Anupama: जिस सीन से दर्शक हुए शॉक, उस पर हंस रहे पाखी-अधिक, देखें वीडियो

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ के बीते एपिसोड में अधिक पाखी से उससे नौकरी छोड़ने के लिए कहता है, लेकिन पाखी नहीं मानती है. पाखी अधिक को जवाब देती कि तुम्हें डर है ना कि मैं कहीं बडी को बता न दूं कि तुम और तुम्हारी बहन पूरे परिवार को खा रहे हैं. इस बात से नाराज होकर अधिक पाखी को तमाचा मार देता है. ‘अनुपमा’ सीरियल में पाखी और अधिक का ये सीन चर्चा का विषय बन गया है. सीरियल में घरेलू हिंसा के मुद्दे को उठाने की कोशिश की जा रही है. शो का ये सीन इतना पॉपुलर हुआ कि दर्शकों का BP बढ़ गया था.

पाखी-अधिक का वायरल वीडियो

एक तरफ जहां इस सीन को देखकर दर्शकों का हाई ब्लड प्रेशर हो जाता है. वहीं दूसरी ओर रियल लाइफ में पाखी और अधिक इस सीन को देखकर काफी एन्जॉय करते नजर आ रहे है. टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में मुस्कान बामने पाखी/स्वीटी का किरदार निभाती है. वहीं अधिक मेहता का किरदार निभाने वाले एक्टर का रियल लाइफ में भी उनका नाम अधिक मेहता है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Muskan Bamne (@muskanbamne)

वीडियो में हंसते नजर आए पाखी-अधिक

एपिसोड के टेलीकस्ट के बाद दोनों एक्टर्स एक-साथ बैठकर यह सीन एन्जॉय कर रहे है. दोनों शो के उन मोमेंट्स को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे है. वहीं मुस्कान बामने ने इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर शेयर किया और लिखा है- ये क्या हो रहा है. अधिक वर्सेज पाखी. हमें यह सीन करते हुए बहुत ही मजा आया कि हम अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे थे, कि अधिक शो में कितना बड़ा पलटू है.

मुस्कान ने आगे लिखा है- जरा देखो उसे. लेकिन, लेकिन, लेकिन…. पाखी का भी पारा सांतवे आसमान पर है. हिसाब तो होकर रहेगा अधिक मेहता. क्या आप लोग एक्साइटेड हैं. इसी वीडियो पर कई यूजर ने कमेंट्स किए है. एक यूजर ने लिखा अधिक तुमसे यह उम्मीद नहीं थी. अब पाखी सही रास्ते पर आई तो तुम्हारा शुरु हो गया.

BB OTT 2: इन 4 कंटेस्टेंट्स पर लटकी नौमिनेशन की तलवार, कौन होगा घर से बेघर

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी 2 इन दिनों काफी लाइमलाइट में है. शो को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. बिग बॉस ओटीटी 2 में यूट्यूबर्स बनाम टीवी स्टार्स के बीच एक लड़ाई देखने के लिए मिल रही है. वहीं सोशल मीडिया पर भी एल्विश यादव, मनीषा रानी और अभिषेक मल्हान को सबसे ज्यादा सपोर्ट मिल रहा है. ऐसे में माना जा रहा है कि इन तीनों में से ही कोई एक कंटेस्टेंट इस सीजन का विनर बनेगा.

मगर, इससे पहले शो में मौजूद कंटेस्टेंट्स को नौमिनेशन का सामना करना पड़ा. इस हफ्ते शो के चार कंटेस्टेंट नॉमिनेशन में अटक सकते  हैं.

इन 4 कंटेस्टेंट्स पर लटकी नौमिनेेशन की तलवार

बिग बॉस ओटीटी 2 को जनता से बेहद प्यार मिल रहा है. बिग बॉस कंटेस्टेंट्स मनीषा रानी सबके निशाने पर है. वहीं मनीषा रानी की बहस पूजा भट्ट से कई बार हो चुकी है. जिया और अविनाश से मनीषा रानी की बनती नहीं है.  इसी कारण वह लगातर नॉमिनेट हो रही है. इस बार भी मनीषा पर नौमिनेेशन की तलवार आ गई है.

जद हदीद और अविनाश सचदेव

बीबी हाउस में कई दिनों से जद हदीद कुछ भी अच्छा नहीं कर रहे. इस हफ्ते नौमिनेशन टास्क में जद हदीद बुरी तरह फंस गए हैं. वहीं जद हदीद पहले भी नॉमिनेट हो चुके है. तब कहा जा रहा था कि वह इविक्ट होंगे.

बिग बॉस ओटीटी 2 के स्ट्रांग कंटेस्टेंट अविनाश सचदेव माने जा रहे थे, लेकिन वह अपनी गेम को समझ नहीं पाए. अविनाश पर भी इस हफ्ते इविक्शन की तलवार लटक रही है. वह भी नौमिनेशन में आए हैं.

जिया शंकर पर लटकी नौमिनेशनकी तलवार

बिग बॉस ओटीटी 2 के इस वीक के नौमिनेशन में चौथा नाम जिया शंकर है. बीबी हाउस की सबसे कंफ्यूज कंटेस्टेंट है उनका गेम कोई भी नहीं समझ पा रहा. वहीं बिग बॉस के मेकर्स नें अभी तक नॉमिनेटिड कंटेस्टेंट्स के लिए वोटिंग लाइन्स को नहीं खोला है. ऐसे में कहा जा रहा है बिग बॉस इन 4 कंटेस्टेंट्स को एक और मौका दे सकते हैं. वहीं बाकी 4 कंटेस्टेंट्स इस हफ्ते सेव है. बीते वीकेंड के वार पर आशिका भाटिया हो गई इविक्ट.

ऑफिस लुक के लिए परफेक्ट है ये लिपस्टिक शेड्स, अपनी मेकअप किट में करें शामिल

अगर आपको मेकअप करना बेहद पसंद है और आप ऑफिस लुक के लिए परफेक्ट लिपस्टिक शेड देख रही हैं तो ये लेख आप के लिए है. आमतौर पर महिलाओं को मेकअप करना खूब पसंद होता है, ऐसे में वे अक्सर मेकअप प्रोडक्ट खरीदती रहती हैं. महिलाओं की रोजमर्रा लाइफ में लिपस्टिक की खास अहमियत है. लिपस्टिक के बिना मेकअप अधूरा है, लिपस्टिक ही मेकअप की जान है.

कई बार महिलाएं अपने ऑफिस लुक्स के लिए ऐसी लिपस्टिक शेड्स चुन लेती हैं, जो उनके लुक को बहुत ज्यादा ओवर दिखाने लगता है. लेकिन आज हम आपके लिए कुछ ऐसे लिपस्टिक शेड्स लेकर आए हैं, जो आपके ऑफिस लुक के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं.

  1. कोरल कलर

कोरल लिपस्टिक बेहद बोल्ड होती हैं, लेकिन आप निश्चित रूप से इस रंग को अपने ऑफिस लुक के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं. कोरल लिप कलर लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका बाकी मेकअप न्यूट्रल रहे. आप इस तरह अपनी आंखों को सॉफ्ट रख सकती हैं और हल्का ब्लश लगा सकती हैं. कोरल शेड्स हर स्किन टोन पर अच्छे नहीं लगते इसलिए इसे कभी भी ऑनलाइन न खरीदें, खरीदने से पहले हमेशा एक बार अपने लगाकर अपने फेस पर देख लें.

