वीडियो ब्लौगिंग कैमरा कौम्पैक्ट साइज ईजी केयर

ब्लौगिंग का दौर चल रहा है. हर कोई सोशल मीडिया पर छा जाना चाहता है. लेकिन छाना आसान नहीं. इस के लिए बेहतर इक्विपमैंट की जरूरत होती है. इस में आप की मदद करते हैं गोप्रो कैमरा, जिन्हें ऐक्शन कैमरा भी कहा जाता है.

ये कंपैटिबल होते हैं. कहीं भी फिट हो जाते हैं. इन्हें कैरी करना भी बहुत ही आसान होता है. इन के आ जाने से आप को खुद को शूट करने के लिए किसी दूसरे की जरूरत नहीं पड़ती. बस, इसे किसी ट्राईपोड, हैलमेट या जहां भी आप चाहते हैं वहां हुक कीजिए और चल निकलिए वीडियो ब्लौग बनाने. ये इतने छोटे होते हैं कि आसानी से पौकेट में फिट हो जाते हैं.

कई भारतीय ट्रैवलर्स अपनी यात्राओं के बारे में इन्हीं छोटे ऐक्शन कैमरों की मदद से ब्लौग बनाते आए हैं और बना रहे हैं. साथ में, खासा पैसा भी कमा रहे हैं.

जैसे, मोहित मनोचा जिन के यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवलिंग देसी’ पर 2.42 मिलियन यानी 24 लाख और इंस्टाग्राम पर 5 लाख 62 हजार फौलोअर्स हैं. वहीं, वरुन वागीश को यूट्यूब पर लगभग 15 लाख लोग फौलो करते हैं और इंस्टाग्राम पर उन के 2 लाख फौलोअर्स हैं. तान्या कनीजोव, जोकि एक सोलो ट्रैवलर हैं, के यूट्यूब पर 9 लाख 85 हजार सब्सक्राइबर्स हैं. ऐसे ही कितने ट्रैवलर्स बिना किसी की मदद के वीडियो बना रहे हैं और फेमस हो रहे हैं.

सोशल मीडिया के इस दौर में अलगअलग तरह के ब्लौग बनाने के लिए ऐसे ब्लौगिंग कैमरे के बारे में जानिए जिन की मदद से आप सोलो चलते, रुकते, बात करते हुए बेहतर वीडियो बना सकते हैं. इन्हें गोप्रो कैमरा कहा जाता है.

मार्केट में इस वक्त ढेर सारे ऐक्शन कैमरा या कहें गोप्रो कैमरा मौजूद हैं. अपनी पसंद और बजट के अनुसार उन में से आप किसी को भी चुन सकते हैं. ये कैमरे आप को मार्केट में 2 हजार से ले कर 1.5 लाख रुपए तक की रेंज में मिल जाते हैं. ये अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी वैबसाइट पर मौजूद हैं. आप इन्हें औफलाइन भी खरीद सकते हैं, जैसे-

अयुशा 4के ऐक्शन कैमरा : इस की कीमत 2 हजार रुपए है. यह कैमरा 16 मैगापिक्सल पिक्चर क्वालिटी के साथ, अल्ट्रावौइड एंगल लैंस के साथ, 98 फुट/30 मीटर की गहराई तक वाटरप्रूफ सिक्योरिटी देने वाला है. 4के/30 एफपीएस रेजोल्यूशन के साथ यह गोप्रो कैमरा कम बजट में आप को ब्लौगिंग के मौके देता है. ब्लौगिंग में अपनी शुरुआत करने वाले के लिए यह एक अच्छा औप्शन हो सकता है पर इतने बजट में बहुत ज्यादा उम्मीदें आप को निराश कर सकती हैं.

फिटस्पार्क ईगल आई12 रियल : 4केञ्च वाईफाई ऐक्शन कैमरा 20 मैगापिक्सल के अल्ट्रा एचडी 170 डिग्री वाइड एंगल लैंस सपोर्ट के साथ 6 हजार रुपए के भीतर आने वाला परफैक्ट ऐक्शन कैमरा है. यह टौर्च और टाइप सी एक्सटर्नल माइक सपोर्ट के साथ उपलब्ध है.

जेडवी 1 एफ : अगर आप अपना बजट बढ़ा कर चल रहे हैं और प्रोफैशनली चीजों को ले कर जाना चाहते हैं तो सोनी का जेडवी 1एफ कैमरा लें. यह 62 हजार रुपए की रेंज में मिल जाता है. यह वीडियो बनाने के लिए एक परफैक्ट ऐक्शन कैमरा है जो सी टाइप पोर्ट के साथ आता है. 20 मैगापिक्सल कैमरा के साथ, 1.5 इंच सैंसर भी इस में उपलब्ध है.

मजेदार बात यह है कि इस के डिस्प्ले को घुमाया जा सकता है. औटो फोकस के साथ ईजी टू यूज और 4के रेजोल्यूशन के साथ परफैक्ट रिकौर्डिंग एक्सपीरियंस के लिए खरीदा जा सकता है.

कैनन पावरशौट वी10 : यह कैमरा इतना हलका होता है कि आप भूल जाएंगे कि यह आप के बैग में है, ऐसा कहना है कैनन इंडिया का, कैनन पावरशौट वी10 ऐक्शन कैमरा के लिए. 4के प्रोफैशनल क्वालिटी वीडियो के लिए 39 हजार के लगभग की कीमत वाला यह ब्लौगिंग कैमरा इमेज स्टेबिलाइजेशन और परफैक्ट माइक्रोफोन रिकौर्डिंग के साथसाथ वाइड एंगल लैंस, फेस ट्रैकिंग और स्मूथ स्किन टोन मोड के जरिए आप को ब्लौगिंग के स्मूथ एक्सपीरियंस कराता है.

डीजेआई ओएसएमओ पौकेट 2 : अगर आप एक वीडियो पावरहाउस चाहते हैं शूटिंग मोड और सुविधाओं के पूरे शूट के साथ तो डीजेआई ओएसएमओ पौकेट 2 इस के लिए एक अच्छा औप्शन है. पौकेट के आकार का और बेहद पोर्टेबल डीजेआई पौकेट 2 वीडियो बनाने के लिए एक शानदार कैमरा है. यह स्मूथ वीडियो और शार्प फोटो के साथ स्टेबिलाइज वीडियो कैपचरिंग सुविधा देता है. 4के और 64 मैगापिक्सल का यह कैमरा आप को अमेजन पर 29 से 39 हजार रुपए के बीच में मिल जाता है.

इन के अलावा भी अमेजन और फ्लिपकार्ट पर कई औप्शंस उपलब्ध हैं पर यहां उन कैमरों को लिया गया है जो बजट के साथ आप को ब्लौगिंग में मदद करेंगे तो शुरू कीजिए अपनी ब्लौगिंग जर्नी पौकेटफ्रैंडली कैमरों के साथ.

Wedding Special: मेकअप का सामान खरीदने से पहले जरूर जानें ये बातें

अगर आप चाहती हैं कि आप को सौंदर्य प्रसाधनों का फायदा मिले न कि बीमारियां तो जब आप मेकअप के सामान खरीदने जाएं, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान जरूर रखें:

1. सिर दर्द

आप को सुंदर बनाने वाला कौस्मैटिक आप को सिर दर्द भी दे सकता है ऐसा आप ने कभी सोचा न होगा. कुछ रसायन जैसे कि डाइजौलिडिनाइल और डीएमडीएम हाइडे्रशन का सौंदर्य प्रसाधनों में काफी इस्तेमाल होता है. ये सिरदर्द और आंखों में जलन का कारण बन सकते हैं. यदि मेकअप उत्पाद इस्तेमाल करने से ऐसे लक्षण दिखें, तो कुछ दिन मेकअप से दूर रहें.

