BB OTT 2: मनीषा रानी के कैरक्टर पर बेबिका ने उठाई उंगली तो भिड़ गया अभिषेक

सलमान खान के कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस ओटीटी 2 के हालिया एपिसोड में बेबीका धुर्वे और मनीषा रानी के बीच गंदी लड़ाई देखने को मिली. उनके बीच ये लड़ाई एक टास्क के दौरान हुआ जब बेबीका ने मनीषा को बहुत उल्टी-सीधी बात की और फिर उन्होंने मनीषा को धक्का भी दिया. जानिए क्या है पूरा मसला

बेबीका धुर्वे-मनीषा रानी के बीच लड़ाई

वीकेंड वार के बाद सोमवार को बिग बॉस ओटीटी 2 में एक मजेदार टास्क हुआ. ऐंजल और डेविल का मुकाबला हुआ. इस टास्क के लिए घर के सदस्यों को दो हिस्सों में बांटा गया था. शो मे देखा जा सकता है बेबीका और जिया का टार्गेट मनीषा रानी थीं. बेबीका, मनीषा को बार-बार उल्टा-सीधा बोल रही थीं और उनके कैरेक्टर पर उंगली उठा रही थी.

बेबीका ने कहा कि मनीषा की नजर मर्दों के अलावा कहीं ओर घूमती ही नहीं है. बेबीका ने यहां तक कहा- “मनीषा को मर्दों के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता है. इस पर ही उन्होंने पूरा करियर बनाया है और वही बात मुंह पर मल दो तो मैडम को चुभता है. इस टास्क के दौरान बेबीका मनीषा को धक्का देती है जिसके चलते वह रोने लगती है. इसके बाद अभिषेक मनीषा के लिए, बेबीका से भिड़ जाते है.

अभिषेक मल्हान और बेबीका धुर्वे के बीच हुआ युद्ध

कॉन्ट्रोवर्शियल शो बिग बॉस ओटीटी 2 एक बार फिर से बेबीका धुर्वे और अभिषेक मल्हान के बीच छिड़ा युद्ध. लड़ाई के दौरान बेबीका ने अभिषेक से कहा चीप, जिसपर अभिषेक भड़क गया. फिर दोनों के बीच तू तू मैं मैं शुरु हो गया जिससे घर वाले भी परेशान दिखे.

मनीषा रानी ने बेबीका के माता-पिता से मांगी माफी

वहीं शो में देखा गया था कि मनीषा रानी कैमरे के सामने में आकर बेबीका के माता-पिता से माफी मांगती नजर आती है. मनीषा ने कैमरे के सामने रोते-रोते सॉरी अंकल आंटी कहते हुए बेबीका के माता-पिता से माफी मांगी.

‘सिंघम’ एक्टर जयंत सावरकर का 87 साल की उम्र में निधन

मराठी और हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाने वाले अनुभवी एक्टर जयंत सावरकर का उम्र संबंधी समस्याओं के कारण सोमवार सुबह अस्पताल में निधन हो गया, उनके बेटे कौस्तुभ सावरकर ने उनके निधन पर पुष्टि की.  जयंत सावरकर 87 साल के थे.

जयंत सावरकर का फिल्मी करियर

मराठी, हिंदी फिल्मों, थिएटर और टेलीविजन में सावरकर का करियर छह दशकों तक फैला रहा, उन्होंने हरिओम विठला, गडबड गोंधल, 66 सदाशिव और बकाल, जबकि युगपुरुष, वास्तव और सिंघम जैसी फिल्मों में अभिनय किया हैं.

वेंटिलेटर पर थे एक्टर

लगभग 10-15 दिन पहले उन्हें ब्लड प्रेशर के कारण ठाणे एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बीती रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, और उम्र संबंधी समस्याओं के कारण सुबह 11 बजे के आसपास उनका निधन हो गया.

 

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फिल्मी करियर की शुरुआत

सावरकर ने मराठी थिएटर में एक बैकस्टेज कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया और उन्हें फेमस नाटककार विजय तेंदुलकर के स्टेज प्रोडक्शन मानुस नवाचे बेट में अभिनय करने का मौका मिला. वहीं इस समय उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है. अंतिम संस्कार मंगलवार सुबह होगा.

अजय देवगन के साथ स्क्रीन शेयर की

सिंघम में जयंत सावरकर ने अजय देवगन के साथ स्क्रीन शेयर की थी. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर काफी धमाल मचाया था. वहीं मराठी सीरीज की बात करें तो एक्टर ने वेब सीरीज ‘समांतर’ में एक ज्योतिषी का किरदार निभाया था जिसे दर्शकों द्वारा काफी पंसद किया जाता है. जयंत सावरकर को आज भी इस किरदार के लिए भी पहचाना जाता है. ये सीरीज साल 2020 में रिलीज हुई थी.

महाराष्ट्र सरकार ने दिया अवॉर्ड

जयंत सावरकर मराठी फिल्म के मशहूर कलाकर है. एक्टर के सम्मान में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें अवॉर्ड से नवाजा. सावरकर को महाराष्ट्र सरकार ने नटवर्य प्रभाकर पणशीकर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया था.

Beauty Tips: जानें चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने के ये 7 तरीके

चेहरा हमारे हमारे व्यक्तित्व का आईना होता है. यही वजह है कि हर इंसान के चेहरे की चमक और खूबसूरती बहुत मायने रखती है. आजकल सभी लोग अपने चेहरे पर प्राकृतिक ग्लो के लिए कई उपाय ढूंढ़ते रहते है. चहरे पर चमक पाने के लिए बाजार में कई प्रोडक्ट उपलब्ध है लेकिन उनमें मौजूद कैमिकल आपकी त्वचा को खराब कर सकते है. आज हम आपको इस लेख के जरिए होम मेड फेस ग्लो टिप्स बताने जा रहे हैं, जो आपको नेचुरल लुक देगा.

  1. हाइड्रेशन

अपनी त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए पूरे दिन खूब पानी पियें. हाइड्रेटेड त्वचा कोमल और चमकदार दिखती है, जिससे आपको प्राकृतिक चमक मिलती है.

2. स्वस्थ आहार

फलों, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन करें. उच्च एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे कि जामुन, पालक और नट्स का सेवन करें. यह आपकी त्वचा को नुकसान से बचाने और एक स्वस्थ चमक को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं.

3. त्वचा की देखभाल

एक अच्छी त्वचा की देखभाल के लिए दिनचर्या को ठीक करें. प्रतिदिन अपने चेहरे पर क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग जरुर करें. इसे साफ और पोषित रखने के लिए अपनी त्वचा के हिसाब से  नेचुरल प्रोडक्ट का उपयोग करें.

4. एक्सफोलिएशन

मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने और छिद्रों को खोलने के लिए नियमित रूप से अपनी त्वचा को एक्सफोलिएट करें. यह आपकी त्वचा की देखभाल बेहतर ढंग से करने में मदद करेगा और आपको चिकनी, अधिक चमकदार रंगत देगी.

5. धूप से सुरक्षा

उचित एसपीएफ वाले सनस्क्रीन का उपयोग करके अपनी त्वचा को हानिकारक यूवी किरणों से बचाएं. सनस्क्रीन समय से पहले बुढ़ापा रोकने में मदद करता है और आपकी त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखता है.

6. फेशियल मसाज

रक्‍तसंचार में सुधार और आपकी त्वचा को एक स्वस्थ चमक देने के लिए फेशियल मसाज सबसे बेस्ट है. धीरे-धीरे अपने चेहरे पर गोलाकार गति में मालिश करें. आप मसाज के लिए फेशियल रोलर या अपनी उंगलियों का उपयोग कर सकते हैं.

