Summer Special: कार से यात्रा करते समय रखें इन 7 बातों का ध्यान

बच्चों के स्कूल में अवकाश होते ही हम सभी घूमने की प्लानिंग करने लगते हैं. 2020 में कोरोना के आगमन के बाद से अधिकांश लोग अपनी निजी कार से यात्रा करने को प्राथमिकता देने लगे हैं. निजी वाहन से यात्रा करने का एक अन्य लाभ यह भी है कि इसमें आपको बहुत पहले से प्लानिंग करने की आवश्यकता नहीं होती, कितना भी सामान साथ ले जाया जा सकता है, सफर में चोरी चकारी का डर नहीं होता साथ ही परिवार के सभी सदस्यों के एक साथ होने से परिवार के सदस्यों के मध्य बॉन्डिंग भी मजबूत होती है. यदि आप भी इन छुट्टियों में अपनी कार से घूमने की प्लानिंग कर रहे है तो आपके लिए ये टिप्स मददगार हो सकते हैं-

1.कार चैक कराएं

सफर पर निकलने से पहले यदि सम्भव हो तो कार की सर्विसिंग कराएं और यदि नहीं करा पा रहे हैं तो गाड़ी के टायरों के साथ साथ पंचर होने पर प्रयोग किये जाने वाले एक्स्ट्रा टायर की हवा और ए सी की कूलिंग आदि को अवश्य चैक करवा लें ताकि आपको सफर में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.

2.समय का रखें ध्यान

यदि आपकी यात्रा लंबी है तो सुबह 5 और 6 बजे के बीच में अपनी यात्रा प्रारंभ करें ताकि आपको ड्राइविंग के लिए पर्याप्त समय मिल सके और आप रात के गहराने से पहले अपनी मंजिल पर पहुंच जाएं. सुबह जल्दी प्रारम्भ की गई यात्रा में रात होने तक 700 किलोमीटर का सफर बहुत असानी से तय किया जा सकता है.

3. हाइड्रेट रहें

ड्राइविंग के दौरान काफी कैलोरी बर्न होती है ऐसे में आप तरल पदार्थ लेते रहें. सादा पानी के साथ साथ नारियल पानी, ग्लूकोज या विभिन्न ज्युसेज और बादाम, अखरोट, किशमिश जैसे नट्स का प्रयोग भी किया जा सकता है.

4. पूरी नींद लें

जिस दिन आपको यात्रा करनी है उस रात्रि को आप 7 से 8 घण्टे की पूरी नींद अवश्य लें ताकि यात्रा के दौरान आप स्वयं को पूरी तरह तरोताजा महसूस कर सकें.

5. ब्रेक लें

दो तीन घण्टे तक कार चलाने के बाद 15-20 मिनट का ब्रेक अवश्य लें इससे कार के इंजन के साथ साथ आपके शरीर को भी आराम मिल सकेगा और खुली हवा में आपका ब्लड सर्कुलेशन संतुलित रहेगा.

6. म्यूजिक की आवाज का रखें ध्यान

ड्राइविंग के दौरान संगीत सुनना आनंददायक तो लगता है परन्तु यही संगीत यदि बहुत तेज आवाज में बजाया जाता है तो दुर्घटना का काऱण भी बन जाता है इसलिए म्यूजिक तो सुनें परन्तु आवाज कम ही रखें ताकि अपने आगे पीछे आने वाली गाड़ियों को आप देख सुन सकें.

7. टायर का प्रेशर चैक करें

सफर प्रारम्भ करने से पूर्व अपनी गाड़ी के टायर का प्रेशर चैक कर लें यदि आपका सफर लम्बा है तो हर सुबह प्रेशर देखें. क्योंकि बहुत अधिक और बहुत कम दोनों ही दुर्घटना के कारण बनते हैं.

अपनी कार में रखें ये जरूरी सामान भी

1.पम्प

आजकल बाजार में टायर में हवा भरने के लिए छोटे छोटे पम्प आते हैं जिन्हें एयर इंफ्लेटर कहा जाता है आप इन्हें अपने साथ रखें ताकि कहीं आवश्यकता पड़ने पर आप प्रयोग कर सकें.

2.बैटरी जम्प कैबल

कई बार आप अच्छे भले घर से निकलते हैं और एक बार बंद होने के बाद गाड़ी स्टार्ट ही नहीं होती इसका कारण कार की बैटरी का चला जाना होता है ऐसे में यदि आपके पास बैटरी जम्प कैबल है तो आप दूसरी कार से अपनी बैटरी चार्ज करके अपना तात्कालिक काम चला सकते हैं.

3. टॉर्च और चार्जिंग कैबल

यद्यपि मोबाइल के इस युग में टॉर्च का कोई महत्व प्रतीत नहीं होता परन्तु सफर के दौरान यह बहुत काम की चीज होती है, मोबाइल चार्ज करने के लिए पावर बैंक और चार्जिंग केबल भी साथ लेकर चलें.

उसका घर: खामोश और वीरान क्यों थी प्रेरणा की जिंदगी

बहुत अजीब थी वह सुबह. आवाजरहित सुबह. सबकुछ खामोश. भयानक सन्नाटा. किसी तरह ही आवाज का नामोनिशान न था. उस ने हथेलियां रगड़ीं, सर्दी के लिए नहीं, सरसराहट की आवाज के लिए. खिड़की खोली, सोचा, हवा के झोंके से ही कोई आवाज हो सकती है. लकड़ी के फर्श पर भी थपथपाया कि आवाज तो हो. कुछ भी, कहीं से सुनाई तो पड़े. पेड़ भी सुन्न खड़े थे, आवाजरहित. उस ने अपनी घंटी बजाई, थोड़ी आवाज हुई…आवाज होती थी, मर जाती थी, कोई अनुगूंज नहीं बचती थी. ये कैसे पेड़ थे. कैसी हवा थी, हरकतरहित जिस में न सुर, न ताल. उस ने खांस कर देखा. खांसी भी मर गई थी जैसे प्रेरणा, उस की दोस्त…अब उस की कभी आवाज नहीं आएगी. वह क्या गई, मानो सबकुछ अचानक मर गया हो. यह सोच कर उस के हाथपैर ठंडे पड़ने लगे. शायद वह प्रेरणा की मौत की खबर को सहन नहीं कर पा रहा था. पिछले सप्ताह ही तो मिली थी उसे वह.

अब तक तो अंतिम संस्कार भी हो गया होगा. हैरान था वह खुद पर. अब तक हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाया उस के घर जाने की. शायद लोगों को उस की मौत का मातम मनाते देख नहीं सकता था, या फिर प्रेरणा की छवि जो उस के जेहन में थी उसे संजो कर रखना चाहता था. अंतिम संस्कार हुए 4 दिन हो चुके थे. तैयार हो कर उस ने गैराज से कार निकाली और भारी मन से चल दिया. रास्तेभर यही सोचता रहा, वहां जा कर क्या कहेगा. आज तक वह किसी शोकाकुल माहौल में गया नहीं. वह नहीं जानता था कि ऐसी स्थिति में क्या कहना चाहिए, क्या करना चाहिए. यही सोचतेसोचते प्रेरणा के घर की सड़क भी आ गई. उस का दिल धड़कने लगा. दोनों ओर कतारों में पेड़ थे. उस का मन तो धुंधला था ही, धुंध ने वातावरण को भी धुंधला कर दिया था. उस ने अपना चश्मा साफ किया, बड़ी मुश्किल से उस के घर का नंबर दिखाई दिया. घर बहुत अंदर की तरफ था. उस ने कार बाहर ही पार्क कर दी. कार से पांव बाहर रखते ही उस के पांव साथ देने से इनकार करने लगे. बाहर लगे लोहे के गेट की कुंडी हटाते ही, लोहे के टकराव से, कुछ क्षणों के लिए वातावरण में एक आवाज गूंजी. वह भी धीरेधीरे मरती गई. पलभर को उसे लगा, मानो प्रेरणा सिसकियां भर रही हो…

वहां 3 कारें खड़ी थीं. घर के चारों ओर इतने पेड़ लगे थे कि उस के मन के अंधेरे और बढ़ने लगे. एक भयानक नीरवता चारों ओर घिरी थी. लगता था हमेशा की तरह ब्रिटेन की मरियल धूप कहीं दुबक कर बैठ गई थी. बादल बरसने को तैयार थे. मन के भंवर में धंसताधंसता न जाने कब और कैसे उस के दरवाजे पर पहुंचा. दिल की धड़कन बढ़ने लगी. एक पायदान दरवाजे के बाहर पड़ा था. उस ने जूते साफ किए और गहरी सांस ली. उस ने घंटी बजाने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि दरवाजा खुला. शायद लोहे के गेट की गुंजन ने इत्तला दे दी होगी. प्रेरणा के पति ने उस के आगे बढ़े हाथ को अनदेखा कर, रूखेपन से कहा, ‘‘अंदर आओ.’’

उस ने अपना हाथ पीछे करते कहा, ‘‘आई एम राहुल. प्रेरणा और मैं एक ही कंपनी में काम करते थे.’’ ‘‘आई एम सुरेश, बैठो,’’ उस ने सोफे की ओर इशारा करते कहा.

सोफे पर बैठने से पहले राहुल ने नजरें इधरउधर दौड़ाईं और कुछ बिखरी चीजें सोफे से हटा कर बैठ गया. राहुल को विश्वास नहीं हुआ, हैरान था वह, क्या सचमुच यह प्रेरणा का घर है. यहां तो उस के व्यक्तित्व से कुछ भी तालमेल नहीं खाता. दीवारें भी सूनीसहमी खड़ी थीं. उन पर न कोई पेंटिंग, न ही कोई तसवीर. अखबारों के पन्ने, कुशन यहांवहां बिखरे पड़े थे. टैलीविजन व फर्नीचर पर धूल चमक रही थी. बीच की मेज पर पड़े चाय के खाली प्यालों में से चाय के सूखे दाग झांकझांक कर अपनी मौजूदगी का एहसास करा रहे थे. हर तरफ वीरानगी थी. लगता था मानो घर की दीवारें तक मातम मना रही हों. दिलों के विभाजन की गंध सारे घर में फैली थी. अचानक उस की नजर एक कोने में बैठे 2 उदास कुत्तों पर पड़ी जो सिर झुकाए बैठे थे. शायद वे भी प्रेरणा की मौत का मातम मना रहे थे.

‘‘राहुल, चाय?’’ ‘‘नहींनहीं, चाय की आवश्यकता नहीं, आ तो मैं पहले ही जाता, सोचा, अंतिम संस्कार के बाद ही जाऊंगा, तब तक लोगों का आनाजाना कुछ कम हो जाएगा.

‘‘वैसे, प्रेरणा ने आप का जिक्र तो कभी किया नहीं. हां, अगर आप पहले आ जाते तो अच्छा ही रहता, आप का नाम भी उस के चाहने वालों की सूची में आ जाता. सच पूछो तो मैं नहीं जानता था कि हिंदी में कविता और कहानियों की इतनी मांग है. क्या आज के युग में भी सभ्य इंसान हिंदी बोलता या पढ़ता है?’’ प्रेरणा के पति ने बड़े पस्त और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा. ‘‘प्रेरणा तो बहुत अच्छा लिखती थी. उस की एकएक कविता मन को छू लेने वाली है. व्यक्तिगत दुखसुख व प्रेम के रंगों की सुगंध है. ऐसी संवदेनाएं हैं जो पाठकों व श्रोताओं को आपबीती लगती हैं. आप ने तो पढ़ी होंगी,’’ राहुल ने कहा.

इतना सुनते ही एक कुटिल छिपी मुसकराहट उस के चेहरे पर फैल गई. उस ने राहुल की बात को तूल न देते हुए संदर्भ बदल कर कहना शुरू किया, ‘‘अच्छा हुआ, आप वहां नहीं थे. कैसे बेवकूफ बना गई वह मुझे, मैं जान ही नहीं पाया कि मेरी पार्टनर कितनी फ्लर्ट थी. कितने दोस्त आए थे अंतिम संस्कार के मौके पर. उस वक्त हमारे परिवार का समाज के सामने नजरें उठाना दूभर हो गया था. उम्रभर मना करता रहा, ऐसी प्रेमभरी कविताएं मत लिखो, बदनामी होगी, लोग क्या कहेंगे. वही हुआ जिस का डर था. लोग कानाफूसी कर रहे थे, बुदबुदा रहे थे, ‘पति हैं, बच्चे हैं…’ किस के लिए लिखती थी?’’ इतना कह कर कुछ क्षण वह चुप रहा, फिर बिफरता सा बोला, ‘‘राहुल, कहीं वह तुम्हारे लिए तो…’’ उस की जबान बेलगाम चलती रही.

