समय पर करवाएं Uterus के कैंसर का इलाज

गर्भाशय (Uterus ) का Cancer आज देश में तेजी से महिलाओं में फैलती जा रही है. इसकी वजह पहले दिखाई नहीं पड़ती और महिलाएं खुद के बारें में इतना नहीं सोचती. भारत में गर्भाशय के कैंसर की घटना 3.8 से बढ़कर एक लाख में 5 महिलाओं को होता है. यह डेटा गर्भाशय के कैंसर को महिलाओं में 5वां सबसे आम कैंसर बताता है. इस बारें में चेन्नई की अपोलो प्रोटॉन कैंसर सेंटर की स्त्री रोग ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कुमार गुब्बाला कहती है कि भारत में यह डेटा गर्भाशय के कैंसर की महिलाओं में 5वां सबसे आम कैंसर की श्रेणी में आता है. अधिकांश गर्भाशय के कैंसर के कारणोंका पता लगाना मुश्किल होता है, लेकिन कुछ ऐसे कारक है, जो इसे विकसित होने के जोखिम को बढ़ाते है.यह अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब और पेरिटोनियम से उत्पन्न होने वाले कैंसर की एक बड़ी संख्या है. यह आमतौर पर 75 प्रतिशत रोगियों में विकसित अवस्था में दिखाई देता है, क्योंकि तब ये अन्य अंगो में भी फ़ैल गया होता है.

गर्भाशय के कैंसर बढ़ने की वजह

  • जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, गर्भाशय के कैंसर होने का खतरा बढ़ता जाता है. गर्भाशय के कैंसर के ज्यादातर मामले उन महिलाओं में होते है, जिनका मासिक धर्म आना बंद हो चुका होता है.
  • आनुवंशिक दोषपूर्ण जीनगर्भाशय के कैंसर के कारण होते है, जो एक महिला के जीवन के दौरान विकसित होते हैऔर विरासत में नहीं मिलते है, लेकिन 100 में से 5 से 15 गर्भाशय के कैंसर 5 से 15 प्रतिशतआनुवंशिक दोषपूर्ण जीन के कारण होते है. विरासत में मिले दोषपूर्ण जीन जो गर्भाशय के कैंसर के खतरे को बढ़ाते है, उनमें BRCA1 और BRCA2 शामिल है, ये जीन ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को भी बढ़ाते है.
  • गर्भनिरोधक गोली लेना, बच्चे पैदा करना और स्तनपान कराना.

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प्रारंभिक लक्षण

अक्सर गर्भाशय के कैंसर के लक्षण अन्य बीमारियों की तरह दिखता है, लेकिन सूक्ष्म परिक्षण के द्वारा इसे पता लगाया जा सकता है.

सबसे आम लक्षण सूजन, पेट में दर्द, मासिक धर्म में बदलाव, दर्दनाक संभोग, खाने में परेशानी या जल्दी से पेट भरा हुआ महसूस करना, थकान आदि है, जिसे समय रहते किसी  स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह ले और इलाज करवाएं.

गर्भाशय के कैंसर के प्रकार

एपिथेलियल गर्भाशय कैंसर सबसे आम प्रकार का कैंसर है. दुर्लभ प्रकारों में जर्म सेल ट्यूमर,स्ट्रोमल ट्यूमर और सार्कोमा शामिल है. प्राथमिक पेरिटोनियल कैंसर गर्भाशय के कैंसर की तरह होता है और उसी तरह से इलाज किया जाता है.

जांच

अल्ट्रा साउंड स्कैन, सीए 125 ब्लड टेस्ट, एमआरआई, सीटी या पैट सीटी स्कैन ये 4 प्रकार के टेस्ट से इस कैंसर का पता लगाया जा सकता है. दरअसल इसके ग्रोथ चार चरण में होता है,पहली चरण में अगर कैंसर अंडाशय तक सीमित है, चरण 2में पेट के निचले हिस्से में कैंसर होना,3 और 4होने पर कैंसर का पेट के अन्य अंगों में फैल जाना है.

गर्भाशय के कैंसर का इलाज

इसके आगे डॉ. कुमार गुब्बाला कहती है कि गर्भाशय के कैंसर के निदान और उपचार के लिए एक अनुशासनिक टीम की आवश्यकता होती है, जो मुख्य डॉक्टर के साथ मीटिंग कर उस टीम का साथ देती है. इसके अलावा उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कहाँ, कितना बड़ा, शरीर में कहीं दूसरी जगह पर फैल गया है या नहीं और रोगी की सामान्य स्वास्थ्य पर उसका प्रभाव क्या है.

अगर गर्भाशय द्रव्यमान (mass) को हटाने और निदान के लिए, गर्भाशय के कैंसर के संदेह के लिए जो पेट के अन्य भागों में फैल चुका हो,जिसमें ओमेंटम, पेरिटोनियम, लिम्फ ग्रंथियों को हटाना शामिल होता है, तब ऑपरेशन की आवश्यकता होती है, जहाँ आंत के करीब या उसके पास काम करना पड़ सकता है.

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यदि कोई व्यापक बीमारी है या ऑपरेशन के बाद सर्जरी से पहले कभी-कभी कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है. पहले कीमोथेरेपी का उपयोग करने की वजह कैंसर की मात्रा को कम करना है और ऑपरेशन के बाद कैंसर सेल की थोड़ी भी मात्रा शरीर में न रहे न रहे को न छोड़ने के इरादे से कम व्यापक ऑपरेशन करना संभव बनाना है.सही और समय पर इलाज से लगभग 90 प्रतिशतरोगी ठीक हो सकते है.

गर्भाशय के कैंसर का पता चलने के बाद लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं कम से कम 5 साल तक बीमारी से जीवित रहती है. प्रारंभिक स्टेज में पता चलने पर20से 40 प्रतिशत महिलायें, जो एडवांस स्टेज में इलाज होने पर जीवित रहती है, जबकि थोड़ी देर में कैंसर का पता चलने पर एडवांस की तुलना में 90 प्रतिशत महिलाएं कम से कम 5 साल तक जीवित रहती है.

घर पर मिनटों में Anik Ghee के साथ तैयार करें नारियल की बर्फी

चाहे शादी ब्याह हो या पूजा पाठ,पार्टी या कोई अन्य फंक्शन मिठाइयों के बिना पूरा हो ही नहीं सकता. मिठाई किसी भी अवसरों की जान होती है. और अगर इन अवसरों पर अच्छी क्वालिटी की मिठाई न मिले तो समझ लीजिए कि अवसर का का मजा किरकिरा हो गया.

भारतीय खाने की तरह भारतीय मिठाइयों में भी बहुत विविधता है. बंगाली मिठाइयों में छेने की प्रमुखता है तो पंजाबी मिठाइयों में खोये की. उत्तर भारत की मिठाइयों में दूध की प्रमुखता है तो दक्षिण भारत की मिठाइयों में अन्न और नारियल की. बेशक त्योहारों व दूसरे अनुष्ठानों में मिठाई का बहुत महत्व होता है और हममे से अधिकतर लोग बाहर की मिलावटी मिठाइयों को उसके नकारात्मक परिणाम को जाने बिना खरीदकर घर लाते हैं, और बच्चे व परिवार के सभी लोग उसे स्वाद से खाते भी हैं.

पर क्या आप जानते है त्योहार के समय मिलावट चरम पर होती है, क्योंकि दूध, मावे की मांग काफी होती है और इससे व्यापारियों को मुनाफा होता है. इसलिए वो अक्सर मिठाईयों को मिलावटी मावे के साथ-साथ सस्ते और हानिकारक रंगों का इस्तेमाल कर, बाजार में सजाकर और आकर्षक बनाकर बेचते है .जिसका परिणाम आपके और आपके परिवार के लिए बेहद घातक साबित हो सकता हैं.