2. पीच

यह एक सॉफ्ट लिपस्टिक शेड है, जो ज्यादातर महिलाओं के फेवरेट लिपस्टिक शेड में शामिल होता है. लेकिन डार्क स्किन टोन की महिलाओं को इस शेड को लगाने से बचना चाहिए. अगर आप ऑफिस लुक के लिए डार्क और चमकीले रंगों को लगाने से बचना चाहती हैं तो ये लिपस्टिक शेड आपके लिए बिल्कुल सही है.

3. मौवे

मौवे शेड्स किसी भी मौके के लिए सबसे अच्छा लिपस्टिक शैड है. अपने ऑफिस लुक के लिए आप मौवे लिप शैड को चुन सकते .यह लिपस्टिक शेड दिखने में बिल्कुल भी चटक नहीं है. सबसे अच्छी बात यह है कि आप इस शेड को हर मौसम में इस्तेमाल कर सकते हैं.

4. भूरा रंग

भूरे रंग की लिपस्टिक शेड आज के समय में काफी ट्रेंडी है. कॉलेज की लड़कियों से लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस भी इस शेड को लगाना पसंद करती हैं. भूरे रंग की लिपस्टिक हर स्किन टोन के साथ मैच करती है और इसमें कोई डाउट नहीं है कि यह आपके लुक को ग्रेस देने में मदद करती है.

5. सॉफ्ट पिंक शेड

यह कलर महिलाओं को काफी पसंद आता है और हर महिला इस रंग की लिपस्टिक शेड को लगाना बेहद पसंद करती हैं. शादी हो, पार्टी हो, डेटिंग, या ऑफिस के लिए बिल्कुल परफेक्ट है.

अब घर चल: भाग 1- जब रिनी के सपनों पर फिरा पानी

‘ इतनी मुश्किल से तो जिंदगी में यह खुशी आई है… इसे भी पूरे दिल से महसूस नहीं कर पा रही हूं. बहारें तो जैसे कह कर गई हैं मेरे दर से कि हम कभी नहीं लौटेंगी यहां. हां कभी थीं मेरी जिंदगी में भी बहारें… सगी बहनों सी… अच्छी सहेलियों सी,’ एक लंबी गहरी ठंडी सांस ले कर रिनी ने सोचा और

पलंग की पीठ से सिर टिका कर मौजूदा हालात से नजरें चुरा कर पलकों का परदा गिरा दिया और आहिस्ताआहिस्ता लौट चली उन बेफिक्र दिनों की ओर जब लमहालमहा जिंदगी गुनगुनाती थी. हंसीखुशी, मुसकराहटें, फूल, कलियां, चांदसितारे, धूप, दिलकश हवाएं उस के कदमों के संग कदम मिला कर चलती थीं.

वह और उस से 8 साल बड़ी रचना दीदी अम्मू व पापा की बेहद लाडली थीं. बेटा न होने का अफसोस अम्मू व पापा को कभी नहीं हुआ. वे दोनों ही जान छिड़कते थे अपनी राजदुलारियों पर और रचना दी तो उसे अपनी गुडि़या सम झती थीं. रचना दी के ब्याह के बाद उदासी तो छाई घर भर में पर रिनी तो जैसे राजकुमारी से रानीमहारानी बन गई. चिंता की परिभाषा उसे नहीं पता थी. अभावों से उस का परिचय नहीं था और परेशानियों, गमों से जानपहचान नहीं थी उस की. वक्त आने पर बांकासजीला और उन से भी ज्यादा समृद्ध घराने का रंजन उसे चाव के साथ ब्याह कर ले गया.

2 शादीशुदा बहनों की इकलौती भाभी थी वह. बहनें तो रिसैप्शन के अगले दिन ही चली गईं. अब रह गए घर में कुल जमा 4 प्राणी वह, रंजन और मम्मीडैडी. बुलबुल सी चहकती

फिरती थी रिनी घरआंगन में. देखदेख रंजन निहाल होते और सासससुर मुग्ध, पर यह चाव चार दिन की चांदनी ही साबित हुआ. चहकती रिनी की गरदन पर वक्त ने पंजा कसना शुरू कर दिया. 6 महीने के बाद ही घर में बच्चे की मांग उठने लगी.

मम्मी की चेतावनियां, ‘‘वारिस तो हमें चाहिए ही रिनी रानी, कान खोल कर सुन लो. कुछ इस्तेमाल कर रही हो तो फौरन बंद कर दो.’’

डैडीजी भी कहां पीछे रहने वाले थे, ‘‘अरे, पार्क में भाईबंधू पोतेपोतियों को घुमानेखिलाने लाते हैं तो जलन होती है. जब कोई पूछता है कि ‘‘आप कब दादा बनने वाले हैं सुभाषजी, बहू की क्या खुशखबरी है? अब तो साल से ऊपर हो चला ब्याह को, तो बड़ी शर्म आती है.’’

एक रंजन ही थे जो कुछ न कहते थे और उस की पीठ पर तसल्ली भरा हाथ रख देते थे. तब वह चैन की सांस लेती थी. लेकिन 4 महीने और आगे खिसकी ब्याह की उम्र तो वे भी उन्हीं की टीम में शामिल हो गए. मां से जाने क्या सीखपढ़ कर कमरे में आते और उस की ओर पीठ कर के लेट जाते.

रिनी मनुहार करती तो भड़क उठते, ‘‘क्या फायदा, बंजर खेत में हल चलाने का? अरे, एक वारिस भी न दे पाई इस घर को तो काहे की पत्नी, कैसी औरत?’’

रिनी ने रंजन के इस रूप की तो कभी कल्पना भी नहीं की थी.

घर भर का प्यार कपूर की गंध की तरह उड़ गया था और मम्मी न जाने किनकिन तरकशों से विष बु झे तीर निकालनिकाल कर अचूक निशाना साध कर चलातीं, जिन से रिनी का कलेजा लहूलुहान हो उठता था.

ये ताने कभीकभी तो अति पार कर जाते, ‘‘अरे, कालो महरी के घर हर बरस 1 बच्चा होता है और हमारी तारा धोबन को ही देख लो… 4 सालों में 3 बालक उस के आंगन में आ गए… एक हमारी ही देहरी सूनी है.’’

रिनी के ब्याह की उम्र 3 साल हो गई और यातनाओं की असीम. बातबात पर हाथ भी उठाने लगे थे रंजन. सास ने कभी हाथ तो नहीं उठाया, लेकिन उन के कड़वे कटाक्ष मार से भी ज्यादा घातक होते थे. कभी कोई गलती से भी पूछ लेता कि बहू की खुशखबरी कब सुना रही हो तो वे माथे पर हाथ मार कर कहतीं, ‘‘अब तो इस घर से गम की खबरें ही बाहर आएंगी कि गायत्री बिन पोते का मुंह देखे ही मर गई.’’

सिर  झुकाए, आंखें नम किए रिनी इस तरह सुनती जैसे वह जानबू झ कर औलाद न पैदा करने का गुनाह कर रही हो.

एक बार घर के पिछवाड़े बड़े अमरूद के पेड़ के पीछे बिल्ली ने बच्चे दिए तो आफत रिनी पर टूट पड़ी, ‘‘कुत्तेबिल्लियां तक इस घर में आआ कर बच्चे जन रहे हैं, एक हमारी रिनी है जो खापी कर डकार तक नहीं ले रही.’’

