REVIEW: बेवजह की जटिलताओं में फंसी बाल फिल्म ‘अटकन चटकन’

रेटिंग: डेढ़ स्टार

निर्माता:विशाखा सिंह

प्रस्तुति: ए आर रहमान

लेखक व निर्देशकः शिव हरे

कलाकारः जगदीश अमृतायन,  लायडियान नधास्वरन, यश राणे, सचिन चैधरी, तमन्ना चतुर्वेदी, देबाश्री चक्रवर्ती,  राज पुरोहित व अन्य.

अवधि: दो घंटे तीन मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः जी 5

‘‘नर हो न निराश करो मन को’’का संदेष देने वाली बेहतरीन विषयवस्तु व कथानक वाली बाल फिल्म का लेखक व निर्देशक शिव हरे ने बेवजह के जटिल रिश्तों की कथा घुसाकर पूरी फिल्म का बंटाधार कर डाला. दर्शक को केवल बच्चे के मुरझाए हुए भूरे व गंदे चेहरे ही याद रह जाते हं. यह लेखक व निर्देशक की विफलता ही है. फिल्म के प्रस्तुतकर्ता के रूप में संगीतकार ए आर रहमान का नाम देखकर दर्शक इस फिल्म को देखने के लिए प्रेरित होता है, पर उसके हाथ निराशा ही हाथ लगती है.

कहानीः

कहानी शुरू होती है विदेश में कहीं रह रहे गुड्डू से, जिसे उसके बचपन के मित्र माधव का कूरियर मिलता है, जिसमें माधव की शादी का निमंत्रण और एक किताब ‘‘अटकन चटकन’’है. इस किताब में उनके बचपन की ही कहानी है. गुड्डू उस किताब को पढ़ना शुरू करता है. कहानी शुरू होती है झांसी के पास एक गाॅंव से, जहां बारह वर्ष का गुड्डू अपने शराबी पिता की वजह से कुछ दूर शहर में तिवारी चाय वाले की दुकान पर नौकरी कर रहा है. उसकी मां मोहिनी ने उन्हे छोड़ दिया है. उसकी छोटी बहन लता है. गुड्डू की कमाई से ही उनका पेट भर पाता है. पर गुड्डू की हर हरकत में संगीत है. वह एक ‘‘यंग्स आर्केस्ट् दोनों’’ ग्रुप में नौकरी कर संगीत सीखना चाहता है, पर उसे अवसर नहीं मिलता.

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उसका सपना ‘तानसेन संगीत महा विद्यालय’से शिक्षा हासिल करना है. उसका दोस्त माधव पैर से अपाहिज है, पर फुटपाथ भीख मांगते हुए भी किताबें पढ़ता रहता है. नाटकीय तरीके से गुड्डू की मुलाकात छुट्टन और मीठी से होती है. पता चलता है कि मंगू चाचा ने उन्हे रेलवे माल गाड़ी के एक डिब्बे में रहने की जगह दे रखी है और वह भीख में मिली रकम में हिस्सा लेता है. माधव योजना बनाता है कि एक अपना संगीत का बैंड बनाया जाए, जिसमें माधव, गुड्डू, छुट्टन व मीठी हो. उधर ‘तानसेन महाविद्याल के प्रिंसिपल डिसूजा परेषान है,  पिछले तीन वर्ष से उनका विद्यालय संगीत प्रतियोगिता हारता आ रहा है. वह चाहते हैं कि इस बार उनके अवकाश ग्रहण से पहले उनका विद्यालय संगीत प्रतियोगिता जीत जाए, पर उन्हें अपने विद्यालय के छात्रों से उम्मीद नही है. उन्हे माधव व गुड्डू के बारे में पता चलता है, तो वह उन्हे अपने विद्यालय में प्रवेश देकर संगीत शिक्षक मोहिनी से शिक्षा दिलाकर प्रतियोगिता के लिए तैयार करवाते हैं.

प्रतियोगिता से एक दिन पहले पता चलता है कि गुड्डू के पिता विष्णु मशहूर पखावज वादक थे और उनकी मां मोहिनी मषहूर गायिका. मगर मोहिनी की लोकप्रियता के चलते विष्णु मोहिनी को घर से भगा दिया था. उधर विद्यालय के नाराज छात्र मंगू चाचा को पैसे देकर यह व्यवस्था करते हैं कि माधव की टीम प्रतियोगिता के लिए न पहुंचे. जबकि विष्णु यह जान गए हैं कि मोहिनी व गुड्डू मिलते हैं, इसलिए वह गुड्डू को घर से नही निकलने देता. पर घटनाक्रम इस तरह बदलते हैं कि माधव, गुड्डू,  छुट्टन व मीठी प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं व जीत भी हासिल करते हैं, पर एक घटनाक्रम के चलते हार का फैसला सुनने से पहले ही माधव सबको छोड़कर चला जाता है. गलती का अहसास कर माधव, गुड्डू से मिलने आता है, तो मुलाकात नही हो पाती है. पर अब उसने अपनी शादीदी में गुड्डू, छुट्टन व मीठी को बुलाया है.

लेखन व निर्देशन:

निर्देशक शिव हरे ने बच्चों के हिसाब से एक बेहतरीन कहानी चुनी थी,  मगर फिर उसमें तमाम जटिलताओं को पिरोकर  पूरी फिल्म का बंटाधार कर दिया अब या फिर ना तो प्रभावित करती है ना ही खुशी देती है. और ना ही दर्शक चाहता है कि अपने बच्चों को या फिल्म दिखाना चाहता.  निर्देशन भी काफी कमजोर है.

अभिनय:

कमजोर पट कथा और सही चरित्र चित्रण ना होने की वजह से सभी कलाकार सिर्फ साधारण अभिनय ही कर पाए हैं.

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‘बालिका वधू’ फेम इस एक्ट्रेस के घर गूंजीं किलकारी, शादी के 7 साल बाद बनीं मां

दुनिया में जहां कोरोनावायरस का कहर बढ़ता जा रहा है. वहीं कई लोगों की जिंदगी में खुशियां दस्तक दे रही हैं. बीते कुछ महीनों में कई सेलेब्स ने अपनी जिंदगी में नए मेहमान का स्वागत किया है. वहीं अब इन सेलेब्स में बालिका वधू में काम कर चुकीं एक्ट्रेस अंजुम फारुकी का नाम भी जुड़ गया है. बालिका वधू स्टार की जिंदगी में ये खुशी 7 साल बाद आई है, जिसकी खुशी उन्होंने सोशलमीडिया पर जाहिर की है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

बालिका वधू स्टार अंजुम ने बेटी की फोटो शेयर करते हुए बताया कि उनकी बेटी का जन्म 28 अगस्त, 2020 को हुआ था. अपनी बेटी पर प्यार बरसाते हुए अपनी पोस्ट पर अंजुम फारुकी ने लिखा कि, ‘दुनिया में तुम्हारा स्वागत है. मैं आप सभी को अपनी बेटी हानिया सैय्यद से मिलवाना चाहती हूं.’ अंजुम फारुकी की बेटी की फोटो में नन्हें हाथ नजर आ रहे हैं.