तो क्यों न हम इन मिठाइयों को घर पर बनाने की कोशिश करे.हो सकता है वो बाहर की मिठाइयों की तुलना में देखने में ज्यादा आकर्षक न लगे लेकिन उनसे हमे और हमारे अपनों को कोई नुक्सान नहीं होगा.

तो चलिए आज हम बनायेंगे बिना मावे के नारियल की बर्फी वो भी बहुत आसान तरीके से. ये बर्फी जितनी आसानी से बन जाते है उतने ही ज्यादा ये स्वादिष्ट भी लगते है और इनकी सबसे बड़ी खासियत ये है की ये जल्दी खराब भी नहीं होते . तो चलिए जानते है इसके लिए हमें क्या-क्या चाहिए-

कितने बर्फी बनेंगे-15 से 20 मध्यम आकार के
कितना समय-20 से 25 मिनट
मील टाइप-वेज

हमें चाहिए-

सूखे नारियल का बुरादा- 300 gm
चीनी -100 gm
फुल क्रीम पका हुआ दूध -200 ml
घी -1 छोटा चम्मच
इलाइची पाउडर – ½ छोटी चम्मच (ऑप्शनल)
मिल्क पाउडर-1 टेबल स्पून (ऑप्शनल)

बादाम- 100 ग्राम

बनाने का तरीका-

1-सबसे पहले एक पैन में Anik Ghee घी गर्म करे.इसके बाद इसमें नारियल का बुरादा या घिसा हुआ नारियल डाल कर उसे 4 से 5 मिनट माध्यम आंच पर भून ले.

2-अब इसमें दूध डाल कर इसे अच्छे से मिलाये .जब दूध पूरा अच्छे से मिलकर सूख जाये तब उसमे चीनी डाल दे और उसको करीब 7 से 8 मिनट गल जाने तक मिलाये.

3-जब चीनी गल जाये तब उसमे मिल्क पाउडर दाल कर फिर से मिलाये.अब आप देखेंगे की मिश्रण सूख सा गया है .तब आप चाहे तो इसमें पिसी हुई इलाइची डाल सकते है .

4-अब गैस को बंद करके मिश्रण को एक प्लेट में निकाल ले और हल्का ठंडा होते ही इसके गोल -गोल लड्डू बना ले.ये बहुत ही आसानी से बन जायेंगे . (बस एक चीज़ याद रखियेगा की मिश्रण को ज्यादा ठंडा नहीं होने देना है.)

5-अब एक दूसरी प्लेट में नारियल का बुरादा निकाल कर बने हुए लड्डू को उसमे हल्का सा घुमा ले.इससे नारियल का बुरादा लड्डू में अच्छे से चिपक जायेगा और ये देखने में भी अच्छे लगेंगे. इसी तरह से सारे लड्डू बना ले.

6- तैयार है instant नारियल की बर्फी . इन्हें फ्रिज में स्टोर करे.आप इसे आराम से कुछ दिन खा सकते है.

Udaariyaan: जैस्मिन के सामने आएगा कैंडी का सच, क्या तेजो को कर देगी घरवालों से दूर?

कलर्स का टीवी सीरियल ‘उड़ारियां’ (Udaariyaan) इन दिनों टीआरपी चार्ट्स में धमाल मचा रहा है. दो बहनों की कहानी दर्शकों का दिल जीत रही है, जिसके चलते मेकर्स सीरियल में और भी कई नए ट्विस्ट लाने वाली है, जिसके चलते सीरियल की कहानी और भी दिलचस्प हो जाएगी. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

तेजो को पता चला सच

 

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अब तक आपने देखा कि खुद की बहन तेजो से नफरत करने वाली जैस्मीन एग्जाम पेपर ऑनलाइन लीक कर देती है. लेकिन फतेह की मदद से तेजो इस मुसीबत से निकल जाती है. हालांकि जैस्मिन की करतूत का तेजो को पता लग जाता है और वह उसे चांटा मारेगी. साथ ही वार्निंग देती नजर आती है, जिसके चलते जैस्मिन गुस्से में नजर आती है.

 

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कैंडी पर होगा जैस्मीन को शक

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि तेजो के कारण जैस्मिन गुस्से में जा रही होगी. जहां पर कैंडी को भूख लगी होगी और वो जैस्मीन के हाथ में चॉकलेट देखकर ललचाने लगेगी. लेकिन उसे चौकलेट नहीं देगी. लेकिन कैंडी जैस्मिन के हाथ से छीन कर भाग जाएगा और घर की एक फैमिली फोटो को गिरा देगा. इसी बीच कैंडी वह फोटो देखकर जैस्मीन को बताएगा कि वह फोटो उसके घर में भी है. लेकिन उसी वक्त तेजो वहां आ जाएगी. हालांकि जैस्मिन के मन में शक आ जाएगा.

जैस्मिन को पता चलेगा सच

 

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चालाक जैस्मिन, तेजो से कैंडी को लेकर सवाल पूछती नजर आएगी और खुद ही सच जानने की ठानेगी. इसी के चलते अपकमिंग एपिसोड में जैस्मिन को पता चलेगा कि कैंडी, सिमरन का बेटा है, जिससे बाउजी नफरत करते हैं क्योंकि सिमरन घर से भाग गई थी. वहीं जैस्मिन इसी बात का फायदा उठाकर तेजो को घर से निकालने का प्लान और पूरी फैमिली को कैंडी का सच बताने की कोशिश करेगी.

 

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वनराज की जलन देख भड़केगी काव्या तो बा सुनाएगी अनुपमा को खरी खोटी

स्टार प्लस के सीरियल अनुपमा में इन दिनों फैमिली ड्रामा देखने को मिल रहा है. जहां वनराज और अनुज आमने सामने आ गए हैं तो वहीं अनुपमा के सपनों की उड़ान पर परिवार का दबाव आ खड़ा हुआ है, जिसके चलते अब सीरियल की कहानी में कई नए मोड़ आने वाले हैं.

अनुज ने दी अनुपमा को हिम्मत

 

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अब तक आपने देखा कि अनुपमा की जिंदगी के सबसे बड़े दिन पर वनराज, अनुज की बेइज्जती करता है. साथ ही वह अनुपमा और अनुज के रिश्ते को लेकर सवाल भी उठाता है, जिससे अनुपमा टूट जाती है वहीं अनुज उसे संभालता है. इसके साथ ही वह अनुपमा को समझाता है कि अब वह घुट-घुट कर जीना बंद कर दे और शाह हाउस से निकलकर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करे.

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बा करेगी वनराज को सपोर्ट

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज के कारण अनुपमा हिम्मत करके वनराज के खिलाफ खड़ी नजर आएगी दरअसल, बापूजी वनराज को अनुपमा से माफी मांगने के लिए कहते हैं. लेकिन बा अपने बेटे की साइड लेते हुए उससे माफी नहीं मांगने की बजाय अनुपमा को वनराज से माफी मांगने के लिए कहेगी. साथ ही उसे अनुज के साथ काम भी छोड़ने के लिए कहेगी. इसी के साथ अनुपमा को धमकी देते हुए बा कहेगी कि अगर उसने अनुज के साथ अपना काम नहीं छोड़ा तो वह उसे धक्के मार कर शाह हाउस से बाहर निकाल देगी.

