Imlie की जान बचाएगा आर्यन, आदित्य को भड़काएगी मालिनी

सीरियल इमली में इन दिनों आर्यन और आदित्य के बीच लड़ाई देखने को मिल रही है. वहीं मालिनी बात का पूरा फायदा उठाकर इमली के लिए त्रिपाठी परिवार के बीच जहर घोलने की कोशिश कर रही है. लेकिन अपकमिंग एपिसोड में एक बार फिर इमली और आदित्य के बीच जहां दूरियां बढ़ने वाली हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

आर्यन करेगा इमली की मदद

 

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अब तक आपने देखा कि आर्यन, इमली को औफिस में सोते पकड़ लेता है. लेकिन इमली पार्क में जाकर सो जाती है, जिसके बाद गुंडे उसे परेशान करते हैं. लेकिन आर्यन उसे बचा लेता है और गुंडों को भगा देता है. वहीं इमली से उसके घर में रहने का औफर देता है. वहीं मालिनी, इमली को आर्यन के साथ देख लेती है और चुपके से दोनों की सेल्फी लेते हुए फोटोज खींच लेती है. ताकि वह आदित्य को फोटोज दिखा सके.

 

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आदित्य को होगी जलन

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि इमली, आर्यन के उसके घर पर रहने का प्रस्ताव ठुकरा देती है. लेकिन आर्यन अपनी डायरी में एक किराये का समझौता लिखकर कहेगा कि जब तक वह उसके घर में रहेगी, वह हर महीने उसके सैलरी से 5000 रुपये काटेगा, जिसे सुनकर इमली मान जाएगी. वहीं मालिनी घर पहुंचकर त्रिपाठी परिवार को अपनी सेल्फी दिखाएगी, जिसमें आदित्य, इमली और आर्यन को साथ देख लेगा. वहीं मालिनी कहेगी कि रात को इमली एक सीईओ के साथ क्या कर रही है, जिसे सुनकर आदित्य को जलन होगी.

आर्यन देगा इमली को सलाह

 

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इसके अलावा आप देखेंगे कि आर्यन , इमली को अपने करियर को सफल बनाने के लिए सलाह देगा और कहेगा कि जिसने भी उससे कहा कि वह खुद को न बदलें या नई चीजें न सीखें, वह बेवकूफ है. इस बात को सुनने के बाद इमली अपने भविष्य को सफल बनाने का फैसला करेगा.

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हंसी को लेकर क्या कहना चाहते है एक्टर और कॉमेडियन Sunil Grover

कॉमेडी की दुनिया में अपनी एक अलग छाप छोड़ने वाले स्टैंडअप कॉमेडियन और अभिनेता सुनील ग्रोवर को प्रसिद्धी ‘कॉमेडी नाइट्स विथ कपिल’ की शो में गुत्थी, रिंकू भाभी और डॉक्टर मशूर गुलाटी की भूमिका से मिली. उन्हें हमेशा से कॉमेडी करना, किसी की नक़ल उतारना पसंद था. स्कूल, कॉलेज में सभी उनके इस हुनर की तारीफ करते थे. कॉलेज के एक कार्यक्रम में कॉमेडी करते हुए सुनील को पता चला कि उन्हें इसी फील्ड में जाना है और उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा और धीरे-धीरे कामयाब हुए. सुनील बहुत ही धैर्यवान और शांत स्वभाव के है, जब उनके पास काम नहीं था, उन्होंने डबिंग और आकाशवाणी में काम किया. सुनील को परिवार वालों ने मुंबई आने से नहीं रोका, क्योंकि वे सुनील की प्रतिभा से परिचित थे. गृहशोभा के लिए सुनील ने खास बात की, आइये जानते है उनकी जर्नी, उन्हीँ की जुबानी.

सवाल-हँसना और हँसाना कितना जरुरी है?

हँसना हमेशा बहुत जरुरी है. कई बार लोगों की परिस्थिति ख़राब होती है, जैसा कोविड के बाद से लोगों को हुआ, क्योंकि बहुतों की नौकरियाँ चली गयी, किसी के पास रहने को घर नहीं, तक़रीबन हर परिवार ने कोविड से किसी न किसी प्रियजन को खोया है. पेंडेमिक की वजह से सबको बहुत नुकसान किसी न किसी वजह से हुई है और ये बहुत ही संवेदनशील परिस्थिति है, जिसमें किसी को भी हँसाना बहुत मुश्किल है, हालांकि अभी सब खुल चुके है, लेकिन ये बीमारी है और लोग इससे डर रहे है. इसलिए पहले जैसी हालात बनने में काफी समय लगेगा.

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सवाल-पेंड़ेमिक के दौरान आपने कैसे समयबिताया?

मैं घर पर था, मेरा खाना-पीना चल रहा था, पर मैं उन लोगों के लिए चिंतित था, जिन्हें हर दिन के हिसाब से पैसे मिलते है, लेकिन उस समय उनके पास काम नहीं था और उनकी भूखों मरने की नौबत आ चुकी थी, मुझे ये देखकर बहुत ख़राब लगता था, क्योंकि हमारे देश की स्थिति अभी भी सुधरी नहीं. आज भी अमीर और गरीब के बीच का अंतर काफी है.

सवाल-आपने हंसी का सफ़र कैसे शुरू किया, किससे प्रेरणा मिली?

हंसी का सफ़र स्कूल और कॉलेज से ही शुरू हो चुका था, स्कूल में नाटक, स्किड्स, मोनो एक्ट, मिमिक्री सब करने लगा था. मैं हरियाणा के डबवाली शहर में जन्म लिया और पढाई की. कॉलेज में कॉमेडी करते हुए मुझे समझ में आया कि मुझे इस फील्ड में जाना है. उन दिनों मैंने जसपाल भट्टी के साथ और टीवी पर काम किया, फिर मैंने चंडीगढ़ में मास्टर ड्रामा लेकर किया. इसके बाद मुंबई मेरे क्लास मेट के बुलाने पर आ गया.यहाँ आने पर मैंने वौइस् ओवर और आकाशवाणी में कई सालों तक काम किया.

सवाल-मुंबई आते समय परिवार की प्रतिक्रिया क्या थी?

उन्होंने कुछ अधिक नहीं कहा, क्योंकि उन्हें पता था कि मैं कुछ कमा सकता हूं. मैने कॉलेज से ही शो होस्ट करना, मिमिक्री, नाटकों में काम करना शुरू कर दिया था, इससे वे जानते थे कि जब यही ये इतना कमा रहा है तो वहां भी कुछ अवश्य कर लेगा. इसलिए उन्होंने नहीं रोका.

सवाल-आपने एक सफल जर्नी तय की है, इससे आप कितने खुश है?

अब तक की जर्नी बहुत अच्छी रही है. उतार- चढ़ाव के बीच ये गुजरी है, लेकिन किसी प्रकार की कोई रिग्रेट नहीं रही. अलग-अलग अनुभव रहे है, लेकिन मैंने टीवी शो, फिल्म, वेब सीरीज आदि सभी काम किया है.

सवाल-हर बार एक नई जोक क्रिएट करना मुश्किल होता है?

जोक्स हमारी समाज से ही पैदा होते है. इसमें लेखक का भी बहुत बड़ा हाथ होता है,क्योंकि मैं तो एक्टिंग करता हूं और राइटर उसे शब्दों में बैठाता है. मैने स्कूल कॉलेज से ही एक्टिंग शुरू की थी, बचपन से ही मैं इसमें था. पहले जोक्स बनने के बारें में पता नहीं था, लेकिन जब बड़ा हुआ तो समझ में आया कि असल में जो हँसना जानते है, वही किसी को हँसा सकते है.

सवाल-कई बार कॉमेडी करने पर भी लोग हँसते नहीं है, इसे कैसे सम्हालते है?

