Holi 2020: अंबानी की होली पार्टी में पति निक और कटरीना के साथ जमकर मस्ती करती दिखीं Priyanka

होली का त्योहार हर कोई धूमधाम से मनाता है. वहीं बौलीवुड की बात करें तो उनका होली मनाने का तरीका ही सबसे अलग है. हाल ही में अंबानी की होली पार्टी में कई हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें बौलीवुड एक्ट्रेस और पूर्व मिस वर्ल्ड प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) और उनके पति अमेरिकन पॉप स्टार निक जोनस (Nick Jonas) भी नजर आए. वहीं दोनों की पार्टी में मस्ती की फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. आइए आपको दिखाते हैं बौलीवुड होली पार्टी की खास फोटोज….

प्रियंका और निक की फोटोज हुई वायरल

एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) और निक जोनस (Nick Jonas) को जोड़ी बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड में भी पसंद की जाती है. वहीं जब प्रियंका चोपड़ा जोनस और निक जोनस की होली पार्टी में पहुंचे तो उनकी फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.

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होली पार्टी में मस्ती करते दिखे प्रियंका और निक

 

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#nickjonas ? let’s remix and have a holi version of one of your tracks.

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होली पार्टी के दौरान प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) और निक जोनस (Nick Jonas) एक दूसरे के साथ बेहद खूबसूरत दिखाई दिए. तो वहीं दोनों ने कई फोटोज भी क्लिक करवाई, जिसमें वह मस्ती करते नजर आए. दूसरी तरफ प्रियंका और निक एक फोटो में कटरीना कैफ के साथ भी नजर आए.

निक संग ईशा अंबानी के घर होली खेलने पहुंची प्रियंका

 

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ईशा अंबानी के घर होली खेलने पहुंचे प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) और निक जोनस (Nick Jonas) की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं, जिसमें दोनों वाइट कलर के कौम्बिनेशन में ट्रैडिशनल लुक में पहुंचे.

 

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बौलीवुड सितारे भी आए नजर

 

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इसी दौरान प्रियंका और निक के अलावा इस पार्टी में कटरीना कैफ, राजकुमार राव अपनी गर्लफ्रेंड पत्रलेखा संग नजर आए, जिनकी पार्टी में एंट्री देखने लायक थी.

 Women’s Day 2020: कामयाबी मिलते ही आप के पीछे पूरा कारवां होगा- नीतू श्रीवास्तव

नीतू श्रीवास्तव, समाजसेविका

नीतू ने समाज के निर्धनों, बेसहारों, वृद्धों, दिव्यांगों और बच्चों को भिक्षावृत्ति व महिलाओं को वेश्यावृत्ति के चंगुल से मुक्त कराया. समाजसेवा के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने के लिए 2 मार्च, 2019 को ‘श्रुति फाउंडेशन’ की नींव रख कर वे उपेक्षित वर्ग के उत्थान के मार्ग पर निकल पड़ीं.

बेसहारों को सहारा देने के लिए जानी जाने वाली नीतू श्रीवास्तव का जन्म छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में एक सामान्य परिवार में हुआ था. उन में सामाजिक हितों के लिए कार्य करने की भावना स्कूल टाइम से ही थी.

समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएट होने के साथ ही नीतू ने आईटीआई से इलैक्ट्रौनिक्स व पीजी कंप्यूटर कोर्स भी किया है. ब्यूटीशियन के तौर पर अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली नीतू श्रीवास्तव में समाजसेवा का जनून इस कदर सवार था कि उन्होंने इस की खातिर अपने पार्लर को बंद कर समाजसेवा की ओर उन्मुख होना ज्यादा बेहतर समझा. आइए, जानते हैं उन से उन के इस सफर के बारे में:

समाजसेवा के क्षेत्र में आने की पे्ररणा कहां से मिली?

समाजसेवा में आने की प्रेरणा मुझे स्कूल टाइम से मिली जब मैं स्काउट गाइड में थी. हमें मिशनरी के साथ कुष्ठ उन्मूलन शिविर में ले जाया जाता था और रोगियों की सेवा कैसे की जाती है यह सिखाया और बताया जाता था. इस तरह मेरा झुकाव दीनदुखियों की तरफ होने लगा. समय के साथ सेवा की भावना बढ़ती गई. दूसरों के दुख अपने लगने लगे तो निर्णय लिया कि चाहे कितनी भी व्यस्त दिनचर्या क्यों न हो अपना समय समाजसेवा में जरूर दूंगी और फिर इस फील्ड में आ गई.

सामाजिक संगठनों से कैसे जुड़ीं?

इस दिशा में अकेले कुछ भी करना मुमकिन नहीं था. अत: मैं समाजहित में जो भी कार्य करती, उसे फेसबुक पर शेयर कर देती, जिस से समाज के लोगों व कई सामाजिक संगठनों की नजर मुझ पर पड़ी. वहीं से मुझे कई सामाजिक संगठनों से जुड़ने के औफर मिलने लगे. इन के साथ जुड़ कर मैं ने कुछ समय ही काम किया. फिर अपने विचारों के साथ आगे बढ़ी.

भिक्षावृत्ति और वेश्यावृत्ति आज देश की 2 बड़ी समस्याएं हैं. इन के लिए अपनी जंग के बारे में बताएं?

भिक्षावृत्ति और वेश्यावृत्ति का कारण पैसों की कमी, मजबूरी व शिक्षा की कमी है, साथ ही लोगों में जागरूकता का अभाव भी एक कारण है. हम अपनी जंग के अंतर्गत इन कार्यों से जुड़े लोगों को इन के बुरे अंजाम से अवगत करा कर उन्हें इन से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें इन कार्यों से दूर कर उन के पुनरुत्थान की कोशिश कर रहे हैं.

‘बड़े सामाजिक संगठन नाम बड़े दर्शन छोटे’ इस बारे में आप का क्या कहना है और कैसे आप खुद को इस फील्ड में अलग साबित कर पा रही हैं?

बड़ेबड़े संगठन सिर्फ बाहर से बड़े लगते हैं, पर अंदर से खोखले होते हैं. अपने समाज के लोग ही जब अपने समाज की मदद करने के लिए आगे नहीं आते हैं तो बड़ा दुख होता है. मेरा संघर्ष यहीं से शुरू हुआ. अब मैं जमीनी स्तर पर कार्य कर के खुद को इस फील्ड में अलग साबित कर पा रही हूं. यह जरूरी नहीं कि बड़ेबड़े डोनेशन हों तभी कोई कार्य मुमकिन हो सकता है. हम शासनप्रशासन के सहयोग से भी कई कार्यों को अंजाम दे सकते हैं. मददगार और शासन के बीच की कड़ी बन कर अर्थात् बहुत से कार्य माध्यम बन कर भी किए जा सकते हैं, जो हम कर रहे हैं.

किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं खासकर मैडिकल फील्ड में. लोगों को पैसा और मदद तो चाहिए पर करना वही चाहते हैं जो उन का मन करता है. ऐसे में हमें उन्हें बहुत समझाना पड़ता है कि हम आप के लिए जो कर रहे हैं वह सही है. कई बार जब किसी वादविवाद के कार्य में आगे आओ तो लोग बयान देने में पीछे हटने लगते हैं, जिस की वजह से कोई भी केस हलका होने लगता है.

महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?

अगर आप के अंदर जनून है और कुछ करने की चाह, तो अपने आत्मविश्वास को बनाए रखें. परेशानियों और संघर्ष के दौर से घबराएं नहीं. संघर्ष के दौर में भले ही आप के साथ कोई न हो पर कामयाबी मिलते ही आप के पीछे पूरा कारवां होगा. जब तक आप खुद अपनी काबिलीयत को नहीं पहचानेंगी कोई आप को न जानेगा और न समझेगा.

3 सखियां: भाग-3

अब तक आप ने पढ़ा:

आभा, शालिनी और रितिका पक्की सहेलियां थीं. स्कूल के दिनों से ही उन का साथ था. तीनों सहेलियां खुले विचारों वाली थीं. जिंदगी से जुड़ी हर बात ये सहेलियां एकदूसरे से शेयर करती थीं. इत्तफाक से तीनों की शादी ऐसे लड़कों से हुई जो अमेरिका में सैटल थे. शादी के बाद जब तीनों सहेलियां अमेरिका पहुंचीं तो वहां भी अपनी दोस्ती बिखरने नहीं दी. वहां आपस में होती बातचीत से पता चला कि उन सहेलियों के विचार तो लगभग एकजैसे थे पर उन के पतियों के विचारों में भिन्नता थी.

अब आगे पढ़ें:

कुछदिन बाद आभा ने शालिनी को फिर फोन लगाया. लेकिन जब कई बार फोन करने पर भी शालिनी ने फोन नहीं उठाया, तो आभा के मन में खलबली मच गई. अपनी सखी के लिए तरहतरह की दुश्चिंताएं उस के मन में उठने लगीं. आखिरकार एक दिन शालिनी ने फोन उठाया.

‘‘अरी कहां मर गई थी तू?’’ आभा झुंझलाई, ‘‘मैं 2 घंटे से तुझे फोन लगा रही हूं.’’

‘‘मैं यहीं पड़ोस में  गई थी. आज हम लोगों के क्लब की मीटिंग थी.’’

‘‘अरे वाह, तू ने कोई क्लब जौइन कर लिया है क्या? इस का मतलब तू घर से बाहर निकलने लगी है. चलो देरसवेर तुझे कुछ अक्ल तो आई. अब बता यह कैसा क्लब है?’’

‘‘यह एक पीडि़त स्त्रियों का क्लब है.’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘यह क्लब उन स्त्रियों के लिए है जिन के पति उन्हें मारतेपीटते हैं या उन्हें अन्य तरीकों से प्रताडि़त करते हैं. हम सब महीने में एक बार मिलती हैं और एकदूसरे को अपने दुखड़े सुनाती हैं. एकदूसरे को ढाढ़स भी बंधाती हैं, एकदूसरे से सलाहमशविरा भी करती हैं और अपनी परेशानियों का समाधान खोजती हैं.’’

‘‘शालिनी, तुझे यह सब करने की क्या जरूरत पड़ गई?’’ आभा चकित हुई, ‘‘क्या तू उन पीडि़त औरतों में से एक है?’’

‘‘हां.’’

‘‘मुझे विश्वास नहीं होता. क्या तेरा पति तुझ पर हाथ भी उठाता है?’’

‘‘हां,’’ शालिनी फफक उठी, ‘‘उन्होंने मुझे कई बार मारा है. छोटीछोटी बात को ले कर भी उन का हाथ मुझ पर उठ जाता है. कौफी ठंडी हुई तो या लंच पैक करने में देरी हुई तो एक थप्पड़. कपड़े धुल कर तैयार नहीं मिले तो एक धौल. एक रोज हम शौपिंग मौल गए थे तो मेरे माथे और बदन पर पड़े नील के निशान देख कर एक अमेरिकन युवती चुपके से मेरे पास आई. उस ने मुझे अपना कार्ड दिया और कहा कि वह पीडि़त स्त्रियों का एक क्लब चलाती है. उस ने आग्रह किया कि मैं उस के क्लब की मीटिंग में आऊं. उस ने यहां तक कहा कि वह मुझे आ कर ले जाएगी और वापस छोड़ भी देगी. इत्तफाक से पार्थ उस समय अपने सैलफोन पर बातें कर रहे थे, इसलिए उन की निगाह हम पर नहीं पड़ी. नहीं तो घर लौट कर वे मुझे और मारते. उन्होंने सख्त ताकीद की है कि मैं बाहर बिना वजह किसी से बातचीत न करूं और न किसी से कोई संपर्क रखूं.’’

‘‘शालिनी तू किस मिट्टी की बनी है?’’ आभा ने बिफर कर कहा, ‘‘तू ये सब क्यों बरदाश्त कर रही है बता तो? क्या तुझ में जरा भी स्वाभिमान नहीं है? क्या तू पढ़ीलिखी और सबल नहीं है? क्या तेरे भेजे में थोड़ी सी भी अक्ल नहीं है? क्या तू इतना भी नहीं जानती कि औरतों पर हाथ उठाना एक जुर्म है. पुलिस में रिपोर्ट लिखाने भर की देर है, तेरे पतिदेव सलाखों के पीछे होंगे.’’

‘‘जानती हूं पर इस से फायदा?’’

‘‘बेवकूफों की तरह बात न कर. फायदा यह होगा कि तेरे मियां को उन के किए की सजा मिलेगी. उन की अक्ल ठिकाने आ जाएगी. उन्हें झक मार कर अपना रवैया बदलना होगा. तुझे नई जिंदगी मिलेगी.’’