 

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Welcome to the world lil girl. Meet my daughter Haneya Syed 👼 28.08.2020.

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नेवी में काम करते हैं पति

 

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Here’s why I can never fit into 26″ waist jeans & that’s fine 😁 Watch till the end 🍧 #nofilters #foodielife #icecream #cake

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एक्टिंग की दुनिया से दूर अंजुम फारुकी के पति नेवी में काम करते हैं. अब वह अपनी पर्सनल लाइफ में व्यस्त हो चुकी हैं. एक इंटरव्यू में अंजुम फारुकी ने इस बात का खुलासा किया था कि वह टीवी की दुनिया को बहुत मिस करती हैं. हालांकि अंजुम फारुकी की तरह ही मोहिना कुमारी सिंह भी टीवी की चमकती इस दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं.

बालिका वधू से बटोरीं थी सुर्खियां

 

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7 years with this amazing man.. #alhamdulillah #grateful #7th

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सीरियल बालिका वधू में गौरी के किरदार में नजर आ चुकीं अंजुम फारुकी ने फैंस के बीच काफी पौपुलर हुई थीं. इस शो के जरिए अंजुम फारुकी को घर-घर में एक नई पहचान मिली थी. हालांकि कुछ समय बाद ही अंजुम फारुकी ने टीवी की दुनिया को अलविदा कहकर साल 2013 में शादी कर ली थी, जिसके बाद अब कर वह टीवी की दुनिया से दूरी बना चुकी हैं.

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Happy teacher’s day: जानें कैसे थे स्टार्स के अपने टीचर्स के साथ रिश्ते

बौलीवुड के सितारों पर बड़ों से लेकर बच्चा, हर कोई अपनी जान छिड़कता है. लेकिन कुछ सितारे ऐसे हैं जो दूसरों पर भी जान छिड़कते हैं. हर किसी का कोई ना कोई क्रश या कहें पहला प्यार होता है. वहीं बौलीवुड सितारें भी इसमें पीछे नहीं हैं. दरअसल आज यानी 5 सितंबर को टीचर्स डे सेलिब्रेट किया जाता हैं. इसी खास मौके पर आज हम आपको बताएंगे कि सेलेब्स कैसे अपने टीचर्स को दिल दे बैठे थे. और कौन उनका पहला प्यार बना था.

1. टीचर के लिए की पढ़ाई से दोस्ती

अपने क्रश के लिए कोई भी काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं लोग. इन्हीं में शामिल हैं. बौलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना, जिन्हें स्कूल में अपनी गणित की टीचर बहुत पसंद थी और अपने क्रश के पास रहने के लिए उन्होंने गणित से भी दोस्ती कर ली थी. हालांकि आगे चल कर उनका दिल किसी और टीचर पर आ गया था.

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2. टीचर से फ्लर्ट करते थे सलमान खान

 

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Respect to all the farmers . .

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सुर्खियों में रहने वाले बौलीवुड के दबंग खान यानी सलमान खान ने अपने आप इस बात का खुलासा करते हुए कहा था कि वह अपनी स्कूल टीचर को बहुत पंसद किया करते थे, जिसके कारण वह अपनी टीचर के साथ फ्लर्ट करने का मौका हाथ से नहीं जाने देते थे.

3. जब रणबीर कपूर को हुआ प्यार

बौलीवुड के चौकलेट बौय, जिन पर लड़कियां मरतीं हैं वह भी दूसरी क्लास में किसी के उपर जान लुटा चुके हैं. दरअसल, रणबीर कपूर को अपनी सेकेंड स्टैंडर्ड की टीचर से ही प्यार हो गया था. रणबीर उसे अपना पहला प्यार मानते हैं. इसका खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू में करते हुए कहा था कि मम्मी नीतू कपूर के बाद वह टीचर रणबीर को बहुत प्यार किया करती थीं.

4. विदेशी टीचर पर लट्टू हुए थे वरूण धवन

 

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Sweet 16🍼

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यूके में जब बिजनेस मेनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे वरूण धवन को अपनी एक्टिंग टीचर बहुत पसंद थी. और केवल 21 साल के वरूण की टीचर उनसे दो साल बड़ी थी. वह बात अलग है कि, वह अपनी टीचर से दिल की बात तो नहीं कह पाए थे.

5. साइंस टीचर पर मर मिटे थे सिद्धार्थ मल्होत्रा

 

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#GoodMorning ☀️

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बौलीवुड हंक सिद्धार्थ मल्होत्रा ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि, उन्हें 9वीं क्लास में अपनी साइंस टीचर पर क्रश था. सिद्धार्थ को उनसे बात करना बेहद पसंद था. वह सबसे बहुत अच्छे से बात करती हैं और उन्हें यही बात बेहद पसंद आती थी.

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Teacher’s Day 2020: गुरु के बारे में जानें क्या कहते है टीवी सितारें

गुरु की भूमिका हर व्यक्ति को निखारने में किसी न किसी रूप में सहायक होता है. यही वजह है कि गुरु शिष्य की परंपरा सालों से चली आ रही है. पहले ये शिक्षा आश्रमों और कुटियों में दिया जाता था, पर अब समय के साथ-साथ इसका रूप स्कूल और कॉलेज ले चुके है. ऐसा माना जाता है कि गुरु की शिक्षा के बिना किसी व्यक्ति का समुचित विकास संभव नहीं. गुरु केवल अध्यापक ही नहीं कोई भी हो सकता है, जो आपको सही मार्गदर्शन करवाएं और जीवन में आये किसी भी सही या गलत बातों से परिचित करवाएं. ये सही है कि बदलते समय में गुरु की परिभाषा बदल चुकी है.

गुरु शिष्य परंपरा में भी बदलाव आ चुका है, पर इसकी महत्ता को कभी भूलाया नहीं जा सकता. यही वजह है कि हर साल 5 सितम्बर को टीचर्स डे’ मनाया जाता है. इसी आधार पर ये जानने की कोशिश की गयी हैकि आखिर आज की पीढ़ी के जीवन में गुरु की परिभाषा क्या है? क्या सोचते है वे इस बारें में? कौन है उनके जीवन का आदर्श जिसे वे अपना गुरु या मेंटर मानते है? आइये जाने क्या कहते है छोटे पर्दे के सितारें.