राहुल हैरान था, क्या यह वही दरिंदा है जिस से वह एक बार कंपनी के सालाना डिनर पर मिला था. राहुल कसमसाता रहा, तय नहीं कर पा रहा था कि उस की प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए. पलभर को उस का मन किया कि उठ कर चला जाए, फिर मन को समझाते बुदबुदाया, ‘मैं उस के स्तर पर नहीं गिर सकता.’ वक्त की नजाकत को देखते वह गुस्से को पी गया. मन में तो उस के आया कि इस पत्थरदिल से साफसाफ कह दे, हां, हां, था रिश्ता. मानवता के रिश्ते को जो नाम देना चाहो, दे दो. जीवन का सच तो यह है कि प्रेरणा मेरे जीवन में रोशनी बन कर आई थी और आंसू बन कर चली गई.

वहां बैठेबैठे राहुल को एक घंटा हो चुका था. अभी तक घर में अक्षुब्ध शांति थी. चुप्पी को भंग करते राहुल ने पूछ ही लिया, ‘‘सर, बच्चे दिखाई नहीं दे रहे?’’ ‘‘श्रुति तो कालेज गई है, रुचि सहेलियों के साथ बाहर गई है. सारा दिन घर में बैठ कर करेगी भी क्या. मैं उस की मां की मौत को बड़ा मुद्दा बना कर उन की पढ़ाई में विघ्न नहीं डालना चाहता. घर को बिखरते नहीं देख सकता. मेरा घर मेरे लिए सबकुछ है, इसे बनाने में मैं ने बहुत पैसा और जान लगाई है. प्रेरणा ने तो पीछा छुड़ा लिया है सभी जिम्मेदारियों से. बच्चों की पढ़ाई, विवाह, घर का लोन सब मुझे ही तो चुकाना है. इस के लिए पैसा भी तो चाहिए,’’ वह भावहीन बोलता गया.

राहुल ने सबकुछ जानते हुए भी विरोध का नहीं, मौन के हथियार को अपनाना सही समझा. सोचने लगा, जो तुम नहीं जानते, मैं वह जानता हूं. मैं ने ही तो करवाया था प्रेरणा के मकान के लिए इतना बड़ा लोन सैंक्शन. फिर लोन का इंश्योरैंस कराने के लिए उसे बाध्य भी किया. इस सुरेश पाखंडी ने प्रेरणा को बदले में क्या दिया? आंसू, यातनाएं, उम्रभर आजादी से कलम न उठा पाने की बंदिशें? एक मैं ही था जिसे वह पति के नुकीले शब्दों के कंकड़ों से पड़े दाग दिखा सकती थी. उस की हंसी तक खोखली हो चुकी थी. अकसर वह कहती थी कि उसे अपना घर कभी अपना नहीं लगा. वह सीखती रही अशांति में भी शांति से जीने की कला. वह खुद पर मुखौटा चढ़ा कर उम्रभर खुद को धोखा देती रही. राहुल की बेचैनी बढ़ती जा रही थी. वह प्रेरणा की लिखनेपढ़ने की जगह देखने को उतावला हो रहा था. अभी तक उसे कोई सुराग नहीं मिला था. कभी बाथरूम इस्तेमाल करने का बहाना कर के दूसरे कमरों में झांक कर देखा, कहीं भी स्टडी टेबल दिखाई नहीं दी. राहुल टटोलता रहा. चाय पीतेपीते जब राहुल से रहा नहीं गया, तो हिम्मत बटोर कर उस ने पूछ ही लिया, ‘‘सर, क्या मैं प्रेरणा का अध्ययन करने का स्थान देख सकता हूं. आई मीन, जहां बैठ कर वह पढ़ालिखा करती थी?’’

‘‘क्यों नहीं,’’ वह व्यंग्यात्मक लहजे में बोला, ‘‘आओ मेरे साथ, वह देखो, सामने,’’ उस ने गार्डन में एक खोके की ओर इशारा किया और फिर बोला, ‘‘वह जो आखिर में कमरा है वही था उस का स्टडीरूम.’’ राहुल भलीभांति जानता था कि जिसे वह कमरा कह रहा है वह कमरा नहीं, 5×8 फुट का लकड़ी का शैड है. मुरगीखाने से भी छोटा. शैड को खोलते ही राहुल का दिमाग चकरी की तरह घूमने लगा. शैड के चारों और मकड़ी के जाले लगे थे. सीलन की गंध पसरी थी. शैड फालतू सामान से भरा था. उस की दीवारों पर फावड़ा, खुरपी, कैंची, फौर्क वगैरह टंगे थे.

एकदो पुराने सूटकेस और पेंट के खाली डब्बे पड़े थे. आधा हिस्सा तो घास काटने वाली मशीन ने ले लिया था, बाकी थोड़ी सी जगह में पुराना लोहे का बुकशैल्फ था, जिस पर शायद प्रेरणा किताबें, पैन, पेपर रखती रही होगी. कुछ मोमबत्तियां और बैट्री वाली हैलोजन की बत्तियां पड़ी थीं. दीवार से टिकी 2 फुट की फोल्डिंग मेज और फोल्डिंग गार्डनकुरसी पड़ी थीं. एक छोटा सा पोर्टेबल हीटर भी पड़ा था. फर्श पर चूहे व कीड़ेमकोडे़ दौड़ रहे थे. बिजली का वहां कोई प्रबंध नहीं था. हां, एक छोटी सी प्लास्टिक की खिड़की जरूर थी जहां से दिन की रोशनी झांक रही थी. अविश्वसनीय था कि कैसे एक इंसान दूसरे से किस हद तक क्रूर हो सकता है. डरतेडरते राहुल ने उस से पूछ ही लिया, ‘‘भला बिना बिजली के कैसे लिखती होगी? डर भी तो लगता होगा?’’

‘‘डर, वह सामने 2 कुत्ते देख रहे हो, प्रेरणा के वफादार कुत्ते. उस की किसी चीज को हाथ लगा कर तो देखो, खाने को दौड़ पड़ेंगे.

‘‘प्रेरणा के अंगरक्षक या बौडीगार्ड, जो चाहे कह लो. यह कहावत तो सुनी होगी तुम ने, ‘जहां चाह वहां राह? मेरे सामने उसे लिखने की इजाजत ही कहां थी. मुझे तो बच्चों की मां और मेरी पत्नी चाहिए थी, लेखिका नहीं. मैं नहीं चाहता था मेरे घर में कविताओं के माध्यम से प्रेम का इजहार हो. देखो न, अब बेकार हैं उस की सब किताबें. कौन पढ़ना चाहेगा इन्हें? बच्चे तो पढ़ेंगे नहीं. नौकर से कह कर बक्से में रखना ही है. तुम चाहो तो ले जा सकते हो वरना रद्दी वाला ले जाएगा या फिर मैं गार्डन में लोहड़ी जला दूंगा,’’ उस ने क्रूरता से कहा. राहुल को लगा उस के कानों में किसी ने किरचियां डाल दी हों. राहुल उसे कह भी क्या सकता था, वह प्रेरणा का पति था. बस, बड़बड़ाता रहा, ‘जा, थोड़ा सा दिल खरीद कर ला, कैसा मर्द है समानता का दर्जा तो क्या, उसे उस के हिसाब से जीने का हक तक न दे सका. तुम क्या जानो कुबेर का खजाना. लेखन का भी एक अनूठा नशा होता है. पत्रिका या किताबों पर अपना नाम देख कर अपने लिखे शब्दों को देख कर जो शब्द धुएं की तरह मन में उठते हैं और हमेशा के लिए कागज पर अंकित हो जाते हैं, दुनिया में कोई और चीज उन से अधिक स्थायी नहीं हो सकती.’

‘‘सर, कुछ किताबें तो रख लेते यादगार के लिए.’’ ‘‘यादगार, बेकार की बातें क्यों करते हो. औरत भी कोई याद रखने की चीज है क्या. हां, प्रेरणा ने 2 बच्चियां जरूर दी हैं, उन के लिए मैं आभारी हूं. जानवर भी घर में रहता है तो उस से मोह हो ही जाता है.’’

राहुल अब वहां पलभर भी रुकना नहीं चाहता था. सोचने लगा, इतनी तौहीन, कठोर शब्दों के बाण. शाबाशी है प्रेरणा को, जो ऐसी बंदिशों व घुटनभरी जिंदगी की रेलपेल से पिस्तेपिस्ते भी अपना काम करती रही. भारी मन से गार्डन से अंदर आतेआते राहुल का पांव हाल में पड़े एक खुले गत्ते के डब्बे से टकराया, जिस में से प्रेरणा का सभी सामान और ट्रौफियां उचकउचक कर झांक रहे थे.

‘‘लगी तो नहीं तुम्हें? मैं तो इन्हें देख कर आपे से बाहर हो जाता हूं. नौकर से कह कर इन्हें बक्से में रखवा दिया है. इन्हें कबाड़ी वाले को धातु के भाव दे दूंगा.’’ उस की हृदयहीन बातें राहुल के हृदय को बींधती रहीं. कितनी आसानी से समेट लिया था सुरेश ने सबकुछ. प्रेरणा की 25 वर्षों की मेहनत के अध्याय को चार दिन में अपने जीवन से निकाल कर फेंक दिया था उस ने. अभी तो उस की राख भी ठंडी नहीं हुई थी, उस का तो नामोनिशान तक मिटा दिया इस बेदर्द ने.

इतनी नफरत, आखिर क्यों? फिर वह मन ही मन ही बड़बड़ाने लगा, ‘हो सकता है प्रेरणा की तरक्की से जलता हो. इस का क्या गया, खोया तो मैं ने है अपना सोलमेट. अब किस से करूंगा मन की बातें. कौन सुनेगा एकदूसरे की कविताएं,’ बहुत रोकतेरोकते भी राहुल की आंखें भर्रा गईं. राहुल की भराई आंखें देख कर सुरेश का चेहरा तमतमा उठा, भौंहों पर बल पड़ गए, माथे की रेखाएं गहरा गईं. उस के स्वर में कसैलापन झलका, वह बोला, ‘‘आई सी, राहुल, कहीं तुम वह तो नहीं हो जिस के साथ वह रात को देरदेर तक बातें करती रहती थी, आई मीन उस के बौयफ्रैंड?’’

इतना सुनते ही राहुल की सांस रुक गई. निगाह ठहर गई. उसे लगा जैसे किसी ने उस के गाल पर तमाचा जड़ दिया हो या फिर पंजा डाल कर उस का दिल चाकचाक कर दिया हो. प्रेरणा तो उस की दोस्त थी, केवल दोस्त जिस में न कोई शर्त, न आडंबर, खालिस अपनेपन की गहनता. प्रेरणा के पास नई राह पर चलने का हौसला नहीं था. उस की खामोशी शब्दों में परिभाषित रहती थी. ऐसी थी वह.

राहुल वहां से भाग जाना चाहता था. वह अपनी खामोश गीली आंखों में चुपचाप प्रेरणा की असहनीय पीड़ा को गले लगाए, उस की कुर्बानियों पर कुर्बान महसूस करता अपने घर को निकलने की तैयारी करने लगा. उसे संतुष्टि थी कि अब प्रेरणा आजाद है. उसे याद आया प्रेरणा अकसर कहा करती थी, ‘भविष्य क्या है, मैं नहीं जानती. इतना जरूर जानती हूं कि सीतासावित्री का जीवन भी इस देश में गायभैंस के जीवन जैसा है, जिन के गले की रस्सी पर उस का कोई अधिकार नहीं.’’ जैसे ही राहुल अपना पैर चौखट के बाहर रखने लगा, उस ने दोनों बक्सों की ओर देखा और सोचा, ‘प्रेरणा की 25 वर्षों की अमूल्य कमाई मैं इस विषैले वातावरण में दोबारा मरने के लिए नहीं छोड़ सकता.’’

राहुल ने प्रेरणा के पति की ओर देखते इशारे से पूछा, ‘‘सर, क्या मैं इन्हें ले जा सकता हूं?’’ ‘‘शौक से, लेकिन इन कुत्तों से इजाजत ले लेना?’’

राहुल ने दोनों बक्सों को छूते हुए, कुत्तों की ओर देखा. कुत्ते पूंछ हिला रहे थे. उस ने बक्से कार में रखे. कुत्ते उस के पीछेपीछे कार तक गए, मानो, कह रहे हों प्रेरणा का घर तो कभी उस का था ही नहीं.

हथेली पर आत्मसम्मान: सोम को क्या समझाना चाहता था श्याम

‘‘सोम, तुम्हारी यह मित्र इतना मीठा क्यों बोलती है?’’

श्याम के प्रश्न पर मेरे हाथ गाड़ी के स्टीयरिंग पर तनिक सख्त से हो गए. श्याम बहुत कम बात करता है लेकिन जब भी बात करता है उस का भाव और उस का अर्थ इतना गहरा होता है कि मैं नकार नहीं पाता और कभी नकारना चाहूं भी तो जानता हूं कि देरसवेर श्याम के शब्दों का गहरा अर्थ मेरी समझ में आ ही जाएगा.

