best kahaniyan : दोपहर   12 बजे का समय हो रहा था. दिल्ली कोर्ट के रजिस्ट्रार औफिस के बाहर वाली बैंच पर आरोही बैठी थी. गरमी काफी थी. पंखा ऊपर घूम रहा था पर हवा नहीं आ रही थी. आरोही 26 साल की लखनऊ की लड़की थी. वह 3 साल से राजौरी गार्डन के एक पीजी में रह रही थी. बीकौम कर के एक प्राइवेट कंपनी में डिजाइनर बन गई थी. सैलरी 35 हजार थी. दिखने में खूबसूरत मगर चेहरे से परेशान दिख रही थी.

आरोही ने हाथ में फाइल पकड़ रखी थी. फाइल में आधार, पैन कार्ड, 4 फोटो और ‘नोटिस औफ इनटैंडेड मैरिज’ की 2 कौपी रखी थीं. वह 2 साल से रोहन के साथ रिलेशन में थी. रोहन नोएडा में जौब करता था. वे 3 महीनों से रजिस्टर मैरिज प्लान कर रहे थे.

आरोही की फोन स्क्रीन पर रोहन को की गई 7 मिस्ड काल्स चमक रही थीं. रोहन के व्हाट्सऐप नंबर पर लास्ट सीन 3 दिन पहले का दिख रहा था.

आरोही अंदर से बहुत घबराई हुई थी मगर मन ही मन खुद को दिलासा दे रही थी, ‘‘आ जाएगा. औफिस में मीटिंग होगी.’’ उस ने खुद को सम?ाया पर पेट में चूहे कूद रहे थे.

बैंच के दूसरे सिरे पर एक लड़का बैठा था. सफेद शर्ट, काली पैंट में वह हैंडसम लग रहा था. वह बारबार घड़ी देख रहा था. उस का नाम आदित्य था और वह 28 साल का गाजियाबाद का रहने वाला था. वह नोएडा की एक एमएनसी कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर था और उस की सैलरी अभी केवल 45 हजार थी क्योंकि उसे जौब जौइन किए ज्यादा समय नहीं हुआ था.

उस के फोन पर भी सन्नाटा था. वह अपनी गर्लफ्रैंड प्रिया को सुबह 9 बजे से कई काल्स और मैसेज कर चुका था.

‘‘कहां हो?’’ ‘‘पहुंची क्या?’’ ‘‘रिप्लाई तो करो,’’ मगर एक का भी टिक नहीं आया और न ही उस ने फोन उठाया.

बीच में खड़े थे मुन्ना भैया. सफेद कुरता, माथे पर तिलक. वह कचहरी का दलाल था.

‘‘3 हजार ले चुका हूं. बाकी 2 हजार शादी वाले दिन. मैडमजी, सरजी, आप दोनों हमारा टाइम मत खराब करो. वकील साहब 4 बजे चले जाएंगे.’’

आरोही और आदित्य ने पहली बार एकदूसरे को देखा. दोनों की आंखों में वही सवाल था, ‘‘तुम्हारा पार्टनर भी नहीं आया?’’

सवा 12 बजे मुन्ना भैया फिर आया, ‘‘क्या डिसाइड किया?’’

दोनों चुप रहे.

आरोही उठी और बाहर निकल आई. आदित्य भी पीछेपीछे आ गया. बाहर गेट पर दोनों ने एक बार फिर से काल की. रोहन का फोन स्विच्ड औफ था और प्रिया का फोन भी स्विच्ड औफ ही आ रहा था. प्रिया की आंखें नम हो गई थीं. आदित्य भी परेशान सा चहलकदमी करने लगा.

आरोही को रोता देख कर उस के करीब आ गया, ‘‘चलो बैठ कर चाय पीते हैं और सोचते हैं कि क्या किया जाए.’’

चाय के बाद दोनों ने लंच भी साथ में ही कर लिया. एकदूसरे के बारे में थोड़ी खोजखबर भी ले ली.

‘‘तुम्हारा नाम क्या है?’’ आदित्य ने पूछा.

‘‘आरोही. तुम्हारा?’’

‘‘आदित्य.’’

‘‘मैं पीजी में रहती हूं और जौब भी करती हूं.’’

‘‘मैं भी.’’

इस के बाद 10 मिनट की खामोशी.

फिर आदित्य बोला, ‘‘देखो आरोही. गुस्सा आ रहा है. 2 साल बरबाद किए और आज…’’

‘‘क्यों न हम दोनों बदला लें?’’

‘‘कैसा बदला?’’ आरोही ने पूछा.

‘‘इस तरह हमारे पार्टनर्स द्वारा दिए जा रहे धोखे का बदला,’’ आदित्य ने कहा.

‘‘ओके मगर हम करेंगे क्या?’’

‘‘चलो हम दोनों अपनी शादी का नोटिस डलवा देते हैं. एकदूसरे के साथ फोटो खिंचवाते हैं. उन्हें भेजते हैं. दिखाते हैं कि तुम नहीं तो कोई और सही.’’

आरोही पहले हंसी. फिर रो पड़ी, ‘‘यह पागलपन है.’’

‘‘हां. पर 3 हजार डुबोने से अच्छा है न?’’ आदित्य बोला.

आरोही ने फाइल खोली. रोहन का फोटो फाड़ कर. कचरे में फेंक दिया.

‘‘ठीक है. करते हैं.’’

शाम में मुन्ना भैया को फोन कर दोनों ने बता दिया कि कल 11 बजे आएंगे. नए

फार्म के साथ.

अगले दिन फार्म पर नाम बदले. ‘स्पाउस आदित्य,’ ‘स्पाउस आरोही.’

फोटो खिंचा. दोनों जबरदस्ती हंस रहे थे मगर कैमरे में आंखें लाल थीं.

काम के बाद भूख लगी.

‘‘खाना खाओगी?’’

‘‘हां.’’

सर्वाना में डोसा खातेखाते 2 घंटे बात हुई.

आरोही ने बताया कैसे लखनऊ से भाग कर दिल्ली आई थी. आदित्य ने बताया कैसे प्रिया ने 6 महीने तक घर वालों को मनाया था और आखिर में मना कर दिया.

पीजी तक छोड़ते समय आदित्य ने कहा, ‘‘कल फोन आया क्या?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘मेरा भी नहीं.’’

आज तीसरा दिन था. आरोही का मन बहुत उदास था. औफिस से छुट्टी ली.

आदित्य का मैसेज आया, ‘‘बोर हो रही हो? चलो फिल्म.’’

पीवीआर में ‘12वीं फेल’ देखी. दोनों बहुत रोए. बाहर निकल कर 1 घंटे तक बैठे रहे.

आदित्य ने कहा, ‘‘पता है, फेल होना बुरा नहीं है. धोखा खाना बुरा है.’’

आरोही ने पहली बार स्माइल की.

5वें दिन मुन्ना भैया का फोन आया, ‘‘नोटिस लग गया है. 30 दिन बाद शादी है. पैसे रैडी रखना.’’

दोनों ने ‘हां’ कह कर फोन रख दिया.

7वें दिन वीकैंड था.

‘‘नैशनल म्यूजियम चलें?’’ आदित्य ने पूछा.

आरोही को पेंटिंग बहुत पसंद थी. 2 घंटे तक एक ही पेंटिंग के सामने खड़ी रही.

आदित्य ने बताया, ‘‘यह 18वीं सदी

की है. देखो आंखों में कितना

दर्द है.’’

आरोही ने कहा, ‘‘तुम्हारी आंखों में भी है.’’

वापसी में मैट्रो में दोनों सो गए. सिर एकदूसरे के कंधे से टकरा गया. दोनों ?ाटके से अलग हुए. दोनों थोड़े शरमा गए.

रात को आरोही ने मैसेज किया, ‘‘आज पूरा दिन तुम्हारे साथ अच्छा लगा. थैंक्स.’’

‘‘मु?ो भी.’’

धीरेधीरे दोनों एकदूसरे के करीब आने लगे थे. रोज शाम में मिलते और बातें करते. दोनों को एकदूसरे की आदत सी हो गई.

10वें दिन आदित्य को बुखार आ गया. 102 बुखार था जबकि वह घर में बिलकुल अकेला था.

आरोही अपने पीजी से सूप और दवा ले कर पहुंच गई. वहां 3 घंटे बैठी. सिर दबाया.

‘‘तुम क्यों आई?’’ आदित्य ने पूछा.

‘‘क्योंकि कोई और नहीं था. तुम्हें तकलीफ में देख कर हिम्मत आ गई कि तुम्हारे पास आ कर बैठूं.’’

एक दिन आरोही ने बताया कि पीजी वाली आंटी ने किराया 2000 बढ़ा दिया.

आदित्य ने रातभर 5 पीजी में काल की. अगले दिन उसे 8 हजार वाला पीजी दिलवा दिया.

आरोही ने कहा, ‘‘तुम बहुत अच्छे हो.’’

‘‘तुम भी.’’

18वें दिन दोनों ने फैसला किया कि वे अपने पुराने पार्टनर की सारे फोटो, चैट डिलीट कर देंगे.

डिलीट करते समय दोनों रोए पर एक भी फोटो फोन में नहीं छोड़ा. सब डिलीट कर दिए.

20वें दिन पहली बार दोनों ने मजाक में कहा, ‘‘अगर सच में शादी करनी पड़ी तो?’’

दोनों हंस पड़े, ‘‘10 हजार में निबटा देंगे.’’

जैसेजैसे 30 दिन करीब आए घबराहट बढ़ने लगी.

25वें दिन रात 11 बजे आदित्य का फोन आया. आवाज भारी थी, ‘‘आरोही, डर लग रहा है.’’

‘‘किस बात का?’’

‘‘पता नहीं. यह सब सही है न? हम जल्दबाजी तो नहीं कर रहे?’’

आरोही 2 मिनट चुप रही. फिर बोली, ‘‘आदित्य, 25 दिन में हम ने जितनी ईमानदारी से बात की है उतनी 2 साल में किसी से नहीं की. मेरे लिए यही सही है.’’

‘‘मेरे लिए भी.’’

27वें दिन सुबह 9 बजे आरोही ब्रश कर रही थी. फोन बजा. ‘रोहन’ नाम ऊपर ब्लिंक कर रहा था.

दिल बैठ गया. 27 दिन बाद रोहन को आरोही की सुध आई.

‘‘आरोही… प्लीज फोन मत काटना. सौरी. पापा बहुत बीमार हो गए थे. घर में प्रौब्लम थी. मैं मजबूर था. मिल सकते हैं? एक बार बात कर लो.’’

आरोही बोली, ‘‘पापा की बीमारी का ?ाठा बहाना न बनाओ. तुम्हारे घर वालों को मैं नीची जाति की लगी थी इसलिए उन्होंने मु?ो रिजैक्ट कर दिया था. आज सुबह ही सुरेंद्र का फोन था जो तुम्हारा जिगरी दोस्त है. अब तुम पापा का बहाना बना रहे हो ताकि मु?ो यूज करते रहो.’’

आरोही के हाथ कांप रहे थे. साथ गुजारे हुए 2 सालों की यादें जेहन में ताजा हो गई थीं. उस ने 10 सैकंड आंखें बंद कीं. आदित्य का चेहरा याद आया.

‘‘नहीं रोहन. अब बहुत देर हो चुकी है,’’ और फिर उस ने रोहन के नंबर को ब्लौक कर दिया.

इधर आदित्य के पास भी प्रिया का फोन आया, ‘‘आदि, मैं दिल्ली आ रही हूं. गलती हो गई. मम्मी ने इमोशनल ब्लैकमेल किया. आईएम सौरी. हम शादी कर लेते हैं.’’

आदित्य खिड़की से बाहर देख रहा था.

‘‘प्रिया, 27 दिन जहां थी वहीं रहो. अब मेरी जिंदगी में जगह नहीं है,’’ कह कर उस ने भी फोन काट दिया. शाम 6 बजे कनाट प्लेस के सैंट्रल पार्क में दोनों मिले. दोनों की आंखें सूजी हुई थीं.

‘‘फोन आया था?’’ आदित्य ने पूछा.

‘‘हां. मैं ने उसे ब्लौक कर दिया,’’ आरोही ने कहा.

‘‘मैं ने भी.’’

2 मिनट की खामोशी. फिर आदित्य हंसा. ‘‘चलो अच्छा है अब कोई बहाना नहीं.’’

आरोही भी हंसी, ‘‘हां. अब नाटक बंद.’’

‘‘तो?’’ आदित्य ने उस की आंखों में देखा.

‘‘तो क्या?’’

‘‘तो यह 30 दिन का मजाक… सच कर दें?’’

आरोही का दिल जोर से धड़का. डर भी था. उम्मीद भी. खुशी भी. मुसकरा कर बोली, ‘‘हां. कर देते हैं सच.’’

उसी रात आदित्य ने मुन्ना भैया को काल की, ‘‘भैया, शादी फाइनल करते हैं 28 तारीख को.’’

‘‘बिलकुल हम पहुंच जाएंगे,’’ मुन्ना भैया ने मुसकराते हुए जवाब दिया.

सुबह 10 बजे कुल 10,342 रुपए के बजट में शादी का कार्यक्रम निश्चित किया गया. आदित्य के 2 दोस्त, आरोही की पीजी की 2 सहेलियां

थीं. सरकारी औफिस के माहौल में दोनों ने शादी की.

सुबह आरोही तैयार हुई. एकदूसरे को माला पहनाई, फोटो खिंचाए. हलके गुलाबी रंग का खूबसूरत सूट. हलका मेकअप. कोई मेहंदी नहीं. आदित्य नए ब्राउन कलर के कुरतापाजामा में था. इस समय दोनों के हाथ कांप रहे थे. मगर आंखों में खुशी ?ालक रही थी. शादी के वादे किए गए थे.

सिंदूर लगाते समय आदित्य का हाथ रुक गया. हंस कर बोला, ‘‘पक्का न?’’

आरोही ने आंखों से ‘‘हां’’ कहा.

फोटो खींचे. मुन्ना भैया ने 2 हजार लिए.

‘‘बधाई हो. सुखी रहो.’’ दोस्तों ने बधाइयां देते हुए गले लगाया.

बाद में सब ने एक अच्छे रेस्तरा में खाने का इंतजाम कर रखा था. रेस्तरा वाले ने एक सिंगल म्यूजिशियन बुलाने की इजाजत दे दी थी. जब दोनों ने एक बार फिर रेस्तरा में हार पहनाए तो वहां खाने आए सभी लोगों ने उन्हें तालियां बजा कर बधाई दी. कुछ तो दोनों के विवाह के साक्षी बन कर फोटो लेने की जिद करने लगे. वे सब अनजाने लोग दोनों के नए रिश्तेदार बन गए. कुछ ने पास की दुकानों से छोटेछोटे उपहार भी खरीद लिए और इन दोनों को बड़े लाड से दिए.

शाम को दोनों अपनेअपने पीजी आए. सामान पैक किया. आरोही का सामान आदित्य वाले फ्लैट में शिफ्ट हुआ. आदित्य ने 1 बीएचके फ्लैट किराए पर लिया था. किराया दोनों मिल कर देने वाले थे. रजिस्ट्रार औफिस की उस बैंच पर मिलने वाले दोनों युवा आज एक ही घर में शादी के बंधन में बंध कर और अतीत भुला कर एक नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे थे.

टिकटोक सोशल मीडिया की चमक के पीछे छिपा अंधेरा

स्क्री  न पर हंसती हुई, लिपस्टिक लगा कर वीडियो बनाती हुई पाकिस्तान की टिकटौकस्टार

28 साल की शम्सो बीबी उर्फ आयशा गिलमाना, जिसे 13 लाख लोग ‘आइडल’ मानते थे और हकीकत में इस्लामाबाद के पास टैक्सिला में 14 अगस्त को गोली से भून दी गई.

उस के पास एक फोन आया. ‘काशी’ नाम के शख्स ने घर से बाहर बुलाया और वह फिर लौट कर नहीं आई. पिता कहते हैं वजह पैसों का विवाद था. यह खबर सिर्फ पाकिस्तान की नहीं है यह हर उस घर की कहानी है जहां बेटी के हाथ में मोबाइल है और आंखों में सपने हैं.

फेम की कीमत : लाइक्स मिले पर इज्जत नहीं

आयशा के 13 लाख फौलोअर्स थे. ब्रैंड, पैसा, पहचान सब था. पर समाज ने उसे क्या दिया? ‘‘टिकटौकर है, चरित्र ठीक नहीं होगा,’’ यह ताना.

‘‘पैसा कमा रही है तो हिसाब दो,’’ यह दबाव.

ऐसे में कुछ खतरे हैं जो उन का रास्ता रोकते हैं:

औनलाइन दोस्ती का जाल: फैन बन कर डीएम में आना, फिर मिलना और फिर ब्लैकमेल

पैसे का विवाद: ब्रैंड डील, गिफ्ट, कोलैब के नाम पर धोखा.

इज्जत के नाम पर हिंसा: घर और समाज का दबाव, ‘‘यह काम छोड़ दो वरना…’’

क्या करें

अपनी आईडी प्राइवेट रखें. घर का पता, स्कूल, कालेज या रोज की लोकेशन शेयर न करें. अजनबी से अकेले न मिलें. ‘फैन मीट’ के नाम पर भी नहीं.

पैसे का हिसाब: ब्रैंड डील का कौंट्रैक्ट, पेमैंट बैंक में आए. पासवर्ड किसी से शेयर न करें न दोस्तों से और न ही किसी अन्य करीबी से.

पेरैंट्स से हर बात शेयर करें: मम्मीपापा को बताएं कि आप की किस से बात हो रही. कोई धमकी मिले तो चुप न रहें. स्क्रीनशौट ले कर 1930 साइबर हैल्पलाइन पर शिकायत करें.

इस सारे घटनाक्रम और टिकटौक स्टार की हत्या में दोष आखिर किस का है? लड़की का कि उसने कैमरा उठाया, सपना देखा? उस ‘काशी’ का जिस ने फोन कर बुलाया और गोली चलाई या फिर हमारी सोच का जो लड़की के कमाने को ‘चरित्रहीनता’ और लड़के के जुर्म को ‘आवेश’ कह देता है?

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