‘‘ऐसा कुछ नहीं होगा. एक बार वे सजा काट कर आएंगे तो फिर वही सिलसिला शुरू होगा. उन का स्वभाव बदलने वाला नहीं है. और अगर उन्हें सजा हुई तो मेरा क्या होगा? मेरा गुजारा कैसे होगा? न मेरे पास कोई नौकरी है और न मेरे में कोई काबिलीयत है. हाथ में एक दमड़ी भी नहीं है. पिताजी ने जो डौलर घर से चलते समय थमाए थे वे खर्च हो गए. मैं अकेली कैसे निर्वाह करूंगी, यह सोच कर ही कलेजा कांपता है.’’

‘‘अकेली क्यों है तू, तेरे साथ हम सब हैं. तेरा परिवार है, नारी कल्याण केंद्र है, सोशल वर्कर हैं जो तुझे हर तरह की मदद पहुंचाएंगे. अच्छा यह बता क्या तू ने अपने मातापिता से इस बारे में बात की है?’’

‘‘नहीं. मेरे मातापिता मेरे बारे में जानेंगे तो रोरो कर मर जाएंगे. मैं ने उन से सिर्फ इतना ही कहा है कि मुझे अपना वैवाहिक जीवन रास नहीं आया. मैं घर लौटना चाहती हूं.’’

‘‘तब वे क्या बोले?’’

‘‘वे क्या कहते. उन्होंने मुझे एक लंबा लैक्चर पिला दिया. तुम तो जानती ही हो कि वे कितने रूढिवादी हैं. वे बोले कि बेटी हरेक के वैवाहिक जीवन में कुछ न कुछ कठिनाइयां आती हैं. तुझे अपने पति से तालमेल बैठाना होगा. अपनी जिंदगी से समझौता करना ही होगा. हिंदू नारी का यही धर्म है. और जरा सोच, अगर तू ने तलाक लिया तो हम तेरी दूसरी शादी कैसे कर पाएंगे? पहली शादी ही इतनी मुश्किल से हुई. और बड़ी बहन तलाकशुदा हो कर घर में बैठी रही तो समाज क्या कहेगा? तेरी छोटी बहनों की शादी कैसे हो पाएगी? वगैरहवगैरह…’’

‘‘ओहो, तुम्हारे मम्मीपापा तो बड़े दकियानूसी निकले. मैं उन से बात करूंगी.’’

‘‘नहीं आभा, इस से कुछ हासिल नहीं होगा. मेरे मातापिता तो पहले से ही अपनी समस्याओं से परेशान हैं. पिताजी रिटायर हो चुके हैं और दिल के मरीज भी हैं. मैं उन को अपना दुखड़ा सुना कर दुखी नहीं करना चाहती और खोटे सिक्के की तरह घर लौट कर उन पर बोझ नहीं बनना चाहती. यह मेरी समस्या है, मैं ही इस से निबटूंगी.’’

‘‘ठीक है, पर मुझ से एक वादा कर. तू मुझे बराबर फोन कर के अपनी खोजखबर देती रहेगी.’’

‘‘अवश्य.’’

शालिनी की बातें याद कर आभा मन ही मन उफनती रही. शालिनी ने यह क्यों कहा कि वह अपने मातापिता पर बोझ नहीं बनना चाहती? क्या हम लड़कियां अपने मातापिता पर बोझ होती हैं? उस ने कुढ़ कर सोचा. जब से आभा ने होश संभाला तब से वह हमेशा सुनती आई थी कि बेटियां पराया धन हैं, दूसरे की अमानत हैं, 2 दिन की मेहमान हैं, वगैरहवगैरह. सुनसुन कर वह चिढ़ती थी. पर नहीं, वह तो अपने मांबाप की आंखों का तारा थी. उन की बेहद लाडली बिटिया थी. उन्होंने कभी उस में और उस के भाई में भेदभाव नहीं किया. आभा को याद आया कि कैसे जब वह स्कूल से लौटती थी, तो अपनी मां को घर में न पा कर रोने बैठ जाती थी. रूठ जाती थी और खाना भी न खाती थी. उस की मां लौटतीं तो उस का मनुहार करतीं, उसे अपनी गोद में बैठा कर उस के मुंह में कौर देतीं तब जा कर वह खाना खाती थी. मांबाप से बिछड़ने पर उसे असहाय पीड़ा हुई थी. उसे हमेशा घर की याद सताती रहती थी.

बेटियां ससुराल जा कर भी अपने मायके से जीवनपर्यंत जुड़ी रहती हैं. उन का जी अपने मांबाप के लिए कलपता रहता है. मांबाप जब बूढ़े और लाचार हो जाते हैं, तो अकसर बेटियां ही उन की सारसंभाल करती हैं. वे संवेदनशील होती हैं, स्नेहमयी होती हैं. तिस पर भी वे पराया धन मानी जाती हैं. और बेटे, वे बड़े हो कर चाहे मांबाप की बात न सुनें, उन्हे मांबाप का सहारा, उन के बुढ़ापे की लाठी आदि विशेषणों से नवाजा जाता है.

आभा को अचानक याद आया कि 2 दिन बाद शालिनी का जन्मदिन था. उस ने एक मोबाइल फोन खरीद कर उसे तोहफा भेज दिया. फिर कुछ दिन बाद उसी मोबाइल से उस के पास फोन आया तो उस ने फोन उठाया.

‘‘हैलो, आप आभाजी बोल रही हैं?’’ एक अनजान पुरुष स्वर सुनाई दिया.

‘‘हां मैं बोल रही हूं. कहिए आप कौन?’’

‘‘मैं शालिनी का पति पार्थ बोल रहा हूं. यह मोबाइल गिफ्ट आप ने भेजा है?’’

‘‘हां, क्यों?’’

‘‘मैं इसे वापस कर रहा हूं. आइंदा आप हमें कोई चीज नहीं भेजेंगी.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘इसलिए कि मुझे आप की और शालिनी की दोस्ती पसंद नहीं. मुझे पता चला है कि आप मेरी पत्नी को बिना वजह मेरे खिलाफ भड़का रही हैं, उसे बरगला रही हैं. बेहतर होगा कि आप हमारे व्यक्तिगत मामलों में दखल न दें.

आगे पढ़ें- आप जैसी स्त्रियों से मेरी पत्नी की निकटता मुझे गवारा नहीं…

पेंसिल आईलाइनर और लिक्विड आई लाइनर में से कौन सा बेहतर रिजल्ट देता है?

सवाल-

पेंसिल आई लाइनर और लिक्विड आई लाइनर में से कौन सा बेहतर रिजल्ट देता है?

