Diwali Celebration: बौयफ्रैंड या गर्लफ्रैंड के साथ प्री दिवाली

Diwali Celebration: दीवाली का त्योहार हो और दिल की बातें न हों यह तो पौसिबल ही नहीं है, क्योंकि दीवाली जैसे त्योहार का मजा भी तभी आता है जब साथ में आप का मनपसंद दिलबर हो। अपने मनपसंद दिलबर यानि सोलमेट या यों भी कह सकते हैं कि लवर प्रेमी के साथ दीवाली मनाने का मजा कुछ खास ही होता है.

अपने सोलमेट के साथ वक्त बिताना किसी त्योहार से कम नहीं है और अगर दीवाली पर आप का प्यार आप के साथ है तो फिर कहने ही क्या.

निश्चित तौर पर हर किसी की वह दीवाली सब से खास होती है जब उस का प्रेमी उस के साथ होता है. पंकज उदास की गजल,’कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यों लगते हो…’ यह सिर्फ गाने की पंक्ति नहीं बल्कि एक प्यार करने वाले के दिल का हाल है.

हजारों खूबसूरत चेहरे होने के बावजूद उस का दिल एक ऐसे शख्स के लिए धड़कता है जो उस की नजर में खास है और दिल के सब से करीब है. तभी तो हजारों की भीड़ में एक प्यार में डूबा इंसान वही चेहरा देखना चाहता है, जिसे देखने के लिए उस का दिल धड़कता है, जो सिर्फ एक ही बात कहता है कि बस, तुम ही हो, मेरी जिंदगी बस तुम ही हो.

दीवाली के मौके पर जब प्यार करने वाले शख्स को सोलमेट के साथ दीवाली मनाने का मौका मिलता है, तो उस के मन में हमेशा यह ख्वाहिश रहती है कि वह ऐसा क्या करे कि उस की सोलमेट के लिए यह दीवाली खास दीवाली हो जाए.

ऐसे ही खास प्रेमियों के लिए पेश हैं,  ताजातरीन टिप्स जिसे फौलो करने के बाद निश्चित तौर पर इस बार की दीवाली खास हो जाएगी.

दीवाली सैलिब्रेशन को खास बनाने वाली टिप्स खासतौर पर उन प्रेमियों के लिए हैं जो न सिर्फ इस साल की दीवाली का जश्न धूमधाम से मनाने की इच्छा रखते हैं , बल्कि अपनी सोलमेट के लिए भी कुछ खास कर के इस दीवाली को स्पैशल दीवाली बनाने की ख्वाहिश रखते हैं.

दीवाली पर अपनाएं खास अंदाज

दीवाली का मौका हो और अपने पार्टनर के साथ खास दीवाली पार्टी करने जाना हो तो अंदाज भी निराला होना चाहिए जैसेकि रोजमर्रा में पहनने वाले कपड़ों से अलग हट कर स्टाइलिस्ट कुरता पजामा, पठानी, पहनें या अगर लड़कियां अपने प्रेमी के साथ दीवाली की पार्टी करने जा रही हैं तो वह भी अपनी प्रेमी की पसंदीदा ड्रैस जोकि थोड़ा ट्रैडिशनल और आकर्षक हों, जैसे साड़ी, शरारा या गरारा या फिर आकर्षक डिजाइनर सलवार कुरता पहनें और साथ में क्लासी ज्वैलरी पहनें, जो खूबसूरत होने के साथसाथ आरामदेह भी हो.

ड्रैसिंग के हिसाब से मेकअप करें

इस के अलावा अपने प्रेमी को रिझाने के लिए उन का पसंदीदा परफ्यूम लगाएं ताकि वह सिर्फ आप की शक्ल और ड्रैसिंग से ही नहीं, बल्कि आप की खुशबू से भी मोहित हो जाएं.

दीवाली पर खासतौर पर रोशनी का जाल, चमकदमक हर जगह पर देखने को मिलती है। इसलिए अपने पार्टनर के साथ कार या बाइक में या अपनी सहूलियत अनुसार ड्राइव पर जरूर जाएं और दीवाली पर सजीधजी सड़कें, दुकानें और दीवाली का खूबसूरत माहौल का लुत्फ जरूर उठाएं।

दीवाली का मौका है तो अपने पार्टनर के लिए खूबसूरत गिफ्ट तो बनता है, लिहाजा गिफ्ट के रूप में अपने प्रेमी को एक खूबसूरत दीवाली गिफ्ट जरूर दें जो उन की पसंदीदा हो. जैसे अगर लड़का है, तो अपनी प्रेमिका को आर्टिफिशल खूबसूरत ज्वैलरी, पर्स, परफ्यूम अपने बजट के हिसाब से जरूर दें और अगर लड़के को गिफ्ट देना है तो खूबसूरत टीशर्ट, घड़ी, ब्रैसलेट लाकेट चेन आदि जरूर दें.

इस दौरान अपने पार्टनर की पसंद को न भूलें। अगर आप अपनी प्रेमिका की पसंद को ध्यान में रख कर गिफ्ट देंगे तो वह निश्चित ही खुश हो जाएगी, क्योंकि आप का सोलमेट आप के लिए खास है तो उसे डिनर के लिए ऐसे होटल में ले जाएं, जहां आप को थोड़ी प्राइवेसी मिल सके और आप शांति से उस के साथ क्वालिटी टाइम गुजार सकें और अपने दिल की बात भी कह सकें.

दीवाली के मौके पर आप का अपने सोलमेट के लिए पूरे दिल से अगर ऐसी दीवाली पर ऐसी सरप्राइज पार्टी रखेंगे तो आप के साथ मनाई यह दीवाली उस की यादगार दीवाली होगी जिस में सिर्फ आप होंगे और आप के बीच होगा दीवाली के जश्न में डूबा इश्क वाला लव.

Diwali Celebration

No Alcohol Diwali: इस दीवाली नो अल्कोहल मोर फन

No Alcohol Diwali: दीवाली का त्योहार आते ही जश्न का माहौल बन जाता है, जिस की वजह से दीवाली के कुछ दिनों पहले से ही सारी तैयारियां शुरू हो जाती हैं. दीवाली शौपिंग का अलग ही माहौल होता है. हर जगह पर मौल हो या दुकान ग्राहकों से खचाखच भरी होती है क्योंकि दीवाली जगमगाहट से भरा त्योहार है तभी तो इस दिन को मनाने के लिए घर की सजावट से ले कर खुद की सजावट तक यानि घर का नया समान और खुद के लिए सुंदर आउटफिट ज्वैलरी जूते, सभी चीजों की खरीदारी होती है.

इतना ही नहीं पूरा घर रोशनी और दीयों से जगमगा उठता है. हमारी पूरी कोशिश होती है की दीवाली पर किसी चीज की कमी न हो. दीवाली यादगार साबित हो इस के लिए हम दीवाली पार्टी का भी आयोजन करते हैं. मातापिता जहां अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने अलग जगह जाते हैं, वहीं बच्चों की अलग पार्टी होती है जिस में नाचगाना, स्वादिष्ठ खाना, मजाक व मस्ती सबकुछ होता है. यानि की दीवाली पर हम फुल दीवाली मूड में होते हैं.

दीवाली की शुरुआत तो बहुत ही शानदार होती है जिस में सारे यंग लड़केलड़कियां सजधज कर आते हैं. खूबसूरत लड़कियों के चेहरे से नजर ही नहीं हटती, जोकि दीवाली पार्टी में स्पैशल ड्रैस पहन कर खूबसूरत ज्वैलरी के साथ इठलातीबलखाती दीवाली की शान बन कर पार्टी में पहुंचती हैं.

इसी पार्टी में हैंडसम हंक कहलाने वाले लड़के ट्रैडिशनल कुरता पजामा, डिजाइनर शेरवानी या पठानी पहन कर फुल स्वैग में दीवाली पार्टी में पहुंच जाते हैं, जिस के बाद शुरू होती है दीवाली पार्टी का हंगामा, नाचगाना, फ्लोर पर थिरकते खूबसूरत चेहरे, जिस के चलते दीवाली पार्टी की शुरुआत तो बहुत ही आलीशान तरीके से होती है, लेकिन जैसेजैसे पार्टी की शाम आगे बढ़ती है शराब की बोतलें खुलनी शुरू हो जाती हैं और खुलने लगते हैं लोगों के खुलते आगाज का नया अंदाज जिस की शुरुआत जहां पर शालीनता और तहजीब के साथ हुई होती है, वहीं शराब के कुछ पैग अंदर जाते ही और नशा दिलोदिमाग पर चढ़ते ही अंदाज बदल जाता है.

दीवाली पार्टी की शुरुआत में प्यार और इज्जत से बात करने वाले वही लोग कुछ समय बाद गालीगलौच में बात करते नजर आते हैं. दीवाली पार्टी की शुरुआत में जो लड़कियां सजधज कर ऐंट्री करती हैं, वही पार्टी के अंत में बाथरूम में उलटियां करती नजर आती हैं. इतना ही नहीं ज्यादा शराब चढ़ जाने की वजह से वही सजधज कर आई लड़कियां जब पार्टी से बाहर निकलती हैं तो उन की ड्रैस कहीं होती है, तो सैंडल कहीं. कई बार तो इन लड़कियों के साथ आए उन के बौयफ्रैंड उन की सैंडल और पर्स संभालते नजर आते हैं क्योंकि उन की फ्रैंड तो ओवर शराब पी कर धुत होती हैं जिस वजह से उन को होश ही नहीं होता कि वे कहा हैं और उन के जूते व कपड़े कहा हैं.

