Serial Story: एक छत के नीचे (भाग-1)

ट्रेन दिल्ली की ओर बढ़ रही थी. मैं ने प्लेटफार्म पर ट्रेन के पहुंचने से पहले अपना सामान समेटा और शीघ्रता से उतर गई. निगाहें बेसब्री से मिलन को ढूंढ़ रही थीं. थोड़ा आश्चर्य सा हुआ. हमेशा समय से पहले पहुंचने वाले मिलन आज लेट कैसे हो गए. तभी मेरे मोबाइल पर मिलन का संदेश आ गया.

‘‘सौरी डार्लिंग, आज बोर्ड की मीटिंग है और 9 बजे दफ्तर पहुंचना है, इसलिए तुम्हें लेने स्टेशन नहीं पहुंच पाया.’’ टैक्सी से घर पहुंची तो मिलन बरामदे की सीढि़यों पर ही मिल गए. साथ में निक्की भी थी. हलके गुलाबी रंग की साड़ी में लिपटी, जो उस के जन्मदिन पर मिलन ने उसे भेंट की थी, सुर्ख बिंदी, लिपस्टिक और हाथों में खनकती चूडि़यां… सब मुझे विस्मित कर रहे थे. मैं ने प्यार से निक्की के गालों को थपथपाया, फिर कलाई पर बंधी घड़ी पर नजर डाली और बोली, ‘‘तू क्यों इतनी जल्दी जा रही है? रुक जा, 1 घंटे बाद चली जाना.’’ ‘‘अगर अभी इन के साथ निकल गई तो आधे घंटे में पहुंच जाऊंगी, वरना पहले बस फिर मैट्रो, फिर बस. पूरे 2 घंटे बरबाद हो जाएंगे.’’

‘‘शाम को जल्दी आ जाएंगे,’’ कह कर मिलन सीढि़यां उतर गए और कार स्टार्ट कर दी. दौड़तीभागती निक्की भी उन की बगल में जा कर बैठ गई. सामान अंदर रखवा कर मैं ने भवानी को चाय बनाने का आदेश दिया. फिर पूरे घर का निरीक्षण कर डाला. हर चीज साफसुथरी, सुव्यवस्थित, करीने से सजी हुई थी.

चाय की प्याली ले कर भवानी मेरे पास आ कर बैठी तो मैं ने कहा, ‘‘रात के लिए चने भिगो दो. साहब चनेचावल बहुत शौक से खाते हैं.’’

‘‘आजकल साहब रात में खाना नहीं खाते,’’ भवानी का जवाब था.

‘‘क्यों…’’

‘‘एक दिन निक्की बिटिया ने टोक दिया कि आजकल साहब का वजन बहुत बढ़ रहा है, बस तभी से रात का खाना बंद कर दिया,’’ भवानी ने हंस कर कहा.

‘‘मुझे तो बहुत भूख लगी है. जो कुछ बन पड़े बना लो. फिर थोड़ी देर सोऊंगी. थकावट के मारे बुरा हाल है.’’ नींद खुली तो कमरे से बाहर निकल कर बालकनी में बैठ कर मिलन और निक्की की प्रतीक्षा करने लगी. अभी उन के आने में 1 घंटा बाकी था. मैं ने अपने डिजिटल कैमरे में कैद फोटोग्राफ देखने शुरू कर दिए.

ये भी पढ़ें- वापसी: खुद टूटने के बावजूद घर को जोड़ती वीरा की कहानी

दिल्ली से जबलपुर तक ट्रेन और  उस के आगे टाटा सफारी से मंडला तक की यात्रा काफी कठिन थी. पूरा क्षेत्र पानी में डूबा हुआ था. नर्मदा नदी में बाढ़ की वजह से तबाही मची हुई थी. जगहजगह सहायता शिविर और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र खोले गए थे. बाढ़ पीडि़तों की सहायता के लिए हमारी संस्था के साथ कई अन्य समाजसेवी संस्थाएं भी एकजुट हो कर कार्यरत थीं. 8 दिन का कार्यक्रम 1 महीने तक खिंच गया था. जब तक स्थिति में सुधार नहीं होता, लौटने का प्रश्न ही कहां उठता था?

मिलन की गाड़ी गेट पर नजर आई तो कैमरा बंद कर भवानी से कह कर चाय के साथ गरमागरम पकौड़े तैयार करवा लिए.

‘‘यह क्या बनवा लिया, बूआ?’’

‘‘बरसात के मौसम में तेरे फूफाजी को चाय के साथ गरम पकौड़े बेहद पसंद हैं.’’

‘‘वजन देखा है, कितना तेजी से बढ़ रहा है?’’ निक्की ने न जाने किस अधिकार के तहत पकौड़ों की प्लेट खिसका कर मिलन की तरफ देखा. मुझे उस का यह तरीका अच्छा नहीं लगा था.

‘‘आजकल यह सब बंद कर दिया है.’’

‘‘सिर्फ 1 कप दूध लूंगा,’’ मिलन बोले.

इतनी देर में निक्की 2 कप ग्रीन टी बना कर ले आई थी. टीवी देखते समय मिलन ने महज औपचारिकता के चलते वहां की कुछ बातें पूछीं और बातचीत का मुद्दा बदल दिया. शादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ था जब मैं और मिलन एकदूसरे से इतने लंबे समय के लिए अलग हुए थे. पूरे 1 महीने बाद मैं घर लौटी थी. उस पर मेरा कार्यक्रम इतना व्यस्त रहा था कि 1 दिन भी मिलन से जी भर कर बात नहीं हुई थी. बेडरूम में पहुंच कर भी मिलन के व्यवहार में वैसी गर्मजोशी नजर नहीं आई थी, जिस की मैं ने उम्मीद की थी. हर रात शारीरिक संबंध की कामना करने वाले मिलन, आज खानापूर्ति के लिए पतिपत्नी के शारीरिक रिश्ते की जिम्मेदारी निभा कर सो गए. मिलन के व्यवहार में आए इस बदलाव को देख कर मेरे मन में अब शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा.

‘कहीं मेरी गैरहाजिरी में मिलन और निक्की? नहीं…नहीं…मिलन मेरे साथ ऐसी बेवफाई नहीं कर सकते,’ उन के प्रति मेरे विश्वास की इस डोर ने ही शायद मुझे निश्ंिचत हो कर सोने का हौसला दिया और आज उन के बजाय मैं तकिए से ही लिपट कर सो गई.

आधी रात को जब आंख खुली तो मिलन बिस्तर पर नहीं थे. एक बार फिर मन में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा तो मैं ने स्टडीरूम में जा कर देखा. मिलन वहां भी नहीं थे. तभी निक्की के कमरे से पुरुष स्वर उभरा. कमरे में झांका तो जो दृश्य मैं ने देखा, उसे देख कर एक बार तो मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ था. मेरे पति मिलन निक्की के ऊपर पूरी तरह से झुके हुए थे. फिर उन की धीमी आवाज सुनाई पड़ी, ‘‘निक्की, समझने की कोशिश करो. जब तक तुम्हारी बूआ यहां रहेंगी, हमें इसी तरह अलगअलग रहना होगा. तरु को जरा भी शक हो गया तो जानती हो क्या होगा?’’

इस पर निक्की का शिथिल स्वर उभरा, ‘‘जानती हूं, लेकिन आप से अलग हो कर मैं एक दिन भी तो नहीं जी सकूंगी.’’ मैं यों ही जड़वत खड़ी रह गई. मेरी बेचैन नजरें अपने पति पर ठहर गईं, जो अब भी सब से बेखबर हो कर निक्की को बेतहाशा चूम रहे थे. दुख, क्रोध और घृणा से तिलमिलाई मैं अपनी भावनाओं को अपने अंदर ही जज्ब कर के अपने कमरे मेें लौट आई थी.

मैं ने अपनी याददाश्त पर जोर दिया. पिछली बार जब मैं ने मिलन से निक्की के ब्याह की बात छेड़ी थी तो उसे सुनते ही मिलन भड़क उठे थे.

‘यों अचानक, निक्की को घर से निकालने की बात तुम्हें क्यों सूझी? पहले उसे किसी काबिल तो हो जाने दो. ब्याह तो कभी भी हो जाएगा.’

‘शादी की भी एक उम्र होती है मिलन. निक्की की उम्र अब उस के योग्य हो गई है. अच्छे रिश्ते नसीब से ही मिलते हैं.’