2. बालों की समस्याएं

सुंदर घने बाल ही तो आप की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं, तो जाहिर सी बात है हम इन की देखभाल के लिए तरहतरह के शैंपू, सीरम, तेल, कंडीशनर और जैल इस्तेमाल करते हैं. इन सब से आप को मनचाहा सौंदर्य तो मिल जाता पर डैड्रफ, बालों का झड़ना और पतला होना जैसी परेशानियां भी खड़ी हो जाती हैं. लंबे समय तक बालों को कलर करने से बाल भूरे हो जाते हैं. अत: बालों के उत्पादों का प्रयोग करना हो तो ब्रैंडेड उत्पाद ही चुनें.

3. ऐक्ने और मुहांसे

ऐक्ने और मुहांसे सुंदरता के सब से बड़े दुश्मन हैं. हमारी चेहरे की स्किन भी बाकी अंगों की तरह सांस लेती है और जब हम क्रीम या लोशन लगाते हैं तो हमारे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं जिस से हमारी स्किन सांस नहीं ले पाती और ऐक्ने और मुहांसों की समस्या खड़ी हो जाती है, तो इस के लिए जरूरी है कि रात को मेकअप उतार कर सोएं. आप कितनी भी थकी हों चेहरा साफ करना न भूलें.

4. स्किन ऐलर्जी

अपने कौस्मैटिक को ज्यादा समय तक उपयोगी बनाने के लिए उस में तरहतरह के प्रिजर्वेटिव इस्तेमाल किए जाते हैं. पैराबींस जोकि ब्यूटी प्रसाधनों में बहुतायत में इस्तेमाल होता है, जिस की वजह से रैशेज हो सकते हैं. अगर आप की स्किन सैंसिटिव है तो अगली बार जब आप कोई भी कौस्मैटिक खरीदें तो पैराबीन का लेवल जरूर जांच लें.

5. आंखों की परेशानियां

आंखों और होंठों का मेकअप ही पूरे चेहरे को आकर्षिक बनाता है. आंखों के आसपास का हिस्सा बहुत ही नाजुक होता है इसलिए इस पर कुछ भी सावधानी से लगाना चाहिए. मसकारा जो की आंखों को आकर्षक बनाता है का अत्यधिक प्रयोग स्किन पर असर डालता है. खुजली और इन्फैक्शन की समस्या भी हो जाती है. इस जगह पर कोई भी उत्पाद लगाने से पहले पैच टैस्ट जरूर करें.

6. इनफर्टिलिटी

सुनने में अजीब लगता है पर सच है. ताजगी का एहसास दिलाने वाली परफ्यूम के कण हमारी स्किन में समा जाते हैं जिस से रिप्रोडक्टिव और्गन प्रभावित होते हैं. नपुंसकता की शिकायत भी हो सकती है, इसलिए वक्त रहते संभल जाएं और ऐसे उत्पादों का ज्यादा प्रयोग न करें.

7. रिंकल्स और झांइयां

लंबे समय तक कौस्मैटिक का उपयोग न सिर्फ हमारी स्किन को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इस से असमय बुढ़ापा भी साफ झलकने लगता है. हालांकि मेकअप से इन कमियों को दूर किया जाता है पर मेकअप इन में बढ़ोतरी भी करता है.

8. हार्मोंस पर असर

हमारे शरीर का ऐंडोक्राइन सिस्टम कौस्मैटिक के अत्यधिक उपयोग से गड़बड़ा जाता है. ट्राइक्लोसन जोकि ऐक्ने रिमूवल क्रीम में पाया जाता है हमारे शरीर में समा कर थायराइड को प्रभावित करता है. जिस से सिरदर्द, वजन का बढ़ना और अवसाद जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं.

9. कैंसर

जी हां, आप का कौस्मैटिक आप को कैंसर जैसी भयंकर बीमारी भी दे सकता है. वैसे तो ज्यादातर कौस्मैटिक बनाने वाली कंपनियां अपने प्रोडक्ट को अच्छी तरह से टैस्ट कर के ही बाजार में उतारती हैं पर इन का इस्तेमाल लंबे समय तक करना उचित नहीं. ब्रैंडेड उत्पाद ऐक्स्पायरी डेट के साथ आते हैं. उस के बाद उत्पाद का इस्तेमाल कतई न करें.

10. दाग और धब्बे

स्किन संबंधी परेशानियों से बचने का सीधा और सरल उपाय है कि आप नैचुरल, हर्बल या अच्छी ब्रैंड का रसायन रहित कौस्मैटिक ही खरीदें और साथ में उत्पाद के इंग्रैडिऐंट्स चैक करना न भूलें.

Winter Special: इन सर्दियों में घर पर बनाए ढाबे जैसा सरसों का साग

सरसों का साग हरे पत्तेदार सब्जियों से बना एक शीतकालीन व्यंजन है या यूं कहे की ये स्वाद और सेहत से भरपूर डिश है. जिसे त्योहारों, शादियों और किसी अन्य विशेष अवसर के दौरान परोसा जाता है और यहाँ तक की आपको ये लगभग सभी उत्तर भारतीय रेस्तरां या ढाबों में बहुत ही आसानी से मिल जाएगा.पंजाबियों की तो ये सबसे लोकप्रिय डिश है.ये न केवल भारतीयों के बीच, बल्कि यह पर्यटकों के बीच भी बहुत लोकप्रिय है. तो चलिये जानते है बहुत ही आसान तरीके से ढाबे जैसा सरसों का साग कैसे बनाए-

कितने लोगों के लिए-3 से 4
कितना समय लगेगा-30 से 40 मिनट
मील टाइप- वेज

हमें चाहिए-

सरसों के हरे पत्ते – 500 ग्राम
पालक – 250 ग्राम
टमाटर-250 ग्राम
प्याज़-2 से 3 मीडियम आकार के
हरी मिर्च-2-3
अदरक- 2 इंच लम्बा टूकड़ा
लहसुन-10 से 12 कली घिसी हुई
सरसों का तेल – 2 टेबल स्पून
घी या बटर – 2 टेबल स्पून
हींग- 2 – 3 पिंच
जीरा- 1/2 छोटी चम्मच
हल्दी पाउडर- एक चौथाई छोटी चम्मच
नमक- स्वादानुसार

बनाने का तरीका-

1-सबसे पहले सरसों और पालक के पत्तों को अच्छे से धोकर रख ले.अब एक बड़े बर्तन में करीब 2 लीटर पानी गरम करे.

2-पानी गरम हो जाने के बाद उसमे सरसों और पालक के पत्ते डालकर उनको उबाल लें.जब पत्ते अच्छे से गल जाए तब गॅस को बंद करके पानी को छान कर पत्तों को अलग कर ले.

3-अब इन पत्तों को मिक्सर में डाल कर पीस लें.

4-अब कढ़ाई में तेल गरम करे .तेल गरम हो जाने के बाद उसमे घिसी हुई अदरक और लहसुन डाल दे.अब करीब 1 मिनट इनको भून लेने के बाद इसमे जीरा ,हरी मिर्च,हल्दी और हींग डाल कर अच्छे से मिला दे.

5-अब इसमे प्याज़ डाल कर इसे अच्छे से लाल होने तक भूने ,जब प्याज़ भुन जाए तब इसमे टमाटर डाल दे और फिर नमक डाल कर टमाटर को अच्छे से गल जाने तक पका लें.

6-टमाटर के गल जाने के बाद अब इसमे पालक और सरसों का पेस्ट डाल दें.और इसे करीब 15 से 20 मिनट मीडियम आंच पर पकाए और इसको बीच बीच में चलाते रहे.

7- 15 से 20 मिनट बाद इसमे बटर डाल कर अच्छे से मिला दे और करीब 5 से 7 मिनट और पकाए.

8-अब गैस को बंद कर दे और इसे एक बाउल में निकाल ले.

9-गर्मारम सरसों के साग पर बटर डाल कर परोसें.

मेनोपौज का रिस्क कम करता है टमाटर, ऐसे करें प्रयोग

मेनोपौज आज अधिकतर महिलाओं के लिए एक बड़ी परेशानी बनी हुई है. एक उम्र में आ कर देखा जाता है कि एक बड़ी संख्या में महिलाओं को इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. एक हाल की स्टडी में ये बात सामने आई है कि टमाटर का प्रयोग मेनोपौज के लक्षणों को कम करने में काफी मदद करता है.

शोध में पाया गया है कि आठ हफ्तों तक दिन में दो बार 200 मिलिलीटर टमाटर का जूस मेनोपौज के लक्षणों को कम करने में काफी मददगार होता है. इसके अलावा स्ट्रेस और कौलेस्ट्रौल की परेशानी में भी ये बेहद लाभकारी है.

टोक्यो मंडिकल यूनिवर्सिटी में 93 महिलाओं पर इस शोध को किया गया. इसमें महिलाओं के हृदय की गति जैसी कुछ चीजों की जांच की गई. नतीजों में ये बात सामने आई कि स्ट्रेस, उलझन, हौट फ्लैश जैसी परेशानियां काफी कम हुई हैं. इसके अलावा आराम करने के दौरान महिलाओं की अधिक कैलोरी बर्न होती है.

एक अन्य शोध में ये बात सामने आई कि मेनोपौज के बाद महिलाओं के लिए टमाटर का अधिक सेवन ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को भी कम करता है. टमाटर में विटामिन सी, लाइकोपीन, विटामिन और पोटैशियम जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं. टमाटर में कौलेस्ट्रोल घटाने की क्षमता होती है. वजन घटाने में भी टमाटर का अहम योगदान होता है.

अनोखा रिश्ता- भाग 4: कौन थी मिसेज दास

मिसेज दास के आने तक घर में एक अजीब सन्नाटा छाया रहा. जयशंकर चुपचाप उदास अपनी पढ़ाईलिखाई की मेज पर जा बैठा और मैं अपना अपराधबोध लिए बरामदे में आ कर चुपचाप तखत पर लेट गया.

करीब साढ़े 4 बजे मिसेज दास आईं और मुझे बरामदे में लेटा देख कर बोलीं, ‘इस गरमी में तुम बरामदे में क्यों लेटे हो? जयशंकर वापस नहीं आया है क्या?’

कमरे से अब सिर्फ जयशंकर की आवाज आ रही थी. वह असमी भाषा में पता नहीं क्याक्या अपनी मां को बताए जा रहा था. मैं अपनेआप को बड़ा उपेक्षित महसूस कर रहा था.

मिसेज दास कमरे से बाहर निकलीं. मैं अपना सिर नीचा किए रोए जा रहा था. उन्होंने बढ़ कर मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में ले कर पेट से लगा लिया और पीठ सहलाने लगीं. फिर अपने आंचल से मेरी आंखें पोंछ कर मुझे कमरे में ले गईं और पीने को एक गिलास पानी दिया. उस के बाद वह सारे सामान को खोल कर देखने लगीं. उन के इशारे पर जयशंकर भी अपने कपड़े नापने उठा. पैंट और कमीज दोनों उस के नाप के थे. शाल और चप्पल भी मिसेज दास को बड़े पसंद आए. वह सब्जियां और मिठाइयां सजासजा कर रखने लगीं. बारबार मुझे बस इतना ही सुनने को मिलता था, ‘इतना क्यों खरीदा? गुवाहाटी के सारे बाजार कल से उठने वाले थे क्या?’

मैं खुश था कि कम से कम घर का तनाव थोड़ा कम तो हुआ.

उस रात खाना खाने के बाद मुझे मिसेज दास ने अपने कमरे में बुलाया. वह चारपाई पर बैठी अपनी चप्पलों को पैर से इधरउधर सरका रही थीं. पास  ही जयशंकर एक कुरसी पर चुपचाप बैठा छत के पंखे को देखे जा रहा था. मिसेज दास ने इशारे से अपने पास बुलाया और मुझे अपने बगल में बैठने को कहा. बड़ा समय लिया उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ने में.

‘जयशंकर बता रहा था कि तुम्हारे परिचित ने तुम्हें आज 600 रुपए दिए थे, यह बताओ कि हम पर तुम ने कितने पैसे खर्च कर डाले?’

‘करीब 300 रुपए.’

‘बाकी के 300 रुपए तो तुम्हारे पास हैं न?’

मैं ने शेष 300 रुपए जेब से निकाल कर उन के सामने रख दिए.

अब मिसेज दास ने अपना फैसला चंद शब्दों में मुझे सुना दिया कि तुम कल सुबह जयशंकर के साथ जा कर धनबाद के लिए किसी भी ट्रेन में अपना आरक्षण करवा लो. तुम्हारी मां घबरा रही होंगी. अपने परिचित का पता मुझे लिखवा दो. जब तुम्हारे बाबा का पैसा आ जाएगा तब मैं जयशंकर के हाथ यह 600 रुपए वापस करवा कर शेष रुपए तुम्हारे बाबा के नाम मनीआर्डर कर दूंगी. तुम्हें हम पर भरोसा तो है न?’

मुझे पता था कि यह मिसेज दास का अंतिम फैसला है और उसे बदला नहीं जा सकता. अपने एक झूठ को छिपाने के लिए मुझे मिसेज दास को एक मनगढ़ंत पता देना ही पड़ा.

दूसरे दिन मुझे एक टे्रन में आरक्षण मिल गया. मेरी टे्रन शाम को 7 बजे थी. मैं बुझे मन से घर वापस लौटा. खाना खाने के बाद मैं मिसेज दास की चारपाई पर लेट गया और मिसेज दास जयशंकर को साथ ले कर मेरी विदाई की तैयारी में लग गईं. वह मेरे रास्ते के लिए जाने क्याक्या पकाती और बांधती रहीं. हर 10 मिनट पर जयशंकर मुझ से चाय के लिए पूछने आता था पर मेरे मन में एक ऐसा शूल फंस गया था जो निकाले न निकल रहा था.

ट्रेन अपने नियत समय पर आई. मैं मिसेज दास के पांव छू कर और जयशंकर के गले मिल कर अपनी सीट पर जा बैठा.