जवाब-

लिक्विड लाइनर से आंखें जितनी बड़ी और आकर्षक लगती हैं उतनी पैंसिल लाइनर से नहीं लगतीं. लिक्विड आई लाइनर काफी देर तक टिका भी रहता है. जिन लोगों की स्किन औयली होती है उन के लिए लिक्विड लाइनर एक जैकपौट की तरह होता है. लिक्विड लाइनर लंबे समय तक उसी शेप में रह सकता है. साथ ही यह बिलकुल साफसुथरा भी दिखाई देता है. वहीं दूसरी ओर पैंसिल या पाउडर लाइनर आंखों के आसपास औयल प्रौड्यूस होने के कारण दिन भर में उस का शेप खराब भी कर सकता है या फिर पूरा हट भी सकता है. लिक्विड आई लाइनर का एक और सब से बड़ा फायदा यह है कि आप इस की मदद से अपनी कोई भी क्रिएटिविटी कर सकती हैं.

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आप भी गरमियों में अपनी स्किन और आंखों को सुंदर बनाने के लिए बाजार से महंगे स्किन प्रोडक्ट खरीदते हैं, तो आज हम आपको आंखों को ब्यूटीफुल बनाने के लाइनर के कुछ ऐसे प्रौडक्ट के बारे में बताएंगे, जिसे आप दुकानों से 300 रूपए की कीमत के अंदर खरीद सकते हैं. जो आपके बजट में होगा.

1. लैक्मे इंस्टा लिक्विड आईलाइनर

कौलेज गर्ल्स के फेवरेट आईलाइनर्स में से एक है लैक्मे इंस्टा लिक्विड आईलाइनर. जो आपको दुकानों में 110 रुपये की कीमत में मिल जाएगा. इसका ब्रश पतला और कलर काला होता है. साथ ही यह वौटर प्रूफ भी है जो गरमी में भी आंखों को खूबसूरत बनाए रखेगा.

2. मेबेलिन हाइपर ग्लौसी लिक्विड आईलाइनर

मेबेलिन लिक्विड आईलाइनर स्मज प्रूफ और वौटर रेसिस्टेंट लिक्विड आईलाइनर है, जो कि 225 रुपये में आता है. इसका लंबा और पतला हैंडल सही ढंग से आईलाइनर अप्लाई करने में मदद करता है.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- इन 5 आईलाइनर से पाएं खूबसूरत आंखें, 300 से कम है कीमत

FILM REVIEW: जानें कैसी है टाइगर श्रॉफ और श्रद्धा कपूर की ‘Baaghi 3’

रेटिंगः एक स्टार

निर्माताः साजिद नाड़ियादवाला

निर्देशकः अहमद खान

कलाकारः टाइगर श्रौफ, रितेश देशमुख, श्रद्धा कपूर ,अंकिता लोखंडे

अवधिः दो घंटे 23 मिनट

दिल व दिमाग को घर पर रखकर यदि आपको टाइगर श्रौफ (Tiger Shroff)  के शारीरिक मसल्स देखने का शौक है अथवा आपको हौलीवुड के कल्ट एक्शन हीरो ’रेम्बो’ के लुप्त होने के बाद उसकी मॉडलिंग करने वाले हीरो को देखना है,तो फिल्म ‘‘बागी 3’’ देखना चाहिए. अन्यथा अहमद खान निर्देशित फिल्म ‘‘बागी 3’’ से दूरी बनाए रखने में ही भलाई है.  इसमें कुछ प्रभावशाली स्टंट दृश्यों और हास्य के छड़ के अलावा कुछ नई लोकेशन जरुर है.

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कहानीः

एक पुलिस अफसर (जैकी श्रॉफ) के बेटे रौनी (टाइगर श्राफ)को अपने भाई विक्रम (रितेश देशमुख) को अविश्वसनीय व अगाध प्यार है.  वह अपने भाई के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. यदि विक्रम का किसी से मामूली झगड़ा हो जाए,तो भी रौनी अपनी ओर से बदला लेता है और बदमाशों को धूल चटा देता है. क्योंकि मृत्यूशैय्या पर लेते हुए रौनी के पिता ने रौनी को कसम दी थी कि वह हमेशा अपनी सारी ताकत के साथ विक्रम की रक्षा करेंगे. विक्रम की पत्नी हैं रूचि नंदन(अंकिता लोख्ंाडे ). जबकि रूचि नंदन की बहन सिया नंदन (श्रद्धा कपूर)को रौनी से प्रेम है. विक्रम पुलिस अफसर है, मगर उसके ज्यादातर कारनामें उसका भाई रौनी पूरा कर उसे लोकप्रिय पुलिस अफसर बनाता रहता है. विक्रम का भाई रौनी ही आगरा इलाके के सभी बदमाशों को पकड़ने में मदद करता है. भारत में एक अपराधी किस्म का इंदर पहेली लांबा (जयदीप अहलावत )इंसान भारतीयों का अपहरण कर सीरिया भेजता रहता है.

लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है,जब एक मिशन के तहत विक्रम सीरिया जाता है. सीरिया में विक्रम का अपहरण सीरिया पर शासन करने वाले आतंकवादी समूह के मुखिया अबू जमाल गाजा (जमील खोरी) द्वारा कर लिया जाता है. तो अब रौनी  अपने भाई की रक्षा के लिए अपनी प्रेमिका सिया के साथ सीरिया पहुंच जाता है. और अब वह सीरिया में आतंकवादी उग्रवादी संगठन को खत्म करने का बीड़ा उठाता है.

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लेखन व निर्देशनः

बेसिर पैर की कहानी व अविश्वसनीय दृश्यों से भरपूर फिल्म‘‘बागी 3’’इसके लेखक व निर्देशक के रचनात्मक दिवालिएपन का प्रतीक है. एक भारतीय एक देश से लड़ने अकेले पहुंच जाता है. फिल्म में कई दृश्य बेवकूफी वाले हैं. फिल्म में कुछ बेहतरीन स्टंट व एक्शन दृश्य हैं. मसलन टाइगर श्राफ को हेलीकॉप्टर से लटकते हुए देखना,जीर्ण भवनों से झपट्टा मारना वगैरह. अबू जमाला गाजा के अड्डे पर जिस तरह से टाइगर श्राफ व श्रद्धा पहुंचते हैं, वह भी हास्यास्पद ही है. सीरियाई विद्रोही जिस तरह की हिंदी बोलते हैं, वह भी हंसी का विषय है. फिल्म का क्लायमेक्स भी मजाक के अलावा कुछ नही है. फिल्म के तमाम दृश्य हौलीवुड फिल्मों व कई वेब सीरीज से चुराए गए लगते हैं. बतौर निर्देशक अहमद खान पूरी तरह से अफसल . रहे हैं.

