“मेरे कुत्ते को भी आपका ऑफर मंजूर नहीं”

बात उन दिनों की है जब राज कुमार बड़े स्टार तो नहीं रह गए थे लेकिन उनका बिंदासपन और एटीट्यूड ज्यों का त्यों था. 1993 में उनकी ‘इंसानियत का देवता’ और ‘पुलिस और मुजरिम’ जैसी फिल्में टिकट खिड़की पर औसत व्यवसाय कर पाई थीं.

एक दिन उनके दोस्त और निर्देशक रामानन्द उनसे मिलने आए. रामानन्द सागर और राज कुमार में अच्छी दोस्ती थी और राज कुमार रामानन्द सागर की जिंदगी और पैगाम जैसी फिल्मों में काम भी कर चुके थें.

सागर ने राज कुमार से कहा कि वो चाहते हैं कि राजकुमार ‘आखें’ का लीड रोल करें. सागर इस रोल के लिए राज को दस लाख रुपए देने के लिए तैयार थे.

सागर का प्रस्ताव सुनकर राज कुमार कुछ पल के लिए शांत रहे और कुछ सोचते रहे. सागर आश्वस्त थे कि राज कुमार उनके दोस्त हैं और उन्हें इनकार नहीं करेंगे. कुछ पल शांत रहने के बाद राज कुमार ने ड्राइंगरूम के पास घूम रहे अपने कुत्ते को आवाज लगाई. कुत्ता राज कुमार के पैरों में आकर बैठ गया.

उन्होंने सिगार पीते हुए कुत्ते से कहा ‘जानी, तुम्हें क्या लगता है कि सागर साहब का ऑफर स्वीकार करना चाहिए या नहीं’ कुत्ता कुछ पल राज कुमार का मुंह ताकता रहा और फिर गर्दन हिलाहिला कर भौंकने लगा. सागर अचंभे में थे कि राज कुमार साहब कर क्या रहे हैं. कुत्ते के भौंकने के बाद राज कुमार सागर जी की तरफ मुखातिब हुए और कहा, ‘देखिए सागर जी, मेरा कुत्ते को भी आपका ऑफर मंजूर नहीं है, ऐसे में मेरे हां करने का सवाल ही पैदा नहीं होता’.

सागर जी को बहुत अपमानित महसूस हुआ लेकिन वो करते भी क्या, राज कुमार अपनी बेबाकी और एटीट्यूड के चलते पूरे बॉलीवुड में मशहूर थें. वो बिना कुछ कहे अपना सा मुंह लेकर लौट आए. लौटने के तुरंत बाद उन्होंने पहला काम किया कि धर्मेंद्र को फिल्म के लिए साइन किया और फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी.

अपनी खूबसूरती में लगाएं चार चांद

सिर्फ चाहने से सब कुछ नहीं मिलता, अगर आपको हमेशा सुंदर दिखना है तो, आपको अपना विशेष ख्याल भी रखना होगा. आज अगर आप किसी से भी पूछें कि क्या वे हमेशा सुंदर दिखना चाहती हैं तो जवाब कभी ना में नहीं होगा.

अपने खाने पीने का ध्यान रख आप अपने शरीर को स्वस्थ और सुंदर बना सकती हैं लेकिन अपनी थकी और बेजान हुई त्वचा के लिए आप क्या करेंगी. सुबह से लेकर शाम तक ऑफिस में काम करना या फिर घर के काम करते रहने से आपके शरीर के साथ-साथ आपकी त्वचा भी थक जाती है जिसे आराम की सख्त जरूरत होती है ताकि वह हमेशा सुंदर बनी रहे.

अगर आप वाकई अपनी सुंदरता में चार चांद लगाना चाहती हैं  तो रोजाना सोने जाने से पहले इन खास निर्देशों का पालन करें :

रात को सोने से पहले हल्दी दूध पिऐं

हल्दी वाला दूध पीने के कई सारे फायदे होते हैं. जब आप हल्दी वाला दूध सोने से पहले पिऐंगे तो आपको ना सिर्फ अच्छी नींद आया करेगी बल्कि हल्दी वाले दूध आपके शरीर से जहरीले पदार्थों को भी बाहर निकाल देगा और खून को भी साफ करने में मदद करेगा. ये आदत डालने से आप पहले से ज्यादा निखर जाएंगी.

