Christmas Special: बची रोटियों से बनाएं हैल्दी लजानिया

सर्दियों का मौसम है, बाजार में सब्जियों की भरमार भी है, और बच्चों की हरदम कुछ अच्छा खाने की फरमाइश भी आपके पास आती ही रहती है. आजकल के बच्चों को चायनीज इटैलियन जैसे कॉन्टिनेंटल फ़ूड बहुत पसंद आता है तो क्यों न आज बाजार में अच्छे खासे महंगे दामों पर मिलने वाले लजानिया को घर में ही हैल्दी और हाइजीनिक तरीके से बनाया जाए. घर पर इन्हें बनाने का सबसे बड़ा लाभ है कि हम इसमें मनचाही सब्जियों को डालकर बच्चों को आसानी से खिला सकते हैं. रेस्टोरेंट में इसे बाजार में मिलने वाली सीट्स से बनाया जाता है, जब कि घर में हम इसे आटे से बनी रोटियों से भी आसानी से बना सकते हैं. तो आइए हम देखते हैं कि घर में बची रोटियों से इसे कैसे बनाया जाता है-

सामग्री (लजानिया बनाने के लिए )

गेहूं के आटे की रोटियां            3

चीज स्लाइस                         6

चीज क्यूब                             2

चिली फ्लैक्स                         1/4 टीस्पून

ऑरिगेनो                              1/4 टीस्पून

सामग्री (फिलिंग के लिए)

गाजर                 3

शिमला मिर्च        1

प्याज                  3

बीन्स                 10-12

पनीर                  50 ग्राम

बटर                  1 टेबलस्पून

नमक                1/2टीस्पून

ओरेगेनो             1/4 टीस्पून

चिली फ्लैक्स      1/4 टीस्पून

लहसुन अदरक पेस्ट  1 टीस्पून

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सामग्री (रेड सॉस के लिए)

बारीक कटा प्याज         2

बारीक कटा लहसुन       4 कली

बटर                             1 टीस्पून

टमाटर                          6

नमक                           1/4 टीस्पून

ओरेगेनो                       1/4 टीस्पून

लाल मिर्च पाउडर          1/2 टीस्पून

टोमेटो सॉस                  1 टेबलस्पून

सामग्री (व्हाइट सॉस के लिए)

बटर                          1 टीस्पून

मैदा                           1 टेबलस्पून

नमक                         1/4 टीस्पून

दूध                             डेढ़ कप

काली मिर्च पाउडर       1/4 टीस्पून

किसा चीज क्यूब                   1

विधि

लजानिया बनाने के लिए सबसे पहले हम फिलिंग तैयार करेंगे. सभी सब्जियों, पनीर और प्याज को बारीक काट लें. एक पैन में बटर डालकर प्याज और अदरक लहसुन पेस्ट डालकर 2-3 मिनट तक भूनें. सभी सब्जियां, कटा पनीर और नमक डालकर सब्जियों के गलने तक पकाकर ऑरिगेनो और चिली फ्लैक्स मिलाएं. तैयार फिलिंग को एक बाउल में निकाल लें.

रेड सॉस बनाने के लिए टमाटर को काटकर मिक्सी में पीसकर छलनी से छान लें. अब एक पैन में बटर डालकर प्याज और अदरक लहसुन के पेस्ट को भून लें. टमाटर प्यूरी, नमक, ऑरिगेनो और लाल मिर्च डालकर तेज आंच पर 3-4 मिनट तक पकाएं. गैस बंद करके टोमेटो सॉस मिलाकर एक बाउल में निकालें.

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व्हाइट सॉस बनाने के लिए एक पैन में बटर पिघलाकर मैदा को हल्का सा भून लें. लगातार चलाते हुए धीरे धीरे दूध मिलाएं ताकि गुठली न पड़ें. नमक, काली मिर्च और किसे चीज क्यूब को डालकर गैस बंद कर दें.

