Welcome 2023: नए साल का वेलकम करें इन 12 देसी लुक के साथ

नये साल में हर कोई भीड़ से अलग अपने अंदाज में सजना पसंद करता है. नए साल के जश्न को मनाने के लिए वेस्टर्न आउटफिट पहनना जरुरी नहीं. असल में कुछ लोगों को लगता है कि इंडियन आउटफिट उन्हें बोरिंग और देसी टाइप फील कराती है, लेकिन अगर आपने इंडियन आउटफिट को अच्छी तरह से कैरी किया है, तो सबकी नजर आपके परिधान से हटाना मुश्किल है. इस बारें में अविश्य डौट कौम के हैंडलूम एक्सपर्ट जवाहर सिंह बताते है कि वो दिन गए जब साड़ी को इंडियन ट्रेडिशनल ड्रेस में गिना जाता था. समय के साथ-साथ उसके पहनने के तरीके, स्टाइल,रंग और उसके मेकिंग में डिजाइनरों ने काफी परिवर्तन किया है. साड़ी को कई अलग अंदाज में भी पहना जा सकता है, यह आपको देसी दिवा का लुक दे सकती है.

 1. घाघरा के साथ लेयर

घाघरा के ऊपर साड़ी की एक लेयर बनाकर पहनने से ये फैंसी फ्यूजन साड़ी लुक नए साल के लिए बहुत ही आकर्षक लगती है. इसके लिए आप सिर्फ एक घाघरा ट्रंक से निकाले या खरीद लें. साड़ी को पल्लू के रूप में कमर के चारों तरफ से घुमाकर एडजस्ट करें और पिन से सेट कर लें.

2. इंडो वेस्टर्न धोती पेंट स्टाइल

इसे बोहेमियन ट्विस्ट के साथ अलग लुक दिया जा सकता है. इस स्टाइल को कैरी करना बहुत आसान होता है, इसके लिए मौडर्न लुक की एक साड़ी, धोती पैंट और एक क्रौप टाप की जरुरत होती है, साड़ी को धोती पैंट के इर्द-गिर्द घुमाकर सेंटर में लायें और प्लीट्स बनाकर अच्छी तरह से खोस लें, अधिक आकर्षक बनांने के लिए एक पतली बेल्ट कमर के चारों ओर बाँध लें.

3. पहने स्ट्रक्चर्ड ड्रेस

अगर आप पूरी तरह से एथनिक वियर नहीं पहनना चाहते है तो निराश होने की कोई जरुरत नहीं, बाजार में कुछ ऐसे बने बनाये डिजाइनर ड्रेस मिल जाते है जिसे आप आसानी से पहन सकती है. इसे अलग लुक देने के लिए फिटेड पैंट्स और हाफ साड़ी का सहारा ले सकती है, इसके अलावा मेटेलिक बेल्ट की सहायता से इसे एक्स्ट्रा स्टाइलिस्ट बना सकती है.

4. क्रौप टाप स्टाइल अपनाए

क्रौप टाप आजकल बहुत प्रसिद्ध है,साड़ी के साथ हैवी ब्लाउज पहनने का रिवाज अब कम हो चुका है,ऐसे में क्रौप टाप ट्विस्ट के साथ साड़ी पहनने से ड्रेस का लुक पूरी तरह से बदल जाता है, ब्लैक कलर की क्रौप टाप हर साड़ी के साथ अलग-अलग ढंग से पहना जा सकता है, इसके साथ कम से कम एक्सेसरीज का उपयोग करें.

5. दे अलग अंदाज नेहरु जैकेट के साथ

नेहरु जैकेट हर तरह के परिधान के साथ जैसे कि वेस्टर्न हो या इंडियन हर किसी के साथ नया लुक देती है. इसे साड़ी पहनने के बाद में या पहले किसी भी तरह से पहन सकती है, जाड़े के मौसम में इस स्टाइल को अपनाना अधिक उपयोगी होता है, अगर आप नेहरु जैकेट नहीं पहनना चाहती हैं तो कौलर वाले किसी शर्ट को भी पहनकर एक अलग लुक दे सकती है.

6. स्किनी जीन्स साड़ी ड्रेप

अगर आप कुछ अलग तरह की करना चाहती है तो अपने स्किनी जींस के साथ कंट्रास्ट साड़ी ले और जींस के उपर ड्रैप करें.

7. बेल्ट स्टाइल

नार्मल तरीके से साड़ी पहनने के बाद इसके उपर कमरबंद या बेल्ट का प्रयोग कर नया लुक दें.

8. नैक ड्रैप स्टाइल

इसके लिए साड़ी के पल्लू को गर्दन के चारो तरफ स्कार्फ के रूप में लपेट लें,ऐसी परिधान सर्दी के मौसम में काफी लाभदायक होता है, इस स्टाइल के लिए पल्लू को थोडा लम्बा रखना पड़ता है,इसके अलावा इस स्टाइल में स्कार्फ का भी प्रयोग किया जा सकता है.

9. मुमताज स्टाइल

ये स्टाइल रेट्रो जमाने का है,जिसमें अभिनेत्री मुमताज की फिल्म ‘राम और श्याम’ की साड़ी स्टाइल को कौपी किया जाता है,इसमें साड़ी के कई लेयर्स बनाकर अलग लुक दिया जाता है,ये देखने में आकर्षक होने के साथ-साथ ग्लैमरस भी होती है.

10. फ्रंट पल्लू स्टाइल

इसमें पल्लू को लेफ्ट में लेने के बजाय पीछे से लेकर राईट कंधे पर लिया जाता है.

11. मरमेड स्टाइल

इसमें लोअर पार्ट में प्लीट्स अधिक दिया जाता है, जिसका लुक मरमेड की पूंछ की तरह होता है,इसे पहनना कठिन है,पर अधिक टक्स और प्लीट्स के द्वारा इसे पहना जा सकता है.

12. पैंट स्टाइल

ये आसान,आरामदायक और अधिक फैशनेबल पहनावा नए साल के लिए अधिक उपयुक्त होता है,इसे कोई भी आसानी से कैरी कर सकता है.

Welcome 2023: नए साल पर लें नए संकल्प, जो समाज को भी कुछ दे सकें

नए साल का मतलब केवल पार्टी, धूमधड़ाका और कैलेंडर बदलना भर नहीं होता. नए साल से नई शुरुआत होती है. जीवन समय की गणना नए साल से होती है. नए साल में ही जन्मदिन आता है. नए साल के अवसर पर पार्टी, धूमधड़ाका और शुभकामनाओं की शुरुआत के साथ हम कुछ न कुछ ऐसा संकल्प लें जो केवल हमारे भविष्य के लिए ही अच्छा न हो, बल्कि हम समाज को कुछ अलग दे भी सकें.

देश में युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है. दुनियाभर की बात करें तो सब से अधिक युवा हमारे देश में हैं. यह संख्या लगातार बढ़ रही है. युवा देश की सब से बड़ी ताकत हैं. इस के बाद भी युवाओं की ऊर्जा का सही प्रयोग नहीं किया जा रहा है. ऐसे में जरूरी है कि युवाओं को खुद अपना रास्ता तय करना चाहिए. नए संकल्प से युवा एक बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं.

आज के दौर में युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर बदल रहे हैं. केवल पढ़ाई कर के सरकारी नौकरी के बल पर आगे बढ़ने का साधन सीमित रह गया है. युवाओं की मुख्य परेशानी यह है कि वे खुद को काबिल नहीं बनाना चाहते. वे जल्दी से जल्दी नौकरी हासिल कर के अपने सुखद भविष्य का सपना देखते रहते हैं.

हाल के कुछ सालों को देखें तो युवाओं में नौकरियों के लिए चाहत बढ़ रही है. इस कारण ही वे आरक्षण का विरोध, नौकरियों के लिए धरनाप्रदर्शन, सबकुछ करने को तैयार रहते हैं. नौकरियों की चाहत के चलते युवाओं को तरहतरह के शोषण का शिकार होना पड़ता है. ऐसे में अगर युवा अपने कैरियर की दिशा पहले से ही तय कर लें तो बेहतर रहता है. नए साल के संकल्प ऐसे में बहुत काम के होंगे.