करें आंखों की मसाज

सारा दिन आपकी आंखें बहुत कुछ देखती हैं और साथ ही दिनभर की धूल मिट्टी को भी सहती हैं, ऐसे में आंखों का ख्याल रखना भी बहुत जरूरी हो जाता है. इस बात पर खासा ध्यान दें कि आप तकिये पर अपना सर सीधा रखकर ही सोया करें ताकि शरीर का तरल पदार्थ कहीं एक जगह जमा न हो जाए, अगर ऐसा होता है तो अगले दिन आपकी आंखें सूजी हुई नजर आती हैं. इसके अलावा सोने से पहले रोज अपनी आंखों की चारों तरफ से क्रीम से मसाज़ करनी चाहिए, इससे आंखें और आपका चेहरा दोनों स्वस्थ्य बना रहेगा.

रात को ब्रश करना हरगिज ना भूलें

यह सोच आपकी गलत है कि सिर्फ सुबह ही ब्रश करना चाहिए. यह बात भी बहुत जरूरी है कि आप सोने से पहले भी ब्रश करें, क्योंकि रात में हम खाना खाते हैं और खाकर सो जाते हैं तो के बीच में कीटाणु अपना घर बना लेते हैं और दांतों को सड़ा देते हैं. यह बात आपके स्वस्थ दांत और आपकी खूबसूरत सी स्माइल के लिए बहुत दर्दनाक है.

बालों को सुलझा कर ही सोऐं

कभी भी सोने से पहले अपने बालों को सुलझाना ना भूले. अपने बालों पर अच्छे से कंघी करें और ढीली चोटी भी बना लें. रोज ऐसा करने से आपके बाल हमेशा अच्छे रहेंगे.

अपनी बॉडी को करें मॉस्चुराइज

सोने से पहले और हो सके तो नहाने के बाद सिर्फ अपने चेहरे पर नहीं बल्कि पूरे शरीर पर लोशन या नारियल तेल लगाकर मॉस्चुराइज करें. इससे आपकी त्वचा हसेशा दमकती रहेगी और इसकी नमी हमेशा कायम रहेगी.

हो सके तो सोने से पहले नहाऐें

आप रोज़ सोने से पहले जरूर नहाएं. ऐसा करने से आपके शरीर में मौजूद दिनभर की सारी गंदगी साफ हो जाएगी और दिनभर के बाद रोमछिद्र के खुलने से आपकी त्वचा सांस भी ले सकेगी. आप ऐसा भी कर सकती हैं कि नहाने के पानी में दो चम्मच शहद और पांच चम्मच दूध मिलाकर नहाएं. इससे आपका शरीर कोमल होगा. अगर ठंड के मौसम में रात में नहाना मुमकिन ना हो पाए, तो आप गर्म पानी में तौलिये को भिगोकर पूरे शरीर को अच्छे से पोंछ भी सकती हैं.

क्रेडिट कार्ड पर बैंक नहीं बताते फायदे की ये 5 बातें

भारत में क्रेडिट कार्ड का प्रचलन तेजी से बढ़ता जा रहा है. ऑनलाइन शॉपिंग हो या रिटेल स्‍टोर से खरीदारी, रेस्‍टोरेंट से लेकर मूवी के टिकट के लिए हम धड़ल्‍ले से क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल करते हैं. यदि आपके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है, तो आपके पास कार्ड के लिए दिन भर में दो से तीन फोन आ जाते हैं. वहीं यदि आपके पास कार्ड है तो दूसरी कंपनी के कार्ड, अपनी ही कंपनी का एडिशनल कार्ड जैसे लुभावने ऑफर भी मिलते हैं. लेकिन बैंक कई बार क्रेडिट कार्ड से जुड़ी कुछ महत्‍वपूर्ण शर्तें आपसे छिपा जाते हैं.

फ्री ईएमआई स्‍कीम लेने से पहले जान लें शर्तें

अक्‍सर बैंक अपने प्रिविलेज कस्‍टमर्स को फ्री ईएमआई या फिर क्रेडिट कार्ड पर जीरो परसेंट पर ईएमआई का वादा करते हैं. लेकिन बैंक शायद ही आपको जीरो ईएमआई से जुड़ी शर्तों को पढ़ने या समझने का समय देते हैं. आपको मालूम होना चाहिए कि जीरो प्रतिशत ब्याज पर ईएमआई पर नियम एवं शर्तें लागू होती हैं. अगर एक भी शर्त का उल्लंघन करते हैं तो 5 या 10 नहीं बल्कि 20 प्रतिशत से भी ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है.

समय पर करा लें अपने प्‍वाइंट रिडीम्‍ड

बैंक आपको कभी भी खुद से नहीं बताता है कि आप अपने प्वाइंट्स को कैसे रिडीम कर सकते हैं. ऐसे में जानकारी न होने से लाखों प्वाइंट्स पड़े रह जाते हैं और क्रेडिट कार्ड एक्सपायर हो जाता है. इसके अलावा जब आपके प्वाइंट्स 1000 से 10,000 जैसे लैंडमार्क को क्रॉस करते हैं तब बैंक आपको ये नहीं बताता कि आपके इतने प्वाइंट हो गए हैं और आप उन्हें रिडीम कर कैशबैक लाभ ले सकते हैं.

