Mona Singh Wedding: वायरल हुई TV की ‘जस्सी’ की मेहंदी सेरेमनी की Photos

टीवी की पौपुलर एक्ट्रेसेस में से एक मोना सिंह की जल्द ही शादी होने वाली है, जिसमें टीवी सितारे भी जमकर मस्ती कर रहे हैं. हाल ही में मेहंदी की फोटोज ने भी सोशल मीडिया पर धमाल मचाना शुरू कर दिया है. आइए आपको दिखाते हैं टीवी की जस्सी की रियल लाइफ मेहंदी सेरेमनी की खास फोटोज…

मेहंदी पर कुछ ऐसे नजर आई मोना

मोना सिंह ने शादी के लिए अपने हाथों पर मेहंदी से खूबसूरत डिजाइन बनवाया. इसी के साथ मेहंदी पर फ्लावर ज्वैलरी के साथ उनका लुक काफी खूबसूरत लग रहा था.

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दोस्त के साथ की जमकर मस्ती

मोना सिंह की मेहंदी सेरेमनी की फोटोज में उनके कुछ खास दोस्त और रिश्तेदार भी नजर आ रहे हैं, जिससे साफ दिख रहा है कि उनके दोस्त और रिश्तेदार उनकी इस नई जिंदगी की शुरूआत से कितना खुश है.

इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं पति

 

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Happpy diwali to all #friends #family #happiness #love #food #happyfaces #light

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मोना सिंह के पति साउथ इंडिया के रहने वाले हैं और एक इन्वेस्टमेंट बैंकर हैं, जिनके साथ मोना सिंह 27 दिसम्बर को 7 फेरे लेंगी और जन्मों-जन्मों के बंधन में बंध जाएंगी.

खास दोस्त गौरव गेरा ने की फोटो शेयर

 

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#MonaSingh To Tie The Knot On This Date

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मोना सिंह के खास दोस्त गौरव गेरा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी दोस्त की मेहंदी की सेरेमनी की फोटो शेयर की. इसी के साथ दुल्हन के लुक में मोना की बैक साइड फोटो शेयर की है.

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खुशी से फूले नहीं समा रही हैं मोना सिंह

 

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@monajsingh is glowing in her mehendi ceremony♥♥ #glamsham #monasingh #mehendi #wedding #ceremonies #prettyinpink

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अदाकारा मोना सिंह अपनी मेहंदी सेरेमनी की तस्वीरों में बेहद खुश नजर आ रही हैं. इसी के साथ वह अपने दोस्तों संग मेहंदी में ठुमके लगाती हुई भी नजर आ रही हैं.

बता दें, मोना सिंह को उनके टीवी सीरियल जस्सी जैसी कोई नहीं से पहचान मिली थी, जिसके बाद वह काफी पौपुलर हो गई थीं. इसी के साथ वह बौलीवुज के हिट फिल्म 3 इडियट्स में भी नजर आईं थीं, जिसमें उनकी एक्टिंग की काफी तारीफें हुई थीं.

37 साल की उम्र में हुआ इस TV एक्टर का निधन, करणवीर बोहरा ने जताया दुख

इंडियन टीवी इंडस्ट्री के पौपुलर एक्टर कुशाल पंजाबी का 37 साल की उम्र में निधन हो गया है. कुशाल के निधन का कारण सुसाइड बताया जा रहा है, लेकिन टीवी सेलेब्स उनकी इस मौत से सदमें में हैं. आइए आपको बताते हैं एक्टर करनवीर बोहरा ने कुशाल पंजाबी की मौत पर सोशल मीडिया पर कैसे जाहिर किया दुख…

करणवीर बोहरा ने ऐसे शेयर किया अपना दुख

एक्टर करणवीर बोहरा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुशल के निधन का शौकिंग खबर देते हुए लिखा- ”तुम्हारे निधन की खबर ने मुझे चौंका दिया है. अभी भी मैं इस बात को नहीं मान पा रहा हूं. मुझे पता है तुम जहां भी होंगे खुश होंगे. जिस तरह से तुमने अपनी जिंदगी को जिया उससे मुझे कई तरह से प्रेरित किया. लेकिन मुझे क्या पता था. डांसिंग, फिटनेस, औफ-रोड बाइकिंग, फादरहुड और इन सबसे ऊपर, तुम्हारा मुस्कुराता हुआ चेहरा, खुशमिजाज नेचर और गर्मजोशी… मैं तुम्हें बहुत मिस करूंगा. तुम्हें हमेशा एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा जिसने अपना पूरा जीवन जिया.” वहीं खबर है कि कुशल पंजाबी ने आत्महत्या की है. बीती रात उनका शव घर में फांसी पर लटका हुआ मिला था.

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यूरोपियन लड़की से शादी की थी शादी

कुशाल पंजाबी की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने यूरोपियन लड़की से शादी की, जिससे 2016 में उनका एक बेटा Audrey Dolhen हुआ. कुशल ने अपने करियर की शुरुआत बतौर मौडल की थी. वे कई बड़ी फिल्मों और टीवी शोज का हिस्सा रह चुके थे. इसी के साथ वह फिटनेस के मामले में भी काफी पौपुलर थे.

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बता दें, हाल ही में कुशाल पंजाबी टीवी शो ‘विष’ में नजर आए थे, जिसमें उन्होंने ने इंटरव्यू में कहा था कि ‘मुझे इस शो में कबीले के सरदार के किरदार निभाना है. ये किरदार मेरे लिए काफी अलग है मैंने कभी भी ऐसा किरदार निभाया नहीं है.

और तो सब ठीकठाक है

दरबार जमा हुआ था. सबकुछ निश्चित कर लिया गया था. अब किसी को कोई परेशानी नहीं थी. पंडित गिरधारीलाल की समस्या का समाधान हो चुका था. रजब मियां के चेहरे पर भी संतुष्टि के भाव थे.

हां, कल्लू का मिजाज अभी ठीक नहीं हुआ था. उस ने भरे दरबार में चौधरी साहब की शान में गुस्ताखी की थी. नरेंद्र तो आपे से बाहर भी हो गया था, किंतु चौधरी साहब ने सब संभाल लिया था.

चौधरी जगतनारायण खेलेखाए घाघ आदमी थे. जानते थे कि वक्त पर खोटा सिक्का भी काम आ जाता है. फिर दूध देने वाली गाय की तो लात भी सही जाती है. उन्होंने बड़ी मीठी धमकी देते हुए कल्लू को समझाया था, ‘‘कल्लू भाई, थूक दो गुस्सा. धंधे में क्रोध से काम नहीं चलता. हम तो तुम्हारे ग्राहक हैं. ग्राहक से गुस्सा करना तो व्यवसाय के नियमों में नहीं आता.’’

‘‘लेकिन चौधरी साहब, मैं अपने इलाके का शेर हूं, कुत्ता नहीं. कोई दूसरा गीदड़ मेरी हद में आ कर मेरा हक छीने, यह मुझे बरदाश्त नहीं होगा. वह रशीद का बच्चा, उस का तो मैं पोस्टमार्टम कर ही दूंगा.’’

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‘‘कल्लू के मुंह से कौर छीनना इतना आसान तो नहीं है, जितना आप लोगों ने समझ लिया है. आज का फैसला आप के हाथ में है. लेकिन आगे का फैसला मैं अपनी मरजी से लिखूंगा. और हां, यह भी आप लोगों को बता दूं कि अपना आदमी जब बागी हो जाता है तो कहीं का नहीं छोड़ता.’’