कुछ दिनों के बाद बाबूजी का भेजा रुपया धनबाद के पते पर वापस आ गया. मनीआर्डर पर मात्र मिसेज दास का पता भर लिखा था.

मेरा यह अक्षम्य झूठ 25 वर्षों तक एक नासूर की तरह आएदिन पकता, फूटता और रिसता रहा था.

सोच के इस सिलसिले के बीच जागतेसोते मैं गुवाहाटी आ गया. रिकशा पकड़ कर मैं मिसेज दास के घर की ओर चल दिया. घर के सामने पहुंचा तो उस का नक्शा ही बदला हुआ था. कच्चे बरामदे के आगे एक दीवार और एक लोहे का फाटक लग गया था. छोटे से अहाते में यहांवहां गमले, बरामदे की छत तक फैली बोगनबेलिया की लताएं, एक लिपापुता आकर्षक घर.

मुझे पता था कि मिस्टर दास का अधूरा सपना बस, जयशंकर ही पूरा कर सकता है और उस ने पूरा कर के दिखा भी दिया.

फाटक की कुंडी खटखटाने में मुझे तनिक भी संकोच नहीं हुआ. मैं यहां किसी तरह की कोई उम्मीद ले कर नहीं आया था. बस, मुझे मिसेज दास से एक बार मिलना था. खटका सुन कर वह कमरे से बाहर निकलीं. शायद इन 25 सालों के बाद भी मुझ में कोई बदलाव न आया था.

उन्होंने मुझे देखते ही पहचान लिया. बिना किसी प्रतिक्रिया केझट से फाटक खोला और मुझे गले से लगा कर रोने लग पड़ीं. फिर मेरा चेहरा अपनी

आंखों के सामने कर के बोलीं, ‘‘तुम तो बिलकुल अंगरेजों की तरह गोेरे

लगते हो.’’

मैं उन के पांव तक न छू पाया. वह मेरा हाथ पकड़ कर घर के अंदर ले गईं. कमरों की साजसज्जा तो साधारण ही थी पर घर की दीवारें, फर्श और छतें सब की मरम्मत हुई पड़ी थी. मिसेज दास रत्ती भर न बदली थीं. न तो उन की ममता में और न उन की सौम्यता में कोई बदलाव आया था. बस, एक बदलाव मैं उन में देख रहा था कि उन के स्वर अब आदेशात्मक न रहे.

मेरे लिए यह बिलकुल अविश्वसनीय था. एम.एससी. करने के बाद जयशंकर अपनी इच्छा से एक करोड़पति की लड़की से शादी कर के डिब्रूगढ़ चला गया था. उस ने मां के साथ अपने सभी संबंध तोड़ डाले, जिस की मुझे सपनों में भी कभी आहट न हुई.

मिसेज दास की बड़ी बहन अब दुनिया में न रहीं. वह अपनी चल और अचल संपत्ति अपनी छोटी बहन के नाम कर गई थीं जो तकरीबन डेढ़ लाख रुपए की थी. जिस का

एक भाग उन्होंने अपने घर की मरम्मत में लगाया और बाकी के सूद और

अपनी सीमित पेंशन से अपना जीवन निर्वाह एक तरह से सम्मानित ढंग से कर रही थीं.

अब वह मेरे लिए मिसेज दास न थीं. मैं उन्हें खुश करने के लिए बोला, ‘‘मां, आप के हाथ की बनी रोहू मछली खाने का मन कर रहा है.’’

यह सुनते ही उन की आंखों से सावनभादों की बरसात शुरू हो गई. वह एक अलमारी में से मेरी चिट्ठियों का पूरा पुलिंदा ही उठा लाईं और बोलीं, ‘‘तुम्हारी एकएक चिट्ठी मैं अनगिनत बार पढ़ चुकी हूं. कई बार सोचा कि तुम्हें जवाब लिखूं पर शंकर मुझे बिलकुल तोड़ गया, बेटा. जब मेरी अपनी कोख का जन्मा बेटा मेरा सगा न रहा तो तुम पर मैं कौन सी आस रखती? फिर भी एक प्रश्न मैं तुम से हमेशा ही पूछना चाहती थी.’’

‘‘कौन सा प्रश्न, मां?’’

‘‘तुम्हें वह 600 रुपए मिले कहां से थे?’’

अब मुझे उन्हें सबकुछ साफसाफ बताना पड़ा.

सबकुछ सुनने के बाद उन्होंने मुझ से पूछा, ‘‘और एक बार भी तुम्हारा मन तुम्हें पैसे पकड़ने से पहले न धिक्कारा?’’

‘‘नहीं, क्योंकि मुझेअपने मन की चिंता न थी. मुझे आप के अभाव खलते थे पर अगर मुझे उन दिनों यह पता होता कि मैं अपने उपहारों के बदले आप को खो दूंगा तो मैं उन पैसों को कभी न पकड़ता. आप से कभी झूठ न बोलता. आप का अभाव मुझे अपने जीवन में अपनी मां से भी अधिक खला.’’

मिसेज दास चुपचाप उठीं और अपने संदूक से एक खुद का बुना शाल अपने कंधे पर डाल कर वापस आईं.

‘‘आओ, बाजार चलते हैं. तुम्हें मछली खानी है न. मेरे साथ 1-2 दिन तो रहोगे न, कितने दिन की छुट्टी है?’’

मैं उन के साथ 4 दिन तक रहा और उन की ममता की बौछार में अकेला नहाता रहा.

5वें दिन सुबह से शाम तक वह अपने चौके में मेरे रास्ते के लिए खाना बनाती रहीं और मुझे स्टेशन भी छोड़ने आईं. पूरे दिन उन से एक शब्द भी न बोला गया. बात शुरू करने से पहले ही उन का गला रुंध जाता था.

अब जब भी बर्लिन में मुझे उन की चिट्ठी मिलती है तो मैं अपना सारा घर सिर पर उठा लेता हूं. कई दिनों तक उन के पत्र का एकएक शब्द मेरे दिमाग में गूंजता रहता है, विशेषकर पत्र के अंत में लिखा उन का यह शब्द ‘तुम्हारी मां मनीषा.’

मैं उन्हें जब पत्र लिखने बैठता हूं अनायास मेरी भाषा बच्चों जैसी नटखट  हो जाती है. मेरी उम्र घट जाती है. मुझे अपने आसपास कोहरे या बादल नजर नहीं आते. बस, उन का सौम्य चेहरा ही मुझे हर तरफ नजर आता है.

अपने हिस्से की धूप: भाग 1- क्या था उस ब्रीफकेस

कुहरे में लिपटी एक नई सुबह नए जीवन में नूपुर का स्वागत कर रही थी. खेतों की तरफ किसान राग मल्हार गाते चले जा रहे थे. गेहूं और सरसों की फसलें फरवरी की इस गुलाबी ठंड में हलकीहलकी बहती शीतल, सुगंधित बयार के स्पर्श को पा कर खिलखिलाने लगी थीं. नूपुर की आंखें नींद से मुंदी जा रही थीं. इन सब के बीच 2 मन आपस में चुपकेचुपके कार की पहली सीट पर लगे बैक मिरर में एकदूसरे को देख आंखों ही आंखों में बतियाने  का प्रयास कर रहे थे. शरीर थकान से टूट रहा था, विदाई का मुहूर्त सुबह का ही था. ससुराल में पहला दिन था उस का. टिटपुट रीतिरिवाजों के बाद उसे कमरे में बैठा दिया गया था. उस की आंखें उनींदी हो रही थीं. कितने दिन हो गए थे उसे मन भर सोए हुए. सोती भी कैसे घर रिश्तेदारों से जो भरा हुआ था.

‘‘नूपुर. सो जा वरना चेहरा सोयासोया लगेगा. फोटो अच्छे नहीं आएंगे,’’ कहते सब जरूर थे पर कैसे? इस बात का किसी के पास कोई जवाब नहीं था. जिसे देखो वही हाथ में ढोलक ले कर उस के सिर पर आ कर बैठ जाता.

‘‘इन्हें देखो महारानी की खुद की शादी है और यह फुर्रा मार कर सो रही हैं. अरे भाई शादीब्याह रोजरोज थोड़े होता है. अभी मजे ले लो फिर तो बस यादें ही रह जाती हैं.’’

मन मार कर उसे भी शामिल होना ही पड़ता. अभी तो ससुराल के रीतिरिवाज बाकी थे.

उस ने खिड़की के बाहर झंक कर देखा, सड़कें सो रही थीं और वह जाग रही थी. दबेदबे पांवों से वह हौलेहौले एक नई जिंदगी में प्रवेश कर रही थी. एक ही मासमज्जा से बने हर इंसान की देह में एक अलग खुशबू होती है जो उसे दूसरों से अलग करती है. शायद घरों की भी अपनी एक देह और एक अलग खुशबू होती है जो उन्हें दूसरों से अलग करती है. नूपुर इस खुशबू से बिलकुल अपरिचित और अनजान थी. उस के घर खुशबू उस के पीहर से बिलकुल अलग थी जिसे उसे अपनाना और अपना बनाना था.

‘‘अरे भई कोई अपनी भाभी का सामान कमरे में पहुंचा दो,’’ सासूमां ने आवाज लगाई.

नूपुर की आंखें तेजी से अपने सामान को ढूंढ़ रही थीं. कल रात से 15 किलोग्राम का लहंगा पहनेपहने अब तो उस का शरीर भी जवाब देने लगा था. कितने शौक से लिया था उस ने.

‘‘जितना तेरा खुद का वजन नहीं है जितना लहंगे का है. कैसे संभालेगी?’’ पापा ने चिंतित स्वर में कहा था.

‘‘अरे पापा लेटैस्ट फैशन है.’’

‘‘लेटैस्ट… यह भी कोई रंग है. मरामरा सा रंग लाई हो. अरे लेना ही था तो लालमैरून लेती, दुलहन का रंग. तुम्हारी मां ने भी अपनी शादी में लाल रंग की साड़ी पहनी थी,’’ पापा ने मुंह बनाते हुए कहा.

‘‘अब ये सब रंग कौन पहनता है… यह एकदम लेटैस्ट और ट्रैडी कलर है. आलिया भट्ट ने भी यही रंग अपनी शादी में पहना था.’’

‘‘वे सब हीरोइनें हैं, कुछ भी पहनें सब अच्छा लगता है पर अपने समाज में तो दुलहन का रंग वही सब माना जाता है.’’

‘‘पापा शादी कोई रोजरोज थोड़ी होती है.’’

‘‘मैं भी तो नहीं कह रहा हूं कि शादी रोजरोज होती है. कम से कम शादी के दिन सुहाग का रंग तो पहनना चाहिए.’’

‘‘इतना महंगा लहंगा सिर्फ एक दिन के लिए तो नहीं खरीद सकती थी. ऐसा रंग लिया है कि आगे भी यूज में आ जाए,’’ नूपुर ने दलील दी.

‘‘सुन रही हो नूपुर की मां तुम्हारी बिटिया की पंचवर्षीय योजना है. यहां जिंदगी का भरोसा नहीं और यह आगे तक की योजना बना कर चल रही है.’’

मम्मी चुपचाप बापबेटी की चिकचिक सुनती रही. जानती थी कुछ भी बोलने का कोई फायदा नहीं है. अभी आपस में लड़ेंगे, बहस करेंगे और फिर खुद ही एक हो जाएंगे और वह विलेन बन कर रह जाएगी.

तभी किसी के कदमों की आहट से नूपुर का ध्यान टूटा. उस के दोनों देवर हाथ में ब्रीफकेस ले कर कमरे में घुसे.

‘‘कितना भारी है भाभी, पत्थर भर कर लाई है क्या?’’

नूपुर मुसकरा दी. क्या कहती महीनों से खरीदारी की थी. कहांकहां से ढूंढ़ढूंढ़ कर सामान इकट्ठा किया था. उस ने तेजी से सामान को

गिनना शुरू किया. 3 ब्रीफकेस, 1 एअर बैग और 1 वैनिटी बैग और वह गुलाबी वाला ब्रीफकेस. वह नदारद था. पापा से कहा तो था कि उसे भी अपने साथ ले कर जाएगी. जीवन की नई शुरुआत हुई थी, हर तरह के रंग और स्वाद से भर गई थी उस की जिंदगी. सबकुछ तो ले कर आई थी वह पर क्या सबकुछ पीछे बहुत कुछ छूट गया था.

‘‘भैया एक पिंक कलर का ब्रीफकेस भी होगा.’’

‘‘पिंक?’’

छोटे देवरों के चेहरे पर शरारत उभर आई,

‘‘आप को भी पिंक कलर पसंद है? वह तो पापा की परियों को पसंद होता है?’’

‘‘तुम लोग फिर से शुरू हो गए,’’ मम्मीजी ने दोनों की मीठी ?िड़की देते हुए कहा.

‘‘भाभी. उस पर बार्बी डौल बनी हुई थी क्या?’’

‘‘हांहां वही. देखा क्या आप ने?’’ उस की आंखों में जुगनू चमक उठे.

‘‘कब से पूरे घर में टहल रहा था समझ ही नहीं आ रहा था कि पता नहीं किस का सामान भाभी के सामान के साथ चला आया है.’’

‘‘जी, वह मेरा ही है,’’ नूपुर ने संकुचाते हुए कहा.

वे दोनों उस भीड़ में कहीं खो गए और थोड़ी देर में अलादीन के चिराग की तरह उस का वह पिंक ब्रीफकेस ले कर हाजिर हो गए.

‘‘यह लीजिए आप की अमानत और कोई आदेश?’’ दोनों ने सीने पर हाथ रख बांएं पैर को पीछे मोड़ सिर को हलका सा झुका कर बड़ी अदा से कहा.

‘‘भाभी को बड़ा मक्खन लगाया जा रहा है. इन की सेवा करोगे तभी तुम्हारा कल्याण होगा,’’ सिद्धार्थ ने कमरे में घुसते हुए कहा.

वैसे तो सिद्धार्थ से शादी से पहले नूपुर की 2-4 बार ही मुलाकात और टेलीफोन पर बातें हुई थीं पर उन अनजान चेहरों के बीच नूपुर को वह चेहरा बहुत अपना सा लगा.

‘‘अपनी भाभी को कुछ खाने को पूछा या बस बातें ही बना रहे हो,’’ सिद्धार्थ ने शेरवानी उतारते हुए कहा, ‘‘इन से बातें बनवा लो, काम धेले भर का नहीं करते.’’

