8 टिप्स: सैलून जैसी हेयर केयर अब घर पर

मौनसून के सीजन में बारिश में भीगना सभी को पसंद होता है. लेकिन यह बारिश हमारे बालों को डल, बेजान और रूखा भी बना देती है. ऐसे में हमें बालों की खास केयर की जरूरत होती है.

हम सभी जानते हैं कि इस समय सैलून का रुख करना सही नहीं है. ऐसे में जब आप के बालों को केयर की जरूरत हो तब आप सैलून जैसा ट्रीटमैंट घर पर भी ले सकती हैं. इस से न सिर्फआप के बाल खूबसूरत बनेंगे, बल्कि आप सेफ भी रहेंगी और पैसों की भी बचत होगी. तो आइए जानते हैं कैसे करें घर पर बालों की केयर:

1. जब हो फ्रिजीनैस की समस्या

मानसून के सीजन में हवा में नमी बहुत अधिक होने के कारण बालों में फ्रिजीनैस की समस्या सब से अधिक होती है, जिस से बाल टूटते भी ज्यादा हैं. ऐसे में बस मन में यही खयाल आता है कि अब पार्लर में इन के ट्रीटमैंट के लिए हजारों रुपए खर्च करने ही पड़ेंगे. जबकि ऐसा नहीं है. आप को सिर्फ मौसम के हिसाब से बालों को ट्रीट करने की जरूरत होगी. इस के लिए आप अपने बालों की औलिव औयल से मसाज करें, क्योंकि औलिव औयल में ऐंटीऔक्सीडैंट्स और ऐंटीइनफ्लैमेटरी गुण होने के कारण ये बालों की फ्रिजीनैस को दूर करने का काम करते हैं. ये बालों में नैचुरल मौइस्चर को बरकरार रखने का भी काम करते हैं. इस के लिए आप हफ्ते में 3-4 बार औलिव औयल को गरम कर के उस से बालों की मसाज करें. आप की समस्या कुछ ही दिनों में गायब हो जाएगी और आप को अपने बालों में स्मार्टनैस व चमक भी देखने को मिलेगी.

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2. हर वाश के बाद कंडीशनर जरूरी

अकसर जब भी स्कैल्प से नैचुरल औयल खत्म हो जाता है, तो बाल रफ और घुंघराले होने लगते हैं. ऐसे में मौनसून सीजन में हर वाश के बाद उन्हें कंडीशनर करना बहुत जरूरी हो जाता है, क्योंकि यह बालों के मौइस्चर को बरकरार रख कर उन्हें हैल्दी बनाने का काम जो करता है. बस इस बात का ध्यान रखें कि बालों को हाइडे्रट करने वाले कंडीशनर का ही इस्तेमाल करें.

3. बालों को झड़ने से रोकें ये मास्क

मौनसून में बालों के झड़ने की प्रोब्लम सब से अधिक देखने को मिलती है. ऐसे में आप बाजार से महंगे मास्क खरीदने के बजाय हम आप को बताते हैं घर में ही बनने वाले हेयर मास्क के बारे में, जिन के फायदे भी ज्यादा हैं और आप इन्हें घर में रखी चीजों से ही आसानी से बना भी सकती हैं:

दही और नीबू का हेयर मास्क बालों के नैचुरल मौइस्चर को बरकरार रखने का काम करता है. इस के लिए आप एक बाउल में दही ले कर उस में 1/2 चम्मच नीबू डालें और इसे बालों में लगाएं. 1 घंटे बाद बालों को धो लें. इस से बाल मजबूत बनेंगे. ऐसा हफ्ते में एक बार जरूर करें. यकीन मानिए इस का रिजल्ट देख कर आप हैरान रह जाएंगी.

जैतून का तेल बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. क्योंकि यह खासकर बालों की डलनैस को दूर करने का काम करता है और अगर आप भी सौफ्ट हेयर चाहती हैं, तो अपने बालों की जैतून के तेल से मसाज कर के थोड़ी देर बाद ही हेयर वाश कर लें. इस से धीरेधीरे आप को अपने बालों में बदलाव नजर आने लगेगा.

बाल रूखे होने पर ऐलोवेरा जैल में दही मिला कर हफ्ते में 3 बार बालों में लगाएं. बालों की खोई चमक लौटने लगेगी.

4. हेयर सीरम से दें बालों को नरिशमैंट

जिस तरह फेस सीरम स्किन को हाइड्रेट रखने के साथसाथ उसे ग्लोइंग बनाने का काम करता है, उसी तरह हेयर सीरम बालों को नरिश करने का भी काम करता है, जो इस मौसम की अहम डिमांड होती है वरना अगर आप की स्कैल्प हाइड्रेट नहीं होगी, तो बाल डल होने के साथसाथ टूटने भी लगेंगे. इसलिए अगर बालों को हर मौसम में खूबसूरत देखना चाहती हैं, तो हेयर सीरम जरूर अप्लाई करें. बस इस बात का ध्यान रखें कि जब भी बालों में सीरम अप्लाई करें तो आप के बाल धुले हुए होने चाहिए. तभी इस का बैस्ट रिजल्ट आप को दिखेगा. हां, बारबार एक ही जगह सीरम अप्लाई करने से बचें.

5. बियर ट्रीटमैंट फौर हेयर

बियर ऐसी हेयर रेमेडी है, जो आप के बालों की हर समस्या को हल करने में कारगर होती है, खासकर जब आप अपने रूखे बालों से परेशान हो जाती हैं. ऐसे में या तो आप मार्केट में मिलने वाले बियर शैंपू को बालों में अप्लाई कर सकती हैं या फिर आप बियर में बारबार मात्रा में पानी मिला कर उस से बालों को धोएं. इस से न सिर्फ आप के बालों में शाइन आएगी, बल्कि इस से जड़ें भी मजबूत होंगी. पार्लर में भी अकसर बालों के लिए बियर ट्रीटमैंट दिया जाता है.

6. हौट हेयर टूल्स का प्रयोग नहीं

वैसे ही बारिश के मौसम में बालों की हालत खराब हो जाती है और ऊपर से आप उन में होट हेयर टूल्स भी इस्तेमाल कर लेंगी, तो यह प्रौब्लम काफी बढ़ सकती है. इसलिए जितना हो सके इस मौसम में हेयर टूल्स का कम से कम इस्तेमाल करें.

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7. हैल्दी डाइट भी जरूरी

अपने बालों को संवारने के लिए भले कितने ही ब्यूटी प्रोडक्ट्स क्यों न ट्राई कर लें, लेकिन जब तक अपनी इनर हैल्थ को नहीं सुधारेंगी तब तक ये सारे प्रयास बेकार ही साबित होंगे. इसलिए अपनी डाइट में विटामिंस, मिनरल्स, प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट्स जरूर शामिल करें. ये आप के बालों की हैल्थ को सुधारने का काम करते हैं.

8. नो हौट वाटर

बारिश के मौसम में भीगने के बाद अकसर जब ठंड लगती है तब मन करता है कि क्यों न गरम पानी से नहाया जाए. लेकिन ऐसा करना आप की सब से बड़ी भूल होगी, क्योंकि गरम पानी से बालों का मौइस्चर खत्म होने के साथसाथ वे डैमेज होने भी शुरू हो जाते हैं. इसलिए उन की अच्छी सेहत के लिए उन्हें नौर्मल पानी से ही धोऐं. इस तरह आप मौनसून के मौसम में घर बैठे अपने बालों की अच्छी केयर कर सकती हैं.

FILM REVIEW: जानें कैसी है हिना खान की फिल्म ‘UNLOCK’

रेटिंग: दो स्टार

ओटीटी प्लेटफॉर्म: जी 5

निर्माता: भावना श्रीवास्तव, राजेश कजोले

निर्देशक: देबात्मा मंडल

कहानी: मोहम्मद आजाद और भावना श्रीवास्तव

कलाकार: हिना खान, कुशल टंडन, अदिति आर्य, ऋषभ सिन्हा व अन्य

अवधि: 58 मिनट

मोबाइल ऐप/ इंटरनेट किस तरह इंसानी जिंदगी के लिए खतरा बनते जा रहे हैं, इसी पर रोशनी डालने के लिए फिल्मकार  देबात्मा मंडल एक हॉरर फिल्म अनलॉक लेकर आए हैं. अफसोस यह हॉरर फिल्म होते हुए भी डराती नहीं है.

कहानी:

कहानी के केंद्र में चार दोस्त सुहानी ( हिना खान), रिद्धि (अदिति आर्य ),अमर (कुशल टंडन) और अनुभव (ऋषभ सिन्हा) है. सुहानी और रिद्धि रूममेट हैं. रिद्धि और अमर एक दूसरे के साथ प्रेम संबंधों में है.अनुभव और अमर दोस्त हैं. एक दिन अनुभव की वजह से सुहानी की मुलाकात अमर से होती है. और सुहानी अमर से एक तरफा प्यार करने लगती है. एक दिन एक होटल की पार्टी में अनुभव मोबाइल ऐप डार्क वेब का जिक्र करता है और बताता है कि इस एप्स से इंसान  जिसे तलाश ना चाहे तलाश सकता है. डार्क वेब एप्स का रिद्धि और अमर पर कोई असर नहीं होता. लेकिन सुहानी बहुत आकर्षित होती है. वापसी में अनुभव और सुहानी के बीच बातचीत होती है जिससे समझ में आता है कि अनुभव की मां बहुत बीमार है पर अनुभव को यकीन है कि बहुत जल्द उसके पास मां के इलाज के लिए पैसे आ जाएंगे. सुहानी अकेले ही घर पहुंचती है क्योंकि रिद्धि वही होटल में रुक गई थी.

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सुहानी ने होटल के उस कमरे में एक जगह कैमरा फिट कर दिया था, जिस कमरे में रिद्धि के जाने की संभावना थी और उस कमरे की सारी गतिविधियां वह अपने मोबाइल फोन पर देख सकती थी. रिद्धि और अमर उस कमरे में जाते हैं और दोनों प्रेम संबंधों में लीन होने लगते हैं, यह सब मोबाइल पर सुहानी देखती है, अचानक रिद्धि उठकर उस कैमरे के ऊपर एक कपड़ा डाल देती है, ऐसे में सुहानी को अनुभव द्वारा बताए गए डार्क वेब एप्स की याद आती है. उस ऐप को अपने मोबाइल पर डाउनलोड कर उस होटल के कमरे में रिद्धि व अमर की बीच जो प्रेम लीला चल रही है, उसे देखना चाहती है. लेकिन डार्क वेब एप उसके सामने सवाल करता है कि इस क्या वह अपनी कोई इच्छा पूरा करना चाहती हैं, ऐसा है तो तीन टास्क पूरा करके अपनी इच्छा को पूरा कर सकती है. सुहानी कहती है कि उसे अमर चाहिए. सुहानी के पहला टास्क पूरा करते ही अमर उसके पास आता है और एक तस्वीर दिखाते हुए कहता है कि रिद्धि उसके साथ धोखा करके इस लड़के के साथ संबंध बना रही है. अब सुहानी अमर के साथ संवेदना प्रकट करते हुए उसके साथ  रहने की कोशिश करती है. दूसरा टास्क पूरा करने के बाद सुहानी और अमर एक पार्टी में जाकर बीयर पीते हैं और फिर अमर के साथ उसकी गाड़ी में बैठकर अपने घर से रवाना होती है पर तभी रिद्धि का फोन अमर के पास आता है और स्थितियां बदल जाती है. अमर और रिद्धि सगाई कर लेते हैं तथा दूसरे दिन रिद्धि ,अमर और  सुहानी को पार्टी देने के लिए होटल में बुलाती है . तय समय पर सुहानी और अमर होटल पहुंच जाते हैं मगर रिद्धि नहीं पहुंचती है. ऐसा होता है कि अनुभव के हाथों  रिद्धि मारी जाती है. मौत की खबर और दूसरा टास्क पूरा करने की घटना याद करके सुहानी डर जाती है. अब वह तीसरा टास्क नहीं करना चाहती. लेकिन उसे डार्क वेब एप्स धमकाता है कि  अगर उसने तीसरा टास्क पूरा नहीं किया, तो अमर मारा जाएगा. उधर अनुभव  तीसरे टेस्ट को लेक फस गया है. अंततः सुहानी अमर और अनुभव के साथ अच्छा तो नहीं होता है.

लेखन:

फिल्म की अवधि 58 मिनट है इसलिए इसे झेला जा सकता है, अन्यथा इसमें खामियां ही खामियां हैं. लेखक ने किसी भी चरित्र का सही ढंग से चरित्र चित्रण नहीं किया है. किसी भी किरदार की जिंदगी पर कोई रोशनी नहीं डाली गई है. डार्क वेब जिस तरह के अपराध करवाता है उसके पीछे कोई तर्क भी नहीं है. इसमें ना तो रोमांस है और ना ही रहस्य व रोमांचही है. जबकि इस विषय पर रहस्य व रोमांच पैदा करने की असीम संभावनाएं थी मगर लेखक और निर्देशक सतही स्तर पर ही रह गए. संभवत लेखक ने पिछले दिनों ब्लू वेल चैलेंज गेम के चलते तमाम बच्चे आत्महत्या कर रहे थे, उसी से प्रेरित होकर इस वेब फिल्म की कहानी गढ़ी है ,पर चरित्रों को गढ़ने में और पटकथा लिखने में जिस  मेहनत की जरूरत थी, वह  करने की बजाय जल्दबाजी में एक कथा पेश कर दी गई.

निर्देशन:

निर्देशक देबात्मा मंडल  भी पूरी तरह से असफल रहे हैं.  निर्देशक का सारा ध्यान इंटरनेट के स्याह पक्ष को ही उभारने में ही रहा, पर किसी भी बात को तर्कसंगत ढंग से पेश नहीं कर पाए.

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 अभिनय:

कहानी चार दोस्तों की है मगर ऋषभ सिन्हा के हिस्से करने का कुछ आया ही नहीं, उसकी प्रतिभा को जाया किया गया है. जहां तक हिना खान ,कुशल टंडन और अदिति आर्य का सवाल है तो इन्होंने एकदम साधारण अभिनय किया है. हिना खान, कुशल टंडन और अदिति आर्य के बीच कहीं कोई केमिस्ट्री नजर नहीं आती. कुशल और अदिति के बीच भी  रोमांस की केमिस्ट्री नजर नहीं आती .इसकी मूल वजह सही ढंग से चरित्र चित्रण का ना होना है. इसके लिए कलाकार कम लेखन ज्यादा दोषी है.

सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड से डरे शेखर सुमन, बेटे को लेकर कही ये बात

 बीते दिनों एक्टर सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के सुसाइज के चलते बौलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर सोशलमीडिया पर बवाल हो रहा है. जहां लोग स्टार किड्स को सोशलमीडिया पर बुरा भला कह रहे हैं तो वहीं सुशांत की मौत की वजह डिप्रेशन को बताकर सेलेब्स को दोषी ठहरा रहे हैं. इसी बीच कुछ सेलेब्स सुशांत के सपोर्ट में भी आकर खड़े हुए हैं, जिनमें जाने-माने कॉमेडियन, एंकर, होस्ट और एक्टर शेखर सुमन (Shekhar Suman) का नाम भी शामिल है. वहीं सुशांत के डिप्रेशन को लेकर उन्होंने अपने बेटे को लेकर अपना एक डर भी सामने रखा है, जिसके बाद उनके फैंस उन्हें हौसला दे रहा हैं. आइए आपको क्या कहते हैं शेखर सुमन…

सुशांत के सुसाइड से डर गए हैं शेखर

हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान शेखर सुमन (Shekhar Suman) ने खुलासा किया है कि वह सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड से बेहद डर गए हैं और अपने बेटे अध्ययन सुमन को लेकर बेहद चिंतित हैं. दरअसल उन्होंने कहा कि सुशांत उनके बेटे की तरह थे और ऐसे में वो उनके पिता का दर्द बेहद अच्छे से समझ सकते है. शेखर सुमन (Shekhar Suman) ने कहा है कि वो इस घटना से दोबारा ‘डरे हुए और चिंतित हैं.’ साथ ही यह भी बताया कि उनका बेटा अध्ययन सुमन भी डिप्रेशन का शिकार रह चुका है और एक ऐसा वक्त भी था जब उसे भी आत्महत्या करने जैसे विचार मन में आने लगे थे.

 

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My father my hero! Period. @shekhusuman ❤️ Happy Father’s Day !

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मुश्किल दौर से गुजर चुके हैं शेखर के बेटे

शेखर सुमन ने कहा, ‘ये मेरे परिवार के लिए काफी मुश्किल था अपने बेटे को उस बुरे दौर से बाहर निकालना. लेकिन अब सुशांत की मौत के बाद मैं दोबारा से डरा हुआ हूं और चिंतित हूं. मैं उन दिनों बार-बार जाकर अपने बेटे के कमरे में देखता था कि सबकुछ ठीक है न… ये कई बार हुआ कि मैं सुबह के 4-5 बजे जाकर उसके कमरे में उसे देखता था तो वो छत को एकटक देखता हुआ मुझे मिलता था. मैं उससे कहता था कि सो जाओ… हम तुम्हारे साथ हर हालत में हैं.‘

 

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Yeh Kya hogaya ! Iam going to miss my hair! Like if you want to know mere Bala sorry I mean baalon ka haal !!!!! #ınstagood

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बता दें, हाल ही में शेखर सुमन ने भी इंडस्ट्री को लेकर कई खुलासे किए हैं, जिसके बाद सोशलमीडिया पर वह सुर्खियों में हैं. साथ ही शेखर सुमन ने एक फोरम भी बनाया है जिसके तहत वह सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड केस में  सीबीआई जांच की मांग की है.

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इंडस्ट्री में कॉम्पीटिशन और इनसिक्युरिटी बहुत ज्यादा है – मीरा देवस्थले

टीवी शो ‘दिल्ली वाली ठाकुर गर्ल्स’ से चर्चित होने वाली एक्ट्रेस मीरा देवस्थले बरौदा की है. उसे बचपन से अभिनय की इच्छा थी, जिसमें साथ दिया उसकी माँ ने. स्वभाव से विनम्र और हंसमुख मीरा ने केवल 5 साल की उम्र से नाटकों में अभिनय करना शुरू कर दिया था.

अपनी पढाई ख़त्म करने के बाद मीरा देवस्थले मुंबई आई और अभिनय की प्रशिक्षण लेने के बाद धारावाहिक ‘ससुराल सिमर का’ में डेब्यू किया, जिसमें उनके काम को काफी प्रशंसा मिली. इसके बाद उसने लगातार कई शो किये और अपनी एक अलग पहचान बनायीं. मीरा देवस्थले अभिनय के साथ-साथ उनकी प्रोसेस भी पसंद है. मीरा देवस्थले शो ‘विद्या’ काफी पौपुलर शो थी. लेकिन लॉकडाउन की वजह से इसे बंद कर दिया गया, जिसका मलाल मीरा को है, पर वह मायूस नहीं आगे बढ़ना जानती है. इन दिनों वह अपने पेंडिंग काम और हॉबी को पूरा कर रही है. उनसे बात हुई पेश है कुछ अंश.

सवाल-इस फील्ड में आने की प्रेरणा कहां से मिली?

12 वीं की परीक्षा पास करने के बाद मैं मुंबई आई और अभिनय की ओर रुख किया. इसके लिए मैंने अभिनय का प्रशिक्षण लिया. पहले मैं इंजिनीयर बनना चाहती थी, पर मैंने देखा कि मुझे सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेना, एक्टिंग और डांस करना अधिक अच्छा लगता है. फिर मैंने अभिनय की ओर जाने का मन बनाया, लेकिन इसके लिए मैंने एक साल का समय मेरे परिवार से माँगा. अगर मैं सफल नहीं हो पायी तो वापस पढाई करुँगी. मुझे परिवार का सहयोग हमेशा मिला उन्होंने मुझे काम करने की पूरी आज़ादी दी है.

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सवाल-कितना संघर्ष रहा?

मुंबई आने के बाद एक्टिंग क्लास ख़त्म होने के बाद काम मिलना शुरू हो गया. अधिक संघर्ष नहीं था, क्योंकि मैंने एक्टिंग क्लास ले लिया. ऑडिशन देती रही और काम मिल गया. संघर्ष अच्छे काम के लिए, स्क्रिप्ट को याद करना और अच्छा परफोर्मेंस देना था, जो मैंने एक दिन में करीब 4 जगह ऑडिशन दिया है, जो बहुत कठिन था.  

सवाल-बड़ी शो का हिस्सा बनने की ख़ुशी कितनी थी?

मैं बहुत खुश थी. मेरी माँ हमेशा मेरे साथ जाती थी, क्योंकि मैं 18 साल की थी. उस धारावाहिक में मुझे सबसे अंत में साईन किया गया था. इसके बाद मैंने एक मेकअप किट खरीदी. शौपिंग की, बहुत अच्छा लगा. इस शो के प्रोड्यूसर और लोग बहुत अच्छे थे, इसलिए पहले दिन से ही शूटिंग करने में भी बहुत मज़ा आया था. सीखने और समझने के लिए वहां बहुत कुछ मिला.  

सवाल-लॉक डाउन में क्या कर रही है?

मुझे किताबे पढने का बहुत शौक है, उसे पढ़ रही हूं. इसके अलावा मैंने माँ के साथ केक बेक करना, इटालियन खाना बनाना सीखा है. इस दौरान मैंने महसूस किया है कि घर पर रहने वाली महिलाएं पूरा दिन काम करती है और ये आसान नहीं होता. 

सवाल-धारावाहिक ‘विद्या’ के बंद होने से मायूसी हुई?

हाँ थोड़ी तो हुई, क्योंकि कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से उन्होंने उसे बंद किया, पर मेरी माँ ने मेरी मायूसी को कम कर दिया. 

सवाल-क्या हिंदी फिल्मों में आने की इच्छा है ?

मैं अभी वेब सीरीज में काम करना चाहती हूं, क्योंकि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है. सीखने के बाद मैं फिल्मों में आना चाहूंगी. 

सवाल-क्या काम के साथ-साथ आपकी पढाई जारी है?

नहीं, वह संभव नहीं क्योंकि काम में हर दिन 10 से 12 घंटे देने पड़ते है, ऐसे में पढाई छूट गयी है, पर जब कभी भी काम से ब्रेक लूँगी, मैं अवश्य एक बार फिर कुछ कोर्स करने की कोशिश करुँगी.

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सवाल-नेपोटिज्म और खेमेबाजी के बारें में आपकी सोच क्या है?

ये हर क्षेत्र में होता है, पर मुझे अभी तक इसका सामना नहीं करना पड़ा. मैंने जब कभी भी लो फील किया मेरे परिवार वालों ने साथ दिया. इसे अधिक महत्व नहीं दिया. डिप्रेशन एक बीमारी है और लोग इसे छिपाते है, जो उचित नहीं. इसका इलाज है, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेने से घबराना नहीं चाहिए. साथ ही दोस्तों और परिवार से संवाद बनाना जरुरी है, जो आपकी बात सुने और सही निर्देश दें. इंडस्ट्री में कॉम्पीटिशन और इनसिक्युरिटी बहुत अधिक है. इसलिए यहाँ डिप्रेसड होना या अकेले पड़ना आम बात है,ऐसे में सपोर्ट सिस्टम का स्ट्रोंग होना जरुरी है. सुशांत सिंह राजपूत की घटना से मैं बहुत शॉकड थी, क्योंकि इतना मेहनत करने वाला इंसान के लिए ऐसा कर जाना विश्वास योग्य नहीं था.

सवाल-तनाव में होने पर आप क्या करती है? 

मेरा परिवार मेरे साथ हमेशा रहता है, इसलिए कभी तनाव नहीं आती. विद्या शो के बंद होने के बाद जब मैंने माँ से इसका जिक्र किया तो उनका कहना था कि कोई बात नहीं. इतने सालों से काम कर रही है अब थोड़ी आराम कर लें. ये रिएक्शन मेरे लिए बड़ी थी. इसके अलावा कोई भी समस्या आने पर भाई, माँ या दोस्तों से शेयर करती हूं. मैं बहुत पॉजिटिव विचार रखती हूं. किसी चीज के न मिलने पर मायूस नहीं होती, हार नहीं मानती. मेरे माता-पिता अलग रहते है, पर उसका प्रभाव मेरे जीवन पर कभी नहीं पड़ा. 

सवाल-लॉक डाउन का असर इंडस्ट्री पर पड़ा है, आपकी सोच इस बारें में क्या है?

जैसा मैंने सुना है कि करीब 12 करोड़ लोगों के काम हर क्षेत्र से चले गए है. ये बहुत बड़ी समस्या है. धीरे-धीरे सब सही होगा. धीरज सबको रखना पड़ेगा. जल्दी ठीक हो यही उम्मीद करती हूं. दुःख इस बात का है कि लोग अभी भी मान नहीं रहे और झुण्ड में बाहर निकलते है.

सवाल-आप कितनी फैशनेबल है?

मैं अधिक फैशन पसंद नहीं करती. आरामदायक कपडे पहनती हूं.  अभी मैं खुद फैशन के बारें में थोडा सोचने लगी हूं. 

सवाल-कोई सामाजिक काम जिसे आप करना चाहे?

मैं करती हूं, जिसे बताना नहीं चाहती. इसके अलावा सिग्नल पर भीख मांग रहे छोटे बच्चों को अगर पढ़ाया जाय, तो अच्छी बात होगी.

सवाल- गृहशोभा के जरिये कोई मेसेज देना चाहे?

मेरी माँ गृहशोभा हमेशा पढ़ती है, उन्हें मैगज़ीन की ब्यूटी, रिलेशनशिप, महिलाओं से सम्बंधित लेख बहुत पसंद है. इसके अलावा महिअलों से मैं कहना चाहती हूं  कि वे घर की बहुत बड़ी जिम्मेदारी सम्हालती है. उन्हें मैं सेल्युट करती हूं. उन्हें कभी अपने आप को कम नहीं समझना चाहिए.

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लंबे समय से घुटनों के पुराने दर्द से पीडि़त हूं, क्या इसका कोई सही इलाज है?

सवाल-

क्या आप बदलते मौसम में घुटनों को नुकसान से बचाने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव का सुझाव दे सकते हैं? मैं एक 45 वर्षीय मरीज हूं. जो लंबे समय से घुटनों के पुराने दर्द से पीडि़त हूं?

जवाब-

तलेभुने पदार्थ न खाएं. धूम्रपान छोड़ दें. विटामिन डी सप्लिमैंट्स लें. घुटनों के इर्दगिर्द की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए टहलने, सैर करने के साथसाथ हलकेफुलके व्यायाम भी करने की जरूरत होगी. हलकेफुलके शारीरिक व्यायाम से घुटनों पर कम दबाव पड़ेगा. अगर चलने से आप के घुटनों में तकलीफ होती है तो आप पानी में रह कर किए जाने वाले व्यायाम जैसे वाटर ऐरोबिक्स, डीप वाटर रनिंग (गहरे पानी में जौगिंग) करने पर विचार कर सकते हैं. आप ऐक्सरसाइज करने वाली साइकिल का भी प्रयोग कर सकते हैं.

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आर्थ्राइटिस अब हमारे देश की आम बीमारी बन चुका है और इस से पीडि़त व्यक्तियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. आर्थ्राइटिस से सिर्फ वयस्क ही नहीं, बल्कि आज के युवा भी पीडि़त हो रहे हैं. जिस की वजहें आज की मौडर्न जीवनशैली, खानपान, रहनसहन आदि हैं. आज हर व्यक्ति आराम चाहता है, मेहनत तो जीवनचर्या से खत्म हो चली है. फलस्वरूप ऐंडस्टेज आर्थ्राइटिस से पीडि़त अनेक रोगियों के पास जौइंट रिप्लेसमैंट सर्जरी के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह जाता.

इस विषय पर मुंबई के फोर्टिस हौस्पिटल के डा. कौशल मल्हान, जो यहां के सीनियर और्थोपैडिक कंसल्टैंट हैं और घुटनों की सर्जरी के माहिर हैं से बातचीत की गई. वे पिछले 20 सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं. उन का कहना है कि हमेशा से हो रही घुटनों की प्रत्यारोपण सर्जरी ही इस रोग से मुक्ति दिलाती है, पर यह पूरी तरह कारगर नहीं होती, क्योंकि सर्जरी के दौरान मांसपेशियां और टिशू क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. परिणामस्वरूप जितना लाभ व्यक्ति को चलनेफिरने में होना चाहिए उतना नहीं हो पाता.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- घुटने का प्रत्यारोपण, आर्थ्राइटिस से मुक्ति

Beauty Tips: क्या मैगनेटिक लैशिज का इस्तेमाल करना सेफ है?

हम अपनी आंखों पर जिस भी चीज का प्रयोग करते हैं उस का सेफ होना बहुत ही आवश्यक होता है क्योंकि आंखें हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण व नाजुक हिस्सा होती है. आज कल मेक अप व गलैमरस जगत में फेक आई लैशिज का प्रयोग बहुत बढ गया है. क्या हैं मैगनेटिक लैशिज व क्या यह सेफ हैं? आइए जानते हैं इस आर्टिकल के माध्यम से.

क्या हैं मैगनेटिक लैशिज?

हम जब फैक लैशिज का प्रयोग करते हैं तो हमें उन को अपनी आंखों से ग्लू की मदद से चिपकाने में काफी मुश्किल महसूस होती है.  हमें यह काम बहुत झंझट वाला लगता है. तो इसी झंझट को खत्म करने के लिए मैगनेटिक लैशिज प्रयोग में आई. इन लैशिज को चिपकाने के लिए आप को किसी तरह की ग्लू की जरूरत नहीं पडती. इनमें छोटी छोटी मैगनेट होती हैं. इन की दो परतें होती हैं. आप इन को अपनी लैशिज के ऊपर चिपका सकती हैं. इन्हें उतारने के लिए बस इन को थोडा सा खींचना होता है और यह आंखों से अलग हो जाती हैं.

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क्या मैगनेटिक लैशिज सेफ हैं?

अपनी आंखों पर कोई भी चीज प्रयोग करने से पहले हम यह सुनिश्चित करते हैं कि वह सुरक्षित है या नही? क्या मैगनेटिक लैशिज सेफ हैं? इस का जवाब हां है, ज्यादातर यह लैशिज आप की आंखों के लिए बिलकुल सुरक्षित हैं परंतु आप को कुछ बातें ध्यान में रखनी होंगी.

ग्लू से चिपकने वाली लैशिज किसी किसी के लिए अलर्जिक साबित हो सकती हैं परंतु मैग्नेटिक लैशिज में ग्लू का प्रयोग ही नहीं होता इसलिए यह सेफ है. फिर भी कई महिलाओं को इन से भी अलर्जी हो सकती है.

नकली पलकें भी इंसानी बालों का प्रयोग कर के ही बनाई जाती हैं. तो उन की क्वालिटी भी अलग अलग मिलती है. इस लिए आप किसी बढिया ब्रैंड की लैशिज का ही प्रयोग करें.

आप लैशिज को उतारते समय अपनी लैशिज के भी कुछ बालों को खो देते हैं और फिर अगली बार वह गलत दिशा में उगते हैं.

आप चाहे किसी भी प्रकार की आई लैशिज का प्रयोग करें, कई बार इन के प्रयोग से आंखों में इंफैक्शन जैसी समस्या हो जाती है.

यदि आप को फिर भी लैशिज का प्रयोग करना अच्छा लगता है तो कुछ सेफ्टी टिप्स को अपनाएं.

सेफ्टी टिप्स

अपनी आई लैशिज किसी अन्य के साथ शेयर न करें.

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अपनी फेक लैशिज को एक बंद डिब्बे में रखें जो कि साफ सुथरा हो.

काफी गर्म जगहों पर अपनी लैशिज को न रखें.

यदि आप को आंखों में जलन या अन्य तरह की दिक्कत होती है तो इन का प्रयोग न करें.

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आधुनिकता के पैमाने पर छलकते जाम

आज भूमि की शादी की पहली सालगिरह थी और अपने पति कार्तिक के इसरार पर उस ने पहली बार बियर का स्वाद चखा था. अब कार्तिक का साथ देने के लिए वह भी कभीकभी ले लेती थी और एक दिन जब कार्तिक कहीं बाहर गया हुआ था तो भूमि ने अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर ली पर उस के बाद भूमि अपने को रोक नहीं पाई और आए दिन ऐसी मदिरापान की पार्टियां उन के यहां आयोजित होने लगीं. भूमि और कार्तिक अपने इस शौक को हाई क्लास सोसाइटी में उठनेबैठने का एक अनिवार्य अंग मानते हैं. यह अलग बात है कि जहां कार्तिक शराब के अत्यधिक सेवन के कारण इतनी कम आयु में ही हाई ब्लडप्रैशर का शिकार हो गया है वहीं भूमि की प्रजनन क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है और वह मां नहीं बन पा रही है.

आज राजेश खन्नाजी बड़ी बेचैनी से चहलकदमी कर रहे थे. उन की बेटी तन्वी अब तक घर नहीं लौटी थी. दरवाजे की घंटी बजी और शराब के नशे में झूमती हुई तन्वी दरवाजे पर खड़ी थी. राजेशजी को तो काटो खून नहीं, उन्हें समझ नहीं आया कि उन की परवरिश में क्या गलती रह गई थी. अगले दिन जब तन्वी का कोर्टमार्शल हुआ तो तन्वी ने पापा से कहा, ‘‘पापा औफिस की पार्टीज में ये सब चलता है और फिर रोशन भैया भी तो पीते हैं.’’

राजेशजी गुस्से में बोले, ‘‘वह कुएं में कूदेगा तो तू भी कूदेगी, लड़कों की बराबरी करनी है तो बेटा अच्छी आदतों की करो.’’

आजकल की भागतीदौड़ती जिंदगी में सभी लोगों पर अत्यधिक तनाव है पर जहां पहले पुरुष ही तनाव से लड़ने के लिए मदिरापान का सेवन करते थे वहीं अब महिलाएं भी पुरुषों के साथ इस मोर्चे पर डट कर खड़ी हैं. क्यों न हो आखिर यह इक्कीसवीं सदी है. महिलाएं और पुरुष  हर कार्य में बराबरी के भागीदार हैं. जब से मल्टीनैशनल कंपनी और कौलसैंटर की बाढ़ भारत में आई है, तभी से शराब और सिगरेट के सेवन में भी आश्चर्यजनक बढ़ोतरी हुई है. यहां पर काम करने की समयावधि, देर रात तक चलने वाली पार्टीज और कभी न खत्म होने वाले कामों के कारण, यहां के कर्मचारियों में  एक अजीब किस्म का तनाव व्याप्त रहता है. इस का निवारण वे मुख्यत: शराब के सेवन से करते हैं.

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एकल परिवारों में बढ़ती लत

ऐसा नहीं है कि पहले के जीवन में तनाव नहीं था पर पहले जहां परिवार के सदस्यों के साथ हम शाम को बैठ कर अपने दुखसुख साझा कर लेते थे. वहीं अब एकल परिवारों के चलन के कारण यह भूमिका मदिरा ने ले ली है.

मजे की बात यह है पहले जहां पत्नियां पति को शराब के सेवन को ले कर रोकटोक करती वहीं अब अगर पति इन नशों का आदी होता है तो उस को तनाव से लड़ने के लिए छोटी सी खुराक समझ कर चुप लगा जाती हैं. बहुत से घरों में तो यह भी देखने को मिलता है कि पत्नियां भी धीरेधीरे पति का साथ देने लगती हैं. बाद में पत्नियों का ये कभीकभी का शौक भी कब और कैसे लत में परिवर्तित हो जाता है वे खुद भी नहीं जान पाती हैं.

अखिल और प्रज्ञा मुंबई में रहते हैं. उन के घर में न पैसों की कोई कमी है और न ही आधुनिक संस्कारों की. दोनों खुद अपनी बेटी के सामने बैठ कर खुद ड्रिंक करते हैं बिना यह सोचे कि इस बात का उन की बेटी कायरा पर क्या असर होगा? हद तो तब हो गई जब एक दिन कायरा को स्कूल से निलंबित कर दिया गया क्योंकि वह पानी की बोतल में पिछले कई दिनों से शराब ले कर जा रही थी. बेटी को क्या समझाएं, यह वे खुद ही नहीं समझ पा रहे हैं. फिलहाल दोनों बेटी से आंखें चुरा रहे हैं और एकदूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं.

इंस्टैंट का जमाना है

आजकल इंस्टैंट जमाना है. हर चीज चाहिए पर बहुत जल्दी और बिना मेहनत करे. अगर तनाव है तो उस से लड़ने का सब से आसान विकल्प लगता है मदिरापान करना. इस के दो फायदे हैं पहले तो कुछ देर के लिए ही सही आप तनावमुक्त तो हो जाओगे और दूसरा आप मौडर्न भी कहलाएंगे.

वहीं जब घर के बुजुर्गों को बच्चों की इस आदत के बारे में बात पता चलता है तो कुछ जुमले बोल कर ही वे लोग अपने कर्तव्य की इतिश्री कर देते हैं.

‘‘कैसा जमाना आ गया है, आदमियों की तो बात जाने दो, आजकल तो औरतें भी शराब पीती हैं.’’

तंबाकू, सिगरेट और शराब, इन सारी चीजों का सेवन करना आजकल की युवा महिलाओं में एक आम बात सी हो गई है. पहले महिलाएं इन सब चीजों का सेवन मजे के लिए करती हैं और बाद में जब ये लत बन जाती है तो एक सजा जैसी हो जाती है. पहले जहां शराब या सिगरेट की दुकानों पर पुरुषों की भीड़ एक आम बात थी वहीं अब महिलाएं भी बिना किसी हिचक के उन दुकानों पर देखी जा सकती हैं.

गीतिका 28 वर्षीय युवती है और एक आधुनिक दफ्तर में काम करती है. जब मैं ने उस से इस बाबत बातचीत करी तो उस ने कहा, ‘‘दीदी, आजकल औफिस पार्टियों में शराब का सेवन अनिवार्य सा हो गया है. नौकरी तो करनी ही है न तो फिर शराब से कैसा परहेज.’’

मैं इस लेख के माध्यम से शराब या सिगरेट को बढ़ावा कदापि नहीं देना चाहती हूं पर मैं समाज के बदलते मापदंड की तरफ आप सब का ध्यान आकर्षित कराना चाहती हूं.

चलिए अब कुछ कारणों पर प्रकाश डालते हैं जिस कारण आजकल महिलाओं में शराब के सेवन की आदत बढ़ती जा रही है.

फैशन स्टेटमैंट: आजकल शराब या सिगरेट का सेवन भी एक तरह का फैशन स्टेटमैंट बन गया है. अगर आप शराब नहीं पीते हैं तो आप बाबा आदम के जमाने के हैं. आप कैसे अपने कैरियर में आगे बढ़ेंगे, अगर आप को आजकल के तौरतरीकों का पता नहीं है?

बराबरी की चाहत: आजकल की नारी जीवन के हर मोर्चे पर पुरुषों के साथ कदम से कदम मिला कर चल रही हैं. अगर पुरुषवर्ग मदिरापान करते हैं तो फिर आज की आधुनिका, श्रृंगारप्रिया कैसे पीछे रह सकती है. अधिकतर महिलाएं सबकुछ जानतेबूझते हुए भी बस बराबरी की चाहत में इस राह की तरफ मुड़ जाती हैं.

तनाव से राहत: तनाव से राहत एक तरफ कैरियर के दबाव, दूसरी तरफ बूढ़े मातापिता, बढ़ते बच्चों की जरूरतें, कभी न खत्म होने वाला काम, इन सब बातों से राहत पाने के लिए भी आजकल की महिलाएं शराब का सहारा लेने लगी हैं. कुछ देर के लिए ही सही उन्हें लगता है वह एक अलग दुनिया में चली गई हैं.

स्वीकार होने की चाह: आजकल अधिकतर लड़कियां नौकरी के कारण अपना घर छोड़ कर महानगरों में अकेले रहती हैं. नई जगह, नए दोस्त और उन दोस्तों में अपनी पहचान बनाने के लिए न चाहते हुए भी वे मदिरापान करने लगती हैं. नए रिश्ते बनते हैं तो सैलिब्रेशन में शराब का सेवन होता है और फिर जब रिश्ते टूटते हैं तो फिर शराब का सेवन गम गलत करने के लिए होता है.

शराब के सेवन से सेहत पर होने वाले बुरे असर से हम सब भलीभांति परिचित हैं. परंतु अगर हाल ही में हुए शोधों पर नजर डालें तो यह पता चलता है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की सेहत पर शराब का दुष्प्रभाव अधिक होता है.

– शराब को पचाने के लिए लिवर से एक ऐंजाइम निकलता है जो शराब को पचाने में सहायक होता है. महिलाओं में ये ऐंजाइम कम निकलता है जिस के कारण उन के लिवर को पुरुषों के मुकाबले अधिक मेहनत करनी पड़ती है.

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– महिलाओं की शारीरिक संरचना पुरुषों से अलग है  इसलिए उन की सेहत पर शराब का दुष्प्रभाव अधिक देर तक और जल्दी होता है.

– शराब के सेवन से महिलाओं की प्रजनन शक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और यदि गर्भावस्था में महिलाएं शराब का सेवन करती हैं तो होने वाले  शिशु पर भी प्रभाव पड़ता है.

घर के मुखिया या बड़े होने के नाते यदि आप अपने बच्चों की शराब के सेवन की आदत से परेशान हैं तो उन्हें अवश्य समझाएं. शराब के सेवन से होने वाली हानि के बारे में भी बताएं पर बेटा और बेटी या बहू सब को एक समान ही सलाह दें. शराब का सेवन करना एक गंदी आदत है. पर इस का आशय यह नहीं है कि उस का सेवन करने वाली महिलाओं का चरित्र खराब है. जो बात गलत है वह सब के लिए ही गलत है चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, दोनों को सलाह देते समय एक ही पैमाना रखें, बेटी और बहू को पाप और बेटे को शौक के तराजू पर ना तौलें.

यह जरूर याद रखिए कमजोर महिला ही विपरीत परिस्थितियों में शराब की डगर पर फिसल जाती है. किसी भी प्रकार के नशे की जरूरत तभी पड़ती है, अगर आप के अंदर हौसले की चिंगारी न हो.

नशा हो जब तुम को हौसले की उड़ान का तो फिर क्या करोगी तुम शराब के जाम का.

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Monsoon Special: जायकेदार पनीर तवा मसाला करें ट्राय

मानसून के मौसम में जायकेदार पनीर तवा मसाला जरूर बनाएं और अपने घरवालों को खुश कर दें.

हमें चाहिए

200 ग्राम पनीर के टुकड़े

1 प्याज कटा हुआ

2 टमाटर कटे हुए

1 शिमलामिर्च कटी हुई

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2-3 कलियां लहसुन

1 टुकड़ा अदरक

1-2 हरी मिर्चें

1/2 छोटा चम्मच जीरा

1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

1/4 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर

1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला

1/4 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर

2 बड़े चम्मच घी

1/2 छोटा चम्मच कसूरी मेथी

नमक स्वादानुसार

बनाने का तरीका

टमाटर, हरीमिर्चें, लहसुन, अदरक को मिला कर मिक्सी में पेस्ट बना लें. तवे पर घी गरम कर जीरा व कटी प्याज भूनें.

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2-3 मिनट बाद कटी शिमलामिर्च, सभी मसाले, हलदी पाउडर, धनिया पाउडर, मिर्च पाउडर, गरम मसाला, अमचूर, नमक और टमाटर का पेस्ट डाल कर धीमी आंच पर घी छोड़ने तक मसाला पकाएं.

पनीर के टुकड़े डालें और अच्छी तरह मिक्स कर पकाएं. कसूरी मेथी को मसल कर डिश गार्निश करें व परोसें.

सांवलेपन को लेकर बिपाशा बसु ने किया ये इमोशनल पोस्ट, बताई अपनी जर्नी 

बीते दिनों अमेरिका में जॉर्ज फ्लौएड की मौत के बाद #blacklifematter ट्रैंड कर रहा है. इसी बीच Hindustan Unilever ने बड़ा फैसला लेते हुए अपनी ब्यूटी क्रीम फेयर एंड लवली (fair and lovely) से फेयर शब्द को हटाने का फैसला किया, जिसके बाद सोशलमीडिया पर लोगों की सांवलेपन को लेकर कई तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. वहीं बौलीवुड एक्ट्रेस बिपाशा बसु (Bipasha Basu) ने भी अब इस फैसले पर अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि बचपन से लेकर अब तक वह सांवलेपन को लेकर किस तरह से सामना करती रहा हैं. आइए आपको दिखाते हैं बिपाशा का वायरल पोस्ट….

बचपन का दर्द किया जाहिर

बिपाशा ने सांवलेपन को लेकर लिखा, ‘जब मैं बड़ी हो रही थी, तब से मैंने हमेशा यही सुना है कि, ‘बोनी सोनी से ज्यादा सांवली है, वो सांवली-काली है ना?’ हालांकि मेरी मां भी सांवली और सुंदर थी और मैं उन्हीं की तरह दिखती हूं. लेकिन मुझे यह कभी समझ नहीं आया था कि मेरे रिश्तेदारों में सांवलेपन को लेकर चर्चा क्यों होती थी? जबकि मैं उस समय एक बच्ची थी.

 

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From the time I was growing up I heard this always,”Bonnie is darker than Soni.She is little dusky na?“Even though my mother is a dusky beauty and I look a lot like her.I never knew why that would be a discussion by distant relatives when I was a kid. Soon at 15/ 16 I started modelling and then I won the supermodel contest … all newspapers read … dusky girl from Kolkata is the winner.I wondered again why Dusky is my first adjective ??? Then I went to New York and Paris to work as a model and I realised my skin colour was exotic there and I got more work and attention because of it. Another discovery of mine:) Once I came back into India and film offers started… and finally I did my first film and from an absolute Ajnabee to Hindi film industry …I suddenly was accepted and loved. But the adjective stayed which I started liking and loving by then.DUSKY girl wows the audiences in her debut film. In most of my articles for all the work I did,my duskiness seemed to be the main discussion.. it attributed to my sex appeal apparently.And sexy in Bollywood started getting accepted widely.I never really understood this… To me sexy is the personality not just the colour of your skin…why my skin colour only sets me apart from the conventional actresses at that time.But that’s the way it was.I didn’t really see much of difference but I guess people did.There was a strong mindset of Beauty and how an actress should look and behave.I was DIFFERENT as it was pointed out. Didn’t really stop me from being and doing all that I loved. Well you see I was confident and proud of who I was from childhood.My skin colour didn’t define me … even though I love it and wouldn’t want it to be any different ever. Many skin care endorsements with loads of money was offered to me in the last 18 years ( some were very tempting)… but I stuck to my principle always. All this needs to stop. This wrong dream that we are selling … that only fair is lovely and beautiful when the majority of the country is brown skinned. It’s a deep rooted stigma. It’s a mammoth step from the brand… and other brands should follow in the same footsteps soon🙏

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मौडलिंग की दुनिया में भी डस्की लुक को लेकर कही ये बात

अपने करियर की शुरूआत के समय की बात करते हुए बिपाशा ने लिखा कि जल्द ही 15/16 में मैंने मॉडलिंग शुरू कर दी और फिर मैंने सुपर मॉडल प्रतियोगिता जीती … सभी न्यूजपेपर्स में यह पढ़ा गया था … कोलकाता की सांवली लड़की विजेता बनी. मुझे फिर से आश्चर्य हुआ कि मेरे डस्की लुक को पहले क्यों देख जाता है??? फिर मैं एक मॉडल के रूप में काम करने के लिए न्यूयॉर्क और पेरिस गई और मुझे एहसास हुआ कि मेरी त्वचा का रंग वहां काफी अलग था और मुझे इसकी वजह से अधिक काम और अटेंशन मिली. यह मेरी एक और खोज थी.

फिल्मी दुनिया में जब मिला लोगों का प्यार

 

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Missing my short hair … #throwback

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एक बार जब मैं भारत वापस आई और फिल्म के ऑफर मिलने लगे … और आखिरकार मैंने अपनी पहली फिल्म की ‘अजनबी’ … मुझे अचानक स्वीकार किया गया और खूब प्यार मिला. लेकिन वहां भी मेरा सांवलापन पहला एडजेक्टिव बना रहा जिसे मैं तब तक पसंद और प्यार करने लगा थी. ‘डस्की’ लड़की ने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों को आकर्षित किया.

सबसे अलग था मेरा रंग

इसके बार मेरे द्वारा किए गए काम और आर्टिकल में मेरे सांवलेपन की चर्चा होने लगी थी.. इसने मेरी सेक्स अपील को सबसे जिम्मेदार ठहराया और बॉलीवुड में इसे बड़े स्केल पर स्वीकार किया जाने लगा. मैंने इसे वास्तव में कभी नहीं समझा … सेक्सी होना एक पर्सनालिटी है या ये सिर्फ आपकी स्किन का रंग भर नहीं है. … क्यों मेरी त्वचा का रंग मुझे उस समय की एक्ट्रेसेस अलग करता है. लेकिन यही तरीका है.


मैं वास्तव में बहुत अंतर नहीं देखती थी, लेकिन मुझे लगता है कि लोगों ने ऐसा किया. तब सुंदरता को लेकर कड़े विचार थे कि एक एक्ट्रेस को कैसे दिखना चाहिए और बर्ताव करना चाहिए, उस वक्त मुझे काफी अलग रखा गया था. हालांकि, इससे कभी मुझे फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि मुझे जो पसंद था वो मैंने किया.

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बता दें, बिपाशा बसु उन एक्ट्रेसेस में से हैं जो अपनी टैलेंट और काबिलियत के दम पर दुनिया में अपना परचम लहरा चुकी हैं. वहीं बौलीवुड की बात करें तो आज भी फैंस उनके लुक और खूबसूरती के दीवाने हैं.

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3 महीने बाद फिर से शुरु हुई ‘ये रिश्ता’ की शूटिंग, नए लुक में दिखे ‘नायरा-कार्तिक’

कोरोनावायरस के कहर के बीच सीरियल्स की शूटिंग की इजाजत दे दी गई है. सरकार द्वारा गाइडलाइंस के साथ सेट पर स्टार्स और वर्कर्स की सेफ्टी के लिए कई तैयारियां की गई हैं. वहीं फैंस के फेवरेट शोज में से एक सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Ye Rishta Kya Kehlata Hai) की शूटिंग भी चालू हो चुकी हैं. इसी बीच सेट पर पहुंचे सभी एक्टर्स मास्क पहने नजर आए, जिसकी फोटोज सोशलमीडिया पर वायरल हो रही है. आइए आपको दिखाते हैं शो के सितारों की वायरल फोटोज….

सेट पर दिखा कोरोना का खौफ

सीरियल की शूटिंग के चलते मुंबई में मोहसिन खान (Mohsin Khan) और शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) मास्क पहनें नजर आए, जिसकी फोटोज में दोनों का लुक बेहद खूबसूरत लग रहा है. वहीं वायरल फोटोज में सेट पर सभी कलाकारों और बाकी टीम मेंबर्स को मास्क पहने हुए नजर आए. साथ ही फोटोज में साफ नजर आ रहा है कि सेट पर सोशल डिस्टेंसिंग का भी भरपूर ध्यान रखा जा रहा है.

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मोहसिन और शिवांगी आए साथ नजर

सेट से सामने आई एक फोटोज में शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) और मोहसिन खान (Mohsin Khan) बेड पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं. जहां शिवांगी जोशी के चेहरे पर हल्की मुस्कान देखी जा रही है वहीं मोहसिन खान के चेहरे पर शिकन देखने को मिल रही है. इसी के साथ मोहसिन का लुक भी फैंस को काफी पसंद आ रहा है, जिसमें मोहसिन के बाल बढ़ गए है्ं और वौ काफी हैंडसम लग रहे हैं. वहीं शिवांगी कर्ली बालों में नजर आ रही हैं और पहले से ज्यादा क्यूट लग रही हैं.

होने वाली है नई एंट्री

 

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Kuch samajh sa nahi aa raha…..

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सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में जल्द ही अलका कौशल की एंट्री होने वाली है. नई स्टोरी के साथ खबरें है कि उनके किरदार की वजह से ही नायरा और कार्तिक के रिश्ते में बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलेगा. वहीं शो के प्रौड्यूसर राजन शाही ने भी लॉकडाउन के बाद नए ट्विस्ट एंड टर्न्स की बात कही थी.

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@khan_mohsinkhan #khanmohsinkhan #momo #mohsinkhan

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बता दें, बीते दिनों खबरें थीं कि नायरा यानी शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) जल्द ही शो को अलविदा कहने वाली हैं. लेकिन हाल ही में दिए एक बयान में शिवांगी ने कहा है कि जल्द ही फैंस को सरप्राइज मिलेगा और वो इसी सीरियल से जुड़ी रहने वाली हैं. अब देखना है कि लॉकडाउन के बाद शो में कौनसे नए ट्विस्ट और नई एंट्री देखने को मिलने वाली है.

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