गुनाह: भाग 2- आकाश ने अपनी गृहस्थी तबाह क्यों की?

वह कुछ पलों तक मेरी बातों में छिपी सचाई को तोलती रही. शायद उसे मेरी नेकनीयती पर यकीन हो गया था. अत: उस ने कागज पर रेवा का पता लिख कर मुझे थमा दिया. मैं हवा में उड़ता वापस आया. सारी रात मुझे नींद नहीं आई. मन में एक ही बात खटक रही थी कि मैं रेवा का सामना कैसे करूंगा? क्या उस से नजरें मिला सकूंगा? पता नहीं वह मुझे माफ करेगी भी या नहीं? उस के स्वभाव से मैं भलीभांति परिचित था. एक बार जो मन में ठान लेती थी, उसे पूरा कर के ही दम लेती थी.

अगर ऐसा हुआ तो? मन के किसी कोने से उठी व्यग्रता मेरे समूचे अस्तित्व को रौंदने लगी. ऐसा हरगिज नहीं हो सकता. मन में?घुमड़ते संशय के बादलों को मैं ने पूरी शिद्दत से छितराने की कोशिश की. वह पत्नी है मेरी. उस ने मुझे दिल की गहराइयों से प्यार किया है. कुछ वक्त लिए तो वह मुझ से दूर हो सकती है, पर हमेशा के लिए नहीं. मेरा मन कुछ हलका हो गया था. उस की सलोनी सूरत मेरी आंखों में तैरने लगी थी.

सुबह उस का पता ढूंढ़ने में कोई खास परेशानी नहीं हुई. मीडियम क्लास की कालोनी में 2 कमरों का साफसुथरा सा फ्लैट?था. आसपास गहरी खामोशी का जाल फैला?था. बाहर रखे गमलों में उगे गुलाब के फूलों से रेवा की गंध का मुझे एहसास हो रहा था. रोमांच से मेरे रोएं खड़े हो गए?थे. आगे बढ़ कर मैं ने कालबैल का बटन दबाया. भीतर गूंजती संगीत की मधुर स्वरलहरियों ने मेरे कानों में रस घोल दिया. कुछ ही पलों में गैलरी में उभरी रेवा के कदमों की आहट को मैं भलीभांति पहचान गया. मेरा दिल उछल कर हलक में फंसने लगा था.

‘‘तुम?’’ मुझे सामने खड़ा देख कर वह बुरी तरह चौंक गई?थी.

‘‘रेवा, मैं ने तुम्हें कहांकहां नहीं ढूंढ़ा. हर ऐसी जगह जहां तुम मिल सकती थीं, मैं भटकता रहा. तुम ने मुझे सोचनेसमझने का अवसर ही नहीं दिया. अचानक ही छोड़ कर चली आईं.’’

‘‘अचानक कहां, बहुत छटपटाने के बाद तोड़ पाई थी तुम्हारा तिलिस्म. कुछ दिन और रुकती तो जीना मुश्किल हो जाता. तुम तो चाहते ही थे कि मैं मर जाऊं. अपनी ओर से तुम ने कोई कसर बाकी भी तो नहीं छोड़ी थी.’’

‘‘मैं बहुत शर्मिंदा हूं रेवा,’’ मेरे हाथ स्वत: ही जुड़ गए थे, ‘‘तुम्हारे साथ जो बदसुलूकी की है मैं ने उस की काफी सजा भुगत चुका हूं, जो हुआ उसे भूल कर प्लीज क्षमा कर दो मुझे.’’

‘‘लगता है मुझे परेशान कर के अभी तुम्हारा दिल नहीं भरा, इसलिए अब एक नया बहाना ले कर आए हो,’’ उस की आवाज में कड़वाहट घुल गई थी, ‘‘बहुत रुलाया है मुझे तुम्हारी इन चिकनीचुपड़ी बातों ने. अब और नहीं, चले जाओ यहां से. मुझे कोई वास्ता नहीं रखना है तुम्हारे जैसे घटिया इंसान से.’’

मैं हैरान सा उस की ओर देखता रहा. ‘‘तुम्हारी नसनस से मैं अच्छी तरह वाकिफ हूं. अपने स्वार्थ के लिए तुम किसी भी हद तक गिर सकते हो. तुम्हारा दिया एकएक जख्म मेरे सीने में आज भी हरा है.’’

‘‘मुझे प्रायश्चित्त का एक मौका तो दो रेवा. मैं…’’

‘‘मैं कुछ नहीं सुनना चाहती,’’ मेरी बात बीच में काट कर वह बिफर पड़ी, ‘‘तुम्हारी हर याद को अपने जीवन से खुरच कर मैं फेंक चुकी हूं.’’

‘‘अंदर आने को नहीं कहोगी?’’ बातचीत का रुख बदलने की गरज से मैं बोला.

‘‘यह अधिकार तुम बहुत पहले खो चुके हो.’’ मैं कांप कर रह गया.

‘‘ऐसे हालात तुम ने खुद ही पैदा किए हैं आकाश. अपने प्यार को बचाने की मैं ने हर संभव कोशिश की थी. अपना वजूद तक दांव पर लगा दिया पर तुम ने कभी समझने की कोशिश ही नहीं की. जब तक सहन हुआ मैं ने सहा. मैं और कितना सहती और झुकती. झुकतेझुकते टूटने लगी थी. मैं ने अपना हाथ भी बढ़ाया था तुम्हारी ओर इस उम्मीद से कि तुम टूटने से बचा लोगे, पर तुम तो जैसे मुझे तोड़ने पर ही आमादा थे.’’मैं मौन खड़ा रहा.

‘‘अफसोस है कि मैं तुम्हें पहचान क्यों न  सकी. पहचानती भी कैसे, तुम ने शराफत का आवरण जो ओढ़ रखा था. इसी आवरण की चकाचौंध में तुम्हारे जैसा जीवनसाथी पा कर खुद पर इतराने लगी थी. पर मैं कितनी गलत थी. इस का एहसास शादी के कुछ दिन बाद ही होने लगा था. मैं जैसेजैसे तुम्हें जानती गई, तुम्हारे चेहरे पर चढ़ा मुखौटा हटता गया. जिस दिन मुखौटा पूरी तरह हटा मैं हैरान रह गई थी तुम्हारा असली रूप देख कर.

‘‘शुरुआत में तो सब कुछ ठीक रहा. फिर तुम अकसर कईकई दिनों तक गायब रहने लगे. बिजनैस टूर की मजबूरी बता कर तुम ने कितनी सहजता से समझा दिया था मुझे. मैं अब भी इसी भ्रम में जीती रहती, अगर एक दिन अचानक तुम्हें, तुम्हारी सैक्रेटरी श्रुति की कमर में बांहें डाले न देख लिया होता. रीना के आग्रह पर मैं सेमिनार में?भाग लेने जिस होटल में गई?थी, संयोग से वहीं तुम्हारे बिजनैस टूर का रहस्य उजागर हो गया?था. तुम्हारी बांहों में किसी और को देख कर मैं जैसे आसमान से गिरी थी, पर तुम्हारे चेहरे पर?क्षोभ का कोई भाव तक नहीं था.

मैं कुछ कहती, इस से पहले ही तुम ने वहां मेरी उपस्थिति पर हजारों प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए थे. मैं चाहती तो तुम्हारे हर तर्क का करारा जवाब दे सकती थी, पर तुम्हारी रुसवाई में मुझे मेरी ही हार नजर आती थी. मेरी खामोशी को कमजोरी समझ कर तुम और भी मनमानी करने लगे थे. मैं रोतीतड़पती तुम्हारे इंतजार में बिस्तर पर करवटें बदलती और तुम जाम छलकाते हुए दूसरों की बांहों में बंधे होते.’’

एक ब्रेकअप ऐसा भी: भाग-1

नैना करण से अंतिम बार करीब 2 महीने पहले मिली थी. उस के बाद तो वह हमेशा कोई न कोई बहाना बना देता. वह मुलाकात भी अजीब सी रही थी. इसी वजह से आज नैना ने ठान लिया था कि वह किसी भी हाल में करण से मिल कर ही जाएगी.

एक घंटे से वह वृंदावन रैस्टोरैंट में करण का इंतजार कर रही थी. हमेशा की तरह वह सही समय पर पहुंच गई थी. यह रैस्टोरैंट शहर से हट कर मगर बहुत खूबसूरत और शांत सा था. नैना और करण अकसर यहीं मिला करते थे. आजकल करण उस के प्रति लापरवाह सा हो गया था. तभी तो वह अब तक नहीं आया था.

थक कर नैना ने उसे फ़ोन लगाया, “क्या हुआ करण, मैं कब से इंतज़ार कर रही हूं यहां.”

“ओके,” कह कर करण ने जल्दी से फोन काट दिया.

थोड़ी देर बाद उस का शौर्ट मैसेज आया, “यार, बेटा साथ में है. इसे कुछ दिलाना था. बेटे को घर भेज कर सीधा वहीं आ रहा हूं.”

इस के करीब 20-25 मिनट बाद करण वहां पहुंचा. नैना नाराज़ थी.

करण ने सफाई दी, “यार, अब हमारा मिलना कठिन होने लगा है. बच्चे बड़े हो रहे हैं. उन्हें चकमा दे कर आना आसान नहीं होता. बीवी भी नजर रखती है.”

“बीवी तो पहले भी नजर रखती थी न, करण. यह तो कोई बात नहीं हुई. जहां तक बच्चों का सवाल है, तो उन्हें बोर्डिंग स्कूल या होस्टल भेज दो या फिर उन से कह दिया करो कि औफिस के काम से जा रहा हूं.”

“यार, संडे औफिस कहां होता है और फिर वे बड़े हो रहे हैं. उन के इतने दोस्त हैं. किसी ने कहीं हमें साथ देख लिया, तो बेकार शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी.”

“यह तो बड़ी अच्छी बात कही तुम ने, प्यार करना शर्मिंदगी कब से हो गई?”

“तुम नहीं समझोगी, नैना.”

“हां, यह तो बिलकुल सच है. न मैं आज तक तुम्हें समझ सकी और न तुम्हारे प्यार को. अगर राज मुझ से सही माने में प्यार करने वाला पति होता तो मैं शादी के बाद तुम से रिश्ता रखती ही नहीं. मगर उसे अपने बिज़नैस के अलावा किसी से प्यार नहीं. एक तुम थे और 20 साल पुराना हमारा प्यार था. पर तुम्हें भी अब मेरे लिए समय निकालना कठिन हो रहा है. तुम मुझ से बचने की कोशिश करने लगे हो,” नैना रोंआसी हो कर बोली.

“ऐसा नहीं है, नैना. बस, वक्त और परिस्थितियां बदल रही हैं. वरना, भला मैं तुम से बचने की कोशिश क्या कभी कर सकता हूं?”

“बात जो भी हो करण, पर मैं तुम से दूर नहीं रह सकती. मैं तुम से कितना प्यार करती हूं, यह तुम भी जानते हो न.”

“मैं क्या प्यार नहीं करता. तुम्हारे पिछले बर्थडे पर भी मैं ने सोने की अंगूठी गिफ्ट की थी. उस से पहले भी याद है हमारी लास्ट मुलाकात जब हम मार्केट गए थे और वहां तुम्हें एक ड्रैस पसंद आ गई थी. तुम्हारी आंखों में उस ड्रैस की इच्छा देखते ही मैं ने उसे तुरंत पैक करवा लिया था. तुम मेरे लिए बहुत खास हो नैना और आज से नहीं, हमेशा से. बस, बात यही है कि तुम मुझे समझ नहीं पाती हो. पिछले साल अक्टूबर में शालू ने मुझे तुम्हारे साथ देख लिया था. मैं ने लाख बहाने बनाए, मगर उस के दिल में यह बात बैठ गई है कि हम दोनों का चक्कर है. उस के शक पर उस की सहेली ने भी मुहर लगा दी क्योंकि उस ने भी मुझे तुम्हारे साथ देख लिया था. इसलिए कह रहा हूं कि अब हमें थोड़ी दूरी बना लेनी चाहिए, नैना.”

उस रात नैना बहुत उदास थी. करण का व्यवहार उसे अंदर तक आहत कर गया था. अब वह अपनी जिंदगी से जुड़े इस अध्याय के संदर्भ में एक फैसला लेना चाहती थी. ऐसा पहली बार नहीं हुआ था. आजकल अकसर ऐसी बातें होने लगी. एक साल से करन उस से मिलने से कतराता रहा है. कभी कोई बहाना बना देता है, तो कभी कोई समस्या. उन की लास्ट मीटिंग 2 महीने पहले हुई थी और फिर आज. वह फैसला लेना चाहती थी कि अब उसे अपने दिलोदिमाग में करण की दखलंदाजी बंद कर देनी चाहिए या जैसा चल रहा है उसी में खुश रहे.

अपनी आंखें बंद कर बिस्तर पर औंधी लेटी नैना बहुत देर तक सोचती रही. हर बार उस के दिल में एक ही बात आ रही थी कि करण अब उस से प्यार नहीं करता. उस का अपना परिवार है, परिवार की जिम्मेदारियां हैं और वह उसी में व्यस्त रहता है. अब वह उस से मिलने को पहली सी चाहत नहीं रखता. फिर ज़बरदस्ती उसे इस रिश्ते को ढोने को मजबूर क्यों किया जाए. आखिर उस की भी सैल्फ रिस्पैक्ट है.

बस, फिर क्या था, नैना एक मेल लिखने बैठ गई. मेल की शुरुआत उस ने उन दिनों की यादों से की जब वह नईनई कालेज गई थी और वहीं फ्रेशर पार्टी के दिन उस की मुलाकात करण से हुई थी. करण उस से सीनियर बैच में था.

उस ने लिखना शुरू किया- ‘ मुझे आज भी याद है वह दिन जब कालेज फ्रेशर पार्टी के दौरान मैं सब से अलग हट कर दूर खड़ी थी. शायद मैं कंफर्टेबल महसूस नहीं कर रही थी. तब तुम मेरे करीब आए थे मुझे चीयर अप करने. तुम ने मुझे अपने दोस्तों से मिलवाया. उस माहौल में कंफर्टेबल फील कराया. उस दिन हमारी दोस्ती हो गई.

‘तुम मेरी बहुत केयर करने लगे थे. तुम्हारी नजरें हमेशा मुझे ढूंढती रहती थीं. यही बात मुझे सब से ज्यादा पसंद थी. हम अकसर साथ समय बिताने लगे. मुझे महसूस होने लगा जैसे मैं तुम से प्यार करने लगी हूं. मैं यह बात तुम से कहना चाहती थी, मगर कह नहीं पा रही थी. तब एक दिन तुम ने मुझे एक खत दे कर अचंभे में डाल दिया.

GHKKPM की पाखी हुई बोल्ड, मोनोकिनी में दिखी ऐश्वर्या शर्मा

टीवी सीरियल ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ की एक्ट्रेस ऐश्वर्या शर्मा शो से बाहर निकलने के बाद से लगातार खबरों में हैं. शो में पाखी का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस घर-घर में मशहूर हो गईं हैं. ‘गुम है किसी के प्यार में’ शो को अलविदा कह चुकी ऐश्वर्या शर्मा अब खतरों के खिलाड़ी सीजन 13 में नजर आएगी. अभिनेत्री अपने पति नील भट्ट के साथ क्वालिटी टाइम का आनंद ले रही हैं क्योंकि वे इस समय छुट्टियों को एन्जॉय कर रहे हैं.

ऐश्वर्या शर्मा और नील भट्ट छुट्टियां मना रहे हैं

ऐश्वर्या और नील थाईलैंड में छुट्टियों का आनंद ले रहे हैं. खैर, इस कपल ने अपने रोमांटिक वेकेशन से कई शानदार तस्वीरें साझा की हैं और उनके फैंस काफी प्यार दे रहे हैं. हम सभी जानते हैं कि ऐश्वर्या फैशनेबल हैं और इसी के साथ उनका स्टाइल समय के साथ बेहतर होता जा रहा है.

 

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एक्ट्रेस ने हॉट तस्वीरें साझा कीं

क्राबी में समुद्र तट पर आनंद ले रही ऐश्वर्या ने कुछ हॉट तस्वीरें साझा कीं. नीली मोनोकिनी में जलवा बिखेरते हुए ऐश्वर्या ने अपना हॉट अवतार दिखाया है. अभिनेत्री बेहद आकर्षक लग रही है क्योंकि वह अपने पति नील के प्यार में हैं.

 

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ऐश्वर्या शर्मा ने बीच पर कराया फोटोशूट

ऐश्वर्या शर्मा को बीच पर आराम करने का समय मिला है. ऐश्वर्या को काम करते हुए काफी लंबा समय हो गया है और अब वह अपनी छुट्टी का पूरा आनंद ले रही हैं. देखने से ऐसा लग रहा है कि ऐश्वर्या शर्मा ने अपने बीच लुक के लिए टॉप, डेनिम शॉर्ट्स और शीयर केप पहना है. लेकिन ऐसा नहीं है. ऐश्वर्या शर्मा ने असल में मोनोकिनी पहनी हुई है. नीली और काली मोनोकिनी उन पर बहुत अच्छी लग रही है.

हालांकि, ऐश्वर्या निश्चित तौर पर संस्कारी बहू की छवि को तोड़ने में कामयाब रही हैं और ये तस्वीरें इसका सबूत हैं. ऐश्वर्या के सिज़लिंग अवतार को उनके फैंस काफी पसंद कर रहे है.

‘भाभीजी घर पर हैं’ फेम एक्ट्रेस बनीं मां, बेटी को दिया जन्म

‘भाभीजी घर पर हैं’ टीवी सीरियल दर्शकों के बीच काफी मशहूर है. शो का हर किरदार दर्शकों के दिल पर राज किया है. इस शो की खासी दीवानगी देखी जा सकती है. ‘भाभीजी घर पर हैं’ अनीता भाभी का रोल निभाने वाली एक्ट्रेस विदिशा श्रीवास्तव मां बन चुकी हैं. एक्ट्रेस ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया है.

गोरी मेम ने दिया बेटी को जन्म

‘भाभीजी घर पर हैं’ फेम एक्ट्रेस मां बन गई है. टीवी एक्ट्रेस विदिशा श्रीवास्तव के घर में नन्ही बच्ची का आगमन हुआ है. उन्होंने प्यारी सी बच्ची को जन्म दिया है. खबरों के अनुसार एक्ट्रेस 11 ने जुलाई को बेटी को जन्म दिया था.

विदिशा श्रीवास्तव ने रखा बेटी का नाम

प्रेग्नेंसी के दौरान लगातर विदिशा ने सेट पर काम किया है. वहीं 1 जुलाई से विदिशा ने छुट्टी ली थी. उन्होंने मां बनते ही अपनी खुशी फैंस के साथ शेयर की. विदिशा ने कहा, ‘ मुझे 18 घंटे का लेबर पेन हुआ. मैं दर्द से लगातार कहरा रही थी. मेरी नॉर्मल डिलीवरी हुई है. लेकिन जैसे ही मैंने अपनी बेटी को देखा मेरा सारा दर्द गायाब हो गया. बेटी को अपनी नजरों के सामने देखना और महसूस करना किसी जादुई पल से कम नहीं था.’

विदिशा ने मीडिया इंटरव्यू में बताया कि, ‘हमने बेटी के लिए नाम भी सोच लिया है. हम अपनी बेटी का नाम मां दुर्गा के नाम पर रख रहे हैं आदया. आदया का मतलब होता है, शक्ति और इसका दूसरा अर्थ भगवान शिव से भी जुड़ा हुआ है.

गोरी मेम शो में कब वापसी करेंगी?

विदिशा ने मीडिया इंटरव्यू कहा कि, मैं अगले एक डेढ़ महीने घर पर ही बेटी के साथ हूं. फिर देखती हूं जैसा भी होगा मैं काम शुरू करूंगी. मुझे लगता है कि मैं काम रेगुलरी शुरू नहीं कर पाऊंगी. लेकिन जब भी जरूरत होगी मैं सेट पर पहुंच जाऊंगी.”

Monsoon special: इस मौनसून घर पर बनाएं ब्रेड बोंडा और ओनियन पैन केक

बरसात का मौसम चल रहा है ऐसे में कुछ चटपटा खाने का मन बहुत करता है. इस मौसम में आप भी बना सकते टेस्टी और क्रिस्पी ब्रैड के बोंडे और ओनियन पैन केक, देखिए रेसिपी.

  1. ब्रैड के बोंडे

सामग्री

  1.  6 ब्रैडस्लाइस
  2.  1 आलू उबला मैश किया
  3. 2 बड़े चम्मच कौर्नफ्लोर
  4.   1/4 कप धनियापत्ती बारीक कटी हुई
  5.   1 छोटा चम्मच हरीमिर्च पेस्ट
  6. 1/2 छोटा चम्मच अदरक पेस्ट
  7. 2 बड़े चम्मच चाटमसाला
  8. 1/2 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर
  9.   1 छोटा चम्मच अनारदाना कुटा हुआ
  10.   तेल तलने के लिए
  11.   नमक स्वादानुसार.

विधि

ब्रैड के छोटेछोटे टुकड़े कर के एक बाउल में डालें. कौर्नफ्लोर और तेल छोड़ कर बाकी सारी सामग्री भी मिला कर आटे की तरह गूंध लें. अब इस मिश्रण से नीबू के आकार की बौल्स बना लें. कौर्नफ्लोर में 2 चम्मच पानी मिला कर घोल बना लें. कड़ाही में तेल गरम करें. ब्रैड बौल्स को कौर्नफ्लोर के घोल में डुबो कर मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तल कर हरी चटनी और टोमैटो कैचअप के साथ परोसें.

विधि

फ्रूट साल्ट को छोड़ कर सारी सामग्री मिलाएं. आवश्यकतानुसार पानी मिलाते हुए गाढ़ा घोल बनाएं. फू्रट साल्ट मिला कर अप्पम मेकर में मिश्रण डालें और मंदी आंच पर पकाएं. फूल जाने पर अप्पे अप्पम मेकर से निकाल कर हरी चटनी के साथ परोसें. 

2. ओनियन पैन केक

सामग्री

  1.   1 बड़ा कप सूजी
  2.   1/2 कप दही
  3.   आवश्यकतानुसार प्यार के छल्ले
  4.   1 छोटा चम्मच लालमिर्च कटी
  5. 1 छोटा चम्मच फ्रूट साल्ट
  6.   रिफाइंड तेल आवश्यकतानुसार
  7. नमक स्वादानुसार.

विधि

सूजी में दहीनमक व लालमिर्च मिलाएं. आवश्यकतानुसार पानी मिला कर फेंटें. गाढ़ा घोल तैयार कर लें. ध्यान रहे कि घोल में गांठ न रहे. नौनस्टिक तवे को हलका गरम करें. तैयार घोल में फ्रूट साल्ट मिला कर थोड़ा और फेंटें. हलके गरम तवे पर एक कड़छी घोल डाल कर गोलाई में फैलाएं. अब इस पर प्याज के छल्ले डालें. किनारों पर तेल छोड़ते हुए दोनों ओर से पैन केक सेंक लें. हरी चटनी के साथ परोसें.

गुनाह: भाग 1- आकाश ने अपनी गृहस्थी तबाह क्यों की?

‘‘रेवा…’’ बाथरूम में घुसते ही ठंडे पानी के स्पर्श से सहसा मेरे मुंह से निकल गया. यह जानते हुए भी कि वह घर में नहीं है. आज ही?क्यों, पिछले 2 महीनों से नहीं?है. लेकिन लगता ऐसा है,जैसे युगों का पहाड़ खड़ा हो गया.

रेवा का यों अचानक चले जाना मेरे लिए अप्रत्याशित था. जहां तक मैं समझता हूं वह उन में से थी, जो पति के घर डोली में आने के बाद लाख जुल्म सह कर भी 4 कंधों पर जाने की तमन्ना रखती हैं. लेकिन मैं शायद यह भूल गया था कि लगातार ठोंकने से लोहे की शक्ल भी बदल जाती है. खैर, उस वक्त मैं जो आजादी चाहता था, वह मुझे सहज ही हासिल हो गई थी.

श्रुति मेरी सैक्रेटरी थी. उस का सौंदर्य भोर में खिले फूल पर बिखरी ओस की बूंदों सा आकर्षक था. औफिस के कामकाज संभालती वह कब मेरे करीब आ गई, पता ही नहीं चला. उस की अदाओं और नाजनखरों में इतना सम्मोहन था कि उस के अलावा मुझे कुछ और सूझता ही नहीं?था. मेरे लिए रेवा जेठ की धूप थी तो श्रुति वसंती बयार. रेवा के जाने के बाद मेरे साथसाथ घर में?भी श्रुति का एकाधिकार हो गया था.

सब कुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन अचानक पश्चिम से सुरसा की तरह मुंह बाए आई आर्थिक मंदी ने मेरी शानदार नौकरी निगल ली. इस के साथ ही मेरे दुर्दिन शुरू हो गए. मैं जिन फूलों की खुशबू से तर रहता था, वे सब एकएक कर कैक्टस में बदलने लगे. मैं इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि श्रुति ने तोते की तरह आंखें फेर लीं. उस के गिरगिटी चरित्र ने मुझे तोड़ कर रख दिया. अब मैं था, मेरे साथ थी आर्थिक तंगी में लिपटी मेरी तनहाई और श्रुति की चकाचौंध में रेवा के साथ की ज्यादतियों का अपराधबोध.

रेवा का निस्स्वार्थ प्रेम, भोलापन और सहज समर्पण रहरह कर मेरी आंखों में कौंधता है. सुबह जागने के साथ बैड?टी, बाथरूम में गरम पानी, डाइनिंग टेबल पर नाश्ते के साथ अखबार, औफिस के वक्त इस्तिरी किए हुए कपड़े, पौलिश किए जूते, व्यवस्थित ब्रीफकेस और इस बीच मुन्नी को भी संभालना, सब कुछ कितनी सहजता से कर लेती थी रेवा.

इन में से कोई भी एक काम ठीक वक्त पर नहीं कर सकता मैं… फिर रेवा अकेली इतना सब कुछ कैसे निबटा लेती थी, मैं सोच कर हैरान हो जाता हूं. उस ने कितने करीने से संवारा था मुझे और मेरे घर को… अपना सब कुछ उस ने होम कर दिया था. उस के जाने के बाद यहां के चप्पेचप्पे में उस की उपस्थिति और अपने जीवन में उस की उपयोगिता का एहसास हो रहा है मुझे. उसे ढूंढ़ने में मैं ने रातदिन एक कर दिए. हर ऐसी जगह, जहां उस के मिलने की जरा भी संभावना हो सकती थी मैं दौड़ताभागता रहा पर हर जगह निराशा ही हाथ लगी. पता नहीं वह कहां अदृश्य हो गई.

मन के किसी कोने से पुलिस में शिकायत करने की बात उठी. पर इस वाहियात खयाल को मैं ने जरा भी तवज्जो नहीं दी. रेवा को मैं पहले ही खून के आंसू रुला चुका हूं. उसे हद से ज्यादा रुसवा कर चुका हूं. पुलिस उस के जाने के 100 अर्थ निकालती, इसलिए अपने स्तर से ही उसे ढूंढ़ने के प्रयास करता रहा.

मेरे मस्तिष्क में अचानक बिजली सी कौंधी. रीना रेवा की अंतरंग सखी थी. अब तक रीना का खयाल क्यों नहीं आया… मुझे खुद पर झुंझलाहट होने लगी. जरूर उसी के पास गई होगी रेवा या उसे पता होगा कि कहां गई?है वह. अवसाद के घने अंधेरे में आशा की एक किरण ने मेरे भीतर उत्साह भर दिया. मैं जल्दीजल्दी तैयार हो कर निकला, फिर भी 10 बज चुके थे. मैं सीधा रीना के औफिस पहुंचा.

‘‘मुझे अभी पता चला कि रेवा तुम्हें छोड़ कर चली गई,’’ मेरी बात सुन कर वह बेरुखी से बोली, ‘‘तुम्हारे लिए तो अच्छा ही हुआ, बला टल गई.’’

मेरे मुंह से बोल न फूटा. ‘‘मैं नहीं जानती वह कहां है. मालूम होता तो भी तुम्हें हरगिज नहीं बताती,’’ उस की आवाज से नफरत टपकने लगी, ‘‘जहां भी होगी बेचारी चैन से तो जी लेगी. यहां रहती तो घुटघुट कर मर जाती.’’

‘‘रीना प्लीज,’’ मैं ने विनती की, ‘‘मुझे अपनी भूल का एहसास हो गया है. श्रुति ने मेरी आंखों में जो आड़ीतिरछी रेखाएं खींच दी थीं, उन का तिलिस्म टूट चुका है.’’

‘‘क्यों मेरा वक्त बरबाद कर रहे हो,’’ वह बोली, ‘‘बहुत काम करना है अभी.’’

रात गहराने के साथ ठिठुरन बढ़ गई?थी. ठंडी हवाएं शरीर को छेद रही थीं. इन से बेखबर मैं खुद में खोया बालकनी में बैठा था. बाहर दूर तक कुहरे की चादर फैल चुकी थी और इस से कहीं अधिक घना कुहरा मेरे भीतर पसरा हुआ था, जिस में मैं डूबता जा रहा था. देर तक बैठा मैं रेवा की याद में कलपता रहा. उस के साथ की ज्यादतियां बुरी तरह मेरे मस्तिष्क को मथती रहीं. जिस ग्लेशियर में मैं दफन होता जा रहा था, उस के आगे शीत की चुभन बौनी साबित हो रही थी.

अगले कई दिनों तक मेरी स्थिति अजीब सी रही. रेवा के साथ बिताया एकएक पल मेरे सीने में नश्तर की तरह चुभ रहा था. काश, एक बार, सिर्फ एक बार रेवा मुझे मिल जाए फिर कभी उसे अपने से अलग नहीं होने दूंगा. उस से हाथ जोड़ कर, झोली फैला कर क्षमायाचना कर लूंगा. वह जैसे चाहेगी मैं अपने गुनाहों का प्रायश्चित्त करने के लिए तैयार हूं. उसे इतना प्यार दूंगा कि वह सारे गिलेशिकवे भूल जाएगी. उस के हर आंसू को फूल बनाने में जान की बाजी लगा दूंगा. अपनी सारी खुशियां उस के हर एक जख्म को भरने में होम कर दूंगा. पर इस के लिए रेवा का मिलना निहायत जरूरी था, जोकि संभव होता नजर नहीं आ रहा था.

वह भीड़भाड़ भरा इलाका था. आसपास ज्यादातर बड़ीबड़ी कंपनियों के औफिस थे. शाम को वहां छुट्टी के वक्त कुछ ज्यादा ही भागमभाग हो जाती थी. एक दिन मैं खुद में खोया धक्के खाता वहां से गुजर रहा था कि मेरे निर्जीव से शरीर में करंट सा दौड़ गया. जहां मैं था, उस के ऐन सामने की बिल्डिंग से रेवा आती दिखाई दी. मेरा दिल जोरजोर से धड़कने लगा.

मैं दौड़ कर उस के पास पहुंच जाना चाहता था पर सड़क पर दौड़ते वाहनों की वजह से मैं ऐसा न कर सका. लाल बत्ती के बाद वाहनों का काफिला थमा, तब तक वह बस में बैठ कर जा चुकी?थी. मैं ने तेजी से दौड़ कर सड़क पार की पर सिवा अफसोस कि कुछ भी हासिल न कर सका. मेरा सिर चकराने लगा.

अगले दिन सैकंड सैटरडे?था और उस के अगले दिन संडे. इन 2 दिनों की दूरी मेरे लिए आकाश और पाताल के बराबर थी. कुछ सोचता हुआ मैं उसी तेजी से उस औफिस में दाखिल हुआ, जहां से रेवा निकली थी. रिशैप्सन पर एक खूबसूरत लड़की बैठी?थी. तेज चलती सांसों को नियंत्रित कर मैं ने उस से पूछा कि क्या रेवा यहीं काम करती हैं? उस ने ‘हां’ कहा तो मैं ने रेवा का पता पूछा. उस ने अजीब निगाहों से मुझे घूर कर देखा.

‘‘मैडम प्लीज,’’ मैं ने उस से विनती की, ‘‘वह मेरी पत्नी है. किन्हीं कारणों से हमारे बीच मिसअंडरस्टैंडिंग हो गई थी, जिस से वह रूठ कर अलग रहने लगी. मैं उस से मिल कर मामले को शांत करना चाहता हूं. हमारी एक छोटी सी बेटी भी है. मैं नहीं चाहता कि हमारे आपस के झगड़े में उस मासूम का बचपन झुलस जाए. आप उस का पता दे दें तो बड़ी मेहरबानी होगी. बिलीव मी, आई एम औनेस्ट,’’ मेरा गला भर आया था.

प्रीडायबिटीज से बचने का यूथ के लिए क्या है सही तरीका, जानें यहां

डायबिटीज पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है और हर साल लाखों लोगों के इससे पीड़ित होने की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इससे भी अधिक चिंताजनक बात है युवाओं में डायबिटीज के मामले का लगातार बढ़ना.

इस बारें में जयपुर के मंगलम प्लस मेडिसिटी हॉस्पिटल के कन्सल्टेंट डायबिटोलॉजिस्ट और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डॉ. अभिषेक प्रकाश कहते है कि

जब शरीर में ब्लड शुगर का लेवल सामान्य से थोड़ा अधिक हो, तो उसे प्रीडायबिटीज या बॉर्डरलाइन डायबिटीज कहा जाता है, लेकिन शुगर लेवल इतना ज्यादा भी नहीं होता कि उसे टाइप-2 डायबिटीज़ बताया जा सके. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद- भारतीय मधुमेह अध्ययन (ICMR-INDIAB) के आंकड़े बताते हैं कि, भारत में 10.3% लोग प्रीडायबिटीज से पीड़ित हैं. प्रीडायबिटीज को हलके में न लें, क्योंकि प्रीडायबिटीज के साथ-साथ दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. प्रीडायबिटीज से पीड़ित लोगों को सेहत से जुड़ी दूसरी समस्याएं होने की संभावना भी अधिक होती हैं, जिनमें हाई ब्लड-प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और मोटापा शामिल होता है.

प्रीडायबिटीज के कारण

  • प्रीडायबिटीज कई वजहों से हो सकता है जिनमें, जेनेटिक कारणों के अलावा ख़राब जीवन शैली तथा पर्यावरण से संबंधित कारक शामिल हैं.
  • ख़राब जीवन शैली का प्रीडायबिटीज में सबसे ज्यादा योगदान होता है. इसके कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं,
  • अधिक वजन या मोटापा प्रीडायबिटीज की सबसे बड़ी वजह है. जरूरत से ज्यादा वजन, खास तौर पर कमर के इर्द-गिर्द अतिरिक्त वजन बढ़ने से इंसुलिन प्रतिरोध विकसित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है.
  • सेहत के लिए हानिकारक आहार मसलन रिफाइन्ड कार्ब्स और चीनी से भरपूर आहार के सेवन से वजन बढ़ने के साथ-साथ इंसुलिन प्रतिरोध भी बढ़ सकता है.
  • आरामदायक जीवन शैली और बेहद कम शारीरिक गतिविधि की वजह से भी इंसुलिन प्रतिरोध हो सकता है.
  • पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) जैसी सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएँ भी प्रीडायबिटीज के जोखिम को बढ़ा सकती हैं.

लक्षण

अक्सर प्रीडायबिटीज में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं, इसलिए बहुत से लोग इस बात से अनजान रहते हैं कि वे इस समस्या से पीड़ित हैं. हालाँकि, कुछ लोगों को डायबिटीज जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है, मसलन

  1. अधिक प्यास लगना
  2. बार-बार पेशाब आना
  3. थकान होना
  4. नजरें कमजोर होना
  5. हाथ-पैरों में सुन्नता या झुनझुनी
  6. बार-बार संक्रमण होना
  7. गर्दन, बगल, ग्रोइन एरिया या घुटनों पर त्वचा का काला पड़ना

जाँच

एक सामान्य से ब्लड टेस्ट के जरिए प्रीडायबिटीज का पता लगाया जा सकता है, जिसे HbA1C टेस्ट कहा जाता है. इस परीक्षण में पिछले दो से तीन महीनों के दौरान शरीर में ब्लड शुगर के औसत रक्त को मापा जाता है. अगर HbA1C का लेवल 5.7% और 6.4% के बीच हो, तो उस व्यक्ति को प्रीडायबिटीज माना जाता है. प्रीडायबिटीज की डायग्नोसिस के लिए और भी कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं, जिनमें फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज (FPG), ऑरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) शामिल हैं.

इलाज

जीवन शैली में बदलाव लाना प्रीडायबिटीज के इलाज का सबसे कारगर तरीका है, जिसमें सेहतमंद भोजन का सेवन करना, वजन घटाना और नियमित रूप से व्यायाम करना शामिल है. अध्ययनों के नतीजे बताते हैं कि, शरीर का वजन 5-10% कम करने से डायबिटीज विकसित होने के जोखिम को 58% तक कम किया जा सकता है. इसके अलावा, शारीरिक व्यायाम इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. जीवन शैली में बदलाव के अलावा, प्रीडायबिटीज के इलाज के लिए दवा भी दी जा सकती है.

प्रीडायबिटीज की रोकथाम

सेहतमंद जीवन शैली को अपनाना, प्रीडायबिटीज को रोकने का सबसे बेहतर तरीका है. इसमें संतुलित आहार का सेवन करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और नियमित रूप से व्यायाम करना शामिल है. इसके लिए धूम्रपान से परहेज करना और शराब के सेवन को सीमित करना भी बेहद जरूरी है. समय-समय पर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से सलाह लेने और फॉलो-अप करने से प्रीडायबिटीज का जल्द पता लगाने और इसे डायबिटीज होने से रोकने में मदद मिल सकती है.

प्रीडायबिटीज एक गंभीर स्थिति है, जिससे आगे चलकर डायबिटीज हो सकता है. आवश्यक कदम उठाने से भविष्य में डायबिटीज से पीड़ित होने वाले युवाओं की संख्या को कम करने में मदद मिल सकती है.

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Monsoon Special: बरसात में ऐसे करें स्किन केयर

मौनसून की फुहार जितनी राहत गरमियों से देती है, उतनी ही परेशानियां भी वह हमारे लिए ले कर आती है. मौनसून के मौसम में आप घर पर हों, औफिस में या बाहर निकलें, हर जगह आप को नमी महसूस होती है. इस का सब से अधिक असर त्वचा पर पड़ता है, इसलिए मौनसून में त्वचा की देखभाल हमें सब से अधिक करनी पड़ती है. त्वचा में कभीकभी फंगल इन्फैक्शन भी होता है, जिसे अगर सावधानी बरती जाए तो दूर रखा जा सकता है. मुंबई के द कौस्मैटिक सर्जरी इंस्टिट्यूट की डर्मैटोलौजिस्ट डा. सोमा सरकार कहती हैं कि बरसात में त्वचा संबंधी समस्या एवं फंगल इन्फैक्शन इसलिए अधिक होता है, क्योंकि त्वचा में अधिक समय तक नमी रहती है. इन सब से बचाव के लिए हलके गरम पानी से नहाना और ऐंटीफंगल क्रीम, साबुन और पाउडर का प्रयोग उपयुक्त होता है. पर निम्न टिप्स इस के लिए ज्यादा उपयोगी हैं:

त्वचा को 3 से 4 बार बिना साबुन वाले फेसवाश से धोएं, जिस से त्वचा पर जमा तैलीय पदार्थ और धूल निकल जाए.

ऐंटीबैक्टीरियल टोनर का प्रयोग मौनसून में अधिक लाभदायक होता है. यह स्किन को संक्रमण और फटने से बचाता है.

मौनसून में कई बार लोग सनस्क्रीन लगाना नहीं चाहते जबकि बादल से भी यूवी किरणें हम तक पहुंचती हैं. इसलिए सनस्क्रीन लोशन या क्रीम अवश्य लगाएं.

इस मौसम में लोग पानी कम पीते हैं, जिस से त्वचा में नमी कम हो जाती है. हमेशा नियमित रूप से 7 से 8 गिलास पानी अवश्य पीएं.

अच्छे स्किन स्क्रबर से रोज अपने चेहरे को साफ करें.

मौनसून में कभी हैवी मेकअप न करें.

खाने में जूस, सूप अधिक लें. किसी भी प्रकार की सब्जी को पकाने से पहले अच्छी तरह धो अवश्य लें. हो सके तो हलके गरम पानी से धोएं.

जब भी आप बाहर से घर आएं, तो हलके गरम पानी और साबुन से हाथपैर धो कर अच्छी तरह सुखा लें. बाद में मौइश्चराइजर लगा लें. इस मौसम में पैरों का खास ध्यान रखना पड़ता है. नमी और अधिक समय तक गीलेपन में रहने की वजह से फंगल इन्फैक्शन उन्हीं में ज्यादा होता है. इस मौसम में बंद और गीले शूज कभी न पहनें. अगर आप के शूज गीले हो जाएं तो उन्हें उतार कर सुखाने की कोशिश करें. इस के साथ ही समयसमय पर पैडिक्योर अवश्य करवाएं. बालों की देखभाल मौनसून में खासतौर पर करनी पड़ती है. इस मौसम में पसीने के साथसाथ बाल कई बार गीले भी हो जाते हैं, इसलिए सप्ताह में 2 से 3 बार शैंपू करें. साथ में कंडीशनर लगाना न भूलें. इस के अलावा जब भी बारिश के पानी से बाल गीले हों तो उन्हें टौवेल से अच्छी तरह सुखा लें. सप्ताह में 1 दिन बालों में तेल अवश्य लगाएं. इस के आगे डा. सोमा सरकार कहती हैं कि मौनसून में तंग और कसे हुए कपड़े कभी न पहनें. नायलौन फैब्रिक की जगह सूती कपड़े पहनें और इस मौसम में आभूषण हमेशा कम पहनें ताकि आप की त्वचा सांस ले सके.

मौनसून में कुछ घरेलू पैक आप समयसमय पर लगा सकती हैं, जो निम्न हैं:

अनारदाने ऐंटीऐजिंग का काम करते हैं और विटामिन सी से भरपूर होने की वजह से ये सूखी त्वचा के लिए लाभप्रद होते हैं. पिसे हुए 2 चम्मच अनारदाने व 1 कप कच्चे ओटमील को एक कटोरी में ले कर उस में 2 बड़े चम्मच शहद व थोड़ी छाछ मिला कर पेस्ट बना लें और चेहरे पर 10 मिनट तक लगा कर रखें. इस के बाद हलके गरम पानी से चेहरा धो लें.

एक सेब को मसल लें. उस में 1-1 चम्मच चीनी और दूध मिला लें. अच्छी तरह फेंट कर उस में कुछ बूंदें कैमोमिल की मिला कर फेसपैक बनाएं और 15 मिनट तक

चेहरे पर लगा कर रखें. इस के बाद चेहरा धो लें. इस से आप की त्वचा की डलनैस कम हो जाएगी.

सोच का विस्तार: भाग 3- रिया के फोन से कैसे गायब हुई सुरेश की खुशी

रात भर रिया खुद को कोस सिसकती रही और मौसी उस का सिर थपथपा तसल्ली देती रहीं. सुबह नाश्ते के बाद जारेद निधि को ले उस की डाक्टर अपौइंटमैंट पर चला गया. मौसी ने रिया को समझाया कि अच्छा होगा तुम अमन को तलाक दे नई जिंदगी की शुरुआत करो. मैं तुम्हारे मम्मीपापा से पूरी बात करूंगी. जारेद तुम्हारी पूरी मदद करेंगे.

निधि ने बेटी को जन्म दिया. नाम रखा जूली. छोटी बच्ची के आने से सब व्यस्त हो गए. इसी बीच रिया ने मम्मीपापा से बात कर उन्हें पूरी बात बता दी. सब की सलाह से तलाक के पेपर फाइल करवा दिए गए. जूली के 2 हफ्ते का होते ही आज जो व्यक्ति उन्हें घर बधाई देने आया उसे जारेद का कजन विलियम बताया गया. निधि उस से बातें करती रही. जूली नानी की गोद में सो रही थी. नाश्ते का प्रबंध रिया ने ही किया. जब जारेद बाहर से लौटे तो सब बातें करने लगे पर रिया चुप. क्या बात करे अनजाने आदमी से.

उस के जाते ही निधि ने विलियम के बारे में बताया कि पिछले साल कार ऐक्सीडैंट में पत्नी का देहांत हो गया था. अब उस की ढाई साल की बेटी की दादी, जो एक नर्स हैं, देखभाल कर रही हैं. विली यानी विलियम अकेला रहता है और आंटी उस का जल्दी ब्याह करना चाहती हैं. जारेद बीच में ही बोल पड़े कि विली बहुत अच्छा इंसान है. यदि रिया तुम उस की बेटी को अपनाने को तैयार हो तो तुम्हें उस से अच्छा साथी नहीं मिलेगा.

रिया बात पूरी सुन अपने कमरे में चली गई. क्या… 1 साल में ही शादी, तलाक, दूसरी शादी और एक बच्ची की मां. सोचतेसोचते उस का सिर घूमने लगा. चूंकि निधि भी रिया के पीछे आ गई, इसलिए उसे बेहोश होते देखा तो पकड़ कर कुरसी पर बैठा दिया. उस रात मौसी रिया के साथ सोईं.

दिखावे को रिया सो रही थी पर उस की आंखें जैसे कोई चलचित्र देख रही हों… मम्मीपापा की परेशानी, दादी की फटकार, अमन सलाखों के पीछे, विली की उस की ओर देखती आंखें, मौसी की सलाह और अचानक वह घबराहट से उठ बैठी.

मौसी ने पूछा कि क्या कोई सपना देख रही थी. सपना कहां यह तो उस की जीतीजागती कहानी है. अब रिया को स्वयं इस कहानी का अंत तलाशना है.

निधि से रिया ने 2 दिन का समय मांगा. 2 दिन बाद कठोर दिल कर उत्तर दिया कि ठीक है जैसे जारेद जीजू सोचें मुझे मंजूर है. इसी इतवार विली उस की बेटी काइरा और मां रिया से मिलने आईं. रिया किचन में नाश्ते का इंतजाम करने गई तो विली मदद करने पहुंचा. बोला कि रिया प्लीज नो प्रैशर, इफ यू ऐग्री आई प्रौमिस टू कीप यू आलवेज हैप्पी. रिया ने उस की ओर देख सिर हिलाया जैसे वह उस की कही बात से सहमत हो. उसी रात फिर फोन कर निधि के कहने पर रिया ने अपने मम्मीपापा को सहमति बताई, पर साथ ही सारी बात दादी को बताने पर जोर दिया.

2 दिन बाद शाम को विली बेटी काइरा को ले निधि के घर पहुंचा. अकेले में रिया से मिलते हुए उस ने कहा कि वह उस के साथ इंडिया जा उस की फैमिली से मिल उन्हें पूरा विश्वास दिलाना चाहता है कि सब ठीक होगा और हां वह काइरा को भी साथ ले जाएगा.

जाने का दिन तय हुआ. जाने वाले दिन रिया को बड़ा अजीब सा लग रहा था. अभी बिना बने रिश्ते के आदमी व बच्चे के साथ यात्रा करना. प्लेन में रिया काइरा से ऐसे जुड़ गई जैसे वह उसी की बच्ची हो. उस के साथ बातें करते, खिलाते, सुलाते एक संबंध सा जुड़ गया.

एअरपोर्ट पर अकेले पापा आए. बेटी और विली को गले लगाया और फिर बच्ची को गोद ले कर कार में बैठाया. घर पहुंच अंदर जाते ही रिया सीधी दादी के कमरे में पहुंची और उन की गोद में सिर रख सुबकसुबक कर देर तक रोती रही. दादी प्यार से सिर सहला उसे शांत रहने को कहती रहीं.

विली ने आगे बढ़ मां के चरण स्पर्श किए. वह ये सब यहां आने से पहले निधि से जान गया था. थोड़ा समय बीता तो दादी ने रिया को उसे बुलाने को कहा यानी विली से मिलना चाहा. विली ने दादी के सामने माथा टेका. यह देख रिया हैरान हुई.

दादी ने उस के सिर पर हाथ रखते कहा कि मेरी रिया को सदा खुश रखना, सुखी रहो. दरवाजे की आड़ में काइरा को गोदी में उठाए रेखा यह देख रो पड़ीं जिस सास ने सारी उम्र छूतछात, वहमों, नियमों में अपने को बांधे रखा आज एकाएक सब भूल एक विदेशी मांसाहारी को आशीर्वाद दे रही हैं.

शायद उन की सोच का विस्तार तब हुआ था जब रिया ने फोन कर दादी को सारी बात सच बताने पर जोर दिया था. बेटे सुरेश से रिया के दुख, अमन की हरकतें, जेल जाने और अब तलाक का जान मां दुखी हो बोली थीं कि मेरी फूल सी पोती को इतनी यातना देने वाला तो राक्षस निकला. अब जेल में पड़ा सड़ता रहेगा. सुरेशजी ने मां को समझाया एक इंसान का अच्छा होना धर्मजाति पर नहीं उस के व्यवहार पर निर्भर होता है.

अचानक दादी को ध्यान आया कि बच्ची कहां है. लाओ उसे, मिलूं मैं उस से. दरवाजे की आड़ से निकल बहू रेखा काइरा को लिए अंदर पहुंचीं. आज सुरेशजी मां से आज्ञा लिए बगैर उन के कमरे में आ बैठे. दादी ने बच्ची को गोद में ले माथा चूमा. इतने दिनों बाद मां को बातें करते देख सब खुश थे.

तभी दादी ने कहा कि सुरेश कल सुबह पंडितजी से रिया की शादी करवाने का कह आओ. इन के पास समय कम है. घर को भी सजा लो. हां, एक बात और पंडितजी से जो सामान चाहिए हो लाने को कह दोे. पैसे हम दे देंगे. तुम अकेले कहांकहां भागोगे… और बहू कल दोपहर बाजार जा कर दूल्हादुलहन के कपड़े खरीद लाना. छोटी बेटी को घाघराचोली अच्छा लगेगा. सब के कपड़ों के पैसे मैं दूंगी. जेवर मत खरीदना. मेरे पास हैं. बस अंगरेजी बाबू की अंगूठी खरीद लेना. दादी एक ही सांस में सब कह गईं.

बेटे ने जब पूछा कि मां बुलाना किसकिस को है, तो बोली कि अरे किसी को नहीं. हम ही बराती और हम ही घर वाले.

घर में हलचल थी. सब किसी न किसी काम में व्यस्त थे. पर सब से बड़ी खुशी इस बात की भी थी कि मां ने (दादी) कितने सालों बाद अपने कमरे की दहलीज लांघी. उन के लिए पहले जैसे ही दीवान पर गद्दा बिछा 2 बड़े तकिए लगा दिए गए. शादी का मुहूर्त 4 दिन बाद शुक्रवार का निकला. शनिवार शाम को उन की वापसी.

दुलहन के वेश में रिया और शेरवानी पहने दूल्हे विलियम को सब के बीच बैठा दादी ने अपने संदूक से निकाल अपनी शादी में मिला भारी भरकम सोने का जड़ाऊ रानी हार रिया को और बड़े मोतियों का 4 लड़ी वाला हार विलियम को पहनाया.

बहू ने कहा कि इतने सालों से समेटा ये सब उसे क्यों नहीं दिया गया? फिर अगर रिया को ही देना था तो पहली शादी में क्यों नहीं दिया?

उत्तर मिला कि तब दामाद पर मेरा दिल नहीं बैठा था पर अब ये हमारे बेटाबेटी सदा सुखी रहेंगे.

शादी का दिन. कुछ जानेपहचाने लोगों को बुलाया गया था. आवभगत चल रही थी पर अचानक एक गोरे सूटेडबूटेड को देखा तो जाना कि वह विलियम का कजन है. उन्हें देख रिया हैरानी से बोली कि हाय जीजू. जीजू ने कहा हाय रिया… सरप्राइज, रेखाजी हैरान… निधि का पति पर बहन ने तो कभी नहीं बताया कि उन का दामाद गोरा है. शादी रीतिरिवाज से हो रही थी. विदाई के समय नवदंपती ने दादी के पैर छुए तो आशीर्वाद देते दादी की आंखें भर आईं.

विलियम ने दादी के दोनों हाथों को अपने हाथों में ले उन्हें आश्वासन दिया कि वह रिया का अच्छा पति बनेगा. भर आई आंखों से रिया ने दादी की आंखों में ममता का प्रतिबिंब देखा. उन के गले लग कहा कि धन्यवाद दादी. मगर दादी ने कहा कि वह क्यों बिटिया, अब रिया क्या बताए कि दादी ने जो अपनी सोच का विस्तार कर लिया था, अपनी सारी उम्र के धर्म, कर्म, पाबंदियां, रूढि़वादिता त्याग कर पोती की खुशी के लिए जो चुना वह इतना सहज नहीं था.

जारेद रात की फ्लाइट से यूएस लौटने वाले थे. रेखाजी ने निधि के लिए झुमके व नन्ही जूली के लिए सोने की छोटी सी चेन खरीद ली, पर अब जारेद को क्या दें. तभी सासूजी एक पुरानी डिबिया ले आईं और फिर बोलीं कि बहू दामाद पहली बार आया है. उसे दे दो. डिबिया खोली तो उस में सोने की गिन्नी थी. रेखाजी ने मुसकराते कहा कि मां आप तो सोने का खजाना हैं. उत्तर मिला कि वह तो हूं ही.

एक रात होटल में रह सुबह रिया व विलियम घर आए. नन्ही काइरा नानी के पास रही. दिन खुशी से बीता और शाम मम्मीपापा उन्हें एअरपोर्ट छोड़ने जाने लगे तो रिया ने दादी को भी चलने को कहा.

रिया दादी के चेहरे पर आए भावों को पहचानती थी. दादी का हाथ सहलाते रिया ने कहा कि दादी आप को अमेरिका में मेरे घर आना होगा.

इस पर दादी ने कहा कि जरूर पर जब तू काइरा के भाई या बहन को जन्म देगी और मैं परदादी बनूंगी तब.

विली ने रिया की ओर देख मुसकराते हुए कहा कि वह तो आप अब हो गई हैं. काइरा की ग्रेट ग्रांड मां, अगली सीट पर बैठे सुरेशजी ने मुड़ रिया और विली को आशीर्वाद दिया.

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