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वनराज को सबक सिखाएगी अनुपमा

दूसरी तरफ अनुपमा हिम्मत करके वनराज से कहेगी कि अब वह उससे वो नहीं डरती, जिसे सुनते ही वनराज उसे थप्पड़ मारने की कोशिश करेगा. लेकिन अनुपमा उसे धक्का मार देगी, जिसके कारण वह नीचे गिर जाएगा. वहीं अनुपमा का ये बदला रुप देखकर बा और काव्या समेत पूरा परिवार हैरान रह जाएगा.

काव्या को आएगा गुस्सा

 

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अनुज से जलन के कारण वनराज का बदला रुप देखकर काव्या अपना आपा खो बैठेगी. वहीं पूरे परिवार के सामने खरी खोटी सुनाएगी, जिसे सुनकर बा एक बार फिर अनुपमा को कहेगी कि मर्द और औरत कभी दोस्त नहीं हो सकते.

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एनिवर्सरी गिफ्ट: कैसा था दिनेश और सुधा का परिवार

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Drugs से कम नहीं दूध की लत

एक दशक पहले, जब सरकार ने शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के लिए क्रमश: हरे और लाल रंग के डौट्स लगाने का प्रावधान किया, तब दूध उद्योग और सैकड़ों पढ़े-लिखे लोगों ने जोर डाला कि दूध एक शाकाहारी उत्पाद है (हालांकि इस का स्रोत पशु है), इसलिए इस पर हरे रंग का डौट लगाया जाना चाहिए. हमें झुकना पड़ा.

वहीं ऐसे लोग जो विशुद्ध रूप से शाकाहारी हैं, अकसर वे भी मानते हैं कि चीज उन की कमजोरी है. कहते हैं चीज से किसी गंदे मोजे सी बदबू आती है, ऐसा क्यों? दरअसल, फैट सोडियम और कोलैस्ट्रौल होने के कारण चीज एक हाईकैलोरी दुग्ध उत्पाद है. एक आम चीज में 70 फीसदी फैट होता है और जिस तरह का फैट होता है, वह मुख्यतया सैचुरेटेड यानी खराब किस्म का फैट होता है. इस से दिल की बीमारी और डायबिटीज का खतरा होता है. पाश्चात्य डाइट में चीज सैचुरेटेड फैट का सब से बड़ा स्रोत है. अमेरिका में एकतिहाई वयस्क और 12.5 मिलियन बच्चे व किशोर मोटापे के शिकार हैं.

हमारे यहां बड़े पैमाने में लोग शाकाहारी हैं और हमारी रुचि घर के सेहतमंद खाने में है. इसीलिए हमें इन से काफी दूर होना चाहिए था. लेकिन हम भी मोटापा ग्रस्त देशों की सूची में शामिल हो चुके हैं. दिल संबंधी बीमारियों, डायबिटीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण मोटापा ही है.

दूध में नशा

औसतन 12 इंच के चीज पिज्जा के एकचौथाई हिस्से में लगभग 6 ग्राम सैचुरेटेड फैट और 27 मिलीग्राम कोलैस्ट्रौल के साथ 13 ग्राम फैट होता है. एक आउंस चीज में 6 ग्राम सैचुरेटेड फैट समेत 9 ग्राम फैट होता है. आंशिक रूप से स्किम्ड दूध में फैट की मात्रा कम होती है.

लेकिन हम दूध पीना और चीज/पनीर खाना जारी रखेंगे. बहुत सालों के बाद मैं ने जाना कि लोग आखिर दूध क्यों पीते हैं या चीज व पनीर क्यों खाते हैं. इसलिए नहीं कि यह उन के लिए जरूरी है या इसलिए कि कृष्ण पीते थे. लोग यह इसलिए लेते हैं, क्योंकि इस में नशे का पुट हुआ करता है.

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पनीर के प्रति लोगों की कमजोरी होती है, इस का वैज्ञानिक कारण है. दूध हाजमे में सहायक होता है, क्योंकि इस में हलका सा मादक तत्त्व होता है, जो कैसोमौर्फिन कहलाता है. 1981 में एली हाजुम और उन के सहयोगियों ने वैलकम रिसर्च लैबोरेटरी में पाया कि दूध में रासायनिक मौर्फिन होता है, जो एक तरह का मादक पदार्थ है. कैसिन सभी स्तनधारियों के दूध में पाया जाने वाला प्रमुख प्रोटीन है. कैसोमौर्फिन की एक खासीयत यह है कि इस का मादक या नशीला असर होता है. दूसरे शब्दों में यह दुनिया सब से पुराने किस्म के ज्ञात ड्रग्स में से एक है. इस किस्म के नशीले पदार्थों में अच्छा महसूस करने और में एक तरह की खुशी के एहसास और शांतचित बनाने की क्षमता के साथ नींद से भी बोझिल हो जाने का एहसास जगाने की क्षमता होती है. इस की लत भी लग जाती है. अगर एकाएक इस का सेवन बंद कर दिया तो इस से दूसरों पर निर्भरता बढ़ जाती है और ‘विड्रौल सिंड्रोम’ का सामना करना पड़ता है.

चीज, पनीर, आइसक्रीम, मिल्क चौकलेट जैसे गाढ़े दुग्ध उत्पादों में सघन मात्रा में नशीला पदार्थ होता है. (डेयरी फ्री वीगन चीज में भी कभीकभी कैसोमौर्फिन मिलाया जाता है) लगभग 10 लिटर दूध से एक किलोग्राम चीज मिलता है. जब दूध चीज में तब्दील होता है, तो इस में निहित पानी अलग कर लिया जाता है और जो बचता है वह सघन फैट यानी वसा होता है. इसी कारण चीज जैसे डेयरी प्रोडक्ट ऊंचे दर्जे के नशीले पदार्थ माने जाते हैं. जाहिर है इस में जितनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ कैसिन होता है, उतना ही वह मन में अच्छा अहसास जगाता है. इसीलिए रात में सोने से पहले बहुत से लोग दूध पीते हैं.

जरा सोचिए, सुहागरात में नए-नवेले जोड़े के लिए दूध का गिलास क्यों रखा जाता है. अब सवाल है कि स्तनधारियों के दूध में आखिर नशीलापन क्यों होता है? इस बारे में फिजिशियन कमेटी फौर रिसपौंसिबल मैडिसिन के संस्थापक और अध्यक्ष डा. नील बर्नाड कहते हैं, ‘‘हो सकता है कि यह मां-बच्चे के बीच एक अनोखा संबंध स्थापित करने का एक उम्दा उपाय हो. मानसिक जुड़ाव हमेशा शारीरिक मजबूती प्रदान करता है. पसंद हो या न हो, मां का दूध नवजात के दिमाग में नशे की तरह काम करता है, जो मांबच्चे के बीच एक मजबूत संबंध स्थापित करता है. इसी कारण मां अपने बच्चे का पालनपोषण जीजान से करती है और नवजात बच्चे को मां की देखभाल की जरूरत भी होती है. हेरोइन या कोकीन की ही तरह कैसोमौर्फिन बहुत ही धीमी गति से आंतों में पहुंचता है और अतिसार को रोकने का काम करता है. दर्द निवारक दवाओं की तरह ही शायद चीज में निहित नशीला तत्त्व भी वयस्कों में कब्ज पैदा करता है.’’

क्या कहती है रिसर्च

बहुत सारे अध्ययनों और जनस्वास्थ्य को देखते हुए 2009 में द यूरोपियन फूड सैफ्टी एजेंसी ने वैज्ञानिक साहित्य की समीक्षा यह देखने के लिए की कि लत के लिए कैसोमौर्फिन आखिर किस हद तक जिम्मेदार होता है? साथ में यह भी कि कैसोमौर्फिन आंतों की दीवार को पार कर रक्तनालिकाओं से होते हुए दिमाग तक भी पहुंचता है या नहीं? क्या औटिज्म का कैसोमौर्फिन से कुछ लेनादेना है? अभी तक वे इन सवालों से जूझ रहे हैं, क्योंकि मानवदेह के लिए यह अच्छा है या नहीं, इस नतीजे तक वे अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं.

