घटते फासले बढ़ती नाराजगी

देश में अब परिवार नई चुनौतियों से जूझ रहे हैं. पहले सासबहू और देवरानीजेठानी विवादों के कारण घरों में कलह रहती थी, अब पतिपत्नी और उस से ज्यादा पिताबेटे और मांबेटी की कलह के किस्से बढ़ रहे हैं. आमतौर पर खुद को सक्षम और समझदार समझने वाली पत्नियां अब पतियों के आदेशों को मानने से इनकार कर रही हैं और घर के बाहर एक अलग जिंदगी की तलाश करने लगी हैं, फिर चाहे वह दफ्तरों में नौकरी हो या किट्टी पार्टियां.

घरों में विवादों के बढ़ने का कारण न सिर्फ सतही जानकारी का भंडार होना है, बल्कि गहराई वाली सोच का अभाव होना भी है. सतही जानकारी ने यह तो सब को समझा दिया है कि हरेक का अपना अधिकार है, अपना जमीनी व व्यक्तिगत दायरा है, जीवन जीने के फैसले खुद करने का अधिकार है पर यह जानकारी यह नहीं बताती कि कोई भी गलत फैसला कैसे खुद को परेशान कर सकता है.

लोगों ने अपने अधिकारों को जानना तो शुरू कर दिया है पर जब इन अधिकारों के कारण दूसरों के दायरे में दखल हो तो क्या करना चाहिए, यह ज्ञान आज का मीडिया या मोबाइल देने को तैयार नहीं है. आज का मीडिया तब तक ही पसंद और सफल है जब तक वह दर्शकों को आत्ममंथन करने को न कहे.

अपने फैसलों का प्रभाव दूसरों पर खराब पड़ सकता है यह आज का मीडिया नहीं बताता, क्योंकि वह फास्ट फूड की तरह स्वादिष्ठ और शानदार दिखने वाली बात करता है. आज का मीडिया आप को अपनी गलतियों की ओर झांकने को नहीं कहता, क्योंकि इस से आप ऊब कर किसी दूसरी स्क्रीन पर चले जाएंगे.

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आज तो दवा के रूप में भी आप को कैप्सूल दिए जा रहे हैं. सेहत बनाने के लिए भी एअरकंडीशंड माहौल वाला जिम चाहिए. फूड सप्लिमैंट चाहिए जो बिना खराबियां बताए आप को मिनटों, घंटों में ठोकपीट कर ठीक कर दे.

ये कैप्सूल, ये टिप्स, ये फास्ट ट्रीटमैंट जीवन को चलाने के लिए नहीं मिलते. पतिपत्नी एकदूसरे से रूठे रहते हैं, बच्चे मातापिता पर भुनभुनाते रहते हैं. हरकोई पकापकाया चाहता है, बिना समस्या की गहराई में जाए उस का हल चाहता है.

सासबहू या जेठानीदेवरानी के झगड़े जब भी होते थे या होते हैं तो इसीलिए कि दोनों को नहीं मालूम कि कैसे एकदूसरे के पूरक बनें. यह शिक्षा कहीं दी ही नहीं जा रही कि लेना है तो किसी को देना भी पड़ेगा. लोगों ने सोच लिया है कि दफ्तरों में काम दे कर जो ले लिया वह घर के लिए देना हो गया. अब घर वाले उस के बदले में मांगी गई चीज दें.

पत्नी सोचती है कि उस ने बनठन कर, साथ चल कर या रात को साथ सो कर जो दे दिया वही काफी है. अब उसे सिर्फ लेना है. बच्चे सोचते हैं कि उन्होंने जन्म ले कर मातापिता को संपूर्णता दे दी. अब मातापिता उन्हें वापस देते रहें. जीवन को एटीएम समझ लिया गया है जहां मशीनी तौर पर लेनदेन होता है.

लोग भूल रहे हैं कि आधुनिक सुविधाएं या तकनीकें कितनी महंगी हैं और कितनी तनाव पैदा करने वाली हैं. वे जानते ही नहीं कि लाखों सालों में विकसित हुए मानव स्वभाव को 1 पीढ़ी में नहीं बदला जा सकता. मानव स्वभाव सदियों से बहुतों के सुझावों, ज्ञान, उदाहरणों पर टिका हुआ है. आज यह आप को केवल पढ़ने से मिल सकता है, काउंसलर या प्रवचन से नहीं मिल सकता.

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आज भी लेखक आप को भ्रमित या गुदगुदाने के लिए नहीं लिखता. वह अपने और दूसरों के उदाहरणों का विश्लेषण करता है. व्हाट्सऐप मैसेजों में बंटता ज्ञान केवल अच्छे शब्द होते हैं. आमतौर पर वे दूसरों की सलाह लेते हैं, जो खुद को ठीक करने की दवा नहीं देते.

पारिवारिक विवाद, प्रेम विवाहों का तलाकों में बदलना, बारबार के ब्रेकअप, उद्दंड बच्चे, खफा बेटेबेटी उस अंधकार की देन हैं जिस में हम अपनेआप को धकेल रहे हैं. हर रोज, हर घंटे, हर उस समय जब आप फालतू की चैटिंग कर रहे हैं और मोबाइल या टीवी को अपना अकेला मार्गदर्शक मान रहे हैं.

Beauty Tips: आई बैग और डार्क सर्कल्स से पाएं छुटकारा

पूरे फेस के मुकाबले हमारी आंखों के आसपास की स्किन काफी पतली और नाजुक होने के साथ वहां तेल ग्रंथियां भी काफी कम होती है. और जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है स्किन के 2 मुख्य माने जाने वाले प्रोटीन कोलेजन और प्रोटीन , स्किन से खत्म होने लगते हैं. जिसके कारण ही आंखों के आसपास की स्किन सबसे ज्यादा रूखी और वहां सबसे पहले झुर्रियां नजर आने लगती है.

अब आप सोच रही होंगी कि किस उम्र से आंखों की खास केयर करने की जरूरत होती है या फिर आंखों के नीचे की स्किन को uva और uvb किरणों से बचाने की जरूरत होती है, जिससे डार्क सर्कल्स की समस्या न आए . तो आपको बता दें कि ये सोचने से बेहतर है कि आप हमेशा ही खास कर सुबह नहाने के बाद चेहरे पर सनस्क्रीन जरूर अप्लाई करें. इससे आप खुद को स्किन एजिंग से बचा पाएंगी. जान लें कि आपकी आंखों के नीचे हमेशा मोइस्चर रहना चाहिए , इसके लिए आप हमेशा लाइट वेट वाली अच्छी क्रीम यूज़ करें. क्योंकि मोइस्चर खत्म होने से स्किन रूखी हो जाती है, जो स्किन एजिंग का कारण बन सकती है.

अकसर यह भी देखा जाता है कि जब आंखों के नीचे ब्लड जमा होने लगता है तो उससे भी आंखों के नीचे कालापन नजर आने लगता है. इसे रोकने के लिए आप दिन में दो बार हलके हाथों से आंखों के नीचे मसाज जरूर करें. आपको बता दें कि आंखों के नीचे ब्लड जमा होने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं जैसे सूर्य की किरणें , एजिंग या फिर जैनेटिक भी हो सकता है.

इसलिए अपनी आंखों के नीचे डार्क सर्किल को रोकने के लिए नेचुरल तरीकों को अपने रूटीन में जरूर शामिल करें. इससे आपकी आंखों के आसपास आई डार्कनैस और झुर्रियों को बड़ी आसानी से कम किया जा सकता है और दोबारा होने से भी रोका जा सकता है. कौनकौन सी नेचुरल टिप्स अपनाएं इस सम्बंद में बता रही हैं कोस्मेटोलोजिस्ट डॉ पूजा नागदेव.

