Marriage investigation : 23 वर्षीय नीलिमा का ऑफिस में काम करने वाले राजेश से काफी दिन से परिचय था, दोनों साथ – साथ घूमते और समय बिताते थे, करीब 2 साल बाद नीलिमा को लगा कि इस दोस्ती को शादी का नाम दे दिया जाय. नीलिमा इस बात को जब राजेश को बोली, तो वह थोड़ी सकपका गया और कहने लगा कि इतनी भी जल्दी क्या है, कर लेंगे शादी, लेकिन नीलिमा को राजेश की इस बात पर शक होने लगा कि जो इंसान हर दिन उससे मिलने की बात करता है. आज उसका रवैया शादी के प्रति ऐसा क्यों है. नीलिमा सोच में पड़ गई और राजेश की हरकतों को वाच करने लगी, क्योंकि इस बात के बाद से राजेश के व्यवहार में थोड़ा बदलाव आने लगा, वह अब रोज नहीं, एक दो दिन बाद नीलिमा की मेसेज का आन्सर देने लगा. नीलिमा ने तुरंत ये बात अपने फ्रेंड को बताई, फ्रेंड ने अपने एक दोस्त की डिटेक्टिव एजेंसी से संपर्क करने की सलाह दी, नीलिमा ने वही किया और पता चला कि उसकी शादी हो चुकी है, उसकी पत्नी और एक बच्चा भी है. नीलिमा ने तुरंत राजेश से बात की और रिश्ता तोड़ डाली.
ये तो अच्छा हुआ कि समय रहते नीलिमा को राजेश की सारी बातों का पता चल गया, जिससे उसने अपनी जिंदगी को बर्बाद होने से बचा लिया. आज के परिवेश में शादी करने के लिए लड़के लड़की मिलते है और उसकी पिछली जिंदगी को जाने बिना शादी कर लेते है और बाद में पछताते है, ऐसे में अगर किसी प्रोफेशनल डिटेक्टिव एजेंसी का सहारा लिया जाय, तो बहुत हद तक धोखेबाजी से बचा जा सकता है.
क्या कहती है आँकड़े
आंकड़े बताते है कि भारत में धोखाधड़ी (मैट्रिमोनियल फ्रॉड) और फर्जी शादियों के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में लगभग 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, ऑनलाइन मैरिज प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली शादियों में इस तरह के मामलों में तेजी से उछाल आया है, जो चिंता का विषय है.
प्री मैरिज इंवेस्टिगेशन
इस बारें में मुंबई की कॉन्फिडेंसीयल केस फाइल्स की प्रनव दवे उर्फ राज, जो सालों से जासूसी की दुनिया में एक बड़ी टीम के साथ काम कर रहे है. उनका कहना है कि अधिकतर इनोसेंट लोग शादी को लेकर धोखा खा जाते है, क्योंकि आज की जेनरेशन लव मैरिज को अधिक पसंद करती है, जिसमें वे परिवार को अधिक महत्व नहीं देती, ऐसे में जिसके साथ शादी करते है, पता चलता है वह लड़का या लड़की गलत है. फिर कानूनी दांव पेच के द्वारा एक दूसरे के हेरेशमेंट का दौर चलता रहता है. यहाँ एजेंसी अपनी भूमिका निभाकर सारे सबूत इकट्ठा करती है, ताकि उनकी मासूमियत का पता चल सकें. इसमें लीगल मानदंड के बीच में रहकर काम किया जाता है. इसमें जांच करवाने वालों की भी सत्यता जांच करनी पड़ती है, जो पहले किया जाता है. कई लोग डायरेक्ट कॉल करके मुझसे कॉल डिजिटल रिकार्ड मांगते है, जो एक तरह से गैर कानूनी है, जो नहीं करता. वैसे तो कई प्रकार के काम डिटेक्टिव एजेंसियां करती है, लेकिन इसमें सबसे अधिक प्री मैरिज इंवेस्टिगेशन पर काम अधिक होता है, जिसमें अरैन्ज मैरिज वाले काफी होते है, जिसमें लड़का या लड़की कितना सही है, इसे पता करना पड़ता है, जो 12 से 15 दिनों में पूरा किया जाता है और पार्टी को रेड फ्लैग या ग्रीन फ्लैग दे दिया जाता है. लव मैरिज वाले अक्सर शादी के बाद आटे है, जब उन्हें पति या पत्नी पर शक होता है.
बैकग्राउन्ड पर दें ध्यान
इसके आगे प्रनव कहते है कि आजकल लव मैरिज का दौर चल रहा है, जिसमें यूथ परिवार पर ध्यान कम देते है. कुछ यूथ मल्टीपल पार्टनर्स रखते है, ऐसे में शादी के बाद वे एडजस्ट नहीं कर पाते और रिश्ते टूट जाते है. ऐसे में किसी के साथ भी कुछ भी संदेहजनक होने पर उसकी जांच करवा लेना ठीक होता है. इससे या तो रिश्ता मजबूत हो जाता है या पहले ही टूट जाता है, जो दोनों के लिए ठीक होता है. आजकल धोखेबाजों की संख्या पहले से काफी बढ़ी है. आज लोग काफी स्मार्ट है, उन्हे पकड़ना आसान नहीं होता. हर समुदाय के अपराधी का पैटर्न एक जैसा होता है. इन बदलाव को समझना जरूरी होता है, लक्षण निम्न है,
- जब भी किसी व्यक्ति के ग्रूमिंग स्टाइल में अचानक बदलाव आने लगे,
- फोन का हर एप्लीकेशन को वह बंद दें,
- सेक्सुअली अपने पार्टनर के साथ कम ऐक्टिव हो,
- लेट नाइट चैटिंग या पार्टनर से अलग रहने की कोशिश करें,
- घर पर समय पर न आना आदि कई हो, तो समझ लेना चाहिए कि रिश्ते में कुछ गड़बड़ है.
कई बार ऐसे भी केसेज आए है, जो पहले संदेहजनक था, पर बाद में पता चला कि सब ठीक है.
कमिटमेंट की कमी
प्रनव कहते है कि पहले के रिश्ते में पति – पत्नी पूरी जिंदगी साथ बिताने की कोशिश करते थे, लेकिन आज के जेनजी किसी रिश्ते से जल्दी बोर हो जाते है, कुछ नया इक्साइटमेंट खोजते है और रिश्ते से डाईवर्ट हो जाते है. कमीटमेंट की कमी आजकल बहुत अधिक है और ये अधिकतर उनकी परवरिश पर निर्भर करता है. अधिकतर लोग शादी कर लेते है, लेकिन वह व्यक्ति कहाँ से आ रहा है, इसकी जांच नहीं करते. इसमें दोनों जेंडर की कहीं न कहीं गलती होती है, जहां से दूरियाँ शुरू होती है. आज के डिजिटल के दौर में कुछ भी छुपाना संभव नहीं, इसलिए क्राइम करते व्यक्त सभी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए.
बैकग्राउंड की जांच जरूरी
प्रनव आगे कहते है कि किसी भी लड़की या लड़के की शादी से पहले उनके घर और परिवार को देख लेना चाहिए, इसके बाद उसकी चाल – चलन, उसकी बैकग्राउंड देख लेना पड़ता है. शादी कराना कोई कठिन नहीं, लेकिन बाद में उसके ट्रोमा को सम्हालना मुश्किल होता है, जिससे आत्महत्या, मर्डर, डिवोर्स आदि की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. इस काम के लिए हजार से लाखों रुपये तक फीस होती है, जो केस की इंटेनसिटी पर निर्भर करता है.
सोशल मीडिया है जिम्मेदार
प्रनव कहते है कि सोशल मीडिया नए जेनरेशन को अच्छा से अधिक खराब बना रही है, सबको आज इसका एडिक्शन है, ये जहर के समान है, जिसे आप कंट्रोल नहीं कर सकते. इसका असर जेनजी और अल्फा जेनरेशन पर बहुत हो रहा है, वे हर गलत चीज को सही मान उसे फॉलो करने लगते है, जबकि वे प्रिन्ट मीडिया पर ध्यान नहीं देते, जो हर चीज को बारीकी से परखने के बाद प्रिन्ट करती है.
चुनें सही एजेंसी
अंत में प्रनव का कहना है कि सोशल मीडिया पर डिटेक्टिव एजेंसियां भी बहुत सारे है, लेकिन इसमें सही एजेंसी को चुनना आवश्यक होता है, नहीं तो लोग ठगी का शिकार बनते है. इसके लिए किसी भी सेंटर पर जाकर उसकी ठीक से जांच परख कर ले, ताकि बाद में पछताना न पड़े.
इस प्रकार डिटेक्टिव एजेंसियां आजकल हर तरह के जासूसी का काम मजबूती से कर रही है, जो आज की स्मार्ट जेनरेशन को कुछ हद तक सही दिशा दिखाने में सफल हो रही है, जान लें, सही निर्णय ही किसी को सही मुकाम तक पहुँचाने में सफल होती है.