बहरहाल, अभी तक हम यह जान गए हैं कि नशीले पदार्थ का और इस की मात्रा का हरेक इनसान पर अलगअलग असर होता है. साथ में सामान्य तौर पर यह स्वीकार भी किया जा चुका है कि किसी भी नशीले पदार्थ को हर रोज लेना हमारी सेहत के लिए अच्छा नहीं है, भले ही वह बहुत थोड़ी मात्रा में लिया जाए. फ्लोरिडा के वैज्ञानिक डा. रौबर्ट कैड ने ध्यान भटकाने वाले विकार के संभावित कारण के रूप में कैसोमौर्फिन की पहचान की है. डा. कैड ने सिजोफ्रेनिया और औटिज्म के मरीजों के रक्त और पेशाब में उच्च सघनता वाला बेटाकैसोमौर्फिन 7 नामक तत्त्व पाया है.

नार्वे के डा. कार्ल रिचेट द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि औटिस्टिक व्यवहार, सीलिएक बीमारी, मानसिक असंतुलन जैसे विकारों में दुग्ध उत्पाद का बहुत बड़ा हाथ होता है. अमेरिका के इलिनोइस के स्टेट विश्वविद्यालय के एक शोध पत्र के अनुसार, ‘‘कैसोमौर्फिन में ओपिओइड या नशाग्रस्त करने की क्षमता हाती है. ओपिओइड शब्द का इस्तेमाल मौर्फिन या अफीम जैसे नशीले पदार्थ के असर के लिए किया जाता है, जिस के असर से नशा होता है. यह सहनशक्ति की क्षमता को बढ़ा देता है, गहरी नींद सुला देता है, लेकिन अवसाद भी पैदा करता है.’’

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नवजात पर असर

हाल ही में जर्नल औफ पैडियाटिक गैस्ट्रोइंट्रोलौजी ऐंड न्यूट्रिशन में ‘काउज मिल्कइंड्यूज्ड इंफैट एपनिया विद इंक्रिज्ड सेरम कंटैंट औफ बोवाइन बेटाकैसोमौर्फिन 5’ नाम से प्रकाशित एक केस स्टडी में कहा गया है कि इंफैंट एपनिया उस स्थिति को कहते हैं जब कोई नवजात सांस लेना बंद कर देता है. शोधकर्ता ने रिपोर्ट में कहा है कि एक स्तनपान करने वाले नवजात में बारबार एपनिया का दौरा पड़ने के मामले में पाया गया कि मां हमेशा गाय का ताजा दूध पीने के बाद नवजात को स्तनपान कराती थी. प्रयोगशाला में हुई जांच में बच्चे के खून में बहुत अधिक मात्रा में कैसोमौर्फिन पाया गया. इस के बाद शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि इस ओपिओइड स्थिति का कारण स्नायुतंत्र में श्वसन केंद्र में दबाव हो सकता है. यह स्थिति मिल्क ओपिओइड कहलाती है.

शोधपत्र आगे यह भी कहता है कि इस हालिया रिपोर्ट का मकसद शोधकर्ताओं का ध्यान इस ओर खींचना है कि संभवतया गाय के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन के कारण नवजात शिशुओं में दैहिक प्रक्रिया के तौर पर एपनिया के लक्षण उभरते हैं. हम मानते हैं कि इस तरह की भावशून्य स्थिति कभीकभार ही देखने को मिलती है. हालांकि सही माने में नवजात शिशु के जीवन के लिए यह खतरा भी बन सकता है. जबकि एक बहुत ही सहज परहेजी उपाय डेयरीफ्री आहार, जोकि महंगा भी नहीं है, से इस स्थिति से बचा भी जा सकता है. हर 10 में से एक नवजात शिशु एपनिया का शिकार होता है और उसे बचाया नहीं जा सकता है. और वह सडन इंफैंट डैथ सिंड्रोम या (संक्षेप में एसआईडीएस) या नवजात शिशु की आकस्मिक मौत का मामला बन कर रह जाता है.

कैलिफोर्निया बेवर्ली हिल्स के इम्युनोसाइंस लैब के सीईओ और इम्युनोलौजिस्ट शोधकर्त्ता अरिस्टो वोजडानी का कहना है कि ग्लूटेन और डेयरी प्रोडक्ट बहुत सारे लोगों में किसी ड्रग की तरह काम करते हैं. जिस तरह हेरोइन या दर्द निवारक दवा की लत लग जाती है, उसी तरह ग्लूटेन या कैसिन से दूर जाने पर इन का तुरंत असर निर्लिप्तता के लक्षण विड्रौल सिमटम्स के रूप में सामने आता है. इस निर्लिप्तता में गुस्सा और अवसाद भी शामिल होता है.

वैसे कैसिन जब शरीर के अंदर पेट में जा कर रासायनिक क्रिया करता है तो यह हिस्टामाइन रिलीज करता है. हिस्टामाइन वह पदार्थ है, जो ऐलर्जी समेत रक्तवाहिकाओं के फैलने और इन की दीवारों को झीना यानी पतला करने में बड़ी भूमिका अदा करता है. हिस्टामाइन का स्राव तब होता है, जब ऐलर्जी पैदा करने वाले किसी बाहरी तत्त्व (मसलन सर्दीजुकाम की दवा, जिस में ऐंटीहिस्टामाइन होता है) की मौजूदगी होती है. इसी कारण दुनिया की 70% आबादी को डेयरी प्रोडक्ट से ऐलर्जी है.

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नवजात के लालनपालन का सुखद तरीका प्रकृति ने तय किया है. यही व्यवस्था दूध छुड़ाने में आड़े आती है. यही कारण है कि बहुत सारे वयस्क दूध की लत से अपना पीछा कभी नहीं छुड़ा पाते. क्या आप को भी इस की लत है?

Festive Season में घर सजाएं ऐसे

त्योहारों के शुरू होते ही लोगों में उत्साह भर जाता है. वे अपने घरों की सजावट को एक नया पारंपरिक और आधुनिक रूप देना चाहते हैं ताकि अपने मेहमानों के साथ इन्हें दोगुने उत्साह से मना सकें.

अपने घर की सजावट को नया रूप देने के लिए कई चीजें हैं. तरह तरह के सजावट के सामान सहित और कई तरह से घर की सजावट कर सकते हैं. अपने घर को निखार सकते हैं और अपने प्रियजनों की प्रशंसा पा सकते हैं.

प्रकाश

घर को आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न लाइट्स का प्रमुख स्थान है. दीवाली, क्रिसमस, गुरु नानक जयंती आदि पर मोमबत्तियों के प्रकाश का अपना महत्त्व है. चमकीले रंगों की शानदार मोमबत्तियों का विभिन्न आकारों में उपलब्ध आकर्षक मोमबत्ती स्टैंड, टी लाइट स्टैंड, ग्लास वोटिव के संग्रह के इस्तेमाल से आप अपने त्योहारों को उज्जवल कर सकते हैं. भारतीय घरों में अगर तांबे के दीपक का प्रयोग न हो, तो त्योहार कुछ अधूरा सा लगता है. ऐसे में तांबे के दीपक का अपना अलग महत्त्व है. घर के दरवाजों पर लालटेन के आकार के वोटिव या लौन में मोमबत्ती टी लाइट होल्टर्स के जरीए घर को शानदार रूप दे सकते हैं. सुगंधित मोमबत्तियों का इस्तेमाल आप को सम्मोहित कर सकता है. शानदार लैंप शेड्स के द्वारा अपने इंटीरियर को नया लुक दे सकते हैं. कोने में रखा एक लंबा लैंप शेड आप के कमरे को रोशनी से भर कर बैडरूम की सुंदरता में चार चांद लगा सकता है.