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-आलू आंखों के लिए एक बेहतरीन नेचुरल औषधि मानी जाती है. ये उन एन्ज़इम्स में से हैं , जो एस्ट्रिंजेंट प्रोपर्टीज के लिए जाने जाते हैं. ये आंखों के नीचे सूजन यानी आई बैग के कारण हो रही जलन को कम करने के साथ स्किन टाइटनिंग का भी काम करता है. इसके लिए आप आधा आलू काटकर उसमें छेद करके ठंडा करने के लिए फ्रीज में रख दें. और हर रोज 10 मिनट के लिए इसे अपनी आंखों पर रख दें. फिर पानी से आंखों को धो लें. इसके बाद कोई अच्छी अंडर आई क्रीम अप्लाई जरूर करें. धीरे धीरे बदलाव आपको खुद नजर आने लगेगा.

– खीरे में स्किन एनेर्जिक्सिंग और एस्ट्रिंजेंट प्रोपर्टीज होने के कारण ये आंखों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसके लिए आप ठंडा खीरा लेकर उसे मोटेमोटे टुकड़ों में काटकर उसे अपनी आंखों पर 5 मिनट के लिए लगा कर रख लें . और फिर हलके हाथों से आंखों के नीचे मसाज करें. इससे आंखों को काफी आराम मिलता है.

– chamomile टी में एन्टिओक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी प्रोपर्टीज होने के कारण ये आंखों को काफी राहत पहुंचाने का काम करती है. इसके लिए आप टी बैग को यूज़ करने के बाद साफ कर ठंडा करने के लिए फ्रीज़ में 30 मिनट के लिए रख दें. और फिर इसे अपनी आंखों पर अप्लाई कर लें . ये आपकी आंखों को रिलैक्स करने के साथ साथ दिमाग को भी ठंडक पहुंचाने का काम करती है.

– टमाटर लिकोपेन का अच्छा स्रोत माना जाता है. ये स्किन को सोफ्ट , स्मूद और डार्क सर्कल्स को कम करने में भी मददगार होता है. इसके लिए आप थोड़े से टमाटर के जूस में बराबर मात्रा में एलोवीरा जैल को मिलाएं. और फिर इस पेस्ट को अपनी आंखों के नीचे लगाकर 5 – 10 मिनट के लिए छोड़ दें. ये आंखों के नीचे की डार्कनेस को दूर करने के साथ साथ उसे हाइड्रेट करने का भी काम करता है.

यकीन मानिए ये टिप्स आपकी आंखों के नीचे की डार्कनेस को खत्म कर देंगे. साथ ही आपके लिए यह भी जरूरी है कि आप पूरी नींद लें , ज्यादा समय स्क्रीन के सामने न बिताएं , सोने से पहले मेकअप हटाना न भूलें और कभी आंखों को रगड़े नहीं बल्कि हलके हाथों से मसाज करते हुए उन्हें आराम दें.

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स्किन की ड्राइनैस को दूर करने का कोई उपाय बताएं?

सवाल

मैं 23 वर्षीय युवती हूं. मेरी त्वचा बहुत ड्राई और सांवली है. त्वचा को गोरा और ड्राइनैस को दूर करने का कोई उपाय बताएं?

जवाब
त्वचा की रंगत निखारने के लिए चेहरे को साफ करने के लिए हमेशा कच्चे दूध का प्रयोग करें, साथ ही कच्चे दूध को चेहरे पर लगा कर हलके हाथों से चेहरे की मसाज भी करें व सूखने पर ठंडे पानी से धो लें. ऐसा करने से धीरेधीरे त्वचा की रंगत में निखार आएगा. त्वचा की ड्राइनैस दूर करने के लिए त्वचा को हमेशा मौइश्चराइज रखें. त्वचा को धूप से बचाएं. घर से बाहर निकलते समय चेहरे पर 30 एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन अवश्य लगाएं.

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रूखी त्वचा से ऐसे पाएं छुटकारा और बरकरार रखें अपनी खूबसूरती

सर्दियों में त्वचा और बालों से जुड़ी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में इस मौसम में खुद की ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है.

सर्दियों में शरीर के उन भागों का खयाल रखना जरूरी होता है, जो 2 हिस्सों को जोड़ते हैं. जैसे कुहनियां और घुटने. सर्दियों में यहां की त्वचा काली और रूखी हो जाती है. शरीर के इन भागों पर डैड स्किन की एक परत भी तैयार हो जाती है, जिसे हटा कर उस हिस्से की सफाई करना एक चैलेंज हो जाता है. इन भागों की नियमित देखभाल से आप की सर्दियां खुशगवार गुजरेंगी.

कुहनियों के कालेपन से छुटकारा

दादीमां का नुसखा : सिरका और ग्लिसरीन को बराबर मात्रा में मिला कर इसे प्रभावित जगह लगाएं और फिर थोड़ी देर तक हलकी मसाज करने के बाद पानी से धो लें. दिन में 2 बार इस प्रक्रिया को दोहराएं. कुछ ही दिनों में पाएं बेदाग और कोमल कुहनियां और घुटने.

इस के अलावा पके चावल से बने स्टार्च का भी इस्तेमाल कर सकती हैं. नहाने से पहले प्रभावित भाग में स्टार्च लगाएं और फिर 15 मिनट बाद कुनकुने पानी से धो लें. इस प्रक्रिया को कुछ दिनों तक रोज दोहराएं.

ऐक्सपर्ट की राय : मुंबई की फेमस  डर्मेटोलौजिस्ट रिंकी कपूर के मुताबिक कुहनियों पर जमी डैड स्किन की परत को हटाने के लिए दिन में 1-2 बार माइल्ड स्क्रब की मदद से मसाज करें. दिन में 2-3 बार सेरामाइड युक्त मौइश्चराइजर लगाएं. इस के अलावा त्वचा के रूखेपन को दूर करने के लिए रोजाना नहाने के पानी में 2-3 बूंदें रोज औयल, शैल औयल और औलिव औयल मिलाएं.

जरूरी टिप : कुहनियों और घुटनों की मौइश्चराइजर से 5 मिनट तक सर्कुलर मोशन में मसाज करें.

बचाएं एडि़यों को फटने से

एडि़यां फटने की वजह से कई बार पैरों से खून आने और दर्द रहने की समस्या भी देखी जाती है. एडि़यों की त्वचा ड्राई होने की वजह से ये फटने लगती हैं.

दादीमां का नुसखा :

1 बड़ा चम्मच ग्लिसरीन में 2 बड़े चम्मच गुलाबजल और 1/2 चम्मच नीबू का रस मिला कर इसे एडि़यों पर लगाएं और रात भर लगा रहने दें. ग्लिसरीन और गुलाबजल का मिश्रण एडि़यों को मौइश्चराइज तो करता ही है साथ ही दर्द से भी राहत देता है. अगर आप रोजाना इस उपाय को दोहराएंगी, तो आप की एडि़यां नहीं फटेंगी.

1 बड़ा चम्मच ओटमील को पीस कर इस में जोजोबा का तेल मिला कर गाढ़ा पेस्ट बना कर उसे फटी एडि़यों पर लगाएं. 1/2 घंटा लगा रहने के बाद ठंडे पानी से धो लें.

ऐक्सपर्ट की राय : डा. रिंकी बताती हैं कि फटी एडि़यों के लिए मैडिकेटेड क्रीम का इस्तेमाल करना जरूरी होता है, इसलिए यूरिया और लेक्टिक ऐसिड युक्त क्रीम का इस्तेमाल करें. घर में बनाया घी भी फटी एडि़यों में लगा सकती हैं. सर्दियों की शुरुआत होते ही घी लगाना शुरू कर दें. इस से एडि़यों की नर्माहट बनी रहेगी और वे फटेंगी नहीं.

जरूरी टिप: अगर आप की एडि़यां फट रही हैं तो पैरों में हमेशा मोजे पहने रहें. पैरों को धूल से बचाएं और दिन में 2-3 बार पैरों में मौइश्चराइज करें.

होंठों का रखें खास खयाल

अगर आप सर्दियों में रूखे होंठों से परेशान होती हैं, तो आप को जरूरत है सही सलाह की.