अभिनयः

जहां तक अभिनय का सवाल है,तो पूरी फिल्म में टाइगर श्रौफ के चेहरे पर कोई भाव नहीं आते. सपाट चेहरा लिए वह सिर्फ एक्शन करते नजर आते हैं.  श्रद्धा कपूर को इस फिल्म में जाया किया गया है. श्रद्धा कपूर ने क्या सोचकर यह फिल्म की है,यह तो वही जाने. फिल्म में वह ग्लैमरस जरुर नजर आती हैं. फिल्म में उनके दो तीन रोने के दृश्य है,मगर इन दृश्यों को देखकर दर्शक अपनी हंसी नही रोक पाता. अन्य कलाकारों ने ठीक ठाक अभिनय किया है.

पारस को छोड़ नेहा कक्कड़ के भाई के साथ रोमांस करती दिखीं माहिरा, देखें वीडियो

 

TikTok Viral Video: आज के समय में TikTok एप का क्रेज इतना है कि सिर्फ आम लोग ही इससे प्रभावित नहीं है बल्कि सेलेब्रिटीज़ भी Tik Tok के दीवानी है. हमारे बॉलीवुड स्टार्स, टीवी स्टार, सिंगर भी Tik Tok में नज़र आ रहें हैं. जी हां, वो भी हर दिन कोई ना कोई टिक टॉक पर अपना वीडियो शेयर कर रहें हैं.वो किसी भी सांग्स को फनी स्टाइल में एक्शन करके दिखाते हैं जो सोशल मिडिया पर वायरल हो जाता है.

हाल ही में ‘बिग बॉस 13’ की कंटेस्टेंट और टीवी एक्ट्रेस माहिरा शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रहा है. इस टिकटोक वीडियो में माहिरा के साथ फेमस सिंगर और कंपोजर टोनी कक्कड़ दिखाई दे रहें हैं. वीडियो में माहिरा और टोनी दोनों गोवा बीच सॉन्ग ‘ तुझको ले जाऊंगा मैं खींच कर, गोवा वाले बीच पर’ TikTok बनाया हैं, इस सांग में दोनों की केमिस्ट्री जबरदस्त है.

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इस वीडियो में माहिरा शर्मा ने पेस्टल ग्रीन कोल्ड-शोल्डर ड्रेस पहनीं है, इस ड्रेस के साथ बड़े इयररिंग पहने और अपने बालों को खुला छोड़ा हुआ है महिरा का मस्त अंदाज लोगो को बहुत पसंद आ रहा है इसके साथ ही माहिरा ने अपने हाथों में एक गिलास पकड़ा हुआ है वहीँ टोनी कक्क्ड़ ने गोल गले की प्रिंटेड टी- शर्ट के साथ लाइट ब्लू कलर की डेनिम जींस पहनी हुई है वह भी कुछ कम नहीं लग रहे हैं.

माहिरा शर्मा और टोनी कक्कड़ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, लोग इस TikTok वीडियो पर खूब कमेंट भी कर रहे हैं. इस वीडियो को देखकर कुछ लोगों ने तारीफ की तो कुछ ताने मारते दिखे. एक यूजर ने लिखा, ‘हर टाइम ओवरएक्टिंग… कभी तो सिर्फ एक्टिंग किया करो.’ वहीं एक अन्य ने लिखा, ‘ये छिपकली ही मिली थी क्या.’

इस वीडियो को माहिरा शर्मा के फैन पेज ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट से शेयर किया है, वीडियो में टोनी कक्कड़ माहिरा शर्मा से ‘गोवा बीच’ पर ले जाने की बात करते हैं, तभी माहिरा अपना हाथ छुड़ाकर वहां से चली जाती हैं. इसमें दोनों ही कलाकारों का अंदाज काफी लाजवाब लग रहा है. इस वीडियो के अलावा टोनी कक्कड़ और माहिरा शर्मा की कुछ फोटो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं, जिसे खुद एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट से शेयर किया है.

 

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That’s Very sweet @officialmahirasharma ♥️ #tonykakkar #mahirasharma

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आपको बता दे एक्ट्रेस माहिरा शर्मा ने बिग्ग बॉस 13 में खूब सुर्खियां बटोरी हालांकि, माहिरा शर्मा फिनाले से पहले ही घर से बेघर हो गई थीं. सीरियल्स ‘नागिन’ और ‘कुण्डली भाग्य’ जैसे कार्यक्रमों में खास रोल निभाया. रिएलिटी शो के अलावा माहिरा शर्मा कई पंजाबी गानों में भी नजर आ चुकी हैं. उनका सबसे लोकप्रिय गाना लहंगा लोगों के बीच खूब पसंद किया जाता है. वहीँ टोनी कक्क्ड़ फेमस सिंगर नेहा कक्क्ड़ के भाई है और खुद भी फेमस सिंगर और कम्पोजर है.

Women’s Day 2020: आलिया से लेकर जाह्नवी तक, इन 7 एक्ट्रेसेस ने किया ‘कुड़ी नू नचने दे…’ को प्रमोट

इरफान खान (Irfan Khan) की फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ (angreji medium) 13 मार्च को रिलीज होने वाली है. जिसमें महिलाओं के सपनों को उड़ान देने का मैसेज देने वाले सौन्ग कुड़ी नू नचने दे.. को प्रमोट करने के लिए बॉलीवुड की 7 टॉप एक्ट्रेसेज साथ आई हैं. जिनमें कटरीना कैफ, आलिया भट्ट, अनुष्का शर्मा, जाह्नवी कपूर, अनन्या पांडे, किआरा आडवाणी, कृति सेनन और खुद फिल्म की एक्ट्रेस राधिका मदान शामिल हैं.

इरफान बीमारी और उसके इलाज के चलते प्रमोशन नहीं कर पा रहे हैं. उनके सम्मान के लिए भी ये आठ एक्ट्रेसे सामने आई हैं. इस फिल्म का निर्देशन होमी अदजानिया ने किया है. इस गाने का म्यूजिक सचिन-जिगर ने कंपोज किया है और इसे विशाल ददलानी ने गाया है.