इस के बाद, श्रीचंद के बेटे सुशांत का बायोडाटा, जो भाभी ने कोरियर से हमें भेजा था, मैं ने मिलन के सामने रख दिया था. सुशांत ने एमए के बाद एमबीए किया था और अब एक मल्टीनैशनल कंपनी से उसे 7 लाख का पैकेज मिल रहा था. मिलन सुशांत का बायोडाटा मेज पर पटक कर बोले, ‘हम अपनी निक्की के लिए इस से अच्छा मैच ढूंढ़ेंगे.’ एम. ए. पास निक्की के लिए इस से अच्छा मैच और कौन सा हो सकता था? उस पर सब से बड़ी बात, दहेज की कोई मांग नहीं थी. इतना तो मिलन ने कभी अपनी बेटी सोनिया के लिए भी नहीं सोचा था, जितना वे निक्की के लिए सोच रहे थे.

मुझे आज भी वे दिन याद हैं जब  निक्की को मैं गांव से पहलेपहल अपने घर लाई थी. निक्की की दादी यानी मेरी मां तो उसे मेरे साथ बिलकुल नहीं भेजना चाह रही थीं लेकिन मैं अपनी ही जिद पर अड़ी थी, ‘निकालो इसे इस दड़बे से और नई दुनिया देखने दो. कब तक इस गांव में रह कर यह यहां की भाषा बोलती रहेगी.’

मां तो आखिर तक विरोध करती रही थीं लेकिन भाभी मान गई थीं. अपने आधा दर्जन बच्चों में से किसी एक बच्चे का भी जीवन संवर जाए तो भला किस मां को आपत्ति होगी? निक्की को देखते ही मेरे सासससुर के माथे पर बल पड़ गए थे. किसी जरूरतमंद, दीनहीन, लाचार व्यक्ति को, अपने विशाल वटवृक्ष तले स्नेह और विश्वास से सींच कर आश्रय देने वाले मिलन भी सहज नहीं दिखाई दिए थे. ‘अम्मांबाबूजी की दवा और सोनिया की पढ़ाईलिखाई के खर्चे पूरे करतेकरते ही हम दोनों की आधी से ज्यादा पगार निकल जाती है. निक्की पर होने वाले अतिरिक्त खर्चे को कैसे बरदाश्त कर पाएंगे हम?’

ये भी पढ़ें- बेवजह: दूसरे का अंतर्मन टटोलना आसान है क्या?

अम्मांबाबूजी के ताने सुनने की तो मैं शुरू से आदी हो गई थी लेकिन मिलन का रूखा व्यवहार बरदाश्त से बाहर था. मैं ने मिलन को तरकीब सुझाई कि कालेज से लौट कर मैं शाम के समय 3-4 ट्यूशन पढ़ा लूंगी. मिलन के चेहरे पर से तनाव की सुर्खी अब भी नहीं हटी थी. मैं ने फिर से अपनी बात पर जोर दिया.

‘मिलन, बड़ी भाभी के मुझ पर बहुत उपकार हैं. बाबूजी ने तो हमें मंझधार में छोड़ कर अपनी अलग दुनिया बसा ली थी. दूसरे दोनों भाई अपनीअपनी गृहस्थी में रम गए. यदि भाभी का कृपाहाथ मुझ पर न होता तो शायद मेरा अस्तित्व ही न होता. भैया की मृत्यु के बाद भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन हमेशा किया ही है.’ मिलन चुप हो गए थे.

शुरूशुरू में निक्की किसी से बात नहीं करती थी. जब तक मैं कालेज से वापस नहीं लौटती, वह एक ही कमरे में दुबकी रहती. सोनिया उसे खूब चिढ़ाती. कभी उसे अपने साथ खेलने पर मजबूर करती तो कभी उस की लंबी चोटी को झटक देती. एक दिन ऐसे ही सोनिया ताली  पीटपीट कर निक्की को चिढ़ा रही  थी. निक्की कभी मिलन को देखती, कभी मुझे निहारती. मिलन ने प्यार से जैसे ही उसे अपने पास बुलाया, निक्की उन के गले में झूल गई थी. मिलन देर तक उसे अपनी गोद में बिठा कर पुचकारते रहे. देर से ही सही, निक्की हमारे परिवार की सदस्य बन गई थी. स्कूल खुले तो हम ने निक्की का दाखिला सोनिया के ही स्कूल में करवा दिया था. उस की शक्लसूरत देख कर प्रिंसिपल ने पहले तो प्रवेश देने से साफ मना कर दिया था, लेकिन जब मैं ने स्वयं दिनरात मेहनत करने का भरोसा दिलाया तो वे मान गई थीं.

एक अच्छे पार्लर में जा कर मैं ने उस के बाल कटवा दिए. पुराने कपड़ों का स्थान नए कपड़ों ने ले लिया था. गांव की भाषा को छोड़ कर वह शुद्ध हिंदी बोलने लगी थी. रहने का सलीका धीरेधीरे उस के व्यक्तित्व का अंग बनने लगा. सोनिया में अद्भुत शैक्षणिक प्रतिभा थी. निक्की औसत छात्रा थी. हम ने उस के लिए एक मास्टर नियुक्त कर दिया था लेकिन उस का मन किताबों में रमता ही नहीं था. जितनी देर  सोनिया पढ़ती, वह ऊंघती रहती. उस का ध्यान भंग करने के लिए निक्की कभी किताब बंद कर देती, कभी पैनपैंसिल छिपा देती. एक दिन मैं ने उसे बुरी तरह झिड़क दिया, ‘कुछ देर तो मन लगा कर पढ़ा करो. सोनिया को देखा. डाक्टर बन गई और तुम थर्ड डिवीजन में 12वीं पास कर पाई हो. पता नहीं किसी कालेज में तुम्हें दाखिला मिलेगा भी या नहीं?’

मैं सिर्फ सोनिया की ही नहीं निक्की की भी मां थी और मां को तो हर पहलू से सोचना भी पड़ता है. मैं तो यही चाहती थी कि सोनिया की तरह निक्की भी आत्मनिर्भर बने. सोनिया की इंटर्नशिप समाप्त होते ही मिलन ने उस का विवाह अभिषेक से तय कर दिया. अभिषेक जितने सुंदर थे, उतना ही उन का व्यक्तित्व भी प्रभावशाली था. व्यवहार में सौम्यता और मृदुता छलकती थी. हंसीमजाक करते रहना उस के स्वभाव में शामिल था. पेशे से वरिष्ठ सर्जन भी थे.

सोनिया को मिलन का प्रस्ताव जरा भी नहीं भाया था. खूब रोई थी वह उस दिन, ‘पापा, मैं इतनी जल्दी विवाह नहीं करना चाहती.’ मिलन काफी परेशान हो गए थे. बारबार एक ही वाक्य दोहराते, ‘22 वर्ष की हो गई है सोनिया. विवाह की यही सही उम्र है. देर करने से अच्छे रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं. तुम किसी तरह समझाबुझा कर उसे विवाह के लिए राजी करो?’ सोनिया अभिषेक के साथ विवाह कर के बेंगलुरु चली गई. दोनों ने मिल कर वहां नर्सिंग होम खोल लिया. सोनिया के ब्याह के बाद हम दोनों पतिपत्नी बिलकुल अकेले पड़ गए थे. मिलन बेटी को बेहद प्यार करते थे. गहन उदासी उन्हें चारों ओर से घेरे रहती. किसी काम में मन नहीं लगता था. निक्की ही उन के पास बैठ कर उन का मन बहलाती. उन के खानेपीने का ध्यान रखती. मिलन भी सोतेजागते, उठतेबैठते निक्की की प्रशंसा करते नहीं अघाते थे. मैं अकसर मिलन से कहती, ‘एक बेटी विदा हुई तो दूसरी हमारे पास है. जब यह भी चली जाएगी तब क्या होगा?’

मिलन झील जैसी शांत शीतल निगाहें उठा कर, एक नजर मुझ पर डाल कर, हताशा के गहन अंधकार में डूब जाते. जीवन मंथर गति से चल रहा था. उन्हीं दिनों मैं ने कालेज से त्यागपत्र दे देने का अहम फैसला ले लिया. मिलन ने सुना तो मेरे फैसले का कस कर विरोध किया था.