दादीमां का नुसखा : नीबू के रस और गुलाबजल को मिला कर रोज रात को सोने से पहले होंठों में लगाएं. इस प्रक्रिया से होंठों का रूखापन तो दूर होगा ही उन की रंगत भी बनी रहेगी.

इस के अलावा सोने से पहले ग्लिसरीन, गुलाबजल और केसर को मिला कर होंठों पर लगा सकती हैं. कुछ ही दिनों में आप को फर्क दिखाई देने लगेगा.

ऐक्सपर्ट की राय : ऐसे लिप बाम, जिस में बीज वैक्स, सेरामाइड और पैट्रोलियम जैली हो, इस्तेमाल करें. ऐसा लिप बाम नहीं लगाना चाहिए, जिस में कलर और फ्रैगरैंस हो. यह होंठों को और ड्राई बना देता है.

जरूरी टिप: सर्दियों में कभी भी होंठों को रूखा न छोड़ें. हमेशा फटे होंठों पर पैट्रोलियम जैली, ग्लिसरीन और नारियल या जैतून का तेल लगाएं. अगर सर्दियों में आप के होंठ ज्यादा रूखे रहते हैं, तो मैट लिपस्टिक लगाने से बचें. उस की जगह जैली बेस्ड लिपस्टिक लगाएं.

नाजुक अंगों की हो खास देखभाल

सर्दियों में शरीर के नाजुक अंगों की भी खास देखभाल की जरूरत पड़ती है. खासतौर पर महिलाओं को, जिन्हें मासिकधर्म की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ऐसे में वैजाइनल एरिया में रूखेपन की वजह से रैश आना आम बात होती है.

दादीमां का नुसखा : वैजाइनल एरिया या जांघों के अंदरूनी हिस्सों की सफाई के लिए 1 मग पानी में नमक घोलें और उस पानी से नाजुक हिस्सों को धोएं. नमक एक प्राकृतिक ऐंटीसैप्टिक है, जो रूखी त्वचा को मुलायम बनाएगा.

जांघों के अंदरूनी भागों की कोमलता बनाए रखने के लिए आप नारियल तेल का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

ऐक्सपर्ट की राय : जिन्हें वैजाइनल एरिया में इचिंग की शिकायत हो, उन्हें वैजाइनल वाश इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह उस जगह के पीएच स्तर को बिगाड़ सकता है. इन नाजुक अंगों के लिए सेरामाइड और स्वेलाइन युक्त मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें. ध्यान रहे कि जिस भी प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रही हों, उस में स्टेराइड न हो.

जरूरी टिप : सर्दियों में टाइट पैंट पहनने से बचें. ऐसे कपड़े पहनने से त्वचा को औक्सीजन नहीं मिल पाती और वह और भी रूखी हो जाती है. इस के अलावा इन अंगों को गरम पानी के बजाय ठंडे पानी से धोएं. वैजाइनल एरिया की सफाई में कतई कोताही न बरतें.

सूट हो या साड़ी, हर लुक के लिए परफेक्ट है ‘कसौटी जिंदगी के 2’  की एक्ट्रेस के ये लुक

कोरोनावायरस लॉकडाउन के बाद लगभग सभी टीवी शोज की शूटिंग शुरू हो गई है. वहीं सेट पर गाइडलाइन्स का ख्याल रखते हुए सीरियल की कहानी और कास्ट में बदलाव हो रहे हैं. इसी बीच खबर है कि सीरियल ‘कसौटी जिंदगी के 2’ (Kasauti Zindagi Kay 2) में निवेदिता के किरदार में नजर आ रही एक्ट्रेस पूजा बनर्जी (Pooja Banerjee) जल्द जी टीवी के सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ (Kumkum Bhagya) में धमाकेदार एंट्री मारने वाली हैं.

‘कुमकुम भाग्य’ (Kumkum Bhagya) में पूजा बनर्जी (Pooja Banerjee) प्रज्ञा (Sriti Jha) की बेटी रिया का किरदार निभाने वाली हैं. हालांकि अभी तक इस रोल में नैना सिंह नजर आ रही थीं, जिन्हें रातों रात शो से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. लेकिन आज हम पूजा बनर्जी के सीरियल की नहीं बल्कि उनके इंडियन फैशन की बात करें. पूजा (Pooja Banerjee) इंडियन लुक की शौकीन हैं इसीलिए वह अक्सर नए-नए फैशन के सूट और साड़ी में नजर आती हैं. वहीं आप पूजा के इन फैशन और स्टाइल्स को फेस्टिवल में भी ट्राय कर सकती हैं.

1. पूजा का सूट है परफेक्ट

अगर आप फेस्टिव सीजन में अपने लुक को स्टाइलिश बनाना चाहती हैं तो पूजा बनर्जी का ये शाइनी लेकिन प्लेन कलर वाला सूट आपके लिए परफेक्ट औप्शन है. शाइनी पिंक कलर के कपड़े पर सिंपल कढ़ाई वाले सूट के साथ स्टाइलिश पैंट और हैवी मैचिंग दुपट्टा आपके लिए परफेक्ट औप्शन है. इसके साथ आप औक्साइड ज्वैलरी का कौम्बिनेशन ट्राय कर सकती हैं या फिर पर्ल की ज्वैलरी भी मैचिंग कर सकते हैं.

 

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Stepped out of the house, after ages… @shopmulmul thank you for your outfit

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2. प्रिंटेड साड़ी करें ट्राय 

अगर आप साड़ी की शौकीन हैं तो प्रिंटेड साड़ी औप्शन आपके लिए परफेक्ट है. इस साड़ी के साथ आप अगर प्लेन ब्लाउज का कौम्बिनेशन ट्राय करेंगी तो ये आपके लिए पऱफेक्ट औप्शन होगा.

3. शादी के लिए परफेक्ट है ड्रेस 

अगर आप किसी शादी के लिए अपने लुक के बारे में सोच रही हैं तो पूजा बनर्जी का ये रफ्फल लहंगा आपके लिए परफेक्ट औप्शन है.

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4. प्लाजो का लुक है परफेक्ट

अगर आप प्लाजो पहनना पसंद करती हैं तो पूजा बैनर्जी की तरह प्लेन कलर के प्लाजो संग अनारकली सूट ट्राय करें. और इस लुक को ट्रैंडी और स्टाइलिश बनाने के लिए फ्लावर प्रिंट दुपट्टा ट्राय करना ना भूलें.

Monsoon Special: फैमिली के लिए बनाएं अंगूर की ये 3 टेस्टी Dishes

अगर आप अपनी फैमिली के लिए कुछ टेस्टी और हेल्दी अंगूर की रेसिपी ट्राय करना चाहते हैं तो आज हम आपको अंगूर से बनी आसान रेसिपी के बारे में बताएंगे, जिसे आप अपनी फैमिली के लिए बना सकते हैं.

1. शेजवान अंगूर काजू करी

हमें चाहिए

250 ग्राम अंगूर

1 मध्यम आकार का प्याज,

2 कली लहसुन, 2 टमाटर

1/2 टी स्पून अदरक लहसुन हरी मिर्च का पेस्ट

1/4 टी स्पून तिल्ली

1/4 टी स्पून मूंगफली दाना,

1 टी स्पून शेजवान चटनी,

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1/4 टी स्पून हल्दी पाउडर,

1/4 टी स्पून गरम मसाला पाउडर

1/4 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर

, 1/4 टी स्पून जीरा,

1 टी स्पून काजू,

1 टेबल स्पून तेल.

विधि-

अंगूर को धोकर साफ कपड़े से पोंछकर लंबाई में दो भागों में काट लें. अब प्याज, लहसुन, टमाटर, तिल्ली और मूंगफली दाना को एक साथ मिक्सी में पीस लें. एक पैन में तेल गरम करें. जीरा तड़काकर हल्दी पाउडर और तैयार पेस्ट डालकर धीमी आंच पर चलाते हुए भूनें. जब मसाला तेल छोड़ दे तो गरम मसाला, नमक और लाल मिर्च पाउडर डालकर भली भांति चलाएं. “ोजवान चटनी, काजू और कटे अंगूर डालकर 2-3 मिनट तक भूनें और आधा ग्लास पानी डालें. 5 मिनट तक ढककर पकाएं. हरे धनिया और काजू से गार्निष करके सर्व करें.

