family story in hindi
family story in hindi
बालों का गिरना इन दिनों एक आम समस्या बन चुकी है. ये एक ऐसी परेशानी है जो किसी को भी, किसी भी उम्र में हो सकती है. यूं तो बाजार में कई ऐसे उत्पाद मौजूद हैं जो ये दावा करते हैं कि उनके इस्तेमाल से बालों का गिरना बंद हो जाएगा. हालांकि इन उत्पादों के इस्तेमाल से रिएक्शन होने का खतरा भी बना रहता है.
ऐसे में घरेलू उपायों को अपनाना सबसे सुरक्षित तरीका है. बालों को गिरने से रोकने के लिए आप प्याज के रस का इस्तेमाल कर सकते हैं. प्याज के रस से जहां बालों का गिरना बंद हो जाता है वहीं इसके इस्तेमाल से बालों की ग्रोथ भी बढ़ती है.
प्याज एक नेचुरल कंडिशनर की तरह काम करता है और इसके नियमित प्रयोग से बालों में चमक भी आती है. प्याज में पर्याप्त मात्रा में सल्फर पाया जाता है जो ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने का काम करता है. इसके चलते कोलेजन भी सकरात्मक रूप से प्रभावित होता है.
बता दें कि कोलेजन बालों की ग्रोथ के जिम्मेदार कारक है. प्याज का रस बालों की जड़ को मजबूती देने का काम करता है. साथ ही इसमें मौजूद तत्वों से स्कैल्प में होने वाले संक्रमण से भी राहत मिलती है.
प्याज का रस डैन्ड्रफ दूर करने के भी काम आता है. यूं तो प्याज का रस बालों के लिए बहुत फायदेमंद है लेकिन सबसे जरूरी है कि आपको इसके इस्तेमाल का सही तरीका पता हो. आप चाहें तो प्याज के रस को इन तरीकों से इस्तेमाल में ला सकते हैं.
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1. प्याज का रस और शहद
अगर आप बालों के गिरने और डैंड्रफ की समस्या से जूझ रहे हैं तो शहद के साथ प्याज का रस मिलाकर लगाना बहुत फायदेमंद होगा. डैंड्रफ की समस्या को दूर करने के साथ ही यह बालों की ग्रोथ भी बढ़ाने का काम करता है. प्याज के रस और शहद की समान मात्रा लेकर उसे अच्छी तरह मिला लें. इस मिश्रण को एक घंटे तक मिलाकर छोड़ दें. उसके बाद इसे अच्छी तरह स्कैल्प पर लगाएं और कुछ समय बाद बालों को हल्के गुनगुने पानी से धो लें.
2. प्याज का रस और बादाम का तेल
बादाम के तेल में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो बालों के गिरने की समस्या को दूर करते हैं. बादाम के तेल में प्याज का रस मिलाकर लगाने से बालों के गिरने की समस्या दूर हो जाती है. इसके इस्तेमाल से बाल घने, मुलायम और चमकदार बनते हैं. आप चाहें तो बादाम के तेल की जगह नारियल का तेल या फिर जैतून का तेल भी मिला सकते हैं.
3. गर्म पानी में प्याज का रस मिलाकर
प्याज के रस में गर्म पानी मिलाकर लगाना भी बालों को सेहतमंद बनाता है. पानी की एक अच्छी मात्रा में प्याज का रस मिलाकर लगाने से बाल तो सेहतमंद होने के साथ ही घने भी बनते हैं.
गोवा में आयोजित इन्टेरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आफ इन्डिया-2021 में यूपी की फिल्म पॉलिसी को खूब सराहना मिल रही है. यहां यूपी के फिल्म बन्धु का स्टॉल भी लगाया गया है जिसका उदघाटन मशहूर फिल्म निर्माता, निर्देशक रणधीर कपूर और राहुल रावेल ने किया. वहीं फिल्म बन्धु के अध्यक्ष नवनीत सहगल और सचिव शिशिर के मार्गदर्शन में एक डेलीगेशन प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुंचा है.
