कावेरी ससुराल पहुंचने ही वाली थी कि उसे नमन का भेजा हुआ रिपोर्ट का फोटो मिल गया. जब कावेरी ने फोटो डाउनलोड कर देखा तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ. रिपोर्ट बता रही थी कि वह गर्भवती है. कावेरी का मन बल्लियों उछलने लगा. वह जल्द ही उदित से मिल कर यह सुखद समाचार उसे सुनाना चाहती थी.
उत्साह से भरी कावेरी दौड़ती हुई उदित के पास जा पहुंची. उदित से आंखें बंद करने को कह कर उस ने पर्स से मोबाइल निकाला और रिपोर्ट का फोटो उदित के सामने कर दिया.
उदित ने आंखें खोलीं तो नजरें मोबाइल स्क्रीन पर ठहर गईं. रिपोर्ट में ‘प्रैगनैंसीपौजिटिव’ देखते ही उस के चेहरे का रंग उड़ गया. माथे पर त्योरियां चढ़ाते हुए बोला, ‘‘क्या मजाक है यह?’’
‘‘मजाक नहीं, यह सच है उदित,’’ कावेरी खुशी से चहक उठी.
‘‘लेकिन यह कैसे हो सकता है?’’ उदित आशंका से घिरा था.
‘‘हो गया बस, कैसे? यह तो मु झे भी नहीं पता,’’ अदा से कंधे उचकाती हुई कावेरी उदित से लिपट गई.
कावेरी को अपने से अलग कर उदित आक्रोशित हो लगभग चीख उठा, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता… कभी नहीं. हुआ तो हुआ कैसे?’’
‘‘क्या हो गया है आप को?’’ इस बार कावेरी तुनक कर बोली, ‘‘यह क्या अनापशनाप बोले जा रहे हैं आप इतनी देर से? मैं ने तो सोचा था कि आप यह खुशखबरी सुन खुशी से झूम उठेंगे. लेकिन…’’
‘‘कैसी खुशखबरी? कैसी खुशी? सुन लो तुम आज कि… मैं पिता नहीं बन सकता,’’ उत्तेजना और क्रोध में उदित के मुंह से सच निकल गया.
कावेरी सिर पकड़ कर बैठ गई. उसे लग रहा था कि वह चक्कर खा कर गिर जाएगी.
अपनी रोबीली आवाज में उदित फिर चिल्लाया, ‘‘क्या मैं जान सकता हूं कि यह बच्चा किस का है? शायद उस नमन का ही, जिस ने तुम्हें यह रिपोर्ट भेजी है.’’
कावेरी यह सहन न कर सकी. तैश में आ कर बोली, ‘‘अब सम झी कि आप ने मु झे हमारे टैस्ट की रिपोर्ट्स क्यों नहीं दिखाई थीं. क्यों नहीं जाना चाहते थे डाक्टर के पास. कितना बड़ा धोखा…’’
बौखलाया सा उदित कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था. बेचैन हो कर वह कमरे में इधरउधर चक्कर लगाने लगा. असमंजस में पड़ी कावेरी भी आंखों पर हाथ रख बैड पर लेट गई.
कुछ देर बाद कमरे की चुप्पी कावेरी का मोबाइल बजने से टूट गई. कौल नमन का था, ‘‘उखड़ी सी आवाज में हैलो बोल मोबाइल पर बात करते हुए वह कमरे से सटी बालकनी में जा खड़ी हुई.’’
नमन बोला, ‘‘उदित का सिडनी टूर कैसा रहा? तुम्हारी तबीयत कैसी है अब? वैसे मैं ने एक जरूरी बात बताने के लिए किया है फोन. अरे, मैं ने जिस रिपोर्ट का फोटो भेजा था वह तुम्हारी नहीं है. पहले किसी और कावेरी की रिपोर्ट दे दी थी मु झे उन लोगों ने. कुछ देर पहले क्लीनिक से फोन आया तो मैं दोबारा जा कर सही वाली रिपोर्ट लाया हूं. अभी व्हाट्सऐप पर तुम्हारी असली रिपोर्ट भेज रहा हूं. कोई बड़ी बीमारी नहीं बस थोड़ा इन्फैक्शन हो गया था.
‘‘ओह, मैं भी कुछ सम झ नहीं पा रही थी कि आखिर यह हुआ क्या? हां, लेकिन उस गलत रिपोर्ट ने उदित को बेनकाब कर दिया है,’’ कहते हुए कावेरी ने पूरी घटना संक्षेप में बता दी.
अब उदित को बता दो रिपोर्ट का सच, ‘‘सब ठीक हो जाएगा,’’ कह कर नमन ने फोन काट दिया और असली रिपोर्ट कावेरी को भेज दी.
फोन पर कावेरी की हताशा में डूबी आवाज सुनने के बाद नमन चिंतित था, लेकिन उसे इस बात की प्रसन्नता भी थी कि उदित को ले कर उस का अनुमान सही निकला और एक छोटी सी युक्ति लगा कर उस झूठ से परदा उठाने में वह सफल भी हो गया.
हुआ यों कि शाम को जब नमन कावेरी की रिपोर्ट लेने पहुंचा तो जो रिपोर्ट उसे मिली उस पर ‘प्रैगनैंसी पौजिटिव’ देख कर वह चौंक गया. फिर रिपोर्ट पर मोबाइल नंबर व घर का पता देखा तो वह कावेरी का नहीं था. नमन सम झ गया कि यह रिपोर्ट किसी और कावेरी की है.
इस से पहले कि वह काउंटर पर जा कर सही रिपोर्ट लेता, उस ने अपने मोबाइल से उस रिपोर्ट की एक फोटो इस तरह खींच कर रख लिया, जिस में एड्रैस और मोबाइल नंबर दिखाई न दे. इस के बाद नमन ने कावेरी की असली रिपोर्ट ले कर अपने पास रख ली. रिपोर्ट नौर्मल थी, इसलिए उसे कावेरी तक पहुंचाने की जल्दी भी महसूस नहीं हुई नमन को.
गलत रिपोर्ट वाला फोटो कावेरी को भेजने के कुछ देर बाद भेजी नमन ने असली रिपोर्ट ताकि कावेरी उदित को गलत रिपोर्ट दिखा सके और इस बारे में कावेरी और उदित की बातचीत भी हो पाए. गलत रिपोर्ट देखने के बाद उदित की प्रतिक्रिया द्वारा सच झूठ की तह तक पहुंचना चाहता था नमन.
सही रिपोर्ट भेजने के बाद नमन आशा कर रहा था कि उदित अब शर्मिंदा हो कर सच छिपाने के लिए कावेरी से क्षमा मांग लेगा और दोनों का वैवाहिक जीवन एक सुखद मोड़ ले लेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
उदित को जब कावेरी ने बताया कि प्रैगनैंसी वाली रिपोर्ट गलत थी तो निर्लज्जता और दोगुने वेग से वह कावेरी पर चिल्ला उठा, ‘‘तो अब अपने दोस्तों के साथ मिल कर मेरा मजाक भी उड़ाना शुरू कर दिया तुम ने. न जाने क्या सम झती हो अपनेआप को… सिडनी में ही खुश था मैं. सोच रहा हूं सब छोड़छाड़ कर वहीं चला जाऊं.’’
कावेरी का मन वितृष्णा से भर उठा. मन के चूरचूर होने की पीड़ा मुख पर साफ झलक रही थी. मन किया कि जोर से चीख उठे. मुंह से जैसे बोल अपनेआप ही निकल पड़े, ‘‘अपने किए पर शर्मिंदा होने की जगह आप मु झे, मेरे दोस्तों पर कीचड़ उछाल रहे हैं? अब तक आप के व्यवहार को मैं आप का स्वभाव सम झ सहन करती आ रही थी, लेकिन आप तो पहले दिन से ही मु झे नीचा दिखाने के मौके तलाश रहे थे.
‘‘क्या हो गया अगर पतिपत्नी में से कोई भी संतान को जन्म देने में असमर्थ है? वह आप भी हो सकते थे या मैं भी. रिश्तों का घटाजोड़ नहीं जानती मैं, लेकिन इतना सम झती हूं कि प्यार दिमाग से नहीं दिल से होता है. पतिपत्नी का रिश्ता प्रेम पर टिका होता है… दिमाग का खेल नहीं चलता यहां. आप क्या छोड़ेंगे मु झे? मैं आज ही, अभी पतिपत्नी के नाम पर कलंक बन चुके इस रिश्ते से अपने को अलग करती हूं.’’
उदित हक्काबक्का सा देखता रह गया और बैग लिए कावेरी उलटे पांव मायके लौट आई.
सुधांशु भी क्या कहते सब जानने के बाद? कुछ दिनों की जद्दोजहद के बाद तलाक हो गया.
अपनी योग्यता के बल पर स्कूल में टीचर बन कावेरी पूरी हिम्मत से स्वयं को संभाले थी, लेकिन मन में कहीं न कहीं एक रिक्तता निरंतर अनुभव कर रही थी. धीरेधीरे उस के वजूद पर छा रही वह उदासी उस की उमंगों और खुशियों को लील ही जाती यदि उस दिन नमन अपना दिल उस के सामने खोल न देता.
‘‘कावेरी, तुम्हें कभी कहने का साहस न जुटा सका. हमेशा एक जुड़ाव सा महसूस होता रहा है तुम संग. कुछ कहना भी चाहा कभी तो अपाहिज पांव ने जैसे मेरी सारी हिम्मत छीन ली. तुम्हारी शादी हुई तो सब्र कर लिया और हमेशा तुम्हें खुश देखना चाहा.
‘‘अब भी तुम्हें उदास देखता हूं तो लगता है कहीं से खुशियों की गठरी बांध लाऊं और सब तुम पर निछावर कर दूं,’’ नमन बोला.
‘‘अपाहिज? क्या कह रहे हो नमन? अपाहिज तो उदित था जिस की सोच ही पंगु थी. काश, तुम ने कुछ साल पहले ही बता दी होती मु झे अपने मन की बात,’’ कावेरी का गला रुंध गया.
‘‘तो अब भी क्या बिगड़ा है? कावेरी, क्या तुम मेरी जीवनसंगिनी बन कर खुश रह सकोगी?’’
कावेरी की आंखें ही नहीं मन भी भीग गया. लगा जैसे नमन ने चाहत के दुपट्टे में सम्मान का सिक्का, उमंग सी हलदी, दूर्वा जैसी खुशी, चावल के दानों सा विश्वास तथा आशा के पुष्प रख कस कर गांठ लगा दी हो और उसे कावेरी की कोमल भावनाओं की चूनर से बांध दिया हो.
‘‘गठबंधन तो आज हो गया हमारा,’’ कह कर कावेरी नमन के गले लग गई.