2-अंगूर की चटपटी लौजीं

हमें चाहिए

-250 ग्राम ताजे अंगूर,

1 टेबल स्पून किसा कच्चा आम,

1/4 टी स्पून मैथीदाना,

1/8 टी स्पून कलौंजी,

1/4 टी स्पून हल्दी पाउडर,

1/4 टी स्पून काला नमक,

1/4 टी स्पून सादा नमक,

1 टी स्पून किसा गुण,

1/2 टी स्पून चिली फ्लैक्स,

1/4 टी स्पून काली मिर्च पाउडर,

1 टी स्पून तेल.

विधि-

अंगूर को धोकर बीच से काट लें. एक नानस्टिक पैन में तेल गरम करके मैथीदाना और कलौंजी तड़काएं. अब हल्दी डालकर अंगूर डाल दें और मंदी आंच पर 5 मिनट तक चलाते हुए पकाएं. आधा कप पानी डालकर किसा आम, गुण और सभी मसाले डाल दें. धीमी आंच पर 5 मिनट तक पकाएं. एअर टाइट जार में भरकर प्रयोग करें.

3. अंगूर का इंस्टेंट चटपटा अचार

हमें चाहिए-

250 ग्राम ताजे अंगूर

1 टेबल स्पून तैयार अचार का मसाला

1 टी स्पून अमचूर पाउडर

2 टेबल स्पून सरसों का तेल

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4 खड़ी लाल मिर्च.

विधि-

सरसों के तेल को एक पैन में गरम धुआं निकलने तक गरम करके गैस बंद कर दें. गैस पर तेल को पुनः हल्का सा गरम करें. खड़ी लाल मिर्च भूनकर अंगूर डालकर चलाएं, जब अंगूर हल्के नरम हो जाएं तो मसाला डालकर 2 से 3 मिनट तक चलाएं. गैस बंद करके अमचूर पाउडर मिलाकर जार में निकालें. परांठा अथवा पूड़ी के साथ सर्व करें.

Serial Story: उत्तरजीवी (भाग-2)

लेखक- के मेहरा

मैं डर जाती. अगर उसे ऐसावैसा कुछ हो जाता तो तुम्हारी बहन चिल्लाती, ‘क्या कर दिया उसे करमजली. जब से पांव धरा है, घर में रोज लड़का बीमार हो जाता है. पहले छठेछमासे अटैक होता था, अब आएदिन पड़ जाता है. अपने मौजमजे के मारे प्राण लेगी क्या?’

किस की मौज, किस का मजा. उस की कमजोरी मुझे खाने लगी. मैं ने तुम से एक दिन दोटूक बात की कि मुझे वापस भेज दो, जहां से लाए थे. तुम कुटिलाई से मुसकरा कर बोले, ‘पहले अपनी मां से पूछ ले फूलवती, फिर बोल. तेरे बाप को बराबर 500 रुपए महीना भिजवा रहा हूं.’

गोया मैं कोई नौकरानी थी और जैसे तुम मेरी तनख्वाह भेज रहे थे मेरे गांव. मेरा बाप, क्या तुम्हारे लकड़ी के ठेके नहीं पूरा कर रहा था? माल तो वही भिजवाता था जिस से तुम हजारों कमाते थे.

मुझे तो नहीं, अलबत्ता 1 हफ्ते बाद तुम ने राजरानी को उस के मायके जयपुर भेज दिया. तुम ने कहा कि तुम्हें बलूत की लकड़ी लाने असम जाना पड़ेगा. 2-4 महीने का चक्कर लगेगा. अंधा क्या मांगे दो आंखें. राजरानी क्या मांगे, अपना मायका.

उसे भेजने में तो तुम्हारा लाभ ही लाभ था. हर बार वह ढेर सारे सामान से लदीफंदी लौटती थी.

वह चली गई तो सारा काम मेरे जिम्मे. ऊपर से हुकूमत तुम्हारी बहन की. तुम झूठे, न कहीं जाना न आना. बिशन तुम्हारे लालच से चिढ़ता था. एकएक कर के सारे कीड़े रेंगरेंग कर बाहर आ रहे थे.

एक दिन मुझ पर जैसे पागलपन सवार हो गया. मैं आंगन में सिर झटकझटक कर नाचने लगी. मेरा पति चिल्लाता रहा मगर मुझे रोक नहीं पाया. तब तुम ने आ कर मुझे अपनी बलिष्ठ गिरफ्त में थाम लिया. मैं वहीं सब के सामने तुम से लिपट कर फूटफूट कर रोई.

बिशनदास तुम्हारे दफ्तर में कागजपत्तर संभालता था. रोज सुबह सफेद कमीज और सफेद पतलून पहन कर, काला बैग ले कर वह औफिस में जा बैठता था. खाना खाने के लिए 1 बजे घर आता था. अकसर उसी के रिकशे में देशी सौदासुलफ लाने बाजार चली जाती थी. घर पर मैं अकेली रहती थी.

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उस दिन भी सुबह की रसोई समेट कर मैं छत पर चली गई. धूप में टंकी के पास बैठ कर कपड़े धोए और नहाई. छत के दरवाजे की ओर मेरी पीठ थी. तुम चुपके से आए और दरवाजे की सांकल लगा दी. मैं मुड़ कर देखती इस के पहले ही तुम ने मुझे गोद में उठा लिया. मैं चिल्लाई तो हथेली से मुंह दबा दिया.

‘चिल्लाचिल्ला…और जोर से चिल्ला. सुन कौन रहा है तेरी? देशी सुनेगी, प्यारेलाल सुनेगा. हां, मगर वे क्या तेरी तरफदारी करेंगे? तुझे ही इलजाम लगेगा. सोच ले. उन का दानापानी तो मुझ से है.’

मैं छटपटाती रही मगर छूट न पाई. फिर यह हरकत रोज का किस्सा बन गई. जितना ही मैं डरती, बचती उतना ही तुम रंग दिखाते. किसी को पता नहीं चला. मगर मैं मुंहजोर हो गई. एकदम निर्भीक. देशी की गालियों का मुंहतोड़ जवाब देती. प्यारेलाल पर रौब से हुक्म चलाती. जब मरजी घूमनेफिरने बाजार चली जाती. मुझे लगता था सब मेरे गुनाहगार थे, अव्वल दरजे के मक्कार.

बस, बिशन से दोस्ती बनाए रखी. उस पर मेरा हक था. वह सीधासादा मासूम इंसान था. तुम्हारे हथकंडों से बेखबर. मुझे सिनेमा ले जाता था. सोने की चूडि़यां बनवा दीं. उस के प्यार करने में आग नहीं थी मगर सुकून तो था, जो मुझे अपनी नियति समझ आती थी. मैं उसे ठग रही थी मगर तुम्हारी मरजी से. बेबस जो थी.

राजरानी वापस आई. मैं ने सोचा, चलो जान छूटी. मगर तुम घाघ थे. कोई न कोई मौका जुटा ही लेते. पहले मैं राजरानी से डरती रही, फिर वह डर भी निकल गया. तुम चोर थे तो मैं सीनाजोर.

मेरे हावभाव देख राजरानी का माथा ठनका. उस ने तुम पर अपनी गिरफ्त कस ली. जाने कैसे, शादी के वर्षों बाद उसे गर्भ रह गया. तुम फूले न समाए. तुम्हारा सारा ध्यान राजरानी पर केंद्रित हो गया. मैं गई भाड़ में. जलन ने मुझे कुटिल बना दिया. ऊपरऊपर से मैं खुशी दिखाती, अंदरअंदर कुढ़ती. मुझे बच्चा चाहिए था. अपना बच्चा, बिशनदास का बच्चा. बहुत जतन किए. कुछ नहीं हुआ.