‘अगले साल रिजाइन कर देना. तब तक मैं भी रिटायर हो जाऊंगा. एकसाथ घूमेंगेफिरेंगे. फिलहाल घर बैठ कर क्या करोगी?’

‘समाजसेवा करूंगी.’

मिलन चुप हो गए थे. मैं ने कई समाजसेवी संस्थाओं से संपर्क स्थापित किए और समाजसेवा के कार्यों में जुट गई. सुबह कुष्ठ आश्रम, दोपहर में अनाथ आश्रम. कभी समाज के निम्नवर्ग के उत्थान के लिए चंदा जमा करती, कभी गरीबों के प्रशिक्षणार्थ समाज के समर्थ लोगों से मिलती. ‘सोनिया तो अपनी ससुराल चली गई. अब तुम भी समाजसेवा के चक्कर में मुझ से दूर होती जा रही हो एक दिन मिलन ने शिकायत की.’

ये भी पढ़ें- मुक्त: क्या शादी से खुश नही थी आरवी?

‘यहीं तो हूं, तुम्हारे पास.’

‘कहां?’ मिलन मुझे अपने बाहुपाश में जकड़ लेते. मैं खुद को उन की बाहों की गिरफ्त से मुक्त करने का असफल प्रयास करती.

‘तुम भी तो हर समय दफ्तर के कामों में उलझे रहते हो. शाम को निक्की तुम्हारी देखभाल कर लेती है.’

‘और रात में?’

‘धत्,’ मिलन शरारत से पूछते तो मैं मुसकरा कर उन के सीने पर सिर रख देती. उन्हीं दिनों भाभी 2 दिन के लिए दिल्ली आई थीं. साथ में सुशांत का बायोडाटा भी लाई थीं. मुझे देखते ही हैरान रह गईं. ‘यह क्या हाल बना रखा है तुम ने, तरु? शरीर बेडौल होता जा रहा है. न ढंग से पहनती हो, न सजतीसंवरती हो,’ उन्होंने मेरे टूटेफूटे नाखून और फटी एडि़यों की तरफ इशारा करते हुए पूछा.

‘अब सजसंवर कर किसे दिखाना है, भाभी?’

‘पुरुष का मनोविज्ञान बड़ा ही विचित्र होता है तरु. जिस पत्नी के साथ उस ने अपने जीवन के इतने वसंत देखे, हर सुखदुख में उस का साथ निभाया, जो पहले उसे अच्छी लगती थी, अब एकाएक उस में कमियां नजर आने लगेंगी और वह उसे फूटी आंख नहीं सुहाएगी.’ तब मैं ने भाभी की बात को मजाक में टाल दिया था, लेकिन आज उम्र के इस पड़ाव पर महसूस हो रहा था, जैसे अपनेआप को पूरी तरह समर्पित करने के बाद भी मैं मिलन का मन नहीं पा सकी. वरना उन के कदम क्यों भटकते?  2 घंटे बाद मिलन वापस लौटे. रात भर हम दोनों पतिपत्नी दो किनारों की तरह अलगअलग लेटे रहे. 2 अजनबियों की तरह आपस में ही सिमटे रहे. बंद आंखों से मैं ने महसूस किया, मिलन के हाथ मेरी ओर बढ़ते, फिर वे खुद पर काबू पा लेते. चादर पर बिछे गुलाब के कांटे मिलन को छेद रहे थे. वे मुझे भी तकलीफ पहुंचा रहे थे.

सुबह तेज बारिश हो रही थी. तेज हवा के झोंकों से खिड़कियों, दरवाजों के खटकने का शोर सुनाई दिया, तो मेरी तंद्रा भंग हुई. अब मैं वास्तविकता के धरातल पर थी. बेमन से बिस्तर छोड़ कर खिड़की के पास जा कर खड़ी हो गई. तभी निक्की के कमरे का दरवाजा खुला. हाथ में छोटा एअरबैग लिए वह मेरे सामने आ कर खड़ी हो गई.

‘‘कहीं जा रही हो?’’ मैं ने नीचे से ऊपर तक उसे निहारा.

‘‘जी, अपनी सहेली के पास.’’

‘‘यों अचानक?’’

मैं जानती थी कि यह मिलन और निक्की की पूर्व नियोजित योजना थी. आज रात की फ्लाइट से सोनिया, बेंगलुरु से आ रही थी. दिल्ली में 2 दिन का उस का सेमिनार था. सोनिया जब भी आती, निक्की हमेशा इसी तरह घर छोड़ कर चली जाती है. मन पश्चात्ताप की आग में जल उठा था. कई बार हम सच को अस्वीकार कर उस से दूर क्यों भागते हैं? मुझे याद है, पिछली बार जब सोनिया आई थी तब निक्की यों ही बहाना बना कर अपनी सहेली के घर चली गई थी. मिलन के मोबाइल पर लगातार एसएमएस की ट्रिनट्रिन सुन कर सोनिया ने मोबाइल उठा लिया था.

‘पापा को इतने मैसेज कौन भेजता है, ममा?’

‘अरे, यों ही विज्ञापन कंपनी वाले परेशान करते रहते हैं,’ मैं ने लापरवाही से बात उछाल दी थी.

सोनिया एकएक कर के मैसेज पढ़ती चली गई.

‘ ‘आई लव यू’ ममा, इस उम्र में पापा को इतने हौट मैसेज कौन भेजता है? अच्छा, यह पढ़ो, ‘तकदीर ने मिलाया, तकदीर ने बनाया, तकदीर ने हम को आप से मिलाया. बहुत खुशनसीब थे वो पल, जब आप जैसे दोस्त इस जिंदगी में आए.’

ये भी पढ़ें- केतकी: घर के बंटवारे में क्या होती है बहू की भूमिका?

सोनिया की बातों पर मैं ने जरा भी ध्यान नहीं दिया था. इस में कोई संदेह नहीं कि मिलन में किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने का गुण है. रिटायरमैंट की उम्र तक पहुंच गए, लेकिन यौवन दूर नहीं गया. उन की आंखों में एक विशेष तरह की गहराई है. हर समय सलीके से कपड़े पहनते हैं. रात में भी परफ्यूम से सराबोर हो कर वे मुझे अपने आगोश में भींचते तो ब्याह के शुरुआती दिन मुझे याद आ जाते.

‘ओह, मिलन, इस उम्र में भी तुम्हें हर रात…’

‘इंसान को हमेशा जवान बने रहना चाहिए. अपने विचार ही तो बुढ़ापा लाते हैं.’

– क्रमश:

Serial Story: एक छत के नीचे (भाग-3)

चिंता सी हो रही थी कि सहेली के घर वह न जाने किस हाल में होगी. दूसरे, इसी बहाने से वह सोनिया से मिल भी लेगी. कौफी हाउस में डोसा खाते समय सोनिया ने दिल को छू लेने वाला विषय छेड़ दिया था, ‘‘‘ममा, आप ने ‘चीनी कम’ फिल्म देखी है? एक युवती अपने पिता की उम्र के प्रौढ़ से पे्रम करती है…’

‘‘हां, इसी विषय पर और कई फिल्में बनी हैं, ‘निशब्द’, ‘दिल चाहता है’ आदि.’’

‘‘ऐसा क्यों होता है, ममा?’’

‘‘उस वक्त प्रौढ़ और वह युवती, दोनों ही यह समझते हैं कि प्यार की कोई सीमारेखा नहीं होती. उन्हें यही लगता है कि प्यार तो कभी भी किसी से भी हो सकता है. युवती यह समझती है कि यह उस की जिंदगी है और इसे अपने तरीके से जीना उस का अधिकार है. उधर प्रौढ़ को भी अपनी युवा प्रेमिका से कोई उम्मीद तो होती नहीं, हालांकि प्रेमिका की उम्र के उस के बच्चे होते हैं, लेकिन प्यार के शुरुआती दिनों में वह इस बात को ज्यादा अहमियत नहीं देता और अपनी युवा प्रेमिका के साथ भरपूर मौज करना चाहता है. लेकिन एक दिन जब परिवारजनों को पता चलने पर उसे परिवार की तीखी निगाहों व आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है तो उस के पास पछताने के अलावा और कोई चारा नहीं रहता. और वह युवती? क्या पूरी उम्र रखैल की भूमिका निभा सकती है? नहीं. कभी न कभी उस का संयम भी जवाब दे जाता है.’’