सैंटर पीसेज

सैंटर पीसेज के बिना देशी डैकोर अधूरा है. इन का उपयोग करते हुए अपने घर को पारंपरिक रूप दे सकते हैं. आजकल विभिन्न रूपों में उपलब्ध पारंपरिक या आधुनिक शैली की मूर्तियां सब से अधिक पसंद की जाती हैं. आप इन्हें पारंपरिक प्राकृतिक रंगों में उपलब्ध पुष्पों जैसे लाल, संतरी आदि का प्रयोग कर जीवंत कर सकते हैं.

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सजावटी वास या फूलदान

फूलों का भारतीय संस्कृति में खासा महत्त्व है. घर आए मेहमान का गर्मजोशी से स्वागत करने, घर को सुगंधित और सुंदर दिखाने के लिए फूलों का उपयोग करते हैं. सुंदर लिली, ट्यूलिप और आर्किड के फूल घर को सुगंधित रखते हैं. आप इन्हें बाजार में उपलब्ध सुंदर फूलदानों में रख सकते हैं. फूलदान निश्चित रूप से आप के घर के सौंदर्य में चार चांद लगा देते हैं.

रग्ज और कालीन

आप अपने फर्श को रग्ज और कालीनों का उपयोग कर सजा सकते हैं. अपने घर के बाहरी हिस्सों जैसे आंगन और बरामदों में हाथों से बुने सुंदर कालीनों और रग्ज का उपयोग कर के महमानों पर छाप छोड़ सकते हैं.

चादरें/कुशन कवर/रुफुस

त्योहारों में बिस्तर पर वाइब्रैंट रंगीन चादरों के खूबसूरत संग्रह से आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं. कमरों में रखे शानदार डिजाइन वाले कुशन कवर्स भी सब का ध्यान आकर्षित करते हैं. बगीचे में सुंदर रुफुस का इस्तेमाल भी आप के बगीचे को और भी सुंदर बना सकता है.

ऐक्सैंट फर्नीचर

ऐक्सैंट फर्नीचर अपने अनोखे डिजाइन से सब का ध्यान आकर्षित करता है. आजकल बाजार में ऐक्सैंट कुरसियों, वुडन चैस्ट, साइड टेबल्स से ले कर सुंदर काउचेज तक की भरमार है. इन त्योहारों में ऐसे फर्नीचर का इस्तेमाल हम घर की शोभा बढ़ाने के साथसाथ आप की सूझबूझ का परिचय भी देता है.

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डैकोरेटिव आईने

डैकोरेटिव आईनों का इस्तेमाल घर में अतिरिक्त जगह का भ्रम बनाता है और प्रवेश के चित्र को प्रतिबिंबित करता है, जो घर में गुडलुक और चार्म का प्रवेश भी करता है. इन छोटी कलात्मक चीजों से आप अपने घर की सुंदरता बढ़ा सकते हैं.

दस्तकारी आईनों का इस्तेमाल घर को खास सुंदरता प्रदान करता है. आप बाजार में उपलब्ध आईनों जैसे बाथरूम दर्पण, विंटेज दर्पण या सजावटी दीवार दर्पण में से अपने लिए सही विकल्प चुन सकते हैं.

– नितीश चंद्रा, मैडहोम डौट कौम

Festive Season दिखें कांफिडेंट एंड स्टाइलिश

त्यौहार हमारे सांस्कृतिक महत्व को प्रकट करते हैं और लोगों के मन में परंपराओं को जीवित रखने के लिए प्रेरित करते है. या यूँ कहे की ये हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गए है. यह एक ऐसा समय है जब हर कोई परफेक्ट और स्टाइलिश दिखना चाहता है.

मैं निश्चित रूप से ये महसूस कर सकती हूं क्योंकि यह वह सार्वभौमिक विचार है जो किसी भी त्यौहार या अवसर के पास होने पर हर लड़की के दिमाग में आता है और सभी त्यौहारों में जो सबसे कॉमन सोच है वह है ऑउटफिट ,ज्वेलरी और परफेक्ट हेयर स्टाइल चुनने की .

पर सच कहूं तो त्योहारों के लिए परफेक्ट ऑउटफिट चुनना कोई रॉकेट साइंस नहीं है. बस जरूरत है तो अपने पसंद -नापसंद के साथ-साथ अपने कम्फर्ट को ध्यान में रखने की.

वैसे ये तो हम सभी जानते है की भारतीय परिधान निस्संदेह पूरी दुनिया में सबसे बहुमुखी पोशाक है. यहाँ के पारंपरिक परिधान न केवल महिलाओं , बल्कि पुरुषों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं. पुरुषों की तुलना में निस्संदेह महिलाओं के पास पारंपरिक परिधानों की अधिक विविधता और विकल्प हैं. और विकल्पों की अधिकता के कारन अक्सर महिलायें असमंजस में रहती हैं.

इसलिए आपके इस असमंजस को दूर करने के लिए यहाँ हम फैशन की दुनिया के कुछ डिफरेंट आउटफिट्स के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आप त्यौहारी सीज़न के लिए चुन सकती हैं-

1- फ्यूज़न साड़ी-

न केवल भारत में बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फ्यूजन पहनने का चलन अब जोरो पर है. फैशन के बदलते ट्रेंड के साथ-साथ साड़ियों के स्टाइल और डिजाईन में भी काफी बदलाव आये है.आजकल मार्किट में इंडो-वेस्टर्न साड़ियाँ एक फ्यूज़न स्टाइल स्टेटमेंट के साथ बहुत ही आसानी से उपलब्ध है.जैसे पैंट स्टाइल साड़ी, कुर्ती साड़ी, ब्लेज़र साड़ी, धोती साड़ी और उत्कृष्ट प्लाजो साड़ी.
इनकी सबसे बड़ी खासियत ये है की इन्हें पहनना बहुत आसान है और ये शादी और त्योहारों के लिए शानदार विकल्प है. आप चाहे तो आप इसके साथ oxidised ज्वेलरी कैर्री कर सकती हैं.

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2-प्लाजो पैंट के साथ लंबी जैकेट

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यदि आप पूरी तरह से देशी लुक नहीं चाहते तो आप प्लाजो को एक लाइट कलर के टॉप और लम्बी जैकेट वाले कॉम्बो के साथ ट्राई कर सकते है.ये आपको एक इंडो-वेस्टर्न लुक देगा.
आप चाहे तो आप इसके साथ हार्ट शेप के Multipearl Earrings भी ट्राई कर सकती है.

3-धोती पैंट के साथ कुर्ती

 

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Kurta Fabric: Rayon Bottomwear Fabric: Rayon Sleeve Length: Three-Quarter Sleeves Set Type: Kurta With Bottomwear Bottom Type: Dhoti Pants Pattern: Printed Multipack: single Sizes: XL (Bust Size: 42 in, Kurta Length Size: 35 in, Bottom Waist Size: Free Size (Upto 38 in ), Bottom Length Size: 39 in) L (Bust Size: 40 in, Kurta Length Size: 35 in, Bottom Waist Size: Free Size (Upto 38 in ), Bottom Length Size: 39 in) M (Bust Size: 38 in, Kurta Length Size: 35 in, Bottom Waist Size: Free Size (Upto 38 in ), Bottom Length Size: 39 in) #dhotipants #dhoti #dhotikurta #dhotisalwar #dhotidress #dhotistyle #dhotikurti #dhotisuit #dhotiwithkurti #dhotiwithtop #rayon #rayonkurti #dhotiwithkurta #allinonestore #allinonestorey

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धोती स्टाइल वाले सलवार के साथ कुर्ता या टॉप एक ट्रेडिशनल आउटलुक के लिए बिल्कुल सही है और ये ऑउटफिट आकर्षक होने के साथ-साथ कम्फ़र्टेबल भी रहेगा. शादी या त्योहारों में आप इसे स्टाइलिश ब्लाउज या एक पेप्लम टॉप या एक डिजाइनर कुर्ता के साथ पेयर कर सकते हैं.
आप चाहे तो इसे साथ स्टोन ड्रॉप्स एअर्रिंग कैरी कर सकती हैं.