‘‘जरूरत से ज्यादा मीठा बोलने वाला इनसान मुझे मीठी छुरी जैसा लगता है, जो अंदर से हमारी जड़ें काटता है और सामने चाशनी बरसाता है,’’ श्याम ने अपनी बात पूरी की.

‘‘ऐसा क्यों लगा तुम्हें? मीठा बोलना अच्छी आदत है. बचपन से हमें सिखाया जाता है सदा मीठा बोलो.’’

‘‘मीठा बोलना सिखाया जाता है न, झूठ बोलना तो नहीं सिखाया जाता. यह लड़की तो मुझे सिर से ले कर पैर तक झूठ बोलती लगी. हर भाव को प्रदर्शन करने में मनुष्य एक सीमा रेखा खींचता है. जरूरत जितनी मिठास ही मीठी लगती है. जरूरत से ज्यादा मीठा किस लिए? तुम से कोई मतलब नहीं है क्या उसे? कुछ न कुछ स्वार्थ जरूर होगा वरना आज के जमाने में कोई इतना मीठा बोलता ही नहीं. किसी के पास किसी के बारे में सोचने तक का समय नहीं और वह तुम्हें अपने घर बुला कर खाना खिलाना चाहती है. कौनकौन हैं उस के घर में?’’

‘‘उस के मांबाप हैं, 1 छोटी बहन है, बस. पिता रिटायर हो चुके हैं. पिछले साल ही कोलकाता से तबादला हुआ है. साथसाथ काम करते हैं हम. अच्छी लड़की है शोभना. मीठा बोलना उस का ऐब कैसे हो गया, श्याम?’’

श्याम ने ‘छोड़ो भी’ कुछ इस तरह कहा जिस के बाद मैं कुछ कहूं भी तो उस का कोई अर्थ ही नहीं रहा. घर पहुंच कर भी वह अनमना सा चिढ़ा सा रहा, मानो कहीं का गुस्सा कहीं निकाल रहा हो.

‘‘लगता है, कहीं का गुस्सा तुम कहीं निकाल रहे हो? क्या हो गया है तुम्हें? इतनी जल्दी किसी के बारे में राय बना लेना क्या इतना जरूरी है…थोड़ा तो समय दो उसे.’’

‘‘वह क्या लगती है मेरी जो मैं उसे समय दूं और फिर मैं होता कौन हूं उस के बारे में राय बनाने वाला. अरे, भाई, कोई जो चाहे सो करे…तुम्हारी मित्र है इसलिए समझा दिया. जरा आंख और कान खोल कर रखना. कहीं बेवकूफ मत बनते रहना मेरी तरह. आजकल दोस्ती और किसी की निष्ठा को डिस्पोजेबल सामान की तरह इस्तेमाल कर के डस्टबिन में फेंक देने वालों का जमाना है.’’

‘‘सभी लोग एक जैसे नहीं होते हैं, श्याम.’’

‘‘तुम से ज्यादा तजरबा है मुझे दुनिया का. 10 साल हो गए हैं मुझे धक्के खाते हुए. तुम तो अभीअभी घर छोड़ कर आए हो न इसलिए नहीं जानते, घर की छत्रछाया सिर्फ घर में ही होती है. घर वाले ही हैं जो कुछ नहीं कहते फिर भी प्यार से बात भी करते हैं और पूछते हैं कुछ और भी चाहिए तो ले लो. बाहर का इनसान प्यार से बात कर जाए, हो ही नहीं सकता. अपना प्यार जताए तो समझ में आता है क्योंकि वह अपना है…बाहर वाला प्यार क्यों जताए? किस लिए वह आप का दुखदर्द बांटे? सोम, आखिर क्या लगते हो तुम उस के?’’

‘‘तुम्हें क्या लगता है क्या सिर्फ वही चोट देता है, जो हमारा कुछ नहीं लगता? अपना चोट नहीं देता है क्या? अच्छा, एक बात समझाओ मुझे, पराया इनसान चोट पहुंचा जाए तो पीड़ा का एहसास ही क्यों हो. वह तो कुछ लगता ही नहीं है न. उस के व्यवहार को हम इस तरह लें ही क्यों कि हमें चोट जैसी तकलीफ हो.

‘‘तुम कल इस शहर में आए. ट्रेन से उतरे तब अकेले तो नहीं थे न. सैकड़ों लोग स्टेशन पर उतरे होंगे. मुझ से मिलने तो कोई नहीं आया और न आए मेरी बला से पर हां, यदि तुम बिना मिले चले जाते तो दुख होता मुझे. सिर्फ इसलिए कि तुम अपने हो…इस का यही मतलब है न कि चोट पराए नहीं अपने देते हैं. इसीलिए पराए इनसान को हम इनसान ही समझें तो बेहतर है. कभी किसी के इतना भी पास न चले जाओ सोम कि धागों में उलझनें पड़ जाएं. कभीकभी उलझ जाने पर धागों का सिरा….’’

‘‘कैसा धागा और कैसा सिरा. इनसानों में धागे होते हैं क्या? तुम में और मुझ में कौन सा धागा है, जरा समझाना…’’

‘‘धागा था तभी तो अपनी बेंगलुरु की फ्लाइट छोड़ उसे 2 दिन के लिए आगे बढ़ा कर तुम यहां दिल्ली मेरे आफिस में चले आए. मुझे तो पता भी नहीं था तुम आने वाले हो. कौन लाया था तुम्हें मेरे पास? कोई तो खिंचाव था न, वरना इतनी तकलीफ उठा कर तुम मेरे पास कभी नहीं आते. तुम्हें क्या मतलब और क्या लेनादेना था मुझ से. सिर्फ धागे ही थे जो तुम्हें यहां मेरे पास खींच लाए हैं.’’

मेरी सारी बातों पर और मेरे सवाल पर श्याम मुझे टकटकी लगा कर देखता रहा जिस के साथ मैं ने अपने जीवन के 4 साल बिताए थे. इंजीनियरिंग में हम साथसाथ थे. वह होस्टल में था और मैं पढ़ने के लिए घर से जाता था. 2 साल एम.बी.ए. में लगे और अब 2 साल से हम दोनों एक अच्छी कंपनी में काम कर रहे हैं. वह भावुक और संवेदनशील है.

कहना शुरू किया श्याम ने, ‘‘मेरी एक सहयोगी है. पति के साथ उस का झगड़ा चल रहा है. तलाक तक बात पहुंच चुकी है. बहुत परेशान रहती है. पति अमेरिका में है, लंबी कानूनी प्रक्रिया और लाखों दांवपेंच. मांबाप के साथ रहती थी. कुछ दिन हुए कार दुर्घटना में मांबाप दोनों ही गुजर गए. उस की बहन और बहनोई दोनों ने मातापिता का घर और कारोबार संभाल कर उसे बेदखल ही कर दिया. आज की तारीख में वह नितांत अकेली है. मातापिता, बहन और पति, सभी से नाता टूट चुका है. मुझ से वह हर तरह की बात कर लेती है. एक तरह से आज की तारीख में मैं ही उस का सब कुछ हूं. कह सकते हो सुरक्षा कवच की तरह उसे संभाल रखा है मैं ने. हर रिश्ते को स्वयं में समेट कर उस का मरहम बनता रहता हूं…दिनरात जबजब जरूरत पड़ती है मैं चला जाता हूं…’’

मैं अपलक उस का चेहरा पढ़ता रहा. जानता हूं श्याम पूरी ईमानदारी से उस की सहायता करता रहा होगा. तन, मन और धन तीनों से हाथ धो चुका होगा तभी इतनी पीड़ा में है.

‘‘मैं जुड़ गया हूं उस के साथ और उस का जवाब है मैं शादी के लायक ही नहीं हूं. शादी के लिए तो परिपक्वता की जरूरत होती है और मैं परिपक्व नहीं हूं.’’

‘‘यह परिपक्व होना किसे कहते हैं जरा बताना मुझे. एक तलाकशुदा औरत को मासूम समझना नासमझी है या उस के सुखदुख समझना. परिपक्व होता अगर उस की सुनाई बातों में उस का भी दोष निकालता. जिस तरह उस का पति उसे लांछित करता रहा उसी तरह मैं भी करता. क्या तभी उसे लगता मैं परिपक्व हूं? तुम्हीं समझाओ, मैं कहां चूक गया?

‘‘सामने वाले पर विश्वास कर लेना ही क्या मेरा दोष है? मेरे जैसे ही उस के और दोस्त हैं जो उस की उसी तरह से सहायता करते हैं जैसे मैं करता हूं. हम अच्छे दोस्त हैं बस…उस का कहना है हम सभी दोस्त हैं वो दूसरे भी और मैं भी.

‘‘दोस्ती के नाम पर ही क्या मैं ने हजारों खर्च कर दिए? मेरी भावनाओं को उस ने समझा नहीं होगा, इतनी नादान होगी वह ऐसा तो नहीं होगा न…वह समझदार है और मैं नासमझ.’’

श्याम की सारी गोलमोल बातें और उस की तकलीफ मेरे सामने अब आईने की तरह साफ हो चुकी थीं. मैं ने उसे समझाया, ‘‘उस से मिलनाजुलना बंद कर दो, श्याम. दूर हो जाओ तुम उस से, यही इलाज है. रिश्तों की कद्र नहीं है उस लड़की में वरना वह तुम्हारा मन नहीं दुखाती.’’

लपक कर भीतर गया श्याम और अटैची से महंगी कश्मीरी शाल निकाल लाया. उस ने यह शाल मंगाई है. 10 हजार रुपए कीमत है इस की. और यह पहली बार नहीं हुआ.

‘‘क्या वह भी तुम्हें इतने महंगे उपहार देती है?’’

‘‘पागल हो गए हो क्या? वह लड़की है सोम, मैं उस से उपहार लेता अच्छा लगूंगा क्या?’’

‘‘तो किस की कीमत वसूलती है वह तुम से. क्या तुम्हारा रिश्ता पाकसाफ है?’’

चौंक गया श्याम. मेरा सवाल था ही ऐसा कठोर. आंखें भर आईं उस की. अपलक मेरा चेहरा देखता रहा. मैं श्याम को जानता हूं. चरित्रवान है. इस ने कभी कोई लक्ष्मण रेखा नहीं लांघी होगी और अगर लांघी नहीं तो कुछ तो है जो जायज नहीं है. इतने महंगे उपहार लेने का उस लड़की को भी क्या अधिकार है. हर रिश्ते की एक गरिमा होती है. दोस्ती की अलग सीमा रेखा है और प्यार की अलग. अगर प्यार नहीं करती, किसी रिश्ते में बंधना नहीं चाहती तो इस्तेमाल भी क्यों?

श्याम का हाथ पकड़ कर भींच लिया मैं ने.

‘‘मैं जानता हूं तुम कभी गलत नहीं हो सकते. अपने प्यार का निरादर मत होने दो. वह लड़की तुम्हें डिजर्व नहीं करती. प्रकृति ने तुम्हें वैसा नहीं बनाया जैसा उसे बनाया है. तुम जितने ईमानदार हो वह उतनी ईमानदार नहीं है. उस का तलाक क्यों हुआ होगा? तलाक होने में भी कौन जाने किस का दोष है? जो सब तुम ने सुनाया है उस से तो यही समझ में आता है कि वह लड़की बंध कर रहना ही नहीं चाहती और प्यार तो बंधन चाहता है न. जो सब का हो वह किसी एक का होना नहीं चाहता और प्यार बांधना चाहता है, प्यार में जो एक का है वह सब का नहीं हो सकता है.’’

‘‘मैं क्या करूं, सोम? ऐसा लगता है लगातार ठगा जा रहा हूं. सब लुटा कर भी खाली हाथ हूं.’’

‘‘लुटना छोड़ दो श्याम, आंखें मूंद कर उस रास्ते पर मत चलो जो गहरी खाई में उतरता है. शोभना के विषय में बात कर रहे थे न तुम, उस का मीठा बोलना तुम्हें पसंद नहीं आया था. उस का अपने घर बुलाना भी तुम्हें अच्छा नहीं लगा. उस के पीछे कारण पूछ रहे थे न तुम…कारण है न. हम दोनों शादी करने वाले हैं. तुम मेरे मित्र हो और उसी नाते वह तुम्हारा मानसम्मान करना चाहती है, बस.’’ अवाक् तो होना ही था श्याम को.