लजानिया बनाने के लिए एक नॉनस्टिक तवे पर 1 टीस्पून रेड सॉस फैलाकर 1 रोटी रख दें. रोटी के ऊपर पहले 1 टीस्पून रेड सॉस फिर 1 टेबलस्पून सब्जियों की फिलिंग, फिर 1 टीस्पून व्हाइट सॉस इस तरह फैलाएं कि रोटी पूरी तरह कवर हो जाये. अब इसके ऊपर 2 चीज स्लाइस रखें. इसी प्रकार शेष 2 रोटियों को भी क्रम से रेड सॉस, फिलिंग, व्हाइट सॉस और चीज स्लाइस से कवर करके एक के ऊपर एक लेयर लगा लें. सबसे ऊपरी सतह पर चीज स्लाइस के साथ साथ चीज क्यूब को भी किस दें. ऊपर से 1 टीस्पून पानी स्प्रिंकल कटके ऑरिगेनो और चिली फ्लैक्स डाल दें. अब इसे एकदम धीमी आंच पर 10 मिनट तक ढककर पकाएं. 10 मिनट बाद खोलकर तेज धार वाले चाकू से काटकर सर्व करें.

‘बुके नहीं बुक उपहार में दीजिये’- मुकेश मेश्राम, प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति

किताबों के पढने से जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आता है. इससे न केवल अच्छी सोंच का विकास होता है बल्कि जीवन में आने वाली कठिनाईयों का मुकाबला कैसे किया जाय इसकी क्षमता का भी विकास होता है. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस) और उत्तर प्रदेश  के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत मुकेश मेश्राम के करियर को देखे तो जीवन में किताबों के महत्व का पता चलता है. मुकेश मेश्राम मध्य प्रदेश  के बालाघाट जिले के वनग्राम बोरी गांव के रहने वाले है. इनके पिता प्राइमरी स्कूल में अध्यापक और मां खेतों में काम करती थी. मुकेश मेश्राम अपने घर से 5 किलोमीटर दूर स्कूल में पढने जाते थे. पढाई में अच्छे होने के कारण ग्रामीण प्रतिभा खोज परीक्षा की छात्रवृत्ति में तीसरी रैंक पाकर अच्छे स्कूल में दाखिला मिला. वहां से शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढे.

भोपाल के मौलाना आजाद टेक्नलौजी कालेज से आर्किटेक्ट में बीआर्क किया. आईआईटी रूढकी से एमआर्क करने के बाद इसरों में सांइटिस्ट के रूप में अपना कैरियर शुरू किया. वहां से भोपाल के मौलाना आजाद कालेज औफ टेक्नॉलौजी में प्राध्यापक के रूप में तैनात हो गये. जहां से उन्होने सिविल सर्विसेज की तैयारी की. पहली बार असफल होेने के बाद हार नही मानी. 1995 में वह सविल सर्विसेज में चुने गये. जम्मू-कश्मीर  कैडर मिला. 1998 में वह उत्तर प्रदेश आये और यहां विभिन्न प्रशासनिक पदों पर रहते खुद की एक अलग पहचान बनाई. आज भी उनके जीवन में बेहद सरलता और सहजता है. वे घूमने फिरने, कविताएं लिखने व किताबे पढने का शौक  रखते है. चिडियों के कलरव व नदियो के कलकल ध्वनि को सबसे अच्छा संगीत मानते है. मुकेश मेश्राम का व्यकितत्व इंजीनियरिग और कला साहित्य का अदभुत संगम है. पेश है उनके साथ एक खास बातचीत के प्रमुख अंश :-

सवाल  – आपका बचपन बहुत संघर्षपूर्ण और रोमांचक रहा है. आगे बढने में किन चीजों ने मदद की?

जवाब- हमारे पिता जी स्कूल टीचर थे. वह घर से 10-12 किलोमीटर दूर पढाने के लिये जाते थे. उस समय स्कूल टीचर का वेतन बहुत नहीं होता था. हम 5 भाई और 4 बहने थे. ऐसे में बहुत परेशानी थी. मेरी मां खेतों में काम करने जाती थी जिससे घर की आर्थिक मदद हो सके. हमने मेहनत से पढाई की. 8 कक्षा के बाद स्कालरशिप के लिये ग्रामीण प्रतिभा खोज परीक्षा पास की. वहां से खुद से आत्मनिर्भर बनाना षुरू किया. हम स्कूल में पढाई के साथ ही साथ दूसरे काम करते थे. प्रकृति से लगाव था तो गांव में ‘प्रेरणा बाल सभा’ बनाई. जिसके जरिये पौधे लगाने और कल्चरल कार्यक्रम करने लगे. मुझे कहानी और कविता लेखन का शोक था. इसमें मुझे राज्यस्तरीय पुरस्कार भी मिले. किताबों और अपने मातापिता का सहयोग आगे बढाने मे मददगार रहा.