4- कुर्ते के साथ लहंगा

 

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यदि पूरी तरह से एथनिक पहनना पसंद करते हैं तो लहंगा और कुर्ता कॉम्बो शायद आपके लिए सबसे अच्छा है. यह चलन पिछले कुछ समय से सुर्खियों में है, लेकिन अभी भी इसका क्रेज लोगों के बीच कायम है. थोड़ा अलग दिखने के लिए आप लॉन्ग कुर्ता या शॉर्ट कुर्ता भी पहन सकती हैं. आप चाहे तो आप इसके साथ रंगीन दुपट्टे को कैरी कर सकती हैं.  हो सके तो इस कॉम्बो को हाई हील्स और कुछ स्टाइलिश झुमके के साथ पेयर करें.

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Top 10 Crime Story in hindi : गृहशोभा मे पढ़िये धोखे और जुर्म की टॉप क्राइम

Crime Story in Hindi. इस लेख में आज हम आपको गृहशोभा की Top 10 Crime Story in Hindi की कहानियां बताएंगे. इन Crime Story में आपको समाज, परिवार और रिश्तों की आड़ में हुए धोखे और जुर्म की कहानी के बारे में बताएंगे, जिसे पढ़कर आपको थ्रिलर का एहसास होगा. साथ ही रिश्तों को लेकर सीख मिलेगी. इन Crime Stories को पढ़कर आप जीवन के कई पहलुओं से परिचित होंगे. तो अगर आप भी Crime Stories पढ़ने के शौकिन हैं तो पढ़िए गृहशोभा की Top 10 Crime Story in Hindi.

1. कर्णफूल: क्यों अपनी ही बहन पर शक करने लगी अलीना

crime story in hindi

जब मैं अपने कमरे के बाहर निकली तो अन्नामां अम्मी के पास बैठी उन्हें नाश्ता करा रही थीं. वह कहने लगीं, ‘‘मलीहा बेटी, बीबी की तबीयत ठीक नहीं हैं. इन्होंने नाश्ता नहीं किया, बस चाय पी है.’’

मैं जल्दी से अम्मी के कमरे में गई. वह कल से कमजोर लग रही थीं. पेट में दर्द भी बता रही थीं. मैं ने अन्नामां से कहा, ‘‘अम्मी के बाल बना कर उन्हें जल्द से तैयार कर दो, मैं गाड़ी गेट पर लगाती हूं.’’

अम्मी को ले कर हम दोनों अस्पताल पहुंचे. जांच में पता चला कि हार्टअटैक का झटका था. उन का इलाज शुरू हो गया. इस खबर ने जैसे मेरी जान ही निकाल दी थी. लेकिन यदि मैं ही हिम्मत हार जाती तो ये काम कौन संभालता? मैं ने अपने दर्द को छिपा कर खुद को कंट्रोल किया. उस वक्त पापा बहुत याद आए.

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2. जरूरी सबक- हवस में अंधे हो कर जब लांघी रिश्तों की मर्यादा

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हा को अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था. दरवाजे की झिर्री से आंख सटा कर उस ने ध्यान से देखा तो जेठजी को अपनी ओर देखते उस के होश फाख्ता हो गए. अगले ही पल उस ने थोड़ी सी ओट ले कर दरवाजे को झटके से बंद किया, मगर थोड़ी देर बाद ही चर्ररर…की आवाज के साथ चरमराते दरवाजे की झिर्री फिर जस की तस हो गई. तनिक ओट में जल्दी से कपड़े पहन नेहा बाथरूम से बाहर निकली. सामने वाले कमरे में जेठजी जा चुके थे. नेहा का पूरा शरीर थर्रा रहा था. क्या उस ने जो देखा वह सच है. क्या जेठजी इतने निर्लज्ज भी हो सकते हैं. अपने छोटे भाई की पत्नी को नहाते हुए देखना, छि, उन्होंने तो मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ लीं…नेहा सोचती जा रही थी.

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3. तंत्र मंत्र का खेला: बाबा के जाल से निकल पाए सुजाता और शैलेश

crime story in hindi

‘यह क्या है शैलेश? तुम्हें मना किया था न कि अगली बार लेट होने पर क्लास में एंट्री नहीं मिलेगी,’’ प्रोफैसर महेंद्र सिंह गुस्से से चीख उठे.

‘‘सौरी सर, आज आखिरी दिन था मजार में हाजिरी लगाने का, आज 40 दिन पूरे हो गए हैं, कल से मैं समय से पहले ही हाजिरी दर्ज करा लूंगा.’’

‘‘यह क्या मजार का चक्कर लगाते रहते हो? इतना पढ़नेलिखने के बाद भी अंधविश्वासी बने हो,’’ प्रोफैसर ने व्यंग्य किया.

‘‘सर, ऐसा न कहिए,’’ एक छात्र बोल उठा. ‘‘सर, आप को रेलवे स्टेशन पर बनी मजार की ताकत का अंदाजा नहीं है,’’ दूसरे छात्र ने हां में हां मिलाई. ‘‘सर, आप ने देखा नहीं, मजार 2 प्लेटफौर्म्स के बीच में बनी है, तीसरे, चौथे, 5वें प्लेटफौर्म्स जगह छोड़ कर बनाए गए हैं,’’ एक कोने से आवाज आई.

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4. Serial Story: किसी से नहीं कहना

crime story in hindi

मध्यवर्ग के विवेक और विनीता अपनी इकलौती बेटी उर्वशी और वृद्ध मातापिता के साथ बहुत ही सुकून के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. परिवार छोटा ही था, घर में जरूरत की सभी सुखसुविधाएं उपलब्ध थीं. ज्यादा की लालसा उन के मन में बिलकुल नहीं थी. यदि कोई चाहत थी तो केवल इतनी कि अपनी बेटी को खूब पढ़ालिखा कर बहुत ही अच्छा भविष्य दे पाएं.

उर्वशी भी अपने मातापिता की इस चाह पर खरा उतरने की पूरी कोशिश कर रही थी. 10 वर्ष की उर्वशी पढ़ने में होशियार होने के साथ ही खेलकूद में भी बहुत अच्छी थी और जीत भी हासिल करती थी. वह स्कूल में सभी टीचर्स की चहेती बन गई थी.

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5. शैतान : रानिया के साथ कौनसा खेल खेल रहा था अरलान

crime story in hindi

8 महीने पहले रानिया जब उस शानदार कोठी में नौकरी के लिए आई थी, तब उस ने ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि वह उस कोठी की मालकिन भी बन सकती है. दरअसल अखबार में 3 साल की एक बच्ची की देखभाल के लिए आया के लिए एक विज्ञापन छपा था. रानिया को काम की जरूरत थी, इसलिए वह आया की नौकरी के लिए उस कोठी पर पहुंच गई थी, जिस का पता अखबार में छपे विज्ञापन में दिया था. कोठी के गेट के पास बने केबिन में बैठे गार्ड ने रानिया को रोक कर कहा, ‘‘तुम्हारे आने की खबर मेमसाहब को दे आता हूं, जब वह बुलाएंगी, तब तुम अंदर चली जाना.’’