राजरानी जचगी के लिए मायके चली गई. उसे वहां छोड़ कर तुम वापस आए तो तुम्हें फिर से मेरी तलब लगी. मन में आया कि तुम पर थूक दूं, मगर मुझे बच्चा चाहिए था, कैसे भी. मैं मुसकरा कर फिर से तुम्हारी हो ली. बच्चा आया, मेरा मन गुलजार हो गया. मैं ने चुपके से तुम्हें बताया पर तुम्हारे तो चेहरे का रंग फीका पड़ गया.

‘निकलवा, अभी गिरवा दे इसे.’

‘नहीं, हरगिज नहीं. कोई नहीं जानता कि यह तुम्हारा है. सब इसे बिशन का ही मानेंगे. नहीं गिरवाऊंगी.’

‘सब बिशन का ही मानेंगे इसे, सिवा बिशन के.’

‘क्या मतलब?’

‘बिशन बच्चा नहीं पैदा कर सकता और यह बात उसे पता है. सुन फूलवती, तू उस की दूसरी बीवी है. उस की पहली को जब पता चला, वह वापस नहीं आई. किसी और के संग जा बैठी. इसीलिए बिशन शुरूशुरू में तुझ से हाथ समेट कर बैठा रहा. जब तू पहली बार मायके जा कर लौट आई तब उस ने तुझे अपनाया, याद कर. बिशन को अगर पता चला कि तू पेट से है तो वह समझ जाएगा कि तू क्या कर रही है.’

मेरे हाथ के तोते उड़ गए यह कहानी सुन कर. मुझे तुम्हारे घर आए तीसरा साल था. इतना बड़ा किस्सा और मुझ से ही छिपा कर रखा तुम सब ने, राजरानी ने भी. तभी तुम ने यह भी बताया कि बिशनदास तुम्हारा जुड़वां भाई था, तुम से 2 घंटे छोटा. पैदाइश के समय सिर्फ डेढ़ किलो वजन था उस का. हजारों तकलीफें उठा कर उसे तुम्हारी मां ने पाला था और अब यह रोल तुम्हारी बहन अदा कर रही है.

‘कितने बेईमान हो तुम सब? कितने झूठे. ऐसे आदमी की शादी ही क्यों की?’

‘तुझे यहां कैसे लाता? तेरा रूप जो डंक मार गया. फूलवती, तू बेहद सुंदर जो थी.’

‘ओ हो, तो फिर राजरानी पर क्यों इतना लुटे जाते हो?’

‘अब पैसा भी तो कोई चीज है न. बस, तू अपनी जगह वह अपनी जगह. तू मुझे खुश रख, मैं हमेशा तेरा खयाल रखूंगा. पर तू यह बच्चेवच्चे का चक्कर छोड़ दे.’

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मैं मरती क्या न करती. रोरो कर अंधी हो गई. मेरी अंदर की व्यथा कौन समझता. दुख जैसेतैसे छिपाया. कहा कि नजला हुआ है. बदले में तुम ने मुझे जड़ाऊ टीका और कंधे तक लटकते झुमके बनवा दिए. बड़ी चालाकी से तुम ने वे गहने अपने भाई को दिए और जताया कि बेटे होने की खुशी में उपहार दे रहे हो. बिशनदास खुश हो गया. खुद अपने हाथ से उस ने मुझे पहनाए और फिर मेरे साथ फोटो खिंचवाई. मैं फूली न समाई.

लकड़ी के ठेके से तुम ने हजारों कमाए मगर मेरे नाम कोई रकम जमा नहीं की जो मैं जिंदगीभर खाती. बिशनदास को तुम क्या देते थे? सिर्फ 250 रुपए महीना.

हमारा राज कब तक छिपा रहता? जिस दिन पकड़ा गया, तुम्हारे भाई ने जहर खा लिया. मैं विधवा हो गई. तुम्हारे खोटे करम एक अच्छेभले इंसान को खा गए. कितना शरीफ था. कुदरत ने भी क्या बंटवारा किया जुड़वां बच्चों में. एक को सारे सद्गुण, विद्या, लगन, कलाप्रियता, संवेदना सब दे कर सेहत छीन ली और दूसरे को सेहत दे कर मतलबी, बेईमान और ऐय्याश बना दिया. भाईबहन तुम्हें बहुत प्यारे थे, मगर अपनी ऐय्याशी सब से ज्यादा.

बिशनदास ने मरतेमरते मुझ से बदला लिया. उस ने अपना सारा हिस्सा देशी के नाम लिख दिया. तुम्हारे मांबाप उस की सेहत की चिंता के मारे अपनी पुरानी हवेली उसी के नाम कर गए थे. तुम ने बेसाख्ता उस की अंतिम इच्छा का मान रखा. दसियों छोटेमोटे किराएदार उस में बसे थे. वह किराया देशी को मिलने लगा. मुझे? मुझे क्या मिला, ठेंगा. मैं और भी निहत्थी और बेबस हो गई.

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Serial Story: उत्तरजीवी (भाग-1)

लेखक- के मेहरा

नारायणदास, यह देखो, तुम्हारा इकलौता पोता रोहित, तुम्हारे बेटे अजीत का बेटा, आज घोड़ी चढ़ रहा है.

मोगरा के फूल बिखरे पड़े हैं. मोगरा, जो मैं तुम्हारे लिए सफेद चादर पर बिछा देती थी, अपने जूड़े में छिपा लेती थी, मुट्ठी भरभर कर तुम्हारे ऊपर बिखेरती थी, जब तुम मेरे पास खुली छत पर चांदनी बटोरने चले आते थे.

शहनाई बज रही है. कभी मैं ने भी चाहा था कि मेरी बरात आए और शहनाई बजे. आज भी वही धुन बज रही है जो हमतुम गुनगुनाते थे, ‘तेरे सुर और मेरे गीत, दोनोें मिल कर बनेंगे प्रीत.’ मेरा रोमरोम झनक रहा है. मैं अंतर्मन से भीगी इस बच्चे को आशीष दे रही हूं. काश, तुम जिंदा होते, यह मंजर देखने के लिए.

रोहित की दुलहन का पिता कर्नल है. दादा राजदूत रह चुका है. बड़ेबड़े राजनेता आए हैं शादी में. मिलिटरी बैंड से बरात चढ़ रही है. एक से बढ़ कर एक गाड़ी, सब घोड़ी के पीछे रेंग रही हैं और उन में बैठी हैं राजरानियां, हीरेमोती चमकाती, साडि़यां सरसराती, खुशबू फैलाती.

तुम कहां हो? और कहां है तुम्हारी घमंडी बीवी राजरानी? दिल नहीं चाहता कि आगे सोचूं. बस, अपने चश्मे के मोटे शीशों से आज का नजारा देख रही हूं, अकेली मैं. बेटियांबहुएं दादीजीदादीजी की गुहार बीसियों बार लगा चुकी हैं, कानों पर विश्वास नहीं होता. अजीत का बेटा मेरे पांव छू कर मुझ से मेरा आशीर्वाद लेने आया घोड़ी चढ़ने से पहले. अजीत और उस की बहू ने भी पांव छुए. यकीन नहीं होता.

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तुम ने यह हक मुझे जीतेजी कभी नहीं दिया था. तुम्हारी मौत ने दे दिया. तुम नहीं रहे, राजरानी नहीं रही, न रही तुम्हारी खबीसनी बहन, देशी. मैं तुम सब से उम्र में छोटी थी, सो अभी तक जिंदा हूं तुम्हारे हिस्से के सुखदुख उठाने को.

अजीत की बहू सुनंदा ने न्यौता भिजवाया था, साथ में 10 हजार रुपए नकद, 4 बढि़या, कीमती सूट, नई चप्पलें, शौल, पर्स, शृंगार का सारा सामान, और भी न जाने क्याक्या. पत्र में लिखा था, ‘चाचीजी, अब बस आप ही हमारे सिर की छतरी हैं. इस परिवार के सब बुजुर्ग उम्र से पहले ही गुजर गए. अपने इस इकलौते वंशदीप को आशीर्वाद देने के लिए ब्याह में जरूर आइएगा. मेरी छोटी बहन आप को लिवाने आएगी ताकि आप को कोई असुविधा न हो.’

भला हो सुनंदा का. नारायणदास, तुम्हारे गलत कामों की गिनती नहीं मगर कहीं कोई अच्छा काम जरूर तुम्हारे खाते में जमा रहा होगा जो तुम्हें ऐसे सुंदर कर्मों वाली लायक बहू मिली. कितनी अभागी थी राजरानी जोे जल्दी चली गई.

मैं ने सुना है, अजीत ने मां को क्लोरोफौर्म का डबल इंजैक्शन दे कर हमेशा के लिए सुला दिया, जैसा कि खानसामा प्यारेलाल ने बताया. सबकुछ होते हुए भी राजरानी पागल हो गई.

मैंराजरानी नहीं हूं, उस की सौत भी नहीं हूं. तुम्हारे संग अपने रिश्ते को क्या नाम दूं? बता कर तो जाते एक बार. राजरानी की गुनाहगार मैं थी तो इस की सजा मुझे मिलनी चाहिए थी. राजरानी क्यों पागल हो गई? हजार दुख तो मैं ने सहे थे, चुपचाप. कहती भी तो किस से? मैं क्यों न पागल हो गई?

उस के मायके वाले जयपुर के पुराने रईस थे. उस के पिता और फिर छोटे भाई जीवनभर उस के नाम से रुपयापैसा भेजते रहे, वह भी हजारों में. तुम सब उस पैसे से ऐश करते थे. उस के जेवर बेचबेच कर पैसा कारोबार में लगा दिया. घर खरीदा तो उस के जड़ाऊ कंगन बेच दिए. चोरी का इलजाम प्यारेलाल पर लगा दिया. फिर भी प्यारेलाल घर में बना रहा. राजरानी ने उसे निकालने को कहा तो तुम ने कहा कि रहने दो, गरीब है, पुराना खादिम है. कितनी भोली थी वह, बेवकूफ थी परले दरजे की. फूलों में पली, कौनवैंट में पढ़ी. तुम देखने गए थे तो वह स्कर्ट पहन कर साइकिल चला रही थी अपने लौन में. न बदन न काठी. तुम उसे बच्ची समझे थे.

सच बताऊं, मुझे उस से जलन थी. तुम जब बीमार पड़े और फालिज से निकम्मे हो गए थे तब मैं छिपछिप कर उसे तुम्हारी बेकार देह की मालिश करते देखती तो मेरे कलेजे को एक अजीब सी ठंडक मिलती. वह खाना बना कर नहानेधोने जाती, मैं रसोई में घुस कर सब्जी चुरा लाती.

जयपुर वाली रसोई खूब अच्छी बनाती थी. तुम्हें उसी के हाथ का खाना पसंद था. थूकपसीने की दोस्ती मुझ से और खाना बीवी के संग मेज सजा कर. जी जलता था मेरा. मन में आता था, जा कर मेजपोश खींच दूं और सारा तामझाम जमीन पर गिरा दूं मगर जब्त कर लेती थी अपना गुस्सा. फिर वह फितूर दिमाग से उतर कर मेरी नसनस में बहने लगता. खाना खा कर वह ठाट से सोती थी.

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मैं मौका देखती रहती थी. उस की नाक बजने की आवाज के साथ ही मेरी नसों में दौड़ता गुस्सा नशा बन कर मुझ पर छा जाता था और मैं उसे लांघ कर तुम्हारे शरीर से आ लिपटती थी. तुम ने क्या कभी रोका मुझे? कितनी फुरती से हम उड़ जाते थे अपनी दुनिया में.

मगर तुम तो लाए ही मुझे इसीलिए थे. नेपालगंज तुम लकड़ी का व्यापार करने आए थे. साथ में था तुम्हारा भाई बिशनदास. मेरा पहाड़ी पंडित बाप लकड़ी का दलाल था. घर ले आया तुम को.

‘साब को चाय पिला, फूलवती. कुछ मीठाशीठा भी ला.’

मैं हिरनी सी कुलांचें भरती पहाड़ी ढलान के नीचे वाली गली के हलवाई से ताजा गुलाबजामुन ले आई थी. तुम्हें गुलाबजामुन से ज्यादा मीठी मैं लगी थी.

लकड़ी का ठेका तो अपनी जगह रहा. तुम मुझे अपने भाई की दुलहन बना कर ले आए. न बरात न बाजा…चार फेरों की शादी. मैं ने सोचा बड़े लोग हैं, बड़ा शहर, ऐश करूंगी. नहीं पता था कि मुझे दुख भोगने हैं. तुम्हारे भाई को तो भयंकर दमा था. मैं नादान उस बीमार पति की सेवा करती रही. कभी उस की पीठ पर, कभी छाती पर वैद्यजी का तेल मलती. कभी गरम पानी में पिपरमिंट डाल कर भाप दिलाती. उस का गोरागोरा पिलपिला मांस, कुरता, बनियान, लकीरों वाला पायजामा, सब में वही बास. चूड़े वाले हाथों से मैं साबुन से कपड़े धोती, मगर बास पीछा नहीं छोड़ती थी.

तुम्हारी विधवा बहन जहानभर के काढ़े बनाती. वह काढ़ा पी कर चुपचाप सो जाता. 5 महीने बाद मैं मायके गई, पहली और आखिरी बार. मां ने मुझे ऊपर से नीचे तक घूरा. मेरे चूड़े का रंग उतरउतर कर बदरंग, पीला सा पड़ गया था. मेरे हाथ सूखे, पांव फटेफटे. उस का मुंह उतर गया. मैं आंख चुरा कर पहाड़ी जंगलों में भाग गई. चीड़ और भांग की मिलीजुली खुशबू में लंबीलंबी सांसें लेती घंटों भटकती रही. मन हुआ, वहीं रह जाऊं. खूब दहाड़ मार कर रोई. मां से लिपटलिपट कर दुहाई दी कि मत भेजो अपने से दूर. मगर मां जल्लाद निकली.

‘अरी कम्बख्त, कोई नहीं कहेगा कि तू छोड़ आई. सब कहेंगे गंवार थी, छोड़ गए. हमारी इज्जत रख. तेरे और भी भाईबहन हैं.’

इस के बाद वह बूढ़ी नाइन को बुला लाई. नाइन ताई ने मुझे पत्नीधर्म की शिक्षा दी. मैं हंसहंस कर दोहरी हो गई. तब उस ने मेरे गाल पर चांटा जड़ दिया. जोर से चिल्लाई, ‘तेरी जिंदगी में दुख ही दुख हैं. अब अपनी कोशिश से जिंदगी सुधार ले वरना कहीं की नहीं रहेगी.’

उस की दी गई हिदायतें गांठ बांध लीं और चुपचाप वापस आ गई. भले ही नादान थी पर इतना तो पता था कि पतिपत्नी के रिश्ते का आधार क्या होता है.

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सारे नुस्खे आजमाती रही तुम्हारे भाई पर. वह हंसनेमुसकराने लगा. मेरी ठोढ़ी उठा कर मुंह भी चूमता कभी. मैं सिकुड़ कर कछुआ बन जाती. जैसेतैसे मेरी गृहस्थी चलने लगी, मगर अकसर उस की सांस फूलने लगती. वह लाचार सा मुझे छोड़ कर खांसने लगता.