रंजन ने भी विरोध करने के बजाय मसालेदार छौंक लगाई, ‘‘अरे, मम्मी, कुत्ता, बिल्ली, गाय, कबूतर, चिडि़या, सांप सब के परिवार बढ़ रहे हैं, एक हम हैं…’’

सब कुछ अकेली सहती रही रिनी. कैसे सह सकी? अब याद करती है तो हैरानी होती है उसे खुद पर. अम्मू व पापा तक कभी उस ने अपने दुखों की आंच को नहीं पहुंचने दिया. नागफनी के इस कंटीले जंगल में महकते फूलों के एक ही पेड़ का साया था उस के पास… पड़ोस वाली स्वनाम धन्य शीतल चाची, जो उसे बच्चों की तरह दुलारती थीं. उस के अदृश्य घावों पर पड़ी उन की एक नेहदृष्टि जैसे मरहम का काम करती थी. उन्होंने ही एक दिन उस की व्यथाकथा को जस का तस उस के मायके पहुंचा दिया.

पापा फौरन आ गए और उन्होंने आसान हल सु झाया, ‘‘दोनों की डाक्टरी जांच करवा लो. पता चल जाएगा कि खामी किस में है.’’

उन के यह कहने भर की देर थी कि जैसे बम फट गया, ‘‘आप की हिम्मत कैसे हुई. हमारे हट्टेकट्टे बेटे पर तोहमत लगाने की? ले जाइए अपनी बेटी को और जैसी चाहे जांच कराइए. हमारे बेटे का पीछा छोडि़ए.’’

जिस घर को वह अपना मान कर बरसों से रह रही थी, उसी से पल भर में खदेड़ दी गई वह और वह भड़कती आग तलाक के तट पर पहुंच कर ही शांत हुई.

पापा ने ही कहा, ‘‘उन्होंने शुरू कर दी है तलाक की बात तो मैं उन की फितरत

अच्छी तरह जानता हूं कि वे तलाक ले कर ही मानेंगे. अदालत में तो लड़की की मानमर्यादा ही मिट्टी में मिला दी जाती है, इसलिए आपसी सम झदारी से ही बात खत्म हो जाए तो बेहतर.’’

बड़े विकट थे वे दिन. उन की यादें तक दर्द से लिपटी हैं, तो दिन कितने यातनादायी होंगे, सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. अब तो बाबुल का घर भी अपना नहीं लगता था रिनी को. वहां रहने, खानेपीने में भी संकोच होता था उसे… उसी घर में जहां वह जन्मीपली थी. अम्मू व पापा उसे पलकों पर बैठा कर रखते थे, लेकिन मन नहीं रमता था उस का यहां. वह नौकरी करना चाहती थी पर पापा ने कड़े शब्दों में विरोध किया, ‘‘इतना तो है पास हमारे बिटिया कि जिंदगी भर तुम्हें आराम से खिलापिला सकते हैं. तुम नौकरी नहीं करोगी.’’

लेकिन उस का तर्क था, ‘‘मैं अपने खाली समय को कैसे भरूंगी पापा? यों निठल्ली बैठी रही तो सोचसोच कर एक दिन पागल हो जाऊंगी.’’

अम्मू ने भी उस की बात का समर्थन किया तो पापा मान गए और पास के ही एक कौन्वेंट स्कूल में उस ने नौकरी शुरू कर दी. शुरू में उसे एलकेजी और अपर केजी क्लासेज मिलीं. पहले थोड़ी सी परेशानी हुई, फिर धीरेधीरे मजा आने लगा. बच्चों में मन बहलने लगा और वह खुश रहने लगी. जिंदगी सहज ढर्रे पर चल निकली.

शुचि और रुचि फूलों सी खूबसूरत पर कुछ मुर झाई हुईं, सुबह की शबनम सी निर्मल पर उदास सी मासूम जुड़वां बहनें उस की एलकेजी क्लास में थीं, जो पढ़ने में तो ठीकठाक थीं पर हर वक्त सहमीसहमी, डरीडरी सी रहती थीं. उन की उस चुप्पी और उदासी की जड़ तक पहुंची रिनी तो स्तब्ध रह गई यह जान कर कि वे बिन मां की बच्चियां हैं और उन के पापा एक आया की सहायता से उन्हें अकेले पाल रहे हैं. आंखें ही नहीं मन भी भीग उठा था उस का.

वह अब शुचिरुचि का खास खयाल रखने लगी. बाल मनोविज्ञान का सहारा ले कर मन जीत लिया रिनी ने उन का. अब वे सामान्य होने लगीं और खुश भी रहने लगीं. अगली पीटीएम में उन के पापा आए तो मुसकराहट के साथ थैंक्स का कार्ड भी थमा गए.

बच्चियां इतना घुलमिल गई थीं रिनी से कि कभीकभी उस के साथ घर भी चली आतीं और शाम तक वहीं रहतीं और पापा के आने के वक्त का अंदाजा लगा कर घर लौट जातीं. कभी रिनी उन्हें छोड़ आती तो कभी आया आ कर ले जाती. रिनी को अचानक जिंदगी ने एक नए मोड़ पर ला कर खड़ा कर दिया.

शुचिरुचि की बूआ यानी उन के पापा की बड़ी बहन श्वेता अपने छोटे भाई शेखर का रिश्ता ले कर बिन खबर किए उन के घर पहुंच गई. अम्मू व पापा हैरान थे और खुश भी, फिर भी अम्मू ने साफ बात की, ‘‘आप जानती ही कितना हैं रिनी के बारे में बिटिया? वह तलाकशुदा है, कुंआरी नहीं.’’