मैं ने चोर नजरों से निक्की और मिलन की ओर देखा. दोनों के चेहरों पर हवाइयां उड़ रही थीं. मैं भी सोनिया के सामने कोई तमाशा खड़ा नहीं करना चाह रही थी. सोनिया को एअरपोर्ट छोड़ कर हम वापस लौट ही रहे थे कि मिलन के मोबाइल पर एसएमएस आने शुरू हो गए. निश्चित रूप से ये मैसेज निक्की ही भेज रही थी. न जाने किस मिट्टी की बनी थी यह लड़की? सोच कर हंसी भी आ रही थी, आश्चर्य भी हो रहा था. मेरे ही प्यार से सींचा गया यह पौधा, फिर भी इस पौधे ने इतना अलग रूप कैसे ले लिया? घर में कदम रखते ही मैं ने मिलन से सीधेसपाट शब्दों में पूछा, ‘‘अब आगे क्या सोचा है?’’

‘‘किस बारे में?’’ मिलन बुरी तरह हड़बड़ा गए थे.

मैं चुपचाप उन का चेहरा निहारती रही तो वे बोले, ‘‘तरु, तुम तो तरु हो. तुम्हारे नाम की सार्थकता इसी में है कि दूसरों को अपनी शीतल छाया के नीचे शरण दो. निक्की को रहने दो इसी घर में. समाज के सामने तो हम दोनों पतिपत्नी ही रहेंगे न?’’

ये भी पढ़ें-  मैट्रो मेरी जान: रफ्तार से चलती जिंदगी की कहानी

कितना भयावह रूप था मिलन का? जिस पुरुष के नाम का सिंदूर मैं अपनी मांग में भरती आई थी, उसी पुरुष ने मुझे कितनी आसानी से पराया बना दिया? क्या देह इतनी बेलगाम हो सकती है कि नैतिकता की सारी सीमाएं लांघ कर बेबुनियाद रास्ता अपना ले? अपमान की आग में चोट खाया मन, अंदर ही अंदर सुलगने लगा. अगर हालात से समझौता कर लूं तो क्या इतना सहज होगा रिश्तों में संतुलन बनाना? कभी न कभी सोनिया और अभिषेक मेरे मन की थाह पा ही लेंगे, फिर तो वे मिलन से नफरत ही करेंगे. मिलन मेरी और निक्की दोनों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे थे. मिलन करवट बदल कर लेट गए थे. मैं जानती थी कि उन्हें थोड़ी देर में नींद आ जाएगी. इतना ही अंतर होता है पुरुष और स्त्री में. पुरुष रिश्तों को ध्वस्त कर के भी सामान्य हो जाता है और स्त्री रिश्तों के भरभरा कर गिरने पर खुद भी टूट कर बिखर जाती है. पुरुष, जिसे अग्नि को साक्षी मान कर साथ निभाने का वचन देता है, उसे भूल कर दूसरी नारी के साथ संबंध स्थापित करने में जरा नहीं सकुचाता.

कमरे में अंधेरा सा छाने लगा तो मैं ने खिड़की के परदे हटा दिए थे. सूरज ढलने के बाद, जो मरियल सा उजाला फैला होता है, वही हर ओर पसरा था. सोनिया के जाते ही मिलन मुक्ति पर्व मनाने लगे. अब वे बेझिझक निक्की के कमरे में घुस जाते. घंटों वहीं बैठे रहते. उसे उपहार देते, घुमाने ले जाते, फिल्में दिखाते. उस दिन मैं ने नाश्ते की मेज पर मिलन को बुलाया. उन के पीछेपीछे निक्की भी आ गई थी

‘‘एक बात पूछूं, मिलन? उस शाम यदि निक्की के स्थान पर सोनिया होती तो क्या तब भी आप ऐसा ही घृणित कृत्य करते?’’ निक्की की मौजूदगी में मैं उन से ऐसा सीधा सपाट प्रश्न करूंगी, कभी सोचा नहीं था मिलन ने. ऐसा निर्मम और अश्लील प्रस्ताव सुनने के बाद मिलन अपना चेहरा झुकाए चुपचाप बैठे रहे.

मेरे सीने में जो अपमान भरा था, उसे तिलतिल कर खाली करते हुए मैं ने पुन: वही प्रश्न दोहराया तो मिलन उठ खड़े हुए. निक्की के लिए यह स्थिति अप्रत्याशित सी थी. वह तो यही समझ रही थी कि ऐसे ही चलता रहेगा सबकुछ. जवानी की दहलीज पर कदम रखती तरुणी की जैसे कुछ भी सोचनेसमझने की शक्ति चुक गई थी. किसी ने उस का मार्गदर्शन भी तो नहीं किया था. वह फूटफूट कर रो पड़ी थी.

‘‘बस कीजिए, बूआ. मैं अपने किए पर बेहद शर्मिंदा हूं.’’

‘‘सच हमेशा कड़वा होता है, निक्की. पर जैसे आदमी अस्वस्थ हो तो उसे कड़वी दवा पीनी पड़ती है, उसी तरह इंसान यदि गलती करता है तो उसे कड़वे बोल सुनने पड़ते हैं. इस घर की छत के नीचे रह कर दूसरी औरत बनने से कहीं अच्छा है सुशांत के साथ ब्याह कर उस की अर्धांगिनी बनो.’’ निक्की अपने कमरे में चली गई तो मिलन बौखला से गए. बोले, ‘‘कहीं निक्की कोई गलत कदम न उठा ले…’’

‘‘कुछ नहीं होगा. सुंदर, सुव्यवस्थित गृहस्थी में प्रवेश कर वह अपने अतीत को एक दुस्वप्न की तरह भुला देगी. मिलन, उसे अपनी जिंदगी जीने दो और तुम भी लौट आओ अपनी गृहस्थी में,’’ मेरे चेहरे पर दृढ़ता के भाव मुखर हो उठे. उस रात मिलन ने अपनी बांहों में मुझे कस कर भींचा तो लगा कि मैं दम ही तोड़ दूंगी. कितना सुखद था वह एहसास. अगले माह सुशांत से निक्की का विवाह हो गया. मैं ने अपने घर की टूटती दीवारों को बचा लिया था. मेरे चेहरे पर संतोष की रेखाएं घिर आई थीं.

ये भी पढ़ें- क्षितिज ने पुकारा: क्या पति की जिद के आगे झुक गई नंदिनी?

लौकडाउन के बाद लगा ‘कसौटी जिंदगी के 2’ को ग्रहण, आखिरी एपिसोड का हुआ ऐलान

कोरोनावायरस के बढ़ते कहर के बीच स्टार प्लस के सीरियल ‘कसौटी जिंदगी के 2’ लौकडाउन के बाद से मुसीबतों के बादल घिरे हुए हैं. कम टीआरपी के चलते परेशान मेकर्स के सामने पार्थ समथान के सीरियल छोड़ने का फैसला, मेकर्स के लिए नई मुसीबत बन गया था. लेकिन अब खबर है कि सीरियल को बंद करने का फैसला ले लिया गया है. आइए आपको बताते हैं क्या है सच…

मेकर्स हैं नाखुश

ऐसे में अब सुनने में आ रहा है कि एकता कपूर ने ‘कसौटी जिंदगी के 2’ (Kasautii Zindagii Kay 2) को ही बंद करने का फैसला ले लिया है. खबरों के  रिपोर्ट के मुताबिक मेकर्स ने सीरियल के कलाकारों को इस खबर की जानकारी दी है और अब इस वजह से सभी लोग काफी दुखी है.

 

View this post on Instagram

 

@the_parthsamthaan @iam_ejf @nititaylor @_burakdeniz @parthian.rajani08 @superstar_parth_samthaan @kasautiizindagiikayoldnew @kaul_me @kasautiizindagiikayxfp @kukki.kaushik_love @anupre.creationss @paricabliss #parthsamthaan #erica #anupre #anurag #anuragbasu #manik # manikmahotra #love #loveyourself #sad #sadedits #iloveyou3000 #nititaylor #manan #kzk2 #anime #kasautiizindagiikay2 #kasautiizindagiikay #anurag #prenae #parthsamthaan #erica #anupre #anurag #anuragbasu #manik # manikmahotra #love #loveyourself #sad #sadedits #iloveyou3000 #nititaylor #manan #kzk2 #anime #kasautiizindagiikay2 #kasautiizindagiikay #anurag #prenae #parthsamthaan #erica #anupre #anurag #anuragbasu #manik # manikmahotra #love #loveyourself #sad #sadedits #iloveyou3000 #nititaylor #manan #kzk2 #anime #kasautiizindagiikay2 #kasautiizindagiikay #anurag #prenae #parthsamthaan #erica #anupre #anurag #anuragbasu #manik # manikmahotra #love #loveyourself #sad #sadedits #iloveyou3000 #nititaylor #manan #kzk2 #anime #kasautiizindagiikay2 #kasautiizindagiikay #anurag #prenae #parthsamthaan #erica #anupre #anurag #anuragbasu #manik # manikmahotra #love #loveyourself #sad #sadedits #iloveyou3000 #nititaylor #manan #kzk2 #anime #kasautiizindagiikay2 #kasautiizindagiikay #anurag #prenae #parthsamthaan #erica #anupre #anurag #anuragbasu #manik # manikmahotra #love #loveyourself #sad #sadedits #iloveyou3000 #nititaylor

A post shared by parthu 😘😘 akanksha (@parthsamthaan.official) on

ये भी पढ़ें- शादी के बाद इतनी बदल चुकी हैं ‘रसोड़े में कुकर’ चढ़ाने वाली राशि, देखें फोटोज…

इस दिन होगा लास्ट एपिसोड

 

View this post on Instagram

 

Prince saves her princess … #kasautiizindagiikay2 #paricaforever #anupreforever #anuragbasu #anurag #preranabasu #prerana

A post shared by parth _ 4444 _ erica (@parth_erica_4444) on

खबरों की मानें तो, ‘प्रोड्यूसर्स ने फैसला लिया है कि इस सीरियल के आखिरी एपिसोड को 3 अक्टूबर को शूट किया जाएगा. पूरी टीम को चैनल का फैसला सुना दिया गया है. कई लोगों को ये सुनकर गहरा धक्का भी लगा है. सेट पर हर कोई दुखी हो गया है क्योंकि हर किसी को लग रहा था कि ये सीरियल बंद नहीं होगा.’

पार्थ समथान की जिद से परेशान मेकर्स

बीते दिनों पार्थ समथान ने सीरियल को छोड़ने का फैसला किया था, जिसके बाद एकता कपूर ने उन्हें रोकने के लिए हर तरह की कोशिश भी की थी. वहीं खबरें थीं कि पार्थ समथान ने दो शर्त पर इस सीरियल में को ना छोड़ने का फैसला किया था, जिसके बाद मेकर्स ने उनकी बात मान ली है.

ये भी पढ़ें- पैचअप के बाद राजीव सेन-चारु असोपा किया खुलेआम रोमांस, ट्रोलर्स बोले ‘नौंटकी-ड्रामेबाज’

बता दें, मिस्टर बजाज के रोल में नजर आने वाले करण सिंह ग्रोवर ने लौकडाउन के बाद सीरियल को छोड़ने का फैसला लिया था, जिसके बाद करण पटेल ने सीरियल में एंट्री ली थी.

पैचअप के बाद राजीव सेन-चारु असोपा ने किया खुलेआम रोमांस, ट्रोलर्स बोले ‘नौंटकी-ड्रामेबाज’

सुष्मिता सेन भले ही अपनी जिंदगी में सुर्खियों में बनी रहती हैं. लेकिन उनके भाई राजीव सेन और भाभी चारु असोपा अपनी शादी में अनबन को लेकर सुर्खियों में रहे. पर अब दोनों पैचअप के बाद अपनी रोमांटिक फोटोज शेयर कर रहे हैं, जिसके बाद फैंस और ट्रोलर्स के रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं रोमांटिक फोटोज…

पैचअप के बाद शेयर की फोटोज

चारु असोपा और राजीव सेन अब एक-दूसरे के साथ कई रोमांटिक फोटोज शेयर कर रहे है, जिससे साफ हो चुका है कि दोनों का पैचअप हो चुका है, लेकिन इस बीच एक बार फिर से राजीव और चारु ट्रोलर्स के निशाने पर आ चुके हैं.

 

View this post on Instagram

 

Coz i give you all of Me ❤️ @asopacharu #mine 🧿 pic credits @artnest_photography

A post shared by Rajeev Sen (@rajeevsen9) on

ये भी पढ़ें- ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के नट्टू काका हुए अस्पताल में एडमिट, जानें क्या है वजह

जमकर प्यार लुटा रहे है कपल

 

View this post on Instagram

 

Stronger together ❤️ i Love my wife 🥇 @asopacharu 🧿

A post shared by Rajeev Sen (@rajeevsen9) on

इन दिनों चारु असोपा और राजीव सेन एक-दूसरे के साथ जमकर क्वालिटी टाइम बिता रहे हैं और दोनों ये भरोसा भी दिला रहे है कि अब वो कभी भी अलग नहीं होंगे. क्योंकि बीते महीनों से चारु असोपा और राजीव सेन के रिश्ते में अनबन के कारण वह एक-दूसरे से दूर थे.

बिग बौस 14 का मिल चुका है औफर

 

View this post on Instagram

 

Missed you sooooo much…. ❤️🧿

A post shared by Charu Asopa Sen (@asopacharu) on

राजीव सेन और चारु असोपा ने हाल ही में एक फोटोशूट करवाया है और इस फोटोशूट के दौरान दोनों के चेहरे की खुशी बयान कर रही है कि अब उनके बीच सब कुछ ठीक है. कुछ दिन पहले ही राजीव सेन को सलमान खान के शो ‘बिग बॉस 14’ का ऑफर मिला था. राजीव सेन ने इस खबर पर रिएक्ट करते हुए सिर्फ इतना ही कहा था कि वो ये शो नहीं करेंगे.

ट्रोलर्स बता रहे हैं नाटक

राजीव सेन और चारु असोपा एक-दूसरे से अपनी नजरें नहीं हटा पा रहे हैं . ऐसा लग रहा है कि दोनों को इस बात का एहसास हो चुका है कि एक-दूसरे के बिना इनका गुजारा नहीं है. लेकिन ट्रोलर्स को उनकी ये फोटोज केवल दिखावा लग रही हैं. और वह कह रहे हैं कि ये सब केवल नाटक है और कुछ दिनों में यह खत्म हो जाएगा.

ये भी पढ़ें- ‘KKK 10’ स्टार बलराज स्याल ने गुपचुप रचाई शादी, शहनाज गिल संग कर चुके हैं रोमांस

कैंसर होने के बावजूद ‘शमशेरा’ की शूटिंग कर रहे हैं संजय दत्त, पढ़ें खबर

अगस्त माह के दूसरे सप्ताह में जब सांस लेने की तकलीफ की वजह से अभिनेता संजय दत्त मुंबई के लीलावती अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे, तो वहां पर जांच के दौरान पता चला था कि वह फेफड़े के कैंसर यानी कि लंग कैंसर की बीमारी से पीड़ित हैं. उस वक्त खुद संजय दत्त ने ट्विटर पर जाकर ऐलान किया था कि वह अपनी बीमारी की वजह से कुछ दिनों के लिए अभिनय से दूरी बना रहे हैं. तब कयास लगाए जा रहे थे कि संजय दत्त तुरंत अपना इलाज कराने के लिए अमेरिका जाएंगे.

संजय दत्त के फेफड़े के कैंसर से पीड़ित होने की खबर आने के साथ ही बॉलीवुड में अजीब सा डर और चिंता की लहर पैदा हो गयो थी. यहां तक की कुछ निर्माता बहुत परेशान हो गए थे. क्योंकि उनकी फिल्में 90 प्रतिशत पूरी थी . ऐसे में संजय दत्त ने भी एक जिम्मेदार इंसान और अभिनेता के रूप में निर्णय लिया कि वह अपना अधूरा काम पूरा करने के बाद ही अमेरिका जाएंगे. फिर संजय दत्त ने अपनी पत्नी मान्यता से सलाह लेने के बाद मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल मैं अपना इलाज कराना शुरू कर दिया. थोड़ी सी राहत मिलने के बाद कल, सोमवार से संजय दत्त मुंबई में अंधेरी स्थित यशराज स्टूडियो में करण मल्होत्रा की फिल्म”शमशेरा “की शूटिंग कर रहे हैं, जिसके निर्माता यश राज स्टूडियो के ही मालिक आदित्य चोपड़ा है. हमें पता है कि “शमशेरा” की सारी शूटिंग रणबीर कपूर पूरी कर चुके हैं. संजय दत्त का 3 दिन की शूटिंग बाकी थी. जो कि कल तक पूरी हो जाएगी.