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Serial Story: उत्तरजीवी (भाग-3)

लेखक- के मेहरा

बिशनदास से मेरे रिश्ते का एक नाम था. उस के रहते मैं सुहागिन कहलाती थी, शृंगार करती थी. चवन्नीभर बिंदी मेरे उजले माथे पर चमचम करती थी. मेरा रूप जगमगाता था. अब मैं न सजसंवर सकती थी, न हंसबोल सकती थी. मेरा नाम एक गाली बन गया. मेरा अंतर्मन मुझे डसता. सोचा, तुम्हारी मनहूस दहलीज छोड़ कर मायके जा बैठूं. मगर वहां कौन खजाना गड़ा था. टीबी की मारी मां. भाई की कच्ची गृहस्थी, बूढ़ा बाप. सबकुछ बदल गया था.

बेटे के सामने होते तो तुम ऐसा दिखाते कि मुझे जानते भी नहीं. मगर अकेले में?

मैं ने अपने किवाड़ उढ़का लिए. तुम ने दर्जनों सफेद साडि़यां ला कर डाल दीं. औरगंडी कोटा, चंदेरी, शिफौन, सब राजरानी से चोरीचोरी. मैं सफेद साड़ी पहने उतरी तो तुम ने घेर लिया. तुम बोले कि फूलवती, तू हंसिनी लगती है. अपने नैनों में मुझे छिपा ले. कह कर तुम ने मेरी छाती में अपना सिर गड़ा दिया.

बेचारी राजरानी. मेरा अपराधी मन कभी भी उस की सेज पर डाका नहीं डालना चाहता था मगर तुम न माने.

मैं ने पूजापाठ में मन लगाया. आश्रम में जा कर रहने लगी. तुम चार दिन में इज्जत का ढोंग कर के वापस ले आए. आश्रम वाले अभिभूत हो गए. मैं ने हथियार डाल दिए. तुम्हारा दिया खाने के एवज में फर्ज भी तो अदा करना था. मैं तुम्हें पाले रही. मैं झूठ क्यों बोलूं. मेरी जवान देह तो वैसी की वैसी ही थी, भूखी, प्यासी.

तुम्हारा बेटा बड़ा हुआ तो राजरानी ने उसे अजमेर पढ़ने भेज दिया. अब वह रोजरोज उस से मिलने के बहाने चली जाती. तुम खुद भी चले जाते अकसर. मैं और देशी अकेले इस कोठी में. न हम आपस में बोलते थे न एकदूसरे को सह पाते थे. प्यारेलाल खाना बना देता. दोनों अलगअलग कमरों में बैठ कर उसे निगल लेते थे.

मुझे प्यारेलाल का ही आसरा था. शायद वह मेरे दर्द को समझता था. शायद वह मुझे भी अपने जैसा समझता था. महज एक खिदमतगार. मैं उस को देशी की तरह फटकारती नहीं थी. धीरेधीरे, मेरी शह पा कर उस के आधे दर्जन बच्चे हमारे आंगन में कूदनेफांदने लगे. देशी नाराज होती तो मैं उसे डांट देती. आखिरकार वह पुरानी हवेली में रहने चली गई. प्यारेलाल ने मुझ से कहा, ‘मालकिन, इन्हें पढ़ालिखा दिया करें. कुछ जोड़बाकी सीख जाएंगे.’

सच पूछो तो मुझे एक आसरा मिल गया. रोज स्कूल लगा कर बैठ जाती. धीरेधीरे महल्लेभर के गरीब बच्चे आ कर बैठने लगे.

तुम दोनों वापस आते तो स्कूल बंद. घर तुम्हें सजासजाया मिलता. रोटी, पानी, राशन, बगीचा सब एकदम ठीक. वक्त गुजरा. अजीत एअरफोर्स का बड़ा अफसर बना. हर तरह से सुंदर होशियार. उस के बौस ने ही उस को दामाद बना लिया. सुनंदा आई सर्वगुणसंपन्न. राजरानी का घमंड सातवें आसमान पर. तुम दोनों एक हो गए.

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सफेद बालों के साथसाथ तुम ने इज्जत का जामा पहन लिया. मैं छिटक कर दूर जा पड़ी. घर के कोने में रखी हुई झाड़ू की तरह. अजीत बेंगलुरु में जा बसा. तुम भी वहीं चले जाते. जब यहां आते, देशी भी रहने आ जाती वरना शक्ल भी न दिखाती. उस के पास आमदनी थी, मेरे पास कुछ भी नहीं.

कितनी बार मैं ने मांग रखी. क्या मेरा हक नहीं था? बिशनदास क्या मेरा ब्याहता पति न था? मगर तुम मामूली हाथ खर्च दे कर टालते गए. बिशनदास के संभाले ही तुम्हारा कारोबार टिका  था. उस के मरने के बाद तुम्हारा मानो दाहिना हाथ ही कट गया. सारा बिजनैस चौपट हो गया. तुम ने कभी सोचा कि जिस भाई की शादी तुम ने अपनी जिम्मेदारी पर करवाई थी उस की विधवा को रोटीपानी की जरूरत पड़ेगी बुढ़ापे में? मेरा बच्चा आज होता तो वह भी अजीत जितना होता, कमा रहा होता.

राजरानी का पर्स नोटों से भरा रहता था और मेरे पास? पर्स ही नहीं था. जब तक तुम्हारा शरीर चला, तुम ने मुझे भोगा. राजरानी ने अपने घमंड में कभी जाहिर नहीं किया मगर मैं जानती हूं कि उसे पता था. वह अपने सुहाग का दिखावा करती थी. तुम्हारे सामने मीठी बनी रहती थी मगर पीठ पीछे, उस की आंखों की नफरत मुझ से सहन नहीं होती थी.

शायद मेरी बददुआ ही तुम को लगी कि तुम्हें फालिज मार गया. कोई कुछ न कर सका. प्यारेलाल और राजरानी तुम्हें संभालते रहे. 6 साल तुम पलंग पर पड़े रहे. पानी की तरह पैसा बहने लगा. मैं दूर से देखती रहती. राजरानी सबकुछ भूल कर तुम्हारे पास बैठी रहती.

नारायणदास, तुम्हारी जैसी नीयत थी वैसा तुम्हें फल भी मिला. सुनंदा जैसी बहू का कोई सुख नहीं मिला. पोता हुआ, पर तुम उसे चाह कर भी देख नहीं पाए. समझ ही नहीं थी. तुम मरे तो अजीत विदेश में था. जिस बच्चे को देखदेख कर मेरी ममता तरसती रही, उस का कंधा भी तुम्हें नसीब नहीं हुआ.

तुम्हारे जाने के बाद राजरानी बिखरने लगी. जब मैं उसे समझातीबुझाती, वह मुझे ही कोसने लगती. मेरा छुआ हुआ खाना तक नहीं खाती थी. दोचार बार आमनेसामने हमारी तकरार हुई. मैं ने डंके की चोट पर उसे साफसाफ सुना दिया :

‘राजरानी, मुझे दोष मत लगा. गलती तेरी है. मां की लाडो बनी रही जनमजिंदगी. बौराया मरद छोड़ कर तू मायके दौड़ जाए तो वह जहां चाहे, मुंह मारेगा ही. जवानी तो अंधी होती है. मैं तो दोनों तरफ से लुट गई. न इज्जत रही न रखवाला. और आज भिखारन बनी तेरे दो टुकड़ों के लिए यहां पड़ी हूं, तो तू डंडे बरसा रही है? शरम कर. मेरा आदमी मरा तेरे आदमी के कारण. तेरे पास तो पैसा है और पूत भी. मेरे पास क्या है?’

‘मेरे पूत का नाम न ले अपनी काली जबान से.’

‘तो जा न उसी के पास. यहां क्यों बैठी है? यह घर तो मनहूस है.’

उस के बाद राजरानी का डेरा बेटेबहू के पास लग गया. मैं घर में निपट अकेली. प्यारेलाल को भी कहां से पालती? चुपचाप राजरानी की भरीपूरी गृहस्थी में से चोरियां करने लगी. कभी कोई भांडा, कभी चांदी का सामान, कभी उस की विदेशी साड़ी. वह छठेछमासे आती, उसे पता भी न चलता. उस की याददाश्त कम होने लगी थी. धीरेधीरे उस का आना कम होने लगा. किसे होश था सामान का?

