स्टार प्लस के पौपुलर रियलिटी शो ‘नच बलिए 9’ में जल्द ही सेमीफाइल की जंग होने वाली है, लेकिन हाल ही में शो में आने वाले नए ट्विस्ट के चलते फैंस को निराशा होने वाली है. खबर है कि शो के पौपुलर कंटेस्टेट में से एक प्रिंस नरूला और उनकी वाइफ युविका ने शो को छोड़ने का फैसला किया है. आइए बताते हैं क्या है पूरा मामला …
प्रिंस ने ऐसे किया शो से बाहर होने का फैसला
नच बलिए 9 के प्रोमो में सभी जोड़ियां सेमीफाइनल में एक से बढ़ कर एक डांस परफौर्मेंस देती नजर आ रही हैं. इन डांस परफौर्मेंस को देखकर जज काफी खुश नजर आ रहे हैं. वहीं अगले ही सीन में प्रिंस नरुला शो के जज के सामने इस बात का खुलासा कर रहे हैं कि, वह अब शो में रहने के मूड में नहीं हैं.
मनीष पौल प्रिंस नरुला और युविया चौधरी को समझाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं, लेकिन प्रिंस अपना फैसला बदलने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं लग रहे हैं. प्रिंस कह रहे हैं कि, वह शो को छोड़ना चाहते हैं अब और शो में ज्यादा नहीं रुक पाएंगे.
प्रिंस और युविका के सेमीफाइनल से पहले शो छोड़ने का फैसला जजों को काफी खल रहा है, लेकिन अभी तक दोनों ने खुलासा नही किया है.
बता दें, शो में टिके रहने के लिए कंटेस्टेंटस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. हाल ही में हुए डबल एलिमनेशन के दौरान प्रिंस नरुला और युविका चौधरी का नाम भी सामने आया था. वहीं ये बात अलग है कि शो की टीम ने दोनों को एनिवर्सरी का सरप्राइज दिया था.
सब टीवी के पौपुलर फैमिली शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में जल्द ही ‘दयाबेन’ की एंट्री होने वाली है, जिसकी जानकारी हमने आपको दी थी. अब हाल ही में शो के नए प्रोमो में आया है कि ‘दया’ की एंट्री किस तरह होने वाली है. वहीं ‘दयाबेन’ के इंतजार में बैठे ‘जेठालाल’ के रिएक्शन का भी फैंस इंतजार कर रहे हैं. तो आइए आपको बताते हैं शो में कैसे होगी ‘दयाबेन’ की एंट्री…
गरबा के दौरान होगा ‘दया’ की एंट्री
गोकुलधाम सोसाइटी में इन दिनों गरबे की धूम है और इसी फेस्टिवल सीजन को देखते हुए निर्माता चाहते हैं कि ‘जेठालाल’ की जिंदगी में ‘दया’ की एंट्री करवाने की सोची है.
‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के वीडियो को सबटीवी ने इंस्टाग्राम एकाउंट से शेयर किया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
प्रोमो में है ये खास
प्रोमो में ‘जेठालाल’ को जैसे ही पता चलता है कि दया गोकुलधाम सोसाइटी में आ चुकी है. वह ‘दया’ से मिलने के लिए बेचैन हो जाता है. इसे देखकर ‘सुंदर’ ‘जेठालाल’ के साथ गेम खेलने का मन बनाता है. वहीं ‘सुंदर’ ‘जेठालाल’ के सामने नौ महिलाएं लेकर आता है, जिन्होंने घूंघट ओढ़ रखा है, और कहता है कि जीजाजी इनमें से पहचानो बहन कहां है. इस तरह ‘जेठालाल’ की जिंदगी आसान होते-होते फिर से मुश्किल बन जाती है.
बता दें इससे पहले शो के मेकर्स ने शो से जुड़ा एक प्रोमो शेयर किया था, जिसमें ‘दयाबेन’ के इंतजार में बैठे ‘जेठालाल’ ने गरबा न खेलने की कसम खा ली थी. वहीं ‘जेठालाल’ के साले सुंदर को जब ये बात पता चलती है तो वह ‘दयाबेन’ को वापस गोकुलधाम लाने का वादा करता है. अब देखना है कि क्या ‘दयाबेन’ की एंट्री के बाद कहानी क्या मोड़ लेती है.
रिश्तों की डोर बहुत नाजुक होती है. कभी-कभी न चाहते हुए भी इन में दूरियां आ जाती हैं. ऐसे में त्यौहार रिश्तों में आई दूरियों को मिटाने के लिए बेहतरीन मौका साबित हो सकते हैं और वैसे भी त्यौहारों और संबंधियों का रिश्ता गहरा होता है. त्यौहारों में संबंधी साथ न हों तो वे बेहद फीके लगते हैं, उनका मजा अधूरा ही रहता है.
1. रिश्तों में ताजगी लाते त्यौहार
त्यौहार हमें खुशी मनाने का मौका देते हैं, रूटीन लाइफ से अलग करते हैं. खुशी के ये ऐसे मौके होते हैं जिन्हें सगेसंबंधियों के साथ ऐंजौय करने से रिश्तों की खोई ताजगी को भी वापस लाया जा सकता है. परी अपना अनुभव बताती हैं, ‘‘मेरे पति और मेरे बीच अकसर इस बात को ले कर झगड़ा होता था कि वे अपने परिवार को समय नहीं देते. मैं जब भी उन से यह शिकायत करती कि वे मेरे साथ ऐंजौय क्यों नहीं करते तो हमारी बहस शुरू हो जाती, जिस की वजह से हमारा वैवाहिक जीवन बहुत ही नीरस होता जा रहा था. ‘‘लेकिन दीवाली के दिन तब हमारे सारे गिलेशिकवे दूर हो गए जब उन्होंने मुझे बिना बताए मेरी बहन और भाई को हमारे घर बुलाया और जब मैं सुबह सो रही थी तो उन सभी ने मुसकरा कर मुझे दीवाली की मुबारकबाद दी. मैं ने अपने पति, बहन और भाई के साथ बहुत ऐंजौय किया. उन के इस सरप्राइज ने तो मेरे सारे मूड को ही बदल दिया.’’