सवाल  – स्कूल से जब आप कालेज पहंुचे तो वहां पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया?

जवाब- आर्किटैक्चर की पढाई के पहले साल में ही 16 वर्ष की उम्र में हमने एक पत्रिका ‘सुबास’ नाम से शुरू की. जिसमें विज्ञान, साहित्य, क्विज के साथ ही साथ युवाओं और बच्चों को लेकर जो भी फैसले सरकार करती थी उसको प्रकाशित किया जाता था. इसका आरएनआई रजिस्ट्रेशन भी कराया था. हमने तमाम बडे साहित्यकारों से संपर्क किया. इसके लिये उन सबने लिखा. 3 साल यह पत्रिका प्रकाशित हुई. हमारे साथी इसमें सहयोग देते थे. जब बीआर्क के 4 साल में पहुंचे पढाई में ज्यादा वक्त देने लगे तो यह पत्रिका बंद हो गई. इस पत्रिका को लोग बहुत पसंद करते थे. संपादक के नाम इतने पत्र आते थे कि पोस्ट ऑफिस वालों ने हमारे लिये अलग बॉक्स लगवा दिया था.

सवाल  – ‘आर्किटेक्ट’ से सिविल सर्विसेज मेे कैसे जाना हुआ?

जवाब- बीआर्क के बाद एमआर्क करने के बाद मैं जॉब करने लगा. पहले दिल्ली में फिर इसरों में. इसके बाद भोपाल में रीजनल इंजीनियरिंग कालेज में पढाते वक्त मुझे साथियों ने प्रोत्साहित किया कि सिविल सर्विस की परीक्षा मुझे देनी चाहिये. पहली बार सफल नहीं हुये. हमने इतिहास विषय लिया था. तैयारी पूरी नहीं थी. इसके बाद दूसरी बार में सफल हुये और 1995 में सिविल सर्विस में आ गया. वहा से बहुत सारे पदो पर काम करने का मौका मिला. समाज को अलग तरह से देखने और समझने के साथ ही साथ उनके लिये कुछ करने का मौका मिला. जिससे मन को सुकून मिलता है.

सवाल  – आमतौर पर कहा जाता है कि हिंदी बोलने और लिखने वाले लोग इस परीक्षा में बहुत सफल नहीं होते. आपकी क्या राय है?

जवाब- ऐसा नहीं है. अगर हम आंकडों को देखे तो अब तक सिलेक्ट हुए  26 फीसदी लोग उत्तर प्रदेश और बिहार से आते है. जो हिंदी बेल्ट कही जाती है. सिविल सर्विस में हर किसी को भी अवसर मिलता है. अगर वह अपने विषय का अच्छा जानकार हो. अच्छे से पढने वाले इस परीक्षा को पास कर लेते है. किताबों और अनुभव से जो ज्ञान मिलता है. वह इस कैरियर में आगे बढाने में मदद करता है. हमंेे लगता है कि लोगो को उपहार में बुके की जगह बुक देनी चाहिये. इससे लोग पढेेगे और समझदार बनेगे.

सवाल  – आप पतिपत्नी दोनो ही प्रशासनिक सेवा में है. कैसे तालमेल होता है?

जवाब- हम घर में कभी ऑफिस का काम नहीं ले जाते. एक दूसरे के काम का सम्मान करते है. इस तरह से जब समझदारी से काम होता है तो कोई दिक्कत नहीं आती है.

सवाल  – आपकी और हॉबीज क्या है?

जवाब- पर्यटन, स्केचिंग, म्यूजिक सुनने का शौक  है. मैं अक्सर इसके लिये प्राकृतिक जगहों पर पर्यटन करता हॅू.