प्यारेलाल ने मोटर हथिया ली जो अजीत के नामकरण के वक्त राजरानी के मायके से आई थी. वह उस को टैक्सी में चलाने लगा. मैं ने उस से अपना कट रखवा लिया. वह रोज के रोज 30-40 रुपए दे देता. मैं ने कोठी को सजासंवार कर रखा. कोई ब्याहबरात होती तो सामने का बगीचा और कमरे किराए पर दे देती.

महल्लेभर के बच्चे इस आंगन को आबाद रखते. मैं खुद 8वीं तक पढ़ी थी मगर उन बच्चों का होमवर्क करातेकराते कुछ ज्यादा ही पढ़लिख गई. जिसे भी जरूरत होती मेरे पास सीखनेसमझने आ बैठता. बिशनदास का कमरा किताबों से भरा पड़ा था. मैं खूब पढ़ती. मेरा नाम चाचीजी पड़ गया. सिर्फ अजीत की नहीं जगतभर की चाची.

एक दिन सुना कि राजरानी बहुत बीमार है. मैं ने प्यारेलाल को खबर लाने के लिए भेजा. मगर उस के बेंगलुरु पहुंचने से पहले ही वह मर चुकी थी. बड़ी बुरी तरह मरी. दिमाग नहीं रहा था उस का. जहांतहां गंदगी फैला देती. पलंग पकड़ लिया था. पड़ेपड़े घाव हो गए. पूरे शरीर में गलन आ गई. हालांकि अजीत और सुनंदा ने सेवादवा में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. आखिरकार अजीत ने…

चलो, जो हुआ भला हुआ. निजातमिली.

राजरानी के मरने के बाद अजीत आया था. सुनंदा को राजरानी ने सब बताया था, मगर वह नेक स्वभाव की पढ़ीलिखी लड़की निकली. उस ने आदर से पूछा, ‘चाचीजी, मम्मी का बहुत सा सामान पड़ा है. आप को देखभाल करनी पड़ती है. आप चाहें तो हम ले जाएं?’

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‘हां बेटी, सब तुम्हारा है. जो चाहे ले जाओ.’

वह तीनचार दिन तक सामान खोलतीछांटती रही. जो उसे ठीक लगा, ले गई. बाकी यहीं धरा है. मेरे मरने तक पड़ा रहेगा. घर तो कितना जर्जर हो चुका है. मेरा बुढ़ापा भी तो यहीं आ कर पसरा है जाने कब से.

अजीत कह गया था कि जब तक मैं जिंदा हूं वह कोठी नहीं बेचेगा. देशी कब की मर चुकी. पुरानी हवेली पर किराएदारों ने कब्जा जमा लिया. कौन कोर्टकचहरी कर रहा है? अजीत और सुनंदा के पास बहुत है. बेंगलुरु में ठाट से रहते हैं. एक बेटा, वह भी न्यूयौर्क में जा बसा है. आजकल फैशन है विदेश में बच्चों को भेज देने का.

मेरी रोटीपानी, सेवादवा सब इन बच्चों के तमाम गरीब मांबाप देख लेते हैं. बगीचे में सब्जियां लगी हैं. जो पेड़ तुम ने बोए थे खूब फल देते हैं. आम, लीची, अमरूद, अनार. मैं खुश हूं. तुम सब के मरने के बाद बांटबांट कर खाती हूं.

कहते हैं न कि सब से अच्छा प्रतिशोध है, बाद तक बचे रहना.

बरात दुलहन के घर तक पहुंच गई. अगवानी और मिलनी हो रही है. दुलहन की दादी, राजदूत की बीवी ने मुझे यानी रोहित की दादी को गले लगाया, मिलनी की और पशमीने की शौल ओढ़ाई. कल जब दुलहन की डोली घर आएगी तो मुंहदिखाई में उसे मैं अपना वही जड़ाऊ मांगटीका और झुमके दूंगी जो तुम ने मुझे दिलाए थे. आखिर मैं ठहरी उत्तरजीवी.

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai की कास्ट हुई ट्रोल, नायरा ने ऐसे दिया करारा जवाब

कोरोनावायरस के बढ़ते कहर के बीच टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की शूटिंग शुरू हो गई है, जिसके बाद टीवी पर शो के नए एपिसोड देखने को मिल रहे हैं. लेकिन इन एपिसोड्स में भी कोरोनावायरस का कहर देखने को मिल रहा है. इसी के चलते ट्रोलर्स ने कलाकारों की टांग खींचना शुरू कर दिया है. दरअसल, एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें ट्रोलर्स मेकर्स के साथ-साथ सीरियल के कलाकारों की टांग खींचते हुए नजर आए थे. वहीं अब इसी का जवाब नायरा यानी शिवांगी जोशी ने एक वीडियो के जरिए दिया है. आइए आपको दिखाते हैं शिवांगी का ट्रोलर्स को करारा जवाब…

सीरियल में फेस पर शील्ड लगाने को लेकर ट्रोल हुई थीं नायरा

सीरियल्स की शूटिंग में कोरोनावायरस की गाइडलाइन्स का ध्यान रखना जरूरी किया गया, जिसके बाद लीड एक्ट्रेस शिवांगी जोशी फेस पर शील्ड लगाकर मार्केट जाती हुई नजर आई थी. वहीं ट्रोलर्स ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लोगों ने कहा कि इस सीरियल को तो कोरोना वायरस भी बंद नहीं करवा सकता है. इन सबके बीच शिवांगी जोशी ने सोशल मीडिया पर अपना एक नया वीडियो शेयर किया है.

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वीडियो के जरिए दिया जवाब

 

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शिवांगी ने ट्रोलर्स का जवाब देते हुए बता दिया है कि उन्हें इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता. शिवांगी जोशी वीडियो में अमेरिकन सिंगर सेलेना गोमेज के मशहूर एलबम ‘पास्ट लाइफ’ के गाने पर मस्ती करती हुई नजर आ रही हैं. ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ एक्ट्रेस का ये वीडियो फैंस के बीच इतना पौपुलर हो रहा है कि वायरल होने के बाद इस वीडियो को 70 हजार से भी ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं.

 

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बता दें, कुछ महीने पहले ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ एक्ट्रेस शिवांगी जोशी ने ट्रोलर्स के मीम्स के बारे में खुलकर बात करते हुए कहा था कि वह ऐसे मीम्स देखकर वो अपनी हंसी नहीं रोक पाती हैं. साथ ही यह भी कहा था कि वो ऐसी बातों को एक कॉम्प्लिमेंट की तरह लेती हैं. सीरियल के ट्रैक की बात करें तो शो में इन दिनों शिवांगी डबल रोल में नजर आ रही हैं, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. हालांकि कोरोनावायरस गाइडलाइंस के चलते फैंस को नायरा कार्तिक का रोमांस देखने को नहीं मिल रहा है.

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Hyundai Grand i10 Nios: इंजन

ऐसे समय में जब सारे सेगमेंट छोटे डिजल इंजनों से दूर जा रहे है, हुंडई ग्रैंड आई 10 नियोस 1.2 लीटर,74-बीएचपी डीजल इंजन का विकल्प प्रदान कर रहा है. आप इसमें 5-स्पीड मैन्युअल ट्रांसमिशन या 5-स्पीड एएमटी के बीच में चुनाव कर सकते है.

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इसका इंजन बहुत पावरफुल बनाया गया है. जो कि शांत और शक्तिशाली है. जब आप नियोस को शहर के अंदर चलाते हैं तो इसका ऑटोमेटिक मैन्युअल ट्रांसमिशन आपको ट्रैफिक में होने वाली परेशानियो से बचाता है. इसके पॉवरट्रेन इंजन की वजह से.

हुंडई ग्रैंड आई 10 नियोस #MakesYouFeelAlive.

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