समय के अभाव में एकदूसरे के साथ वक्त बिताना आज एक मुश्किल काम है. ऐसे में त्यौहार इस का अच्छा उपाय हैं. त्योहारों पर सभी की छुट्टी रहती है, इसलिए इन्हें सगेसंबंधियों के साथ मिलजुल कर मनाना चाहिए. इस से रिश्ते मजबूत होते हैं.
3. अपनों को न भूलें
अरुण एम.बी.ए. करने के लिए अमेरिका गया था. लेकिन हर त्यौहार पर अपने सभी रिश्तेदारों व दोस्तों को बधाई जरूर देता. उन्हें मैसेज और ईमेल भेजता. यानी वह दूर होते हुए भी सभी रिश्तेदारों, मित्रों से जुड़ा रहता. एकदूसरे से मेलमिलाप बढ़ाने का त्योहारों से अच्छा माध्यम और कोई नहीं हो सकता. बस जरूरत है, इन्हें याद रखने की चाहे आप अपनी जिंदगी में कितने भी व्यस्त क्यों न रहते हों अथवा दूर. त्यौहारों पर अपनों को याद करने पर आप यकीनन उन के दिलों में एक खास जगह बना लेंगे.
4. उपहार भेजें
त्योहारों के खास मौकों पर मार्केट में बहुत सुंदरसुंदर उपहार उपलब्ध होते हैं. उपहार छोटा हो या बड़ा, यह माने नहीं रखता. आप को दिखावा नहीं करना है, बल्कि उपहारों के जरिए करीबियों के प्रति अपनी भावनाएं दर्शानी हैं.
अगर आप मिल कर मिठाई या गिफ्ट नहीं दे पाए तो कम से कम बधाई तो अवश्य दें. त्यौहार पर किया गया एक मैसेज या फोन भी आप के भावों को दर्शाने का अच्छा तरीका होता है. बधाई भरे मैसेज हर किसी के चेहरे पर मुसकान बिखेर जाते हैं.
6. सरप्राइज दें
त्यौहार के दिन बिना बताए ही संबंधियों व दोस्तों के घर उन की मनपसंद मिठाई ले कर पहुंच जाएं और उन्हें चौंका दें. यह निमंत्रण दे कर बुलाने से कहीं ज्यादा ऐक्साइटिंग तरीका बन जाता है. प्लानिंग से ऐंजौयमैंट करने से ज्यादा मजा चौंकाने में है.
क्या लड़की का बाहर अकेले रहना गलत है? आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताएंगे जो घर से बाहर बहुत दूर दूसरे शहर में रहती है.जौब करती है, खुद के पैरों पर खड़ी है किसी के सामने हांथ नहीं फैलाना पड़ता है.उसका नाम है नेहा. हां नेहा ने जब पढ़ाई शुरु की थी और जब वो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी तो लोगों ने उससे सवाल किए की तुम आगे क्या करना चाहती हो.
उसने कहा मेरे सपने कुछ ज्यादा बड़े नहीं है बस मैं चाहती हूं कि लाइफ में अच्छी पढ़ाई करके अपने पैरों पर खड़ी हो जाउं और अच्छी जॉब करके पैरेंट्स की हेल्प भी करूं. लेकिन रिश्तेदार और समाज तो समाज ही होते हैं.जब एक लड़की के बाहर रह कर पढ़ाई या जौब करने की बात आती है तब उनके कई सवाल खड़े हो जाते हैं.
हे भगवान अकेली लड़की है बाहर कैसे रहेगी. और कहीं लड़की बाहर जाकर कुछ गलत न कर बैठे आजकल जमाना बड़ा खराब है.जरा सोचो तो औफिस जाएगी लड़की,फिर बड़े-बड़े शहरों में लोग पार्टी करते हैं वहां जाएगी तो कहीं कुछ गलत न हो जाए.कुछ ऐसे ही सवाल और डर थे नेहा के सामने.लेकिन उसने भी ठान लिया था वो अपनी जिंदगी अपने मर्जी से ही जीएगी.
वो दिन था मार्च 2018 का जब नेहा को नौकरी मिली और उसे दिल्ली जाना था नौकरी के लिए.परिवार के आंखों में चिंता थी तो वहीं रिश्तेदारों के आंखों में शंका.अरे देखों तो उनकी बेटी दिल्ली जा रही है. कलयुग है कहीं ऐसा न हो कि मां-बाप की नाक कटा दें.जमाना बड़ा खराब है.
नेहा का परिवार ज्यादा धनी नहीं था,नेहा ने बहुत मेहनत की नौकरी के साथ-साथ वो अपने परिवार का ध्यान भी अच्छे से रखना जानती थी.देखते ही देखते नेहा के परिवार के हालात बहुत अच्छे हो गए और नेहा भी छुट्टियों में घर आती-जाती रहती थी.