ये बहुत ही मुश्किल काम होता है. जिंदगी का वह सबसे जहरीला पदार्थ है, क्योंकि आपके जोक से कोई हँस नहीं रहा. उस समय अचानक कुछ नया बोलकर सहज करना पड़ता है. मुझे याद आता है कि एक बार किसी कारणवश मैं रात के साढ़े तीन बजे शूटिंग कर रहा था. एक बजे शो शुरू हुआ, पर मेरी एंट्री सुबह 4 बजे हुई. मेरे हिसाब से मेरे जोक्स बहुत अच्छे थे, लेकिन जिन्हें सुना रहा था, उन्हें हंसी नहीं आ रही थी, क्योंकि वे आधे सोये हुए दर्शक थे. तब समझ में आया कि इतनी रात को जागरण ही ठीक है, कॉमेडी नहीं.

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सवाल-आपको गुत्थी की भूमिका से काफी पॉपुलैरिटी मिली, क्या लड़की बनकर कॉमेडी करना आसान होता है?

मैं अपने दिमाग से कभी लड़की नहीं बना. वह एक चरित्र है और संयोग से वह लड़की है. अगर मैं लड़की बनने की कोशिश करता, तो मैं उसकी भाव-भंगिमा पर अधिक ध्यान देने लगता, उसके माइंड सेट को नहीं देखता.मैं उसके दिमाग में घुसकर ये बताने की कोशिश करता हूं कि ये लड़की तो है, पर एक चरित्र है. मैं दिमाग में जेंडर नहीं रखता.

सवाल-कॉमेडी शो आजकल कई चैनल्स पर हो रहे है, क्या इस तरीके की शो की मांग अधिक है?

कॉमेडी के जितने भी शो हो, अच्छा होता है, क्योंकि लोगों को हँसना बहुत जरुरी है. हंसने के जितने भी साधन हो, वह कम ही होता है. ये तनाव को कम करता है और इसमें लोगों की कॉनजम्पशन और पसंद अधिक जिम्मेदार होती है, क्योंकि दर्शक जितना इसे देखना पसंद करते है, शो भी उसी हिसाब से तैयार किये जाते है.

सवाल-कॉमेडी करते समय द्विअर्थी शब्दों का और मिमिक्री करते वक्त किसी के आहत न होने को आप कितना ध्यान रख पाते है?

कॉमेडी सबको पसंद होती है. पूरा परिवार साथ मिलकर इसे देखते है, इसलिए मैं द्विअर्थी शब्दों का प्रयोग नहीं करता. मिमिक्री मैं अधिकतर उनकी करता हूं, जिन्हें लोग और मैं देखना पसंद करते है. असल में ये मेरी तरफ से एक ट्रिब्यूट होता है. मैं किसी की पर्सनल बातों को लेकर मिमिक्री नहीं करता, ताकि देखने वालों की और जिनके बारें में कही गयी है, उन्हें ख़राब न लगे.

सवाल-आपकी पत्नी आरती से आपका मिलना कैसे हुआ? आपका बेटा आपके काम को कितना सराहते है?

मैं आरती से मुंबई में मिला था, वह एक इंटीरियर डिज़ाइनर है. एक शो के दौरान उससे मिला था. मेरा 11 साल का बेटा मोहन जन्म से मुझे कॉमेडी करता हुआ देख रहा है. अब उसे लगता है कि ये पिता का जॉब है. शुरू-शुरू में वह पूछता था कि लोग मेरे साथ पिक्चर क्यों खींच रहे है, मैंने उसे समझाया कि मेरे काम की वजह से लोग मुझे देखते और पसंद करते है, इसलिए मेरे साथ फोटो खींच रहे है.

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सवाल-मुंबई ने आपको अच्छा काम , पैसा और शोहरत सब दिया है,लेकिन इन सबके बीच आप क्या मिस करते है?

मुझे बहुत समय बाद वह मिला जिसकी मैं अपेक्षा किया करता था, रोटी बनाना, कपडे धोना ये सब तो मैं बिलकुल भी मिस नहीं करता, लेकिन उत्तर भारत की सर्दियों में गरम कपडे पहनना, ढाबे पर देसी भोजन खाना आदि को मैं मिस करता हूं, पर मैं उसे शूटिंग में पूरा कर लेता हूं. इसके अलावा मुंबई में काफी ट्राफिक है, मैं अपने स्थान की खाली सड़कों को मिस करता हूं, जिस पर मुझे गाड़ी चलाना बहुत पसंद है.

सवाल-कोई मेसेज जो आप देना चाहते है?

मैं सभी से कहना चाहता हूं कि कोविड की एक भयंकर दौरसे सभी गुजर चुके है, लेकिन अभी ये रोग विद्यमान है, इसलिए जिन व्यक्तियों ने वैक्सीन नहीं लगाया है, वे अवश्य लगायें और जो लगा चुके है वे दूसरों को प्रेरित करें, ताकि अच्छी तरह से इस पेंडेमिक से लड़ी जा सके. जब भी बाहर जाए, मास्क पहने, साबुन से हाथ धोएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, जब तक ये बीमारी ख़त्म नहीं होती.

2,503 कन्याओं का विवाह ‘कन्या विवाह सहायता योजना’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज जनपद कुशीनगर में श्रम विभाग के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 2,503 कन्याओं के विवाह कार्यक्रम में सम्मिलित हुए. गोरखपुर मण्डल से सम्बन्धित जनपदों की इन कन्याओं का विवाह ‘कन्या विवाह सहायता योजना’ के तहत सम्पन्न हुआ. इसमें जनपद कुशीनगर की 654, जनपद गोरखपुर की 817, जनपद महराजगंज की 634 तथा जनपद देवरिया की 398 कन्याएं सम्मिलित हैं. इस समारोह में 138 मुस्लिम तथा 122 बौद्ध जोड़ों का विवाह भी सम्पन्न हुआ. मुख्यमंत्री जी द्वारा 11 नवविवाहित दम्पत्तियों को प्रतीक स्वरूप प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया.

