Monsoon Hair care Tips: सिर की खुजली से छुटकारा दिलाएंगे ये 5 होममेड हेयर मास्क

मौनसून का मौसम चल रहा है जहां बारिश की फुहारों की ठंडक ने गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन इस मौसम बालों की कई समास्याएं उत्पन्न हो जाती है. दरअसल, मौनसून के मौसम में बालों में खुजली की समास्या अधिक पैदा हो जाती है. ऐसे में हम सभी बहुत परेशान हो जाते है. मौनसून के मौसम में अधिक उमस होने से बालों और स्कैल्प में नमी होने से सिर में खुजली होती है. सिर में खुजली होना आम समास्या है, यह समस्या कई बार शर्मिन्दगी की वजह भी बनती है. सिर में खुजली होना दुखदायी हो सकता है, खासकर जब आप कोई महत्वपूर्ण काम कर रहे हों, तो यह आपको ध्यान केंद्रित नहीं करने देती है. वैसे तो बाजार में कई प्रोडक्ट मौजूद है, लेकिन हम आपको घर में बने कुछ नेचुरल हेयर मास्क के बारे में बताएंगे…

  1. सरसो तेल और दही का हेयर मास्क

सबसे पहले एक कटोरी में आधा कप दही और इसमे दो बड़े चम्मच सरसो का तेल मिक्स करें. इसके बाद इसमें कुछ बूंदे टी ट्री हेयर ऑयल की मिक्स करें. शैम्पू करने के बाद इस हेयर मास्क को लगाकर 20 से 25 मिनट तक रहने दें. इसके बाद स्कैल्प की अच्छे से मसाज करते हुए गुनगुने पानी से सिर धो लें. दही में मौजूद प्रोटीन और लैक्टिक एसिड स्कैल्प के स्किन सेल्स को क्लीन करके बालों को घना करने में मदद करेगा. यह हेयर मास्क डेंड्रफ, खुजली और फंगल इंफेक्शन खत्म करने के साथ बालों को मजबूती भी देगा.

2. मेथी दाना मास्क

मेथी दाना में कई ऐसे गुण या तत्व हैं जो न सिर्फ सेहत बल्कि बालों के लिए भी फायदेमंद होते हैं. मेथी दाना का मास्क बनाने के लिए सबसे पहले मेथी दाने को पूरी रातभर पानी में भिगो दें. अगले दिन गुड़हल की पत्तियों का पेस्ट बनाएं और इसे मेथी दाना के पेस्ट में मिलाएं. हेयर मास्क को स्कैल्प में लगाएं और आधे घंटे बाद वॉश कर लें. ये सिर की खुजली को दूर करने में काम आएगा.

3.नीम और नारियल तेल का मास्क

मौनसून के सीजन में सिर की खुजली से छुटकारा पाने के लिए नीम और नारियल तेल का मास्क बेहद लाभकारी है. इसमें मौजूद एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो आपके सिर की खुजली को शांत करने में मदद करता. इसके लिए सबसे पहले नारियल तेल और नीम की पत्तियों को धीमी आंच पर गर्म करें. मिश्रण को ठंडा होने दें और फिर इसमें नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाएं. इस मास्क को अपने स्कैल्प और बालों पर लगाएं, 30 मिनट या रात भर के लिए छोड़ दें. बाद में शैम्पू से धो लें.

4 . एलोवेरा और शहद का मास्क

एलोवेरा में एंटी-फंगल गुण होते हैं जो आपके सिर की खुजली को कम करने में मदद करते है. सबसे पहले आप एलोवेरा जेल में एप्पल साइडर सिरका मिलाएं और एक अच्छा मिश्रण बनाएं. फिर इसमें शहद मिलाएं और इसे अपने सिर पर लगाएं. आप इसे 20-30 मिनट के लिए छोड़ सकते हैं इसे शैम्पू से धो सकते हैं.

5. एग व्हाइट और सेब का सिरका

इसके लिए सबसे पहले आप एक कटोरी में 3-4 एग वाइट लें. फिर इसमें एक बड़ा चम्मच सेब सिरका मिलाए. आखिरी में 2 चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. इस मिक्सचर से सिर में मसाज करके 30 से 40 मिनट के लिए रहने दें. इसके बाद सादे पानी से बाल धो लें.

Film Review Bawaal: न कहानी में जान न अभिनय में कमाल

रेटिंग : 5 में से आधा स्टार
निर्माता : साजिद नाडियादवाला व अश्विनी अय्यर तिवारी
लेखक : अश्विनी अय्यर तिवारी
निर्देशक : नितेश तिवारी
कलाकार : वरूण धवन, जाह्नवी कपूर, मनोज पाहवा, गुंजन जोशी, अंजुमन सक्सैना, मुकेश तिवारी, प्रतीक व अन्य.
अवधि : 2 घंटे 19 मिनट
ओटीटी प्लेटफार्म : अमेजन प्राइम

बौलीवुड की पतिपत्नी जोड़ी यानी कि ‘दंगल’ फेम निर्देशक नितेश तिवारी और ‘पंगा’ फेम निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी इस बार फिल्म ‘बवाल’ ले कर आए हैं. इस फिल्म की कहानी लिखने के साथ ही इस के निर्माण से भी अश्विनी अय्यर तिवारी जुड़े हुए हैं जबकि फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी हैं.

फिल्म ‘बवाल’ देख कर यकीन ही नहीं होता कि इस फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी ने ही आमिर खान वाली फिल्म ‘दंगल’ के अलावा राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म ‘छिछोरे’ का निर्देशन किया था. इतना ही नहीं फिल्मकार ने इस फिल्म में मिरगी की बीमारी के प्रति जो अमानवीय रूख पेश किया है, उस के लिए तो उन्हें माफ भी नहीं किया जा सकता. इस के अलावा कहानी का मूल प्लौट एक सभ्य औरत द्वारा घमंडी व गंवार पुरूष का हृदय परिवर्तन करने की है, जो सैकड़ाें फिल्मों में दोहराई जा चुकी है.

कहानी : कहानी के केंद्र में लखनऊ का रहने वाला अजय उर्फ अज्जू (वरुण धवन) और निशा (जाह्नवी कपूर) हैं. अज्जू हमेशा अपनी छवि को चमकाने में लगा रहता है. अज्जू एक हाईस्कूल में इतिहास का शिक्षक है, पर वह खुद अज्ञानी है. पढ़ाना आता नहीं. अज्जू का एक ही काम है कि अपना और अपने आसपास के लोगों का समय बरबाद किया जाए. अज्जू की हरकतों से बैंक में नौकरी करने वाले उस के पिता (मनोज पाहवा) और घरेलू महिला मां (अंजुमन सक्सैना) बहुत परेशान रहते हैं.

अज्जू दिनभर अपने सब से अच्छे दोस्त विनय (प्रतीक पचोरी) के साथ अपने पिता की कमाई को उड़ाते रहता है. पर अज्जू की शादी एक उच्च शिक्षित, प्यारी व समझदार निशा (जाह्नवी कपूर) से हो जाती है, जो मिरगी की बीमारी से ग्रस्त है.

शादी के बाद निस्संदेह दोनों की जिंदगी बदल जाती है. सबकुछ जानते हुए भी अज्जू, निशा से दूरी बना लेता है. इस के बाद कहानी आगे बढ़ती है.

एक दिन स्कूल में विधायक (मुकेश तिवारी) का बेटा अज्जू से इतिहास का एक सवाल पूछ देता है, जिस का जवाब अज्जू को पता नहीं रहता। इसी बात पर गुस्से में अज्जू उस लड़के को थप्पड़ मार देता है. बस यहीं बवाल हो जाता है. अज्जू को सस्पैंड कर दिया जाता है. उस के खिलाफ जांच शुरू होती है. खुद की छवि को सुधारने के मकसद से अज्जू यूरोप जा कर जूम पर बच्चों को द्वितीय विश्वयुद्ध का इतिहास पढ़ाने की योजना बनाता है. अपने पिता से ₹10 लाख यह कह कर वसूलता है कि वह निशा के साथ संबंध सुधारने के लिए उस के साथ यूरोप जा रहा है.