फिल्म बन्धु के स्टॉल का उदघाटन करते हुए मशहूर फिल्म निर्देशक रणधीर कपूर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की और कहा कि उनकी दमदार फिल्म नीति की वजह से ही समस्त निर्माता, निर्देशक उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुझे खुशी हो रही है कि आज गोवा में आयोजित फिल्म समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार का फिल्म बन्धु स्टाल का उद्घाटन उनके द्वारा हो रहा है. फिल्म निर्देशक राहुल रावेल ने यूपी को एक अद्भुत स्थान बताया. उन्होंने कहा कि यहां पर ज्यादा से ज्यादा फिल्में बननी चाहिये. उन्होंने यूपी सरकार के कार्यों तथा फिल्म नीति की खूब सराहना की. इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित निर्माता, निर्देशक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
दुनिया भर से आए निर्माता, निर्देशकों को एलडीडी पर दिखाई जा रहीं यूपी की शूटिंग लोकेशन
गोवा फिल्म फेस्टिवल में लगाए गए फिल्म बन्धु के स्टॉल पर यूपी सरकार की फिल्म नीतियों का प्रचार-प्रसार बुकलेट, फोल्डर देकर और एलईडी से किया जा रहा है. पूरी दुनिया से आये कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, टेकनिकल विशेषज्ञों से सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन, नीति और यूपी की खूबसूरत फिल्म शूटिंग लोकेशन के बारे में चर्चा की जा रही है और प्रसारण किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश फिल्म बन्धु के उप निदेशक दिनेश कुमार सहगल ने निर्देशक रणधीर कपूर और राहुल रावेल से मुलाकात कर उनको उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण करने का न्योता भी दिया. बता दें कि गोवा फिल्म फेस्टिवल में यूपी की फिल्म पॉलिसी पर मशहूर फिल्म निदेशक करन जौहर तो इतने फिदा हो गये कि उनसे यह कहे बिना नहीं रहा गया कि यूपी के लखनऊ और वाराणसी में फिल्म शूट करो तो कहानियां अपने आप उभर जाती हैं.
सीरियल अनुपमा (Anupama) में इन दिनों फैमिली ड्रामा देखने को मिल रहा है, जिसके चलते शो में मेकर्स नए ट्विस्ट लाने को तैयार हैं. वहीं खबरे हैं कि शो में दर्शकों को जल्द ही लीप देखने को मिलने वाला है, जिसके चलते अनुपमा और अनुज एक साथ नजर आने वाले हैं. इसी बीच अनुपमा और अनुज यानी रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह साथ में डांस करते नजर आ रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं वायरल वीडियो की झलक…
अनुपमा ने शेयर की वीडियो
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हाल ही में Anupama यानी रूपाली गांगुली ने अनुज यानी गौरव खन्ना के साथ एक डांस वीडियो शेयर किया है, जिसमें फैंस को दोनों की क्यूट कैमेस्ट्री देखने को मिल रही है. वहीं फैंस सोशलमीडिया पर दोनों की तारीफें करते हुए लिख रहे हैं कि ‘आप दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी लगती है.’ वहीं फैंस दोनों से सवाल पूछते नजर आ रहे हैं कि आखिर सीरियल में दोनों शादी कब रहे हैं?’
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शो में आएगा नया ट्विस्ट
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सीरियल में आने वाले ट्विस्ट की बात करें तो शो में जल्द बा बापूजी की शादी की 50वीं सालगिरह का सेलिब्रेशन देखने को मिलने वाला है. हालांकि इसी बीच काव्या, परितोष की शादीशुदा जिंदगी में आग लगाने का काम करेगी. दरअसल, किंजल और परितोष के बीच दूरियों का फायदा उठाकर काव्या दोनों की लाइफ में जहर घोलेगी. इसी के चलते किंजल और तोषू एक-दूसरे को तलाक देने के लिए कहेगी. वहीं अनुपमा का शाह हाउस में आना एक बार फिर काव्या को पसंद नही आएगा और वह फिर उसपर ताने कसेगी. लेकिन अनुपमा उसे करारा जवाब देगी.
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स्टार प्लस के टीवी सीरियल गुम है किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Mein) में देवर विराट और भाभी पाखी के रोल में नजर आने वाले नील भट्ट (Neil Bhatt) और ऐश्वर्या शर्मा (Aishwarya Sharma) 30 नवंबर को शादी के बंधन में बधने वाली है, जिसकी तैयारियां शुरु हो गई है. इसी बीच सोशलमीडिया पर नील और ऐश्वर्या की मेहंदी सेरेमनी (Aishwarya Sharma Mehendi Ceremony) की फोटोज छा गई हैं. आइए आपको दिखाते हैं पाखी उर्फ ऐश्वर्या शर्मा की मेहंदी सेलिब्रेशन की फोटोज की झलक…
मेहंदी लगवाते हुए शरमाई पाखी
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मेहंदी सेलिब्रशन की झलक सोशल मीडिया के जरिए ऐश्वर्या शर्मा ने फैंस को दिखाई है. ऐश्वर्या शर्मा द्वारा शेयर की गई वीडियो में वह नई नवेली दुल्हन की तरह मेहंदी लगवाते हुए शरमाती दिख रही हैं. वहीं फैंस को अपनी मेहंदी की झलक भी दिखा रही है. इसी के साथ वह अपनी फैमिली संग जमकर मस्ती करती हुई भी नजर आ रही है.
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बैचलर्स पार्टी की दिखाई थी झलक
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एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा और नील भट्ट 30 नवंबर को मध्यप्रदेश में शादी करने वाले हैं. हालांकि दोनों शादी के बाद मुंबई में अपने दोस्तों को एक ग्रैंड रिसेप्शन पार्टी भी देंगे. लेकिन इससे पहले ऐश्वर्या शर्मा ने मुंबई में अपने दोस्तों संग बैचलर्स पार्टी भी सेलिब्रेट की थी, जिसकी उन्होंने एक वीडियो भी शेयर की थी.
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बता दें, सीरियल गुम है किसी के प्यार में (Ghum Hai Kisikey Pyaar Mein) के सेट पर नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा की मुलाकात हुई थी, जिसमें वह एक दूसरे के करीब आ गए थे. वहीं दोनों ने एक साल पहले रोके की फोटोज शेयर करके अपने फैंस के साथ शेयर किया था. हालांकि दोनों सीरियल में देवर भाभी के रोल में नजर आते हैं, जिसके चलते कई बार पाखी के रोल के लिए ऐश्वर्या शर्मा को सोशलमीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार भी होना पड़ता है.
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romantic story in hindi
खूबसूरत और बड़े घर की चाह हर किसी को होती है. मगर महानगरों में ऐसे घरों की चाह पूरी होना आसान नहीं. छोटे घरों में रहने को मजबूर होना पड़ता है. मगर थोड़ी सी सूझबूझ व साजसजावट के तरीकों पर ध्यान दे कर छोटे घर में रह कर भी बड़े और हवादार घर में रहने का एहसास ले सकती हैं.
1. रखें घर को व्यवस्थित:
आप अपने घर को जितना अधिक व्यवस्थित व साफसुथरा रखेंगी, कमरों में उतनी ही ज्यादा जगह दिखेगी. सामान करीने से रख कर और फालतू सामान को हटा कर काफी जगह खाली कर सकती हैं.
2. सफेद व हलके रंगों का प्रयोग करें:
गहरे रंग बड़ी जगह के प्रभाव को कम कर देते हैं. इसलिए घर की दीवारों पर सफेद रंग करवाएं. फर्नीचर भी हलके रंग का खरीदें. अगर दीवारों पर सफेद रंग पसंद नहीं आता हो तो हलका हरा, गुलाबी, आसमानी, पीला आदि रंगों का चुनाव करें. पेंट एक ही रंग का करवाएं, फिर देखें कैसे कमरा बड़ा नजर आता है.
3. रोशनी का चुनाव:
घर में भरपूर रोशनी आने दें, क्योंकि घर में पर्याप्त रोशनी उसे उज्ज्वल और बड़ा दिखाने में मदद करती है. अपने घर में रंगों का प्रभाव दिखाने के लिए लैंप्स भी लगाएं. इस से घर आकर्षक भी दिखेगा.
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4. मल्टीपर्पज फर्नीचर का इस्तेमाल:
ऐसे फर्नीचर में निवेश करें जो बहुद्देशीय हो. इस तरह का फर्नीचर आप के कमरे को व्यवस्थित दिखाता है और जगह भी ज्यादा नजर आती है. उदाहरण के लिए किचन में ऐसी बहुद्देशीय मेज का प्रयोग किया जा सकता है, जिस में बहुत से रैक हों. इस में आप अपनी रसोई के कुछ सामान के साथसाथ दूसरी जरूरी चीजें भी एक जगह रख सकेंगी और सामान अतिरिक्त जगह भी नहीं घेरेगा.
5. घर में मिरर का प्रयोग:
मिरर के प्रयोग से आप अपने कमरे को बड़ा होने का आभास दे सकती हैं. फोकल पौइंट का प्रयोग करें और अपने मिरर को ऐसे केंद्रित करें कि घर में गहराई का भ्रम पैदा हो. घर की खिड़की के सामने वाली दीवार पर दर्पण लगाएं. रोशनी के प्रतिबिंब के कारण आप के कमरे का क्षेत्र बड़ा दिखेगा.
6. स्ट्राइप्स का प्रयोग:
घर के डैकोर में हलका सा फेरबदल ला कर भी घर का रूप बदल सकती हैं. उदाहरण के लिए धारीदार कारपेट्स कमरे को लंबा होने का आभास दे सकता है. इसी तरह घर के परदे आदि में स्ट्राइप्स वाली डिजाइनें घर को बड़ा दिखाती हैं.
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7. मार्गों को ब्लौक न करें:
घर के छोटे प्रवेशमार्गों, लौबियों या हौलवे में संकीर्ण कौन्सोल टेबलों के उपयोग से घर के प्रवेश स्थान के बड़े होने का आभास दे सकती हैं. मार्गों को ब्लौक न करें या प्रवेश स्थान को इतना संकीर्ण न करें कि लोगों को वहां चलने में परेशानी हो. जितनी दूर तक आप की आंखें कमरे को देख पाएंगी, कमरे के उतना ही बड़ा होने का आप को एहसास होगा.
विवाह से पहले एकदूसरे को पाने की चाह में जो युगल समाज तथा परिवार के विरुद्ध जाने से भी संकोच नहीं करते, अचानक विवाह होते ही या उम्र के किसी भी पड़ाव में एकदूसरे से आखिर अलग होने का निश्चय क्यों कर लेते हैं. यह बहुत चिंतनीय विषय है, क्योंकि पहले के जमाने के विपरीत आधुनिक समय में अधिकतर विवाह युवाओं द्वारा स्वेच्छा से किए जा रहे हैं. मातापिता द्वारा पारंपरिक सुनियोजित विवाह को उन के द्वारा नकारा जा रहा है. इन के असफल होने के कई ठोस कारण हैं:
– प्रेम विवाह बौलीवुड की ही देन है, जहां जीवनसाथी ढूंढ़ते समय न उम्र की परवाह होती है न जाति के बंधन की. जिस रफ्तार से प्रेम विवाह का फैसला यहां लिया जाता है उसी रफ्तार से तलाक भी हो जाता है. ‘तू नहीं और सही’ यह सोच पूरे बौलीवुड को अपनी गिरफ्त में लिए हुए है, जिस के प्रभाव से साधारण जनता भी अछूती नहीं है. यह तो सर्वविदित है ही कि फिल्मों के नायकनायिका की जीवनशैली आम जनता को बहुत जल्दी प्रभावित करती है, क्योंकि वे उन के आदर्श होते हैं.
– बौंबे हाई कोर्ट ने एक केस के संदर्भ में 2012 में बताया था कि अरेंज्ड मैरिज के बजाय प्रेम विवाहों में तलाकों की संख्या कहीं ज्यादा है. 1980 से प्रेम विवाह के चलन ने जोर पकड़ा. उस से पहले प्रेम की अभिव्यक्ति ही इतनी कठिन थी कि परिवार वालों के सामने जाहिर होने से पहले ही वह कहीं और रिश्ता जुड़ने के कारण दम तोड़ देती थी. यह चलन अभी महानगरों तक ही सीमित है. अभी छोटे शहरों और गांवों में इसे समाज द्वारा मान्यता नहीं मिली है. यह स्थिति भी देखने को मिल सकती है कि यदि परिवार वालों को पता लग जाता है, तो समाज में अपने मानसम्मान को ठेस न पहुंचे, इस से बचने के लिए वे अपने बच्चों की हत्या तक करने से भी गुरेज नहीं करते.
– प्रेम जिस की परिणति विवाह में होती है वह वास्तव में प्रेम नहीं होता, महज शारीरिक आकर्षण होता है. प्रेम और विवाह सिक्के के दो पहलू होते हैं. कोई जरूरी नहीं कि एक प्रेमी अच्छा पति भी साबित हो या एक प्रेमिका अच्छी पत्नी साबित हो. विवाह के पहले एक ही व्यक्ति के गुणों पर रीझ कर उस के साथ जीवनयापन का निर्णय करते हैं, लेकिन भारत में विवाह के बाद पत्नी को पति के सारे परिवार से तालमेल बना कर चलना पड़ता है, पति को भी पत्नी के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारी निभानी होती है.
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प्रेम विवाह तभी सफल होता है जब इस का आधार त्याग, प्रतिबद्धता, समर्पण, समझौता हो जोकि प्राय: आधुनिक युवावर्ग में देखने को नहीं मिलता है, इसलिए विवाह के पहले देखे गए दिवास्वप्न विवाह के बाद धराशायी होते देख कर पत्नी विद्रोह करने लगती है, जिस का परिणाम तलाक होता है.
– आधुनिक लड़कियां पढ़लिख कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गई हैं. इस का सकारात्मक प्रभाव के साथ नकारात्मक प्रभाव यह पड़ रहा है कि वे असहनशील होने के साथसाथ अभिमानी भी हो रही हैं, जोकि सफल वैवाहिक जीवन के लिए घातक है.
– आधुनिक युवावर्ग अपनी वैयक्तिकता को प्राथमिकता देता है और किसी भी प्रकार का समझौता करने से कतराता है, जोकि वैवाहिक जीवन का आधार है. इसी कारण केरल राज्य में तलाकों की संख्या सब से अधिक है. वहां के लोगों की सोच है कि हर व्यक्ति को विवाह करना ही क्यों चाहिए?
– अमेरिका और कनाडा के साथसाथ कई पश्चिमी देशों के लोग भी अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हैं. आजकल हमारे युवा भी या तो उन देशों में नौकरी के कारण वहां जा कर बस गए हैं या फिर भारत में रह कर विदेशी कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं, इसलिए वहां के लोगों के वैवाहिक जीवन का हमारी युवा पीढ़ी पर भी बहुत प्रभाव पड़ रहा है. मगर वे भूल जाते हैं
कि भारत के विपरीत वहां के युवा न तो परिवार और न ही समाज के प्रति उत्तरदायी होते हैं.
15-16 साल की उम्र के बाद ही न वे मातापिता के प्रति कर्तव्यों के लिए बाध्य होते हैं और न ही मातापिता का उन के प्रति कोई कर्तव्य शेष रह जाता है. उन्हें समाज क्या कहेगा, इस का उन्हें कतई भय नहीं होता है.
– फिर अब तलाक लेना भी बहुत आसान हो गया है खासकर महिलाओं के लिए संविधान की धारा 498 के अंतर्गत वे ससुराल पक्ष पर शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगा कर बहुत आसानी से उन से छुटकारा पा सकती हैं. इस के लिए उन्हें कोई प्रमाण दिखाने की भी आवश्यकता नहीं होती है. हां, इस का महिलाओं द्वारा दुरुपयोग करने के कारण लोगों के दबाव डालने पर संविधान के इस कानून में अब संशोधन किया गया है.
– समाज में दिनप्रतिदिन तलाकों की संख्या में बढ़ोतरी भी युवावर्ग को तलाक लेने के लिए प्रेरित कर रही है. ‘दोस्त तलाक ले सकता है तो मैं क्यों नहीं? शायद दूसरा पार्टनर इस से बेहतर मिल जाए’, यह सोच युवावर्ग पर हावी है.
– प्रेम विवाह अधिकतर बिना सोचेसमझे, अपनी मरजी से होता है, इसलिए उसे अपनी मरजी से तोड़ना भी बहुत आसान लगता है, क्योंकि समाज या परिवार का उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं होता.
– लिव इन रिलेशनशिप भी प्रेम विवाह का ही एक रूप है. महानगरों में इस का चलन खूब जोर पकड़ रहा है. इस में लड़केलड़कियां अपने परिवार को सूचित किए बिना ही स्वेच्छा से एकदूसरे के साथ रहते हैं और आवश्यक नहीं कि साथ रहते हुए वे विवाह के बंधन में बंध ही जाएं. उन्हें रिश्ता टूटने पर तलाक लेने के लिए किसी कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की आवश्यकता नहीं होती है यानी बंधनरहित विवाह में यह बहुत सुखदायी रिश्ता लगता है. लेकिन यह तभी तक ठीक है, जब तक दोनों में तालमेल है, क्योंकि समाज और परिवार की मानसिकता इस रिश्ते की स्वीकृति नहीं देती और उन का सहयोग न मिलने के कारण एक के भी द्वारा रिश्ता तोड़ने पर दूसरा भावनात्मक रूप से आहत हो कर अवसाद में चला जाता है. आत्महत्या तक करने को मजबूर हो जाता है. अभिनेत्री प्रत्यूषा इस का ताजा उदाहरण हैं. उन से पहले जिया खान ने भी यह कदम उठाया था.
2005 में साउथ की प्रसिद्ध अभिनेत्री खुशबू के लिव इन रिलेशनशिप और विवाह से पहले शारीरिक रिश्ता रखने के समर्थन में साक्षात्कार में खुलेआम बोलने पर विरोधियों का कहना था कि इस से हमारे समाज की लड़कियों पर बुरा असर पड़ेगा. अत: उन के विरोध में 22 एफआईआर दर्ज होने के बाद खुशबू द्वारा केस दर्ज करने के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि कोई स्त्री और पुरुष साथ रहना चाहते हैं तो उस का विरोध क्यों हो? ऐसा कर के वे क्या अपराध कर रहे हैं? यह लोगों की मानसिकता के अनुसार गलत हो सकता है, लेकिन गैरकानूनी नहीं. संविधान के आर्टिकल 21 में दिए गए मौलिक अधिकार ‘स्वतंत्रता से जीने का अधिकार’ के अंतर्गत यह आता है. यह उन का व्यक्तिगत मामला है.
प्रेम विवाह की तरह 22 मई, 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप को भी विवाहित रिश्ते के समान वैधानिक घोषित कर दिया था.
तलाक लेने के लिए कानून हमारे हित को ध्यान में रख कर ही बनाया गया है, लेकिन उपयोग के स्थान पर उस का दुरुपयोग भी धड़ल्ले से हो रहा है. मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताडि़त होने पर ही तलाक लेना उचित है. छोटीछोटी बातों को तूल दे कर या कोई दूसरा पसंद आ जाए तो तलाक लेने का परिणाम कभी सुखद नहीं हो सकता. विवाह चाहे किसी भी प्रकार का हो उस की नींव आपसी समझदारी और समझौते पर ही टिकी होती है.
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पश्चिमी देशों के विपरीत हमारे देश में वैवाहिक जीवन में परिवार का जो सहयोग मिलता है वह उसे सफल बनाने के लिए बहुत आवश्यक है.
विवाह सामाजिक बंधन के रूप में ही ठीक है, बिना बंधन के वह बिना पतवार की नौका के समान है, जिस की कोई मंजिल नहीं होती. यहां प्रेम विवाह का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने अति आवश्यक हैं.
मातापिता को अपने बच्चों की भावनाओं को समझ कर उन की पसंद को स्वीकार करते हुए सहयोगात्मक प्रतिक्रिया देनी चाहिए. उन के मार्गदर्शन से ही बच्चों के वैवाहिक जीवन में ठहराव और अनुशासन की कल्पना की जा सकती है.
आजकल शादी विवाह के अवसर पर फ्लोरल अर्थात फूलों से बनी ज्वैलरी का प्रयोग बहुतायत से किया जाने लगा है. यूं तो हमने प्राचीन कालीन शकुंतला को भी चित्रों में फूलों से बनी ज्वैलरी पहने ही देखा है परन्तु आजकल शादी में हल्दी, मेंहदी तथा बेबी शावर अथवा गोद भराई के समय भी नायिका और उसके परिवार की महिला सदस्यों द्वारा फूलों से बनी ज्वैलरी पहनने का ही चलन है. भांति भांति के फूलों से बनी फ्लोरल ज्वैलरी सस्ती होने के साथ साथ इकोफ्रेंडली और अत्यधिक सस्ती भी होती है. फूलों से गले के हार से लेकर झुमके, मांग टीका, कंगन, करधनी और अंगूठी जैसे सभी गहने बड़ी आसानी से बनाये जा सकते हैं.
कौन से फूलों का करें उपयोग
-मोगरा
रंग में सफेद होने के साथ साथ मोगरा दिखने में बहुत सुंदर और चारों ओर अपनी खुशबू बिखेरने वाला होता है. सफेद होने के कारण गेंदे, गुलाब जैसे दूसरे रंग के बड़े फूलों के साथ इसे पेयर करना काफी आसान होता है.
-गुलाब
यूं तो गुलाब अनेक रंगों में पाया जाता है परन्तु लाल और गुलाबी रंग का शादी विवाह के अवसर पर विशेष महत्व होता है.इसके अतिरिक्त यदि आप कुछ हैवी ज्वेलरी पहनना चाहतीं हैं तो गुलाब से बनी ज्वेलरी सर्वश्रेष्ठ विकल्प है.
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-गुलदाउदी/सेवंती
गुलदाउदी को सेवंती भी कहा जाता है. इसके फूल पीले, सफेद और बैंगनी रंग के सुंदर होते है. इनसे बनी ज्वैलरी बहुत सुंदर और दिखने में भारी लगती है.
-हरसिंगार
नारंगी डंडी और सफेद फूल वाले हरसिंगार या पारिजात के फूलों की ज्वैलरी मनमोहक सुगन्ध के साथ साथ कन्ट्रास रंग के कारण देखने में बहुत अच्छी लगती है. चूंकि इसमें स्वयम ही दो रंग होते हैं इसलिए इसमें किसी दूसरे रंग के फूल लगाने की आवश्यकता नहीं होती. आकार में छोटे होने के कारण इनसे मल्टीलेयर्ड ज्वेलरी भी बड़ी आसानी से बनाई जा सकती है.
रखें इन बातों का ध्यान
फ्लोरल ज्वैलरी चूंकि बहुत नाजुक होती है इसलिए इसे बनवाते या खरीदते समय निम्न बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है.
-ज्वैलरी का चयन करते समय अवसर का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, मसलन हल्दी मेंहदी के लिए सुर्ख लाल, बेबी शावर के लिए सफेद और लाल या नारंगी रंग के फूलों का चयन करना उत्तम रहता है.
-ज्वैलरी खरीदने या बनवाने के लिए किसी कुशल माली या फूलवाले का चयन करें ताकि गुणवत्ता के साथ आपको कोई समझौता न करना पड़े.
-ज्वैलरी बनवाते समय अपनी ड्रेस के रंग का भी ध्यान रखें सम्भव हो तो ऐसी ड्रेस और ज्वैलरी का चुनाव करें जिसमें कुछ न कुछ समानता अवश्य हो.
-माली को ताजे फूलों का ही प्रयोग करने को कहें क्योंकि एक दिन पुराने फूलों की ही पंखुड़ियां गिरने लगतीं हैं.
-ज्वैलरी बनाने वाले को डिजाइन आप स्वयम बताएं ताकि आपके मनमुताबिक ज्वैलरी बन सके. साथ ही मजबूत धागे का प्रयोग करने को कहें.
-यदि आपका कार्यक्रम एकदम सुबह है तो ज्वैलरी एक दिन पहले ही लाकर फ्रिज में रख लें ताकि सुबह कोई हड़बड़ी न रहे.
-छोटे बच्चों को फूलों की ज्वैलरी पहनाने से बचें क्योंकि इनकी पत्तियां उनके मुंह में जा सकतीं हैं.
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-फूलों के साथ साथ बीच बीच में कलियों का प्रयोग ज्वैलरी के सौंदर्य को दोगुना कर देता है.
-ताजे फूलों की अपेक्षा आप चाहें तो आर्टिफिशियल फूलों से बनी ज्वेलरी का भी प्रयोग किया जा सकता है. ये ताजे फूलों की अपेक्षा काफी सस्ती पड़ती है.आजकल बाजार में भांति भांति के डिजाइन की ज्वैलरी उपलब्ध है.
-यदि आपका कम बजट है तो आप दुल्हन के लिए ताजे और शेष मेहमानों के लिए आर्टिफिशियल फूलों का मांग टीका आदि ले सकतीं हैं.
लगभग हर आदमी को अपने जीवन में कभी न कभी कमर दर्द का अनुभव अवश्य होता है. आज कमर दर्द बहुत बड़ी समस्या बन गया है. हर उम्र के लोग इस से परेशान हैं और दुनिया भर में इस के सरल इलाज की खोज जारी है.
मनुष्य के शरीर में कमर को सब से मजबूत भाग माना जाता है. कमर की बनावट में हड्डियां, कार्टिलेज (डिस्क), जोड़, मांसपेशियां, लिगामैंट व नसें आदि शमिल हैं. इन में से किसी के भी विकारग्रस्त होने पर कमर दर्द उत्पन्न हो सकता है. मैकैनिकल कारणों के साथ टीबी से ले कर कैंसर तक कोई भी कारण दर्द पैदा कर सकता है. कमर दर्द का शिकार पुरुषों से अधिक महिलाएं होती हैं, जिस का मुख्य कारण होता है कमर की मांसपेशियों की कमजोरी. इस का दूसरा कारण है कमर की हडिडयों के जोड़ों में विकार होना.
कमर दर्द से जुड़ी बीमारियों के लक्षण
पैरों का सुन्न होना, कमजोरी का एहसास होना, पेशाब में परेशानी, चलने पर पैरों के दर्द का बढ़ना, झुकने या खांसने पर पूरे पैर में करंट जैसा लगना आदि. कई बार रोगी की चाल शराबीयों जैसी लड़खड़ाती है.
कमर दर्द के ये सभी कारण कई रीढ़ संबंधी बीमारियों को जन्म देते हैं जैसे स्पौंडिलाइटिस, सर्वाइकल, कमर में ट्यूमर, स्लिप्ड डिस्क आदि. इन में स्लिप्ड डिस्क एक बहुत ही गंभीर समस्या बन गई है.
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नई दिल्ली स्थित फोर्टिस हौस्पिटल के वरिष्ठ कंसल्टैंट डा. प्रदीप मुले का कहना है कि आज पूरी दुनिया में कमर दर्द का सब से बड़ा कारण है स्लिप्ड डिस्क. आखिर यह स्लिप्ड डिस्क क्या होता है? दरअसल, स्लिप्ड डिस्क एक ऐसी बीमारी है, जिसे समझने के लिए रीढ़ की बनावट के बारे में जानना जरूरी है.
हमारी रीढ़ की हड्डी 33 हड्डियों के जोड़ से बनती है और प्रत्येक 2 हड्डियां आगे की तरफ एक डिस्क के द्वारा और पीछे की तरफ 2 जोड़ों के द्वारा जुड़ी होती है.
यह डिस्क प्राय: रबड़ की तरह होती है जो इन हड्डियों को जोड़ने के साथसाथ इन्हें लचीलापन भी प्रदान करती है. इन्हीं डिस्क में उत्पन्न हुए विकारों को स्लिप्ड डिस्क कहते हैं.
कमर दर्द से जुड़ी बीमारियों की पहचान है कमर से ले कर पैरों में जाता दर्द, पैरों का सुन्न या भारी होना अथवा चीटियां चलने जैसा एहसास भी हो सकता है. चलने पर असहनीय दर्द होना. कई बार लेटेलेटे भी कमर से पैर तक असहनीय दर्द होता रहता है.
स्लिप्ड डिस्क का रोग कमर के अलावा गरदन में भी हो सकता है. अभी तक पुराने स्लिप्ड डिस्क के औपरेशन से लोग काफी भयभीत थे. क्योंकि इस में नसों के कट जाने व अपाहिज हो जाने का डर रहता था.
इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए कई शोध किए जा रहे हैं. कई प्रयोगों ने बहुत सी नवीन तकनीकों को जन्म दिया है. इस के अलावा कई दवाओं के माध्यम से भी इन का इलाज किया जा रहा है. किंतु इन सब के द्वारा बीमारी को जड़ से उखाड़ पाना अभी तक संभव नहीं था.
उपचार
यदि इस के उपचार की बात की जाए तो कई प्रकार के उपचार मौजूद हैं. बैड रैस्ट, इंजैक्शन, शल्य चिकित्सा, स्पाइनल फ्यूजन, डिस्क प्रत्यारोपण, वर्टिब्रोप्लास्टी, पिन होल सर्जरी और मिनिमल इन्वेसिव सर्जरी आदि. लेकिन हर उपचार की कुछ सीमाएं हैं. मगर अब एक नई सर्जरी की शुरुआत की गई है और यह है ओजोन थेरैपी. दरअसल, ओजोन थेरैपी से इस का इलाज आसान हो गया है.
औक्सीजन ओजोन थेरैपी एक शल्यरहित प्रक्रिया है, जोकि देश में अब उपलब्ध है. इस प्रक्रिया के दौरान डिस्क सिकुड़ती है, जिस से नर्व रूट कंप्रैशन घटता है और औक्सीजन की मात्रा बढ़ने लगती है. इस की सफलता दर 80% है. इस का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और न ही शरीर में कोई सूजन या संक्रमण होता है.
इस चिकित्सा के कई लाभ हैं जैसे कि यह पुरानी सर्जरी के मुकाबले कम जटिल है. पुरानी सर्जरी से सस्ती होती है. त्वचा पर कोई दाग नहीं पड़ता. इमेज गाइडेंस के जरीए बीमारी की निश्चित जगह का पता लगाया जा सकता है.
यह लोकल ऐनेस्थीसिया दे कर किया जाता है. इसे एक दिन में ही किया जा सकता है.
वास्तव में इस पूरी चिकित्सा के लिए केवल 1 से 4 घंटे तक के लिए अस्पताल जाना होता है. इस के मुख्य फायदे हैं कि मरीज उसी दिन से चलफिर सकता है. इस में खून बहने व संक्रमण का रिस्क नहीं होता. मरीज को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है. इस से दवाओं व अस्पताल का खर्च बच जाता है.
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कमर दर्द से बचने के टिप्स
– उठनेबैठने के ढंग में परिवर्तन करें. बैठते वक्त सीधे तन कर बैठें. कमर झुका कर या कूबड़ निकल कर न बैठें और न ही चलें.
– यदि बैठतेबैठते ही अलमारी के रैक से कुछ उठाना हो तो झुक कर ही उठाएं.
– क्षमता से अधिक वजन न उठाएं.
– नरम या गुदगुदे बिस्तर पर न सोएं, बल्कि सपाट पलंग या तख्त पर सोएं ताकि पीठ की मांसपेशियों को पूर्ण विश्राम मिले.
– वजन हरगिज न बढ़ने दें. भले ही इस के लिए आप को डाइटिंग या व्यायाम ही क्यों न करना पड़े.
– तनाव से बचें. चिंता दूर करने के लिए खुले में टहलें. कोई भी मनोरंजक क्रियाकलाप करें ताकि ध्यान बंटे.
– नियमित व्यायाम की आदत डालें ताकि शरीर चुस्तदुरुस्त व फुरतीला रहे. शरीर के सभी अंग क्रियाशील रहें. इस में पैदल चलना या जौगिंग सर्वश्रेष्ठ हैं. साइकिल चलाना, गोल्फ या बैडमिंटन खेलना आदि भी फायदेमंद है.
डा. प्रदीप मुले
फोर्टिस हौस्पिटल, वसंत कुंज, नई दिल्ली