Bigg Boss OTT 2: क्या सलमान ने छोड़ दिया है शो, समाने आई ये वजह

टीवी का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस का ओटीटी वर्जन फैंस को खूब पसंद आ रहा है. इस शो को जनता का काफी प्यार मिल रहा है. इस शो में टीवी स्टार के साथ-साथ बॉलीवुड के एक्टर्स और तमाम सोशल मीडिया स्टार्स को भी जगह दी गई है.

इस बार बिग बॉस ओटीटी को सलमान खान होस्ट कर है. शो को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. बिग बॉस ओटीटी सलमान खान से जुड़ा हुआ है वह हर वीकेंड पर शो होस्ट करते है इसके साथ ही वीकेंड का वार पर सलमान सबकी क्लास लगाते है. दावा किया जा रहा है सलमान खान बॉस ओटीटी 2 की होस्टिंग छोड़ रहे है.

सलमान ने छोड़ा बिग बॉस

दरअसल पिछले वीकेंड वार पर सलमान खान के हाथ में सिगरेट नजर आई थी, जिसे दर्शकों ने नोटिस कर लिया था. एपिसोड़ वायरल होते ही सोशल मीडिया पर सलमान खान  का सिगरेट पीना एक मुद्दा बन गया था, जिस वजह से उन्हें खूब ट्रोल किया गया. लेकिन सलमान को कुछ लोगों ने सपोर्ट करते हुए कहा सिगरेट पीना इसमे क्या गलत है.

काफी चर्चा के बाद, सलमान इस विवाद के बाद शो की होस्टिंग छोड़ सकते हैं. वहीं, अब दावा किया जा रहा है कि सलमान ने बिग बॉस ओटीटी 2 की होस्टिंग को छोड़ने का फैसला लिया है. इसी के साथ ही सलमान टीवी पर प्रसारित होने वाले बिग बॉस के सीजन 17 को भी होस्ट नहीं करेंगे. कहा जा रही है कि सलमान और निर्माताओं को कुछ लेना-देना हो सकता है, जिन्होंने जानबूझकर होस्टिंग के बीच सलमान के सिगरेट पीने वाले शॉट को वीकेंड का वार में एपिसोड प्रसारित किया.

इस वीकेंड पर नहीं दिखे सलमान

अभी हाल ही में बिग बॉस ओटीटी 2 के वीकेंड के वार पर सलमान खान होस्टिंग करते नजर नहीं आए. ऐसे में कहा गया कि सलमान किसी मिटमेंट की वजह से एपिसोड की शूटिंग नहीं कर पाए. उनकी जगह पर कृष्णा अभिषेक और भारती सिंह ने वीकेंड का वार होस्ट किया था. हालांकि कृष्णा अभिषेक की होस्टिंग को जनता को पसंद नहीं आई. सलमान वीकेंड के वार पर कड़क अंदाज में सभी कंटेस्टेंट्स को फटकार लगाते हैं, ये भारती और कृष्णा मिलकर नहीं कर पाए.

Monsoon special: बालों के लिए वरदान यह चीज आप के घर में ही है

Monsoon सीजन चल रहा है ऐसे में मौसम सुहाना हो जाता है. बरसात के मौसम में अक्सर बाल झड़ने की समास्या उत्पन्न हो जाती है. झड़ते बालों से छुटकारा पाने के लिए हमारे घर में मौजूद कई चीजें हमारे ब्यूटी को बढ़ाने में काम आती है. अब चाहे स्किन हो या हमारे हेयर्स की केयर, भारतीय किचन में मौजूद हर चीज काम की साबित हो सकती है.

Monsoon के सीजन में बहुत से लोगों को बालों के झड़ने की समस्या अधिक होती है ड्राई स्कैल्प के कारण बालों में रूसी इंचिग की समस्या भी आने लगती है. अगर आप भी अपने बालों के लिए किसी अच्छी होमरेमडी की तलाश में हैं तो ये लेख आपके लिए ही बहुत काम के लिए है.

आप अपने किचन में रखे मेथी के दानों को इस्तेमाल में ला सकते हैं. मेथी के दानों में आयरन प्रोटीन होता है. यह बालों की ग्रोथ उन्हें टूटने से बचाने में कारगर है. आइए जानते हैं मेथी के दानों का कैसे कर सकते हैं इस्तेमाल.

हेयर मास्क का करें इस्तेमाल

मेथी के दानों की गुडनेस को अपने बालों में उतारने के लिए इसका इस्तेमाल हेयर मास्क की तरह कर सकते हैं. इसके लिए मेथी के दानों को रात भर के लिए पानी में भिगो कर छोड़ दें. अगली सुबह मेथी के दानों को मिक्सर में पीस कर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट में कोकोनट मिल्क को एड कर सकते हैं. इस पेस्ट को अपनी स्कैल्प पर अप्लाई कर कुछ देर छोड़ दें. करीब आधे घंटें बाद नॉर्मल पानी से हेयर वॉश कर लें. इस मास्क को हफ्ते में तीन बार ट्राई कर सकते हैं.

मेथी के बीज खाने में करें इस्तेमाल

इसके अलावा आप मेथी के दानो का सेवन नार्मल यूज़ की तरह कर सकते है. सबसे पहले आप मेथी के दानों को पानी के सुबह पी सकते है.

Monsoon Special: बारिश के मौसम में कैसे करें विटामिन डी की कमी को पूरा

हमारे शरीर के लिए धूप बेहद आवश्यक होती है, क्योंकि इस से विटामिन डी की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है. विटामिन डी हमारे शरीर के लिए आवश्यक तत्वों में से एक है. यह कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखता है. इस के अलावा मांसपेशियों के लिए भी विटामिन डी की आवश्यकता होती है और यह आप के शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है. विटामिन डी की पूर्ति सूर्य के संपर्क में आने से होती है. ज्यादातर लोगों को इस तरीके से कुछ विटामिन डी मिल जाती है, लेकिन बारिश होने के कारण हम सूर्य के संपर्क में नहीं आ पाते और विटामिन डी को प्राप्त करना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है. हमारे शरीर को ठीक से काम करने के लिए नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी की आवश्यकता है.

इसलिए अगर धूप ना हो, तो इस की आवश्यकता को पूरा करने के लिए यहां हम आप को कुछ तरीके बताएंगे. तो देरी किस बात की है, आइए जानते हैं इन तरीकों के बारे में-

डाइट

आप की डाइट से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है. आप अपने डाइट में कम मात्रा में विटामिन डी वाले कुछ अन्य खाद्य पदार्थ जैसे अंडे की जर्दी, पनीर और मशरूम शामिल कर सकते हैं. कई खाद्य पदार्थ विटामिन डी से भरपूर होते हैं, जैसे गाय का दूध, पौधे आधारित दूध, संतरे का रस, दही आदि.

सप्लीमेंट

अगर आप की डाइट विटामिन डी की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाती है, तो आप सप्लीमेंट ले सकती हैं.
विटामिन डी वसा में घुलनशील होती है और इसलिए जब आप सप्लीमेंट को किसी भोजन या नाश्ते के साथ लेती हैं तो यह अच्छे से अवशोषित होते हैं.

सावधानियां

कई लोग यह जाने बिना कि उन्हें सप्लीमेंट की आवश्यकता है या नहीं, इस का सेवन कर लेते हैं, लेकिन आ पको पहले विटामिन डी की कमी है या नहीं, यह निर्धारित करना चाहिए. इस के लिए पहले ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है. अगर विटामिन डी की कमी पाई जाती है, तो आप डाक्टर की मदद से सप्लीमेंट का सेवन कर सकती हैं.

अधिक विटामिन डी के सेवन से हो सकता है स्वास्थ्य को खतरा

बहुत अधिक विटामिन डी लेना आप के शरीर के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. आप के रक्त में विटामिन डी का अधिक स्तर उलटी, मतली, भूख न लगना, डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द, अत्यधिक पेशाब आना और गुरदे की पथरी होने का कारण बन सकता है. इसीलिए अगर आप को विटामिन डी की कमी है, तो एक बार माहिर डाक्टर से जरूर परामर्श करें.

हार्ट अटैक के केस बहुत बढ़ रहे है. ऐसे में मुझे जानना है हार्ट अटैक आने पर क्या करें?

सवाल

आजकल हार्ट अटैक के मामले बहुत बढ़ गए हैं. मैं जानना चाहती हूं कि हार्ट अटैक आने पर क्या करना चाहिए?

जवाब

हार्ट अटैक के समय धमनियों में जो अवरोध/ब्लौकेज होती है वह थक्का बनने के कारण पूरे 100% तक हो जाती है. इस से रक्त का प्रवाह रुक जाता है और हृदय की मांसपेशियां नष्ट होने लगती हैं. अधिकतर मामलों में मरीज को छाती में तेज दर्द या सांस फूलने की समस्या होती है. अत: जैसे ही मरीज सांस उखड़ने या छाती में दर्द होने की शिकायत करे तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. इस के पहले सोर्बिट्रेट टैबलेट को जीभ के नीचे रखना चाहिए, एहतियात के तौर पर मरीज को एक डिस्प्रिन की गोली भी दी जा सकती है. मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए ताकि शीघ्र ब्लौकेज को निकाला जा सके और हृदय को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जाए.

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मैं 56 वर्षीय घरेलू महिला हूं. मुझे एक बार हार्ट अटैक आ चुका है. क्या मेरे लिए सैकंड हार्ट अटैक का खतरा बहुत बढ़ गया है?

जवाब

जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका है उन्हें दोबारा आने का रिस्क सामान्य लोगों से बहुत ज्यादा होता है. हर साल यह खतरा 10-15% बढ़ जाता है. 5 साल में 50% लोगों को दूसरा अटैक आ जाता है. पहले हार्ट अटैक के बाद जीवनशैली में बदलाव लाएं, तलेभुने खाद्यपदार्थों का सेवन न करें, बाहर का खाना खाने से बचें, घर पर बना सादा खाना खाएं.

अपने रक्त में शुगर और कोलैस्ट्रौल के स्तर और रक्तदाब को नियंत्रित रखें. नियत समय पर अपनी दवा लें. धूम्रपान और सैकंड हैंड स्मोकिंग भी सैकंड हार्ट अटैक आने के खतरे को बढ़ा देता है इसलिए अगर आप के परिवार में कोई धूम्रपान करता है तो उस से दूर रहें.

डा. आनंद कुमार पांडेय

डाइरैक्टर ऐंड सीनियर कंसल्टैंट, इंटरनैशनल कार्डियोलौजी, धर्मशिला नारायणा सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल 

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भुट्टा परांठा पिज्जा: स्वाद भी सेहत भी

आज पिज्जा, नूडल्स और पास्ता जैसे फास्ट फूड हर आयुवर्ग की पहली पसंद हैं। ये खाने में भी सभी को बहुत पसंद आते हैं, पर इन फास्ट फूड का सब से बड़ा नुकसान यह है कि इन का बेस मैदा का होता है और इन्हें लंबे समय तक ताजा रखने के लिए अनेक प्रिजर्वैटिव का प्रयोग करने के साथसाथ पिज्जा तैयार करते समय इन का स्वाद बढ़ाने के लिए फूड कलर और ऐसेंस का प्रयोग किया जाता है, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह होते हैं.

आज यह हमारे आहार का प्रमुख हिस्सा बन चुका है इसलिए इस से बचा तो नहीं जा सकता पर घर पर थोड़े से प्रयास से हैल्दी पिज्जा जरूर बनाया जा सकता है, जो सभी को बेहद पसंद भी आएगा और इस तरह हम फास्ट फूड का सेवन भी भरपूर कर सकेंगे और इन के नुकसानों से बचे भी रहेंगे.

इस समय भुट्टे का सीजन चल रहा है, इसलिए आज हम आप को भुट्टे से पिज्जा बनाना बता रहे हैं, जिसे आप घर की सामग्री से बड़ी आसानी से बना सकते हैं।

आइए, जानते हैं कि इसे कैसे बनाया जाता है :

कितने लोगों के लिए : 4
बनने में लगने वाला समय : 30 मिनट
मील टाइप : वेज

सामग्री
ताजा भुट्टे : 2
मक्के का आटा : 4 बङे चम्मच
कौर्नफ्लोर : 2 बङे चम्मच
चिली फ्लैक्स : 1 बङा चम्मच
पिज्जा सीजनिंग : 1 बङा चम्मच
पिघला मक्खन : 2 बङे चम्मच
बारीक कटा प्याज : 1 छोटा
बारीक कटी शिमलामिर्च : 1 बङा चम्मच
पनीर (बारीक कटा) : 1 बङा चम्मच
औलिव औयल : 1 बङा चम्मच
पिज्जा सौस : 1 बङा चम्मच
मोजरेला चीज : 200 ग्राम
नमक स्वादानुसार

विधि : भुट्टे के दानों को निकाल कर बारीक पीस लें. फिर कौर्नफ्लोर, मक्के का आटा और स्वादानुसार नमक मिला कर आटे जैसा गूंध लें और बिना रेस्ट दिए तैयार मिश्रण से पिज्जा बेस जितना बड़ा परांठा बनाएं। इसे घी लगा कर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें. जब यह ठंडा हो जाए तो बटर लगा कर पिज्जा सौस लगाएं और कटा प्याज, शिमलामिर्च, पनीर और औलिव औयल डाल कर मोजरेला चीज को किस दें. ऊपर से चिली फ्लैक्स और पिज्जा की सीजनिंग डाल कर 5 मिनट माइक्रोवेब में 220 डिग्री पर बेक कर के सर्व करें.

कैसे रुकेगा कामकाजी महिलाओं का शोषण

यौन उत्पीड़न को एक अवांछित व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया है. कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न दुनिया में एक व्यापक समस्या है. फिर चाहे वह विकसित राष्ट्र हो या विकासशील या फिर अविकसित, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार हर जगह आम है. यह पुरुषों और महिलाओं दोनों पर नकारात्मक प्रभाव देने वाली एक सार्वभौमिक समस्या है.

यह महिलाओं के खिलाफ अपराध है, जिन्हें समाज का सब से कमजोर तबका माना जाता है. इसलिए उन्हें कन्या भू्रण हत्या, मानव तस्करी, पीछा करना, यौन शोषण, यौन उत्पीड़न से ले कर सब से जघन्य अपराध बलात्कार तक सहना पड़ता है. किसी व्यक्ति को उस के लिंग के कारण परेशान करना गैरकानूनी है.

यौन उत्पीड़न अवांछित यौन व्यवहार है, जिस से किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने की उम्मीद की जा सकती है जो आहत, अपमानित या डरा हुआ महसूस करता है. यह शारीरिक, मौखिक और लिखित भी हो सकता है.

कार्यस्थल छोड़ने का मुख्य कारण

सितंबर, 2022 में जारी यूएनडीपी जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत में काम करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 2021 में लगभग 36त्न से घट कर 2022 में 33त्न हो गया. कई प्रकाशनों ने कई मूल कारणों की पहचान की, जिन में महामारी, घरेलू दायित्वों में वृद्धि और शादी एक बाधा के रूप में शामिल है. लेकिन क्या यही कारण हैं? नहीं, जिन अंतर्निहित कारणों पर हम अकसर विचार करने में विफल रहे हैं उन में से एक कार्यस्थल में उत्पीड़न है, जिस के कारण महिलाएं कार्य छोड़ देती हैं.

महिलाओं ने वित्तीय रूप से स्वतंत्र बन कर, सरकारी, निजी और गैरलाभकारी क्षेत्रों में काम कर के समाज के मानकों को तोड़ने की कोशिश की है, जो उन्हें मालिकों, सहकर्मियों और तीसरे पक्ष से उत्पीड़न के लिए उजागर करता है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यस्थल या कार्यालय में यौन उत्पीड़न के 418 मामले दर्ज किए गए. लेकिन यह संख्या केवल एक उत्पीड़न को इंगित करती है. अधिकांश लोगों का मानना है कि कार्यस्थल उत्पीड़न केवल यौन प्रकृति का हो सकता है, लेकिन वास्तव में विभिन्न प्रकार के उत्पीड़न से संबंधित विभिन्न श्रेणियां हैं, जो सभी कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रभावित करती हैं, जिस से अपमान और मानसिक यातना होती है. इस के परिणामस्वरूप उन की कार्यक्षमता में कमी आती है और काम छूट जाता है.

कुछ महिलाएं अभी भी कार्यस्थल में उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने से डरती हैं. यौन उत्पीड़न की निम्न उल्लेखनीय शिकायतें जो राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं:

  •  रूपन देव बजाज, (आईएएस अधिकारी), चंडीगढ़ ने ‘सुपर कौप’ केपीएस गिल के खिलाफ शिकायत की.
  •  देहरादून में पर्यावरण मंत्री के खिलाफ अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ की एक कार्यकर्ता ने शिकायत दर्ज की.
  •  मुंबई में अपने सहयोगी महेश कुमार लाला के खिलाफ एक एयरहोस्टेस ने कंप्लेन की.

शिकायत कैसे दर्ज कर सकते हैं?

  •  शिकायत घटना के 3 महीने के भीतर लिखित रूप में की जानी चाहिए. घटनाओं की शृंखला के मामले में पिछली घटना के 3 महीने के भीतर रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए. वैध परिस्थितियों पर समयसीमा को और 3 महीने तक बढ़ाया जा सकता है.
  •  शिकायतकर्ताओं के अनुरोध पर जांच शुरू करने से पहले समिति सुलह में मध्यस्थता करने के लिए कदम उठा सकती है. शारीरिक/मानसिक अक्षमता, मृत्यु या अन्य किसी स्थिति में कानूनी उत्तराधिकारी महिला की ओर से शिकायत कर सकता है.
  •  शिकायतकर्ता जांच अवधि के दौरान स्थानांतरण (स्वयं या प्रतिवादी के लिए) 3 महीने की छुट्टी या अन्य राहत के लिए कह सकता है.
  •  जांच शिकायत के दिन से 90 दिनों की अवधि के भीतर पूरी की जानी चाहिए. गैरअनुपालन दंडनीय है.

गुनाह: भाग 3- आकाश ने अपनी गृहस्थी तबाह क्यों की?

‘‘वह गुजरा हुआ कल था, जिसे मैं कब का भुला चुका हूं,’’ मैं मुश्किल से बोल पाया.

‘‘तुम्हारे लिए यह सामान्य सी बात हो सकती है, पर मेरा तो सब कुछ दफन हो गया है, उस गुजरे हुए कल के नीचे. कैसे भूल जाऊं उन दंशों को, जिन की पीड़ा में मैं आज भी सुलग रही हूं. याद करो अपनी शादी की सालगिरह का वह दिन, जब तुम जल्दी चले गए थे. देर रात तक तुम्हारा इंतजार करती रही मैं. हर आहट पर दौड़ती हुई मैं दरवाजे तक जाती थी. लगता था कहीं आसपास ही हो तुम और जानबूझ कर मुझे परेशान कर रहे हो. तुम लड़खड़ाते हुए आए थे. मैं संभाल कर तुम्हें बैडरूम में ले गई?थी. खाने के लिए तुम ने इनकार कर दिया था.

शायद श्रुति के साथ खा कर आए थे. मैं पलट कर वापस जाना चाहती थी कि तुम ने भेडि़ए की तरह झपट्टा मार कर मुझे दबोच लिया था. तुम देर तक मुझे नोचतेखसोटते रहे थे और मैं तुम्हारी वहशी गिरफ्त में असहाय सी तड़पती रही थी. तुम्हारी दरिंदगी से मेरा मन तक घायल हो गया था. बोलो, कैसे भूल जाऊं मैं वह सब?’’

‘‘बस करो रेवा,’’ कानों पर हाथ रख कर मैं चीत्कार कर उठा, ‘‘मेरे किए गुनाह विषैले सर्प बन कर हर पल मुझे डसते रहे?हैं. अब और सहन नहीं होता. प्लीज, सिर्फ एक बार माफ कर दो मुझे. वादा करता हूं भविष्य में तुम्हें तकलीफ नहीं होने दूंगा.

‘‘तुम पहले ही मुझे इतना छल चुके हो कि अब और गुंजाइश बाकी नहीं है. सच तो यह है कि तुम्हारे लिए मेरी अहमियत उस फूल से अधिक कभी नहीं रही, जिसे जब चाहा मसल दिया. तुम ने कभी समझने की कोशिश ही नहीं की कि बिस्तर से परे भी मेरा कोई वजूद है. मैं भी तुम्हारी तरह इंसान हूं. मेरा शरीर भी हाड़मांस से बना हुआ है, जिस के भीतर दिल धड़कता है और जो तुम्हारी तरह ही सुखदुख का अनुभव करता है.’’

‘‘इस बीच रीना ने मेरी बहुत सहायता की. जीने की प्रेरणा दी. कदमकदम पर हौसला बढ़ाया. वह भावनात्मक संबल न देती तो मैं टूट गई होती. अपना अस्तित्व बचाने के लिए मैं अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती थी. उस ने भरपूर साथ दिया. तुम ने कभी नहीं चाहा मैं नौकरी करूं. इस के लिए तुम ने हर संभव कोशिश भी की. अपने बराबर मुझे खड़ी होते देख तुम विचलित होने लगे थे. दरअसल, मेरे आंसुओं से तुम्हारा अहं तुष्ट होता था, शायद इसीलिए तुम्हारी कुंठा छटपटाने लगी?थी.’’

‘‘मुझे अपने सारे जुर्म स्वीकार हैं. जो चाहे सजा दो मुझे, पर प्लीज अपने घर लौट चलो,’’ मैं असहाय भाव से गिड़गिड़ाता हुआ बोला.

‘‘कौन सा घर?’’ वह आपे से बाहर हो गई, ‘‘ईंटपत्थर की बेजान दीवारों से बना वह ढांचा, जहां तुम्हारे तुगलकी फरमान चलते हैं? तुम्हें जो अच्छा लगता वही होता था वहां. बैडरूम की लोकेशन से ले कर ड्राइंगरूम की सजावट तक सब में तुम्हारी ही मरजी चलती थी. मुझे किस रंग की साड़ी पहननी है, किचन में कब क्या बनना है, इस सब का निर्णय भी तुम ही लेते थे. वह सब मुझे पसंद है भी या नहीं, इस से तुम्हें कुछ लेनादेना नहीं?था. मैं?टीवी देखने बैठती तो रिमोट तुम झपट लेते. जो कार्यक्रम मुझे पसंद थे उन से तुम्हें चिढ़ थी.

‘‘वहां दूरदूर तक मुझे अपना अस्तित्व कहीं भी नजर नहीं आता था… हर ओर तुम ही तुम पसरे हुए थे. मेरे विचार, मेरी भावनाएं, मेरा अस्तित्व सब कुछ तिरोहित हो गया तुम्हारी विक्षिप्त कुंठाओं में. तुम्हारी हिटलरशाही की वजह से मेरा जीना हराम हो गया था. उस अंधेरी कोठरी में दम घुटता था मेरा, इसीलिए उस से दूर बहुत दूर यहां आ गई हूं ताकि सुकून के 2 पल जी सकूं, अपनी मरजी से.’’

‘‘अब तुम जो चाहोगी वही होगा वहां. तुम्हारी मरजी के बिना एक कदम भी नहीं चलूंगा मैं. तुम्हारे आने के बाद से वह घर खंडहर हो गया है. दीवारें काट खाने को दौड़ती हैं. बेटी की किलकारियां सुनने को मन तरस गया है. उस खंडहर को फिर से घर बना दो रेवा,’’ मेरा गला भर आया था.

‘‘अपनी गंदी जबान से मेरी बेटी का नाम मत लो,’’ उस की आवाज से नफरत टपकने लगी, ‘‘भौतिक सुख और रासायनिक प्रक्रिया मात्र से कोई बाप कहलाने का हकदार नहीं हो जाता. बहुत कुछ कुरबान करना पड़ता है औलाद के लिए.

याद करो उन लमहों को, जब मेरे गर्भवती होने पर तुम गला फाड़फाड़ कर चीख रहे थे कि मेरे गर्भ में तुम्हारा रक्त नहीं, मेरे बौस का पल रहा है. तुम्हारे दिमाग में गंदगी का अंबार देख कर मैं स्तब्ध रह गई थी. कितनी आसानी से तुम ने यह सब कह दिया था, पर मैं भीतर तक घायल हो गई?थी तुम्हारी बकवास सुन कर. जी तो चाहा था कि तुम्हारी जबान खींच लूं, पर संस्कारों ने हाथ जकड़ लिए थे मेरे.

‘‘तुम चाहते थे कि मैं गर्भपात करा लूं. अपनी बात मनवाने के लिए जुल्मों का हथकंडा भी अपनाया पर मैं अपने अंश को जन्म देने के लिए दृढ़संकल्प थी. प्रसव कक्ष में मैं मौत से संघर्ष कर रही थी और तुम श्रुति के साथ गुलछर्रे उड़ा रहे थे. एक बार भी देखने नहीं आए कि मैं किस स्थिति में हूं. तुम तो चाहते ही थे कि मैं मर जाऊं ताकि तुम्हारा रास्ता साफ हो जाए. इस मुश्किल घड़ी में रीना साथ न देती तो मर ही जाती मैं.’’

आंखों में आंसू लिए मैं अपराधी की भांति सिर झुकाए उस की बात सुनता रहा.

‘‘मुझे परेशान करने के तुम ने नएनए तरीके खोज लिए थे. तुम मेरी तुलना अकसर श्रुति से करते थे. तुम्हारी निगाह में मेरा चेहरा, लिपस्टिक लगाने का तरीका, हेयरस्टाइल, पहनावा और फिगर सब कुछ उस के आगे बेहूदा था. मेरी हर बात में नुक्स निकालना तुम्हारी आदत में शामिल हो गया था.

मूर्ख, पागल, बेअक्ल… तुम्हारे मुंह से निकले ऐसे ही जाने कितने शब्द तीर बन कर मेरे दिल के पार हो जाते?थे. मैं छटपटा कर रह जाती थी. भीतर ही भीतर सुलगती रहती?थी तुम्हारे शब्दालंकारों की अग्नि में. इतनी ही बुरी लगती हूं तो शादी क्यों की?थी मुझ से? मेरे इस प्रश्न पर तुम तिलमिला कर रह जाते थे.

‘‘उकता गई?थी मैं उस जीवन से. ऐसा लगता था जैसे किसी ने अंधेरी कोठरी में बंद कर दिया हो. मेरी रगरग में विषैले बिच्छुओं के डंक चुभने लगे थे. जहर घुल गया था मेरे लहू में. सांस घुटने लगी थी मेरी. उस दमघोंटू माहौल में मैं अपनी बेटी का जीवन बरबाद नहीं कर सकती. उपेक्षा के जो दंश मैं ने झेले हैं, उस की छाया उस पर हरगिज नहीं पड़ने दूंगी.

बेहतर है, तुम खुद ही चले जाओ वरना तुम जैसे बेगैरत इंसान को धक्के मार कर बाहर का रास्ता दिखाना भी मुझे अच्छी तरह आता है. एक बात और समझ लो,’’ मेरी ओर उंगली तान कर वह शेरनी की तरह गुर्राई, ‘‘भविष्य में भूल कर भी इधर का रुख किया तो बाकी बची जिंदगी जेल में सड़ जाएगी,’’ मेरी ओर देखे बिना उस ने अंदर जा कर इस तरह दरवाजा बंद किया जैसे मेरे मुंह पर तमाचा मारा हो.

मैं किंकर्तव्यविमूढ सा खड़ा रहा. इंसान के गुनाह साए की तरह उस का पीछा करते हैं. लाख कोशिशों के बाद भी वह परिणाम भुगते बगैर उन से मुक्त नहीं हो सकता. कल मैं ने जिस का मोल नहीं समझा, आज मैं उस के लिए मूल्यहीन था. यह दुनिया कुएं की तरह है. जैसी आवाज दोगे वैसी ही प्रतिध्वनि सुनाई देगी. जो जैसे बीज बोता है वैसी ही फसल काटता है. तनहाई की स्याह सुरंगों की कल्पना कर मेरी आंखों में मुर्दनी छाने लगी. आवारा बादल सा मैं खुद को घसीटता अनजानी राह पर चल दिया. टूटतेभटकते जैसे भी हो, अब सारा जीवन मुझे अपने गुनाहों का प्रायश्चित्त करना था.

Monsoon Special: मौनसून में घर को रखें हाइजीनिक

मौनसून में हेल्थ का ख्याल रखने की शुरूआत घर से होती है और अगर आपका घर हाइजीनिक होगा तो आप सालों साल हेल्दी रहेंगे. हाइजीन घर होने का मतलब ये नही की आप पूरे दिन भर घर की सफाई करें. पर अगर आप घर की सफाई कर रहीं हैं तो कुछ चीजें ऐसी होती हैं अगर वो जर्म फ्री रहेंगी तो आपका घर भी हाइजीनिक रहेगा. इसीलिए आज हम आपको घर को कैसे हाइजीनिक रखें इसके बारे में कुछ टिप्स बताएंगे, जिससे इस मौनसून ही नही सालों साल आपका घर हाइजीन फ्री रहेगा.

1. जर्म फ्री रखें किचन

किचन हमारी हेल्थ सही या खराब होने का पहला कारण होता है इसीलिए कोशिश करें की किचन को क्लीन रखें. किचन का तौलिया जिस से आप हाथ साफ करती हैं उस में बैक्टीरिया होने के चांसेज ज्यादा होते हैं. इसीलिए उसे हर दूसरे दिन बदलें और उसे धोने के बाद अच्छी तरह सुखा लें. किचन में जूठे बरतन न रहने दें, क्योंकि उनमें मौजूद बचे खाने में बैक्टीरिया सबसे जल्दी पनपते हैं. किचन में सब्जियां आदि काटने के लिए प्रयोग किए जाने वाले चौपिंग बोर्ड को रोज धोकर और सुखा कर रखें. नल के चारों ओर, सिंक व मोरी के आसपास नमी ज्यादा होती है.

2. बाथरूम की भी क्लीनिंग है जरूरी

बाथरूम में सफाई सही ढंग से न होने पर ये कईं बीमारियों का कारण बन सकता है. दागधब्बों रहित, चमकती टाइलों वाला बाथरूम वैसे तो साफ दिखता है. पर अगर माइक्रोस्कोप से देखा जाए तो वहां ढेरों बैक्टीरिया दिख जाएंगे. इसलिए परिवार का हर सदस्य अपना अलग तौलिया इस्तेमाल करे, क्योंकि एक ही तौलिए का सभी लोगों द्वारा इस्तेमाल स्किन प्रौब्लम्स हो सकती है. टूथब्रश को हमेशा कवर से ढक कर रखें. कौकरोच ब्रश के ब्रिसल्स पर मल से जीवाणु छोड़ सकते हैं. बाथरूम को गीला न छोड़ें, क्योंकि काई, फफूंदी, नमी, दरारें रोग फैलाने वाले कीटाणुओं को तेजी से आकर्षित करते हैं. साबुनदानी की भी नियमित सफाई करें. किनारों पर जमने वाले साबुन पर गंदगी की परत जमने लगती है, जिस पर बैक्टीरिया पैदा होते हैं.

3. टौयलेट हाइजीन है सबसे जरूरी

ज्यादातर लोग अपने लिविंगरूम को तो साफ-सुथरा रखते हैं, पर टौयलेट क्लीनिंग की ओर खास ध्यान नहीं देते. जबकि परिवार के स्वास्थ्य की दृष्टि से टौयलेट का हाइजीन न होना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि बारबार इस्तेमाल किए जाने के कारण यह बारबार गंदा हो जाता है और टौयलेट सीट पर बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं. टौयलेट सीट व वह हर हिस्सा जो शरीर के संपर्क में आता है वहां रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया के होने की आशंका अधिक होती है. टौयलेट को जर्म फ्री बनाने के लिए मार्केट में मौजूद टौयलेट क्लीनर का प्रयोग करें. टौयलेट क्लीनर को टौयलेट सीट के अंदर व बाहर अच्छी तरह डाल कर लगभग आधे घंटे के लिए छोड़ दें. फिर पानी से धो लें. टौयलेट को साफ व फ्रैश रखने के लिए ऐसे क्लीनर का प्रयोग करें, जो जिद्दी दागों को हटा कर बैक्टीरिया का सफाया करें. टौयलेट को साफ व बदबूरहित रखने के लिए टैंक में टौयलेट बाउल टैबलेट्स डालें. टौयलेट को सूखा रखें. गीला रहने से कीटाणु जल्दी पैदा होते हैं.

4. बैडरूम को भी रखें हाइजीन फ्री

आप सोच रही होंगी कि बैडरूम में जर्म्स कहां से आएंगे, इसलिए इस की खास साफ-सफाई की क्या जरूरत है? लेकिन यहीं आप गलत हैं. दरअसल, बैडरूम के कारपेट, कुशन कवर, परदों पर भी बैक्टीरिया अपना अड्डा बनाते हैं और तो और आपके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले लैपटौप, टीवी के रिमोट पर भी बैक्टीरिया होते हैं, जो शरीर के संपर्क में आते हैं. साथ ही शैल्फ में रखी किताबों या शोपीसेज भी जर्म्स को आकर्षित करते हैं. अत: इन्हें समय-समय पर साफ करती रहें वरना घर के लोग एलर्जी के शिकार हो सकते हैं. कारपेट, बैडशीट्स, परदों की वैक्यूम क्लीनर से अच्छी तरह सफाई करें.

5. पालतू जानवरों का भी रखें ख्याल

अगर आप ने घर में कोई पालतू जानवर पाल रखा है तो आप को होम हाइजीन की खास जरूरत है, क्योंकि कुत्ते, बिल्ली, खरगोश के फर से बच्चों और बड़ों को एलर्जी हो सकती है. इसके लिए उन्हें साफ-सुथरा रखें और उन से उचित दूरी बनाए रखें. उन के रहने व खाने का इंतजाम घर के अलग हिस्से में करें. पालतू जानवरों का ऐलर्जी वैक्सीनेशन कराएं. पालतू जानवर जर्म्स व इन्फैक्शन का खतरा बढ़ाते हैं.

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एक ब्रेकअप ऐसा भी: भाग-2

‘कितने प्यार से लिखा था तुम ने कि नैना, यदि तुम मेरी जिंदगी में नहीं आई होतीं तो शायद मैं समझ नहीं पाता कि प्यार क्या होता है. तुम्हारे आते ही हवाएं महकने लगती हैं. दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं. बातें जबां पर आ कर अटक जाती हैं. सबकुछ भूल जाता हूं, बस, तुम्हारे बारे में ही सोचता रहता हूं. क्या तुम्हें नहीं लगता कि हमें प्यार हो गया है? अगर हां, तो मुसकरा दो. और अगर न, तो यह कागज कहीं दबा दो या नष्ट कर दो.

‘मैं ने तुम्हारा यह खत पढ़ा और मेरी सांसें तेज चलने लगी थीं. चाह कर भी मैं तुम्हारी तरफ देख नहीं पा रही थी. पलकें झुका कर वहीं बैठी रही. तुम घबरा रहे थे कि कहीं मेरा जवाब न तो नहीं. तभी मैं ने पलकें उठाईं और मुसकरा कर तुम्हारी तरफ देखा. तुम प्यार से मेरी तरफ ही रहे थे. मुझे बहुत शर्म आई और मैं वहां से उठ कर भाग गई. फिर पूरे दिन तुम मेरे पीछे पड़े रहे. तुम वे 3 जादुई शब्द सुनना चाहते थे. शाम हो रही थी. सूरज बादलों की आगोश में खो चला था. तभी मैं ने तुम्हारी बांहों में समाते हुए कह दिया था कि हां करण, मैं भी तुम से बहुत प्यार करती हूं. उस दिन हम दोनों को लगा था कि हमारी जिंदगी अब संपूर्ण हो गई है. एकदूसरे का साथ हमारे जीवन की सब से बड़ी खुशी है.

‘कालेज के वे 2 साल हमारे अरमानों को पंख लगा गए थे. हम दोनों एक रोमानी दुनिया में विचरण करते रहते. मैं तुम्हारे साथ अपना सुनहरा भविष्य देखने लगी थी. पर मैं गलत थी, करण. जल्दी ही मुझे पता चल गया कि तुम्हारे लिए हमारे उन मीठे सपनों से ज्यादा महत्त्वपूर्ण अपने पिता के वचन की लाज रखना और उन की रूढ़िवादी सोच को पोषित करना है.

‘तुम ने कितनी सहजता से आ कर कह दिया था कि यार नैना, मैं अपने पिता के खिलाफ नहीं जा सकता. मुझे उन की पसंद की लड़की से शादी करनी पड़ेगी. पिताजी ने बचपन में ही मेरी सगाई कर दी थी और यह बात मुझे मालूम नहीं थी.

‘इधर फाइनल ईयर के एग्जाम थे और उधर तुम्हारी शादी. उस दिन मैं बहुत रोई थी. मगर फिर परिस्थितियों से समझौता कर लिया था. मैं ने तुम्हारी यादों से दूर होने के लिए वह कालेज छोड़ दिया. मैं ने तय किया था कि अब तुम से कभी नहीं मिलूंगी. फिर मैं ने एमबीए की पढ़ाई की और एक मल्टीनैशनल कंपनी जौइन की. वहीं राज से मेरी मुलाकात हुई. हम दोनों दोस्त बन गए. इसी दौरान उस की मां ने मुझे देखा और अपनी बहू बनाने का फैसला कर लिया. मैं ने भी सहमति दे दी. बाद में पता चला कि राज ने यह शादी केवल मां के लिए की थी. वह मुझे प्यार नहीं करता था. वह काफी अग्रेसिव नेचर का था. हम अकसर झगड़ते, मगर फिर 2 दोस्तों की तरह पैचअप कर लेते.

‘वह प्यार जो मुझे तुम से मिला था, राज कभी भी नहीं दे सका. यही वजह है कि वक्त ने जब हमें फिर से औफिस कलीग के रूप में मिलाया तो मैं खुद को तुम्हारे करीब आने से नहीं रोक सकी. तुम ने भी तो कहा था कि मुझ से ज्यादा तुम ने कभी किसी को भी नहीं चाहा. हम फिर से दो शरीर एक प्राण बन गए. जिंदगी फिर से खूबसूरत और रोमानी हो गई. कालेजलाइफ की तरह हम जमाने से छिपतेछिपाते मिलने लगे. कभी राज बिज़नैस टूर पर जाता, तो मैं तुम्हें अपने घर बुला लेती और कभी तुम्हारी पत्नी प्रिया बच्चों को ले कर मायके जाती, तो तुम मुझे अपने घर बुला लेते. कई दफा क्लाइंट मीटिंग के नाम पर हम औफिस से भी साथ निकलने लगे थे.

‘वे दिन कितने सुहाने थे. मैं ने अपनी बिटिया को होस्टल भेज दिया था क्योंकि मैं तुम्हारे और मेरे बीच किसी को भी नहीं आने देना चाहती थी. मगर तुम ने हमेशा की तरह हमारे बीच अपने परिवार को आने दिया. अब तुम मुझ से मिलना नहीं चाहते, तो ठीक है करण, मैं भी ज़बरदस्ती तुम्हारे पीछे नहीं पड़ूंगी. बहुत सोचने के बाद मैं ने भी मूव औन करने का फैसला ले लिया है.’

नैना बहुत देर तक अपना लिखा हुआ मेल पढ़ती रही. दिमाग शांत था. दिल की भावनाएं मर चुकी थीं. उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह अपने अतीत का गला घोँट कर सुकून के चंद लमहे पा लेना चाहती है.

अभी वह सोच ही रही थी कि मेल सेंड करे या नहीं, तब तक उस के व्हाट्सऐप पर अभिनव का मैसेज आया, ‘यार, क्या आज बाहर कहीं घूमने जाने का प्रोग्राम बनाएं? ‘

अभिनव उस का पड़ोसी था. एक तरफ जहां करण उसे इग्नोर कर रहा था तो दूसरी तरफ उस का नया पड़ोसी अभिनव उस की नज़दीकी चाहने लगा था. दरअसल, अभिनव तलाकशुदा था और स्कूल के समय में नैना का सहपाठी भी था. उसे नैना के पारिवारिक जीवन में व्याप्त उदासीनता की खबर थी. ऐसे में उस के और अपने जीवन के ख़ालीपन को वह एकदूसरे का साथ दे कर भरना चाहता था. नैना ने उसे करण के साथ रिश्ते की खबर भी नहीं लगने दी थी. कहीं न कहीं वह भी अभिनव की तरफ आकर्षित होने लगी थी. करण की बेपरवाही से उपजे दर्द ने अभिनव के लिए रास्ता साफ कर दिया था.

ऊहापोह की धुंध किनारे कर उस ने सेंड बटन पर क्लिक कर दिया और मुसकरा उठी. ऐसा लगा जैसे दिल पर सौ मन भारी रखा पत्थर हट गया हो और अब वह खुल कर सांस लेने को आजाद हो. फिर उस ने ‘ओके’ के साथ अभिनव को एक प्यारी सी स्माइली भेज दी. अब उस के मन में कोई उलझन नहीं थी. उस ने अपनी जिंदगी के आगे के सफर का रास्ता तय कर लिया था.

इधर जब करण को यह मेल मिला तो वह चौंक पड़ा. नैना के इस कदम ने उस के अंदर एक अजीब सी कसक पैदा कर दी थी. उस ने नहीं सोचा था कि नैना इस तरह अचानक रिश्ता बिलकुल ही खत्म कर देगी. आखिर वह भी नैना से प्यार करता था. उस ने तुरंत नैना को फोन लगाया. मगर उस ने फोन उठाया नहीं, एक छोटा सा मैसेज कर दिया, ‘मैं आगे बढ़ चुकी हूं, करण. अब मुझे भूल जाओ.’

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