‘‘तू क्या कर लेगा? तीन कौड़ी का आदमी. जानता नहीं जुम्मन की लंबी जबान काट कर फेंक दी थी. हरिशंकर आज भी जेल की चक्की पीस रहा है. कृपाराम मतवाला कुत्ते की मौत मरा था. आखिर, तू समझता क्या है अपनेआप को? चिड़ीमार कहीं का.

‘‘दोचार चूहे इधरउधर मार लिए तो बड़ा भेडि़या समझने लगा है अपनेआप को. सुन, हम राजनीति करते हैं. कोई भाड़ नहीं झोेंकते. तुझ जैसे तीन सौ पैंसठ घूमते हैं झाडू लगाते हुए. चल फूट यहां से,’’ नरेंद्र ने एक फूहड़ सी गाली बकी.

चौधरी साहब ने उसे रोक दिया, ‘‘नहीं नरेंद्र, कहने दो उसे, जो वह कहना चाहता है. उसे भी अपनी बात कहने का हक है. भई, देश में लोकतंत्र है. लोकतंत्र के तहत किसी को उचितअनुचित कुछ भी कहने से रोका नहीं जा सकता. बोलने दो इसे. यह समाजवाद का जमाना है. इसे कुछ गलत लगा है. इसे अपने दर्द को कहने का पूरापूरा हक है. फिर यह हमारा आदमी है. यह हमारे लिए कुछ भी सोचे, हम इस का बुरा नहीं सोच सकते.’’

‘‘हां, हरीश. तुम ध्यान रखना कल्लू भाई का. इसे जब भी कोई जरूरत हो तो उसे पूरी करना. इस समय इसे गुस्सा है. जब यह शांत हो जाएगा तो समझ जाएगा कि कौन अपना है, कौन पराया,’’ चौधरी साहब गांधीवादी मुद्रा में बुद्धआसन लगाए हुए थे.

लेकिन कल्लू एकदम चिकना घड़ा था. वह अपनी हैसियत जानता था. वह यह भी जानता था कि चौधरी साहब के बिना उस का गुजारा नहीं और यह भी मानता था कि अपनेआप को अधिक सस्ता और सुगम बनाने से इनसान की औकात घटती है.

अब चौधरी साहब का दबदबा था. जिस का दबदबा हो उसी के साथ रहने में लाभ था. फिर कल्लू तेजी से घूम कर बाहर निकल गया.

इधर नरेंद्र चौधरी साहब को राजनीति समझा रहा था, ‘‘आप ने बहुत मुंह लगा रखा है उस घटिया आदमी को. उसे न तो बोलने का शऊर है, न ही उठनेबैठने की तमीज. उस दिन धर्मदास को ही दरवाजे पर धक्का मार दिया और फिर पिस्तौल भी निकाल ली. वह तो अच्छा हुआ कि मनोहरलालजी आ गए और बात संभल गई. नहीं तो गजब हो जाता.’’

‘‘अरे, कुछ भी गजब नहीं होता. इंदिरा गांधी को गोली मार दी गई तो मारने वालों पर कौन सा गजब टूट पड़ा? वही अदालत- कचहरी के चक्कर, वकीलों की तहरीरें, न्यायविदों की दलीलें. मुलजिम आनंद करते रहे. उन की रक्षा और देखभाल पर लाखों रुपया पानी की तरह बहाया जाता रहा. अब उच्चतम न्यायालय ने उन में से एक को बरी भी कर दिया है. बाकी को फांसी पर लटका दिया जाएगा. इस से क्या होगा? क्या पंजाब में अब शांति है.

‘‘जुलियस रिबेरो को पद्मश्री से अलंकृत कर दिया गया तो क्या उन की राइफलों में नई गोलियां आ गईं? पंजाब सरकार बरखास्त हो गई तो क्या आतंकवाद दब गया. सबकुछ वैसा ही चल रहा है.

‘‘राजनीति की शतरंज की चालें चली जाती रहेंगी और घाघ मुहरों के घर बदलते रहेंगे, पर मुहरे वही रहेंगे. धर्मनिरपेक्ष समाजवाद, लोकतंत्रीय संविधान, बीस सूत्री कार्यक्रम सब अपनी जगह ठीक हैं, लेकिन हम भी अपनी जगह ठीक हैं.

‘‘कल्लू भाई की अपनी राजनीति है, अपना पैंतरा है, लेकिन वह हमारे लिए काम का आदमी है. बड़ा जीवट वाला आदमी है. देखो, उस दिन कालीप्रसाद को बुलाने भेजा तो उसे गिरेबान पकड़ कर घसीटता हुआ ले आया. कालीप्रसाद जैसे धाकड़ और झगड़ालू आदमी के गिरेबान पर हाथ डालना कोई हंसीखेल नहीं है, नरेंद्र.’’

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चौधरी साहब आ गए नेताओं वाली भाषण मुद्रा में. लेकिन तभी चपरासी बुद्धा अंदर आया. बोला, ‘‘साहब, दिल्लीपुरा के ठाकुर लोग आए हैं.’’

चौधरी साहब ने उन्हें अंदर भेजने का संकेत किया. कीमती खादी के कपड़ों में झकाझक तड़कभड़क के साथ 5 विशिष्ट व्यक्तियों ने प्रवेश किया.

चौधरी साहब का इशारा समझ कर सभी साथी बाहर खिसक गए. कुछ देर तक कुशलक्षेम चलता रहा.

‘‘साहब, वह आप का पुलिसिया कुत्ता था, अब वह कैसा है?’’

‘‘अरे भाई, किस पुलिसिए कुत्ते की बात कर रहे हो. उस के बाद तो मैं 7 कुत्ते बदल चुका.’’

अभ्यागतों में रमन नामक सदस्य भी था. वह सोचने लगा, ‘कुत्ते नहीं हुए, चप्पलें हो गईं. 1 साल में 7 कुत्ते बदल डाले.’

उधर चौधरी साहब पूछताछ करने लगे, ‘‘हरदयालजी, वह आप के भतीजे की बहू का कुछ चक्कर था… मामला सिमट गया कि नहीं?’’

‘‘नहीं, साहब. उस में कुछ गड़बड़ हो गई. हम समझे थे कि बलात्कार का मामला दर्ज कराएंगे. बहू पढ़ीलिखी है. साहस के साथ कह देगी कि दुर्गा ने उस के साथ जबरदस्ती की.

‘‘लेकिन बहू पहले दिन ही अदालत में घबरा गई और रोने लगी. वकीलों ने जिरह कर उसे और भी बौखला दिया. फिर बाद में कुछ मामला बना भी तो गवाह बिक चुके थे.

‘‘मुरली बाबू ने कुछ टुकड़े फेंक कर उन्हें खरीद लिया, लेकिन चौधरी साहब, एक बाजी जिच भी हो गई तो क्या अगली मात तो हम ही देंगे.’’

‘‘वह कैसे?’’ चौधरी साहब ने दोनों पैर सोफे पर खींच लिए. तभी अवधनारायण ने उठ कर उन की धोती ठीक कर दी.

हरदयाल अपना नक्शा समझाने लगे, ‘‘ ‘अपनी धरती’ अखबार का संपादक है न, शंभूप्रसाद. वह अपना यार है. कुछ मामला उस से बना है. उसी के आदमियों ने कुछ तसवीरें खींची हैं. गुलजार रेस्तरां में शराब पीते हुए, मालतीमाधवी के साथ रंगरलियां मनाते हुए, मार्क्सवादी नेता अर्जुनकुमार के साथ शतरंज खेलते हुए. बस, उन्हीं सब तसवीरों के आधार पर एक कहानी बन गई. यही फिल्म उस की असलियत खोल कर रख देगी.’’