मुख्यमंत्री जी ने सामूहिक विवाह समारोह में परिणय सूत्र में बंधने वाले सभी जोड़ों को सौभाग्यशाली बताते हुए उन्हें हार्दिक बधाई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि इस आयोजन में मुख्यमंत्री, मंत्रिगण, जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण की उपस्थिति लोकतंत्र की ताकत को दर्शाती है. उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए श्रम एवं सेवायोजन मंत्री श्री स्वामी प्रसाद मौर्य सहित उनके विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि श्रम विभाग ने शासन की योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाया है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की परम्परा में कन्यादान महादान माना गया है. वर्तमान सरकार इस प्रकार के कार्यक्रमों से जुड़ रही है. उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम में जाति, मत, मजहब, क्षेत्र तथा भाषा का कोई भेदभाव नहीं किया गया है. सभी पात्र लोगों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है. वर्ष 2017 के पहले भी श्रम विभाग था, लेकिन तब शासन की योजनाओं का लाभ गरीबों, मजदूरों, किसानों, युवाओं तथा महिलाओं को नहीं मिल पाता था. वर्तमान सरकार के गठन के बाद प्रत्येक जरूरतमन्द को शासन की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है. बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान दिया, उसमें सभी के लिए समान अधिकार की व्यवस्था की गयी है. केन्द्र और प्रदेश सरकार इसी समान अधिकार के तहत बिना भेदभाव समाज के अन्तिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है. शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, निःशुल्क विद्युत कनेक्शन, 05 लाख रुपये की आयुष्मान भारत योजना तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति को बिना भेदभाव के दिया जा रहा है. केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं व्यवस्थित रूप में आगे बढ़ रही हैं. किसानों को शासन की योजनाओं का पूरा लाभ दिया जा रहा है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार के प्रयास से 43 लाख गरीबों को आवास उपलब्ध कराये गये हैं. 02 करोड़ 61 लाख शौचालय, 01 करोड़ 40 लाख गरीबों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन, 01 करोड़ 56 लाख निःशुल्क रसोई गैस, 90 लाख लोगों को निराश्रित महिला पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन तथा दिव्यांगजन पेंशन का लाभ दिया जा रहा है. 02 करोड़ 54 लाख किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रदान की गयी है. यह सब तब सम्भव हुआ है, जब अपने-पराये का भेदभाव समाप्त हुआ. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ जब एक साथ मिलते हैं, तो सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं. सामूहिक विवाह का कार्यक्रम इसी का प्रतिफल है. सामूहिक विवाह के दो लाभ होते हैं. इससे बाल विवाह और दहेज प्रथा दोनों पर अंकुश लगता है. उन्होंने कहा कि आज गांव की बेटी सबकी बेटी का भाव देखने को मिलता है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना के कारण कई देशों में जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया, लेकिन प्रधानमंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सहित भारत में कोरोना के सफल प्रबन्धन की मिसाल पूरी दुनिया ने देखी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने देश में कोरोना की निःशुल्क जांच तथा उपचार की व्यवस्था के साथ ही सभी को निःशुल्क वैक्सीन भी उपलब्ध करायी है. आज भारत में लगभग 125 करोड़ कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है. उत्तर प्रदेश में भी अब तक 16 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण जब लॉकडाउन जारी हुआ था, तब उत्तर प्रदेश देश की पहली सरकार थी, जिसने 54 लाख गरीबों, श्रमिकों तथा मजदूरों के लिए भरण-पोषण भत्ते की व्यवस्था की थी. सरकार ने निःशुल्क खाद्यान्न वितरण भी प्रारम्भ किया, जो अनवरत जारी है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक गरीब को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से निःशुल्क खाद्यान्न प्रदान किया जा रहा है. इसके तहत  अन्त्योदय कार्डधारकों को 35 किलो निःशुल्क खाद्यान्न तथा पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 05 किलो निःशुल्क खाद्यान्न प्रदान किया जा रहा है. साथ ही, राज्य सरकार द्वारा भी अन्त्योदय कार्डधारकों को 35 किलो निःशुल्क खाद्यान्न के साथ 01 किलो दाल, 01 लीटर खाद्य तेल, 01 किलो चीनी, 01 किलो नमक प्रदान किया जा रहा है. इसी प्रकार पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 05 किलो निःशुल्क खाद्यान्न के साथ 01 किलो दाल, 01 लीटर खाद्य तेल, 01 किलो नमक भी प्रदान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार ने नेशनल पोर्टेबिलिटी सिस्टम लागू किया है, जिससे श्रमिक कहीं भी अपना राशन प्राप्त कर सकता है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि श्रमिक राष्ट्र का निर्माता है. इसके श्रम, परिश्रम तथा पुरुषार्थ से राष्ट्र की नींव पड़ती है. श्रमिक जितना मजबूत होगा, देश भी उतना मजबूत होगा. श्रमिक रोजगार के लिए विभिन्न राज्यों अथवा जनपदों में भ्रमण करता है. इसके दृष्टिगत प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों के बच्चों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त अटल आवासीय विद्यालयों की स्थापना करायी जा रही है. इन विद्यालयों के माध्यम से श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी, जिससे इनके बच्चे भी महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे सकेंगे. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हितों में निर्णय लिया है कि कोई भी श्रमिक प्रवासी हो अथवा निवासी हो, उसे 02 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा की गारण्टी तथा 05 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने अभी विगत दिनों जनपद कुशीनगर में अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन किया है. इस एयरपोर्ट में वायु सेवाएं प्रारम्भ हो चुकी हैं. इसके अलावा, जनपद में एक मेडिकल कॉलेज भी बनने जा रहा है, जिससे कुशीनगरवासियों को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी. यह मेडिकल कॉलेज जनपद कुशीनगर की शान का प्रतीक होगा.

सामूहिक विवाह के इस कार्यक्रम में प्रत्येक वर-वधू द्वारा मास्क के प्रयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए आवश्यक है कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाए. उन्होंने कहा कि कोरोना दुनिया के कई देशों में कहर ढा रहा है. प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में देश और प्रदेश ने कोरोना पर सफल नियंत्रण पा लिया, लेकिन दुनिया में संक्रमण के नये दौर को लेकर हमें सतर्कता पर पूरा ध्यान देना होगा. इसलिए ‘दो गज की दूरी मास्क है जरूरी’ मंत्र का अनुसरण करते हुए यह भी आवश्यक है कि सभी लोग समय से कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज अवश्य लें. निःशुल्क वैक्सीन के प्रति लोगों को जागरूक करें. जिन लोगों ने अब तक वैक्सीन नहीं लगवायी है, उन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि वैक्सीन ही कोरोना से बचाव का एक महत्वपूर्ण साधन है.

श्रम एवं सेवायोजन मंत्री श्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में बिना भेदभाव के समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को शासन की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है. श्रमिक अपने कार्य के लिए विभिन्न स्थानों पर जाते रहते हैं. ऐसे में उनके बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए प्रत्येक मण्डल मुख्यालय पर अटल आवासीय विद्यालय की स्थापना की जा रही है.

राज्य सरकार द्वारा इन विद्यालयों में श्रमिकों के बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा सुविधा प्रदान की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों के जीवन में व्यापक परिवर्तन आया है. प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों के हितों के दृष्टिगत 18 जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं.

Anupamaa: बा-बापूजी को खास तोहफा देगा अनुज, काव्या को लगेगा झटका

सीरियल अनुपमा (Anupamaa) में वनराज- काव्या (Sudhanshu Panday- Madalsa Sharma) और तोषू- किंजल के बिगड़ते रिश्तों के बीच शाह परिवार में जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है. दरअसल, शो में बा-बापूजी की शादी की 50वीं सालगिरह मनाते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं अनुपमा (Rupali Ganguly) समेत पूरा परिवार बेहद खुश नजर आ रहा है. इसी बीच सीरियल के सेट से कुछ फोटोज वायरल हो रही हैं, जिसे देखकर फैंस चौंक जाएंगे. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

बा का साथ देंगे अनुज-अनुपमा

शाह परिवार में जल्द ही शहनाई बजने वाली है, जिसके चलते शो में धमाल दिखने वाला है. दरअसल, शादी की 50वीं सालगिरह पर जहां बा और बापूजी शादी करेंगे तो वहीं अनुपमा के साथ अनुज भी इस शादी का हिस्सा बनता नजर आएगा. वहीं खबरें हैं कि अनुज और अनुपमा बा का कन्यादान भी करते नजर आएंगे, जिसकी फोटोज सोशलमीडिया पर वायरल हो रही हैं.

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अनुज देगा खास तोहफा

दूसरी तरफ खबरों की मानें तो इस शादी के मौके पर अनुज को शाह हाउस में देखकर जहां पूरा परिवार हैरान होगा तो वहीं अनुज, बा-बापूजी को शादी के तोहफे के रुप में शाह हाउस गिफ्ट करेगा. दरअसल, काव्या ने अनुज के दोस्त को शाह हाउस बेच दिया था, जिससे पूरा परिवार अनजान था. लेकिन अनुज इस घर को दोबारा खरीद लेगा.

अनुज के साथ मस्ती करती नजर आएगी अनुपमा

 

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इसके अलावा आप शादी में देखेंगे कि अनुपमा खुशी के माहौल में झूमती नजर आएगी और बेहद खुश होगी. वहीं अनुपमा को खुश देखकर अनुज भी मस्ती करती नजर आएगा, जिसे देखकर काव्या और वनराज नाराज नजर आएंगे. लेकिन अब देखना दिलचस्प होगा कि अनुज (Gaurav Khanna) और अनुपमा की जोड़ी क्या बन पाएगी.

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औरत नहीं है बच्चा पैदा करने की मशीन

हाल ही में मुंबई के पौश इलाके दादर की एक 40 वर्षीय महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उस के पति ने उसे बेटा पैदा करने के दबाव में 8 बार गर्भपात कराने को मजबूर किया. इस के साथ ही उस को 1,500 से अधिक हारमोनल और स्टेराइड इंजैक्शन दिए गए.

भारत में गर्भपात गैरकानूनी है, इसलिए उस का गर्भपात और उपचार बिना उस की सहमति के विदेश में करवाया. बेटे की ख्वाहिश में की जा रही इस मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने पर उस के साथ मारपीट की.