ड्यू डेट का रखें ध्‍यान

आपने अक्सर देखा होगा कि आपको मोबाइल बिल भरना हो तो टेलीकॉम कंपनियां लगातार एसएमएस भेजती हैं. वहीं बैंक भी आपको मिनिमम बैलेंस के लिए रिमाइंडर भेजती हैं. लेकिन क्रेडिट कार्ड के बिल को जमा करने के लिए आपके पास कोई मैसेज नहीं आता. वास्‍तव में देखा जाए तो बैंक खुद नहीं चाहते कि आप समय पर बिल जमा कर दें. ऐसे में आप खुद ही अपनी ड्यू डेट का ख्‍याल रखें. बैंक तो यही चाहते हैं कि आप लेट करें और बाद में लेट फीस भरें.

फ्री में कार्ड अपग्रेड का लगता है वार्षिक शुल्क

बैंक आपको अक्‍सर कार्ड अपग्रेड करने का ऑफर देते हैं. अक्‍सर बैं‍क की एक्‍जीक्‍यूटिव आपको फ्री ऑफ कॉस्ट अपने सिल्वर कार्ड को गोल्ड में और गोल्ड को प्लेटिनम में अपग्रेड करवाने का लालच देते हैं. लेकिन ये नहीं बताते कि नए क्रेडिट कार्ड के लिए आपको 500 रुपए से लेकर 700 रुपए तक का शुल्क भी देना पड़ेगा.

लिमिट बढ़ने से भी बढ़ता है वार्षिक शुल्क

क्रेडिट कार्ड धारकों को अक्सर एक कॉल आती है कि आपके क्रेडिट कार्ड की क्रेडिट लिमिट मुफ्त में बढ़ाई जा रही है. बैंक आपको प्रिविलेज कस्‍टमर मानते हुए आपकी लिमिट को दो गुना या इससे अधिक कर देता है. यहां आपसे आपकी सहमति भी नहीं मांगी जाती. लेकिन बैंक आपको कभी ये नहीं बताता कि इसके बाद आपका वार्षिक शुल्‍क बढ़ जाएगा.

जब काजोल ने अजय के लिए गंवाई दोस्ती

हाल ही में खबर आ रही थी की करण और काजोल की दोस्ती टूट चुकी है. अब उन दोनों के बीच पहले जैसा संबंध बिल्कुल भी नहीं है. खबरों की मानें तो इन सब का कारण अजय देवगन हैं.

न सिर्फ करण जोहर से बल्कि अन्य सेलेब्रिटीज से भी काजोल को अपने पति के विवाद के कारण दोस्ती तोड़नी पड़ी है. उन्होंने हमेशा अपने पति का साथ दिया. आइए जानते हैं कब कब काजोल ने अजय के लिए अपनी दोस्ती गंवाई है.

करण जोहर

काजोल और करण बॉलीवुड में अपनी दोस्ती के लिए मशहूर थे. लेकिन अजय की खातिर काजोल ने करण से दूरी बना ली. पिछले साल जब अजय और करण के बीच बयानबाजी हुई तो काजोल ने पति का साथ दिया. इसी के साथ करण से उनकी दोस्ती खत्म हो गई. इसके बाद ‘ऐ दिल है मुश्किल’ व ‘शिवाय’ के क्लैश ने इनकी रही-सही दोस्ती की उम्मीद भी तोड़ दी. ऑडियो क्लिप से जुड़े विवाद के बाद करण ने बायोग्राफी में कहा कि वे काजोल से दोस्ती जारी नहीं रख सकते.

अक्षय कुमार-अजय देवगन विवाद

अजय और अक्षय के बीच अबोला 2005 में आई दोनों की फिल्म ‘इंसान’ के समय से है. अजय को लगता था कि अक्षय के कारण फिल्म में उनका रोल काटा गया है. दोनों के इस विवाद में भी काजोल ने अजय का साथ दिया. उन्होंने 1994 में आई ‘ये दिल्लगी’ के बाद अक्षय के साथ कोई फिल्म नहीं की थी, लेकिन दोनों की दोस्ती बरकरार रही. बाद में जब अक्षय ने अजय को ‘सन ऑफ सरदार’ टाइटल दिया तो दोनों के बीच पैचअप हो गया.