हरदयाल अपनी योजना और भी विस्तार में समझाता, लेकिन तभी चौधरी साहब ने उसे टोक कर मुख्य मुद्दे पर बात करना जरूरी समझा.

आने वालों में अध्यापक ज्ञानेंद्र, वकील सुरेंद्रनाथ, सरपंच मोतीलाल, नेता ज्वालाप्रसाद और रमन उपस्थित थे. हरदयाल एक दूसरे सिलसिले में वहां आया था.

बात रमन ने ही शुरू की, ‘‘चौधरी साहब, अब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा है. हम ने पूरे जिले की नाका चुंगियों का ठेका लिया है. ट्रैफिक से चुंगी वसूल करते हैं. 10 प्रतिशत पार्टी के दफ्तर को देते हैं…’’

‘‘रुकिए, सारी बातें समझदारी के साथ स्पष्ट करनी चाहिए. ऐसा करते हैं, हरदयालजी, आप सब 11 तारीख को हम से मिलना, जो भी उचित होगा, तय कर लेंगे,’’ चौधरी साहब ने रमन की बात बीच में ही काट दी.

हरदयाल चुपचाप उठ कर बाहर चला गया.

‘‘अरे भाई, तुम लोगों में इतनी भी बुद्धि नहीं है कि कोई अन्य बाहरी आदमी बैठा है. ठीक है, आगे कहो.’’

‘‘आगे क्या कहें? 20 प्रतिशत आप के खाते में डाल देते हैं. 20 प्रतिशत सरकारी कामकाज के लिए, खानेपिलाने के लिए रख छोड़ते हैं. बकाया 50 प्रतिशत में हम 4 लोग भागीदार हैं.’’

‘‘फिर?’’

‘‘फिर क्या? वह ज्ञानीशंकर का लड़का नर्मदा अकड़ रहा है. 100-50 लड़के इकट्ठे कर लिए हैं और लड़नेमरने को आमादा है.’’

‘‘ठीक है, ठीक है, कुछ फूल उसे भी भेंट कर दो.’’

‘‘नहीं, चौधरी साहब, वह हरिश्चंद्र की औलाद बनता है. ऐसे लेनेदेने से तो नहीं टूटेगा. और भी जलील करेगा सब के आगे.’’

‘‘चांदी का जूता बहुत भारी होता है, नरेंद्रजी.’’

‘‘चौधरी साहब, नर्मदा अक्खड़- मिजाज और सनकी नौजवान है. उस ने अपना बहुमत बना लिया है. तब तो एक ही उपाय है. उसे साफ कर दिया जाए.’’

‘‘छि:छि:, कैसी छोटी बातें करते हो. ऐसे सनकी और जिद्दी आदमियों की हमें बहुत जरूरत है. मैं कल तहसील आऊंगा खुद नर्मदा से बातें करूंगा. और कुछ?’’

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अध्यापक ज्ञानेंद्र ने अपनी बात कही, ‘‘चौधरी साहब, हम ने जिले के परमिट आप की राय के अनुसार ही वितरित किए थे. सेठ भगवानदास को सीमेंट का परमिट दिया गया. मुंशी प्यारेलाल भजनलाल फर्म को मिट्टी का तेल, गोवर्धनप्रसाद को सौफ्ट कोक, अली मुहम्मद को गैस आदि के ठेके दिए गए. हम ने वसूली के लिए चक्कर भी लगाए, लेकिन अधिकांश ने कहा कि उन्होंने अपना धन आप को दे दिया है. यदि ऐसा है तो हमारा हिस्सा दिलवा दीजिए.’’

‘‘देखो, मास्टर ज्ञानेंद्रजी. जब तुम एक निजी पाठशाला में मास्टरी करते थे तो चेहरे पर झुर्रियां थीं, आंखों में गड्ढे थे और कुरतापाजामा में पैबंद लगे थे. तुम्हारी पत्नी क्षयरोग की मरीज लगती थी और बच्चे ऐसे लगते थे जैसे सीधे अनाथाश्रम से आए हों.

‘‘तुम 350 रुपए और मुट्ठीभर इज्जत ले कर बीमार जिंदगी से लड़ रहे थे. मैं ने तुम्हें सड़क से उठा कर  मकान में रखा, मकान में दुकान लगवाई, दुकान में चक्की लगवाई, चक्की की कमाई से तुम्हारी रोटियां चल रही हैं.

‘‘चुनाव में तुम्हें विधान सभा का सदस्य बनाने के लिए 1 लाख रुपए खर्च किए हमारे 2 आदमी किशन और रमेश चुनाव युद्ध में काम आ गए. हम ने उन्हें तालाब में फिंकवा कर मामला रफादफा कर दिया. तुम अच्छे वोटों से जीते, तुम्हारा नाम भी हुआ.

‘‘अब रही हिसाबकिताब की बात. भाई मास्टर, पहले मुझे अपने 1 लाख रुपए निकालने हैं. 20-20 हजार  रुपए मृत व्यक्तियों के रिश्तेदारों को देने हैं. अभी तो सिर्फ 80 हजार ही वसूल हुए हैं. आप लोग 60 हजार रुपए का प्रबंध कर के मुझे दिलवा दो. फिर चाहो तो मेरा हिस्सा भी तुम खा जाना.

‘‘गांधी, नेहरू जैसे बड़े नेता भी तो चुपचाप सब देखते थे. हिस्सेपट्टे से दूर रहते थे. मेरे पास तो ईमानदारी की कमाई ही बहुत है,’’ चौधरी साहब ने पैर सोफे से नीचे लटका दिए.

‘‘चौधरी साहब, यह तो ठीक है कि अब मेरा पक्का मकान है, लोगबाग इज्जत से देखते हैं, सेहत सुधर गई है, लेकिन राजनीति से इस का कुछ लेनादेना नहीं है.

‘‘हाउसिंग बोर्ड का मकान कर्ज पर लिया है. राजवैद्य चक्रपाणिजी के आयुर्वेदिक उपचार से मुझे स्वास्थ्य लाभ हुआ है. चुनाव में भी लोगों को मेरे चरित्र पर विश्वास था. मैं समझता हूं कि इस चुनाव में किसी का कुछ खर्च नहीं हुआ. क्या प्रमाण है आप के पास? क्या खर्च किया है आप ने?’’

‘‘छि:छि:, उग्र होने से स्वास्थ्य बिगड़ता है, मेरे भाई. सुनो, जिन लोगों को चुनाव से पहले वारुणी की बोतलें वितरित कीं, उन की रसीदें चाहिए क्या? 3 महल्लों में हैंडपंप लगवाए हैं, उन की रसीद चाहिए क्या? 3 हजार कंबल खरीद कर बांटे गए, उन की रसीद चाहिए क्या? कैसी बच्चों जैसी बातें करते हो? बिना खर्चपानी के कोई चुनाव नहीं जीतता. एक प्राइमरी स्कूल के मास्टर की इतनी हस्ती नहीं होती कि वह विधान सभा का चुनाव जीत ले. क्या तुम्हारी सात पुश्तों में भी किसी ने ऐसा सम्मान प्राप्त किया था?

‘‘भाई मेरे, अब तुम सरकार हो, कानून हो, शहर के मालिक हो. तुम किसी को भी जेल में बंद करा सकते हो. किसी को भी जेल से छुड़वा सकते हो. शहर के जुए के अड्डे, रंडियों के कोठे, शराब की भट्ठियां सब तुम्हारी मरजी से चलती हैं.

‘‘मुगल शासनकाल में बादशाह विभिन्न प्रांतों के लिए अलगअलग सूबेदार नियुक्त करता था. वह सूबेदार अपने इलाके का राजा होता था. तुम भी अपने इलाके के राजा हो. किसी का भी तबादला करा सकते हो, नियुक्ति करा सकते हो, निलंबित करा सकते हो. तुम्हारे एक इशारे पर कोई भी पिट सकता है, हवालात में बंद हो सकता है या भगाया जा सकता है. क्या मदरसे की मास्टरी में तुम्हारा यही रोब था?’’

‘‘लेकिन चौधरी साहब, पेट बड़ा हो जाने से खुराक भी ज्यादा हो जाती है. आप ने हमारा पेट बड़ा किया है तो हमें खुराक भी बड़ी चाहिए.’’

‘‘पुलिस विभाग आप के लिए छोड़ दिया है. खाओ और खाने दो. शहर के गुंडेबदमाशों का दोहन करो, लाटरी, जुआ, शराब, चिट आदि की सदाबहार खेती को संभालो.’’

‘‘फिर भी आप को हम सब का हिस्सा तो देना ही होगा. आप जबरदस्ती हमारा हिस्सा हजम नहीं कर सकते.’’

‘‘फिर ठीक है, समझ लो, मैं ने सब कुछ हजम कर लिया. अब आप को जो करना है कर लेना.’’

‘‘समझ लीजिए, चौधरी साहब. आप को यह सौदा महंगा पड़ेगा.’’

‘‘जाओ, मास्टर. राजनीति में ऐसी धमकियां तो हमारा नाश्तापानी हैं. हां, लेकिन हाथपैर संभाल कर वार करना.’’

सभी लोग उत्तेजित से निकल गए. नेताजी ने चपरासी से कहा, ‘‘अंदर कोई नहीं आए. जरा रामदुलारी को भेज देना. कंठ बड़ा चटक रहा है.’’

दूसरे दिन तहसील में होहल्ला मचा हुआ था. वकील सुरेंद्रनाथ, नेता ज्वालाप्रसाद और नरेंद्र का कत्ल हो गया था. रात में 8-10 डाकू आए थे गांव में.

सब से पहले गल्ला फकीर मरा. वह पागल था. पुराने कुएं की जगत पर सोया था. होहल्ला सुन कर डाकुओं के सामने सीना तान कर खड़ा हो गया. एक घोड़े की लगाम भी पकड़ ली. तभी आग के एक शोले ने उसे जमीन पर लिटा दिया. एक ही चीख में ठंडा हो गया वह पागल. उस की कहीं चर्चा भी नहीं हुई.

फिर डाकुओं ने ढूंढ़ढूंढ़ कर तीनों व्यक्तियों को मारा. संयोगवश मास्टर ज्ञानेंद्र किसी काम से शहर गए थे. सरपंच होतीलाल को पेचिश लग गई थी. वह सरकारी अस्पताल का लाल पानी पीने के लिए गांव से बाहर ही थे. शायद इसीलिए शहीद होतेहोते बच गए.

सरकारी टेलीफोन की घंटियां घनघना उठीं. नेता, अभिनेता, पत्रकार, फोटोग्राफर आदि की लाइनें लगने लगीं. पुलिस हरकत में आ गई.

दूरदूर तक डाकुओं का पीछा किया गया. उन की धूल भी हाथ न लगी, लेकिन पुलिस को तो कुछ न कुछ करना ही था. 30 आदमियों को गिरफ्तार किया गया. गांवतहसील में कुछ नारेबाजियां हुईं. फिर सबकुछ शांत हो गया.

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दूसरे दिन शाम को मास्टर ज्ञानेंद्र चुपचाप आए डरेसहमे से. चौधरी साहब ने उन का स्वागत किया. अंदर के निजी कक्ष में कुछ भेद की बातें हुईं. कुछ देर बाद मास्टर ज्ञानेंद्र कुछ संतुष्ट से, कुछ खुश से बाहर निकले.

ज्ञानेंद्र ने गांव संभाल लिया था. अब उन के मकान की दूसरी मंजिल का काम संगमरमर से हो रहा था. कुछ नई शक्लसूरतें गांव में दिखाई दे रही थीं.

फिर एक दिन चौधरी साहब गांव में आए. सब को आश्वस्त किया. लोग उन से सहमे हुए थे, डरे हुए थे. और तो सब ठीकठाक था. सब जगह शांति थी. लोग अपनेअपने कामों में लग गए थे.

धमाकों से जुड़े कुछ सवाल

लेखक-विश्वजीत बनर्जी

शहर में रहरह कर सिलसिलेवार बम धमाके हो रहे थे. चारों तरफ अफरातफरी का माहौल था. मैं टेलीविजन पर नजरें गड़ाए बैठा था. मुन्ना भी वहीं बैठा अपना होमवर्क कर रहा था. अचानक उस ने पूछा, ‘‘पापा, बहुत देर से कोई ब्लास्ट नहीं हुआ है, अगला ब्लास्ट कब होगा?’’

‘‘मैं कैसे बता सकता हूं बेटा?’’

‘‘क्यों पापा, आप इतना टेलीविजन जो देखते हैं.’’

‘‘बेटा, टेलीविजन देखने से ब्लास्ट का पता नहीं चलता.’’

‘‘तो फिर टेलीविजन पर ब्लास्ट कैसे दिखाते हैं?’’

‘‘ब्लास्ट होने पर टेलीविजन वाले वहां पहुंच जाते हैं और उस का फोटो खींचते हैं.’’

‘‘क्या टेलीविजन वाले कहीं भी पहुंच सकते हैं?’’ मुन्ना ने पूछा.

‘‘हां.’’

‘‘नहीं, पापा.’’

‘‘क्यों नहीं, बेटा?’’

‘‘कल हम सुपरमार्केट गए थे न.’’

‘‘हां बेटा, गए तो थे.’’

‘‘वहां कोने में एक भिखारी मर गया था न.’’

‘‘हां, हां.’’

‘‘वहां टेलीविजन वाले क्यों नहीं थे?’’

‘‘बेटा, टीवी वाले तभी पहुंचते हैं जब कोई बड़ा आदमी मरता है या बहुत सारे लोग एकसाथ मरते हैं.’’

तभी टेलीविजन पर प्रधानमंत्री आ गए. वह बम धमाकों के बारे में अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे.

‘‘देखो, यह बहुत बडे़ आदमी हैं,’’ मैं ने टेलीविजन की तरफ इशारा किया.

‘‘यह कौन हैं, पापा?’’

‘‘यह हमारे पी.एम. यानी प्राइम मिनिस्टर हैं.’’

‘‘पर पापा, यह इतने दुबले हैं, बोलते भी इतना धीरेधीरे हैं, तो बड़े आदमी कैसे हुए?’’

‘‘देखो, मैं बताता हूं. तुम स्कूल में धीरे बोलते हो या जोर से?’’

‘‘धीरे से, पापा.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘जोर से बोलने पर मैडम बहुत डांटती हैं, पर पापा, पी.एम. को कौन मैडम डांटती है?’’

मैं कुछ बोलता तभी ब्रेकिंग न्यूज में एक और ब्लास्ट की खबर आई.

‘‘पापा, पापा, देखो, एक और ब्लास्ट हो गया,’’ मुन्ना उछल कर ताली बजाते हुए बोला.

‘‘मुन्ना बेटा, ऐसा नहीं करते. देखो, कितने लोग मर रहे हैं, सब को कितनी चोटें आई हैं. देखो, सब अंकलआंटी कैसे रो रहे हैं.’’

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इतने में टेलीविजन पर गृहमंत्री का इंटरव्यू आने लगा.

‘‘पापा, सब लोग रो रहे हैं पर ये क्यों नहीं रो रहे हैं?’’ मुन्ना ने गृहमंत्री के बारे में पूछा.

‘‘इन्हें शरम आती है, बेटे.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘बेटा, तुम्हें याद है. तुम ने एक बार स्कूल में पैंट में शूशू कर दिया था?’’

‘‘हां.’’

‘‘तुम ने यह बात किसी से बताई थी?’’

‘‘बहुत शरम लगी थी न पापा, इसलिए घर आ कर सिर्फ मम्मी को बताई थी.’’

‘‘देखो, मंत्रीजी भी शरम के मारे सब के सामने रो नहीं पा रहे हैं.’’

‘‘तो फिर यह किस के पास जा कर रोते हैं?’’

‘‘पी.एम. के पास, बेटे.’’

तभी एक और धमाके की खबर आई.

‘‘पापा, एक एपीसोड में कितने ब्लास्ट होते हैं?’’ मुन्ने ने पूछा.

‘‘बेटा, यह कोई सीरियल थोड़े ही न चल रहा है.’’

‘‘तो फिर टेलीविजन पर सीरियल ब्लास्ट क्यों लिखा है?’’

‘‘अपना होमवर्क मन लगा कर क्यों नहीं करता?’’ मैं ने मुन्ने को हलके से डांटा.

‘‘पापा, बताओ न…बम कौन फोड़ रहा है?’’

‘‘आतंकवादी अंकल, बेटा.’’

‘‘ये अंकल कहां रहते हैं?’’

‘‘क्यों?’’

‘‘दीवाली में उन्हीं से पटाखे खरीदने हैं.’’

‘‘बेटा, वह पटाखे नहीं, बम बनाते हैं.’’

‘‘वह इतना अच्छा बम बनाते हैं तो फिर पटाखा क्यों नहीं बनाते?’’

‘‘मुझे नहीं पता.’’

‘‘पापा, अंकल एक ही साथ इतने सारे बम क्यों फोड़ते हैं?’’

‘‘लोगों को डराने के लिए.’’

‘‘पापा, क्या उन से पुलिस अंकल भी डरते हैं?’’

‘‘बेटा, पुलिस तो बम से भी खतरनाक है.’’

‘‘कैसे, पापा?’’

‘‘बम तो एक ही बार फटता है पर पुलिस जिसे पकड़ती है उसे बारबार फोड़ती है.’’

‘‘क्या पुलिस अंकल भी बम फोड़ते हैं?’’

‘‘नहीं, अच्छा बताओ तुम्हें कौन सा चौकलेट पसंद है?’’

‘‘चुइंगम.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘चुइंगम बहुत बार चबाने से भी खत्म नहीं होता.’’

‘‘ठीक बताया तुम ने, पुलिस भी जिसे पकड़ती है उसे चुइंगम की तरह बहुत बार चबाती है.’’

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मुन्ना ने अचानक मेरे हाथ से रिमोट छीन कर कार्टून चैनल लगा दिया. उस में टौम एंड जेरी के बीच निरंतर खींचतान जारी थी. टौम जेरी के पीछे भागता है पर जेरी बारबार चकमा दे कर निकल जाता.

‘‘वह देखो, पापा,’’ मुन्ना बोला, ‘‘बम वाले अंकल के पीछे पुलिस अंकल कैसे भाग रहे हैं,’’ इतना कह कर मुन्ना खिलखिला कर हंस रहा था.

ड्राई स्किन के लिए ट्राय करें ये फेस मास्क

सर्दियों में ड्राई स्किन को मैनेज करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. कितना भी मौइस्चराइजर या क्रीम लगा लो थोड़े समय बाद चेहरा फिर शुष्क पड़ जाता है. ड्राई स्किन को ठीक करने के लिए महिलाएं तरहतरह के फेस मास्क का भी इस्तेमाल करती हैं, पर उन का असर भी कुछ दिनों तक ही रहता है. लेकिन कुछ ऐसे नैचुरल फेस मास्क है, जिन्हें आप आसानी से घर पर बना सकती हैं. इन्हें लगाने से स्किन में लंबे समय तक नमी रहती है:

1. ऐलोवेरा फेस मास्क

ऐलोवेरा में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो शरीर और स्किन दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं. इस में पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट से चेहरे की कई समस्याएं दूर हो जाती हैं. ऐलोवेरा के इस्तेमाल से चेहरे में नमी तो आती ही है, जरूरी पोषण भी मिलता है.

ऐलोवेरा का फेस मास्क बनाने के लिए ऐलोवेरा जैल निकाल लें. इस में खीरे का जूस मिला लें. इस मास्क को फेस वाश के बाद चेहरे पर लगाएं और फिर कुछ देर लगा रहने के बाद चेहरे को धो लें. इस से चेहरे का रूखापन तो दूर होगा ही, साथ ही चेहरे पर ग्लो भी नजर  आने लगेगा.

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2. ऐवोकाडो फेस मास्क

फलों का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद होता है. इन के सेवन से सेहत तो अच्छी रहती ही है, चेहरे पर भी चमक बनी रहती है. ऐवोकाडो पोशक तत्त्वों से युक्त होता है, जो स्किन को स्वस्थ बनाता है. यह ड्राई और डैमेज स्किन को हटा कर स्किन को कोमल बनाता है. ऐवोकाडो फेस मास्क बनाने के लिए 2 चम्मच मैश किए ऐवोकाडो में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच गुलाबजल डाल कर अच्छी तरह मिला लें. फिर चेहरे को क्लीन करने के बाद इसे चेहरे पर लगाएं. 10 मिनट लगा रहने के बाद कुनकुने पानी से चेहरे को धो लें.

3. स्ट्राबेरी फेस मास्क

स्ट्राबेरी से स्किन मुलायम ही नहीं, बल्कि ग्लोइंग भी नजर आती है. इस में मौजूद विटामिन सी स्किन के रूखेपन को दूर करने में मदद करता है. इस के इस्तेमाल से स्किन में जमे डैड सैल्स भी निकल जाते हैं. स्ट्राबेरी फेस मास्क के लिए 2-3 बड़ी स्ट्राबेरी को मैश कर उस में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच ओटमील मिला कर पेस्ट बना लें और फिर चेहरे पर लगा कर 20 मिनट  के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. इसे हफ्ते में 2 बार जरूर लगाएं.

4. पपीता फेस मास्क

पपीता सेहत और खूबसूरती दोनों के लिए ही बेहतरीन माना जाता है. इस में पोटैशियम होता है, जो स्किन को हाइड्रेट और खूबसूरत बनाए रखता है. यह स्किन में मौजूद डैड सैल्स और दागधब्बों को साफ करने में भी मदद करता है.

पपीता फेस मास्क बनाने के लिए पके पतीते का 1 कप पेस्ट बनाएं. फिर इस में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच नीबू का रस मिलाएं और चेहरे पर लगाएं. 10 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लें. इसे हर 2 दिन बाद इस्तेमाल कर सकती हैं.

केला और चंदन फेस मास्क

बनाना फेस मास्क ड्राई स्किन को नमी पहुंचा कर उसे चमकदार बनाने में मदद करता है. इस से स्किन का रूखापन तो खत्म होता ही है, झुर्रियों की समस्या भी खत्म होने लगती है. यह स्किन को टाइट रखने में भी मदद करता है.

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बनाना फेस मास्क बनाने के लिए एक पके केले को अच्छी तरह मैश कर उस में 1 चम्मच शहद, 1 चम्मच जैतून का तेल और 1/2 चम्मच चंदन पाउडर मिलाएं. अब इस मास्क को चेहरे पर लगाएं. जब यह सूख जाए तब कुनकुने पानी से धो लें.

छोटी सरदारनी: क्या मेहर की वजह से हरलीन कर देगी घर का बटवारा?

सीरियल छोटी सरदारनी में हरलीन का मेहर और सरब के लिए गुस्सा कम होने का नाम ही नही ले रहा है. वहीं परम के स्कूल से निकाले जाने के मामले से हरलीन का गुस्सा नफरत में बदल गया है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा अब शो में आगे…

मेहर के लिए बढ़ती हरलीन की नफरत

क्रिसमस के मौके पर जहां मेहर, परम को खुश करती है तो वहीं यूवी और परम के स्कूल से निकाले जाने की प्रौब्लम को भी खत्म कर देती है. पर हरलीन को मेहर का परम के मामले में आना पसंद नही आता.

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सरब और हरलीन के बीच पड़ी दरार

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पिछले एपिसोड में आपने देखा कि सरब, परम के साथ मेहर के बच्चे का नाम भी प्रौपर्टी में जोड़ने के लिए कहता है, जिससे हरलीन गुस्से में आ जाती है. वहीं मेहर, सरब से कहती है कि उसे आने वाले बच्चे के नाम प्रौपर्टी करने की कोई जरूरत नही है, लेकिन सरब, मेहर की बात नही मानता.

क्या हरलीन का फैसला बन जाएगा मेहर के लिए मुसीबत

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि हरलीन, सरब से बटवारे के लिए कहेगी. वहीं तरकश, मेहर से कहेगा कि वो कैसे भी करके ये बटवारा रोक ले, लेकिन मेहर तरकश से कहेगी कि अब कुछ नही हो सकता, जिसे सुनकर हरलीन सहित सभी घरवाले चौंक जाएंगे.

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अब देखना ये है कि क्या घर के बटवारे के बीच क्या सरब और हरलीन का रिश्ता फिर सही हो पाएगा? अब आगेे क्या मोड़ लेेेेगी मेेेहर की जिंदगी जानने के लिए देखते रहिए ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, रात 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

अलविदा 2019: हिमा दास से लेकर दिया मिर्जा तक, इस साल रहा इन 8 महिलाओं का बोलबाला

भारत के बेटियां की पहचान की मोहताज नहीं है .इस साल विभिन्न क्षेत्रों में भारत की बेटियों ने अपना लोहा मनाया. आइए नजर डालते है इस साल के चर्चित नारी शक्ति की पहचान बनती चहरों पर…

1. निर्मला सीतारमण

इंदिरा गांधी के बाद वे देश की दूसरी महिला वित्त मंत्री हैं. वह देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं. इससे पहले वे रक्षामन्त्री थीं और उससे पहले वे भारत की वाणिज्य और उद्योग तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री रह चुकी हैं.

2. हिमा दास

भारत की गोल्डन गर्ल हिमा दास (‘Golden Girl’ Hima Das) युवा धावक हैं. जिन्होंने अपने प्रतिभा से पीछे साल सबको चौंका दिया . 19 वर्षीय दास ,स्टार ऐथलीट हिमा दास (Hima Das) ने 19 दिन के भीतर 5वां गोल्ड जीत कर देश के गौरव को और भी बढ़ाया है. उन्होंने विभिन्न टूर्नामेंटों में पांच पदक जीते हैं. आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं. हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता.  हिमा ने इस साल कुल 6 गोल्ड जीत चुकी है.

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3. दीया मिर्जा

संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र . यूएन ने सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की प्राप्ति के लिए भारतीय अभिनेत्री दीया मिर्जा को अपना विशेष दूत बनाया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने मिर्जा सहित विश्व की 17 अन्य मशहूर हस्तियों को भी अंतरराष्ट्रीय संस्था के विशेष कार्य के लिए चुना है.

4. हिना जायसवाल

भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट हिना जायसवाल देश की पहली महिला फ्लाइट इंजीनियर हैं. भारतीय वायु सेना ने हिना जायसवाल को अपनी पहली महिला फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर शामिल किया है. वह बेंगलुरू के उत्तरी उप नगर में स्थित येलाहांका एयर बेस की 112वीं हेलीकॉप्टर यूनिट की फ्लाइट लेफ्टिनेंट थीं.

5. जी एस लक्ष्मी

भारत की जीएस लक्ष्मी इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) इवेंट की पहली महिला रेफरी बन गई हैं. आईसीसी ने उन्हें आईसीसी पुरुष टी-20 वर्ल्ड कप क्वालिफायर 2019 के लीग चरण के लिए मैच अधिकारियों की लिस्ट की घोषणा की.

6. चंद्राणी मुर्मू

लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेडी पार्टी की  सबसे कम उम्र की आदिवासी महिला सांसद चंद्राणी मुर्मू संसद पहुंची. वह देश की सबसे कम उम्र की महिला सांसद है.  मुर्मू ने ओडिशा की केन्झार लोकसभा सीट से जीत दर्ज की है . मुर्मू की उम्र अभी केवल 25 साल है . पेश से वह इंजीनियर हैं.

7. कैप्टन आरोही पंडित

मुंबई की रहने वाली 23 साल की कैप्टन आरोही पंडित लाइट स्पोटर्स एयरक्राफ्ट (एलएसए) में अकेली अटलांटिक महासागर को पार करने वाली दुनिया की पहली महिला है. उन्होंने अपनी उपलब्धि से पूरे देश का गौरवान्वित किया है. वह 3000 किलोमीटर की दूरी तय कर अपने छोटे से एयरक्राफ्ट के साथ कनाडा के इकालुइट हवाईअड्डे पर उतरीं थीं. इस दौरान वह ग्रीनलैंड और आइसलैंड में भी रुकी थीं.

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8. गगनदीप कंग

भारतीय मूल की वैज्ञानिक गगनदीप कंग रॉयल सोसायटी में शामिल होने वाली पहली महिला है. वह हरियाणा के फरीदाबाद की रहने वाली है. गगनदीप कांग दक्षिण भारत के वेल्लोर कृत्रिम चिकित्सा महाविद्यालय में स्थित एक क्लीनियन वैज्ञानिक है. गगनदीप कांग एक चिकित्सा वैज्ञानिक है जिन्होंने दस्त रोगों पर काम किया है. उन्होंने 250 से अधिक वैज्ञानिक पत्र प्रकाशित किए हैं. ऐसा करने वह पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं.

Bigg Boss 13: विकास ने खोली घरवालों की पोल, सिद्धार्थ-रश्मि के बारे में कही ये बात

बिग बौस सीजन 13 अब एक अलग ही मोड़ लेता दिखाई दे रहा है. हर रोज कोई ना कोई हंगामा करने के बाद भी किसी का पेट नहीं भर रहा है और हर एपिसोड में कोई ना कोई कंटेस्टेंट फिर से झगड़ पड़ता है. अगर बात की जाए बीते एपिसोड के कैप्टेंसी टास्क की तो उसमें भी घरवालों के बीच काफी हंगामे होते दिखाई दिए और हर बार की तरह इस बार भी सभी कंटेस्टेंट की उम्मीद यही थी की टास्क रद्द हो जाए. बिग बौस के आदेश के बाद भी किसी ने उनकी बात नहीं मानी तो बिग बौस ने खुद से ही यो निर्णय लेते हुए घोषित किया की हफ्ते की कैप्टेंसी के दावेदार सिर्फ दो ही कंटेस्टेंट होंगे और उनका नाम है शहनाज गिल और विशाल आदित्य सिंह.

जहां एक तरफ विकास गुप्ता कंटेस्टेंट देवोलीना भट्टाचार्य की बैक पेन होने की वजह से शो में आए थे और देवोलीना की तरफ से ही खेल रहे थे तो बिग बौस के अनुसार देवालीना अब इस शो में वापस नहीं आ पाएंगी तो इस कारण विकास गुप्ता को भी बीते एपिसोड में शो से अलविदा लेना पड़ा. बिग बौस के घर से बाहर आकर विकास ने एक इंटरव्यू दिया और एक एक कर सभी कंटेस्टेंट के बारे में बात की.

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विकास गुप्ता में बताया कि, ‘मुझे लगता है घर के सभी लोग गेम को मजे से नहीं खेल रहे हैं. सब लोग बस हर समय झगड़ा करते रहते हैं. चाय की पत्ती पर भला कौन लड़ाई करता है. हो सकता है कि, आगे चल कर इन लोगों के व्यवहार में कुछ बदलाव आए क्योंकि, बीते कुछ दिनों में मैंने इन लोगों को हंसी मजाक करते हुए भी देखा है.

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सिद्धार्थ शुक्ला के बारे में बात करते हुए विकास ने बताया कि, उन दोनो की काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी और विकास ने बताया जब मैं बिग बौस का घर छोड़ कर जा रहा था तब घर के कई लोगों की आंखों में आंसू थे और सिद्धार्थ शुक्ला उन लोगों में से एक था. मुझे उसका व्यवहार काफी पौजेटिव लगा.

 

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रश्मि देसाई और सिद्धार्थ की लड़ाई के बारे में बात करते हुए विकास ने कहा, इस झगड़े में इन दोनों में से कोई गलत नहीं था. उसके बाद भी यह झगड़ा इतना आगे चला गया. शहनाज गिल मुझको पसंद है वह लोगों पर बुरी तरह से अटैक नहीं करती है और घर में मस्ती करती रहती है.

अब आने वाले एपिसोड में देखने वाली बात ये होगी कि शहनाज गिल और विशाल आदित्य सिंह में से कौन होगा घर का अगला कैप्टन.

Good News Review: फिल्म देखने से पहले यहां जानें कैसी है अक्षय-करीना की ‘गुड-न्यूज’

रेटिंगः चार स्टार

निर्माताः धर्मा प्रोडक्शंस, गुउकैप फिल्मस, शशांक खेतान

निर्देशकः राज मेहता

कलाकारः अक्षय कुमार, करीना कपूर खान, दिलजीत दोसांझ  और कियारा अडवाणी

अवधिः दो घंटे 13 मिनट

निः संतान दंपतियों की कोख भरने के लिए ‘आई वीएफ’नामक वैज्ञानिक तकनीक पिछले कुछ वर्षो से चर्चा में है, मगर इस तकनीक से बहुत कम लोग वाकिफ हैं. इसी संजीदा और गंभीर विषय पर राज मेहता हास्य फिल्म ‘‘गुड न्यूज’’ लेकर आए हैं.एक संजीदा व गंभीर विषय को राज मेहता ने इस तरह हास्य की चाशनी में पेश किया है कि दर्शक शुरू से अंत तक हंसता है और बीच बीच में उसकी आंखें भी नम होती हैं.

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कहानीः

फिल्म की कहानी मुंबई के उच्च वर्ग के दंपति वरूण बत्रा(अक्षय कुमार)और दीप्ति बत्रा (करीना कपूर खान) से शुरू होती है.वरूण बत्रा एक कार की कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि दीप्ति मशहूर पत्रकार हैं. इनकी शादी के सात वर्ष हो गए हैं,पर अभी तक माता पिता नहीं बन पाए हैं.अब दीप्ति मां बनने के लिए बेसब्र है.पर वरूण अभी भी इस मसले पर सुस्त है.उधर इन पर मां-बाप बनने के लिए पारिवारिक और सामाजिक दबाव भी बना हुआ है.जब यह दोनों मुंबई से दिल्ली वरूण की बहन रिचा (अंजना सुखानी) मां बनने के उपलक्ष्य में मनाई जाने वाली पहली लोहड़ी के लिए आते हैं,तो वरुण की बहन रिचा और वरूण के जीजा उन्हें डौक्टर जोशी दंपति (आदिल हुसैन-टिस्का चोपड़ा)से मिलकर आइवीएफ ट्रीटमेंट के जरिए माता पिता बनने की सलाह देते हैं.वरूण इसके लिए तैयार नही है,मगर दीप्ति के आगे वरूण की नहीं चलती.दोनों डौ.जोशी से मिलते हैं.आईवीएफ तकनीक की सारी प्रक्रिया को पूरा करते हैं.दीप्ति गर्भधारण करने में सफल हो जाती है.पर तभी इनकी जिंदगी में भूचाल आ जाता है. वास्तव में ‘आईवीएफ तकनीक के पूरा होने के बारहवें दिन डां जोशी इन्हें बताते हैं कि  उन्हीं के सरनेम वाले बत्रा दंपति यानी कि हनी बत्रा (दिलजीत दोसांझ) और मोनिका बत्रा (कियारा अडवानी)भी डौक्टर जोशी के यहां इलाज कराने आए थे और एक समान सरनेम के कारण उनके स्पर्म बदल  गए हैं.अब दीप्ति के गर्भ में हनी का स्पर्म और मोनिका के पेट में वरुण का स्पर्म है. इसके बाद इन दोनों दंपतियों की जिंदगी में काफी कुछ ऐसा घटित होता है,जिससे दर्शक हंसता है,तो वहीं उसकी आंखे नम भी होती हैं.

निर्देशनः

बतौर स्वतंत्र निर्देशक राज मेहता की यह पहली फिल्म है,मगर फिल्म देखकर ऐसा कहीं अहसास नहीं होता.सच कहा जाए तो राज मेहता ने अपनी इस पहली फिल्म में कई मंजे हुए निर्देशकों को मात दे दी है.आई वीएफ जैसी संजीदा विज्ञान की तकनीक और उसकी पूरी प्रक्रिया को आम इंसान तक हास्य के पुट के साथ जिस तरह से  राज मेहता ने इस फिल्म के माध्यम से पहुंचाने का प्रयास किया है, वह उन्हे अति काबिल निर्देशकों की  श्रेणी में लाकर खड़ा करता है.

इंटरवल से पहले कुछ संवाद जरुर कुछ दर्शकों को अखरते हैं. सेक्स को लेकर रिचा अपने भाई वरूण से जिस तरह की बातें करती है, वह कुछ दर्शकों को जरुर खटकता अखरता है. पर निर्देशक राज मेहता की खूबी यह है कि स्पर्म अदलाबदली जैसे विषय पर बनी इस फिल्म को  कहीं भी अश्लील नहीं होने दिया. मगर कुछ दृश्य मेलोड्रमैटिक बन गए हैं. शायद बौलीवुड फिल्म के लिए पुरूष किरदार का आंसू बहाना जरुरी है, इसीलिए वरूण भी आंसू बहाते हैं.  इंटरवल के बाद वर्तमान समय की हर फिल्म की तरह इस फिल्म में भी औरतों से जुड़े मुद्दे को हाइलाइट करने का प्रयास किया गया है. इस फिल्म में निर्देशक बच्चा पैदा करने में एक औरत और मर्द के योगदान का विश्लेषण करता नजर आता है.

एडीटिंग कसी हुई है.

अभिनयः

जहां तक अभिनय का सवाल है तो हर कलाकार ने अपने किरदार को बाखूबी जिया है.वरुण बत्रा के किरदार में अक्षय कुमार की तमाम कारगुजारियां देखकर दर्शक हंसते-हंसते लोटपोट होते हैं.उन्होंने अपने किरदार के सुर को बहुत अच्छी तरह से पकड़ा हुआ है. मगर महानगर में रहने वालों द्वारा छोटे शहर के लोगों के अंग्रेजी उच्चारण को लेकर मजाक उड़ाने के दृश्य अक्षय कुमार पर अच्छे नहीं लगते. कम से कम खुद अक्षय कुमार को इस संबंध में सोचना चाहिए था और लेखक व निर्देशक से कहकर वह इस तरह के संवादों में बदलाव कर सकते थे.

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वहीं उच्च स्तर की पत्रकार और पत्नी दीप्ति के किरदार में  करीना कपूर खान ने अच्छा परफार्म किया है.जज्बाती दृश्यों में उनका अभिनय ज्यादा निखर कर आया है.हनी के किरदार में दिलजीत दोसांझ परदे पर छा जाते हैं.उनकी कॉमिक टाइमिंग गजब की है.मोनिका के किरदार में कियारा अडवाणी काफी क्यूट व संुदर लगी हैं. डौक्टर जोशी दंपति के किरदारों में आदिल हुसैन और टिस्का चोपड़ा दिल जीत लेते हैं.अंजना सुखानी का किरदार काफी छोटा है,मगर वह अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहती हैं.

https://www.youtube.com/watch?v=-j9LBON0y8k

मैं लो प्रोफाइल पर्सन हूं – अक्षय खन्ना

फिल्म ‘हिमालय पुत्र’ से हिंदी फिल्म में डेब्यू करने वाले अभिनेता अक्षय खन्ना, 70 और 80 के दशक के मशहूर अभिनेता विनोद खन्ना के बेटे है. इस फिल्म को उनके पिता ने ही प्रोड्यूस किया था. इसके बाद अक्षय ने कई फिल्में की और कमोवेश एक सफल कैरियर गुजारे है. उन्होंने कॉमेडी से लेकर रोमांटिक और निगेटिव हर तरीके की फिल्मों में काम किया है. वे आज भी अकेले है और अकेले ही जीवन बिताना पसंद करते है. उन्होंने आजतक जो भी काम किया उसी को सफल मानते है. वे बोलते बहुत कम है और अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीना पसंद करते है. उनकी फिल्म ‘सब कुशल मंगल’ रिलीज पर है और इसमें वे अपनी अलग भूमिका को लेकर बहुत खुश है पेश है कुछ अंश.

सवाल-आपके जीवन का कुशल मंगल क्या है?

मुझे आज भी काम करने का मौके का मिलना ही मेरे जीवन का कुशल मंगल है. अच्छे-अच्छे स्क्रिप्ट मुझे आज मिल रहे है.

सवाल-इस फिल्म को करने की ख़ास वजह क्या रही?

इसकी कहानी बहुत अलग है इस तरह की भूमिका मैंने पहले कभी की नहीं है. दो नए कलाकार मेरे साथ डेब्यू कर रहे है ये सब मेरे लिए ख़ास और नया है. जो मैं हर फिल्म मैं खोजता हूं वह इसमें मिल रहा था इसलिए ना कहने की कोई गुंजाईश नहीं थी.

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सवाल-आप अपनी जर्नी को कैसे देखते है, कोई मलाल अभी भी रह गया है क्या?

मुझे लगता है मैं अगर 20 साल और भी काम करूं तो भी मुझे संतुष्टि नहीं मिलेगी. ये सफ़र जो कलाकार की होती है, वह कभी खुद ब खुद समाप्त नहीं होती. इसमें उतार चढ़ाव तो आते रहते है, जो जिंदगी की एक पहलू है, जिससे गुजरना पड़ता है साथ ही जिंदगी में संघर्ष हमेशा चलता रहता है. इसे मैं अधिक सिरियसली नहीं लेता. नकारात्मक बातों पर अधिक फोकस नहीं करता, क्योंकि उससे कोई फायदा नहीं होता.

सवाल-नए कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

मैं इनके लिए बहुत प्रोटेक्टिव रहता हूं और चाहता हूं कि इनके साथ कुछ गलत न हो, ये फिल्म सफल हो, उनका काम सबको पसंद आये, ताकि उनकी जर्नी आगे अच्छी हो, बस यही अनुभव रहा है.

सवाल-किसी फिल्म के लिए अब कितनी तैयारी करनी पड़ती है?

आज भी तैयारी और मेहनत करनी पड़ती है, क्योंकि हर निर्देशक की कहानी अलग होती है और मुझे उसके मुताबिक काम करने की जरुरत होती है, ताकि उसकी फिल्म सफल हो. अभिनय के साथ-साथ ये एक व्यवसाय भी होता है, जिसका ध्यान मैं हमेशा रखता हूं. निर्देशक के अनुसार काम करने का डर अभी भी रहता है. सेट पर मैं ऐसे मैं कई बार नर्वस भी हो जाता हूं. मैं कभी अपने निर्देशक को निराश नहीं देखना चाहता.

सवाल-इस फिल्म में निर्देशक से लेकर कलाकार सभी नए है,ऐसे में आप उन्हें कितनी सहजता प्रदान करते है,ताकि उन्हें आपको निर्देश देने में कोई प्रेशर महसूस न हो?

क्रिएटिव फील्ड में किसी का किसी के उपर प्रेशर होने पर काम करना मुश्किल होता है. प्रेशर को घर पर छोडकर आना पड़ता है.

सवाल-आजकल फिल्मों से मनोरंजन गायब होता जा रहा है, इसकी जगह समाज की डार्क साइड या  किसी अप्रत्याशित और डरावनी घटनाएं ले रही है, इसकी वजह क्या मानते है?

फील गुड वाली पिक्चर आज भी बन रही है, लेकिन रीयलिस्टिक फिल्में पहले भी बनती थी. इसे दिखाना और समझना दर्शकों के लिए आवश्यक है. इससे बचकर हम कही नहीं जा सकते. समाज को पूरे में देखने की जरुरत है.

सवाल-आपने बीच में थोडा ब्रेक लिया और फिर काम शुरू किया इसकी वजह क्या रही?

मैंने हमेशा अच्छी फिल्मों की स्क्रिप्ट चाही है, कभी मिलता है तो कभी नहीं. जिसे मिलने में कई बार सालों लग जाते है. इससे मेरा काम कम हो जाता है. जो मुझे ऑफर मिलता है उसमें से कुछ अच्छा खोज लेता हूं.

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सवाल-आपके हमेशा लो प्रोफाइल रहने की वजह क्या है?

मैं अपनी जिंदगी लो प्रोफाइल तरीके से ही जीना चाहता हूं. मैं हाई प्रोफाइल इंसान नहीं हूं, मुझे उसी में कम्फर्ट फील होता है और ये ब्लड प्रेशर के लिए भी अच्छा होता है.

सवाल-फिटनेस का राज क्या है?

सही समय पर खाना, सोना ,उठना, व्यायाम करना आदि करता हूं. इसके लिए मैं मेहनत बहुत करता हूं.

सवाल-आप अपने पिता की किस सीख को आप अपने जीवन में उतारते है?

मेरे पिता कभी ज्ञान नहीं बाटते थे. वे जियो और जीने दो पर विश्वास करते थे. वे नॉन जजमेंटल इन्सान थे. वे कभी किसी की आलोचना नहीं करते थे. जो ठीक लगे उसे करने की  सलाह देते थे. उन्होंने अपनी जिंदगी उसी तरह से जिया है.

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