Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम में कुछ इस तरह संक्रमण से बचें

भारत में मौनसून की सब से ज्यादा प्रतीक्षा रहती है, क्योंकि यह मौसम हरेक को गरमी से राहत देता है, लेकिन साथ ही इस मौसम के कारण कई बीमारियों के पनपने की भी आशंका रहती है. बुजुर्ग और बच्चों पर इस मौसम का सब से ज्यादा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि उन की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है.

कई तरह के कीटाणु और संक्रमण मौनसून के साथ आते हैं. पेरैंट्स के लिए बहुत जरूरी है कि वे बच्चों को इन बीमारियों का शिकार होने से बचाएं और कुछ आवश्यक सावधानी बरतें. इस मौसम में नमी के कारण कीटाणुओं की संख्या में वृद्धि होती हैं. बच्चों को इन कीटाणुओं से दूर रखने के लिए काफी सावधानी बरतनी चाहिए.

मौनसून के दौरान स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ जाते हैं. इस के अलावा, त्वचा की बीमारियां, दूषित पानी से उत्पन्न बीमारियां और मच्छर जनित बीमारियां काफी बढ़ जाती हैं.

  1. वायरल बुखार

यह सब से आम बीमारी है, जो मौनसून के दौरान बच्चों को प्रभावित करती है. तापमान में  बहुत ज्यादा उतारचढ़ाव बच्चे के शरीर को बैक्टीरिया के हमले के प्रति अतिसंवेदनशील बनाता है जिस के कारण वायरल, सर्दी और फ्लू होता है. इस का इलाज यदि शुरुआती चरण में किया जाए तो ठीक रहता है वरना देरी से गंभीर संक्रमण का खतरा हो सकता है.

2. डेंगू

यह इस मौसम की आने वाली सब से गंभीर बीमारियों में से एक है. एडिस व इजिप्टी मच्छरों द्वारा काटे जाने पर होने वाली यह एक आम और खतरनाक बीमारी है. ये मच्छर गरम और आर्द्र जलवायु में पैदा होते हैं. डेंगू का प्रकोप भारत में सब से ज्यादा है. इस के शुरुआती लक्षण बुखार, सिरदर्द, बदन पर चकत्ते उभरना आदि हैं.

3. मलेरिया

यह बीमारी मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होती है. ये मच्छर बरसात का पानी इकट्ठा होने से पनपते हैं. इस के लक्षण लगातार बुखार के साथ कंपकंपी और गंभीर थकावट होती है. यदि बच्चे में इस का लक्षण दिखे तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं, ताकि बीमारी गंभीर रूप न ले सके.

4. कोलेरा

यह एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है जिस से गंभीर डिहाइड्रेशन होता है. यह रोग प्रदूषित भोजन और पानी में मौजूद बैक्टीरिया के कारण होता है. यह बीमारी साफसफाई और स्वच्छता की कमी से होती है. इस बीमारी के लक्षण हैं उलटी आना, अचानक दस्त होना, मतली, मुंह का खुश्क होना और मूत्र में कमी.

5. टायफाइड

यह दूषित पानी और भोजन से पैदा होने वाली एक आम बीमारी है. इस बीमारी के आम लक्षण लंबे समय तक बुखार, पेट में तेज दर्द और सिरदर्द हैं.

6. चिकनगुनिया

यह मच्छर से उत्पन्न होने वाली वायरल बीमारी है जो डेंगू की तरह है. इस के कारण बुखार और जोड़ों में तेज दर्द होता है जो लंबे समय तक रहता है. यह बीमारी मादा मच्छर के काटने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है. इस का कोई उचित इलाज या टीकाकरण नहीं है. यदि आप का बच्चा इस बीमारी से पीडि़त है, तो उसे भरपूर आराम करना चाहिए और उसे डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए भरपूर तरल पदार्थ दिए जाने चाहिए.

7. पेट का संक्रमण

इस सीजन में यह बच्चों को होने वाली सब से आम बीमारी है. दूषित भोजन और पानी पीने से बच्चों के पेट में संक्रमण होने की आशंका रहती है. इस के शुरुआती लक्षण उलटी, सिरदर्द और हलका बुखार हैं.

8. पीलिया

यह भी प्रदूषित भोजन और पानी पीने से फैलता है. पीलिया के लक्षण हैं आंखों और नाखूनों में पीलापन आना, भूख और स्वाद में कमी, कमजोरी, कंपकंपी के साथ तेज बुखार होना. इस बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह जानलेवा बीमारी है.

9. लेप्टोस्पाइरोसिस

स्पाइरल आकार वाले बैक्टीरियम स्पायरोछेते द्वारा लेप्टोस्पाइरोसिस बीमारी होती है. इस का दूषित पानी के साथ घनिष्ठ संबंध है. इस बीमारी के लक्षणों में तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, और लिवर का फेल हो जाना शामिल हैं. अगर इस बीमारी को अनदेखा किया जाए तो यह बीमारी घातक हो सकती है.

10. हैपेटाइटिस ए

यह बीमारी लिवर को काफी प्रभावित करती है. यह दूषित भोजन और पानी के इस्तेमाल से होती है. हैपेटाइटिस ए के सामान्य लक्षण हैं- बुखार, उलटी और शरीर में चकत्ते होना. यह एक वायरस है जो किसी को भी आसानी से प्रभावित कर सकता है. यह एक संक्रमित बीमारी है.

– डा. शब्बीर चामढाव  

(लेखक सैफी अस्पताल, मुंबई में बालरोग विशेषज्ञ हैं)

Kalki 2898 AD का टीजर रिलीज, प्रभास-दीपिका के लुक से फैंस हुए इंप्रेस

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास, बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन, एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण और एक्टर कमल हसन समेत फिल्म कल्की में नजर आने वाले है. इस फिल्म को के प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है.

गुरुवार को एक इवेंट में निर्माताओं ने फिल्म का शीर्षक और टीज़र जारी किया. फिल्म की पहली झलक में अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और प्रभास भविष्य की दुनिया में फंसे हुए हैं और अंधेरी ताकतों से लड़ रहे हैं. कल्कि 2898 AD साल 2024 में रिलीज होगी.

फैंस प्रभास के लुक से हुए इंप्रेस

‘कल्की 2898 एडी’ फिल्म में प्रभास के लुक ने जहां लोगों को निराश किया था, वहीं फिल्म के टीजर ने दर्शकों को राहत दिलाई है. प्रभास की ‘कल्की 2898 एडी’ का टीजर देखने के बाद लोगों ने इसे ‘ब्लॉकबस्टर’ तक घोषित कर दिया है. टीजर पर आ रहे रिएक्शन को देखकर कहा जा सकता है कि लोग वाकई में इससे इंप्रेस हुए हैं.

‘कल्कि 2898 एडी’ फिल्म  मशहूर नाग अश्विन द्वारा लिखित और निर्देशित है. इस विज्ञान-फाई फिल्म की घोषणा वैजयंती मूवीज की 50वीं वर्षगांठ पर की गई थी. यह फिल्म 600 करोड़ रुपये के भारी बजट पर बनी है, जो इसे अब तक की सबसे महंगी भारतीय फिल्म है.

फैंस ने जमकर की तरीफ

प्रभास की के-प्रोजेक्ट यानी ‘कल्कि 2898 एडी’ का टीजर रिलीज होते ही काफी चर्चाओं में आ गया है. टीजर देखने के बाद लोग जमकर तरीफ कर रहे है. एक यूजर ने प्रभास की अपकमिंग फिल्म ‘सालार’ से इसकी तुलना करते हुए लिखा, “मैं नाग अश्विन पर भरोसा करता हूं. अगर आप मुझसे निजी तौर पर पूछें तो ‘प्रोजेक्ट के’ की पहली झलक ‘सालार’ से ज्यादा दमदार लग रही है. जबरदस्त कॉन्सेप्ट और बड़ा जोखिम.”

दूसरे यूजर ने प्रभास का ‘कल्की 2898 एडी’ से जुड़ा लुक शेयर करते हुए लिखा, “दुनिया को बता दो कि प्रभास वापिस आ चुका है. एक अन्य यूजर ने लिखा, “ये शॉट तो पूरा बाहूबली की वाइब्स दे रहा है. प्रभास ने फैंस को जबरदस्त चीज दी है.

50 की उम्र में फिर पिता बने Arjun Rampal, गर्लफ्रेंड ने दिया बेटे को जन्म

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अर्जुन रामपाल और गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स के घर एक नन्हा मेहमान आया है. अर्जुन रामपाल की गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स ने बेटे को जन्म दिया है. बता दें अर्जुन रामपाल 50 की उम्र में 4 बच्चो के पिता बन चुके है. अर्जुन और गैब्रिएला का एक बड़ा बेटा है. अर्जुन रामपाल और उनकी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स गुरुवार 20 जुलाई को दूसरी बार पेरेंट्स बन गए हैं.

फिलहाल अर्जुन रामपाल और उनकी फैमिली घर में नन्हा मेहमान आने का जश्न मना रहे हैं. एक्टर ने खुद ट्विटर पर पोस्ट कर फैंस और फ्रेंड्स को ये गुड न्यूज शेयर की.

मिल रही है ढ़ेर सारी बधाइयां

अर्जुन रामपाल और गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स को बेटे के जन्म पर कई सारी गुड विशिज मिल रही है. फिल्मी जगत से कई स्टार ने शुभकमनाएं दी है. बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी समेत कई बॉलीवुड के दिग्गज सितारों ने कमेंट कर अर्जुन रामपाल और गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स को बेटे के जन्म की बधाई दी.

 

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अर्जुन रामपाल ने पोस्ट में लिखा

अर्जुन रामपाल ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “मुझे और मेरे परिवार को एक प्यारे से बेटे से नवाजा गया है. मां और बेटा दोनों ही एकदम स्वस्थ हैं. डॉक्टर और नर्स की जबरदस्त टीम को शुक्रिया. बेटे के आने से हमारी खुशी सातवें आसमान पर है. आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए शुक्रिया.”

इसी के साथ ही अर्जुन रामपाल ने अपने पोस्ट में एक फोटो भी शेयर की, जिसपर ‘हेलो वर्ल्ड’ लिखा था. उनकी इस पोस्ट पर सुनील शेट्टी ने हार्ट शेप इमोजी शेयर किया. वहीं बॉबी देओल ने कमेंट कर लिखा, “आपको ढेर सारी शुभकामनाएं.” दिव्या दत्ता ने पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, “दिल से बधाइयां.”

एक्टर अर्जुन रामपाल और गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स कई सालों से रिलेशनशीप में है. अर्जुन पहली पत्नी मेहर जेसिया से अलग होने के बाद से गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स के संग रिलेशनशीप में आ गए है. साल 2019 में गैब्रिएला ने आरिक को जन्म दिया था. इसके अलावा अर्जुन की पहली पत्नी से दो प्यारी बेटियां है जिनका नाम माहिका और मायरा है.

स्त्री रोग में क्रांति ला रही एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी

पिछले कुछ वर्षों में, स्त्री रोग (गायनेकोलॉजी) से जुड़े मामलों में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी काफी प्रभावशाली साबित हुई है. इन मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं में स्त्री रोग से जुड़े मामलों में बीमारी का पता लगाने और इलाज करने के लिए छोटे कट लगाए जाते हैं और स्पेशलाइज्ड उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है. लैप्रोस्कोपी सर्जरी ने गायनेकोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति ला दी है जिससे मरीज की रिकवरी कम वक्त में हो जाती है, निशान कम आते हैं और बेहतर परिणाम आते हैं. गुरुग्राम के सीके बिरला हॉस्पिटल में ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉक्टर अंजलि कुमार ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी.

  1. लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी

परंपरागत रूप से, हिस्टेरेक्टॉमी (सर्जरी के जरिए यूट्रस निकालना) पेट में चीरे के माध्यम से की जाती थी, जिसमें मरीज की रिकवरी में लंबा समय लग जाता था. हालांकि, लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है जिसके चलते मरीज की रिकवरी तुरंत होती है, ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है और निशान भी बहुत कम होते हैं. रोबोटिक-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी जैसी एडवांस तकनीक से इलाज को और मजबूती मिली है. इसमें, जटिल शारीरिक संरचनाओं को भी डॉक्टर ज्यादा आसानी से नेविगेट कर लेते हैं और ऑपरेशन में इससे काफी मदद मिलती है. जिन महिलाओं को यूटेरिन फाइब्रॉएड, एंडोमेट्रियोसिस या पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होती है उनके लिए ये प्रक्रिया काफी कारगर है.

2. एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस में यूट्रस के बाहर एंडोमेट्रियल टिशू बढ़ जाते हैं. ये गंभीर पेल्विक पेन और बांझपन का कारण बन सकता है. एंडोमेट्रियोसिस घावों के लिए लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया एक बहुत ही स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट मेथड बन गया है. इसमें डॉक्टर एंडोमेट्रियोसिस इम्प्लांट्स को विजुलाइज करने, उनका मैप बनाने, और ठीक से हटाने के लिए लेप्रोस्कोपिक उपकरणों का उपयोग करते हैं, जिससे मरीजों को लंबे समय तक राहत मिलती है. इन मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया से न केवल लक्षण कम होते हैं, बल्कि प्रजनन क्षमता भी इससे प्रिजर्व होती है. महिलाओं को इसका काफी लाभ मिलता है.

3. ओवेरियन सिस्टेक्टोमी 

ओवेरियन अल्सर, तरल पदार्थ से भरी थैली जो अंडाशय पर बनती है. इसमें दर्द, हार्मोनल असंतुलन और फर्टिलिटी संबंधी परेशानियां होने का डर रहता है. लेप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टोमी की मदद से डॉक्टर अल्सर को हटाते हैं और स्वस्थ ओवेरियन टिशू को संरक्षित करते हैं, इससे ओवेरियन फंक्शन बेहतर होता है और फर्टिलिटी भी सुधरती है.

इंट्राऑपरेटिव अल्ट्रासाउंड और फ्लोरेसेंस इमेजिंग जैसी एडवांस तकनीक से अल्सर की सटीक पहचान की जाती है और फिर उसे हटाया जाता है. इस प्रक्रिया में जोखिम कम रहता है. ओपन सर्जरी की तुलना में लेप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टोमी के बाद दर्द कम होता है, अस्पताल में मरीज को कम वक्त रहना पड़ता है और वो रोजमर्रा के काम भी जल्दी वापसी हो जाती है.

4. मायोमेक्टोमी

यूटेरिन फाइब्रॉएड के कारण पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, पेल्विक पेन होता है और प्रजनन संबंधी परेशानियां भी हो जाती हैं. मायोमेक्टोमी में गर्भाशय को संरक्षित करते हुए फाइब्रॉएड को सर्जरी के जरिए हटाया जाता है. जो महिलाएं गर्भधारण करना चाहती हैं, उनके लिए ये एक बेहतर उपाय है. लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टोमी पारंपरिक ओपन सर्जरी से ज्यादा पॉपुलर है क्योंकि इसमें छोटे चीरे लगाए जाते हैं, ब्लड लॉस कम होता है और मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है. रोबोटिक-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक मायोमेक्टोमी से सर्जरी काफी सटीक हुई है और इसके परिणामस्वरूप बेहतर प्रजनन रिजल्ट आते हैं.

5. ट्यूबल रिवर्सल

जिन महिलाओं की ट्यूबल लिगेशन (सर्जिकल नसबंदी) होती है, उनके लिए ट्यूबल रिवर्सल सर्जरी प्रजनन क्षमता को बहाल करने का अवसर प्रदान करती है. लेप्रोस्कोपिक ट्यूबल रीनेस्टोमोसिस में फैलोपियन ट्यूबों को फिर से जोड़ा जाता है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावनाएं बढ़ती हैं. मिनिमली इनवेसिव सर्जरी से निशान कम आते हैं और ऑपरेशन के बाद मरीज को कम परेशानी होती है जिससे महिलाओं को अपनी रुटीन की गतिविधियों में तेजी से लौटने में मदद मिलती है. लैप्रोस्कोपिक तकनीक, माइक्रोसर्जिकल स्किल्स से साथ जुड़ी होती है जिससे ट्यूबल रिवर्सल सर्जरी की सफलता दर और परिणामों में काफी सुधार होता है.

एडवांस गायनेकोलॉजी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के आने से प्रजनन आयु के दौरान स्त्री रोग संबंधी तमाम परेशानियों को ठीक करने के मामले में क्रांति आई है. मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं, जैसे कि लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी, एंडोमेट्रियोसिस एक्साइशन, ओवेरियन सिस्टेक्टोमी, मायोमेक्टोमी और ट्यूबल रिवर्सल से मरीजों को ओपन सर्जरी की तुलना में काफी लाभ पहुंचा है.

तेजी से रिकवरी, कम निशान और बेहतर प्रजनन रिजल्ट के चलते लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से स्त्री रोगों से पीड़ित महिलाओं के लिए आशा की किरण मिली है. तकनीक भी लगातार बढ़ रही है, जिससे ये उम्मीद की जा रही है कि लैप्रोस्कोपिक तकनीक भी आगे विकसित होगी जिससे और बेहतर रिजल्ट प्राप्त होंगे और महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ में सुधार आएगा.

Monsoon special: बारिश के मौसम में बनाएं ये 3 हैल्दी चाट

मानसून के प्रारम्भ होते ही चारों तरफ ठंडक घुल जाती है. यद्यपि बारिश के मौसम में हमारी पाचन क्षमता कमजोर हो जाती है और आहार विशेषज्ञ हल्का भोजन खाने की सलाह देते हैं परन्तु यही वो मौसम होता है जब मन हरदम कुछ चटपटा खाने का करने लगता है. बाजार में मिलने वाली ज्यादा तली भुनी डिशेज को सेहतमंद नहीं कहा जा सकता इसलिए इस मौसम में उन्हें खाने से बचना चाहिए. तो क्यों घर पर ही थोड़े से प्रयास से कुछ टेस्टी और हेल्दी बनाया जाए जिससे स्वाद भी पूरा हो जाये और सेहत भी प्रभावित न हो.

आज हम आपको ऐसी ही 3 चाट रेसिपी बता रहे हैं जो मौसम के अनुकूल भी हैं और इन्हें आप झटपट घर में उपलब्ध सामग्री से बड़ी आसानी से बना भी सकतीं हैं तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

  1. चीजी पाइनेपल चाट

कितने लोगों के लिए  –  4

बनने में लगने वाला समय –  20

मील टाइप  –  वेज

सामग्री

  1.   4 स्लाइस टिंड पाइनेपल 
  2. 1 टीस्पून दरदरी भुनी मूंगफली 
  3. 1/4 टीस्पून काली मिर्च पाउडर   
  4. 1/8 टीस्पून काला नमक                         
  5. 1/8 टीस्पून चाट मसाला                         
  6.   1/2 टीस्पून बटर                                   
  7. 1 चुटकी चिली फ्लैक्स                           
  8. 1 चीज क्यूब 

विधि

पाइनेपल के टिन को सावधानी पूर्वक खोलकर स्लाइस को बाहर निकालकर पानी से अच्छी तरह धो लें. अब एक पैन में बटर डालें और पाइनेपल को सुनहरा होने तक दोनों तरफ से सेंक लें. अब पाइनेपल को 1 इंच के टुकड़ों में काट लें और इसमें चिली फ्लैक्स को छोड़कर सभी मसाले व मूंगफली मिला लें. इन कटे पाइनेपल को पैन में फिर से डालकर ऊपर से चीज क्यूब को ग्रेट करें और चिली फ्लैक्स बुरक दें. ढककर चीज के मेल्ट होने तक एकदम धीमी आंच पर पकाएं. गर्मागर्म चाट प्लेट में डालकर सर्व करें.

2. क्रिस्पी आलू टुक चाट

कितने लोगों के लिए  – 5

बनने में लगने वाला समय – 20 मिनट

मील टाइप –  वेज

सामग्री

  1. 4 आलू                                   
  2. 1 टीस्पून हरी चटनी                           
  3. 1 टीस्पून इमली की मीठी चटनी         
  4.  1 टीस्पून घी या तेल                           
  5. 1 बारीक कटी हरी मिर्च           
  6. 1/4 टीस्पून चिली फ्लैक्स                         
  7. 1/4 टीस्पून चाट मसाला                       
  8. 1 टीस्पून बारीक कटी हरी धनिया         
  9. 1 टेबलस्पून अनार के दाने                     
  10. 1 टीस्पून फीकी सेव                           

विधि

आलू को प्रेशर कुकर में डालकर धीमी आंच पर केवल 1 सीटी ले लें. ठंडा होने पर इन्हें 4 टुकड़ों में काट लें. अप्पे पैन में घी लगाकर इन टुकड़ों को डालें और धीमी आंच पर उलटते पलटते हुये आलुओं के सुनहरा होने तक पकाएं. जब आलू गोल्डन ब्राउन हो जाएं तो एक इन्हें सर्विंग प्लेट में डालें. चटनियां, मसाले, सेव और अनार के दाने डालकर सर्व करें.

3. पेरी पेरी कॉर्न चाट

कितने लोगों क़े लिए –   4

बनने में लगने वाला समय  –  20 मिनट

मील टाइप  –  वेज

सामग्री

  1. 2 कप ताजे स्वीट कॉर्न                 
  2. 1/2 कप बारीक कटी शिमला मिर्च     
  3. 1 बारीक कटा प्याज                   
  4. 2 बारीक कटी हरी मिर्च               
  5. 1/4 कप बारीक कटा पनीर                 
  6. 1/2 टीस्पून पेरी पेरी मसाला                       
  7. 1 टीस्पून नीबू का रस                           
  8. 1/4 टीस्पून चाट मसाला                           
  9. 1/2 टीस्पून बटर                                       
  10. 1/8 टीस्पून काली मिर्च पाउडर   

विधि

कॉर्न के दानों को प्रेशर कुकर में डालकर 1/4 टीस्पून नमक और 1 टेबलस्पून पानी डालकर तेज आंच पर 1 सीटी ले लें. अब एक पैन में बटर डालकर कटी हरी मिर्च, प्याज और शिमला मिर्च डालकर तेज आंच पर 2 मिनट तक चलाते हुए पकाकर गैस बंद कर दें. ठंडा होने पर इसमें कॉर्न, पनीर सभी मसाले व नीबू का रस मिलाएं. हरे धनिये से गार्निश करके सर्व करें.

लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत

लव जिहाद पर काफी कट्टरवादियों का खून खौलने लगता है चाहे लव जिहाद की घटना उन के घर से 200 किलोमीटर दूर क्यों न हुई हो भगवाई पब्लिसिटी गैंग ने इस कदर माहौल को बिगाड़ दिया है कि आजकल प्रेम करने से पहले धर्म और जाति पूछनी होती है और लडक़ा अगर मुसलिम हो तो आसमान टूट पड़ता है.

यह बीमारी अब मुसलमानों में भी शुरू हो गई है, दिल्ली में 10 जुलाई को 20 साल के ङ्क्षहदू लडक़े की हत्या कर दी गई क्योंकि उस ने एक मुसलिम लडक़ी से पे्रम करने की हिम्मत दिखा दी थी. अररिया, बिहार, का राजकुमार का एक मुसलिम लडक़ी से प्रेम हो गया तो लडक़ी के रिश्तेदारों ने उस की हत्या लवजिहाद के तरीके से कर डाली.

धर्म के नाम पर प्रेम को अब इस तरह गंदला कर डाला गया है कि युवा दिनों के डर लगने लगा है कि उन्होंने यदि कदम कहीं आगे बढ़ा लिए तो मौत का ही सामना न करना पड़े.

भारतीय जनता पार्टी इस तरह की हत्याओं को खूब समर्थन देती है जबकि उन के चुराए हुए आदर्श नेता सुभाष चंद्र बोस ने खुए एक जापानी लडक़ी से शादी कर ली थी जब वे द्वितीय विश्वयुद्ध के दिनों में जापान में थे. अगर लव जिहाज बुरा है, अगर अपने धर्म से दूसरे से प्रेम करना हिंदू संस्कारों के खिलाफ है, अगर जाति तोड़ कर विवाह करना गलत है तो न केवल कई भारतीय जनता पार्टी के नेता, कितने ही भाजपा के भगवा लपेट में आ जाएंगे. पुराण उन मामलों से भरे पड़े हैं जिन में एक जाति के महापुरुषों ने दूसरी में शादी की थी और बच्चे भी पैदा किए थे. धर्म ने इस तरह अंधा बना रखा है कि बिना जांचे परखे आज के महंत, गुरू, पादरी, मुल्ला जो कहें वही पत्थर की लकीर हो जाता है और कुछ लोग इस लकीर को घर करने वालों को दंड देने पर उतारू हो जाते हैं.

दिल्ली के शहजाद बाग जैसी घटनाएं अब सारे देश में होने लगी हैं और प्रेम को बदनाम करने वाले ने इतना डर फैला दिया है कि जब हत्या हो रही होती है तो आसपास के लोग चुपचाप खड़े हो कर देखते हैं, कोई बीच में नहीं पड़ता. सभी को डर होता है कि मारने वाले अगर लोग पार्टी से जुड़े होंगे तो वे तो बच जाएंगे और बीच बचाव या बचाने वाले थानों, अदालतों के चक्कर में फंस जाएंगे.

आज का समाज यह बोडकास्ट कर रहा है कि प्रेम करना है तो पहले पंड़ों, मौलवियों, पादरियों, ग्रंथियों से पूछो, उन्हें चढ़ावा चड़ाओ और फिर ‘आईलवयू’, ‘आई लव यू टू बोलो.’

मुझे कैंसर से डर लगता है, कैंसर से बचने के लिए मैं क्या कर सकती हूं?

सवाल

मुझे कैंसर से बहुत डर लगता है. लेकिन सब कहते हैं जिस को कैंसर होना है तो हो कर ही रहेगा. क्या इस से बचने के लिए हम कुछ नहीं कर सकते हैं?

जवाब

यह सही है कि कैंसर एक बहुत गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्या है. कैंसर किसी को किसी भी उम्र में हो सकता है. लेकिन यह सही नहीं है कि इस से बचने के लिए आप कुछ नहीं कर सकते. कुछ उपाय हैं जिन के द्वारा आप कैंसर के खतरे को काफी कम कर सकते हैं जैसे कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से एकतिहाई धूम्रपान के कारण होती हैं. इस के अलावा खानपान की गलत आदतें, वजन अधिक होना और शारीरिक सक्रियता की कमी भी कैंसर के प्रमुख रिस्क फैक्टर है.

विश्वभर में हुए कई शोधों में यह बात सामने आई है कि कैंसर के कुल मामलों में से 25 से 30त्न स्वस्थ्य व पोषक भोजन का सेवन कर के, शारीरिक रूप से सक्रिय रह कर और मोटापे का शिकार न हो कर बचे रह सकते हैं.

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परिवार के 2 लोग और एक परिचित कैंसर से जूझ रहे हैं. पूरे विश्वभर में कैंसर के मामले भयावह तरीके से बढ़ रहे हैं. मैं जानना चाहती हूं कि इस के कारण क्या हैं?

जवाब

आधुनिक जीवनशैली और खानपान की बदली आदतों ने कैंसर का खतरा बढ़ दिया है. आज फास्ट और जंक, प्रोसैस्ड फूड का चलन बढ़ गया है जिस में कैलोरी की मात्रा काफी अधिक और पोषकता कम होती है. गैजेट्स के बढ़ते चलन ने शारीरिक सक्रियता को काफी कम कर दिया है जिस के परिणामस्वरूप उर्जा का असंतुलन हो जाता है. विश्वभर में मोटापा एक महामारी की तरह फैल रहा है जो कैंसर का एक बड़ा रिस्क फैक्टर है. अनिद्रा और तनाव का बढ़ता स्तर भी इस समस्या को और बढ़ा रहा है. –डा. देनी गुप्ता

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आज भी कायम है रेखा की खूबसूरती

मशहूर एक्ट्रेस रेखा की सुंदरता का कौन दीवाना नहीं है, वह जितनी बेहतरीन अदाकारा हैं उतनी ही वह खूबसूरत भी हैं. हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई खूबसूरत अभिनेत्रियां हुई , लेकिन रेखा जैसी खूबसूरत शायद ही कोई हो. वह उम्र के जिस पड़ाव पर हैं, उस वक्त लोगों को झुर्रियां तक आ जाती हैं, लेकिन आज भी वह यंग दिखती हैं. आज की खूबसूरत हिरोइनों को भी देती हैं टक्कर. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हाल ही में अभिनेत्री रेखा ने कुछ फोटो शूट्स करवाएं हैं. जिन्हें देखकर आप भी कहेंगे वाह क्या अदा है. इन तस्वीरों में रेखा इतनी ग्लैमरस लग रही हैं कि कोई कह ही नहीं सकता की ढलती उम्र के साथ उनकी खूबसूरती ढल गई.

 

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इंस्टाग्राम पर छाई रेखा की तस्वीरों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. इन तस्वीरों में रेखा किसी महारानी या बेगम से कम नहीं लग रही हैं. उनकी ये खूबसूरती देखते बन रही है. गोल्डन कलर के लहंगे और साड़ी में जैसे कोई अप्सरा ही आसमान से उतर आई ऐसा लग रहा है. एक तस्वीर में सर पर मोर जैसा मुकुट है, जो बेहद खूबसूरत लग रहा है. ज्वैलरी ने तो खूबसूरती में और भी चार चांद लगा दिए. चेहरे पर चमक और तेज, होंठों पर गाढ़े मरून कलर की लिपस्टिक तो जैसे क्या ही कहें अब.

मशहूर मैग्जीन वोग के लिए था फोटोशूट

दरअसल ये फोटोशूट मशहूर मैग्जीन वोग के लिए था, जिसके कवर पेज पर रेखा बिखेरे खूबसूरती के जलवे. रेखा की इन तस्वीरों को देखकर उनके फैन्स तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं. एक फैन ने लिखा कि- SHE IS QUEEN OF BOLLYWOOD, रेखा की जगह कोई नहीं ले सकता. और देखा जाए तो ये सच भी है. बॉलीवुड में रेखा की अलग ही छाप है. एक जानकारी के मुताबिग वोग दुनिया की सबसे प्रसिद्ध फैशन पत्रिका है. वोग पहली बार 1892 में एक साप्ताहिक समाचार पत्र के रूप में प्रकाशित हुआ था जो धीरे-धीरे एक फैशन पत्रिका में बदल गया. फैशन की दुनिया में वोग का बहुत बड़ा नाम है और ये लगभग 23 देशों तक फैला है. इसके 11 मिलियन से भा ज्यादा ग्राहक हैं. इस पत्रिका में दुनिया के कई प्रमुख फैशन डिजाइनर जुड़े हैं.

 

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रेखा का फिल्मी करियर

रेखा ने अपने 40 सालों के लंबे करियर में लगभग 180 से उपर फिल्मों में काम किया है. करियर के दौरान  कई दमदार रोल किए, इसके अलावा कई आर्ट फिल्मों मे भी काम किया. रेखा के करियर का ग्राफ बहुत बार नीचे भी गिरा लेकिन उन्होंने खुद को इससे उबारा और अपनी अदाकारी से सभी का दिल जीता. रेखा को तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार, दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का और एक बार सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री का अवॉर्ड मिल चुका है. जिसमें उनकी कई मुख्य फिल्में शामिल हैं जैसे- खून भरी मांग, सिलसिला, खूबसूरत. फिल्म उमराव जान के लिए रेखा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेश्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. 2010 में पद्मश्री सम्मान भी मिला.

गठबंधन: भाग 2-क्यों छिन गया कावेरी से ससुराल का प्यार

कावेरी के 7 फेरों से पहले भी सुखमय भविष्य और मन को बांधने के प्रतीक के रूप में गठबंधन की रस्म अदा की गई थी. लेकिन हुआ क्या? उदित के कंधे पर लटके दुपट्टे में बंधा गोल सिक्का कैसे तिरस्कार की टेढ़ीमेढ़ी आकृति में बदल गया, वह जान ही नहीं सकी.

दूर्वा उसे हराभरा खुशहाल जीवन कहां दे सकी? वह तो कंटीली  झाडि़यां ही चुभा रही है. हलदी का सुनहरा रंग जीवन में चढ़ने की आशा पूरी होती, उस से पहले ही विषाद ने अपने रंग बिखेर दिए थे उस पर. फूल सा उस का चेहरा जैसे खिलने से पहले ही मुर झाया सा लगने लगा था. अक्षत चावल के धवल दाने पति के अटूट प्रेम और सुखशांति देने के स्थान पर एक बो झ सा औपचारिक रिश्ता ही तो दे पाए थे उसे.

मानसिक शांति तो अब एक सपना सी लगने लगी है. गठबंधन ने दोनों के मन को तो नहीं बांधा. हां, कावेरी के पांवों में जंजीर जरूर बंध गई थी, जिसे न तो वह तोड़ पा रही थी और न ही अपने अस्तित्व को यों कैद में देख पा रही थी.

डोरबैल बजने से कावेरी सोच के दलदल से बाहर आ गई. दरवाजा खोला तो सामने नमन को देख मुर झाया मन खिल सा गया.

नमन उस के पड़ोस में ही रहता था. दोनों की दोस्ती पुरानी थी. वे एक ही स्कूल में पढ़े थे. बाद में उच्च शिक्षा के लिए नमन बैंगलुरु चला गया था. एमबीए करने के बाद नोएडा स्थित एक विदेशी कंपनी में बतौर मैनेजर वह कार्य कर रहा था. नमन का एक पैर पोलियो के कारण बेहद कमजोर था. उस पैर में वह कैलीपर पहन कर रखता था, तभी उस का चलनाफिरना संभव हो पाता था.

नमन के मन में कावेरी के लिए विशेष स्थान था, लेकिन इस का कारण कावेरी का अप्रतिम सौंदर्य या उस का पढ़ाई में अव्वल होना नहीं था. इस का कारण तो कावेरी का मन के प्रति सम्मान और स्नेही व्यवहार था, जो सहानुभूति से नहीं, मित्रता की सुगंध से सुवासित था.

विवाह के बाद कावेरी का मायके में आना कम होने लगा तो नमन से मिलनाजुलना बंद सा हो गया, लेकिन कावेरी की मित्रता जैसे ऊर्जा बनी हमेशा नमन का हाथ पकड़े साथसाथ चला करती थी.

नमन आया तो कावेरी पहले के रंग में रंग गई. बातों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा था. पुराने दोस्त, स्कूल व कालेज के टीचर्स और मौसम का मिजाज सबकुछ समा गया था उन की बातचीत के मध्य.

कावेरी अपना दर्द मन में ही रख नमन का दिल नहीं दुखाना चाहती थी, लेकिन वह भूल गई थी कि नमन जैसा अंतरंग मित्र उस की मुसकान देख कर ही अनुमान लगा लेगा कि वह दिल से निकली खुशनुमा मुसकराहट है या हंसी का जामा पहने हुए गहन पीड़ा.

कुछ देर की बातचीत के बाद नमन अचानक पूछ बैठा, ‘‘कावेरी, हम क्या अपने पुराने दिनों को ही याद करते रहेंगे या अपनी नई जिंदगी के किस्से भी शेयर करेंगे?’’

कावेरी को लगा जैसे चोरी पकड़ी गई हो. बोली, ‘‘मेरी जिंदगी तो वही, किसी भी शादीशुदा स्त्री की जिंदगी जैसी ही… सासससुर, पति, जिम्मेदारियां बस और क्या? तुम ही कुछ बताओ न,’’ कह कर उस ने पलकें  झुका लीं.

‘एक खूबसूरत जिंदादिल औरत पति से दूर बैठी हो और एक बात भी उस के बारे में न करे… अजीब लग रहा है मु झे. मैं गलत नहीं हूं तो तुम बहुत कुछ दबाए बैठी हो अपने अंदर. कावेरी, मन की गिरह खोल दो प्लीज.’

नमन की स्नेहभरी गुहार कावेरी के दिल से आंखों तक पहुंच आंसू बन कर  झर झर बहने लगी. अपनी सभी आहत अनुभूतियों को उस ने 1-1 कर नमन के समक्ष खोल कर रख दिया. नमन की सहानुभूति घावों पर मरहम का काम कर रही थी.

कावेरी की आपबीती सुन कुछ सोचता हुआ सा नमन बोला, ‘‘कावेरी, क्या तुम्हें पूरा विश्वास है कि उदित ने तुम दोनों की रिपोर्ट्स को ले कर सच बोला है तुम से?’’

‘‘मतलब? उदित ने औनलाइन देखी थीं रिपोर्ट्स. अपनी मरजी से थोड़े ही कहा था.’’

‘‘लेकिन तुम ने तो नहीं देखीं, फिर प्रिंट्स भी नहीं निकलवाए उस ने. कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम नहीं वह…’’

नमन की बात बीच में ही काट कर कावेरी बोल उठी, ‘‘विश्वास तो नहीं हो रहा कि उदित इतना बड़ा  झूठ बोल सकता है. वह गुस्सैल जरूर है, लेकिन धोखेबाज भी…?’’ बेचैन हो वह सोच में डूब गई.

उसे चिंतित देख नमन ने उस का ध्यान दूसरी ओर लगाने के उद्देश्य से चुटकुले सुनाने शुरू कर दिए. एक बार फिर हंसीमजाक का दौर चल पड़ा. इस बीच सुधांशु का जयपुर पहुंच कर फोन आ गया. नमन वहां आया हुआ है यह जान कर कावेरी के लिए चिंतित सुधांशु को राहत सी मिली. नमन से उन्होंने रात में कावेरी के पास ही रुकने का अनुरोध कर किया.

रात के 1 बजे दोनों की उनींदी आंखों ने बातचीत की गति पर थोड़ा विराम लगा  ही दिया. सोने से पहले नमन हौले से मुसकरा कर बोला, ‘‘कावेरी, एक बात कहना चाहता हूं. हम कितने वक्त बाद मिले हैं. इस के बाद न जाने कब मिल पाएं. तुम्हें कोई तकलीफ न हो तो 1-1 कौफी हो जाए. हां, लेकिन कौफी मैं बनाऊंगा. तुम रुको न यहीं, मैं बस यों गया और यों आया.’’

कावेरी मित्र के आग्रह को टाल नहीं सकी.  अपने पिता के कमरे में जा कर कावेरी नमन के सोने का प्रबंध करने लगी. नमन कौफी ले कर आया तो पहला घूंट भरते ही बोली, ‘‘कमाल की कौफी बनाते हो नमन, तुम्हारी होने वाली वाइफ से रश्क सा हो रहा है मु झे,’’ कहते हुए कावेरी खिलखिला कर हंस पड़ी और फिर वहीं बैड पर पैर फैला कर चैन से बैठ कौफी का आनंद लेने लगी.

नमन ने उसे अपने मोबाइल में उन लड़कियों के फोटो दिखाए, जहां उस के रिश्ते की बात चल रही थी. कावेरी से उस की पसंद की लड़की चुनने को कह कर वह वाशरूम चला गया.

थकी हुई कावेरी वहीं बैड पर लेटी तो पता ही नहीं चला कि कब आंख लग गई.

सुबह अलार्म बजने पर ही कावेरी की नींद खुली. हड़बड़ा कर बिस्तर से उठ वह कमरे से बाहर निकली. नमन बालकनी में खड़ा गुलाबी आसमान पर बिखरी छटा निहार रहा था. इस से पहले कि वह रात के विषय में कोई सवाल करती, नमन स्वयं ही बोल उठा, ‘‘रात को जब मैं चेंज कर अंकल के कमरे में वापस आया तो तुम गहरी नींद में थीं. तुम्हें उठाना मैं ने ठीक नहीं सम झा और तुम्हारे कमरे में जा कर सो गया.’’

चाय पी कर नमन वापस चला गया. जब तक सुधांशु लौटे नहीं नमन प्रतिदिन कावेरी से मिलने आता रहा. सुधांशु लौटे तो कावेरी जैसे नन्ही सी बच्ची बन गई. वह यह देख कर बहुत प्रसन्न थी कि इतने कम समय के लिए जयपुर जाने पर भी पापा यह नहीं भूले थे कि लाख की चूडि़यां कावेरी को बहुत पसंद हैं.

ंगबिरंगी चूडि़यों और कंगनों के साथ ही पापा गुलाबी और पीले रंग में रंगा, गोटापत्ती के काम वाला एक सुंदर लहंगा भी लाए थे. कितना खुश देखना चाहते थे वे कावेरी को, चाह कर भी कावेरी सुधांशु को अपना दुख नहीं बता पाई.

वह जानती थी कि उस के मां न बन पाने पर ससुराल वालों का उसे दोष देना पापा को बहुत कष्ट पहुंचाएगा. अपनी पीड़ा भीतर ही दबा पापा के स्नेह को पलपल महसूस करती कावेरी के 10 दिन बातें करते और हंसतेहंसाते कब बीत गए, पता ही नहीं चला उसे.

वापसी के दिन नाश्ता करने वह टेबल पर बैठी ही थी कि उबकाई आने  लगी. उबकाई के साथ ही चक्कर भी आ रहा था. सुधांशु उसे घर के पास ही डाक्टर सुजाता के क्लीनिक पर ले गए.

डाक्टर सुजाता ने जांच कर दवा के साथ कुछ टैस्ट भी लिख दिए. टैस्ट के लिए सैंपल्स दे कावेरी घर आ कर दवा खा आराम करने लेट गई. दोपहर को नमन कावेरी से मिलने आया तो साथ में उस की पसंद का ढोकला भी लाया.

कावेरी की पसंदीदा दुकान का ढोकला उस पर पापा और नमन का साथ, कावेरी भूल ही गई कि वह बीमार है. तीनों की बातों और ठहाकों से घर गूंज उठा.

शाम होतेहोते कावेरी की तबीयत बिलकुल ठीक हो गई. सुधांशु चाहते थे कि वह अगले दिन तक रुक जाए, लेकिन कावेरी ने जाना ही उचित सम झा, क्योंकि उदित सुबह ही सिडनी से अपने घर लौट चुका था.

डाक्टर सुजाता के क्लीनिक पर रिपोर्ट्स औनलाइन देखने की सुविधा नहीं थी और स्वास्थ्य में सुधार के कारण कावेरी को रिपोर्ट लेना आवश्यक भी नहीं लग रहा था, इसलिए वह कैब बुक करवाने लगी.

नमन और सुधांशु का मानना था कि रिपोर्ट एक बार देखनी जरूर चाहिए. कावेरी को लौटने में देर न हो जाए, इसलिए नमन ने कहा कि वह क्लीनिक से रिपोर्ट ले कर उस का फोटो खींच कावेरी को व्हाट्सऐप पर भेज देगा. कैब बुला कर पापा और नमन से विदा ले वह टैक्सी में बैठ कर चली गई.

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