इस बारे में फिल्म के निर्माता दिनेश विजन कहते हैं- बॉलीवुड महज इंडस्ट्री नहीं है. इस तरह के सहयोगी रवैए इसे बेहतर स्थान बनाते हैं. मुझे उम्मीद है कि यह हमें और हम जैसों को अधिक समर्थन और एक-दूसरे के लिए प्रोत्साहित करता रहेगा.’

गाने से जुड़ने की वजहों के बारे में यह बता रहीं एक्ट्रेसेस

1. यह गाना हर लड़की की आवाज है. जो कहती है – हमें बस हमारे जैसा रहने दो, जिंदगी का अपने तरीके से लुत्फ उठाने दो. – किआरा आडवाणी

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2. जब होमी ने मुझे गाना भेजा था तब यह लूप पर था और अब भी है. यह गाना सभी को सुपर हैप्पी करने वाला है. – अनुष्का शर्मा

3. एक लड़की के पंखों को न काटो. उन्हें ऊंची उड़ान भरने दो. देखो वह दुनिया को एक जादुई जगह बना देगी. – राधिका मदान

4.मुझे यह गीत बहुत पसंद है और इसने मुझे और ऊंची उड़ान भरने के लिए प्रेरित किया. इसके बोल बड़े ही सार्थक है. -आलिया भट्ट

5. इरफान और होमी मेरे पसंदीदा लोगों में से हैं इसलिए जब उन्होंने मुझे फोन किया तो मैं तुरंत तैयार हो गई. जब हम किसी के लिए कुछ कर सकते हैं, तो हमें जरूर करना चाहिए. इंडस्ट्री का मिजाज ऐसा ही होना चाहिए. – कटरीना कैफ

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6. इरफान ने हम सभी को बहुत कुछ दिया है और हम उन्हें जल्द बेहतर हेल्थ के साथ वापस देखना चाहते हैं. फिल्म में उन्होंने ऐसे फादर की भूमिका निभाई है जो अपनी बेटी के लिए किसी भी हद तक जाते हैं. – जाह्नवी कपूर

7. यह सभी एज ग्रुप की लड़कियों के लिए एक परफेक्ट गीत है. यह निश्चित रूप से मेरा सॉन्ग है. – अनन्या पांडे

Women’s Day 2020: जानें क्या कहते हैं बौलीवुड सितारे

महिला दिवस हर साल किसी न किसी रूप में विश्व में मनाया जाता है. महिलाएं आज आजाद है, पर आज भी कई महिलाएं बंद कमरे में अपना दम तोड़ देती है और बाहर आकर वे अपनी व्यथा कहने में असमर्थ होती है. अगर कह भी लिया तो उसे सुनने वाले कम ही होते है. इस पर कई फिल्में और कहानियां कही जाती रही है पर इसका असर बहुत कम ही देखने को मिलता है. आखिर क्या करना पड़ेगा इन महिलाओं को, ताकि पुरुष प्रधान समाज में सभी सुनने पर मजबूर हो? कुछ ऐसी ही सोच रखते है हमारे सिने कलाकार आइये जाने उन सभी से,

तापसी पन्नू

महिलाओं को पुरुषों के साथ सामान अधिकार मिले. ये केवल कहने से नहीं असल में होने की जरुरत है. इसके लिए समय लगेगा, पर होनी चाहिए. महिलाओं को भी अपनी प्रतिभा को निखारने और लोगों तक पहुंचाने की जरुरत है. आज महिला प्रधान फिल्में बनती है, क्योंकि महिलाओं ने अपनी काबिलियत दिखाई है. आज दो से तीन फिल्में हर महीने महिला प्रधान रिलीज होती है और लेखक ऐसी कहानियां लिख रहे है और निर्माता निर्देशक इसे बना भी रहे है.

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आलिया भट्ट

मैं हमेशा ये कहती रही हूं कि आपके सपने को आप कैसे भी पूरा करें. आप खुद अपने आप को औरत समझकर कभी पीछे न हटें. पुरुष प्रधान समाज में हमेशा लोग कहते रहते है कि आप औरत है और आपसे ये काम नहीं होगा. मेरे हिसाब से ऐसा कुछ भी नहीं है, जो औरतें कर नहीं सकती. आपमें बस हिम्मत की जरुरत है और यही मुझे दिख भी रहा है.

अंकिता लोखंडे

 

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My Dear #saree u were, u are, and u will be my first love forever ?#saree #indianbeauty ???????

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महिला दिवस महिलाओं के लिए एक अच्छा दिन है, लेकिन हर महिला को हमारे देश में सम्मान मिलने की जरुरत है. किसी औरत पर कुछ समस्या आने पर मैं सबसे पहले उसके लिए खड़ी होती हूं. मैं थोड़ी फेमिनिस्ट हूं. इसके अलावा आज की सभी लड़कियां भी बहुत होशियार है और इसे मैं अच्छा मानती हूं, वे जानती है कि उन्हें क्या करना है. मेरी छोटी बहन भी अपने हर काम में हमेशा फोकसड रहती है और वैसे आज के यूथ भी है. ये ग्रोथ है और इसे आगे बढ़ाने में सबका सहयोग होना चाहिए. महिला सशक्तिकरण ऐसे ही होगा,लेकिन कहना बहुत मुश्किल है कि महिलाओं का विकास कितना हुआ है, क्योंकि जहाँ भी पुरुषों को मौका मिलता है, वे उसे दबाने की कोशिश करते है, ऐसे में महिलाओं को बहुत मजबूत होने की जरुरत है. यही वह पॉवर है जब आप ऐसे किसी बात के लिए ना कह सकें. ‘ना’ कहने के लिए शिक्षा जरुरी है.

काजोल

 

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Sometimes a smile just isn’t enough…… #blue #leaveitlikethat #kapilsharmashow

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महिला दिवस मनाने से महिलाओं को ख़ुशी नहीं मिल सकती. उन्हें अलग नहीं बल्कि पुरुषों के समान अधिकार मिलने की जरुरत है. इसके लिए सभी महिलाओं को साथ मिलकर काम करनी चाहिए, क्योंकि अधिकतर एक महिला दूसरे को नीचा दिखाती है, जो ठीक नहीं. इसके अलावा एक माँ को अपने बेटे को मजबूती से परवरिश करने की जरुरत है , ताकि बड़े होकर वह किसी भी महिला को सम्मान दे सके.