अजय व निशा यूरोप में पैरिस, ऐम्स्टर्डम, बर्लिन वगैरह की यात्रा करते हैं. इस दौरान यूरोप में निशा व अजय के साथ कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. उस के बाद अज्जू का हृदय परिवर्तन हो जाता है.

लेखन व निर्देशन : फिल्म ‘बवाल’ देख कर इस के लेखक व निर्देशक दोनों की सोच, दिमागी समझ व उन की प्रतिभा पर तरस आता है. फिल्म में जिस तरह के दृश्य हैं, उन से एक बात समझ में आती है कि यह सारा मसला ‘सब्सिडी’ का है अन्यथा प्रेम, 2 इंसानों के रिश्तों, मिरगी की बीमारी के मर्म को समझने के साथ द्वितीय विश्वयुद्ध के यादगार स्थलों की यात्रा का कोई संबंध ही नहीं बनता. फिल्म में हिटलर और भयावहता के साथ ही गैस चैंबरों और उन में फेंके गए यहूदियों के खात्मे की दास्तान है, जिसे बच्चों ने आज तक पाठ्यपुस्तकों में नहीं पढ़ा. यह फिल्म लेखक व निर्देशक की विकृत मानसिकता का ही परिचायक है.

फिल्मकार ने मिरगी के प्रति अजय का जो रवैया दिखाया है, उसे अमानवीय ही कहा जाएगा क्याेंकि यह बड़ी समस्या नहीं है. सभी जानते हैं कि विश्व में करोड़ों लोग मिरगी यानी कि दौरा पड़ने की बीमारी वाले इंसानों के साथ अच्छी जिंदगी गुजार रहे हैं. नवविवाहितों के बीच मिरगी के कारण दरार पैदा करने के चित्रण को किसी भी स्तर पर संवेदनशील नहीं कहा जा सकता.

सभी जानते हैं कि मिरगी का दौरा कभीकभार महज 1 मिनट के लिए ही पड़ता है. फिल्मकार ने यूरोप यात्रा के दौरान अजय व निशा द्वारा एकदूसरे को समझने के दृश्यों को चित्रित करने की बजाय द्वितीय विश्व युद्ध के मैमोरियल पर ही ध्यान केंद्रित रखा, शायद ऐसा उन्हें सब्सिडी के कारण करना पड़ा होगा. हम इस से पहले भी देख चुके हैं कि सब्सिडी ले कर बनाई गई फिल्म में उस राज्य के पर्यटन स्थलों को समाहित करने के चक्कर में कहानी को चौपट किया जाता रहा है.

फिल्मकार ने द्वितीय विश्वयुद्ध की विनाशलीला के साथ ही नाजी विरोध को रेखंकित किया है, मगर इस से अजय व निशा के रिश्तों को जोड़ना अपरिपक्व दिमागी उपज ही है. इतना ही नहीं, अजय के यूरोप जाने और द्वितीय विश्वयुद्ध के पाठों के लिए वीडियो शूट करने का पूरा विचार सतही है. लेखक व निर्देशक दोनों की कल्पनाएं कमाल की हैं जब अजय व निशा गैस चेंबर में जाते हैं, तब ब्लैक ऐंड व्हाइट दृश्य हैं. यहां अजय खुद को द्वितीय विश्व युद्ध के समय गैस चैंबर होने का सपना देखता है और तभी निशा को मिरगी का दौरा पड़ता है और अजय का हृदय परिवर्तन हो जाता है. वाह, क्या कहना लेखक व निर्देशक दोनों की सोच का.

लेखक ही नहीं निर्देशक के ज्ञान का सब से बड़ा उदाहरण यही है कि इन्हें तो भारत के बारे में कुछ पता नहीं. इन्हें यह भी नहीं पता कि नर्मदा नदी मध्य प्रदेश से गुजरात तक बहती है, नकि लखनऊ में. लखनऊ में तो गोमती नदी है. पर यह तो यूरोप व द्वितीय विश्वयुद्ध पढ़ा रहे हैं. इंसानी रिश्तो में मिठास लाने के कई तरीके हो सकते हैं, जिन की तरफ फिल्मकार व लेखक ने ध्यान नहीं दिया. फिल्मकार ने यूरोप यात्रा के लिए रवाना होते समय हवाईजहाज के अंदर एक गुजराती परिवार को पेश कर कुछ मनोरंजक दृश्य रचे हैं.

इस फिल्म की कहानी को परिवार के साथ जोड़ कर कहानी व रिश्तों को सुधारने की दिशा में रोचकता लाई जा सकती थी. गुजराती परिवार महज चंद मिनटों के लिए हंसी के क्षण पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए था.

अभिनय : अजय उर्फ अज्जू के किरदार में वरूण धवन और निशा के किरदार में जाह्नवी कपूर का अभिनय घटिया है और यह फिल्म उन के कैरियर को विनाश की ओर ही ले जाती है. इस फिल्म को देख कर एहसास होता है कि वरूण धवन और जाह्नवी कपूर को अभिनय की एबीसीडी नए सिरे से सीखने की जरूरत है. यदि वे ऐसा नहीं करते तो इन के कैरियर पर पूर्ण विराम लगते देर नहीं लगेगी. गुंजन जोशी, मनोज पाहवा और अंजुमन सक्सैना जरूर अपने अभिनय की छाप छोड़ जाते हैं. विधायक के छोटे किरदार में मुकेश तिवारी अपनी छाप छोड़ जाते हैं, मगर उन के जैसे सशक्त अभिनेता को इस तरह की फिल्मों से दूरी बना कर ही रखना चाहिए.

अनुपमा में आया नया ट्विस्ट, समर की होगी मौत!

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ इन दिनों काफी चर्चा में है. शो को टीआरपी लिस्ट में टॉप पर बनाए रखने के लिए मेकर्स खूब मेहनत कर रहे, आए दिन एक नया ट्विस्ट लेकर आ जाते हैं. लेकिन ‘अनुपमा’ का करंट ट्रैक देखकर दर्शकों का दिमाग हिल गया है.

बीते दिन भी रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में देखने को मिला कि अनुपमा से बदला लेने के लिए मालती देवी चाल चलती हैं और समर की डांस अकेडमी सील करा देती हैं. वहीं दूसरी ओर डिंपल की एक हरकत से अनुज का पारा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है.

हालांकि अनुपमा फैसला करती है कि वह खुद जाकर गुरु मां से बात करेगी और उनसे माफी के लिए गिड़गिड़ाएगी. लेकिन ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट यहीं पर खत्म नहीं होते हैं.

समर की होगी मौत

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के आने वाला एपिसोड काफी खतरनाक होने वाला है. शो में ऐसा कुछ होने जा रहा किसी ने अभी तक सोचा नहीं होगा. जी हां, शो के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि समर की मौत हो जाएगी. प्रोमो में दिखाया गया है. अनुपमा अकेडमी से सीधे शाह हाउस में जाएगी. जहां वह काफी परेशान दिखती है और सबसे बार-बार पूछती है, मेरा समर कहां है. मेरा समर कहां है? लेकिन इस पर कोई कुछ नहीं कहता. इसके बाद तोषू कहता है, ‘मम्मी समर नहीं रहा’.

 

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टूट गई अनुपमा की दुनिया

वहीं शो में अभी तक यह खुलासा नहीं किया गया समर की मौत कैसे हुई. ये शो का महा ट्विस्ट है. अभी तक अनुपमा की समास्याएं खत्म नहीं हुई वह गुरु मां से माफी मांगेगी, वहीं समर की मौत होने से अनुपमा की दुनिया में सैलाब सा आ गया.  अनुपमी की दुनिया फिर से बिखर जाएगी. रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ बेहद ही दिलचस्प होने वाला है. ऐसे में देखने होगा कि समर की मौत शायद न हुई हो या कुछ और ट्विस्ट ये आने वाले शो में पता लग जाएगा.

देवर है आशिक नहीं

अलकेश न केवल सगे भाई की पत्नी बल्कि चाचाताऊ के बड़े भाई की पत्नियों को भी फ्लाइंग किस और उन से फ्लर्टिंग करता रहता है. उस की इस आदत का बुरा मानना भी छोड़ दिया है. अपनी हमउम्र भाभी के साथ घंटों मोबाइल पर बात करता है. भाई को शक होता पर मुंह बंद कर लेता वरना जीवन दांव पर लग जाएगा.

मंटी भाभी को खूब उपहार दे कर उन का दिल जीत बैठा है. भाभी भी उस का बहुत ध्यान रखती है. अचानक एक दिन नव दंपती को अलग रहने का फरमान जारी कर दिया गया. जब दोनों ने बहुत पूछा तो मां को कहना पड़ा कि देवरभाभी में कभी भी खिचड़ी पक सकती है. इस की उम्र ही ऐसी है. वह अनजाने बहक सकता है. कामधाम करता नहीं कि उस की भी शादी कर दी जाए. अत: यही विकल्प है. तब दोनों ओर से रिश्तों को ताकीद किया गया तब वे सहज हुए. भाभी ने उचित दूरी बना कर गृहस्थी बना ली.

क्यों होता है ऐसा

हमउम्र या कम उम्र मेें सहज रूप से भी देवरभौजाई में आकर्षण की संभावना अधिक रहती है. ऐसे में देवर आशिकमिजाज हो तो यह संभावना बहुत अधिक बढ़ सकती है. सदैव देवर जानबूझ कर ही भौजाइयों के प्रति आकर्षण का शिकार नहीं होते अनजाने भी होते हैं. ऐसे में उन्हें समय रहते समझना जरूरी है. भाभी हमारे घर आई ही इस काम के लिए है यह सोच देवर की हो ठीक नहीं है. भाभियों के खुलेपन को भी देवर आशिकमिजाजी उभारने का आधार बना लेते हैं.

पतिपत्नी की आपसी कलह भी आशिकमिजाज देवरों को अपने लिए स्कोप के रूप में दिखाई देती है. ऐसी स्थिति में उन की आशिकमिजाजी फूलतीफलती है.

भाभी द्वारा आशिकमिजाजी पहचान न पाना या उसे ही सहज व्यवहार सम?ा लेना आशिकमिजाजी देवर को स्वीकृति लगती है. हमारे लोकगीतों में देवरों की रोमांटिक छवि बखान की गई है जो जीवन की हकीकत से मेल नहीं खाती.

देवर दूसरा वर नहीं देवर भाभी दोनों ही कुछ खुलेपन को सहज मानते हैं. कई भाभियां इसी सोच में आशिकमिजाज देवरों की करतूतें पहचान नहीं पातीं. कभी आभास हो भी जाता है तो प्रतिरोध नहीं कर पातीं. उन्हीं ही दोषी माना जाएगा, इस डर से वे मुंह नहीं खोलतीं.

एक अनुभवी प्रिंसिपल शिवराम गौड कहते हैं कि ये स्थितियां वहां ज्यादा कौमन और सहज हैं जिस समाज में पति की मृत्यु के बाद देवर से शादी का रिवाज है. वहां स्थितियों को सहज स्वीकारने की ये स्थितियां बनी होंगी मगर अब वे बंदिशें कम होती जा रही हैं.

पति के अन्य रिश्तों जैसा ही ये रिश्ता भी पति के मांबाप, भाईबहन, बूआ, मामा आदि सभी रिश्ते वधू को उसी रूप में मानते हैं तो भाई का रिश्ता भी भाई ही माना जाना चाहिए.

शिप्रा के पति का निधन हो गया. उस के हमउम्र कुंआरे देवर से सब ने शादी के लिए कहा पर उन दोनों में भाईबहनों का सा नाता था. दोनों ने इस सच को उजागर किया. सम?ाने पर अपनी भावनाएं मुखर कीं. देवर कहता था कि

वह भाई के बच्चे पालेगा पर भाभी ने उस पर कहीं और शादी करने का दबाव बनाया. कई लड़कियां दिखाईं.

देवर इसी शर्त पर शादी के लिए माना जब भाभी भी शादी के लिए तैयार हुईं. दोनों ने एकदूसरे के जीवनसाथी देखे पसंद किए. आज उन का जीवन बेहद खुशहाल है. दोनों के जीवनसाथी भी इस रिश्ते को अटूट मानसम्मान देते हैं. शिप्रा के भाई कहते हैं कि सचमुच हम से भी आगे है यह रिश्ता.

गृहस्थी टूट सकती है

आशिकमिजाज देवर भले लुभाता हो पर यह आकर्षण गृहस्थी को चौपट कर सकता है, उस में दीमक लग सकती है. आशिकमिजाज देवर कुंआरा हो या शादीशुदा उसे शुरू से ही अपनी मर्यादा बता दें. रिजर्व रहें. एक सीमा तक ही संबंधों का विस्तार करें.

कैसे निबटें

आशिकमिजाजी कतई न सहें. तुरंत प्रतिरोध करें. पति व सास को बताएं. अपने पीहर के बजाय ससुराल वालों से कहें अन्यथा उन्हें लगेगा कि आप उन के घर की बदनामी कर रही हैं. बेहतर होगा कि ननदों को राजदार बनाएं. उन्हें आसपास रखें.

  •  प्रतिरोध करने पर भी देवर न माने तो उस से बोलना छोड़ देने में भी कोई बुराई नहीं है.
  •  हदों की हिदायत देने पर भी उस की आशिकमिजाजी पर कोई असर न हो तो मनोवैज्ञानिक तक पहुंचाने में पति की मदद ली जा सकती है. देवर का यह आचरण सहना या स्वीकारना अथवा उसे छिपाना किसी भी नजरिए से उपयुक्त नहीं है

लड़की है कठपुतली नहीं

क्रौप टौप काफी ट्रेंड में है. यह पहनने पर कूल फीलिंग देते हैं. इतना ही नहीं ये सैक्सी भी लगते हैं. लेकिन कई घरों में लड़कियों के क्रौप टौप पहनने पर पाबंदी होती है. जो लोग क्रौप टौप पहनने के विरोध में हैं, उन का कहना है क्रौप टौप अश्लीलता को बढ़ावा देता है. इस में कमर दिखती है. क्रौप टौप बनाने वाली कंपनियां अपनी बिक्री के लिए लड़कियों को बिगाड़ रही हैं.

क्रौप टौप अश्लीलता को बढ़ावा नहीं देते. इस विषय पर जाग्रति राय अपना एक ऐक्सपीरियंस शेयर करते हुए कहती हैं, ‘‘मैं 20 साल की हूं. एक दिन मैं क्रौप टौप और जींस पहन सोफे पर बैठ कर टीवी देख रही थी. तभी मेरे पापा आए और गुस्से में मुझ से बोले कि जाग्रति यह तुम ने किस तरह के कपड़े पहने हुए हैं? जाओ जा कर कपड़े बदलो. क्या तुम्हें कपड़े पहनने की जरा भी अकल नहीं है? अब तुम बड़ी हो गई हो. लगता है बाहर जा कर तुम ज्यादा ही बिगड़ गई हो. मुझे तुम्हारा बाहर जाना बंद करना पड़ेगा. तभी तुम्हें अकल आएगी. पापा को इतने गुस्से में देख कर मैं डर गई. मैं ने कपड़े तो बदल लिए लेकिन मैं अपने कमरे से बाहर नहीं आई.’’

जाग्रति के पापा सुरेंद्र राय का उस पर गुस्सा करने का कारण था जाग्रति का क्रौप टौप पहनना. वे लड़कियों के छोटे कपड़े पहनने के सख्त खिलाफ हैं.

कपड़े पहने पर बेशर्मी क्यों

क्या मौडर्न कपड़े पहनना बेशर्मी की निशानी है? इस पर जाग्रति कहती हैं, ‘‘क्रौप टौप पहनना बेशर्मी नहीं है. यह बिलकुल ब्लाउज की तरह होता है. बस फर्क यह है कि ब्लाउज साड़ी के साथ पहना जाता है और क्रौप टौप जींस, स्कर्ट, शौर्ट्स, प्लाजो के साथ पहना जाता है.’’

लड़कियों की घरों में बेइज्जती किस तरह से होती है, इस का एक उदाहरण दीपिका रावत देती हैं. गाजियाबाद की रहने वाली दीपिका बताती हैं, ‘‘जब भी वह कभी सुबह लेट सो कर उठती थी तो मम्मी कहती थीं कि ससुराल में भी ऐसे ही देर से उठोगी तो 2 दिन में सास मायके छोड़ जाएगी. मैं अकेली ऐसी लड़की नहीं हूं जिस ने यह सब सुना है. हमारे देश की लगभग हर लड़की ने अपने घर में यह सब कभी न कभी सुना ही होगा. देर से उठने का नियम क्या सिर्फ लड़कियों पर लागू होता है? लड़कों को इस से बाहर क्यों रखा गया है? क्या उन का देर से उठना इस सोसाइटी को मंजूर है? इस तरह के दकियानूसी चोंचले सिर्फ लड़कियों के लिए बनाए गए हैं क्योंकि वे कभी नहीं चाहते कि लड़कियां उन के हाथों से फिसलें. वे लड़कियों को अपनी मुट्ठी में कैद रखना चाहते हैं.’’

वैसे तो इस सोसाइटी ने लड़कियों के लिए न जाने कितने नियम बनाए हुए हैं. इन्हीं में से एक नियम है लड़कियों का पैर फैला कर बैठना. यह सोसाइटी लड़कियों के पैर फैला कर बैठने की आदत को गलत नजर से देखती है. अगर कोई लड़की पैर फैला कर बैठती है तो इसे सैक्स सिंबल भी समझ लिया जाता है. जो लोग लड़कियों के पैर फैला कर बैठने को गलत कहते हैं उन का मानना है कि ऐेसी लड़कियां अच्छे घर की नहीं होतीं. इन में संस्कारों की कमी होती है. लड़कियां ऐसी हरकत कर के लड़कों को अट्रैक्ट करना चाहती हैं.

संस्कार या बंदिशें

लड़कियों के पैर फैला कर बैठने के तरीके को ले कर 25 साल की सुरभि यादव अपने बचपन का एक ऐक्सपीरियंस बताते हुए कहती हैं, ‘‘मैं जब 16 साल की थी तब अपने मम्मीपापा के साथ एक पार्टी में गई थी. वहां मैं कंफर्टेबली पैर फैला कर अपने दोस्तों के साथ खाना ऐंजौय कर रही थी. तभी पापा ने मुझे आंखें दिखाते हुए अपने पास आने का इशारा किया.

‘‘जब मैं उन के पास गई तो वे मेरा हाथ पकड़ कर साइड में ले गए. उन्होंने गुस्से भरी नजरों से मुझे देखा और कहा कि तुम्हें ढंग से बैठना नहीं आता क्या जो पैर फैला कर बेशर्मों की तरह बैठी हो? देख नहीं रही हो कि लोग तुम्हें किस तरह से घूर रहे हैं? जाओ जा कर ठीक से बैठो. पापा की इन बातों को सुन कर मैं हैरान हो गई. लेकिन मेरे पास कोई जवाब नहीं था इसलिए मैं चुपचाप जा कर पैरों को क्रौस कर के बैठ गई.

‘‘इस सोसाइटी ने लड़कियों के शोषण के लिए तरहतरह के नियम बनाए हुए हैं. यह सोसाइटी बस उन्हें किसी भी तरह कंट्रोल करना चाहती है. इस के लिए वह समयसमय पर उन्हें टोकती है, रोकती है और न जाने किसकिस तरह की पाबंदियां उन पर लगाई जाती हैं. फैमिली द्वारा बारबार उन्हें नीचा दिखाना? उन्हें गलत समझना, उन की बेइज्जती करना लड़कियों के मन में परिवार वालों के लिए गुस्सा और नफरत पैदा कर देता है. ऐसी लड़कियां चिड़चिड़ी हो जाती हैं. उन्हें बातबात पर गुस्सा आने लगता है. ऐसी लड़कियां अपने मम्मीपापा के बूढ़े होने पर उन से दूरी बना लेती हैं. वे उन से मिलती भी नहीं हैं क्योंकि उन के अंदर बेइज्जती की कड़वी यादें बसी होती हैं. मैं समझती हूं कि अगर आप को इज्जत चाहिए तो आप को इज्जत देनी भी पड़ेगी.’’

इशारों की गुलाम नहीं

लड़कियों की बेइज्जती में सोसाइटी का बहुत बड़ी भूमिका है. इस सोसाइटी ने लड़कियों को कठपुतली समझ रखा है, जिस की बागडोर उन्होंने पुरुषों के हाथों में दी हुई है. वे जैसे मरजी चाहें वैसे इसे घुमा सकते हैं. तभी तो उन के हंसने को ले कर भी उन्हें कड़े नियमकायदे बताए गए हैं. ज्यादा जोर से नहीं हंसना, ज्यादा खिलखिला कर नहीं हंसना, इस तरह से हंसना है, इस तरह से नहीं वगैरहवगैरह.

हर लड़की को उस की लाइफ में उस के परिवार वालों ने कभी न कभी जरूर टोका होगा. कभी तो उसे धीरे हंसने के लिए कहा ही होगा. उन्हें ऐसा करने के लिए इस सोसाइटी ने पढ़ायालिखाया है ताकि उन्हें अपने काबू में रख सकें.

35 साल की रिचा कुमारी एक मैरिड वूमन हैं. वे पेशे से ग्राफिक डिजाइनर हैं. वे बताती हैं कि कुछ महीने पहले उन के फ्रैंड्स गैटटूगैदर करने उन के ससुराल में आए थे. जब उन की फ्रैंड यामिनी ने जोक सुनाया तो वे जोरजोर से हंसने लगीं. उन के हंसने की आवाज हौल में बैठे उन के सासससुर तक भी गई. जब दूसरी बार ऐसा फिर से हुआ तो उन की सास ने उसे सब के सामने टोकते हुए कहा कि तुम्हें इस तरह से नहीं हंसना चाहिए. महिलाओं का इस तरह से हंसना सभ्य नहीं माना जाता है. तुम थोड़ा आराम से हंसो. 5 साल बाद भी वे यह वाकेआ नहीं भूली हैं.

यह कैसी सोच

लड़कियों की बेइज्जती न सिर्फ घर में होती है बल्कि यह बीच सड़क पर भी होती है. उन की यह बेइज्जती कोई बाहर वाला नहीं करता वरन अपनी फैमिली के मैंबर द्वारा की जाती है. रिचा कहती है कि लड़कियां अगर अपने लिए स्टैंड लें तो किसी की मजाल नहीं कि वह उन के बारे में कुछ उलटा बोल सके.’’

प्रीति वर्मा 18 साल की है. वह अपने मम्मीपापा की इकलौती संतान है. एक दिन जब प्रीति अपने फ्रैंड निखिल अरोड़ा के साथ हाथ पकड़ कर रोड पार कर रही थी तभी रोड की दूसरी साइड कार से आते उस के पापा सचिन वर्मा ने उन्हें देख लिया. उन्होंने कार को साइड में लगा कर रोड क्रौस किया और प्रीति के पास आ कर उस का हाथ ?ाटकते हुए उसे निखिल से दूर किया. इस के बाद उन्होंने प्रीति को सचिन के सामने ही थप्पड़ मार दिया. फिर उन्होंने प्रीति को कार में बैठाया और सीधे घर ले कर आ गए.

सचिन ने घर आते ही प्रीति को सुनाते हुए कहा, ‘‘हमारे भरोसे का तुम यह सिला दे रही हो? बाहर जाते ही तुम अपने संस्कार भूल गई. इस तरह सड़क पर लड़के के हाथों में हाथ डाल कर चलना हमारे संस्कार में नहीं है. इस तरह से तुम हमारी नाक कटा रही हो. अगर दोबारा मैं ने इस तरह का कुछ भी सुना तो तुम्हारा बाहर जाना बंद हो जाएगा.’’

रिश्तों में दरार डालती हैं गलतफहमियां कई बार गलतफहमी रिश्तों में दरार लाने का कारण बन जाती है. ऐसा ही सचिन वर्मा और प्रीति के साथ भी हुआ. लेकिन प्रीति अपने दोस्त के सामने अपनी बेइज्जती को नहीं भूली. इसलिए अब वह एक शहर में होते हुए भी जल्दी अपने घर नहीं जाती है.

ऐसा ही एक वाकेआ अदा शर्मा के साथ भी हुआ था. 30 साल के महेंद्र शर्मा ने जब अपनी 23 साल की बहन अदा शर्मा को एक कैफे में लड़के के साथ कौफी पीते देखा तो वह उस पर भड़क गया. उस ने न आव देखा न ताव सीधा अदा को और उस के फ्रैंड को थप्पड़ मार दिए. महेंद्र शर्मा का ऐसा करना उस की रूढि़वादी सोच को दिखाता है. उस ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि वह लड़का कौन है. वह अदा का बौयफ्रैंड है या बस फ्रैंड. बिना सच जाने, बिना सोचेसमझे उस का ऐसा करना अदा के लिए शर्मींदगी का कारण बन गया.

इस घटना के बाद अदा के जितने भी मेल फ्रैंड थे सब ने उस से दूरी बना ली. वे उस के साथ चलने से डरने लगे. उन्हें डर लगने लगा कि न जाने कब उस का भाई या पापा आ जाए और उन्हें बिना किसी बात के मारने लगे.

अदा कहती है, ‘‘मेरे भाई की इस हरकत ने मेरे दोस्तों को मु?ा से दूर कर दिया. हमारी सोसाइटी में लड़कियों को ऐसी सिचुएशन से कई बार गुजरना पड़ता है, जबकि इस में उन की कोई गलती भी नहीं होती सिवा उन के लड़की होने की.’’

कई बार लड़कियों की बेइज्जती अपने ही घर में इतनी बढ़ जाती है कि उस की अपनी फैमिली उस के कैरेक्टर पर सवाल उठाने लग जाती है. ऐसा अकसर कम पढ़ेलिखे और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के घर में होता है. ऐसा ही एक घर मोली गौड़ा का है.

मौली गौड़ा 24 साल की है. वह मुंबई की घनी आबादी वाली एक चाल में रहती है. आएदिन उस के घर उस के छोटे भाई जयंत गौड़ा की फीमेल फ्रैंड आती रहती थी. लेकिन जब मोली का दोस्त पंकज कंपा घर आया तो उस के पापा मुकेश मौली पर बरस पड़े. वे चिल्लाते हुए बोले, ‘‘यह मेरा घर है या कोई कोठा जो मुंह उठा कर कोई भी आ जाता है? तुम ने मेरे घर को क्या कोठा सम?ा लिया है जो जब चाहा किसी को भी ले आती हो? कभी कोई दोस्त. तुम्हारा कोई कैरेक्टर है या नहीं या तुम्हारा एक लड़के से मन नहीं भरता. जो आए दिन कोई न कोई यहां आता ही रहता है?’’

इतना सुनते ही मौली रोते हुए कमरे में चली गई. यह सब सुन कर उस का दोस्त भी वहां से चला गया. इस घटना के बाद वह फिर कभी मौली के घर नहीं आया.

पहले घर में इज्जत जरूरी इस तरह की बातें गरीब तबके के लोगों के लिए आम हो गई हैं. ज्यादा पढ़ेलिखे न होने के कारण वे इस तरह के शब्दों का यूज करते हैं. लेकिन इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि आखिर वह किसी लड़की या महिला के लिए  ऐसा कैसे कह सकते हैं जो महिलाओं के चरित्र का हनन करती है. लेकिन फिर भी धड़ल्ले से महिलाओं के लिए अपशब्दों का यूज किया जाता है.

जो लोग अपने घर में लड़कियों और महिलाओं की बेइज्जती करते हैं वे यह नहीं समझ पाते कि ऐसा कर के वे अपने लिए ही गड्ढा खोद रहे हैं क्योंकि बेइज्जती या अपमान सहने वाली लड़कियां दोबारा उस घर में पैर नहीं रखना चाहती हैं. फिर चाहे उन के घर वाले उन्हें लाख बुलाएं.

ऐसे में जिस कपल ने अपनी इकलौती बेटी की बेइज्जती की होती वे अपनी बेटी को देखने के लिए तरस जाते हैं क्योंकि वह उन्हें देखना तक नहीं चाहती. बेइज्जती सहने वाली कुछ लड़कियां अगर अपने घर जाती भी हैं तो सीधे मुंह किसी से बात नहीं करती हैं. अगर उन के इस व्यवहार को खत्म करना है तो उन्हें अपने घर की लड़कियों और औरतों का मानसम्मान करना होगा, उन से इज्जत से बात करनी होगी.

पनीर से बनाइये ये मीठी नमकीन डिश

किसी भी खास अवसर पर जब खास भोजन बनाया जाता है तो मेन्यू में पनीर से बनी डिश अवश्य शामिल होती है. पनीर जिसे दूध से फाड़कर बनाया जाता है भारतीय भोजन में विशेष स्थान रखता है. बच्चे बडों सभी का फेवरिट पनीर केल्शियम, प्रोटीन, और विटामिन्स से भरपूर होता है. यह एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिससे विविध मिठाईयां, परांठे, सब्जियां और पुलाव आदि बनाया जाता है. आज हम आपको पनीर से बनने वाली 2 रेसिपीज बनाना बता रहे हैं जो आप किसी ही अवसर पर बड़ी आसानी से बना सकतीं हैं इन्हें घर में उपलब्ध सामग्री से बड़ी आसानी से बनाया जा सकता है तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

  1. केरेमल पनीर बाइट

कितने लोगों के लिए  – 6

बनने में लगने वाला समय  –  20 मिनट

मील टाइप –  वेज

सामग्री

  1.  1 कटोरी किसा पनीर                         
  2. 1 कटोरी मिल्क पाउडर                         
  3. 1 कटोरी किसा गुड़                           
  4. 1/2 कटोरी मिल्क पाउडर                         
  5. 1 टेबल स्पून घी                               
  6. पिस्ता कतरन सजाने के लिए                         
  7. 1/4 टी स्पून इलायची पाउडर     

विधि

पनीर और मिल्क पाउडर को एक साथ अच्छी तरह मिक्स कर लें ताकि पनीर के रेशे खत्म हो जाएं. अब गरम घी में गुड़ डालकर धीमी आंच पर पिघलाएं जब गुड़ पिघल जाए तो इलायची पाउडर, पनीर और मिल्क पाउडर का मिश्रण डालें. लगातार चलाते हुए धीमी आंच पर मिश्रण के पैन के किनारे छोड़ने तक पकाएं. जब मिश्रण गाढा होकर पैन के बीच में इकट्ठा होने लगे तो तैयार मिश्रण को चिकनाई लगी एक चौकोर ट्रे में जमा दें. उपर से पिस्ता कतरन डालकर एक कटोरी से हल्का सा दबा दें ताकि पिस्ता बर्फी में अच्छी तरह चिपक जाएं. ठंडा होने पर 1-1 इंच के क्यूब्स में काटकर सिल्वर फॉयल या चोकलेट पेपर में लपेटकर फ्रिज में रखें. आप फ्रिज में इन्हें 15 दिन तक स्टोर कर सकतीं हैं.

2. पिज्जा पनीर रैप

कितने लोगों के लिए  – 6

बनने में लगने वाला समय –  30 मिनट

मील टाइप  –    वेज

सामग्री

  1. 1 कप मैदा                             
  2. 100 ग्राम पनीर                           
  3. 50 ग्राम शिमला मिर्च                   
  4. 1 बारीक कटा प्याज             
  5. 1/4 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर               
  6. 1/2 टी स्पून अमचूर पाउडर                   
  7. 1/4 टी स्पून जीरा                           
  8. 1/4  टी स्पून चाट मसाला                     
  9. 1 टी स्पून तेल                         
  10. 2 टेबलस्पून पिज्जा सॉस                     
  11. 1 टीस्पून पिज्जा सीजनिंग   

विधि

मैदा को पानी की सहायता से कड़ा गूंथ लें. छोटी छोटी लोई लेकर तवे पर हल्का सा सेंककर  रोटी बना लें. पनीर और शिमला मिर्च को बारीक बारीक काट लें. गरम तेल में जीरा और प्याज भूनकर पनीर, शिमला मिर्च और नमक डालकर 5 मिनट तक खोलकर ही पकाएं. जब पानी सूख जाए तो लाल मिर्च, अमचूर पाउडर, पिज्जा सीजनिंग और चाट मसाला मिलाकर फिलिंग तैयार करें. अब तैयार रोटी पर पिज्जा सॉस लगाकर 2 चम्मच पनीर की फिलिंग  फैलाएं. इसे साईड से फोल्ड करते हुए रैप तैयार करें. रैप के उपर ब्रश से तेल लगाएं और अवन में 250 डिग्री पर 10 मिनट तक बेक करें. अवन न होने पर नानस्टिक तवे पर चिकनाई लगाकर धीमी आंच पर दोनों तरफ सेंकें. बीच से काटकर टोमेटो सॉस के साथ सर्व करें.

गठबंधन: भाग 3- क्यों छिन गया कावेरी से ससुराल का प्यार

कावेरी ससुराल पहुंचने ही वाली थी कि उसे नमन का भेजा हुआ रिपोर्ट का फोटो मिल गया. जब कावेरी ने फोटो डाउनलोड कर देखा तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ. रिपोर्ट बता रही थी कि वह गर्भवती है. कावेरी का मन बल्लियों उछलने लगा. वह जल्द ही उदित से मिल कर यह सुखद समाचार उसे सुनाना चाहती थी.

उत्साह से भरी कावेरी दौड़ती हुई उदित के पास जा पहुंची. उदित से आंखें बंद करने को कह कर उस ने पर्स से मोबाइल निकाला और रिपोर्ट का फोटो उदित के सामने कर दिया.

उदित ने आंखें खोलीं तो नजरें मोबाइल स्क्रीन पर ठहर गईं. रिपोर्ट में ‘प्रैगनैंसीपौजिटिव’ देखते ही उस के चेहरे का रंग उड़ गया. माथे पर त्योरियां चढ़ाते हुए बोला, ‘‘क्या मजाक है यह?’’

‘‘मजाक नहीं, यह सच है उदित,’’ कावेरी खुशी से चहक उठी.

‘‘लेकिन यह कैसे हो सकता है?’’ उदित आशंका से घिरा था.

‘‘हो गया बस, कैसे? यह तो मु झे भी नहीं पता,’’ अदा से कंधे उचकाती हुई कावेरी उदित से लिपट गई.

कावेरी को अपने से अलग कर उदित आक्रोशित हो लगभग चीख उठा, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता… कभी नहीं. हुआ तो हुआ कैसे?’’

‘‘क्या हो गया है आप को?’’ इस बार कावेरी तुनक कर बोली, ‘‘यह क्या अनापशनाप बोले जा रहे हैं आप इतनी देर से? मैं ने तो सोचा था कि आप यह खुशखबरी सुन खुशी से  झूम उठेंगे. लेकिन…’’

‘‘कैसी खुशखबरी? कैसी खुशी? सुन लो तुम आज कि… मैं पिता नहीं बन सकता,’’ उत्तेजना और क्रोध में उदित के मुंह से सच निकल गया.

कावेरी सिर पकड़ कर बैठ गई. उसे लग रहा था कि वह चक्कर खा कर गिर जाएगी.

अपनी रोबीली आवाज में उदित फिर चिल्लाया, ‘‘क्या मैं जान सकता हूं कि यह बच्चा किस का है? शायद उस नमन का ही, जिस ने तुम्हें यह रिपोर्ट भेजी है.’’

कावेरी यह सहन न कर सकी. तैश में आ कर बोली, ‘‘अब सम झी कि आप ने मु झे हमारे टैस्ट की रिपोर्ट्स क्यों नहीं दिखाई थीं. क्यों नहीं जाना चाहते थे डाक्टर के पास. कितना बड़ा धोखा…’’

बौखलाया सा उदित कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था. बेचैन हो कर वह कमरे में इधरउधर चक्कर लगाने लगा. असमंजस में पड़ी कावेरी भी आंखों पर हाथ रख बैड पर लेट गई.

कुछ देर बाद कमरे की चुप्पी कावेरी का मोबाइल बजने से टूट गई. कौल नमन का था, ‘‘उखड़ी सी आवाज में हैलो बोल मोबाइल पर बात करते हुए वह कमरे से सटी बालकनी में जा खड़ी हुई.’’

नमन बोला, ‘‘उदित का सिडनी टूर कैसा रहा? तुम्हारी तबीयत कैसी है अब? वैसे मैं ने एक जरूरी बात बताने के लिए किया है फोन. अरे, मैं ने जिस रिपोर्ट का फोटो भेजा था वह तुम्हारी नहीं है. पहले किसी और कावेरी की रिपोर्ट दे दी थी मु झे उन लोगों ने. कुछ देर पहले क्लीनिक से फोन आया तो मैं दोबारा जा कर सही वाली रिपोर्ट लाया हूं. अभी व्हाट्सऐप पर तुम्हारी असली रिपोर्ट भेज रहा हूं. कोई बड़ी बीमारी नहीं बस थोड़ा इन्फैक्शन हो गया था.

‘‘ओह, मैं भी कुछ सम झ नहीं पा रही थी कि आखिर यह हुआ क्या? हां, लेकिन उस गलत रिपोर्ट ने उदित को बेनकाब कर दिया है,’’ कहते हुए कावेरी ने पूरी घटना संक्षेप में बता दी.

अब उदित को बता दो रिपोर्ट का सच, ‘‘सब ठीक हो जाएगा,’’ कह कर नमन ने फोन काट दिया और असली रिपोर्ट कावेरी को भेज दी.

फोन पर कावेरी की हताशा में डूबी आवाज सुनने के बाद नमन चिंतित था, लेकिन उसे इस बात की प्रसन्नता भी थी कि उदित को ले कर उस का अनुमान सही निकला और एक छोटी सी युक्ति लगा कर उस  झूठ से परदा उठाने में वह सफल भी हो गया.

हुआ यों कि शाम को जब नमन कावेरी की रिपोर्ट लेने पहुंचा तो जो रिपोर्ट उसे  मिली उस पर ‘प्रैगनैंसी पौजिटिव’ देख कर वह चौंक गया. फिर रिपोर्ट पर मोबाइल नंबर व घर का पता देखा तो वह कावेरी का नहीं था. नमन सम झ गया कि यह रिपोर्ट किसी और कावेरी की है.

इस से पहले कि वह काउंटर पर जा कर सही रिपोर्ट लेता, उस ने अपने मोबाइल से उस रिपोर्ट की एक फोटो इस तरह खींच कर रख लिया, जिस में एड्रैस और मोबाइल नंबर दिखाई न दे. इस के बाद नमन ने कावेरी की असली रिपोर्ट ले कर अपने पास रख ली. रिपोर्ट नौर्मल थी, इसलिए उसे कावेरी तक पहुंचाने की जल्दी भी महसूस नहीं हुई नमन को.

गलत रिपोर्ट वाला फोटो कावेरी को भेजने के कुछ देर बाद भेजी नमन ने असली रिपोर्ट ताकि कावेरी उदित को गलत रिपोर्ट दिखा सके और इस बारे में कावेरी और उदित की बातचीत भी हो पाए. गलत रिपोर्ट देखने के बाद उदित की प्रतिक्रिया द्वारा सच झूठ की तह तक पहुंचना चाहता था नमन.

सही रिपोर्ट भेजने के बाद नमन आशा कर रहा था कि उदित अब शर्मिंदा हो कर सच छिपाने के लिए कावेरी से क्षमा मांग लेगा और दोनों का वैवाहिक जीवन एक सुखद मोड़ ले लेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

उदित को जब कावेरी ने बताया कि प्रैगनैंसी वाली रिपोर्ट गलत थी तो निर्लज्जता और दोगुने वेग से वह कावेरी पर चिल्ला उठा, ‘‘तो अब अपने दोस्तों के साथ मिल कर मेरा मजाक भी उड़ाना शुरू कर दिया तुम ने. न जाने क्या सम झती हो अपनेआप को… सिडनी में ही खुश था मैं. सोच रहा हूं सब छोड़छाड़ कर वहीं चला जाऊं.’’

कावेरी का मन वितृष्णा से भर उठा. मन के चूरचूर होने की पीड़ा मुख पर साफ  झलक रही थी. मन किया कि जोर से चीख उठे. मुंह से जैसे बोल अपनेआप ही निकल पड़े, ‘‘अपने किए पर शर्मिंदा होने की जगह आप मु झे, मेरे दोस्तों पर कीचड़ उछाल रहे हैं? अब तक आप के व्यवहार को मैं आप का स्वभाव सम झ सहन करती आ रही थी, लेकिन आप तो पहले दिन से ही मु झे नीचा दिखाने के मौके तलाश रहे थे.

‘‘क्या हो गया अगर पतिपत्नी में से कोई भी संतान को जन्म देने में असमर्थ है? वह आप भी हो सकते थे या मैं भी. रिश्तों का घटाजोड़ नहीं जानती मैं, लेकिन इतना सम झती हूं कि प्यार दिमाग से नहीं दिल से होता है. पतिपत्नी का रिश्ता प्रेम पर टिका होता है… दिमाग का खेल नहीं चलता यहां. आप क्या छोड़ेंगे मु झे? मैं आज ही, अभी पतिपत्नी के नाम पर कलंक बन चुके इस रिश्ते से अपने को अलग करती हूं.’’

उदित हक्काबक्का सा देखता रह गया और बैग लिए कावेरी उलटे पांव मायके लौट आई.

सुधांशु भी क्या कहते सब जानने के बाद? कुछ दिनों की जद्दोजहद के बाद तलाक हो गया.

अपनी योग्यता के बल पर स्कूल में टीचर बन कावेरी पूरी हिम्मत से स्वयं को  संभाले थी, लेकिन मन में कहीं न कहीं एक रिक्तता निरंतर अनुभव कर रही थी. धीरेधीरे उस के वजूद पर छा रही वह उदासी उस की उमंगों और खुशियों को लील ही जाती यदि उस दिन नमन अपना दिल उस के सामने खोल न देता.

‘‘कावेरी, तुम्हें कभी कहने का साहस न जुटा सका. हमेशा एक जुड़ाव सा महसूस होता रहा है तुम संग. कुछ कहना भी चाहा कभी तो अपाहिज पांव ने जैसे मेरी सारी हिम्मत छीन ली. तुम्हारी शादी हुई तो सब्र कर लिया और हमेशा तुम्हें खुश देखना चाहा.

‘‘अब भी तुम्हें उदास देखता हूं तो लगता है कहीं से खुशियों की गठरी बांध लाऊं और सब तुम पर निछावर कर दूं,’’ नमन बोला.

‘‘अपाहिज? क्या कह रहे हो नमन? अपाहिज तो उदित था जिस की सोच ही पंगु थी. काश, तुम ने कुछ साल पहले ही बता दी होती मु झे अपने मन की बात,’’ कावेरी का गला रुंध गया.

‘‘तो अब भी क्या बिगड़ा है? कावेरी, क्या तुम मेरी जीवनसंगिनी बन कर खुश रह सकोगी?’’

कावेरी की आंखें ही नहीं मन भी भीग गया. लगा जैसे नमन ने चाहत के दुपट्टे में सम्मान का सिक्का, उमंग सी हलदी, दूर्वा जैसी खुशी, चावल के दानों सा विश्वास तथा आशा के पुष्प रख कस कर गांठ लगा दी हो और उसे कावेरी की कोमल भावनाओं की चूनर से बांध दिया हो.

‘‘गठबंधन तो आज हो गया हमारा,’’ कह कर कावेरी नमन के गले लग गई.

हमेशा हाथों को मुलायम बनाए रखने के खास टिप्स बताएं?

सवाल

मेरे हाथों की स्किन बेजान और ड्राई दिखने लगी है. हमेशा हाथों को मुलायम बनाए रखने के खास टिप्स बताएं?

जवाब

हाथों को सुंदर बनाए रखने के लिए स्क्रब करना बेहद जरूरी होता है. हाथों को स्क्रब करने से त्वचा से मृत कोशिकाएं हट जाती हैं और हाथ सुंदर दिखने लगते हैं. इस के बाद हाथों पर मौइश्चराइजर लगाना जरूरी होता है. इस से त्वचा पर मौइस्चर बना रहता है.

हाथों के लिए स्क्रब बनाने के लिए 1 मुट्ठी बादाम पीस कर पाउडर बना लें. उस में आधा चम्मच शहद डाल कर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट से हाथों को  स्क्रब करें. चीनी, नमक और नारियल तेल से बना स्क्रब भी यूज कर सकती हैं.

इस स्क्रब को बनाने के लिए 1 चम्मच नारियल तेल और 1 चम्मच शहद को अच्छी तरह मिला लें. अब इस में एकचौथाई कप नमक और चीनी मिलाएं. अब इस में थोड़ा सा नीबू का रस मिला कर 30 सैकंड तक ब्लैंड करें. इस से हाथों पर स्क्रब करने से मृत कोशिकाएं हट जाती है.

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लौकडाउन के दौरान घर का काम करते हुए हाथों और पैरों का इस्तेमाल सब से ज्यादा होता है. आजकल हमें ऐसे कई तरह के काम करने पड़ रहे हैं जो हाथों की त्वचा को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं. जैसे कपड़े धोते समय तरहतरह के डिटर्जेंट का उपयोग करना पड़ता है. उन में केमिकल्स कंपोनेंट काफी हाई होता है. यही नहीं कपड़े धोते समय कभी गर्म तो कभी ठंडे पानी का इस्तेमाल होता है. यह सब हमारे हाथों के लिए काफी परेशानी पैदा करते हैं. त्वचा पर रैशेज या फिर इरिटेशन हो जाती है.

मृगमरीचिका एक अंतहीन लालसा: भाग 2-मीनू ने कैसे चुकाई कीमत

ऋषभ के चेन्नई से आ जाने के बाद हमारी मुलाकात उतनी आसान न रही और न ही हमारे मिलने की कोई उपयुक्त जगह. 10-12 दिनों में ही हमारे बीच में जिस्मानी दूरी आने से हम बौखला उठे और फिर आपसी रजामंदी से भाग जाने का निर्णय ले लिया, किसी भी अंजाम की परवाह किए बगैर. मयंक का तो पहले ही अपने परिवार से कोई खास जुड़ाव नहीं था. इधर उस के शारीरिक आकर्षण में बंधी मैं भी घायल हिरनी सी उस के साथ चलने को तत्पर हो उठी.

एक दिन खुशी के स्कूल की छुट्टी थी. तब ऋषभ के औफिस जाने के बाद मैं ने खुशी को खिलापिला कर सुला दिया और चल पड़ी अपने नए सफर की ओर.

अब सोचती हूं तो बहुत धिक्कारती हूं खुद को परंतु उस वक्त वासना की आंधी के आगे मेरा सतीत्व और ममत्व दोनों हार गए थे. गोवा के एक रिजोर्ट में 2-3 दिन रहने के बाद जब हमारी खुमारी कुछ उतरी, तो समझ आया कि जीवन में शारीरिक जरूरतों के अलावा भी बहुत कुछ जरूरी होता है. उस का कारण यह था कि मयंक जो 10-15 हजार रुपए अपने घर से लाया था, वे खत्म होने को थे. मेरे पास जो भी कैश था, मैं ने मयंक के हाथ में रख दिया.

‘‘इस से क्या होगा?’’ उस के चेहरे पर नाराजगी के भाव थे. ‘‘तो मैं क्या करूं, जो मेरे पास था तुम्हें दे दिया. अब क्या करना है तुम जानो,’’ मैं गुस्से में बोली.

‘‘अच्छा तो क्या सारी जिम्मेदारी मेरी है. तुम भी तो कुछ ला सकती थीं?’’ उस ने झुंझला कर कहा.

‘‘तो प्यार का दम भरते ही क्यों थे जब तुम्हारी जेब खाली थी? बहुत बड़े मर्द बनते थे न? अब कहां गई तुम्हारी मर्दानगी? बातें तो चांदसितारों की करते थे. क्या तुम्हें इन खर्चों के बारे में पहले नहीं सोचना चाहिए था?’’ मैं ने गुस्से में अपने पहने हुए गहने उतार कर उस के हाथों में रख दिए. ‘‘मुझ पर चीखने की बजाय अपने गरीबान में झांको और देने ही हैं तो सारे गहने दो… यह मंगलसूत्र भी,’’ मयंक ने उतावलेपन से मेरी ओर बढ़ते हुए कहा.

‘‘नहीं इसे मैं नहीं दूंगी. यह ऋ षभ के प्यार की निशानी है,’’ मैं ने भावावेश में कहा. ‘‘वाह रे सतीसावित्री. पति और बच्ची को छोड़ते समय तुम्हारा कलेजा नहीं पसीजा और अब उस की निशानी को रखने का नाटक कर रही हो,’’ मयंक अब बेशर्मी पर उतर आया था.

‘‘तुम्हें शर्म नहीं आती… आज मैं तुम्हारे कारण ही अपनी हरीभरी गृहस्थी को छोड़ कर यहां हूं. यहां तक कि अपनी बेटी खुशी को भी छोड़ दिया मैं ने तुम्हारे लिए,’’ मैं लगभग चीखते हुए बोली. ‘‘तो कोई एहसान नहीं किया. तुम्हारा पति तुम्हें जो नहीं दे पाया, वह मैं ने दिया है. बड़े मजे किए हैं तुम ने मेरे साथ मैडम,’’ मयंक ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया था.

मयंक के इस बदले रूप को देख कर मैं हैरान रह गई. मन का क्षोभ, बेबसी और ठगे जाने की पीड़ा आंखों से बह निकली. मन के किसी कोने में घर से भागने का मलाल भी हुआ और अपनी नामसझी पर गुस्सा भी आया. मुझे रोता देख मयंक मेरे पास आया और हमेशा की तरह मुझे दुलारने की कोशिश की, लेकिन आज उस की यह हरकत मुझे बहुत नापाक लगी. आवेश में आ कर मैं ने उस के गाल पर जोरदार तमाचा जड़ दिया, ‘‘दूर हो जा मुझ से, मेरे पास आने की हिम्मत भी मत करना.’’

‘‘अरे पागल हो गई है क्या? क्यों चिल्ला रही है? भीड़ इकट्ठी हो जाएगी. मत भूल कि हम यहां भाग कर आए है… तुम्हारी जो मरजी आए करो,’’ कह कर मयंक पैर पटकता हुआ कमरे से बाहर चला गया. उस वक्त अपनी हालत के लिए अपने सिवा किसे कोसती. ऋ षभ ने 1-2 बार अप्रत्यक्ष रूप से मुझे समझाने की कोशिश भी की थी, परंतु उस समय मुझ पर मयंक के प्यार का ऐसा भूत सवार था कि बिना कोई आगापीछा सोचे मैं यह काम कर बैठी. अब मैं अपनी उसी करनी पर शर्मिंदा हो कर रोए जा रही थी.

शाम हो गईं मयंक नहीं लौटा. अब मैं और घबरा गई. अगर उस ने भी मुझे छोड़ दिया तो मैं क्या करूंगी, कहां जाऊंगी? एक तो अनजानी जगह उस पर हाथ में दो पैसे भी नहीं… शायद सच्चे रिश्तों को नकारने की मुझे सजा मिली थी. मेरी बरबादी की शुरुआत हो चुकी थी. ऋ षभ जैसे सच्चे जीवनसाथी और अपनी मासूम बच्ची को धोखा दे कर मैं ने जो वासनाजनित गलत राह चुनी थी उस की भयावहता का यह सिर्फ आगाज था. मयंक को मैं कौल पर कौल किए जा रही थी, पर उस का मोबाइल स्विच्ड औफ था. वहां इसी तरह ऋ षभ भी तो परेशान हो रहे होंगे, यह विचार आते ही उन्हें फोन लगाना चाहा, पर फिर रुक गई कि किस मुंह से और क्या सफाई दूंगी मैं? मयंक द्वारा लाई गई इस नई सिम में और कोई भी नंबर सेव नहीं था. रात होने को थी. मेरा सारा धैर्य जवाब दे चुका था.

तभी दरवाजे पर हुई आहट से दौड़ कर दरवाजा खोला तो हैरानपरेशान ऋ षभ को देखते ही चौंक पड़ी. मन चाहा कि लिपट जाऊं उन से और जी भर कर रो लूं, पर अपनी करतूत याद आते ही मुझ पर मानो घड़ों पानी पड़ गया. मयंक के पापा भी उन के साथ थे, पर मुझे कमरे में अकेली पा कर वे बाहर ही बैठ गए मयंक के इंतजार में. ऋ षभ ने पास आ कर स्नेह से मेरी पीठ पर हाथ रखा तो मैं पिघल कर उन के सीने से लग गई, ‘‘मुझे माफ कर दो ऋ षभ, मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई,’’ मैं ने हिचकियां लेते हुए कहा.

काफी देर तक खड़े रह ऋ षभ अपनी मूक संवेदनाएं प्रकट करते रहे, फिर बोले, ‘‘घर चलो मीनू, खुशी तुम्हारी राह देख रही है.’’ ‘‘नहीं ऋ षभ अब मैं वहां क्या मुंह ले कर जाऊंगी. खुशी से क्या कहूंगी? मैं ने जो भी किया है, उस की कोई माफी नहीं,’’ कह मैं सिसक उठी.

ऋ षभ काफी देर तक मुझे समझाते रहे. उन्होंने बताया कि किस तरह मयंक के किसी दोस्त से हमारी जानकारी निकाल कर बड़ी मुश्किल से यहां आए हैं. मैं मन ही मन और भी लज्जित हो गई. आखिरकार मैं लौटने को तैयार हो गई. करती भी क्या. मयंक का असली रंग तो देख ही चुकी थी. ‘‘अंकलजी, आप मयंक से बात कर उसे ले आना, मैं मीनू को ले कर जा रहा हूं,’’ चिंतित बैठे मयंक के पिता से ऋ षभ ने कहा और मेरा हाथ पकड़ कर बाहर आ गए.

घर पहुंचते ही दादी के हाथों से छिटक कर खुशी मम्मामम्मा कहते हुए मेरे गले आ लगी. मैं उसे जोर से छाती से लगा कर प्यार करने लगी. वहां मौजूद सभी लोगों को शायद यह प्यार बनावटी लग रहा हो, पर मैं वास्तव में शर्मिंदा थी. ऋ षभ की वजह से सभी ने ज्यादा रिएक्ट नहीं किया, पर उन की निगाहों में खासी नाराजगी दिखी. मेरा अपना भाई भी मुझ से दूर खड़ा था. मुझे लौटे 2-3 दिन बीत चुके थे. सारा समय मैं अपने कमरे में ही रहती थी. ऋ षभ आ कर मुझे खाना खिला जाते. नन्ही खुशी तो जैसे चहक उठी थी. पर मेरे सासससुर व भाई ने अभी तक मुझ से कोई बात नहीं की थी.

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