‘‘पिछले डेढ़ साल से हम साथसाथ काम कर रहे हैं. मेरे हर सुखदुख मेें वह मेरा साथ देती है. जितना मैं उस के लिए करता हूं उस से कहीं ज्यादा वह मेरे लिए करती है. उपहार के नाम पर मैं ने उसे कभी कुछ भी नहीं दिया क्योंकि उसे बिना किसी रिश्ते के कुछ भी लेना पसंद नहीं. जबरदस्ती कुछ ला कर दे दूं तो वह भी कुछ वैसा ही कर के सब बराबर कर देती है क्योंकि दोस्ती में लेनादेना बराबर हो तभी सम्मानजनक लगता है…’’

‘‘हैरान हूं मैं. वह लड़की किस अधिकार से तुम्हें इतना लूट रही है और रिश्ता भी बांधना नहीं चाहती. मत करो उस से इतना प्यार और अपना प्यार इतना सस्ता मत बनाओ कि कोई उसे अपमानित कर पैरों के नीचे रौंदता चला जाए. एक रेखा खींचो, श्याम.’’

आंखें नम हो गईं श्याम की.

‘‘तुम्हारी होने वाली भाभी है शोभना और उस के कुछ गुण हैं जिन की वजह से मैं उस की इज्जत भी करता हूं. मेरी मान्यता है जब तक तुम किसी की इज्जत नहीं करते तब तक तुम उस से प्यार नहीं कर सकते. इकतरफा प्यार से आखिर कब तक निभा सकता है कोई?’’

कड़वी सी मुसकान चली आई थी श्याम के होंठों पर जिस में उस की पीड़ा मुझे साफसाफ नजर आ रही थी. लगता है कि अब वह उस लड़की का सम्मान नहीं कर पाएगा क्योंकि उस ने हाथ का कीमती शाल एक तरफ सरका दिया था… हिकारत से, मानो उसी पर अपना गुस्सा निकालना चाहता हो.

मेरा हाथ स्नेह से थाम रखा था श्याम ने. उस के हाथ की पकड़ कभी सख्त होती थी और कभी नरम. उस के भीतर का महाभारत उसे किस दिशा में धकेलेगा मैं नहीं जानता फिर भी एक उम्मीद जाग रही थी मन में. इस बार जब वह वापस जाएगा तब काफी बदल चुका होगा. अपने प्यार का, अपनी भावनाओं का सम्मान करना सीख चुका होगा.

Mother’s Day Special: जीवन पर हावी तो नहीं बांझपन

कुछ महिलाओं में अचानक प्रैगनैंसी जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं जैसे माहवारी चक्र का बाधित होना, स्तनों में दूध बनना, कामेच्छा कम होना आदि. असल में इस का संबंध एक ऐसी स्थिति से होता है, जिसे हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया कहा जाता है. इस में खून में प्रोलैक्टिन हारमोन का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है. ऐस्ट्रोजन के प्रोडक्शन में बड़े स्तर पर हस्तक्षेप होने से माहवारी चक्र में बदलाव आने लगता है.

प्रोलैक्टिन का मुख्य काम गर्भावस्था के दौरान स्तनों को और विकसित करने, दूध पिलाने के लिए उन्हें उभारने और दूध बनाने का होता है. वैसे किसी महिला के प्रैगनैंट न होने के दौरान भी यह हारमोन कम मात्रा में खून में घुला रहता है. लेकिन प्रैगनैंसी खासतौर से बच्चे के जन्म के बाद इस का स्तर काफी बढ़ जाता है. इस स्थिति में 75% से ज्यादा महिलाएं प्रैगनैंट न होने के बावजूद दूध उत्पन्न करने लगती हैं.

पुरुषों में भी प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ने से कामवासना में कमी, नपुंसकता, लिंग में पर्याप्त तनाव न आना और स्तनों का आकार बढ़ना जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं. टेस्टोस्टेरौन का स्तर कम होना भी इसी स्थिति के बाद का एक परिणाम है. अगर ऐसी स्थिति में इलाज न कराया जाए, तो शुक्राणुओं की गुणवत्ता घटने लगती है और वे ज्यादा देर जीवित भी नहीं रह पाते हैं. इस के चलते उन के निर्माण में गड़बड़ी भी आने लगती है.

प्रसव या गर्भधारण करने की उम्र में महिलाओं में यह ज्यादा प्रचलित है. हालांकि इस में महिलाओं की प्रासंगिक स्थिति सामान्य ही बनी रहती है. ऐसी महिलाएं, जिन का ओवेरियन रिजर्व अच्छा हो, उन्हें भी माहवारी में अनियमितता का सामना करना पड़ सकता है और यह एक तरह से इस डिसऔर्डर के आगमन का संकेत होता है.

बांझपन का कारण

खून में प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ने से प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है. इस में या तो पिट्यूटरी स्टाक कंप्रैस हो जाती है या फिर डोपामाइन का स्तर घट जाता है अथवा प्रोलैक्टिनोमा (पिट्यूटरी ऐडीनोमा का एक प्रकार) का जरूरत से ज्यादा प्रोडक्शन होने लगता है, जो हाइपोथैलेमस से गोनाडोट्रोपिन को रिलीज करने वाले हरमोरन (जीएनआरएच) के स्राव को रोकता है.

गोनाडोट्रोपिन को रिलीज करने वाले हरमोन (जीएनआरएच) के स्तर में कमी आने की वजह से ल्यूटीनाइजिंग हारमोन (एलएच) और फौलिकल स्टिम्युलेटिंग हारमोन (एफएसएच) के स्राव में भी कमी आने लगती है. परिणामस्वरूप बां झपन का सामना करना पड़ता है.

बांझपन की स्थिति

एक बार जब प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ जाता है, तो महिलाओं में माहवारी कम होने लगती है और खून में ऐस्ट्रोजन का स्तर घटने से अनियमितता के साथसाथ बां झपन की स्थिति भी पैदा होने लगती है. कुछ मामलों में माहवारी के प्रवाह में बदलाव इमेनोरिया के रूप में भी देखने को मिलता है, जिस में प्रजनन क्षमता वाली उम्र में भी माहवारी कम होने लगती है. कई बार तो प्रैगनैंट न होने या किसी मैडिकल हिस्ट्री की वजह से भी स्तनों में दूध बनाने लगता है और उन में दर्द भी महसूस होता है क्योंकि प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ने और कामेच्छा की कमी होने के साथ ही योनी में सूखापन आने से स्तनों के टिशू भी चेंज होने लगते हैं.

महिलाओं के उलट पुरुषों में माहवारी जैसा कोई भरोसेमंद लक्षण नजर नहीं आने की वजह से इस के वास्तविक कारण का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है. उन में धीरेधीरे कामेच्छा की कमी आने, लिंग में पर्याप्त तनाव न आने, प्रजनन क्षमता में कमी आने और स्तनों का आकार बढ़ने जैसे लक्षण जरूर नजर आ सकते हैं. मगर कई बार ये कारक भी आसानी से नजर नहीं आते और उस की वजह से वास्तविक कारणों की पहचान नहीं हो पाती है.

महिलाओं में इस के संबंधित परिणाम

इस स्थिति में जैसे ही अंडाशय से ऐस्ट्रोजन का प्रोडक्शन प्रभावित होता है, बां झपन की संभावना बढ़ने के साथ ही ऐस्ट्रोजन की कमी के कारण बोन मिनरल डैंसिटी बीएमडी भी घटने लगती है और ओस्टियोपोरोसिस होने का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐस्ट्रोजन हार्ट को बीमारियों से बचाने में भी बेहद महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इस के स्तर में असंतुलन पैदा होने से आगे चल कर हार्ट से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा भी पैदा हो जाता है. पिट्यूटरी ट्यूमर की वजह से प्रोलैक्टिन का जरूरत से ज्यादा प्रोडक्शन होने के कारण सिर में तेज दर्द और नजर कमजोर होने के साथसाथ अन्य हारमोंस के प्रोडक्शन में भी कमी आ जाती है, जिस के चलते हाइपरथायरोडिज्म हो सकता है, जो बां झपन के एक और कारण के रूप में सामने आता है.

कैसे करें डायग्नोज

इस कंडीशन को डाइग्नोज करने के लिए सब से पहले तो मरीज की मैडिकल हिस्ट्री देख कर यह पता लगाया जाता है कि कहीं उसे पहले से ही अस्पष्ट कारणों के चलते स्तनों से दूध का स्राव होने या स्तनों का आकार बढ़ने की समस्या तो नहीं रही है या फिर अनियमित माहवारी अथवा बां झपन की समस्या पहले से तो नहीं रहती है.

पुरुषों में यह पता लगाना जरूरी होता है कि उन की सैक्सुअल फंक्शनिंग कहीं पहले से तो खराब नहीं रही है और स्तनों से दूध का स्राव होने की समस्या कहीं पहले से तो नहीं है. अगर मैडिकल हिस्ट्री से हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया के होने का पता चलता है, तो सब से पहले ब्लड टैस्ट के जरीए यह पता लगाया जाता है कि सीरम प्रोलैक्टिन का स्तर कितना है. इस में खाली पेट खून की जांच कराने को प्राथमिकता दी जाती है. अगर सीरम प्रोलैक्टिन का स्तर ज्यादा है, तो फिर आगे अन्य जरूरी टैस्ट करवाए जाते हैं.

आमतौर पर माहवारी न होने की स्थिति में सब से पहले प्रैगनैंसी टैस्ट कराया जाता है. इस के अलावा थायराइड हारमोन के स्तर का पता लगाने के लिए थायराइड के टैस्ट करवाए जाते हैं ताकि यह साफ हो जाए कि मरीज को हाइपरथायरोडिज्म तो नहीं है. अगर प्रोलैक्टिन का स्तर बहुत ज्यादा है, तो उस की वजह से ट्यूमर होने की आशंका भी पैदा हो जाती है. ऐसे में ब्रेन और पीयूष ग्रंथियों का एमआरआई कराने की सलाह भी दी जाती है, जिस में हाई फ्रीक्वैंसी रेडियो तरंगों के जरीए टिशू की इमेज ली जाती है और ट्यूमर के आकार का पता लगाया जाता है.

क्या इलाज संभव है

इलाज का पहला कदम उन प्रमुख कारणों का पता लगाना है, जिन के चलते यह स्थिति पैदा हुई. ये कारण शारीरिक भी हो सकते हैं. कुछ विशेष प्रकार की दवा लेने की वजह से भी ऐसा हो सकता है. इस के अलावा थायराइड या हाइपोथैलिमिक डिसऔर्डर या पिट्यूटरी ट्यूमर या फिर किसी सिस्टेमिक डिजीज की वजह से भी ऐसा हो सकता है.

एक बार जब बीमारी की वास्तविक वजह का पता चल जाता है और किसी ट्यूमर के होने की संभावना खत्म हो जाती है, तो ऐसी दवा के जरीए उपचार शुरू किया जाता है, जो शरीर में प्रोलैक्टिन के स्तर में कमी लाती है. इस से एफएसएच, एलएच और ऐस्ट्रोजन का स्तर फिर से सामान्य होने लगता है. नतीजतन प्रजनन क्षमता फिर से पहले की तरह कायम हो जाती है और माहवारी भी नियमित रूप से होने लगती है.

   -डा. तनु बत्रा

आईवीएफ ऐक्सपर्ट, इंदिरा आईवीएफ हौस्पिटल, जयपुर. 

Mother’s Day Special: मदर्स डे पर कुछ ऐसा हो आपकी मदर का मेकओवर

मदर्स डे आने में अब कुछ ही दिन बचे है ऐसे में आप अपनी मदर को स्पेशल फील कराने के लिए कुछ न कुछ तो जरूर कर रहे होंगे कोई मदरस डे अपनी माँ को फूल गिफ्ट करेंगा, कोई ब्यूटीफुल ड्रेस, कोई मेकअप प्रोडक्ट्स, कोई अच्छी सी पार्टी देगा, कोई मूवी दिखाने ले जाएगा ऐसे में मां के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करना आपके साथ आपकी मदर को बहुत अच्छा लगेगा अगर आप इस ओकेजन के लिए उनको एक खूबसूरत मेकओवर भी दें और उनके मेकअप और लुक को क्रिएट करने  में उनकी मदद करें, और उन्हें स्पेशल फील करवाएं तो उनको और भी अच्छा लगेगा. जब आप खुद उन्हे तैयार करेंगी और घुमाने ले जाएँगी तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा. इस खास ओकेजन में आइये जाने कि मदर्स डे आप अपनी मदर के लिए कैसा मेकअप कर सकती हैं और उन्हे एक फ्रेश लुक दे सकती हैं.

ब्यूटी एक्सपर्ट रिचा अग्रवाल कुछ ऐसे टिप्स आपकी मदर्स के लिए शेयर कर रही हैं जिससे वो एक समर रेडी और पार्टी रेडी लुक अचीव कर सकती हैं.

 मॉइश्चराइजिंग

स्किन को यूथफुल और खिला-खिला रखने के लिए स्किन को हाइड्रेट रखना बहुत ज़रूरी है, इसके लिए सबसे पहले तैयार होने से पहले चेहरे को मॉइस्चराइज़ ज़रूर करें, इससे स्किन फ्रेश भी दिखेगी और साथ ही मेकअप भी अच्छे से ब्लेंड होगा.

अंडर आई क्रीम 

इसके साथ ही आँखों के नीचे के एरिया में अंडर आई क्रीम का इस्तेमाल ज़रूर करें, इससे पहले आई क्रीम को पैच टेस्ट कर के ज़रूर देख लें. अंडर आई क्रीम लगाने के बाद मेकअप बेस ज़रूर लगाए, इससे अंडर आई पफीनेस, डार्क सर्कल्स आदि कवर हो जाएंगे.

वाटरप्रूफ कंसीलर और फाउंडेशन

इसके बाद पूरे चेहरे पर फेस कंसीलर और या फिर फाउंडेशन लगाएं और खूब अच्छी तरह से ब्रश से ब्लेंड करें, चेहरे पर बेस लगाते हुए आप गर्दन पर भी बेस को अच्छे से स्प्रे करें. समर के लिए एसपीएफ युक्त लाइट और ऑयल फ्री फाउंडेशन ही लगाए.जिससे स्किन चिपचिपी नहीं दिखेगी और साथ ही सूरज की अल्ट्रा वायलेट किरणों से भी आप अपनी स्किन को प्रोटेक्ट रख पाएंगी.

फॉर लॉन्ग लास्टिंग मेकअप

अगर आप चाहती हैं की मेकअप  इवन लगे तो मेकअप से पहले स्किन पर आइस रब ज़रूर कर लें. इसके उपयोग से आपकी स्किन ऑयली और चिपचिपी नहीं दिखेगी.  साथ ही स्किन सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों से  भी बची रहेगी. क्यूंकि गर्मियों का समय  तो आप आयल फ्री मॉस्चराइज़र का ही इस्तेमाल करें, और यदि आपको एक्ने और पिम्पल्स आदि की समस्या रहती है तो आप जेल बेस्ड मॉइस्चराइज़र भी लगा सकती हैं.

आई मेकअप

अपनी मां का वाटरप्रूफ आई मेकअप ही करें इसके बाद आँखों पर माइल्ड मेकअप कर सकते हैं, आइब्रो को शेप में रखने के लिए ब्रश की मदद से आई ब्रो के बाल सेट करें और फिर फिलर से आई ब्रो फिल  करे, डार्क ब्लैक कलर का इस्तेमाल ना करें और इसकी जगह डार्क ब्राउन कलर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

 आई शैडो हो खास

इसके बाद आँखों पर माइल्ड ब्राउन या पीच कलर का आई  शैडो लगाएं जो स्किन के टोन से एक टोन डार्क हो. समर में हैवी आई मेकअप करने से परहेज़ ही करें क्यूंकि आई मेकअप करते समय आईशैडो के लिए लाइट व न्यूट्रल शेड्स चुनें.  समर में आई मेकअप को फैलने से बचाने के लिए आप वाटरप्रूफ आई मेकअप का इस्तेमाल करें और सारे मेकअप को वाटरप्रूफ रखे. इवनिंग पार्टी का मेकअप हो बाइब्रेंट अगर आप इवनिंग पार्टी को एन्जॉय कर रही हैं , तो आई मेकअप के लिए हल्के ब्राइट शेड्स या फिर थोड़े वाइब्रंट शेड्स का इस्तेमाल कर सकती हैं. इवनिंग पार्टी में आई मेकअप के लिए ग्रे,  नेवी ब्लू जैसे शेड्स बहुत अच्छे दिखते हैं और इन शेड्स स्मोकी आई मेकअप इस्तेमाल कर सकते हैं.

इसके बाद आप अपने आई ब्रोस को हाईलाइट ज़रूर करें, आप लाइनर को स्किप भी कर सकते हैं और गर्मियों का समय है तो काजल भी स्किप करें, और सिंगल कोट मस्कारा लगा सकती हैं और आई लाश कर्लर का इस्तेमाल कर सकते हैं. समर में फ्रेश लुक के लिए आप ब्लैक का इस्तेमाल ना करते हुए  सॉफ्ट ब्राउन कलर का  मस्कारा लगाएं और आप चाहे तो आप ट्रांसपेरेंट मस्कारा भी लगा सकती हैं जो आर्टिफिशल नहीं लगेगा और नेचुरल दिखेगा और साथ ही आपकी आई लेसेज भी घनी दिखेंगी.

ब्लशर और लिपस्टिक के कलर को करें कोऑर्डिनेट

स्किन से एक टोन डार्क ब्लशर का इस्तेमाल करें, और लिपस्टिक भी ब्लशर से मिलते हुए कलर की ही लगाए. लिपस्टिक लगाने से पहले लिप लाइनर से शेप दें और फिर अपने लिप्स को उससे फिल कर दें, गर्मियों का समय है तो हल्के शेड की लिपस्टिक का ही चयन करें आप लिपस्टिक के लिए पीच, पिंक, लाईट ब्राऊन कलर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं , और इसके ऊपर लिप ग्लॉस ज़रूर लगा लें.  याद रखे समर में लाईट मेकअप करें जिससे आप और अधिक यंग और फ्रेश नज़र आएंगी.  आप चाहे तो समर में लिपस्टिक की जगह सिर्फ लिप ग्लॉस ही अप्लाई कर सकते हैं. समर में ऑरेंज और कोरल कलर्स अप्लाई करें क्यूंकि डीप और हैवी कलर्स इस मौसम में अच्छे नहीं लगते.करें नेचुरल मेकअप सेटर का इस्तेमाल करें.

मेकअप में ले ब्लॉटिंग पेपर की मदद

आप चाहती हैं की मेकअप स्किन पर ज़्यादा देर तक टिके तो फिर मेकअप पूरा होने के बाद आधे फ़ीट की दूरी से पानी का स्प्रे सिर्फ एक सेकंड के लिए कर दें यह नेचुरल मेकअप सेटर का काम करेगा आपकी स्किन पर. इसके साथ ही आप अपने पास ब्लॉटिंग पेपर ज़रूर रखे ताकि आप एक्सेस आयल को समय समय पर ब्लॉटिंग पेपर की मदद से हटा सके.

हेयर स्टाइल

इस ओकेजन पर और गर्मी को देखते हुए आपकी मां का हेयर स्टाइल ऐसा हो जिससे वह कंफरटेबल हो  आप हाई बन बना कर खूबसूरत स्टाइल दे सकती हैं.इसके अलावा ये स्टाइल भी अपना सकती है.

फ्रेंच बन

ये स्टाइल दिखने में जितना स्‍टाइलिश होता है उतना कंफरटेबल भी , यह गर्मी के दिनों में बालों को बिखरने से भी बचाए रखता है. इससे गर्मी भी कम लगती है. इसे बनाते समय बालों को घुमाते हुए ऊपर की ओर चढ़ाया जाता है और जूड़ा पिन की मदद से अंदर की ओर दबाकर लॉक कर दिया जाता है.

फिश टेल स्‍टाइल

अगर आपके बाल लंबे है तो आपके लिए ये हेयर स्‍टाइल बेहतरीन है. इस हेयर स्‍टाइल की मदद से आपके बाल समेटे रहेंगे और बार बार खुलेंगे नहीं. फिश टेल बनाने में भले ही थोड़ा मेहनत है लेकिन एक बार बनाने के बाद आप चाहें तो पूरे दो दिन चोटी बनाने से बच सकती हैं. इसे बनाते समय कई बारीक लेयरिंग की जाती है.

आउटफिट्स भी हो स्टाइलिश

आप मदर्स डे के दिन अपनी मां के साथ मैचिंग आउटफिट्स भी स्टाइल कर सकती हैं. आजकल ट्विनिंग ड्रेसेस का काफी ट्रेंड देखा जा रहा है, जिसे आप भी अपनी मां के साथ स्टाइल कर सकती हैं. आप अपनी मां को शरारा सूट, प्लाजो सूट वियर करा सकती है इसके अलावा यंग और स्मार्ट लुक के लिए लांग वन पीस अपनी मैचिंग का भी पहन सकती है इससे मां-बेटी का लुक और बॉन्डिंग और भी स्ट्रांग लगेगी.

Mother’s Day Special: माई मौम माई दीवा

‘‘सुबह 5 बजे का अलार्म बजा नहीं कि मम्मी तुरंत उठ खड़ी होतीं. फिर जब वे हमें उठाने लगती हैं तो हम सब हर बार बस 5 मिनट और सोने दो कह कर उन्हें रूम से चले जाने का इशारा कर देते हैं. जब तक हम उठते हैं हमें लंच व ब्रेकफास्ट तैयार मिलता है. तैयार होते भी हम मां से कभी जूते लाने को कहते हैं तो कभी कहते हैं मां प्लीज मेरी ड्रैस प्रैस कर दो. ‘‘हम ही नहीं पापा व घर के अन्य सदस्यों की भी इस तरह की फरमाइशें जारी रहती हैं. मां चेहरे पर मुसकान लिए खुशीखुशी हम सब की फरमाइशें पूरी कर देती हैं, जबकि उन्हें खुद भी औफिस जाना होता है. मगर वे जानती हैं कि खुद के साथसाथ परिवार की सारी चीजों को कैसे मैनेज कर के चलना है.

‘‘घर की सारी जरूरतें पूरी करने के बाद उन्हें अपने औफिस भी जाना होता है. कभीकभी तो मुझे आश्चर्य होता है कि इतने व्यवस्थित तरीके से वे ये सब कैसे मैनेज करती हैं. मैं भी उन से सीख कर उन के जैसा बनना चाहती हूं. सच में मौम सिर्फ एक परफैक्ट वूमन

नहीं, बल्कि मेरी स्ट्रैंथ भी हैं और उन्हीं से मैं आयरन की तरह मजबूत बन जीवन जीने का व्यवस्थित तरीका भी सीख रही हूं,’’ यह कहना है 17 वर्षीया रिया का. फिटनैस से नो कंप्रोमाइज अगर औफिस पहुंचने की जल्दी के चक्कर में हैल्थ को इग्नोर किया तो आगे चल कर दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, इसलिए सुबह की सैर स्किप करने का तो सवाल ही नहीं उठता, भले ही सुबह आधा घंटा जल्दी क्यों न उठना पड़े.

ऐसा सिर्फ मां अकेले नहीं करतीं, बल्कि इस में परिवार के सभी सदस्यों को भी शामिल करना नहीं भूलती, क्योंकि वे जानती हैं कि फिटनैस सिर्फ उन के लिए ही नहीं, बल्कि सभी के लिए जरूरी है. सभी को समझाती भी हैं कि सुबह की फ्रैश हवा में घूमने से हम खुद को न सिर्फ बीमारियों से दूर रख सकते हैं, बल्कि पूरा दिन फ्रैश महसूस करते हुए चुस्ती से काम भी कर सकते हैं. मां यह बात अच्छी तरह जानती है कि परिवार की सेहत का ध्यान रखने के लिए उस का भी सेहतमंद रहना जरूरी है.

वर्किंग मदर्स खासतौर पर इस बात का खयाल रखती हैं. उन्हें पता है कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं को शरीर में आयरन, कैल्सियम इत्यादि की कमी से दोचार होना पड़ता है. ऐसे में वे अपनी डाइट के प्रति सजग हैं. चीजों का स्किप करना नहीं सीखा

कहावत है कि मां के पास जादू की छड़ी होती है जिस से वह हर मुश्किल आसान बना देती है. कुनाल ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि मम्मी की औफिस में मीटिंग और उसी दिन स्कूल में हमारी पार्टी होने के कारण मुझे घर से राइस ले जाने थे. मेड को भी उसी दिन छुट्टी करनी थी. पापा ने भी सुबह ही बताया कि आज उन का आलूमटर खाने का मन है. इतने सारे काम. फिर भी मेरी सुपर मौम ने किसी को रूठने नहीं दिया.

घर का कोई काम अधूरा नहीं छोड़ा. फिर टाइम पर औफिस भी पहुंच गईं. ये सब हमें उन के शाम को घर लौटने पर पता चला. तब हमें लगा कि हमें भी अपनी स्वीट मौम के लिए कुछ करना चाहिए. तब मैं ने और पापा ने उन के लिए डिनर तैयार कर के उन्हें सरप्राइज दिया. ऐसा उन्होंने पहली बार नहीं, बल्कि कई बार किया है. मैं उन्हें ऐसा करता देख कर इंस्पायर होता हूं. और उन की तरह बनना चाहता हूं.

खुद को रखती हैं हरदम टिपटौप

मां यह बात भली प्रकार समझती है कि उस की बेटी उसे अपनी स्ट्रैंथ के साथसाथ उसे अपना रोल मौडल भी मानती है. ऐसे में वह अपने अपीयरैंस से समझौता नहीं करती. अपनी मां के पर्सनल केयर रूटीन के बारे में कृति कहती हैं कि मौम हर समय किसी की भी एक आवाज पर हाजिर हो जाती हैं. पूरा दिन घर व औफिस के कामों में लगी रहती हैं. फिर भी खुद को टिपटौप रखती हैं. लेटैस्ट आउटफिट्स को कैरी करना नहीं भूलतीं. भले ही बाहर जाने का टाइम न भी मिले, फिर भी अपनी स्किन की केयर के लिए होममेड चीजें चेहरे पर प्रयोग करती रहती हैं ताकि स्किन हर उम्र में चमकतीदमकती रहे.

वे हमें भी त्वचा को जवां बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह देती हैं. सिर्फ सलाह ही नहीं, बल्कि उन्हें जबरदस्ती करवाती भी हैं ताकि हम धीरेधीरे उसे अपने रूटीन में शामिल कर सकें. मैं जब भी अपनी मौम के साथ जाती हूं तो मुझे गर्व महसूस होता है कि ये मेरी मौम हैं. उन की पर्सनैलिटी की हर कोई तारीफ करते नहीं थकता. परिवार की हर बात का खयाल मां को फैमिली की स्ट्रैंथ यों ही नहीं कहते, उस के पास परिवार के एकएक सदस्य की पसंदनापसंद का लेखाजोखा रहता है. कब और किसे क्या चाहिए, वह बिना बताए ही समझ जाती है.

आदर्श अपनी परीक्षा के दिन याद करते हुए बताता है कि पिछले हफ्ते मेरी परीक्षा थी. मैं ने देर रात तक पढ़ाई की. मम्मी को मेरी आदत के बारे में पता था कि मैं जल्दीजल्दी में अपना एडमिट कार्ड ले जाना भूल जाऊंगा, इसलिए उन्होंने पहले ही मेरे बैग में मेरा एडमिट कार्ड रख दिया था. जब परीक्षा केंद्र में मुझे याद आया तो मेरे होश उड़ गए. लेकिन ‘माई मौम इज ग्रेट’ यह सोच जब मैं ने अपना बैग चैक किया तो वह उस में था. यही नहीं जब भी पापा को जरूरी डौक्यूमैंट्स की जरूरत होती है, तो मम्मी ही उन्हें ढूंढ़ कर देती हैं. यानी हम उन के बिना अधूरे हैं.

बच्चों को बनाए वैल बिहैव्ड

मां को बच्चों के साथ समय बिताने का भले ही कम समय मिल पाता है, फिर भी वे अपने बच्चों को पूरी तरह वैल मैनर्ड बनाने की कोशिश करती हैं. किस तरह बड़ों के सामने पेश आते हैं, घर आए मेहमान को कैसे ऐंटरटेन करते हैं, अगर कोई आप के साथ बदतमीजी करता है तो कैसे प्यार से उसे अपनी गलती महसूस करवानी है, पेरैंट्स अगर कुछ कहें तो उलट कर जवाब नहीं देना है, हमेशा सब की मदद के लिए तैयार रहना है वगैरावगैरा सिखाती रहती हैं. मां से बेहतर भला यह बात कौन समझेगा कि बच्चे के लिए उस की पहली पाठशाला उस के मातापिता ही होते हैं. उन के बोलचाल के तरीके और व्यवहार पर पेरैंट्स की ही छाप होगी. मां यह सुनिश्चित करती है कि घर का कोई भी सदस्य बच्चों के सामने अनापशनाप बात या व्यवहार करे.

समझाए पढ़ाई का महत्त्व

मांएं ट्यूशन तक ही बच्चों की पढ़ाई को सीमित नहीं रखतीं, बल्कि खुद भी उन की पढ़ाई पर समय देती हैं ताकि वे उन की वीकनैस व स्ट्रैंथ को पहचान सकें. जहां भी उन्हें उन में कमजोरी नजर आती है उन्हें टीचर की तरह समझाने की कोशिश करती हैं ताकि उन का बच्चा अव्वल आ सके.

बच्चे के उज्जवल भविष्य की नींव रखने में मां की भूमिका को नकारा नहीं सकता. उस के प्रतिदिन के प्रयास का फल बच्चे के काबिल बन जाने पर ही मिलता है.

फैमिली संग क्वालिटी टाइम भी

वे घर में सभी के साथ क्वालिटी टाइम व्यतीत करने में विश्वास रखती हैं ताकि अगर थोड़ा सा समय भी साथ बिताने को मिले तो वह समय उन के लिए पूरे दिन का बैस्ट समय हो और परिवार का कोई भी सदस्य खुद को इग्नोर महसूस न करे. मां की भूमिका परिवार में धागे की तरह होती है जिस से परिवार का हर एक सदस्य मोतियों की तरह पिरोया हुआ रहता है. ऐसे में वह सुनिश्चित करती है कि दिन में भले कुछ समय के लिए ही, मगर परिवार के सभी सदस्य एकसाथ बैठ कर कुछ पल जरूर बताएं.

फंक्शंस भी मिस नहीं करतीं आजकल की व्यस्त जीवनशैली अपनों, नातेरिश्तेदारों से मिलनेजुलने के मौके बहुत कम देती है. मां की जिम्मेदारी यहां और भी बढ़ जाती है क्योंकि जब वह खुद व्यस्त होने का बहाना बना कर गैटटुगैदर मिस करेगी तो बच्चे भी अपनों को जाननेसमझने से वंचित रह जाएंगे.

मां यह सुनिश्चित करती है कि पारिवारिक समारोहों में सपरिवार शामिल हो कर फैमिली बौंडिंग को और मजबूत बनाया जाए. इस बारे में श्रेया कहती है कि मैं थकी हुई हूं या फिर मेरे पास ढेरों काम हैं, कह कर मेरी मौम ने कभी फैमिली फंक्शंस मिस करने का बहाना नहीं बनाया, बल्कि हर फंक्शन अटैंड करती हैं. यही नहीं, घर आए मेहमानों की भी खुशीखुशी आवभगत करती हैं. वे हमें भी यही सिखाती हैं कि रिश्तों, परिवार का महत्त्व समझो, क्योंकि एकजुट परिवार में जो ताकत होती है वह अलगथलग रहने में नहीं.

सिखाती है टाइम मैनेजमैंट समय का सही प्रबंधन

किस तरह करना है, यह तो कोई मां से सीखे. अपना अनुभव शेयर करते हुए राज का कहना है कि मैं अपने पेरैंट्स का सिंगल चाइल्ड हूं, जिस कारण मुझे अपने पेरैंट्स से ऐक्स्ट्रा केयर मिलती है. मेरे मौमडैड दोनों वर्किंग हैं. इस के बावजूद मेरी मौम ने घर में पूरा अनुशासन बना कर रखा है. मैं जब भी कोई गलती करता हूं तो वे मुझे आंखों से इशारा कर अपनी नाराजगी बता देती हैं, जिस से मैं उस काम को दोबारा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता. मेरी मौम चीजों को बहुत अच्छी तरह मैनेज करना जानती हैं. उन्हीं से मैं ने टाइम मैनेजमैंट सीखा है. मैं तो यही कहूंगा कि अब तक मैं ने जो अचीव किया है सिर्फ अपनी मां के कारण.

बोल्ड बनाती है मां

जिस तरह मां हर परिस्थिति का सामना डट कर करती है उसी तरह बच्चों को भी हर हालात से लड़ना सिखाती है. अनुभव बताते हैं कि जब मेरी मां की ऐंजौय करने की उम्र थी तब हमारे पापा का देहांत हो गया. ऐसी स्थिति में मां ने खुद को संभालते हुए हमें कभी पापा की कमी महसूस नहीं होने दी. उन्होंने जौब कर के हमारी हर जरूरत को पूरा किया.

वे हमें भी बोल्ड बनाने की कोशिश करती रहती हैं. वे अंदर से भले ही टूट गई थीं, लेकिन हमारे सामने कभी आंखों से आंसू नहीं आने दिए. उन का संघर्ष और मेहनत देख मेरे मुंह से उन के लिए तारीफ के शब्द निकलने रुकते नहीं हैं. मैं अपनी मौम से बस यही कहूंगा कि आप को दुनिया की हर खुशी देने की कोशिश करूंगा.

Mother’s Day Special: बढ़ती बेटियों को दें ये ब्यूटी मंत्र

पार्टी से घर लौट सोनम जब अपने बैडरूम में घुसी, तो वहां का नजारा देख कर दंग रह गई. ड्रैसिंगटेबल पर कौस्मैटिक का सामान बिखरा पड़ा था और उस की 13 वर्ष की बेटी आलिया सजधज कर खुद को आईने में निहार रही थी. गुस्से में तमतमाई सोनम ने आलिया के गाल पर थप्पड़ जड़ते हुए कहा कि ये कोई बच्चों के इस्तेमाल की चीजें नहीं हैं.

यह वाक्या था पहले के जमाने की मम्मी का. मगर आजकल की मम्मियां ऐसी नहीं होती हैं. वे खुद तो सजतीसंवरती हैं ही, साथ ही अपनी बेटी को भी कौस्मैटिक्स के इस्तेमाल से नहीं रोकतीं खासतौर पर जब लड़कियां टीनऐजर हो जाती हैं, तो अपनी मांओं को यों सजतेसंवरते देख कर उन का मन भी उन चीजों को इस्तेमाल करने को करने लगता है.

इस बारे में कौस्मैटोलौजिस्ट एवं माइंड थेरैपिस्ट अवलीन खोकर कहती हैं, ‘‘आजकल स्कूलों में बहुत सारी ऐक्टिविटीज होती रहती हैं और उन में बच्चों को सजाने और प्रेजैंटेबल दिखाने के लिए मेकअप का इस्तेमाल किया जाता है. इस के अतिरिक्त आजकल टीवी सीरियल्स और फिल्मों में भी कम उम्र की ऐक्ट्रैसेज और मौडल्स दिख रही हैं. 13 से 16 वर्ष की उम्र ऐसी होती है, जब लड़कियां अपने लुक्स पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देती हैं. यह उम्र फिल्म ऐक्ट्रैसेज और मौडल्स को कुछ ज्यादा ही प्रभावित करती है.

‘‘फिल्म या सीरियल में कौन सा नया लुक आया है, उसे आजमाने से मां भी अपनी बेटी को नहीं रोक सकती, क्योंकि वह खुद भी उस लुक को खुद पर आजमा रही होती है. ऐसे में बेटी को लगता है कि जब मां कर रही हैं, तो मैं भी कर सकती हूं. बस यही बात मांओं को अपनी बेटियों को समझानी है कि हर वह प्रोडक्ट, जो मां इस्तेमाल कर रही हैं उसे उन की बेटी इस्तेमाल नहीं कर सकती, क्योंकि उस की त्वचा अभी कैमिकल्स की हार्डनैस को झेलने लायक नहीं बनी है.

मांओं को भी पता होना चाहिए कि उन की बेटी की त्वचा पर कौन से प्रोडक्ट्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं. बहुत जरूरी है कि बच्चे की त्वचा पर कोई भी प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पूर्व उस पर लिखी इनग्रीडिएंट्स पर गौर कर लिया जाए. उत्पाद यदि डर्मेटोलौजिस्ट द्वारा अप्रूव्ड है, उस में सल्फैटिक ऐसिड और मिंट एजेंट हैं, तब ही उस उत्पाद को अपनी बेटी की त्वचा पर इस्तेमाल करें. जिन प्रोडक्ट्स में पैराबीन, पैथोलेट्स ट्रिक्लोसन, पर्कोलेट जैसे तत्त्व होते हैं उन्हें कभी बच्चे को इस्तेमाल न करने दें, क्योंकि ये त्वचा को ड्राई करते हैं और ऐक्ने की समस्या को बढ़ाते हैं.

फेयरनैस क्रीम का भ्रम

इस उम्र की लड़कियों में खासकर सांवली लड़कियों में फेयरनैस क्रीम का बहुत क्रेज होता है. बाजार में भी फेयरनैस क्रीम के इतने विकल्प मौजूद हैं कि किसी एक का चुनाव करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में आंख मूंद कर और ब्रैंड के भरोसे क्रीम खरीदना और उस के इस्तेमाल के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता. लेकिन इस संबंध में अवलीन की मानें तो स्किन कलर मैलानिन से बनता है. यह कुदरती होता है. हां, इसे निखारा जरूर जा सकता है. कोई भी क्रीम डस्की स्किन को फेयर नहीं बना सकती. यह सिर्फ कौस्मैटिक सर्जरी के द्वारा ही संभव है, जो इस उम्र की लड़कियों को तो बिलकुल नहीं करानी चाहिए. हां, त्वचा के रंग को निखारने के लिए मांओं को अपनी बेटियों पर ये टिप्स जरूर आजमाने चाहिए:

– धूप में निकलें या न निकलें दिन में रोज 3 बार चेहरे को साफ कर के सनस्क्रीन जरूर लगाएं. दरअसल, जब त्वचा सूर्य के संपर्क में आती है, तो उस में मैलानिन बनने लगता है, जिस से त्वचा की रंगत डल होती जाती है. सनस्क्रीन त्वचा के लिए सुरक्षाकवच का काम करता है. यह त्वचा में मैलानिन बनने से रोकता है. सुबह स्कूल जाते वक्त बेटी को सनस्क्रीन जरूर लगाने को कहें. यदि बेटी की त्वचा औयली है, तो उसे जैल बेस्ड सनस्क्रीन लगाने को कहें. ध्यान रखें कौस्मैटिक ब्रैंड्स का सनस्क्रीन लेने की जगह मैडिकेटिड सनस्क्रीन को बेटी के लिए चुनें. कौस्मेस्यूटिकल सनस्क्रीन लेने से बचें. जब बेटी घर आए तब भी उसे सनस्क्रीन लगाने को कहें, क्योंकि ट्यूबलाइट और बल्ब में भी अल्ट्रावायलेट किरणें होती हैं, जो त्वचा में मैलानिन बनाती हैं.

– अधिकतर मांएं बेटी की रंगत को निखारने के लिए अखबारों और टीवी पर आने वाले फेयरनैस क्रीम के विज्ञापनों से भ्रमित हो महंगीमहंगी क्रीमें खरीद तो लेती हैं, लेकिन उन का असर बेटी की त्वचा पर नहीं दिखता. अत:बारबार क्रीमें बदलने से बेहतर है कि जो भी क्रीम खरीदें उस के पैक पर लिखी इनग्रीडिएंट्स को पढ़ लें. दरअसल, ब्लीच एजेंट, हाइड्रोक्यानिक और कोजिक ऐसिड वाली फेयरनैस क्रीम लेने की जगह लाइकोरिस, नियासिनेमाइड और ऐलोवेरा युक्त फेयरनैस क्रीमें ही खरीदें. ये चेहरे की रंगत को एक लैवल फेयर कर देती हैं.

त्वचा के टैक्स्चर को पहचानें

इस उम्र की लगभग सभी लड़कियों को मासिकधर्म शुरू हो जाता है. इस से उन में हारमोनल बदलाव भी होते हैं, जिन का असर त्वचा पर भी पड़ता है.

साउथ दिल्ली स्थित द स्किन सैंटर के डर्मेटोलौजिस्ट डाक्टर वरुण कतियाल कहते हैं, ‘‘त्वचा का टैक्स्चर 4 तरह का होता है- औयली, नौर्मल, कौंबिनेशन और सैंसिटिव. यदि आप अपनी बेटी के स्किन टैक्स्चर को पहचानना चाहती हैं, तो सुबह जब वह सो कर उठे तो उस के चहरे के टी जोन और यू जोन पर एक टिशू पेपर लगाएं. देखें कि कहां ज्यादा औयल है. यदि टी और यू दोनों जोन पर औयल है, तो त्वचा औयली है, यदि टी पर औयल है और यू पर नहीं, तो त्वचा का टैक्स्चर कौंबिनेशन है.

‘‘बाजार में हर त्वचा के हिसाब से प्रोडक्ट उपलब्ध हैं. फिर भी हर प्रोडक्ट के पीछे लिखा होता है कि प्रोडक्ट कोमैडोजेनिक है या नौनकोमैडोजेनिक है. कभी भी बेटी को कोमैडोजेनिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करने दें, क्योंकि यह त्वचा के पोर्स ब्लौक कर देता है, जिस से मुंहासे होने का डर रहता है.’’

खुशबूदार उत्पाद हैं नुकसानदायक

इस उम्र के बच्चे रंग और खुशबू से बहुत प्रभावित होते हैं खासकर लड़कियां. उन्हें इस बात का भ्रम होता है कि रंग और खुशबू के असर से उन की त्वचा खूबसूरत हो जाएगी. लेकिन असल में यही नुकसानदायक होते हैं. एक मां ही अपनी बेटी को यह समझा सकती है कि यह उम्र सिर्फ त्वचा की ठीक तरह से सफाई करने की है न कि उसे आर्टिफिशियल लुक देने की.

इस बाबत एशियन इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल साइंस के कंसल्टैंट डर्मेटोलौजिस्ट डाक्टर अमित बांगिया कहते हैं, ‘‘बाजार में बहुत सारे उत्पाद आते हैं और उन पर लिखा होता है  कि यह उत्पाद ऐलोवेरा, रोजमैरी, जैसमिन या फिर कोकोनट युक्त है. साथ ही उन उत्पादों से वैसी ही खुशबू भी आ रही होती है. लेकिन असल में खुशबू वाले उत्पादों में केवल ऐसेंस और कैमिकल्स के अलावा कुछ नहीं होता है. इतना ही नहीं, ये फ्रैगरैंस वाले उत्पाद आप की बेटी के ऐस्ट्रोजन हारमोन को भी प्रभावित करते हैं, जिस से वह चिड़चिड़ी हो सकती है और उस का वजन भी बढ़ सकता है. त्वचा पर जो असर पड़ता है वह अलग. इसलिए बाजार में उपलब्ध और्गेनिक उत्पादों का ही इस्तेमाल बेटी की त्वचा पर करें.

Sunrise Pure : मटर पनीर का मसालेदार जायका

चाहे आप कढ़ाही पनीर बना रहे हों या फिर सिंपल आलूगोभी की सब्जी, एक सामग्री जो आप बिलकुल नहीं भूलते वह है गरम मसाला. इस के साथ ही जब भी आप कुङ्क्षकग कर रही होती हैं तो यह बात करना नहीं भूलतीं कि मेरी दादी या नानी की बनाई सब्जियों में जो जायका मिलता था वह अब नहीं आता. चलिए गरम मसाले के इस सफर में इस की मसालेदार बातों से रूबरू होते हैं.

सही संतुलन

गरम मसाले पहले घरों में खुद तैयार किए जाते थे. इन्हें बनाने की सामग्री जैसे दालचीनी, लौंग, इलायची, तेजपत्ता, कालीमिर्च और जायफल इत्यादि का सही संतुलन और मिश्रण ही इन का स्वाद जगाता था. फिर इस के बाद इन्हे कितनी मात्रा में किस डिश में इस्तेमाल करना है यह भी बहुत महत्त्वपूर्ण होता था. आज के दौर में न तो यह सब करने का समय है और न ही समझ. यों तो इंटरनेट पर गरम मसाला तैयार करने की ढेरों रैसिपी मिल जाएंगी लेकिन फिर भी आप को वह दादीनानी के स्वाद वाली कमी महसूस होती रहेगी.

सनराइज गरम मसाला

आप को दादीनानी के बनाए खाने की याद ताजा करनी है तो सनराइज का गरम मसाला आप के लिए क्यों सही है हम आप को बताते हैं. सनराइज गरम मसाला का पैकेट खोलते ही इस की खुशबू आप को इस की गुणवक्ता का एहसास कराती है. इस में इस्तेमाल किए गए अच्छी क्वालिटी के मसालों का सही मिश्रण जब आप की पनीर की सब्जी या फिर चना दाल में घुलमिल जाता है तब जगता है दादीनानी के हाथ का स्वाद. तो दादीनानी के हाथ का स्वाद हमेशा याद रखना है तो सनराइज गरम मसाले को अपनी किचन की मसाला रैक का हिस्सा हमेशा बनाए रखें.

मटर पनीर

  • 200 ग्राम पनीर टुकड़ों में कटा
  • 1 कप हरी मटर के दाने
  • 1 प्याज का पेस्ट
  • 2 टमाटर की प्यूरी
  • 2 हरीमिर्चें
  • 1 छोटा चम्मच अदरकलहसुन का पेस्ट
  • 1 छोटा चम्मच काजू का पेस्ट
  • 1/2 छोटा चम्मच जीरा
  • 1/2 चम्मच लालमिर्च पाउडर
  • 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर
  • 1/2 चम्मच सनराइज शाही गरममसाला
  • 1 छोटा चम्मच घनिया पाउडर
  • तेल या घी जरूरतानुसार
  • नमक स्वादानुसार.

विधि

  • कड़ाही में तेल गरम कर जीरा तडक़ाएं और फिर प्याज का पेस्ट मिला कर भूनें.
  • अब इस में अदरकलहसुन का पेस्ट मिला कर चलाते हुए भूनें.
  • टमाटर की प्यूरी भी मिला दें और तेल छोडऩे तक भूनें.
  • अब सभी मसाले मिला कर माध्यम आंच पर चलाते हुए भूनें.
  • इस मिश्रण में काजू का पेस्ट भी मिला दें और चलाते हुए भूनें ताकि पेस्ट चिपके नहीं.
  • अब मटर मिला कर आंच धीमी करें और ढक़ कर 2-3 मिनट तक पकाएं.
  • पनीर को आप हल्का सुनहरा फ्राई कर या फिर सादा भी डाल सकती हैं.
  • पनीर मिला कर 2 मिनट ढक़ कर और पकाएं.
  • धनियापत्ती से सजा कर परोसें.

‘जवाब भेजें कॉन्टेस्ट जीतें’

शाही गरम मसाला का इस्तेमाल करके आप और कौन सी डिश झटपट तैयार कर सकती है.
अपना जवाब हमें अपनी सेल्फी के साथ 98sxxxxxxx23 पर व्हाट्सएप करें. और grihshobhamagazine@delhipress.in पर मेल करें. चुने गए प्रतिभागियों के नाम फोटो के साथ प्रकाशित किए जाएंगे.

बर्फ पिघल गई- भाग 3: जब प्यार के बीच आ गई नफरत

अगले दिन गरिमा को कंपनी की नई ब्रांच में भेज दिया. बौस ने जतिन को भी मार्केटिंग देखने के लिए कह दिया. तनु आश्वस्त थी कि उस का विभाग भी जल्द ही बदलने वाला है.’’

‘‘तनु तुम रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में बहुत अच्छा काम कर रही हो. तुम्हारे दायरे को मैं बढ़ा रहा हूं, तुम्हारा पद वही रहेगा और तुम इसी औफिस में रहोगी.’’

बौस के कैबिन से निकल कर तनु ने राहत की सांस ली. गरिमा को बौस ने क्या

कह कर दूसरे औफिस जाने के लिए मना लिया, तनु नहीं समझ पा रही थी. उस का बेबी भी अभी छोटा था और गरिमा तो लंबे समय से कंपनी में ही थी. उस ने अपनी जौब की वजह से ही इसी शहर में शादी की थी.

‘‘तनु, कल तेरे पास आ रही हूं औफिस के बाद. बहुत दिन हो गए साथ में बैठ कर कौफी पीए हुए.’’

गरिमा के फोन पर तनु चहक उठी. शाम को दोनों बैठ कर कंपनी में हुए बदलावों के बारे में चर्चा कर रही थीं, ‘‘तू ने बौस को बताया नहीं कि दूसरा औफिस तेरे घर से दूर है और बच्चा भी अभी छोटा है.’’

गरिमा तनु के सवाल की जैसे प्रतीक्षा ही कर रही थी. बोली, ‘‘हां, मुझे लगा था लेकिन अब सब ठीक है. ऐक्चुअली वह औफिस बौस के भतीजे का है. उन्हें एक अनुभवी कर्मचारी की जरूरत थी जिस पर विश्वास किया जा सके. तुम्हें बौस भेजना नहीं चाहते थे तो मुझे जाना पड़ा.’’

तनु हैरान थी यह सुन कर, ‘‘तुम मुझे बोल सकती थी मैं चली जाती. मुझे कौन सा घर देखना है या बच्चे को संभालना है औफिस के बाद.’’

गरिमा बात को खत्म करते हुए बोली, ‘‘थोड़ा टाइम निकलने देते हैं. नहीं मैनेज हुआ तो बौस से बात कर लेंगे.’’

गरिमा कुछ सोच रही थी.

‘‘क्या बात है? किस सोच में हो?’’ तनु ने पूछा तो गरिमा ने बताया, ‘‘अपने बौस के बारे में सोच रही थी. बेचारे ने घर वालों की मरजी के बिना लव मैरिज की. उस का भयंकर ऐक्सीडैंट हुआ और घरवाली छोड़ कर चली गई. बेचारे के सिर में भी चोट आई थी. अभी तक इलाज चल रहा है. अपने पुराने बौस का भतीजा है उस को वापस सैटल करने के लिए नया औफिस बनाया है. पुराने स्टाफ को उस के साथ लगाया है.’’

तनु को अचानक  झटका लगा. उस ने अपने सिर को झटका, ‘‘नहीं ऐसा नहीं हो सकता है.’’ गरिमा कौफी खत्म कर चुकी थी, ‘‘सर में दर्द है क्या,’’ उस के सवाल पर तनु इतना ही बोल पाई, ‘‘नहीं, बस बुरा लगा तुम्हारे नए बौस के बारे में जान कर. कुछ मेरी जिंदगी से मिलताजुलता.’’

गरिमा जाने के लिए उठ गई. चलतेचलते बोली, ‘‘यार, मेरे मुंह से अचानक निकल गया. तेरे बारे में सोचा ही नहीं…’’

तनु ने आंखों में भर आए पानी को रोक कर कहा, ‘‘मैं, तुम्हारे बौस के जल्दी ठीक होने के लिए प्रार्थना करूंगी.’’

गरिमा के जाने के बाद एक ही प्रश्न तनु को कचोट रहा था कि कहीं रोहन का भी ऐक्सीडैंट तो नहीं हुआ था उस दिन. फोन पूरा दिन बंद था. गुस्से में अगले दिन मैं ने नंबर ब्लौक क्यों कर दिया था.

अब उसे लग रहा था कि कुछ छूट गया था जिसे वह पकड़ नहीं पाई थी. कुछ घट गया था जिसे वह जान नहीं पाई थी. तभी एक वीडियो ने उस के शक को सच में बदल दिया.

गरिमा ने अपने नए औफिस के दीवाली सैलिब्रेशन का वीडियो अपने फ्रैंड्स गु्रप में शेयर किया. हाथ में छड़ी ले कर लंगड़ाते हुए रोहन को चलते देख कर तनु फूटफूट कर रोई. नफरत की बर्फ आंसुओं से पिघल गई. सारा ऐटीट्यूड बदल गया उस प्यार में जो शादी से पहले तनु रोहन से किया करती थी.

तनु रोहन के औफिस में मिलने गई, ‘‘मेरी गलती के लिए मुझे माफ कर दो रोहन. मैं तुम से इतनी नफरत करने लगी थी कि ऐसा भी कुछ हो सकता है सोच ही नहीं पाई.’’

‘‘मेरी भी गलती कम नहीं है तनु. मैं ने भी तुम्हारे जाने के बाद तुम से संपर्क नहीं किया. उस दिन ऐक्सीडैंट के बाद बच गया, लेकिन तुम्हें फोन नहीं किया.’’

‘‘तुम्हारा फोन तो ऐक्सीडैंट में टूट गया था पर मैं ने तो तुम्हारा नंबर ही ब्लौक कर दिया था. पता नहीं क्या हो गया था मुझे,’’ तनु सबकुछ कह देना चाहती थी. दोनों हाथों में अपना मुंह छिपा कर आमनेसामने बैठे थे.

‘‘अब गिलेशिकवे हो गए हों तो हमें भी थोड़ा सा थैंक्स दे दो. पिछले 6 महीनों से हम लोग तुम दोनों को सामने लाने के लिए नौकरी कर रहे थे,’’ जतिन और गरिमा एकसाथ बोले.

‘‘भाभी मैं ने पापा को आप से हुई बात बताई तो उन्होंने ही मु?ो चुप रहने को कहा था.’’

तनु ने पीछे मुड़ कर देखा तो रोहन की बहन और तनु के बौस खड़े थे.

‘‘ओह सर, मुझे पता ही नहीं था कि आप रोहन के अंकल हैं. मु?ो माफ कर दीजिए,’’ तनु ने हाथ जोड़ कर आंखें बंद कर लीं.

‘‘बेटी तुम्हारी कोई गलती नहीं थी. वह समय ही ऐसा था कि तुम दोनों ही एकदूसरे को नुकसान पहुंचा रहे थे.’’

तनु और रोहन ने एकदूसरे की आंखों में देखा, ‘‘काश, नफरत प्यार पर हावी नहीं होती तो जिंदगी कुछ और ही होती,’’ यही आवाज दोनों के दिल से आ रही थी.

होम स्टे में रुकते समय क्या करें क्या नहीं

कुछ समय पूर्व ही उज्जैन निवासी सीमा का नया घर बनकर तैयार हुआ.. अभी उसे शिफ्ट हुए 2 वर्ष ही हुए थे कि पति का ट्रांसफर दूसरे शहर में हो गया. जब दूसरे शहर में उसे किराए पर वैल फर्निश्ड घर मिल गया तो उसने उज्जैन स्थित अपने घर में थोड़े से चेंजेज करवाये और होम स्टे के रूप में उज्जैन में आने वाले पर्यटकों को देने का फैसला किया. कुछ समय तक तो सब ठीक था परन्तु एक बार जब एक परिवार के जाने के बाद वह घर में गयी तो घर की दुर्दशा देखकर उसकी आंखों में आसूं ही आ गए और उस दिन से उसने अपने घर को होम स्टे में देने के बजाए ताला लगाना ही उचित समझा. क्योंकि घर की दीवारों और बेड के सिरहाने पर लगे कपड़े  को बच्चों ने भांति भांति के रंगों से रंग दिया था, बाथरूम के जेट को तोड़ दिया गया था यही नहीं घर के कामगारों से भी उस परिवार ने बुरा व्यवहार किया था.

बच्चों की परीक्षाएं अब लगभग समाप्ति की ओर हैं , अथवा समाप्त हो चुकीं हैं और बच्चों की परीक्षा समाप्त होते ही अभिभावक घूमने जाने का प्लान बनाना प्रारम्भ कर देते हैं. घूमने कहीं भी जाना हो सबसे मुख्य प्रश्न होता है वहां रुकने का. कुछ वर्षों पूर्व तक रुकने के लिए आमतौर पर होटल, मोटल और रिजॉर्ट को ही जाना जाता था परन्तु 2020 में कोरोना के आगमन के बाद से पर्यटन के दौरान होम स्टे को बहुत पसन्द किया जा रहा है.

क्या है होम स्टे

होटल में जहां आपके साथ होटल के स्टाफ के द्वारा एक मेहमान की भांति व्यवहार किया जाता है वहीं होम स्टे में आप किसी परिवार में एक सदस्य की भांति निवास करते हैं, जिसमें आपको रहने, खाने और मनोरंजन की सुविधा प्रदान करने के लिए शुल्क भी लिया भी जाता है. इसके अतिरिक्त कई बार मकान मालिक अपने पूरी तरह फर्निश्ड घर को समस्त सुविधाओं के साथ सशुल्क पर्यटकों को सौंप देते हैं. जिसमें पर्यटक अपनी

सुविधानुसार खाना बनाने से लेकर अन्य समस्त कार्य  भी अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं. यहां पर उन्हें घर जैसा वातावरण उपलब्ध कराया जाता है. आजकल छोटे से छोटे और बड़े से बड़े पर्यटक स्थल पर भांति भांति के होम स्टे मौजूद हैं जिन्हें आप अपनी जेब के अनुसार आसानी से चुन सकते हैं.

यह सही है कि अन्य विकल्पों की तुलना में होम स्टे आज किसी भी पर्यटक स्थल पर रुकने के लिए बहुत अच्छा विकल्प है क्योंकि यहां पर घर जैसा अहसास, आजादी और आराम होता है परंतु कई बार होम स्टे में प्रवास के दौरान नेटवर्क या मनचाहा भोजन न मिलने जैसे अनेकों परेशानियां भी आतीं हैं ऐसे में आपके सामने क्या करें, क्या न करें की अजीब सी दुविधा होती है तो आइए देखते हैं कि ऐसी परिस्थिति में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं-

क्या करें

  • आप चाहे होम स्टे में परिवार के सदस्य की भांति रहें या स्वतंत्र रूप से रहें घर में प्रवेश करते ही वहां की समस्त व्यवस्था पर एक नजर डालें और छोड़ते समय उसी रूप में छोड़ें. साथ ही निवास के दौरान उस घर की व्यवस्था का पालन करने का प्रयास करें.
  • सीमा और उसकी 3 दोस्त अपने परिवार के साथ मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध मांडू भ्रमण के दौरान एक ऐसे होम स्टे में रुके जिसके मालिक एक बुजुर्ग दंपति थे…मौज मस्ती के दौरान जब रात को 1 बजे वे तेज म्यूजिक में डांस कर रहे थे तो बुजुर्ग दंपत्ति ने इस पर आपत्ति जताई..सीमा कहती है “उनकी बात सही थी पर हम तो मस्ती ही करने आये हैं” अगले दिन उसने उस दम्पती को बेहद शांत होकर अपनी परेशानी बताई इस पर आगे से उस दंपत्ति ने अपने ऐसे कमरे में सोना सुनिश्चित किया जिसमें आवाज नहीं आती थी.  यदि आप भी होम स्टे के दौरान किसी परेशानी से जूझ रहे हैं तो सयंमित भाषा शैली का प्रयोग करते हुए मालिक को अपनी परेशानी बताएं.
  • हर होम स्टे की भी होटल की ही भांति अपनी टर्म्स और कंडीशन्स होतीं हैं इसलिए बुकिंग करने से पहले सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ लें, फिर यदि अपने प्रवास के दौरान उसके अनुसार कोई बात या सुविधा न मिले तो मालिक से उसे उपलब्ध कराने को कहें.
  • प्रवास के प्रथम दिन ही आप भोजन में अपनी पसन्द नापसंद उन्हें बता दें ताकि वे भोजन तैयार करते समय आपकी पसन्द का ध्यान रखें और यदि किसी बात से आप असंतुष्ट हैं तो उस बारे में उनसे खुलकर बात करें.
  • आप जिस स्थान पर भ्रमण के लिए जा रहे हैं उस स्थान का सम्मान करें क्योंकि आप जहां घूमने जा रहे हैं उस स्थान का पर्यटन अनेकों लोगों की रोजी रोटी का काऱण होता है. गोआ, सभी नेशनल पार्क जैसे अनेकों ऐसे स्थान हैं जहां के निवासियों की जीविका का एकमात्र साधन पर्यटन ही है.
  • होम स्टे में अपने प्रवास के दौरान आप उस स्थान की संस्कृति, पहनावा, खानपान आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

क्या न करें

  • यदि आप किसी परिवार के साथ रह रहे हैं तो अनावश्यक रूप से उस परिवार के अंदर तक घुसने का प्रयास न करें और न ही बात बात में दखलंदाजी करे ध्यान रखें कि आप सिर्फ उस परिवार में चंद दिन के मेहमान हैं मालिक नहीं.
  • आपकी सुविधा के लिए उपलब्ध कराए गए नौकर चाकरों से किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार करने की जगह सहज और सरल व्यवहार करें किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर चीखने चिल्लाने की जगह अपनी बात को सभ्यता पूर्वक कहें.
  • प्रयोग करने के बाद घर के समस्त सामान को यथास्थान रखें ताकि आपके बाद आने वाला पर्यटक भी उसे प्रयोग कर सके.
  • बाथरूम में आपको उपलब्ध कराए गए शैम्पू, साबुन, टॉवेल आदि को अपने साथ ले जाने की ग़ल्ती कदापि न करें.
  • यदि आप स्वतंत्र घर में रह रहे हैं तो घर छोड़ते समय बेड की चादर, तकिए, आदि को व्यवस्थित करके ब्लेंकेट और रजाई को फोल्ड करके रखें साथ ही घर छोड़ते समय पूरे घर को अच्छी तरह चैक करें कि समस्त लाइट्स, पंखे और नल बंद हों.
  • किचिन में चाय नाश्ता-खाना आदि बनाने के बाद किचिन को व्यवस्थित कर दें और जूठे बर्तनों को साफ करके रखें.
  • चलते समय यदि आपसे रिव्यू लिखने के लिए कहा जाए तो लिखने के लिए विनम्र भाषा शैली का प्रयोग करें.

रखें इन बातों का भी ध्यान

  • होम स्टे को बुक करने से पूर्व अच्छी तरह रिसर्च करें आजकल सोशल मीडिया का जमाना है आप सम्बंधित स्थान के बारे में रिव्यू पढ़कर ही बुकिंग करें.
  • बुक करने से पहले फोन पर क्या क्या सुविधाएं मिलेंगी क्या नहीं इसके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें.
  • यदि आपके साथ छोटे बच्चे हैं तो उनके लिए कुछ खाद्य वस्तुएं अवश्य अपने साथ ले जाएं क्योंकि उन्हें पूरे दिन कुछ कुछ खाने को चाहिए होता है.
  • होम स्टे के दौरान यदि आप किसी परिवार का हिस्सा बनने जा रहे हैं तो उसे अपनी पसन्द नापसंद के बारे में पहले से ही बता दें.
  • अपने प्रवास के दौरान यदि आप स्वयं कुकिंग करना चाहते हैं तो अपनी आवश्यकताओं से मालिक को अवगत करायें.
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