तेजी से पांव पसार रहा ‘आई फ्लू’: हो जाएं सावधान

दिल्ली सहित कई राज्यों में इस वक्त ‘आई फ्लू’ तेजी से फैल रहा है. इस इंफैक्शन के रोजाना कई मामले सामने आ रहे हैं, जिस से आंखें खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है. अगर आप भी इन दिनों ‘आई फ्लू’ से जूझ रहे हैं, तो सावधान हो जाएं और तुरंत डाक्टर से संपर्क करें.
जब भी मानसून या बारिश का मौसम शुरू होता है, तो अपने साथ कई बीमारियां ले कर आता है, जो काफी भयावह होता है. बारिश के कारण लोगों को गरमी से राहत जरूर मिलती है, लेकिन इस की वजह से लोगों को बाढ़ और अलगअलग बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इन दिनों आंखों की इस ‘आई फ्लू’ नामक बीमारी ने लोगों की चिंता बढ़ा रखी है.
क्या है ‘आई फ्लू’?
दरअसल, इस बीमारी का नाम कंजैक्टिवाइटिस है, जिसे ‘पिंक आई इंफैक्शन’ या ‘आई फ्लू’ के नाम से भी जाना जाता है. दिल्ली सहित कई राज्यों में इस बीमारी के दिनप्रतिदिन मामले बढ़ रहे हैं, जिस से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
आंखों में होने वाला यह संक्रमण बैक्टीरियल या वायरल दोनों तरह के हो सकते हैं. एक खबर के मुताबिक, डाक्टर कहते हैं कि दिल्ली में इन दिनों इस फ्लू का खतरा काफी बढ़ गया है. बाढ़, बारिश के कारण ज्यादातर लोग इस से संक्रमित हो रहे हैं, इसलिए लोगों को साफसफाई का काफी ज्यादा ध्यान रखना होगा. लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.
हालांकि गरीब बस्तियों में, राहत शिविरों में या जिन के घर के आसपास बाढ़ का पानी भरा है, वहां के लोगों के लिए सतर्कता बरतना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि कितनी भी कोशिश कर लें, इंफैक्शन हो ही जाता है. फिर भी कोशिश की जा सकती है खुद को सेफ रखने की.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा में आई फ्लू या कंजैक्टिवाइटिस बच्चों और बड़ों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है. जिला अस्पताल, चाइल्ड पीजीआई और राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में अचानक से मरीजों की संख्या बढ़ गई है. स्वास्थ्य विभाग ने इस पर गंभीर चिंता जताई और इस से निबटने के लिए कई उपाय कर रहा है.
जिला अस्पताल में स्पैशल ओपीडी शुरू हुई है, जिस में पहले ही दिन 207 मरीज ‘आई फ्लू’ से संक्रमित मिले हैं. इस से पहले अस्पताल में रोजाना 170 के आसपास मरीज आ रहे थे. वहीं, आई फ्लू से पीड़ित बच्चों को स्कूल न बुलाने के निर्देश दिए गए हैं. बिहार के भी कई जिलों में तेजी से फैल रहा है वायरल इंफैक्शन. कई जिलों में मैडिकल टीम का गठन किया गया है. एम्स में तो सौ से ज्यादा केस रोज आ रहे हैं.
क्या हैं ‘आई फ्लू’ के लक्षण?
‘आई फ्लू’ का पहला लक्षण है आंखों का लाल होना, अजीब सी जलन या किरकिरी सा महसूस होना. आंखों से पानी गिरता है और दर्द होने लगता है.
आंखों की ऊपरी परत धुंधली हो जाती है और उस पर चिपचिपा पदार्थ नजर आने लगता है.
‘आई फ्लू’ से बचाव कैसे करें?
खबरों के मुताबिक, ‘आई फ्लू’ से बचाव के कई घरेलू उपाय हैं, जो सामान्यतौर पर डाक्टर भी घर में करने को कहते हैं :
  1. आई फ्लू होने पर आंखों को बारबार नहीं छूना चाहिए और न ही रगड़ना चाहिए.
  2. आंखों को हलके कुनकुने पानी से दिन में 4 से 5 बार धोना चाहिए.
  3. आंखों में अगर बारबार कीचड़ आ रहा है, तो उसे साफ रूमाल या टिशू पेपर से साफ करें.
  4. ज्यादा दिक्कत हो तो गरम सिंकाई भी कर सकते हैं.
  5. फोन का कम इस्तेमाल करें. साथ ही, टीवी भी न देखें.
  6. डाक्टर से सलाह ले कर आंखों में कंजैक्टिवाइटिस की दवा डालें.
  7. जब संक्रमण कम होने लगे, तब ही घर से बाहर निकलें.
  8. इंफैक्शन होने पर बाकी लोगों से थोड़ा दूर रहें, क्योंकि आप से दूसरे व्यक्तियों में भी संक्रमण फैलने का डर होता है.

दो सखियां: भाग 3- क्या बुढ़ापे तक निभ सकती है दोस्ती

तारा ने भी पुराने दिन याद करते हुए कहा, ‘‘क्या खूब याद दिलाई. हम तो देव आनंद पर फिदा थे. हाय जालिम, क्या चलता था. मेरे पति तो मधुबाला के इतने दीवाने थे कि घर पर उस की फोटो टांग रखी थी. इन का बस चलता तो सौतन बना करले आते.’’

‘‘तभी एक देव आनंद जैसे लड़के पर रीझ गई थीं शादी के बाद?’’

‘‘ताना मार रही हो या तारीफ कर रही हो?’’

‘‘अरे सहेली हूं तेरी, ताना क्यों मारूंगी. अपनी जवानी के दिन याद भी नहीं कर सकते. फिर जवानी में तो सब से खताएं होती हैं.’’

‘‘हां, तू भी तो गफूर भाई को दिलीप कुमार समझ दिल दे बैठी थी.’’

‘‘अरे, उस कमबख्त की याद मत दिलाओ. मुझ से आशिकी बघारता रहता और निकाह कर लिया किसी और से. समझा था दिलीप कुमार, निकला प्राण. मेरा तो घर टूटतेटूटते बचा.’’

‘‘हम औरतों का यही तो रोना है. जिसे देव आनंद समझ कर बतियाते रहे उस ने महल्लेभर में बदनामी करवा दी हमारी. यह तो अच्छा हुआ कि हमारे पति को हम पर भरोसा था. फिर जो पिटाई की थी उस की, वह दोबारा दिखा नहीं. जिसे देव आनंद समझा वह अजीत निकला. खैर, पुरानी बातें छोड़ो, यह बताओ कि जफर भाई के बारे में कुछ सुना है?’’

‘‘हां, सुना तो है. घर की नौकरानी को पेट से कर दिया. इज्जत और जान पर आई तो निकाह करना पड़ा.’’

‘‘लेकिन जफर ठहरे 50 साल के और लड़की 20 साल की.’’

‘‘अरे मर्द और घोड़े की उम्र नहीं देखी जाती. घोड़ा घास खाता है और मर्द ने सुंदर जवान लड़की देखी कि मर्दों का दिमाग घास चरने चला जाता है.’’

‘‘जफर भाई बुढ़ाएंगे तो नई दुलहन को बाहर किसी का मुंह ताकना पड़ेगा.’’

‘‘यह तो सदियों से चला आ रहा है.’’

बातचीत चल रही थी कि इसी बीच फिर आवाज आई, ‘‘दादी, ओ दादी.’’

‘‘लो आ गया बुलावा. बात अधूरी रह गई. कल मिल कर बताऊंगी. तब तक कुछ और पता चलेगा.’’

रात में अल्पविराम लग गया. महिलाओं की गपें उस पर निंदारस, कहीं पूर्णविराम लग ही नहीं सकता था. बुढ़ापे में वैसे भी नींद कहां आती है. खापी कर बेटा काम पर चला जाता. बहू घर के काम निबटा सोने चली जाती. पोती स्कूल चली जाती तो सितारा बैठने चली जाती तारा के घर. तारा का भी यही हाल था. भोजनपानी होने के बाद पोता स्कूल निकल जाता. बहू घर के कामकाज में लगी रहती. कामकाज हो जाता तो बिस्तर पर झपकी लग जाती. अब तारा क्या करे.

अकेला मन और एकांत काटने को दौड़ता. वह सितारा को आवाज देती. कभी सितारा अपने घर महफिल जमा लेती. तारासितारा के अलावा यदि कोई और वृद्ध महिला बैठने आ जाती तो दोनों की बातें रुक जातीं. उन्हें सभ्यता के तकाजे के कारण बात करनी पड़ती, बिठाना पड़ता. लेकिन अंदर से उन्हें ऐसा लगता मानो कबाब में हड्डी. कब जाए? वे यही दुआ करतीं. उन्हें अपने बीच तीसरा ऐसे अखरता जैसे पत्नी को सौतन. फिर दूसरी महिलाओं के पास इतना समय भी नहीं होता कि दोपहर से रात तक बैठतीं.

इस उम्र में तो आराम चाहिए. तारासितारा तो बैठेबैठे थक जातीं तो वहीं जमीन पर चादर बिछा कर लेट जातीं. फिर कोई बात याद आ जाती तो फिर शुरू हो जातीं. उन की थकान तो बात करते रहने से ही दूर होती थी. एक बार सितारा के बेटे ने पूछा भी, ‘‘अम्मी, क्या बात चलती रहती है? घर की बुराई तो नहीं करती हो?’’ सितारा समझ गई कि यह बात बहू ने कही होगी बेटे से. सितारा भी जवाब में कहती, ‘‘क्या मैं अपने बहूबेटे की बुराई करूंगी?’’

बेटे ने कहा, ‘‘नहीं अम्मी, बात यह है कि हम ठहरे मुसलमान और वे हिंदू. आजकल माहौल बिगड़ता रहता है. फिर तुम्हारी सहेली का बेटा तो मुसलिम का विरोध करने वाली पार्टी का खास है. सावधानी रखना थोड़ी.’’