शाहरुख खान

अजय और शाहरुख का झगड़ा तब शुरू हुआ था, जब फिल्म ‘करण-अर्जुन’ में दोनों एक ही भूमिका निभाने को लेकर आमने-सामने हो गए थे. बाद में शाहरुख को ये रोल मिला और अजय से उनकी दुश्मनी हो गई. 2014 में दोनों के बीच उस समय पैचअप हो गया, जब शाहरुख ‘सिंघम रिटर्न्स’ के सेट पर आकर अजय से मिले. लेकिन ‘जब तक है जान’ और ‘सन ऑफ सरदार’ के क्लैश के बाद दोनों के बीच फिर विवाद हो गया. 2015 में बुल्गारिया में फिर दोनों एक हो गए.

आदित्य चोपड़ा

अजय की ‘सन ऑफ सरदार’ और यशराज बैनर की ‘जब तक है जान’ जब आपस में क्लैश हुईं तो अजय ने कोर्ट में केस फाइल कर दिया था. उन्होंने आद्त्य पर सभी मल्टीप्लेक्स हथियाने का आरोप लगाया था. इस विवाद में काजोल भी आदित्य चोपड़ा के खिलाफ हो गईं. नतीजा ये हुआ कि ‘जब तक है जान’ के प्रीमियर में यशराज बैनर के साथ काम करने वाली सभी अभिनेत्रियों को बुलाया गया, लेकिन इसमें काजोल का नाम नहीं था. बाद में 2014 में अजय और आदित्य का पैचअप हुआ.

कई कहानियों का मिश्रण है अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘फिल्लौरी’

मशहूर अदाकारा अनुष्का शर्मा की बतौर निर्माता ‘‘एन एच 10’’ के बाद अब दूसरी फिल्म ‘‘फिल्लौरी’’ 24 मार्च को प्रदर्शित होने वाली है. ‘एच 10’ की ही तरह ‘‘फिल्लौरी’’ में भी अनुष्का शर्मा ने स्वयं अभिनय भी किया है. फिल्म ‘‘फिल्लौरी’’ का ट्रेलर आने के बाद चर्चाएं गर्म है कि यह फिल्म दो फिल्मों की कहानियों का मुरब्बा है. यह दो फिल्में है-जॉनी दीप अभिनीत हौलीवुड फिल्म ‘‘कॉर्पस ब्राइड’’ और पंजाबी फिल्म ‘‘सरदार जी’’.

इस तरह की चर्चाओं की अपनी वजहें हैं.फिल्म ‘‘फिल्लौरी’’ के ट्रेलर के आने के बाद इस फिल्म की जो कहानी उजागर होती है, उसके अनुसार फिल्म ‘‘फिल्लौरी’’ में सूरज शर्मा एक मांगलिक लड़के के किरदार मे हैं. जिन्हें मजबूर अपने माता पिता की पसंद की लड़की से विवाह करने से पहले एक पेड़ के साथ विवाह करना पड़ता है. इसी के चलते उसे अनुष्का शर्मा के भूत से विवाह करना पड़ता है. खैर, उन्हें भूत की अतीत की कहानी पता चलती है और फिर उसे हल करने का प्रयास होता है. जिससे हर बात सही हो जाए.

जबकि टिम बर्टन्स निर्देशित हॉलीवुड फिल्म ‘‘कॉर्पस ब्राइड’’ में विक्टर(जॉनी दीप) को विक्टोरिया (इमिली वॉटसन) से शादी करनी है. पर जंगल में अपनी प्रतिज्ञा को पूरी करने के लिए वह सगाई की अंगूठी को एक पेड़ की जड़ में रख देता है, जो कि वहां पर दफनाई गयी ईमली (हेलेना बोनहम कार्टर) की उंगली होती है. वह कहती है कि उसकी विक्टर से दूसरी शादी हो गयी. फिर विक्टर को पता चलता है कि ईमली की हत्या की जा चुकी है और अब विक्टर अपनी प्रेमिका विक्टोरिया के संग मिलकर ईमली की आत्मा को मुक्ति दिलाता है.

यह एक अलग बात है कि टिम बर्टन्स की फिल्म ‘‘कॉर्पस ब्राइड’’ एक डार्क फिल्म है, जबकि अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘‘फिल्लौरी’’ एक हल्की फुल्की हास्य फिल्म है.

तो दूसरी तरफ 2015 में प्रदर्शित पंजाबी फिल्म ‘‘सरदार जी’’ में नीरू बाजवा ने भटकती आत्मा का किरदार निभाया है, जबकि दिलजीत दोशांज ने उस इंसान का किरदार निभाया है, जो कि आत्माओं को एक बोटल में बंद करता रहता है. मजेदार बात यह है कि दिलजीत दोशांज ने अनुष्का शर्मा के साथ फिल्म ‘‘फिल्लौरी’’ में भी अभिनय किया है.