पार्टी में शराब के गिलास से शराब जब अंदर पहुंचती है तो नकली चेहरे के पीछे जो मन में अपने ही लोगों के लिए नफरत और गुस्सा छिपा होता है, वह पीने के बाद सचाई के रूप में बाहर आने लगता है, जिस के बाद कई बार इसी पार्टी में मारपीट तक हो जाती है और दीवाली पार्टी का पूरा मजा खराब हो जाता है.

ऐसे में क्या साल का एक दिन जो कि दीवाली जैसा बड़ा त्योहार है अल्कोहल फ्री पार्टी के साथ आयोजन नहीं हो सकता?

इस बार दीवाली अल्कोहल फ्री के साथ मजा दोगुना कर के देखें

हालांकि आज के समय में बिना शराब की पार्टी थोड़ा मुश्किल सा लगता है, क्योंकि नहीं पीढ़ी के मुताबिक बिना शराब की पार्टी ओल्ड फैशन या मिडिल क्लास वालों की पार्टी मानी जाती है लेकिन अगर त्योहार के नाम पर सिर्फ एक दिन बिना शराब के पार्टी करें तो उस के कई सारे फायदे नजर आएंगे. ऐसा करना ज्यादा मुश्किल नहीं है अगर मन में ठान लें तो. अल्कोहल फ्री पार्टी में लोग आपस में दिल की बात करते नजर आएंगे, एकदूसरे से घुलतेमिलते नजर आएंगे.

शराब न पीने पर दीवाली पर बने स्वादिष्ठ मिठाइयों का ओर टैस्टी आइटम का मजा लूटते का मौका लूटते नजर आएंगे. कई सारी खूबसूरत यादें, दिल की बातें, एकदूसरे की खिंचाई, मजाकमस्ती का माहौल, दीवाली पर खेले जाने वाले गेम्स आदि सभी चीजों का मजा ले पाएंगे. अगर इस दीवाली पार्टी में शराब नहीं पी जाएगी तो बिना शराब पीए पार्टी करने पर आप खुद महसूस करेंगे कि अल्कोहल फ्री पार्टी का मजा ही कुछ और है.

शराब पीने के बाद जहां दिमाग पर हैंगओवर का बोझ चढ़ जाता है, वहीं बिना शराब पीए दीवाली मनाने पर आप को दिली सुकून जरूर मिलेगा. यकीन न हो तो इस बार दीवाली के मौके पर अल्कोहल फ्री दीवाली मना कर खुद ही अनुभव कर लें.

No Alcohol Diwali

Festive Hairstyles: इस दीवाली कैसा हो आप का हेयर डू

Festive Hairstyles: दीवाली का त्योहार साल का वह समय होता है, जब हर व्यक्ति अपने घर को साफसुथरा रखने और प्रकाशित करने की कोशिश करता है. सभी के मन में त्योहार को ले कर उमंग होता है. खुशियों का माहौल चारों तरफ दिखाई पड़ने लगता है, दिल प्यार से भरे होते हैं, मीठे व्यंजन बन रहे होते हैं और उपहारों का आदानप्रदान हो रहा होता है.

दीवाली पर खूबसूरत परिधान के साथ एक अच्छी और सुंदर हेयरस्टाइल अपनाएं. इस दीवाली पर कुछ अलग और आकर्षक दिखने की इच्छा से हेयरस्टाइल, हेयर कट आदि के बारे में गहराई से जानें, जो आप के चेहरे पर जंचें. सुरुचिपूर्ण और आसान हेयरस्टाइल को अपनाएं, जो भले ही एक दिन के लिए हों, लेकिन उस की लुक आप की खूबसूरती को अलग और अनोखा बनाती है. हेयरस्टाइल से पहले केशों को अच्छी स्टाइलिंग के लिए तैयार करें, ताकि आप का हेयर डू सुंदर दिखें.

  • शुरुआत एक अच्छी तरह से धोए हुए और कंडीशन किए हुए केशों से करें.
  • अगर आप हीट स्टाइलिंग कर रही हैं, तो हीट प्रोटेक्टैंट स्प्रे का इस्तेमाल जरूर करें, ताकि बालों को हीट डैमेज से बचाया जा सके.

साइड ब्रैडेड स्टाइल

आमतौर पर फैस्टिव सीजन में ब्रैडेड हेयरस्टाइल सब से ज्यादा पसंद किया जाता है. ट्रैडिशनल हेयरस्टाइल को एक अलग अंदाज में किया जा सकता है. आप को अपने बालों को पूरी तरह से एक चोटी में बांधने की जरूरत नहीं है, आप को सामने के एक हिस्से को एक तरफ स्टाइलिश ढंग से बांधें और अपने बाकी बालों को खुला छोड़ दें. आप चाहें तो बेहतर लुक के लिए बाकी बालों को आसानी से सीधा या कर्ल कर सकती हैं. यह हर उम्र की स्त्री के लिए सूटेबल हेयर डू है.

ब्रैडेड बन विद मैसी हेयर

जुड़ा त्योहारों के मौसम में सब से ज्यादा पसंद किया जाता है. इस हेयरस्टाइल में बालों को बहुत ही सुंदर स्टाइल में एक बन मिलेगा. इसे आप खुद भी बना सकती हैं, क्योंकि यह बनाने में आसान होता है. सच तो यह है कि अगर आप एक स्लीक और स्टाइलिश हेयरस्टाइल की तलाश में हैं, तो ब्रैडेड बंस बैस्ट चौइस है. इसे मैसी लुक देने के लिए 1 या 2 ढीले बालों की लेयर को लूज कर दें. इस से यह मैसी बन बेहद सुंदर लगेगा.

स्लीक ओपन हेयर

अगर आप अपने बालों की लंबाई के साथ कंफर्टेबल हैं, तो आप बीच की मांग निकाल कर बाल खुले छोड़ सकती हैं. लड़कियों को यह हेयरस्टाइल सब से ज्यादा पसंद आता है. आप चाहें तो अपने बालों को स्ट्रैट करवा सकती हैं या फिर खुले हुए बालों में कर्ल बना सकती हैं। अगर आप के बाल कर्ली हैं, तो यह हेयरस्टाइल आप की साड़ी या फिर लहंगे के साथ बेहद ही सुंदर लगेगा.

टौप नौट

दीवाली पर यह हेयरस्टाइल आप की पर्सनैलिटी को पूरी तरह बदल सकता है. टौप पर नौट स्टाइल में यह हेयरस्टाइल बनाना बहुत ही आसान है. त्योहार के इस सीजन के लिए यह हेयरस्टाइल बहुत ही सही है. किसी भी उम्र की स्त्रियां इसे खुद ही बना सकती हैं.

स्लीक पोनी

अगर आप कोई क्लासी लुक रखना चाहती हैं, तो स्लीक पोनी बिलकुल परफैक्ट है. यह हेयरस्टाइल आप को अधिक आकर्षक बना सकता है. अगर स्लीक पोनी हेयरस्टाइल को डिफरैंट लुक देना चाहती हैं, तो अपनी पोनी को नीचे से कर्ल करवा सकती हैं.

सिम्पल हेयरस्टाइल

यह एक आसान हेयरस्टाइल है, जो दीवाली में यूथ के लिए आकर्षक होता है। इस में चोटी बनाने में आप कभी गलती नहीं कर सकतीं. केशों को बीच से बांटें और सिर के दोनों तरफ से 2-2 हिस्से बनाएं. हर चोटी को सिर के ऊपर लपेटें और उन्हें हेयरपिन से सुरक्षित करें. यह स्टाइल न सिर्फ खूबसूरत दिखता है, बल्कि आप के बालों को पूरे दिन अपनी जगह पर भी रखता है.

परांदा हेयरस्टाइल

परांदे को ले कर बालों में एक तरफ लगाएं, जैसे आप ब्रैड बनाते हैं और फिर उसे नीचे सेट करें. अपने स्टाइल को और बेहतर बनाने के लिए आप मांगटीका, गजरा, रंगबिरंगी क्लिप्स, सुनहरे और रेशमी धागों से बने ऐक्सैसरीज या मोती का इस्तेमाल कर सकती हैं. केश कम है, तो हेयर ऐक्सटैंशन का प्रयोग कर बालों को थोड़ा खुला रख सकती हैं, लेकिन इस में ताजा फूलों का प्रयोग किया जा सकता है, जो फ्रेश लुक के साथसाथ अच्छी खुशबू भी बिखेरती है.

Festive Hairstyles

Sweets Recipe: त्योहार पर घर की बनी मिठाई खिलाने की बात ही अलग है

Sweets Recipe: गोल्डन ओरियो बूंदी

सामग्री

– 6 बूंदी के लड्डू

– 15-20 गोल्डन ओरियो बिस्कुट

– 50 ग्राम मक्खन

– थोड़ी सी चौकलेट सौस सजाने के लिए.

विधि

बूंदी के लड्डुओं को फोड़ कर चूरा कर लें. बिस्कुटों को मिक्सी में पीस लें. एक बाउल में पिघला मक्खन लें. बिस्कुटों का चूरा मिला कर अच्छी तरह गूंध लें. एक चौकोर ट्रे लें. बिस्कुट के चूरे के 2 भाग कर लें. एक भाग को ट्रे में नीचे अच्छी तरह से फैला कर जमा दें. उस पर बूंदी का चूरा अच्छी तरह से दबाते हुए जमा दें. सब से ऊपर फिर से बिस्कुट के चूरे की तह जमा दें. चाकू की सहायता से ऊपरी सतह एकसार कर लें. इस ट्रे को कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें. जब यह अच्छी तरह सैट हो जाए तो ऊपर से चौकलेट सौस से सजाएं. परोसने से पहले मनचाहे आकार के टुकड़ों में काट लें.

