साथ: भाग 2- पति से दूर होने के बाद कौन आया शिवानी की जिंदगी में

‘‘आप मांजी को अकेला ही छोड़ कर आए हैं, यह तो ठीक नहीं है,’’ फिर पता नहीं क्या सोच कर मैं ने साहिल से कहा, ‘‘आप काम कीजिए, मैं आप के घर जा रही हूं. मुझे आज वैसे भी कुछ खास काम नहीं, आप मांजी को फोन कर दीजिए.’’

पूरे हक से कही मेरी यह बात सुन कर साहिल हैरान था पर उस ने मुझे मना नहीं किया. अगले 30 मिनट बाद मैं मांजी के पास थी. मैं ने उन को दवा दी और उन के पास बैठी रही. वे बोलीं, ‘‘बेटा, अब मैं ठीक हूं, साहिल तो ऐसे ही परेशान हो जाता है.’’

‘‘मांजी, आप साहिल की शादी कर दो, ताकि आप की सेवा करने के लिए कोई आप के पास रहे,’’ मैं ने मांजी के सिर को दबाते हुए कहा.

मांजी ने आंखें बंद करते हुए कहा, ‘‘यह सपना तो मैं कब से देख रही हूं पर साहिल को कोई पसंद ही नहीं आती. कहता है कि आजकल की लड़कियां सिर्फ दिखावटी जिंदगी जीती हैं, सचाई तो उन में है ही नहीं.’’

कुछ देर में मांजी की आंख लग गई और मैं साहिल के बारे में सोचती रही. उस में कोई दिखावा नहीं था. सादगी भरी थी उस की जिंदगी. शाम को साहिल के घर लौटते ही मैं वापस आ गई.

अगला दिन रविवार था, औफिस की छुट्टी थी. मेरा मन हुआ कि मांजी की तबीयत का हाल पूछ लूं. मैं ने साहिल को फोन किया तो मांजी ने ही फोन उठाया. उन्होंने बहुत जोर दिया कि मैं लंच उन के साथ ही करूं. तो मैं ने मान लिया क्योंकि घर पर अकेले रहने को दिल नहीं कर रहा था. मैं झट से तैयार हो कर मांजी के पास पहुंच गई. दरवाजे की कालबैल बजाते ही साहिल को अपने सामने खड़ा पाया.

सफेद कुरतेपाजामे में वह बहुत आकर्षित लग रहा था. मेरी नजर उस पर 1 मिनट टिकी फिर मैं ने नजरें हटा ली. सारा दिन मांजी और साहिल के साथ ही बीता. रात का खाना भी उन के साथ ही खाया. रात को काफी देर हो गई तो साहिल मुझे घर छोड़ आया. उस रात मुझे सिर्फ साहिल का ही खयाल आता रहा. अगले दिन मैं औफिस पहुंच कर सब से पहले साहिल के पास गई.

‘‘गुड मौर्निंग साहिल,’’ मैं ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘वेरी गुड मौर्निंग शिवी.’’

साहिल के मुंह से शिवी सुन कर मुझे अजीब लगा पर अगले ही मिनट साहिल फिर बोला, ‘‘ओ सौरी, शिवानीजी,’’ मेरा ध्यान कहीं और था.

‘‘कोई बात नहीं, पर ये शिवी कौन है?’’ मैं ने साहिल से पूछा.

‘‘अरे कोई नहीं, आप ही हैं. कल रात मांजी से आप की बात कर रहा था तो मांजी ने आप को प्यार से बारबार शिवी कहा था. इसलिए मेरे मुंह से यह निकल गया, सौरी,’’ साहिल ने थोड़ा घबरा कर कहा पर मैं उस के मुंह से शिवी सुन कर बहुत खुश थी. हम ने उस दिन भी लंच साथ किया और शाम को घर आने से पहले मैं साहिल के घर मांजी से मिलने भी गई.

धीरेधीरे यह एक सिलसिला सा बन गया. अब साहिल मुझे शिवी ही कहता था. हम साथसाथ लंच करते, साथसाथ घर वापस आते. हमारी नजदीकियां बढ़ने लगी थीं. मुझे पता नहीं चला कि कब मुझे साहिल का साथ इतना पसंद आने लगा कि मैं भूल गई कि मैं शादीशुदा हूं.

पुणे से वापस आ कर और भी बिजी हो गए थे. उन को अपनी मेहनत का फल भी मिला. उन का प्रमोशन हो गया. हम दोनों में बात न के बराबर होती थी. लेकिन जब कभी उन के औफिस की कोई पार्टी वगैरह होती थी तो मैं उन के साथ जरूर जाती थी और उन के दोस्त जब मेरी तारीफ करते थे तो उन का चेहरा चमक उठता था.

उस दिन साहिल का फोन आया कि मांजी की तबीयत बहुत खराब हो गई है, वह उन को अस्पताल ले जा रहा है. मैं ने अमन को फोन कर कह दिया कि मेरी एक सहेली की मां बहुत बीमार हैं, मैं उन को देखने जाऊंगी, इसलिए रात को देर से आऊंगी. अमन ने सिर्फ ओके कह कर फोन काट दिया. मांजी आईसीयू में थीं. डाक्टर ने कहा कि यहां कोई और नहीं रुक सकता, आप कल सुबह आना. मैं समझबुझ कर साहिल को घर ले आई. रात काफी हो चुकी थी. साहिल मांजी को ले कर बहुत परेशान था. उस को ऐसी हालत में छोड़ कर मैं घर कैसे जाऊं, समझ नहीं आ रहा था. पर घर तो जाना ही था.

‘‘अब मैं चलती हूं साहिल, कल सुबह आती हूं,’’ मैं ने अपना पर्स उठाते हुए कहा.

‘‘प्लीज मत जाओ शिवी, मुझे तुम्हारी जरूरत है,’’ साहिल की आंखों में आंसू थे, उस ने मुझे अपनी ओर खींच लिया.

‘‘साहिल मुझे जाने दो रात बहुत हो चुकी है,’’ मैं ने अपनेआप को छुड़ाते हुए कहा. लेकिन चाह कर भी वहां से घर नहीं आ पाई. सारी रात साहिल सिर्फ मेरी गोद में सिर रख कर रोता रहा और कहता रहा कि वह मांजी और मेरे बिना नहीं जी पाएगा.

मैं सुबह घर जा रही थी तो लग रहा था कि अमन की बातों को झेलना पड़ेगा. पर घर पर अमन अभी तक सो रहे थे. मैं नहाने चली गई. वापस आई तो देखा अमन अब भी सो रहे थे. मैं किचन में चली गई. इतने में साहिल का फोन आया. उस ने कांपती हुई आवाज में मुझे मांजी के न होने की खबर दी. मेरी आंखों से आंसू निकल पड़े. दिल किया कि जोर से रो लूं पर खुद पर नियंत्रण किया. साहिल कैसे सहेगा इस दुख को. सोचते हुए मैं ने अमन को जगाया और बताया कि मेरी सहेली की मांजी नहीं रहीं.

‘‘अरे ये तो बुरा हुआ,’’ उन्होंने आंखें मलते हुए कहा.

‘‘मैं जा रही हूं अमन, आप प्लीज नाश्ता बाहर कर लेना,’’ मैं ने जल्दी से उन को कहा.

‘‘हां, ठीक है. अरे सुनो, आज पवन के घर पार्टी है तुम जल्दी आ जाना,’’ अमन ने चादर मुंह पर लेते हुए कहा तो मैं थोड़ी सोचती हुई वहीं खड़ी रह गई कि ये इंसान हैं या पत्थर. किसी की मां नहीं रहीं और इन को पार्टी में जाना है. पर इन का भी क्या कुसूर ये तो अपनों का दर्द ही नहीं समझते, परायों का क्या समझेंगे.

मैं अपनी शादी से खुश नहीं हूं और पति से अलग होना चाहती हूं, मैं क्या करू?

सवाल

मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं. एक बेटा भी है. मैं अपनी शादी से खुश नहीं हूं और पति से अलग होना चाहती हूं पर वे मुझे छोड़ना नहीं चाहते, बावजूद इस के कि वे मुझे पसंद नहीं करते. हमेशा लड़ते रहते हैं. कई बार तो मारते पीटते भी हैं. मुझे समझ में नहीं आता कि उन से छुटकारा कैसे पाऊं? कृपया मेरी समस्या का कोई समुचित हल बताएं?

जवाब

आप ने पूरा खुलासा नहीं किया कि आप के पति आप को नापसंद क्यों करते हैं और आप लोगों में झगड़ा क्यों होता है? जहां तक आप के पति के आप को मारनेपीटने की बात है तो वह उचित नहीं है. इस के लिए पहली बार ही जब उन्होंने आप पर हाथ उठाया था आप को अपने सासससुर से इस की शिकायत करनी चाहिए थी.

आप की शादी को 3 साल हो चुके हैं. इतने सालों में आप पति के स्वभाव को जान चुकी होंगी, इसलिए कोशिश कर सकती हैं कि कोई ऐसा काम न करें, जिस से गृहकलह की नौबत आए. अब आप का बच्चा भी है और घर की अशांति का बच्चों की परवरिश पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. जहां तक आप के द्वारा पति को छोड़ने की बात है तो हम परिवार जोड़ने की सलाह देते हैं तोड़ने की नहीं. अत: पति को छोड़ने का विचार मन से निकाल दें. पति से तालमेल बैठाने का प्रयास करें.

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कमजोरों पर भारी पड़ता तलाक तलाक तलाक

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ इलाके की रहने वाली रेहाना की शादी 16 साल की उम्र में लखनऊ के परवेज से हो गई थी. रेहाना का परिवार गांव में रहता था. वह वहां के रहनसहन की आदी थी. 5वीं जमात तक पढ़ी रेहाना को पढ़नेलिखने का शौक था. उस के वालिद ने आगे स्कूल भेजने से बेहतर उस की शादी करना मुनासिब समझा. रेहाना को समझा दिया गया कि निकाह के बाद लखनऊ जाना, तो वहां पढ़ने के लिए अच्छेअच्छे स्कूल मिलेंगे.

रेहाना निकाह के बाद लखनऊ आ गई. वहां पर उस ने अपनी पढ़ाई की बात की, तो किसी ने उस की बात को तवज्जुह नहीं दी. धीरेधीरे वह रोजमर्रा की जिंदगी में उलझ गई. शादी के सालभर बाद ही रेहाना को एक बच्चा भी हो गया. रेहाना का पति नौकरी करने विदेश चला गया. अब वह कुछ दिन लखनऊ रहती, तो कुछ दिन मायके हैदरगढ़ चली जाती. इस बीच ससुराल में उस का कुछ मनमुटाव भी होने लगा. यह बात विदेश में नौकरी करने गए रेहाना के पति परवेज को भी पता चली, तो वह उसी को जिम्मेदार ठहराने लगा. रेहाना को यह पता नहीं था कि परवेज के मन में क्या है?