वहीं, तारा के बेटे ने भी कहा, ‘‘अम्मा, हम हिंदू हैं और वे मुसलमान. देखना कहीं धोखे से गाय का मांस खिला कर भ्रष्ट न कर दें. उन का कोई भरोसा नहीं. पाकिस्तान समर्थक हैं वे.’’ अम्मा ने कहा, ‘‘बेटा, हमें क्या लेनादेना तुम्हारी राजनीति से. हम ठहरे उम्रदराज लोग, धर्मकर्म की बातें कर के अपने मन की कह कर दिल हलका कर लेते हैं. मेरे बचपन की सहेली है. मुझे गोमांस नहीं खिलाएगी. इतना विश्वास है. इस के बाद वे मिलीं तो बातों का जायका कुछ बदला.

तारा ने कहा, ‘‘तुम गाय खाती हो. हम लोग तो उसे पूजते हैं.’’ सितारा ने कहा, ‘‘खाने को क्या गाय ही रह गई है. बकरा, मुरगा, मछली सब तो हैं. मैं अपने धर्म को जितना मानती हूं उतना ही दूसरे धर्म का सम्मान करती हूं. मैं पहले तुम्हारी सहेली हूं, बाद में मुसलमान. क्यों? किसी ने कुछ कहा है? भरोसा नहीं है मुझ पर?’’

‘‘नहींनहीं, गंभीर मत हो. ऐसे ही पूछ लिया.’’

‘‘दिल साफ कर लो. पूछने में क्या एतराज करना.’’

‘‘तुम पाकिस्तान की तरफ हो?’’

‘‘ऐसा आरोप लगाया जाता है हम पर.’’

‘‘कभी माहौल बिगड़ा तो क्या करोगी?’’

‘‘तुम्हारे घर आ जाऊंगी, क्योंकि मुझे भरोसा है तुम पर. तुम मेरी और मेरे परिवार की रक्षा करोगी. कभी तुम पर मुसीबत आई तो मैं तुम्हारे परिवार की रक्षा करूंगी,’’ और दोनों सहेलियों की आंखों में आंसू आ गए.

‘‘तुम्हारा बेटा अजय, मुसलमान विरोधी क्यों है? उसे समझाओ.’’

‘‘वह सब समझता है. कहता है, राजनीति है. बस और कुछ नहीं. लेकिन सुना है तुम्हारा बेटा हिंदू विरोधी है?’’

‘‘नहीं रे, वह तो हिंदुओं के डर के कारण मात्र मुसलिम संघों से जुड़ा है. केवल दिखाने के लिए. बाकी वह समझता सब है. हम एक ही देश के रहने वाले पड़ोसी हैं एकदूसरे के. चलो, कोई और बात करो. इन बातों से हमारा क्या लेनादेना.’’ और फिर वे वर्मा की बेटी, गफूर का नौकरानी से निकाह, बहुओं की तानाशाही, बेटों की धनलोलुपता, अपने पोतेपोतियों के स्नेह पर चर्चा करने लगीं.

समाज में फैली अश्लीलता, बेहूदा गीत, संगीत पर भी उन्होंने चर्चा की. अपनी जवानी, बचपन को भी याद किया और बुढ़ापे की इस उम्र में सत्संग आदि पर भी चर्चा की. लेकिन आनंद उन्हें दूसरों की बहूबेटियों के विषय में बात करने में ही आता था. पराए मर्दों के अवैध संबंधों में जो रस मिलता वह दुनिया में और कहां था.

तारा ने कहा, ‘‘मेरा पोता 20 साल का हो चुका है. खुद को शाहरुख खान समझता है.’’

सितारा ने कहा, ‘‘मेरी पोती भी 18 साल की हो गई. अपनेआप को करीना कपूर समझती है.’’

तारा ने कहा, ‘‘एक विचार आया मन में. कहो तो कहूं. बुरा मत मानना, मैं जानती हूं संभव नहीं और ठीक भी नहीं.’’

सितारा ने कहा, ‘‘यही आया होगा कि मेरी पोती शबनम और तुम्हारे पोते अजय की जोड़ी क्या खूब रहेगी? मेरे मन में आया कई बार. लेकिन हमारे हाथ में कहां कुछ है. कितने हिंदूमुसलिम लड़केलड़कियों ने शादी की. वे बड़े लोग हैं. उन की मिसालें दी जाती हैं. हम मिडिल क्लास. हम करें तो धर्म, जात से बाहर. हमारे यहां तो औरतें बच्चा पैदा करने की मशीन भर हैं. जमाने भर के नियमकायदे. फिर पुरुष को 4 शादियों की छूट. तुम्हारे यहां अच्छा है कि एक शादी.’’

तारा ने कहा, ‘‘लेकिन हमारे यहां दहेज जैसी प्रथा भी है. हर धर्म में अच्छाई और बुराई हैं. खैर, यह बताओ कि वर्मा की बेटी का कुछ पता चला? क्या सचमुच एबौर्शन हुआ था उस का? उस के मातापिता शादी क्यों नहीं कर देते उस लड़के से?’’

सितारा ने कहा, ‘‘वर्मा ठहरे कायस्थ. ऊंची जात के. वे कहते हैं मर जाएंगे लेकिन छोटी जात से शादी नहीं करेंगे.’’

‘‘इतना खयाल था तो ध्यान रखना था. अब लड़की तो उसी जात की हो गई जिस जात वाले के साथ सो गई थी. अब अपनी जात में करेंगे तो यह तो धोखा होगा उस लड़के के साथ. अगर लड़के को पता चल गया तो शादी के बाद फिर क्या होगा. धक्के मार कर भगा देगा.’’

तारासितारा की गपें चलती रहतीं. इसी बीच उन के पोते, पोती की भी आंखें लड़ गईं. उन में प्यार हो गया. कब हो गया, कैसे हो गया, उन्हें भी पता न चला. चुपकेचुपके निहारते रहे. फिर ताकने लगे धीरेधीरे, फिर मुसकराने लगे और दीवाने दिल मचलने लगे. बात हुई छोटी सी. फिर बातें हुईं बहुत सी. प्यार परवान चढ़ा. दिल बेकरार हुए और पाने को मचल उठे एकदूसरे को. फिर दोनों ने इकरार किया. फिर तो बातों का सिलसिला चल निकला. मुलाकातें होने लगीं दुनिया से छिप कर, मरमिटने की कसमें खाईं. दुनिया से न डरने की, साथ जीनेमरने की ठान ली. और एक दिन दुनिया को पता चला तो तूफान आ गया.

बुजुर्ग बातें करते हैं. अधेड़ धर्म और समाज की चिंता करते हैं. नौजवान प्यार करते हैं. पहले एक परिवार ने दूसरे को चेतावनी दी. अपनेअपने बच्चों को डांटाफटकारा. उन पर पहरे लगाए. पहरेदार जागते रहे और प्यार करने वाले भाग खड़े हुए. किसी को समाज से निष्कासन की सजा मिली. किसी पर फतवा जारी हुआ. बच्चों ने दूर कहीं शादी कर के घर बसा लिया और अपनेअपने परिवार के साथ थाने में भी सूचना भिजवा दी ताकि लड़की भगाने, अपहरण, बलात्कार जैसी रिपोर्ट दर्ज न हों. समाज पर थूक कर चले गए दोनों. दोनों परिवार कसमसा कर रह गए.

तारासितारा का मिलना बंद हो गया. दोनों को खरीखोटी सुनने को मिलीं, ‘सब तुम लोगों की वजह से. कहीं का नहीं छोड़ा. दिखा दी न अपनी जात, औकात.’ तारासितारा ने भी बचपन की दोस्ती खत्म कर ली. हिंदूमुसलिम दंगों का सवाल ही पैदा नहीं हुआ. बाकायदा कोर्ट मैरिज की थी दोनों ने. फसाद का कोई मौका ही नहीं दिया कमबख्तों ने. कट्टरपंथी मन मसोस कर रह गए. दूसरों पर हंसने वाली तारा और सितारा पर आज दूसरों के साथ उन के घर वाले भी हंस रहे थे. लानतें भेज रहे थे. 2 घनिष्ठ सखियों की दोस्ती समाप्त हो चुकी थी हमेशाहमेशा के लिए.

एक कट्टरपंथी ने सलाह दी, ‘‘भाईजान, हिंदू महल्ले में रहने का अंजाम देख लिया. आज लड़की गई है, कल…ऐसा करें, मकान बेचें और मोमिनपुरा चलें. अपनों के बीच.’’

शर्म और जिल्लत से बचने के लिए अपनी जान से प्यारी लड़की को मृत मान कर सितारा अम्मी सहित वह घर बेच कर मोमिनपुरा चली गईं. ऐसा नहीं है कि मोमिनपुरा की लड़कियों ने हिंदू लड़कों से और बजरंगपुरा की लड़कियों ने मुसलिम लड़कों से विवाह न किया हो, लेकिन जिस पर गुजरी वही नफरत पालता है. बच्चों ने मातापिता को फोन किया. विवाह स्वीकारने का निवेदन किया लेकिन दोनों घर के मिडिल क्लास दरवाजे बंद हो चुके थे उन के लिए. बच्चों ने न आना ही बेहतर समझा. वे अपने दकियानूसी विचारों वाले परिवारों को जानते थे. तारा और सितारा दो जिस्म एक जान थीं.

बचपन की सहेलियां. अलगअलग हो कर भी एकदूसरे को याद करतीं. एकदूसरे की याद में आंसू बहातीं. वह दिनदिन भर बतियाना, एकदूसरे को पान खिलाना, चायनाश्ता करवाना, गपें करने का हर संभव बहाना तलाशना. मीठी ईद की सेंवइयां, दीवाली की मिठाई. लेकिन क्या करें, धर्म के पहरे, समाज की चेतावनी के आगे दोनों बुजुर्ग सहेलियां मजबूर थीं. इश्क की कोई जात नहीं होती. प्यार का कोई धर्म नहीं होता. दिल से दिल का मिलन, प्रेमियों का हो या सखियों का, कहां टूटता है. पहरे शरीर पर होते हैं मन और विचारों पर नहीं. अपने अहं और जिद की वजह से दोनों परिवारों और समाज के लोगों ने उन्हें शेष जीवन मिलने तो नहीं दिया पर सुना है कि

अंतिम समय तारा की जबान पर सितारा का नाम था और सितारा ने तारा कह कर अंतिम सांस ली थी. यह भी सुना है कि दोनों की मृत्यु एक ही दिन लगभग एक ही समय हुई थी. 2 बुजुर्ग सहेलियों में इतना प्रेम देख कर मातापिता ने धर्म की दीवार तोड़ कर, मजहब के ठेकेदारों को ठोकर मारते हुए अजय को अपना दामाद और शबनम को अपनी बहू स्वीकार कर लिया था और उन से निवेदन किया था कि वे घर वापस आ जाएं.

Anupama: पाखी हुई घरेलू हिंसा का शिकार, क्या बेटी को इंसाफ दिला पाएगी अनुपमा

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में आए दिन नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. ‘अनुपमा’ की टीआरपी को बढ़ाने के लिए  मेकर्स जद्दोजहद कर रहे है. बीते दिन रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में देखने को मिला कि काव्या वनराज को अंधेरे में रखने के लिए पछताती है और बेबी शावर के दौरान भी खुश नहीं रहती. वहीं दूसरी ओर मालती देवी को बार-बार बच्चे के रोने की आवाज आती है जिससे वह डर जाती हैं.

पाखी हो रही है घरेलू हिंसा का शिकार

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अधिक मेहता पाखी पर चिल्लाता है. वहीं उसका हाथ खींचकर बात करेगा. अधिक कहेगा हर चीज तुम्हारी मर्जी से नहीं होगा. क्या सोच के उसे तुम ज्वाइन कर रही हो. न डिग्री है न डिप्लोमा, बताओं क्यों ऑफिस जा रही हो. मुझे और मेरी बहन को परेशान करने.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupama_world8 (@anupamaa_world8)

पाखी पर हाथ उठाएगा अधिक

गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कि अधिक पाखी से  उससे नौकरी छोड़ने के लिए कहेगा, लेकिन पाखी नहीं मानेगी. पाखी अधिक को जवाब देगी कि तुम्हें डर है ना कि मैं कहीं बडी को बता न दूं कि तुम और तुम्हारी बहन पूरे परिवार को खा रहे हैं. इस बात से नाराज होकर अधिक पाखी को तमाचा मार देगा.

अनुपमा सिखाएगी सबक

‘अनुपमा’ में दिखाया जाएगा कि अधिक को जवाब देने के लिए पाखी भी हाथ उठाएगी, लेकिन तभी अधिक भीगी बिल्ली बन जाएगा. दरअसल, वहां पर बा आ आजाएंगी और वह बा के सामने अच्छा पति बनकर दिखाएगा. अधिक बा के सामने जताएगा कि पाखी उसे मारने की कोशिश कर रही थी. अधिक किसी तरह से बा को लेकर वहां से चला जाएगा, और बा से कहेगा किसी से कुछ मत कहना.लेकिन अनुपमा सुन लेती है. अनुपमा अपने बच्चों से बहुत प्यार करती है अगर अनुपमा यह बात पता चली तो वह अधिक की क्लास लगा देगी. लेकिन पाखी भी ठान लेगी कि वह चुप नहीं बैठेगी

BB OTT 2: एल्विश यादव पर फूटा Aashika Bhatia की मां का गुस्सा, इस कमेंट पर भड़की

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी 2 काफी सुर्खियों में है. बिग बॉस ओटीटी 2 को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. शो में अभिषेक मल्हन, मनीषा रानी, एल्विश यादव और आशिका भाटिया की चौकड़ी दर्शकों को खूब पसंद आ रही है. बिग बॉस ओटीटी 2 में एल्विश यादव जबरदस्त छा रहे है. दर्शक एल्विश यादव को भर-भर के प्यार दे रहे है. वहीं एल्विश अपने मजाकियां अंदाज और बड़बोलेपन से वह जनता को खूब हंसा रहे है. बिग बॉस ओटीटी 2 के बाते एपिसोड में एल्विश यादव ने आशिका भाटिया के छोटे कपड़ों पर कमेंट किया था. हालांकि, इस पर आशिका की मां ने रिएक्शन दिया है.

आशिका की मां ने एल्विश पर निकाला गुस्सा

मीडिया इंटरव्यू के मुताबिक आशिका की मां ने बताया कि उन्हें एल्विश यादव की बात बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी. उन्होंने कहा, “मुझे एल्विश की यह बात सुनकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगी. इस बात पर एल्विश यादव को रोकना चाहिए थे. क्योंकि उन्हें किसी के कपड़ों पर कमेंट करने का कोई हक नहीं बनता कि तुम छोटे कपड़े क्यों पहनते हो. सामने बोलने की उसकी हिम्मत नहीं थी लेकिन जब आशिका को यह बात पता चलेगी तो उसे बहुत बुरा लगेगा.”

