family story in hindi
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सवाल-
मैं 23 वर्षीय एक कालेज की स्टूडैंट हूं. मेरे परिवार में हृदय रोगों का पारिवारिक इतिहास है. क्या कुछ उपाय हैं जिन के द्वारा में इस के खतरे को कम कर सकूं?
जवाब-
आप बहुत युवा हैं. अपने खानपान को बेहतर बना कर और अनुशासित जीवनशैली का पालन कर के खतरे को कम कर सकती हैं. घर का बना सादा खाना खाएं, जंक फूड्स और तलेभुने भोजन का सेवन न करें या कम करें. रोज 30 मिनट सैर करें. 10 मिनट में 1 किलोमीटर की दूरी तय करना अच्छा रहता है. धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें. तनाव न पालें. अपने रक्तदाब और रक्त में कोलैस्ट्रौल के स्तर को नियंत्रित रखें. नियमित रूप से अपनी जरूरी जांचें कराती रहें.
सवाल-
मेरी माताजी को टाइप-2 डायबिटीज है. मैं ने सुना है डायबिटीज के मरीजों के लिए हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है. क्या इस स्थिति से बचने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं?
जवाब
रक्त में शुगर का बढ़ा हुआ स्तर रक्तनलिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और वे कमजोर हो जाती हैं. जिन लोगों को डायबिटीज होती है उन्हें अकसर उच्च रक्तदाब की शिकायत भी हो जाती है. ऐसी स्थिति में हृदय को शरीर में रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है. यही सब कारण मिल कर हृदय रोगों का खतरा बढ़ा देते हैं. हृदय रोगों से बचने के लिए रोज
3-4 किलोमीटर पैदल चलें. रक्त में शुगर का स्तर नियंत्रण में रखें. तनाव न पालें. लाल मांस, वसायुक्त भोजन, तलीभुनी और मीठी चीजों से परहेज करें. नियमित रूप से कार्डिएक चैकअप कराएं ताकि समय रहते कोरोनरी आर्टरी डिजीज का उपचार हो सके.
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सवाल-
मेरे पति को एक हार्ट अटैक आ चुका है. उन्हें हमेशा दूसरे हार्ट अटैक की चिंता सताती रहती है. बताएं क्या करूं?
जवाब-
आंकड़ों के अनुसार जिन लोगों को एक बार हार्ट अटैक आ चुका होता है उन में से 20% लोगों को अगले 5 वर्षों में दूसरे हार्ट अटैक के कारण अस्पताल में भरती होना पड़ता है. लेकिन अगर आप के पति लगातार चिंता करते रहेंगे तो उन के लिए खतरा काफी बढ़ जाएगा. उन्हें आप अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करें जैसे धूम्रपान और शराब पूरी तरह छोड़ने के लिए कहें. मांस, वसायुक्त भोजन, नमक, चीनी और प्रोसैस्ड फूड्स का सेवन कम से कम करने दें. नियमित रूप से ऐक्सरसाइज करने के लिए कहें और मानसिक शांति के लिए ध्यान करने या कोई शौक पूरा करने को कहें.
सवाल-
मेरी सास की उम्र 56 वर्ष है. उन की धमनियों में ब्लौकेज है. क्या ऐंजियोप्लास्टी कराना ठीक रहेगा?
जवाब-
हृदय की मांसपेशियों को बचाने के लिए भोजन और औक्सीजन की आपूर्ति फिर से सामान्य बनाना जरूरी है. इस के लिए ऐंजियोप्लास्टी एक कारगर उपचार माना जाता है. प्राथमिक ऐंजियोप्लास्टी में रक्तनलिकाओं में जमे क्लौट को निकाल कर रक्त के प्रवाह को पुन: प्रारंभ किया जाता है.
आवश्यकता पड़ने पर एडवांस ऐंजियोप्लास्टी की जाती है जिस में धमनियों में रक्त के प्रवाह को सुधारने के लिए एक लचीली नली डाली जाती है. ऐंजियोप्लास्टी
कराने के बाद हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है. समय पर ऐंजियोप्लास्टी कराने से हृदय की मांसपेशियों को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है.
सवाल-
मैं 51 वर्षीय घरेलू महिला हूं. सीढि़यां चढ़नेउतरने में मेरी सांस बहुत फूलती है और दिल की धड़कनें भी काफी तेज हो जाती हैं. बताएं ऐसा क्यों होता है?
जवाब-
एकसाथ कई सीढि़यां चढ़ने पर अकसर लोगों की सांस फूलने लगती है, जो सामान्य है. लेकिन अगर 3-4 सीढि़यां चढ़ने पर ही आप की सांस फूलने लगे तो इस का कारण मोटापा, श्वसनतंत्र से संबंधित समस्याएं या हृदय रोग हो सकता है. शारीरिक सक्रियता बढ़ने पर हृदय की धड़कनें थोड़ी बढ़ जाती हैं क्योंकि शरीर की बढ़ी हुई जरूरत के कारण हृदय को अधिक रक्त पंप करना पड़ता है. यदि धड़कनें काफी तेज हो जाती हैं और सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है तो आप किसी हृदय रोग विशेषज्ञा को दिखाएं. जरूरी जांच करने पर ही कारण स्पष्ट हो पाएगा.