7. प्राकृतिक मेकअप

अपने फेस के लिए प्राकृतिक मेकअप लुक चुनें जो भारी न होकर आपकी विशेषताओं को निखारे. ग्लोइंग स्किन के लिए अपने चेहरे पर हल्के फाउंडेशन या टिंटेड मॉइस्चराइज़र, हल्के ब्लश और हल्के हाइलाइटर का उपयोग करें.

मुझे औस्टियोआर्थ्राइटिस डायग्नोज हुआ है, क्या इससे मेरे घुटनों पर असर होगा?

सवाल-

मेरी उम्र 35 साल है. मुझे औस्टियोआर्थ्राइटिस डायग्नोज हुआ है. क्या आगे चल कर मेरे घुटने खराब हो सकते हैं?

जवाब-

औस्टियोआर्थ्राइटिस में जोड़ों के कार्टिलेज क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. जब ऐसा होता है तो हड्यों के बीच कुशन न रहने से वे आपस में टकराती हैं, जिस से जोड़ों में दर्द होना, सूजन आ जाना, कड़ापन और मूवमैंट प्रभावित होना जैसी समस्याएं हो जाती हैं. औस्टियोआर्थ्राइटिस के कारण घुटनों के जोड़ों के खराब होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कई उपाय हैं, जिन के द्वारा आप औस्टियोआर्थ्राइटिस के कारण होने वाली जटिलताओं को कम कर सकते हैं. कैल्सियम और विटामिन डी से भरपूर भोजन का सेवन करें. वजन न बढ़ने दें. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. रोज कम से कम 1 मील पैदल चलें. इस से बोन मांस बढ़ता है.

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दिल्ली-एनसीआर में आर्थराइटिस की एक बड़ी वजह अंडरग्राउंड वौटर या बोरवेल के पानी का इस्तेमाल भी है. डाक्टरों का कहना है कि अंडरग्राउंड वौटर में फ्लोराइड की अधिक मात्रा से लोगों की हड्डियों के जौइंट खराब हो रहे हैं. उन्हें आर्थराइटिस और ओस्टियो आर्थराइटिस जैसी बीमारी हो रही है. देश के जिन इलाकों में अंडरग्राउंड वौटर में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है, उनमें दिल्ली भी शामिल है.

इंडियन कार्टिलेज सोसायटी और आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. राजू वैश्य ने बताया कि दिल्ली के वेस्ट, नौर्थ-वेस्ट, ईस्ट, नौर्थ ईस्ट और साउथ वेस्ट जोन में इस बीमारी के मरीज ज्यादा हैं. आए दिन लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि फ्लोराइड युक्त पानी लगातार पीने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. जोड़ों में कड़ापन आ जाता है. इसके बाद आर्थराइटिस और ओस्टियो आर्थराइटिस जैसी समस्याएं हो जाती हैं. गंभीर स्थिति में हाथ-पैर की हड्डियां टेड़ी हो जाती हैं. जब कोई ज्यादा फ्लोराइड वाला पानी लगातार पीता है तो उसे फ्लोरोसिस होने का खतरा भी होता है. जिन एरिया में पाइपलाइन की सप्लाई नहीं है, वहां बोरवेल का पानी खूब इस्तेमाल हो रहा है.

वेंकटेश्वर हास्पिटल के आर्थोपेडिक सर्जन डाक्टर आर.के. पांडेय का भी यही मानना है. उन्होंने बताया कि जो लोग लगातार बोरवेल का पानी पीते हैं, उनमें आर्थराइटिस का खतरा काफी होता है. जब खून में फ्लोराइड का लेवल बढ़ता है तो वह जाइंट को खराब करने लगता है. डाक्टर वैश्य ने कहा कि फ्लोरोसिस कई तरह के होते हैं. अस्थि फ्लोरोसिस हड्डियों पर असर करता है. यह युवा और बुजुर्ग दोनों को हो सकता है. इसमें गर्दन, कूल्हे, बांह और घुटनों के जौइंट में दर्द होता है. हड्डियों का लचीलापन खत्म हो जाता है. इसे शुरुआती दौर में पहचान पाना मुश्किल है.

मां नहीं बनें बच्चे की दोस्त

दुनिया का सब से खूबसूरत और मजबूत रिश्ता मां और बच्चे का होता है. मां अपनी संतान के लिए जान भी दे सकती है. बच्चा भी मां के सब से ज्यादा करीब होता है और इमोशनली कनैक्टेड होता है. मां ही होती है जो बच्चे को अच्छी तरह सम?ाती है. कोई भी बच्चा अपनी हर समस्या सब से पहले अपनी मां के साथ शेयर करना चाहता है. मां और बच्चे का यह रिश्ता बेहद खूबसूरत और अनोखा होता है पर कभीकभी कुछ माताएं अनजाने में अपनी संतान के प्रति ऐसा व्यवहार रखने लगती हैं जिस की वजह से बच्चा न सिर्फ मानसिक तौर पर मां से दूर हो जाता है बल्कि दोनों के बीच भावनात्मक लगाव भी कम हो जाता है. ऐसे में मां को इन बातों पर जरूर ध्यान देना चाहिए:

अपने एक बच्चे को ज्यादा प्यार देना

अगर किसी महिला के 2 या 2 से अधिक बच्चे हैं और उस का ध्यान केवल एक ही पर रहता है या फिर एक को ज्यादा मानती है और दूसरों को समानरूप से प्यार नहीं दे पाती है तो यह एक बहुत बड़ी गलती है. ऐसा कर के वह न सिर्फ अपनी उस संतान को स्वयं से बल्कि अपने भाईबहनों से भी दूर करती जाती है. बच्चे भावुक होते हैं. जब उन्हें मां के द्वारा इग्नोर किया जाता है या डांटफटकार मिलती है तो उन के भीतर हीनभावना का विकास हो जाता है जो उन के भविष्य के लिए सही नहीं होता है. इसलिए मां को चाहिए कि अपने सभी बच्चों को हमेशा बराबर प्यार दे.

हर बार बच्चे को दोष देना

मातापिता भी इंसान हैं और इस नाते गलतियां कर सकते हैं. मगर कई घरों में मांबाप हमेशा खुद को सही मानते हैं और बच्चे को ही दोषी मान कर डांटने लगते हैं. अगर आप भी हर बात पर खुद को सही और अपनी संतान को गलत ठहराने की कोशिश करते हैं तो यह आप दोनों के रिश्ते के लिए सही नहीं है. इस से बच्चे के मन में आप के प्रति विद्रोह की भावना घर कर जाती है जो आगे चल कर उसे विकृत मानसिकता का इंसान बना सकती है. मां खासतौर पर ममता और प्यार की प्रतिमूर्ति होती है और कोई भी बात प्यार से समझ सकती है. इसलिए अपने बच्चे के प्रति कभी कठोर रुख न अपनाएं बल्कि उसे प्यार से डील करें.

दोस्त की भूमिका

एक मां को अपने बच्चे के लिए कभीकभी दोस्त की भूमिका भी निभानी चाहिए. उस के साथ बातें कर के उस के मन की हालत सम?ानी चाहिए. इस से दोनों के बीच रिश्ता गहरा होता है. मगर साथ में यह भी पता होना चाहिए कि कब अपनी संतान का दोस्त बन कर व्यवहार करना है और कब एक मां के रोल को निभाना है क्योंकि अगर हर समय दोस्ती ही दर्शाई तो उस का व्यवहार आप के लिए बदल सकता है.

बच्चे के जज्बात समझें

अगर आप हमेशा अपनी बात ऊपर रखती हैं और चिड़चिड़ी रहती हैं तो आप का बच्चा आप से खुल कर बात नहीं कर सकेगा. अगर आप का बच्चा किसी बात पर आप से नाराज है तो उसे मनाने का प्रयास जरूर करें. अगर आप उसे दुखी ही छोड़ देती हैं तो यह आप के लिए सही नहीं है. आप उसे सम?ाएं फिर प्यार से गले लगा लें. इस से बच्चा आप से और भी गहराई से जुड़ जाएगा.

पौजिटिव अप्रोच

आप के बच्चे का ओवरऔल व्यवहार कैसा है या वह कितनी सकारात्मक सोच वाला तमीजदार बच्चा है यह काफी हद तक मां का बच्चे के प्रति सकारात्मक रवेए और परवरिश की देन होती है. कुछ शोध बताते हैं कि जिन बच्चों का अपनी मां के साथ पौजिटिव बौंड होता है वे अपनी युवास्था में भी संतुलित व्यक्तित्व वाले और सही निर्णय लेने में सक्षम होते हैं. मां के साथ अच्छे रिश्ते को जीने वाले ज्यादातर बच्चे हिंसा या क्रोध से दूर रहते हैं.

मां के साथ मजबूत रिश्ता

बच्चे जैसा माहौल घर में देखते हैं वैसा ही वो अपने जीवन में अपनाते भी हैं. कुछ नए शोध बताते हैं कि जिन बच्चों की अपनी मां के साथ स्ट्रौंग रिलेशनशिप होती है वे हमेशा अपनी मां की फीलिंग्स की कद्र करते हैं. अगर उन की मां और उन के पापा के बीच किन्हीं बातों को ले कर ?ागड़े होते हैं या उन के पापा हिंसक व्यवहार करते हैं तो ऐसे बच्चे को अपनी मां की भावनाओं की बेहतर सम?ा होती है.

बच्चे बनते हैं इमोशनली स्ट्रौंग

एक बच्चे का सब से ज्यादा लगाव अपनी मां से होता है. वह केवल भोजन के लिए ही अपनी मां पर निर्भर नहीं होता है बल्कि उस का इमोशनल अटैचमैंट भी होता है. इसी वजह से मां से बच्चे का संवाद उस के मानसिक और भावनात्मक व्यवहार को प्रभावित करता है.

जब बच्चे को घर में अच्छा माहौल, मां की सपोर्ट और भरपूर प्यार मिलता है तो वह खुद को सुरक्षित महसूस करने लगता है और उस में जीवन के प्रति पौजिटिव थिंकिंग पैदा होती है. जिस घर में मां बच्चे के साथ बातें कर के उस की हर परेशानी का हल निकालती रहती है और बच्चे का हौसला बढ़ाती है तो ऐसे बच्चे इमोशनली स्ट्रौंग बनते हैं.

अमेरिका की इलिनोइस यूनिवर्सिटी की स्टडी के अनुसार जब बच्चा अपनी मां के साथ खेलता है तो उस दौरान मां और बच्चा दोनों एकदूसरे के संकेतों का सहज रूप से जवाब दे रहे होते हैं. यह सकारात्मक बातचीत बच्चे के हैल्दी सोशल और इमोशनल डैवलपमैंट में हैल्प करती है.

बच्चे को प्यार से समझएं

मां और बच्चे का रिश्ता बहुत मजबूत होता है. लेकिन समय के साथ हर रिश्ते में कुछ बदलाव होते हैं. उन बदलावों को अपना कर ही आप आगे बढ़ सकते हैं. इसलिए एक उम्र के

बाद बच्चे के साथ हमेशा एक दोस्त की तरह रहें ताकि वह अपनी बात आप से बिना किसी डर के शेयर कर पा सके. जब आप के बच्चे से कोई गलती हो जाए तो गुस्से से डांटने के बजाय उसे प्यार से समझाएं. इस से वह आप की बातों को अच्छे से समझेगा और आप के बीच का रिश्ता मजबूत होगा.

बच्चे को समय दें

आज के समय में ज्यादातर महिलाएं जौब करती हैं. ऐसे में घर और काम के बीच समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है. अत: वह बच्चे को पूरा समय नहीं दे पाती. अगर आप के साथ भी ऐसा है तो परेशान न हों. बस यह कोशिश करें कि घर में आप के पास जितना भी समय है बच्चे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं. याद रखें सही से बात न हो पाने के कारण रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं, साथ ही बच्चों के भटकने का खतरा भी रहता है. इसलिए आप जब घर में हों तो फोन में लगे रहने के बजाय अधिक से अधिक समय बच्चे से बातें करें, उस के साथ ऐंजौय करें, खाना बनाएं या कुछ और बच्चे को कुछ नया सिखाएं.

हमेशा अपने बच्चे के बर्थडे के दिन उसे सब से पहले विश करें. इस से आप के बच्चे को इस बात का एहसास रहेगा कि उस की आप की जिंदगी में बहुत अहमियत है. इस दिन अपने बच्चे के लिए कुछ स्पैशल करें. उस की पसंद की चीज खरीद कर दें. उस की मनपसंद जगह पर घूमने जाएं. पूरे परिवार के साथ पिकनिक का प्रोग्राम भी बना सकती हैं.

बच्चों को सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल ऐसे सिखाएं

आजकल के बच्चे यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफौर्म्स का काफी उपयोग करते हैं और इन साइट्स को देख कर बहुत कुछ सीखते हैं. ऐसे में मातापिता के लिए महत्त्वपूर्ण है कि वे अपने बच्चों को इन वैबसाइट्स का सही इस्तेमाल सिखाएं और उन की हाई क्वालिटी कंटैंट चुनने में मदद करें.

इस संदर्भ में सीनियर साइकोलौजिस्ट डा. ज्योति कपूर, फाउंडर मनस्थली, गुरुग्राम कुछ सुझाव दे रही हैं जो आप की अपने बच्चे को गाइड करने में सहायता कर सकते हैं:

डिसिप्लिन और लिमिटेशन मैंटेन रखें

बच्चों को सोशल मीडिया और यूट्यूब का उचित और सीमित इस्तेमाल करने की सीख दें. उन्हें एक समयसीमा दें और बताएं कि वे इतने समय तक ही यूट्यूब या सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते हैं. उन्हें इस बात का एहसास दिलाएं कि इन सब में ज्यादा समय लगाना हानिकारक हो सकता है. उन के लिए दूसरी गतिविधियों में भी समय बिताना जरूरी है.

  1. कंटैंट की क्वालिटी चैक करें

बच्चों को यह समझाएं कि सभी कंटैंट बराबर नहीं होते हैं और उन्हें हमेशा अच्छे स्टैंडर्ड और वैल्यूज का ध्यान रखना चाहिए. उन्हें इस बात के लिए प्रोत्साहित करें कि वे किसी भी वीडियो, चैनल या पेज की औथैंटिसिटी जरूर वैरीफाई करें, साथ ही वे उन्हीं चीजों पर फोकस करें जो उन की जानकारी के लिए जरूरी हों.

2. सामाजिक विषयों पर देखे गए कंटैंट पर बातचीत करें

अपने बच्चों के साथ उन के देखे गए सोशल कंटैंट के बारे में चर्चा करें. उन से उन के देखे गए वीडियो, पेज के बारे में प्रश्न करें और उन की सोच और विचारों को प्रोत्साहित करें. ऐसा करना उन्हें समझने का और अपनी बात रखने का अवसर देगा और उन्हें अच्छी और बुरी सामग्री के बीच अंतर महसूस होगा.

3. सतर्कता और सुरक्षा के बारे में बात करें

बच्चों को सोशल मीडिया और यूट्यूब पर सुरक्षित रहने के बारे में जागरूक करें. उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा करने की सीख दें. अनजान लोगों के साथ बातचीत न करने और किसी भी अनुचित कंटैंट की रिपोर्ट करने का तरीका सिखाएं.

4. संवाद

बच्चों के साथ प्यार से पेश आएं और उन के साथ संवाद बनाए रखें. उन की रुचियों और उन के द्वारा देखे गए कंटैंट पर चर्चा करें. यह उन्हें बताएगा कि आप उन की सोच, रुचियों और इंटरनैट पर देखे जाने वाले कंटैंट को महत्त्व देती हैं. इस से वे कुछ भी देखने के बाद खुद ही आप को बताएंगे और आप हमेशा उन पर नजर रख सकेंगी या उस कंटैंट में दिखाई गई अच्छी बातें उन्हें समझ सकेंगी

विरासत कानून के अजीब प्रावधान

हिंदू विरासत कानून है एक अजीब प्रावधान है. 1956 में बने विरासत कानून में यह भी डाला गया है कि किसी व्यक्ति के मरने के बाद संपत्ति पत्नी और बच्चों में बराबर बंटने के साथ बराबर का हिस्सा मां को भी मिलेगा. यह एकदम अव्याहारिक व अनैतिक कानूनी प्रावधान है जिस का कोई सिरपैर नहीं है.

जब कानून बना था तो कहा गया था कि यह मां की सुरक्षा के लिए था पर यह तो कई बेटेबेटियों और पति के जिंदा रहने वाली मां को मिलने वाला हक है. बेटे के मरने के बाद अक्सर मांबाप विधवा और उस के बच्चों को पूरा हिस्सा न मिले इसलिए उस हक का उपयोग करते हैं.

स्वयं इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए इस कानून का उपयोग किया था और मेनका, व वरुण को संजय गांधी की मृत्यु के बाद बराबर का हिस्सा इंदिरा गांधी, प्रधानमंत्री को देना पड़ा था. मेनका गांधी अपने हिस्से में बंटबारा न हो इस के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गई थी पर इंदिरा गांधी नहीं मानी थी जबकि उस समय वह प्रधानमंत्री की और उस के साथ राजीव गांधी, सोनिया, प्रियंका और राहुल थे. मेनका और वरुण का एक हिस्सा कम किया था.

हां, यह जरूर सुनने में आया कि संजय गांधी की संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा जो इंदिरा को मिला था इंदिरा गांधी ने वरुण गांधी को गिफ्ट कर दिया था और इस तरह छोटा सा वरुण संजय गांधी की संपत्ति का 2 तिहाई मालिक हो गया था और मेनका एक तिहाई की मालिक रह गई थी.

यह कानून जवान बेटों की मृत्यु पर जम कर इस्तेमाल किया जाता है. वृद्ध पिता मरते हैं तो उस समय उस की मां जिंदा नहीं होती इसलिए वो बड़ा नहीं बनता या जब विधवा हाथपैर मार कर जिंदा रहने का प्रयास कर रही हो तब प्रोटिडेंट फंड, फिक्सडिपोजिट, जौयंट प्रौपर्टी में मृत पति को मिला हिस्सा, मकान आदि पर सास अपने पति के पिता और भाईबहन के कहने पर हक जमाने लगे, यह बहुत गलत है.

जो लोग कहते हैं कि हिंदू कानून गंगा जल सा साफ और गौमूत्र सा पवित्र है, उन्हें ख्याल रखना चाहिए कि हिंदू संपत्ति, विवाद, गोद, विरासत कानून अनैतिकता से भरे हैं. 1956 व 2005 में कुछ सुधार हुए हैं पर समाज आज भी युवा औरतों के प्रति ही नहीं बूढ़ी औरतों के प्रति भी आज भी पौराणिकवाद में जी रहा है जब औरत होने का मतलब आहितर्य, सीता या द्रौपदी होना ही था.

नीली आंखों के गहरे रहस्य: भाग-2

शाम को भी उस का मोबाइल स्विच औफ था. 2 दिनों से उसे लगातार फोन करता रहा लेकिन उस का मोबाइल स्विच औफ ही मिला.

तीसरे दिन रविवार को उस का फोन आया. मन आशंकित हो उठा, न जाने कैसी खबर हो?

‘‘सर…’’

‘‘कमाल हो तुम भी, मैं लगातार 2 दिनों से तुम्हें फोन कर रहा हूं और तुम्हारा मोबाइल स्विच औफ जा रहा है,’’ मैं ने लगभग डांटते हुए, अधिकारपूर्वक उस से कहा लेकिन दूसरे ही क्षण मुझे आत्मग्लानि हुई कि मैं ने उस की मां की तबीयत के विषय में नहीं पूछा. धीरे से बोला, ‘‘सौरी मीठी, अब तुम्हारी मां की तबीयत कैसी है?’’

‘‘मम्मी ठीक नहीं हैं, सर. अस्पताल में दौड़धूप व उन की देखभाल में इतनी व्यस्त रही कि मोबाइल चार्ज करना ही भूल गई. और हमारा अपना है ही कौन जो मेरे फोन पर मेरी मम्मी का हाल पूछता. इस शहर में थोड़े समय पहले ही तो शिफ्ट हुई हैं हम मांबेटी.’’

‘‘क्या? तुम लोग अभी थोड़े वक्त पहले ही शिफ्ट हुई हो इस शहर में? और इतनी जल्दी खुद का मकान भी ले लिया जिस के आधार पर तुम बैंक से लोन लेना चाहती हो?’’ ऐसे नाजुक मौके पर भी मैं ने अपना बैंक वाला दिमाग दौड़ा लिया. मन में सोचा, मुझे बेवकूफ समझ रही है कल की लड़की. सोच रही है अपने नाम की तरह ही मीठी बातों में फंसा कर मुझ से लोन पास करवा लेगी.

‘‘सर, बात थोड़ी गंभीर है. फोन पर नहीं बता सकती. मुझे आप की मदद की सख्त जरूरत है. अगर आप मेरे घर आएंगे तो मेरी मम्मी से भी मिल लेंगे और मैं आप को अपनी बात खुल कर बता सकूंगी. मैं अपने घर का पता आप को अभी एसएमएस करती हूं.’’

जल्दी ही उस के पते का एसएमएस भी आ गया. उस का घर मेरे घर से काफी दूर था. एक बार को लगा, कहीं यह नीली आंखों वाली अपनी मां के साथ मिल कर मेरे खिलाफ कोई साजिश तो नहीं रच रही? नहीं, मैं नहीं जाऊंगा, आखिर मेरी उस से पहचान ही कितनी है? फिर अंदर से आवाज आई, इंसानियत के नाते बीमार को देखने जाना चाहिए. शायद वास्तव में उसे मेरी मदद की जरूरत हो? साधना को भी साथ ले जाऊंगा.

लेकिन दूसरे ही पल खयाल आया, अगर साधना को साथ ले गया तो मामला और पेचीदा हो सकता है. सुंदर और जवान लड़की को देख कर कहीं वह मेरे और उस के संबंधों को ले कर कोई गलत धारणा न बना ले और मुझ पर अधिक निगाह रखने लगे. हो सकता है मेरी जासूसी भी करे. आफत मेरी ही आएगी. इसलिए उसे साथ ले जाने का विचार त्याग  दिया और उस के घर जाने के लिए खुद को पूरी तरह से सतर्क व चौकन्ना कर लिया. साधना से कह दिया कि विजिट के लिए एक पार्टी के साथ जा रहा हूं.

उस का घर ढूंढ़ने में बहुत परेशानी हुई. काफी वक्त लग गया जबकि लगातार उस से मोबाइल पर घर की सिचुएशन पूछता रहा था. वह मुझे अपने घर के दरवाजे पर ही मिल गई. बेहद तनावग्रस्त, चिंतित और दुखी लगी. मुझे देख कर भरे स्वर में बोली, ‘‘थैंक्यू सर, प्लीज आइए,’’ कहती हुई मुझे अंदर ले गई जहां एक छोटे से कमरे में उस की बीमार मां लेटी थीं.

लगभग 50 वर्षीया एक महिला पलंग पर लेटी थीं, मुझे देख कर वे उठने का प्रयास करने लगीं. मैं ने रोक दिया, ‘‘प्लीज, आप लेटी रहिए.’’

‘‘मम्मी, आप बैंक मैनेजर आनंदजी हैं. अपने ब्यूटीपार्लर के लिए मैं लोन के सिलसिले में इन से मिली थी.’’

‘‘आनंदजी, प्लीज आप इस के ब्यूटीपार्लर के लिए लोन पास करवा दीजिए, जिस से यह आत्मनिर्भर हो जाए,’’ कमजोर स्वर में जब वे बोलीं तो मीठी ने उन्हें चुप कराते हुए कहा, ‘‘प्लीज मम्मी, आप बोलिए मत, मैं बात कर लूंगी, आनंदजी से.’’

‘‘सर, आप क्या लेंगे चाय या कौफी?’’ मीठी ने पूछा तो मैं ने कहा, ‘‘मीठी, मैं यहां चाय या कौफी पीने नहीं आया हूं. मैं तो तुम्हारी मां को देखने आया हूं. अब उन की तबीयत कैसी है? उन्हें हुआ क्या है?’’

मेरे यह पूछने पर वह असहज हो गई. फिर अपनी मां को दवाई खिलाती हुई बोली, ‘‘मम्मी, आप यह दवाई खा कर आराम करो. मैं आनंदजी को अपना घर दिखाती हूं. इसी के आधार पर हमें लोन मिलेगा.’’

मुझे उस का व्यवहार कुछ अजीब सा लगा. इस की मां की तबीयत खराब है और इसे लोन की पड़ी है.

वह मुझे ऊपर एक कमरे में ले गई जो बहुत ही कलात्मक ढंग से सजा था और वहां सिर्फ एक बैड पड़ा था. बैड के अलावा वहां बैठने के लिए कोई कुरसी या स्टूल न था. लिहाजा, मुझे सकुचाते हुए उसी बैड पर बैठना पड़ा.

‘‘सौरी सर, मैं मम्मी के सामने आप को कुछ बता नहीं सकती थी, इसलिए आप को ऊपर ले कर आई हूं. इस समय मैं ने उन्हें वह दवाई दे दी है जिस से उन्हें गहरी नींद आ जाएगी.’’

यह सुन कर मेरी घिग्घी बंध गई. आखिर, यह लड़की कहना क्या चाहती है?

‘‘सर, हम लोग अलीगढ़ के नहीं, बल्कि आगरा के हैं. आगरा में हमारा छोटा सा खुशहाल परिवार था. मैं मीठी, मेरी मम्मी ममता और पापा मनोज. पापा ताजमहल में गाइड थे. उन के सपने बहुत ऊंचे थे. वे विदेश जा कर खूब पैसा कमाना चाहते थे. उन की इस चाहत और सपने को पूरा किया अमेरिका की सेरेना ने जो ताजमहल घूमते वक्त अपने गाइड की नीली आंखों की गहराई में इस कदर डूब गई कि उन्हें अपना बना कर ही दम लिया. वह बहुत अमीर थी, पापा यही तो चाहते थे. मम्मी बहुत रोईंगिड़गिड़ाईं, मेरा हवाला दिया लेकिन पापा नहीं पिघले. सेरेना ने हम मांबोटी को 15 लाख रुपए दे दिए या यों कहो, हमारे पापा की कीमत हमें दे दी. वे 15 लाख रुपए पा कर भी हम गरीब थे क्योंकि हमारे पापा हमारे पास नहीं थे.

‘‘औपचारिकता पूरी हो जाने के बाद पापा उस के साथ अमेरिका चले गए हमेशा के लिए. हम मांबेटी ने आगरा शहर छोड़ने का मन बना लिया. जिस प्रेम के प्रतीक ताजमहल की वजह से हमारा घरसंसार चलता था, हम सब मुहब्बत से रहते थे, उसी की वजह से हमारा सबकुछ हम से छिन गया क्योंकि हमारी दुनिया थे हमारे पापा. उन्होंने हमें बेशक भुला दिया था लेकिन हम उन्हें नहीं भुला सके थे, इसलिए हम आगरा में रहना ही नहीं चाहते थे.

‘‘हम अलीगढ़ आ गए. बरसों पहले जब नानाजी की पोस्टिंग अलीगढ़ में थी तब मम्मी यहां रही थीं, इसलिए उन्होंने अलीगढ़ को चुना. हम किराए के मकान में रहने लगे. हमें लगा ये 15 लाख रुपए धीरेधीरे खत्म हो जाएंगे. इसलिए हम ने एक ब्रोकर की मदद से 10 लाख रुपए का यह छोटा सा घर ले लिया. डेढ़ लाख रुपए में घर का जरूरी सामान खरीद लिया, 3 लाख रुपए मेरी शादी के लिए मम्मी ने गहने खरीद लिए और बाकी 50 हजार रुपए बैंक में जमा कर दिए.

‘‘मां ने घर का खर्चा चलाने के लिए एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी कर ली और ट्यूशन भी पढ़ाने लगीं. मैं कालेज के बाद ब्यूटीपार्लर का कोर्स करने लगी. इस कार्य में मैं पारंगत हो गई, तो सोचा, क्यों न घर के नीचे वाले हिस्से में ब्यूटीपार्लर खोल लूं. कमाई अच्छी होगी, घर की घर में भी रहूंगी.

‘‘लेकिन मम्मी, पापा की बेवफाई सह न सकीं और दिल की मरीज हो गईं. उन्हें अटैक पड़ा तो एंजियोग्राफी से पता चला उन की 2 आर्टरीज ब्लौक हैं. डाक्टरों ने एंजियोप्लास्टी के लिए बोला है. इस का खर्चा लगभग 2-3 लाख रुपए तो होगा ही. बस, इसी वजह से परेशान हूं कि इतना पैसा इतनी जल्दी कैसे मैनेज करूं? यह सब मम्मी को बता कर परेशान नहीं करना चाहती.’’

मेरे दिमाग ने सचेत किया, इस के झांसे में मत आना. हो सकता है यह सब मनगढ़ंत कहानी हो. मैं बोला, ‘‘मीठी, इस मामले में मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूं?’’

‘‘सर, मैं चाहती हूं अगर आप किसी भी तरह 3 लाख रुपए का इंतजाम करवा दें तो मैं आप का एहसान जिंदगीभर नहीं भूलूंगी. 50 हजार रुपए मैं अपने अकाउंट से निकाल लूंगी,’’ आशाभरी नजरों से उस ने मुझे ताकते हुए कहा.

लेकिन मैं अंदर से मजबूत था और उस की भावनाओं के जाल में फंसने वाला नहीं था. ‘‘मीठी, 3 लाख रुपए तो बहुत होते हैं. 10-20 हजार रुपए की रकम होती तो मैं अभी दे देता. 3 लाख रुपए तो मेरे खाते में भी नहीं है,’’ मैं ने झूठ बोला हालांकि मैं जानता था कि उसे पता है कि मैं झूठ बोल रहा हूं क्योंकि एक बैंक मैनेजर के खाते में 3 लाख रुपए नहीं होंगे, ऐसा नहीं हो सकता.

‘‘सर, मैं आप से पैसा नहीं, बल्कि सहयोग मांग रही हूं. आप मेरे गहने गिरवी रखवा कर पैसा दिलवा दें क्योंकि ऐसा काम कोई भरोसेमंद इंसान ही कर सकता है.’’

‘‘तुम मुझ पर किस आधार पर विश्वास कर रही हो? तुम तो सिर्फ एक बार ही मुझ से मिली हो.’’

‘‘उम्र भले ही कम हो मेरी लेकिन वक्त और हालात ने मुझे इतना परिपक्व कर दिया है कि इंसान की नीयत और फितरत को पहचानने में कभी गलती नहीं करती हूं,’’ आत्मविश्वास से भरे स्वर में वह बोली.

मेरी जिज्ञासा बढ़ी और मुसकरा कर बोला, ‘‘जरा मेरी नीयत और फितरत तो बताओ.’’

‘‘सर, आप परीक्षा ले रहे हैं मेरी. लेकिन मैं सच जरूर बताऊंगी.’’

मैं मन ही मन थोड़ा डर गया, पता नहीं मेरे बारे में क्या बताए? लेकिन मैं हंस कर बोला, ‘‘हांहां, बताओ, जरा मैं भी तो सुनूं मेरे बारे में क्या धारणा है तुम्हारी?’’

‘‘आप बहुत ही नेकदिल और ईमानदार इंसान हैं लेकिन मुझे ले कर आप थोड़ा आशंकित व भयभीत हैं. कहीं मैं आप के साथ फ्रौड या धोखा न कर दूं.’’

हालांकि वह सच कह रही थी लेकिन मैं ने कहा, ‘‘नहीं, मीठी तुम गलत बोल रही हो, ऐसा कुछ भी नहीं है.’’

‘‘नहीं सर, आप अपनी जगह ठीक हैं. 3 लाख रुपए की रकम कोई छोटीमोटी तो है नहीं जो किसी अजनबी को दे दी जाए. अगर आप की जगह मैं होती तो शायद मैं भी हिचकिचाती. लेकिन आप मेरे गहने ले जाइए और अपने किसी परिचित व विश्वसीनय सुनार से उन की जांच करवा लीजिए. और फिर पैसा दिलवा दीजिए. मैं मम्मी की जल्दी से जल्दी एंजियोप्लास्टी कराना चाहती हूं.’’

मैं ने मन में सोचा जब यह लड़की अपने कीमती गहने मुझे सौंप रही है, सिर्फ मुझ पर विश्वास कर के तो इंसानियत के नाते मुझे भी इस की मदद करनी चाहिए.

‘‘ठीक है, मेरा एक खास परिचित ज्वैलर है. वह यह काम भी करता है. मैं अभी उस से फोन पर बात कर के देखता हूं.’’

‘‘सर, अगर पैसा आज ही मिल जाए तो बेहतर होगा. कल सुबह ही टैक्सी कर के मम्मी को दिल्ली ले जाऊंगी.’’

मैं ने ज्वैलर से बात की तो उस ने हां कर दी. मैं ने मीठी से पूछा, ‘‘गहने घर पर हैं या लौकर में?’’

‘‘मैं ने कल ही गहने और कैश लौकर से निकाल लिए थे, पता नहीं कब जरूरत पड़ जाए,’’ कहती हुई वह एक बैग ले आई और सारे गहने दिखा दिए.

‘‘चलो जल्दी से तैयार हो जाओ, मैं ने ज्वैलर को टाइम दे दिया है.’’

‘‘मैं क्या करूंगी वहां जा कर? आप हो तो सही.’’

‘‘नहीं मीठी, तुम्हें चलना पड़ेगा. गहने कितने वजन के हैं? कितने रुपए के हैं. लिखापढ़ी, रसीद बहुतकुछ होता है. जल्दी चलो और अपनी मां को भी बता दो.’’

‘‘सर, मुझे आप पर पूरा भरोसा है, प्लीज आप जल्दी जाइए.’’

‘‘मीठी, मुझे यह ठीक नहीं लग रहा. उस ज्वैलर को इन गहनों के बारे में क्या बताऊंगा? तुम साथ होगी तो मुश्किल नहीं होगी.’’

‘‘कह देना, एक दूर की रिश्तेदार के हैं, बीमारी की वजह से आने में असमर्थ हैं,’’ कहती हुई वह मुसकरा पड़ी.

मन में आया कह दूं कि तुम दूर की नहीं, मेरे दिल की रिश्तेदार हो.

गहनों का बैग ले कर मैं तुरंत निकल पड़ा. इस दौरान साधना के पचासों फोन आए लेकिन मैं ने रिसीव नहीं किए. हर बार काट दिए. रास्ते में फिर फोन बजा. मुझे पता था कि उसी का होगा. सुबह का निकला और लगभग शाम हो चली, चिंता तो कर रही होगी, इसलिए स्कूटी साइड में रोक कर बात की.

‘‘अरे, सुबह से कहां हो आप? एक कप चाय पी कर निकले हो. फोन करना तो दूर, मेरा फोन भी काट रहे हो. कहीं किसी मुसीबत में तो नहीं हो,’’ वह घबराए और आशंकित स्वर में बोली.

‘‘नहीं साधना, मैं किसी मुसीबत में नहीं हूं. बस, हुआ यों, मैं जिस पार्टी के साथ था उस की मां की अचानक तबीयत खराब हो गई तो मानवता के नाते मैं उस के साथ अस्पताल में हूं. तुम परेशान मत हो,’’ बड़ी सफाई से झूठ बोलते हुए मैं ने उसे आश्वस्त कर दिया.

ज्वैलर्स की दुकान पर पहुंच कर जैसे ही गहनों का बैग खोला तो ज्वैलर शरारत से मुसकरा कर बोला, ‘‘बैंक मैनेजर साहब, किस का लौकर तोड़ दिया?’’

‘‘अरे यार, बात यह है कि…’’

‘‘जुए में बुरी तरह हार कर भाभी के गहने चुरा लाए हो. लेकिन याद रखो दोस्त, जैसे ही भाभी को पता चलेगा, वे तुम्हें रुई की तरह धुन देंगी,’’ मेरी बात पूरी होने से पहले ही वह फिर शरारत पर उतर आया था.

‘‘अरे भाई, यह मस्तमजाक छोड़ो. पहले मेरी बात सुनो. मेरे एक दूर के रिश्तेदार हैं जो बहुत बीमार हैं. उन्हें तुरंत दिल्ली के एक अस्पताल में ले जाना है, जहां उन का औपरेशन होना है. ये गहने उन्हीं के हैं. उन्हें पैसों की सख्त जरूरत है. इन की जल्दी से जांच कर लो कि असली हैं या नकली? अगर असली हैं तो इन्हें गिरवी रख कर कितना पैसा मिल जाएगा.’’

वह शीघ्र ही गहनों की शुद्धता की जांच करने लगा और बोला, ‘‘गुरु, शुद्ध खालिस सोने के हैं.’’

‘‘क्या कीमत होगी इन की?’’

उस ने जल्दी ही गहनों को तोल कर बताया, लगभग 3 लाख रुपए के हैं. मैं पूरे 3 लाख रुपए दे दूंगा क्योंकि किसी जरूरतमंद बीमार के लिए चाहिए और आप मेरे खास परिचित भी हो. उस ने गहनों की लिखापढ़ी, लिस्ट, रसीद सबकुछ देते हुए पूरे 3 लाख रुपए भी दे दिए.

रुपए ले कर निकला तो बाहर गहरा अंधेरा हो गया था. मैं ने स्कूटी मीठी के घर की तरफ दौड़ा दी. अपना मोबाइल भी स्विच औफ कर लिया क्योंकि मुझे पता था साधना बारबार फोन करेगी. घर जा कर कह दूंगा कि बैटरी डिस्चार्ज हो गई थी. उस के घर पहुंचतेपहुंचते रात हो चुकी थी.

वह दरवाजे पर खड़ी मेरा इंतजार कर रही थी. मुझे जल्दी से ऊपर कमरे में ले गई, ‘‘सर, काम बना?’’

‘‘हांहां, बन गया. पूरे 3 लाख रुपए हैं, गिन लो,’’ कहते हुए मैं ने उसे नोटों का बैग थमा दिया.

‘‘थैंक्यू सर,’’ कहती हुई वह भावावेश में मुझ से कस कर लिपट गई. मैं हक्काबक्का रह गया. यह अप्रत्याशित स्थिति मेरे लिए अकल्पनीय थी. इस के लिए मैं तैयार न था. लेकिन उस के जिस्म की गरमी, सांसों की तेज रफ्तार…मैं खुद पर काबू न रख सका और उसे बेतहाशा चूमने लगा.

 

अधूरे प्यार की टीस: भाग 2-क्यों बिखर गई सीमा की गृहस्थी

अलग होने के बाद भी सीमा ने लड़ाईझगड़े बंद नहीं किए थे. फिर उस ने मकान व दुकान के हिस्से कराने की रट लगा ली थी. राकेश अपने दोनों छोटे भाइयों के सामने सीमा की यह मांग रखने का साहस कभी अपने अंदर पैदा नहीं कर सके. इस कारण पतिपत्नी के बीच आएदिन खूब क्लेश होता था.

3 बार तो सीमा ने पुलिस भी बुला ली थी. जब उस का दिल करता वह लड़झगड़ कर मायके चली जाती थी. गुस्से से पागल हो कर वह मारपीट भी करने लगती थी. उन के बीच होने वाले लड़ाईझगड़े का मजा पूरी कालोनी लेती थी. राकेश को शर्म के मारे सिर झुका कर कालोनी में चलना पड़ता था.

फिर एक ऐसी घटना घटी जिस ने सीमा को रातदिन कलह करने का मजबूत बहाना उपलब्ध करा दिया.

उन की शादी के करीब 5 साल बाद राकेश का सब से पक्का दोस्त संजय सड़क दुर्घटना का शिकार बन इस दुनिया से असमय चला गया था. अपनी पत्नी अंजु, 3 साल के बेटे नीरज की देखभाल की जिम्मेदारी दम तोड़ने से पहले संजय ने राकेश के कंधों पर डाल दी थी.

राकेशजी ने अपने दोस्त के साथ किए वादे को उम्र भर निभाने का संकल्प मन ही मन कर लिया था. लेकिन सीमा को यह बिलकुल अच्छा नहीं लगता था कि वे अपने दोस्त की विधवा व उस के बेटे की देखभाल के लिए समय या पैसा खर्च करें. जब राकेश ने इस मामले में उस की नहीं सुनी तो सीमा ने अंजु व अपने पति के रिश्ते को बदनाम करना शुरू कर दिया था.

इस कारण राकेश के दिल में अपनी पत्नी के लिए बहुत ज्यादा नफरत बैठ गई थी. उन्होंने इस गलती के लिए सीमा को कभी माफ नहीं किया.

सीमा अपने बेटे व बेटी की नजरों में भी उन के पिता की छवि खराब करवाने में सफल रही थी. राकेश ने इन के लिए सबकुछ किया पर अपने परिवारजनों की नजरों में उन्हें कभी अपने लिए मानसम्मान व प्यार नहीं दिखा था.

अपनी जिंदगी के अहम फैसले उन के दोनों बच्चों ने कभी उन के साथ सलाह कर के नहीं लिए थे. जवान होने के बाद वे अपने पिता को अपनी मां की खुशियां छीनने वाला खलनायक मानने लगे थे. उन की ऐसी सोच बनाने में सीमा का उन्हें राकेश के खिलाफ लगातार भड़काना महत्त्वपूर्ण कारण रहा था.

उन की बेटी रिया ने अपना जीवनसाथी भी खुद ढूंढ़ा था. हीरो की तरह हमेशा सजासंवरा रहने वाला उस की पसंद का लड़का कपिल, राकेश को कभी नहीं जंचा.

कपिल के बारे में उन का अंदाजा सही निकला था. वह एक क्रूर स्वभाव वाला अहंकारी इनसान था. रिया अपनी विवाहित जिंदगी में खुश और सुखी नहीं थी. सीमा अपनी बेटी के ससुराल वालों को लगातार बहुतकुछ देने के बावजूद अपनी बेटी की खुशियां सुनिश्चित नहीं कर सकी थी.

शादी करने के लिए रवि ने भी अपनी पसंद की लड़की चुनी थी. उस ने विदेश में बस जाने का फैसला अपनी ससुराल वालों के कहने में आ कर किया था.

राकेश को इस बात से बहुत पीड़ा होती थी कि उन के बेटाबेटी ने कभी उन की भावनाओं को समझने की कोशिश नहीं की. वे अपनी मां के बहकावे में आ कर धीरेधीरे उन से दूर होते चले गए थे.

इन परिस्थितियों में अंजु और उस के बेटे के प्रति उन का झुकाव लगातार बढ़ता गया. उन के घर उन्हें मानसम्मान मिलता था. वहां उन्हें हमेशा यह महसूस होता कि उन दोनों को उन के सुखदुख की चिंता रहती है.

इस में कोई शक नहीं कि उन्होंने नीरज की इंजीनियरिंग की पढ़ाई का लगभग पूरा खर्च उठाया था. सीमा ने इस बात के पीछे कई बार कलहक्लेश किया पर उन्होंने उस के दबाव में आ कर इस जिम्मेदारी से हाथ नहीं खींचा था. वह अंजु से उन के मिलने पर रोक नहीं लगा सकी थी क्योंकि उसे कभी कोई गलत तरह का ठोस सुबूत इन के खिलाफ नहीं मिला था.

राकेशजी को पहला दिल का दौरा 3 साल पहले और दूसरा 5 दिन पहले पड़ा था. डाक्टरों ने पहले दौरे के बाद ही बाईपास सर्जरी करा लेने की सलाह दी थी. अब दूसरे दौरे के बाद आपरेशन न कराना उन की जान के लिए खतरनाक साबित होगा, ऐसी चेतावनी उन्होंने साफ शब्दों में राकेशजी को दे दी थी.

पिछले 5 दिनों में उन के अंदर जीने का उत्साह मर सा गया था. वे खुद को बहुत अकेला महसूस कर रहे थे. उन्हें बारबार लगता कि उन का सारा जीवन बेकार चला गया है.

मोबाइल फोन की घंटी बजी तो राकेशजी यादों की दुनिया से बाहर निकल आए थे. उन की पत्नी सीमा ने अमेरिका से फोन किया था.

‘‘क्या रवि ठीकठाक पहुंच गया है?’’ सीमा ने उन का हालचाल पूछने के बजाय अपने बेटे का हालचाल पूछा तो राकेशजी के होंठों पर उदास सी मुसकान उभर आई.

‘‘हां, वह बिलकुल ठीक है,’’ उन्होंने अपनी आवाज को सहज रखते हुए जवाब दिया.

‘‘डाक्टर तुम्हें कब छुट्टी देने की बात कह रहे हैं?’’

‘‘अभी पता नहीं कि छुट्टी कब तक मिलेगी. डाक्टर बाईपास सर्जरी कराने के लिए जोर डाल रहे हैं.’’

‘‘मैं तो अभी इंडिया नहीं आ सकती हूं. नन्हे रितेश की तबीयत ठीक नहीं चल रही है. तुम अपनी देखभाल के लिए एक नर्स का इंतजाम जरूर कर लेना.’’

‘‘ठीक है.’’

‘‘अपने अकाउंट में भी उस का नाम जुड़वा दो.’’

‘‘ठीक है.’’

‘‘मैं तो कहती हूं कि आपरेशन कराने के बाद तुम भी यहीं रहने आ जाओ. वहां अकेले कब तक अपनी बेकद्री कराते रहोगे?’’

‘‘तुम मेरी फिक्र न करो और अपना ध्यान रखो.’’

‘‘मेरी तुम ने आज तक किसी मामले में सुनी है, जो अब सुनोगे. वकील को जल्दी बुला लेना. रवि के यहां वापस लौटने से पहले दोनों काम हो जाने…’’

राकेशजी को अचानक अपनी पत्नी की आवाज को सुनना बहुत बड़ा बोझ लगने लगा तो उन्होंने झटके से संबंध काट कर फोन का स्विच औफ कर दिया. कल रात को अपनेआप से किया यह वादा उन्हें याद नहीं रहा कि वे अब अतीत को याद कर के अपने मन को परेशान व दुखी करना बंद कर देंगे.

‘इस औरत के कारण मेरी जिंदगी तबाह हो गई.’ यह एक वाक्य लगातार उन के दिमाग में गूंज कर उन की मानसिक शांति भंग किए जा रहा था.

अनुपमा के खिलाफ हुए डिंपल और समर, मालती देवी के साथ किया कॉन्ट्रैक्ट

अनुपमा धारावाहिक जबसे स्टार प्लास पर टेलीकस्ट हुआ है तभी से टीआरपी की लिस्ट में धूम मचा रहा है. इस सीरियल को धांसू बनाने के लिए मेकर्स आए दिन नया ट्विस्ट लेकर आते ही रहते हैं. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में डिंपल फोड़ेगी बॉम्ब सबके उड़ जाएंगे होश.

अनुपमा को आएगा बुरा सपना

सीरियल में आगे देखने के लिए मिलेगा कि, सोते वक्त अनुपमा एक बुरा सपना देखती है. सपने में अनुपमा पहले छोटी अनु को ढूंढती है. उसके मिल जाने के बाद वह शाह हाउस में सब बच्चों को बाहर बुलाती है. यहां पर उसे समर के मरने की खबर दी जाती है.

समर की खमोशी अनुपमा की बढ़ाएगी चिंता

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में जहां दोनों परिवार मिलकर हिम्मत बढ़ा रहे होते है कि मालती देवी जो कुछ भी करेगी, उसका दोनों परिवार के लोग मिलकर सामना करेंगे. लेकिन शाह हाउस में खुशियों का माहौल होता है तब समर मायूस होकर घर में कदम रखेगा. अनुपमा उससे बार-बार पूछेगी कि क्या हो गया? आखिर वह इतना क्यों परेशान हो गया.

 

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डिंपल करेगी ऐलान

अब कहानी में नया ट्विस्ट आएगा. मालती देवी अनुपमा से बदला लेने के लिए समर और डिंपी को अपनी तरफ करेगी. वह उनके साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करने की कोशिश करेगी, जिससे दोनों गुरुकुल का हिस्सा बन जाएंगे.

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में डिंपल के ऐलान करने से सबके होश उड़ हो जाते है. डिंपल कहेगी, हमने मालती देवी की एकेडमी के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. यह सब सुनकर सबके होश उड़ हो जाते है.

मालती देवी के दिमाग में क्या चल रहा है

मालती देवी बहुत ही आसानी से डिंपल को मोहरा बनाकर घर की सारी जानकारी जान लेती है. वहीं मालती देवी ने अनुपमा के सबसे लाडले बेटे को अपने यहां काम पर रखा है. दर्शकों के थ्योरीज की माने तो मालती देवी धीरे-धीरे करके उसके सभी बच्चे को उसके खिलाफ करना चाह रही है.

GHKKPM: सेट पर फिर लौटी Sai Joshi, देखें वीडियो

स्टार प्लास का टॉप सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ दर्शको में काफी फेमस है. शो के मेकर्स ने कई कोशिशे कर लीं टीआरपी में नंबर वन बनने की लेकिन ऐसा कुछ धमाल कर नहीं पाए. वहीं सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरे तेजी से वायरल हो रही है. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सई जोशी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस आएशा सिंह (Ayesha Singh) को ‘गुम है किसी के प्यार में’ के सेट पर मस्ती करती नजर आ रही है.

क्या GHKKPM में लौट आई सई?

‘गुम है किसी के प्यार में’ सीरियल में सई जोशी किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस आएशा सिंह (Ayesha Singh) ‘गुम है किसी के प्यार में’ शो के सेट पर नजर आई है. वारयल तस्वीरों में देखा जाता है वह सेट पर पहुंचकर अपने पुराने दोस्तो, कास्ट और क्रू से मुलाकत के दौरान ये तस्वीरे क्लिक की गई है. बता दें, ‘गुम है किसी के प्यार में’ पिछले दिनों एक लंबा लीप आया था. जिसके बाद शो की कहानी नए कास्ट के साथ बढ़ रही है. लेकिन उनके फैंस सई को शो में काफी मिस कर रहे है.

BTS वीडियो में शूटिंग को एन्जॉय करती दिखीं सई

जब सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें और वीडियो सामने आई. जिनमें सई उर्फ आएशा सिंह (Ayesha Singh) सेट पर नजर आ रही है. इस दौरान उनके फैंस का खुशी का ठिकाना नहीं रहा. लोगों ने इन तस्वीरों को जमकर शेयर किया है और लिखा है- सई जोशी फिर से एक बार ‘गुम है किसी के प्यार में’ के सेट पर लौट आई है.

दूसरी वीडियो में कास्ट-क्रू के साथ दिखीं

वीडियो में देखा जा सकता है एक सीन में सवि और ईशान अपना रोल प्ले कर रहे है. वहीं आएशा शूटिंग को एन्जॉय कर रही हैं. दूसरे वीडियो में आएशा कास्ट और क्रू के साथ मस्ती करती नजर आ रही है. इस पर एक यूजर ने कमेंट किया है- वह लौट आई है दोस्तो, फिर एक बार ‘गुम है किसी के प्यार में’ के सेट पर देख कर बहुत खुशी हुई.

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