  ‘चौकलेट फ्लेवर वाली यह आसान रैसिपी बच्चों को बेहद पसंद आएगी.’

चौको चिप डिलाइट

सामग्री

– 1 कप चोको चिप्स

– 1 मध्यम आकार का चौकलेट स्पंज केक

– 3-4 बडे़ चम्मच मिक्स फू्रट जैम

– दूध आवश्यकतानुसार.

विधि

केक को एक बाउल में चूर कर लें. इस में जैम मिला कर मिश्रण को गूंध लें. थोड़ा सा दूध डाल कर मिश्रण को बंधने लायक गूंध लें. इस मिश्रण को एक ट्रे में 1/2 इंच मोटा रखते हुए फैलाएं. ऊपर चोको चिप्स अच्छी तरह फैला कर दबादबा कर मिश्रण पर चिपका दें. ठंडा होने के लिए फ्रिज में रख दें. जब मिश्रण सैट हो जाए तो चौकोर टुकड़ों में काट लें. प्रत्येक टुकड़े को कैंडी रिबन से सजाएं. स्वादिष्ठ चोको चिप डिलाइट तैयार है.

‘हलवाई जैसी रसमलाई कुछ आसान टिप्स से घर पर बना सकती हैं.’

मार्बल रसमलाई

सामग्री

– 2 किलोग्राम दूध – 11/2 छोटे चम्मच कस्टर्ड पाउडर

– थोड़ा सा केसर – 1/4 कप चीनी

– 2 चुटकियां इलायची पाउडर

– 8-10 पिस्ता

– 8-10 मार्बल केक

– 1/2 कप गाढ़ा मलाई.

विधि

दूध को एक भारी पैंदे के बरतन में उबलने रखें. जब दूध आधा रह जाए तो 2 चम्मच ठंडे दूध में कस्टर्ड पाउडर घोल कर उबलते दूध में डाल दें. इसे लगातार चलाती रहें ताकि गांठें न पड़ें. दूध गाढ़ा होने लगे तो उस में केसर, चीनी तथा इलायची पाउडर डाल कर 2 उबाल आने तक पकाएं. ठंडा होने पर दूध को फ्रिज में खूब ठंडा होने तक रखें. मार्बल केक के स्लाइसों को एक ट्रे में रखें. गाढ़ी मलाई को अच्छी तरह से फेंट लें. आधे स्लाइसों पर यह मलाई लगाएं तथा बचे स्लाइसों को उन के ऊपर रख कर सैंडविच जैसा बना लें. इन्हें मनचाहे आकार में काट लें. कटोरियों में गाढ़ा किया दूध डालें. ऊपर मार्बल केक के तैयार टुकड़े डालें. मार्बल रसमलाई तैयार है. तुरंत परोसें.

 ‘इस बार फिरनी में चावलों की जगह शकरकंद ट्राई कर के देखें.’

शकरकंद फिरनी

सामग्री

– 500 ग्राम शकरकंद उबली

– 2 किलोग्राम दूध

– 1 कप मिल्कमेड

– 1/2 कप मेवे कटे

– थोड़ा सा पिस्ता व गुलाब की पंखुडि़यां सजाने के लिए

– चुटकी भर छोटी इलायची पाउडर.

विधि

शकरकंद को छील कर कस लें. एक भारी तले के बरतन में दूध उबलने रखें. जब दूध उबल कर आधा रह जाए तो उस में कसी शकरकंद व इलाइची पाउडर डाल दें. लगातार हिलाते हुए दूध के गाढ़ा होने तक पकाएं. फिर मेवे और मिल्कमेड डाल कर लगातार चलाती रहें. उबाल आने पर आंच से उतार लें. गरम फिरनी सर्विंग डिश में डालें. ऊपर पिस्ता व गुलाब की पंखुडि़यों से सजा कर ठंडा होने के लिए फ्रिज में रख दें.

 ‘छेने को चौकलेटी ट्विस्ट दें और फिर देखें स्वाद का मैजिक’

चौको छैना बौल्स

सामग्री

– 15-20 छोटे सफेद रसगुल्ले

– 100 ग्राम चौकले सेंवइयां

– जैली बौल्स सजाने के लिए

– 100 ग्राम कुकिंग चौकलेट.

विधि

रसगुल्लों को एक छलनी में डाल कर पानी से धो कर सुखा लें. चौकलेट को पिघला लें. चौकलेट सेंवइयां (बाजार में उपलब्ध) को एक प्लेट में रख लें. रसगुल्लों को चौकलेट में डुबो कर सेवइयां में लपेट कर एक बटर पेपर पर रखती जाएं. फिर इन्हें जमने तक फ्रिज में रखें. जैली बौल्स से सजा कर परोसें.

 लेखक- रीशा

Sweets Recipe

Hindi Short Story: अनकहा रिश्ता- क्या अनकहा ही रहा ?

Hindi Short Story: महेश कुमारजी को अपनी पत्नी के देहांत के बाद अपने बेटे बासु के साथ शहर आना पड़ा, क्योंकि पत्नी के जाने के बाद वे एकदम अकेले हो गए थे.

अब बेटा ही था, जिस के साथ वो रह सकते थे, और उन की इस उम्र में सही से देखभाल हो सकती थी. उन के बेटे ने शहर आ कर महेशजी को उन का कमरा और बालकनी दिखाई और कहा, “पापा, आप कुछ समय यहां बालकनी में सुकून के साथ बैठ सकते हैं, अखबार पढ़ सकते हैं, आप का मन लगा रहेगा. और देखो पापा, मन तो आप को लगाना ही पड़ेगा.”

महेशजी भी अपना मन लगाने की पूरी कोशिश करते, लेकिन बुढ़ापे का एकाकीपन उन्हें खाए जाता था. आसपास कोई बोलने वाला भी नहीं था. बेटा और बहू अपने काम में लगे रहते, कभीकभार पोते के साथ मन बहला लिया करते,
लेकिन वह भी अकसर स्कूल की पढ़ाई में लगा रहता था.

महेशजी की बालकनी के सामने वाले फ्लैट में भी शायद कोई नहीं रहता था, क्योंकि अकसर वो बंद ही रहती.

कुछ समय बाद उन के सामने वाली बालकनी में कोई रहने आ गया. उस में एक सभ्य व संभ्रांत महिला दिखाई दी, जो लगभग उन्हीं की उम्र की थी.

उन संभ्रांत महिला ने अपनी कामवाली को कुछ समझाया, कुछ पौधे लगवाए, कपड़ों के सुखाने के लिए रस्सी बधंवाई और एक आरामकुरसी और एक छोटा सी मेज लगवा दी. इस तरह वो वीरान सी दिखने वाली बालकनी अब सजीव हो उठी. किसी के होने का एहसास देने लगी.

महेशजी और उन संभ्रांत महिला का आपस में गरदन के इशारे से अभिवादन हुआ, क्योंकि दोनों बालकनी में दूरी ज्यादा थी, इसलिए इशारे से ही बातें हो सकती थीं, और यों भी तेज बोल कर बातें यहां शहरों में कहां हो पाती हैं. यहां तो हर इनसान अपनेआप में मगन है, आसपास की किसी को कोई खबर ही नहीं है.

अब तो महेशजी को अपनी बालकनी अच्छी लगने लगी. वे अब आराम से बैठ कर अखबार पढ़ते.

सामने वाली बालकनी में छाई हुई वीरानी अब वसंत का रूप ले चुकी थी, तुलसी का पौधा उन की आस्था को दर्शाता तो मनी प्लांट की बेल व छोटे फूलों के पौधे जिंदगी की सजीवता को दिखाते.

वैसे भी स्त्रियों को वरदान मिला है कि वे चाहे जहां घर बसा सकती हैं, उसे स्वर्ग का द्वार बना सकती हैं, वसंत ला सकती हैं, वीरानियां को बदल कर बगिया खिला सकती हैं. स्त्रियां घर के आसपास एक सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करती हैं.

बस इस तरह उन दोनों का रोज आंखों से व गरदन के इशारे से आपस में अभिवादन होने लगा. संवाद कभी न होता. महेशजी अब फिर से जिंदगी को जीने लगे थे.

वे उन महिला को कभी वहां सब्जी साफ करते देखते, कभी पौधों में पानी देते हुए देखते, कभी अचार सुखाते, तो कभी स्वेटर बुनते, दोनों का आपस में कभी संवाद नहीं होता. बस एक एहसास होता है कि उन के आसपास भी कोई है…

उन महिला की एक प्यारी सी पोती भी थी, जिस से वो कभीकभी इशारों में ही महेशजी को नमस्ते करवाती, जिस से उन्हें और अपनापन महसूस होता.

बस इस तरह दोनों में एक प्यारा सा “अनकहा रिश्ता” बन गया.

यों ही कई महीने गुजर गए. एक दिन महेशजी ने देखा कि उन महिला ने न ही उस दिन दीप जलाया और न ही पौधौ को पानी दिया. बस, आ कर आरामकुरसी पर ऐसे ही बैठ गईं. महेशजी को लगा कि शायद तबीयत खराब है. उन्होंने इशारों से पूछा, “क्या हुआ…?”