 

View this post on Instagram

 

#SanjayDutt snapped post his shoot today at Yashraj Studios. Glad he is feeling good👍

A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) on

ये भी पढ़ें- शादी के बाद इतनी बदल चुकी हैं ‘रसोड़े में कुकर’ चढ़ाने वाली राशि, देखें फोटोज…

संजय दत्त से जुड़े सूत्रों का दावा है कि संजय दत्त ने तय कर लिया है कि वह अजय देवगन की फिल्म “भुज द प्राइड ऑफ इंडिया”की अपनी बकाया डबिंग का काम भी पूरा करेंगे. उसके बाद वह फिल्म” केजीएफ 2″की जमीन का काम पूरा करेंगे. इस बीच वह अपना इलाज मुंबई में ही अंधेरी स्थित कोकिलाबेन अस्पताल में कराते रहेंगे.संजय दत्त और मान्यता दत्त ने निर्णय लिया है कि दिसंबर से पहले वह अपना बचा हुआ सारा काम पूरा करेंगे, जिससे किसी भी फिल्म निर्माता को नुकसान ना होने पाए.

सूत्रों का दावा है कि संजय दत्त दिसंबर माह में अमेरिका जाकर “मेमोरियल स्लोआन केटरिंग कैंसर सेंटर” में जाकर इलाज कराएंगे .तब तक संजय दत्त के बच्चों शहरान और इकरा की सर्दी की छुट्टियां भी शुरू हो चुकी होंगी. ऐसे में उनके बच्चे भी उनके साथ अमेरिका में रहेंगे. संजय दत्त चाहते हैं कि जब वह अमेरिका अपना इलाज कराने जाएं, तब उनके बच्चे और उनकी पत्नी मान्यता भी उनके साथ रहें.

ये भी पढ़ें- ‘KKK 10’ स्टार बलराज स्याल ने गुपचुप रचाई शादी, शहनाज गिल संग कर चुके हैं रोमांस

प्रैग्नेंसी से जुड़ी परेशानियों में क्या करूं?

सवाल-

मैं 27 वर्षीय गर्भवती महिला हूं. मुझे चौथा महीना चल रहा है, लेकिन कई दिनों से कब्ज के कारण काफी परेशान हूं. कृपया कोई उपाय बताएं?

जवाब-

गर्भावस्था के दौरान ऐस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरौन का स्तर अधिक होने से आंतों की मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं, जिस से भोजन और द्रव की गति धीमी हो जाती है और गर्भाश्य का आकार बढ़ने से आंतों पर दबाव पड़ता है, जिस से उन का संकचुन प्रभावित होता है. इसीलिए अकसर गर्भवती महिलाओं को कब्ज हो जाती है. आप को बहुत परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी उपाय कर के अपनी पाचनप्रक्रिया को दुरुस्त रख सकती हैं. आप पानी और दूसरे तरल पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करें. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. गर्भावस्था में अकसर महिलाओं में तनाव का स्तर बढ़ जाता है, इस से भी कब्ज होने की आशंका बढ़ जाती है. तनाव से बचने और मस्तिष्क को शांत रखने के लिए प्रतिदिन 10-20 मिनट तक ध्यान करें. अपने खानपान और नींद का भी पूरा ध्यान रखें. अगर समस्या ज्यादा गंभीर है तो आप का डाक्टर आप को मल को मुलायम करने वाली दवा लेने को कहेगा.

ये भी पढ़ें- 

मां बनना किसी भी महिला के लिये जिदंगी का सबसे सुखद अहसास होता है. इसको और सुखद बनाने के लिये जरूरी है कि मां की सेहत की देखभाल बहुत ध्यान पूर्वक की जायें. मां बनने पर सबसे पहले डाक्टर के पास जाये. यह ना सोचे कि जब कोई दिक्कत होगी तब जायेगे. पहले के समय में जब कोई दिक्कत होती थी तभी महिलाओं को डाक्टर के पास ले जाया जाता था. अब गर्भ के ठहरते ही होने वाली मां को डाक्टर के पास जाना चाहिये. पहले यह काम सास या घर की कोई दूसरी महिला करती थी. अब ज्यादातर मामलों में पति खुद डाक्टर के पास ले जाता है. कई बार महिला खुद भी डाक्टर के पास संपर्क करने चली जाती है. यह बदलाव बहुत अच्छा है. समय पर डाक्टर के पास जाने से बहुत सारी उन बीमारियों से बचाव होने लगा है जिनकी जानकारी पहले नहीं हो पाती थी.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- मां बनने पर समय से जाए डाक्टर के पास

TV की फैशन क्वीन हैं ‘ये रिश्ते हैं प्यार के’ की ‘कुहू’, बौलीवुड एक्ट्रेसेस को भी देती हैं मात

स्टार प्लस के सीरियल ‘ये रिश्ते हैं प्यार के’ (Yeh Rishtey Hai Pyaar Ke) इन दिनों फैंस के बीच काफी सुर्खियों में हैं. सीरियल के लीड किरदार के अलावा कुहू का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस कावेरी प्रियम (Kaveri Priyam) भी फैंस के बीच काफी पौपुलर हो रही हैं, जिसका अंदाजा उनके सोशलमीडिया अकाउंट को देखकर लगाया जा सकता है. एक्ट्रेस कावेरी प्रियम अक्सर हॉट लहंगे और साड़ियों में नजर आती हैं, जिसे फैंस काफी पसंद करते हैं.

कावेरी साड़ियों और लहंगे के साथ ही ब्लाउज के कलेक्शन के लिए भी जानी जाती हैं, जिसे आप वेडिंग हो या फेस्टिव सीजन हर वक्त ट्राय कर सकती हैं. तो आइए आपको दिखाते हैं एक्ट्रेस कावेरी प्रियम के कुछ फेस्टिव या वेडिंग के लिए इंडियन लुक्स, जिसे शादीशुदा या कुंवारी लड़कियां ट्राय कर सकती हैं.

1. मिरर वर्क लहंगा है परफेक्ट

आजकल लहंगे में मिरर वर्क लहंगे काफी ट्रैंड में हैं. अगर आप भी वेडिंग सीजन हो या फेस्टिव सीजन में ट्राय कर सकते हैं. इसके साथ आप कौंट्रास्ट औफ शोल्डर ब्लाउज ट्राय कर सकती हैं. ज्वैलरी की बात करें तो आप कावेरी प्रियम की तरह लौंग इयरिंग्स ट्राय कर सकते हैं.

 

View this post on Instagram

 

💫✨✨💫 . . . . . #throwbacksunday #sunday #kuhu #kuku #yrhpk #pink #ethnic #dolledup #curls #mm

A post shared by Kavveri Priiyam🏵️ (@kaveripriyam_official) on

ये भी पढ़ें- फेस्टिव सीजन के लिए परफेक्ट है ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की ‘नई कीर्ति’ के लुक

2. शरारा लुक है परफेक्ट

टीवी हो या बौलीवुड हर किसी को इन दिनों शरारा लुक पसंद आ रहा है. अगर आप भी इस सीजन में शरारा लुक ट्राय करना चाहती हैं कावेरी का ये लुक आपके लिए परफेक्ट औप्शन है.

3. सिंपल साड़ी को दे स्टाइलिश लुक

 

View this post on Instagram

 

💟 #kuhu #kuku #yrhpk❤ Pc @smileplease_25

A post shared by Kavveri Priiyam🏵️ (@kaveripriyam_official) on

अगर आप सिंपल लुक को ट्रैंडी बनाना चाहते हैं तो प्लेन रेड साड़ी के साथ रेड पर्ल वाली ज्वैलरी कौम्बिनेशन ट्राय करें. ये आपके लुक के लिए परफेक्ट रहेगा.