इस वैलेंटाइन आप दिखें खास

हर कपल के लिए वैलेंटाइन डे खास होता है. वैलेंटाइन डे पर हर लड़की खूबसूरत और आकर्षक दिखना चाहती है. अगर आप भी क्यूट, फ्लर्टी या बोल्ड लुक अपनाकर अपने साथी को इम्प्रेस करना चाहती हैं तो ये टिप्स आपके लिए काफी मददगार हो सकते हैं.

क्यूट चिक लुक

मासूम और क्यूट चेहरे वाली लड़कियां अधिकांश लड़कों को भाती हैं. क्यूट चिक लुक के लिए क्रीम फाउंडेशन का इस्तेमाल करें, जो चेहरे पर आसानी से एकसाथ मिल जाए. चेहरे पर मेट लुक आपको आकर्षक दिखाएगा.

– गालों को हल्की गुलाबी रंगत देने के लिए हल्के हाथों से ब्लश लगाएं.

– आंखों को क्लासिक लुक देने के लिए ब्लैक आईलाइनर लगाएं. मस्कारा लगाना नहीं भूलें.

– गहरे गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगाएं. इससे आपको कम्पलीट वेलेंटाइन लुक मिलेगा.

बोल्ड लुक

अगर आप बोल्ड लुक चाहती हैं तो अच्छी तरह से चेहरे पर एकसार मिल जाने वाले फाउंडेशन लगाएं. फाउंडेशन अगर वाटरप्रपूफ हो तो और अच्छा है, जिससे शाम तक आपका मेकअप बरकरार रहेगा.

– वाटरप्रूफ मस्कारा, आईलाइनर लगाएं.

– बेहद हल्की गुलाबी रंगत की लिपस्टिक या होठों को सिर्फ चमकदार लुक देने के लिए लिप ग्लॉस लगाएं.

फ्लर्टी फन लुक

फ्लर्टी फन लुक इन दिनों को और स्पेशल बना देगा. आंखों का खास मेकअप करें.

– मस्कारा सही से ऊपरी पलकों के ऊपर और नीचे दोनों तरफ से उभार देते हुए लगाएं.

– काले रंग का आईलाइनर लगाएं. आंखों के कोनों पर लाइनर से विंग निकालें. इससे चेहरे को बेहद आकर्षक लुक मिलता है.

– क्रीम फाउंडेशन को चेहरे पर एकसार लगाकर सुर्ख लाल रंग की लिपस्टिक लगाएं.

यकीन मानिए आपके पार्टनर की नजर आप से हटेगी नहीं. इस वेलेंटाइन डे खुद को परफेक्ट लुक देकर दिलकश नजर आएं और आत्मविश्वास से भरपूर दिखें.

प्यार में इजहार जरूरी

वैशाली ने एमबीए में ऐडमिशन लिया. पहले दिन जब वह कालेज गई तो अपनी ही क्लास के एक लड़के पर उस की नजर टिक गई. लड़के का नाम रोहित था, जो दिखने में काफी हैंडसम था.

वैशाली ने जब से रोहित को देखा तो वह उस की दीवानी हो गई. उस ने रोहित को मन में बसा लिया, लेकिन किसी को मन की बात नहीं बताई. कालेज में कई बार उस का रोहित से आमनासामना होता पर वह प्यार का इजहार न कर पाती.

एक प्रोजैक्ट के सिलसिले में दोनों को एकसाथ काम करने का मौका मिला. वैशाली ने सोचा कि इस दौरान वह अपने मन की बात उस से कह देगी, लेकिन प्रोजैक्ट पूरा होने पर भी वह अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाई.

कुछ महीने बाद जब वैशाली को पता चला कि रोहित की सगाई हो रही है, तो उस के पैरों तले जमीन खिसक गई. उसे लगा वह रोहित के बगैर जी नहीं पाएगी. उसे अपनेआप से कोफ्त होने लगी कि समय रहते उस ने अपने दिल की बात रोहित के सामने बयां क्यों नहीं की?

समय के साथ वैशाली के लिए भी एक रिश्ता आया. परिजनों ने जब इस रिश्ते के लिए उस की प्रतिक्रिया पूछी, तो उस ने शादी से ही इनकार कर दिया.

वैशाली की भांति अनेक युवतियां हैं जो किसी से प्यार तो कर बैठती हैं, लेकिन उस के समक्ष प्यार का इजहार नहीं कर पातीं, जिस से उन का प्यार एकतरफा हो जाता है व कभी परवान नहीं चढ़ता.