बिग बॉस ओटीटी 2 शो हुआ 2 हफ्ते के लिए एक्सटेंड

फिलहाल शो में बेबीका धुर्वे, पूजा भट्ट, मनीषा रानी, अभिषेक मल्हान, एल्विश यादव, अविनाश सचदेव, जिया शंकर, जद हदीद, और आशिका भाटिया कंटेस्टेंट हैं. पिछले वीकेंड के वार पर फलक नाज घर से बेघर हो गई थी. रियलिटी शो बिग बॉस ओटीटी 2 लगातर टीआरपी बढ़ने और दर्शको का खूब सारा प्यार मिलने के बाद शो को 2 हफ्ते के लिए एक्सटेंड कर दिया गया है.

दो सखियां: भाग 2- क्या बुढ़ापे तक निभ सकती है दोस्ती

तारा ने कहा, ‘‘सुना है पाकिस्तान के राष्ट्रपति को पुलिस ने पकड़ लिया.’’

सितारा ने कहा, ‘‘पाकिस्तान अजीब मुल्क है जहां राष्ट्रपति को पुलिस पकड़ लेती है. भारत में किसी पुलिस वाले की हिम्मत नहीं कि राष्ट्रपति पर उंगली भी उठा सके. यहां पुलिस वाले तो बस गरीबों को ही पकड़ते हैं.’’

‘‘अरे छोड़ो ये सब, यह बताओ, कल क्या कहने वाली थीं?’’ सितारा याद करने की कोशिश करती है लेकिन उसे याद नहीं आता. फिर वह बातों में रस लाने के लिए काल्पनिक बात कहती है, ‘‘हां, मैं कह रही थी कि वर्मा की बिटिया कल छत पर उलटी कर रही थी. कहीं पेट से तो नहीं है?’’

‘‘हाय-हाय, वर्माजी के मुख पर तो कालिख पुतवा दी लड़की ने. घर वालों को तो पता ही होगा.’’

‘‘क्यों न होगा. उस के मांबाप के चेहरे का रंग उड़ा हुआ है. रात में घर से चीखने की आवाजें आ रही थीं. बाप चिल्ला रहा था कि नाक कटवा कर रख दी. क्या मुंह दिखाऊंगा लोगों को. और लड़की सुबकसुबक कर रो रही थी. आज देखा कि वर्माइन अपनी बेटी को बिठा कर रिकशे पर ले जा रही थीं. दोनों मांबेटी के चेहरे उतरे हुए थे. जरूर बच्चा गिराने ले जा रही होगी.’’

‘‘क्या सच में?’’

‘‘तो क्या मैं झूठ बोलूंगी. धर्म कहता है झूठ बोलना गुनाह है, जैसे शराब पीना गुनाह है.’’

‘‘लेकिन क्या मुसलमान शराब नहीं पीते?’’

‘‘अरे, अब धर्म की कौन मानता है. जो पीते हैं वे शैतान हैं.’’

‘‘जीजा भी तो पीते थे.’’ सितारा ने दोनों कान पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘तौबातौबा, कभीकभी दोस्तों के कहने पर पी लेते थे. अब मृतक के क्या दोष निकालना. बहुत भले इंसान थे.’’

‘‘लेकिन मैं ने तो सुना है कि पी कर कभीकभी तुम्हें पीटते भी थे?’’

‘‘किस से सुना है? नाम बताओ उस का?’’ सितारा ने गुस्से में कहा तो फौरन तारा ने उसे पान लगा कर दिया. सितारा ने पान मुंह में रखते हुए कहा, ‘‘अब आदमी कभीकभी गुस्से में अपनी औरत को पीट देता है. मियांबीवी के बीच में थोड़ीबहुत तकरार जरूरी भी है. मैं भी कहां मुंह बंद रखती थी. पुलिस वालों की तरह सवाल पर सवाल दागती थी, ‘देर क्यों हो गई, कहीं किसी के साथ चक्कर तो नहीं है?’’’

‘‘था क्या कोई चक्कर?’’

‘‘होता तो शादी नहीं कर लेते. हमारे मर्दों को 4 शादियों की छूट है. लेकिन मेरा मर्द बाहर चाहे जो करता हो, घर पर कभी किसी को नहीं लाया.’’

फिर थोड़ी देर खामोशी छा जाती. इतने में चायनाश्ता हो जाता. वे फिर तरोताजा हो जातीं और सोचतीं कि कहां से शुरू करें. आखिर 2 औरतें कितनी देर खामोश रह सकती हैं.

‘‘तुम अपनी कहो, कल बहू चिल्ला क्यों रही थी?’’

‘‘अरे, पतिपत्नी में झगड़ा हो गया था किसी बात को ले कर. थोड़ी देर तो मैं सुनती रही, फिर जब नीचे आ कर दोनों को डांटा तो बोलती बंद दोनों की.’’ यह तो तारा ही जानती थी कि जब उस ने पूछा था कि क्या हो गया बहू? तो बहू ने पलट कर जवाब दिया था, ‘अपने काम से काम रखो, ज्यादा कान देने की जरूरत नहीं है. अपने लड़के को समझा लो कि शराब पी कर मुझ पर हाथ उठाया तो अब की रिपोर्ट कर दूंगी दहेज की. सब अंदर हो जाओगे.’

‘‘लेकिन मुझे तो सुनने में आया कि कोई दहेज रह गया था, उस पर…’’

तारा ने बात काटते हुए कहा, ‘‘हम क्या इतने गएगुजरे हैं कि बहू को दहेज के लिए प्रताडि़त करेंगे. किस से सुना तुम ने…सब बकवास है. अब झगड़े किस घर में नहीं होते. हमारा आदमी हमें पीटता था तो हम चुपचाप रोते हुए सह लेते थे. पति को ही सबकुछ मानते थे. लेकिन आजकल की ये पढ़ीलिखी बहुएं, थोड़ी सी बात हुई नहीं कि मांबाप को रो कर सब बताने लगती हैं. रिपोर्ट करने की धमकी देती हैं. ऐसे कानून बना दिए हैं सरकार ने कि घरगृहस्थी चौपट कर दी. सत्यानाश हो ऐसे कानूनों का.’’

‘‘हां, सच कहती हो. घरपरिवार के मामलों में सरकार को क्या लेनादेना. जबरदस्ती किसी के फटे में टांग अड़ाना.’’

तारा ने आंखों में आंसू भरते हुए कहा, ‘‘घर तो हम जैसी औरतों की वजह से चलते हैं. बाहर आदमी क्या कर रहा है, हमें क्या लेनादेना लेकिन आजकल की औरतें तो अपने आदमी की जासूसी करती हैं. वह क्या कहते हैं…मोबाइल, हां, उस से घड़ीघड़ी पूछती रहती हैं, कहां हो? क्या कर रहे हो, घर कब आओगे? अरे आदमी है, काम करेगा कि इन को सफाई देता रहेगा. हमारा आदमी बाहर किस के साथ था, हम ने कभी नहीं पूछा.’’ यह तो तारा ने नहीं बताया कि पूछने पर पिटाई हुई थी कई दफा. उस का आदमी बाहर किसी औरत को रखे हुए था. घर में कम पैसे देता था. कभीकभी घर नहीं आता था. आता तो शराब पी कर. पूछने पर कहता कि मर्द हूं. एक रखैल नहीं रख सकता क्या. तुम्हें कोई कमी हो तो कहो. दोबारा पूछताछ की तो धक्के दे कर भगा दूंगा. उस ने अपने आंसुओं को रोका. पानी पिया. पिलाया. फिर पान का दौर चला.