नीना कुलकर्णी

महिलाओं पर अत्याचार सालों से होता आया है, पहले वे बंद कमरे में रहकर इसे सहती थी, क्योंकि कोई जानने या सुनने पर शर्म उस महिला के लिए ही होती थी, पर आज महिलाओं ने अपनी आवाज बुलंद की है और आगे आकर अपराधी को दंड देने से नहीं कतराती. इसमें भागीदारी सभी महिलाओं की जरुरी है, ताकि ऐसे दौर से गुजरने वाली किसी भी महिला को न्याय मिले, भूलकर भी कभी उनकी आलोचना न करें.

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प्रणाली भालेराव

महिला प्यार और केयर की प्रतिमूर्ति है. जितना एक महिला इसे कर सकती है, उतना कोई नहीं कर सकता. इसलिए इसके माँ, बहन, बेटी आदि कई रूप में देखने को मिलती है. महिला दिवस केवल एक दिन ही नहीं. बल्कि हमें हर दिन उतना ही प्यार, केयर और सम्मान उन्हें देनी चाहिए, जो हर रूप में हर दिन हमारे आसपास रहती है. तभी कोई आगे बढ़ सकता है. महिलाओं को भी अपनी देखभाल बिना डरे अपने लिए करनी चाहिए. मैंने वैसा ही किया और आज मुझे सबका सहयोग मिला है. गृहशोभा की सभी महिलाओं को महिला दिवस की शुभ कामनाएं देती हूं, ताकि वे हमेशा अपने जीवन में खुश रहे.

राजीव खंडेलवाल

 

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महिला दिवस मेरे लिए बहुत ख़ास है और मैं इस दिन को अपने पूरे परिवार के साथ मनाना पसंद करता हूं, क्योंकि मेरे आसपास महिलाएं ही किसी न किसी रूप में मेरे साथ है और उनकी वजह से मैं यहाँ तक पहुंच पाया हूं. ये केवल एक दिन नहीं हर दिन उनको ही समर्पित है. मैं उन्हें हमेशा सम्मान देता हूं, क्योंकि उनके बिना किसी की जिंदगी संभव नहीं.

Holi Special: घर पर बनाएं स्वादिष्ट ठंडाई

ठंडाई ख़ास मौकों जैसे होली और दिवाली पर मेहमानों को परोसे जाने के लिए परफेक्ट ड्रिंक है. कुछ घरों में तो ये पूरे गर्मी के सीजन भर पी जाती है. हम अक्सर मार्किट से  रेडीमेड ठंडाई लेकर आटे है और उसे दूध में मिलाकर पीते हैं.पर इस होली हम आपको घर पर ही ठंडाई बनाने का आसान तरीका बताने जा रहे है .यकीन मानिये घर पर बनी हुई ये ठंडाई रेडीमेड ठंडाई से ज्यादा स्वादिष्ट होगी.

तो चलिए जानते है की घर पर ठंडाई कैसे बनाये –

हमें चाहिए( 4 लोगों के लिए )-

बादाम-2 टेबल स्पून

काजू-2 टेबल स्पून

पिस्ता -2 टेबल स्पून

खरबूजे के बीज -2 टेबल स्पून

खसखस -2 टेबल स्पून

हरी इलाइची -2 टेबल स्पून

दालचीनी -1/2  टी स्पून

काली मिर्च-2 टी स्पून

फुल क्रीम दूध -4 बड़े कप

चीनी-2 ½  कप

गुलाब की पंखुड़ियां

बनाने का तरीका

1-सबसे पहले एक बाउल में बादाम, काजू, पिस्ता, खरबूज  के बीज, खसखस, हरी इलाइची, दालचीनी और काली मिर्च को मिला लें.

2-अब इन सभी को मिक्सर में अच्छे से पीस कर पाउडर बना लें.

3-अब एक पैन में 4 बड़े कप दूध लेकर उसे उबाल लें.उबलते हुए दूध में चीनी मिला कर अच्छे से चला लें .

4-अब उसमे पिसा हुआ मेवे और मसाले का पाउडर डाल कर अच्छे से मिला लें.

5-अब गैस को बन्द कर दे और इसे एक साइड रखकर ठंडा होने दें .

6-अब इसे फ्रिज में कुछ घंटों के लिए ठंडा होने को रख दें.

7 –कुछ घंटों बाद इसे फ्रिज से बाहर निकाल कर 4 अलग अलग गिलास में डाल लें.

8-अब इसे बादाम, काजू और गुलाब की पंखुड़ियों से गार्निश करें.

9 –ठंडा –ठंडा serve करें .तैयार है स्वादिष्ट ठंडाई.

यह रिश्ता प्यार का: भाग-2

पिछला भाग पढ़ें- यह रिश्ता प्यार का: भाग-1

रामलाल से पूछने पर उस ने बताया कि किरण मेम साहब रख गई हैं. कह रही थीं साहब को अच्छा लगेगा. उन्हें बता देना कि मैं आई थी. मैं ने मोबाइल पर किरण को धन्यवाद कहा तो वह बोली, ‘‘कांतजी, जिस दिन आप गुलदस्ता उस टेबल पर रखा देखो समझ लेना मेरी तरफ से संकेत है कि उमेशजी को घर लौटने में देर लगेगी. आप बेफिक्र मेरे पास आ सकते हो.’’ थोड़ी देर में ही मैं किरण के पास पहुंच गया. हलके आसमानी रंग की साड़ी में वह बहुत सुंदर लग रही थी. खुली बांहों में भर कर स्वागत करते हुए मेरा हाथ पकड़ कर ड्राइंगरूम में सोफे तक ले गई, ‘‘कांत, मैं तुम्हें बता नहीं सकती कि जब से तुम से मित्रता हुई है मेरी खुशी कितनी बढ़ गई है.’’

‘‘तुम बहुत ब्यूटीफुल लग रही हो. लगता है आज तुम ने मेकअप में बहुत समय लगाया है. अगर मेकअप न भी करो तो भी तुम सुंदर लगती हो.’’

