Monsoon Special: इन 7 टिप्स से बरसात में रहेंगे फिट एंड फाइन

चिलचिलाती गरमी से मौनसून की बौछारें राहत तो देती हैं पर बारिश के बाद वातावरण में बढ़ती उमस के कारण वायरल, बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण भी सक्रिय हो जाते हैं. इस दौरान डेंगू, मलेरिया आदि के मामले भी बढ़ जाते हैं. फिर उमस भरे मौसम में शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है.

तो क्या मौनसून का लुत्फ न उठाएं? नहीं, मौनसून का दिल खोल कर लुत्फ उठाने के लिए बस इन स्वास्थ्य संबंधी उपायों का पालन करें:

 1. मच्छरों से बचाव

वैसे तो डेंगू व मलेरिया के मामले गरमी के महीनों से ही दिखने लगते हैं, लेकिन जब मौनसून की बौछारें शुरू होती हैं तो ये बीमारियां चरम पर पहुंच जाती हैं. उमस बढ़ते ही कीड़ेमकोड़ों को पनपने का माकूल माहौल जो मिल जाता है. ठहरे हुए पानी में मच्छरों को प्रजनन करने की अच्छी जगह मिल जाती है और हवा में बढ़ती उमस उन्हें पनपने का अच्छा मौका मिल जाता है. इसीलिए मच्छरजनित बीमारियों का कहर मौनसून के मौसम में चरम पर होता है. अत: घर के आसपास ठहरे हुए पानी में मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव करें.

2. भरपूर पानी पीते रहें

अत्यधिक उमस का मतलब है कि बहुत ज्यादा पसीना निकलेगा. लिहाजा डीहाइड्रेशन होना पक्का है. पूरे वर्ष की तरह मौनसून के दौरान भी खुद को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है. शुद्ध जल का पर्याप्त सेवन करें ताकि आप का शरीर और त्वचा हाइड्रेटेड बनी रहे. इस से आप के शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत भी मिलती है और आप पानी की कमी होने से भी बचे रहते हैं. इस के अलावा भरपूर पानी पीने से शरीर के विषाक्त तत्त्व भी पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकलते रहते हैं.

3. बैक्टीरियल एवं फंगल संक्रमण से बचाव

मौनसून के मौसम में बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण बड़ी तेजी से फैलता है, क्योंकि इस मौसम का तापमान और नमी उन की वृद्धि के लिए अनुकूल हो जाती है. त्वचा के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपनी त्वचा को ज्यादा समय तक भीगने से बचाएं. सीलन के कारण फंगल संक्रमण बढ़ता है. बैक्टीरियल और फंगल समस्याओं से बचे रहने के लिए ऐंटीबैक्टीरियल साबुन, क्रीम और पाउडर का इस्तेमाल करें, खासकर तब जब आप की त्वचा ज्यादा संवेदनशील हो.

आर्द्र मौसम में फंगल तेजी से फैलता है. त्वचा के मुड़ने वाले स्थानों पर लाल निशान पड़ जाते हैं. इस के अलावा तैलीय त्वचा में तेजी से दाने निकल आते हैं और खुजली भी होने लगती है. बहुत ज्यादा पसीना निकलने की स्थिति में यदि आप त्वचा को सुखा कर नहीं रखते और कपड़े नहीं बदलते हैं तो भी ऐसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ज्यादा देर तक पसीने वाले मोजे पहनने से भी समस्या बढ़ जाती है. इसलिए अपने पैरों और जांघों को सूखा और संक्रमण मुक्त रखें.

स्नान करने के बाद तौलिए से त्वचा और सिर को पोंछ कर सुखा लें. जब भी पैरों को धोएं, उन्हें तौलिए से अच्छी तरह पोंछ कर सुखा लें और उंगलियों के बीच के हिस्सों को भी सुखा लें. इस से आप संक्रमण से बचे रहेंगे. घर में प्रवेश करते ही पैरों को धो लें और संभव हो तो पानी में बेटाडीन की कुछ बूंदें मिला कर उस में पैरों को कुछ देर डुबोए रखें. जरूरत हो तो ऐंटीफंगल पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. पैरों में हवा की आवाजाही बनाए रखने के लिए खुले जूते या चप्पलें पहनें.

4. तैलीय और बाहर के भोजन से परहेज करें

मौनसून के मौसम में अपचता भी एक बड़ी समस्या होती है. जब उमस अधिक होती है तो शरीर में भोजन पचाने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है. फिर जब आप का पाचनतंत्र कमजोर रहता है तो गरिष्ठ भोजन आप के पेट को आसानी से बिगाड़ सकता है. लिहाजा आप अपने पेट को बिगड़ने न दें. इसे संक्रमण की चपेट में न आने दें. तैलीय भोजन भी त्वचा में संक्रमण और अन्य समस्याएं पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है. अत: इस दौरान हलका और आसानी से पचने वाला भोजन ही करें.

इस दौरान चूंकि संक्रमण चरम पर होता है, इसलिए बाहर के भोजन से परहेज करना ही बेहतर होगा. मौनसून के दौरान सड़क किनारे के ढाबों और रैस्टोरैंट में खाना खाने से दूर ही रहें. घर में बना भोजन ही करें. इस से संक्रमण की चपेट में आने की संभावना कम रहेगी, जो इस दौरान वातावरण में तेजी से फैल चुका होता है.

5. आंखों को भी रखें साफ

इस मौसम में आंखों का वायरल संक्रमण भी चिंता का कारण बनता है. हालांकि इस मौसम में संक्रमण से बचना मुश्किल होता है, लेकिन यह तय है कि आंखों की साफसफाई करते रहने से आप संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं. घर में प्रवेश करते ही साबुन से हाथ धो कर आंखों को पानी से अच्छी तरह धोएं.

हर रात सोने से पहले आंखों में गुलाबजल की कुछ बूंदें डालें. पानी में सल्फर का टुकड़ा डाल कर भी रख सकते हैं. फिर उस पानी से आंखों को साफ कर सकते हैं.

6. प्रतिरक्षण प्रणाली मजबूत रखें

संक्रमण से लड़ने का सब से अच्छा तरीका अपने शरीर को अंदर से मजबूत बना कर रखना है और यह मजबूती सही खानपान से ही संभव हो सकती है. शरीर को चमकदार और अंदर से मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित रसदार फल और हरी सब्जियां खाएं. सेब, नाशपाती और अनार जरूर खाएं. भोजन में लहसुन का इस्तेमाल करें. नियमित दही खाएं.

7. साफसफाई के नियमों का पालन करें

मौनसून के दौरान संक्रमण तेजी से फैलता है. इसलिए खुद को जितना साफसुथरा रखेंगे आप के संक्रमित होने की उतनी ही कम संभावना रहेगी. हम सार्वजनिक परिवहन में सफर करते हैं, सार्वजनिक स्थानों और सामुदायिक केंद्रों में जाते हैं जहां हर तरह के लोग होते हैं. इन में से कई लोग संक्रमण से ग्रस्त हो सकते हैं. अत: उन से संक्रमित न होने का सब से अच्छा उपाय यही है कि घर आते ही हाथों और चेहरे को अच्छी तरह धो लें. संभव हो तो स्नान ही कर लें तथा शरीर को अच्छी तरह सुखा लें.

– डा. रविंद्र गुप्ता, इंटरनल मैडिसिन कंसल्टैंट, कोलंबिया एशिया हौस्पिटल

 

BB ott 2: जिया ने एलविश को पिलाया साबुन का पानी, ट्विटर पर ट्रेंड हुआ #ShameonJiya

बिग बॉस ओटीटी 2 काफी चर्चा में है. सलमान खान के शो बिग बॉस ओटीटी 2  में दो लोगों की एंट्री हुई है, एल्विश यादव और आशिका भाटिया. इस समय एल्विश सोशल मीडिया पर चर्चा के विषय बन गए हैं क्योंकि वह घर के अंदर कंटेस्टेंट्स को परेशान कर रहे हैं और एक दिन के भीतर, वह कुछ कंटेस्टेंट्स को परेशान करने में कामयाब रहे.

एल्विश घर के अंदर अपनी राय बहुत स्पष्ट रखते हैं और इसी वजह से कुछ कंटेस्टेंट्स उन्हें पसंद नहीं करते. एल्विश का अब तक बीबी हाउस में अविनाश सचदेव, जिया शंकर और फलक नाज़ से विवाद हो चुका है. कुछ ऐसा ही वाकया हाल ही में जिया शंकर के साथ हुआ. अपनी एक हरकत के कारण वह ट्विटर पर जमकर ट्रोल हो रही हैं. गुस्साए दर्शकों ने जिया शंकर के खिलाफ ‘शेम ऑन जिया शंकर’ ट्रेंड तक शुरू किया. दरअसल, जिया शंकर ने ‘बिग बॉस ओटीटी 2’ में एल्विश यादव को पीने के लिए साबुन का पानी दिया.

ट्विटर पर ट्रेंड हुईं जिया शंकर

जब एल्विश ने जिया को फर्जी कहा तो जिया ने अपनी बात कहने में कोई कसर नहीं छोड़ी. वहीं एल्विश यादव ने जिया शंकर से पीने के लिए पानी मांगा था तो जिया शंकर ने उस पानी में हैंडवॉश मिलाकर दे दिया. दूसरी ओर एल्विश ने एक घूट पानी पी लिया, उसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि जिया शंकर ने जो पानी दिया है उसमें साबुन मिला है. जिया का यह वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह दावा कर रही हैं कि किसी ने ग्लास ठीक से नहीं धोया होगा और जिया को अपनी इस हरकत पर बुरा नहीं लगा.

जिया शंकर पर एल्विश यादव गुस्साए

एल्विश यादव जिया पर काफी गुस्से में नजर आ रहे हैं लेकिन उन्होंने अपनी जुबान पर लगाम लगाई और जिया से कहता है कि, “पानी पिलाना पुण्य का काम है. आपके घर में पिलाते होंगे साबुन वाला पानी, हमारे यहां ये सब नहीं होता.”

अभिषेक मल्हान इस मामले में हस्तक्षेप करता है और जिया शंकर को उसकी मूर्खता का एहसास कराने की कोशिश करता है. लेकिन जिया पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ.

जिया शंकर के इस व्यवहार से नेटिजन्स उनसे बेहद नाराज हैं.

TRP List : TMKOC के आगे फिसड्डी साबित हुआ ‘अनुपमा’, जानें बाकी शो का हाल

टीवी सीरियल की दीवानगी हर दर्शकों के दिलों में देखी जा सकती है. दिन-प्रतिदिन टीवी सीरियल जनता को खूब मनोरंजन दे रहे है. मनोरंजन की दुनिया में सारा खेल टीआरपी का है. जनता के मन पसंद शो टीआरपी की किस नंबर पर हैं, आज हम आपको बताएंगे.

साल 2023 के 28वें सप्ताह की टीआरपी लिस्ट जारी कर दी है. इस बार भी ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ पहले और ‘अनुपमा’ दूसरे नंबर पर नजर आया. वहीं इस सप्ताह की लिस्ट से ‘इंडियाज बेस्ट डांसर’ का पत्ता कट चुका है.

TMKOC बना नंबर वन

इस साल 2023 के 28वे हफ्ते की टीआरपी जारी हो गई. दर्शकों का सबसे चाहेता सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ अभी भी नंबर वन पर छाया हुआ है. एक्टर दिलीप जोशी का शो हर बार की तरह इस बार भी सबको पछाड़ते हुए टीआरपी में नंबर वन पर बना हुआ है. ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने 74 रेटिंग के साथ पहले नंबर पर जगह बनाई है. वहीं मीडिया खबरों के मुताबिक जल्द ही शो में दयाबेन की वापसी हो सकती है.

अनुपमा ने दूसरे नंबर पर जगह बनाई

रूपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ सीरियल में कई ट्विस्ट और टर्न्स देखने के वाबजूद ‘अनुपमा’ ने दूसरे नंबर पर जगह बनाई है. शो को 70 रेटिंग के साथ दूसरे स्थान मिला है. बता दें कि ‘अनुपमा’  सीरियल में अनुपमा ने छोटी अनु के लिए अमेरिका का सपना तोड़ दिया.

तीसरे स्थान पर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’

स्टार प्लस का सबसे पुराना सीरियल अभी भी कई सीरियल को टक्कर दे रहा है. शो को खास बनाने के लिए मेकर्स कई प्रयास करते रहते है. वहीं ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ ने 66 रेटिंग के साथ तीसरे स्थान पर जगह बनाई. शो में इन दिनों अबीर का ट्रैक चल रहा है.

चौथे स्थान पर आए द कपिल शर्मा शो

‘द कपिल शर्मा शो’ ने इस बार 66 रेटिंग के साथ चौथे स्थान पर जगह बनाई. बता दें कि शो पर जल्द ही बंद होने वाला है. इसके आखिरी एपिसोड में अनिल कपूर नजर आएंगे.

कुंडली भाग्य

‘कुंडली भाग्य’ ने 59 रेटिंग के साथ पांचवे नंबर पर जगह बनाई है. शो में जल्द ही प्रीता लूथरा परिवार के सामने आएगी, जिससे सबके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी.

राधा मोहन

वहीं सीरियल राधा मोहन इस बार 57 रेटिंग के साथ छठे नंबर पर रहा. ‘राधा मोहन’ की पॉजिशन देखकर कहा जा सकता है कि शो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है.

‘गुम है किसी के प्यार में’

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ लीप आने के बाद नीचे गिरता जा रहा है. इसके साथ ही ये शो भी छठे से सातवें नंबर पर आ चुका है. इस सप्ताह ‘गुम है किसी के प्यार में’ 56 रेटिंग के साथ सातवें नंबर पर रहा.

कुमकुम भाग्य

टीवी सीरियल ‘कुमकुम भाग्य’ 56 रेटिंग के साथ आठवें स्थान पर टिका. बता दें कि एक वक्त ऐसा भी आया था, जब टीआरपी में, टॉप 10 शोज में से ‘कुमकुम भाग्य’ का पत्ता कट गया था.

इसके साथ ही ‘भाग्यलक्ष्मी’ 54 रेटिंग के साथ नौंवे स्थान पर रहा और कलर्स का नया शो ‘शिवशक्ति’ 53 रेटिंग के साथ दसवें स्थान पर दिखा. शो भले ही कुछ दिनों पहले शुरू हुआ है, लेकिन अब कह सकते है कि इस शो ने लोगों के बीच जगह बनानी शुरू कर दी है.

मेरे पेरेंट्स को कैंसर है, क्या कैंसर होने से मैं हाई रिस्क कैटेगरी में आती हूं?

सवाल

मेरी मां को लिवर कैंसर और पिता को प्रोस्टेट कैंसर है. मैं अपने स्वास्थ्य को ले कर बहुत चिंतित हूं. क्या मातापिता दोनों को कैंसर होने से मैं हाई रिस्क कैटेगरी में आती हूं?

जवाब

यह सही है कि आनुवंशिक कारण कैंसर के लिए एक प्रमुख रिस्क फैक्टर्स में से एक है, लेकिन परिवार में जब 3 पीढि़यों तक कैंसर के मामले लगातार होते हैं तब उसे आनुवंशिक या हेरिडिटरी माना जाता है. आप के मातापिता दोनों को कैंसर है, इस से आप को घबराने की जरूरत नहीं है. उन में आपस में कोई रक्त संबंध नहीं है क्योंकि वे अलगअलग परिवारों से आते हैं इसलिए इसे आनुवंशिकता से संबंधित नहीं माना जा सकता है.

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डाक्टर मुझे कीमोथेरैपी के बाद स्टेरौयड भी दे रहे हैं. मैं ने पढ़ा है कि स्टेरौयड का सेवन नहीं करना चाहिए. क्या यह सेहत के लिए नुकसानदायक होता है?

अगर आप के डाक्टर आप को कीमोथेरैपी के साथ स्टेरौयड्स दे रहे हैं तो आप को जरूर लेना चाहिए. ये कीमोथेरैपी के साइड इफैक्ट्स से बचने के लिए दिए जाते हैं. कई बार तो ये कीमोथेरैपी का ही हिस्सा होते हैं. ऐसे में इन्हें लेने से कोई दिक्कत नहीं होती. इसलिए डाक्टर द्वारा सु?ाई सभी दवाइयां नियत समय पर और निर्धारित मात्रा में जरूर लें.

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मेरी उम्र 54 साल है. 5 साल पहले मेनोपौज हो गया था, लेकिन कभीकभी वैजाइना से ब्लीडिंग होती है. कोई खतरे की बात तो नहीं?

जवाब

मेनोपौज के बाद वैजाइना से ब्लीडिंग होना बिलकुल सामान्य नहीं है. ब्लीडिंग चाहे मेनोपौज के बाद हो या महावारी के बीच अथवा शारीरिक संबंध बनाने के बाद, महिलाओं को इसे गंभीरता से लेना चाहिए. यह सर्वाइकल कैंसर का संकेत हो सकता है. आप तुरंत किसी डाक्टर को दिखाएं, जरूरी जांचें कराएं और उपचार शुरू करें.

-डा. देनी गुप्ता

सीनियर कंसल्टैंटमैडिकल औंकोलौजीधर्मशिला नारायणा सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटलदिल्ली   

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जिंदगी की उजली भोर: भाग 2- रूना को जब पता चला समीर का राज?

सुबह वह तेज बुखार से तय रही थी. समीर ने परेशान हो कर छुट्टी के लिए औफिस फोन किया.  उसे डाक्टर के पास ले गया. दिनभर उस की खिदमत करता रहा. बुखार कम होने पर समीर ने खिचड़ी बना कर उसे खिलाई. उस की चाहत व फिक्र देख कर रूना खुश हो गई पर रात की बात याद आते ही उस का दिल डूबने लगता.

दूसरे दिन तबीयत ठीक थी. समीर औफिस चला गया. शाम होने से पहले उस ने एक फैसला कर लिया, घुटघुट कर मरने से बेहतर है सच सामने आ जाए, इस पार या उस पार. अगर दुख  को उस की आखिरी हद तक जा कर झेला जाए तो तकलीफ का एहसास कम हो जाता है. डर के साए में जीने से मौत बेहतर है.

उस दिन समीर औफिस से जल्दी आ गया. चाय वगैरह पी कर, फ्रैश हुआ. वह बाहर जाने को निकलने लगा तो रूना तन कर उस के सामने खड़ी हो गई. उस की आंखों में निश्चय की ऐसी चमक थी कि समीर की निगाहें झुक गईं, ‘‘समीर, मैं आप के साथ चलूंगी उन से मिलने,’’ उस के शब्द चट्टान की मजबूती लिए हुए थे, ‘‘मैं कोई बहाना नहीं सुनूंगी,’’ उस ने आगे कहा.

समीर को अंदाजा हो गया, आंधी अब नहीं रोकी जा सकती. शायद, उस के बाद सुकून हो जाए. समीर ने निर्णयात्मक लहजे में कहा, ‘‘चलो.’’

रास्ता खामोशी से कटा. दोनों अपनीअपनी सोचों में गुम थे. होटल पहुंच कर कैबिन में दाखिल हुए. सामने एक खूबसूरत औरत, एक बच्ची को गोद में लिए बैठी थी. रूना के दिल की धड़कनें इतनी बढ़ गईं कि  उसे लगा, दिल सीना फाड़ कर बाहर आ जाएगा, गला बुरी तरह सूख रहा था. रूना को साथ देख कर उस के चेहरे पर घबराहट झलक उठी. समीर ने स्थिर स्वर में कहा, ‘‘रोशनी, इन से मिलो. ये हैं रूना, मेरी बीवी. और रूना, ये हैं रोशनी, मेरी मां.’’

रूना को सारी दुनिया घूमती हुई लगी. रोशनी ने आगे बढ़ कर उस के सिर पर हाथ रखा. रूना शर्म और पछतावे से गली जा रही थी. कौफी आतेआते उस ने अपनेआप को संभाल लिया. बच्ची बड़े मजे से समीर की गोद में बैठी थी. समीर ने अदब से पूछा, ‘‘आप कब जाना

चाहती हैं?’’

‘‘परसों सुबह.’’

‘‘कल शाम मैं और रूना आ कर बच्ची को अपने साथ ले जाएंगे,’’ समीर ने कहा.

वापसी का सफर दोनों ने खामोशी से तय किया. रूना संतुष्ट थी कि उस ने समीर पर कोई गलत इल्जाम नहीं लगाया था. अगर उस ने इस बात का बतंगड़ बनाया होता तो वह अपनी ही नजरों में गिर जाती.

घर पहुंच कर समीर ने उस का हाथ थामा और धीरेधीरे कहना शुरू किया, ‘‘रूना, मैं

बेहद खुश हूं कि तुम ने मुझे गलत नहीं समझा. मैं खुद बड़ी उलझन में था. अपने बड़ों के ऐब खोलना बड़ी हिम्मत का काम है. मैं चाह कर भी तुम्हें बता नहीं सका. करीब 4 साल पहले, पापा ने रोशनी को किसी प्रोग्राम में गाते सुना था. धीरेधीरे उन के रिश्ते गहराने लगे. उस वक्त मैं अहमदाबाद में एमबीए कर रहा था.

‘‘मेरी अम्मी हार्टपेशैंट थीं. अकसर ही बीमार रहतीं. पापा खुद को अकेला महसूस करते. घर का सारा काम हमारा पुराना नौकर बाबू ही करता. ऐसे में पापा की रोशनी से मुलाकात, फिर गहरे रिश्ते बने. रोशनी अकेली थी. रिश्तों और प्यार को तरसी हुई लड़की थी. बात शादी पर जा कर खत्म हुई. अम्मी एकदम से टूट गईं. वैसे पापा ने रोशनी को अलग घर में रखा था. लेकिन दुख को दूरी और दरवाजे कहां रोक पाते हैं.

‘‘जब मुझे पता लगा, मैं गांव गया. बूआ भी आईं, काफी बहस हुई. पापा ने अपना पक्ष रखा, बीवी की बीमारी, उन के कहीं न आनेजाने की वजह से वे भी बहुत अकेले हो गए थे. जिंदगी बेरंग और वीरान लगती थी. एक तरह से अम्मी का साथ न के बराबर था. ऐसे में रोशनी से हुई उन की मुलाकात.

‘‘जरूरत और हालात ने दोनों को करीब कर दिया. उस का भी कोई न था, परेशान थी. वह प्रोग्राम में गाने गा कर जिंदगी बसर कर रही थी. दोनों की उम्र में फर्क होने के बाद भी आपस में

अच्छा तालमेल हो गया तो शादी ही बेहतर थी.

‘‘पापा अपनी जगह सही थे. यह भी ठीक था कि बीमारी से अम्मी चिड़चिड़ी और रूखी हो गई थीं. वे किसी से मिलना नहीं चाहती थीं. पर अम्मी का गम भी ठीक था. जो हो गया उसे तो निभाना था. बूआ का बेटा बाहर पढ़ने गया था. बूआ अकसर अम्मी के पास रहतीं. पापा दोनों घरों का बराबरी से खयाल रखते. लेकिन अम्मी अंदर ही अंदर घुल रही थीं. जल्दी ही वे सारे दुखों से छुटकारा पा गईं. मैं एक हफ्ता रुक कर वापस आ गया.

‘‘पापा रोशनी को घर ले आए. बूआ और गांव के मिलने वाले पापा से नाराज से थे. मगर रोशनी ने पापा व घर को अच्छे से संभाल लिया. वह मेरा भी बहुत खयाल रखती. रोशनी बहुत कम बोलती. एक अनकही उदासी उस की आंखों में तैरती रहती. मुझ से उम्र में वह 5-6 साल ही बड़ी होगी पर उस में शोखी व चंचलता जरा भी न थी. इसी तरह 1 साल गुजर गया.

‘‘एमबीए के बाद मुझे अहमदाबाद में अच्छी नौकरी मिल गई. अकसर गांव चला जाता. एक बार मैं ने रोशनी में बड़ा फर्क देखा, वह खूब हंसती, मुसकराती, गुनगुनाती, जैसे घर में रौनक उतर आई. पापा भी खूब खुश दिखते. फिर मैं 3-4 माह गांव न जा सका. फिर तुम से शादी तय हो गई. मैं शादी के लिए गांव गया. पर बहुत सन्नाटा था. बस, पापा और बाबू ही घर पर थे. पापा बेहद मायूस टूटेबिखरे से थे. घर में रोशनी नहीं थी. दिनभर पापा चुपचुप रहे. रात जब मेरे पास बैठे तो उदासी से बोले, ‘रोशनी चली गई. मैं ने ही उसे जाने दिया. वह और उस का सहपाठी अजहर बहुत पहले से एकदूसरे को चाहते थे. पर अजहर के मांबाप उस से शादी करने के लिए नहीं माने. वह नाराज हो कर बाहर चला गया. आखिर मांबाप इकलौते बेटे की जुदाई सहतेसहते थक गए. उसे वापस बुलाया और रोशनी से शादी

पर राजी हो गए. अजहर आ कर मुझ से मिला, सारी बात बताई. मैं रोशनी की खुशी चाहता था. सारी जिंदगी उसे बांध कर रखने का कोई फायदा न था.

‘‘‘मुझे पता था कि उस ने अकेलेपन और एक सहारा  पाने की मजबूरी में मुझ से शादी की थी. मुझ से शादी के बाद भी वह बुझीबुझी ही रहती थी. बस, जब अजहर ने उसे आने के बारे में बताया तब ही उस के चेहरे पर हंसी खिल उठी. फिर मेरी व उस की उम्र में फर्क भी मुझे ये फैसला करने पर मजबूर कर रहा था. मैं ने उसे अजहर के साथ जाने दिया. बस, एक दुख है, उस की कोख में मेरा अंश पल रहा था. मैं ने उस से वादा किया, बच्चा होने के बाद मैं तलाक दे दूंगा. फिर वह अजहर से शादी कर ले. उसे यह यकीन दिलाया कि बच्चे की पूरी जिम्मेदारी मैं उठाऊंगा. अब बेटा, यह जिम्मेदारी मैं तुम्हें सौंपता हूं कि रोशनी की शादी के पहले तुम उस से बच्चा ले लेना और उस की परवरिश तुम ही करना.  यह मेरी ख्वाहिश और इल्तजा है.’

‘‘रूना, मैं ने उन्हें वचन दिया था कि यह जिम्मेदारी मैं जरूर पूरी

करूंगा. अभी तक अजहर ने रोशनी को अलग फ्लैट में बड़ौदा में रखा है. वहीं उस ने बच्ची को जन्म दिया. पापा ने तलाक दे दिया. बस, वह बच्ची के जरा बड़े होने का इंतजार कर रही है ताकि वह बच्ची को हमें सौंप कर अजहर से शादी कर के नई जिंदगी शुरू कर सके. मैं बच्ची के सिलसिले में ही रोशनी से मिलने जाता था. उस की जरूरत का सामान दिला देता था. अजहर ने अपने घर में रोशनी की शादी और बच्ची के बारे में नहीं बताया है. जब हम इस बच्ची को ले आएंगे तो वे दोनों नवसारी जा कर शादी के बंधन में बंध जाएंगे.’’

यह सब सुन कर वह खुशी से भर उठी और इतना समझदार और जिम्मेदार पति पा कर

उसे बहुत गर्व हुआ. उसे याद आया, सीमा ने उसे बताया था कि बड़ौदा मौल में समीर एक खूबसूरत औरत के साथ था. तो वह औरत रोशनी थी. अच्छा हुआ, उस ने इस बात को ले कर कोई बवाल नहीं मचाया.

समीर ने रूना का हाथ थाम कर प्यार से कहा, ‘‘रूना, मेरी इच्छा है कि हम रोशनी की बच्ची को अपने पास ला कर अपनी बेटी बना कर रखेंगे, इस में तुम्हारी इजाजत की जरूरत है.’’ समीर ने बड़ी उम्मीदभरी नजरों से रूना को देखा, रूना ने मुसकरा कर कहा, ‘‘मां खोने का दुख मैं उठा चुकी हूं. मैं बच्ची को ला कर बहुत प्यार दूंगी, अपनी बेटी बना कर रखूंगी. मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे आप जैसा शौहर मिला. आप एक बेमिसाल बेटे, एक चाहने वाले शौहर और एक जिम्मेदार भाई हैं. हम कल ही जा कर बच्ची को ले आएंगे. मैं उस का नाम ‘सवेरा’ रखूंगी क्योंकि वह हमारी जिंदगी में एक उजली भोर की तरह आई है.’’

समीर ने खुश हो कर रूना का माथा चूम लिया. उसे सुकून महसूस हुआ कि उस ने पापा से किया वादा पूरा किया. समीर और रूना के चेहरे आने वाली खुशी के खयाल से दमक रहे थे.

घर पर बनाएं टोमैटो सूप विद रोस्टेड आमंड

मौनसून का सीजन चल रहा है. ऐसे मौसम में गर्मा-गर्म  सूप पीने का मजा ही अलग है. आज हम आपको टोमैटो सूप विद रोस्टेड आमंड और प्रोबायोटिक योगर्ट की रेसिपी बताने जा रहे है तो देर किस बात की. घर पर बनाएं टोमैटो सूप विद रोस्टेड आमंड और प्रोबायोटिक योगर्ट.

1.टोमैटो सूप विद रोस्टेड आमंड

सामग्री

  1.  2 छोटे चम्मच औलिव औयल 
  2. 1 तेजपत्ता
  3.   2 प्याज कटे हुए 
  4.  6 टमाटर चकोर टुकड़ों में कटे हुए 
  5.  31/2 कप वैजिटेबल स्टौक
  6.   11/2 कप फुलक्रीम दूध 
  7.  थोड़ा सा कालीमिर्च पाउडर 
  8. थोड़े से भुने बादाम के टुकड़े 
  9.  थोड़ी सी क्रीम 
  10.  थोड़े से बेसिल के पत्ते 
  11.  नमक स्वादानुसार.

विधि

एक बड़े सौस पैन में औयल को मीडियम आंच पर गरम कर के उस में तेजपत्ता और प्याज डाल कर सुनहरा होने तक भूनें. फिर इस में टमाटर डाल कर 3-4 मिनट तक चलाते हुए इस में वैजिटेबल स्टौक डाल कर एक उबाल आने दें. फिर इसे हलकी आंच पर रख कर तब तक पकाएं जब तक सूप गाढ़ा न हो जाए. बीचबीच में चलाना न भूलें. फिर सूप को आंच से उतार कर थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें. अब इस में से तेजपत्ता निकाल कर इस में बादाम डाल कर इस की स्मूद प्यूरी बनाएं. फिर इसे पैन में डाल कर इस में दूधनमक और कालीमिर्च डाल कर चलाते हुए दोबारा गरम करें. ध्यान रखें सूप को उबालना नहीं है. फिर इसे सूप प्लेट में सर्व कर के ऊपर से क्रीम व बेसिल के पत्तों से गार्निश कर गरमगरम सर्व करें.

2. प्रोबायोटिक योगर्ट

सामग्री

  1.   200 मिलीलिटर हंग कर्ड 
  2.  200 मिलीलिटर फ्रैश क्रीम 
  3.  250 मिलीलिटर कंडैस्ड मिल्क
  4.  100 ग्राम अल्फांसो आम 
  5.  100 मिलीलिटर प्रोबायोटिक मिल्क.

विधि

एक बाउल में हंगकर्डकंडैंस्ड मिल्कक्रीम व प्रोबायोटिक मिल्क को मिला कर अच्छी तरह फेंटें. फिर इस में फ्लेवर के लिए मैंगो प्यूरी ऐड करें. अब इन्हें रमेकिंस बाउल्स में डाल कर ओवन में वाटर बाथ यानी हौट वाटर पैन में रख कर 160 डिग्री सैल्सियस पर 15 मिनट बेक करें. फिर मैंगो के टुकड़ों से गार्निश कर के ठंडाठंडा सर्र्व करें.                    

आम जनता के लिए नहीं हवाई यात्रा

इंडिगो और एअर इंडिया के 500-500 एअरक्राफ्ट खरीदने  के समाचार को देशभर में ढोल पीटपीट कर बताया जा रहा है मानों यह अचीवमैंट सरकार की हो. अगर देश में एअर टै्रफिक बढ़ रहा है तो यह साबित करता है कि ट्रेनें और रोड जर्नी अभी भी महंगी या टाइम लेने वाली है और जिस के पास पैसा है वह जैसेतैसे बाई एअर ही जाना चाहता है.

एअरपोर्ट और एअर जर्नी अब कोई लग्जरी नहीं रह गए हैं. ये इतने बड़े देश में जरूरी हो गए हैं.

अगर दिनों का सफर घंटों में पूरा हो जाए तो जो ऐक्स्ट्रा पैसा देना पड़ता है वह ज्यादा नहीं लगता. बड़े देश में लोग इधर से उधर तो जाएंगे ही और जैसेजैसे नौकरियों और व्यापार के नए अवसर अपने घर से दूर मिलेंगे लोग एअर सर्विस के कारण ज्यादा मोबाइल होंगे ही.

अब एअरलाइंस पूरी तरह निजी हाथों में हैं, सारे एअरक्राफ्ट निजी कंपनियों के पास हैं और एअरपोर्ट भी अब निजी ठेकेदारों के हाथों में हैं. पर निजी हाथों में जाने का मतलब यह नहीं है कि पैसेंजरों को कंपीटिशन का फायदा हो रहा है. हर एअरलाइंस जानती है कि अब कस्टमर उस के पास खुदबखुद आ रहा है और अब निजी एअरलाइंस की सेवाएं सरकारी एअरलाइंस की सेवाओं से ज्यादा घटिया होने लगी हैं.

सरकार ने कानून बना कर हर प्रोडक्ट की एक एमआरपी तय कर रखी है पर एअरलाइंस के टिकटों की कोई एमआरपी नहीं है. ये कंपनियां तांगे वालों से भी ज्यादा मोलभाव करती हैं पर यह भेदभाव एकतरफा होता है. कार्टेल बना कर यानी 4-5 एअरलाइंस मिल कर किसी भी सैक्टर को महंगा कर सकती हैं और दाम 20% से 100% तक बढ़ा लेती हैं. कम चलने वाले सैक्टरों को कैंसिल करना भी आम है.

अब एअरलाइंस का कोई फिक्स्ड टाइमटेबल भी नहीं है. एक एअरलाइंस एक सैक्टर पर 1 दिन में 5 उड़ानें भर सकती है तो दूसरे दिन 2 ही. चूंकि बुकिंग अब वैबसाइट पर होती है, आप को पता नहीं चलेगा कि कौन सी फ्लाइट कैंसिल की गई है.

500-500 एअरक्राफ्टों को खरीदनेका मतलब यह तो है कि ज्यादा लोग सफर बाई एअर करेंगे पर यह भी है कि उन्हें खाना भी महंगा खरीदना पड़ेगा और पीने का पानी भी. सिक्युरिटी के नाम पर पानी की बोतल न ले जाने देने का नियम होने पर पानी का व्यापार करने वाले चांदी काट रहे हैं. इसी तरह एअरपोर्टों पर या एअरक्राफ्टों में खाना बेहद महंगा है. ज्यादातर एअरक्राफ्ट इस असुविधा को कम नहीं करेंगे क्योंकि इस पर ग्राहकों का कोई दबाव है ही नहीं.

एअरपोर्ट बनाना और एअरलाइंस खड़ी करना तथा उस के लिए अनुमतियां लेना एक बड़ा मुश्किल काम है. सरकार की मिलीभगत है कि यह मुश्किल ही रहे ताकि केवल खास लोग ही सफर कर पाएं. ये खास लोग आमतौर पर शिकायत भी नहीं करते क्योंकि इन के पास समय नहीं होता और बरबाद करने के लिए पैसा होता है. जहां आम जनता और ज्यादा गरीब होती जा रही है, वहीं यह भारीभरकम अरबों डौलरों की डील की जाती है.

देश में अमीरगरीब का फासला जिस तेजी से बढ़ रहा है, वह एक नई वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था को जन्म दे रहा है. अब ऊंची कास्टों में एक बहुत अमीर और जरा से अमीरों की नई सबकास्ट पैदा होे गई है. वर्ण व्यवस्था के हिमायती जब इस 500-500 हवाईजहाजों की डील पर खुशी मना रहे हैं तो असल में इस की खुशी मना रहे हैं कि पौराणिक व्यवस्था मजबूत हो गई है.

Monsoon special: बारिश में न खाएं ये चीजें, नहीं तो हो जाएंगे मुंहासे

बरसात का मौसम चल रहा है. मौनसून सीजन बहुत ही सुहाना होता है बरसात के होने से ठंड़ा मौसम हो जाता है. इसके साथ ही मौनसून में काफी उमस होती है. मौनसून सीजन में कई स्किन समास्याएं उत्पन्न हो जाती है. इन दिनो आसानी से स्किन रैशेज, पिंपल्स, एक्ने या मुहांसे की समास्याएं होती है. इसी वजह से बरसात के मौसम में मुंहासों को रोकने के लिए आपको कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए. हम आपको यहां उन्हीं आहार के बारे में बताने जा रहे हैं जो मुंहासों का कारण बनते हैं.

  1. दही

दही सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. गर्मियों में दही खाना अच्छा होता है. लेकिन बरसात के मौसम में दही खाना ठीक नहीं होता क्योंकि इससे एक्ने की समस्या हो सकती है. असल में दही के सेवन से पित्त-कफ में बढ़ोत्तरी हो सकती है, जो एक्ने का कारण हो सकते हैं.

2. चॉकलेट

मौनसून के समय चॉकलेट न खाएं क्योंकि चॉकलेट हमारी गो-टू स्वीट है! लेकिन यह आपके लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि बहुत अधिक चॉकलेट खाने से मुंहासों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि चॉकलेट कोको, दूध और चीनी से भरी हुई हैं, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकती हैं और इस वजह से, पिंपल्स का कारण बन सकती हैं.

3. फास्ट फूड

वैसे तो फास्ट फूड खाना हेल्थ के लिए अच्छा नहीं होता है. लेकिन बरसात के समय फास्ट फूड नहीं खाना चाहिए इससे मुंहासों खतरा बढ़ जाता है. फास्ट फूड में फैट, रिफाइंड कार्ब्स और कैलोरी से भरे होते हैं. फास्ट फूड जैसे बर्गर, पिज्जा, नगेट्स, हॉट डॉग, मिल्कशेक, सोडा, आदि मुँहासे के विकास को बढ़ा सकते हैं. आंकड़ो के मुताबिक इन फास्ट फूड के सेवन से मुँहासे के विकास में 24% की वृद्धि हो सकती है.

4. कॉफी

कॉफी का सेवन ज्यादातर वर्किंग लोग करते हैं. कॉफी पीने से लोगों को लगता है कि वे एनर्जेटिक फील करते हैं और काम करने की क्षमता बेहतर होती है. वहीं, आयुर्वेद के अनुसार, ज्यादा मात्रा में कॉफी पीना सही नहीं होता है. इसमें हीटिंग प्रॉपर्टी होती है, जो कि पित्त को बढ़ाने का काम कर सकता है, जो एक्ने का कारण बन सकते हैं.

5. उड़द दाल

बरसात के समय में का उड़द दाल सेवन कम करना चाहिए. उड़द दाल के सेवन से पित्त कफ में बढ़ोत्तरी हो सकती है, जो कि एक्ने का मुख्य कारण हो सकता है. इसलिए, अगर आपको काफी ज्यादा एक्ने की प्रॉब्लम रहती है, तो बेहतर है कि इन दिनों उड़द की दाल का सेवन न करें.

Monsoon Special: 8 टिप्स- मौनसून में ऐसे हों लुक्स

मौनसून की बारिश यकीनन गरमी से राहत दिलाती है, मगर इस सीजन में परेशानियां भी कम नहीं होती हैं, जैसे जलभराव के कारण जाम में फंस जाना, बारिश में भीग जाना, कपड़ों पर दागधब्बे लग जाना आदि.

माना कि मौनसून की इन परेशानियों से बचा नहीं जा सकता, लेकिन इस सीजन के अनुकूल परिधान पहन कर परेशानियों को कम जरूर कर सकती हैं. पेश हैं, इस मौसम के कुछ ड्रैसिंग टिप्स

1.जींस और कौरडरौय को करें अवाइड

भले ही ये आप को कितने ही पसंद क्यों न हों, लेकिन इन्हें पहन कर आप बारिश में भीग गईं तो ये आप को खासी परेशानी दे सकते हैं. ये काफी मात्रा में पानी सोख लेते हैं और फिर जल्दी सूखते भी नहीं हैं. सूखने में कम से कम 1 दिन लग ही जाता है. फिर इतने ज्यादा भीगे कपड़े पहनने से न केवल आप असहज महसूस करेंगी, बल्कि ये आप के शरीर को नम भी कर सकते हैं. इतना ही नहीं फंगल एवं बैक्टीरियल संक्रमण से भी ग्रस्त कर सकते हैं.

2.चुनें शौर्ट एवं कैप्री

कैप्रीज, शौर्ट, स्कर्ट इस मौसम के लिए बैस्ट हैं. ये न केवल आप को कूल और आरामदायक रखेंगे, बल्कि बारिश में फंस जाएं तो असुविधा भी कम होगी. हां,यह सुनिश्चित कर लें कि कैप्री शरीर से चिपकने वाली यानी बहुत टाइट न हो. पर्याप्त ढीली हो, ताकि जल्दी सूख सके. शौर्ट भी ऐसा हो जिस पर रोड पर चलते समय छींटों के दाग न पड़ें.

3.चुनें गहरे और चमकीले रंगों की ट्यूनिक

मौनसून गहरे और चमकीले रंग पहनने का मौसम होता है. ट्यूनिक को पैरों में फ्लैट फ्लिप फ्लौप के साथ, लाइट लैगिंग या कैप्री के साथ स्टाइल किया जा सकता है. ऐसी ड्रैसिंग बेहद आरामदायक अनुभव देती है.

कुछ डार्क कलर जैसे नेवी ब्लू या डार्क ग्रीन को अपने वार्डरोब में शामिल कर के अपने आसपास के सुस्त, ग्रे क्लाउडी वातावरण में चमक ला सकते हैं.

4.ढीला और हलका टौप चुनें

रोजाना पहनने के लिए शौर्ट कुरती, रूमी टौप और अलकी टीशर्ट आम हैं. फैब्रिक भी हलका चुनें जैसे लायक्रा या पौलिएस्टर जो कि रिंकल फ्री भी होता है और कौटन के मुकाबले सूखता भी जल्दी है.

5.लाइट चैकर्ड फौर्मल लुक को कहें हां

इस सीजन में आरामदायक और हलकी हाफ स्लीव फौर्मल शर्ट चलन में होती है, जो औफिस लुक के लिए एकदम परफैक्ट है, जो औफिस में टीशर्ट नहीं पहन सकतीं, उन के लिए हाफ स्लीव फौर्मल शर्ट बेहतर विकल्प हो सकती है.

6.ट्रांसपैरेंट कपड़ों को कहें न

यदि आप ट्रांसपैरेंट टौप या कुरता पहनती हैं तो बारिश आप को शर्मिंदा कर सकती है. इसलिए ध्यान रखें, बारिश में हमेशा सौलिड और डार्क कलर के टौप का ही चुनाव करें. ऐसे कपड़े पहन कर आप बेफिक्र मौसम का लुत्फ भी उठा सकती हैं. सौलिड ड्रैस मैटीरियल पहनने का एक और प्लस प्वौइंट यह है कि अगर आप बारिश में भीग जाएं तो आप के कपड़े जल्दी सूख जाते हैं. फिर अंडरशर्ट पहनने की भी जरूरत नहीं रहती.

7.वार्डरोब में रखें कुछ हलकी विंडचीटर्स

आप को अपने बैग में हमेशा एक अल्ट्रा लाइट विंडचीटर ले जाने की सलाह दी जाती है. बारिश होने के दौरान आप इसे जल्दी से पहन सकती हैं और यह आप के कपड़ों को बूंदाबांदी के साथसाथ सड़क पर वाहनों के जरीए उड़ने वाले कीचड़ से भी बचाएगी. यदि आप को अचानक ठंड महसूस हो, तो यह आप को गरम भी रखेगी.

8.पहने आरामदायक और मजबूत फुटवियर

सड़क पर फिसलने या सड़क पर कीचड़ से बचने के लिए आरामदायक जूते पहनना बहुत जरूरी है. वाटरपू्रफ लैदर स्लिप ओन्स, फ्लोटर्स या स्नीकर्स इस सीजन के लिए बैस्ट हैं, क्योंकि ये आप को बारिश से सुरक्षित रखेंगे और जल्दी खराब भी नहीं होंगे, तो कुछ समय के लिए अपने फौर्मल शूज को कह दें बायबाय.

– मोनिका ओसवाल

ऐग्जीक्यूटिव डाइरैक्टर, मोंटे कार्ल

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