रिषिना कंधारी कहती है कि मुझे जीवन में जिन लोगों ने सही और गलत का ज्ञान दिया है, वही मेरे गुरु है. जीवन में बहुत सारें लोग ऐसे मिलते है जो कुछ न कुछ आपको सीख देते रहते है, मैं अपने आपको ‘एकलव्य’ और शिक्षा देने वाले को ‘द्रोणाचार्य’ कहती हूं. अभी मैं जो शो कर रही हूं उसमें मुझे मारवाड़ी संवाद बोलने पड़ते है, जिसके लिए मुझे मेरे निर्देशक धर्मेन्द्र शर्मा और मेरी को एक्ट्रेस नीलू बाघेला है, जो मुझे संवाद के बारें में पूरी जानकारी देती है, अभी मैं उन्हें ही अपना गुरु मान रही हूं.

शशांक व्यास के हिसाब से मेरे अध्यापक मेरे जीवन के बहुत बड़े आदर्श है, उन्होंने मुझे जीवन के सही रास्ते दिखाए है, जिसपर चलकर आज मैं सफल हो पाया हूं, पर मेरी माँ की भूमिका भी इसमें कम नहीं है, हर पल, हर रास्ते पर वह मेरे साथ चली है. यहाँ मुझे एक बात का दुःख है कि गुरु को हमेशा अपने शिष्यों को समान दृष्टि से देखने की जरुँरत है, वे कम पढ़ाकू बच्चे और अधिक पढने वाले बच्चों के बीच में भेद-भाव कभी न करें. इससे बच्चे का मनोबल टूटता है. एक बार एक अध्यापक ने मेरे पिता से कहा था कि मेरा कोई एम्बिशन या गोल नहीं है, क्योंकि मेरे मार्क्स कम आये थे. मेरे हिसाब से अगर किसी छात्र को नंबर कम आते है तो अध्यापक को उस छात्र पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, इससे उन्हें आगे बढ़ने और आत्मविश्वास को बनाये रखने में सफलता मिलती है. बच्चों को सफलता से अधिक असफलता से निपटने की जानकारी गुरु को देने की आवश्यकता है. मार्कस जीवन में अधिक महत्व नहीं रखते, क्योंकि जीवन में हर कठिन परिस्थिति से निकलने में जो व्यक्ति सफल होता है, वही आज कामयाब है.

 

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Cinema is the most beautiful fraud in the world. 🥰

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अमल सेहरावत कहते है कि जो व्यक्ति आपको जीवन के उद्देश्य और आशावादिता को बनाये रखने में सहयोग दे वही गुरु है. मेरे पेरेंट्स और कास्टिंग डायरेक्टर अतुल मोंगिया ये दोनों मेरे जीवन के सही मेंटर रहे है. मुझे अभी भी याद है जब मुझे एक्टिंग में कोई काम नहीं मिल रहा था और मेरा आत्मविश्वास डगमगा रहा था, तब इन लोगों ने मुझे सहारा दिया और मेरे कॉन्फिडेंस को बनाए रखने में सहायता की थी और बर्तमान में रहने और उसे एन्जॉय करने की सलाह दी थी, इससे मैं अपनी सशक्तता को बनाये रखा और आज सफल हूं.

धारावाहिक ‘उडान’ और नागिन फेम विजेंद्र कुमेरिया का कहना है कि गुरु मेरे लिए वह है जो मुझे सही दिशा में चलने के लिए गाइड करें और जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करें. मेरे जीवन में मेरे पिता एक दोस्त, मेंटर और गाइड है. बचपन की कुछ यादे मुझे आज भी अच्छी लगती है. मुझे याद आता है जब मैं जूनियर क्लास में था और 5 साल का था, मेरा भाई सेकंड क्लास में था. उसकी क्लास टीचर एक पारसी लेडी थी, जो बहुत खूबसूरत थी. मैं कभी-कभी मेरे भाई से मिलने उसकी कक्षा में जाया करता था, क्योंकि मुझे वह लेडी मुझे चोकलेट दिया करती थी. एक दिन मैंने उसे कहा था कि मैं बड़ा होकर उनसे शादी करूँगा. अब मुझे ये सोचकर हंसी आती है.

 

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Need some more greenery in the concrete jungles. Don’t we???

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ध्रुवी हल्दंकर कहती है कि टीचिंग एक नोबल प्रोफेशन है और ये किसी भी बच्चे को एक आकार देने के साथ-साथ उसके जीवन को एक दिशा प्रदान करती है. मेरी गुरु पंडित बिरजू महाराज की बेटी ममता महाराज है, जिन्होंने मुझे जीवन का उद्देश्य बताया और समझाया है. वह मेरी कथक की गुरु है. इसके अलावा मेरी इंग्लिश टीचर अनीता अरोड़ा,वीना मलिक, मैथ टीचर ब्रांडा ब्रिगेंजा, जो मेरे माँ के हाथ का बनाया हुआ अचार पसंद करती थी और मुझे कई बार एक बोतल अचार लाने को कहा करती थी.

अंकित सिवाच कहते है कि गुरु केवल स्कूल और कॉलेज में ही नहीं पाए जाते. जो भी व्यक्ति आपके जीवन में आपको सही रास्ता दिखाए, आप पर विश्वास रखे, वही गुरु कहलाया जा सकता है. मैं परिवार से लेकर उन सभी के लिए आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने मुझे यहाँ तक पहुँचने में सहायता की है और अभी तक खुद को रुटेड रख पाया हूं. मुझे याद आता है, जब मैं 9 वीं कक्षा में था और मेरी फीलिंग नुपुर मैडम के लिए हो गया था. मैं बहुत चिंतित था और कई रातों तक ये सोचकर सो नहीं पाया था कि कही ये बात किसी को पता न चल जाय. आज इसे सोचकर हंसी आती है.

डिब्रूगढ़ आसाम और धारावाहिक संस्कार की चर्चित शमीन मन्नान के जीवनमें अलग-अलग समय पर अलग लोगों ने दिशा निर्देश दिया है, जिसमें नीरज काबी ने एक्टिंग के क्राफ्ट को समझाया है. वह कहती है कि मुझे याद आता है जब मैं 10 वीं कक्षा में थी और मुझे मेरे साइंस टीचर ने क्लासरूम से बाहर घंटो खड़ा किया था, क्योंकि मैंने क्लास में अपनी बेस्ट फ्रेंड को देखकर हंसी थी, जो मुझे बहुत ख़राब लगा था, क्योंकि सभी मेरे जूनियर्स मुझे देखकर हँसते हुए जा रहे थे, इससे मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुयी थी और मैं बाद में पूरे दिन रोई थी. अब मुझे उस बात को सोचकर हंसी आती है.

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धारावाहिक अनुपमा में चर्चित होने वाले अभिनेता आशीष मेहरोत्रा के अनुसार एक अच्छे गुरु की जरुरत हर बच्चे को होती है, ताकि वह उसके सपनो और उद्देश्यों को साकार होने में सही दिशा दिखा सकें. ये पेरेंट्स के साथ-साथ गुरु का होता है. जिसमें वह जीवन के मूल्यों, आज़ादी के सही अर्थ, आशा-निराशा, सही -गलत, सफलता-असफलता आदि सभी को सीखता है. मेरे जीवन में केवल एक मेंटर ही नहीं कई रहे है, जिसमें माता-पिता से लेकर पडोसी, सहकर्मी आदि सभी का किसी न किसी रूप में सहयोग मेरे कामयाबी में रहा है. मेरे स्कूल टीचर माधुरी मैडम, मुक्ता मैडम, अजय सर आदि के लिए मेरा सम्मान हमेशा से है. जबकि मुंबई आने पर कास्टिंग डायरेक्टर काविश सिन्हा, सौरव सर और प्रशांत सर आदि सबका सहयोग मेरे साथ रहा है. उन सभी के लिए मेरा आभार सदैव रहेगा.

किस स्किन टोन पर कैसा मेकअप फबेगा, जानिए यहां

महिलाओं को यह गलतफहमी होती है कि वे चेहरे पर क्रीम, पाउडर औैर कौस्मैटिक के दूसरे उत्पादों को लगा कर खूबसूरत दिखने लगेंगी. लेकिन ऐसा नहीं है. मेकअप चेहरे के आकार और त्वचा के रंग को ध्यान में रख कर ही करना चाहिए. तभी वह आप को खूबसूरत दिखाने में मदद कर सकता है.

बीते दिनों दिल्ली प्रैस भवन में गृहशोभा की फेब मीटिंग में प्रतिभागियों को मेकअप के इन्हीं गुरों को सिखाने के लिए शिल्पी ब्यूटी सैलून की मेकअप आर्टिस्ट शिल्पी कपूर ने बताया कि मेकअप हमेशा ऐसा होना चाहिए जिस से खूबसूरती निखर कर सामने आए.

गोरी त्वचा का मेकअप

सैशन की शुरुआत हुई फेयर स्किन यानी गोरी त्वचा के मेकअप टिप्स से जिस में शिल्पी ने बताया कि ज्यादातर पेल या फेयर स्किन वाली महिलाओं की त्वचा नाजुक होती है. जरा सी भी ईचिंग या स्क्रैच से उन का चेहरा लाल हो जाता है और उन की त्वचा पर मार्क्स दिखाई देते हैं. इसलिए इस रंग की महिलाओं को अलग तरह के मेकअप की जरूरत होती है.

पेल या फेयर स्किन पर मेकअप के दौरान गलती होने के बहुत चांसेज होते हैं. साथ ही गलत तकनीक से किए गए मेकअप से चेहरा भद्दा लगने लगता है.

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रंगों का इस्तेमाल

गोरे रंग या फेयर स्किन पर ब्राइट कलर हमेशा ही अच्छे लगते हैं. इसलिए मेकअप में भी इस बात का ध्यान रखें. फेयर कलर की महिलाओं को मेकअप में हमेशा डार्क और थोड़े चमकीले रंगों का प्रयोग करना चाहिए. वैसे ब्रौंज कलर फेयर कलर वालों पर बहुत खूबसूरत लगते हैं. खासतौर पर होंठों पर गहरे रंग की लिपस्टिक लगानी चाहिए.

फाउंडेशन

कई बार रंग साफ होेने की वजह से महिलाएं मेकअप बेस नहीं बनातीं. लेकिन यह गलत है. फाउंडेशन के इस्तेमाल से त्वचा को स्मूथ बेस मिलता है. साथ ही इस से स्किन टोन भी एक जैसा हो जाता है. यहां एक बात पर ध्यान देना जरूरी है. वह यह कि फेयर कलर वालों को फाउंडेशन चुनते वक्त बहुत सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यदि वे गलत फाउंडेशन का चुनाव करेंगी, तो उन का रंग काला या फिर ग्रे दिखने लगेगा. खासतौर पर रोशनी में गलत फाउंडेशन का असर ज्यादा दिखाई देता है. इसलिए फाउंडेशन लगाने से पहले उसे एक बार त्वचा पर लगा कर टैस्ट कर लेना चाहिए.

आंखों के लिए साधारण मेकअप

गोरे रंग वाली महिलाओं को आंखों का मेकअप जहां तक हो साधारण रखना चाहिए. वैसे तो इन के लिए काजल, आईलाइनर और मसकारा ही पर्याप्त होता है, लेकिन हलके रंग का आईशैडो भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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ब्लशर जरूर लगाएं

गालों पर कभी भी ब्लशर का इस्तेमाल करना न भूलें. इस के बिना आप का मेकअप पूरा नहीं होगा. पेल स्किन को खूबसूरत और ग्लोइंग दिखाने के लिए हलके ब्लशर की जरूरत होती है.

सांवली त्वचा का मेकअप

डार्क स्किन यानी सांवली त्वचा वाली महिलाओं को हमेशा इस बात की शिकायत रहती है कि वे अपनी त्वचा की रंगत को निखार नहीं सकतीं. इस के लिए वे बाजार में उपलब्ध बहुत सारे उत्पादों का प्रयोग करती हैं. कभीकभी इस की वजह से वे हीन भावना का शिकार भी होती हैं. लेकिन डार्क स्किन वाली महिलाएं भी मेकअप के जरीए अपनी त्वचा की रंगत को निखार सकती हैं और किसी भी समारोह में अलग दिख सकती हैं. ऐसी त्वचा वाली महिलाओं को मेकअप के दौरान अपनी स्किन टोन का ध्यान रखना चाहिए. इस के अलावा अपने चेहरे से मिलताजुलता कलर लिपलाइनर और ब्लशर का इस्तेमाल कर वे खूबसूरत दिख सकती हैं.

लिक्विड फाउंडेशन करें इस्तेमाल

सांवली महिलाएं मेकअप के लिए लिक्विड फाउंडेशन इस्तेमाल करें, क्योंकि यह त्वचा के रंग से मिल जाता है. यदि आप को अपनी स्किन टोन से मेल खाता हुआ फाउंडेशन नहीं मिलता है, तो आप 2 रंगों के फाउंडेशन को मिला कर अपनी टोन का रंग बना सकती हैं. फाउंडेशन लगाने से पहले चेहरे पर मौइश्चराइजर लगाना न भूलें.

ब्लशर का इस्तेमाल कभीकभी

डार्क स्किन वाली महिलाओं को हमेशा चेहरे पर ब्लशर नहीं लगाना चाहिए. हां, कभीकभार पार्टी आदि में आप इस का प्रयोग कर के एक सुंदर सा लुक पा सकती हैं. चेहरे को ब्लश करने के लिए डीप औरेंज, वाइन या कोरल रंगों का प्रयोग करें.

लिपस्टिक का प्रयोग

सांवली त्वचा वाली महिलाओं को लिपस्टिक का चुनाव भी रंग के हिसाब से करना चाहिए. जिन महिलाओं का रंग डार्क हो उन्हें पेल कलर्स यानी हलके रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. अगर आप को लिपस्टिक लगाना पसंद है तो आप डार्क कलर की ही लिपस्टिक लगाएं, जैसे वाइन, रैड, प्लम और ब्राउन आदि रंग आप की सुंदरता निखारेंगे.

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आईब्रोज के लिए

ऐसी महिलाओं को मेकअप के दौरान अपनी आइब्रोज को नजरअंदाज बिलकुल भी नहीं करना चाहिए. अपनी आईब्रोज को शेप देने के लिए पैंसिल और पाउडर का प्रयोग करना बेहतर होगा. ये आप की आंखों की खूबसूरती को बढ़ाते हैं.

कैसे चुनें सही ब्रा

आप को यह जान कर हैरानी होगी कि 10 में से 8 महिलाएं गलत ब्रा का चुनाव करती हैं. शरीर में ब्रा सही तरह फिट नहीं होगी तो ब्रैस्ट का आकार सही नहीं दिखेगा और आप कितनी भी स्टाइलिश ड्रैस क्यों न पहन लें वह आप पर अच्छी नहीं दिखेगी.

ब्रा ब्रैस्ट साइज के अनुसार ही पहननी चाहिए. कई बार महिलाएं या तो बड़े साइज की ब्रा पहन लेती हैं या फिर छोटे साइज की, जिस से ब्रैस्ट में ढीलापन आने लगता है और आकार में भी बदलाव दिखने लगता है. कई बार ज्यादा टाइट ब्रा पहनने से स्किन ऐलर्जी भी हो जाती है.

अगर आप चाहती हैं कि ब्रैस्ट का साइज सही रहे और वह सुडौल दिखे तो सही ब्रा का चुनाव बहुत जरूरी है.

आइए, जानते हैं सही ब्रा कैसे चुनें और उसे पहनते वक्त किनकिन बातों का ध्यान रखें:

ब्रा का सही माप

ब्रा का सही माप लेने के लिए इंचीटेप का इस्तेमाल करें. ब्रा साइज मापने के लिए बैंड साइज और कप साइज का माप लेना होता है.

बैंड साइज मापें

बैंड साइज मापने के लिए ब्रैस्ट के नीचे से चारों तरफ की लंबाई मापें. ध्यान रहे बांहें नीचे की तरफ रहें. अगर आप का बैंड साइज औड नंबर में आता है तो उस में 1 जोड़ दें. यदि आप का बैंड साइज 29 है तो उस में 1 जोड़ने पर उसे 30 माना जाएगा यानी आप का बैंड साइज 30 है.

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कप साइज ऐसे मापें

कप साइज मापने के लिए इंचीटेप को ब्रैस्ट के सैंटर पौइंट पर रख कर मापें. कप साइज हमेशा बैंड साइज से ज्यादा होगा. यदि आप का कप साइज 32 है और आप का बैंड साइज 30 तो इस में 2 इंच का अंतर है. 2 इंच का मतलब होता क्च कप यानी आप का ब्रा साइज 32 क्च है. यदि आप के कप साइज और बैंड साइज में 1 इंच का अंतर है तो इस का मतलब है ्न कप. अब आप दुकान पर जा कर आसानी से अपने साइज की ब्रा खरीद सकती हैं.

रखें इन बातों का ध्यान

कई महिलाएं व लड़कियां कोईर् भी साधारण ब्रा हर कपड़े के साथ पहन लेती हैं. लेकिन कुछ कपड़ों के लिए खासतौर पर ब्रा डिजाइन की जाती हैं. अगर आप उन परिधानों के साथ सही ब्रा पहनेंगी तो आप ज्यादा बेहतर और परफैक्ट दिखेंगी.

आइए, जानते हैं किन परिधानों के साथ कौन सी ब्रा पहनें:

पुशअप ब्रा: पुशअप ब्रा अधिकतर वे लड़कियां व महिलाएं पहनना पसंद करती हैं, जिन का ब्रैस्ट साइज कम होता है. कई बार जब टाइट कपड़े पहनती हैं तो ब्रा लाइन पता चलने लगती है. लेकिन पुशअप ब्रा में ऐसा नहीं होता. पुशअप ब्रा का एक फायदा यह भी है कि इसे किसी भी कपड़े के साथ पहना जा सकता है.

स्पोर्ट्स ब्रा: जो लड़कियां जिम जाती हैं या खेलकूद में हिस्सा लेती हैं, उन्हें उस वक्त स्पोर्ट्स ब्रा का इस्तेमाल करना चाहिए. यह ब्रैस्ट को पूरा कवर करती है. कई लड़कियां डांस या जिम करते वक्त नौर्मल ब्रा का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन जब वे ऐक्सरसाइज या जंप करती हैं तो बहुत अजीब लगता है. इसलिए स्पोर्ट्स ऐक्टिविटीज के समय लड़कियों को स्पोर्ट्स ब्रा का इस्तेमाल करना चाहिए.

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स्टिक औन ब्रा: स्टिक औन ब्रा शरीर से आसानी से चिपक जाती है. यह 2 कप के साथ आती है. इस में स्ट्रैप नहीं होता. यदि आप बैकलैस या स्ट्रैपलैस ड्रैसेज पहन रही हैं तो यह ब्रा आप के लिए परफैक्ट है.

अंडरवायर ब्रा: अंडरवायर ब्रा में एक स्ट्रिप या वायर होती है, जो ब्रा के अंदर होती है. इस ब्रा को पहनने के बाद यह ब्रैस्ट के नीचे सैट हो जाती है. ब्लाउज और टौप के साथ इस ब्रा को पहन सकती हैं.

मोल्डेड कप ब्रा: यह ब्रा एक गोल और सीमलैस शेप तैयार करती है. इसे पहनने के बाद कोई भी लाइन नहीं दिखती. यह ब्रा हाइनैक और टीशर्ट के साथ पहनने के लिए बेहतरीन है.

फैमिली के लिए बनाएं हींग वाली खस्ता कचौरी

शाम के समय नाश्ते में कचौरी और चाय का मेल स्वाद को और बढ़ा देता हैं. आइए जानते हैं खस्ता कचौरी बनाने की विधि.