‘‘तारीफ करने की कला तो कोई तुम से सीखे. तुम तारीफ करते हुए बहुत अच्छे लगते हो. बैठो जब तक मैं चाय बना कर लाती हूं तुम टीवी पर कोई मनपसंद चैनल लगा लो,’’ कहते हुए उस ने रिमोट मुझे पकड़ा दिया. थोड़ी देर में वह ट्रे में 2 कप चाय और प्लेट में बिसकुट ले आई. फिर मेरे पास बैठ गई, ‘‘कांतजी, अब मैं आप को बता रही हूं कि उमेशजी दुकान के लिए माल लेने दिल्ली गए हैं. कल लौटेंगे. हमारे पास मौजमस्ती के लिए पर्याप्त समय है. जी भर कर मेरे पास रहिए और जो मन में इच्छा हो उसे पूरी कर लीजिए. मैं पूरा सहयोग दूंगी. मैं सच्चे दिल से आप से प्यार करती हूं’’

‘‘मैं आज सीरियस मूड में हूं और तुम्हें कुछ समझाना चाहता हूं. मैं शादीशुदा हूं. वीना मुझे बहुत प्यार करती है. और मैं नहीं चाहूंगा कि उमेश की गैरमौजूदगी का मैं फायदा उठाऊं. वे मेरे अच्छे दोस्त हैं. यह तो तुम्हारे प्यार का रिस्पौंस था जो मैं मित्रता की हद से बाहर तुम्हें कभीकभी ‘हग’ कर लेता था या तुम्हें ‘हग’  करने देता था. मेरी तुम्हें सलाह है, अब हमें खुद पर नियंत्रण लगा लेना चाहिए…’’

इस से पहले कि मैं अपनी बात पूरी कर पाती उलटे उस ने ही मुझे समझाना शुरू कर दिया, ‘‘कांतजी, बी प्रैक्टिकल. मैं आप और आप की पत्नी के बीच में आए बगैर भी तो प्यार कर सकती हूं. यदि हमारा संबंध गुप्त रहे तो हरज क्या है?’’ कहने को वह यह सब कह तो गई, फिर कुछ सोच कर मुसकराते हुए बोली, ‘‘आप मुझ से उम्र में काफी बड़े हो. मुझे अभी तक इस तरह समझाने वाला कोई नहीं मिला है. आप से मित्रता और प्यार मेरी जरूरत है. पत्नी का फर्ज मैं उमेशजी के साथ पूरी ईमानदारी से निभा रही हूं और निभाती रहूंगी, लेकिन उन से प्यार कभी नहीं हो पाया है. वे सीधेसरल अवश्य हैं, लेकिन प्यार करने के लिए न तो उन के पास समय है और न ही उन की सोच में प्यार का कोई महत्त्व है. सुखसुविधाओं के अलावा एक स्त्री को शारीरिक सुख की भी चाह होती है,’’ कहती हुई वह भावुक हो गई. आंखों से अविरल अश्रुधारा बह निकली.

मैं ने उसे गले लगा कर पीठ थपथपाते हुए आश्वासन दिया, ‘‘मेरी मित्रता और प्यार जितना संभव होगा बना रहेगा.’’ वीना की डिलिवरी के समय मैं 1 सप्ताह की छुट्टी ले कर उस के मायके पहुंच गया. उस ने एक प्यारी सी गुडि़या को जन्म दिया. चंडीगढ़ लौट कर पुन: मैं अपने कामकाज में व्यस्त हो गया. किरण और मेरा एकदूसरे के घर आनाजाना पहले जैसा ही था. लगभग डेढ़ माह बाद वीना को उस का भाई चंडीगढ़ मेरे पास छोड़ गया. अभी वीना को देखभाल की जरूरत थी. किरण दिन के समय वीना के पास आ जाती थी और हर काम में उस की मदद करती थी. वीना को भी किरण बहुत अच्छी लगी, तो दोनों जल्दी ही पक्की सहेलियां बन गईं. किरण ने उसे बताया कि उस की शादी 20 की होतेहोते ही हो गई थी. पुरुषों के साथ संबंध में उसे कोई अनुभव नहीं था. उस ने वीना से मेरे बारे में बेबाक तरीके से कहा, ‘‘मुझे कांतजी बहुत अच्छे लगते हैं. कुदरत ने तुम्हारी जोड़ी बहुत अच्छी बनाई है. तुम सुंदर और सरल हो. वे भी प्यार पाने और देने के लिए जल्द ही लोगों की ओर आकर्षित हो जाते हैं…एक बात बताऊं वीना भाभी…कांत का दिल बहुत सहानुभूति और दूसरों की कद्र करने वाला है.’’

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वीना ने संक्षेप में बस इतना ही कहा, ‘‘मेरे कर्म अच्छे थे जो वे मुझे मेरे जीवनसाथी के रूप में मिले.’’ वीना के साथ परिचय होने के बाद हम दोनों मित्र परिवारों में मिठाई और उपहारों के आदानप्रदान का सिलसिला शुरू हो चुका था. बर्थडे और शादी की सालगिरह हम दोनों परिवार एकसाथ एक उत्सव की भांति मनाते थे. कभी किरण हमारे घर आ कर किचन में वीना की खाना बनाने में सहायता करती तो कभी घर के सामान की झाड़पोंछ में उस की मदद करती. वह चाहती थी घर के कामकाज का बोझ वीना पर न पड़े. डिलिवरी के बाद धीरेधीरे वीना का स्वास्थ्य बेहतर होता जा रहा था. इस विषय में वह किरण की तारीफ उमेश के सामने करने से नहीं चूकती थी. एक दिन उमेश बोले, ‘‘किरण है ही ऐसी. सब की मदद करने में उसे बहुत खुशी मिलती है. हमेशा मुसकरा कर मदद करने का एहसान भी नहीं जताती है.’’ पहली बार उमेश के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर किरण की खुशी का ठिकाना न रहा. उस ने मुझ से कहा, ‘‘आज पहली बार उमेशजी ने मेरी तारीफ में कुछ शब्द कहे हैं, तो पार्टी तो बनती ही है. आज शाम की चाय हम लोग मेरे घर पर पीएंगे,’’ मैं मान गया.

एक दिन शाम के समय जब मैं औफिस से घर लौटा तो देखा ड्राइंगरूम में टेबल पर गुलदस्ता रखा था. वीना ने बताया, ‘‘किरण यह गुलदस्ता लाई थी. कह रही थी उस का मन मेरे साथ चाय पीने का था. अभी 1 घंटा पहले ही अपने घर गई है.’’ मैं किरण की सांकेतिक भाषा समझ गया. किरण मुझ से अपने घर में मिलना चाहती है. वीना के साथ चाय पीने के बाद मैं ने वीना से कहा, ‘‘मैं औफिस के काम से 1 घंटे के लिए बाहर जा रहा हूं. 7 बजे तक आऊंगा.’’  मैं किरण के घर पहुंचा तो देखा वह मुख्यद्वार पर मेरा इंतजार कर रही थी. बड़ी बेसब्री के साथ मुझे बांहों में भर कर मेरा स्वागत किया.

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