उन्होंने भी इशारे से जवाब दिया, “सब ठीक है”, लेकिन दोचार दिन में उन महिला का बालकनी में आना भी कम होता गया.

कुछ दिन पश्चात, अब कई दिनों से वे महिला महेशजी को दिखाई नहीं दे रही थी, उन्हें लगा कि शायद कहीं बाहर गई होंगी, लेकिन जब कई दिन हुए वे नहीं दिखाई दी और उन के लगाए पौधे सूखने लगे, उन की लगाई मनीप्लांट की बेल सूखने लगी, तो वे चिंतित हो उठे, उन का मन बेचैन हो उठा.

लेकिन पूछें तो किस से पूछें? महेशजी को बहुत चिंता हुई, उन का अब मन किसी भी काम में नहीं लगता.

फिर एक दिन वही कामवाली बालकनी में दिखाई दी, जो पहले दिन उन महिला के साथ आई थी. वह आई और बालकनी की सफाई करने लगी. महेशजी से रहा नहीं गया, तो उन्होंने इशारे से पूछा कि, “वे कहां हैं?”

उस ने भी इशारों से हाथ ऊपर कर के जवाब दिया कि, “वे अब नहीं रहीं.”

महेशजी का दिल धक से रह गया. उन्होंने उस अकेली पड़ी आरामकुरसी की तरफ देखा और फिर एक बार वो अपनेआप को अकेला महसूस करने लगे.
उन का वो प्यारा सा “अनकहा रिश्ता” अनकहा ही रह गया…

Hindi Short Story

लघु कहानी: बाबाजी का ठुल्लू

लघु कहानी: बाहर गली में लाउडस्पीकर बज रहा था. धूलमिट्टी उड़ाते औटो पर रखे लाउडस्पीकर से आवाज आ रही थी, ‘‘आप सभी को बाबाजी के समागम में आमंत्रित किया जाता है. जहां विशेष कृपा के तौर पर बाबाजी का ठुल्लू दिया जाएगा.

ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंच कर बाबाजी की कृपा का लाभ उठाएं.’’ठुल्लू शब्द उल्लू ज्यादा सुनाई पड़ रहा था पर फिर भी मैसेज जा चुका था कि कोई विशेष कार्यक्रम ही होगा तभी इतनी जोरशोर से प्रचार हो रहा है.

जो ‘कौमेडी नाइट विद कपिल’ देखते हैं वे तो समझ गए पर जो नहीं देखते थे वे कार्यक्रम का हिस्सा बन गए.भव्य पंडाल सजा था. आसपास श्रद्धा की दुकानें सजी थीं, जिन में धूप, मालाएं, धार्मिक ग्रंथ, हवन सामग्री आदि मिल रही थी और साथ ही सजी थीं खानेपीने की दुकानें.

बाहर से तो ऐसा लग रहा था जैसे कोई शादीब्याह का आयोजन हो. एक बार को लगा कहीं गलत जगह तो नहीं आ गए पर पता तो यही था. बाबाजी का आने का समय 4 बजे का था. 7 बज रहे थे पर उन का अभी तक कोई अतापता न था. भीड़ बढ़ती जा रही थी.

8 बजे 4 गाडि़यां धूलमिट्टी उड़ाती मैदान में पहुंचीं. उन में एक औडी थी, जिस में गेरुआ चोला पहने बाबाजी अपनी धोती संभालते उतरे. उम्र यही कोई 50-55 वर्ष. बाल मिलेजुले सफेदकाले. चेहरे की चमक किसी महंगे ब्यूटीपार्लर का इश्तिहार लग रही थी जैसे अभी वहां से फेशियल करवा कर आए हों.‘‘बाबाजी की जय हो,’’ समर्थकों ने जोरजोर से नारे लगाने शुरू कर दिए.

लोग उत्सुकतावश बाबाजी की ओर ऐसे देख रहे थे जैसे वे कोई अजूबा हों.बाबाजी हाथ उठा कर बहुत आत्मविश्वास के साथ बोले, ‘‘मैं कुछ नहीं करता, भगवान मुझ से करवाता है. जब तक उस का हुक्म न हो तब तक मैं यहां आ ही नहीं सकता.’’पूरी बात जनता के पल्ले नहीं पड़ी. पर जोरदार तालियों से आभास हो गया शायद कोई बहुत बड़ी बात कही है.

‘‘बाबाजी आज आप सब को एक विशेष कृपा प्रदान करेंगे. ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंच कर आप ने जो विश्वास बाबाजी पर जताया है वह काबिलेतारिफ है.’’समर्थक 1-1 कर के बाबाजी की प्रशंसा के पुल बांधते हुए अपनी बात आगे रखने लगे.तभी एक तरफ खुसुरफुसुर शुरू हो गई.‘‘कृपया शांत बैठें…जो कुछ कहना चाहते हैं कृपया माइक पर कहें.’’कुछ श्रोता आपस में लड़ रहे थे, ‘‘मैं बोलूंगा, मैं बोलूंगा.’’‘‘सभी को मौका दिया जाएगा,’’ ऐसा कह कर एक समर्थक ने माइक एक स्मार्ट, पढ़ेलिखे दिखने वाले सज्जन को पकड़ा दिया.‘‘गुरुदेव आप की सेवा में मेरा कोटिकोटि प्रणाम स्वीकार हो.

मुझे कई सालों से शुगर और ब्लडप्रैशर की बीमारी थी, जो आप की विशेष कृपा से ठीक हो गई.’’शुगर और ब्लडप्रैशर वाले मरीज खुश थे कि हम यहां आ गए तो हमारी भी बीमारी ठीक हो जाएगी.इस के साथ ही समर्थक फिर ‘बाबाजी की जय हो’ दोहराने लगे.‘‘मुझ में ऐसा कुछ नहीं है. परमात्मा परम ज्ञानी हैं,’’ बाबाजी का इतना बोलना था कि लोग फिर जोरजोर से तालियां बजाने लगे.कई लोग जो पहली बार आए थे, थोड़े कनफ्यूज दिखे कि ऐसा कैसे हो गया? यह तो शुरुआत थी.

फिर एक महिला ने माइक पकड़ा और कहा, ‘‘बाबाजी, गृहस्थी चलानी बहुत मुश्किल हो गई है…इतनी महंगाई है कि प्याज तो अब सपने की बात हो गई है और टमाटर तो कीमत से और लाल हुए पड़े हैं,’’ बाबाजी हाथ उठाते हुए बोले, ‘‘प्याज खाना कोई फायदे की बात नहीं है. इसे छीलो तो आंसू निकलते हैं और काटो तो जेब कटती है. मुझे देखो मैं ने इस की तरफ कभी आंख उठा कर भी नहीं देखा.’’समर्थक बोले, ‘‘बाबाजी के नक्शेकदम पर चलो, आंखें भी खुश रहेंगी और जेब भी.’’इस के साथ ही वही तालियां, वही नारा और वही समर्थकों का जोश.

माइक वाली महिला कुछ समझ कुछ नहीं और फिर बगले झंकते हुए बैठ गई. तालियों से शायद उसे अंदाजा हो गया था कि बाबाजी बहुत पहुंचे हुए हैं.तभी माइक एक बच्चे को दिया गया. बोला, ‘‘बाबाजी, मैं पेपरों से पहले बीमार पड़ गया था और यह आप की कृपा ही होगी कि मैं ने 20 नंबर का प्रश्नपत्र हल कर लिया और मेरे 40 नंबर आ गए.’’जनता फिर उल्लू की तरह कभी इधर देखती तो कभी उधर, पर उसे समझ नहीं आया कि यह कैसे हो गया.

जो इन सब बातों की सचाई जानना चाहते थे उन्हें कोई माइक नहीं दे रहा था.रात का 1 बज गया. बाबाजी को नींद आने लगी, तो समागम के समापन की घोषणा हो गई और लाउडस्पीकर पर ‘बजरंगी हमारी सुध लेना भुला नहीं देना, विनय तोहे बारबार है…’ भजन चलाया गया और समर्थक स्टेज पर हाथ उठाउठा कर नाचने लगे.

सब अपने आसपास के लोगों की देखादेखी नाचने लगे. उन के बजरंगी जा चुके थे अपने नए अवतार में, जिस में उन्होंने एक पैर जमीन पर रखा हुआ है और एक लोगों के दिल पर. और अपने बलशाली हाथों पर लोगों का दिमाग रख कर अपनी औडी में उड़ गए.

जिन्होंने माइक पर बोला था स्टेज के पीछे उन्हें पैसे बांटे जा रहे थे. पंडाल वाला भी खुश था कि अगली बार ज्यादा कमाई हो जाएगी. बड़ा पंडाल जो लगाना है.खाने के खोमचे वालों की चांदी हो गई. बाबा के इंतजार में लोगों ने खा कर ही टाइमपास किया.अंत में एक समर्थक ने माइक पर घोषणा की कि अगला कार्यक्रम 15 दिन बाद होगा. अपने साथ अपने पूरे परिवार को लाएं और बाबाजी के उल्लू उफ, सौरी ठुल्लू का सीक्वल पाएं.