सामग्री

मैदा – 220 ग्राम

तेल – 2 चम्मच

नमक – 1 चम्मच

बेसन – 50 ग्राम

सौंफ – 1 चम्मच

लाल मिर्च – 1 चम्मच

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धनिया के बीज – 1 चम्मच

आमचूर पाउडर – 1/4 चम्मच

अदरक पाउडर – 1/4 चम्मच

हींग – 1/8 चम्मच

पानी – 2 चम्मच

विधि

खस्ता कचौरी बनाने के लिए सबसे पहले आप एक बाउल लें और उसमें मैदा, तेल और नमक डालकर इसे पानी से गूंथ लें. अब दूसरा बाउल लें और उसमें बेसन, धनिया के बीज, सौंफ, हींग, आमचूर, तेल और नमक डालकर अच्छे से मिला लें.

अब इस मिश्रण को एक पैन में थोड़े-से तेल डालकर भून लें. ठंडा होने पर इसमें पानी मिलाकर इसे सॉफ्ट बना लें.

फिर तैयार किया हुआ गूंथे हुए आटे की लोई बना लें. लोई को हल्के हाथों से दबाएं और इसमें बेसन का तैयार किया हुआ मिश्रण को भरें.

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अब इसे मोटी रोटी की तरह बेलें. एक कड़ाही में तेल गर्म करें और कचौरी को डीप फ्राई करें. कचौरी को गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई करें. खस्ता कचौरी बनकर तैयार हैं.

फेस्टिव सीजन के लिए परफेक्ट है ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की ‘नई कीर्ति’ के लुक

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya kehlata hai) में इन दिनों ‘कार्तिक’ और ‘नायरा’ के साथ-साथ ‘कीर्ति’ के ट्रैक पर भी जोर दिया जा रहा है. ‘कीर्ति’ के एक्स हस्बैंड के साथ नया ट्रैक फैंस को पसंद आ रहा है. वहीं मोहेना कुमारी की जगह लेने वाली एक्ट्रेस हर्षा खंडेपरकर (Harsha khandeparkar) भी फैंस को काफी पसंद आ रही हैं. कई सीरियलों में अपनी एक्टिंग से फैंस का दिल जीत चुकीं एक्ट्रेस हर्षा इन दिनों ‘कीर्ति’ के रोल में खुद को ढालने में लगी हुई हैं. लेकिन आज हम हर्षा की एक्टिंग या शो की नहीं बल्कि उनके फैशन की करेंगे.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में वह इन दिनों इंडियन लुक में नजर आ रही हैं, जो फेस्टिव सीजन के लिए परफेक्ट लुक है. आइए आपको दिखाते हैं ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की ‘नई कीर्ति’ के फेस्टिव लुक की झलक….

1. शरारा लुक है परफेक्ट

इन दिनों शरारा लुक लोगों के बीच काफी पौपुलर है. बौलीवुड से लेकर टीवी एक्ट्रेसेस अक्सर शरारा फैशन कैरी करते हुए नजर आते हैं. हाल ही में हर्षा फ्लावर प्रिंट वाले शरारा लुक में नजर आई, जिसे आप फेस्टिव सीजन में आसानी से कैरी कर सकती हैं. इसके साथ आप मल्टी कलर ज्वैलरी कैरी कर सकती हैं.

 

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2. लहंगा है परफेक्ट

अगर आप लहंगे की शौकीन हैं तो हर्षा का ये लुक ट्राय करना ना भूलें, पीले कलर के सिंपल लहंगे के के साथ हैवी दुपट्टा और ग्रीन कलर के कौम्बिनेशन वाली ज्वैलरी आपके लिए परफेक्ट लुक है, जिसे आप फेस्टिव हो या वेडिंग हर सीजन में ट्राय कर सकती हैं.

3. प्लाजो लुक है परफेक्ट 

आजकल हर कोई कुर्ते के साथ प्लाजो कैरी कर रहा है. अगर आप भी प्लाजो पहनने की शौकीन हैं और कंफरटेबल लुक चाहती हैं तो हर्षा का ये शरारा लुक ट्राय करें. हैवी कुर्ते के साथ प्लेन प्लाजो लुक आपके लिए फेस्टिव सीजन में परफेक्ट औप्शन है.

4. हैवी शरारा के साथ सिंपल कुर्ता 

 

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अगर आप वेडिंग सीजन में कुछ नया ट्राय करना चाहती हैं तो हैवी शरारा के साथ प्लेन कुर्ता कौम्बिनेशन ट्राय करें. ये आपके लुक के लिए परफेक्ट कौम्बिनेशन है.

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5. गाउन है सभी का फेवरेट

वेडिंग हो फेस्टिव सीजन गाउन हर किसी का फेवरेट औप्शन होता है. अगर आप भी अपने लुक पर चार चांद लगाना चाहते हैं तो हैवी गाउन के साथ सिंपल ज्वैलरी कौम्बिनेशन ट्राय करें.

किस हद तक करें मदद

एक सवाल हमेशा चिंतन करने वालों को परेशान करता है कि  क्या इंसान मूलतया अच्छा प्राणी है जो परिवेश और परिस्थिति के वशीभूत हो, बुरा हो जाता है, या इंसान मूलतया बुरा प्राणी है जो मजबूरीवश अच्छाई का चोला धारण करता है? आखिर सच क्या है?

येल यूनिवर्सिटी की अगर मानें तो व्यक्ति मूलतया अच्छा प्राणी है जिस पर कई कारकों के काम करने से उस में परिवर्तन नजर आता है, जो कभी अच्छा तो कभी बुरा भी हो सकता है.

निभा के 2 बेटे आपस में किसी खिलौने के लिए लड़ रहे थे. टीवी पर एक कार्टून शो चल रहा था. शो में एक बच्चा एक डरावना कार्टून कैरेक्टर से बचने के लिए पहाड़ पर चढ़ने की कोशिश करता है, मगर बारबार गिरने को होता है. दोनों बच्चों की नजर जब उस पर पड़ी तो दोनों ही बच्चे मना रहे थे कि वह किसी तरह बच जाए. उन का खिलौने पर से ध्यान हट गया था. यह छोटा सा उदाहरण हम ने बच्चों का इसलिए दिया कि बचपना इंसान का शुरुआती दौर है और बच्चे अपने मूल स्वभाव में हैं. बच्चों पर किसी भी तरह के परिवेश और परिस्थितिजन्य प्रभाव के पहले की, यह विवेचना है.

जैसेजैसे बच्चा बड़ा होता जाता है उस में अपने आसपास के लोगों और परिस्थितियों का बड़ा प्रभाव पड़ने लगता है. इस प्रभाव के रहते हुए भी कई लोग अच्छे स्वरूप में रहते हैं, और दूसरों की सेवा व सहायता के लिए हमेशा तत्पर दिखते हैं. इन्हीं सेवाभावी तत्पर लोगों की जिंदगी में जब झांका गया तो सामने आया कि ये अपनी सेवा और सहायता के बाद ज्यादातर सेवा प्राप्त करने वालों से असंतुष्ट और दुखी थे. अधिकांश लोगों ने इन की सेवा और सहायता का नाजायज फायदा उठाया और इन का शोषण किया. कइयों ने इन के किए का एहसान मानना या जताना जरूरी नहीं समझा.

ऐसे में सेवा और निस्वार्थ सहायता करने वालों के लिए  भला क्या प्रेरणा रह जाती है. शांभवी और उस के पति संभव जिस कालोनी में रहते थे वह काफी समृद्ध लोगों का इलाका था. संभव को नाइट ड्यूटी करनी पड़ती और शांभवी घर पर ट्यूशन पढ़ाती जिस का समय सुबह 6 से 9 बजे का होता. पड़ोस में 75 साल के एक अंकल रहते थे. वे अकेले ही रहते थे.

एक सुबह उन की बाई शांभवी के पास खबर ले कर आई कि अंकल दरवाजा नहीं खोल रहे. चूंकि शांभवी पहले से ही उन का ध्यान रखा करती थी. वह अपने ट्यूशन के बच्चों की छुट्टी कर जल्द अंकल के घर गई. उस के पास अंकल के घर की एक चाबी रहती थी. उस से उस ने दरवाजा खोला. अंकल को पैरालिटिक हाल में पाया. संभव नाइट ड्यूटी कर के सो रहा था. उस का फोन बंद था. दौड़ते हुए वह घर आई. संभव को उठाया और अंकल को अच्छे अस्पताल में भरती कराया गया. छोटा बेटा दूर रहता था पर वह भी आ गया.

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छोटा बेटा तीसरे दिन से संभव को फोन कर के बारबार पैसे की किल्लत के बारे में बताने लगा. जबकि अंकल काफी समृद्ध थे. दोनों बेटे अच्छे जौब में होने के बावजूद अंकल ने अपना पुराना बंगला बेच दोनों बेटों को 40-40 लाख रुपए नकद दिए थे. उन की अपनी जमापूंजी, पैंशन सब थी, जिस में छोटा बेटा भी हिस्सेदार था. लड़के का कहना था कि पापा को डिस्चार्ज कराते वक्त फिक्स्ड डिपौजिट तुड़वानी पड़ेगी, जिस में नुकसान हो जाएगा. संभव अभी 70 हजार रुपए दे दे, वह बाद में वापस कर देगा.

छोटे बेटे ने अपनी ऐयाशी के लिए कई जगहों से उधार ले रखा था. एक जगह तो उस की इसी वजह से नौकरी भी चली गई थी. अब इन दोनों के लिए उसे न मना करते बनता, न इतने रुपए देते. अंकल का दिमाग सही ढंग से काम नहीं कर रहा था. दोनों लड़के अव्वल दरजे के धूर्त और स्वार्थी.

संभव अपराधभावना से घिर रहा था. यद्यपि संभव के लिए अभी इतने रुपए निकाल देना आसान न था, और दोनों बेटे इस भार को उठाने में सक्षम भी थे. इन का छोटा बेटा धर्म और आस्था के नाम पर कुछ महीने पहले ही नामी धार्मिक प्रतिष्ठानों में दानधर्म कर के काफी आशीष बटोर लाया था.

संभव को इस दुविधा से निकालने के लिए आखिर शांभवी को कड़ा फैसला लेना ही पड़ा. अंकल जब अपने घर आए और आया के सहारे रहने लगे, शांभवी उन की देखभाल करने जाती जरूर लेकिन उन के बेटों का फोन नंबर ब्लौक कर दिया.

आइए, कुछ मुख्य बिंदुओं को समझें ताकि किसी की सहायता कर हमें परेशानी न उठानी पड़े :

सेवा और दान में अंतर :   मनुष्य भौतिक वस्तुओं का दान कुछ न कुछ प्राप्ति की ही आशा में करता है, चाहे वह किसी गुरु महाराज या शक्तिशाली व्यक्ति की कृपा हो, पुण्य की आशा हो या अपने कर्मों को सुधार कर जिंदगी में सुख हासिल करने की कामना हो. अकसर धार्मिक दान ऐसे ही होते हैं.

धार्मिक दान प्राप्त करने वाले किसी संस्थान या व्यक्ति में भी अहंकार होता है. वह कृपा या आशीष बरसा कर दान देने वाले को धन्य कर के उच्च आसन पर पहुंचने की मानसिकता से ग्रस्त होते हैं.

दान देने वाला भी कृपा पाने का हक जताने में पीछे नहीं रहता. वहीं, दान लेने वाला अपने आप को कमतर सिद्ध होने से बचाने के लिए आशीष या कृपा देने का स्वांग जरूर रचता है.

मदद होती है निस्वार्थ  :  जब इंसान के अंदर प्रेमपूर्णभाव का अतिरेक होता है, वह स्वयं को छोड़ जरूरतमंद के बारे में सोचता है. कैसे उसे विपत्ति से निकाला जाए, कैसे उस की समस्या का समाधान किया जाए, ऐसे इंसान को यही चिंता रहती है. मदद से उसे कितना फायदा होगा या क्या नुकसान, यह विचार करने से पहले ही वह मदद के लिए हाथ बढ़ा चुका होता है.

नीरा को ही ले लें. वह मददगार स्वभाव की है, पर दिखावा नहीं करती. उस के औफिस के चपरासी की बीमारी से जब मौत हो गई तो वह उस की पत्नी व उस के बच्चे से मिलने उन के घर गई. उन की बुरी स्थिति देख वह अपने घर से अपने बच्चे की ड्रैस, पढ़ाई की सारी सामग्री, उस की जरूरत के कई सामान उसे दे आई. हर महीने बच्चे की स्कूल फीस भी देने लगी. यह सब देख उस स्त्री का शराबी भाई नीरा के प्रेमपूर्ण आचरण का फायदा उठाने लगा. वह जबतब उस के औफिस आ जाता और किसी न किसी बहाने उस से पैसे की मांग करता. वह ऊब कर जब उसे फटकारने लगी, तो वह औफिस से नीरा के घर लौटते वक्त उस का पीछा करने लगा. उसे अनापशनाप धमकाने लगा.  तंग आ कर नीरा ने चपरासी की बीवी से संपर्क साधना तो छोड़ा ही, घर में भी अपनी परेशानी बता कर अलग ही परेशान हो गई.

पति और सास ने उसे समझाइश दी कि दान ही करना था तो हमारे गुरुजी के आश्रम में दान करती. वे हम से खुश होते. हमें आशीष देते. हम से बताती तो तुम्हारे उस बच्चे को दे रही स्कूल फीस में हम भी कुछ मिला कर गुरुजी के आश्रम के बच्चों के लिए तोहफे ले लेते. इस से तुम्हारे पति को गुरुजी के आश्रम के रैनोवेशन का ठेका भी मिल जाता. अब समझने वाली बात यह है कि जब जरूरत चपरासी की बीवी को थी तो वह करोड़पति के आश्रम में दान कर के उस स्त्री की मदद कैसे करती जिसे उस वक्त मदद की दरकार थी. नीरा को भी क्या शांति मिलती? बिलकुल नहीं. हां, घरवालों को उस दान के बदले व्यक्तिगत फायदा जरूर हो जाता. गुरु की नजर में चढ़ कर विशेष कृपापात्र बनने की इच्छा और इस के लिए मौके टटोलना, दान देना व इस का फायदा उठाना, एक निस्वार्थ सहायता से काफी अलग है.

क्यों लोग किसी विशेष समूह का हिस्सा बन दान करते हैं :  धार्मिक समूह का हिस्सा बन दान करने के पीछे व्यक्ति का शक्तिशाली संस्थान या व्यक्ति से कृपालाभ की आंकाक्षा प्रधान होती है. समाज में और लोगों के सामने उन की धाक बनी रहे, जरूरत के वक्त उन का शक्तिपरीक्षण काम आ सके.

ऐसे संस्थान या गुरु दान और कृपा का विशेष संयोग पैदा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने से जोड़े रखते हैं ताकि वे स्वयं विलासितापूर्ण जीवन जिएं, ठाठ और दर्प से जिएं तथा लोगों की व्यक्तिगत सोच पर अपनी विशेष सोच व चिंतन को थोप सकें और समाज के पंख फैलाते दृष्टिकोणों को अपनी दकियानूसी सोचों के सीखचों में रोक सकें. मदद करें दूसरों की लेकिन स्वयं की मदद करते हुए :  ज्यादातर लोग एहसान ले कर या तो आसानी से भुला देते हैं, या मदद करने वाले का ही तरहतरह से शोषण करने लगते हैं.

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पार्थ जितना पढ़ने में अच्छा था उतना ही मददगार, सरल स्वभाव का. उस के छुटपन का दोस्त रंजन यह भलीभांति समझ चुका था. ऐसे तो पार्थ पढ़ाई आदि में उस की मदद किया ही करता, मगर तब भी वह रंजन के साथ खड़ा था जब रंजन के पिता को दिल का दौरा पड़ा. वह अपने सैमिस्टर के एग्जाम छोड़, अस्पताल की दौड़भाग में लगा रहा, उन्हें खून दिया, उन का जीवन बचाया. इधर, रंजन ने यारीदोस्ती के नाम पर पार्थ की नई बाइक को पथरीली, ऊबड़खाबड़ जमीन पर डेढ़ सौ किलोमीटर तक ऐसा दौड़ाया कि पार्थ को उस बाइक को ठीक करवाने में ढाई हजार रुपए खर्चने पड़े.

सीधासादा पार्थ रंजन से कह तो कुछ नहीं पाया लेकिन घरवालों ने पार्थ को ऐसी खरीखोटी सुनाई कि मदद के नाम पर उस की पूरी परिभाषा ही बदल गई.

मदद तो करें मगर मौकापरस्तों को पहचानें भी :  जीवन में सिर्फ स्वार्थी और आत्मकेंद्रित हो कर नहीं चला जा सकता. हम सामाजिक प्राणी हैं. हम दूसरों की मदद जरूर करें, वह भी इसलिए नहीं कि आगे हमें काम पड़ सकता है, बल्कि इसलिए कि वाकई मनुष्य स्वभाव से अच्छा प्राणी है. हां, मदद करते वक्त खुद का उन के द्वारा नाजायज फायदा न उठने दें. मदद दें, तो थोड़ी दूरी भी रखें और कुछ औपचारिकताएं भी. इस से सामने वाला कितना भी बेशर्म क्यों न हो, उसे अपनी सीमा का एहसास होता रहेगा. मदद करते वक्त अपनी क्षमता से बाहर न जाएं.

मदद लेने वाले के लिए गुजारिश

मदद की आवश्यकता किसी को भी पड़ सकती है. हम जब मदद लें तो सहायता करने वाले व्यक्ति का विशेष खयाल रखें, ताकि उसे कोई असुविधा न हो. जहां तक हो सके, कम से कम मदद लें और ज्यादा से ज्यादा एहसान मानें.  कभी किसी से सहायता की आवश्यकता पड़ ही जाए, तो लें अवश्य, लेकिन आप भी दूसरों की मदद को तत्पर रहें.

मदद लेना और मदद देना सामाजिक प्रक्रिया है. हमारे संतुलित और सामंजस्यपूर्ण व्यवहार से हमारे सामाजिक रिश्ते मधुर और मजबूत बनते हैं. इस का खयाल अवश्य रखें.

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पिछले 2-3 वर्षों से मुझे कब्ज की शिकायत है?

सवाल-

मेरी उम्र 36 वर्ष है. मैं  सरकारी कार्यालय में क्लर्क हूं. पिछले 2-3 वर्षों से मुझे कब्ज की शिकायत है. बताएं क्या करूं?

जवाब

लगातार लंबे समय तक बैठे रहने से उदर गुहा दब जाती है, जिस से पाचन क्रिया धीमी पड़ जाता है और कब्ज का कारण बन जाती है. जो लोग रोज घंटों बैठे रहते हैं उन में आंतों की मूवमैंट भी नहीं होती है, जिस से आंतें अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाती हैं. आंतों में पचे हुए भोजन की गति सामान्य न होना कब्ज का कारण बन जाता है. आप अपनी जौब तो बदल नहीं सकते, लेकिन अपनी आदतों में बदलाव जरूर ला सकते हैं. जंक

फू ड के बजाय संतुलित, पोषक और हलके भोजन का सेवन करें. 7-8 घंटे की नींद लें. खाने और सोने का समय निर्धारित कर लें, क्योंकि आप क्या खाते हैं और कितना सोते हैं, उस के साथ यह भी महत्त्वपूर्ण है कि आप कब खाते और सोते हैं. सप्ताह में कम से कम 150 मिनट अपना मनपसंद वर्कआउट करें. अनावश्यक तनाव न पालें.

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ज्यादा मसालेदार भोजन के सेवन से या ज्यादा समय तक भूखे रहने की वजह से अक्सर ही एसिडिटी की समस्या हो जाती है. एसिडिटी होने वजह से कई बार हम दवाइयों का सेवन करने लगते हैं और धीरे धीरे इसकी आदत सी पड़ जाती है. इन दवाईयों का हमेशा इस्तेमाल हमारी सेहत पर असर जालता है. ऐसे में बार-बार दवाइयों के सेवन से बेहतर है कि आप कुछ घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कर एसिडिटी से निजात पाएं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही घरेलू उपायों के बारे में बताने वाले हैं.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- एसिडिटी से निजात दिलाएंगे ये फूड्स, आज ही आजमाकर देखें

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