एक बार नेहा घर आई हुई थी कि तभी उसके कुछ रिश्तेदार उसेक घर आए औऱ वही सवाल की अरे बेटा तू तो अकेले रहती है सब ठीक तो है न वहां कुछ गड़बड़ तो नहीं.इससे पहले कि वो कुछ और कहते नेहा समझ चुकी थी कि बस अब ये क्या कहने वाले हैं और क्या सोच रहें है.लेकिन नेहा ने सोच लिया कि आज तो उनको जवाब देना ही होगा.
नेहा ने कहा हां मैं एक लड़की हूं और मैं अकेले रहती हूं.हां मैं एक लड़की हूं मेरे मां-बाप को गर्व है मुझपर.हां मैं एक लड़की हूं.लेकिन अकेले रहने का ये मतलब नहीं की मैं बिगड़ गई या मैनें अपने परिवार की इज्जत डुबो दी.हां मैं एक लड़की हूं औऱ मैं भी एक लड़के की तरह अपने परिवार का ध्यान रख सकती हूं अकेले.मैं बाहर अकेले ही कब कुच हैंडल करती हूं.
मुझे कोई दिक्कत नहीं होती है वहां.और वहां पर मेरे कई दोस्त भी हैं जो हमेशा मेरी मदद करते हैं जरूरत पड़ने पर.हां मैं पार्टी में भी जाती हूं लेकिन अपनी मर्यादा पता है मुझे.अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीती हूं इसलिए अकेले रहती हूं. अपनी शर्तों पर जीती हूं जिंदगी इसलिए अकेले रहती हूं और हां ये सब करने के लिए मेरा एक लड़का होना जरुरी नहीं है मैं खुश हूं कि मैं एक लड़की हूं औऱ मैं बाहर अकेले रहती हूं.मैनें कोई गुनाह नहीं किया.
फेस्टिव सीजन में हम अपनी स्किन पर कई तरह के एक्सपेरिमेंट करते हैं, लेकिन कई बार ये हमारी स्किन को मैच नही करते. वहीं मेकअप की बात करें तो इन दिनों न्यूड मेकअप काफी ट्रेंड में हैं. न्यूड मेकअप यानी कम मेकअप. बौलीवुड की बात करें तो एक्ट्रेस आलिया भट्ट अक्सर न्यूड मेकअप में नजर आती हैं, जिसमें वह बेहद खूबसूरत नजर आती हैं. न्यूड मेकअप आप की स्किन को इवनटोन रखता है, जिस से चेहरा निखर कर सामने आता है. मेकअप बेस जितना न्यूट्रल होगा आप उतनी ही खूबसूरत लगेंगी. इसलिए आज हम आपको न्यूड मेकअप कैसे करें इसकी कुछ टिप्स बताएंगे.
1. चीक्स मेकअप पर ऐसे करें न्यूड मेकअप
टोनर है जरूरी: अपने चेहरे को फेस वाश से धो कर कौटन बौल को टोनर में भिगो कर उस से चेहरे को पोंछें. मेकअप से पहले जितना जरूरी फेस वाश करना होता है उतना ही जरूरी उस पर टोनर लगाना भी होता है. टोनर लगाने से चेहरे का मेकअप बरकरार रहता है और वह फैलता भी नहीं है.
फाउंडेशन का चयन: फाउंडेशन का चयन अपनी स्किन टोन के हिसाब से करना चाहिए. हमेशा अपनी स्किन से मैच करता फाउंडेशन ही चुनें. हर 5 साल में स्किन टोन बदलती है. यानी आपको हर 5 साल में अपनी स्किन टोन के अनुसार अलग फाउंडेशन की जरूरत होती है. इसी तरह फाउंडेशन लगाने के बाद इसे ब्रश से एकसमान करना चाहिए. ताकि स्किन पर एकसमान रंगत दे. फाउंडेशन अपने चेहरे के रंग से एक शेड हलका यूज करें. इस से चेहरा नैचुरल लगेगा. इस के साथ ही कौंपैक्ट भी फाउंडेशन के रंग का ही यूज करें.
कंसीलर पर हमेशा ध्यान दें: कंसीलर से चेहरे के दागधब्बों और मुंहासों को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही यह चेहरे पर दिखने वाली उम्र की रेखाओं को भी छिपाता है. इस का इस्तेमाल सिर्फ इन चीजों को छिपाने के लिए ही करें और स्किन कौंप्लैक्शन से मैच करता टू वे केक लगाएं. टू वे केक को शरीर के अन्य खुले भागों जैसे कि गरदन, पीठ, कानों एवं कानों के पीछे भी लगाएं.
ब्लशर: चीक्स पर दिन के समय रोजी ब्लशर यूज न करें. इसे रात में लगाएं और वह भी नाक से डेढ़ से 2 इंच की दूरी से लगाना शुरू करें. दिन में गुलाबी गालों पर खूबसूरती की छटा बिखेरने के लिए अपनी स्किन टोन से मैच करता बहुत ही लाइट ब्लश औन लगाना चाहिए. इस से मेकअप नैचुरल दिखता है.
आईशैडो: दिन में डार्क कलर का आईशैडो मेकअप को बहुत हैवी बना देता है, इसलिए हमेशा न्यूड या न्यूट्रल कलर का आईशैडो लगाएं. यह नैचुरल भी लगता है और क्लासी भी. मेकअप को नैचुरल दिखाने के लिए लाइट ब्राउन कलर से आंखों को डीप सैट कर के नैचुरल ब्राउन कलर का आईशैडो लगाएं. अगर आप को झुर्रियों की भी शिकायत है तो क्रीम आईशैडो इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. उस की जगह पाउडर आईशैडो का इस्तेमाल करें. यह आप के लिए काफी अच्छा रहेगा. शिमर आईशैडो का प्रयोग न करें. यदि आईब्रोज के नीचे हाईलाइट करना चाहती हैं, तो क्रीम कलर से हाईलाइट कर सकती हैं.