लघु कहानी

Best Hindi Story: उन की फेसबुकिया फ्रैंड्स

Best Hindi Story: जब हमारे मित्र हो सकते हैं तो उन की सहेलियां होना भी वाजिब है. मगर यह शब्द उस समय गले नहीं उतरता जब सारा दिन औफिस में मरखप कर आने के बाद हमें एक प्याली चाय के साथ साफसुथरे बिस्तर पर थोड़ा आराम करने की सख्त आवश्यकता होती है और बैठक में घुसते ही हमें ऐसा लगता है जैसे वहां अभीअभी संसद की काररवाई समाप्त हुई हो या हमारी बैठक से बजरंग दल की यात्रा गुजरी हो जो रास्ते में जो मिला नाटक करती जाती है.

चारों तरफ बिखरे कप और प्लेटें, सोफों पर गिरी चाय, फर्श पर बिखरी पानी की बोतलें और गिलास देख कर ऐसा लगता है मानो उन की सहेलियों की सभ्यता के सारे के सारे प्रतीकात्मक चिह्न वहां मौजूद हों.फिर उस वक्त तो बड़ी ही कोफ्त होती है जब औफिस से लौटते हुए ट्रैफिक जामों से जूझते हुए सारे रास्ते चिलचिलाती धूप से गला सूख जाता है और घर पर फ्रिज से पानी की सारी बोतलें तथा बर्फ की सारी ट्रे नदारद मिलती हैं.
फिर हमें झक मार कर टैंक के नल से आ रहे गरम पानी को पी कर ही अपने दिल को सांत्वना देनी पड़ती है.इन सारी बातों को हम सरकारी जीएसटी की तरह बरदाश्त कर जाते हैं और बड़ी शालीनता के साथ अपनी उन से यानी श्रीमतीजी से एक प्याला चाय की फरमाइश करते हैं क्योंकि हमें गरमी में भी चाय पीने की आदत है और एक वे हैं कि हमारी फरमाइश को नजरअंदाज करते हुए गुसलखाने में घुस जाती हैं.

5-6 बार याद दिलाने मेरा मतलब है कि आवाजें लगाने पर करीब 1 घंटे बाद हमारी वे तौलिए से हाथ पोंछती हुई आ कर कहती हैं, ‘‘क्या है… घर में घुसे नहीं कि चिल्लाना शुरूकर दिया.’’फिर हम उन्हें मनाने की गरज से अपने मतलब की बात न कह कर यह कहते हैं,‘‘क्या कर रही थीं. बहुत थकी हुई दिखाई पड़ रही हो.’’‘‘कुछ नहीं, जरा साड़ी धो रही थी.सुशीला की बच्ची ने गंदी कर दी थी. मैं नेसोचा, धो कर अभी डाल दूं वरना नई साड़ी खराब हो जाएगी.’’‘‘तो क्या वह साड़ी… मेरा मतलब है, कल जो क्व8 हजार की नई साड़ी लाया था वह खराब हो गई?’’ हम अपना सिर थाम लेते हैं.

हमारी समझ में नहीं आता कि उसे घर में पहनने की क्या जरूरत थी.‘‘अब छोडि़ए भी. कुछ सहेलियां आ गई थीं. सो पहन ली. फिर वह तो नासमझ बच्ची थी. अगर उस की जगह अपनी बच्ची होती तो?’’उन का चेहरा शर्म से लाल हो जाता है क्योंकि फैमिली प्लानिंग के चक्कर में हमारे एक भी बच्चा नहीं है. अभी मैडम को नौकरी नहीं मिली है पर ढूंढ़ रही हैं और एक बच्चे की खातिर अपनी एमए बीएड की पढ़ाई को बरबाद नहीं करना चाहतीं.

फिर हम उन्हें कंधे से पकड़ कर बड़े प्यार से याद दिलाते हैं कि दफ्तर से आए लगभग डेढ़ घंटे से भी अधिक हो चुका है. 2 कप कौफी बनाए 1 घंटा हो गया. आप की कौफी को 2 बार गरम कर चुका हूं.इस से ज्यादा और कुछ कहने की हमारी हिम्मत नहीं होती क्योंकि आजकल देश में गवर्नमैंट तो पौराणिक है, पर घरों में स्त्री राज चलने लगा है.

क्या पता कब हमारा कोर्ट मार्शल हो जाए यानी वे हमें छोड़ कर मायके चली जाएं या अपना घर ले लें. पिछली बार जब वे गई थीं तो पूरे महीने में अपने सारे दोस्तों, आसपास के लोगों को, नानीपरनानी को ही नहीं, अपनी ननिहाल में होने वाली पहली नानी तक को याद करता रहा था.वे हमें बैठक की सफाई के लिए कहकर रसोईघर की ओर बढ़ जाती हैं.

मरता क्या नहीं करेगा. बैठक में प्याले समेटते समय हम सोचते हैं कि आज के जमाने में अच्छा घरहोना, सुखसुविधा के साधन होना भी सिरदर्द है और कम से कम जो सिरदर्द हमें है वह तोइस पंखे, एसी, फ्रिज और टैलीविजन और सबसे बड़ा व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम की ही देन है और इस सिरदर्द में सब से बड़ा योगदान हैहमारी उन की रोज नई बनने वाली फेसबुक सहेलियों का.एक दिन की बात है.

हम सिर में दर्दहोने के कारण दफ्तर से छुट्टी ले कर घर आगए थे. उस दिन पहली बार हम ने अपनी मैडम के सहेली मंडल के दर्शन अपने कमरे में लगे दरवाजे के चाबी वाले सूराख में से किए थे.इन लोगों का विचार था कि हम सो रहे हैं.

भला आप ही बताइए जब ऐसी महान हस्तियां, जिन्होंने हमारा रात और दिन का चैन हराम कर रखा हो, घर में मौजूद हों तो हम कैसे सोसकते हैं.वार्त्तालाप अपनी चरम सीमा पर था, ‘‘फलाना ऐसा है… फलाना वैसा है… इस बार ऊंटी में रिजौर्ट खुला है, ग्रेटर कैलाश में एक डिस्को चालू हुआ है वगैरहवगैरह.’’हम चुपचाप अपने पलंग पर लेट गए थे. वार्त्तालाप के दौरान भावावेश में ऊंचे स्वर में बोले गए शब्द तथा हर 5 मिनट बाद जोरदार ठहाके हमारे कानों में पड़ रहे थे.

उस दिन उन की सहेलियों के वार्त्तालाप का नमूना सुन कर हम ने यह अंदाजा लगाया कि उन की सहेलियों के मध्य होने वाले घंटों वार्त्तालाप में न कोई मतलब की बात होती है और न ही उन का आपस में कोई संबंध होता है. बस वही घिसीपिटी बातें, ‘‘उस की शक्ल कितनी अच्छी है, शक्ल न सूरत, उस पर ऐसा भयंकर मेकअप तोबा आदि.’’हां, एक बात जरूर उस दिन हमारी सम?ा में आ गई थी कि ये औरतें एक कुशल आलोचक होती हैं.

क्या मजाल जो वहां बैठी औरतों को छोड़ महल्ले की कोई भी औरत उन की आलोचना का शिकार हुए बगैर रह जाए और यही नहीं, गेहूं के साथ घुन यानी उन औरतों के साथ उन के पतियों का भी क्रियाकर्म ये लगे हाथों कर डालती हैं.

आखिर उस दिन की कृपादृष्टि हम परभी हो ही गई. बैठक समाप्त होने के बाद हमारी श्रीमतीजी धड़धड़ाती हुई अंदर आईं और बगैर कहीं कौमा या विराम लगाए लगातार बोलती्रही चली गईं, ‘‘क्यों जी, आजकल, दफ्तर की स्टैनो के साथ क्या गुलछर्रे उड़ाए जा रहे हैं.मैं भी कहूं रोज दफ्तर से लौटने में देर क्यों हो जाती है.

कान खोल कर सुन लो, अगर फिर उस कलमुंही के साथ कहीं इधरउधर गए तो ठीक नहीं होगा.’’रमा बता रही थी कि उस ने हमाराऔफिस पार्टी का एक फोटो फेसबुक पर देखा था जिस में हम मैंसी के साथ चिपके खड़ेखड़े देख रहे थे. शायद उन की किसी सहेली ने उन सेकह दिया था कि हम एक दिन अपने दफ्तर की स्टैनो के साथ काफी हाउस में बैठे थे जबकि हम कभी स्टैनो के साथ वहां गए ही नहीं थे.

हम ने बहुतेरा समझने की कोशिश की, पर सब बेकार. हम जितना खंडन करते उन का पारा उतना ही और चढ़ता जाता और फिर तो उन्होंने पुलिस में डोमैस्टिक वायलैंस की शिकायत की धमकी दे डाली. महीनेभर तक अपने हाथों की जलीभूनी रोटियां खिला कर उन की सहेलियों को कोसते रहे और उन की सेवा करते रहे.

पर हम पतियों की सब से बड़ी कमजोरी यही होती है कि शाम को 2 घंटे पत्नियों का लंबाचौड़ा भाषण सुनने के बाद जब हमें उन के हाथों की बनी गरमगरम मुलायम रोटियां मिल जाती हैं तो हमारा सारा ताब उसी तरह गायब हो जाता है जैसे आजकल राशन की दुकान से शक्कर.

अब जब हम ने उन्हें राजस्थान के जोधपुर में घुमा लाने का वादा किया तो वे मानीं और हमारी जान में जान आई और हम बाज आए. आइए, उन की सहेलियों के बारे में कुछ कहने या नैन्सी से हंसीमजाक करने से.

