कैंसर के 7 लक्षण महिलाएं न करें नजरअंदाज

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो पूरी तरह से आप के बस से बाहर है. इस बीमारी को ले कर लोग काफी डरे रहते हैं. जैनेटिक, उम्र और वातावरण ऐसे कारण हैं जिन की वजह से कैंसर सेल्स की ग्रोथ की संभावना बढ़ जाती है जो आप के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है. यह कोशिकाओें की अनियंत्रित ग्रोथ का नतीजा होता है. लेकिन कुछ कैंसर होते हैं, जिन से महिलाओें को विशेषतौर पर खतरा रहता है.

हालांकि, लोगों को शुरुआती चरण में कैंसर को पहचानना और समझना बहुत महत्त्वपूर्ण है. जब कैंसर की बात आती है, तो समय माने रखता है और वास्तव में यह आप के जीवन को बचाने में मदद कर सकता है. कैंसर के ऐसे कई लक्षण हैं जिन्हें महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

आणविक अंकोलौजिस्ट और कैंसर आनुवंशिकीविद, डा. अमित वर्मा के अनुसार, कैंसर के ऐसे कई लक्षण हैं जिन्हें महिलाओं को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिन में शामिल हैं :

  1. ब्रैस्ट में परिवर्तन 

ब्रैस्ट में कोई असामान्य गांठ, मोटा होना या डिंपल, या निप्पल में परिवर्तन, जैसे डिस्चार्ज या उलटा हो तो डाक्टर से जांच जरूर कराएं.

2. असामान्य रक्तस्राव 

रजोनिवृत्ति के बाद कोई रक्तस्राव, भारी या लंबे समय तक मासिकधर्म, माहवारी के बीच रक्तस्राव का मूल्यांकन किया जाना चाहिए.

3. पेट या पैल्विक दर्द 

पेट या पैल्विक में लगातार या गंभीर दर्द इस के लक्षण हो सकते हैं. डिंबग्रंथि या अन्य प्रजनन कैंसर.

4. आंत्र या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन 

यदि आप आंत्र या मूत्राशय की आदतों में कोई परिवर्तन अनुभव करते हैं, जैसे कब्ज, दस्त या पेशाब करने में कठिनाई, यह कोलोरेक्टल या मूत्राशय के कैंसर का संकेत हो सकता है.

5. बिना वजह वजन कम होना 

अगर बिना प्रयास किए आप का वजन कम हो रहा है, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है. खासकर यदि आप को भूख कम लगती है या थकान महसूस हो रही है.

6. त्वचा में परिवर्तन

तिल या अन्य त्वचा के घावों के रंग, आकार या आकृति में कोई भी परिवर्तन होने पर त्वचा विशेषज्ञ द्वारा जांच जरूरी है.

7. लगातार खांसी या आवाज भारी होना 

ऐसी खांसी जो 1 महीने से अधिक समय तक बनी रहे या 2 सप्ताह से अधिक समय तक स्वर बैठा रहना फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है.

यदि आप इन में से किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं, तो इस का निर्धारण करने के लिए तुरंत डाक्टर से मिल कर परामर्श लें.

लव सैंटर क्यों बन रहे जिम

प्यार उम्र नहीं देखता, सरहदें नहीं देखता, बंधन नहीं देखता. जो एक बार प्यार में पड़ जाता है वह हर बंदिश को तोड़ कर अपने इश्क को मुकम्मल करने की पुरजोर कोशिश में लग जाता है. जी हां, ऐसी ही कहानी है राजस्थान की कनिका सोनी की जिसे बिहार के जिम ट्रेनर लक्की से प्यार हो गया और दोनों ने भाग कर शादी कर ली.

पहले लोगों का प्यार स्कूलकालेज, औफिस या फिर शादीब्याह के मौकों पर परवान चढ़ता था, लेकिन अब इस की जगह जिम सैंटरों ने ले ली है. लोग जिम में पसीना बहाते हुए प्यार में पड़ जाते हैं. बिहार के जमुई के रहने वाले मातापिता ने बेटी को शहर के सब से बड़े जिम में कसरत करने भेजा. लेकिन बेटी को उसी जिम ट्रेनर से प्यार हो गया और दोनों ने मातापिता के मरजी के खिलाफ जा कर शादी कर ली.

सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि शादीशुदा लोग भी जिम ट्रेनर के प्यार में पड़ जाते हैं. एक शादीशुदा महिला का कहना है कि उसे अपने जिम ट्रेनर से प्यार हो गया, लेकिन यह बात वह अपने पति को कैसे बताए सम?ा नहीं आता. सिर्फ आम घरों की लड़कियों या महिलाओं का दिल ही अपने जिम ट्रेनर पर नहीं आया, बल्कि वर्कआउट करतेकरते अपने जिम ट्रेनर को दिल दे बैठी ये हसीनाएं भी:

  1. आयरा खान

अमीर खान की बेटी आयरा खान की फिलफाल शादी तो नहीं हुई है, लेकिन जल्द ही वह जिम ट्रेनर नुपुर शिखरे के साथ शादी के बंधन में बंधने वाली हैं. नुपुर शिखरे आयरा के पापा के जिम ट्रेनर थे. आयरा नुपुर को 3 साल से डेट कर रही हैं.

सुष्मिता सेन: मिस यूनिवर्स का टाइटल अपने नाम करवा चुकीं बौलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन एक समय पहले मौडल रोहमान शौल को डेट कर रही थीं. दोनों के बीच इतना प्यार बढ़ गया कि रोहमान शौल सुष्मिता सेन के जिम ट्रेनर बन गए थे. रोहमान सुष्मिता को जिम ट्रेनिंग देते थे जिस के कई वीडियो सुष्मिता ने खुद अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किए.

2. निगार खान

ऐक्ट्रैस निगार खान ने साहिल खान से शादी की थी. कभी बौलीवुड में ऐक्टिंग करने वाले साहिल खान जिम ट्रेनर हैं. बता दें कि जैकी श्रौफ की पत्नी आयशा श्रौफ का भी नाम जिम ट्रेनर साहिल के साथ जुड़ चुका है. हालांकि आयशा ने इसे अफवाह बताया था.

3. अलाया एफ

अलाया एफ का बौयफ्रैंड ऐश्वर्य ठाकरे भी पहले जिम ट्रेनर था. उन का भी ऐक्टर को छोड़ जिम ट्रेनर पर दिल आ गया.

4. मैडोना

हौलीवुड ऐक्ट्रैस मैडोना का ऐक्स बौयफ्रैंड कालोंस लियोन भी जिम ट्रेनर है. हालांकि अब मैडोना किसी और को डेट कर रही हैं.

5. दिशा पाटनी

बौलीवुड की सब से फिट ऐक्ट्रैसेज में शुमार दिशा पाटनी कभी टाइगर श्रौफ के संग रिलेशन में थीं. लेकिन इन दोनों उन्हें अपने नए हैंडसम बौयफ्रैंड के साथ देखा जा रहा है. वे अपने नए बौयफ्रैंड ऐलैक्जैंडर ऐलैक्स को डेट कर रही हैं. दोनों साथ वर्कआउट करते हैं. ऐलैक्जैंडर जिम ट्रेनर भी हैं.

6. देवोलीना भटाचार्जी

टीवी ऐक्ट्रैस देवोलीना भट्टाचार्जी ने अपने जिम ट्रेनर शाहनवाज शेख से शादी कर सभी को चौंका दिया. देवोलीना ने अपने प्यार की खातिर धर्म की दीवार को गिरा कर मुसलिम ट्रेनर शाहनवाज को हमसफर बना लिया.

प्यार तो वही पर उस का पैटर्न बदल रहा है

औनलाइन प्यार का क्रेज तो है ही, पर इस के अलावा अब प्यार की तलाश में लोग जिम सैंटर का रुख करने लगे खासकर सिंगल लोग इसे एक पंथ दो काज की तरह लेते हैं कि शरीर भी फिट रहेगा और इमोशनल सेहत भी शानदार हो जाएगी. जिम चाहेअनचाहे एक ऐसी जगह बन गई है कि जहां कोई अकेला सप्ताह में 1/2 या 7 दिन चला जाए, तो कोई आंख उठा कर नहीं देखने वाला. आप यहां आराम से अपने जिम ट्रेनर प्रेमी से नैनमटक्का कर सकते हैं, कोई कुछ नहीं बोलेगा क्योंकि कोई शंका ही नहीं करेगा कि आप वहां पर अपने प्रेमी के साथ प्रेमआलाप करने जा रहे हैं.

वहीं क्लब में अगर आप की मैंबरशिप भी है, तो वहां जाओ खाओपीओ बस. स्पोर्ट्स में भी पार्टनर चाहिए. लेकिन जिम में आप पूरे सप्ताह अकेले जा सकते हैं और फिर भी अकेले ही रह जाएं आप का कोई दोस्त न बने, तो भी कोई आंख नहीं उठती. यह सोशलाइजिंग की सब से सुलभ जगह है.

जिम में मी टाइम

वैसे तो कोई भी इंसान यह सोच कर जिम नहीं जाता कि वहां उसे कोई साथी मिल जाएगा और वह उस के साथ इश्क लड़ाएगा. वह तो वहां सिर्फ अपनी फिटनैस के लिए आता है, लेकिन जिम में आने वाला कोई शख्स अगर सचमुच अपने रिश्ते को ले कर उदास है तो जिम का माहौल उस की मदद जरूर करता है. जिम ट्रेनर या कोई और उस व्यक्ति को अकेलेपन से जू?ाते देख उस के साथ सिंपैथी दिखाने लगता है, उस का ध्यान रखने लगता है, तो वह उस की ओर आकर्षित होता चला जाता है और एक दिन वह प्यार का रूप ले लेता है.

परेशानियों की वजह भी

मगर जिम वाला प्यार परेशानियों की वजह भी बन रहा है. ऐसे कई मामले देखने को मिल रहे हैं जैसे पिछले साल ही पटना के नामीगिरामी डाक्टर राजीव कुमार सिंह की पत्नी खुशबू सिंह, जो 2 बच्चों की मां है वह 26 साल के जिम ट्रेनर के प्यार में पागल हो गई. दोनों लेट नाइट तक फोन पर बातें करते रहते थे. लेकिन यह बात डाक्टर पति को नागवार गुजरी और उस ने जिम ट्रेनर को जान से मारने की धमकी दे डाली.

उस के बाद उस की सुपारी दे कर उस पर अज्ञात बदमाशों से एक के बाद एक दनादन 5 गोलियां दगवा दीं. यह जानकारी खुद जिम ट्रेनर विक्रम ने पुलिस को दी. गोली लगने के बाद खून से लथपथ वह खुद स्कूटी चला कर अस्पताल पहुंचा तब उस की जान बच पाई.

ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड के देहरादून का है जहां जिम ट्रेनर के प्यार में पागल एक पत्नी ने पति को नींद की गोलियां खिला कर उस की जान ले ली. हरियाणा के यमुनानगर में जिम ट्रेनर के प्यार में पड़ी एक महिला ने 10 लाख रुपयों में अपने पति की जान का सौदा कर डाला.

बीते साल एक व्यापारी की हत्या का बड़ा खुलासा हुआ. पुलिस जांच के मुताबिक पत्नी के जिम ट्रेनर से संबंध और उन की ब्लैकमेलिंग से परेशान पति ने खुद को ही खत्म कर डाला.

इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते

कहते हैं इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते और आज के टैक्नोलौजी के युग में तो तुरंत प्यार पर पड़ा परदा बेपरदा हो जाता है. हम कहां जा रहे हैं, क्या कर रहे हैं, किस से मिल रहे हैं टैक्नोलौजी के जरीए आसानी से पता लगाया जा सकता है. जिम में होने वाले अफेयर को ले कर कई बार पतिपत्नी के बीच जासूसी भी की जाती है. इस में जिम के तौलिए को खोज निकालना या साक्ष्य के तौर पर कोई मैसेज तलाशने की कोशिश की जाती है.

धोखा दे रहे पार्टनर के ईमेल तक पहुंचने के लिए एक खास तरह के सौफ्टवेयर का भी इस्तेमाल किया जाता है. पिछले साल ही 15 अक्तूबर में मध्य प्रदेश के भोपाल के कोहेफिजा में एक फिटनैस सैंटर में ऐसा ही मामला देखने को मिला, जहां पतिपत्नी के बीच जम कर हंगामा हुआ. जब पत्नी को पता चला कि फिटनैस सैंटर में पति का किसी अन्य लड़की से अफेयर चल रहा है तो वह वहां पहुंच गई और पतिपत्नी और वो के बीच जम कर जूतमपैजार हो गई.

पुलिस के मुताबिक, महिला के पति का जिम में आने वाली एक लड़की के साथ अफेयर चल रहा था, जिस का पत्नी को पता चल गया और फिर उस के जिम सैंटर आ कर उस लड़की की चप्पलों से जम कर पिटाई कर डाली.

बढ़ने लगे हैं जिम में प्यार के मामले

महिलाओं को ले कर किए गए एक सर्वे में पाया गया है कि 90 फीसदी महिलाओं का फिटनैस ट्रेनर पर कभी न कभी क्रश रहा. वहीं जिम ट्रेनर का भी वहां आने वाली लड़कियों पर क्रश रहा. जिम न सिर्फ बौडी को ले कर आप की चिंता खत्म कर सकता है बल्कि आप के शादीशुदा जीवन का भी अंत कर सकता है.

आज तलाक के मामलों की बड़ी वजह फिटनैस ट्रेनर्स के साथ अफेयर को देखा जा रहा है. एक वकील का कहना है कि अकसर विवाहित जीवन के अंत की वजह ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स होते हैं. इस तरह के मामलों में सामने आया है कि ट्रेनर के साथ ‘पर्सनल’ हो कर महिलाएं पहले से मुश्किलों से गुजर रहे विवाहित जीवन में परेशानी को और बढ़ा देती हैं. नतीजा यह होता है कि कपल तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं. आमतौर पर ऐसे शादीशुदा जोड़े संपन्न परिवारों से होते हैं, जहां पति बिजनैस में बिजी रहता है.

ऐसे में साथ और सुख तलाश रही महिला को पर्सनल ट्रेनर में यह सब नजर आने लगता है, तो वह उस की ओर आकर्षित होने लगती है.

‘यूनिवर्सिटी औफ ओंटारियो’ की एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग अपने पार्टनर के साथ जिम जाते हैं उन के लिए इस दौरान किया गया वर्कआउट काफी इफैक्टिव हो सकता है. अगर आप अपने पार्टनर के साथ जिम जाते हैं तो आप के लिए यह एक प्लस पौइंट है क्योंकि एकसाथ ऐक्सरसाइज करने से आप फिट तो रहेंगे ही आपस का रिश्ता भी मजबूत बनेगा. जो कपल कुछ चीजें एकसाथ करते हैं जैसे साथ में सैर पर जाना, डिनर करना, घूमने जाना उन के रिश्ते काफी अच्छे होते हैं. जो कपल समय की कमी के कारण साथ समय नहीं बिता पाते वे साथ में वर्कआउट करते वक्त अपने लाइफपार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं.

बच्चे अब टैस्टट्यूब से होगे

1978 से पहले जितने बच्चे पैदा होते थे वे अपनी मां की कोख में ही स्पर्म और एग के मिलन से होते थे. आज हर मिनट में कम से कम एक बच्चे का पहला जन्म टैस्टट्यूब में होता है जब पुरुष का स्पर्म और औरत का एग फर्टीलाइज किया जाता है, दुनिया की आजादी में सवा करोड़ लोगों ने मां के पेट में पहला जन्म नहीं लिया था. उन्हें मां के गर्भ में प्रत्यारोपित किया गया था.

जैसेजैसे लड़कियां काम पर जाने लगी हैं, बच्चे पैदा करना और उन्हें पालना एक आफत लगने लगी है और वे इसे 40-42 तक टालती हैं. इस समय यदि स्पर्म काउंट या एग प्रोडेक्शन कम हो जाए या यूट्स और फैलोपीयन ट्यूबें जबाव देने लगे तो वे आईवीएफ सेंटरों में चक्कर लगाना शुरू करती हैं.

अपने कैरियर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद उन्हें एहसास होता है कि उन से ज्यादा तेज, ज्यादा टैकसैवी कंपीटीटर वर्षा फोर्स में आने लगी है और उन्हें काम के बजाए शारीरिक सुख को प्रायरोसी देनी चाहिए. बच्चे, अपने बच्चे, इस सुख का हिस्सा है.

इन विद्रो फॢटलाइजेशन ड्रग्स और तकनीक की बड़ी मांग होने लगी है और अब बच्चे पंडों, पादरियों की मेहरबानी से नहीं डाक्टरों और टैक्रीशियनों की मेहरबानी से हो रही है. आज 125 पैदा हुए बच्चों में से एक आईटीएफ से हो रहा है, कल ज्यादा होंगे यह पक्का है.

अभी आईवीएफ तकनीक मानसिक व शारीरिक तौर पर पेनफुल है और मंहगी भी है पर जैसेजैसे मांग बढ़ेगी, यह सस्ती होगी और हर 5 में से एक अगर आईवीएफ से होने लगे तो बड़ी बात नहीं.

जैसे आज जिंदगी शुरू से प्लान की जाती है. स्कूल जाने से लेकर इंजीनियर, डाक्टर बनना सब पलांड है, नेचुरल नहीं, वैसे ही बच्चे भी प्लान किए जाएं अपनी सुविधा के हिसाब से तो कोई हर्ज नहीं. गनीमत यह है कि चर्च, मसजिद या मंदिर ने इस का जम कर विरोध नहीं किया है. शायद इसलिए उन्हें तो हर नए बच्चे एक नया दान करने वाला भक्त दिखता है. बच्चा टैस्टट्यूब में हुआ हो या औरत के शरीर में बच्चे को होने के बाद कोई धर्म उसे छोड़ता नहीं है जबकि यह उन के ईश्वरीय ग्रंथों के नितांत खिलाफ है, मर्द, बात पैसे की है, नहीं.

8 Tips: लौंग लास्टिंग मेकअप इन मौनसून

मौनसून में मेकअप को देर तक टिका कर रखना है तो कुछ मौनसून मेकअप टिप्स को फौलो कर लौंग लास्टिंग व परफैक्ट लुक पा सकती हैं.

  • जहां तक संभव हो वाटरप्रूफ और स्मजप्रूफ मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें.
  • ब्राइट की जगह लाइट मेकअप को महत्त्व दें, जो थोड़ा इधरउधर होने पर भी खराब न लगे.
  • वाटर बेस्ड मेकअप प्रोडक्ट्स खरीदें जिस से कि चेहरे पर एक्स्ट्रा औयल न आए.
  • मेकअप पूरा होने पर सैटिंग स्प्रे का इस्तेमाल करें.
  • ब्लोटिंग शीट्स साथ रखें. जब लगे चेहरे पर औयल जमा हो रहा है तो आप इन शीट्स का इस्तेमाल कर मेकअप सैट कर सकती हैं.
  • फिनिशिंग स्प्रे या सैटिंग स्प्रे मेकअप का लास्ट टच है. यह मेकअप को सैट कर देता है और मेकअप देर तक टिका रहता है.
  • यदि मौनसून में निकली धूप में घूम रही हैं तो बीचबीच में फेस मिस्ट स्प्रे आप को फ्रैश महसूस कराएगा.
  • मौनसून मेकअप टिप्स में बर्फ का विकल्प भी आसान और असरदार हो सकता है. बर्फ लगाने से न सिर्फ चेहरे पर आने वाले पसीने की समस्या कम हो सकती है, बल्कि त्वचा को ठंडक और आराम भी मिलता है. आइस क्यूब को फेसवाश करने के बाद भी उपयोग किया जा सकता है. इस के अलावा मेकअप से कुछ मिनट पहले भी आइस क्यूब का उपयोग कर सकती हैं. ऐसा करने से पसीना कम आएगा व मेकअप भी काफी लंबे समय तक टिका रहेगा.

फटी एड़ियों को ठीक करने का तरीका बताएं?

सवाल-

मेरी उम्र 37 साल है. मेरी समस्या फटी एडि़यों को लेकर है. बताएं इन्हें ठीक करने के लिए क्या करूं?

जवाब-

फटी एडि़यों के लिए एक बालटी कुनकुना पानी में 2 चम्मच नीबू का रस और थोड़ा सा नारियल का तेल मिला लें. फिर 15-20 मिनट तक इस में पैर डुबोए रखें. फिर एडि़यों को प्यूबिक स्टोन से अच्छी तरह रगड़ें. इस से उन की डैड स्किन साफ हो जाएगी. इस के बाद पैरों को ठंडे पानी से धो कर उन की जैतून या नारियल के तेल से मालिश करें. ऐसा करने से आप की फटी एडि़यां ठीक हो जाएंगी.

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हमारे शरीर का हर हिस्सा हमारी खूबसूरती को बयां करता है, लेकिन ध्यान सिर्फ चेहरे की तरफ ही जाता है और बाकी हिस्सों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिन में एड़ियां भी शामिल हैं, जो बेजान व रूखी होने की वजह से फट जाती हैं और कभीकभी तो स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि खून निकलने की नौबत भी आ जाती है. हालांकि सर्दियों के मौसम में यह परेशानी अधिक बढ़ जाती है और कभीकभी तो असहनीय पीड़ा होती है. अगर आप भी इसी परेशानी से गुजर रही हैं और अपनी एडि़यों को खूबसूरत बनाना चाहती हैं, तो यह जानकारी आप ही के लिए है:

क्यों फटती हैं एड़ियां

आप की एड़ियों के फटने के कई कारण हो सकते हैं, जहां मौसम में बदलाव इस का कारण सम झा जाता है, वहीं लंबे समय तक खड़े रहना, नंगे पांव चलना, पैरों को पानी में अधिक रखना, गलत फुटवियर पहनना आदि भी इस के कारण हो सकते हैं या फिर डायबिटीज, थॉयराइड, मोटापा आदि भी एड़ियां फटने का कारण हो सकते हैं.

1. एड़ियों को यों खूबसूरत बनाएं

वैसलीन, पैट्रोलियम जैली एडि़यों के लिए वरदान हैं. इन्हें लगाते ही एड़ियां बिलकुल सौफ्ट हो जाती हैं. नीबू का रस और वैसलीन मिला कर उस से फटी एडि़यों पर रोजाना रात में सोने से पहले हलकी मसाज करें. इस से एड़ियां जल्द ही ठीक होने लगेंगी.

नीली आंखों के गहरे रहस्य: भाग-1

नीली आंखें मैं ने फिल्मों में नायक और नायिकाओं की देखी थीं. वास्तविक जीवन में पहली बार उस की नीली आंखें देखीं जब वह बैंक में मुझे पहली बार मिली थी.

‘‘सर, मैं ब्यूटीपार्लर खोलना चाहती हूं, आप के बैंक से लोन चाहिए.’’ अपने केबिन में बैठा, मैं एक जरूरी फाइल देख रहा था. यह स्वर सुन कर मैं ने अपना चेहरा ऊपर उठाया तो उस 24-25 वर्षीया युवती को देख कर ठगा सा रह गया. टाइट जींस, चुस्त टौप, खुले लहराते बाल, देखने में अति सुंदर, साथ ही, उस की नीली आंखें जिन में न जाने कैसी कशिश और सम्मोहन था कि मैं उन के गहरे समंदर में गोते लगाने लगा.

‘‘सर,’’ उस ने कुछ जोर दे कर लेकिन कोमल स्वर में कहा तो मैं सचेत हो गया, ‘‘हां, कहिए, कैसे?’’

‘‘जी, मेरा नाम मीठी है. मैं ब्यूटीपार्लर खोलना चाहती हूं, आप के बैंक से लोन चाहिए.’’

‘‘कितना लोन चाहिए?’’

‘‘5 लाख रुपए. इस के लिए मुझे क्या औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी,’’ बहुत ही गंभीर और सधे स्वर में उस ने पूछा.

‘‘इस के लिए आप को अपनी किसी प्रौपर्टी के कागजात देने होंगे. एक गारंटर की भी जरूरत पड़ेगी. और हां, वह प्रौपर्टी मुझे देखनी भी पड़ेगी तभी उस के आधार पर कार्यवाही आगे बढ़ेगी.’’

‘‘ठीक है सर, हमारा घर है जो कि मां के नाम है. ऊपरी हिस्से में हम रहते हैं. नीचे के हिस्से में ब्यूटीपार्लर खोलने की सोची है. आप जब चाहें हमारा घर देख सकते हैं,’’ उस ने उत्साहित स्वर में कहा, ‘‘तो सर, आप कब आ रहे हैं हमारा घर देखने?’’

उस का उत्साह, खुशी, लगन, रूपसौंदर्य और नीली आंखें देख कर मन में आया कह दूं कि आज शाम को ही, लेकिन मेरी छठी इंद्रिय ने मुझे सचेत किया कि मैं एक बैंक मैनेजर हूं और मुझे बैंक संबंधी, खासतौर से लोन संबंधी, मामलों में बहुत सूझबूझ, चतुराई, सतर्कता व दूरदर्शिता से काम लेना होगा क्योंकि आजकल बहुत फ्रौड हो रहे हैं.

बैंक में कोई भी जालसाजी या धोखाधड़ी होती है तो पहले बैंक मैनेजर पर ही शक की सूई ठहरती है चाहे उस का कुसूर हो या न हो. इसलिए हर कदम फूंकफूंक कर रखना पड़ता है. यह लड़की अपने यौवन और सौंदर्य के जाल में उलझा कर कहीं मुझ से कोई ऐसा गलत काम न करवा दे कि मैं फंस जाऊं.

‘‘सर, क्या सोचने लगे आप?’’ उस ने मुझे टोका तो मैं अपनी विचारयात्रा को विराम दे कर बोला, ‘‘देखिए, अभी 2-4 दिन मेरे पास वक्त नहीं है, काम ज्यादा है. आप अपना मोबाइल नंबर दे दीजिए, जिस दिन भी फ्री होऊंगा, आप को फोन पर बता दूंगा.’’

‘‘थैंक्यू सर,’’ कहते हुए उस ने अपना मोबाइल नंबर बता दिया और मैं ने शरारत से उस का नंबर अपने मोबाइल में ‘ब्लू आइज’ नाम से सेव कर लिया.

उस के जाते ही मैं फिर से उस की नीली आंखों की गहराई में उतर गया. अपने से आधी उम्र की लड़की के बारे में सोचना मुझे गलत तो लग रहा था, मेरी बेटी भी लगभग उसी की उम्र की थी, लेकिन पता नहीं क्यों उस की नीली आंखों ने मुझ पर क्या जादू कर दिया था कि मेरा मन उस की तरफ बेलगाम घोड़े की तरह दौड़ा ही जा रहा था और मैं, बेबस व असहाय सा हो गया था.

शाम को घर पहुंचते ही पत्नी चाय बनाने लगी और मैं मुंहहाथ धोने लगा. गरमागरम चाय का कप पकड़ाते हुए वह बोली, ‘‘सुनो, अब खुशी के लिए लड़के देखने शुरू कर दो. पूरे 25 वर्ष की हो गई है. उस का एमबीए भी कंपलीट हो गया है. जौब जब मिलेगी तब मिलती रहेगी लेकिन हमें तो लड़के देखने शुरू कर देने चाहिए.’’

यह सुन कर मुझे लगा कि मैं बूढ़ा हो गया हूं. खुशी की शादी होगी, फिर मैं नाना भी बन जाऊंगा. साथ ही, सोच रहा हूं उस नीली आंखों वाली लड़की के बारे में. मुझे अपने पर शर्म आई.

‘‘पापा, आप कब आए बैंक से?’’ मेरी बेटी ने पूछा.

‘‘बस बेटा, अभी थोड़ी देर पहले.’’ जैसे ही मैं ने उसे बेटा कहा तो उस नीली आंखों वाली की तसवीर मेरे सामने आ गई. अपने मन को हर तरह से काबू किया लेकिन रात को न चाहते हुए भी उंगलियां मोबाइल स्क्रीन पर पहुंच गईं और ‘ब्लू आइज’ पर उंगली का हौले से दबाव पड़ गया.

‘‘हैलो कौन?’’ इतनी जल्दी फोन उठा लेगी, यह तो मैं ने सोचा भी न था, संभलते हुए बोला, ‘‘मीठीजी, मैं बैंक मैनेजर आनंद बोल रहा हूं. असल में, मैं कल शाम को फ्री हूं, अगर आप चाहें तो अपना घर दिखा सकती हैं.’’

‘‘जरूर सर?’’ वह चहक कर बोली, ‘‘यह तो बहुत अच्छा है. मैं तो खुद चाहती हूं कि जल्दी से जल्दी मेरा लोन पास हो जाए और मेरा ब्यूटीपार्लर खोलने का सपना पूरा हो जाए.’’

‘‘तो ठीक है. आप कल शाम को 5 बजे बैंक आ जाना, मैं आप के साथ चलूंगा.’’

‘‘किस के साथ चलोगे और कहां चलोगे?’’ पत्नी ने पूछा.

उस का इस तरह पूछना, मुझे लगा जैसे उस ने किसी शुभ काम में टोक लगा दी है. सो, झुंझला कर बोला, ‘‘कल बैंक के बाद एक पार्टी के साथ विजिट के लिए जाना है. कहीं मौजमस्ती के लिए नहीं जा रहा.’’

‘‘आप तो बेवजह नाराज हो गए. और हां, अकेले मत जाना, साथ में किसी सहकर्मी को ले जाना. जमाना ठीक नहीं है. एक से भले दो रहते हैं,’’ वह मुझे एक बच्चे की तरह समझाती हुई बोली.

उस की इस नसीहत से मेरा पारा और चढ़ गया, ‘‘हद करती हो तुम? बैंक मैनेजर हूं. अनुभव है मुझे. पहचान है आदमी की, कौन भला है कौन बुरा? और, मेरी किसी से रंजिश या दुश्मनी थोड़ी है जो कोई मुझे नुकसान पहुंचाएगा.’’

‘‘आप को कुछ बताना और राय देना बेकार है. आप तो अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित, ईमानदार बैंक मैनेजर हो. आप जिस संस्था का नमक खाते हो उस के साथ गद्दारी नहीं कर सकते. यह सिर्फ मैं ही जानती हूं लेकिन कोई बाहर वाला नहीं. किसी केस में आप ने नानुकुर की या अपनी असंतुष्टता व असहमति दर्शायी तो सामने वाला आप को प्रलोभन देगा ही और आप पूरी कठोरता से उस निम्न प्रस्ताव को अस्वीकार करोगे. ऐसे में वह आप की इस बात व व्यवहार से चिढ़ जाए व आप को अपना दुश्मन मान ले तब…यही सोच कर डर लगता है और फिर, घर में जवान बेटी है, तो यह डर और सताने लगता है. अब आप ही बताओ, क्या मैं गलत कह रही हूं?’’

‘‘साधना, रिलैक्स यार. मैं बैंक की नौकरी 30 वर्षों से कर रहा हूं. कभी झंझटों या गलत कामों में नहीं फंसा क्योंकि मैं अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले हर काम को पूरी स्पष्टता, सत्यता, पारदर्शिता और ईमानदारी से करता हूं और अपने सामने वाले को पहली मुलाकात में ही अपने व्यवहार, स्वभाव व कार्यशैली से यह दर्शा देता हूं कि मैं गलत नीति और गलत आचरण वाला व्यक्ति नहीं हूं. इज्जत से नौकरी की है, रिटायरमैंट भी पूरे सम्मान के साथ लूंगा.’’

‘‘बस, आप की इसी गांधीवादी विचारधारा पर तो फिदा हूं मैं,’’ कहती हुई वह शरारत से लिपट गई.

जल्दी ही वह गहरी नींद की आगोश में समा गई लेकिन आज नींद मुझ से कोसों दूर थी या यों कहिए नींद मुझ से रूठ कर रात्रिजागरण करवाने पर तुली थी.

शायद, साधना सही कहती है. औरतों की बातें, सलाह पुरुषों को हमेशा गलत लगती हैं. हालांकि ऐसा नहीं है. वे भी सही होती हैं. साधना का डर जायज है. आजकल लोग छोटी सी बात पर ही रंजिश पैदा कर लेते हैं. माना कि मैं बहुत होशियार व समझदार हूं लेकिन फिर भी मुझे और ज्यादा चौकन्ना रहना होगा.

सुबह आंख देर से खुली. साधना ने नाश्ता तैयार कर दिया था और लंच की तैयारी में जुटी थी. फ्रैश हो कर आया तो मोबाइल घनघना उठा. स्क्रीन पर‘ब्लू आइज’ देख कर मन सुहावने मौसम की तरह मदमस्त हो गया.

‘‘हैलो सर, मैं मीठी बोल रही हूं. आज शाम को आप मेरे घर आ रहे हैं न. तो प्लीज सर, डिनर मेरे यहां ही कीजिए. मेरी नानी कहती थीं कि मैं खीर बहुत स्वादिष्ठ बनाती हूं, इसलिए प्लीज…’’

निवेदनभरे मीठे स्वर में उस का आग्रह न ठुकरा सका मैं.

‘‘ठीक है, मैं डिनर आप के यहां ही कर लूंगा.’’

‘‘कहां डिनर कर लेंगे आप?’’ कहते हुए साधना ने कौफी का मग मेरे सामने बढ़ा दिया.

जब भी कोई अच्छी शुरुआत करने की सोचो, यह जरूरी बीच में आ टपकती है. औरत है या बिन मौसम बरसात, मन ही मन कुढ़ गया मैं क्योंकि मैं नीली आंखों वाली के साथ डिनर और खीर का आनंद लेने की सोच रहा था.

‘‘क्या सोचने लगे? और मेरी बात का जवाब भी नहीं दिया.’’

‘‘सोच रहा हूं आज शाम मुंबई के लिए उड़ जाऊं और वहां किसी नीली आंखों वाली हीरोइन के साथ डिनर करूं,’’ अपनी खीझ और कुढ़न को हास्यपरिहास से पेश कर दिया.

यह सुन कर वह खुल कर हंस पड़ी, ‘‘इस उम्र में कोई भूरी, काली, पीली, हरी और नीली आंखों वाली घास भी न डालेगी आप को, डिनर तो बहुत दूर की बात है.’’ उस ने भी मेरी तरह व्यंग्य से जवाब दिया.

‘‘छोड़ो भी यह हंसीमजाक. मैं आज डिनर बाहर ही करूंगा. एक पार्टी के साथ, उस के घर पर ही. बहुत आग्रह किया उस ने, इसलिए मना न कर सका,’’ अपना टिफिन हाथ में लेते हुए बड़ी सफाई से झूठ बोला मैं.

‘‘यह पार्टी जानकारी की है या अपरिचित?’’ उस ने फिर जासूसी की.

‘‘बस, एक बार बैंक में लोन के सिलसिले में मुलाकात हुई है,’’ इस बार सच बोला.

‘‘तो आप उन के यहां डिनर मत करो. जब तक जानपहचान गहरी न हो तो किसी के यहां डिनर पर नहीं जाना चाहिए.’’

‘‘क्यों नहीं जाना चाहिए?’’ मैं ने चिढ़ कर पूछा.

‘‘जमाना ठीक नहीं है. अपना काम निकलवाने के लिए सामने वाला आप के खाने में कुछ ऐसावैसा मिला दे और आप को अपने वश में कर के कुछ आप से गलत काम करा बैठे तो?’’ उस ने चिंता व्यक्त की.

अब मेरा क्रोध सातवें आसमान पर था, ‘‘जमाना तो ठीक है लेकिन तुम मानसिक रूप से ठीक नहीं हो. तभी तो ऐसे वाहियात विचार तुम्हारे मन में आते रहते हैं. खाने में कुछ मिला कर वश में करने की बात तुम्हें बताई किस ने? इतनी पढ़ीलिखी होने के बावजूद यह अंधविश्वास? मेरी तो समझ से परे है. अगर खिलानेपिलाने से वश में करने के नुसखे कामयाब होते तो आज हर सास अपनी बहू की गुलाम होती, पति अपनी पत्नी का सेवक और हर बौस अपने मातहतों के हाथों की कठपुतली बन जाता.

‘‘साधना, अपने दिमाग का इस्तेमाल करो, ये सब पाखंडी बाबाओं और मौलवियों के पैसा कमाने के साधन हैं. वे अपनी दुकानें चलाने के लिए अपने एजेंटों को ग्राहक फंसाने का काम सौंपते हैं. सब का अपनाअपना कमीशन होता है. अपने दिमाग का न इस्तेमाल करने वाली जनता से ही इन का खुराफाती बिजनैस फलफूल रहा है.’’

क्रोध और झुंझलाहट से बड़बड़ाता हुआ मैं बाहर आ गया और स्कूटी स्टार्ट कर के बैंक के लिए चल पड़ा.

साधना की बेतुकी बातों से मूड चौपट हो चुका था. बैंक में घुसते ही केबिन में रखा लैंडलाइन फोन बज उठा. जोनल औफिस से आने वाला बैंक में इस समय का नियमित फोन था. मैं ने ‘‘हैलो, गुडमौर्निंग सर’’ कहा और उधर से भी हैलो हुई, थोड़ी औपचारिक बातें हुईं और मेरी बैंक उपस्थिति दर्ज हो गई.

मैं अपने कार्य में लग गया. तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी. स्क्रीन पर ब्लू आइज देख कर लगा, अब मूड औन हो जाएगा.

‘‘सर…’’

‘‘आज शाम को तुम्हारे घर चलूंगा और डिनर भी करूंगा,’’ उस की पूरी बात सुने बिना मैं बोल पड़ा.

‘‘लेकिन सर, आज…’’

उस के घबराए स्वर को भांप कर मैं ने पूछा, ‘‘क्यों, क्या हुआ?’’

‘‘सर, आज सुबह ही मम्मी को हार्टअटैक आया है. वे अस्पताल में भरती हैं,’’ कहती हुई वह लगभग रो पड़ी.

‘‘कौन से अस्पताल में हैं?’’ लेकिन उस के जवाब देने से पहले ही फोन कट गया. मेरे मिलाने पर वह उठा नहीं रही थी. शायद, अस्पताल में परेशान और व्यस्त होगी, यह सोच कर मैं ने फिर फोन नहीं किया.

अधूरे प्यार की टीस: भाग 1-क्यों बिखर गई सीमा की गृहस्थी

आज सुबह राकेशजी की मुसकराहट में डा. खन्ना को नए जोश, ताजगी और खुशी के भाव नजर आए तो उन्होंने हंसते हुए पूछा, ‘‘लगता है, अमेरिका से आप का बेटा और वाइफ आ गए हैं, मिस्टर राकेश?’’

‘‘वाइफ तो नहीं आ पाई पर बेटा रवि जरूर पहुंच गया है. अभी थोड़ी देर में यहां आता ही होगा,’’ राकेशजी की आवाज में प्रसन्नता के भाव झलक रहे थे.

‘‘आप की वाइफ को भी आना चाहिए था. बीमारी में जैसी देखभाल लाइफपार्टनर करता है वैसी कोई दूसरा नहीं कर सकता.’’

‘‘यू आर राइट, डाक्टर, पर सीमा ने हमारे पोते की देखभाल करने के लिए अमेरिका में रुकना ज्यादा जरूरी समझा होगा.’’

‘‘कितना बड़ा हो गया है आप का पोता?’’

‘‘अभी 10 महीने का है.’’

‘‘आप की वाइफ कब से अमेरिका में हैं?’’

‘‘बहू की डिलीवरी के 2 महीने पहले वह चली गई थी.’’

‘‘यानी कि वे साल भर से आप के साथ नहीं हैं. हार्ट पेशेंट अगर अपने जीवनसाथी से यों दूर और अकेला रहेगा तो उस की तबीयत कैसे सुधरेगी? मैं आप के बेटे से इस बारे में बात करूंगा. आप की पत्नी को इस वक्त आप के पास होना चाहिए,’’ अपनी राय संजीदा लहजे में जाहिर करने के बाद डा. खन्ना ने राकेशजी का चैकअप करना शुरू कर दिया.

डाक्टर के जाने से पहले ही नीरज राकेशजी के लिए खाना ले कर आ गया.

‘‘तुम हमेशा सही समय से यहां पहुंच जाते हो, यंग मैन. आज क्या बना कर भेजा है अंजुजी ने?’’ डा. खन्ना ने प्यार से रवि की कमर थपथपा कर पूछा.

‘‘घीया की सब्जी, चपाती और सलाद भेजा है मम्मी ने,’’ नीरज ने आदरपूर्ण लहजे में जवाब दिया.

‘‘गुड, इन्हें तलाभुना खाना नहीं देना है.’’

‘‘जी, डाक्टर साहब.’’

‘‘आज तुम्हारे अंकल काफी खुश दिख रहे हैं पर इन्हें ज्यादा बोलने मत देना.’’

‘‘ठीक है, डाक्टर साहब.’’

‘‘मैं चलता हूं, मिस्टर राकेश. आप की तबीयत में अच्छा सुधार हो रहा है.’’

‘‘थैंक यू, डा. खन्ना. गुड डे.’’

डाक्टर के जाने के बाद हाथ में पकड़ा टिफिनबौक्स साइड टेबल पर रखने के बाद नीरज ने राकेशजी के पैर छू कर उन का आशीर्वाद पाया. फिर वह उन की तबीयत के बारे में सवाल पूछने लगा. नीरज के हावभाव से साफ जाहिर हो रहा था कि वह राकेशजी को बहुत मानसम्मान देता था.

करीब 10 मिनट बाद राकेशजी का बेटा रवि भी वहां आ पहुंचा. नीरज को अपने पापा के पास बैठा देख कर उस की आंखों में खिं चाव के भाव पैदा हो गए.

‘‘हाय, डैड,’’ नीरज की उपेक्षा करते हुए रवि ने अपने पिता के पैर छुए और फिर उन के पास बैठ गया.

‘‘कैसे हालचाल हैं, रवि?’’ राकेशजी ने बेटे के सिर पर प्यार से हाथ रख कर उसे आशीर्वाद दिया.

‘‘फाइन, डैड. आप की तबीयत के बारे में डाक्टर क्या कहते हैं?’’

‘‘बाईपास सर्जरी की सलाह दे रहे हैं.’’

‘‘उन की सलाह तो आप को माननी होगी, डैड. अपोलो अस्पताल में बाईपास करवा लेते हैं.’’

‘‘पर, मुझे आपरेशन के नाम से डर लगता है.’’

‘‘इस में डरने वाली क्या बात है, पापा? जो काम होना जरूरी है, उस का सामना करने में डर कैसा?’’

‘‘तुम कितने दिन रुकने का कार्यक्रम बना कर आए हो?’’ राकेशजी ने विषय परिवर्तन करते हुए पूछा.

‘‘वन वीक, डैड. इतनी छुट्टियां भी बड़ी मुश्किल से मिली हैं.’’

‘‘अगर मैं ने आपरेशन कराया तब तुम तो उस वक्त यहां नहीं रह पाओगे.’’

‘‘डैड, अंजु आंटी और नीरज के होते हुए आप को अपनी देखभाल के बारे में चिंता करने की क्या जरूरत है? मम्मी और मेरी कमी को ये दोनों पूरा कर देंगे, डैड,’’ रवि के स्वर में मौजूद कटाक्ष के भाव राकेशजी ने साफ पकड़ लिए थे.

‘‘पिछले 5 दिन से इन दोनों ने ही मेरी सेवा में रातदिन एक किया हुआ है, रवि. इन का यह एहसान मैं कभी नहीं उतार सकूंगा,’’ बेटे की आवाज के तीखेपन को नजरअंदाज कर राकेशजी एकदम से भावुक हो उठे.

‘‘आप के एहसान भी तो ये दोनों कभी नहीं उतार पाएंगे, डैड. आप ने कब इन की सहायता के लिए पैसा खर्च करने से हाथ खींचा है. क्या मैं गलत कह रहा हूं, नीरज?’’

‘‘नहीं, रवि भैया. आज मैं इंजीनियर बना हूं तो इन के आशीर्वाद और इन से मिली आर्थिक सहायता से. मां के पास कहां पैसे थे मुझे पढ़ाने के लिए? सचमुच अंकल के एहसानों का कर्ज हम मांबेटे कभी नहीं उतार पाएंगे,’’ नीरज ने यह जवाब राकेशजी की आंखों में श्रद्धा से झांकते हुए दिया और यह तथ्य रवि की नजरों से छिपा नहीं रहा था.

‘‘पापा, अब तो आप शांत मन से आपरेशन के लिए ‘हां’ कह दीजिए. मैं डाक्टर से मिल कर आता हूं,’’ व्यंग्य भरी मुसकान अपने होंठों पर सजाए रवि कमरे से बाहर चला गया था.

‘‘अब तुम भी जाओ, नीरज, नहीं तो तुम्हें आफिस पहुंचने में देर हो जाएगी.’’

राकेशजी की इजाजत पा कर नीरज भी जाने को उठ खड़ा हुआ था.

‘‘आप मन में किसी तरह की टेंशन न लाना, अंकल. मैं ने रवि भैया की बातों का कभी बुरा नहीं माना है,’’ राकेशजी का हाथ भावुक अंदाज में दबा कर नीरज भी बाहर चला गया.

नीरज के चले जाने के बाद राकेशजी ने थके से अंदाज में आंखें मूंद लीं. कुछ ही देर बाद अतीत की यादें उन के स्मृति पटल पर उभरने लगी थीं, लेकिन आज इतना फर्क जरूर था कि ये यादें उन को परेशान, उदास या दुखी नहीं कर रही थीं.

अपनी पत्नी सीमा के साथ राकेशजी की कभी ढंग से नहीं निभी थी. पहले महीने से ही उन दोनों के बीच झगड़े होने लगे थे. झगड़ने का नया कारण तलाशने में सीमा को कोई परेशानी नहीं होती थी.

शादी के 2 महीने बाद ही वह ससुराल से अलग होना चाहती थी. पहले साल उन के बीच झगड़े का मुख्य कारण यही रहा. रातदिन के क्लेश से तंग आ कर राकेश ने किराए का मकान ले लिया था.

मृगमरीचिका एक अंतहीन लालसा: भाग 4-मीनू ने कैसे चुकाई कीमत

एक दिन इन्होंने शाम के खाने पर अपने सहयोगी को पत्नी के साथ बुलाया. वे लोग खाना खा कर बैठे. थोड़ी देर हंसीमजाक और मस्ती का दौर चला. बातों ही बातों में जब ऋ षभ ने उन्हें बताया कि मेरी वाइफ बहुत टैलेंटेड हैं व पार्लर चलाती हैं, तो उन के दोस्त की पत्नी ने मेरा पार्लर देखा और सराहा. अगले ही दिन वे अपनी एक फ्रैंड के साथ पार्लर आईं और काफी काम कराया, मैं बहुत उत्साहित थी. उन के जाने के बाद बैठी ही थी कि कुछ दूर रहने वाली नैंसी और ममता भी आ गईं. नैंसी बड़ी ही मुंहफट थी. मैं ने हंस कर दोनों का स्वागत किया. नैंसी को अपने बालों को अलग लुक देना था तथा ममता को वैक्सिंग करवानी थी. नैंसी को अपने बालों की कटिंग बहुत पसंद आई. दोनों ही मेरे काम से खुश दिखीं. इस दौरान हमारे बीच कुछ फौर्मल सी बातचीत भी हुई.

एक दिन सुबहसुबह छुट्टी के दिन खुशी अभी सो कर नहीं उठी थी, ऋ षभ वाशरूम में थे कि तभी किसी ने बैल बजाई. यह सोच कर कि बाई आ गईर् होगी मैं ने दरवाजा खोला तो सामने मयंक को देख कर अचकचा गई. मेरा मन कसैला हो गया और चेहरे पर तनाव आ गया. ‘‘भैया हैं क्या?’’ मयंक धीरे से बोला और आंखों ही आंखों में मुझे कुछ समझाने की कोशिश करने लगा. उस की आंखों के भाव समझ मुझे उस से नफरत हो आई. क्या अब भी उसे मुझ से कुछ उम्मीद है? छि: यह अपनेआप को समझता क्या है? बहुत कड़े शब्दों में कोई जवाब देना चाहती थी कि तभी ऋ षभ ने पीछे से आवाज दी, ‘‘आओआओ मयंक, तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था.

‘‘जी भैया आज्ञा कीजिए,’’ शब्दों में शहद घुली मिठास ले कर वह बेशर्मों की तरह बोला. ‘‘जान, मयंक के लिए कुछ ले कर आओ,’’ मेरे हाथों को थाम ऋ षभ ने मेरी पेशानी को चूमते हुए कहा.

‘‘जी,’’ ऋ षभ की बात का आशय समझ मैं वहां से चली आई. ‘‘मयंक, आप की भाभी यानी हमारी बेगम साहिबा का जन्मदिन आ रहा है 26 सितंबर को, तो एक पार्टी प्लान करने की सोच रहा हूं.’’

‘‘जी भैया बहुत अच्छा, मैं सारा इंतजाम कर दूंगा,’’ मयंक को जैसे इसी मौके की तलाश थी. ऋ षभ के बताए गार्डन में मयंक द्वारा वाकई बहुत खूबसूरत इंतजाम कर दिया गया. हालांकि इस बीच मयंक ने मुझे फिर से बहकाने का एक भी मौका नहीं छोड़ा. जब भी मेरे सामने अपनी जाहिल हरकतें करता और मैं उसे जवाब देने को आतुर होती, न जाने कहां से ऋ षभ हमारे बीच आ जाते. ऐसा लगता कि वे हमेशा मेरे पास ही हैं. लेकिन एक बात तो तय थी कि मयंक के जिन गुणों या हरकतों पर पहले मैं रीझ उठती थी अब उस की उन्हीं हरकतों पर मुझे क्रोध आता था.

शाम को ऋ षभ के पसंदीदा ग्रे शेड गाउन को पहन जब उन का हाथ थाम कर मैं ने गार्डन के हौल में प्रवेश किया, तो सभी ने तारीफ भरी नजरों से तालियां बजा कर हमारा स्वागत किया. पिंक कलर की फ्रौक में खुशी भी किसी परी से कम नहीं लग रही थी. केक कटने के बाद बजती तालियों के बीच सब से पहले मैं ने खुशी को केक खिलाया, फिर ऋ षभ ने मुझे व मैं ने ऋ षभ को खिलाया.

तभी अचानक लाइट के चले जाने से जो जहां था वहीं खड़ा रह गया. किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. कई लोगों की मिलीजुली आवाजें कानों में आ रही थीं कि सहसा किसी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे एक ओर ले चला. एक पल को तो मैं समझ नहीं पाई, पर फिर उन हाथों की छुअन का एहसास होते ही मैं ने उस व्यक्ति के गालों पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर दिया. तभी लाइट आ गई. मेरा अंदाजा बिलकुल सही था, यह मयंक ही था, जिस ने लाइट जाने का फायदा उठाने की कोशिश की थी. फिर तो मैं ने मयंक को खूब खरीखोटी सुनाई. मेरे मन में उस के पति जितना आक्रोश था सारा मेरी जबान पर आ गया. उस की कारगुजारियों को बेपरदा करतेकरते मैं स्वयं भी आत्मग्लानि से भर भावुक हो उठी.

तभी किसी ने फिर पीछे से मेरा हाथ थाम लिया. हां ये ऋ षभ ही थे हमेशा की तरह. आगे ऋ षभ ने कहा, ‘‘दोस्तो, हकीकत से आप सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं. जो भी कुछ हो चुका है उस में मैं अपनी पत्नी का दोष नहीं मानता. कई बार स्थितियां व निर्णय हमारे बस में नहीं रहते. मेरा मानना है कि मेरी पत्नी आज भी उतनी ही पवित्र है और आज भी मैं उस का उतना ही सम्मान करता हूं जितना पहले करता था, बल्कि अब और ज्यादा. वैसे भी कायदे से सजा उसे मिलनी चाहिए, जो आज भी वही गलती दोहराने की कोशिश में लगा है. आप सभी देख चुके हैं. सचाई आप के सामने है.’’

थप्पड़ खाने के बाद मयंक कुछ गुस्से और चिढ़ से मुझे घूरने लगा. तभी ऋषभ की साफगोई देख कर महल्ले वाले भी हमारे पक्ष में बोलने लगे. बात बढ़ती देख मयंक के मम्मीपापा उसे वहां से ले कर चले गए. पार्टी में आए अचानक इस व्यवधान के लिए ऋ षभ और मैं ने मेहमानों से काफी मांगी. फिर सभी ने उत्साहपूर्वक पूरा प्रोग्राम अटैंड किया. पार्टी में जो कुछ हुआ उस ने मेरे खोए आत्मविश्वास को एक बार फिर लौटा दिया. ऋ षभ के साथ ने मुझ में एक साहस का संचार कर दिया.

मयंक को बारबार बुला कर उस से मेरा सामना कराना भी ऋषभ ने जानबूझ कर कराया था, ताकि मैं समाज के सामने अपने अपराधबोध से मुक्त हो सकूं, क्योंकि वे मयंक को मुझ से बेहतर समझ पाए थे और जानते थे कि मुझ से मिलने पर वह दोबारा अपनी जलील हरकत अवश्य दोहराएगा. बहरहाल, अब मैं बेधड़क बाहर आनेजाने लगी. मेरी झिझक व संकोच दूर हो गया था. मयंक मुझे फिर दिखाई नहीं पड़ा. दूसरे पड़ोसियों से ही मालूम हुआ कि मयंक के मातापिता अपना घर बेच कर कहीं और चले गए हैं. सुन कर मैं ने राहत की सांस ली.

उन के घर बदलने के 7-8 महीने बाद ही पता चला था कि मयंक की शादी हो गई है. अब उड़तीउड़ती खबरें कभीकभार सुनने को मिलती हैं कि वह अपनी पत्नी को बहुत परेशान करता है. मैं खुद को धन्य समझती हूं कि ऋषभ जैसा जीवनसाथी मुझे मिला, जिस ने मुझे मयंक के झूठे मोहपाश के दलदल से बचा लिया. तभी मेरी नजर घड़ी पर गई तो चौंक उठी कि खुशी के आने का वक्त हो गया है. घर का सारा काम जस का तस पड़ा था. खुशी को लेने जाने के लिए ताला लगा कर घर से निकली, रास्ते में ऋ षभ को फोन किया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें मालूम हो चुका है, वे भी स्तब्ध हैं यह जान कर कि उस की पत्नी ने आत्महत्या कर ली है.

मैं पूजा के लिए वाकई बहुत दुखी थी. लेकिन मयंक जैसे अवसरपरस्त व बदतमीज इंसान के लिए मेरे मन में कोई संवेदना नहीं थी.

मृगमरीचिका एक अंतहीन लालसा: भाग 3-मीनू ने कैसे चुकाई कीमत

ऐसे ही एक रात अचानक मेरी नींद खुली तो देखा ऋ षभ मेरे पास नहीं हैं, हां खुशी मेरी ही बगल में सोई थी. मैं उठ कर उन्हें पुकारती हुई बाहर निकली ही थी कि बैठक से आती आवाजों ने मुझे ठिठकने को मजबूर कर दिया. ये आवाजें मेरे भाई की थीं. वह कह रहा था, ‘‘जीजाजी मैं आंटीअंकलजी की बात से सहमत हूं. यह रिश्ता अब सामान्य नहीं हो पाएगा. यह दीदी की गलती नहीं शर्मनाक हरकत है, जिस का दंड उस के साथसाथ सारी जिंदगी आप को भी भुगतना पड़ेगा और आगे जा कर खुशी को भी.’’

‘‘मेरी बात तो सुनो,’’ ऋ षभ ने कुछ कहना चाहा.

‘‘नहीं जीजाजी आप सुनो… खुशी अभी छोटी है. बड़ी हो कर जब उसे सब मालूम पड़ेगा तो वह भी अपनी मां को कभी माफ नहीं कर पाएगी और फिर यह तो सोचिए कि ऐसी लड़की से कौन शादी करना चाहेगा जिस की मां भाग…’’ ‘‘बस करो जतिन… तुम बहुत बोल चुके,’’ ऋ षभ ने थोड़ा गुस्से से कहा.

‘‘क्या गलत कह रहा है जतिन… अरे वह तो उस का भाई है उस का अपना खून. जब वह उसे बरदाश्त नहीं कर पा रहा है, तो तू किस मिट्टी का बना है?’’ इस बार ऋ षभ के पापा बोले. ‘‘पापा, आप सभी समझने की कोशिश करें. मैं मीनू को जानता हूं… पत्नी है वह मेरी. अगर उस से कोई गलती हुई है, तो कहीं न कहीं मैं भी कुछ हद तक उस के लिए जिम्मेदार हूं. उस की इच्छाओं और चाहतों को मैं ने भी कहीं नजरअंदाज किया होगा, तभी तो उसे मयंक की जरूरत पड़ी होगी,’’ ऋ षभ के चेहरे पर गहरी संवेदना के भाव थे.

‘‘मैं यह नहीं कहता कि मीनू से गलती नहीं हुई है. लेकिन यही गलती मयंक से भी हुई है और आप का समाज मयंक को तो बाइज्जत बरी कर देगा इस गुनाह से. कल से ही वह फिर आवारागर्दी करता नजर आएगा इसी महल्ले में. फिर मेरी मीनू ही यह सजा क्यों भुगते? पति हूं मैं उस का. जीवन भर साथ निभाने के वादे किए थे तो उस की इस मुश्किल घड़ी में कैसे उस का हाथ छोड़ दूं? और अगर मान लीजिए यही गुनाह मुझ से हो जाता तो उसे यह मशवरा देने के बजाय आप लोग यही समझा रहे होते कि मीनू जाने दे, माफ कर दे ऋ षभ को. अपनी गृहस्थी टूटने से बचा ले, और न जाने क्याक्या? ‘‘सिर्फ इसलिए कि वह एक औरत है, उस के द्वारा की गई भूल के लिए हम उसे सूली पर चढ़ा दें? माफ कीजिए यह सजा मुझे मान्य नहीं है. मीनू के हमारे जीवन में होने से ही हमारी खुशियां हैं, उस के बिना मैं और खुशी दोनों अधूरे हैं. मैं मीनू की जिंदगी बरबाद नहीं कर सकता पापा. यह मेरा अंतिम निर्णय है.’’

ऋ षभ के दिए तर्कों का किसी के पास जवाब नहीं था. सभी चुप हो गए, पर मेरा मन चीत्कार कर उठा. बोली, ‘‘मुझे माफ कर दो ऋ षभ. तुम ने मेरी पीड़ा को समझा, पर मैं आज तक तुम्हें पहचान न सकी. किसी के बाहरी आकर्षण में पड़ कर मैं ने तुम्हारा दिल दुखाया और तुम्हें बहुत गहरा घाव दे बैठी. सचमुच मैं माफी के योग्य नहीं हूं.’’ पर कहते हैं न कि समय बड़े से बड़ा घाव भी कर देता है. इस घटना को 1 महीना हो गया था. ऋ षभ और मेरे बीच सभी कुछ सामान्य हो चला था. मैं अभी भी बाहर निकल कर लोगों का सामना करने से कतराती थी. मयंक के बारे में भी मुझे कोई जानकारी नहीं थी. अगस्त माह शुरू हो चुका था. बारिश का मौसम मुझे सब से सुहावना लगता था.

ऐसी ही एक खूबसूरत शाम ऋ षभ को घर जल्दी आया देख मैं चौंक पड़ी, ‘‘आज इतनी जल्दी?’’ मैं ने पूछा. ‘‘हां, तैयार हो जाओ, कहीं घूमने चलते हैं,’’ ऋ षभ ने मुसकरा कर कहा.

‘‘लेकिन खुशी सो रही है,’’ मैं ने बात टालने की गरज से कहा, क्योंकि मैं बाहर जाना ही नहीं चाहती थी. ‘‘मैं ने मौसी को बोल दिया है. आज वे खुशी के साथ यही रुक जाएंगी,’’ ऋ षभ ने कहा.

‘‘ठीक है, फिर मैं तैयार हो जाती हूं,’’ मैं ऋषभ को बिलकुल नाराज नहीं करना चाहती थी. मेरी वजह से उन्होंने पहले ही काफी कुछ सहा था. जब तक हम तैयार हुए, बारिश ने मौसम को और भी खुशगवार बना दिया था.

मौसी आ गई थीं. खुशी को उन्हें सौंप जब मैं बाहर निकली तो मेरी ओर देखते हुए इन्होंने एक प्यारी सी मुसकान बिखेरी. फिर गाड़ी निकालने लगे. मैं भी गेट खोल कर इन की मदद करने लगी. तभी अचानक मयंक के घर पर मेरी नजर पड़ी. ऊपर बालकनी से वह मुझे न जाने कब से निहारे जा रहा था. उस घटना के बाद मेरा और मयंक का पहली बार सामना हो रहा था. मेरा असहज हो जाना स्वाभाविक था.

ऊपर देखते हुए मैं लड़खड़ा सी गई. तभी 2 मजबूत बाजुओं ने मुझे सहारा दे कर थाम लिया. ये ऋ षभ थे जिन्होंने बड़ी ही अदा से मेरा हाथ थाम मुझे कार में बैठाया. आसपास के घरों से भी कई जोड़ी निगाहों ने हमें तब तक कैद में रखा जब तक कि हम उन की आंखों से ओझल नहीं हो गए.

खूबसूरत आलीशान होटल के अंदर एकदूसरे का हाथ थामे हम ने प्रवेश किया. अपनी खोई गरिमा को वापस पा कर मैं तो फूली नहीं समा रही थी. मन ही मन उस एक पल का शुक्रिया अदा कर रही थी, जिस पल मैं ने उन से शादी के लिए हां की थी.

हौल की धीमी रोशनी में ऋ षभ ने मुझे डांस के लिए इनवाइट किया, जिसे मैं ने सहर्ष स्वीकार कर लिया. उन के सीने से लग कर डांस करते हुए मैं खुद को संसार की सब से खुशहाल औरत समझ रही थी. कुछ देर बाद प्यारा सा डिनर कर के हम होटल के उस कमरे में जाने लगे, जो ऋषभ ने पहले से ही बुक किया हुआ था.

‘‘ये सब करने की क्या जरूरत थी ऋ षभ,’’ काफी समय बाद मैं ने उन्हें उन के नाम से पुकारा. ‘‘अंदर तो आओ,’’ कह कर ऋ षभ ने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया.

‘‘अरे, यह क्या कर रहे हैं? सब हमें देख रहे हैं,’’ मैं ने शरमाते हुए कहा. ‘‘देखने दो. इन्हें भी तो मालूम हो कि हमारी शरीकेहयात कितनी खूबसूरत हैं,’’ अंदर आ कर इन्होंने मुझे बैड पर लिटाते हुए कहा. उस के बाद अपनी जेब से एक छोटा सा गिफ्ट निकाल कर बड़े ही रोमांटिक अंदाज में मुझे पेश किया. उस में से हार्ट शेप की एक डायमंड रिंग निकाल कर इन्होंने मुझे पहना दी.

‘‘थैंकयू ऋ षभ,’’ कह मैं इन के गले लग गई. मेरी आंखों आंसुओं से भीगी थीं. अपनी पीठ पर गीलेपन का एहसास होते ही इन्होंने मेरा चेहरा हाथों में ले लिया, ‘‘यह क्या? तुम रो रही हो?’’

‘‘मैं ने तुम्हें बहुत दुख पहुंचाया है ऋषभ… किस मुंह से माफी मांगू?’’ ‘‘बस मीनू अब इस टौपिक को आज के बाद यहीं खत्म कर दो. तुम मेरी प्रेयसी, प्रेरणा सभी कुछ हो. तुम्हें घर ला कर मैं ने कोई एहसान नहीं किया है. बस अब वह सब तुम्हें देने की कोशिश कर रहा हूं, जिस की तुम हकदार हो. मेरी एक बात ध्यान से सुनो. जब तक तुम खुद को माफ नहीं कर देतीं, हर कोई तुम्हें गुनहगार बताता रहेगा, इसलिए प्लीज इस तकलीफ से बाहर आओ. मैं तुम्हें इस तरह आत्मग्लानि में जीते नहीं देख सकता,’’ कह कर ऋ षभ ने मुझे अपने सीने से लगा लिया.’’

उस खूबसूरत रात उन पवित्र बांहों के आगोश में जाने कितने समय बाद मुझे चैन की नींद आई. दूसरा पूरा दिन भी हम होटल में ही रुके. आज मुझे मयंक का शारीरिक आकर्षण ऋ षभ के प्यार के आगे बौना नजर आ रहा था. मौसी से फोन कर हम लगातार खुशी के संपर्क में भी रहे. घर आने के बाद हमारी जिंदगी बदल चुकी थी. अपनी उस गलती को नादानी समझ मैं भी भुलाने लगी थी. ऋ षभ के प्यार व विश्वास ने मेरे दिलोदिमाग में मजबूती से अपनी जड़ें जमा ली थीं.

एक दिन ऋ षभ ने मुझे पार्लर की चाबी सौंपते हुए अपना काम दोबारा शुरू करने को कहा. मैं थोड़ा सोच में पड़ गई. एक तो महीनों से पार्लर बंद पड़ा था, दूसरे पार्लर आने वाली औरतों की निगाहों में तैरते प्रश्नों का सामना कैसे करूंगी यह सोच कर मन बैठा जा रहा था. मगर ऋ षभ ने मुझे अपने साथ का भरोसा दिया. उसी दिन कामवाली बाई के साथ जुट कर मैं ने अपना पार्लर साफ किया. कई कौस्टमैटिक जो ऐक्सपायर्ड हो गए थे, उन्हें हटा कर हर चीज व्यवस्थित की. कुछ जरूरी सामान की लिस्ट बनाई. पार्लर खोले 2-3 दिन हो गए थे, उस का बोर्ड भी ऋ षभ ने साफ कर फिर से लगा दिया था, परंतु एक भी क्लाइंट अभी तक नहीं आई थी. अपने सभी काम जल्दी से निबटा कर मैं पार्लर में बैठ जाती. किसी के आने का पूरा दिन बैठेबैठे इंतजार करती रहती. ऋ षभ से मेरे मन की बेचैनी छिपी नहीं थी.

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