आईलाइनर या मस्कारा: सुबह के समय कोशिश करें आईलाइनर या मसकारा आंखों के ऊपर और नीचे एकसाथ न लगाएं. एक पतली सी आईलाइनर या काजल की रेखा खींच सकती हैं. डार्क कलर के आईलाइनर को आंखों की लोअरलिड में लगाने से बचें. इस से आंखें थकीथकी सी लगने लगती हैं. इन की जगह व्हाइट या न्यूड कलर के शेड्स का इस्तेमाल कर सकती हैं.
शेप डिफाइन करने के लिए आईलाइनर की जगह आईलैश ज्वौइनर का इस्तेमाल करें, क्योंकि यह दिखाई भी नहीं देता है और आंखों की शेप भी हाईलाइट करता है. आंखों में काजल जरूर लगाएं. इस से आंखें प्यारी और कजरारी दिखती हैं. लेकिन यदि पलकें हलकी हैं और आप उन्हें घना दिखाना चाहती हैं, तो लैशेज को आईलैश कर्लर से कर्ल कर लें. उस के बाद उन पर ट्रांसपैरेंट मसकारा का सिंगल कोट लगाएं.
आईब्रो पैंसिल: आईब्रो पैंसिल या आईब्रो कलर से आईब्रोज को शेप दे सकती हैं. आईब्रो पैंसिल हमेशा लाइट कलर की लें जो आप की आईब्रोज के कलर से हलकी हो. अगर आप बहुत गोरी हैं, तो शेड एक रंग गहरा होना चाहिए. आईब्रो पैंसिल्स कई रंगों में उपलब्ध हैं. वैक्स टच वाली पैंसिल लगाने में बहुत आसान होती है और नैचुरल लुक भी देती है.
अगर आप चाहती हैं कि आप की लिपस्टिक भी लंबे समय तक टिकी रहे तो इस के लिए लिपस्टिक लगाने से पहले कंसीलर का इस्तेमाल करना चाहिए. उस के बाद जिस रंग की लिपस्टिक लगाना चाहती हैं लगाएं, लेकिन उस से पहले लिप लाइनर से लिप्स पर आउटलाइन कर लें. ऐसा करने पर लिप्स काफी आकर्षक लगेंगे और लिपस्टिक भी लंबे समय तक टिकी रहेगी.
लिप्स नैचुरली पिंक हैं, तो उन पर केवल ट्रांसपैरेंट लिप ग्लौस लगाएं. अगर ऐसा नहीं है तो होंठों पर बहुत ही लाइट कलर जैसे कि बबलगम पिंक, पीच पिंक, लेस पिंक या कैमियो पिंक कलर की लिपस्टिक लगाएं. टिशू पेपर से ब्लौट कर लें और फिर ऊपर से हलका सा ट्रांसपैरेंट लिप ग्लौस लगा लें. इस से लिप्स नैचुरल पिंक एवं ग्लौसी नजर आएंगे.
मेहंदी लगाना हर किसी को पसंद होता है, लेकिन बात अगर फेस्टिवल पर मेहंदी लगाने की करें तो कोई पीछे नही रहता. आजकल मार्केट में कई तरह के डिजाइन पौपुलर हैं, जिसे आप इस दिवाली फेस्टिवल में ट्राय कर सकती हैं. आजकल के ट्रेंडी मेहंदी के डिजाइन आपके लुक पर चार चांद लगा देंगे. साथ ही आपके हाथों को और भी खूबसूरत बना देंगे. आइए आपको बताते हैं मेंहदी डिजाइन्स के कुछ खास औप्शन्स…
1. लंबे हाथों के लिए परफेक्ट है ये डिजाइन्स
अगर आपके हाथ लंबे हैं और उंगलियां बड़ी हैं तो ये डिजाइन आपके लिए परफेरक्ट औप्शन है. चेन पैटर्न के साथ मिक्स ये मिक्स मेहंदी डिजाइन आपकी लंबी उंगलियों को सिंपल, लेकिन खूबसूरत बनाएगा.
अक्सर छोटे हाथों पर कुछ मेहंदी के डिजाइन ऐसे होते हैं जो हमारे हाथों को खूबसूरत दिखाने की बजाय बेकार बना देता है. अगर आफके पास भी ऐसा होता है तो ये मेहंदी का डिजाइन आपके लिए परफेक्ट औप्शन है.
हाथों में मेहंदी लगाने की बात की जाए तो बेल बेस्ट औप्शन होता है. अगर आपको मेहंदी के कोई डिजाइन पसंद न आए तो बेल लगाना आपके लिए बेस्ट औप्शन साबित होगा. ये आपके लुक को बेस्ट सुक देगा.
आजकल ऐसे डिजाइन मार्केट में काफी पौपुलर है. अगर आप भी कुछ ऐसे ही डिजाइन ट्राय करना चाहते हैं तो ये डिजाइन आपके लिए परफेक्ट रहेगा. इस डिजाइन से आपका हाथ सिंपल दिखेगा उतना ही आपका लुक ट्रेंडी दिखेगा.
