क्लब: भाग-1

लेखक- अनिल चाचरा

नए सहायक प्रबंधक नवीन कौशिक को उस शाम विश्वास हो गया कि अर्चना नाम की सुंदर चिडि़या जल्दी ही पूरी तरह उस के जाल में फंस जाएगी.

सिर्फ महीने भर पहले ही नवीन ने इस आफिस में अपना कार्यभार संभाला था. खूबसूरत, स्मार्ट और सब से खुल कर बातें करने वाली अर्चना ने पहली मुलाकात में ही उस के दिल की धड़कनें बढ़ा दी थीं.

जरा सी कोशिश कर के नवीन ने अर्चना के बारे में अच्छीखासी जानकारी हासिल कर ली.

बड़े बाबू रामसहायजी ने उसे बताया, ‘‘सर, अर्चना के पति मेजर खन्ना आजकल जम्मूकश्मीर में पोस्टेड हैं. अपने 5 वर्ष के बेटे को ले कर वह यहां अपने सासससुर के साथ रहती हैं. सास के पैरों को लकवा मारा हुआ है. पूरे तनमन से सेवा करती हैं अर्चना अपने सासससुर की.’’

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बड़े बाबू के कक्ष से बाहर जाने के बाद नवीन ने मन ही मन अर्चना से सहानुभूति जाहिर की कि मन की खुशी और सुखशांति के लिए जवान औरत की असली जरूरत एक पुरुष से मिलने वाला प्यार है. मेजर साहब से दूर रह कर तुम सासससुर की सेवा में सारी ऊर्जा नहीं लगाओ तो पागल नहीं हो जाओगी, अर्चना डार्लिंग.

करीब 30 साल की उम्र वाली अर्चना को मनोज और विकास के अलावा सभी सहयोगी नाम से पुकारते थे. वे दोनों उन्हें अर्चना दीदीक्यों कहते हैं, इस सवाल को उन से नवीन ने एक दिन भोजनावकाश में पूछ ही लिया.

‘‘सर, वह हमारी कोई रिश्तेदार नहीं है. बस, मजबूरी में उसे बहन बनाना पड़ा,’’ विकास ने सड़ा सा मुंह बना कर जवाब दिया.

‘‘कैसी मजबूरी पैदा हो गई थी?’’ नवीन की उत्सुकता फौरन जागी.

विकास के जवाब देने से पहले ही मनोज बोला, ‘‘सर, इनसानियत के नाते मजबूर हो कर उसे बहन कहा. उस का कोई असली भाई नहीं है. उस का दिल रखने को काफी लोगों की भीड़ के सामने हम ने उसे बहन बना लिया एक दिन.’’

‘‘आप उस के चक्कर में मत पडि़एगा, सर,’’ विकास ने अचानक उसे बिन मांगी सलाह दी, ‘‘किसी सुंदर औरत का अनिच्छा से भाई बनना मुंह का स्वाद खराब कर देता है.’’

‘‘वैसे मेरा कोई खास इंटरेस्ट नहीं है अर्चना में, पर पति से दूर रह रही इस तितली का किसी से तो चक्कर चल ही रहा होगा?’’ नवीन ने अपने मन को बेचैन करने वाला सब से महत्त्वपूर्ण सवाल विकास से पूछ लिया.

‘‘फिलहाल तो किसी चक्कर की खबर नहीं उड़ रही है, सर.’’

‘‘फिलहाल से क्या मतलब है तुम्हारा?’’

‘‘सर, अर्चना पर दोचार महीने के बाद कोई न कोई फिदा होता ही रहता है, पर यह चक्कर ज्यादा दिन चलता नहीं.’’

‘‘क्यों? मुझे तो अर्चना अच्छी- खासी फ्लर्टनजर आती है.’’

‘‘सर, जैसे हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती वैसे ही शायद यह फ्लर्टचरित्र की कमजोरी न हो.’’

‘‘छोड़ो, हम क्यों उस के चरित्र पर चर्चा कर के अपना समय खराब करें,’’ और इसी के साथ नवीन ने वार्त्तालाप का विषय बदल दिया था.

अर्चना का कोई प्रेमी नहीं है, इस जानकारी ने नवीन के अंदर नया उत्साह भर दिया और वह डबल जोश के साथ उस पर लाइन मारने लगा.

‘‘सर, हम सब यहां आफिस में काम करने के लिए आते हैं और इसी की हमें तनख्वाह मिलती है. हंसीमजाक भी आपस में चलता रहना चाहिए, पर शालीनता की सीमाओं के भीतर,’’ अर्चना ने गंभीरता से नवीन को कई बार इस तरह से समझाने का प्रयास किया, पर कोई फायदा नहीं हुआ.

‘‘अपने दिल को काबू में रखना अब मेरे लिए आसान नहीं है,’’ ऐसे संवाद बोल कर नवीन ने उस को अपने जाल में फंसाने की कोशिश लगातार जारी रखी.

फिर उस शाम नवीन ने जोखिम उठा कर अपने आफिस के कमरे के एकांत में अचानक पीछे से अर्चना को अपनी बांहों में भर लिया.

नवीन की इस आकस्मिक हरक त से एक बार को तो अर्चना का पूरा शरीर अकड़ सा गया. उस ने अपनी गरदन घुमा कर नवीन के चेहरे को घूरा.

‘‘मैं तुम से दूर नहीं रह सकता हूं…तुम बहुत प्यारी, बहुत सुंदर हो,’’ अपने मन की घबराहट को नियंत्रित रखने के लिए नवीन ने रोमांटिक लहजे में कहा.

‘‘सर, प्लीज रिलेक्स,’’ अर्चना अचानक मुसकरा उठी, ‘‘आप इतने समझदार हैं, पर यह नहीं समझते कि फूलों का आनंद जोरजबरदस्ती से लेना सही नहीं.’’

‘‘मैं क्या करूं, डियर? यह दिल है कि मानता नहीं,’’ नवीन का दिल बल्लियों उछल रहा था.

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‘‘अपने दिल को समझाइए, सर,’’ नवीन से अलग हो कर अर्चना ने उस का हाथ पकड़ा और उसे छेड़ती हुई बोली, ‘‘बिना अच्छा दोस्त बने प्रेमी बनने के सपने देखना सही नहीं है, सर.’’

‘‘अगर ऐसी बात है, तो हम अच्छे दोस्त बन जाते हैं.’’

‘‘तो बनिए न,’’ अर्चना इतरा उठी.

‘‘कैसे?’’

‘‘यह भी मैं ही बताऊं?’’

‘‘हां, तुम्हारी शागिर्दी करूंगा तो फायदे में रहूंगा.’’

‘‘कुछ उपहार दीजिए, कहीं घुमाने ले चलिए, कोई फिल्म, कहीं लंच या डिनर हो…चांदनी रात हो, हाथ में हाथ हो, फूलों भरा पार्क हो…सर, पे्रमी हृदय को प्यार की अभिव्यक्ति के लिए कोई मौकों की कमी है?’’

‘‘बिलकुल नहीं है. अभी तैयार करते हैं, कल इतवार को बिलकुल मौजमस्ती से गुजारने का कार्यक्रम.’’

‘‘ओके,’’ अर्चना ने नवीन को उस की कुरसी पर बिठाया और फिर मेज के दूसरी तरफ पड़ी कुरसी पर बैठ कर बड़ी उत्सुकता दर्शाते हुए उस के बोलने का इंतजार आंखें फैला कर करने लगी.

रविवार साथसाथ घूम कर बिताने के उन के कार्यक्रम की शुरुआत फिल्म देखने से हुई. सिनेमाघर के सामने दोनों 11 बजे मिले.

नवीन अच्छी तरह तैयार हो कर आया था. महंगे परफ्यूम की सुगंध से उस का पूरा बदन महक रहा था.

‘‘सर, मुझे यह सोचसोच कर डर लग रहा है कि कहीं कोई आप के साथ घूमने की खबर मेरे सासससुर तक न पहुंचा दे,’’ अर्चना ने घबराए अंदाज में बात की शुरुआत की, ‘‘कल को कुछ गड़बड़ हुई तो आप ही संभालना.’’

‘‘कैसी गड़बड़ होने से डर रही हो तुम?’’

‘‘क ल को भेद खुला और मेरे पति ने मुझे घर से बाहर कर दिया तो मैं आप के घर आ जाऊंगी और आप की श्रीमती जी घर से बाहर होंगी.’’

‘‘मुझे मंजूर है, डार्लिंग.’’

‘‘इतनी हिम्मत है जनाब में?’’

‘‘बिलकुल है.’’

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‘‘तब उस मूंछों वाले को हड़का कर आओ जो मुझे इतनी देर से घूरे जा रहा है.’’

आगे पढ़ें- नवीन ने दाईं तरफ घूम कर…

DIWALI 2019: घर पर बनाएं टेस्टी पालखोवा

अगर आप फेस्टिवल में शेफ संजीव कपूर की रेसिपी करना चाहते हैं तो ये डिश आपके लिए अच्छा औप्शन है. पालखोवा एक टेस्टी और हेल्दी रेसिपी है, जिसे आप अपने घर में फैमिली और फ्रेंड्स के लिए ट्राय कर सकते हैं.

हमें चाहिए

2 लीटर दूध

2 टेबल स्पून गाढ़ा दही

20 शुगर फ्री नेचुरास्वीट ड्रौप्स

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½ कप फ्रेशक्रीम

½ टेबल स्पून इलायची पाउडर

बनाने का तरीका:

नौन स्टिक पैन में दूध उबालें. उसमें दही डालकर अच्छी तरह में मिलाएं. जब दूधफटनेलगे,शुगरफ्री नेचुरा स्वीट ड्रौप्सऔर क्रीम डालकर लगातार हिलाते हुए पकाएं जब तक की मिश्रण गाढा ना हो जाए.

इलायची पावडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. आंच से उतारें, एक बाउल में डालेंऔर ठंडा होने दें. अलग अलग सरविंग बाउल्स में डालकर तुरन्त परोसें.

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DIWALI 2019: कैक्टस बनते त्यौहार

दीवाली खुशियों का त्योहार है. दीवाली पर सब एकदूसरे को गिफ्ट और मिठाइयां दे कर खुशियां मनाते हैं. लेकिन आधुनिक परिवेश में धन की अधिकता के चलते लोगों ने खुशियों के इस त्योहार में कैक्टस बोने शुरू कर दिए हैं. अंधकार में दीपक जला कर रोशनी की ओर बढ़ने के बजाय कुछ स्त्रीपुरुष जुए और शराब के नशे के अंधेरे रास्ते पर चलते हुए दीवाली पर अपने खुशियों भरे जीवन में कटुता घोल रहे हैं. दीवाली पर जुआ खेलने की परंपरा किसी अंधविश्वास से शुरू हुई थी. आधुनिक परिवेश में धन की अधिकता, भौतिक साधनों की सुविधा के कारण जुआ घरघर में खेला जाने लगा है. दीवाली पर जुए की अधिकता देखी जाती है. अब फाइवस्टार होटलों और बड़ेबड़े फार्महाउसों में भी जुए के आयोजन होने लगे हैं. कार्ड पार्टियों के नाम पर हजारोंलाखों नहीं, करोड़ों रुपयों का जुआ खेला जाने लगा है. दीवाली पर शराब में डूब कर जुआ खेला जाता है.

पहले जुए और शराब का चलन पुरुषों तक ही सीमित था, लेकिन अब स्त्रियां भी इस में शामिल होने लगी हैं. यही नहीं शराब की पार्टियों में भी स्त्रियां बढ़चढ़ कर भाग ले रही हैं. दीवाली पर जुए में जीतने वाला व्यक्ति वर्ष भर जीतता रहता है. इस अंधविश्वास के चलते सभी वर्ग के लोग जुआ खेलते हैं. स्त्रियां भी जुआ खेलने में किसी से पीछे नहीं रहती हैं. धनी वर्ग की ही नहीं मध्यवर्ग की स्त्रियां भी जुए में बढ़चढ़ कर भाग लेती हैं. धनी वर्ग के स्त्रीपुरुषों में तो जुआ स्टेटस सिंबल बन चुका है. दीवाली की रात को ही नहीं, दीवाली के कुछ दिन आगेपीछे भी खूब जुआ खेला जाता है. कैसिनो, फार्महाउसों और बड़ेबड़े होटलों में हौल बुक करा कर जुए के आयोजन किए जाते हैं. इन आयोजनों में बड़ेबड़े दांव लगाए जाते हैं. क्व20 से 30 हजार हार जाने वाले की ओर कोई देखता भी नहीं. क्व5-10 लाख हारने वाले का ही नाम सब की जबान पर होता है.

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लाखोंकरोड़ों दांव पर

कैसिनो में 10-20 लाख के दांव से 2-3 करोड़ दांव पर लगाने वाले बिजनैसमैन भी अब आगे आने लगे हैं. स्त्रियां बड़ीबड़ी रकमें हारने पर दुख के बजाय खुश होती देखी जाती हैं. रुपए हारना भी स्टेटस सिंबल बनता है. दीवाली पर क्व2-3 लाख हारने वाली महिला किट्टी पार्टी में बड़े गर्व से जुए में हारने की बात बताती है. तब सभी स्त्रियां उस की प्रशंसा करती हैं. उसे आदरणीय नजरों से देखा जाता है. जुए की परंपरा अब किट्टी पार्टियों में भी देखी जा सकती है. वैसे तो महिलाओं को किट्टी पार्टियों में कभी भी जुआ खेलते देखा जा सकता है, लेकिन दीवाली के आसपास बहुत जोरशोर से खेला जाता है. दीवाली के आसपास किट्टी पार्टी का आयोजन जिस कोठी या फ्लैट में किया जाता है उस पार्टी का आयोजन करने वाली महिला उस में ताश खेलने का कार्यक्रम भी रखती है. ताश के माध्यम से जुआ खेला जाता है. पार्टी में स्त्रियां अलगअलग समूह बना कर जुआ खेलती हैं. दीवाली पर जुए के आयोजन अब होटलों से अधिक फार्महाउसों में होने लगे हैं, क्योंकि दीवाली के अवसर पर बड़ेबड़े होटलों में जगह नहीं मिलती. फिर अधिकांश स्त्रीपुरुष होटलों में नहीं जा पाते. ऐसे लोगों ने फार्म हाउसों में कार्ड पार्टियों के नाम पर जुए और शराब की पार्टियां आयोजित करनी शुरू कर दी हैं. आयोजक अपने परिचितों को आमंत्रित करते हैं. यही नहीं, फेसबुक पर सूचना दे कर दूसरे लोगों को भी आमंत्रित करते हैं. दूसरे लोग फोन पर सीट बुक करा कर पार्टी में शामिल होते हैं. दीवाली पर जुआ खेलने और दूसरी मौजमस्ती करने के लिए अब कार्ड पार्टियों का आयोजन भी होने लगा है. कार्ड पार्टियां फार्महाउसों में आयोजित की जाती हैं. फार्महाउसों के मालिक कार्ड पार्टियों का आयोजन करते हैं लेकिन आजकल दूसरे लोग भी फार्म हाउस किराए पर ले कर कार्ड पार्टियां आयोजित करते हैं.

शराब के छलकते जाम

कार्ड पार्टियों में जुआ खुलेआम चलता है और शराब के जाम भी खूब छलकते हैं. इन फार्महाउसों में पुलिस का हस्तक्षेप भी बहुत कम होता है, क्योंकि फार्महाउस नगर के बड़ेबड़े बिजनैसमैनों के होते हैं और उन लोगों को बड़ेबड़े नेताओं का संरक्षण मिला होता है. नेताओं के संरक्षण मिले फार्महाउसों में जुए के साथसाथ शराब और शबाब की रंगीन पार्टियां भी खूब मजे से चलती हैं. ताश के पत्तों से जुआ खेला जाता है. ताश के पत्तों का जुआ स्त्रीपुरुष मिल कर खेलते हैं. ताश के पत्तों से जोड़े मिलाए जाते हैं. इस तरह नएनए जोड़े बना कर स्त्रीपुरुष खूब मौजमस्ती करते हैं. जुए के तरीके भी अलगअलग फार्महाउसों और होटलों में परिवर्तित होते रहते हैं. पार्टियों में अधिकतर स्त्रीपुरुष भाग लेते हैं. ऐसी पार्टियों में भाग लेने वाली नवयुवतियां घर या औफिस में किसी को नहीं बतातीं, लेकिन चोरीछिपे अधिकांश नवयुवतियां कार्ड पार्टियों में शामिल होती हैं. एक नवयुवती ने कार्ड पार्टी में जाने की बात बताई. वह पहले बौयफ्रैंड के साथ ‘लिव इन रिलेशन’ में रहती थी. तब अपने बौयफ्रैंड के साथ कार्ड पार्टियों में खूब जाती थी. पिछले वर्ष वह दीवाली पर जिस कार्ड पार्टी में गई थी उस में टैडीबियर का खेल खेला गया.

उस पार्टी में स्त्रीपुरुष पतिपत्नी के साथ शामिल हुए थे. कुछ लोग अपनी गर्लफ्रैंड के साथ आए थे. पार्टी में एक बड़ी टेबल पर एक टैडीबियर रखा गया था. दूर खड़े युवकयुवतियां एक गोल छल्ले (रिंग) को उछाल कर उस टैडीबियर पर फेंकते थे. पहले एक नवयुवती ने छल्ला फेंका. छल्ला टैडीबियर पर गिरा. अब युवक की बारी थी. एक नवयुवक ने छल्ला फेका. टैडीबियर बच गया. दूसरे नवयुवक ने छल्ला फेंका. वह भी टैडीबियर से दूर जा गिरा. कई नवयुवकों ने छल्ले फेंके. आखिर एक नवयुवक का छल्ला टैडीबियर पर गिरा. सभी उपस्थित स्त्रीपुरुषों ने जोरजोर से तालियां बजाईं और वह नवयुवक पहले छल्ला फेंकने वाली नवयुवती को बांहों में भर कर पास के कैबिन में ले गया. उस के बाद फिर टैडीबियर पर छल्ला फेंकने के लिए पहले एक नवयुवती आगे आई. इस तरह छल्ला फेंकने का कार्यक्रम देर तक चलता रहा.

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मौजमस्ती का जरिया

दीवाली पर जुआ खेलने वालों के किस्से सुन कर महाभारत के युधिष्ठिर के जुआ खेलने और राजपाट के साथ द्रौपदी के हार जाने की बात भी छोटी लगने लगती है. आधुनिक परिवेश में तरहतरह से जुआ खेला जाता है. जुए में पुरुष अपनी पत्नी को हारने पर बहुत खुश होते हैं. पुरुषों का जुए में पत्नी हार जाने पर किसी दूसरी स्त्री के साथ मौजमस्ती करने का मौका जो मिलता है. जुए के कुकृत्यों के साथ दूसरे अनेक कुकृत्य भी शामिल होते जा रहे हैं. दीवाली अंधेरे में दीप जला कर खुशियां मनाने का त्योहार है. लेकिन लोग जुए और शराब में डूब कर अपने जीवन में अंधेरा कर लेते हैं. जुआ खेलने वाला व्यक्ति जुए में हारे धन की भरपाई के लिए किसी से उधार ले कर फिर जुआ खेलता है. लेकिन जब उधार के रुपए भी जुए में हार जाता है तब परिवार पर संकट के बादल छा जाते हैं. जुए में अधिक धन हार जाने वाले जब कर्ज से मुक्त नहीं हो पाते हैं तो वे डिप्रैशन का शिकार हो जाते हैं या फिर आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

खुशियों का मोल समझे

जुए और शराब की मस्ती में डूबने वाले होश आने पर खुद को खाली हाथ ही पाते हैं. ऐसे में उन के पास पछताने के अलावा कोई और रास्ता नहीं होता. आजकल की व्यस्त जिंदगी में अपनों के साथ बिताने के लम्हें हैं ही कितने? इस दीवाली परिवार से नहीं, खुद से ये वादा करें कि जुए या नशे में पैसा और समय बरबाद करने की बजाए परिवार के साथ खुशियों के हलकेफुलके पल बिताएंगे. फिर देखिए कि किस तरह ये पल हमेशा के लिए यादगार बन जाएंगे.

‘कार्तिक’ ने ‘नायरा’ को दी kairav की कस्टडी, सबके सामने ऐसे मांगी माफी

सीरियल ‘ये रिश्ता’ में जहां ‘कार्तिक-नायरा’ के बीच ‘कायरव’ की कस्टडी का ड्रामा फैंस को एंटरटेन कर रहा है तो वहीं ‘वेदिका’ का ‘कार्तिक’ के साथ रखना फैंस को गुस्सा दिला रहा है. हाल ही में हमने आपको बताया था कि जल्द ही ‘वेदिका’ की एक्जिट होने वाली है, जिसके चलते शो में काफी सारा ड्रामा देखने को मिलेगा. लेकिन इससे पहले ‘कार्तिक’ ‘नायरा’ से माफी मांगने वाला है. आइए आपको बताते हैं क्या है ‘कार्तिक’ के माफी मांगने का कारण…

‘नायरा’ की बेइज्जती पर कार्तिक होगा ये रिएक्शन

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि कैसे ‘कार्तिक’ की वकील ‘दामिनी’ मिश्रा कोर्ट में सबके सामने ‘नायरा’ की बेइज्जती करेगी. वो ‘नायरा’ के कैरेक्टर पर सवाल उठाएंगी और कहेगी कि वो एक अच्छी मां नहीं है. जिसके बाद ‘कार्तिक’ खुद को रोक नहीं पाएंगे और सबके सामने अपनी ही वकील को खरी खोटी सुनाएगा. इसके बाद ‘कार्तिक’, जज से माफी मांगेगा और अपनी बात कहने की परमिशन मांगेगा.

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सबके सामने ‘नायरा’ से माफी मांगेगा ‘कार्तिक’

‘कार्तिक’ कोर्ट में ही सबके सामने ‘नायरा’ से माफी मांगेगा और कहेगा कि वो सही थी और मैं गलत. ‘नायरा’ एक अच्छी इंसान है और अच्छी मां भी. मैं ही एक बुरा बाप हूं. ‘कार्तिक’ की ये बातें सुनकर ‘नायरा’ फूटफूटकर रोने लगेगी.

‘नायरा’ को ‘कायरव’ की कस्टडी देगा ‘कार्तिक’

आगे ‘कार्तिक’ कहेगा कि उसे अपनी गलती का एहसास हो गया है. एक मां को उसके बेटे से दूर करना गलत हैं. इसलिए मैं चाहता हूं आप ‘नायरा’ को ‘कायरव’ की कस्टडी दे दें.

एक्स हस्बैंड की एंट्री के चलते होगी ‘वेदिका’ की एक्जिट

 

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‘वेदिका’ की शो से एक्जिट कराने के लिए शो के मेकर्स ने ‘वेदिका’ के पास्ट यानी उसके एक्स हस्बैंड को लाने का फैसला किया है, जिससे ‘वेदिका’ की एक्जिट होना तय है.

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 दिवाली सेलिब्रेशन पर होगा ‘नायरा-कार्तिक’ का मिलन


‘नायरा-कार्तिक’ के मिलन के इंतजार में खुशखबरी है कि जल्द ही दिवाली सेलिब्रेशन के मौके पर शो में नया ट्विस्ट आएगा, जिसके चलते ‘नायरा और कार्तिक’ का मिलन हो जाएगा.

‘कोमोलिका’ के बाद ‘मिस्टर बजाज’ ने भी शो छोड़ा, जानें क्या है वजह

स्टार प्लस के सीरियल ‘कसौटी जिंदगी के 2’ में जहां हाल ही में जहां ‘कोमोलिका’ की एंट्री के बाद फैंस खुश थे तो वहीं अब शो के लीड रोल में नजर आने वाले एक और एक्टर ने शो को अलविदा कह दिया हैं. जी… ‘मिस्टर बजाज’ के रोल में नजर आने वाले करण सिंह ग्रोवर ने हाल ही में शो को अलविदा कह दिया है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

‘मिस्टर बजाज’ के रोल में करण का सफर हुआ खत्म

‘नई कोमोलिका’ के आने के बाद अब ‘मिस्टर बजाज’ यानी करण सिंह ग्रोवर का सफर खत्म हो चुका है, जिसका खुलासा खुद करण ने सोशल मीडिया पर किया है.

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शो छोड़ने की ये थी वजह

खबरों की माने तो, करण सिंह ग्रोवर अपने मिस्टर बजाज के किरदार से खुश नहीं थे, जिसके लिए करण सिंह ग्रोवर ने एकता कपूर से भी मुलाकात की थी. वह बात अलग है कि, इस समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया है. यही वजह है कि, करण सिंह ग्रोवर ने कसौटी जिंदगी के 2 को छोड़ने का फैसला किया.

सोशल मीडिया पर शेयर की फोटोज


हाल ही में करण सिंह ग्रोवर ने अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर की है जिसमें वह शो के सेट पर अपनी फेयरवेल पार्टी इंजौय करते नजर आ रहे हैं. इस दौरान करण सिंह ग्रोवर के साथ उनकी पूरी ‘कसौटी जिंदगी के 2’ की टीम नजर आ रही है.

करण के लिए हुई फेयरवेल पार्टी

जाने से पहले करण सिंह ग्रोवर के लिए शो के सेट पर धमाकेदार फेयरवेल पार्टी का आयोजन किया गया था. इस बात का खुलासा करण सिंह ग्रोवर ने अपनी इंस्टाग्राम फोटोज कर लिखे कैप्शन में किया. करण सिंह ग्रोवर ने लिखा, इतनी बेहतरीन फेयरवेल पार्टी देने के लिए आप सब का धन्यवाद. आप सब के साथ काम करके मुझे काफी मजा आया. पार्टी के लिए धन्यवाद…. एकता कपूर यहां हम सब आपको काफी मिस कर रहे हैं.

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बता दें, इससे पहले ‘कोमोलिका’ के रोल में नजर आने वाली हिना खान ने भी शो को बीच मझधार में छोड़ दिया था. वहीं अब ‘मिस्टर बजाज’ यानी करण सिंह ग्रोवर के शो को अलविदा कहने के बाद शो पर क्या असर पड़ता है. करण के इस फैसले से उनके फैंस काफी हैरान हैं.

छेड़खानी या रेप कभी भी मजे के लिए नहीं होती – सबा खान

लीक से हटकर काम करना और उसे एक दिशा देना आसान नहीं होता, ये संभव तभी हो पाता है, जब उसमें आपका परिवार साथ दे और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें, ऐसी ही मजबूत इरादों के साथ मुंबई की सामाजिक कार्यकर्ता सबा खान अपनी संस्था ‘परचम’ के साथ काम कर रही है. उसने मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों की आज़ादी को महत्व दिया है, जो घरेलू अत्याचार सहे बिना उसका विरोध करने में सक्षम है. ऐसा करते हुए उन्हें कई उलाहने और ताने भी सुनने पड़े, पर वह अपने काम में अडिग रही. इसकी प्रेरणा कहाँ से मिली पूछे जाने पर सबा कहती है कि  स्कूल में सोशल वर्क का कर्रिकुलम था, वहाँ काम करते करते इस क्षेत्र में रूचि बन गयी. इसके बाद टाटा इंस्टिट्यूट से मैंने सोशल वर्क में मास्टर किया. इससे अलग-अलग और्गनाइजेशन में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान मुझे ‘अंजुमन इस्लाम’ के एक प्रोजेक्ट,जो बांद्रा में मुसलमान औरतों के लिए काम करती थी. वहां उन औरतों के साथ उनके घरेलू समस्याएं, काउंसलिंग आदि करती थी, ऐसे ही आगे बढ़ते-बढ़ते मैंने अपनी एक संस्था के बारें में सोची, क्योंकि किसी संस्था के अंतर्गत काम करने से उनके द्वारा दिए गए काम को ही करना पड़ता है. खुद की सोच को आगे ले जाने का मौका नहीं मिलता. ऐसे में कुछ लड़कियों ने मेरा साथ दिया और साल 2012 में अपनी संस्था ‘परचम’ खोली. जिसका उद्देश्य महिलाओं की सोच को खुलकर आगे लाने की थी. टीम में 7 महिलाये कोर में है. बाकी 200 सदस्य है.

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सामाजिक काम में समय सीमा कोई नहीं रहती इसलिए परिवार के सहयोग की बहुत जरुरत होती है, ताकि आप शांतिपूर्ण ढंग से काम कर सकें. इस बारें में सबा कहती है कि मैंने शादी नहीं की है और तय किया है कि जिस रिश्ते में इतना कंट्रोल है, उससे दूर रहकर अपने तरीके से काम करूँ. परिवार का सहयोग मेरे लिए बहुत होता है और अगर वे किसी बात को करने से मना भी करते है, तो वजह मेरी सुरक्षा की ही होती है, ऐसे में हमेशा बातचीत करते रहने से उन्हें हमारे काम के महत्व और अपनी देखभाल के तरीके को समझना आसान होता है और मैंने ऐसा ही किया है, क्योंकि रिश्ते आपको आगे बढ़ने में भावनात्मक सहयोग देती है. केवल परिवार का ही नहीं, दोस्तों का भी सहयोग चाहिए.

‘परचम’ संस्था लड़कियों की खेलने और घूमने की आजादी को अधिक महत्व देता है. सबा आगे कहती है कि लड़कियों के खेलने के लिए जगह नहीं है और वे लड़कों के साथ खेल नहीं सकती. जबकि लड़कियों की परवरिश बचपन से ही पति और परिवार को आगे ले जाने के लिए होती है. उनकी इच्छा पर कोई ध्यान नहीं देता. मैंने लड़कियों को फुटबौल खेलने की ओर प्रेरित किया और उनकी एक टीम बनायी,क्योंकि हमारे धर्म में लड़कियों को खुले मैदान में बिना सिर ढके खेलने की आजादी नहीं है. इतना ही नहीं किसी लड़की को बाज़ार जाकर अपनी मनपसंद कुछ खाने-पीने की आज़ादी नहीं, ये काम सिर्फ लड़के ही कर सकते है,ऐसे में हमें लगा कि इसे आगे लाने में ये फुटबाल खेल सही रहेगा और इसमें काफी लड़कियों ने भाग लिया, लेकिन खेलने की जगह का अभाव था. मैंने जगह बनाने के लिए 500 लड़कियों की ‘फाइटर रैली’ निकाली, क्योंकि लड़कियों का बाहर निकलना बहुत जरुरी है, ताकि पुरुषों को उन्हें सड़कों पर देखने की आदत बने और ये लड़कियों को अधिक समूह में होने की जरुरत है, ताकि छेद-छाड़ कम हो. छेड़खानी या रेप कभी भी मज़े के लिए नहीं होती, अपनी जगह दिखाने के लिए होती है. रास्तों को सुरक्षित बनाने के लिए इसकी ओनरशिप लेने की जरुरत है.

फुटबाल की टूर्नामेंट के ज़रिये सबा महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ा रही है, अभी लड़कियों के साथ उनकी मांए भी खेल रही है, क्योंकि बचपन में उन्हें इसकी आजादी नहीं मिली. सबा का आगे कहना है कि इसमें हिन्दू मुस्लिम सभी लड़कियां साथ मिलकर खेलती है, क्योंकि धर्म को अलग करने वाले हमारे राजनेता है. जो गंदी विचार एक दूसरे के अंदर डालते है. फुटबाल टूर्नामेंट का नाम ‘फातिमा बी सावित्रीबाई फ्रेंडशिप टूर्नामेंट’ है. 3 साल से ये टूर्नामेंट मुम्ब्रा में चला रहे है. करीब 200 लड़कियां इसमें अब प्रशिक्षित हो रही है.

इसमें काम में चुनौती बहुत होती है,क्योंकि इसमें पहले खेल का मैदान मिलना बहुत मुश्किल था, क्योंकि सभी जगह को लड़कों ने कैप्चर कर रखा है. सबा कहती है कि मैंने फुटबाल टीम बनाने में स्कूल की लड़कियों को चुनना चाही, जिसमें अधिकतर स्कूल ने लड़कियों को खेलने देने से मना कर दिया. इसके अलावा जो लड़कियां खेलने जाती थी, उनके भाई उन्हें खेलने पर मारपीट कर घर बैठा देते थे. डेढ़ महीने में 40 लड़कियों से घटकर केवल 20 ही रह गयी थी. ये लड़कियां इंग्लिश ट्यूशन के बहाने झूठ बोलकर खेलने आती थी, लेकिन इससे लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ने लगा. मुम्ब्रा में खेल के मैदान की सहमति में 934 लोगों ने हस्ताक्षर किया और इससे हमें खेलने का मैदान सिर्फ लड़कियों के लिए मुम्ब्रा में मिला. इसके अलावा धर्म गुरुओं का हस्तक्षेप था, उन्होंने लड़कियों के कोच को रोकने की कोशिश की, लेकिन मेरे परिवार ने सहयोग दिया. अब काम आसान हो चुका है. असल में तंग गलियों में रहने वाले मुसलमान परिवार की दशा बहुत दयनीय है, जिसे कोई मौलवी या राजनेता नहीं देखते. व्यक्ति को खुद ही इससे लड़ना पड़ता है. आगे भी दुनिया और उसकी सोच को महिलाओं के प्रति बदलने की हमारी कोशिश रहेगी.

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DIWALI 2019: त्यौहार पर घर जाने की मारामारी क्यों?

कार्यालय में अपनी सीट पर बैठेबैठे अचानक मोनिका की नजर टेबल पर लगे कैलैंडर पर चली गई. दीवाली की तारीख नजदीक आते देख सब से पहले जो सवाल उस के जेहन में कौंधा वह था कि रिजर्वेशन मिलेगा या नहीं? अगले ही पल उस की उंगलियां लैपटौप के कीबोर्ड पर दौड़ने लगीं, लेकिन उसे हताशा हाथ लगी. सभी सीटें फुल हो चुकी थीं. ट्रेन का ही नहीं उसे बस और हवाईजहाज का भी टिकट न मिला. अब वह सोच में पड़ गई कि घर कैसे जाए और यदि न जा पाए तो परिवार से दूर कैसे त्योहार मनाए?

मोनिका की ही तरह और भी न जाने कितने लोग अपने घरपरिवार से दूर दूसरे शहरों में रहते हैं. सब की घरपरिवार से दूर रहने की अपनी वजह है. कोई पढ़ाई के लिए तो कोई नौकरी की वजह से दूसरे शहर में बसेरा डाले हुए है. काम और पढ़ाई में उलझे ऐसे लोगों को हर दिन तो नहीं लेकिन तीजत्योहार पर परिवार वालों की कमी बहुत खलती है. इसीलिए वे त्योहारों पर घर जाने की जद्दोजेहद में लगे रहते हैं. रिजर्वेशन खुलते ही लोग अपनी सीट बुक कराने के लिए इंटरनैट से चिपक जाते हैं. कुछ तो ऐसे भी होते हैं जो खासतौर पर रिजर्वेशन कराने के लिए दफ्तर से छुट्टी ले कर रेलवे स्टेशन में लगी लंबी कतार में घंटों खड़े रहते हैं. मगर उस के बाद भी कई बार रिजर्वेशन नहीं हो पाता है. ऐसे में कभीकभी  अपने ही शहर में रहने वाले यारदोस्तों, जिन को घर जाने के लिए सीट मिल चुकी होती है, उन की खुशामद करनी पड़ती है, तो कभी रिश्वत का सहारा लेना पड़ता है.

1. हो सकते हैं नुकसान कई

ऐसे में सवाल उठता है कि एक दिन के त्योहार के लिए इतनी मारामारी क्यों? आखिर त्योहार उस स्थान पर भी तो मनाया जा सकता है जहां आप रहते हैं. यदि घर जाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो बेमतलब की परेशानी उठाने की क्या जरूरत है? त्यौहार के बाद भी तो समय निकाल कर घर जाया जा सकता है? हां, यह स्वाभाविक है कि त्यौहारों का मजा अपनों के संग ही आता है. इस के लिए सचेत रहने की जरूरत होती है. यानी पहले से घर जाने की व्यवस्था करने में ही समझदारी है वरना इस मारामारी के कई नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं. आइए, जानते हैं कि हड़बड़ी में सफर करने के क्याक्या नुकसान हो सकते हैं:

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सबसे पहला और बड़ा नुकसान तो आप की जेब को होता है. यदि आप समय पर टिकट बुक नहीं करवा पाए हैं, तो जाहिर है कि तत्काल टिकट मिलना असंभव होता है. यदि किसी दलाल से तत्काल टिकट बुक कराते हैं तो जाहिर है कि वह आप को काफी महंगा पड़ेगा. इस के अलावा यदि आप बस या फ्लाइट से जाने की सोचते हैं तो वहां भी आप की जेब को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

पैसों के अलावा दूसरा नुकसान होता है दफ्तर के काम का. जब आप ने तय ही कर लिया है कि जैसेतैसे घर जाना ही है तो जाहिर है आप हर वक्त यही सोचते रहेंगे कि घर जाने से पहले सारे काम निबटा लिए जाएं. होना भी यही चाहिए कि आप की अनुपस्थिति में आप के द्वारा किए जाने वाले कार्य का बोझ और किसी पर न आए. लेकिन काम को आननफानन कर पाना संभव नहीं होता है. घर जाने की जल्दी में जिस काम में अधिक समय लगता है उसे कम समय में सिर्फ निबटा देने के उद्देश्य से किया जाए तो आप सोच सकते हैं कि उस काम की क्या गुणवत्ता होगी? ऐसे में काम को कुशलता से न कर पाने का जोखिम आप को तब उठाना पड़ता है जब आप के अप्रेजल का समय आता है, क्योंकि संस्थानों में कर्मचारी की काम के प्रति ईमानदारी, मेहनत और लगन को ऐसे मौकों पर ही परखा जाता है. ऐसे में यह एक माइनस पौइंट आप की साल भर की मेहनत पर पानी फेर सकता है.

कई बार काम को निबटाने और घर जाने की व्यवस्था करने की चिंता में अकसर खाने को नजरअंदाज किया जाता है या फिर बेवक्त खाना खाया जाता है. यह भी सेहत को बिगाड़ने का ही इंतजाम है.

अूममन लोग ट्रेन में बिना टिकट यह सोच कर चढ़ जाते हैं कि टीटी को रिश्वत दे देंगे. सीट भले न मिले, लेकिन खड़े होने की जगह तो मिल ही जाएगी. लेकिन क्या आप को पता है कि रिश्वत देना अपराध है और इस की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है?

सीट कन्फर्म न होने पर केवल स्थान पाने की ही जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती, बल्कि सामान के खोने का डर भी बढ़ जाता है, क्योंकि आप पूरा सफर सामान को कंधे पर उठाए तो सफर नहीं कर सकते. कहीं तो आप को सामान रखना ही पड़ेगा. इस स्थिति में सामान कहीं और आप कहीं और होते हैं. ऐसे में सामान के चोरी होने का डर बना रहता है.

2. पहले से करें तैयारी

त्योहार घर पर मनाने का मन बना ही लिया है, तो इस की प्लानिंग भी सुनियोजित तरीके से करें. आइए, आप को इस के कुछ टिप्स बताते हैं:

यह बात सभी को पता है कि ट्रेन में सीट रिजर्वेशन के लिए 4 महीने पहले से टिकट मिलने शुरू हो जाते हैं. लेकिन यह याद रखना आप की जिम्मेदारी है. यदि आप घर जाने की सोच रही हैं खासतौर पर दीवाली जैसे मौके पर तो जिस दिन इस तारीख के लिए रिजर्वेशन खुलता है उसी दिन आप को टिकट बुक करा लेना चाहिए. त्योहार के 1 महीना या हफ्ता भर पहले टिकट मिलना नामुमकिन होता है, यह हमेशा ध्यान रखें. यह भी खयाल रखें कि जरूरी नहीं कि दलाल से आप को पक्का ही टिकट मिल जाएगा, क्योंकि यह ऐसा वक्त होता है जब आप की ही तरह बहुत लोग दलाल की दुकान के आगे कतार में खड़े मिलते हैं. यहां पर फर्स्ट कम फर्स्ट सर्विस वाला हिसाब होता है. यदि यहां भी देर हो गई तो आप के पास अफरातफरी में सफर करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचेगा.

लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि त्योहार के दिन या उस के आसपास के दिनों में लोकल कनवेंस तक में जगह नहीं मिलती. इसलिए जाने के लिए टिकट का इंतजाम पहले से कर लें.

बौस को कम से कम 1 माह पूर्व घर जाने की बात बता दें. इस से जो भी महत्त्वपूर्ण काम होंगे उन्हें वे आप को पहले करने को कह देंगे. तब आप उन्हें पूरी कुशलता से और समय से पूरा कर पाएंगे.

कालेज में त्योहार पर भले ही आप को छुट्टी दी जा रही हो, लेकिन त्योहार के आसपास आप के इम्तिहान तो नहीं हैं या कोई जरूरी प्रोजैक्ट तो आप को जमा नहीं करना, इस बात का भी ध्यान रखें. यदि ऐसा कुछ है तो उस की तैयारी पहले से करें और फिर उसी के हिसाब से रिजर्वेशन कराएं.

3. न जा पाएं घर तो क्या करें

तमाम कोशिश के बाद भी यदि आप घर जाने में असफल रहते हैं तो उदास न हों और न ही त्योहार के उत्साह को कम होने दें. जिस शहर में आप हैं उसी शहर में आप त्योहार को अपनी तरह से मना सकते हैं. अपने परिवार के साथ तो आप ने कई बार त्योहार मनाया होगा, लेकिन इस बार नए लोगों के साथ नए तरीके से त्योहार मना कर भी देखें.

अगर महल्ले में कोई आप के जैसा हो, जो त्योहार पर अपने घर न जा सका हो तो उस के साथ त्योहार का आनंद लें.

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आजकल त्योहारों पर कुछ समुदायों और संस्थानों द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है. यदि आप को ऐसे आयोजनों का हिस्सा बनने में आनंद आता हो तो जरूर उन का हिस्सा बनें. ऐसा करने पर आप त्योहार का मजा एक नए अंदाज में ले सकेंगे.

आप जिस शहर में हैं उस के आसपास सैरसपाटे का कोई स्थान हो तो आप त्योहार के दिन वहां भी जा सकते हैं. यदि आप को इस छोटे से सफर में कोई साथी मिल जाए तो और भी अच्छा रहेगा.

त्यौहार के दिन कुछ ऐसा करें जो आप ने कभी न किया हो. आप हर बार त्योहार पर अपने और अपने घर वालों के लिए ढेर सारा सामान खरीदते हैं, तो इस बार उन के लिए खरीदिए जिन के लिए कोई नहीं खरीदता और जो खुद भी अपने लिए कुछ खरीद पाने में असमर्थ होते हैं. आप त्योहार का मजा अनाथ बच्चों, वृद्धों और स्पैस्टिक सैंटर जा कर वहां के लोगों के साथ भी ले सकते हैं. त्योहार को मनाने का यह नया अंदाज आप को जो अनुभूति देगा उसे आप कभी नहीं भुला पाएंगे.

DIWALI 2019: सिल्क की साड़ियों की इन खूबियों को जानकर हैरान रह जाएंगे आप

फेस्टिवल में कपड़ों की बात की जाए तो सिल्क यानी सिल्क बेस्ट औप्शन होता है, ये हर तरह से हमें फायदा पहुंचाता है, इसीलिए आज हम आपको सिल्क की खूबियों के बारे में बताएंगे.

1. नेचुरल चमक रहती है बनी

अन्य कपड़ों को मुलायम, मजबूत या चमकदार बनाने के लिए उन पर कई तरह के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है,वहीं सिल्क पहले से मुलायम और चमकदार होता है. इसकी चमक नैचुरल होती है.

2. पसीना सोखता है सिल्क

पसीना और नमी के कारण स्किन में कई प्रकार के इन्फेक्शन होने की सम्भावना होती है. सिल्क में नमी या पसीना सोखने की जबरदस्त खूबी होती है. जिससे स्किन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.

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3. हर मौसम के लिए परफेक्ट है सिल्क       

सिल्क के कपड़े से हवा पास होती है,जिसके कारण स्किन को नुकसान नहीं पहुंचता. सिल्क के कपडों की खास बात यह भी है की यह सर्दी के मौसम में गर्म और गर्मी के मौसम में ठंडा रहता है. इसलिए सिल्क को आप किसी भी मौसम में पहन सकती हैं.

4. सिल्क के कपड़े में फफूंदी नहीं लगती

सिल्क का धागा कीट के द्वारा खुद की कीड़े मकोड़े या फफूंद से रक्षा के लिए बनाया जाता है जो एक विशेष प्रकार के प्रोटीन से बना होता है. इसलिए सिल्क के कपड़े में फफूंदी नहीं लगती तथा इसमें डस्ट माईट नहीं होते हैं. सिल्क का कपड़ा हाइपो-एलेर्जेनिक होता है यानी इसे पहनने से एलर्जी नहीं होती .

5. सेंसिटिव स्किन के लिए परफेक्ट है सिल्क

सिल्क के धागे लम्बे और मुलायम होते हैं इससे बने हुए कपड़े स्किन के लिए भी बहुत नर्म होते हैं. इनसे स्किन पर बिलकुल भी रगड़ नहीं लगती. सेंसिटिव स्किन वालों को सिल्क के कपड़े उपयोग करने से बहुत आराम मिलता है.

6. ऐसे करें सिल्क की देखभाल

फैशन डिज़ाइनर रुकसार बताती है कि सिल्क के कपडों को सूती या मलमल के कपड़ो में लपेट कर रखना चाहिए. इससे कपडों की चमक बिलकुल नए जैसी बनी रहती है. सिल्क के कपड़े में धूप दिखाते रहना चाहिए. इससे वस्त्र में बदबू नहीं आएगी. सिल्क की साड़ियों को लोहे के हैंगरों पर न टांगे. इससे उम में रिएक्शन होने की संभावना रहती है.

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DIWALI 2019: बिंदी लगाते वक्त रखें इन बातों का ध्यान

बढ़ते फैशन के दौर में बिंदी का चलन फिर से देखने को मिल रहा है. फैशन के अनुसार छोटी बिंदी को आजकल ज्यादा पसंद किया जा रहा है. महिलाएं हों या लड़कियां छोटी बिंदी लगाना ज्यादा पसंद कर रही हैं. आइए, जानते हैं बिंदी लगते वक्त किन किन बातों का ध्यान रखें-

अगर आप रंग-बिरंगी छोटी बिंदी लगा रही हैं तो अपने कपड़ों से मैच करता हुआ ही लगाएं. अगर आपने शौर्ट कुर्ती पहनी है, तो इस पर छोटी बिंदी बहुत खूबसूरत लगेगी.