Best Hindi Story

Drama Story in Hindi: चालू बहू के सासू मंत्र

Drama Story in Hindi: इस दुनिया में सास से इतना डरने की क्या जरूरत है? आखिरकार वे भी तो कभी बहू थीं और बहू को भी देरसवेर सास तो बनना ही है. लेकिन ससुराल में अपना वर्चस्व कायम करना है तो सास को पटाना जरूरी है. इस के लिए घर की इस लाइफलाइन को सही ढंग से पकड़ना है, उस के हर उतारचढ़ाव पर नजर रखनी है और उस पर कितना दबाव डालना है इस का भी सहीसही अनुमान लगाना है. पेश हैं सास को पटाने के लिए आजमाए हुए कुछ नुसखे, जो एक बहू की जिंदगी को खुशियों से भर देंगे.

नुसखा नं. 1: आप सही कहती हैं सासू मौम. इस अद्वितीय मंत्र का जाप आप दिन में 10-15 बार करो. वे अगर दिन को रात कहें तो रात कहो. पर ध्यान रखो कि सास भी कभी बहू थी.

नुसखा नं. 2: चाणक्य नीति. सास का

मूड देख कर बात करो. अगर उन का मूड अच्छा है तो माने जाने की संभावना से अपने मन की बात कही जा सकती है. अगर वे मना कर दें तो तुरंत पलट जाओ, हां मम्मीजी, मैं भी यही सोच रही थी.

नुसखा नं. 3: भोली सूरत चालाक मूरत. सब से पहले इस में आप को करना यह है कि अपनेआप को ऐसा दिखाना है कि जैसे आप को कुछ आता ही नहीं है. सहीगलत की समझ ही नहीं है. एकदम भोंदू हैं आप. ऐसे लोगों को सिखाने में सिखाने वालों को बड़ा मजा आता है. यह तो सीखने वाला ही जानता है कि उस ने कितने घाट का पानी पिया है. सास अगर घर की प्रधानमंत्री हैं तो रहने दो. आप बस प्रैसिडैंट वाली कुरसी पर नजर रखो. इस बात को एक उदाहरण से समझे:

द्य सुबह जल्दी उठने के बजाय अपने टाइम पर उठो और जल्दीजल्दी पल्लू संभालते हुए सासू मौम के पास जा कर ऐसे दिखाओ कि आप तो जल्दी उठना चाहती थीं पर… आप का दिल आप का साथ नहीं देता, बस दगा ही देता है.

‘देखो मां अलार्म ही नहीं बजा, मोबाइल की बैटरी भी आज ही डाउन होनी थी,’ इस वाक्य को अच्छे से कंठस्थ कर लो, क्योंकि यह बहुत काम आएगा. सास को भला आजकल का स्मार्ट फोन चलाना कहां आता है. एक हफ्ता ऐसे ही बहाने बना लो और जरूरत पड़े तो नैट पर बहाने सर्च कर लो. एक हफ्ते बाद देखना सास टोकना बंद कर देंगी. फिर बहू का मोबाइल चार्जिंग के लिए लगाना शुरू कर देंगी.

नुसखा नं. 4: बारीक निरीक्षण. इस में आप को देखना है कि किस कैटेगरी की सास आप को मिली हैं, धार्मिक या मौडर्न.

धार्मिक हैं तो थोड़ी मुस्तैदी दिखा कर 2-4 भजन याद कर लो. गूगल है न आप की मदद के लिए. आप को कोई संगीत अवार्ड थोड़े ही जीतना है. आप को तो बस अपनी सास के दिल में जगह बनानी है. फिर क्या? उन की कीर्तन मंडली में थोड़ी नानुकर कर के अपनी आवाज का जादू बिखेरो. फिर देखो लोग कैसे आप की वाहवाही करते हैं. बहू के ऐसा करने पर सास का सीना तो गर्व से फूल जाता है. वे वारीवारी जाती हैं अपनी बहू पर. पर आप को इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देना है. हाथ जोड़ कर ‘कहां मैं, कहां सासूमां’ वाली चाणक्य नीति अपनाए रखनी है.

नुसखा नं. 5: तारीफ पर तारीफ. बस यही एक अच्छी बहू की निशानी है. उसे सास की दबी इच्छाओं को नए सिरे से उभारना है. वे जो भी बनाएं जैसा भी बनाएं उन की पाक कला पर उंगली उठाने की कोशिश नहीं करनी है. वरना बतौर इनाम आप को ही रसोई में पिसना पड़ेगा.

नुसखा नं. 6: अपनी तारीफ को कभी सीरियसली न लें. आप के बनाए खाने की चाहे कितनी भी तारीफ हो उसे नजरअंदाज ही करें. वरना घर को एक परमानैंट कुक मिल जाएगा और घर के सभी सदस्य उस की तारीफ कर के उस शैफ बहू को रसोई में अपनी फरमाइशों में ही उल?ाए रखेंगे.

आप को जबतब ‘मम्मीजी आप के खाने का जवाब नहीं. काश, मैं ऐसा खाना बना पाती,’ सिर्फ कहना है करना नहीं है. ‘आप तो मेरी मम्मी से भी ज्यादा अच्छा खाना बनाती हैं,’ आप के यह कहने पर तो आप की सास फूल कर कुप्पा हो जाएंगी और आप को रसोई से छुट्टी मिल जाएगी. ऐसा होने पर अकसर होता यही है कि सास का बस चले तो बहू को खिलाखिला कर ही मार डाले.

नुसखा नं. 7: स्मार्ट बनें. इस में आप को अपने ज्ञान को कदमकदम पर इस्तेमाल करना है. सारे ब्यूटी ट्रीटमैंट सास पर आजमाने हैं. कहीं जाने से पहले उन का फेशियल कर दें. उन्हें अच्छे से तैयार कर दें. सुंदर सा जूड़ा बना दें. इन सब कामों में तो हर बहू परफैक्ट होती ही है.

नुसखा नं. 8: खर्चा करें. सास को बहू का उन पर खर्चा करना अच्छा लगता है. इसलिए मौकों पर अगर बहू सास को उपहार दे तो सास तो बहू पर वारीवारी जाएगी.

नुसखा नं. 9: वाचाल बनो. वक्त देख कर सही बात करने का हुनर विकसित करो. औफिस में काम करती हो तो आराम से दोस्तों के साथ तफरीह कर के आओ और घर में घुसते ही ऐसे दिखाओ जैसे औफिस से घर पहुंच कर पता नहीं कितनी बड़ी जंग जीत ली या कोई किला फतह कर लिया.

रोनी सूरत और भोली मूरत दर्शाते हुए, इस से पहले कि कोई आप पर चढ़े आप शुरू हो जाएं, ‘‘हाय राम आज फिर देर हो गई. सौरी मम्मीजी ये ट्रैफिक भी न… कोई साइड ही नहीं देता. अगर वह गाड़ी वाला थोड़ा रुक जाता तो क्या हो जाता उस का… आदिआदि.’’

नुसखा नं. 10: गुरुघंटाल बनो. यानी बातें ज्यादा काम कम. एक बात को बारबार दोहराओगे तो वह भी सही लगने लगेगी. कुछ भी पकाओ तो पहले ही बोलना शुरू कर दो, ‘‘मुझे पता है कि आज खाना स्वादिष्ठ नहीं बना है. मम्मीजी (सास) तो बहुत टेस्टी खाना बनाती हैं. मैं जाने कब सीख पाऊंगी? शायद इस जनम में तो नहीं.’’

चेहरे पर ऐसे भाव लाओ कि सब की दयादृष्टि आप की झोली में ही गिरे. सास तो अपनी तारीफ सुन कर फूल कर कुप्पा हो जाएंगी और कहेंगी, ‘‘बेटा, मैं तुझे सिखाऊंगी.’’

बस यह मौका हाथ से नहीं जाने देना है. खुशीखुशी उन की विद्यार्थी बन जाओ. रसोई में जा कर बस थोड़ा हाथ हिला दो और तारीफ खूब बटोर लो. अगर पति खाने में कोई कमी निकालें तो साफ मुकर जाओ यह बोल कर कि मम्मी ने बनाया है. अब बेचारे पति अपनी मां से थोड़े ही कुछ कहेंगे.

आप में से कई लोग सोचेंगे कि क्या ये नुसखे काम आएंगे? जी हां शतप्रतिशत काम आएंगे. यह बात और है कि सब बहुओं की किस्मत इतनी अच्छी नहीं होती कि उन्हें गाइड करने वाला मिल जाए.

अंत में गुरु मंत्र: विपक्षी पार्टी को कमजोर समझने की भूल नहीं करनी है. अगर आप की चालाकी पकड़ी जाए तो दांत दिखा कर हंसते

हुए कहना है, ‘‘मम्मीजी मैं तो मजाक कर रही थी. मेरा वह मतलब नहीं था, जो आप सम?ा रही हैं. पर देखो आप ने मेरी चोरी पकड़ ली. आप महान हैं. आप ने तो सीआईडी वालों को भी पीछे छोड़ दिया आदिआदि. बस तारीफ पर तारीफ.’’

डरने की क्या बात है सास से? ये नुसखे जान कर कोई बहू नहीं डरती अपनी सास से. बस इतनी सी गुजारिश है बहुओं आप से कि इन्हें अपनी सासों से छिपा कर रखना वरना… वरना कुछ भी हो सकता है.

Drama Story in Hindi

Family Story in Hindi: घर में चोर- क्या पकड़ा गया चोर?

Family Story in Hindi: एकबार यों हुआ कि हमारे पासपड़ोस में धड़ाधड़ चोरियां होने लगीं. चोरियां किसी योजनाबद्ध ढंग से होतीं तो किसी को ताज्जुबन होता. किंतु चोर इतने बौखलाए हुए थे कि एक दिन जिस घर में चोरी कर जाते तीसरे दिन फिर उसी घर में सेंध लगाने पहुंच जाते. परिणामस्वरूप वहां उन्हें उसी माल से साबिका पड़ता जिसे 2 दिन पहले वे रद्दी सम?ा कर छोड़ गए थे. उदाहरण के लिए दीवाने गालिब, गीतांजलि आदि.

अत: हमारे महल्ले के एक महानुभाव ने एहतियात के तौर पर अपने मकान के बाहर गत्ते पर यह लिख कर लटका दिया, ‘इस घर

में एक बार पहले चोरी हो चुकी है. कृपया अब कोई और घर देखें. सितारों से आगे जहान और भी है.’

मैं ने उन महानुभाव से पूछा, ‘‘आप ने हिंदी और अंगरेजी में लिखा, उर्दू में क्यों नहीं लिखा?’’

वे बोले, ‘‘अजी, वह शेरोशायरी की भाषा है, चोरों के पल्ले क्या खाक पड़ती? जो

भी हो, चोरों ने चोरी की भी डैमोके्रसी समझो कर जब उस का बिना खटके प्रयोग शुरू कर दिया तो मेरी एकमात्र अद्वितीय बीवी ने माथे पर दोहत्थड़ मार कर कहा, ‘‘हाय, इस घर में आ कर तो मेरे भाग्य फूट गए.’’

मैं ने कहा, ‘‘जनाब, यह तो बीवियों का शताब्दियों पुराना वाक्य है. नई कविता के लहजे में ताकि उसे बिना समझे दाद दी जा सके और सम?ाने का कार्य आने वाली शताब्दियों पर छोड़ा जा सके.’’

वह बोली, ‘‘मैं ने आप से शादी की है और आप मुझो से मजाक कर रहे हैं.

मैं ने उत्तर दिया, ‘‘मजाक बिलकुल आगे नहीं. शादी तो मजाक की कब्र है. अब फरमाइए?’’

‘‘फरमाऊं क्या खाक? हर घर चोरियां हो रही हैं. मगर हमारे भाग्य निगोड़ा एक चोर भी नहीं.’’

मेरे जी में आया कह दूं, ‘डार्लिंग, तुम जो इस घर में हो, फिर चोर की क्या जरूरत है?’ सूचनार्थ निवेदन है कि मेरी जेब की रेजगारी प्राय: मेरी बीवी के खाते में चली जाती है, क्योंकि शादी के समय पवित्र अग्नि के फेरे लेते हुए हम दोनों ने शपथ ली थी कि हम एकदूसरे के सुखदुख में हिस्सा बंटाते रहेंगे.

इस शपथ का हम दोनों बराबर निर्वाह कर रहे हैं. फर्क इतना है कि वह दुख देती रहती है और सुख देने की ड्यूटी मेरे जिम्मे लगा रखी है.

मगर मैं घर के इस चोर साथी की बात जबान पर नहीं ला सका, क्योंकि अनुभव से सीखा था कि गृहस्थ जीवन एक शतरंज है. एक ऐसी शतरंज जिस में मात हमेशा पति की होती है. अत: मैं ने बीवी से कहा, ‘‘प्रिय, चोर का प्रबंध करना मेरे लिए बाएं हाथ का खेल है. मैं समाज का बड़ा प्रभावशाली व्यक्ति हूं. अभी पुलिस थाने में टैलीफोन कर दूं तो आधा घंटे में एक छोड़ दर्जन चोर पहुंच जाएंगे. वहां चोरों का बहुत बड़ा स्टौक रहता है.

मेरी यह वीरतापूर्ण घोषणा सुन कर मेरी बीवी 25 वर्ष बाद फिर मुझ पर फिदा हो गई. उस का एक बोसा मु?ा पर अंगड़ाई सी लेता हुआ मालूम हुआ. मगर मैं ने यह कह कर उसे टाल दिया कि पहले चोर आ जाए, बोसा उस के बाद सही और वैसे भी उस के बाद हमारे पास बोसे के सिवा और कौन सी चीज बाकी रह जाएगी.

फिर मैं ने सोचा कि थाने को फोन करने के बाद अगर चोर सचमुच आ गया तो हमारे घर में है ही क्या जो ले जाएगा. पिछले दिनों एक शायर के घर में चोर घुस आया था. उसे वहां से न तसवीरे बुतां मिली, न हसीनों के खुतूत, जिन की बिना पर वह शायर को ब्लैकमेल कर सकता. सुबह खाली हाथ लौटने पर उस ने मुंह से ?ाग वगैरह बहाए और उस की शायरी पर कठोर आलोचना लिख कर चला गया. आश्चर्य है कि उचित सीमा से अधिक पढ़ेलिखे लोग चोर क्यों बन जाते हैं? आलोचक क्यों नहीं बनते?

सहसा याद आया कि पड़ोस में हिंदी के एक कवि के घर चोरी हुई थी. चोर को भ्रम यह था कि आजकल हिंदी में प्रशंसा कम और पैसे अधिक मिलते हैं. उर्दू शायर की तरह नहीं जो गजल सुनाने के बाद जब पैसों की मांग करता है तो संयोजक कहते हैं, ‘‘मुकर्रर, मुकर्रर’’

शायर कहता है, ‘‘पैसे, पैसे.’’

जवाब मिलता है, ‘‘मुकर्रर, मुकर्रर.’’

मतलब यह कि उर्दू शायर को पैसा नहीं मिलता, मुकर्रर मिलता है और चोर इतिहास की सचाई से अच्छी तरह परिचित थे. किसी चोर ने मेरे घर का रुख नहीं किया, क्योंकि मैं भी एक जमाने में शायरी करता था. छोड़ इसलिए दी थी कि वह किसी की समझ में नहीं आती थी. यहां तक कि धीरेधीरे मेरी सम?ा में भी आनी बंद हो गई थी.

अत: मैं ने थाने में टैलीफोन करने से पहले उस हिंदी कवि को टैलीफोन किया और पूछा, ‘‘प्रशांतजी, सुना है आप के निवासस्थान पर चोर पधारा था.’’

वह गर्व से बोले, ‘‘हां, पधारा तो था.’’

मैं ने कहा, ‘‘बड़े खुशकिस्मत हो, यार. इधर हम हैं कि आंखें बिछाए बैठे हैं, लेकिन उन की नजर में चढ़ते ही नहीं. उर्दू में लिखते हैं न. हम पर न समाज की कृपा है न चोर की. मेरी बीवी तो इस गम में सुहाग की चूडि़यां तक तोड़ने पर उतारू है. आप के यहां जो चोर आया था, वह कैसा था?’’

वे बोले, ‘‘बहुत बढि़या. एकदम शानदार.’’

‘‘उस का अतापता बता सकते हो?’’ प्रशांतजी ने बताया, ‘‘मेरी तो उस से नमस्तेवमस्ते भी नहीं हुई, क्योंकि मैं कवि सम्मेलन में गया हुआ था और मेरी बीवी भी वहां वाहवाह करने के लिए पहुंची हुई थी. बच्चे स्कूल गए हुए थे.’’

मैं ने पूछा, ‘‘स्कूल, क्या चोर अब आधुनिक हो गए हैं. रात को सेंध नहीं लगाते, दिनदहाड़े आते हैं. मूल्यवान सूट पहन कर आते हैं. ताला तोड़ते नहीं, बाकायदा चाबी लगा कर खोलते

हैं. इस से चोर मालूम ही नहीं होते, रिश्तेदार मालूम होते हैं और फिर सामान उठा कर यों ले जाते हैं, जैसे चोरी न कर के मकान बदल कर जा रहे हों.’’

फिर मैं ने पूछा, ‘‘तो आप का कौन सा सामान शिफ्ट कर के ले गए?’’

‘‘मेरे सभी नए कपड़े ले गए. फटेपुराने कपड़े छोड़ गए.’’

‘‘कपड़ों के अतिरिक्त और कौन सी फटीपुरानी चीज छोड़ गए?’’

‘‘मेरी बीवी.’’

यह कह कर हिंदी कवि तो हंस दिए, मैं रो दिया. अगर चोरों ने मेरे घर आ कर भी

यही तरीका अपनाया तो… मगर फिर यह सोच कर कुछ आशा बंधी कि हिंदी कवि की बीवी तो दाद देने चली गई थी, मगर मेरी बीवी तो हमेशा घर में रहती है. इसीलिए एहतियात के तौर पर मैं ने चोरों की इस नीति का जिक्र बीवी से नहीं किया और तुरंत पुलिस चौकी का फोन नंबर मिलाने लगा. फोन एगेज निकला. चोरों की ज्यादा मांग और ज्यादा सप्लाई के कारण थाने का टैलीफोन प्राय: ऐंगेज रहने लगा है. इतने में अचानक तड़ाक से एक आवाज आई. आवाज में दहशत थी. फिर क्या देखता हूं कि एक साहब मेरे ड्राइंगरूम के रोशनदान से कूद कर फर्श पर प्रकट हुए और कड़क कर बोले, ‘‘हाथ ऊपर उठाओ.’’

मैं ने पूछा, ‘‘श्रीमान का शुभ नाम?’’

वह बोला, ‘‘मैं चोर हूं.’’

मैं ने चैन की सांस ली और कहा, ‘‘चोर हो? बड़ी देर की मेहरबां आतेआते… मेरी बीवी तो आप को बहुत याद कर रही थी.’’

वह कमीना जैसे राल टपकाते हुए

बोला, ‘‘क्यों?’’

मैं ने कहा, ‘‘निवेदन यह है कि पड़ोसी के घर में फ्रिज आ जाए तो बीवियां ईर्ष्या के

मारे जल उठती हैं. इसी तरह पासपड़ोस में चोर आने लगे तो भी जल उठती हैं कि हमारे भाग्य में एक चोर भी नहीं. अत: श्रीमान, आप हमारे लिए चोर नहीं फ्रिज हैं.’’

वह जलभुन कर बोला, ‘‘चुप रहो और दोनों हाथ ऊपर उठाओ.’’

मैं उस से कुछ कहना चाहता था लेकिन इस डर से कि कहीं बुरा न मान जाए मैं खामोश रहा. बड़ी मुश्किल से तो एक चोर घर आया था उसे भी नाराज कर दूं. मैं ने तुरंत ही एक मनोरंजक बात छेड़ दी. ‘‘जनाब चोर, आप रोशनदान तोड़ कर अंदर क्यों दाखिल हुए? सामने दरवाजे से पधारते तो अपने संबंधी लगते?’’

वह गरदन फुला कर बोला, ‘‘हम चोर हैं. सीधे रास्ते से आना अपना अपमान सम?ाते हैं.’’

मैं ने प्रशंसा में ताली बजाई, ‘मुकर्रर’ तक मुंह से निकल गया. बीवी को, जो चोर के आते ही मेरी पीठ में शरण ले चुकी थी, मैं ने बधाई दी, ‘‘तुम्हारी मनोकामना पूरी हुई. थानेदार का एहसान भी नहीं उठाना पड़ा. चोर खुद पधार गया है. इसे नमस्कार करो.’’

मगर बीवी कांप रही थी. चोर दहाड़ा, ‘‘यह क्या तुम ने ताली और मुकर्रर मुकर्रर लगा रखी है? और यह औरत कौन है?’’

मैं ने कहा, ‘‘यह एक शरणार्थी है.’’

वह गरजा, ‘‘मजाक बंद करो. मैं पूछता हूं, तुम इस के कौन हो?’’

‘‘मैं शरणार्थी शिविर का रखवाला हूं.’’

चोर में सैंस औफ ह्यूमर होती तो मेरे वाक्य की प्रशंसा करता मगर वह आलोचकोंकी सी आंखें निकाल कर बोला, ‘‘मेरा समय नष्ट मत करो. मुझो अभी 3 और घरों में चोरियां करनी हैं. अलमारी की चाबियां निकालो.’’

‘‘मैं आप के साथ चलूंगा और मार्गदर्शन करूंगा.’’

बीवी ने मेरे कान में कहा, ‘‘आप क्यों इस के साथ जा कर अपनी जान खतरे में डालते हैं? इसे अथार्टी लैटर दे दीजिए, खुद चला जाएगा.’’

मु?ो जीवन में पहली बार मालूम हुआ कि बीवी मुझो अलमारी से ज्यादा कीमती समझाती है.

मगर चोर को जैसे शक होने लगा कि हम इधरउधर की बातें कर के उसे टरका रहे हैं. अत: इस बार उस ने चाकू की नोक मेरी बीवी की गरदन पर रख दी और बोला, ‘‘अपना यह सोने का हार अपनेआप उतार कर मेरे हवाले करती हो या मैं खुद ही छीन लूं?’’

भारतीय नारियां गैर मर्दों से सीधे बात करना सभ्यता के विरुद्ध समझती हैं. अत: बीवी मुझो संबोधित करते हुए बोली, ‘‘इसे कह दीजिए कि यह नकली हार है, असली हार तो 7 दिन पहले सड़क पर एक ने छीन लिया था.’’

मगर मालूम होता था कि सभ्यता के विषय में चोर का ज्ञान मेरी बीवी से अधिक विस्तृत था. बोला, ‘‘तुम्हारा सोने के गहनों का डब्बा तो होगा. वह कहां रखा है?’’

चोर जानता था कि हर भारतीय नारी के पास गहनों का डब्बा अवश्य होता है. भारतीय संस्कृति का विद्वान होने के नाते चोर ने चाकू की नोक बीवी की गरदन पर अधिक जोर से दबाई तो पूरी भारतीय संस्कृति बाहर आ गई. बीवी कहने लगी, ‘‘डब्बा बैंक लौकर में है और यह है बैंक की रसीद और चाबी.’’

अब चोर कुछ अधिक तिलमिला उठा. उस ने हम दोनों को जबरदस्त धक्का दे कर फर्श पर गिरा दिया, कुछ इस कोण से कि हम दोनों जैसे गलबहियां से हो गए. गलबहियों का यह आनंद हमें सिर्फ हनीमून में आया था. चोर अब घर की वस्तुएं उलटपलट करने में व्यस्त हो गया. उसे बीवी के पर्स से दोढाई रुपए की रेजगारी मिली, जो मेरी पतलून से पर्स में और पर्स से चोर की मुट्ठी में जा पहुंची थी. कुछ फटेपुराने मैले वस्त्र मिले, जो हम ने बाढ़ पीडि़त लोगों को भेजने के लिए रख छोड़े थे. भेज इसलिए नहीं सके थे क्योंकि इस बीच कपड़ा बेचने वालों ने कपड़ों के मूल्य ढाई गुना बढ़ा दिए थे और हम नहीं चाहते थे कि एक पीडि़त परिवार दूसरे पीडि़त परिवार की सहायता करे. चोर ने मेरी अलमारी की कुछ पुस्तकें फर्श पर बिखेर दी थीं. उठा कर इसलिए नहीं ले गया, क्योंकि मार्केट में साहित्यिक रद्दी का भाव काफी गिर गया था और इस साहित्यिक धरोहर से एक खरबूजा तक नहीं खरीदा जा सकता था.

जब उसे काम की कोई भी वस्तु नहीं मिली तो वापस जाते हुए उस ने गुस्से में दरवाजा इस तरह जोर से बंद किया कि दरवाजे का एक छोटा शीशा टूट गया. बीवी कानाफूसी करते हुए बोली, ‘‘कमबख्त ख्वाहमख्वाह हमारा शीशा भी तोड़ गया. अब नया शीशा लगवाने के लिए पैसे कहां से लाएंगे?’’

चोर ने शायद सुन लिया और दरवाजे से झांक कर वही ढाई रुपए की रेजगारी मेरी बीवी के मुंह पर दे मारी और बोली, ‘‘भूखेनंगो, यह लो मेरी तरफ से नया शीश लगवा लेना.’’

Family Story in Hindi

Dish Washing Hacks: ऐसे चमकाएं घर के बर्तन

Dish Washing Hacks: घर सजाने से लेकर घर को चमकाए रखना बड़ा काम है, जिसमें सबसे जरूरी हिस्सा किचन का होता है. किचन में खाना बनाने से लेकर बर्तनों की सफाई तक सभी बेहद जरूरी होता है. वही अगर बात बर्तन चमकाने की की जाए तो बर्तन चमकाना बड़ा मुश्क‍िल काम है. उस पर अगर बर्तन जल जाए तो और मुसीबत हो जाती है. अगर आपके बर्तन भी जल गए हैं और अपनी उम्र से कुछ ज्यादा ही पुराने लगने लगे हैं तो आज हम आपको कुछ तरीके  बताएंगे, जिनका इस्तेमाल करके आप अपने बर्तनों को बिना किसी परेशानी के साफ कर सकते हैं. साथ ही उन्हें नए जैसी चमक दे सकती हैं.

1. कांच के बर्तन और कप की सफाई के लिए रीठे के पानी का इस्तेमाल करें. इससे आपके कटलरी नई जैसी लगेगी.

2. पीतल के बर्तन साफ करने के लिए नींबू को आधा काट लें व इस पर नमक छिड़ककर बर्तनों पर रगड़ने से आपके बर्तन चमकने लगेंगे. साथ ही आपके किचन खूबसूरत भी लगेगा.f

3. बर्तनों पर जमे मैल को साफ करने के लिए पानी में थोड़ा-सा सिरका व नींबू का रस डालकर उबाल लें. इससे आपके बर्तन हाइजीन फ्री और क्लीन हो जाएंगे.

4. जले हुए बर्तनों को साफ करने के लिए उसमें एक प्याज डालकर अच्छी तरह उबाल लें. फिर बर्तन साबुन से साफ करें. आपके जले हुए बर्तन दोबारा नए जैसे लगने लगेंगे.

5. एल्यूमीनियम के बर्तनों को चमकाने के लिए बर्तन धोने वाले पाउडर में थोड़ा-सा नमक मिलाकर बर्तनों को साफ करें. ये आपके बर्तनों को बिना नुकसान पहुंचाए क्लीन करेगा.

6. प्याज का रस और सिरका बराबर मात्रा में लेकर स्टील के बर्तनों पर रगड़ने से बर्तन चमकने लगते हैं.

7. प्रेशर कुकर में लगे दाग-धब्बों को साफ करने के लिए कुकर में पानी, 1 चम्मच वौशिंग पाउडर व आधा नींबू डालकर उबाल लें. बाद में बर्तन साफ करने वाले स्क्रबर से हल्का रगड़कर साफ कर लें.

8. चिकनाई वाले बर्तनों को साफ करने के लिए सिरका कपड़े में लेकर रगड़ें, फिर साबुन से अच्छी तरह धोएं.

Dish Washing Hacks

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