‘‘अरे तारा, कल बेटा पान ले कर आया था बाजार से. लाख महंगा हो, एक से एक चीजें पड़ी हों सुगंधित, खट्टीमीठी लेकिन घर के पान की बात ही और है.’’

‘‘क्या था ऐसा पान में? क्या तुम ने देखा था?’’

‘‘हां, जब बेटे ने बताया कि पूरे 20 रुपए का पान है. ये बड़ा. तो इच्छा हुई कि आखिर क्या है इस में? खोला तो बेटे से पूछा, ‘ये क्या है?’ तो बेटे ने बताया कि अम्मी, यह चमनबहार है, यह खोपरा है, यह गुलकंद है, यह चटनी है. और भी न जाने क्याक्या. लेकिन अच्छा नहीं लगा, एक तो मुंह में न समाए. उस पर खट्टामीठा पान. अरे भाई, पान खा रहे हैं कोई अचार नहीं. पान तो वही जो पान सा लगे, जिस में लौंग की तेजी, इलाइची की खुशबू, कत्था, चूना, सुपारी हो. ज्यादा हुआ तो ठंडाई और सौंफ. बाकी सब पैसे कमाने के चोंचले हैं.’’ यह नहीं बताया सितारा ने कि उन्हें शक हो गया था कि जमीनमकान के लोभ में कहीं बेटा पान की आड़ में जहर तो नहीं दे रहा है. सो, उन्होंने पान खोल कर देखा था. जब आश्वस्त हो गईं और आधा पान बहू को खिला दिया, तब जा कर उन्हें तसल्ली हुई. बेटेबहू काफी समय से गांव की जमीन बेचने के लिए दबाव बना रहे थे.

‘‘कितनी उम्र होगी तुम्हारी पोती की?’’

‘‘होगी कोई 16 वर्ष की.’’

‘‘लड़का देखा है कोई?’’

‘‘नहीं, बहू कहती है कि 18 से पहले शादी करना गैरकानूनी है. अभी उम्र ही क्या है? मांबाप के यहां चैन से रह लेने दो. फिर तो जीवनभर गृहस्थी में पिसना ही है. एक तो ये कानून नएनए बन गए हैं, फिर लड़की जात. इस उम्र में तो हम 2 बच्चों की अम्मा बन गए थे. लेकिन बहूबेटे कहते हैं कि अभी उम्र नहीं हुई शादी की. पढ़ना कम, घूमना ज्यादा. एक कहो, दस कहती हैं आजकल की औलादें. तौबा.’’

‘‘यही हाल तो हमारे यहां है. जब देखो सिनेमा, टीवी, क्रिकेट. पढ़ाई का अतापता नहीं. 10वीं में फेल हो चुके हैं. उम्र 20 साल के आसपास हो गई है. हम कहें तो उन की अम्मा को बुरा लगता है. बाप, बेटे से पूछता है कितना स्कोर हुआ. यह कैसा खेल है भई.’’

‘‘अच्छा क्रिकेट. हमारे यहां भी यही चलता है. खेल न हुआ, तमाशा हो गया. इस ने इतने बनाए, उस ने आउट किया. बापबेटी में बहस चलती है. कौन, क्यों कैसे आउट हो गया. एंपायर ने गलत फैसला दे दिया. टीवी पर चिपके रहते हैं दिनभर. ये भी नहीं कि अम्मी को मनपसंद सीरियल देख लेने दें. बेटा तो बेटा, पोती रिमोट छीन लेती है हाथ से, न शर्म न लिहाज.’’

‘‘क्या करें, अब हमारे दिन नहीं रहे. बुढ़ापा आ गया. बस, अपनी मौत का रास्ता तक रहे हैं. हमारे जमाने में तो रेडियो चलता था. ये औफिस गए नहीं कि हम ने गीतमाला लगाई. मजाल है कोई डिस्टर्ब कर दे. सास टोक भी दे तो हम कहां मानने वाले थे.’’

‘‘सच कहती हो तारा, हमारे मियां तो हमें अकसर फिल्म दिखाने ले जाते थे, क्या फिल्में बनती थीं. मैं तो मरती थी दिलीप कुमार पर. क्या शानदार गाने, मन मस्त हो जाता था. आजकल तो पता नहीं क्या गा रहे हैं, सिवा होहल्ला के. हीरो बंदर की तरह उछलकूद कर रहा है. हीरोइन ने कपड़े ऐसे पहने हैं कि…नहीं ही पहने समझो. तहजीब का तो कचूमर निकाल दिया है.’’

Monsoon Skincare Tips: बारिश में स्किन पर होती है चिपचिपाहट तो इस्तेमाल करें, ये होममेड टोनर

बरसात के मौसम में हवा में नमी, उमस, पसीना और हल्की गर्मी से स्किन चिपचिपाहट महसूस करती है. Monsoon के सीजन में स्किन की देखभाल करना बेहद जरूरी है. इस मौसम में उमस की वजह से स्किन चिड़चिड़ी महसूस करती है. बारिश में स्किन प्रॉब्लम होना आम बात है. स्किन पर पिंपल के अलावा रैशज या फिर लालपन तक दिखने लगता है. बारिश में अगर भीग जाए तो खुजली समेत कई फंगल इंफेक्शन संबंधित स्किन प्रॉब्लम होने लगती है. इस Monsoon स्किन पर होने वाली चिपचिपाहट से बचना है तो कुछ घरेलू टिप्स आजमा सकते हैं. जानें आप किन तरीकों से घर पर ही होममेड टोनर तैयार कर सकते हैं.

  1. चावल का टोनर

हर भारतीय किचन में चावल जरुर मिलेगा. जो चावल भूख मिटाने के साथ-साथ स्किन केयर के लिए बेस्ट है. आप घर पर चावल का टोनर भी इस्तेमाल कर सकते है. इसके लिए चावल को अच्छे से धोने के बाद इसे भिगो दें. अगले दिन चावल को निकालकर इसकी स्मूदी बना लें और इसमें पानी में मिलाकर एक बोतल में डाल लें. रात में सोने से पहले इसे स्किन पर लगाएं और फर्क देखें.

2. ग्रीन टी टोनर

घर पर ग्रीन टी का टोनर बनाना बहुत आसान है, इसके लिए सबसे पहले आप पैन में पानी लें और इसमें ग्रीन टी बैग शामिल करें. थोड़ी देर गर्म करने के बाद इसे ठंडा होने दें. अब एक बोतल में इसे शामिल करें. रात में सोने से पहले चेहरे को अच्छे से वॉश करें और मॉइस्चराइजर लगाने के बाद इस टोनर को जरूर अप्लाई करें.

3. एलोवेरा टोनर

चिपचिपाहट को दूर करने के लिए एलोवेरा सबसे बढ़िया है. इसके लिए आधा कप गुलाब जल लें और इसमें एलोवेरा जेल के पल्प को मिलाएं. इसे अच्छे से मिक्स करके एक टाइट कंटेनर में स्टोर करें. सुबह उठने के बाद और रात में सोने से पहले इसे स्किन पर अप्लाई करें. ये आपकी स्किन को फ्रेश रखेगा.

4. खीरे का टोनर

खीरे में अधिक मात्रा में पानी होता है और ये स्किन को रिपेयर और कूल करने में भी कारगर होता है. खीरे में पोषक तत्वों के साथ ही एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं. खीरे से बनी टोनर स्किन को फ्रेश भी फील कराता है. इसका टोनर बनाने के लिए एक खीरे को कद्दूकस कर लें और एक बोतल में डाल लें. इसमें पानी डालें और रोज वाटर भी ऐड करें. रोज रात में इसे चेहरे पर स्प्रे करना न भूलें.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें