pregnancy diabetes : मुझे गर्भावस्था के दौरान जैस्टेशनल डायबिटीज हो गई है. मेरे होने वाले बच्चे के लिए कोई खतरा तो नहीं है?
वैसे तो डायबिटीज से पीडि़त महिलाएं स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं लेकिन अगर रक्त की शुगर को नियंत्रित न किया जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए समस्याएं पैदा कर सकती है, जिन में सम्मिलित हैं. प्लेसेंटा से अतिरिक्त ग्लूकोज बच्चे के अग्नाश्य में जा सकता है जिस से इंसुलिन का निर्माण बढ़ सकता है. इस से बच्चे का भार और आकार सामान्य से अधिक बढ़ सकता है जिसे मैक्रोसोमिया कहते हैं. इस के कारण सामान्य प्रसव में समस्याएं आती हैं. जिन गर्भवती महिलाओं को डायबिटीज होती है उन के बच्चों में आगे चल कर मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है. गर्भावस्था के दौरान रक्त में शुगर के अनियंत्रित स्तर से गर्भपात हो सकता है. गर्भ में ही या जन्म के तुरंत बाद बच्चे की मृत्यु हो सकती है. जन्म के बाद बच्चे को सांस की तकलीफ हो सकती है, उस का शुगर लैवल बढ़ सकता है और उसे पीलिया भी हो सकता है.
मैं 47 वर्षीय घरेलू महिला हूं. पिछले कई सालों से डायबिटीज से जू झ रही हूं. कृपया सामान्य जीवन जीने के लिए कुछ जरूरी उपाय बताएं?
डायबिटीज के मरीज जितने बेहतर तरीके से अपने रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखते हैं, उन के लिए सामान्य जीवन जीना उतना ही आसान होता है. अपना ब्लड प्रैशर 130/80 से कम रखें. खाली पेट रक्त में शुगर की मात्रा 110 मिलीग्राम और खाना खाने के 2 घंटे बाद 150 मिलीग्राम से कम रखें. सब से जरूरी है डायबिटीज से पीडि़त महिलाओं की कमर का घेरा
32 इंच से कम होना चाहिए. बुरे कोलैस्ट्रौल (एलडीएल) का स्तर 100 से कम और अच्छे कोलैस्ट्रौल (एचडीएल) का स्तर 50 से अधिक रखें. ये सभी सावधानियां डायबिटीज के मरीजों को लंबा और सामन्य जीवन जीने में सहायक होती हैं.
मेरी सास को पिछले कुछ समय से काफी धुंधला दिखाई दे रहा था. जांच कराने पर डायबिटिक रेटिनोपैथी होने के बारे में पता चला है. इस के उपचार के क्या विकल्प हैं?
डायबिटिक रेटिनोपैथी के इलाज में लेजर का इस्तेमाल किया जाता है, यह रेटिना के पीछे की नई रक्तवाहिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाने और आंखों में रक्त तथा द्रव के रिसाव को रोकने के लिए किया जाता है. इलाज की प्रक्रिया के दौरान आंखों को सुन्न करने और पुतलियों को बड़ा करने के लिए विशेष आई ड्रौप डाला जाता है. इस के बाद लेजर किरणों से इलाज किया जाता है. आंखों में इन्फ्लामेशन को कम करने या आंखों के पीछे की नई रक्तवाहिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से रोकने के लिए आंखों में ल्यूसैंटिस, अवास्टिन के इंजैक्शन लगाए जाते हैं. लेजर और इंजैक्शन से जब इलाज संभव नहीं होता है तो विट्रेक्टौमी सर्जरी से इलाज किया जाता है.
मैं 54 वर्षीय घरेलू महिला हूं और मधुमेह से पीडि़त हूं. अचानक मेरी आंखों की रोशनी कम हो गई है. क्या ऐसा मधुमेह के कारण हुआ है?
आप डायबिटिक रेटिनोपैथी की शिकार हैं जो डायबिटीज से जुड़ी प्रमुख स्वास्थ्य जटिलताओं में से एक है. रक्त में शूगर का स्तर अधिक बढ़ने से रेटिना में रक्तवाहिकाओं को नुकसान होता है, जिस के कारण यह बीमारी हो सकती है. इस बीमारी से रेटिना को रक्त पहुंचाने वाली नसों में सूजन हो सकती है, जिस से नजर धुंधली हो जाती है. जिन्हें जितने लंबे समय से डायबिटीज होती है उन्हें डायबिटिक रेटिनोपैथी होने की आशंका उतनी ही अधिक हो जाती है. इस का इलाज नहीं कराने पर यह अंधेपन का कारण बन सकता है. इस के मुख्य लक्षण हैं सुबह उठने के बाद कम दिखाई देना, सिरदर्द रहना, अचानक आंखों की रोशनी कम हो जाना, आंखों के आगे काले धब्बे दिखाई देना तथा रंगों को पहचानने में कठिनाई होना आदि.
मैं अपनी 13 साल की बेटी को ले कर बहुत परेशान हूं. उसे जुवेनाइल डायबिटीज है. सम झ नहीं आता उस की देखभाल कैसे करूं?
टाइप-1 डायबिटीज टाइप-2 डायबिटीज से ज्यादा गंभीर होती है, क्योंकि इस का प्रबंधन मुश्किल होता है. जब एक बार बच्चे इंसुलिन पर निर्भर हो जाते हैं तो फिर हमेशा उन्हें इस की जरूरत पड़ती है. लेकिन खानपान में बदलाव ला कर इंसुलिन पर निर्भरता को कम किया जा सकता है. डाक्टर से मिल कर डाइट चार्ट तैयार कराएं और अपने बच्चे को इस का कड़ाई से पालन करने के लिए प्रेरित करें. अपने खानपान में भी बदलाव लाएं ताकि बच्चा खुद को अलगथलग महसूस न करे. उसे अपने साथ वाक पर ले जाएं, ऐक्सरसाइज और योग करने के लिए प्रेरित करें.
जुवेनाइल डायबिटीज से पीडि़त बच्चों में कभीकभी रक्त में शुगर का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है इसलिए स्कूल में भी बताएं कि आप का बच्चा जुवेनाइल डायबिटीज से पीडि़त है, उस के दोस्तों को भी इस बारे में बताएं ताकि किसी आपातकालीन स्थिति से निबटने में परेशानी न हो.
-डा. एके झिगन, चेयरमैन
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