मम्मीजी ने कहा, ‘‘नूपुर तुम जल्दी से नहा लो. मेहमानों का आना शुरू हो जाएगा, कुछ रीतिरिवाज भी करने हैं और यह मायके से जो तुम्हारे लिए सामान आया है उसे भी दो.’’

‘‘क्या मां आप से कहा था न मुझे यह सब पसंद नहीं. उस का सामना है, किसी से क्या मतलब है. नूपुर के घर वालों ने दिया उस ने लिया, उस से हमें क्या?’’ सिद्धार्थ के चेहरे पर नाराजगी साफ झलक रही थी.

अनोखा रिश्ता- भाग 3: कौन थी मिसेज दास

वह मुझे ले कर एक कैफे में गए जहां हम ने समोसे के साथ कौफी पी.  वहीं उन्होंने मुझे बताया कि जिस दक्षिण भारतीय के घर वह ठहरे हैं वह लखपति आदमी है. मैं घर से बाहर निकला नहीं कि जेब में 200 रुपए जबरन ठूंस देता है.

‘तुम अपने दोस्त से मिलने आए हो?’ उन्होंने पूछा तो मैं ने हां में अपनी गरदन हिला दी.

‘क्या करता है तुम्हारा दोस्त?’

‘बी.एससी. कर रहा है, सर.’

‘उस के मांबाप मालदार हैं?’

‘नहीं, वह विधवा मां का इकलौता बेटा है. मां एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाती हैं. फिर मैं ने उन्हें मिसेज दास के बारे में थोड़ाबहुत संक्षेप में बताया. कैफे के बाहर अचानक शर्माजी ने मुझ से पूछा, ‘आज शाम को तुम क्या कर रहे हो?’

‘कुछ खास नहीं.’

‘तुम 9 बजे के आसपास मुझ से शहर में कहीं मिल सकते हो?’

‘पर कहां? यहां तो मैं पहली बार आया हूं.’

वह कुछ सोचते हुए बोले, ‘ऐसा करो, तुम आज मेरा इंतजार रात के 9 बजे गुवाहाटी स्टेशन के पुल पर करना जो सारे प्लेटफार्मों को जोड़ता है. तुम समय से वहां पहुंच जाना क्योंकि मेरे पास शायद तब उतना समय न होगा कि तुम्हारे  किसी सवाल का जवाब दे सकूं.’

आशंकाओं की धुंध लिए मैं घर वापस आया. मिसेज दास खाना बना रही थीं. जयशंकर उन की मदद कर रहा था. मुझे देखते ही जयशंकर कहने लगा, ‘अगर तुम आने में थोड़ा और देर करते तो मां मुझे तुम्हारी खोज में भेजने वाली थीं. दोपहर का खाना भी तुम ने नहीं खाया.’

मैं माफी मांग कर हाथमुंह धोने चला गया. मेरे दिमाग में बस, एक ही सवाल कुंडली मारे बैठा था कि मिसेज दास को कौन सी कहानी गढ़ के सुनाऊं ताकि वह निश्ंिचत हो कर मुझे शर्माजी से मिलने की अनुमति दे दें.

हाथमुंह धो कर मैं बरामदे में आ गया और आ कर चौकी पर चुपचाप बैठ गया. इस शर्मा से मेरा कोई कल्याण होने वाला है, यह भनक तो मुझे थी पर मैं मिसेज दास को कौन सा बहाना गढ़ कर सुनाऊं, यह मेरे दिमाग में उमड़घुमड़ रहा था.

खाने के बाद मैं ने मिसेज दास को अपनी गढ़ी कहानी सुना दी कि आज अचानक शहर में मुझे मेरे ननिहाल का एक आदमी मिला. स्टेशन के पास ही उस का अपना एक निजी होटल है. मुझे उस से मिलने 9 बजे जाना है.

मिसेज दास चौंकीं, ‘इतनी रात में क्यों?’

इस सवाल का जवाब मेरे पास था…‘होटल के कामों में वह दिन भर व्यस्त रहते हैं. उन के पास समय नहीं होता.’

‘ठीक है, तुम जयशंकर को साथ ले कर जाना. वह यहां के बारे में ठीक से जानता है. गुवाहाटी इतना सुरक्षित नहीं है. मैं इतनी रात में तुम्हें अकेले कहीं भी जाने की अनुमति नहीं दे सकती.’

मैं ने इस बारे में पहले सोच लिया था अत: बोला, ‘मिसेज दास, मैं बच्चा थोड़े ही हूं जो आप इतना घबरा रही हैं. हो सकता है कि अगला कुछ खानेपीने को कहे, ऐसे में अच्छा नहीं लगता किसी को बिना आमंत्रण के साथ ले जाना.’

मेरी बात सुन कर मिसेज दास की पेशानी पर बल पड़े पर उन्हें सबकुछ युक्तिसंगत लगा.

‘ठीक है, समय से तैयार हो जाना. मैं एक रिकशा तुम्हारे लिए तय कर दूंगी. वह तुम्हें वापस भी ले आएगा.’

ठीक साढ़े 8 बजे मिसेज दास एक रिकशे वाले को बुला कर लाईं. मैं उस पर बैठ कर स्टेशन की ओर चल पड़ा. स्टेशन के सामने वह मुझे उतार कर बोला, ‘मैं अपना रिकशा स्टैंड पर लगा कर स्टेशन

के सामने आप का इंतजार करूंगा.’

9 बजने में अभी 5 मिनट बाकी थे. अंदर से मैं थोड़ा घबरा रहा था. प्लेटफार्मों को जोड़ने वाले पुल पर आधी गुवाहाटी अपने चिथड़ों में लिपटी सो रही थी. घुप अंधेरा था. यह शर्मा कहीं किसी षड्यंत्र में मुझे फंसाने तो नहीं जा रहा, सोचते ही मेरी रीढ़ की हड्डी तक सिहर गई थी. अचानक मुझे पुल पर एक आदमी लगभग भागता हुआ आता दिखा. इस घुप अंधेरे में भी शर्माजी की आंखें मुझे पहचानने में धोखा न खाईं… ‘ये हैं 600 रुपए. इन्हें संभालो और फटाफट अपना रास्ता नाप लो.’

मैं आननफानन में सारे रुपए अपनी जेब में ठूंस कर वहां से चल दिया. बाहर आते ही मेरा रिकशा वाला मुझे मिल गया. मैं ने एक घंटे का समय ले रखा था. हम घर की तरफ वापस लौट पड़े. रास्ते भर पुलिस की सीटियों और चोरचोर पकड़ो का स्वर मेरे कानों में गूंजता रहा.

घर पर मेरी असहजता कोई भी भांप न पाया. मिसेज दास और जयशंकर दोनों जागे हुए थे. बरामदे के सामने रिकशे के रुकते ही दोनों बरामदे में आ गए, ‘क्या हुआ, इतनी जल्दी वापस क्यों आ गए?’

वह बिहारी होटल में था ही नहीं तो मैं उस के नाम एक परची पर यहां का पता लिख कर वापस आ गया. कब तक मैं उस का इंतजार करता. आप भी देर होने पर घबरातीं.

‘चाय पीओगे,’ बड़ी आत्मीयता से मिसेज दास बोलीं.

मैं यह भी नहीं चाहता था कि मिसेज दास मेरी असहजता भांप लें. थकावट का बहाना बना कर बरामदे में आ गया और अपनी चौैकी पर लेट कर एक पतली सी चादर अपने चेहरे तक तान ली. नींद तो मुझे आने से रही.

रात भर बुरेबुरे खयाल तसवीर बन कर मेरी आंखों के सामने आते रहे और एक अनजाने भय से मैं रात भर बस, करवटें ही बदलता रहा. रात में 2-3 बार मिसेज दास मेरी मच्छरदानी ठीक करने आईं. मैं झट अपनी आंखें मूंद लेता था. ये शर्माजी के 600 रुपए अभी तक मेरी दाईं जेब में ठुंसे पड़े थे जिन्हें सहेजने की मेरे पास हिम्मत न थी.

सुबह होते ही रात का भय जाता रहा. रोज की तरह अपनी दिनचर्या शुरू हुई. 10 बजे के बाद मैं अकेला था.

मैं बाहर निकला तो नुक्कड़ पर मुझे वही रिकशे वाला टकरा गया जो स्टेशन ले गया था. उस के रिकशे पर बैठ कर मैं पास के एक बाजार में गया. 2 घंटे की खरीदारी में मिसेज दास के लिए मैं ने एक ऊनी शाल खरीदी और एक जोड़ी ढंग की चप्पल भी.

जयशंकर के लिए एक रेडीमेड पैंट और कमीज खरीदी. इस के अलावा मैं ने तरहतरह की मौसमी सब्जियां, सेब, नारंगी, मिठाइयां और एक किलो रोहू मछली भी खरीदी. इस खरीदारी में 300 रुपए खर्च हो गए पर रास्ते भर मैं बस, यही सोच कर खुश होता रहा कि इतने सारे सामानों को देख कर मिसेज दास और जयशंकर कितने खुश होंगे.

जयशंकर कालिज से वापस घर आया तो सामान का ढेर देखते ही पूछा, ‘बाबा, का पैसा आ गया क्या?’

मैं ने उसे बताया कि मेरे ननिहाल वाला आदमी आया था. जबरदस्ती मेरे हाथ पर 600 रुपए रख गया. मेरे नाना से वापस ले लेगा. तुम मिठाई खाओ न.

जयशंकर बिना कोई प्रतिक्रिया दिखाए अपने कपड़े बदल कर दोपहर का खाना लगाने लगा. मैं उसे कुरेदता रहा पर वह बिना एक शब्द बोले सिर झुकाए खाना खाता रहा.

जब मैं थोड़ा सख्त हुआ तो वह कहने लगा. बस, तुम ने हमारा स्वाभिमान आहत किया है. इतने पैसे खर्च करने से पहले तुम्हें मां से बात कर लेनी चाहिए थी. मां को उपहारों से बड़ी घबराहट होती है.’

कंगना को जवाब देने के लिए करण जोहर ने मिलाया डिज्नी प्लस हौटस्टार से हाथ

कंगना रानौट और करण जोहर के बीच 36 का आंकड़ा है? यह बात जग जाहिर है. कंगना रानौट हर मौके पर करण जोहर पर हमला करने से बाज नही आती है. कंगना बार बार नेपोटिजम का मुद्दा उठाकर करण जोहर को कटघरे में खड़ी करती रहती हैं. जबकि करण जोहर कभी भी कंगना के खिलाफ तीखी टिप्पणी नही करते.मगर वह कंगना पर जब भी कोई सकारात्मक या यॅूं कहें कि व्यंगात्मक टिप्पणी करते है,तब भी कंगना ,करण जोहर पर हमला करने से बाज नही आती है.

पिछले दिनों करण जोहर ने एक ईवेंट में कहा कि वह कंगना रानौट की फिल्म ‘इमरजेंसी’ देखने के लिए उत्साहित हैं. तो इससे भी  कंगना रानौट को मिर्ची लग गयी और कंगना ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) का सहारा लेते हुए करण जोहर पर उनके खिलाफ बदनामी अभियान शुरू करने का आरोप लगाते हुए लिखा- ‘‘हा हा पिछली बार जब उन्होंने कहा था कि वह ‘मणिकर्णिका’ देखने के लिए उत्साहित हैं, तो फिल्म के प्रदर्शन वाले सप्ताहांत पर मेरे जीवन का सबसे बुरा बदनामी भरा अभियान मेरे ऊपर थोप दिया गया.फिल्म में काम करने वाले लगभग सभी मुख्य कलाकारों को मुझ पर कीचड़ उछालने के लिए भुगतान किया गया था.फिल्म में तोड़फोड़ की गयी और अचानक मेरे जीवन का सबसे सफल सप्ताहांत मेरे लिए एक जीवित दुःस्वप्न में बदल गया… हा हा, मैं अब बहुत डर गई हूं… क्योंकि वह फिर से उत्साहित है…‘‘

इस पर करण जोहर ने कोई प्रतिक्रिया नही दी.जबकि बौलीवुड के एक तबके ने शंका जाहिर की थी कि कहीं करण जोहर,कंगना के साथ भी दोस्ती तो नहीं करना चाहते.जिस तरह से वह कार्तिक आर्यन, सलमान खान सहित कई लोेगों के साथ दुश्मनी भुलाकर दोस्ती का हाथ बढ़ा चुके हैं.

मगर हकीकत यह है कि करण जोहर अपनी आदत के ुमुताबिक किसी पर भी आरोप लगाकर आरोप प्रत्यारोप के चक्कर में नहीं पड़ते.वह तो मीठे शब्दों या अपने कार्य से सामने वाले को जवाब देने में यकीन करते हैं. जी हाॅ! यह कटु सत्य है.पिछले तीन चार वर्षों से ‘नेपोटिजम’ को लेकर कंगना रानौट  ,करण जोहर पर लगातार हमलावर हैं.पर अब जो खबर आ रही है,उससे यह बात साफ हो गयी कि करण जोहर ने कंगना के नेपोटिजम के आरोपों का जवाब देने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए ओटीटी प्लेटफार्म ‘डिज्नी प्लस हौटस्टार’ से हाथ मिलाया है.यह कटु सत्य है.

इन दिनों करण जोहर एक फिक्शनल वेब सीरीज ‘‘शो टाइम’’ बना रहे हैं,जो कि 2024 में ‘डिज्नी प्लस हौट स्टार’ पर स्ट्रीम होगी. इस वेब सीरीज में करण जोहर नेपोटिजम पर बात करेंगे.इस बात को कबूल करते हुए ‘डिज्नी प्लस हौट स्टार’ के कंटेट हेड गौरव बनर्जी कहते हैं-‘‘हम करण जोहर के साथ मिलकर एक शो ‘‘शो टाइम’’ बना रहे है.इस शो  में फिल्म इंडस्ट्री के अंदर की कहानी है,जिसमें करण जोहर नेपोटिजम की कहानी बयां करेंगे.और नेपोटिजम हमारे लिए क्या मायने रखता है,यह भी समझ में आएगा.यह बहुत ही ज्सादा उत्साह जनक शो होगा.’’

गौरव बनर्जी के इस बयान के बाद बौलीवुड में चर्चाएं गर्म हो गयी हैं कि करण जोहर ने ‘नेपोटिजम’ के मुद्दे पर कंगना रानौट को जवाब देने का यह रास्ता निकाला है.कुछ लोगों की राय में करण जोहर का ‘‘शो टाइम’ उसी वक्त स्ट्रीम होगा,जब कंगना रानौट की फिल्म ‘‘इमरजंसी’’ प्रदर्शित होगी.

शाहरुख खान ने विक्की कौशल से मांगी माफी, वजह हैरान कर देगी

बॉलीवुड के सबसे टैलेंटेड एक्टर्स में शुमार विक्की कौशल इन दिनों काफी चर्चाओं में है. एक्टर हाल ही में ‘कॉफी विद करण 8’ में नजर आए है. इसके साथ ही एक्ट्रेस कियारा आडवाणी भी उनके साथ नजर आई. दरअसल, बॉलीवुद सुपरस्टार शाहरुख खान अपनी अपकमिंग फिल्म को लेकर काफी सुर्खियों में है. वहीं साल 2023 में शाहरुख खान की दो फिल्में ‘पठान’ और ‘जवान’ ने बॉक्स ऑफिस पर सबके छक्के छुडा दिए थे. ऐसे में साल के आखिर में किंग खान फिर से धमाल मचाने वाले है. उनका हाल ही में डंकी फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था. जिससे काफी अच्छा रिस्सपॉन्स मिला है. इस फिल्म में विक्की कौशल भी नजर आने वाले है. इस बीच विक्की ने शाहरुख खान को लेकर एक बड़ा खुलासा कर दिया.

 

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करण के शो पर विक्की ने कही ये बात

दरअसल, हाल ही में विक्की कौशल ‘कॉफी विद करण 8’ में नजर आए थे. इस दौरान बॉलीवुड एक्ट्रेस भी उनके साथ मौजूद थी. दोनों ने इस शो पर काफी खुलासे किए. विक्की कौशल ने शाहरुख खान के साथ काम करने का एक्सीपीरियंस भी शेयर किया. विक्की कौशल ने कहा कि, ‘डंकी’ की शूटिंग के दौरान एक दिन शाहरुख खान को दिल्ली जाना पड़ा था. इसलिए मुझे एक शॉट बॉडी डबल के साथ देना पड़ा. इसके बाद शाहरुख ने अपना काम पूरा करके रात में बुलाया हालांकि मैं वहां नहीं जा सका. इसके बाद उन्होंने लंबा-चौड़ा मैसेज लिखा. उन्होंने कहा कि विक्की, वो शॉट हम दोबारा करेंगे. मुझे माफ कर दो कि मैं तुम्हें क्यूज देने के लिए वहां मौजूद नहीं रह सका. इसके बाद मैंने शाहरुख सर को कॉल किया और बताया कि सबकुछ ठीक है. बाद में शाहरुख सर ने उस शॉट को देख और कहा कि इसे दोबारा करने की जरूरत नहीं है.’

विक्की कौशल वर्कफ्रंट

अभी हाल ही में एक्टर विक्की कौशल की फिल्म सैमबहादुर बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई है. इस मूवी को मेघना गुलजार ने डायरेक्ट की है. सैमबहादुर रिलीज के बाद से काफी ठंडी पड़ गई है. वहीं विक्की कौशल की डंकी फिल्म 21 दिसंबर को रिलीज होगी.

कैसे सर्दियों में एथिनिक ड्रेस को करें स्टाइल

सर्दीयां शुरू होते ही हर किसी के मन में मोटे मोटे स्वेटर जैकेट का ख्याल आने लगता है जिसके चलते हर कोई ऑउटफिट को लेकर चिंतित हो जाता है सर्दियों में  बहुत ज्यादा कपड़े पहनना कोई पसंद नहीं करता क्योंकि इससे उनकी महंगी महंगी  ड्रेसेस का लुक खराब हो जाता है और  यही वो सीजन होता है जब सबसे ज्यादा शादियाँ  होती हैं अक्सर शादी बियाह में महिलाएं एथनिक वियर पहनना पसंद करती हैं ऐसे में स्वेटर जैकेट से उनकी साड़ी का ग्रेस फीका पड़ जाता है  महिलाएं अपनी खूबसूरत साड़ी और लहंगे को शॉल या स्वेटर से छिपाना बिलकुल पसंद नहीं करतीं.

मगर  सर्द हवाएं सारा स्टाइल बिगाड़ देती हैं. लेकिन यदि आप स्टाइल के चक्कर में खुद की सेहत से खिलवाड़ नहीं करना चाहती हैं तो  यह लेख आपके बहुत काम का है क्योंकि इसमें आप जानेगे कि  फैशन के इस दौर में कैसे अपने एथनिक वियर से  खूबसूरती के साथ हम  सर्दियों को मात दे सकते हैं और अपनी एथनिक पोशाक में थोड़ा सा बदलाव कर उसे जैकेट्स ,शाल के साथ स्टाइलिश बना सकते हैं. क्योंकि जो आनंद और खूबसुरती एथनिक पोशाक में है वो शायद ही किसी और ड्रेस को पहनकर आता है

  1. वेलवेट ब्लाउज हैं बेस्ट 

वेलवेट ब्लाउज  आप साड़ी लहंगे या स्कर्ट किसी पर भी पहन सकती हैं आप अपनी ड्रेस के मैचिंग का ब्लाउज  पीस खरीद कर  टेलर से सिल्वा भी सकती हैं या रेडीमेट  खरीदकर उसे फिटिंग भी करा सकती है यदि आपके साड़ी या लहंगे का कलर हल्का है तो मैचिंग ब्लाउज गहरे रंग में ले और यदि ड्रेस का रंग गहरा है तो ब्लाउज हल्के रंग में ले आप ब्लाउज की स्लीव  पर मन चाहा  वर्क भी  करा  सकती हैं. इस तरह  के ब्लाउज डीप नैक लाइन में बेहद खूबसूरत लगते हैं.

2. टॉप को दें ब्लाउज टच 

अपने क्लासी दिखने वाले वुलन फुल स्लीव्स टॉप,हॉल्टेर नैक टॉप ,पेपलम टॉप, एसिमेट्रिकल कुर्ती स्टाइल का टॉप पहन सकती है जिसके साथ आप चोकर पहनकर खुद को एक क्लासी लुक के साथ तैयार कर सकती हैं। यह लुक आप साड़ी या अपनी लॉन्ग स्कर्ट दोनों में से किसी के भी साथ  कैरी कर सकती हैं.

3. शर्ट स्टाइल  ब्लाउज 

कैसुअल और स्टाइलिश लुक पाने के लिए शर्ट स्टाइल  ब्लाउज एक बेहतरीन ऑप्शन है ऐसे ब्लाउज आप मैचिंग ब्लाउज या वेलवेट के भी बनवा सकती है इन्हे आप साड़ी ,लहंगे या स्कर्ट के साथ कैरी कर सकती हैं ऐसे ब्लाउज पर  सिंपल ज्वेलरी फबती लगती है.

4. जैकेट विद  ब्लाउज 

आप  चाहें तो लहंगे ,साड़ी के कंट्रास्ट मैचिंग की हैवी फैब्रिक की लांग जैकेट बनवाकर पहन सकती है इन्हे आप साड़ी लहंगा  किसी पर भी पहन सकती है बस ध्यान रखें की यदि साडी  या लहंगा सिंपल  है तो हेवी जैकेट बनवाएं और यदि आपकी ड्रेस हेवी लुक में है तो सिंपल लुक वाली फुल स्लेव्स जैकेट बनवाएं इसके लिए आप वेलवेट ,सिल्क  फैब्रिक चुन सकती हैं.

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