छोटी बिंदी साड़ियों के साथ भी बहुत फबती है. खास कर प्रिंट और कॉटन की साड़ियों के साथ. अगर आपका सिंपल के साथ खूबसूरत दिखने का मन है तो आप लाइट मेकअप के साथ छोटी बिंदी जरूर लगाएं.

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छोटी बिंदियों में काली और लाल बिंदी सभी परिधानों के साथ खूब जचती है. अगर आपको लाल बिंदी ज्यादा पसंद है तो आप इसे कई कपड़ों के साथ मैच कर सकती हैं. काला, पीला, लाल, नीला, सफ़ेद,रानीपिंक, डार्कग्रीन, आसमानी, क्रीम आदि. इन रंगों के कपड़ों पर लाल बिंदी बहुत सुंदर लगती है.

काली बिंदी ज़्यादातर लड़कियां इस्तेमाल करती हैं. काली बिंदी के लिए कपड़ों के रंगों से मैच करना जरूरी नहीं है. इसे आप किसी भी रंग के परिधान के साथ लगा सकती हैं.

ऐसे चमकेगी बिंदिया

अगर आपकी हाइट ज्यादा है तो आप लंबी बिंदी के जगह गोल बिंदी का इस्तेमाल न करें.

छोटी हाइट वाली महिलाओं को लंबी बिंदी लगानी चाहिए.

अगर आपका रंग गोरा है तो डार्क रंग की बिंदी का इस्तेमाल करें. और यदि गेंहुआ है तो हल्के रंग की बिंदी लगाएं.

ट्रैडीशनल लुक के लिए लाल और मैरुन रंग की बिंदी का इस्तेमाल करें

शादी-पार्टी के लिए खास है यह बिंदियां

घर में किसी की शादी हो तो कई सारे फंक्शन अटेंड करने होते है. ऐसे में महिलाएं हर फंक्शन में सबसे अलग और सुंदर दिखना चाहती हैं. पर्फेक्ट हेयरस्टाइल, पर्फेक्ट मेकअप के साथ अगर बिंदी भी पर्फेक्ट हो तो चेहरे की खूबसूरती निखर जाती है.

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जब हो सगाई
अगर आप सगाई का फंक्शन अटेंड कर रही है तो बिंदी भी उसी के अनुसार होनी चाहिए.
सगाई में अगर आप कुछ सिंपल वियर कर रही हैं तो हैवी बिंदी लगाएं. इससे आपकी सिंपल ड्रेस की खूबसूरती बढ़ जाएगी. कई महिलाएं ड्रेस बहुत हैवी पहन लेती है और मेकअप भी उसी के अनुसार करती है और बिंदी भी चमक वाली लगा लेती है. इससे आपका पूरा लुक बहुत चमक वाला और फ्यूसिंग सा लगने लगता है. इसलिए जब भी कुछ हैवी पहने तो मेकअप भी हल्के करे और बिंदी भी सिंपल चुने.

हल्दी और मेहंदी की रस्म

हल्दी में पूरा घर ही हल्दी के रंग में रंग जाता है. पीले वस्त्र में सभी बहुत अच्छे दिखते है. और मेहंदी वाले दिन भी कुछ ऐसा ही हाल रहता है. ग्रीन ड्रेस में सभी बहुत खूबसूरत लगता है. अगर आप अपनी पीली और ग्रीन साड़ी के साथ बिंदी मैच करने में कनफ्यूज है तो आप कोई भी सिंपल बिंदी लेकर लगा सकती है. सिंपल बिंदी आपको एक एलीगेंट लुक देती है. पीले के साथ मारून और ग्रीन रंग में सिंपल बिंदी बहुत फबेगी.

शादी वाले दिन

शादी वाले दिन आप गोल नग वाली बिंदी लगा सकती हैं. लंबी डिजाइनर बिंदियां ऐसे फंक्शन में बहुत अलग लुक देती है. वेल्वेट बिंदी में भी अलग अलग रंग और डिजाइन मार्केट में आने लगे है.

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दिवाली स्पेशल: अनिक घी के साथ बनाएं कोकोनट दाल करी

अगर आप फेस्टिवल के औयली और हैवी फूड से तंग आ गए हैं और कुछ हल्का, हेल्दी और टेस्टी बनाना चाहते हैं तो अनिक घी के साथ बनाएं ये परफेक्ट रेसिपी. कोकोनट दाल करी और उस पर लगाया गया अनिक घी का तड़का आपके टेस्ट और हेल्थ का ख्याल रखेगा. आप इस दाल को चावल के साथ गरमागरम परोस कर अपनी फैमिली को परोस सकते हैं.

हमें चाहिए

– 1 कप धुली मसूर दाल

– 1/2 कप बारीक कटा प्याज

– 1 बड़ा चम्मच अदरक व लहसुन पेस्ट

– 1 बड़ा चम्मच किचन किंग पाउडर

– 1/4 छोटा चम्मच करी पाउडर

– 1 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

– 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

– 1/4 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

– 1 इंच टुकड़ा दालचीनी

– 1 नग तेजपत्ता

– 1 कप कोकोनट मिल्क

– 4 कप पानी

– 2 बड़े चम्मच घी

– नमक स्वादानुसार

तड़के के लिए

– 3 बड़े चम्मच अनिक घी

– 3 बड़े चम्मच टोमैटो प्यूरी

– 1 छोटा चम्मच कश्मीरी मिर्च पाउडर

– 2 साबूत लालमिर्च

– 1 छोटा चम्मच जीरा

– चुटकी भर हींग पाउडर

– सजाने के लिए थोड़ी सी धनियापत्ती कटी.

बनाने का तरीका

दाल को साफ कर 1 घंटा पानी में भिगोए रख कर फिर पानी निथार कर अलग रखें.

एक प्रैशर कुकर में अनिक घी गरम कर के प्याज, अदरक व लहसुन भूनें.

सभी सूखे मसाले, नमक और दाल डाल कर 3 मिनट धीमी आंच पर भूनें.

इस में 4 कप पानी और 1 कप कोकोनट मिल्क डाल कर कुकर बंद करें. 1 सीटी आने के बाद आंच धीमी करें.

5 मिनट और पकाएं. जब कुकर की भाप निकल जाए तब ढक्कन खोलें, दाल गल जानी चाहिए.

अगर पानी कम हो तो गरम कर के और मिला दें.

तड़के के लिए अनिक घी गरम करें. उस में जीरा चटकाएं. साबूत लालमिर्च, हींग पाउडर और कश्मीरी मिर्च डालें. जब तड़का भुन जाए तब आधा तड़का एक बाउल में निकालें.

बचे तड़के में टोमैटो प्यूरी डाल कर भूनें और दाल में मिला दें. दाल को सर्विंग बाउल में पलटें. ऊपर से हींग व जीरे वाला तड़का डालें और सर्व करें.

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