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सवाल-
मेरे पति चेन स्मोकर हैं. क्या धूम्रपान करने से हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है?
जवाब-
धूम्रपान हृदय रोगों के लिए एक सब से प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है. लंबे समय तक धूम्रपान करने से रक्तवाहिकाओं में फैटी ऐसिड जमा हो जाता है जिस से रक्त का सामान्य प्रवाह प्रभावित होता है. तंबाकू में मौजूद विषैले पदार्थ रक्तनलिकाओं को संकरा और क्षतिग्रस्त कर देते हैं जिस से रक्त में थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है और रक्तसंचार प्रभावित होता है. इस से हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. अपने पति को तुरंत धूम्रपान बंद करने को कहें. किसी अच्छे हृदय रोग विशेषज्ञा को दिखाएं ताकि कुछ जरूरी जांचों के बाद पता लगाया जा सके कि धूम्रपान ने उन के हृदय और रक्तनलिकाओं को कितना नुकसान पहुंचाया है.
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सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) की टीआरपी इस बार भी पहले नंबर पर बना हुआ है. सीरियल की बात करें तो अनुज (Gaurav Khanna) और मालविका (Aneri Vajani) के रिश्ते का सच जानने के बाद वनराज (Sudhanshu Panday) अपनी प्लानिंग में लग गया है. वहीं काव्या (Madalsa Sharma), अनुपमा (Rupali Ganguly) को वनराज के खिलाफ करती नजर आ रही है. इसी बीच सीरियल में मालविका का अतीत सामने आने वाला है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…
अनुज से जलन महसूस करेगा वनराज
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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि वनराज की बजाय अनुज के प्रैसेंटेशन देने के लिए मालविका कहेगी. वहीं वह जीत भी जाएंगे और मालविका, अनुज की तारीफ करेगी, जिसे सुनकर वनराज चिढ़ जाएगा. वहीं अनुपमा को वनराज के गुस्से का एहसास हो जाएगा और वह परेशान नजर आएगी.
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मालविका को आएगा पैनिक अटैक
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दूसरी तरफ जहां काव्या की न्यू ईयर पार्टी में मालविका आने के लिए मना कर देगी. लेकिन अनुपमा एक गेम खेलकर मालविका को पार्टी में आने के लिए मना लेगी. इसी बीच घर जाते समय एक आदमी एक औरत को मार रहा होगा, जिसे देखकर मालविका घबरा जाएगी और उसे पैनिक अटैक आ जाएगा. वहीं मालविका की हालत देखकर अनुज, अनुपमा को उसके अतीत के बारे में बताता नजर आएगा.
मालविका पर बरसती है काव्या
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अब तक आपने देखा कि जीके, अनुपमा से अपने दिल की बात अनुज को बताने के लिए कहते हैं. लेकिन अनुपमा सही वक्त आने पर दिल का इजहार करने के लिए कहती है. वहीं अनुपमा और जीके को बात करता देख अनुज परेशान नजर आता है. दूसरी तरफ बा और मालविका की बौंडिंग देखकर काव्या को जलन महसूस होती है औऱ वह मालविका पर बरसती हुई नजर आती है.
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टीवी सीरियल इमली (Imlie) में आर्यन (Fehman Khan) यानी फहमान खान की एंट्री के बाद दर्शकों को शो काफी पसंद आ रहा है, जिसके चलते मेकर्स शो में नया ट्विस्ट लाने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन हाल ही में खबरे हैं कि आदित्य यानी गशमीर महाजनी (Gashmeer Mahajani) शो को अलविदा कहने वाले हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…
आदित्य ने छोड़ा शो
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बीते दिनों सोशलमीडिया पर खबरें थीं कि गशमीर महाजनी (Gashmeer Mahajani Quits Show ) ने शो को अलविदा कह दिया है. वहीं अब खबरों की मानें तो गश्मीर महाजनी ने मेकर्स के साथ बातचीत के बाद शो को अलविदा कह दिया है. वहीं कहा जा रहा है कि सारी पेपर फॉर्मेलिटीज पूरी करने के बाद गशमीर इस महीने की आखिर तक सीरियल इमली की शूटिंग करके शो को छोड़ देंगे.
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सीरियल में आएगा नया ट्विस्ट
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गश्मीर महाजनी (Gashmeer Mahajani) के सीरियल को अलविदा कहने से पहले मेकर्स सीरियल में नया ट्विस्ट लाने के लिए तैयार हैं. दरअसल, अपकमिंग एपिसोड में आर्यन के कहने पर आदित्य एक आतंकवादी का इंटरव्यू लेने के लिए जाएगा. हालांकि इमली भी साथ जाने की बात कहेगी. वहीं आर्यन दोनों को बताएगा कि उसे इंटरव्यू लेने पगड़ंडिया जाना होगा, जिसे जानकर आदित्य और इमली हैरान रह जाएंगे.
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मालिनी-इमली का होगा बुरा हाल
खबरों की मानें तो मालिनी और इमली की जिंदगी बदलते हुए नजर आने वाली है. जहां इमली की जिंदगी में आर्यन उसका साथ देता नजर आएगा तो वहीं आदित्य के ना होने से मालिनी, इमली के और भी ज्यादा खिलाफ होती नजर आएगी.
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उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पिछले पौने पांच वर्षों में साढ़े चार लाख सरकारी नौकरियां देकर अपना संकल्प पूरा किया. कोविड 19 महामारी के दौरान भी योगी का मिशन रोज़गार धीमा नहीं पड़ा. समय की ज़रुरत के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के खाली पद भर कर स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत किया.
स्वास्थ्य क्षेत्र के ढांचे को सुदृढ़ बनाने की दिशा में उ. प्र. लोक सेवा आयोग का बड़ा योगदान रहा जिसने अन्य विभागों के साथ साथ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा में समयबद्ध , निष्पक्ष और त्वरित तरीके से भर्तियां करके नागरिकों को राहत दी. सार्वजनिक हित को दृष्टिगत रखते हुए, उ.प्र. लोक सेवा आयोग ने स्वास्थ्य विभाग से सम्बन्धित पदों का चयन जल्द से जल्द वरीयता के आधार किया जिससे चुने गए अभ्यर्थी शीघ्रातिशीघ्र अपने नियत पदों पर दायित्व संभाल सके. इस क्रम में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता, शुचिता और पारदर्शिता को अक्षरशः सुनिश्चित करते हुए समयबद्ध कार्यवाही की गयी .
इस क्रम में एलोपैथिक चिकित्साधिकारी (श्रेणी-2) के 15 संवर्गों के 3620 पदों पर चयन सम्बन्धी कार्यवाही का विज्ञापन आयोग द्वारा 28.05.2021 को जारी किया गया जिसमें आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 28 जून थी. त्वरित कार्यवाही करते हुए आयोग ने अंतिम तिथि के एक महीने में अभ्यर्थियों का साक्षात्कार प्रारम्भ कर दिए. लगभग ढाई महीने मात्र में समस्त संवर्गों के लिए साक्षात्कार पूरे कर लिए गए. साक्षात्कार समाप्त होने की तिथि 07.10.2021 थी लेकिन उससे पहले ही साक्षात्कार प्रारंभ होने के महीने भर से पहले ही प्रथम दो संवर्ग पीडियाट्रिक्स / एनेस्थेटिस्ट के परिणाम 18 अगस्त , 2021 को जारी कर दिए गए. यही नहीं, समस्त संवर्गों का अंतिम परिणाम साक्षात्कार समाप्त होने के महीने भर के अंदर ही दिनांक 2.11. 2021 तक जारी कर दिया गया.
इस प्रकार युद्ध स्तर पर कार्य करते हुए प्राथमिकता के आधार पर एलोपैथिक चिकित्सा विशेषज्ञों के 15 संवर्गों यथा पीडियाट्रिशियन, एनेस्थेटिस्ट फिजिशियन, पैथालाजिस्ट इत्यादि के 3620 पदों पर चयन हेतु 4062 अभ्यर्थियों का साक्षात्कार सम्पन्न किया गया. लगभग चार माह में 1237 अभ्यर्थियों को चयन के लिए उपयुक्त पाया गया.
इसके अतिरिक्त चिकित्सा विभाग के अन्य संवर्गों यथा स्टेटीशियन कम प्रवक्ता, सहायक आचार्य पैथालाजी, कम्युनिटी मेडिसिन साइक्रियाटिक तथा एनेस्थीसिया के लगभग 82 पदों का परिणाम जारी किया गया तथा एम. ओ. एच. सह सहायक आचार्य के 05 तथा सहायक आचार्य, ब्लड बैंक के 15 पदों का भी साक्षात्कार सम्पन्न हो चुका है. उक्त पदों का परिणाम इसी सप्ताह जारी कर दिया जायेगा जबकि सहायक आचार्य के शेष पदों पर यथाशीघ्र साक्षात्कार कराने की कार्यवाही की जा रही है.
कोविड महामारी में स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आयोग ने पारदर्शिता, निष्पक्षता सुनिश्चित रखते हुए अपनी गतिशीलता को और आगे बढ़ाया है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उ.प्र. के अंतर्गत स्टाफ नर्स / सिस्टर (ग्रेड-2) (महिला एवं पुरुष) के 4743 पदों का विज्ञापन 16 जुलाई को जारी किया गया. आवेदन के लिए एक माह का समय दिया गया और मात्र डेढ़ मास में तीन अक्टूबर को लिखित परीक्षा आयोजित कर दी गई.उक्त पदों का निम्नवत् श्रेणियों में अंतिम चयन परिणाम औपबंधिक रूप से निम्नवत जारी कर दिया गया है
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के 2582 पदों ( 50 पुरुष एवं 2532 महिला) के सापेक्ष 50 पुरुष तथा 1627 महिला अभ्यर्थी चयनित चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के 1235 पदों ( 90 पुरुष एवं 1145 महिला) के सापेक्ष 90 पुरुष तथा 623 महिला अभ्यर्थी चयनित के. जी. एम. यू. के 926 पदों ( 46 पुरुष एवं 880 महिला) के सापेक्ष 46 पुरुष तथा 578 महिला अभ्यर्थी चयनित उपरोक्त तीनों श्रेणियों में कुल 3014 अभ्यर्थी चयनित हुए आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम अर्हता अंक न पाने के कारण 1729 पद भर नहीं सके
आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने बताया कि विज्ञापन जारी होने के लगभग पांच माह में ही स्टाफ नर्स के 4743 पदों पर चयन की प्रक्रिया पारदर्शी रूप से पूर्ण की गयी जो अपने आप में एक प्रेरणास्पद मानदण्ड है. उन्होंने इसके लिए आयोग कार्मिकों की प्रतिबद्धता और संकल्प और आयोग की कार्य संस्कृति को सराहा जिन्होंने कोविड 19 महामारी की अवधि में भी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृह बनाए रखने के लिए राष्ट्रहित में अपना योगदान किया. उन्होंने बताया कि स्टाफ नर्स (पुरुष) की शेष 448 रिक्तियों का विज्ञापन भी इसी माह जारी कर दिया जायेगा .
family story in hindi
कई बार एक फिल्म का इम्पैक्ट कहानी पर नहीं, बल्कि एक लीड एक्टर की लुक पर निर्भर करता है. इसमें अभिनेता आमिर खान की फिल्म दंगल, करीना कपूर की फिल्म टशन या फिर अभिनेता सोनू सूद की फिल्म R राजकुमार, सिम्बा, हैप्पी न्यू इयर, कॉमेडियन कपिल शर्मा की फिल्म ‘किस किस को प्यार करू’ आदि सभी फिल्मों में एक्टर को चरित्र के हिसाब से अपनी बॉडी बनाने में ट्रेनर का मेहनत रहा है. वे उन्हें वैसी बॉडी पाने के लिए लगातार मोटीवेट करते रहते है.
मिली प्रेरणा
असल में फिट रहना सभी चाहते है, लेकिन जब सेलेब्स की बात हो, तो फिटनेस उनके जीवन का खास अंग होता है, क्योंकि उनकी खूबसूरती फिटनेस में छुपी रहती है, फिर चाहे वह जीरो साइज़ हो या प्लस साइज़, चरित्र के अनुसार उन्हें अपनी काया में बदलाव करनी पड़ती है. इस काम के लिए वे बहुत सारा पैसा खर्च भी करते है, क्योंकि आउटडोर होने पर सेलेब्स अपने फिटनेस ट्रेनर को साथ भी ले जाते है और उनकी डाइट, ट्रेनर के हिसाब से चलती है. इस बारें में सेलेब्रिटी फिटनेस ट्रेनर योगेश भतेजा कहते है कि स्कूल के समय से ही थोड़ी रूचि फिटनेस को लेकर थी. मैं प्रोफेशनल फुटबाल प्लेयर बनना चाहता था, लेकिन मैंने फिजिकल एजुकेशन में ग्रेजुएट किया और मुझे अब फुटबॉल प्लेयर से अधिक ट्रेनर बनने की इच्छा हुई और मैंने एक जिम में ज्वाइन किया. मुझे ये फील्ड बहुत रुचिकर लगा, जिसमें मैंने फिटनेस, अलग-अलग तरह की वर्कआउट, व्यायाम आदि को लेकर सर्टिफिकेशन करता गया और मैंने एक बॉडी बिल्डर कम्पटीशन में ज्वाइन किया. वहां बहुत ही विस्तृत तरीके से बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन के बारें में प्रशिक्षण दिया जाता है, इससे अधिक गहराई से मैं बॉडी पार्ट के बारें में सीख सकते है. मैंने उसमें ज्वाइन किया और टॉप 5 में चुना गया. वही से जिम की जर्नी शुरू हुई. आज 16 साल से मैं इस क्षेत्र में काम कर रहा हूँ.
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कठिन होती है सेलेब्स की ट्रेनिंग
एक सेलिब्रिटी और एक आम इंसान को ट्रेन करने के अंतर के बारें में फिटनेस ट्रेनर योगेश का कहना है कि एक बहुत बड़ा अंतर दोनों में है. आम इंसान की लाइफ में एक रूटीन होता है, लेकिन सेलेब्स का टाइम फिक्स्ड नहीं होता, कभी दिन तो कभी रात में शूट चलता रहता है. शूटिंग के घंटे कई बार लम्बे हो जाते है और उन्हें फेस, बॉडी और डाइट पर भी काम करना होता है. नए-नए स्किल्स जिसमें खासकर कलरी सीखना चाहते है, कई सारी चीजे उन्हें सीखनी पड़ती है और इससे पोषण बॉडी से ही लेना पड़ता है. उस समय रूटीन बहुत मुश्किल होने के साथ-साथ डिमांडिंग भी हो जाता है. बॉडी टायर्ड होने पर भी उन्हें वर्कआउट करना पड़ता है. ऐसे में उनकी एनर्जी के साथ वर्कआउट को पुश करना, ताकि वे उस लेवल तक जा सकें और उन्हें अच्छा दिखना भी जरुरी होता है. हर बार मुझे उनके हिसाब से ट्रेनिंग देनी पड़ती है, जो बहुत कठिन होता है.
जरुरी है मोटिवेशन
सभी सेलेब्स योगेश की बात को मानते है, क्योंकि उन्हें चरित्र के हिसाब से बॉडी चाहिए. वे आगे कहते है कि हाईली सेल्फ मोटीवेटेड इंसान अभिनेता सोनू सूद है. वहां मेरी मेहनत थोड़ी कम हो जाती है. मुझे हर किसी को उनके अनुसार बॉडी देना ही मेरा काम है, इसलिए जो आम इंसान फिट होना चाहते है मैं उन्हें कहता हूँ,‘If you have the will, I have the skill’ कोई भी सामने वाला अगर फिटनेस के लिए राजी होता है, तो उसे ठीक करना मुश्किल नहीं और मैं उन्हें यहाँ तक पहुँचने का रास्ता बता देता हूँ.
बनती है फिटनेस चार्ट
योगेश का अपना कोई जिम नहीं है, क्योंकि उन्हें कई बार फिल्म के लिए मुंबई से बाहर कई महीने या साल भर बाहर रहना पड़ता है. ऐसे में जिम को स्टाब्लिश करना उनके लिए मुश्किल है. यही वजह है कि योगेश कई सारे जिम के साथ जुड़े है. उनकी टीम में उनका भाई देवेन्द्र भटेजा और 5 अन्य व्यक्ति है, जिन्हें योगेश ने ट्रेनिंग दी है और उनके व्यस्त रहने पर टीम अपना काम करती है. योगेश कहते है कि सेलेब्रिटी के साथ जाने का उद्देश्य बॉडी को उस चरित्र के अनुसार शेप में बनाए रखना है. अभिनेत्री कंगना रनौत जब फिल्म ‘थलाईवा” किया, उस समय उन्हें करीब 20+ किलो वजन बढ़ाना पड़ा, ताकि वह स्वर्गीय जयललिता जैसी दिखे. इससे बॉडी के जॉइंट और इंटरनल काफी लोड आया और दर्द शुरू हुआ, ऐसे में साथ जाने पर उनके डाइट और हार्ट की जांच करता हूँ. इस दौरान बनाये गए फिटनेस चार्ट को ऐसा बनाया जाता है, ताकि वजन को एक तालमेल के साथ धीरे-धीरे घटाया जाय. परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने अपना बेस्ट देने के लिए ‘दंगल’ फिल्म में अपना वजन बढाया.
भेड़चाल में न हो शामिल
ट्रेनर योगेश आगे कहते है कि आइडियली देखा जाय तो 3 महीने में प्लस 3 या माइनस 3 किया जा सकता है, इससे अधिक करने पर बॉडी सिस्टम पर गलत अवश्य पड़ता है. हेल्दी डाइट और हेल्दी living के साथ अगर वजन बढ़ाते है, तो वह ठीक होता है, उसी प्रकार एक सिमित दायरे में वजन घटाने पर किसी प्रकार की समस्या नहीं होती. बिना सोचे-समझे बार-बार शरीर बढ़ाना और घटाना ठीक नहीं. इसमें सबसे गलत काम आज के यूथ करते है, जो कही पढ़कर या देखकर ओवरनाईट में वैसी शरीर बनाना चाहते है, जो ठीक नहीं. इससे नींद की समस्या,कई प्रकार की बीमारियाँ, हार्मोनल समस्याएँ आदि हो जाती है.इसके अलावा नमक छोड़ देना या पानी कम पीने से वजन कभी नहीं घटता.
अमिताभ बच्चन की बात करें तो सारे प्रोफेशनल का आपस में बातचीत चलती रहती है. उनके डॉक्टर, ट्रेनर, डाइटिशियन, शेफ आदि सब मिलकर काम करते है. इसके अलावा अमिताभ बच्चन समय के बहुत पाबंदी रखते है. समय से खाना, समय से सोना और समय से काम करना ये सब उनकी सूची में रहती है.
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वजन घटाना नहीं मुश्किल
वजन के बढ़ने में फ़ूड का बहुत बढ़ा हाथ होता है. बॉडी की जरुरत और टाइप के अनुसार ही डाइट चार्ट होनी चाहिये, जिसमें प्रोटीन, फैट, फाइबर आदि को नहीं छोड़ना चाहिए. इसलिए न्यूट्रीनिस्ट से मिलकर सही डाइट प्लान बनाना जरुरी है, जिससे वजन घटाना मुश्किल न हो. संतुलित भोजन और नियमित वर्कआउट से वजन बहुत जल्दी घटता है. आजकल मोटापे के शिकार बच्चे अधिक होते है, कुछ कारण निम्न है,
इसके अलावा शुगर, सॉफ्ट ड्रिंक और जंक फ़ूड को अवॉयड करें, पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल खाए, समय से खाना और समय से सोना, बॉडी को रोज सुबह डिटोक्स करें.
एक फिल्म में अभिनेता राजकुमार का डायलॉग बहुत प्रसिद्ध है, ‘’इतने हसींन पॉव जमीन पर मत रखिए मैले हो जाएंगें.’’ जब इतने हसीन पॉवों में पायल की रुनझुन सुनाई देती है तो उनकी खूबसूरती और अधिक बढ जाती है. अंग्रेजी में एंकलेट कही जाने वाली पायल महिलाओं के पैरों में चार चांद लगा देती है. नयी नवेली दुल्हन के पैरों में भारी और चौड़ी पायल सजती है तो रोज की दिनचर्या में महिलाएं हल्की फुल्की कम वजन की पायल पहनना पसंद करतीं हैं. पहले जहां केवल चांदी और सोने की पायल ही प्रचलन में होती थी वहीं वर्तमान समय में सोने चांदी के साथ साथ कुंदन, मोती, और नग की फैशनेबल डिजायन वाली पायल बाजार में हर रेंज में उपलब्ध हैं.
कैसी कैसी पायल
-पारंपरिक सोने-चांदी की पायल
सदा से ही प्रचलन में रहने वाली सोने और चांदी से बनी पायल देखने में बहुत सुंदर लगती है. छोटे छोटे घुंघरुओं से युक्त इस पायल में कई बार मीना और नग आदि का भी प्रयोग किया जाता है. सोने की पायल की अपेक्षा महिलाएं डेली रूटीन में चांदी की पायल पहनना अधिक पसंद करतीं हैं. इस प्रकार की पायल शादी ब्याह में दुल्हन के लिए अधिक प्रयोग की जाती है.
-अजमेरी पायल
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह राजस्थान की पारंपरिक पायल है. चांदी से बनी यह पायल आम पायलों से अधिक वजनीली और चौड़ी होती है. शहरी महिलाओं की अपेक्षा आदिवासी और जनजातीय महिलाओं में स्वयं को विवाहित प्रदर्शितत करने के लिए अजमेरी पायल को पहना जाता है.
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-टो रिंग पायल
पैर की उंगली से लेकर पंजे को कवर करती हुई एंकल में पहनी जाने वाली यह पायल प्रत्येक उम्र की महिलाओं में अत्यधिक प्रचलित है. इसमें कई लड़ियां होती हैं जो पूरे पैर को कवर कर लेतीं हैं. हल्की से हल्की और भारी से भारी वजन में यह बाजार में बड़ी ही सुगमता से उपलब्ध है. सोने चांदी के अलावा यह मोतियों और नगों में भी बनायी जाती है जिससे हर वर्ग के लिए इसे खरीदना काफी आसान होता है. शादी विवाह जैसे फंक्शन्स में इस प्रकार की पायल अधिक पहनी जातीं हैं.
-पोलकी पायल
पोल्की पायल सुनहरी धातु में ही बनायी जाती हैं. अन्य पायलों की अपेक्षा यह अधिक रंगीन और आकर्षक होती है. रंगीन होने के कारण यह प्रत्येक परिधान पर फबती है.
-कुंदन मोती पायल
सोने की रेगुलर पायल में कीमती रत्नों को सोने के अंदर जड़ा जाता है. यह घुंघरू और बिना घुंघरूवाली दोनों प्रकार की होती है. साधारण पायल की अपेक्षा यह काफी नाजुक और कीमती होती है. बारात पालकी डिजायन कुंदन की प्रमुख डिजायन है.
-आक्सीडाइज्ड पायल
रंग में काली होने के बावजूद आक्सीडाइज्ड ज्वैलरी आजकल सभी उम्र की महिलाओं को बहुत लोकप्रिय है. इन पायलों का मोर डिजायन खासा लोकप्रिय है. इसमें आगे की ओर लगी लटकन इसकी खूबसूरती को दोगुना कर देती है.
ध्यान रखने योग्य बातें
-यदि आपको पायल पहनने की आदत नहीं है तो एकदम हल्की चेन डिजायन से शुरूआत करें.
-कीमती, जड़ाउ और नगों वाली पायल को डेली रूटीन की अपेक्षा कभी कभार पहनना ही श्रेयस्कर होता है अन्यथा इनकी चमक और सौन्दर्य समाप्त हो जाता है.
-पायल खरीदते समय उसके कुंदे और डिजायन को भली भांति चेक करें ताकि पहनते समय यह आपके कपड़ों में न फंसे.
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-अन्य पायलों की अपेक्षा चांदी की पायल डेली रुटीन में पहनना उत्तम रहता है, क्योंकि यह बहुत टिकाउ और मजबूत होती है, परंतु समय समय पर इनको साफ करना अत्यंत आवश्यक होता है अन्यथा इनमें गंदगी भर जाती है जो दिखने में बहुत भद्दी लगती है इन्हें साधारण डिटर्जेंट के घोल से बड़ी ही सुगमता से साफ किया जा सकता है.
-पायल खरीदते समय पैर में पहनकर अवश्य देखें. ध्यान रखें कि यह एकदम ढीली न हो क्योंकि पहनने के कुछ समय बाद यह थोड़ी लूज हो जाती है अतः पैर में एकदम फिट पायल ही खरीदें.
-फैशनेबल पायल को प्रयोग करने के बाद पायल को सुरक्षित बाक्स में रखें. संभव हो तो अन्य ज्वैलरी से पृथक रखें.
-यदि आपकी चांदी सोने की पायल काफी समय से उपयोग में नहीं आयी है तो इसे ज्वैलर के पास ले जाकर साफ कराएं फिर प्रयोग करें. इससे आपकी पायल नई सी लगने लगेगी.
मातृत्व एक ऐसा सुख है जिस की चाह हर औरत को होती है? शादी के बाद से ही औरत इस ख्वाब को देखने लगती है. लेकिन कहते हैं न कि ख्वाब अकसर टूट जाते हैं. हां कई बार कुछ कारणों से या किसी समस्या की वजह से अगर कोई औरत मां बनाने के सुख से वंचित रह जाती है तो उस से बड़ा सदमा और दुख उस के जीवन में कुछ और नहीं होता. दुनिया मानो जैसे उस के लिए खत्म सी हो जाती है.
उस पर अगर उसे बांझ, अपशकुनी, मनहूस और न जाने कैसेकैसे ताने सुनाने को मिलें तो उस के लिए कोई रास्ता नहीं बचता. ताने देने वालों में बहार वाले ही नहीं बल्कि उस के अपने ही घर के लोग शामिल होते हैं.
जैसे ही एक नवयुवती को विवाह के कुछ साल बाद पता चलता है कि वह मां नहीं बन सकती तो आधी तो वह वैसे ही मर जाती है बाकी रोजरोज के अपनों के ताने मार देते हैं. टीवी पर दिखाए गए एक सीरियल ‘गोदभराई’ में घर की बहू खुद बांझ न होने के बावजूद अपने पति की कमी की वजह से मां नहीं बन पाती. इसी कारण उसे पासपड़ोसियों के ताने सुनने पड़ते हैं जिस वजह से वह दुखी होती है. उस के अपने ही उसे नीचा दिखने का कोई मौका नहीं छोड़ते. गलती किसी की भी हो ताने हमेशा उसे ही सुनने पड़ते हैं.
औरतों के खिलाफ प्रचार
टीवी पर दिखाए जाने वाले सोप ओपेरा तो उन औरतों के खिलाफ प्रचार करते हैं जो मां नहीं बन पातीं और लोग इसे बड़े चाव से देखते हैं. यह मनोरंजन के लिए कहानी ही नहीं है बल्कि इस में कहीं न कहीं समाज की सचाई छिपी हुई है. वह दर्द है जिसे बहुत सारी महिलाओं को सहना पड़ता है.
अब सुनीता का ही उदाहरण ले लीजिए. इन की शादी को 4 साल हो गए और शादी के 6 महीने बाद से ही सास को अपने पोतेपोतियों को खिलने की इच्छा होने लगी और फिर देखते ही देखते 4 साल बीत गए. बीच में सुनीता ने कई टैस्ट भी करवाए जिन का नतीजा सिर्फ यह बयां करता है कि वह मां नहीं बन सकती और बस फिर शुरू हो गया आईवीएफ सैंटरों के चक्कर लगाने का. उस के गर्भाशय में ही कमजोरी है जिस से वह मां नहीं बन सकती. तानों इस सिलसिले में सिर्फ सास ही नहीं बल्कि सुनीता की ननद, देवरानी और पति भी इस में शामिल हैं.
असल में दोस्तों और सहेलियों के बीच भी ऐसी औरतें कटीकटी सी रहती हैं, क्योंकि उन की बातें तो बच्चों के बारे में ही होती हैं. परिवार और दूसरों के ताने तो फिर भी वे सह लेतीं पर पति के भी साथ न देने पर जैसे उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो.
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मां न बन पाने का गम तो उन्हें पहले ही था पर पति की बेरुखी ने और तोड़ कर रख दिया. बुरे समय में आखिर दोनों एकदूसरे के सुखदुख के साथी होते हैं पर किसी एक के बुरे समय में दूसरे का साथ न होना तोड़ कर रख देता है.
अनचाहा दर्द
सुनीता अपना दर्द बयां करते हुए कहती हैं कि शुरुआत में तो वे अपनी ससुराल वालों के तानों से परेशान हो कर कई ओझओं और तांत्रिकों के पास गईं जिन्होंने उन्हें कई पूजापाठ और दान करने को कहा. उन्होंने सब किया पर फिर भी उस का कोई नतीजा नहीं निकला इन सब के नाम पर उन ओझओं और तांत्रिकों ने उन के परिवार वालों से हजारों रुपए वसूले पर उस का फायदा कुछ नहीं हुआ.
फिर उन लोगों ने उन्हें श्रापित बताया और कहा कि भगवान ही नहीं चाहते कि उन्हें कोई औलाद हो. आईवीएफ सैंटरों में जो पैसा खर्च हुआ वह अलग.
फिर क्या था इन सब के बाद तो परिवार वाले उन्हें और ज्यादा ताने देने लगे और नफरत करने लगे. सास तो पति की दूसरी शादी तक करवाना चाहती थीं पर उन्हें जब पता चला कि तलाक आसान नहीं है और कहीं वे पुलिस में चली गईं तो चुप हो कर रह गईं. सब लोग उन से दूरी बनाने लगे और हर शुभ काम से भी दूरी रखी जाने लगी. फिर धीरेधीरे वे भी खुद को ही दोष देने लगीं. उन्हें लगने लगा कि वे मनहूस हैं. कई बार मन में खयाल आने लगा कि कहीं जा कर आत्महत्या कर लें.
मगर एक दिन सुनीता की मुलाकात अपनी सहेली से हुई जिस के समझने पर सुनीता का खोया आत्मविश्वास लौटने लगा. सुनीता की सहेली ने समझया कि वह खुद को मनहूस न मान कर हालात का सामना करे. अगर वह खुद को ही मनहूस समझने लगेगी तो बाहर वाले तो उसे ताने देंगे ही.
उस की सहेली ने समझया कि खुद को मनहूस समझने से कुछ नहीं होगा उलटा खुद का आत्मविश्वास कम होगा. बच्चे होने और न होने से कोई मनहूस नहीं हो जाता. तांत्रिकों को यह कैसे पता हो सकता है कि तुम श्रापित हो.
अंधविश्वास भरी बातें
बस फिर क्या था सुनीता को इस बात का एहसास हुआ की वाकई में इस में उन की कोई गलती नहीं है और न ही वे मनहूस है और न ही अपशकुनी. पहले सुनीता को इस बात का एहसास हुआ और फिर उन्होंने सोचा कि अब इस बात का एहसास वे अब अपने पति को भी करवाएंगी और फिर अपने ससुराल वालों को.
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सुनीता को तो इस का मौका मिला और उन्हें उन की सहेली का सहारा भी जो उन की जिंदगी में एक उम्मीद की किरण ले कर आया वरना शायद उन्होंने खुदकुशी कर ली होती या पूरी जिंदगी खुद को कोसतेकोसते बितातीं लेकिन आज भी कई महिलाएं ऐसी हैं जो पूरे परिवार के ताने सुनसुन कर जी रही हैं. न ससुराल और समाज में उन्हें इज्जत मिलती है और न ही पति का प्यार. फिर भी वे अपने रिश्ते निभाती हैं और उफ तक नहीं करतीं.
जरा सोचिए क्या खुद को मनहूस समझना या खुद को दोष देना वह भी उस बात के लिए जिस में आप का कोई कुसूर नहीं है और न ही कोई दोष ठीक है? तांत्रिक लोग सिर्फ आप की भावनाओं का फायदा उठा कर पैसा ऐंठने के लिए श्राप या पाप जैसी अंधविश्वास भरी बातें आप के दिमाग में डालते हैं. विडंबना तो यह है कि पढ़ेलिखे लोग भी आजकल इन सब बातों में यकीन रखते हैं और घर की बहुओं को ताने देते हैं, जबकि आजकल विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि हर चीज का इलाज संभव है. तांत्रिकों और बाबाओं की बातों में आने के बाद के बजाय महिलाओं को अकेला बिना बच्चों के जीना सीखना होगा. फिर यह न भूलें कि वृद्धावस्था में बच्चों का भी भरोसा नहीं रहता कि वे साथ रहेंगे.
सवाल-
मैं 48 वर्षीय कामकाजी महिला हूं. मेरे पैरों में बहुत दर्द रहता है. उन की नसें बहुत उभरी और सूजी हुई दिखाई देती हैं. बताएं मैं क्या करूं?
जवाब-
ऐसा लगता है आप को वैरिकोज वेंस की समस्या है. लगातार लंबे समय तक खड़े या बैठे रहने से पैरों की नसों या शिराओं पर दबाव पड़ता है, जिस से कई बार उन में खराबी आ जाती है. मोटापे या वाल्व के खराब होने से भी यह समस्या हो जाती है. कई महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान वैरिकोज वेंस की समस्या उत्पन्न हो जाती है. नियमित रूप से ऐक्सरसाइज करें, अपना वजन कम करें, टाइट फिटिंग के कपड़े न पहनें और लगातार लंबे समय तक खड़े होने या बैठने से बचें. अगर फिर भी आराम न मिले तो डाक्टर को दिखाएं.
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आप ने अकसर अपने मित्रों, पड़ोसियों व रिश्तेदारों को पैरों में दर्द होने की शिकायत करते सुना होगा. कुछ लोगों के पैरों में दर्द चलने से शुरू हो जाता है. जब वे चलना बंद कर देते हैं तो विश्रामावस्था में पैरों से दर्द गायब हो जाता है और दोबारा चलने से फिर वही दर्द उभरता है. कभीकभी बुजुर्ग लोग अकसर पैरों में दर्द होने की शिकायत करते हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन के पैरों में दर्द चलने से कम हो जाता है पर लेटने पर दर्द की तीव्रता बढ़ जाती है. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं या धूम्रपान, सिगरेट, बीड़ी व हुक्का के आदी हैं या फिर तंबाकू और उस से बने पदार्थों जैसे जर्दायुक्त पान मसाला, खैनी, चैनी, मैनपुरी या जाफरानी पत्ती के आदी हैं और साथ ही साथ पैरों में दर्द को ले कर परेशान हैं तो होशियार हो जाइए, वरना देरसवेर पैर गंवाने पड़ सकते हैं.
अकसर लोगों को यह भ्रम रहता है कि मधुमेह का पैरों से कोई संबंध नहीं है, मधुमेह का रोग सिर्फ हृदय से संबंधित है. उसी तरह से धूम्रपान के आदी लोग यह समझते हैं कि धूम्रपान से सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है और कैंसर हो सकता है. पर लोग यह नहीं जानते कि धूम्रपान के आदी व तंबाकू के व्यसनी लोगों में पैरों में गैंगरीन होने का खतरा हमेशा मंडराता रहता है. डायबिटीज का मरीज अगर धूम्रपान भी करता है या तंबाकू का सेवन करता है तो वह वही कहावत हो गई, ‘करेला वो भी नीम चढ़ा.’ मधुमेह व धूम्रपान दोनों मिल कर पैरों का सत्यानाश कर देते हैं. इसलिए, टांगों व पैरों को स्वस्थ व क्रियाशील रखने के लिए इन दोनों पर अंकुश रखना अत्यंत आवश्यक है. पैरों में दर्द क्यों