अगर आप अपने हाथों को खूबसूरत दिखाना चाहती हैं तो ये मेहंदी का डिजाइन आपके लिए बेस्ट औप्शन है. हाथों को भरने के लिए ये डिजाइन आपके लिए बेस्ट औप्शन साबित होगा.
सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ कि ‘कीर्ति’ यानी मोहिना सिंह शादी के बंधन में बंध चुकी हैं. एक्टिंग करियर से दूर मोहिना ने हरिद्वार में शादी की रस्में निभाईं. वहीं शादी में ये रिश्ता की टीम की बजाय बड़ी संख्या में मोहिना के फैंस नजर आए, लेकिन अपनी शादी में मोहिना के लुक और डांस ने फैंस को काफी एंटरटेन किया.आइए आपको दिखाते हैं मोहिना की रौयल वेडिंग की खास फोटोज…
कुछ इस लुक में नजर आईं मोहिना
रीवा की राजकुमारी मोहिना अपने वेडिंग लुक में बेहद खूबसूरत लग रही थीं. रौयल लुक में मोहिना रीवा की रौयल राजकुमारी से कम नही लग रही थीं.
जैसे ही मोहिना और सुयश ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई, वैसे ही पीछे खूब पटाखे बजने की आवाजें भी आई. मोहिना रीवा की राजकुमारी है और ऐसे उनकी शाही शादी तो होनी ही थी.
डांस रिएलिटी शो डांस इंडिया डांस में मोहिना अपने डांस का जादू पहले ही चला चुकी हैं. ऐसे में भला अपनी शादी पर मोहिना बिना डांस किए कैसे रह सकती थीं. यही वजह है कि, मोहिना कुमारी सिंह शादी के दिन भी खुद को डांस करने से नहीं रोक पाई और मोहिना ने लाल जोड़े में ही खूब ठुमके लगाए. इस दौरान मोहिना के साथ उनके पति सुयश रावत भी ताल से ताल मिलाते नजर आए.
मोहिना की शादी में एक्टर्स और एक्ट्रेस भी शामिल हुए, जिनके साथ वह काम कर चुकी हैं. वहीं मोहिना के साथ रिएलिटी शो में साथ रह चुके कुछ कोरियोग्राफर भी नजर आए.
कौमेडी किंग कहे जाने वाले कपिल शर्मा जल्द ही पापा बनने वाले हैं, जिसे वह काफी इन्जौय कर रहे हैं. हाल ही में हमने कपिल और उनकी वाइफ गिन्नी चतरथ के बेबी हनीमून की कुछ वायरल फोटोज दिखाई थी, वहीं अब गिन्नी के बेबी शावर की फोटोज भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ है. आइए आपको दिखाते हैं गिन्नी की वायरल फोटोज…
कपिल ने वाइफ के लिया ये
कपिल शर्मा ने हाल ही में अपनी वाइफ गिन्नी के लिए बेबी शावर पार्टी रखी, जिसकी खुशी उनके फेस पर साफ झलक रही थी. वहीं पति कपिल के इस सरप्राइज की खुशी गिन्नी की फोटोज से साफ दिख रही है.
कपिल अपनी वाइफ के लिए हर मोमेंट को स्पेशल बनाने के लिए खूब मेहनत कर रहे हैं. वाइफ गिन्नी की बेबी शावर पार्टी में कपिल ने कई सेलेब्स को इनविटेशन दिया. साथ ही उनके द कपिल शर्मा शो के उनके को-स्टार्स भी इस पार्टी में मौजूद रहे. सभी ने इस दौरान खूब मस्ती की.
कपिल शर्मा अभी से अपने शो के शूटिंग शेड्यूल की प्लानिंग कर रहे हैं ताकि वो गिन्नी की डिलीवरी के वक्त उनके साथ टाइम स्पेंड कर सकें. खबर के मुताबिक, गिन्नी की ड्यू डेट दिसंबर के मिड में है तो कपिल अभी से प्लानिंग कर रहे हैं ताकि शो की शूटिंग पर असर ना पड़े. वो उस हिसाब से सेलेब्स के इंटरव्यू लेंगे कि काम भी हो जाए और वो अपने परिवार और होने वाले बेबी के साथ टाइम स्पेंड कर सकें.
इतना ही नहीं, कपिल ने हाउसफुल 4 की कास्ट अक्षय कुमार और बाकी स्टार्स के साथ, सांड की आंख की कास्ट और मेड इन चाइना की स्टार कास्ट के साथ अपना शे़ड्यूल प्लान कर रहे हैं.
बता दें, गिन्नी और कपिल की शादी के बाद से कपिल की शोहरत एकबार फिर बरकरार है. वहीं टीआरपी चार्ट में भी कपिल का शो नंबर 1 पर बरकरार है.
स्टार प्लस के सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में इन दिनों नए-नए ट्विस्ट फैंस को एंटरटेन कर रहा है. ‘नायरा और कार्तिक’ के बीच ‘कायरव’ की कस्टडी के चलते नए-नए राज खुलते नजर आ रहे हैं. ‘कार्तिक’ की वकील जहां ‘नायरा’ को किडनैप कर चुकी है. वहीं अब ‘कार्तिक’ की वकील ने ‘नायरा’ का एक नया राज खोला है, जिसके कारण ‘कार्तिक’ ‘कायरव’ की कस्टडी लेने पर अड़ गया है. आइए बताते हैं क्या होगा शो में आगे…
‘कार्तिक की वकील’ का ‘नायरा’ पर वार
‘कार्तिक की वकील’ केस जीतने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है. आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि ‘वकील’ ‘नायरा’ के ‘कायरव’ को अबौर्ट कराने का सच कोर्ट में बता देती है.
अपकमिंग एपिसोड़ में आप देखेंगे कि किस तरह ‘नायरा’ के अबौर्शन की बात कर ‘कार्तिक’ हैरान हो जाएगा और ‘कायरव’ की कस्टडी लेने के लिए किसी भी हद तक चला जाएगा.
अबौर्शन की बात पता लगने के बाद ‘नायरा और कार्तिक’ के बीच लड़ाई होगी. वहीं ‘कार्तिक और नायरा’ को लड़ाई करता देख ‘कायरव’ भाग जाएगा और भागते हुए वह सीढ़ियों से गिर जाएगा पर उसे ज्यादा चोट नही आएगी.
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हाल ही में हमने आपको ‘वेदिका’ के एक्स हस्बैंड के बारे में बताया था, लेकिन अब खबर है कि ‘नायरा’ को ‘वेदिका’ का ये सच पता चल जाएगी, जिसके बाद वह घर के सभी लोगों को ‘वेदिका’ का सच बता देगी.
‘वेदिका’ के एक्स हस्बैंड की सच्चाई ‘नायरा’ ‘कार्तिक’ को बताएगी तो ‘कार्तिक’ गुस्से में आकर ‘वेदिका’ को घर से बाहर निकाल देगा. वहीं अब देखना ये होगा कि अबौर्शन के बारे में जानने के बाद क्या ‘कार्तिक’ ‘नायरा’ को माफ कर पाएगा और दोनों के बीच क्या दोबारा रोमांस शुरू होगा.
पिछले दिनों दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडैंट्स यूनियन यानी डूसू इलैक्शंस हुए तो बहुमत में लड़कों की भागीदारी तो हमेशा की तरह ही थी लेकिन प्रैसिडैंट पोस्ट के लिए कांग्रेस से जुड़े नैशनल स्टूडैंट्स यूनियन औफ इंडिया (एनएसयूआई), औल इंडिया डैमोक्रेटिक स्टूडैंट्स और्गेनाइजेशन और औल इंडिया स्टूडैंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने चेतना त्यागी, रोशनी और दामनी कैन को मैदान में उतारा. हालांकि ये तीनों यह इलैक्शन जीत नहीं पाईं लेकिन उन का जज्बा और राजनीति में लड़कों के कदम से कदम मिला कर चलना काबिलेतारीफ रहा. प्रैसिडैंट न सही लेकिन जौइंट सेक्रेटरी पद पर एनएसयूआई की शिवांगी खरवाल ने बाजी मार ही ली. शिवांगी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडैंट्स यूनियन की जौइंट सेक्रेटरी बन कर लड़कियों के लिए राजनीति की राह प्रशस्त कर दी है. परंतु राजनीति की राह उतनी आसान नहीं जितनी कि वह दिखती है, खासकर लड़कियों के लिए.
‘‘मैं ने जब 20 साल की उम्र में कालेज की राजनीति में कदम रखा तब मुझे सत्ता और ताकत का पहली बार एहसास हुआ. मेरा रुझान यों तो खेल और संगीत में था लेकिन जब मुझे अपने कालेज के प्रिंसिपल और शिक्षकों की तरफ से छात्रसंघ के प्रौक्टर का पद दिया गया तो मैं ने इस मौके को छोड़ा नहीं. सैकंड ईयर प्रौक्टर के पद से छात्रसंघ के अध्यक्ष बनने तक के सफर में मुझे मानसिक तनाव, निराशा और हताशा का भी कई बार सामना करना पड़ा.’’
यह कहना है दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कालेज की पूर्व छात्रा अध्यक्ष कोमल प्रिया सिंह का. कोमल को राजनीति की कोई खास समझ नहीं थी. लेकिन जब उन्हें इस से जुड़ने का मौका मिला तो उन्होंने न सिर्फ इस में दिलचस्पी दिखाई बल्कि प्रौक्टर के पद से छात्र अध्यक्ष तक का सफर भी निडरता से तय किया. इस सफर में उन्हें वाहवाही और सफलता तो मिली लेकिन कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा.
कोमल अकेली ऐसी लड़की नहीं है जिस ने बहुत ही कम उम्र में कालेज की राजनीति में कदम रखा. ऐसी सैकड़ों लड़कियां हैं, जो 20 साल से भी कम उम्र में राजनीति के रास्तों पर निकलीं और इतनी आगे निकलीं कि देश ही नहीं, विदेशों तक में अपने नाम का परचम लहराया. सुषमा स्वराज, अलका लांबा, जोथिमनी सैन्नीमलाई अगाथा संगमा, वृंदा करात, प्रियंका गांधी जैसी राजनीतिक हस्तियों ने बहुत ही कम उम्र से राजनीति की गहराइयों को समझा. परंतु लड़कियों के लिए चुनाव में सफलता के बाद भी मुश्किलें कम नहीं होतीं. संघर्ष कार्यकाल तक चलता रहता है.
चुनौतियां कम नहीं
ऊंचेऊंचे नारों के शोरगुल में जब लड़कियों की आवाज भीड़ से नहीं, बल्कि उम्मीदवारों के खेमे से आ रही हो तो सभी की नजरें उन पर टिक जाती हैं. कारण कई होते हैं, कोई उन्हें सम्मान की नजर से देखता है तो कोई हीनता की. ‘लड़कियों की जगह ब्यूटीपार्लर में बैठ कर मैनीक्योर कराने की है, चुनाव में पसीना बहाने की नहीं’ जैसे वाक्य खुद प्रैसिडैंट पद के उम्मीदवार लड़कों के मुंह से सुनने को मिल जाते हैं. और केवल डूसू ही क्यों, सामान्य कालेज स्टूडैंट्स यूनियन इलैक्शंस में भी लड़कियों की भागीदारी है तो सही मगर लड़कों से कम. इस भागीदारी का अनुपात कभी लड़कियों के पक्ष में नहीं रहा. इस की कई वजहें हैं, मातापिता की तरफ से सपोर्ट न होना, पढ़ाई का बीच में आना, समय न होना, राजनीति को खिन्नता से देखना, प्रोफैसरों का लड़कियों को राजनीति से दूर रहने की सलाह देना, खुद दोस्तों का साथ न मिल पाना आदि. यानी कालेज राजनीति में लड़कियां हैं तो जरूर मगर उतनी नहीं जितनी होनी चाहिए. इन सभी के लिए चुनाव जीतने के बाद भी चुनौतियां कम नहीं होतीं.
जिम्मेदारियों का बढ़ना
छात्रसंघ से जुड़ कर केवल नारेबाजी और प्रचार ही नहीं करने पड़ते, छात्रों की समस्याओं को ले कर प्रबंधन से ले कर डीन, प्रिंसिपल और कालेज प्रशासन तक को संभालना पड़ता है. कई बार जब छात्रों की मांग और उन की परेशानियों का हल नहीं निकलता तो उस के लिए धरनाप्रदर्शन और दूसरे तरीके आजमाने पड़ते हैं. ऐसे में एक लड़की होने के नाते परेशानियां बढ़ती ही हैं. घंटों पार्टी, मीटिंग और कालेज प्रबंधन के साथ चर्चा करनी पड़ती है, समस्या का समाधान निकालना पड़ता है.
असुरक्षा की भावना
राजनीति जैसी जगह पुरुषों से भरी पड़ी है. वहां किसी लड़की का होना और उस पर भी अगर उस का दबदबा हो तो वह बहुत से पुरुष साथियों की नजर में खटकती भी रहती है.
भारतीय जनता पार्टी में कला संस्कृति की मीडिया प्रभारी और पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकीं वीणा बेनीपुरी प्रसिद्ध कवि रामवृक्ष बेनीपुरीजी की बहू हैं. वीणा बेनीपुरी ने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसी कई परिस्थितियों का सामना किया है. तब पार्टी के अन्य पुरुष सदस्यों को उन का आगे आना खटकता रहा. यहां तक कि उन की छवि को धूमिल करने का भी प्रयास किया गया. उन का नाम पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ गलत तरीके से भी जोड़ा गया.
इसी तरह की चीजें कालेज राजनीति में भी देखने को मिलती हैं. लड़के बाकायदा लड़कियों को धमकियां देते हैं, गालीगलौज की कोशिश करते हैं और उन्हें इलैक्शन में भाग लेने के साथसाथ जीतने पर पद त्यागने तक की नसीहतें देते फिरते हैं.
कालेज जाते तो पढ़ाई करने ही हैं लेकिन जब समाजसेवा की भावना से प्रेरित हो कर और छात्राओं के हक, सुविधा और सुरक्षा के लिए कालेज राजनीति से जुड़ना होता है, तो पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे पाना मुश्किल हो जाता है. आप को हमेशा ही छात्रों के बीच रहना होता है, उन की परेशानियां सुननी पड़ती हैं, पार्टी, मीटिंग या कालेज प्रशासन की तरफ से बुलाई गई बैठक में शामिल होना पड़ता है. कालेज में होने वाले इवैंट्स या खेल आयोजन को ले कर प्रबंधन करना होता है. इन सब के बीच पढ़ाई और नियमित रूप से क्लास लेना मुश्किल होता है. टौपर छात्राएं भी राजनीति में आ कर पढ़ाई से दूर होने लगती हैं और उन के ग्रेड्स लगातार गिरते जाते हैं.
परिवार की तरफ से रोकटोक
राजनीति भले ही कालेज की हो लेकिन परिवार के लिए वह देश की राजनीति से कम नहीं होती. उन के लिए अपनी बेटी की सुरक्षा हमेशा ही सर्वोपरि रहती है. जिन का पारिवारिक माहौल राजनीति का रहा हो उन्हें तो परिवार का पूरा साथ मिलता है, लेकिन जिन का राजनीति से दूरदूर तक संबंध नहीं होता वे अपनी बेटियों को इस में भेजने से डरते हैं. उन्हें कालेज के काम से बेटी का हर समय टैंशन में रहना, रातरातभर काम में उलझे रहना, अच्छेबुरे हर तरह के व्यक्ति से संबंध रखना अखरता है. यही कारण है कि वे उस पर रोकटोक लगाने लगते हैं. कोमल को भी अपने इस फैसले के लिए अपने परिवार से कुछ अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली थी. लेकिन धीरेधीरे कोमल ने उन्हें समझा लिया.
दोस्ती में बदलाव
कालेज की कैंटीन में दोस्तों के बीच फैशन, रिलेशनशिप, सैक्स और हलकीफुलकी गौसिप की जगह जब छात्रदल की मांगों, अधिकारों और राजनीति जैसे गंभीर मुददों पर बातें होने लगें तो दोस्तों की कैटेगरी बदल जाती है. आप के साथ राजनीतिक सोच और समझ वाले लोग जुड़ जाते हैं. सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने दल और उन से जुड़े राजनीतिक विचारों के पोस्ट डालने के लिए करने लग जाते हैं. फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर का प्रयोग छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाने लगता है. ऐसे में जहां दोस्तों के बीच मनमुटाव पैदा होने लगते हैं वहीं यदि कुछ दोस्त अलगअलग पार्टियों से इलैक्शन लड़ते हैं तो उन की दोस्ती टूटना लगभग स्वाभाविक होता है.
‘‘तू ये इलैक्शन मत लड़, लड़ेगा तो तू मेरा दोस्त नहीं.’’
‘‘मैं क्यों पद छोड़ूं, तू भी तो छोड़ सकता है.’’
इन्हीं बातों के बीच दोस्त आगे निकल जाते हैं और दोस्ती पीछे छूट जाती है. यह टूटी हुई दोस्ती इलैक्शन खत्म होने के बाद भी कभी पहले जैसी नहीं होती, खासकर हारे हुए दोस्त की तरफ से.
निजी जीवन में परेशानियां
राजनीति जीवन का एक ऐसा पहलू है, जिस से जुड़ने के बाद जिंदगी आम जिंदगी नहीं रह जाती. कोमल को भी अपनी निजी जिंदगी में अपने छात्र राजनीतिक जीवन का असर साफ दिखाई देता है. आप का एक आम लड़की की तरह दोस्तों के साथ घूमना और मस्ती करना बंद जैसा हो जाता है. अपने पहनावे को ले कर सजग होना पड़ता है. ऐसा न हो कि आप ने कुछ ऐसा पहन लिया जिस के लिए विरोधी दल के सदस्य आप के चरित्र को ही निशाना बना डालें. कालेज में तो होता भी यह है कि यदि आप पहले की तरह क्लास बंक करते हैं तो केवल आप के ही नहीं, बल्कि कालेज के बाकी सभी प्रोफैसर्स की नजरों में आप आ जाते हैं. आप के द्वारा कही गई एकएक बात पत्थर की लकीर बनने लगती है. निजी जीवन में चाहे आप ने अपने मातापिता को खुद से ऊंची आवाज में बात न करने दी हो लेकिन अब कालेज में स्टूडैंट्स का प्रतिनिधि होने के नाते आप को सभी के ताने भी सुनने पड़ते हैं और उपहास भी झेलना पड़ता है.
मुझे अच्छे से याद है जब मेरे कालेज में एनुअल फैस्ट के समय सैलिब्रिटी नहीं आया था तो स्टूडैंट्स ने प्रैसिडैंट की सरेआम धज्जियां उड़ा दी थीं. वह कालेज आ कर शक्ल दिखाना तो दूर, क्लासेज तक अटैंड नहीं कर पाता था. प्रैसिडैंट भी क्या, कालेज की आर्ट रिप्रिजैंटेटिव एक शांत स्वभाव की लड़की थी, वह पूरे डिपार्टमैंट की जिम्मेदारी खुशी से निभाती थी, लेकिन इलैक्शन जीतने के बाद जब वह अपने स्वभाव के अनुसार एक कोने में किताब ले कर बैठी रहती थी तो उस के खुद के दोस्त तक यह कहते फिरते थे कि वह बदल चुकी है, उस में घमंड आ गया है. इन शौर्ट, उसे अपनी निजी लाइफ अपनी शर्तों पर जीने के लिए भी जवाबदेह होना पड़ता था.
हालांकि कालेज राजनीति में अनेक चुनौतियां हैं लेकिन उस का मजा भी कुछ कम नहीं. यह लड़कियों की पहचान को बदल कर रख देती है. ऐसी कितनी ही लड़कियां हैं जो एक समय में बेहद शांत रहा करती थीं लेकिन कालेज राजनीति में उतरने और जीतने के बाद से उन के आत्मविश्वास में तेजी से बढ़ोतरी हुई. जीतना भी दूर की बात है, केवल कैंपेनिंग के बाद भी लड़कियों में भीड़ से लड़ने, सैकड़ों की भीड़ में आवाज उठाने का साहस आ जाता है. यह कोई छोटी बात नहीं है.
एक महिला उम्मीदवार होने के नाते आप के दल के पुरुषसाथी भी आप के साथ खड़े होते हैं. आप के साथ हमेशा कुछ ऐसे पार्टी सदस्य होते हैं जो इस बात का बेहतर ध्यान रखते हैं कि कोई दूसरा आप के साथ दुर्व्यवहार न करे या आप का नाम खराब न करे. विपक्षी दल आप की छवि बिगाड़ने का प्रयास करते रहते हैं. ऐसे में एक लड़की जब छात्र अध्यक्ष या फिर पार्टी में किसी मुख्य भूमिका में होती है तो उस की सुरक्षा का ध्यान ऐसे ही कुछ राजनीतिक मित्र रखते हैं जो भरोसेमंद होते हैं.
ताकत किसे अच्छी नहीं लगती. एक आम लड़की या छात्रा होने पर आप की मांगों को अहमियत नहीं दी जाती लेकिन जब आप के पास राजनीतिक ताकत होती है, तो सभी आप की बात को सुनते भी हैं और उस पर ठोस कदम भी उठाए जाते हैं. युवतियों और महिलाओं को हक और सम्मान के लिए आवाज उठाने की ताकत मिल जाती है. यूनिवर्सिटी में छात्राध्यक्ष के पास एक अच्छाखासा वोटबैंक होता है. उस वोटबैंक के कारण राज्य के विधायक और मंत्रियों का समर्थन भी मिलने लग जाता है. इस से आप को राज्य की राजनीति से जुड़ने का मौका भी मिलता है.