पीडि़ता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि शादी के कुछ समय बाद ही पति ने वारिस के रूप में एक बेटे की जरूरत पर जोर दिया और जब ऐसा नहीं हो सका तो उस के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी. इसी वजह से विदेश में उस का 8 बार गर्भपात कराया. महिला के पिता सेवानिवृत्त जज हैं और उन्होंने अपनी बेटी का विवाह एक उच्च शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार में किया था. पीडि़ता के पति और सास दोनों ही पेशे से वकील हैं और ननद डाक्टर है.

2009 में पीडि़ता ने एक बच्ची को जन्म दिया. 2 साल के बाद 2011 में जब वह दोबारा गर्भवती हुई तो उस का पति उसे डाक्टर के पास ले गया और गर्भ में फिर से बेटी होने की खबर पा कर उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया.

आरोपी पति अपनी पत्नी को भ्रूण प्रत्यारोपित कराने ले गया और इस से पहले आनुवंशिक रोग के निदान के लिए बैंकौक भी ले कर गया. गर्भाधान से पहले भ्रूण के लिंग की जांच कर के उस का इलाज और सर्जरी की जा रही थी. इस के लिए पीडि़ता को 1,500 से अधिक हारमोनल और स्टेराइड के इंजैक्शन दिए गए. महिला की शिकायत के आधार पर पति के खिलाफ उत्पीड़न, मारपीट, धमकी और जैंडर सलैक्शन का केस दर्ज कर लिया गया.

सोचने वाली बात है कि जब रईस और पढ़ेलिखे लोग ऐसा करेंगे तो दहेज देने में लाचार या अनपढ़ लोगों के बारे में कुछ कहना ही बेकार है. आज के समय में जबकि लड़कियां बड़े से बड़े ओहदे पर पहुंच कर बखूबी अपनी भूमिकाएं निभा रही हैं तब इस तरह की सोच रखने वाले रईस परिवारों की इस मानसिक संकीर्णता पर अफसोस जाहिर करने के सिवा क्या कहा जा सकता है?

औरतों के साथ हैवानियत

मगर बात यहां केवल संकीर्ण सोच या बेटे के लिए पागलपन की नहीं है. इस तरह के मामले दरअसल हैवानियत की सीमा पार कर जाते हैं. एक औरत के लिए मां बनने का सफर आसान नहीं होता. गर्भधारण के बाद के पूरे 9 महीने उसे कितनी शारीरिक तकलीफों से गुजरना पड़ता है यह केवल एक औरत ही समझ सकती है. मगर अकसर पुरुष औरत को इंसान नहीं बल्कि बच्चे पैदा करने वाली मशीन समझते हैं.

उन्हें यह भी समझ नहीं आता कि एक मां का अपने बच्चे से जुड़ाव उसी समय हो जाता है जब वह उस के पेट में आता है. बच्चा उस के शरीर का ही हिस्सा होता है. ऐसे में महज बेटी होने की वजह से उस का गर्भपात करा देना उस अजन्मी बच्ची के साथसाथ मां की ममता का भी खून करना होता है. असुरक्षित गर्भपात गर्भवती औरतों की मृत्यु का तीसरा सब से बड़ा कारण है.

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यही नहीं गर्भपात और इलाज के नाम पर उस के शरीर में हारमोनल और स्टेराइड इंजैक्शन घुसाना या सर्जरी करना किसी भी तरह मान्य नहीं है. पति होने का मतलब यह नहीं कि पुरुष महिला के शरीर का मालिक हो गया और उस के साथ कुछ भी करने का हक हासिल कर लिया. इस तरह के लोग तो रैपिस्ट से भी ज्यादा हैवान होते हैं. रेपिस्ट किसी अनजान महिला के साथ जबरदस्ती करते हैं, मगर पति 7 वचन निभाने का वादा कर के भी महिला को मर्मांतक पीड़ा पहुंचाते हैं.

औरत केवल बच्चे पैदा करने के लिए नहीं है

हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबान की नई सरकार में महिलाओं को शामिल किए जाने की सभी संभावनाओं को खारिज करते हुए समूह के एक प्रवक्ता ने कहा कि महिलाओं को सिर्फ बच्चे पैदा करने चाहिए. एक महिला के लिए कैबिनेट में होना जरूरी नहीं है. इस के बाद अफगानिस्तान की सैकड़ों महिलाएं अपनी जान जोखिम में डाल कर इस के विरोध में सड़कों पर उतर आईं.

तालिबान द्वारा विरोध पर काररवाई में महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोड़े और लाठियों का इस्तेमाल किया. यही नहीं तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं के खेलों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

इस तरह की सोच पुरुषों की छोटी सोच का नतीजा होती है. आज महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिला कर अपनी काबिलीयत साबित कर रही हैं. फिर भी औरतों को दोयम दर्जा ही दिया जाता है. बात तालिबान की हो या भारत की, औरतों के साथ हैवानियत कहीं भी हो सकती है और इस की वजह महिलाओं के प्रति समाज का संकीर्ण रवैया है. समाज का यह रवैया कहीं न कहीं धार्मिक अंधविश्वासों और धर्मगुरुओं की देन है.

मैं बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं हूं

महिला हीरोइन हो या साधारण घर की लड़की अकसर भारतीय समाज में शादी के बाद ज्यादातर लड़कियों से यह सवाल जरूर पूछा

जाता है कि वह खुशखबरी कब सुनाएगी यानी मां कब बन रही है. ऐसा लगता है जैसे औरत का सब से पहला और जरूरी काम बच्चे पैदा करना ही है.

दरअसल, ससुराल में ऐंट्री होने के बाद से ही लड़कियों पर एक अच्छी पत्नी और बहू के साथसाथ घर को वारिस देने की जिम्मेदारी भी डाल दी जाती है. उसे बेटे की मां बनने का आशीर्वाद दिया जाता है. मां बनने में देर हुई तो ताने दिए जाने लगते हैं. सिर्फ परिवार वाले ही नहीं बल्कि रिश्तेदार और पासपड़ोस वालों का नजरिया भी यही होता है.

अकसर घर के बड़े बेटियों को समझते हैं कि शादी के बाद कैरियर को भूल कर पहले घर देखना और घर की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए. लड़की को कभी अपनी जिंदगी से जुड़े अहम फैसले लेने का हक भी नहीं मिलता. कई बार सासससुर द्वारा बहू से डिमांड की जाती है कि वह उन्हें पोता ही दे.

इस तरह कभी पोते की चाह को ले कर सासससुर बहू पर हावी होते हैं तो कभी शादी के तुरंत बाद बच्चे की पैदाइश को ले कर उतावले रहते हैं. ऐसा लगता है जैसे बहू बच्चा पैदा करने की मशीन है. जब चाहे पोता पैदा करवा लो और यदि गर्भ में बच्ची है तो उस की हत्या कर दो. लगता है जैसेकि लड़की की अपनी कोई संवेदना ही नहीं. उस का कोई वजूद ही नहीं, रूढ़ीवादी सोच के चलते लड़की के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है.

बदल जाती है लड़की की जिंदगी

शादी वैसे तो 2 लोगों के बीच होती है, लेकिन अपेक्षाएं केवल बहू से ही की जाती हैं. वैसे ही नए माहौल में एडजस्ट होना और घर को संभालना उस के जीवन की चुनौती होती है. उस की जिंदगी में ऐसे कई बदलाव आते हैं जिन का सामना सिर्फ और सिर्फ लड़की को ही करना पड़ता है. यही नहीं नए रीतिरिवाजों से ले कर सब के मन की करने का बोझ भी घर की नई बहू पर डाल दिया जाता है.

जिन लड़कियों के लिए जिंदगी में कैरियर बहुत महत्त्वपूर्ण होता है उन्हें भी शादी के बाद अपनी प्राथमिकताएं बदलनी पड़ती हैं. एक अच्छी बहू, पत्नी बनने के चक्कर में कैरियर बहुत पीछे छूट जाता है. बची हुई कसर उन के मां बनने के बाद घर पर रह कर बच्चा संभालने की जिम्मेदारी पूरी कर देती है.

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सोसाइटी में दिखावा

समाज में दिखावा करने का रिवाज बहुत पुराना है. बहू के आने के बाद शादी में मिले सामान से ले कर उस की खूबसूरती और कुकिंग स्किल्स को ले कर ससुराल वाले रिश्तेदारों के सामने तारीफ करते नहीं थकते. ऐसा कर के वे समाज में अपनी हैसियत बढ़ा रहे होते हैं. सोसाइटी में अच्छी और बुरी बहू के कुछ पैमाने बने हुए हैं जिन के आधार पर एक बहू को जज किया जाता है. बहू घर का कितना काम करती है, कितनी जल्दी पोते का मुंह दिखा रही है या कितने बड़े घर से आई है जैसी बातें ही उस के अच्छा और बुरा बनने का फैसला करती हैं.

समाज को नहीं भाती आत्मनिर्भर लड़की

समाज में एक आत्मनिर्भर बहू को पचा पाना आज भी मुश्किल है. अगर बहू अपने पहनावे, कैरियर और दोस्तों से मिलनेजुलने जैसी बातें खुद डिसाइड करती है तो ससुराल में उस का टिकना मुश्किल हो जाता है. उस के पति और सासससुर को यह बात बिलकुल रास नहीं आती है. अगर एक बहू काम से घर पर देर से लौटती है तो उसे जज किया जाता है. लड़के दोस्त होने पर उस के चरित्र तक पर सवाल उठाए जाते हैं और शादी के तुरंत बाद मां न बनने का फैसला उस में कई तरह की कमियां ढूंढ़ निकालता है.

जरूरी है कि महिलाएं खुद अपनी अहमियत को समझेंं और किसी भी तरह के दबाव को अपनी लाइफ पर हावी न होने दें. पुरुषों को भी जरूरत है इस सोच से ऊपर उठने की, बेटा हो या बेटी बिना किसी पक्षपात के बच्चे को अपना पूरा प्यार देने की.

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कपड़ों को Attractive लुक देती हैं फ्रिल्स

1960-70 के दशक की फ्रिल्स आज फैशन बनी हुई हैं. ब्लाउज, साड़ी स्कर्ट और फ्रॉक से लेकर जैकेट और स्कर्ट तक में फ्रिल्स छाया हुआ है. सामान्य सी ड्रेस को भी आकर्षक और स्टाइलिश लुक दे देतीं हैं फ्रिल्स. फ्रिल युक्त कपड़े आरामदायक होने के साथ साथ ट्रेंडी भी लगते हैं. यूं तो परिधानों में भांति भांति की फ्रिल्स लगाई जातीं हैं परन्तु मुख्य फ्रिल निम्न होतीं हैं-

ऑरेव फ्रिल-कुर्ते, टॉप, गाउन और ब्लाउज की आस्तीन में इस प्रकार की फ्रिल बनाई जाती है. यद्यपि सामान्य फ्रिल की अपेक्षा इसमें कपड़ा अधिक लगता है परन्तु यह बनने पर सुंदर बहुत लगती है.

सादा फ्रिल-कपड़े की डबल या सिंगल पट्टी पर चुन्नटें डालकर बनाई जाने वाली यह फ्रिल स्कर्ट, और फ्रॉक आदि पर खूब फबती है. इससे पतली और चौड़ी दोनों प्रकार की फ्रिल बनाई जा सकती है.

लेयर्ड फ्रिल-एक फ्रिल के 2-3 इंच ऊपर से ही दूसरी फ्रिल लगाए जाने के कारण यह लेयर्ड फ्रिल कहलाती है. अधिक  घेर वाले परिधान के लिए ऑरेव फ्रिल की और कम घेर के लिए सादा फ्रिल की लेयर्स बनाई जाती है. जितनी अधिक लेयर्स उतना अधिक परिधान आकर्षक लगता है.

वाटरफॉल फ्रिल्स-इस प्रकार की फ्रिल आमतौर पर ऑफशोल्डर ड्रेसेज में बनाई जाती है. इसमें सिंगल अथवा डबल लेयर में नेकलाइन के चारों ओर टॉप, गाउन आदि के ऊपरी हिस्से और ब्लाउज में फ्रिल बनाई जाती है. इसमें फ्रिल बनाने के लिए सिलाई के स्थान पर इलास्टिक का प्रयोग किया जाता है.

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ध्यान रखने योग्य बातें

-फ्रिल बनाने के लिए कपड़ा सदैव अच्छी क्वालिटी और पक्के रंग का लें अन्यथा यह धुलने पर आपकी पूरी ड्रेस को ही खराब कर देगा.

-फ्रिल बनाने के लिए प्योर कॉटन के स्थान पर जॉर्जेट, सॉफ्ट नेट, और साटन जैसा सॉफ्ट सिंथेटिक मिक्स कपड़ा लें क्योंकि इसमें  फॉल अच्छा रहता है जिससे फ्रिल देखने में सुंदर लगती है. सख्त फेब्रिक वाला कपड़ा फ्रिल के लिए उत्तम नहीं रहता.

-फ्रिल के लटकने वाले या बाहरी सिरे पर इंटरलॉक या साधारण सिलाई के स्थान पर पीको करवाने से ड्रेस का लुक एकदम रेडीमेड जैसा हो जाता है.

-फ्रिल पर लेस, बीड्स, स्टोन, पाईपीन और मोती लगाकर आप ड्रेस को हैवी लुक प्रदान कर सकतीं हैं.

-फ्रिल वाले कपड़ों को आप मशीन के स्थान पर किसी सॉफ्ट डिटर्जेंट से हाथ सही धोयें ताकि इनकी सिलाइयां और पीको सुरक्षित रहे.

करें ये भी प्रयोग

-आजकल लेयर वाली शरारा ड्रेस बहुत फैशन में है इसे बनाने के लिए बाजार से कपड़ा खरीदने के स्थान पर आप अपनी किसी पुरानी साड़ी का उपयोग करें. इसके पल्लू को अलग कर दें या फिर उससे कुर्ता बनवा लें, शेष कपड़े में पतली साधारण लेस या गोटा पट्टी लेस लगवाकर शानदार शरारा ड्रेस बनवाएं. चुन्नी आप मैच करके अलग से ले सकतीं हैं.

-फ्रिल बनाने के लिए आप साड़ी की फॉल का प्रयोग करें इससे फॉल भी अच्छा आता है और फ्रिल भी आसानी से बन जाती है.

-साटन के चौड़े रिबन और लेस से भी फ्रिल बनाना काफी आसान होता है परन्तु इससे केवल सादा फ्रिल ही बनाई जा सकती है.

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-फ्रिल बनाते समय केवल कपड़े की मैचिंग के धागे का ही प्रयोग करें.

-साधारण सी प्लेन कुर्ती, ब्लाउज या टॉप को यदि आप पार्टी वियर बनाना चाहती हैं तो बस इसमें कन्ट्रास या सेम रंग की फ्रिल बनवाएं, कम खर्च में शानदार ड्रेस तैयार हो जाएगी.

-अच्छी अवस्था और अच्छे फेब्रिक वाली प्रिंटेड साड़ी से आप फ्रिल वाला शरारा और चुन्नी बनवाएं और सेम या कन्ट्रास रंग की कुर्ती ले लें आपकी लाजबाब ड्रेस तैयार हो जाएगी.

घर में ये पौधे लगाएं और मच्छरों को दूर भगाएं

हमारे देश की राजधानी दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों और कई शहरों में मच्छरों का आतंक सा छाया हुआ है. यही कारण है कि इन दिनों देश के कई हिस्से मच्छर जनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. मच्छरों से कई तरह की गंभीर बिमारियां जैसे डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया जन्म लेती हैं, जो आगे चलकर आपको जीवन में बहुत हानि पहुंचाती हैं. आप भी मच्छरों से बचने के लिए तरह-तरह की क्रीम, लोशन और कैमिकल्स युक्त तत्वों का इस्तेमाल करते हैं, जो आपकी त्वचा और स्वास्थ्य दोनो के लिए हानिकारक होते हैं.

मच्छरों से बचने के लिए आपको हर रोज कोई न कोई नये-नये उपाय बताते रहता है, जो कभी असर करते होंगे और कभी नहीं. मच्छरों से बचाव के लिए घर में कुछ पौधे लगाना एक हर्बल और बहुत सस्ते उपाय हो सकते हैं. आज हम आपको बहुत सारे उन पौधों के बारे में बता रहे हैं जिनमें मच्छरों को दूर भगाने वाली गंध और उन्हें दूर कर देने वाला गुण पाया जाता है, तो आप भी अपने घर में ये पौधे लगाकर मच्छरों और बिमारियों को दूर रख सकते है..

1. तुलसी का पौधा

ये बात तो आप सभी जानते हैं कि तुलसी का पौधा अनेक गुणों से भर पूर होता है. तुलसी की पत्तियों की खुशबू बहपत तेज होती है, जो कि मच्छरों को दूर भगाने में मददगार है. जहां भी तुलसी का पौधा लगा होता है, उसके आसपास मच्छर नहीं आते, इसीलिए आपको मच्छरों को दूर रखने के लिए घर में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए.

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2. लेमन बाल्म का पौधा

लेमन बाल्म पुदीने की तरह दिखने वाला एक पौधा है, जिसकी खुशबू नींबू के जैसी होती है इसीलिए तो इसका नाम लेमन बाल्म रखा गया होगा. यह पौधा जहां भी लगा होता है, उसके आसपास इसकी महक दूर दूर तक चारों ओर फैलती है. इसकी इस सुगंध के कारण मच्छर इसके पास नहीं भटकते. घर में इस पौधे को लगाने से मच्छर आपके घर में नहीं आऐंगे. इसके अलावा मच्छरों से बचाव के लिए इसकी पत्तियों को आप रगड़कर अपने शरीर पर भी लगा सकते हैं.

3. गेंदे का पौधा

गेंदे के फूल की तेज ऐर तीखी अजीब सुगंध मच्छरों के लिए परेशानी का सबब है. यही कारण है कि मच्छर इस पौधे से दूर ही रहते हैं और मच्छरो से बचने के लिए ये पौधा लगाना चाहिए.

4. हरी चाय का पौधा

ये हरी चाय का पौधा मच्छरों का जानलेवा दुश्मन है. इस पौधे की खुशबू मात्र से ही मच्छर दूर भागने लगते हैं. हरी चाय के पौधे की खुशबू भी नींबू की तरह ही होती है. आपको पता है, बाजार में बिकने वाली मच्छरों को मारने वाली दवाओं में कई अच्छी कम्पनियों द्वारा कुछ मात्रा में इस पौधे का रस मिलाया जाता है. इसकी पत्तियों को पीस कर शरीर में लगा लेने से भी, इसकी तेज खुशबू से मच्छर आपके आस-पास से भाग जाते हैं.

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5. नीम का पौधा

आयुर्वेदिक और औषधीय गुणों से युक्त नीम के पौधे में मौजूद तत्व मच्छरों और कई कीड़े-मकोड़ों को दूर रखने में सहायक है. मच्छरों को दूर भगाने के लिए आपको नीम की पत्तियों को घर में रखना चाहिए. आप चाहें तो इसकी  पत्तियों को जलाकर अपने घर में इसका धुंआ कर सकते हैं. ऐसा करने से भी मच्छर घर से दूर भाग जाते हैं. आर इसका तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं, ये भी फायदेमंद होता है.

जब कहना हो न

20 सितंबर, 2021 की सुबह. करीब 9 बजे का समय. सड़क पर लोगों की आवाजाही आम दिनों की तरह थी. दिल्ली के लेबर चौक के पास से 2 युवतियां गुजर रही थीं. सहसा वहां एक बाइक आ कर रुकती है. बाइक सवार बाइक को ठोकर मार कर एक युवती की तरफ लपक कर उस पर एक के बाद एक कैंची से वार करने लगता है. खून से लथपथ लड़की जमीन पर गिर जाती है. मगर युवक  रुकता नहीं. लड़की पर करीब 25-26 दफा वार कर डालता है.

युवक युवती की गरदन को बुरी तरह गोद देता है. पीठ पर भी वार करता है. लात भी जमाता है. यहां तक कि कई नसें भी काट देता है. हैवानियत का यह घिनौना खेल करीब 10 मिनट तक चलता है. इस बीच लोग मूकदर्शक बने खड़े रहते हैं. कोई बचाव के लिए आगे नहीं आता है.

दिलोदिमाग को झकझोर देने वाली इस घटना को देख कर कोई भी समझ सकता है कि वह शख्स उस लड़की से बेतहाशा नफरत करता होगा.

सुरेंद्र नाम का यह शख्स 3 वर्षों से करुणा नाम की उस युवती से प्यार करने का दंभ भरता था. एकतरफा प्यार में पागल यह युवक एक कंप्यूटर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट चलाता था और शादीशुदा था. उस के 2 बच्चे भी हैं. पत्नी के साथ तलाक का केस चल रहा था. करीब 3 साल पहले करुणा ने उस के सैंटर में दाखिला लिया था. तभी से सुरेंद्र उस का पीछा करने लगा था और प्यार करने का दावा करता था. करुणा ने उस का प्रेमप्रस्ताव ठुकरा दिया था. पुलिस में भी शिकायत की थी. पर सुरेंद्र के प्यार का भूत नहीं उतरा. उसे शक था कि करुणा किसी और से जुड़ी हुई है. करुणा के रिजैक्शन ने सुरेंद्र के अहं पर ऐसी चोट की कि उस ने अपने तथाकथित प्यार के जनून में करुणा का कत्ल ही कर डाला.

ऐसी ही एक घटना 19 सितंबर, 2016 को दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में घटी. जब एक दिलजले आशिक ने अपनी प्रेमिका को तीसरी मंजिल की बालकनी से फेंक दिया. वजह वही थी, एकतरफा प्यार में रिजैक्शन का दर्द.

करीब डेढ़ साल पहले आरोपी अमित ने ब्यूटीपार्लर में काम करने वाली उस युवती से फेसबुक पर दोस्ती की थी. दोनों के बीच जानपहचान बढ़ती गई. व्हाट्सऐप पर खूब चैटिंग भी होने लगी पर अमित द्वारा विवाह का प्रस्ताव रखने पर लड़की ने इनकार कर दिया और इस इनकार की कीमत उसे अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी.

दरअसल, 19 सितंबर की रात अमित अपनी बहन के साथ लड़की के घर पहुंचा और बातचीत के दौरान फिर से विवाह का प्रस्ताव रखा पर युवती द्वारा फिर इनकार किए जाने पर वह आगबबूला हो गया और युवती को बालकनी से नीचे फेंक दिया.

इसी तरह गत 23 सितंबर को ईस्ट दिल्ली क्रौस रिवर मौल की तीसरी मंजिल से एक 17 वर्षीय लड़की ने छलांग लगा कर खुदकुशी कर ली. इस घटना की तह में भी एक असफल हिंसक प्रेमी का बदला ही था. दरअसल, यह युवक 1 माह से लड़की को परेशान कर रहा था. लड़की के परिवार वालों ने इंदिरापुरम थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी. मगर वह लड़की का पीछा नहीं छोड़ रहा था.

उस ने लड़की का अपने साथ लिया गया फोटो व्हाट्सऐप पर डाल दिया. इस घटना से लड़की को इतनी शर्मिंदगी उठानी पड़ी कि उस ने आहत हो कर अपनी जान दे दी.

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ऐसी घटनाएं समाचारों की सुर्खियां बनती रहती हैं. हाई प्रोफाइल केसेज (1996 का प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड/नैना साहनी तंदूर कांड) हों या मध्य अथवा निम्नवर्गीय केसेज जनून और अहं के आवेश में पागल पुरुष (भले ही वह पति हो या प्रेमी) स्त्री के प्रति हिंसक हो उठता है. तब उसे अपने ही प्रेम को बेदर्दी से मौत के घाट उतारते जरा भी संकोच नहीं होता है.

अब सवाल उठता है कि प्रेम जैसे खूबसूरत और दिल के रिश्ते में बदला और नफरत जैसे नकारात्मक भावों की जगह कहां है? प्रेम तो ऐसा एहसास है. जो दिल की गहराइयों को छूता है. सच्चा प्यार करने वाला इनसान कभी अपने प्रेमी को दुखतकलीफ में नहीं देख सकता. वह तो प्रेमी के चेहरे पर मुसकान सजाने के लिए अपने प्राणों तक की बाजी लगा सकता है. फिर जान लेना तो कल्पनातीत बात है. दरअसल, इन घटनाओं के मूल में है रिजैक्शन.

प्यार में रिजैक्शन

जिंदगी में अकसर हम चीजें रिजैक्ट करते हैं. कभी कोई चीज, जो हमें पसंद न हो उसे, तो कभी नौकरी, जो रास न आ रही हो या फिर कभी कोई आइडिया जो हमारी अपेक्षाओं के अनुकूल न हो. जैसे अप्रूवल, वैसे ही रिजैक्शन. दोनों ही हमारी जिंदगी के हिस्से हैं. इस से हैल्दी कंपीटिशन और बेहतर क्वालिटी निश्चित होती है. मगर मुश्किल तब पैदा होती है जब मनुष्य एकदूसरे को रिजैक्ट करते हैं खासकर जब लड़की/ स्त्री किसी लड़के/पुरुष को रिजैक्ट करती है.

मर्दवादी मानसिकता पर चोट

ऐसा होने पर उन के अहं पर चोट लगती है. लड़के कभी यह सहने को तैयार नहीं होते कि कोई लड़की उन के प्रेम को अस्वीकार कर किसी और को गले लगा ले. वे प्रेम पर एकाधिकार चाहते हैं. दरअसल, बचपन से ही हमारे यहां घरों में लड़कों की हर इच्छा पूरी की जाती है. मनपसंद चीज न मिलने पर यदि वे तोड़फोड़ भी करते हैं, तो भी घर वाले कुछ नहीं कहते.

घर के पुरुष महिलाओं पर रोब झाड़ते हैं. भाइयों के आगे बहनों में चुप रह कर सब सह जाने की आदत डाली जाती है. नतीजतन बड़े हो कर भी बहुत से लड़के स्वयं को इस मर्दवादी मानसिकता से मुक्त नहीं कर पाते.

नफरत में बदलती चाहत

इस तरह की मर्दवादी मानसिकता वाले शख्स जब एकतरफा प्यार में किसी को जनून की हद तक चाहने लगते हैं और लड़की यदि उन की इस चाहत को गंभीरता से नहीं लेती या अस्वीकार कर देती है, तो उन के प्यार को नफरत में बदलते देर नहीं लगती.

इस संदर्भ में क्रिमिनल साइकोलौजिस्ट अनुजा कपूर कहती हैं, ‘‘एक अध्ययन में पाया गया है कि किसी के प्रति एकतरफा चाहत जब जनून का रूप ले लेती है, तो वह इनसान को बड़े से बड़ा अपराध तक करने को मजबूर कर देती है. नाकाम चाहत में कुछ व्यक्ति डिप्रैशन में आ जाते हैं, तो कुछ घटिया करतूतों पर उतर आते हैं जैसे धमकी भरे मैसेज भेजना, पीछा करना, परेशान करना आदि. नफरत के ज्वार में बह कर कुछ लड़के कई दफा लड़की के साथसाथ अपनी जिंदगी भी बरबाद कर लेते हैं.’’

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब प्रेमी/पति साइकोपैथ हो. इन का कोई भरोसा नहीं होता. अपने जनून में ये बर्बरता की हद तक जा सकते हैं.

साइकोपैथ प्रेमियों के लक्षण

साइकोलौजिस्ट डा. गौरव गुप्ता का कहना है, ‘‘साइकोपैथ जोड़तोड़ या झांसा देने में माहिर होते हैं. किसी लड़की/लड़के की शुरुआती मुलाकातों में इस बात का पता नहीं चल पाता कि  वह साइकोपैथ के साथ है. इस तरह के व्यक्ति के किसी के साथ जुड़ने पर उस के जीवन में काफी बदलाव नजर आने लगते हैं. वह अपने पहनावे को ले कर सतर्क होने लगता है. ऐसा व्यक्ति अपने पार्टनर को बोलने नहीं देता. सामने वाले की बातों को नजरअंदाज करता है. दूसरे की योजनाओं को चुटकियों में पलट कर अपनी योजना थोप देता है. अगर आप ब्रेकअप करने का प्रयास करेंगे तो वह परेशान हो उठेगा, माफी मांगेगा, लेकिन यह सब प्लानिंग के तहत होता है. उसे कभी अपने किए का पछतावा नहीं होता. वह आंखों में आंखें डाल कर झूठ बोलने में माहिर होता है. वह धीरेधीरे आप को दोस्तों से अलग करता जाएगा और केवल वही आप की जिंदगी में रहेगा ताकि वह आप पर और अधिकार जमा सके. उस का व्यवहार पलपल बदलता है. हर बार वह अपने बुरे बरताव के लिए माफी मांगेगा, लेकिन उस में सुधार नहीं होता.’’

कानून की ढीली पकड़

इस तरह की घटनाओं की एक और मुख्य वजह कानून की ढीली पकड़ भी है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत में महिलाओं के हित में अनेक कानून बने हैं. फिर भी उन के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आ रही. वजह है कानून की ढीली पकड़ और अपराधी को सजा मिलने में होने वाला विलंब.

बड़े से बड़ा अपराध कर के भी अपराधी बच निकलता है. सजा मिलती भी है तो वर्षों बाद. ऐसे में लोगों के बीच कानून का खौफ घटा है. लड़कियों के साथ खुलेआम छेड़छाड़, कहीं भी शराबसिगरेट पीना, बीच सड़क पर थूकना, गंदगी फैलाना, गालियां देना, ट्रैफिक नियमों की अवहेलना जैसे काम करने के बावजूद व्यक्ति को सजा मिलनी तो दूर उसे टोकने वाला भी कोई नहीं होता है. वह स्वयं को सिस्टम के ऊपर समझने लगता है और फिर जो मन करता है वही करने लगता है.

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न कहें मगर संभल कर

लाइफ कोच, अनामिका यदुवंशी कहती हैं, ‘‘जिस शख्स के लिए आप का दिल गवाही न दे रहा हो उसे अपने साथी के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता. अत: न कहते समय कुछ बातों का खयाल रखें ताकि सामने वाला आप से बदला लेने को उतारू न हो.’’

न कहना हो तो न करें इंतजार: किसी को भी ज्यादा समय तक मौका दे कर आप उस के मन में यह संशय पनपने का समय दे रही हैं कि कहीं न कहीं उस के पास अब भी मौका है. जितनी देर आप लटकी रहेंगी, उतनी ही उस की उम्मीदें बढ़ती रहेंगी. ऐसे में किसी को ज्यादा दिनों तक लटका कर न कहने से आप उसे न केवल ज्यादा दुख देंगी, बल्कि इस से उस का ईगो भी ज्यादा हर्ट होगा और वह अपना गुस्सा संभालने की स्थिति में नहीं रहेगा.

अत: आप की किसी लड़के में रुचि नहीं है तो शुरूआत से ही सारी चीजें साफ रखनी चाहिए.

सब से बेहतरीन तरीका है ईमानदारी से सीधे तौर पर न कहना: मैसेज से कहें न. सामने न कहने से किसी के भी अहं को चोट लग सकती है, क्योंकि हो सकता है वह उस समय भावनाओं से अभिभूत हो या फिर जब आप न कहें वह उस समय नशे में हो और आप पर गुस्सा करे, चिल्लाए. अत: इन स्थितियों से बचने के लिए अपनी अस्वीकृति मैसेज द्वारा भेज सकती हैं.

अनदेखा करें: कोई आप की प्रतिक्रिया पाने के लिए लगातार आप को मैसेज करेगा. आप के सामने गिड़गिड़ाएगा कि आप उसे क्यों छोड़ रही हैं. हो सकता है, आप को सब के सामने बेइज्जत भी करे या आप का मजाक उड़ाए. ऐसे में आप को खुद को सही ठहराने के लिए कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है. बस हर स्थिति को अनदेखा करें और धैर्य रखें.

न कह कर मत करें हां: भले ही कोई आप को कितने भी मैसेज करे या दबाव बनाए, लेकिन अपना मन या निर्णय न बदलें. उसे यह मौका कतई न दें कि वह आप की नजरों में आप को ही दोषी बना दे और इस कारण आप उस से बातचीत जारी रखें. यदि आप नहीं चाहती हैं तो दोस्ती रखने की भी जरूरत नहीं है. उसे दुख न हो, इस के लिए दूसरी कहानी बनाने की जरूरत नहीं है और न ही भविष्य के लिए उसे फिर से उम्मीद बंधाने की जरूरत है.

यदि उसे अनदेखा करना मुश्किल है, तो ब्लौक कर दें. एक बार जब कोई न कर देता है और किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं रखता तो अधिकांश लोग आगे बढ़ जाते हैं.

आप को न कहने का हक है. बस इस के बारे में खुद को स्पष्टवादी रखे, लेकिन स्थिति साफ रखें. अस्पष्टता लिए कोई गुंजाइश न छोड़ें बिना दुख पहुंचाए न कहने का सब से बेहतर तरीका यही है.

अनामिका यदुवंशी कहती हैं कि पुरुषों को नफरत से नहीं, सकारात्मक सोच से डील करना चाहिए. यदि न आप का साथी कह रहा है या दुनिया में आप को सब से ज्यादा समझने वाला अथवा वह जो आप को खुद भी बहुत प्यार करता है, पर उस की कोई मजबूरी है तब उस की न को दिल पर न ले कर उस की भावनाओं को समझें वरना उस की न को अहं पर ले कर आप खुद को नुकसान पहुंचाएंगे और भविष्य के लिए बड़ी समस्याएं खड़ी करेंगे.

न का सीधा असर दिमाग पर: दरअसल, जब हम न सुनते हैं तो हमारे दिमाग का कुछ हिस्सा तेजी से कार्य करता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब आप शारीरिक रूप से दर्द या दुख महसूस करते हैं तो उस का सीधा असर दिमाग पर होता है. इसी कारण न सुनना ज्यादा दुख पहुंचाता है.

मनोवैज्ञानिक घावों को भी भरा जा सकता है: भावनात्मक दर्द, किसी की अस्वीकृति और मानसिक पीड़ा से उत्पन्न घावों को भरा जा सकता है. इस के लिए हमें सकारात्मक सोच रखनी होगी. सकारात्मक सोच के साथ जीवन के दोनों पहलुओं हां और न को साथ ले कर चलें. निश्चय ही किसी की न आप को कभी परेशान नहीं करेगी.

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नई नवेली दुल्हन के लिए ट्राय करें ये 28 किचन टिप्स

शादी के बाद हर लड़की की एक ही चिंता होती है कि कहीं खाना बनाने में कोई ऐसी गड़बड़ न हो जाए, जिस से ससुराल वाले नाराज हो जाएं.

आप की इस टेंशन को दूर करने में ये टिप्स मददगार साबित होंगे:

1. दही पतला करना हो तो उस में पानी की जगह दूध मिलाएं.

2. कसूरीमेथी को तवे पर हलका भून कर डालें.

3. घर पर पनीर बनाएं तो बचे पानी का इस्तेमाल मठरी, भठूरे, नान का मैदा गूंधने में करें.

4. सरसों का साग बनाते समय उस में एक शलगम डालें. स्वाद दोगुना हो जाएगा.

5. कोफ्ते बनाते समय सूखा आलूबुखारा या इमली डाल कर रोल करें.

6.  अचार के मसाले को छलनी से छान लें. मसाले में स्वाद अनुसार नमक डाल कर हरीमिर्चों में भर कर खाने के साथ सर्व करें.

7. डोसा बनाने वाले तवे पर रात को ही तेल लगा कर रखें. डोसा चिपकेगा नहीं.

8. परांठे की हर परत पर घी लगा कर सूखा आटा बुरकें.

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9. खीर ज्यादा पतली हो गई हो तो थोड़ा कस्टर्ड पाउडर मिलाएं.

10. कमलककड़ी को उबालें. घी में बेसन भून कर उस में नमकमिर्च, अमचूर, हरीमिर्च डालें. कमलककड़ी के गीले टुकड़े बेसन में डाल कर चलाएं. बेसन चिपक जाएगा. परांठों के साथ सर्व करें.

11. तंदूरी रोटियां बच गइ हों तो सुबह तवे पर घी लगा कर गरम करें. परांठों का स्वाद देंगी.

12. पिसे अनारदाने में नमक मिला कर रखें. कीड़ा नहीं लगेगा.

13. राजमा, लोबिया, काले चने, छोले अगर एक कटोरी बना रही हैं, तो उस में 1 कटोरी टोमैटो प्यूरी डालें. ग्रेवी अच्छी बनेगी.

14. सब्जी में कच्चा पनीर डाल रही हैं तो उसे हलदी मिले पानी में 15 मिनट भिगो कर डालें.

15. राजमा उबाल कर पानी छान कर अलग करें. मसाला भूनें, राजमा डाल कर 5 मिनट तक चलाएं, मसाला राजमा में रच जाएगा. बचा पानी डाल कर पकाएं.

16. पुलाव के लिए नमक डाल कर चावल उबालें. सब्जियां फ्राई करें. मिक्स कर लें. पुलाव खिलाखिला बनेगा.

17. आटा गूंधने का समय न हो तो आटे को भिगो कर रख दें. 15 मिनट बाद घी का हाथ लगा कर मसलें. 2 मिनट में आटा तैयार हो जाएगा.

18. आलू का बोंडा, गोभी, पनीर के पकौड़े बनाते समय बेसन के घोल में चुटकी भर मीठा सोडा डालें. पकौड़े क्रिस्पी बनेंगे.

19. आलू उबाल कर फ्रिज में रखें. मनपसंद आकार में काट कर सुनहरा तल लें. मीठीखट्टी चटनी के साथ परोसें.

20. पोहा पानी में भिगो दें. दूध उबालें उस में पोहा, चीनी और ड्राईफ्रूट्स डालें. झटपट खीर तैयार है.

21. मीठी चटनी में कृत्रिम रंग न डालें. थोड़ी देगीमिर्च डाल दें.

22. गोंद का पाउडर बना लें. जब आटा भुन जाए तो उस में गोंद डाल कर मिक्स करें. वह सूजी के दानों की तरह फूल जाएगी. बूरा मिला कर लड्डू बना लें.

23. गुड़ की डिश बनाने से पहले उसे कूट कर थोड़े पानी में मिला कर गरम करें. मिट्टी, कचरा नीचे बैठ जाएगा. छान कर इस्तेमाल करें.

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24. कुल्फी बनाते समय चुटकी भर मीठा सोडा दूध में डालें. मलाई नहीं आएगी.

25. कपड़ों पर घी या तेल गिर जाए तो झट से आटा, मैदा, टैलकम पाउडर जो मिले उस पर बुरकें. कुछ देर बाद ब्रश से साफ कर साबुन से धो लें.

26. गैस स्टोव पर घी की परत जम जाए तो उस पर मीठा सोडा बुरकें और रगड़ कर साफ कर लें.

27. रसोई का काम निबटाने के बाद गीले हाथों पर आटा या बेसन मलें. सारा मैल उतर जाएगा.

28. मीठी चटनी बनाएं तो उस में चुटकी भर नमक डालें. चटपटी चटनी बनाएं तो 1/2 चम्मच चीनी डालें.

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