  1. कैरियर से समाज का भला करना

निफ्ट यानी नैशनल इंस्टिट्यूट औफ फैशन टैक्नोलौजी से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही आशा दीक्षित कहती हैं कि आज के समय में फैशन डिजाइनिंग की डिमांड बहुत बढ़ रही है. नौकरियों से अलग लोग अपने ब्रैंड शुरू कर रहे हैं. इस के जरिए युवा अपने कैरियर को जल्द ही एक पहचान दिला पा रहे हैं. हम केवल खुद का नाम ही नहीं रोशन कर रहे, तमाम लोगों को नौकरियां भी दे रहे हैं. नए फैशन ब्रैंड का ही प्रभाव है कि आज के समय में बड़ेबड़े फैशन ब्रैंड तक बजट के अंदर अपने डिजाइन सैल करने को मजबूर हो रहे हैं. पहले यही डिजाइनर केवल बड़े फिल्मस्टार और बिजनैस सैलिब्रिटी के लिए ही कपड़े डिजाइन करते थे. तब इन की कीमत भी बहुत होती थी. युवा डिजाइनरों के आने से आज यह बदलाव हुआ है कि कम बजट में भी लोग डिजाइनर वियर पहन रहे हैं. एक डिजाइनर के रूप में उन का संकल्प है कि वे छोटेबड़े हर बजट के डिजाइन तैयार करें.

आशा दीक्षित आगे कहती हैं, ‘‘आज के युवा पहले से अधिक सामाजिक होते जा रहे हैं. वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझ रहे हैं. पढ़ाई के साथ उन का प्रयास होता है कि वे दूसरे बच्चों को भी शिक्षा दे सकें. मैं भी ऐसे लोगों को खासकर अपनी उम्र के लड़केलड़कियों को फैशन का मतलब समझाना चाहती हूं जिस से कि वे भी नए दौर के साथ खुद को अपडेट रख सकें. शिक्षा के जरिए ही युवाओं को अपडेट रखना चाहती हूं.

‘‘मेरा प्रयास यह होगा कि मैं अपनी पहचान से अपने परिवार को गर्व करने लायक कुछ दे सकूं. मेरे परिवार में लड़कालड़की का कोई भेदभाव नहीं है. यही मैं हर घर में होते देखना चाहती हूं. बच्चे पेरैंट्स के साथ अपने ग्रैंड पेरैंट्स को भी महत्त्व दें, उन के साथ सामंजस्य बना कर रखें, यह संकल्प नए साल में हमें लेना है. इस से बच्चों को ग्रैंड पेरैंट्स के अनुभवों का लाभ मिल सकता है. ग्रैंड पेरैंट्स को भी खालीपन नहीं लगेगा. उन के अनुभव और युवाओं की सोच नई राह दिखा सकते हैं.’’

2. लोगों को जागरूक करना

मौडलिंग के क्षेत्र में अपना कैरियर संवार रही संजना मिश्रा कहती हैं, ‘‘मौडलिंग और ऐक्ंिटग के क्षेत्र में कदम रखने से पहले मैं ने यह सोच लिया कि मुझे क्या करना है और क्या नहीं? यह मैं ने अपने बायोडाटा पर साफ लिख भी दिया है. आमतौर पर इस फील्ड में आने वाली लड़कियों में इस बात को ले कर कंफ्यूजन रहता है कि वे क्या करें और क्या न करें? इस का लाभ दूसरे लोग उठा कर बरगलाते हैं.’’ संजना साल 2015 में मिस यूपी रनरअप, मिस मौडल 2016 विनर रही हैं. ब्यूटीफुल स्माइल और ‘चार्मिंग फेस’ जैसे अवार्ड भी हासिल किए. इस के बाद प्रिंट शूट और रैंप शो भी किए. कई कार्यक्रमों में ऐंकर की भूमिका निभा चुकी संजना अपने नए साल के संकल्प को ले कर कहती है कि उन्हें अपने काम पर फोकस करना है जिस गति से उन्होंने अपने काम को आगे बढ़ाया है उसे और आगे ले जाना है.

संजना कहती हैं, ‘‘मैं अपने क्षेत्र में काम करने वाली लड़कियों को जागरूक करना चाहती हूं ताकि वे पूरी तैयारी के साथ यहां आएं. फैशन की दुनिया में खराबी नहीं है. यहां आने वाले को तय करना होता है कि वह अपनी मेहनत से आगे बढ़ना चाहता है या शौर्टकट रास्ते से. शौर्टकट रास्ते में शुरुआती सफलता दिखती है पर यह चमक चार दिन की होती है. कई बार इस में उलझ कर लोग सबकुछ खत्म कर बैठते हैं. ऐसे में अपनी मेहनत से आगे बढ़ें, यही सब से मजबूत रास्ता होता है.

‘‘आज के समय में फैशन का क्षेत्र बहुत बढ़ा हुआ है. फिल्मों में वैब सीरीज का चलन बढ़ा है. टीवी में ऐक्ंिटग की जरूरतें बढ़ी हैं. रैंप शो और डिजाइनर शूट बढ़ गए हैं. ऐसे में, यह कैरियर पहचान और पैसा दोनों दिलाने में सक्षम है.’’

3. अलग पहचान बनाने का संकल्प

फैशन के क्षेत्र में ही कैरियर बना चुकी साक्षी शिवानंद कहती हैं, ‘‘मैं पढ़ाई और ऐक्टिंग एकसाथ करना चाहती हूं. मेरा फोकस फैशन शो के अलावा ऐक्ंिटग पर है. मेरा संकल्प है कि मैं अपने कैरियर में ऐक्टिंग को आगे बढ़ाऊं. छोटे शहरों में फैशन फील्ड को ले कर रूढि़वादी सोच हावी रहती है. हमें इस से बाहर निकलना है. तभी हम कुछ नया सोच सकते हैं. छोटे शहरों की लड़कियां भी किसी से पीछे नहीं हैं, यह साबित करने का संकल्प इस साल लेना है. मैं छोटे शहरों की लड़कियों को मैसेज देना चाहती हूं कि जब वे फैशन के फील्ड में आएं तो सारे हालात को समझ कर आएं. जिस से उन के सामने असहज हालात न बनें. लड़कियों के साथ उन के पेरैंट्स को भी यह समझ लेना चाहिए. अगर पेरैंट्स समझ लेंगे तो वे अपने बच्चों के सही फैसलों में साथ खड़े होंगे और गलत फैसलों में उन को राह दिखाएंगे.’’

अंशिका वर्मा शेफ बनना चाहती हैं. वे कहती हैं, ‘‘मेरा संकल्प है कि इस साल हर माह में एक नई डिश पर काम करूं और उस को नए रूप में सामने लाऊं. आज के समय में लड़कियों के सामने कई अवसर मौजूद हैं. वे खुद की पहचान बना सकती हैं. पेरैंट्स भी आजकल जागरूक हैं. वे बच्चों की उम्मीदों  का खयाल रखते हुए उन को सहयोग करते हैं. ऐसे में बच्चों की भी जिम्मेदारी है कि  वे पेरैंट्स की उम्मीदों को तोड़ें नहीं. किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए मेहनत के साथ नए इनोवेशन की जरूरत होती है. ऐसे में युवाओं का ज्ञान बढ़ाना चाहिए. आज के समय में युवाओं में सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ गया है. सोशल मीडिया का अपना एक दायरा है. यह सूचना क्रांति का दौर है. सोशल मीडिया का प्रयोग सूचनाओं के आदानप्रदान तक ठीक है. नए प्रयोगों, जानकारियों और विचारों के लिए पढ़ना व समझना जरूरी होता है, तभी आगे बढ़ा जा सकता है.’’

अंशिका आगे कहती है, ‘‘नए साल में हमारा संकल्प है कि हम अपने विचारों के आदानप्रदान के लिए पढ़ना शुरू करें. किसी भी विषय में बिना तर्क के उस का अनुसरण नहीं करना चाहिए. सोशल मीडिया तर्क से बचता है और अफवाहों को फैलाता है, ऐसे में अपने तर्कसंगत विचारों के साथ किसी घटना को हम समझेंगे तो अफवाहों के दौर से बाहर निकल सकेंगे.’’

यह सच है कि आज हर कोई युवाओं को केवल सोशल मीडिया के प्रचार से भरमाना चाहता है. ऐसे में जरूरी है कि युवा अफवाहों से बचें और तर्कसंगत विचारों के साथ आगे बढ़ें.

Welcome 2023: नए साल में मंडे ब्लूज से बचने के लिए अपनाएं ये 7 मेकअप रूल्स

रविवार के बाद आने वाला सोमवार अपने साथ सुस्ती, अरुचि, नीरसता जैसे कितने ही भाव ले कर आता है. इस का असर चेहरे पर साफ नजर आता है. नतीजतन खिला और निखरा चेहरा भी डल और मुरझाया दिखता है.

मंडे ब्लूज के इस इफैक्ट को कम करने के लिए आजमाइए मेकअप के न्यू रूल्स ताकि मंडे को भी आप का चेहरा तरोताजा नजर आए और आप न्यू मेकअप लुक के साथ औफिस जाने के लिए बेताब हो जाएं.

  1. आईकैची आईलाइनर

फुल मेकअप करने के बजाय आईलाइनर पर फोकस करें. इस के लिए जैट ब्लैक, डार्क ब्राउन या रौयल ब्लू शेड का आईलाइनर चुनें. अब आउटफिट से मेल खाता (ब्लैक, ब्राउन, ब्लू में से कोई एक) आईलाइनर आंखों की सिर्फ ऊपरी आईलिड पर थोड़ा चौड़ा लगाएं ताकि यह उभर कर नजर आए.

इसे और भी आकर्षक बनाने के लिए आईलाइनर के पिछले छोर को ऊपर की तरफ ले जा कर छोड़ दें. इसी तरह फिश स्टाइल आईलाइनर से भी आंखों को अट्रैक्टिव इफैक्ट दे सकती हैं. इस के लिए आंखों की ऊपरी आईलिड पर थिक आईलाइनर लगाएं और इन के छोर को ऊपर की तरफ ले जाएं.

अब निचली आई लिड के ठीक बीच से आईलाइनर लगाना शुरू करें और इसे छोर पर ले जा कर नीचे की तरफ मोड़ दें. इस आई मेकअप के साथ आईशैडो, मसकारा और डार्क लिपस्टिक लगाने से बचें वरना लुक गौडी नजर आ सकता है.

2. आईकैंडी आईशैडो

आईलाइनर के बजाय आईशैडो का इफैक्ट भी मंडे ब्लूज की डलनैस को कम कर सकता है, लेकिन तब जब आप सही आईशैडो के शेड के साथ उसे अप्लाई करने का भी सही तरीका अपनाएंगी. आईशैडो के लिए शैंपेन, ब्रौंज या व्हाइट शेड का चुनाव करें. इन दिनों ये तीनों ही शेड्स फैशन में हैं.

आईकैंडी लुक के लिए शैंपेन शेड का आईशैडो पलकों पर अप्लाई करें. अगर व्हाइट कलर का आईशैडो यूज करना चाहती हैं तो पूरी पलकों पर आईशैडो लगाने के बजाय ब्रश की सहायता से सिर्फ आंखों के दोनों पिछले छोरों पर लगाएं.

इस से आप की आंखों को व्हाइट इफैक्ट मिलेगा. इसी तरह ब्रौंज शेड आईशैडो को भी सिर्फ आंखों की पिछले छोरों पर ऊपर की तरह कोना निकालते हुए लगाएं. इस से आप की आंखें और भी आकर्षक नजर आएंगी. इस के बाद आईलाइनर, मसकारा या बोल्ड लिपस्टिक न लगाएं वरना लुक बिगड़ सकता है.

3. मसकारा मैजिक

अगर आप मिनिमल आई मेकअप करना चाहती हैं, तो आईशैडो और आईलाइनर के बजाय आई मेकअप के लिए सिर्फ मसकारे का इस्तेमाल करें. जी हां, आकर्षक लुक के लिए मसकारा भी काफी है. इस के लिए ब्लैक, ब्राउन, ब्लू या फिर ट्रांसपैरेंट शेड का मसकारा खरीद सकती हैं. आंखों के ऊपरी आईलैशेज पर मसकारा लगाते वक्त उन्हें ऊपर की तरफ कर्ल करें और निचली आईलैशेज पर मसकारा लगा कर नीचे की तरफ कर्ल करें.

इससे आप की पलकें घनी और आंखें आकर्षक नजर आएंगी. अगर आप की नैचुरल आईलैशेज की ग्रोथ बहुत कम है, तो आर्टिफिशियल आईलैशेज लगा कर भी मसकारा लगा सकती हैं. इस से लोगों की निगाहें आप की आंखों पर टिकी रहेंगी. मसकारे के साथ न्यूड शेड की लिपस्टिक आप को आकर्षक लुक देगी.

4. बोल्ड लिप कलर

आप चाहें तो आई मेकअप के बजाय लिप मेकअप को भी हाईलाइट कर सकती हैं. बोल्ड लुक के लिए ब्राइट शेड की लिपस्टिक चुनें जैसे ब्राइट औरेंज, ब्राइट पिंक, हौट रैड, मजैंटा आदि. ये शेड्स काफी अट्रैक्टिव नजर आते हैं.

परफैक्ट लिप मेकअप के लिए पहले होंठों पर मौइश्चराइजर लगाएं, फिर लिपलाइनर से आउटलाइन दें और फिर लिपस्टिक लगा लें. ग्लौसी के बजाय मैट टैक्स्चर वाली लिपस्टिक खरीदें. यह काफी स्टाइलिश नजर आती है.

यह जरूरी नहीं कि आप सिर्फ डार्क ऐंड बोल्ड शेड की लिपस्टिक लगा कर ही अपने लिप्स को हाईलाइट करें. लिपस्टिक के न्यूड शेड भी आप को सैक्सी लुक दे सकते हैं. इन्हें भी जरूर ट्राई करें.

5. लिक्विड फाउंडेशन

वीकैंड की थकावट के बाद त्वचा रूखी और मुरझाई सी नजर आती है. ऐसे में बेस मेकअप के लिए त्वचा पर पाउडर फाउंडेशन लगाने की भूल न करें वरना इस से आप का चेहरा और भी रूखा और पैची नजर आ सकता है.

फ्रैश लुक के लिए लिक्विड फाउंडेशन का चुनाव करें. यह चेहरे पर बहुत जल्दी और अच्छी तरह सैट हो जाता है और लंबे समय तक टिका भी रहता है.

6. ब्यूटीफुल ब्लशर

अगर आप आई और लिप मेकअप दोनों नहीं कर रही हैं, तो चीक मेकअप से भी आकर्षक लुक पा सकती हैं. चीक मेकअप को हाईलाइट करने के लिए पीच, पिंक, रोज, कोरल शेड का ब्लश औन खरीदें. लेकिन पाउडर के बजाय क्रीम बेस्ड ब्लशर लगाएं.

इस का इफैक्ट काफी फ्रैश नजर आता है, जबकि पाउडर ब्लशर से त्वचा रूखी नजर आती है. लेकिन ध्यान रहे अगर आप ब्लशर लगा रही हैं, तो डार्क लिपस्टिक और हैवी आईलाइनर न लगाएं.

7. स्मार्ट आइडियाज

मंडे ब्लूज से बचने के लिए सप्ताह की शुरुआत हौट और स्टाइलिश आउटफिट से करें जैसे वी नैक टौप, मिनी स्कर्ट, स्लीवलैस कुरती, स्किनी जींस आदि.

हैवी इयररिंग्स, लौंग नैकपीस, बिग रिंग और कफ में से किसी एक ज्वैलरी को अपना स्टाइल स्टेटमैंट बनाएं और मंडे ब्लूज को बीट करें.

फौर्मल फुटवियर के बजाय मंडे को हाई हील के सैक्सी सैंडल पहनें या फिर वैजेस भी ट्राई कर सकती हैं.

कोई भी स्टाललिश हेयरस्टाइल ले कर भी आप मंडे ब्लूज को मात दे सकती हैं जैसे हाई पोनी, हाई बन आदि.

रैग्यूलर लैदर या लैपटौप बैग के बजाय स्टाइलिश और ट्रैंडी हैंड बैग कैरी करें. मंडे ब्लूज खुदबखुद छूमंतर हो जाएगा.

आउटफिट से ले कर कोईर् भी न्यू ऐक्सैसरीज मंडे को पहनें. इस से औफिस जाने के लिए आप खुद ऐक्साइटेड रहेंगी.

Welcome 2023: नए साल में ग्रैंड पेरैंट्स के साथ ग्रैंड पार्टी

नए साल का आरंभ आपसी रिश्तों को सुधारने का सब से अच्छा समय साबित हो सकता है. पुरानी पीढ़ी के पास अनुभव की कमी नहीं होती और नई पीढ़ी के पास ऊर्जा भरपूर होती है. अगर अनुभव और ऊर्जा का समावेश एक जगह पर हो जाए तो तरक्की पक्की हो जाती है. कई बार बाप और बेटे के बीच रिश्ते उतने अच्छे नहीं होते जितने दादा और पोते के बीच होते हैं. ऐसी ही दूरियां दूसरे रिश्तों में भी आ रही हैं. ऐसे में जरूरी है कि नए साल पर परिवार के साथ ग्रैंड पार्टी करें. जिस में हर पीढ़ी के लोग शामिल हों. आमतौर पर पुरानी पीढ़ी ऐसी ग्रैंड पार्टी से दूर रहती है, इसलिए उस को पार्टी में जरूर शामिल करें.

बुढ़ापे में दादा के साथ थोड़ी बात कर उन के अनुभव के विषय में जानकारी ले ली जाए तो दादा का दिल खुश हो जाएगा. बुढ़ापे का खाली समय डिप्रैशन की भावना को जन्म देता है. अगर दादा और पोते के बीच संबंध बेहतर हों, पोते के पास दादा को देने के लिए कुछ समय हो तो दादा के अंदर डिप्रैशन का जन्म ही नहीं होगा. केवल दादा और पोते की ही बात नहीं है. मां और दादी के बीच भी बेटी एक कड़ी हो सकती है. पेरैंट्स और ग्रैंड पेरैंट्स के साथ नए साल की ग्रैंड पार्टी से पीढि़यों के बीच रिश्ते सुधारने में मदद मिलती है. पूरा परिवार सालभर नई एनर्जी को महसूस करेगा.

बीकौम कर रही नेहा बताती है, ‘‘मैं अपनी मम्मी से ज्यादा अपनी दादी के करीब हूं. वे मेरी बात ज्यादा अच्छे से समझ लेती हैं. वे मेरी बात को समझ कर मां को भी मेरी बात समझा देती हैं, जिस से मुझे अपने काम के लिए मम्मी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.’’

प्रेरणा की शादी तय हुई थी. प्रेरणा की मां के पास इतना समय नहीं था कि वे उसे कुछ अच्छे से समझा पातीं. प्रेरणा कहती है, ‘‘मेरी नानी ने मुझे ससुराल में रिश्ते निभाने के कुछ टिप्स दिए. मैं हैरान रह गई जब उन्होंने पति के साथ शारीरिक संबंधों को ले कर बहुत ही सहज तरीके से मुझे समझा दिया, इस से मेरी कई तरह की भ्रांतियां दूर हो गईं.’’

करीब होते हैं ग्रैंड पेरैंट्स

दादी के पास हर समस्या का समाधान होता है. हालांकि नई पीढ़ी की लड़कियों को लगता है कि वृद्ध दादी के पास उन की समस्या का समाधान कैसे होेसकता है. बेटियां तब आश्चर्यचकित रह जाती हैं जब दादी, मां के मुकाबले अधिक व्यावहारिक सलाह दे देती हैं. यही वजह है कि प्रचारप्रसार यानी विज्ञापनों की दुनिया में भी बेटी और दादी के रिश्तों को ले कर ज्यादा विज्ञापन बनते हैं. दादी की सलाह केवल सेहत और खानपान तक से ही जुड़ी नहीं रहती, वे रिश्तों को ले कर भी बहुत सटीक सलाह देती हैं.

असल में दादी और दादा, जिन को पुरानी पीढ़ी का मान कर दरकिनार कर दिया जाता है, वे आज भी मातापिता से ज्यादा आधुनिक सोच वाले होते हैं. दादी और दादा की पीढ़ी के पास समय अधिक होता है. उन के पास करने को ज्यादा काम नहीं होता. वे अपनी आधुनिक सोच किसी पर दिखाएं तो लोग उन का मजाक उड़ाते हैं. ऐसे में अगर बेटा या बेटी उन के पास कुछ समय गुजारते हैं तो उन्हें दोहरा लाभ होता है. एक तो वे लोग खुद में व्यस्त हो जाते हैं. उन को लगता है कि परिवार में उन की पूछ बनी हुई है. बेटा न सही, उस के बच्चे उन की सलाह तो ले रहे हैं. परिवार को यह लाभ मिलता है कि बेटे और बाप के बीच आईर् दूरी को कम करने के लिए एक सेतु मिल जाता है. ग्रैंड पेरैंट्स जब परिवार के साथ नए साल की पार्टी में शामिल होंगे तो उन का उत्साह बढ़ जाएगा. इस से परिवार के बीच सामंजस्यभरा माहौल बनेगा.

सब की रुचि का खयाल रखें

नए साल में तमाम तरह की पार्टियों का आयोजन होता है. ऐसे आयोजन को तैयार करते समय घर की पुरानी पीढ़ी को ध्यान में रखें, इस बात की जरूरत बड़े स्तर पर महसूस की जा रही है. यही वजह है कि अच्छी सोच वाले स्कूल अब ग्रैंड पेरैंट्स मीटिंग भी कराने लगे हैं, जिस में बच्चे अपने ग्रैंड पेरैंट्स के साथ आते हैं. बच्चों को अपनी कमी या समस्याएं मांबाप से साझा करने में संकोच होता है. वे ग्रैंड पेरैंट्स से बात को शेयर करने में हिचक का अनुभव नहीं करते. अगर नए साल में ग्रैंड पेरैंट्स के साथ पार्टी सैलिब्रेशन होगा तो उस की खुशियां पूरे साल घरपरिवार को नई ऊर्जा देती रहेंगी.

नए साल में सर्दी बहुत होती है, ऐसे में पार्टी का आयोजन करते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि दादादादी किस तरह से उस में हिस्सा लेंगे. उन के खाने, ड्रैस कोड से ले कर मनोरंजन तक के अलग इंतजाम करने जरूरी होंगे. पार्टी इस तरह की न हो कि दादादादी केवल कोने में बैठे नजर आएं. आप उन की रुचियों को देखते हुए आयोजन करें ताकि वे लोग भी शामिल हो सकें. पार्टी का असली मजा तभी आता है जब सभी सक्रियता से शामिल हों. परिवार के सभी लोगों का पार्टी में हिस्सा लेना संबंधों को नई ऊर्जा देता है. घरपरिवार के माहौल को बेहतर बनाने के लिए ऐसे उत्सव जरूरी हो जाते हैं.

सुधरेंगे रिश्ते, बदलेगा माहौल

आमतौर पर नए साल की पार्टी में घर के बुजुर्ग लोगों को हाशिए पर रखा जाता है. इस का प्रमुख कारण यह होता है कि नए साल की पार्टी में शराब और जुआ जैसी बुराइयों वाले आयोजन होते हैं. ऐसे में बुजुर्गों के बीच यह संभव नहीं होता. इस कारण उन को घर पर ही छोड़ दिया जाता है. जब नए साल की पार्टी में घर के बुजुर्गों को शामिल किया जाएगा तो पार्टी के आयोजन में शराब और जुआ जैसी चीजें बाहर हो जाएंगी, आपसी रिश्तों में ऊर्जा आएगी. कई बार घरपरिवार के विवाद भी ऐसे आयोजनों से खत्म हो जाते हैं. इसलिए नए साल की ग्रैंड पार्टी में ग्रैंड पेरैंट्स को जरूर शामिल करें. इस से रिश्ते सुधरेंगे और घरपरिवार का माहौल बदलेगा.

पीढि़यों में दूरी को कम करने के लिए पार्टी का अपना अहम रोल होता है. यह नए साल के जश्न से ले कर फैमिली आउटडोर डिनर कुछ भी हो सकता है. आज के समय में पुरानी पीढ़ी केवल सोच के आधार पर ही नहीं, पहनावे और फैशन के लिहाज से भी नईर् पीढ़ी का मुकाबला करने को तैयार है. पार्टियों में ऐसे लोगों को संगीत पर थिरकते देखा जा सकता है. कई बार नई पीढ़ी उन से पीछे रह जाती है. नई पीढ़ी की सोच अब बदल रही है. वह पुरानी पीढ़ी के बीच सामंजस्य बैठा कर चलती है. ऐसे में यह चलन बढ़ रहा है और यह चलन आपसी रिश्तों को मजबूत भी कर रहा है.

डाक्टर बन चुका गौरव अपनी पसंद की लड़की से शादी करना चाहता था. उस के पिता चाहते थे कि वह रिश्तेदार की लड़की से शादी करे. वे लड़की भी पसंद कर चुके थे. बाप और बेटे के बीच विचारों का टकराव था. जिस के चलते गौरव शादी ही नहीं कर रहा था. ऐसे में गौरव के दादा ने पहल की और पिता को समझाया. जिस के बाद गौरव की शादी उस की पसंद की लड़की से हो गई. केवल शादी तक ही नहीं, गौरव के दादा ने शादी के बाद भी घरपरिवार, नातेरिश्तेदारों के बीच गौरव की पत्नी की ऐसी इमेज बना दी कि सभी उस की प्रशंसा करने लगे. ग्रैंड पेरैंट्स बच्चों के लिए बहुत जरूरी होते हैं. उन के बीच की कड़ी को जोड़ने के लिए नए साल की पार्टी जैसे अवसरों का लाभ उठाना चाहिए.

केवल कलैंडर का पन्ना बदलने या घड़ी की सूई की जगह बदलने से जीवन में खुशियां नहीं आतीं. जीवन में खुशियों को भरने के लिए सोच बदलने की जरूरत है. ऐसे आयोजन इस में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ग्रैंड पेरैंट्स के पास समय अधिक होता है. उन के समय का सदुपयोग करें और जीवन में नई ऊर्जा भरें. नए साल की शुरुआत की यह ऊर्जा पूरे साल बनी रहेगी.

ताकि रिश्तों में मिठास घुले

पार्टी किसी भी तरह की हो, उस से ऊर्जा मिलती ही है. परिवार के साथ नए साल की पार्टी में पूरे परिवार के लोग शामिल होंगे तो आपस में संबंध बेहतर होंगे. आमतौर पर नए साल की पार्टी को लोग अकेले सैलिबे्रट करना चाहते हैं. ऐसे में परिवार उपेक्षित रहते हैं. जिस से कई तरह की दूरियां आपस में पैदा हो सकती हैं. जब पूरा परिवार साथ रह कर पार्टी करेगा तो संबंध बेहतर होते हैं. खासकर हम ग्रैंड पेरैंट्स को इस में शामिल कर सकते हैं. एकसाथ कई पीढि़यां इस में तालमेल के साथ हिस्सा ले सकती हैं जो पूरे परिवार के लिए लाभकारी हो सकता है.

— रीना गुप्ता, समाजसेविका

पार्टी के नाम पर लोग कई तरह की बुराइयों के शिकार हो जाते है. केवल आदमी ही नहीं, औरतें भी पार्टी में शराब और जुए का शौक पूरा करती हैं. यह जीवन के लिए बहुत अच्छा नहीं होता. परिवार के साथ पार्टी करने से ऐसी बुरी आदतों से लोग बचे रहेंगे. परिवार के साथ होने से नशे और जुए जैसी आदतों से दूर रहेंगे. एकसाथ कई परिवार मिल कर भी ऐसे आयोजन कर सकते हैं. ऐसे में उस उम्र के लोगों में आपसी बातचीत से संबंध सुधरेंगे. पार्टी में परिवार के करीबी लोगों के शामिल होने से लोगों का एकदूसरे की रुचियों को समझना आसान हो जाता है.

— विनोद, बिजनैसमैन

Winter Special: गोअन फिश करी बनाने का इससे असान तरीका कही नहीं

सर्दियों में नौनवेज खाने और बनाने के अलग ही मजा होता है तो आज हम के लिए लेकर आए है ऐसे ही नौनवेज डिश जिसे आप सर्दियों जल्दी पका भी सकती है और खा भी सकती है. तो ट्राय करें गौअन फिश करी जो सर्दियों में हेल्थ को फिट रखेंगी.

सामग्री

250 ग्राम (8 क्यूब्स) सीबास फिश.

सामग्री पेस्ट की

1 बड़ा चम्मच तेल द्य 1 बड़ा प्याज कटा हुआ

1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर द्य 1 छोटा चम्मच धनिया द्य 1 छोटा चम्मच जीरा

छोटा चम्मच अजवाइन द्य 1 बड़ा चम्मच अदरक कटा हुआ द्य  2 हरीमिर्चें कटी हुई द्य  8 लौंग

1 कप नारियल कसा हुआ.

करी

2 बड़े चम्मच तेल द्य 1/2 कप नारियल क्रीम

1 छोटा चम्मच धनियापत्ती कटी हुई द्य  7-8 करीपत्ते द्य 1/2 टमाटर कटा हुआ

1/4 छोटा चम्मच मिर्च पाउडर द्य 1/4 छोटा चम्मच हलदी द्य  20 ग्राम इमली

 नमक स्वादानुसार.

विधि

फिश को चौकोर काट लें.

  1. पेस्ट की विधि

पैन गरम कर जीरा, धनिया और अजवाइन को बिना तेल के भून कर अलग रखें. फिर पैन में तेल गरम कर प्याज को तब तक भूनें जब तक वह पारदर्शी न हो जाए. अब पैन में अदरक, लहसुन, हरीमिर्च, कसा नारियल और हलदी डाल कर कुछ देर तक अच्छी तरह मिलाएं और फिर भुनी सामग्री में मिला कर ग्राइंड कर पेस्ट बना लें.

2. करी की विधि

एक पैन में तेल गरम कर उस में राई के दाने डालें. दानों को चटकने दें. फिर इस में करीपत्ते डालें. अब टमाटर डालें और थोड़ी देर अच्छी तरह हिलाएं. फिर इस मिश्रण में हलदी और मिर्च डाल कर अच्छी तरह मिलाएं. अब इस मिश्रण में नारियल का पेस्ट डालें और बाकी सामग्री के साथ मिलाएं. इस के बाद इमली को निचोड़ कर उस के पल्प को मिश्रण में डालें. फिर नारियल की क्रीम मिलाएं. आखिर में नमक डालें और धीमी आंच पर पकाएं. अब फिश के टुकड़े डालें और उन्हें पकने दें. पकने के बाद धनियापत्ती से गार्निश कर सर्व करें.

कारा: रमन के लिए किस हद तक गई आभा- भाग 3

“तुम्हें दोस्त की बेटी की शादी में जाना अधिक आसान लगा बनिस्पत एक बीमार को मिलने के. अपनीअपनी प्राथमिकताएं हैं. तुम ने प्रतिष्ठा को चुना और मैं होती तो शायद प्रेम को चुनती. मैं तुम्हें मिलने के लिए मजबूर नहीं कर सकती लेकिन खुद को तो रोक सकती हूं न… यह मेरी आखिरी सदा है. इस के बाद कभी तुम्हें आवाज नहीं दूंगी,” लिख कर आभा ने रमन को व्हाट्सऐप पर मैसेज कर दिया और रमन की प्रतीक्षा करने लगी लेकिन प्रतिष्ठा भी तो एक कारा ही है न? इस की मोटी सलाखों को तोड़ पाना किसी साधारण व्यक्ति के लिए आसान नहीं. शायद प्रेम करने वाले असाधारण ही होते होंगे. रमन की चुप्पी आभा को निराश करने लगी. प्रेम के अस्तित्व से भरोसा उठने लगा. यह विचार पुष्ट होने लगा कि शायद प्रेम का दैहिक रूप ही अधिक प्रचलन में है.

कई दिन बीत गए. आभा की शरीरिक अस्वस्थता ठीक हो गई लेकिन उस की मानसिक व्याधि दूर नहीं हुई. दिमागी मंथन अब भी जारी है.

“क्या प्रेम जबरदस्ती करवाया जा सकता है? किसी को भी पकड़ कर आप के साथ बांध दिया जाए और यह आदेश दिया जाए कि बस, आज से आप को इसी से प्रेम करना है क्या यह संभव है?” आभा सोचती तो उसे अपने मांबाबूजी याद आ जाते. हर रोज झगड़ते, एकदूसरे पर कटाक्ष करते, ताने मारते और बातबात में नीचा दिखाने की कोशिश करते. मांबाबूजी को देख कर उसे कभी नहीं लगा कि यह भी प्यार का कोई रूप है क्या. बावजूद इस के वे दोनों 4 संतानों के मातापिता बने.

दूर की एक चाची को घर आई देख कर अवश्य ही बाबूजी जरा नरम पड़ते दिखते थे. बाबूजी चाची के बच्चों को भी बहुत प्यार करते थे लेकिन लोकलाज के कारण उस ने कभी चाची को बाबूजी से बात करते नहीं देखा था. हां, उन की मुसकान वह अवश्य महसूस करती थी. इस बीच रमन के फोन आते रहे और आभा प्रेम को ले कर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी. शायद पहुंच भी नहीं सकती थी क्योंकि इतना तो वह जान ही गई थी कि प्रेम की परिभाषा हरेक के लिए अलग होती है और शायद निजी भी. रमन के लिए जो प्रेम की धारणा है वह उस की धारणा से पृथक है.

“हैलो…आभा? क्या हुआ? तुम सुन रही हो न?” अचानक रमन की आवाज उसे वर्तमान में ले कर आई. आभा अब तक कुछ सामान्य हो चुकी थी.

“तुम्हारे लिए प्रेम क्या है रमन? क्या तुम इसे परिभाषित कर सकते हो?” आभा ने पूछा.

“लगता है, आज मेरी क्लास ली जा रही है,” रमन ने माहौल को सहज करने की कोशिश की.

“तुम तो साहित्यकार हो न, बताओ? क्या है प्रेम?” आभा ने उसे अनसुना करते हुए फिर से पूछा.

“हमारेतुम्हारे मामले में तो प्रेम अकेले में सौ प्रतिशत और सब के सामने शून्य है आभा. परिस्थितियां तुम भी जानती हो और मैं भी. बस, तुम उन्हें स्वीकार नहीं करना चाहती. हम जिन सामाजिक सीमाओं में बंधे हैं उन्हें तोड़ नहीं सकते. तुम्हें वह गीत याद है, ‘प्यार से भी जरूरी कई काम हैं… प्यार सब कुछ नहीं जिंदगी के लिए…'” रमन ने हारे हुए शब्दों में अपनी विवशता स्वीकार की. फोन पर फिर से चुप्पी की चादर फैल गई.

“प्रेम शब्द की जितनी भी व्याख्या की जाए या फिर उसे जितना भी परिभाषित किया जाए, हमेशा समझ से बाहर का विषय ही रहा है. समाज और संसार की नजरों में भी प्रेम सदैव अबूझ पहेली सा ही रहा होगा, तभी तो जहां पशुपक्षियों, जीवजंतुओं और असहायउपेक्षितों से प्रेम करने वाले को महान करार दिया जाता है, वहीं किसी विपरीत लिंगी से प्रेम करने को हिकारत की दृष्टि से देखा जाता है फिर चाहे वह प्रेम कितना भी निश्छल या वासना रहित क्यों न हो,” आभा प्रेम पहेली में उलझ कर कसमसा रही थी.

“समाज की तो क्या ही कहें, ऐसे प्रेम को तो स्वयं प्रेमी भी सहजता से स्वीकार नहीं कर पाता. उसे भी अपने मीत से मिलने के लिए न जाने कितने झूठ बोलने पड़ते हैं, कितने बहाने रचने पड़ते हैं. और मजे की बात तो यह है कि ये सारे प्रपंच व्यक्ति स्वयं अपनेआप से करता है. शायद समाज में अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए. रमन भी तो यही कर रहा है,” आभा के विचारों ने और गति पकड़ी.

“क्या मैं रमन को प्रेम करने के लिए बाध्य कर सकती हूं? नहीं न? तो क्या करूं? क्या रमन को भूल जाऊं? क्या यह प्रेम की हार नहीं होगी? आभा अपने प्रश्नजाल से बाहर निकल ही नहीं पा रही थी. तभी मानो रौशनी की 1-1 क्षीण सी रेखा दूर कहीं अंधियारे में कौंधी. आभा साफसाफ देख पा रही थी कि उस रौशनी में प्रेम को परिभाषित होते हुए.

“आभा, अरे यार… कुछ बोलो न? प्लीज, जो सहजता से चल रहा है उसे चलने दो न. क्यों शांत जिंदगी में लहरें लाने की जिद पर अड़ी हुई हो?”रमन ने आभा से अनुनय की लेकिन आभा तो अपना निर्णय ले चुकी थी.

“मैं क्यों इतनी स्वार्थी हुई जा रही हूं. यदि रमन के लिए उस की गढ़ी हुई प्रेम की परिभाषा सही हो सकती है तो मैं भी तो अपनी निजी परिभाषा गढ़ने के लिए स्वतंत्र हूं. उस की वह जाने लेकिन मैं भी तो जिद्दी हुई जा रही हूं न प्रेम को पाने के लिए. शायद यह जिद प्रेम को पाने की नहीं बल्कि रमन को पाने की है. क्या मैं उसे भौतिक रूप से पाए बिना अपने प्रेम को निभा नहीं सकती? यदि नहीं तो फिर मेरा प्रेम स्वार्थ ही हुआ न? अब मैं सबकुछ समय पर छोड़ कर निश्चिंत हो अपना प्रेम निभाउंगी. बिना किसी जिद और स्वार्थ के. बिना किसी शिकायत के. हां, मैं प्रेम की प्रायोजित कारा से आजाद हो कर स्वतंत्र प्रेम करूंगी,” आभा ने तय कर लिया था और ऐसा निश्चय करते ही उसे लगा मानो उस का मष्तिष्क सचमुच किसी भारी बोझे से आजाद हो गया. अब उसे रमन पर गुस्सा नहीं बल्कि प्रेम आ रहा था. वह भी पहले से कई गुणा अधिक.

“तुम सही कहते हो रमन. तुम्हें पाने की मेरी जिद ही मेरी पीड़ा का कारण है. मैं तुम से हमेशा प्यार करूंगी लेकिन अपने प्यार को अपनी जिद नहीं बनने दूंगी. जिस दिन तुम सब के सामने मुझे अपनी जिंदगी का हिस्सा स्वीकार करोगे उस दिन मेरी दुनिया में तुम्हारा स्वागत है. मुझे देह नहीं नेह चाहिए,” कहते हुए आभा ने फोन काट दिया. मानो नेह को देह की कारा से मुक्त कर दिया हो.

नए साल का दांव: भाग-1

आज वंदिता की ट्रेडमिल पर स्पीड रोज की तरह नहीं थी. कदमों में सुस्ती थी. हमेशा अच्छा वर्कआउट करने वाला जोश गायब था. वार्मअप भी ठीक से नहीं कर पाई थी. आंखों में रातभर जागने के बाद की थकान और उदासी थी. ऐक्सरसाइज नहीं कर पा रही थी, जबकि आज तक ऐसा नहीं हुआ था. उस की फिटनैस पूरी सोसाइटी की महिलाओं के लिए उदाहरण थी. बेहद स्मार्ट, सुंदर, स्लिम वंदिता अपने हंसमुख, बोल्ड स्वभाव के चलते सोसाइटी में सब को प्रिय थी. उस की सहेलियों की नजरें आज जिम में उसी पर थीं. सब उस की मनोस्थिति से अवगत थीं. सहेलियां भी उस की उदासी से उदास थीं.

वंदिता ने अपने बैग से पानी की बोतल निकाल 2 घूंट पीए और फिर अमायरा से बोली, ‘‘आज नहीं हो पा रहा कुछ… चलती हूं.’’

वहीं साइकिल चलाती शिनी ने कहा, ‘‘तू आ गई आज हम तो इसी बात पर खुश हैं… प्राउड औफ यू… यार, बहुत स्ट्रौंग है तू. डौंट वरी… हम तेरे साथ हैं. कुछ करते हैं.’’

अमायरा, शिनी और सिम्मी ने भी ऐक्सरसाइज रोक कर अपनाअपना बैग उठा लिया. तीनों जिम से निकल कर क्लब हाउस में ही स्विमिंग पूल के किनारे रखी चेयर्स पर बैठ गई. सुबह के 11 बज रहे थे. हलकीहलकी धूप में तीनों ने वंदिता को प्यार से देखा. उस की भरी आंखें छलकने को तैयार थीं.

शिनी ने बात शुरू की, ‘‘वंदिता तेरे मैसेज तो रात में ही पढ़ लिए थे. अब यह बता जब कपिल रात को मोहना से न्यू ईयर प्लान डिसकस कर रहा था, तो तूने उसी समय उस की क्लास क्यों नहीं ली?’’

वंदिता ने गंभीर आवाज में कहा, ‘‘मैं ने पूछा था कि किस के साथ न्यू ईयर पर माथेरान जा रहे हो? तब उस ने बेशर्मी से कहा कि तुम्हारे साथ तो नहीं, बस इतना जानना तुम्हारे लिए काफी है… मैं ने फिर पूछा किस के साथ तो बोला कि क्यों पीछे पड़ी हो मेरे? बता दूंगा या अंदाजा क्यों नहीं लगाती हो? इतने बदतमीज, बेशर्म इंसान से जवान बच्चों के सामने और क्या बात करती? बच्चे भले ही दूसरे कमरे में थे पर फ्लैट में सब सुनाई देता है… कपिल इतना धीरे भी नहीं बोलता. वह डंके की चोट पर मोहना से जुड़ गया है. उसे अब किसी की परवाह नहीं.’’

अमायरा ने कहा, ‘‘मेरा मन होता है कपिल को पकड़ कर ऐसा इलाज करूं कि बच्चू याद रखे और वह मोहना उसे देख कर तो उस का मुंह नोचने का मन करता है. पति है, बच्चा है, कपिल से 10 साल छोटी है, फिर भी शर्म नहीं आ रही दोनों को रासलीला रचाते.’’

सिम्मी बोली, ‘‘एक का नहीं, दोनों का कुसूर है, पर सोचो क्या किया जाए.’’ 1 घंटा सब यों ही बैठी रहीं. कोई रास्ता नहीं सू झ रहा था. अपने दिल की भड़ास निकाल कर सब अपनेअपने घर चली गईं. वंदिता भी घर आ कर नहाने चली गई. शावर के नीचे खड़ी देर तक रोती रही. आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे.

यह क्या हो गया, यह कब सोचा था, वह तो इतनी परफैक्ट वाइफ सम झती थी खुद को. कपिल इतना धोखा दे जाएगा, कभी नहीं सोचा था. कपिल आज ही सुबह दूर पर निकल गया था. दोनों बच्चे संजय और साक्षी अपनेअपने औफिस में थे. नहा कर वह चुपचाप बैड पर ढह सी गई. किसी तरह चैन नहीं आ रहा था. 28 साल की की गृहस्थी अपनी आंखों के सामने ढही जा रही थी. दिलफेंक, आशिकमिजाज कपिल ने दूसरी औरतों के साथ ऐसी हरकतें पहले भी की थीं.

कभी इग्नोर कर के, कभी डांटडपट कर, तो कभी प्यार से कपिल को सही रास्ते पर ले आती थी, पर जो अब हो रहा था वह तो कभी नहीं हुआ था. 2 साल पहले सोसइटी की ही एक बिल्डिंग में मोहना अपने पति विनय और छोटे बच्चे यश के साथ किराए पर रहने आई थी.

यह एक पौश सोसाइटी थी. अच्छे रोचक प्रोग्राम होते रहते थे. ऐसे ही एक प्रोग्राम में वंदिता और मोहना की दोस्ती हो गई. दोनों की यह दोस्ती पारिवारिक दोस्ती में बदल गई. दोनों के परिवार वीकैंड में साथ बैठते, खातेपीते. वंदिता को पता ही नहीं चला कि कब मोहना और कपिल सब की नजरें बचा कर एकदूसरे के

इतने करीब आ गए कि वंदिता की गृहस्थी की नींव इतनी जोर से हिली कि संभालना मुश्किल हो गया. विनय अपना बिजनैस शराब, जुए में गंवा चुका था. सारी बुरी आदतों में डूबा कईकई दिन तक घर से बाहर रहता. वह तो वंदिता ने एक दिन कपिल के वाशरूम जाने पर उस का फोन चैक कर लिया. इस से पहले कोई किसी का फोन छूता नहीं था. शायद इसीलिए उस ने कोई सावधानी नहीं बरती थी. कपिल और मोहना की सारी चैट पढ़ कर वंदिता के पैरों तले की जमीन खिसक गई. सबकुछ क्लियर था. दोनों सारी सीमाएं पार कर चुके थे. कई बार शारीरिक संबंध बना चुके थे. विनय और यश की गैरमौजूदगी में दोनों को साथ समय बिताने पर जो आनंद आया था, चैट में खुल कर कई इमोजी के साथ खुशी जाहिर की गई थी. यहां तक कि मोहना के कई खर्चे भी कपिल उठा रहा था. सबकुछ साफ था. शक की कोई गुंजाइश ही नहीं थी.

कपिल जब नहा कर निकला, वंदिता ने चैट दिखा कर पूछा, ‘‘यह सब क्या और क्यों चल रहा है कपिल?’’

कपिल चौंका, फिर सम झ गया कि पोल खुल चुकी है. पलभर में वह इस स्थिति से निबटने के लिए तैयार हो गया. बेशर्मी से बोला, ‘‘हां, वह मेरी दोस्त है और रोजरोज की किचकिच से अच्छा है मैं तुम्हें आज ही बता दूं कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं उसे नहीं छोड़ूगा.’’

‘‘इतने बड़े बच्चे हैं हमारे… सालों का साथ है… मैं ने तुम्हारी कई गलतियां माफ की हैं. अब नहीं करूंगी… यह कुछ ज्यादा ही हो गया है.’’

‘‘मैं माफी मांग भी नहीं रहा हूं और मु झे इस में कोई ड्रामा भी नहीं चाहिए.’’

वंदिता को रोना आ गया, ‘‘यह तुम ने अच्छा नहीं किया कपिल.’’

‘‘तुम्हें मेरे साथ रहना है तो रहो… मैं मोहना को नहीं छोड़ूंगा, जो करना है कर लो.’’

कपिल अपना फोन ले कर जा चुका था. उस दिन से आज तक जैसे वह रोज अंगारों पर चल रही थी, सोसाइटी बड़ी थी. मोहना की बिल्डिंग कुछ ही दूरी पर थी. वंदिता की कई सहेलियां मोहना की बिल्डिंग में रहती थीं. उन्होंने कपिल को कई बार मोहना के फ्लैट में जाते देखा था.

उन्होंने वंदिता को बताया तो वंदिता ने फिर कपिल से बात की, ‘‘क्यों हम सब की बेइज्जती करवा रहे हो? कुछ तो लिहाज करो.’’

‘‘नहीं, मु झे कोई फर्क नहीं पड़ता. जो कर सकती हो कर लो.’’

वंदिता अब बहुत परेशान रहने लगी. क्या करे, हालात काबू से बाहर थे.

यूपी-112 ने नागरिकों को किया जागरुक

लखनऊ. पुलिस ने जानता को जागरूक करने के लिए अभियान शुरू किया है. अशोक कुमार सिंह, ADG UP -112 के निर्देशन में दिनांक 30 दिसम्बर 2022 से 01 जनवरी 2023 तक 03 दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. जिसमे पुलिस सहायता, आग लगने पर फायर बिग्रेट, मेडिकल सहायता व  दुर्घटना/आपदा के साथ-साथ सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने हेतु नागरिकों को प्रेरित किया जा रहा है.

​नव वर्ष के अवसर पर आम नागरिकों को उत्तर प्रदेश पुलिस की विभिन्न जनोपयोगी सेवाओं जागरुक करने के उद्देश्य से  प्रदेश सभी जनपदों के माल व अन्य स्थानों पर 2-2 स्टाल लगाये गए, प्रदेश में कुल 155 सार्वजनिक स्थानों पर ये स्टॉल लगायें गए है.

इस नव वर्ष के अवसर पर नव संकल्प उठाएँ, दूसरों की मदद को आगे आएँ, इस संदेश के साथ यूपी-112 के कर्मियों ने स्टाल पर नागरिकों को पुलिस की सेवाओं से जागरुक किया.  इसी क्रम में पुलिस कर्मियों ने बुजुर्गों और महिलाओं से भी संवाद कर उनसे 112 की सवेरा और नाईट एस्कॉर्ट सेवा की जानकारी साझा की. इस मौक़े पर यूपी-112 द्वारा मित्र पुलिसिंग का संदेश दिया और बताया कि पुलिस कैसे मित्र बनकर मदद करती आ रही है .

WELCOME 2023: सुधाशुं पांडे से लेकर मिताली नाग तक, जानें कैसे नया साल मनाएंगे ये टीवी सेलेब

कोविड 19 ने बहुत समय तक सबको कही आने जाने से रोका और उसके कम होने पर  सभी सेलेब्स   ने अपने काम को पूरा करने की कोशिश की, अब थोडा समय उनके पास है और इसे वे  दुगुने उत्साह के साथ मनाना चाहते है. कोई ट्रेवल करना चाहता है, तो कोई परिवार के साथ समय गुजारने की कोशिश कर रहे है, आखिर क्या कुछ नया करने वाले है, वे इस साल ? गृहशोभा ने जानने की कोशिश की नए साल का स्वागत सेलेब्स इस बार कैसे करने वाले है , आइये जाने.

  1. अदा खान

अभिनेत्री अदा खान कहती है कि नया साल मैं अपने दोस्त और परिवार के साथ मनाने की इच्छा रखती हूँ. मैं मस्कट और कश्मीर से यहाँ केवल नए साल को मनाने ही आई हूँ. मैंने अपने जीवन में कभी कोई संकल्प नहीं  लिया, क्योंकि उसे मैं पूरा नहीं कर पाई, इसलिए जिंदगी जैसे सामने आती है, उसे वैसे ही एन्जॉय करना चाहती हूँ. मैं वर्तमान में रहना और वर्तमान को अच्छी तरह से जीने में विश्वास रखती हूँ.

2. करण सिंह छाबड़ा

चाक एंड डस्टर फेम करण सिंह छाबड़ा को हाउस पार्टी अपने दोस्तों के साथ करना पसंद है. वे कहते है कि साल का पहला दिन मैं एन्जॉय करते हुए बिताना पसंद करता हूँ. मैंने पिछले 5 महीने से लगातार शूट के लिए ट्रेवल किया है. इसलिए अब मैं कही जाना नहीं चाहता. मुंबई में नए साल को मनाते हुए सी-लिंक से लॉन्ग ड्राइव करना चाहता हूँ. मेरा न्यू इयर रेसोल्यूशन रोज सवेरे समय से उठ जाना है. मैं हर साल इसकी कोशिश कर रहा हूँ, लेकिन बहुत जल्दी इसे तोड़ भी देता हूँ, पर इस साल मैं अपने सभी दोस्तों को सबसे पहले ‘गुड मोर्निंग’ मेसेज देना चाहता हूँ.

3. मिताली नाग

अभिनेत्री मिताली का 5 साल का बेटा रुद्रांश  है, इसलिए किसी भी वेकेशन प्लान बेटे की छुट्टियों के साथ ही करती है. इस बार वह अपने परिवार के साथ इसे मनाना चाहती है. मिताली  कहती है कि अब तक मैंने नए साल पर ट्रेवल करना पसंद किया है, लेकिन कोविड की वजह से इस पर ब्रेक लग गया है, इसलिए इस साल कहीं  जाने का मन नहीं है. इस बार का मेरा संकल्प यह है कि मैं अगले साल  हर दिन सुबह 5 बजे उठ जाऊं, ताकि मैं अपने फिटनेस पर अधिक समय दे सकूँ.

4. आकाश शर्मा

अभिनेता आकाश इस बार नए साल पर स्पेन अपने दोस्तों के साथ मनाना चाहते है. न्यू इयर सेलिब्रेशन उनके लिए एक फेस्टिवल है और इसे वैसे ही अच्छी तरह से मनाना चाहते है. नए साल में वे अधिक मेहनत और लगन से काम करने की इच्छा रखते है.

5. एकता शर्मा

कुसुम फेम अभिनेत्री एकता शर्मा नए साल के लिए कोई प्लान नहीं बनाई है, क्योंकि उस दिन वह घर पर परिवार के साथ रहकर हाउस पार्टी मनाना पसंद करती है. वह कहती है कि इस बार मैं अपनी बेटी और माँ के साथ हूँ. मैने इस बार केवल एक संकल्प ‘फिट’ रहने का लिया है और खुद को अधिक से अधिक प्यार करना चाहती हूँ, क्योंकि खुद से प्यार करने वाला ही दूसरे को प्यार कर सकता है.

6. सिद्दार्थ बोडके

मराठी फिल्म और हिंदी टीवी शो में काम करने वाले अभिनेता सिद्धार्थ बोडके अपने पेरेंट्स के साथ नए साल को मनाना चाहते है. उनका कहना है कि मैं अपने पेरेंट्स से मिलने नाशिक जाऊंगा. मैं इस साल के अधूरे काम को अगले साल तक पूरा करने की कोशिश करूँगा. इसके अलावा मैं अपने फिटनेस पर अधिक काम करूँगा, क्योंकि कोविड ने सभी को फिटनेस का महत्व समझाया है.

7. सुधांशु पाण्डेय

अभिनेता सुधांशु पाण्डेय कहते है कि मेरा नए साल का प्लान बिल्कुल साधारण है. मैं इसे मनाने कही नहीं जा रहा हूँ. मैं घर पर दोस्तों, परिवार, बच्चे और पत्नी के साथ एन्जॉय करना चाहता हूँ. मुझे अपनी कुछ आदतों को नए साल में छोड़कर कुछ अच्छा काम करने के बारें में सोचना है.मेरे लिए हर दिन नया होता है और हर दिन को मैंअपने जीवन का शुरुआत मानता हूँ, इसलिए मेहनत से हर काम करता हूँ. मैं कोई संकल्प नहीं लेता, हर दिन को एन्जॉय करता हूँ.

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