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6. विश्वास: अमित के सुखी वैवाहिक जीवन में क्यों जहर घोलना चाहती थी अंजलि?

crime story in hindi

करीब 3 साल बाद अंजलि और अमित की मुलाकात शौपिंग सैंटर में हुई तो दोनों एकदूसरे का हालचाल जानने के लिए एक रेस्तरां में जा कर बैठ गए.

यह जान कर कि अमित ने पिछले साल शादी कर ली है, अंजलि उसे छेड़ने से नहीं चूकी, ‘‘मैं बिना पूछे बता सकती हूं कि वह नौकरी नहीं करती है. मेरा अंदाजा ठीक है?’’

‘‘हां, वह घर में रह कर बहुत खुश है, अंजलि,’’ अमित ने मुसकराते हुए जवाब दिया.

‘‘और वह तुम से लड़तीझगड़ती भी नहीं है न, अमित?’’

‘‘ऐसा अजीब सा सवाल क्यों पूछ रही हो?’’ अमित के होंठों पर फैली मुसकराहट अचानक गायब हो गई.

‘‘तुम्हारी विचारधारा औरत को सदा दबा कर रखने वाली है, यह मैं अच्छी तरह से जानती हूं, माई डियर अमित.

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7. फरेब : बौस और पति दोनों ने कैसे उठाया मुसकान का फायदा

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जब प्रोग्राम खत्म होने को होता, तो उसे फूलों का एक खूबसूरत गुलदस्ता भेंट कर चुपचाप लौट जाता.

शुरूशुरू में तो मुसकान ने उस की ओर ध्यान नहीं दिया, पर जब वह उस के हर प्रोग्राम में आने लगा, तो उस के मन में उस नौजवान के लिए एक जिज्ञासा जाग उठी कि आखिर वह कौन है? वह उस के हर प्रोग्राम में क्यों होता है? उसे उस के हर अगले प्रोग्राम की तारीख और जगह की जानकारी कैसे हो जाती है? वगैरह.

नट जाति से ताल्लुक रखने वाली मुसकान एक कुशल नाचने वाली थी. अपने बौस के आरकैस्ट्रा ग्रुप के साथ वह आएदिन नएनए शहरों में अपना प्रोग्राम देने जाती रहती थी.

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8. बेरुखी : आखिर कौन था रमेश का हत्यारा

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नरेश की लाश 2 दिनों बाद एक कुएं से बरामद हुई थी. दुर्गंध फैली थी, तब लोगों को पता चला था कि कुएं में लाश पड़ी है. उस के बाद पुलिस को सूचना दी गई थी. नरेश की पत्नी ऐश्वर्या ने उस की गुमशुदगी दर्ज करा रखी थी. नरेश शहर का जानामाना व्यवसायी था. पिता की मौत के बाद सारा कारोबार वही संभाल रहा था, जिस की वजह से वह काफी व्यस्त रहता था. वह सुबह घर से निकलता था तो रात 10 बजे से पहले लौट नहीं पाता था.

नरेश की पत्नी ऐश्वर्या को परिवार वालों ने स्वीकार नहीं किया था, इसलिए वह उसे ले कर शहर के सब से महंगे इलाके में फ्लैट ले कर अलग रह रहा था. ऐश्वर्या बेहद खूबसूरत थी. शादी के अभी एक साल ही बीते थे कि यह हादसा हो गया था. लाश बरामद होने के बाद पुलिस ऐश्वर्या से पूछताछ करने पहुंची तो पहला सवाल यही किया, ‘‘आप को किसी पर शक है?’’

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9. पानी चोर : कल्पना उस रात ठाकुर के घर से क्या चुरा कर लाई

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रात के तकरीबन 2 बजे थे. कल्पना ने अपना कई दिनों से खाली पड़ा घड़ा उठाया और उसे साड़ी के पल्लू से ढक कर दबे पैर घर से चल पड़ी. करीब 15 मकानों के बाद वह एक कोठी के सामने रुक गई.

कल्पना को कोठी की एक खिड़की अधखुली नजर आई. उस ने धीरे से पल्ला धकेला, तो खिड़की खुल गई. उस की आंखें खुशी से चमक उठीं. वह उस खिड़की को फांद कर कोठी में घुस गई. कोठी के अंदर पंखों व कूलरों की आवाजों के अलावा एकदम खामोशी थी. लोग गहरी नींद में सो रहे थे.

कल्पना एक कमरा पार कर के दूसरे कमरे में पहुंची. वहां अलमारी अधखुली थी, जिस में से नोटों की गड्डियां व सोने के गहने साफ दिखाई दे रहे थे. कल्पना उन्हें नजरअंदाज करती हुई आगे बढ़ गई और तीसरे कमरे में पहुंची. वहां कई टंकियों में पानी भरा हुआ था.

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10. कुरसी का करिश्मा : कैसे अपने ही बुने जाल में उलझ गए राजेश बाबू

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दीपू के साथ आज मालिक भी उस के घर पधारे थे. उस ने अंदर कदम रखते ही आवाज दी, ‘‘अजी सुनती हो?’’

‘‘आई…’’ अंदर से उस की पत्नी कलावती ने आवाज दी.

कुछ ही देर बाद कलावती दीपू के सामने खड़ी थी, पर पति के साथ किसी अनजान शख्स को देख कर उस ने घूंघट कर लिया.

‘‘कलावती, यह राजेश बाबू हैं… हमारे मालिक. आज मैं काम पर निकला, पर सिर में दर्द होने के चलते फतेहपुर चौक पर बैठ गया और चाय पीने लगा, पर मालिक हालचाल जानने व लेट होने के चलते इधर ही आ रहे थे.

‘‘मुझे चौक पर देखते ही पूछा, ‘क्या आज काम पर नहीं जाना.’

‘‘इन को सामने देख कर मैं ने कहा, ‘मेरे सिर में काफी दर्द है. आज नहीं

जा पाऊंगा.’

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लड़कियों में न निकालें मीनमेख

सुश्रुत अपने परिवार के साथ दिल्ली के राजौरी गार्डन में लड़की देखने गया. वह बड़े जोश में था और दोस्तों को भी बता कर आया था कि लड़की देखने जा रहा हूं. लड़की वालों के घर जब उस का पूरा परिवार पहुंचा तो उन्होंने आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ी. अच्छा खाना खिलाया. सभी रिश्तेदारों ने उन का खुले दिल से स्वागत किया.

अब आई लड़की दिखाने की बारी. सौम्य सी लड़की वंदना जब सामने बैठी तो सुश्रुत समेत उस के घर वाले इस तरह से सवाल दागने लगे मानो वंदना उन की कंपनी में इंटरव्यू देने आई हो.

कितनी उम्र है? अब तक कितने लड़के देख चुके हैं तुम्हें? कहां जौब करती हो औफिस में किसी से अफेयर तो नहीं है? बौस पुरुष है या महिला? हाइट कितनी है तुम्हारी? सैलरी कितनी मिलती है? इन्हैंड कितनी है और पेपर में कितनी है? तुम्हारी हाईट बिना हाई हील्स के कितनी है? तुम्हारा कलर ही इतना फेयर है या मेकअप किया है? कपड़े कैसे पहनती हो? वैस्टर्न का भी शौक है? इतनी ज्यादा उम्र हो गई है, अभी तक कोई लड़का नहीं मिला या कोई कमी थी?

ऐसे ही सवालों की झड़ी लगा दी उन्होंने, जिस से वंदना घबरा गई और बिना कुछ कहे रोते हुए अंदर चली गई. इस पर भी सुश्रुत का परिवार नहीं माना. लड़की हकली है क्या? कुछ बीमारी तो नहीं है? कुछ बोल क्यों नहीं रही थी? कुछ छिपा रही थी क्या? जैसे सवाल दागते रहे. जाहिर है लड़की और उन के परिवार वालों को उन की इन हरकतों से बहुत शर्मिंदा होना पड़ा.

लड़की राशन का सामान नहीं

यह ऐसी अकेली घटना नहीं है. लगभग हर घर में लड़की देखने आए लोग ऐसा ही व्यवहार करते हैं. बड़े बुजुर्ग ऐसा व्यवहार करते हैं तो समझ में आता है, लेकिन जब आज के युवा लड़की देखते वक्त इतनी मीनमेख निकालते हैं, तो लगता है उन्हें लड़की नहीं कोई स्मार्ट फीचर वाला फोन चाहिए, जिस का एकएक स्पैसिफिकेशन चैक करना जरूरी हो. अरे भाई, लड़की है कोई खानेपीने का सामान नहीं, जो इतना मोलभाव किया जाए.

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हर इंसान में कुछ कमियां और कुछ खूबियां होती हैं. ऐसे में सिर्फ युवती में ही कमी निकालना गलत है. आज युवाओं को सोचना चाहिए कि युवतियां आत्मनिर्भर हो कर अपना जीवन जीना चाहती हैं.

इसलिए वे आत्मसम्मान से समझौता नहीं करतीं ऐसे में क्या कोई युवा चाहेगा कि उस की होने वाली वाइफ के साथ इस तरह की मीनमेख निकाल कर शादी हो. होना तो यह चाहिए कि युवक अपनी होने वाली पत्नी के साथ अलग से बात कर के अपनी पसंदनापसंद, हौबीज, आइडियोलौजी और जीवन में वरीयता देने वाली बातों पर चर्चा करे और जब मन मिल जाएं तब शादी के लिए हां करे.

शक्लसूरत और धनसंपदा न होने के कारण लड़की में कमी निकालना मूर्खता है. शरीर और पैसा तो बदलता रहता है, लेकिन इंसान के विचार नहीं बदलते. जरा सोचिए जो युवक शादी से पहले युवतियों में इतनी मीनमेख निकाल कर उन्हें शर्मिंदा करते हैं, अगर उन की बहन को देखने आए लड़के वाले भी ऐसी ही हरकत करें तो उन्हें कितना बुरा लगेगा? जाहिर है सब की भावना और आत्मसमान का आदर करना चाहिए.

अपने गिरेबान में भी झांकें

हमारी संस्कृति और रीतिरिवाज ऐसे हैं जहां लड़की को लड़के वालों के सामने झुकना पड़ता है. लड़का लड़की को ब्याह कर यह समझता है कि वह उस पर एहसान कर रहा है जबकि दुनिया में दो लड़कालड़की शादी करते वक्त एकदूसरे का बराबरी से सामना करते हैं और कोई बिना किसी के सामने झुके व आपस में बात कर शादी तय करते हैं, लेकिन हमारे यहां युवक समझते हैं कि अगर वे शादी करने जा रहे हैं तो लड़की की क्लास ले कर आएंगे. उस का अगलापिछला सब चैक कर फिर उसे पास करेंगे.

दरअसल, वे अपने गिरेबान में झांकना भूल जाते हैं. जरा सोचिए, युवती यदि आप के शरीर, लंबाई और हैसियत का मजाक बना कर शादी के दौरान आप को कमतर आंके तो कैसा लगेगा?

युवा प्रश्न करने से पहले यह भूल जाते हैं कि पहले वे अपनी खूबियां भी तो बताएं. जब उन से सिर्फ लड़के के बारे में पूछा जाता है तो कहते हैं कि लड़का ज्यादा पढ़ा तो नहीं है, लेकिन बाप का बिजनैस देखेगा.

अगर लड़का लड़की देखने जा रहा है तो बिना लड़की देखे कोई राय न बनाएं. अकसर लोग पहले से ही नकारात्मक विचार मन में बना लेते हैं. जिस वजह से उन्हें हर चीज में यही भाव दिखाई देता है. लड़की वालों को ऐसा महसूस न कराएं कि आप को लड़की नापसंद है. सिर्फ लड़की की कमियां न गिनवाएं. इतना ही नहीं यदि लड़की या लड़के में कोई कमी या विकार है तो उसे उजागर करें.

लड़की वालों के यहां रिश्तेदारों की पूरी फौज ले कर न जाएं. अगर युवक ज्यादा कमाता है या परिवार आर्थिक रूप से लड़की वालों से मजबूत भी हो, तो भी लड़की वालों पर अपने पैसे का रोब दिखा कर उन्हें छोटा होने का एहसास न होने दें.

अंधविश्वासी न बनें

शादी के समय पंडेपुरोहित लड़के के घर वालों को अंधविश्वास में फंसा कर अपनी जेब भर लेते हैं. युवक को भी लड़की की खूबसूरती से जुड़े टोटके बता कर भटकाने का काम करते हैं.

वे भाग्य को चमकाने वाले चिह्न बता कर युवक के मन में शारीरिक और नस्लीय भेदभाव का बीज रोप देते हैं. कभी भी अंधविश्वास के चक्कर में पड़ कर शादी के दौरान लड़की देखते हुए ऐसे रिवाजों में न पड़ें. तन की नहीं मन की सुंदरता भी देखें.

लड़की को करें सहज

जब कोई युवा किसी लड़की को देखने जाता है तो उसे यह बात समझनी चाहिए कि यह समय लड़की के लिए बड़ा नर्वस होने वाला होता है. उस पर कई तरह के दबाव रहते हैं. मातापिता का दबाव होता है कि ठीक ढंग से तैयार हो कर लड़के के सामने जाना. किसी भी तरह की कोई चूक नहीं होनी चाहिए, जबकि लड़के के सामने किसी तरह का कोई दबाव नहीं होता. उलटे वह सीना चौड़ा कर यह सोच कर जाता है कि उसे तो लड़की सिलैक्ट या रिजैक्ट करनी है.

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यह मानसिकता गलत है. युवक को चाहिए कि लड़की से बात कर उसे सहज करे. जाहिर सी बात है इस दिन आप दोनों अच्छे कपड़े पहन कर गए होंगे, लेकिन बात की शुरुआत के लिए कपड़ों की तारीफ करना अच्छा रहेगा. इस से उस लड़की को लगेगा कि आप ने उसे नोटिस किया.

लड़की को अच्छा लगेगा अगर आप अपनी संभावित पत्नी से उन के घरपरिवार के बारे में पूछें. कैरियर के बारे में उस से बातें करना भी एक अच्छा विकल्प है. कुछ न समझ आए तो चुपचाप उस की पसंद के बारे में पूछ लें. ऐसा करने से लड़की काफी सहज हो जाएगी और आप की बातों का उचित और तार्किक जवाब दे पाएगी.

जरा सोचिए, आप एक परिवार के साथ जीवनभर का रिश्ता जोड़ने के इरादे से जाते हैं ऐसे में अगर वे भी आप के परिवार व आप को ले कर मीनमेख निकालें तो जाहिर है बुरा लगेगा. जो व्यवहार आप को बुरा लग सकता है उसे दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए. रीतिरिवाज या रिश्तेदारों के दबाव में आ कर लकड़ी की या उस के परिवार वालों की मीनमेख निकालने के चक्कर में हो सकता है आप के हाथ से एक अच्छा रिश्ता निकल जाए. शादी को सौदेबाजी का खेल बनाना निहायत ही गलत है.

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