एक दिन फोन पर बात करते ही दोनों के बीच झगड़ा होने लगा. गुस्से में आ कर परवेज ने रेहाना को ‘तलाक तलाक तलाक’ कह कर तलाक दे दिया.इस बात की जानकारी रेहाना के मायके और ससुराल वालों को भी हुई. उन लोगों ने बात को संभालने के बजाय दोनों का अलगाव कराने का फैसला कर लिया. निकाह के 4 साल के अंदर ही 20 साल की रेहाना तलाकशुदा औरत बन कर ही मायके में रह कर मेहनतमजदूरी कर के अपना पेट पालने को मजबूर हो रही है.

यह केवल रेहाना की बात नहीं है. गांवों और कसबों में रहने वाली कमजोर परिवार की बहुत सारी मुसलिम लड़कियां इस तरह की परेशानियों से गुजर रही हैं. कुछ सालों में उत्तर प्रदेश और बिहार के गांवकसबों में रहने वाली लड़कियों के मातापिता उन की शादी शहरों में करने लगे हैं, ताकि वे सुखी जिंदगी गुजरबसर कर सकें. शादी के समय अपनी अच्छी माली हालत बताने वाले लड़कों के परिवार शादी के बाद लड़कों को नौकरी करने किसी और देश या शहर भेज देते हैं, जहां पर वे नौकरी करते हैं. घर में उन का रहना कम होने लगता है.पतिपत्नी के अलग रहने से दोनों के बीच दूरियां बढ़ती जाती हैं. एक समय ऐसा आता है कि ये दूरियां तनाव, लड़ाईझगड़े में बदल जाती हैं. फोन, ह्वाट्सऐप और सोशल मीडिया के बढ़ते चलन से बातबात पर तलाक देने की घटनाएं बढ़ गई हैं. छोटीछोटी बातचीत और लड़ाईझगड़े में ये मर्द अपनी औरतों को तलाक देने लगे हैं. मुसलिम तलाक कानून 3 तलाक को ले कर पसोपेश की हालत में है. ऐसे में इस का खमियाजा औरतों को उठाना पड़ता है.

आंकड़े बताते हैं कि साल 2014 में महिला शरीआ अदालतों में 235 तलाक के मामले आए थे. इन में से 66 फीसदी मामलों में बातचीत करतेकरते मुंहजबानी तलाक ही लिया गया था. जिन औरतों को तलाक मिला, उन में से 90 फीसदी से ज्यादा औरतें इस तरह के तलाक से खुश नहीं हैं. मुसलिम समाज में आज भी 55 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में ही कर दी जाती है. इन में से आधी औरतों के पास निकाहनामा नहीं होता है. मुसलिम समुदाय में इस तरह के तलाक की अहम वजह किसी और से शादी भी होती है. 90 फीसदी औरतें अपने पतियों की दूसरी शादी के खिलाफ हैं. मुसलिम समाज में घरेलू हिंसा के मामले भी बढ़े हैं. औरतें बातबात पर तलाक के डर से अपनी बात किसी से कहने में डरती हैं. उन को लगता है कि इस से उन का पति उन को तलाक दे देगा. तलाक के डर से वे मारपीट को चुपचाप सहती रहती हैं.

छोटी छोटी वजहें

बातबात पर तलाक देने के मामलों को देखा जाए, तो बहुत छोटीछोटी वजहें सामने आती हैं. रेहाना ने बताया कि उस के पति ने लड़ाईझगड़ा शुरू करने से पहले कहा था कि तुम को खाना बनाना नहीं आता. जब भी तुम गोश्त बनाती हो, उस में तेल ज्यादा रहता है. उस को खाने के बाद हमारे घर वालों का पेट खराब हो जाएगा. वे बीमार हो जाएंगे. जब तुम घर के लोगों के लिए खाना तक नहीं बना सकती हो, तो तुम्हारे साथ निकाह कर के रहने का क्या फायदा? इस के बाद ही उस ने तलाक दे कर रेहाना को छोड़ दिया. दरअसल, मुसलिम कानून में औरतों के बजाय आदमियों को ज्यादा हक दिए गए हैं. ऐसे में औरतें हमेशा अपने को असुरक्षित महसूस करती हैं. आदमियों को लगता है कि 3 बार तलाक कहने से उन को बीवी से छुटकारा मिल जाएगा. एक बार तलाक हो जाने के बाद कोई भी औरत की बात को सही नहीं मानता. ऐसे में आदमियों के हौसले बढ़ते जाते हैं.

समाज के दूसरे तबकों को देख कर मुसलिम बिरादरी की लड़कियां भी फैशनेबल पोशाक में रहना चाहती हैं. जब वे ऐसा करती हैं, तो उन के समाज के कट्टरवादी लोग एतराज करते हैं. यहीं से औरतों का विरोध होने लगता है.

20 साल की फरहाना ने बताया कि उस ने इंटर तक की पढ़ाई पूरी की थी. शादी के बाद वह अपनी सहेलियों से मिलती, तो वे सब फैशन से रहती थीं. एक बार उस ने भी फैशनेबल पोशाक पहन ली. इस से उस की सास नाराज हो गईं और इस बात की शिकायत उस के पति को कर दी, जिस के बाद मारपीट से शुरू हुई कहानी तलाक तक पहुंच गई. इस तरह के हालात का सामना कर रही रजिया ने बताया कि उस का तलाक इसलिए हो गया, क्योंकि अपनी ननद की शादी में उस ने कपड़ों और गहनों की खरीदारी की थी. यह बात ननद की ससुराल वालों को पसंद नहीं आई. ननद की ससुराल वालों की शिकायत पर उसे तलाक दे दिया.

पहले भारतीय समाज में शादी टूटने की घटनाएं कम होती थीं. हाल के कुछ सालों में ये घटनाएं बढ़ चुकी हैं. शादी टूटने की सब से ज्यादा घटनाएं मुसलिम बिरादरी में बढ़ रही हैं. महज 10 सालों के अंदर शादी टूटने की घटनाएं 3 गुना ज्यादा बढ़ गई हैं. छोटेबड़े सभी शहरों में एकजैसे हालात हैं. देश में सब से ज्यादा तलाक मुंबई में होते हैं. एक साल में मुंबई में औसतन 11 हजार, दिल्ली में 8 हजार और लखनऊ में 3 हजार तलाक होते हैं. दिल्ली में हर साल फैमिली कोर्ट में 15 हजार से ज्यादा अर्जियां तलाक के लिए डाली जाती हैं. केरल, पंजाब और हरियाणा में तलाक के मामले तेजी से बढ़े हैं. वहां हर साल 3 से 6 हजार तलाक के केस फाइल होते हैं.

तलाक की कहानी

मुसलिम तबके में किसी आदमी को अपनी पत्नी से छुटकारा पाने के लिए तलाक शब्द को कहने का हक हासिल है. 3 बार तलाक शब्द को दोहरा कर वह पत्नी को तलाक दे सकता है. मुसलिम धर्म के जानकार मानते हैं कि इस तरह बातबात पर तलाक लेना सही नहीं है. तलाक शब्द को एकसाथ ही 3 बार में नहीं बोला जा सकता है. एक महीने में एक बार ही तलाक बोला जा सकता है. इस से पतिपत्नी को तलाक लेने में 3 महीने तक का समय मिल जाता है.

सही बात यह है कि लोग इस बात का पालन नहीं करना चाहते. लोग एक बार में ही तलाक शब्द को 3 बार में बोल कर तलाक लेना पसंद करते हैं. मुसलिम तबके के लोग भी इस बात को ज्यादा प्रचारित नहीं करना चाहते कि तलाक को किस तरह से देना होता है. मर्द इस भ्रम को बनाए रखना चाहते हैं, जिस से वे औरतों का शोषण कर सकें.

कम पढ़ीलिखी लड़की इस तरह के दबाव में आ कर टूट जाती है. वह 3 बार कहे गए तलाक को ही सही मान लेती है. वह इस को अपनी किस्मत मान कर समझौता कर लेती है. कम उम्र में तलाक होने से औरतें जिंदगीभर दुख भोगती रहती हैं. इस में से कई दिमागी बीमारियों का शिकार हो कर टूट जाती हैं.

रेहाना कहती है, ‘‘तलाक देने के तरीकों से मुसलिम औरत हमेशा नुकसान में रहती है. जब तक 3 तलाक को सही तरह से इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, तब तक मर्द मनमानी करते रहेंगे.’’ तलाक को ले कर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुझाव दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शादी का रजिस्ट्रेशन कराने के साथ ही शादी में दिए गए स्त्रीधन और मिलने वाले सामान की पूरी लिस्ट भी बनाई जाए.

इस के बाद भी अभी तक इस बात पर अमल नहीं किया गया है. अगर 3 तलाक के गलत इस्तेमाल से शादियों को टूटने से बचाना है, तो सुप्रीम कोर्ट की बात को मानना ही पडे़गा. मर्दों को लगता है कि अगर तलाक देने के तरीके में कोई रुकावट आएगी, तो उन की मनमानी पर असर पड़ेगा, जिस से वे औरत को आसानी से तलाक दे कर दूसरी शादी नहीं कर सकेंगे.

सोशल साइटें बनीं सौतन

पिछले 4-5 सालों में सोशल साइटों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिस में आदमी और औरत दोनों ही अलगअलग दोस्त बनाते हैं. सब से बड़ा जरीया फेसबुक और ह्वाट्सऐप हैं. पहले यह लत शहरों तक ही सिमटी थी, पर अब मोबाइल फोन, फेसबुक और ह्वाट्सऐप गांवकसबों तक पहुंच गए हैं. बातबात पर तलाक के मामलों को अलग कर के देखा जाए, तो सोशल साइटें तलाक की अहम वजहें बन रही हैं. स्कूल में पढ़ाने वाली सलमा फेसबुक और वाट्सऐप दोनों का इस्तेमाल करती थीं.

वे जब स्कूल से वापस आतीं, तो कुछ देर सोशल साइट्स पर बिताती थीं. एक बार उन के पति ने उन का फोन देखा तो पता चला कि सलमा रात को किसी मर्द दोस्त से चैटिंग कर रही थी. पति ने इस बात को ले कर पहले झगड़ा शुरू किया और बाद में सलमा को तलाक दे दिया. मुसलिम बिरादरी में अभी भी औरतों पर तमाम तरह की पाबंदी हैं. ऐसे में सोशल साइटें सौतन बन गई हैं. बातबात पर होने वाले तलाक में फेसबुक और ह्वाट्सऐप की बातों को सुबूत की तरह से पेश किया जाने लगा है. 50 फीसदी से ज्यादा लोग अपने साथी के अकाउंट पर नजर रखते हैं. 60 फीसदी लोग यह चाहते है कि उन की पत्नी अपने मोबाइल फोन में किसी तरह का पासवर्ड लौक न लगाएं.

30 फीसदी लोगों में फेसबुक और वाट्सऐप को ले कर हफ्ते में एक बार झगड़ा जरूर होता है. सोशल साइटों ने शादीशुदा जिंदगी में परेशानी खड़ी कर दी है. इस का सब से ज्यादा असर मुसलिम बिरादरी पर पड़ रहा है. अब मुसलिम बिरादरी भी इन मामलों को ले कर जागरूक होने लगी है. 3 तलाक कानून से उस की परेशानियां और भी ज्यादा बढ़ती जा रही हैं.

मुसलिम देश भी हैं परेशान

भारत में 3 तलाक भले ही चल रहा हो, पर मुसलिम देशों में इस पर बैन लगाया जाना शुरू हो गया है. पाकिस्तान में 3 तलाक को बंद कर दिया गया है. मुसलिम देशों में गुस्से, नशे और जोश में दिए गए तलाक को सही नहीं माना जाता है. अलगअलग देशों में तलाक को ले कर अलगअलग कानून हैं. मुसलिम देशों में औरतों की हालत बेहद खराब है. यूरोपीय देशों में मुसलिम जोड़ों के लिए अलग कानून है. 3 तलाक को वहां भी अच्छा नहीं माना जाता है. इस को रोकने के वहां भी अलगअलग कानून बने हैं. उन देशों में रहने वालों के माली और सामाजिक हालात भारत से अलग हैं.

ऐसे में भारत में 3 तलाक को ले कर ज्यादा जागरूकता नहीं है. भारत में तमाम औरतों ने अपने संगठन बना कर 3 तलाक  का विरोध करना शुरू किया है. इस से समाज में जागरूकता तो आ रही है, पर अभी भी बड़ा हिस्सा 3 तलाक को सही मानता है. आपसी विरोधऔर सहमति के बीच 3 तलाक का प्रचलन जारी रहने से औरतों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सब से ज्यादा परेशानी गांवकसबों में रहने वाली औरतों के सामने आती है. कम पढ़ीलिखी गरीब औरतें अपनी शिकायत तक सही से नहीं करा पाती हैं. 3 तलाक ने इस तरह की औरतों की जिंदगी को बरबाद कर दिया है.

 

 

अल्पविराम: शादीशुदा स्वरा जब अपने दोस्त के प्यार में पड़ गई

शादीके 10 साल के बाद प्रेम क्या मर जाता है? रिश्ता भी विवाहित जोड़े क्या यंत्रचालित ढंग से निभाने लगते हैं? अब यह सब विवाहितों पर लागू होता है अथवा नहीं, यह तो वे ही जानें, स्वरा और आलोक के लिए तो यह पूर्णतया सत्य है. स्वरा और आलोक के विवाह को 9 साल से कुछ महीने ज्यादा ही हो गए थे. उन का एक 8 साल का प्यारा बेटा शिव था. आलोक एक उच्च पद पर कार्यरत था, इसलिए घर में वह सब कुछ मौजूद था, जो उसे आधुनिक और संपन्न बनाता था. शिव के जन्म के बाद स्वरा ने अपनी स्कूल की जौब छोड़ दी थी और अब जब शिव तीसरी कक्षा का छात्र है, वह अपना खाली समय शौपिंग, गौसिप वगैरह में गुजारती. आज वह घर में ही थी और इधरउधर की बातें सोचतेसोचते थक गई थी. शिव के आने में काफी समय था अभी. और आलोक के आने का कोई तय समय नहीं था. जब बैठेबैठे ऊब गई तो महाराज को खाना क्या बनाना है, बता कर गाड़ी ले कर निकल गई.

मौल में घूमते हुए उस का ध्यान कई जोड़ों पर गया. कितना समय बीत गया था आलोक और उसे ऐसे घूमे हुए. अब तो आलोक रोमांटिक बातों पर हंसता है और फैमिली आउटिंग को टालता है. प्रेम भी वे मशीनी तरीके से करते हैं और इस प्रेम का दिन भी फिक्स हो गया है, शनिवार की रात. अब तो हालत यह हो गई है कि शनिवार की रात जब आलोक उस की तरफ बढ़ता, तो उसे उबकाई आ जाती. वह कोई न कोई बहाना बनाने की कोशिश करती. कभीकभी वह जीत जाती, तो कभीकभी आलोक जीत जाता. तब वह सोचती कि प्रेम क्या कभी तय कर के किया जाता है? वह तो एक उन्माद की तरह आता है और सुख दे जाता है. लेकिन आलोक को यह बात कौन समझाए? वह तो प्रेम भी अपनी मीटिंग की तरह करने लगा था. ऐसा पहले तो नहीं था. क्या उसे अपना बाकी जीवन ऐसे ही गुजारना होगा.

‘‘मैडम, ऐक्सक्यूज मी, आप एक फौर्म भर देंगी?’’ एक युवक उस के पास आ कर बोला, तो उस की विचारों की तंद्रा भंग हुई और वह वर्तमान दुनिया में लौट आई.

‘‘क्या है यह?’’

‘‘यह हमारी कंपनी की स्पैशल स्कीम है. सभी फौर्म में से एक सिलैक्ट होगा और उसे भरने वाले को 3 दिन और 2 रातों का गोवा का पैकेज मिलेगा.’’

‘‘बाद में आना, अभी मैं बिजी हूं,’’ स्वरा ने उसे टालते हुए कहा.

‘‘परंतु मैं तो बिलकुल फ्री हूं,’’ कोई अचानक उन के बीच आ कर बोला तो स्वरा और वह लड़का दोनों चौंक गए.

अरे यह तो कमल है, उस के कालेज के दिनों का सहपाठी. स्वरा को याद आया, कितना स्मार्ट हो गया है यह लल्लू. फिर उस लड़के से उस का नंबर ले कर स्वरा ने उसे बाद में आने को कहा.

उस लड़के के जाने के बाद स्वरा और कमल मौल में ही एक रैस्टोरैंट में बैठे तो बात करतेकरते कब शाम हो गई उन्हें पता ही नहीं चला. अगले दिन मिलने का वादा कर के स्वरा घर आ गई, परंतु घर आ कर भी कमल की बातों को भूल नहीं पा रही थी. कितने दिनों के बाद किसी ने उस की इस तरह से तारीफ की थी. रात में खाना खा कर अभी वह लेटी ही थी कि फोन की घंटी बजी. फोन कमल का था. उस ने सोचा कि कमल को डांट दे कि अभी फोन करने का क्या मतलब? परंतु कर नहीं पाई. उन की बात जब खत्म हुई तो पता चला कि रात का 1 बज गया है.

फिर तो यह रोज का सिलसिला बन गया. या तो वे दिन में मिल लेते या घंटों फोन पर बातें करते रहते. स्वरा काफी खुश रहने लगी थी, क्योंकि कमल और उस की सोच काफी मिलती थी. वह कमल से उन सभी टौपिक पर बात करती, जिन पर वह अकेली बैठे सोचती रहती. फिर उसे लगता कि कमल आलोक से कितना अलग, कितना संवेदनशील है. ऐसा होने से दोनों ही एकदूसरे का साथ ज्यादा से ज्यादा चाहने लगे थे. एक दिन कमल ने अचानक स्वरा को फोन कर के मौल में बुला लिया और वह पहुंची तो बोला, ‘‘स्वरा, कल मैं कंपनी के काम से न्यू जर्सी जा रहा हूं. 1 महीने बाद आऊंगा.’’

‘‘क्या इतने दिन…’’

‘‘हां, लगेंगे तो इतने ही दिन. जाना तो मैं भी नहीं चाहता था पर तुम तो जानती ही हो मेरे बिजनैस की प्रौब्लम.’’

‘‘नहींनहीं कमल तुम जरूर जाओ. हम फोन पर तो बात करते रहेंगे.’’

‘‘स्वरा, मैं एक बात सोच रहा था.’’

‘‘हां, बोलो.’’

‘‘जाने से पहले तुम्हारे साथ कुछ वक्त गुजारना चाहता था.’’

‘‘गुजार तो रहे हो.’’

‘‘नहीं, ऐसे नहीं अकेले कहीं… तुम समझ रही हो न?’’

कुछ सोच कर स्वरा ने कहा, ‘‘बोलो, कहां चलें?’’

‘‘तुम कोई सवाल मत करो, बस चलो. मुझ पर तुम्हें भरोसा तो है न?’’

‘‘चलो, फिर चलें.’’

कमल ने गाड़ी एक आलीशान होटल के सामने रोकी.

‘‘ये कहां आ गए हम?’’ स्वरा गाड़ी से उतरते हुए बोली. वह खुद को असहज महसूस कर रही थी.

‘‘स्वरा, मुझे तुम से जो बात करनी है, उस के लिए एकांत जरूरी है.’’

होटल की लौबी से कमरे तक पहुंचने का रास्ता स्वरा को काफी लंबा महसूस हो रहा था, परंतु वह अंदर से एक अलग रोमांच का भी अनुभव कर रही थी. शादी के पहले कालेज बंक कर के जब स्वरा आलोक से मिलने जाया करती थी, तब भी कुछ ऐसा ही महसूस करती थी. परंतु एक अंतर यह था कि तब उस के कदम तेजी से बढ़ते थे, लेकिन आज बड़ी मुश्किल से उठ रहे थे.

‘‘आओ स्वरा, अंदर आओ. कहां खो गईं, भरोसा तो है न मुझ पर?’’

‘‘कमल, यह तुम ने दूसरी बार पूछा है. औफकोर्स है यार. न होता तो यहां तक आती क्या?’’

अंदर पहुंच कर कमल ने स्वरा को बिस्तर पर बैठाया और खुद उस के घुटनों के पास नीचे बैठ गया.

‘‘यह क्या कमल, तुम यहां क्यों बैठ रहे हो?’’

‘‘मुझे यहीं बैठने दो स्वरा, क्योंकि मुझे जो कहना है वह मैं तुम्हारी आंखों में आंखें डाल कर कहना चाहता हूं.’’

‘‘ऐसा क्या?’’

‘‘स्वरा, तुम से मिलने से पहले मैं सोचता था कि मेरी जिंदगी यों ही कट जाएगी. औफिस से घर व घर से औफिस. और एक ऐसी बीवी जो मुझ से ज्यादा किट्टी पार्टी और शौपिंग में रुचि रखती है. मैं शायद अपने दोनों बेटों की खातिर जी रहा था यह जिंदगी. लेकिन तुम मिलीं तो सब कुछ बदल गया. हम दोनों शादी की बेमजा जिंदगी में कैद हैं, इसलिए मैं तुम्हें अपना बनाना चाहता हूं,’’ ऐसा कहते हुए कमल स्वरा के एकदम करीब आ गया. इतना करीब कि उस की गरम सांसें स्वरा के कोमल कपोलों को सुलगाने गीं.

स्वरा ने इस क्षण के आने के बारे में सोचा न हो ऐसा न था. वह सोचती थी कि जब यह क्षण आएगा तो वह रोमांचित हो जाएगी. जो रिक्तता उस की शादीशुदा जिंदगी में आ गई थी, शायद वह भर जाएगी. परंतु यह क्या? कमल का पास आना उसे बिलकुलअच्छा नहीं लगा. उसे ऐसा लगा जैसे आलोक की कोई बहुत प्यारी चीज, कमल उस से छीनना चाहता है और वह ऐसा होने नहीं देना चाहती. उसी पल उस को यह भी एहसास हुआ कि अंदरूनी रूप से तो वह कभी भी आलोक से दूर हुई ही नहीं थी.

एक झटके में वह कमल को पीछे कर के खड़ी हो गई.

‘‘क्या हुआ स्वरा, मुझ से कोई भूल हो गई?’’

‘‘भूल, नहीं कमल, हुआ तो यह है कि तुम्हारी वजह से मैं समझ पाई कि मैं आलोक से कितना प्यार करती हूं. हमारी शादी में एक अल्पविराम जरूर लग गया था, परंतु प्रयास कर के मैं उसे हटा दूंगी. अल्पविराम को पूर्णविराम समझने की भूल से उबारने के लिए धन्यवाद दोस्त.’’

कमल को जड़ छोड़ कर स्वरा होटल से बाहर आ गई और औटो में बैठ कर उस ने 3 फोन किए. पहला, टूअर पैकेज वाले लड़के को और उस से गोवा की अगले हफ्ते की बुकिंग करवाई. दूसरा, अपनी मां को ताकि शिव उस पूरे हफ्ते किसी भरोसेमंद के पास रहे और तीसरा फोन किया आलोक को.

महत्त्वाकांक्षा: आधुनिकता की चमक में जब मीत ने आया को सौंपी बेटी की परवरिश

आजमीता का औफिस में कतई मन नहीं लग रहा था. सिर भारी हो गया था, आंखें सूजी हुई थीं. रात में वह सो जो नहीं पाई थी. पति से काफी नोकझोंक हुई थी. उस की पूरी रात टैंशन में गुजरी थी.

‘‘तुम औफिस से छुट्टी क्यों नहीं ले लेतीं.’’

‘‘आप क्यों नहीं ले लेते? पिछली दफा मैं ने लंबी छुट्टी नहीं ली थी क्या?’’ पति के कहने पर मीता फट पड़ी.

‘‘उस के पहले मैं ने भी तो लंबी छुट्टी ली थी.’’

उस के बाद दोनों के बीच खूब झगड़ा हुआ और फिर दोनों बिना कुछ खाएपीए सो गए.

सुबह उठने पर दोनों के चेहरों पर कई सवालिया निशान थे. बिना एकदूसरे से बोले और कुछ खाएपीए दोनों औफिस चले गए.

‘पूरी जिम्मेदारी औरत के सिर ही क्यों थोप दी जाती है.’ रहरह कर यही सवाल उसे बुरी तरह मथे जा रहा था. हर बार औरत ही समझौता करे? पत्नी की प्रौब्लम से पति को सरोकार क्यों नहीं? क्यों पुरुष इतना खुदगरज, लालची और हठधर्मी बन जाता है?

‘‘अरे, क्या हुआ? यह मुंह क्यों लटका हुआ है?’’ मैडम सारिका ने पूछा.

‘‘क्या बताऊं मैडम, बेटी को ले कर हम दोनों में रोज झगड़ा होता है. वह बीमार है. मुझे दफ्तर की ओर से विदेश यात्रा पर जाना है. ऐसे में मैं कैसे छुट्टी ले सकती हूं. पति मेरी कोई मदद नहीं करते, उलटे गृहिणी बनने की सलाह दे कर मेरा और मूड खराब कर देते हैं.’’

‘‘बेटी को क्या हुआ है?’’

‘‘उस ने हंसनाखेलना छोड़ दिया है. हमेशा उनींदी सी रहती है. रहरह कर दांत किटकिटाती है. हर समय शून्य में निहारती रहती है.’’

‘‘किसी चाइल्ड स्पैशलिस्ट को दिखाओ,’’ मैडम सारिका घबरा कर बोलीं.

‘‘मैं छुट्टी नहीं ले सकती… मेरी टेबल पर बहुत काम पड़ा है.’’

‘‘उस की तुम टैंशन मत लो… मैं सब संभाल लूंगी… तुम बेटी को किसी अच्छे डाक्टर को दिखाओ.’’

मीता को यह जान कर अच्छा लगा कि पति ने भी अगले दिन की छुट्टी ले ली है. अगली सुबह आया की राह देखी, उस के न आने पर पड़ोसिन को घर की चाबी दे कर डाक्टर के पास रवाना हो गए.

डिस्पैंसरी में बहुत भीड़ थी. प्राइवेट डिस्पैंसरी में भी सरकारी अस्पतालों जैसी भीड़ देख कर मीता दंग रह गई. उसे अपना नंबर आना नामुमकिन सा लगने लगा, क्योंकि शनिवार होने के कारण डिस्पैंसरी 1 बजे बंद हो जानी थी.

मीता को आज पता चला कि छुट्टी की कितनी अहमियत है. सरकारी और प्राइवेट औफिसों में कितना अंतर है. प्राइवेट औफिस सैलरी तो अच्छी देते हैं पर खून चूस लेते हैं. जरा भी आजादी नहीं… कितना मन मार कर काम करना पड़ता है… इंसान मशीन बन जाता है. अपनी आजादी पर ग्रहण लग जाता है.

इस बीच पड़ोसिन का फोन आया कि आया अभी तक नहीं आई है. पता नहीं क्या हो गया था उसे जो बिना बताए छुट्टी कर गई.

बड़ी देर बाद मीता का नंबर आया. बच्ची की हालत देख कर एक बार को डाक्टर भी चौंक गया. उस ने बच्ची की बीमारी से संबंधित बहुत सारे प्रश्न पूछे, जिन के मीता आधेअधूरे उत्तर ही दे पाई. जितना आया जानती थी उतना मीता कहां जानती थी… बच्ची का खानापीना, खेलनाखिलाना सब कुछ उसी के जिम्मे जो था. वह दिन भर आया के पास ही तो रहती थी.

बच्ची का मुआयना कर डाक्टर ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी और बच्ची को ज्यादा से ज्यादा अपने पास रखने की ताकीद भी की. साथ ही यह भी कहा कि आया पर पूरी नजर रखें. यह सुन मीता घबरा गई.

अब पतिपत्नी दोनों को एहसास हो रहा था कि उन से बच्ची की उपेक्षा हुई है. उन्होंने अपनी बेटी से ज्यादा नौकरी को अहमियत दी. यह उसी का दुष्परिणाम है, जो बच्ची की हालत बद से बदतर हो गई.

‘‘सुनो जी, मैं 1 सप्ताह की छुट्टी ले लेती हूं… सैलरी कटे तो कटे… बच्ची को इस समय मेरी सख्त जरूरत है,’’ मीता कहतेकहते रो पड़ी.

‘‘मैं भी छुट्टी ले लेता हूं मीता. मेरी भी बराबर की जिम्मेदारी है… कहीं का नहीं छोड़ा इस नौकरी ने हमें, महत्त्वाकांक्षी बन कर रह गए थे हम.’’

‘‘बच्ची को कुछ हो गया तो मैं कहीं की नहीं रहूंगी. विदेश जाने की धुन ने मुझे एक तरह से अंधा बना दिया था,’’ मीता अपने पति के कंधे पर सिर रख कर रोने लगी.

 

बच्ची की आंखें थोड़ी खुलतीं, फिर बंद हो जातीं. वह अपनी अधखुली आंखों से शून्य में निहारती. अपनी मां को अर्धबेहोशी में देखते रहने का वह पूरा प्रयत्न करती.

‘‘बेटी आंखें खोल… अपनी ममा से बातें कर… देख तो तेरी ममा कितनी दुखी हो रही है… अब तुझे कभी आया के पास नहीं छोड़ेगी तेरी ममा… जरा तो देख..’’ कहतेकहते मीता का कंठ पूरी तरह अवरुद्ध हो गया.

रोतेबिलखते कब उस की आंख लग गई, उसे पता ही नहीं चला. दरवाजे पर आहट से वह जागी. दरवाजा खोला तो सामने पति हाथ में लिफाफा लिए खड़े थे. पति के हाथों से लगभग उसे छीन कर बच्ची की ब्लड रिपोर्ट पढ़ने लगी.

‘‘ड्रग्स,’’ उस ने प्रश्नवाचक दृष्टि से पति की ओर ताका.

‘‘हां, ड्रग्स. बच्ची को धीमा जहर दिया जा रहा था. जरूर यह आया का काम है. तभी तो वह अब नहीं आ रही है.’’

‘‘बेबी के शरीर ने फंक्शन करना बंद कर दिया है,’’ मीता को डाक्टर का यह कहना याद आ गया और वह चक्कर खा कर बिस्तर पर जा गिरी.

कुछ समय बाद अचानक डाक्टर का फोन आया. बच्ची को ले कर क्लीनिक बुलाया. डाक्टर ने पुलिस को फोन कर आया को गिरफ्तार भी करा दिया था. पुलिस आया को ले कर क्लीनिक आ गई थी. उन के वहां पहुंचने पर आया उन से मुंह छिपाने का प्रयास करने लगी. तब पुलिस ने उन के सामने ही आया से पूछताछ शुरू की.

‘‘क्या आप की आया यही है?’’

‘‘जी, यही है,’’ दोनों ने एकसाथ जवाब दिया.

‘‘बच्ची पूरा दिन आया के पास ही रहती थी क्या?’’

‘‘जी हां, हम दोनों तो अपनेअपने औफिस चले जाते थे.’’

‘‘क्या आप ने इसे नौकरी पर रखते समय पुलिस थाने में जानकारी दी थी?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘यही आप से बहुत बड़ी गलती हुई है…’’ पुलिस इंस्पैक्टर ने दो टूक शब्दों में कहा और फिर आया की ओर मुखातिब हुए, ‘‘पतिपत्नी के औफिस जाने के बाद तुम बच्ची को कहां ले जाती थी?’’

‘‘जी, कहीं नहीं, मैं पूरा समय घर पर ही रहती थी.’’

‘‘झूठ… इन को जानती हो?’’ पुलिस ने पास के पार्क के माली की ओर इशारा कर के पूछा तो आया का चेहरा उतर गया. पार्क में बीमार बच्ची के नाम पर भीख मांगती थी. बच्ची बीमार सी लगे, इसलिए उसे भूखा रखती, ऊपर से धीमे जहर ने बच्ची पर और कहर ढा दिया था. पर समय रहते डाक्टर के रिपोर्ट करने पर पुलिस ने उसे रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया था.

अब आया जेल में थी और बच्ची अस्पताल में जीवनमृत्यु के बीच झूल रही थी. वह अपने मातापिता की महत्त्वाकांक्षा की बलि जो चढ़ गई थी.

 

अपशकुनी: अवनि को पहली नजर में ही दिल दे बैठा था अनन्य

अनन्य पार्किंग में अपनी कार खड़ी कर के उतर ही रहा था कि सामने से स्कूटी से उतरती लड़की को देख कर ठगा सा रह गया. उस लड़की ने बड़ी अदा से हैलमेट उतार कर बालों को झटका तो मानो बिजली सी कौंध गई.

उस के स्कूटी खड़ा कर आगे बढ़ने तक वह बड़े ध्यान से उसे देखता रहा. सलीके से पहनी हैंडलूम की साड़ी, कंधों तक लहराते काले बाल और एकएक कदम नापतौल कर रखती गरिमा से भरी चाल उस के व्यक्तित्व को अद्भुत आभा प्रदान कर रहे थे.

अपनी मौसेरी बहन के बेटे चिरायु के जन्मदिन की पार्टी में शामिल होने के लिए अनन्य उत्सव रिजोर्ट आया था. वह लड़की भी उत्सव की ओर जा रही थी. अनन्य को कुछ और देर तक उसे निहारने का सुख मिल गया.

उत्सव के गेट में घुसते ही वह लपक कर लिफ्ट की ओर दौड़ गई. जब तक अनन्य को होश आता, लिफ्ट ऊपर जा चुकी थी. अनन्य के पास अब इंतजार करने के अलावा दूसरा कोई चारा भी नहीं था. पहली बार उसे धीमी गति से चलने के कारण खुद पर गुस्सा आया.

जब वह तीसरी मंजिल पर पार्टी वाले हौल में पहुंचा तो उसी लड़की को अपनी बहन सुजाता से बात करते देख हैरान रह गया. उसे देखते ही सुजाता खिलखिला कर हंस दी.

‘‘तुम शायद इसी की शिकायत कर रही हो. यही पीछा कर रहा था न तुम्हारा? ठहरो, अभी इस के कान पकड़ती हूं,’’ सुजाता नाटकीय अंदाज में बोली थी.

‘‘मैं खुद कान पकड़ता हूं, दीदी. मैं किसी का पीछा नहीं कर रहा था. मैं तो चिरायु के जन्मदिन की पार्टी में आ रहा था. कोई मेरे आगे चल रहा हो तो मैं क्या करूं.’’

‘‘मैं ऐसे दिलफेंक लड़कों के लटके- झटके खूब समझती हूं. जरा पूछिए इन से कि ये महाशय मेरे पीछे ही क्यों चल रहे थे? तेज कदमों से चल कर मेरे आगे क्यों नहीं निकल गए थे?’’

‘‘अनन्य, तुम्हें अवनि के इस सवाल का जवाब तो देना ही पड़ेगा. अब बोलो, क्या कहना है तुम्हारा?’’ सुजाता को न्यायाधीश बनने में आनंद आने लगा था.

‘‘ऐसा कोई नियम है क्या दीदी कि सड़क पर किसी लड़की के पीछे नहीं चल सकते?’’ अनन्य ने जवाब में सवाल खड़ा कर दिया.

‘‘नियम तो नहीं है, पर इसे पीछा करना कहते हैं, बच्चू. और इस के लिए दंड भुगतना पड़ता है,’’ सुजाता मुसकराते हुए बोली.

‘‘ठीक है, आप का यही निर्णय है तो मैं दंड भुगतने के लिए तैयार हूं,’’ अनन्य जोर से हंसा, पर तभी चिरायु आ धमका था और बात बीच में ही रह गई थी.

‘‘मामा, कितनी देर से आए हो. मेरा गिफ्ट कहां है?’’ चिरायु अनन्य की बांहों में झूल गया.

अनन्य ने छोटा सा पैकेट निकाल कर चिरायु को थमा दिया था.

‘‘इतना छोटा सा  गिफ्ट?’’ चिरायु ने मुंह बनाया.

‘‘खोल कर तो देख. आंखें खुली की खुली रह जाएंगी.’’

चिरायु ने बड़े यत्न से कागज में लपेटा हुआ पैकेट एक झटके में फाड़ा तो उस की खुशी का ठिकाना न रहा.

‘‘ओह, वाह वीडियो गेम? मामा, आप सचमुच ग्रेट हो. पापा, देखो, अनु मामा मेरे लिए क्या लाए हैं.’’

ध्रुव वीडियो गेम को देखने में व्यस्त हो गए. सुजाता भी दूसरे मेहमानों की आवभगत में जुट गई.

अनन्य का ध्यान फिर पास ही बैठी अवनि की ओर आकर्षित हो गया. उस के लिए मानो अन्य अतिथि वहां हो कर भी नहीं थे. उस का मन कर रहा था कि वह बस अवनि को निहारता रहे. एकदो बार कनखियों से देखते हुए उस की दृष्टि अवनि से मिली तो लगा जैसे उस की चोरी पकड़ी गई हो.

जन्मदिन का उत्सव समाप्त होते ही उस ने सुजाता से पूछा, ‘‘दीदी, कौन है वह? पहले तो उसे कभी नहीं देखा.’’

‘‘किस की बात कर रहा है तू?’’ सब कुछ समझते हुए भी सुजाता मुसकराई.

‘‘वही जो आप से मेरी शिकायत कर रही थी,’’ अनन्य भी मुसकरा दिया.

‘‘तुझे क्या करना है? तू तो विवाह के नाम से ही दूर भागता है. कैरियर बनाना है. जीवन में आगे बढ़ने के रास्ते में तो विवाह तो सब से बड़ी बाधा है न?’’ सुजाता ने अनन्य के ही शब्द दोहरा दिए थे.

‘‘पर दीदी अवनि को देखते ही मैं ने अपना खयाल बदल दिया है. पता नहीं क्या जादू है उस के व्यक्तित्व में. कुछ बताइए न उस के बारे में.’’

‘‘यही तो रोना है…जिस अवनि को देख कर तुम सम्मोहित हुए हो उस ने अपने चारों तरफ वैराग्य और वासनारहित ऐसा आवरण ओढ़ रखा है कि उस तक पहुंचना कठिन ही नहीं असंभव है. और क्यों न हो, इस संसार ने भी तो उस के साथ ऐसा ही व्यवहार किया है,’’ सुजाता का दर्दीला स्वर सुन कर अनन्य चौंक उठा.

‘‘ऐसा क्या कर दिया संसार ने अवनि के साथ?’’ क्षणमात्र में ही अब तक की सुनी हुई समस्त अनहोनी घटनाएं अनन्य के मानसपटल पर कौंध गई.

‘‘पता नहीं तुम्हें याद है या नहीं, हमारे पुराने गौलीगुड़ा वाले घर के सामने डा. निशीथ राय रहा करते थे…’’

‘‘खूब याद है,’’ अनन्य सुजाता की बात पूरी होने से पहले ही बोल उठा, ‘‘हां, बचपन में बीमार पड़ने पर मां उन्हीं के पास इलाज के लिए ले जाती थीं.’’

‘‘वे हमारे दूर के रिश्ते के चाचा थे. अवनि उन की बहन सुनंदा की छोटी बेटी है.’’

‘‘लेकिन हुआ क्या उस के साथ?’’ अनन्य उतावला हो बैठा. वह उस के बारे में सब कुछ जान लेना चाहता था.

‘‘5 वर्ष पहले की बात है. अवनि का विवाह एक बड़े संपन्न परिवार में तय हुआ था. गोदभराई की रस्म के बाद जब वर पक्ष के लोग वापस लौट रहे थे तो उन की कार को सामने से आते ट्रक ने टक्कर मार दी. उस दुर्घटना में भावी वर और उस के पिता दोनों की मौत हो गई.’’

‘‘ओह, कितना अप्रत्याशित रहा होगा यह सब?’’

‘‘अप्रत्याशित? यह कहो कि बिजली गिरी थी अवनि और उस के परिवार पर. अवनि तो पत्थर हो गई थी यह सब देख कर. उस के मातापिता सांत्वना देने गए थे पर वर पक्ष ने उन का मुंह भी देखना पसंद नहीं किया, बैठने के लिए पूछना तो दूर की बात है,’’ सुजाता ने बताया.

‘‘कितना संताप झेलना पड़ा होगा बेचारी को,’’ अनन्य बुझे स्वर में बोला.

‘‘2-3 वर्ष इलाज करवाया गया अवनि का तब कहीं जा कर वह सामान्य हुई. अब भी छोटी सी बात से डर जाती है. जैसे तुम उस के पीछे चल रहे थे पर उस को लगा कि तुम उस का पीछा कर रहे थे. कोई जोर से बोल दे या रात के सन्नाटे के उभरते स्वर, सब से वह छोटी बच्ची की तरह डर जाती है.’’

‘‘मातापिता ने फिर से विवाह की कोशिश नहीं की?’’

‘‘की थी, पर उस के अपशकुनी होने की बात कुछ ऐसी फैल गई थी कि कोई तैयार ही नहीं होता था. मातापिता ने उसे बहुत प्रोत्साहित किया, ढाढ़स बंधाया तब कहीं जा कर फिर से उस ने पढ़ाई प्रारंभ की. अर्थशास्त्र में एमफिल करते ही यहां महिला कालेज में व्याख्याता बन गई. मुश्किल से 6 माह हुए हैं यहां आए. कालेज के छात्रावास में ही रहती है. कहीं खास आनाजाना भी नहीं है. कभी बहुत आग्रह करने पर हमारे यहां चली आती है.’’

‘‘कितने दुख की बात है. जीवन ने उस के साथ बड़ा क्रूर उपहास किया है,’’ अनन्य को उस से हमदर्दी हो आई थी.

‘‘जीवन से अधिक क्रूर मजाक तो उस के अपनों ने किया है. 2 बड़े भाई हैं, एक बड़ी बहन है. तीनों अपनी गृहस्थी में इतने मगन हैं कि छोटी बहन के संबंध में सोचते तक नहीं. मेरी बूआ यानी अवनि की मां बिलकुल अकेली पड़ गई हैं. एक ओर बीमार पति की तीमारदारी तो दूसरी ओर अवनि की समस्या. उन का हाल पूछने वाला तो कोई है ही नहीं,’’ सुजाता का गला भर आया. आंखें भीग गईं.

‘‘जो हुआ, बहुत दुखद था, पर दीदी, इस का अर्थ यह तो नहीं कि पूरा जीवन एक दुर्घटना की भेंट चढ़ा दिया जाए,’’ अनन्य को अपनी बात कहने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे.

‘‘तुम सही कह रहे हो अनन्य, पर यह सब उसे बताएगा कौन? अभी तक तो सब ने उस के घावों पर नमक छिड़कने का ही काम किया है.

एक दिन अचानक वह मुझ से मिलने चली आई. बातों ही बातों में पता चला कि तैयार हो कर कालेज के लिए निकली तो कुछ छात्राएं उस के सामने पड़ गईं.

अवनि को देखते ही वे आपस में ऊंचे स्वर में बातें करने लगीं कि आज सवेरेसवेरे अवनि मैडम का मुंह देख लिया है, पता नहीं दिन कैसा गुजरेगा. यह बताते हुए वह रो पड़ी,’’ सुजाता ने बताया.

‘‘इस तरह कमजोर पड़ने से काम कैसे चलेगा. उन छात्राओं को तभी इतनी खरीखोटी सुनानी चाहिए थी कि फिर से ऐसी बेहूदा बात कहने का साहस न कर पाएं,’’ अनन्य क्रोध से भर उठा.

‘‘कहना बहुत सरल होता है, अपनी ही बात ले लो. कुछ ही देर पहले तुम अवनि के व्यक्तित्व से पूर्णतया अभिभूत लग रहे थे. पर मुझे नहीं लगता कि यह सब कुछ जानने के बाद भी तुम्हारे मन में उस के प्रति वही भावनाएं होंगी?’’ सुजाता व्यंग्यपूर्ण स्वर में बोली.

‘‘आप के इस प्रश्न का उत्तर अभी तो मेरे पास नहीं है. सबकुछ जाननेसमझने के लिए समय तो चाहिए न दीदी,’’ अनन्य के हर शब्द में गहराई थी, अवनि के प्रति सहानुभूति थी.

सुजाता बस मुसकरा कर रह गई थी. अनन्य के जाने के बाद सुजाता सोच में डूब गई.

उस के मन में विचारों का तेजी से मंथन चल रहा था. कभी वह अनन्य के बारे में सोचती तो कभी अवनि के बारे में.

‘‘कब तक यों ही बैठी रहोगी? ढेरों काम पड़े हैं,’’ तभी ध्रुव ने उस की तंद्रा भंग की.

‘‘क्या करूं, फिर वही कहानी दोहराई जा रही है. पता नहीं अवनि को कोई सहारा देने का साहस जुटा पाएगा या नहीं?’’ निराश स्वर में बोल सुजाता उठ खड़ी हुई.

‘‘इस चिंता में घुलना छोड़ दो सुजाता. अवनि पढ़ीलिखी है, समझदार है, आत्मनिर्भर है. धीरेधीरे अपने बलबूते जीना सीख जाएगी,’’ ध्रुव ने समझाना चाहा था.

कुछ माह भी नहीं बीते थे कि एक दिन अचानक ही शुभदा मौसी का फोन आ गया. इधरउधर की बात करने के बाद वे बोलीं, ‘‘क्या कहूं सुजाता, मन रोने को हो रहा है. पर सोचा पहले तुम से बात कर लूं. शायद तुम्हीं कोई राह सुझा सको.’’

‘‘क्या हुआ, मौसी? सब खैरियत तो है?’’ सुजाता बोली.

‘‘मेरी कुशलता की इतनी चिंता कब से होने लगी तुम्हें? काश, तुम ने मुझे समय से सचेत कर दिया होता.’’

‘‘क्या कह रही हो मौसी? मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा,’’ सुजाता परेशान हो उठी.

‘‘मैं उस मुई अवनि की बात कर रही हूं. पता नहीं कब से प्रेमलीला चल रही है दोनों की. अब अनन्य जिद ठाने बैठा है कि विवाह करेगा तो अवनि से ही, नहीं तो कुंआरा रहेगा.’’

‘‘मेरा विश्वास करो मौसी. मुझे तो इस संबंध में कुछ भी पता नहीं है.’’

‘‘पर अनन्य तो कह रहा था कि वह अवनि से पहली बार चिरायु के जन्मदिन पर ही मिला था.’’

‘‘उस समारोह में तो बहुत से लोग आमंत्रित थे. कहां क्या चल रहा था, मैं कैसे बता सकती हूं.’’

‘‘ठीक है, मान ली तुम्हारी बात. पर अब तो कुछ करो, सुजाता. मेरा तो एक ही बेटा है. उसे कुछ हो गया तो मैं बरबाद हो जाऊंगी,’’ शुभदा फोन पर ही रो पड़ीं.

‘‘ऐसा मत बोलो मौसी, ऐसा कुछ नहीं होगा. क्या पता इस में भी कोई अच्छाई ही हो,’’ सुजाता ने उन्हें ढाढ़स बंधाया.

‘‘इस में क्या अच्छाई होगी. मेरी तो सारी उमंगों पर पानी फिर गया. इस से तो अनन्य कुंआरा ही रह जाता तो मैं संतोष कर लेती. सुजाता, वादा कर कि तू अनन्य को समझा लेगी.’’

‘‘ठीक है, मैं प्रयत्न करूंगी मौसी. पर कोई वादा नहीं करती. तुम तो जानती ही हो, आजकल कौन किस की सुनता है. जब अनन्य तुम्हारी बात नहीं मान रहा तो मेरी क्या मानेगा,’’ सुजाता ने अपनी विवशता जताई थी.

‘‘प्रयत्न करने में क्या बुराई है? तुझे तो बहुत मान देता है. शायद मान जाए. अपनी मौसी के लिए तू इतना भी नहीं करेगी?’’ शुभदा ने जोर डालते हुए कहा था.

‘‘क्यों शर्मिंदा करती हो, मौसी. मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करूंगी.’’

सुजाता ने शुभदा को आश्वस्त तो कर दिया पर अति व्यस्तता के कारण अगले 2 महीने तक अवनि और अनन्य से मिलने तक का समय नहीं निकाल पाई. पर एक दिन अचानक शुभदा मौसी को आया देख उस के आश्चर्य की सीमा न रही.

‘‘आओ मौसी, तुम्हारा फोन आने के बाद व्यस्तता के कारण अनन्य से मिलने का समय ही नहीं निकाल पाई. मैं आज ही अनन्य से मिलने की कोशिश करूंगी,’’ सुजाता मौसी को अचानक आया देख वह अचकचा कर बोली.

‘‘अब उस की कोई आवश्यकता नहीं, बेटी. मैं तो उन दोनों के विवाह का निमंत्रण देने आई हूं. अनन्य को बहुत समझायाबुझाया, लेकिन वह माना ही नहीं. पता नहीं उस जादूगरनी ने क्या जादू कर दिया. बेटे की जिद के आगे झुकना ही पड़ा,’’ शुभदा मौसी भरे गले से बोलीं और निमंत्रणपत्र दे कर उलटे पांव लौट गईं.  बहुत प्रयत्न करने पर भी उन्हें रोक नहीं पाई सुजाता. शायद वे अनन्य और अवनि के विवाह के लिए सुजाता को भी दोषी मान रही थीं.

शुभदा मौसी तो निमंत्रणपत्र दे कर चली गईं पर सुजाता के मन में बेचैनी हो रही थी कि आखिर अनन्य क्यों अवनि के बारे में सबकुछ जानने के बाद विवाह के लिए राजी हो गया और अवनि कैसे अपनी पुरानी यादों को भूल कर विवाह के लिए तैयार हो गई? सुजाता ने अनन्य और अवनि से बात की तो दोनों ने ही कहा, ‘‘दीदी, हम दोनों ने एकदूसरे को अच्छी तरह समझ लिया है. साथ ही हम यह भी समझ गए हैं कि शकुनअपशकुन कुछ नहीं होता. जीवनसाथी अगर अच्छा हो तो जिंदगी अच्छी गुजरती है. अत: एकदूसरे को समझने के बाद ही हम ने शादी का फैसला लिया है.

सुजाता ने अपने में कई ताजगी का अनुभव किया.

अनन्य और अवनि का विवाह बड़ी धूमधाम से संपन्न हुआ था. य-पि शुभदा मौसी किसी अशुभ की आशंका से सोते हुए भी चौंक जाती थीं.

अनन्य और अवनि के विवाह को अब 5 वर्ष का समय बीत चुका है. 2 नन्हेमुन्नों के साथ दोनों अपनी गृहस्थी में कुछ ऐसे रमे हैं कि दीनदुनिया का होश ही नहीं है उन्हें. पर शुभदा मौसी हर परिचित को यह समझाना नहीं भूलतीं कि शकुनअपशकुन कुछ नहीं होता. यह तो केवल पंडों का फैलाया वहम है.

5 टिप्स : मानसून में इंटिमेट हाइजीन को बनाए रखना है जरुरी 

 मानसून के साथ-साथ इंटिमेट हाइजीन की समस्या भी बढ़ने लगती है, क्योंकि इस समय वातावरण में नमी की मात्रा अधिक होती है. इसके अलावा कोरोना काल में खुद को साफ़ रखना, इन्फेक्शन से बचना और सेनीटाइज करना भी एक चुनौती है. इस समय यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की समस्या, महिलाओं में अधिक हो जाती है, ऐसे में इंटिमेट हाइजीन जरुरी हो जाता है. कोई भी ऐसा काम इस समय न करें, ताकि इन्फेक्शन का खतरा बढे. गर्मी और पसीने से बचने की जरुरत ऐसे मौसम में ख़ास होती है, क्योंकि इससे बेक्टेरिया के पनपने से वेजाइनल इन्फेक्शन बढ़ जाता है. मिलेनियम हर्बल केयर के एक्सपर्ट वासवदत्ता गाँधी कहती है कि कुछ ख़ास टिप्स निम्न है ,जिससे आप इंटिमेट हाइजीन को मानसून में भी कायम रख सकती है.

1. हमेशा इंटिमेट पार्ट को रखें ड्राई 

लगातार बारिश होते रहने की वजह से कपड़ों को अच्छी तरह सूखाना एक समस्या है, ऐसे में जो भी इनरवेयर पहने, वे अच्छी तरह से ड्राई हो, इसका ख्याल रखें, क्योंकि इस मौसम में अधिक पसीना आता है, ऐसे में इनरवियर के फैब्रिक ब्रीदेबल होनी चाहिए. सिंथेटिक फैब्रिक नमी को बाहर निकलने से रोकती है, जिससे इरीटेशन और फ्रिक्शन होता है, जो त्वचा के लिए भी ठीक नहीं. इसलिए ऐसे इनरवेयर या लौन्जरी को थोड़े समय के लिए ही पहने. इसके अलावा अगर आप बारिश में भींग चुकी है, तो घर आने पर तुरंत नहा लें और खुद को अच्छी तरह से सुखा लें.

2. टाइट कपड़े पहनने से बचें 

इस मौसम में स्किनी जींस और टाइट शॉर्ट्स को पहनना अवॉयड करें, इससे पसीने अधिक होते है और एयर फ्लो शरीर में ठीक से नहीं हो पाता, जिससे त्वचा में जलन और घर्षण होने लगता है. आरामदायक और ढीले कपडे इस मौसम में पहने. सोते समय भी आरामदायक हल्के शॉर्ट्स पहने ताकि एयर फ्लो सही तरीके से हो सकें, जिससे जलन और घर्षण कम से कम हो.

3. साफ़-सफाई और हाइजीन को रखे बरक़रार 

समय समय पर इंटिमेट पार्ट को साफ़ रखने से बेक्टेरिया इन्फेक्शन और दुर्गन्ध से आप मुक्त रह सकती है. सुबह नहाते समय और रात को सोते समय इंटिमेट पार्ट की सफाई हमेशा करें. अगर आपको अधिक पसीना आता है, तो आपको  साफ़ सफाई पर भी अधिक  ध्यान देने की जरुरत है. कई अच्छे और हर्बल उत्पाद बाज़ार में मिलते है, जिसका प्रयोग आप हाइजीन को बनाये रखने के लिए कर सकती है. 

4. खुद को रखें हाइड्रेटेड 

अधिक मात्रा में पानी और फ्रूट जूस पियें, ताकि यूरिन सही मात्रा में हो और यूरिनरी ट्रैक साफ़ और हेल्दी रहे. पानी शरीर के टोक्सिन को बाहर निकालती है और बॉडी की पीएच वैल्यू को संतुलित रखती है. इस मौसम में गर्मी और नमी की वजह से पसीना अधिक आता है. इससे शरीर की बॉडी फ्लूइड कम हो जाती है, जिससे युरिनेट के समय जलन का अनुभव होता है, जो कई बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का रूप ले लेती है. 

5. हेल्दी फ़ूड हैबिट को करें मेंटेन 

अधिक स्पाइसी फ़ूड खाने से परहेज करें, एसिडिक फ़ूड पीएच के संतुलन को बिगाडती है, जिससे इंटिमेट एरिया से गन्दी बदबू आने लगती है. प्री और प्रोबायोटिक युक्त भोजन अधिक लें, जिसमें प्लेन दही, प्याज, लहसुन, स्ट्राबेरी, और हरी पत्तेदार सब्जियां जो वेजाइना में हेल्दी बेक्टेरिया को पनपने में मदद करें और आपका इंटिमेट हेल्थ अच्छा रहे.  

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बारिश में जा रही हैं घूमने, तो पढ़ें ये खबर

तपती गर्मी के बाद बारिश की पहली बौछार से किसी को भी प्‍यार हो सकता है. भीषण गर्मी के बाद जब मानसून की पहली फुहार पड़ती है, तो पेड़ पौधों, जीवजंतुओं से ले कर मनुष्यों तक सभी खुश हो जाते हैं.

हालांकि मानसून की बौछार का मजा ही अलग होता है. इस मौसम में चाय-पकौड़े खाना, भीगना और दोस्तों के साथ घूमना हर किसी को पसंद होता है. यह कहना गलत नहीं होगा की बारिश का मौसम एक ऐसा मौसम है जब प्रकृति का असल रूप और सुंदरता देखने को मिलती है. बारिश में घूमना रूमानी और उत्‍साहित करने वाला एहसास है.

बारिश में रुमानियत तो है साथ ही मस्‍ती से जुड़ी कुछ परेशानी भी. बारिश में घूमने से पहले कुछ तैयारियां करनी पड़ती है. इसलिए आज हम आपको कुछ टिप्‍स बता रहे हैं जिन्हें ध्यान में रख कर लें मानसून में घूमने का मजा.

छाता और बरसाती के बिना बाहर नहीं निकलें

बारिश के मौसम में कभी भी मेघा रानी बरस सकती हैं इसलिए अगर आप कहीं घूमने जा रही हैं या जाने की सोच भी रही हैं तो अपने साथ छाता, रेनकोट जरूर रखें. मानसून ट्रिप पर जाने से पहले एक वाटरप्रूफ बैग खरीदें, जिसमें बेफीक्री से अपना रख सकती हैं और घूम सकती हैं.

जिप लौक बैग रखें साथ

सामान पैक करते समय अपने बैग में जिप लौक बैग जरूर रखें. इस जिप लौक बैग में आप अपना पर्स, मोबाइल फोन, कोमरा, लेंस आदी चीजें रख सकती हैं. इस बैग के अंदर आपकी सभी चीजें सुरक्षित रहेंगी.

मच्छरों से निजात

मानसून विभिन्न बीमारियों, संक्रमण, मौसमी सर्दी और फ्लू का भी मौसम है. और मानसून में बेपरवाही के कारण बीमारियां भी जल्‍द घर बनाने लगती है. बीमारियों से बचने के लिए मच्छर भगाने वाली क्रीम, क्वायल, पाउडर सब साथ ले कर चलें.

सिंथेटिक कपड़े ही पहनें

सिंथेटिक कपड़े आसानी से सूख जाते हैं और प्रेस किए बिना भी पहने जा सकते हैं. इसलिए मानसून में सफर पर जाते समय ज्‍यादा से ज्‍यादा ऐसे कपड़े ही पैक करें.

चप्पल और जूते

बरसात के मौसम में फिसलने का डर रहता है इसलिए ऐसे फुटवियर रखें जो फिसलने से बचाये. लेदर के जूते चप्‍पलों की बजाय रबड़ और कैनवस के बने फुटवियर लेकर चलें.

खाना और पानी का रखें खास ख्याल

स्ट्रीट फूड को विशेष तौर पर अवाइड करें. इससे गैस, अपच और डिहाइड्रेशन जैसी प्राब्‍लम्‍स हो सकती हैं. ज्यादा औयली खाना खाने से भी बचें. ठंडे और लिक्‍वेड फूड जूस, तरबूज खाना प्रेफर करें. पानी भी सोच समझ कर पिएं. ढाबा, होयल का खूला पानी पीने की जगह बौटल का पानी पिएं.

फर्स्ट एड बाक्स

इस मौसम में पेट और स्‍किन की प्राब्‍लम्‍स बहुत होती हैं, साथ ही भीगने से सर्दी जुकाम और बुखार भी होने का खतरा रहता है. ऐसे में जरूरी है कि कि आप सामान के साथ कुछ एंटी सेप्‍टिक क्रीम और जरूरी दवा साथ रख लें.

मौसम रिपोर्ट की जानकारी

अगर आप कहीं दूर घूमने जा रही हैं तो अपने डेस्‍टिनेशन पर पहुंच कर घूमने निकलने के पहले मौसम की जानकारी ले लें. इसके लिए वेदर रिपोर्टस और भविष्‍यवाणियों के बारे में पता रखें.

एडवांस टिकेट और प्लानिंग

इस मौसम में ट्रेन और दूसरे यात्रा के साधनों में काफी भीड़ भाड़ होती है. इसलिए एडवांस प्‍लानिंग के साथ एडवांस में टिकट भी बुक करा लें. बाकी कहां ठहरेंगे और कहां कहां जाना है इसकी भी व्‍यवस्‍था पहले ही कर लें.

फोन रखें चार्ज

बारिश के मौसम में लाइट कटने की समस्या भी आम है इसलिए अपना फोन हमेशा चार्ज रखें, टार्च ले कर चलें. पावर बैंक साथ ले कर चलना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

बारिश के मौसम का आनंद घर के चार दीवारी में बंद हो खिड़की के पास खड़े होकर बारिश के बूंदो को देखकर नहीं लिया जा सकता. बारिश का असल आनंद तो खुले आसमान के नीचे भीग कर ही है. बेशक बारिश के मौसम में भीगे और घूमें भी लेकिन हमारे दिए गए टिप्स को जरूर फौलो करें.

प्रेम विवाह: भाग 2- अभिजित ने क्यों लिया तलाक का फैसला?

शादी के बाद हनीमून मना कर वे घर में दाखिल हुए तो कैथरीन की सास जानकी ने उस से कहा, ‘देखो कैथरीन, अब तुम इस घर की बहू हो. पर एक बात मैं तुम्हें साफसाफ बता देना चाहती हूं. मेरी रसोई में प्रवेश न करना. मेरी सास छुआछूत बहुत मानती हैं और किसी का छुआ नहीं खातीं.’

‘जी,’ कैथरीन बोली. पर उस का सर्वांग सुलग उठा.

‘एक बात और सवेरे जब उठो तो अपनी नाइटी बदल कर सलवारकमीज या साड़ी पहन कर बाहर आना. घर के बड़ेबूढ़ों का थोड़ाबहुत लिहाज तो करना ही पड़ेगा.’

‘जी,’ कैथरीन बोली.

उस ने मन ही मन अपने दांत पीसे. घर में घुसते ही इतनी हिदायतें, बंदिशें. घर भी क्या था एक खंडहर. बदरंग दीवारें, जगहजगह से प्लास्टर उखड़ा हुआ. दड़बे जैसे कमरे. उसे और अभि को सब से अच्छा कमरा दिया गया था. कमरा क्या एक कोठरी थी.

एक बात उसे बहुत अखरती थी. देर रात तक घर के लोग जागते रहते थे. अभि के पिता दमे के मरीज थे और निरंतर खांसते रहते थे. सवेरे 5 बजे सास उठ जातीं और किचन में खटरपटर करने लगतीं.

अभि कैथरीन को अपनी बांहों में लेता तो वह उसे परे धकेलती, ‘रुको, अभि, घर में सब जाग रहे हैं.’

‘तो क्या हुआ, हम पतिपत्नी हैं और अपने कमरे में बंद हैं. हमें किसी से क्या लेना?’

‘नहीं, मुझे शर्म आती है.’

‘ओहो, यह क्या गंवारों जैसी बातें कर रही हो. कम औन यार, वक्त जाया न करो. मेरी बांहों में आओ. आज रविवार है,’ अभि ने कहा.

‘तो?’

‘आज का दिन तुम्हारे नाम. हम पूरा दिन साथ बिताएंगे. पहले एक बढि़या से रेस्तरां में तुम्हें खाना खिलाएंगे. उस के बाद पिक्चर देखेंगे और शाम को पार्क में टहल कर घर लौटेंगे.’

कैथरीन उस से लिपट गई, ‘ओह अभि, तुम कितने अच्छे हो.’

पार्क में बैठेबैठे उस ने अभि के कंधे पर सिर रख दिया.

‘अभि, आज का दिन कितना अच्छा गुजरा. काश हमें एकांत खोजने के लिए घर से बाहर न आना होता. क्यों अभि, क्या हम अलग मकान में शिफ्ट नहीं कर सकते? छोटा सा 1 बैडरूम वाला, किराए का ही सही.’

‘यह कैसे संभव है डार्लिंग? 2 घर चलाना मेरे लिए मुमकिन नहीं और मैं एकएक पैसा अपनी बहनों की शादी के लिए जोड़ रहा हूं. किराए के घर के लिए भी डिपौजिट की जरूरत पड़ती है. वह कहां से लाएंगे?’

‘ओह,’ कैथरीन ने एक ठंडी सांस भरी, ‘तो सारा खेल पैसों का है.’

अगर उस का बस चलता तो वह अभि के परिवार को घर से चलता कर देती. घर मकान मालिक को लौटा कर बदले में एकमुश्त पैसे ले कर एक अलग घर बसाती, जहां वह और अभि आनंद से रहते. पर यह सब एक आकाश कुसुम जैसा था.

‘तो कम से कम मुझे ही कोई नौकरी कर लेने दो,’ उस ने कहा, ‘घर पर तो अम्मां मुझे किसी काम को हाथ लगाने नहीं देतीं और मैं दिन भर बैठी बोर होती रहती हूं.’

‘तुम नौकरी करोगी?’

‘हां, इस में हरज ही क्या है. मैं ग्रैजुएट हूं और मैं ने सैके्रेटरी का कोर्स भी किया हुआ है. उस रोज मेरी सहेली शीला मिली थी. वह बता रही थी कि वरली में एक प्राइवेट कंपनी में रिसेप्शनिस्ट की पोस्ट खाली है. वेतन भी ठीक है और काम भी हलका है. क्या कहते हो?’

‘ठीक है. तुम्हें जंचे तो कर लो.’

कैथरीन अपनी नई नौकरी पर गई तो उसे बहुत अच्छा लगा. उस के सहकर्मी बड़े मिलनसार थे. पर अपने बौस चौधरी को ले कर वह तनिक उलझन में पड़ गई. उस के बौस जरा रंगीन मिजाज के थे. उन की आदत थी कि दफ्तर में घुसते ही स्टाफ की लड़कियों को छेड़ते, उन से चुहल करते. सब से हायहैलो करते. वे कैथरीन की मेज पर रुकते, उस से थोड़ी देर बतियाते, फिर अपने कैबिन में दाखिल होते.

‘इस रोमियो से जरा बच कर रहना,’ उसे उस के सहकर्मियों ने आगाह किया, ‘यह सब लड़कियों से फ्लर्ट करता है, उन के करीब आने की कोशिश करता है. इस से दूरी बनाए रखना.’

एक दिन चौधरी ने उसे बुलाया,

‘मिस कैथरीन, मुझे मालूम हुआ है कि तुम ने सैके्रटरी का कोर्स किया हुआ है. मेरी स्टैनो छुट्टी पर गई हुई है. अगर कुछ दिन तुम उस का काम भी संभाल लो तो मैं तुम्हारा आभारी होऊंगा.’

भला वह कैसे इनकार कर सकती थी. जबतब उस का इंटरकौम बज उठता, ‘कैथरीन, मेरे कैबिन में आना. एक लैटर डिक्टेट करना है.’

एक बार तो वह लिफ्ट से नीचे जा रही थी कि चौधरी भी लिफ्ट में आ गया.

‘तुम घर ही जा रही हो न. कहो तो मैं तुम्हें ड्रौप कर दूं.’

‘नहीं सर, मैं चली जाऊंगी.’

लेकिन चौधरी ने उस की एक न सुनी.

यहां तक तो ठीक था पर एक दिन लिफ्ट में उसे अकेली पा कर चौधरी ने उसे चूम लिया. वह हड़बड़ा गई.

‘सौरी डियर, तुम जब मुसकराती हो तो तुम्हारे गालों में जो गड्ढे पड़ते हैं वे इतने प्यारे लगते हैं कि मैं खुद को रोक न सका,’ चौधरी ने सफाई दी.

वह कैंटीन में बैठी घर से लाया हुआ सैंडविच खा रही थी कि उस के सहकर्मियों ने प्रवेश किया.

‘हैलो कैथरीन, कैसा चल रहा है?’

‘ठीक है.’

‘क्या बात है, तुम कुछ परेशान सी लग रही हो?’ शुक्ला ने कहा, ‘लगता है अपने दिलफेंक आशिक ने कोई गुस्ताखी की है.’

कैथरीन की आंखों में आंसू छलक आए.

‘मैं यह नौकरी छोड़ दूंगी,’ वह बोली.

‘तुम क्यों नौकरी छोड़ोगी? नौकरी तो उसे छोड़नी होगी.’

‘हां, हम सब उस के बरताव से तंग आ गए हैं,’ बनर्जी ने कहा, ‘हम उसे ऐसा सबक सिखाना चाहते हैं कि वह दोबारा कभी लड़कियों को छेड़ने की हिम्मत नहीं करेगा.’

‘हम ने एक प्लान बनाया है,’ गोडबोले ने कहा, ‘तुम साथ दो तो ही इसे अंजाम दिया जा सकता है.’

‘क्या मतलब?’

उन्होंने उसे बताया.

वह सोच में पड़ गई.

‘ओह, मुझे नहीं लगता कि मैं यह सब कर पाऊंगी,’ वह बोली.

‘सोच लो. हम तुम्हें इस काम के लिए 2 लाख रुपए देंगे.’

‘2 लाख?’ वह चकित हुई.

‘हां, हम ने ये रुपए चंदा मांग कर इकट्ठे किए हैं. हम किसी भी कीमत पर चौधरी को यहां से भगाना चाहते हैं. उस ने मेरी बहन का जीवन बरबाद कर दिया. वह इस की चिकनीचुपड़ी बातों में आ गई और इसे दिल दे बैठी. वह सोचती थी कि यह अपनी पत्नी को तलाक दे कर उस से शादी कर लेगा. पर इस ने उसे धोखा दिया. मेरी बहन अपना मानसिक संतुलन खो बैठी है.’

‘लेकिन इस काम में बड़ा जोखिम है,’ उस ने आपत्ति की.

‘बिलकुल नहीं. बात हम चारों के बीच रहेगी. किसी और को कानोंकान खबर भी न होगी, सोच लो. 5 मिनट के काम के लिए 2 लाख मिल रहे हैं.’

वह उधेड़बुन में पड़ी रही. बड़ी विषम परिस्थिति थी. पैसा उस की कमजोरी था. इतने सारे पैसे हाथ आ गए तो उस की सारी मुश्किलें दूर हो जाएंगी. वह और अभि एक अलग मकान किराए पर ले लेंगे और जिंदगी का भरपूर आनंद उठाएंगे. काफी सोचविचार के बाद उस ने निश्चय कर लिया.

हमेशा की तरह चौधरी ने उसे बुलाया. वह शौर्टहैंड की नोटबुक ले कर गई. फिर चौधरी ने साथ कौफी पीने की फरमाइश की. वह उसे कौफी का प्याला थमा रही थी कि प्याला छलक गया और गरमगरम कौफी उस के हाथों पर गिर गई. प्याला उस के हाथ से छूट कर छन्न से जमीन पर जा गिरा. उस के मुंह से चीख निकली.

‘अरे, जरा सी कौफी ही तो गिरी है. इस में इतना परेशान होने की क्या बात है?’ चौधरी ने कहा.

पर उस पर तो जैसे पागलपन सवार हो गया था. वह फिर जोर से चीखी.

‘क्या हुआ, हाथ जल गया क्या? देखूं तो,’ चौधरी ने उस का हाथ थामा.

उस ने उस का हाथ झटक दिया, ‘मुझे हाथ मत लगाना. मुझ से दूर रहो बदमाश कहीं के.’

चौधरी हक्काबक्का रह गया.

‘यह क्या बक रही हो? तुम होश में तो हो?’

तभी अचानक कैबिन का द्वार खुला और 4 लोग अंदर घुस आए.

‘क्या बात है? यह हंगामा कैसा है?’

कैथरीन उन लोगों को देख कर रोते हुए बोली, ‘इस आदमी ने मुझे रेप करने की कोशिश की.’

चौधरी का चेहरा पीला पड़ गया.

‘यह झूठ है. मैं ने इसे हाथ भी नहीं लगाया.’

‘इस ने मुझ से हाथापाई की. मुझे अपनी बांहों में लेना चाहा. मेरे कपड़े फाड़ दिए.’

‘झूठ, सरासर झूठ,’ चौधरी ने सिर हिलाया.

कैथरीन फूटफूट कर रोने लगी.

कैबिन में भीड़ इकट्ठा हो गई थी. कुछ के हाथों में कैमरे थे. वे धड़ाधड़ तसवीरें ले रहे थे. दरअसल, वे टीवी और अखबार वाले थे.

‘हम ने पुलिस को खबर कर दी है,’ किसी ने कहा.

‘नहीं, पुलिस मत बुलाओ,’ चौधरी गिड़गिड़ा रहा था, ‘आप लोग जानते हैं कि यह इलजाम सरासर झूठा है. आप जो चाहें मैं करने के लिए तैयार हूं. मैं इज्जतदार आदमी हूं.’

कैथरीन जब घर पहुंची तो घर के लोग टीवी के इर्दगिर्द बैठे थे. अभि का चेहरा उतरा हुआ था.

 

TRP लिस्ट में गिरे ये टीवी सीरियल, जल्द ही कटेगा ‘बेकाबू’ समेत इन शोज का पत्ता

दर्शक ही टीवी सीरियल को हिट कराते है वहीं नपसंद भी करते है. मनोरंजन के लिए शो के मेकर्स कई प्रयास करते रहते है. फिर भी कई टीवी सीरियल नहीं चल रहे है. टीआरपी गिरते ही कई टीवी सीरियल बंद हो चुके हैं. दरअसल, छोटे पर्दे के ये टीवी सीरियल जल्द ही बंद होने वाले है. टीवी और ओटीटी के कुछ शोज ऐसे हैं जिनका पत्ता जल्द ही कटने वाला है. इस लिस्ट में टीवी एक्ट्रेस दिशा परमार के ‘बड़े अच्छे लगते हैं 3’ के साथ-साथ टीना दत्ता का ‘हम रहें न रहे हम’ तक शामिल है.

जल्द ही कटेगा ‘बेकाबू’ समेत इन शोज का पत्ता

टीवी चैनल पर जब नए सीरियल आते है तो मेकर्स पुराने शोज बंद कर देते है. वैसे ही टीवी के वो सीरियल भी शामिल हैं जो 4 महीने पहले ही शुरू हुए थे, लेकिन छोटे पर्दे पर फुस्स साबित हुए. इस लिस्ट में टीना दत्ता के ‘हम’ से लेकर दिशा परमार का ‘बड़े अच्छे लगते हैं 3’ तक शामिल है. तो चलिए एक नजर डालते हैं उन टीवी सीरियल पर-

‘बेकाबू’ सीरियल जल्द ही बंद होगा

शालीन भनोट और ईशा सिंह स्टारर ‘बेकाबू’ पर ताला लगने वाला है. बेकाबू का आखिरी एपिसोड शालीन भनोट और ईशा सिंह ने शूट भी कर लिया है, जिसका वीडियो खूब वायरल हुआ था.

‘बड़े अच्छे लगते हैं 3’

इस लिस्ट में शामिल दिशा परमार और नकुल मेहता स्टारर ‘बड़े अच्छे लगते हैं 3’ को लेकर खबर आई है कि शो पर जल्द ही ताला लग सकता है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नही हुई.

‘हम रहें न रहे हम’

टीना दत्ता और जय भानुशाली का ‘हम रहे न रहे हम’ जल्द ही बंद हो सकता है. दावा किया जा रहा है, इसकी जगह सुंबुल तौकीर खान का नया शो ‘काव्या’ शुरू हो सकता है.

‘मैत्री’ और ‘फालतू’ जल्द होगा बंद

जीटीवी चैनल का ‘मैत्री’ को कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाया गया था. लेकिन अब मेकर्स ने इसे पूरी तरह से बंद करने का प्लान बना लिया है. बता दें कि शो टीआरपी लिस्ट में कुछ खास नहीं कर रहा था. वहीं निहारिका चौकसे और आकाश आहूजा स्टारर ‘फालतू’ को लेकर कहा जा रहा है कि शो जल्द ही बंद हो सकता है. इसके जगह ‘बातें कुछ अनकही सी’ शुरु हो सकता है.

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