एकतरफा प्यार में मिली असफलता युवतियों को निराश और कुंठाग्रस्त कर देती है. युवतियां अपने पहले प्यार को, भले ही वह एकतरफा ही क्यों न हो, ताउम्र नहीं भूल पातीं.

यदि आप भी किसी को अपना दिल दे बैठी हैं और अपने प्यार के प्रति गंभीर हैं तो जल्दी से जल्दी उसे अपने दिल की बात बता दें. हो सकता है सामने वाला इस बारे में सोचेविचारे या उस नजरिए से आप को देखे. यदि उस के दिल में पहले से ही कोई लड़की होगी तो वह स्पष्ट इनकार कर देगा. इस से आप समय रहते अपने कदम पीछे खींच सकती हैं. यदि उस का अफेयर किसी से नहीं हुआ तो वह आप के बारे में गौर कर सकता है. हो सकता है वह भी आप को चाहने लगे. जब आग दोनों ओर बराबर लगी हो, तभी प्यार परवान चढ़ सकता है अन्यथा एकतरफा प्यार चाहे वह किसी भी तरफ से हो, उस का हश्र अच्छा नहीं होता.

याद रखें, आप के किसी को चाहने मात्र से बात नहीं बनती. बात तभी बनती है जब सामने वाला भी आप को उसी शिद्दत से चाहे, लेकिन यह तभी संभव है जब सामने वाले को आप के मन की बात पता हो. फिर देखिए उस का चमत्कार.

यदि आप आमनेसामने हो कर अपने प्यार का इजहार करने में संकोच करती हैं तो इस के लिए अन्य तरीके भी अपना सकती हैं, जैसे उस से मोबाइल पर बात कर सकती हैं या उसे एसएमएस भेज सकती हैं. चाहें तो किसी मध्यस्थ का सहयोग ले सकती हैं जो उस से आप को मिलवा सके. वैसे भी कालेज में बहुत से स्थान और मौके मिलते हैं जहां आप उस से अपने दिल की बात कर सकती हैं. उसे लाइब्रेरी में, कैंटीन में या किसी कौफीशौप में बुला सकती हैं.

प्यार हो जाना जितना आसान है, उस का इजहार उतना ही मुश्किल. ऐसा प्राय: एकतरफा प्यार करने वालों के साथ होता है. अपने प्यार का इजहार आप कई अवसरों पर कर सकती हैं जैसे यदि गु्रप में कहीं बाहर घूमने गई हों तो कोशिश करें कि आप उस युवक के आसपास ही रहें और उसे इस बात का एहसास कराएं कि आप के लिए वह खास है.                              

वैलेंटाइन डे : प्यार के इजहार का खास दिन

वैलेंटाइन डे प्यार के इजहार के लिए खास दिन है. आप अपने प्रिय को पीला गुलाब दे सकती हैं. इस का आशय है कि मैं तो तुम्हें चाहती हूं परंतु मुझे तुम्हारे दिल की बात पता नहीं है. जब आप का दिल किसी पर आ जाए और उसी के नाम से धड़कने लगे तो आप गुलाबी गुलाब भेंट कर अपनी भावना का इजहार कर सकती हैं. लाल गुलाब आप के मनोभावों को प्रदर्शित करता है. यदि वह इसे स्वीकार कर लेता है तो इस का मतलब यह हुआ कि वह भी आप से प्यार करता है.

लोकतंत्र का राजतंत्रीकरण

अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में एक बात साफ हो रही है कि राजनीति अब पुश्तैनी पेशा बन गया है. जो भी एक बार राजनीति में सफल हो जाए वह अपने बच्चों को अन्य व्यवसायों में भेजने के बजाय राजनीति में भेजना पसंद करता है. गांधी व सिंधिया परिवार, मुलायम सिंह यादव, एम करुणानिधि, लालू प्रसाद यादव, प्रकाश सिंह बादल, देवीलाल, हेमवतीनंदन बहुगुणा, बाल ठाकरे आदि के उदाहरण भरे पड़े हैं. विदेशों में भी ऐसा ही कुछ होता है और क्यूबा, उत्तर कोरिया, सिंगापुर इस के उदाहरण हैं. यह लोकतंत्र का असल में राजतंत्रीकरण करना है.

नेताओं के बच्चों को बहुत जल्दी समझ आ जाता है कि राजनीति में भले ही उतारचढ़ाव हों, पर कैरियर सुरक्षित रहता है, नेता हार कर भी नेता बना रहता है. कैरियर यदि खराब होता है तो किसी कांड में फंसने से होता है, पर कैट हैज नाइन लाइव्स की तरह राजनीति नेताओं के बच्चों को मरने नहीं देती और छोटेमोटे पद, ट्रस्टों की दादागीरी, बैंकों की चैयरमैनशिप मिलती ही रहती है.

राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने हाथ मिला कर अपने पुरखों के दुश्मन से इंदिरासोनिया गांधी व मुलायम सिंह यादव की लड़ाई को भुला कर इस बार चुनावों में साथ कैरियर बनाने की कोशिश की है. कांग्रेस की अब खासीयत है कि वह जिस पार्टी के साथ छोटी पार्टनर बनती है, वह जीत जाती है चाहे कांग्रेस खुद अकेले न जीत पाए.

राजनीति कैरियर के रूप में बुरा क्षेत्र नहीं है. इसे सत्तालोलुपता  कहना गलत होगा. यह तो एक तरह से सेवा है, जिस की कीमत मिलती है.

सरकार चलाना किसी भी तरह से मुफ्त में नहीं हो सकता. कोई भी बिना पैसे लिए जनता के लिए काम नहीं करेगा. जनता के लिए अगर समाजसेवी संस्था चलाओ तो भी संचालक से चपरासी तक को वेतन तो देना ही होगा.

ऐसे ही हर नेता को अच्छाखासा पैसा चाहिए ताकि आफत के दिनों में उसे याचक बन कर दरदर न भटकना पड़े. जो युवा राजनीति को खराब समझते हैं, उन्हें सबक सीखना चाहिए कि रोहित वेमुला और कन्हैया जैसों की भी जरूरत है तो अखिलेश यादव व स्टालिन की भी.

यह नहीं भूलना चाहिए कि यह कैरियर एक एमबीए पास के कैरियर से भी मुश्किल है. इस में बुद्धि और शारीरिक बल दोनों चाहिए. सैकड़ों लोगों से मिलना, उन के नाम याद रखना, समस्याओं की जड़ों में जाना झगड़ेफसाद या खर्च, वाकपटु होना, भाषण देने की कला आना सब जरूरी है और जो यह नहीं कर सकता वह पीछे रह जाता है.

यह कैरियर नेता पुत्रों के लिए तो अच्छा है ही, अन्य लोगों के लिए भी बुरा नहीं. सही नेता ही समाज को नई दिशा देते हैं. कभी सरकार को मनमानी करने से रोकते हैं तो कभी सरकार चलाते हैं.

गा लो मुसकुरा लो…

बसंत का मौसम रंगीन फूलों और खिली धूप का होता है और जब शरीर पर बसंती रंग चढ़ता है तो फिर वही आभा खिलती है जो प्रकृति में खिलती है. बसंती बदन पर हजारों कवियों ने वैसा ही लिखा है जैसा बसंती प्रकृति पर लिखा है. दोनों ही खुशनुमा होते हैं. नई आभा देते हैं, एक खुशबू देते हैं और भविष्य के लिए चमचमाहट का रास्ता बनाते हैं.

ये दिन बारबार नहीं आते. हर किशोर के बसंती साल दोचार ही होते हैं. फिर जिम्मेदारियों और स्पर्धा का काल शुरू हो जाता है. इन दिनों में अपनी खुशबू फैलाएं और रंगों को बिखेरें. यह हर किशोर का ध्येय होना चाहिए.

यह खुशबू बहुत कीमती होती है. इसी का इंतजार पूरे वर्ष रहता है. जब चारों ओर एक सुखद माहौल छाया रहता है. इसी तरह की खुशबू हर व्यक्ति के जीवन में केवल एक बार किशोरावस्था के आसपास आती है और कोई उसे छोड़े तो उस की गलतफहमी दूर करनी चाहिए.

बहुत बसंती किशोर कलपने लगते हैं कि उन के पास यह नहीं है, वह नहीं है. कोई अपने शरीर से परेशान रहता है, कोई कपड़ों से, कोई गैजेट्स से तो कोई जेबखर्च से, पर अगर इन को दिल पर हावी न होने दें तो यह कीमती समय सालों तक याद रह सकता है. इन दिनों की दोस्ती निश्छल होती है और बारबार जीवन में महक लाती है. इन दिनों का सुखद काम आप के भविष्य को बनाता है. इन दिनों का ज्ञान भविष्य का रास्ता बनाता है. जैसे इन दिनों पौधे अपने फूलों के बीज चारों ओर बिखरते हैं वैसे ही इन दिनों का काम चारों ओर याद रहता है.

जीवन को सजानेसंवारने के लिए बहुतकुछ करना पड़ता है. इस के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है. जैसे माली बसंत की तैयारी पहले से करते हैं वैसे ही हर किशोर को इन सालों को महकता और फलताफूलता देखने के लिए पहले से ही तैयारी करनी चाहिए और किशोरावस्था में भी इस का यत्न करना चाहिए. इन सालों में कैरियर बनाने के प्लान तैयार करें, खूब ज्ञान एकत्रित करें, हर समय चौकन्ने रह कर हर तथ्य के पीछे जाएं. आगे आने वाले सालों की तैयारी करें.