4.  स्टाइलिश लुक है परफेक्ट

 

View this post on Instagram

 

When I am too lazy to pose🤪🤪… . . . Clicked and edited by @ruslaanmumtaz #yrhpk❤ 9pm Monday to Saturday only on @starplus

A post shared by Kavveri Priiyam🏵️ (@kaveripriyam_official) on

अगर आप वेडिंग सीजन के लिए कोई परफेक्ट लुक ढूंढ रही हैं तो कावेरी का ये लुक आपके लिए परफेक्ट औप्शन हैं.

5. फ्रिल ब्लाउज के साथ लहंगा है परफेक्ट

फेस्टिव सीजन के लिए कावेरी की ये ड्रेस परफेक्ट औप्शन है.

जब खरीदें किचन चिमनी

भारतीय व्यंजनों में तड़के का ज्यादा इस्तेमाल होता है. इस के अलावा फ्राई करना, ग्रिल करना, खाने में मसालों का प्रयोग भी होता रहता है. ऐसी स्थिति में एक सही चिमनी ही रसोई से धुआं और गंध आसानी से निकाल सकती है.

आजकल बाजार में कई तरह की चिमनियां बिकती हैं, जिन में से सही चिमनी का चयन करना मुश्किल होता है. इस बारे में मुंबई की ‘मेग्लियो’ शॉप के चिमनी डीलर लक्ष्मण पुरोहित, जो एक दशक से भी अधिक समय से चिमनी बेच रहे हैं, उनका कहना है कि चिमनी की बनावट में पहले से काफी सुधार आया है. इस के 2 विकल्प ग्राहकों को ज्यादा आकर्षित करते हैं. इन विकल्पों की खूबियां इस प्रकार हैं.

– पहले विकल्प में धुआं बाहर फेंकने के लिए पाइप का प्रयोग किया जाता है.

– दूसरे में चिमनी को डक्ट से जोड़ने की जरूरत नहीं होती. इस के अंदर लगा कार्बन फिल्टर धुआं, तेल और गंध सोख लेता है और शुद्ध हवा को वापस रसोईघर में छोड़ता है. इस में समस्या यह आती है कि कार्बन में तेल जल्दी चिपक जाता है और इसे जल्दी-जल्दी साफ करना पड़ता है.

दोनों तरह की चिमनियां प्रयोग में लाई जा सकती हैं, लेकिन डक्ट वाली चिमनी ज्यादा अच्छी होती है. इस में भी अगर डक्ट की पाइप ज्यादा मुड़ी या काफी लंबी हो, तो चिमनी से हवा बाहर निकलने में समय लगता है. डक्ट के लिए जगह की जरूरत होती है, इसलिए अगर आप के किचन में जगह है, तो डक्ट वाली चिमनी लगाएं. जगह की कमी हो, तो कार्बन फिल्टर वाली चिमनी सही रहेगी.

आधुनिक चिमनी

पहले चिमनी का आकार अलग होता था. ज्यादातर चिमनियां पुश बटन और डायरेक्ट बटन द्वारा चलती थीं. आजकल बाजार में डिजिटल गैस सैंसर वाली चिमनी भी आने लगी है, जिस में यदि गैस किसी कारणवश लीक करती है, तो चिमनी ऑटोमैटिक चालू हो जाती है और गैस के निकल जाने के बाद बंद भी हो जाती है. यह चिमनी आजकल ज्यादा प्रयोग में लाई जा रही है.

ये भी पढ़ें- कांटों भरी ग्लैमर की डगर

चिमनी की सक्शन पावर का ध्यान

इस के अलावा चिमनी की सक्शन पावर का भी ध्यान रखें, क्योंकि यह जितना ज्यादा होती है, रसोई उतनी ही गंध और धुएं रहित होती है. यह क्षमता चिमनी में 500 मीटर क्यूबिक प्रति घंटा से 1,200 मीटर क्यूबिक प्रति घंटा होती है. इस में 900 मीटर क्यूबिक प्रति घंटा से 1,000 मीटर प्रति घंटा सक्शन पावर वाली चिमनी है.

किचन का आकार

चिमनी लगाने की प्रक्रिया में किचन के आकार की बड़ी भूमिका है. यदि किचन बड़ा है, तो ज्यादा सक्शन पावर वाली चिमनी लगाना ठीक रहता है. एक अनुमान के अनुसार किचन की चिमनी को 1 घंटे में 10 गुना शुद्ध हवा से भरने की जरूरत होती है. इसलिए चिमनी चुनने से पहले किचन की वॉल्यूम को 10 से गुणा करने के बाद जो क्षेत्रफल आए, उतनी ही सक्शन पावर वाली चिमनी किचन में लगाना सही होता है. इसे गैस चूल्हे से ढाई फीट की ऊंचाई पर लगाना ठीक रहता है.

यह भी ध्यान रखें

1 साल से 5 साल के अलावा लाइफटाइम गारंटी वाली चिमनी भी मिलती है. चिमनी की कीमत भी उस की वारंटी पर निर्भर होती है. चिमनी की कीमत कुछ हजार से ले कर लाखों तक होती है, जिसे ग्राहक अपने बजट के हिसाब से खरीदता है. एक अच्छी चिमनी 10 से 15 साल आसानी से काम कर सकती है.

चिमनी की देखभाल

– वैसे तो चिमनी की सफाई उस की उपयोगिता के आधार पर की जाती है, लेकिन यदि आप साधारण खाना बनाती हैं, तो 15 दिन बाद उस के फिल्टर को डिटर्जैंट मिले गरम पानी से अच्छी तरह धो कर, सुखा कर लगा दें. इस से फिल्टर की जाली साफ हो जाती है.

– चिमनी अगर अधिक चिपचिपी हो गई है और डिटर्जेंट पानी से साफ नहीं हो रही है, तो सोडियम हाइड्रो ऑक्साइड या कास्टिक सोडे से धोएं.

– कुछ फिल्टर ऐसे भी होते है जिन्हें धोया नहीं जा सकता. ऐसे में 4 से 5 महीने बाद उसे बदलना पड़ता है.

– कभी भी हार्श डिटर्जेंट से फिल्टर को न धोएं.

ये भी पढ़ें- कैसे चुनें सही ब्रा

जरूरी है मैंस्ट्रुअल हाइजीन

पीरियड्स यानी माहवारी महिला के शरीर में होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया होती है. फिर भी इस बारे में अधिकांश महिलाओं को सही जानकारी नहीं होती है और कुछ महिलाएं इस बारे में बात करने में भी संकोच महसूस करती हैं. इस कारण वे पीरियड्स में हाइजीन से सम झौता कर के खुद की हैल्थ के साथ खिलवाड़ करती हैं, जो सही नहीं है.

‘ससटैनेबल सैनिटेशन ऐंड वाटर मैनेजमैंट नामक संस्था के अनुसार, दुनियाभर में 52% महिलाएं रिप्रोडक्टिव ऐज में हैं, लेकिन बहुत कम महिलाएं ही पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखती हैं, जो काफी चौंकाने वाली बात है.

आज मैंस्ट्रुअल हाइजीन को बनाए रखने के लिए मार्केट में सैनिटरी पैड, टैंपोंस, मैंस्ट्रुअल कप आदि सबकुछ उपलब्ध है, फिर भी भारत में आज भी 80% महिलाएं इन का उपयोग नहीं करती हैं, बल्कि इन की जगह पुराने तरीके जैसे पुराने कपड़े, पत्तियां आदि का इस्तेमाल करती हैं, जो उन के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में सालों से चली आ रही दकियानूसी प्रथाऐ मैंस्ट्रुअल हाइजीन के सामने सब से बड़ा रोड़ा हैं.

क्यों जरूरी है मैंस्ट्रुअल हाइजीन

यूटीआई के खतरे को करे कम

अकसर जब भी महिलाएं लंबे समय तक गंदे, गीले कपड़े या फिर गंदे सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं, तो वहां पैदा हुई नमी के कारण बैक्टीरिया को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिल जाता है, जो यूरिनरी ट्रैक्ट इंफैक्शन का कारण बनता है. पैड या कपड़े में नमी के कारण उस में माइक्रोब्स जैसे इ कोली, कैंडिडा ऐल्बीकंस पैदा हो जाते हैं, जिन के परिणामस्वरूप पेशाब करने में जलन, पेट के निचले हिस्से में दर्द, बुखार, यहां तक कि बौडी में दर्द की समस्या भी हो सकती है. इन से बचने के लिए हर 4 घंटे में पैड को बदलना चाहिए. साथ ही जब भी पैड को बदलें तब साफ पानी से उस जगह को जरूर साफ करें. ऐसा करने से महिला खुद को इंफैक्शन से बचा पाएगी.

ये भी पढ़ें- कैंसर रोगियों को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट बनाएगी डांस थेरेपी

स्किन रैशेज से बचाव

स्किन पर रैशेज होने का मुख्य कारण स्किन हाइजीन का ध्यान नहीं रखना होता है. ऐसा अकसर तब होता हैजब पैड या कपड़ा गीला हो जाता है और आप उसे नहीं बदलतीं, जिस के कारण वैजाइना में इन्फैक्शन होने से स्किन इरिटेशन के कारण जांघों पर रैशेज पड़ जाते हैं. जिन में जलन, खुजली होने लगती है.

इन से आप हाइजीन का ध्यान रख कर बच सकती हैं.

एक रिसर्च के अनुसार, पैड में इस्तेमाल की गई ऐडहैसिव के कारण भी रैशेज की समस्या होती है. यह एक तरह की ग्लू होती है, जो पैड की बैक साइड पर लगाई जाती है, ताकि पैड अंडरवियर के साथ चिपक जाए, साथ ही कुछ पैड में खुशबू का भी इस्तेमाल किया जाता है.

मगर जिन महिलाओं की स्किन बहुत सैंसिटिव होती है, उन्हें इस के कारण भी रैशेज की समस्या हो जाती है. इसलिए जल्दीजल्दी सैनिटरी पैड चेंज करने के साथसाथ बायोडिग्रेडेबल पैड का ही इस्तेमाल करें. क्योंकि यह फाइबर से बना होने के कारण स्किन को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है. जबकि अन्य 90% पैड्स प्लास्टिक और क्लोरीन ग्लीच वुड पल्प से बने होने के साथ उन में कैमिकल्स का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, जो स्किन को नुकसान पहुंचाने का ही काम करते हैं. इसलिए हाइजीन के लिए बायोडिग्रेडेबल पैड्स बैस्ट हैं.

रिप्रोडक्टिव हैल्थ को रखें मैंटेन

हर महिला के जीवन में मां बनने का अनुभव सब से बेहतरीन अनुभव होता है और इस सुख से कोई भी महिला वंचित नहीं रहना चाहती है. ऐसे में अगर पीरियड्स के दौरान साफसफाई का ध्यान नहीं रखा जाता तो यह सीधेसीधे उन की रिप्रोडक्टिव हैल्थ को नुकसान पहुंचाने का ही काम करता है, क्योंकि अगर इस दौरान गंदे पैड, कपड़े का इस्तेमाल किया या समय पर नहीं बदला जाता तो इन्फैक्शन होने से यह हमारे गुप्तांग तक पहुंच कर इनर लेयर को प्रभावित कर देता है, जिस से यूटरस की दीवार, ओवरीज चाहिए, यहां तक कि ट्यूब भी खराब हो सकती है. इसलिए हमेशा साफसफाई का खास ध्यान रखें.

सर्वाइकल कैंसर से बचाव

यह सर्विक्स का यानी गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर होता है. यह कैंसर ह्यूमन पैपीलोमा वायरस की वजह से होता है. यह वायरस सैक्स के दौरान या फिर पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान नहीं रखने की वजह से भी होता है. इसलिए पीरियड्स के दौरान स्वच्छताका खास ध्यान रखें. पैड को जल्दीजल्दी बदलें, पैड चेंज करने के बाद हाथों को जरूर साफ करें. इस से काफी हद तक आप सर्वाइकल कैंसर से बच पाएंगी.

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों के लगभग 60 हजार मामले सामने आते हैं, जिन में से दोतिहाई मामले पीरियड्स में स्वच्छता न रखने की वजह से होते हैं. इसलिए मैंस्ट्रुअल हाइजीन का खास ध्यान रखना चाहिए और इस दौरान कपड़े आदि के प्रयोग से बचना चाहिए.

आप को रखे कौन्फिडैंट भी

जब भी हम पीरियड्स के दौरान कपड़े बगैरा का इस्तेमाल करती हैं तो हर समय यही डर सताता रहता है कि कहीं कपड़ा खराब न हो जाए. उठनेबैठने में भी दिक्कत होती है. लेकिन जब पैड, टैंपोन का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें समयसमय पर बदलती रहती हैं तो उस से न सिर्फ खुद की हाइजीन का ध्यान रखती हैं, बल्कि इस से कौन्फिडैंस भी बढ़ता है, क्योंकि कपड़े खराब होने की टैंशन जो नहीं होती.

ये भी पढ़ें- कैसा हो संतुलित आहार

पैड और टैंपोन के इस्तेमाल का समय

पी सेफ की सहसंस्थापक श्रीजना बगारिया बताती हैं कि लाइट और हैवी फ्लो के लिए पैड्स भी विभिन्न आकारों में आते हैं. ऐसे में पैड या टैंपोन कितनी देर में बदलना चाहिए यह इस पर निर्भर करता है कि आप के पीरियड्स में निकलने वाले ब्लड का फ्लो कितना हलका या कितना तेज है. बात करें इसे बदलने के समय की तो कम से कम 3-4 घंटे बाद पैड को बदलना चाहिए. वहीं टैंपोन को बदलने का वक्त 4-6 घंटे होता है.

इस बात को ले कर चिंतित न रहें कि टैंपोन वैजाइना के अंदर ही न फंस जाए, क्योंकि ऐसा नहीं होता. टैंपोन में एक छोर से जुड़ा स्ट्रिंग होता है, जो शरीर के बाहर ही रहता है और किसी भी टैंपून को हटाने के लिए उस का इस्तेमाल होता है. इसलिए ये काफी सेफ है. बस खुद की हाइजीन के साथ कोई सम झौता न करें.

बच्चों के लिए बनाएं टेस्टी और हेल्दी व्हीट पास्ता

पास्‍ता एक ऐसी डिश है जिसे हर कोई खाना पसंद करता है. बच्‍चे ही नहीं बड़े भी इसे बहुत शौक से खाना पसंद करते हैं. लेकिन क्‍या हो जब टेस्‍ट के साथ पौष्टिकता भी मिल जाएं. जी हां आज हम आपको हेल्‍दी गेंहू पास्‍ता की रेसिपी बनाना सीखाएंगे.

आइये जानते हैं इसे बनाने की रेसिपी.

सामग्री

दो कप होल व्हीट पास्ता

5 लहसुन की कली

3 सूखी लाल मिर्च

2 कप टोमेटो पल्प

1 टमाटर बारीक कटा हुआ

2 चुटकी इटालियन सीजनिंग

ये भी पढ़ें- स्नैक्स में परोसें पनीर बॉल्स

तुलसी की पत्तियां

1 चम्मच कुकिंग ऑयल

नमक स्वादानुसार

काली मिर्च पाउडर

विधि

एक पैन में तेल गर्म करें और इसमें कूटी हुई लहसुन, लाल मिर्च और इटैलियन सीजनिंग डालें. जब लहसुन सुनहरे रंग की हो जाए तो इसमें कटे हुए टमाटर डालें और पकाएं.

थोड़ी देर पकाने के बाद इसमें टोमेटो पल्प डालें और फिर इसमें पास्ता मिलाकर इसे चलायें. पैन में पूरा पानी भर दें जिसमें पास्ता पूरी तरह समां जाए.

अब इसमें नमक डाल दें और फिर तेज आंच पर कुछ देर पकने दें. जब पानी उबलने लगे तो थोड़ी थोड़ी देर पर चमचे की मदद से इसे चलाते रहें जिससे पास्ता चिपके नहीं.

इस बात का ध्यान रखें कि पास्ता का पानी पैन में ही रहना चाहिए क्योंकि ये पास्ता बेस की तरह काम करेगा. अब आंच बंद कर दें और ऊपर से तुलसी की कुछ पत्तियां डालकर सजाएं.

ये भी पढ़ें- फैमिली के लिए बनाएं हींग वाली खस्ता कचौरी

आप चाहें तो काली मिर्च पाउडर भी छिड़क सकते हैं. जिन्हें चीज पसंद है वो अब इसमें ऊपर से चीज डाल सकते हैं. बस आपका लजीज पास्ता पूरी तरह तैयार है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें