Monsoon Special: बारिश और एलर्जी

मौनसून में जरा सी भी लापरवाही ऐलर्जी और इन्फैक्शन से ग्रस्त कर सकती है. बरसात के शुरू होने के साथ ही ये बीमारियां काफी परेशान करने लगती हैं. इस के साथ ही त्वचा और आंखों से संबंधित रोग भी काफी परेशान करते हैं.

1.स्किन इन्फैक्शन

बरसात की शुरुआत होते ही हमारी त्वचा के लिए परेशानी बढ़ जाती है. चूंकि इस दौरान वातावरण में ह्यूमिडिटी बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि काफी तेजी से ग्रो करते हैं और जैसे ही ये त्वचा के संपर्क में आते हैं, त्वचा को संक्रमित कर देते हैं. हालांकि इन दिनों त्वचा को अगर सब से ज्यादा किसी माइक्रोब से संक्रमित होने का डर होता है, तो वह है फंगस. बरसात के मौसम में सब से ज्यादा फंगस यानी फफूंद के कारण ही त्वचा संक्रमित होती है और कई प्रकार के स्किन डिजीज होने की संभावना बनी रहती है.

2.रैड पैचेज यानी लाल चकत्ते

फंगल इन्फैक्शन की वजह से त्वचा खासकर बगलें, पेट और जांघों के बीच के जोड़ और स्तनों पर गोल, लाल पपड़ीनुमा चकत्ते निकल आते हैं. इन में काफी खुजली होती है.

इस परेशानी से बचने के लिए बगल, ग्रोइन और शरीर में जहांजहां जोड़ हैं वहां ऐंटीफंगल पाउडर लगाएं ताकि पसीना और नमी एकत्रित न होने पाए. बारबार फंगल इन्फैक्शन होने पर मैडिकेटेड पाउडर का इस्तेमाल करें.

3.हीट रैशेज

इस मौसम में पसीना काफी आता है, जिस से त्वचा के छिद्र यानी स्किन पोर्स बंद हो जाते हैं. इस वजह से त्वचा पर लाल फुंसियां यानी घमौरियां निकल आती हैं. इन में काफी खुजली और जलन होती है.

प्रिकली हीट पाउडर लगाएं. ढीले और सूती कपड़े पहनें. त्वचा की साफसफाई का पूरा खयाल रखें. घमौरियों के होने पर कालामाइन लोशन का इस्तेमाल करें. इस से खुजली से राहत मिलेगी.

4.पैरों का इन्फैक्शन

फंगल इंफैक्शन के कारण पैरों की उंगलियां संक्रमित हो जाती हैं. असल में इस मौसम में नंगे पांव गीले फर्श पर चलने या देर तक पानी में पैरों के रहने के कारण वहां मौजूद फंगस उंगलियों को संक्रमित कर देता है.

इस संक्रमण की वजह से उंगलियां लाल हो कर सूज जाती हैं और उन में खुजली भी होती है. इस संक्रमण के होने पर रोगी को चलने में काफी तकलीफ होती है. इस संक्रमण के कारण कई बार अंगूठे के नाखून यानी टो नेल्स और दूसरे नाखून भी संक्रमित हो जाते हैं. इस संक्रमण के होने पर नाखून बदरंग और कमजोर हो कर अपनी चमक खो देते हैं.

फुट और नेल इन्फैक्शन से बचने के लिए गीली जमीन पर नंगे पैर न चलें. पैरों को ज्यादा देर तक गीला न रहने दें. गीले जूतेचप्पल पहनने से बचें. बहुत देर तक जूतेमोजे न पहने रखें, क्योंकि इस से पसीना निकलता है और वह सूख नहीं पाता है, जिस से फंगल इन्फैक्शन हो सकता है. इस मौसम में सैंडल्स और फ्लोटर्स ही पहनें. नाखूनों को समयसमय पर काटते रहें और उन की साफसफाई का विशेष ध्यान रखें. सूती मोजे पहनें.

5.साइट संक्रमण

मौनसून में आंखों को सब से ज्यादा तकलीफ साइट संक्रमण से ही होती है. इस संक्रमण के होने पर पलकों पर एक प्रकार का लंप यानी गांठ सी हो जाती है. इस की वजह से आंखों में काफी दर्द होता है. यह संक्रमण बैक्टीरिया द्वारा आंखों के संक्रमित होने के कारण होता है. गरम पानी में कपड़ा डुबो कर सेंकने और हर 2-3 घंटे पर आंखों की सफाई करने से रोगी को आराम मिलता है.

इस के अलावा इस मौसम में आंखों का लाल हो जाना. उन में जलनचुभन और खुजली होना आम बात है.

6.ऐथलीट फुट

यह बीमारी उन लोगों को होती है, जो काफी लंबे समय तक पानी में रहते हैं, खासकर गंदे पानी में. इस संक्रमण की शुरुआत अंगूठे से होती है. वहां की त्वचा सफेद या हरे रंग की हो जाती है. उस में बहुत ज्यादा खुजली होने लगती है. कई बार तो यहां की त्वचा से दुर्गंधयुक्त स्राव या पस भी निकलने लगता है.

इस संक्रमण से बचने के लिए पानी से निकलने के बाद पैरों को गरम पानी और साबुन से साफ करें. उस के बाद अच्छी तरह सुखाएं. बूट पहनने से बचें.

7.अस्थमा

मौनसून में हवा में परागकण और फंगस जैसे ऐलर्जन के मौजूद रहने के कारण अस्थमा की परेशानी बढ़ जाती है. मौनसून में अस्थमा के तेज होने के कई कारण होते हैं:

– गरज के साथ तेज बारिश के होने से इस मौसम में रोगी को अस्थमा के अटैक आने लगते हैं. चूंकि इस मौसम में तेज हवा चलती है इस कारण बड़ी मात्रा में फूलों के परागकण निकल कर हवा में फैल जाते हैं, जो सांस के साथ रोगी के शरीर में चले जाते हैं. नतीजा रोगी की परेशानी बढ़ जाती है.

– इस मौसम में ह्यूमिडिटी यानी आर्द्रता के बढ़ने से फंगल स्पोर्स या मोल्ड्स काफी तेजी से पनपते हैं. ये फंगस या मोल्ड्स दमे के रोगी के लिए बेहद स्ट्रौंग ऐलर्जन होते हैं. ऐसे में वातावरण में इन की वृद्धि अस्थमा रोगियों की परेशानी का सबब बन जाती है. यही कारण है कि इस मौसम में दमा के अटैक ज्यादा आते हैं.

– बरसात के कारण हवा में सल्फर डाइऔक्साइड और नाइट्रोजन औक्साइड की मात्रा में वृद्धि हो जाती है. फलतया वायु प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हो जाती है. ये सल्फर डाइऔक्साइड और नाइट्रोजन औक्साइड दमे के रोगियों को सीधा प्रभावित करते हैं और परेशानी बढ़ा देते हैं.

– मौनसून के दौरान गाडि़यों के धुएं के कारण होने वाला वायु प्रदूषण आसानी से समाप्त नहीं होता. इस वजह से अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है.

– मौनसून के मौसम में कुत्ते, बिल्ली अकसर घर के अंदर ही रहते हैं, बाहर कम निकलते हैं. इस वजह से उन के बालों में रूसी की मात्रा बढ़ जाती है. यह रूसी भी अस्थमा रोगियों की परेशानी को बढ़ाती है.

– मौनसून के दौरान वायरल इन्फैक्शन में वृद्धि हो जाती है. इस वजह से भी रोगी में दमे के लक्षण उभर आते हैं.

 सावधानियां 

– इस दौरान नियमित रूप से दमा की दवा लेते रहें. जो गंभीर रूप से अस्थमा से पीडि़त हों वे अपने साथ इनहेलर के द्वारा ली जाने वाली दवा भी लेते रहें ताकि उन के वायुकोष में सूजन न हो.

– आर्द्रता यानी ह्यूमिडिटी और नम जगहों को समयसमय पर एअर आउट करें. डीह्यूमिडिफायर के माध्यम से ऐसी जगहों की आर्द्रता को 25 से 50% तक कम करें.

– जरूरत पड़ने पर एअर कंडीशन का प्रयोग करें.

– बाथरूम की नियमित सफाई करें और उन उत्पाद का इस्तेमाल करें, जो फफूंद को खत्म करते हों.

– भाप को बाहर निकालने के लिए ऐग्जौस्ट फैन का इस्तेमाल करें.

– इन दिनों इनडोर प्लांट्स को बैडरूम से बाहर रखें.

– बाहरी स्रोतों जैसे गीली पत्तियों, बाग की घास, कूड़े आदि से दूर रहें, क्योंकि वहां फफूंद होने का डर रहता है.

– फंगस को खत्म करने के लिए ब्लीच और डिटर्जैंट वाली क्लीनिंग सौल्यूशन का प्रयोग करें.

– जिस समय सब से ज्यादा परागकण हवा में फैले हों जैसे एकदम सुबह उस समय बाहर जाने से बचें.

– जब परागकण ज्यादा मात्रा में हवा में फैले हों उस समय खिड़कियां बंद रखें.

– रोएंदार तकिए और बिस्तर का इस्तेमाल न करें.

– सप्ताह में 1 बार गरम पानी से चादरों और तकियों के कवरों को साफ करें.

– महीने में 2 बार गरम पानी से घर के सारे परदों को साफ करें.

– इन दिनों कालीन न बिछाएं. अगर कालीन बिछा रखा है, तो उसे साफ करते समय मास्क का प्रयोग करें.

– इस बात का ध्यान रखें कि घर में धूल न जमने पाए. गीले कपड़े से लैंपशेड, खिड़कियों के शीशों को साफ करें.

8.आई इन्फैक्शन

इन दिनों हवा में मौजूद परागकण, धूलकण और दूसरे ऐलर्जन के कारण आंखें संक्रमित हो कर लाल हो जाती हैं. इसे ऐलर्जिक कंजक्टिवाइटिस कहते हैं. इस वजह से आंखों में सूजन आ जाती है. हालांकि इस कंजक्टिवाइटिस में आंखों से पानी नहीं निकलता है, लेकिन उन में खुजली बहुत ज्यादा होती है. इस परेशानी से बचने के लिए ऐलर्जन से बच कर रहें. समयसमय पर आंखों में आईड्रौप डालें.

सावधानी

– गंदे हाथों से आंखों को स्पर्श न करें.

-अगर आप को महसूस होता है कि आप को ऐलर्जिक कंजक्टिवाइटिस हो गया है, तो तुरंत साफ पानी से आंखों को धोएं और ठंडे पानी में पट्टी डुबो कर आंखों पर दबा कर रखें.

– अगर घर में किसी को कंजक्टिवाइटिस हुआ है, तो उसे ड्रौप डालने के बाद अपने हाथों को साफ पानी से धोएं.

– इन दिनों अपना तौलिया, साबुन, तकिया और दूसरी व्यक्तिगत चीजें किसी दूसरे के साथ शेयर न करें. ऐसा करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इन्फैक्शन हमेशा हाथों, कपड़ों आदि से फैलता है.

– इन दिनों कौंटैक्ट लैंस के इस्तेमाल से बचें.

– घर से बाहर निकलते समय धूप का चश्मा जरूर लगाएं.

– सड़क किनारे बिकने वाली चीजों को खाने से बचें.

– बाहर से आने के बाद अपने हाथों को साफ पानी से धोएं.

– बारबार आंखों को स्पर्श न करें.

– आंखों को पोंछने के लिए रूमाल या तौलिए के बजाय डिस्पोजेबल टिशू का इस्तेमाल करें.

– हाथों को समयसमय पर साफ पानी से धोते रहें.

– इन दिनों कौस्मैटिक्स का इस्तेमाल न करें.

– आंखों की साफसफाई का पूरा ध्यान रखें. उन्हें साफ और ठंडे पानी से धोएं.

– आंखों को दिन में 3-4 बार साफ करें.

– नाखूनों को समयसमय पर काटते रहें.

– अगर आंखों में चुभन महसूस हो रही है, तो रगड़ें नहीं वरना संक्रमण हो सकता है.

– परेशानी होने पर डाक्टर को दिखाएं

डा. पी के मल्होत्रा

सरोज सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल, नई दिल्ली

Anupama के खिलाफ हुई गुरु मां, क्या बच्चों को बनाएंगी निशाना?

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ जबसे टेलीकस्ट हुआ है तभी से दर्शकों का चाहेता सीरियल बन गया है. रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) स्टारर ‘अनुपमा’ में नए-नए ट्विस्ट और टर्न्स आते ही रहते है. शो के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि गुरु मां और मालती देवी अनुपमा से बदला लेने का प्लान तैयार किया है.

वनराज और बा को सता रहा है डर

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि लीला बा शाह हाउस में बैठी वनराज शाह से कहेगी- अब अनुपमा ने सही किया या गलत किया, लेकिन मालती देवी अब तो गलत ही करेगी. इस पर वनराज कहता है कि, अब मालती कुछ भी करें उसका सीधा असर हम पर ही पड़ेगा. वहीं कपाड़िया हाउस में अनुज अपने भाई से कहेगा चाहे कुछ भी हो जाए, मैं मालती देवी को अनु को एक बाल भी बंका करने नहीं दूंगा.

 

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मालती देवी ने पकड़ी कमजोरी

रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) स्टारर ‘अनुपमा’ में आगे देखने को मिलेगा कि मालती देवी गुरुकुल में बैठी है और अपने आप से कहेगी जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे. गुरु मां से मालती कहेगी कि, उसे लगता है कि मां होना उसकी सबसे बड़ी ताकत है. असल में वह सबसे बड़ी कमजोरी है. उसी कमजोरी पर मैं वार करुंगी. रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) स्टारर ‘अनुपमा’ में मनोरंजन यहीं खत्म नहीं होता अब यह देखना होगा कि, क्या मालती देवी अब छोटी अनु को निशाना बनाएंगी.

मालती का अगला कदम क्या होगा

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि, अनुपमा की ममता का फायदा उठाकर गुरु मां अपनी शिष्या को पराजित करेगी. इस मंगलवार को शो में दिखाया जाएगा कि वह माया की वजह से प्लेन मे बैठकर उतर गई थी. क्योंकि उसे माया की रूह दिखाई पड़ गई, जिसने उसे कहा उसकी बच्ची को उसकी जरुरत है.

Monsoon Skin care Tips: 10 ब्यूटी प्रोडक्ट जो आपकी किट में जरुर होने चाहिए

Monsoon सीजन अपने साथ खुशियां, सुहावना मौसम और ठंडी हवा लेकर आता है. चिलचिलाती गर्मी के बाद, मौनसून राहत तो देता है लेकिन इसके साथ नमी भी बढ़ जाती है जिससे त्वचा संबंधी कई समस्याएं हो जाती हैं. लेकिन, अपनी त्वचा की देखभाल और ब्यूटी रूटीन में कुछ सरल उपाय के साथ, आप बारिश के मौसम में भी अपनी त्वचा को स्वस्थ, चमकदार और पोषित रख सकते हैं.

जब मौनसून की बात आती है तो ऐसे मे ब्यूटी और स्किन केयर के लिए बेहतरीन प्रोडक्ट बहुत जरूरी है. आवश्यक है जो हमें इस मौसम में आने वाली कठिनाइयों, जैसे नमी, बारिश और संभावित स्किन प्रॉब्लम से निपटने में मदद करें. आज हम आपको इस लेख में बताएंगे 10 ब्यूटी प्रोडक्ट (10 Beauty Product) हैं जिन्हें आपको अपनी मानसून किट में शामिल करना चाहिए:

  1. स्पार्कलिंग फेस वॉश 

मौनसून के मौसम में चमकदार फेस वॉश का उपयोग करने से आपकी त्वचा को ताजगी और  सफाई मिल सकती है. स्पार्कलिंग फेस वॉश के इस्तेमाल से नमी की वजह से स्किन में जमा होने वाली अशुद्धियों, अतिरिक्त तेल और पसीने को हटाने में सहायता करती है. हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सभी प्रकार की त्वचा को स्पार्कलिंग  फेस वॉश से लाभ नहीं होगा, खासकर यदि आपकी त्वचा संवेदनशील (Senstive) या ड्राई  (Dry) है, तो एक सौम्य क्लींजर चुनें जो आपकी त्वचा के प्रकार के लिए उपयुक्त हो.

2. क्लींजर का इस्तेमाल करें

फेस की गंदगी, पसीना और अतिरिक्त तेल हटाने के लिए एक सौम क्लींजर उपयोग करें. एक्सपर्ट के मुताबिक हमेशा, ऐसे क्लींजर की तलाश करें जो आपकी त्वचा के लिए कोमल हो और कठोर तत्वों से मुक्त हो.

3. वाटरप्रूफ मस्कारा

बारिश या उमस के कारण दाग-धब्बे से बचने के लिए वॉटरप्रूफ मस्कारा का इस्तेमाल करें. यहां तक ​​कि अगर आप अपने आप को भारी बारिश में भी पाते हैं, तो भी आपकी पलके घनी बनी रहेंगी.

4. हाइड्रेटिंग लिप बाम

एक हाइड्रेटिंग लिप बाम आपके होठों को नमीयुक्त रखेगा. चूंकि मौनसून का मौसम शुष्क हो सकता है, इसलिए होंठों की उचित देखभाल करना महत्वपूर्ण है. ऐसे लिप बाम की तलाश करें जिसमें शिया बटर या नारियल तेल जैसे पौष्टिक तत्व हों.

5. वाटर बेस्ड मॉइस्चराइज़र

मौनसून के मौसम में, जब नमी का स्तर अधिक होता है, वाटर बेस्ड मॉइस्चराइज़र का उपयोग करना फायदेमंद हो सकता है. वाटर बेस्ड मॉइस्चराइज़र की बनावट हल्की होती है और यह त्वचा को ऑयली या भारीपन छोड़े बिना हाइड्रेट करता है.

6. लूज कॉम्पैक्ट पाउडर

बरसात के मौसम में क्रीम-आधारित उत्पाद के बजाय लूज़ कॉम्पैक्ट पाउडर लगाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है, खासकर यदि आप चमक को नियंत्रित करना चाहते हैं और साथ ही मैट फ़िनिश भी बनाए रखना चाहते हैं. तो लूज़ पाउडर तेल को सोखने और मेकअप को लंबे समय तक बनाए रखने की क्षमता के लिए जाना जाता है.

7. पेन आई लाइनर

मौनसून के मौसम के दौरान, लिक्विड आईलाइनर के बजाय पेन लाइनर का उपयोग करना एक बेस्ट विकल्प है क्योंकि उनके पास अधिक स्मज-प्रूफ और लंबे समय तक चलने वाला फॉर्मूला होता है. इसमें बोल्ड और लंबे समय तक टिकने वाले गुण होते है और ये बढ़िया ग्रिप देता है.

8. लाइटवेट मॉइस्चराइज़र

मौनसून के मौसम में भले ही उमस हो, फिर भी आपकी त्वचा को हाइड्रेटेड रखने की ज़रूरत होती है. एक नॉन-ऑयली, हल्का मॉइस्चराइज़र चुनें जो त्वचा पर भारीपन महसूस किए बिना पर्याप्त हाइड्रेशन प्रदान करता हो.

9. ऑयल फ्री सनस्क्रीन

मौसम चाहे जो भी हो, धूप से बचाव जरूरी है. अपनी त्वचा को यूवी किरणों से बचाने के लिए, ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एसपीएफ़ वाले नॉन-ऑयली सनस्क्रीन का उपयोग करें.

10. अपनी त्वचा को विटामिन सी प्रदान करें

एक्सफ़ोलीएटिंग चमकदार त्वचा पाने का एक शानदार तरीका है, आप हर दिन अपना चेहरा साफ़ नहीं कर सकते. इसलिए अपने फेस को चमक प्रदान करने के लिए,  सुबह और रात की त्वचा देखभाल  में विटामिन सी सीरम जोड़ें.  चेहरे पर विटामिन सी सीरम का उपयोग करने से आपका चेहरा चमकदार दिखेगा.

बिजी शेड्यूल की वजह से अपनी स्किन की तरफ ध्यान नहीं दे पा रही हूं, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 45 वर्ष है. 1 महीने बाद मेरे बेटे की शादी है. काम की व्यवस्तता के कारण अपनी ओर कम ही ध्यान दे पा रही हूं. मैं जानना चाहती हूं कि मुझे फेशियल कितने दिन पहले कराना चाहिए? मेरे बाल भी हलकेहलके सफेद हो रहे हैं. मुझे उस दिन कैसा हेयरस्टाइल बनाना चाहिए?

आप को अपने बेटे की शादी से 3-4 दिन पहले फेशियल कराना चाहिए. किसी प्रोफैशनल सैलून में जा कर बालों पर ब्रैंडेड हेयर कलर करा सकती हैं या फिर सफेद बालों को छिपाने के लिए हिना का इस्तेमाल कर सकती हैं. किसी अच्छे पार्लर में जा कर आप अपने चेहरे और बालों की लंबाई के मुताबिक हेयरस्टाइल बनवा सकती हैं.

हर कोई खूबसूरत दिखना चाहता है लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में यह आसान काम नही है. हाल ही किए गए एक सर्वे के मुताबिक एक औफिस जाने वाली महिला मेकअप के लिए 55 मिनट देती है. इसीलिए अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए और अपने डेली रूटीन को बदलने के लिए इन टिप्स को जरूर फौलो करें…

1. रात को कर लें प्लानिंग…

रात को ही सुबह की प्लानिंग करते हुए अपने सामान को व्यस्थित रखें, इससे सुबह आप को फैसला लेने में कम वक्त के साथ सामान ढूंढ़ने में भी समय नही लगेगा.

2. बालों के लिए माइक्रोफाइबर टौवेल का इस्तेमाल…

रोजाना इस्तेमाल होने वाले टौवेल के मुकाबले माइक्रोफाइबर टौवेल ज्यादा जल्दी पानी सोखता है. यह न केवल आप के ड्रायर से बाल सुखाने का समय आधा करता है, बल्कि आप के बालों को लगने वाली गरमी की मात्रा भी कम करता है.

3. बीबी या सीसी क्रीम…

रोजाना इस्तेमाल होने वाली बीबी या सीसी क्रीम में एसपीएफ होता है. यह आप की त्वचा को नमी देने के साथ कोमल बनाती है. साथ ही धूप से बचाते हुए चमकदार बनाती है. इसे लगाने के बाद आप को कंसीलर, फाउंडेशन, मौइस्चराइजर और सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नही पड़ती है.

जिंदगी की उजली भोर: भाग 1- रूना को जब पता चला समीर का राज?

समीर को बाहर गए 4 दिन हो गए थे. वैसे यह कोई नई बात न थी. वह अकसर टूर पर बाहर जाता था. रूना तनहा रहने की आदी थी. फ्लैट्स के रिहायशी जीवन में सब से बड़ा फायदा यही है कि अकेले रहते हुए भी अकेलेपन का एहसास नहीं होता.

कल शाम रूना की प्यारी सहेली सीमा आई थी. वह एक कंपनी में जौब करती है. उस से देर तक बातें होती रहीं. समीर का जिक्र आने पर रूना ने कहा कि वह मुंबई गया है, कल आ जाएगा.

‘मुंबई’ शब्द सुनते ही सीमा कुछ उलझन में नजर आने लगी और एकदम चुप हो गई. रूना के बहुत पूछने पर वह बोली, ‘‘रूना, तुम मेरी छोटी बहन की तरह हो. मैं तुम से कुछ छिपाऊंगी नहीं. कल मैं बड़ौदा गई थी. मैं एक शौपिंग मौल में थी. ग्राउंडफ्लोर पर समीर के साथ एक खूबसूरत औरत को देख कर चौंक पड़ी. दोनों हंसतेमुसकराते शौपिंग कर रहे थे. क्योंकि तुम ने बताया कि वह मुंबई गया है, इसलिए हैरान रह गई.’’

यह सुन कर रूना एकदम परेशान हो गई क्योंकि समीर ने उस से मुंबई जाने की ही बात कही थी और रोज ही मोबाइल पर बात होती थी. अगर उस का प्रोग्राम बदला था तो वह उसे फोन पर बता सकता था.

सीमा ने उस का उदास चेहरा देख कर उसे तसल्ली दी, ‘‘रूना, परेशान न हो, शायद कोई वजह होगी. अभी समीर से कुछ न कहना. कहीं बात बिगड़ न जाए. रिश्ते शीशे की तरह नाजुक होते हैं, जरा सी चोट से दरक जाते हैं. कुछ इंतजार करो.’’

रूना का दिल जैसे डूब रहा था, समीर ने झूठ क्यों बोला? वह तो उस से बहुत प्यार करता था, उस का बहुत खयाल रखता था. आज सीमा की बात सुन के वह अतीत में खो गई…

मातापिता की मौत उस के बचपन में ही हो गई थी. चाचाचाची ने उसे पाला. उन के बच्चों के साथ वह बड़ी हुई. यों तो चाची का व्यवहार बुरा न था पर उन्हें एक अनचाहे बोझ का एहसास जरूर था. समीर ने उसे किसी शादी में देखा था. कुछ दिनों के बाद उस के चाचा के किसी दोस्त के जरिए उस के लिए रिश्ता आया. ज्यादा छानबीन करने की न किसी को फुरसत थी न जरूरत समझी. सब से बड़ी बात यह थी कि समीर सीधीसादी बिना किसी दहेज के शादी करना चाहता था.

चाची ने शादी 1 महीने के अंदर ही कर दी. चाचा ने अपनी बिसात के मुताबिक थोड़ा जेवर भी दिया. बरात में 10-15 लोग थे. समीर के पापा, एक रिश्ते की बूआ, उन का बेटाबहू और कुछ दोस्त.

वह ब्याह कर समीर के गांव गई. वहां एक छोटा सा कार्यक्रम हुआ. उस में रिश्तेदार व गांव के कुछ लोग शामिल हुए. बूआ वगैरह दूसरे दिन चली गईं. घर में पापा और एक पुराना नौकर बाबू था. घर में अजब सा सन्नाटा, जैसे सब लोग रुकेरुके हों, ऊपरी दिल से मिल रहे हों. वैसे, बूआ ने बहुत खयाल रखा, तोहफे में कंगन दिए पर अनकहा संकोच था. ऐसा लगता था जैसे कोई अनचाही घटना घट गई हो. पापा शानदार पर्सनैलिटी वाले, स्मार्ट मगर कम बोलने वाले थे.

उस से वे बहुत स्नेह से मिले. उसे लगा शायद गांव और घर का माहौल ही कुछ ऐसा है कि सभी अपनेअपने दायरों में बंद हैं, कोई किसी से खुलता नहीं. एक हफ्ता वहां रह कर वे दोनों अहमदाबाद आ गए. यहां आते ही उस की सारी शिकायतें दूर हो गईं. समीर खूब हंसताबोलता, छुट्टी के दिन घुमाने ले जाता. अकसर शाम का खाना वे बाहर ही खा लेते. वह उस की छोटीछोटी बातों का खयाल रखता. एक ही दुख था कि उस का मायका नाममात्र था, ससुराल भी ऐसी ही मिली जहां सिवा पापा के कोई न था. शादी को 1 साल से ज्यादा हो गया था पर वह  3 बार ही गांव जा सकी. 2 बार पापा अहमदाबाद आ कर रह कर गए.

अनजाने पल: क्यों सावित्री से दूर होना चाहता था आनंद

एक ब्रेकअप ऐसा भी: भाग-3

उस का यह व्यवहार करण को बहुत बुरा लगा. दिल को चोट लगी थी.

अब नैना अकसर अभिनव के साथ बाहर निकलने लगी. उसे किसी की परवा न थी. वह अपने दिल की बात सुन रही थी. अभिनव करण की अपेक्षा काफी विनम्र और अंडरस्टैंडिंग नेचर का था. वैसे भी, नया नया प्यार था, सो, वह नैना को बहुत खास महसूस करा था. उस की छोटीछोटी ख़ुशियों का खयाल रखता. नैना को अब जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी.

एक दिन वह अभिनव के साथ किसी क्लब में थी. वहीं करण अपनी बीवी के साथ पहुंचा. नैना को पति के बजाय किसी और पुरुष के साथ देख कर उस का खून खौल उठा. यदि नैना अपने पति के साथ होती तो उसे बुरा नहीं लगता, मगर वह किसी और के साथ थी. नैना ने भी करण को देख लिया था, मगर उसे इग्नोर कर वह अभिनव की आंखों में देखती रही. करण से यह सब सहन नहीं हो रहा था. वह उस दमघोटू माहौल से दूर जाना चाहता था. उस ने अपनी बीवी से तबीयत ठीक न होने का बहाना बनाया और घर वापस लौट आया. आ कर एक कमरे में बंद हो गया. उस का दिल टूट गया था. भले ही नैना उस की बीवी नहीं थी पर वह उसे बीवी से ज्यादा प्यार करता था. नैना ऐसा कैसे कर सकती है, यह सोचसोच कर करण का सिर फट रहा था. एक बार फिर से उस ने नैना को फोन लगाया.

इस बार भी नैना ने फोन पिक नहीं किया, तो करण ने उसे व्हाट्सऐप किया, ‘यार, तुम ऐसा कैसे कर सकती हो? इतनी आसानी से मेरी जगह किसी और को कैसे दे सकती हो?’

थोड़ी देर बाद नैना का जवाब आया, ‘मैं ने पहले भी लैटर में लिखा था करण, अब मैं आगे बढ़ चुकी हूं. मैं ने मूव औन कर लिया है और तुम्हें भी ऐसा करने की पूरी आजादी है.’

‘पर हमारा प्यार, हमारा वह रिश्ता क्या कोई माने नहीं रखता? तुम मुझे ऐसे छोड़ कैसे सकती हो?’

‘मिस्टर करण, आप ने मुझ से शादी नहीं की है. इसलिए मुझ पर पतियों वाली मिल्कियत न जमाओ. तुम्हारे पास मेरे लिए वक्त नहीं रहा. इतने महीनों से लगातार मुझे इग्नोर कर रहे हो. यह तो मेरी बेवकूफी थी कि मैं फिर भी प्यार की उम्मीद करती रही. देखो करण, तुम्हारे लिए हमेशा से तुम्हारा परिवार अधिक महत्त्वपूर्ण रहा है. तुम ने हमेशा मुझ से ऊपर अपने घरवालों की इच्छा और जरूरतों को रखा. पहले अपने पिता के कारण मुझ से शादी नहीं की. अब बीवीबच्चों के चलते तुम्हारे पास मेरे लिए समय नहीं. तुम ने कभी भी मेरी परवा नहीं की. ऐसे में भला इस तरह के सवाल करने का हक तुम्हें किस ने दिया?’

नैना का रूखा जवाब उसे अंदर तक आहत कर गया. कहीं न कहीं वह नैना को दिल से चाहता था. इसलिए, शादी के बावजूद उसे अपना बना कर रखा था. पर आज उस के दिल का वह कोना रो रहा था. वह पूरी रात बेचैन रहा. बीवी ने कारण पूछा, तो टाल गया. अगले दिन औफिस के काम में उस का बिलकुल भी मन नहीं लगा, तो उस ने नैना को जवाब देने की सोचा.

उस ने नैना के मेल का जवाब लिखना शुरू किया- ‘नैना, तुम मुझे कभी नहीं समझ पाईं. मेरे प्यार को भी महसूस नहीं कर पाईं. याद है जब कई वर्षों बाद दोबारा तुम्हें औफिस में अपनी कलीग के रूप में देखा था, तो मैं कैसे रो पड़ा था. तुम्हें गले से लगा लिया था. दिल किया था कि तुम्हें खुद में ऐसे समेट लूं कि तुम कभी भी दूर न जा सको. पर मैं गलत था. तभी तो तुम ने मेरी कोई परवा नहीं की और ऐसे अचानक ब्रेकअप कर लिया. तुम ने किसी और को अपनी जिंदगी में शामिल कर लिया. मुझे तुम से ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी.

‘तुम्हें शायद हमारी वे मुलाक़ातें याद नहीं जब केवल तुम मेरे साथ थीं और कोई नहीं था. बीवी से औफिस ट्रिप का बहाना बना कर मैं तुम्हें कश्मीर ले कर गया. हम ने धरती के उस बेहद खूबसूरत स्थल पर 5 दिन बिताए. कितने मनोरम पल थे वे. तुम्हें कहांकहां नहीं घुमाया. तुम एक इशारा करती थीं और वह चीज तुम्हारे लिए उसी पल खरीद कर लाता था. तुम्हारी हर ख़्वाहिश, हर तमन्ना और हर उम्मीद पूरी की. अब जब परिस्थितियां बदल रही हैं, मैं ने थोड़ी दूरी बनाई, जो जरूरी थी, तो तुम ने एकदम से मेरा साथ छोड़ दिया. मेरी दुनिया से पूरी तरह निकल गईं. प्यार में ऐसा भी कभी होता है क्या? 20 सालों का प्यार ऐसे अचानक बिलकुल खत्म किया जा सकता है? यदि तुम्हें लगता है कि ऐसा किया जा सकता है और तुम मेरे बगैर खुश रह सकती हो, तो ठीक है. ऐसा ही करते हैं. हम अब पूरी तरह ब्रेकअप ही कर लेते हैं.’

नैना के पास करण का यह मेल पहुंचा. उस ने मेल में लिखे एकएक शब्द को महसूस किया. सारी यादें ताजा हो गईं. नैना की आंखों से आंसू बह निकले. बहुत देर तक वह उस मेल को बारबार पढ़ती रही और रोती रही.

कुछ देर बाद उस ने अपना चेहरा धोया, कपड़े बदले और फिर से चेहरे पर मुसकान सजा कर अभिनव को फोन लगाया, “अभिनव, आज मैं चाहती हूं कि तुम मुझे कहीं ऐसी जगह ले जाओ जहां मुझे दुनिया की कोई तकलीफ़, कोई दर्द, कोई याद मेरे पास न फटके. बस, केवल मैं होऊं, तुम्हारा प्यार हो और एक सुकून हो.”

“जैसी आज्ञा मैडम,” अभिनव ने जवाब दिया.

नैना का चेहरा संतोष और सही फैसले की मजबूती से चमक उठा. उस की जिंदगी में अब करण कहीं नहीं था.

Monsoon Special: बारिश के लिए करें अपने आशियाने को तैयार

मानसून में घर की, खासकर लकड़ी के फर्नीचर और दरवाजे-खिड़कियों की देखभाल बहुत जरूरी होती है, वरना मानसून के बाद उनका आकार और रंग, दोनों खराब हो सकता है. अगर आप अपना घर बारिश के लिए तैयार नहीं रखती हैं तो यह मौसम भारी मुसीबत का कारण बन सकता है. बारिश का मतलब है नमी, बदबू मारते कपड़े, अलमारियों में फंगल इंफेक्शन और भी बहुत कुछ. इसलिए इस खूबसूरत मौसम का मजा आप ले सकें, इसके लिए आपको थोड़ी-सी तैयारी करनी होगी.

1. मानसून में हो फर्नीचर की देखभाल

मौसम की नमी लकड़ी की गुणवत्ता और आकार पर बहुत बुरा असर डालती है. इसमें फंगस जमा हो सकती है. इस मौसम में हल्के गीले कपड़े की बजाय साफ-नरम और सूखे कपड़े से फर्नीचर साफ करें. लेमिनेटेड फर्नीचर जैसे स्टडी डेस्क, अलमारी, शटर या डोर को साफ करने के लिए साबुन और पानी का इस्तेमाल करें. इस बात का खास खयाल रखें कि अलमारी में रखने से पहले कपड़े पूरी तरह से सूख चुके हों. अलमारी में थोड़ी-बहुत सूखी नीम की पत्तियां भी डाल दें.

2. कारपेट्स और रग्स का रखें ख्याल

मानसून कारपेट्स और रग्स पर बहुत ही बुरा असर डालता है. बारिश में खिड़कियां खुली न रखें, उनसे नमी अंदर आकर कारपेट्स में जमा हो जाएगी. नम कारपेट्स फंगस का बहुत बड़ा कारण होते हैं. इसी तरह से कारपेट पर गीले फुटवियर ले जाने से भी बचें. बेहतर होगा कि पंखा चलाए रखें. कारपेट्स को नियमित रूप से वैक्यूम क्लीन करती रहें. वैसे अच्छा यही होगा कि इस मौसम में भारी कारपेट्स उठा कर रख दें. आप ईकोफ्रेंडली कारपेट्स भी इस्तेमाल कर सकती हैं. इनकी ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती.

3. सीलन को रोकें

बारिश के दिनों में अक्सर दीवारों और छतों पर सीड़न आ जाती है. अगर दीवार या छत पर हल्की सी भी दरार है, खिड़कियां सही नहीं हैं तो घर की दीवारें बुरी तरह से प्रभावित होती हैं. इससे पेंट भी पपड़ी के रूप में उतर सकता है. इन दिनों जो पेंट्स लगाए जाते हैं, वे भी नमी को आसानी से पकड़ लेते हैं और फिर पपड़ी के रूप में उतर जाते हैं. आरसीसी की छत में भी पानी घुस सकता है. इसलिए बारिश आने से पहले ही पूरे घर की दीवारों को चेक करें और सारे पाइपों और नालियों की सफाई करवा लें.

4. सोफे की सफाई

बारिश के मौसम में सोफों को वैक्यूम क्लीन करना न भूलें. वैक्यूमिंग करते समय क्लीनर को गर्म हवा वाले मोड पर रखें. सोफे के कोनों में नेफ्थलीन की गोलियां डाल दें.

ये भी करें

रसोई के सारे केबिनेट्स को खाली करके अच्छी तरह साफ करें. खाना खुला न छोड़ें. फ्रिज को भी अच्छी तरह साफ करके देख लें, जो खाद्य सामग्री पुरानी हो गई है, उसे फेंक दें. पेड़-पौधों की कटाई करें. बारिश में पेड़-पौधे जल्दी बढ़ते हैं, इसलिए इन्हें ट्रिम कर दें.

बारिश के मौसम में दीमक बहुत तेजी से बढ़ती है. इसलिए पूरे घर के खिड़की-दरवाजे चेक करें कि कहीं कोई दीमक तो नहीं लगी हुई. इस मौसम में घर में कोई तोड़-फोड़ या रिनोवेशन न करवाएं.

बारिश से पहले गद्दों को निकालकर धूप दिखा दें. इससे बारिश में कोई कीड़े बिस्तरों में नहीं लगेंगे.

नमी को पूरी तरह से नियंत्रित करने की कोशिश करें. इलेक्ट्रिकल गैजेट्स को लेकर विशेष सावधानी बरतें. उन्हें सिलिकॉन पाउच में रखें.

Monsoon Special: बारिश के साइड इफैक्ट्स

मानसून की रिमझिम बारिश लोगों को चिलचिलाती गरमी से तो राहत दिलाती है, मगर यह भी सच है कि इस मौसम में सिर्फ बड़ेबुजुर्गों को ही नहीं, युवाओं, महिलाओं और बच्चों को भी तरहतरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इस मौसम में लगातार बारिश होती रहती है, जिस से हर जगह पानी, कीचड़, गंदगी देखने को मिलती है. इस से जीवाणुओं और विषाणुओं को पनपने का भरपूर मौका मिलता है. मक्खीमच्छर इसी मौसम में सब से ज्यादा पनपते हैं. इस मौसम में पाचनतंत्र भी कमजोर हो जाता है, जिस से शरीर का इम्यून सिस्टम गड़बड़ा जाता है. शरीर की रोगाणुओं और विषाणुओं से लड़ने की ताकत कम हो जाती है और संक्रामक रोगों के होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए जरूरी है कि इस मौसम में अपने स्वास्थ्य पर तो ध्यान दे हीं, परिवार के सदस्यों को भी रोगों से बचने के उपाय बताएं.

बीमारियां कैसीकैसी

गंदा पानी संक्रामक रोगों के फैलने का बहुत बड़ा कारण है. जगहजगह गंदे पानी के जमाव की वजह से कीटपतंगों व मक्खीमच्छरों के पनपने की आशंका होती है. मच्छरों के काटने से मलेरिया तथा डेंगू फैलता है. बारिश के दिनों में पानी के तेज बहाव के कारण पानी के पाइप लीक करने लगते हैं और कई जगह टूट भी जाते हैं, जिस की वजह से बारिश या फिर सीवेज का पानी वाटर सप्लाई के पानी में मिल कर उसे प्रदूषित कर देता है. इस से कौलरा, टायफाइड, डायरिया, हैपेटाइटिस जैसी बीमारियों के होने की आशंका बढ़ जाती है. मौसम के तापमान में अचानक गिरावट आ जाने तथा सर्द हवाओं की वजह से खांसीजुकाम, निमोनिया, टौंसिलाइटिस, त्वचा संबंधी रोग, आंखों का रोग जैसे कंजंक्टिवाइटिस के होने की भी आशंका बनी रहती है. इस मौसम में हृदय, फेफड़ों, गुरदों, मस्तिष्क संबंधी बीमारियां तथा पीलिया होने की आशंका भी ज्यादा होती है. समय रहते ध्यान न देने से कई बार मरीज की मौत भी हो जाती है.

समय पर कराएं इलाज

मानसून में मच्छरों से मलेरिया, डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियां ज्यादा होती हैं. इन के प्रति थोड़ी सी भी लापरवाही से परिणाम घातक हो सकता है. डेंगू काफी खतरनाक रोग होता है. यह बड़ेबूढ़ों के साथ बच्चों को भी संक्रमित करता है, इसलिए इस की थोड़ी सी भी शंका हो यानी मरीज को तेज बुखार, उलटियां, कमजोरी, सिरदर्द होने लगे तो तुरंत इलाज कराएं. गंदे पानी की वजह से पाचनतंत्र की बीमारियां भी आम बात है. इन में टायफाइड, डायरिया, डिसेंट्री के साथसाथ कालरा तक के होने की संभावना होती है. उलटियां, दस्त, बुखार, कमजोरी महसूस होने पर तुरंत इलाज कराएं. अत्यधिक उलटियां या दस्त होने पर मरीज के शरीर में पानी की कमी हो जाती है. ऐसी स्थिति में समय पर अस्पताल न ले जाने पर मरीज के मरने तक की संभावना रहती है. यदि कोई डायबिटीज, हार्टअटैक तथा उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से ग्रस्त हो तो उसे भी इस मौसम में विशेषतौर पर सावधानी बरतनी चाहिए. डायबिटीज के मरीजों को नंगे पांव चलने से बचना चाहिए. गंदे पानी तथा कीचड़ से सने पैरों से संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है. नंगे पांव चलने की वजह से लैप्टोस्पाइरोसिस नामक संक्रमण हो सकता है.

यदि इस मौसम में बच्चों को सर्दी, खांसी या बुखार होने लगे, तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए. बहुत छोटे बच्चों को मौसम बदलने की वजह से खासकर श्वसनतंत्र की बीमारियां, जैसे निमोनिया होने की प्रबल संभावना होती है. इस का भी इलाज समय से कराना जरूरी होता है.

बेहतर है बचाव

कहते हैं इलाज से बेहतर है बचाव. इसलिए इन दिनों यदि भावी मुसीबतों से बचाव के लिए तैयारी कर लें, तो मानसून के दौरान होने वाली समस्याओं से तो नजात पा लेंगे, मानसून की बारिश का भी भरपूर आनंद उठा सकेंगे. इस दौरान क्याक्या सावधानियां बरतनी चाहिए. आइए जानें- 

मच्छरों से बचाव : बारिश के दिनों में मच्छरों का प्रजनन बड़ी तेजी से होता है. बारिश के ठहरे पानी में ये तेजी से पनपते हैं. इस दौरान घर तथा बाहर जगहजगह नालियों, गड्ढों, कूलरों, पुराने बरतनों और ड्रमों में पानी जमा रहता है, जहां इन की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होती है. इन के काटने से मलेरिया जैसी घातक बीमारी के होने की संभावना होती है. अत: इन से बचाव के लिए हर तरह की एहतियात बरतनी चाहिए. मानसून से पहले ही घर की नालियों की सफाई करवा दें. यदि कहीं गड्ढा है, तो उसे मिट्टी से भरवा दें ताकि बारिश का पानी जमा न हो पाए. मार्केट में मलेरिया से बचाव के लिए दवाएं मिलती हैं, जिन का पहले से सेवन कर लेने से इस की संभावना नहीं रहती. रात को मच्छरदानी लगा कर सोएं. कई लोग मच्छरदानी की जगह मस्क्यूटो क्वायल लगा कर सोते हैं, जिस का निरंतर प्रयोग हानिकारक हो सकता है. इस के धुएं में पाए जाने वाले रसायन शरीर के लिए हानिकारक होते हैं. शाम को घर में नीम की सूखी पत्तियों का धुआं करें. मच्छरों को भगाने के लिए यह अचूक घरेलू उपाय है. मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए नालियां, गड्ढों तथा आसपास जमे पानी में मिट्टी का तेल या फिनाइल का छिड़काव करें. यदि आप घूमने जा रहे हैं, तो मस्क्यूटो रेवेलेंट ट्यूब रखना न भूलें. बच्चों को भी रात को सोते समय उन के हाथपैरों, बांहों आदि खुली जगहों पर इसे लगाएं.

डाइट का रखें ध्यान : मानसून में प्रदूषित पेयजल से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है. हमेशा उबला या फिल्टर्ड पानी ही पिएं. बाहर का पानी, जूस या कच्चे भोज्यपदार्थों का सेवन करने से परहेज करें खासकर सड़क के किनारे खड़े ठेले वालों से चाट, पकौड़े, समोसे न तो खुद खाएं और न ही अपने बच्चों को खाने को दें.

डाक्टरों का मानना है कि फिल्टर्ड वाटर को भी उबाल कर पिएं. केवल फिल्टर कर देने से सारे विषाणु या जीवाणु नहीं मरते हैं. प्रदूषित पानी से टायफाइड, पीलिया, डायरिया, डिसेंट्री, कौलरा के साथसाथ पाचनतंत्र की कई दूसरी बीमारियां भी होती हैं. इन से बचने के लिए खुला खाना खाने और बिना पैकिंग वाला दूषित पानी पीने से बचना चाहिए. खाना बनाने के लिए भी फिल्टर्ड पानी का प्रयोग करें या पानी को खौला कर ठंडा कर लें. गरम पानी पीने से खाना अच्छी तरह पचता है. बाहर के खुले भोज्यपदार्थों पर मक्खियां भिनभिनाती हैं, उन्हें न खाएं. कच्ची सब्जियां खाने से बचें. बारिश के गंदे पानी में चलने से भी तरहतरह की बीमारियां होती हैं, क्योंकि इस से सीवेज वाटर में पाए जाने वाले कीटाणु या जीवाणु शरीर के सीधे संपर्क में आ जाते हैं, जो रोग का कारण बनते हैं. अत: बच्चों को गंदे पानी में चलने या खेलने से रोकें. उन्हें मौसम के अनुरूप ड्रैस पहनाएं ताकि सर्दीखांसी से बचाव हो सके. इस मौसम में बच्चों को गमबूट पहनने के लिए दें और घर लौटने के बाद यदि कपड़े भीगे हों तो उन्हें तुरंत बदल दें. भीगे कपड़ों से सर्दीखांसी होने की संभावना रहती है. बाल गीले हों तो साफ तथा सूखे तौलिए से अच्छी तरह पोंछ दें. एयरकंडीशंड कमरों में गीले कपड़ों में न जाने दें. पैर गीले या गंदे हों तो उन्हें साफ पानी में धोने तथा सूखे तौलिए से पोंछ लेने की हिदायत दें.

मानसून में पाचनतंत्र से संबंधित 2 तरह की बातें देखने को मिलती हैं. पहली, भोजन को पचाने की गति धीमी हो जाती है, जिस कारण सारे खाद्यपदार्थ आसानी से नहीं पचते. फलस्वरूप शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है. दूसरी बात यह है कि इस दौरान बैक्टीरिया तथा वायरस ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं. इसलिए खानपान में यदि पर्याप्त हाइजीन मेंटेन नहीं करेंगे तथा सही खाना नहीं खाएंगे तो संक्रमण की प्रबल संभावना रहेगी. इस मौसम में यह समस्या सामने आती है कि क्या खाएं, क्या नहीं. अत: इस मौसम में कच्ची सब्जियों के सेवन से बचें. फलों से भी परहेज करें, क्योंकि फलों तथा सब्जियों में नमी की वजह से तरहतरह के बैक्टीरिया तथा वायरस पनपते हैं. अत: इन की जगह अंकुरित तथा पूरी तरह से पकी सब्जियां ही खाएं. मांस से भी परहेज करें, क्योंकि गरिष्ठ भोजन आसानी से नहीं पचता. यदि आप नानवेज नहीं छोड़ना चाहते तो ताजा ही खाएं. मछली इस मौसम में न खाएं, क्योंकि इस समय मार्केट में ताजा मछलियां कम मिलती हैं.

अपनी डाइट में सूप, गाय का दूध तथा नारियलपानी की मात्रा को बढ़ा दें. इस से शरीर की रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. ज्यादा तेल, घी तथा मसालेदार खाने से भी बचें. पानी में शहद तथा नीबू की थोड़ी मात्रा डाल कर सेवन करें. इस से इम्यून सिस्टम सुदृढ़ होता है.

खानपान के नियम

खाने में नमक का प्रयोग कम से कम करें, क्योंकि इस से गैस तो बनती ही है, शरीर में पानी का जमाव भी होता है.

अत्यधिक तले भोज्यपदार्थों से परहेज करें, क्योंकि इस मौसम में पाचन क्षमता कमजोर होती है.

मक्का, बाजरा के आटे में अत्यधिक पोषक तत्त्व होते हैं, इसलिए इस आटे का सेवन करें. ऐसे खाद्यपदार्थ जिन में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जैसे करी आदि, को न लें.

सलाद से परहेज करें.

खट्टे भोज्यपदार्थों से बचें.

बाजार के रायते, पनीर का सेवन न करें.

मानसून में करेलों, मेथी के सेवन से संक्रमण से बचाव होता है. इन्हें डाइट में शामिल करें.

कुछ अतिरिक्त सावधानियां

घर को अंदर तथा बाहर से हमेशा साफ तथा सूखा रखें.

घर के आंगन में या बाहर आसपास बारिश के पानी को जमा न होने दें.

शरीर को ढक कर रखें. कम तापमान होने पर संक्रमण की संभावना होती है.

एसी वाले कमरे में भीगे केश तथा भीगे कपड़े पहन कर न जाएं.

पैर गीले हों तो सुखा लें. उन्हें गीला मत छोड़ें.

फल तथा सब्जियों को साफ पानी से धोएं.

खूब पानी पिएं ताकि शरीर में पानी की कमी न होने पाए.

बच्चों को कीचड़, बारिश के गंदे पानी में न खेलने दें.

Vickey Kaushal ने खास अंदाज में मनाया कैटरीना का बर्थडे, शेयर की तस्वीर

कैटरीना कैफ 16 जुलाई को 40 साल की हो गईं. अभिनेत्री को सोशल मीडिया पर फैंस और फॉलोअर्स से खूबसूरत जन्मदिन के विशेस मिले. कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज ने भी एक्ट्रेस को उनके 40वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं. कुछ समय पहले, कैटरीना कैफ के पति-अभिनेता विक्की कौशल ने अभिनेत्री को ‘जन्मदिन की शुभकामनाएं’ देने के लिए उनकी एक साथ प्यार भरी तस्वीरें साझा कीं.

विक्की ने कैटरीना के जन्मदिन पर रोमांटिक तस्वीरें साझा कीं

एक्टर विक्की कौशल ने अपनी ‘वाइफ’ कैटरीना को उनके 40वें जन्मदिन पर बधाई देने के लिए अपनी हालिए छुट्टियों की दो रोमांटिक तस्वीरें साझा कीं. तस्वीरें शेयर करते हुए विक्की ने लिखा, “तुम्हारे जादू से हैरान हूं…हर रोज. जन्मदिन मुबारक हो मेरा प्यार!” तस्वीरों में, कैटरीना को विक्की के साथ प्यार भरी नज़रें मिलाते हुए मुस्कान दिखाते हुए देखा जा सकता है.

कैटरीना ने पीले रंग की डैस पहनी है जबकि विक्की ने कैजुअल लुक चुना है तस्वीरों में कपल समुद्र किनारे एन्जॉय करते नजर आ रहे है.

 

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फैंस की प्रतिक्रियाएं देखें

जैसे ही विक्की कौशल ने कैटरीना को जन्मदिन की बधाई देने के लिए रोमांटिक तस्वीरें डालीं, उनके फैंस ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी. एक ने लिखा, “सबसे प्यारी जोड़ी.” एक अन्य ने टिप्पणी की, “बॉलीवुड की परफेक्ट जोड़ी.” एक-दूसरे के प्रति जोड़े के प्यार की प्रशंसा करते हुए, एक फैन ने कहा, “एलेक्सा प्ले “लवर” बाय टेलर स्विफ्ट.” कई फैंस ने कैटरीना को ‘जन्मदिन की शुभकामनाएं’ दीं और रेड दिल वाले इमोजी बनाए.

15 जुलाई को विक्की और कैटरीना को हाथों में हाथ डाले मुंबई एयरपोर्ट पर आते देखा गया था. कपल ने सुरक्षा जांच में एंट्री करने से पहले पापराज़ी के लिए पोज़ दिया और उनकी ओर हाथ हिलाया.

कैटरीना और विक्की की शादी

कैटरीना और विक्की ने दिसंबर 2021 में राजस्थान में एक भव्य डेस्टिनेशन वेडिंग में शादी के बंधन में बंधे. लेकिन अपनी शादी से पहले उन्होंने कभी भी अपने रिश्ते के बारे में सार्वजनिक रूप से बात नहीं की थी.

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