इन दिनों हरेक को मित्र बनाएं. मातापिता, दादादादी, चाचाचाची, पड़ोसियों को अपना बनाएं. मुंह छिपा कर न बैठें, पढ़ाई के साथ जीवनभर की लाइनें खींचें, जिन के आधार पर जीवनभर खुशनुमा यादें रहें. प्रकृति का बसंत माह 2 माह का होता है, जीवन का बसंत 3-4 वर्ष का होता है पर दोनों का असर एकजैसा है.

ये साल गाने, गुनगुनाने, दुनिया देखने, जोखिम लेने के हैं. इन्हें हाथ से फिसलने न दें. इन्हें संभाल कर इस्तेमाल करें, क्योंकि फिर न लौटेंगे ये दिन.

बॉलीवुड सितारों की असल जिन्दगी पर बनी फिल्में

बॉलीवुड का ये जमाना तो जैसे बायोपिक्स का हो चला है. इन दिनों बॉलीवुड में असल जिन्दगी की कहानियों पर फिल्म बनाने की होड़ सी लगी हुई है. हर कोई चाहे वह निर्देशक हो या कलाकार, असल जिन्दगी पर आधारित कहानियों पर ही काम करना चाहता है.

हाल ही में अभिनेता रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म जो कि संजय दत्त की बायोपिक है, उस पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं. इस फिल्म में रणबीर पहली बार राजकुमार हिरानी के साथ काम करने वाले हैं. पिछले साल 27 फरवरी को यानि कि 2016 में संजय दत्त जेल से रिहा हुए हैं. अब देखना ये है कि ये फिल्म लोगों को कितनी पसंद आएगी, लेकिन ये तो वक्त ही बताएगा. सूत्रों की मानें तो इस फिल्म के रिलीज होने का वक्त, 2017 का क्रिसमस ही बताया जा रहा है.

बहरहाल हम आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा जब किसी बॉलीवुड स्टार की असल जीवन पर फिल्म बनाई जा रही हो. इससे पहले भी कई सितारों के जीवन पर फिल्में बन चुकी हैं. आइए ऐसी ही फिल्मों पर हम एक नजर डालते हैं.

साल 1959 में बनी फिल्म कागज के फूल, आज भी बेहतरीन फिल्मों की लिस्ट में शुमार है. और अगर पुरानी बातों को याद करें तो हमें भी ये बात समझ आ ही जाऐगी कि ये फिल्म अभिनेता गुरु दत्त और उस वक्त की जानी मानी अभिनेत्री वहीदा रहमान की लव स्टोरी पर आधारित थी.

गाना ‘तुम इतना जो मुस्करा रहे हो…’, जो आज भी आप गुनगुनाते हैं, अभिनेत्री शबाना आजमी पर फिल्माया गया है.  यह गाना साल 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘अर्थ‘ का है. आपको बता दें कि यह फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर महेश भट्ट के जीवन पर आधारित है. इस फिल्म की पूरी कहानी महेश, उनकी पत्नी और उनकी प्रेमिका रही परवीन बॉवी के इर्दगिर्द घूमती है.

हिन्दी सिनेमा में थोड़ा पीछे जाकर देखें तो ये बात भी समझ आती है कि फिल्म वो लम्हे, जो साल 2006 में आई थी, यह भी डायरेक्टर और प्रोड्यूसर महेश भट्ट की रियल लव लाइफ पर बेस्ड थी. पूरी फिल्म में उनके औऱ परवीन के रिश्ते को पर्दे पर दिखाया गया था. इस फिल्म में कंगना रनौत और शाहनी अहूजा ने मुख्य भूमिकाऐं अदा की थी.

ऐसे ही साल 2011 में आई फिल्म डर्टी पिक्चर, दक्षिण भारतीय फिल्मों की सेक्स सिंबल कही जाने वाली अभिनेत्री सिल्क स्मिता के जीवन पर बेस्ड थी. फिल्म में विद्या बालन ने सिल्क की भूमिका अदा की थी. यह फिल्म सुपरहिट भी रही थी.

और नई-पुरानी खबरों की मानें तो डायरेक्टर जुगराज की दारासिंह बायोपिक भी आने वाली है. इस फिल्म में अक्षय कुमार लीड रोल में नजर आएंगे यानि कि फिल्म में अक्षय कुमार अभिनेता दारा सिंह का किरदार निभाएंगे.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें