Volunteer work : आज कुछ बड़े यानी वयस्क समाज, पर्यावरण, कम्युनिटी आदि में बदलाव और संरक्षण के लिए किसी न किसी रूप में अपनी भागीदारी दे रहे हैं क्योंकि उन्हें इन सब का महत्त्व सम?ा आ रहा है. मगर खेद यह है कि लोगों में यह समझ बहुत देरी से आई. तो यही देरी हम अपने बच्चों में क्यों आने दें? क्यों न उन्हें पहले से एक अच्छी और विकसित सोच दें ताकि वे अच्छे और जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी आगे बढ़ कर आएं.
इस के लिए स्कूल में पढ़ाई मोरल
वैल्यूज, ईवीएस चैप्टर ही काफी नहीं बल्कि प्रैक्टिकल क्लासेज भी जरूरी हैं. प्रैक्टिकल यानी वौलंटियर वर्क.
बच्चों को वौलंटियर यानी स्वयं सेवा करना सिखाना उन के विकास के लिए बहुत आवश्यक है. इस से उन में सहानुभूति विकसित होती है. वे सोशल स्किल्स सीखते हैं और समाज के लिए कुछ करने की भावना भी उन में पैदा होती है.
शुरुआती समय से ही इन से जुड़ने पर बच्चों को विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने में मदद मिलती है. वास्तविक दुनिया की परेशानी, उस का प्रभाव उन्हें दिखता है और साथ ही उन्हें यह भी एहसास होता है कि उन के कार्यों से बदलाव हो सकता है.
कैसे जोड़ें
आप बच्चों को स्कूलिंग कैंपेन में भाग लेने को कहें, साथ ही अपनी सोसाइटी, हाउसिंग कम्युनिटी के ऐसे वौलंटियर कैंपेन की शुरुआत करें. यदि कौरपोरेट सैक्टर यानी यदि आप का औफिस इस तरह के कैंपेन से जुड़ा है तो बच्चों को भी वह कार्यक्रम दिखाएं. इस तरह की पहल आप बच्चों के समर वैकेशन में ही क्यों न करें क्योंकि इस में आप को उन्हें वौलंटियर वर्क दिखाने और सम?ाने का अच्छा समय मिलेगा साथ ही बच्चे भी फुजूल की ऐक्टिविटीज या स्क्रीन से चिपकने से दूर रहेंगे.
वौलंटियर वर्क या कैंपेन में क्याक्या किया जा सकता है
टीचिंग वर्क: जहां बड़े यानी वयस्कों के साथ मिल कर बच्चे छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं. इस से पीडि़त बच्चों को एक सीमित समय के लिए ही सही शिक्षा मिलती और साथ ही शिक्षा देने वाले बच्चों को उस शिक्षा का असली महत्त्व समझ भी आता है और दिखाई भी देता है.
सोशल क्लीननैस और हाइजीन: इस तरह के प्रोग्राम से जुड़ कर बच्चों में निजी और सार्वजनिक दोनों स्तर की साफसफाई की जागरूकता और आवश्यकता की अच्छी समझ आएगी. इस से एक तो स्वयं इस का ध्यान रखेंगे, साथ ही दूसरों को भी समझाएंगे.
प्लांटिंग ट्रीज: पेड़पौधों का वृक्षारोपण या प्लांटिंग भी बहुत ही अच्छा विकल्प है बच्चों के लिए. इस तरह बच्चे अपने पर्यावरण का महत्त्व समझेंगे और उस के संरक्षण के लिए अपना उत्तरदायित्व भी सम?ाते हुए निरंतर अच्छे प्रयासों में एकजुट रहेंगे.
डोनेशन वर्क: वैकेशन में पेरैंट्स सोसाइटी के साथ या अपने बच्चों के फ्रैंड्स के साथ मिल कर नईपुरानी बुक्स, टौएज, कपड़ों का कलैक्शन कर के उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को डोनेट कर सकते हैं. इस से बच्चों को इस बात का महत्त्व समझ आएगा कि पुरानी चीजें भी दूसरों के लिए उपयोगी होती हैं और अगर हर चीज का सही इस्तेमाल करें तो वे अपने इस्तेमाल के बाद भी दूसरों के काम आ सकती हैं.
रीसाइक्लिंग और बरबादी का सबक: बच्चे इस तरह के वर्क से हर छोटीबड़ी बात और चीजों का सही यूज, उन का महत्त्व और लाइफ साइकिल पर उन का इंपैक्ट समझते हैं. जैसे प्लास्टिक कितना खराब है, पानी की वेस्टेज, बिजली की फुजूलखर्ची और इन सब का हमारे लाइफ साइकिल पर, हमारे ऐन्वायन्मैंट, हमारे प्लैनेट पर पड़ने वाला अच्छा और बुरा असर दोनों. साथ ही वे यह भी सीखेंगे कि चीजों को रीसाइक्लिंग कर कैसे फिर से उपयोगी बनाया जा सकता है.
सोशल कैंपेन या वौलंटियर वर्क आप के बच्चों में क्या बदलाव लाता है
टीमवर्क: सोशल कैंपेन में बच्चों को समूहों में काम करना पड़ता है, जिस से उन्हें साझा यानी एक लक्ष्य में योगदान देना, साथियों का समर्थन करना और रचनात्मक प्रतिक्रिया को स्वीकार करना सिखाया जाता है. यह बच्चों को एकता की भावना और ताकत दिखाता और समझता है.
सहानुभूति को बढ़ावा देना: बहुत से अनदेखे सामाजिक पहलुओं को देख कर, लोगों की परेशानियों के देखसमझ कर, उन से बातचीत कर या उन की कहानियां सुनने से बच्चे दूसरों के प्रति संवेदनशील बनते हैं, उन से सहानभुति रखते हैं.
सोचनेसमझने का दायरा बढ़ता है: एक विषम वातावरण में लोगों को देखना, उन की परेशानियों को देखना और उन्हें उन से बाहर निकालने के लिए सोशल कैंपेन को काम करते देखने से बच्चों का दृष्टिकोण भी बदलता है.
आत्मविश्वास बढ़ना: अपने छोटे प्रयासों से बदलाव देखना जैसे अपना पुराना टौय या बुक ही किसी दूसरे बच्चे को देते वक्त उस बच्चे की चेहरे पर खुशी देखना आप के बच्चे में यह विश्वास लाता है कि उस की छोटी सी मदद या कोशिश दूसरों को कितनी खुशी दे रही है और यह बात उस के अंदर आत्मविश्वास जगाती है कि उस ने एक अच्छा काम किया है, जिस से उस के अंदर और मदद करने की इच्छा, वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने की चाह बढ़ती है.
सोशल मैसेज: सोशल कैंपेन में बच्चों को क्रिएटिव पोस्टर, आर्ट, बैनर आदि बनाने का काम दे कर आप उन की क्रिएटिव स्किल्स और अपनी बात को कहने की योग्यता को निखार सकते हैं.
यह भी बहुत जरूरी है कि आप बच्चों को किताबों और पत्रिकाओं से जोड़ें ताकि उन्हें ठोस ज्ञान मिले. साथ ही जो पेरैंटिंग टिप्स आप को बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के लिए सोशल मीडिया से मिल रहे हैं उन्हें जानने के लिए तो आप को पूरा समय स्क्रीन को देना पड़ जाता है. ऐसे जब बच्चा आप को स्क्रीन से इतनी देर तक जुड़ा देखेगा तो फिर स्क्रीन से दूर होने की आप की बात वह इतनी आसानी से कैसे सम?ोगा? इसलिए आप भी किताबों का रुख करें क्योंकि वहां से आप को ऐसी बहुत जानकारी मिलती है जो अच्छे नागरिक और अच्छे व्यक्तिव को गढ़ने में बहुत उपयोगी होती है.