Bigg Boss 15: Umar Riaz के साथ Cozy होते हुए दिखीं Rashami Desai, Rakhi Sawant ने कही ये बात

कलर्स के रियलिटी शो बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) की टीआरपी बढ़ाने के लिए मेकर्स जमकर कोशिश करते नजर आ रहे हैं. शो के कंटेस्टेंट भी लड़ाई और रोमांस से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं. इसी के चलते तेजस्वी प्रकाश और करण कुंद्रा (Tejran) की नजदीकियों के बाद अब शो में नया लव एंगल देखने को मिल रहा है. दरअसल, बिग बॉस 13 का हिस्सा रह चुकीं एक्ट्रेस रश्मि देसाई (Rashami Desai) और उमर रियाज (Umar Riaz) की लव स्टोरी शुरू होती नजर आ रही है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

रश्मि-उमर आए करीब

 

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हाल ही के एक एपिसोड में रश्मि देसाई ने देवोलीना से हुई एक लड़ाई में उमर रियाज से प्यार का इजहार किया था. हालांकि सभी ने इजहार को सीरियस नहीं लिया था. लेकिन वीकेंड के वार पर दोनों ने एक दूसरे को पसंद करने की बात कही थीं, जिसके बाद दोनों का रोमांस देखने को मिल रहा है. दरअसल, बीते एपिसोड में रश्मि देसाई और उमर रियाज काउच पर बैठकर रोमांस करते नजर आए थे, हालांकि इस दौरान दोनों देवोलीना भट्टाचार्जी के गेम के बारे में बात कर रहे थे. इसी बीच रश्मि देसाई और उमर रियाज ने एक दूसरे को गले लगा लिया था.

 

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राखी सावंत ने कही ये बात

 

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रश्मि देसाई और उमर रियाज को करीब देख राखी सावंत ने दोनों से पूछा कि लव लपाटा हो रहा है यहां? उमर रियाज बोले मौसम ही ऐसा है. जब आपको सर्दी लगती है तो आपको वॉर्म फीलिंग की जरूरत होती है. जब भी मुझे लगता है कि मेरे हाथ पैर नॉर्मल हो गए हैं मैं सामने वाले जो चल हट बोल देता हूं. हालांकि अगले दिन राखी सावंत ने दोनों की बात देवोलीना भट्टाचार्जी से करते हुए कहा कि क्या दोनों घर से बाहर जाने के बाद भी इस रिश्ते को बरकरार रखेंगे? वहीं देवोलीना कहती हैं कि मुझे नहीं पता. मैं रश्मि देसाई से कई बार इस बारे में बात कर चुकी हूं. वो हर बार मुझसे नाराज हो जाती है जब भी मैं उसका नाम उमर रियाज के साथ जोड़ती हूं. मुझे लगता है कि रश्मि देसाई मजाक कर रही है. राखी सावंत बोलती है कि किसी को गोद में बैठना जोक कैसे हो सकता है. मुझे लगता है शो में बने रहने के लिए दोनों दिखावा कर रहे हैं. बाहर जाने के बाद इन दोनों के बीच कोई रिश्ता नहीं रहेगा.

बता दें, शो में इन दिनों तेजरान यानी तेजस्वी प्रकाश और करण कुंद्रा की लवस्टोरी फैंस को काफी पसंद आ रही है. वहीं शो से हाल ही में बाहर हुए कंटेस्टेंट राजीव अदातिया ने भी दोनों की लव स्टोरी को सच बताते हुए शादी तक की बात कह दी थीं. वहीं ये खबर सुनकर फैंस काफी खुश हुए थे.

 

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5 Tips: Emergency Funds भी है जरूरी

मुसीबतें किसी को बताकर नहीं आती. इसके लिए जरूरी है कि आप पहले से तैयार रहें. भविष्य की जरूरतों के लिए आप जैसे काफी सारे लोग एक बड़ी राशि इंश्योरेंस, यूलिप, फिक्स डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते रहते हैं. लेकिन इन सब के बाद भी अक्सर आप कई बार ऐसी मुसीबत से निपटने में असमर्थ हो जाते हैं. पैसों की अचानक जरूरत के लिए हम अपनी एफडी और यूलिप का प्रीमैच्योर विड्रॉल कर लेते हैं, नतीजन पूरी रकम भी नहीं मिल पाती. ऐसे गलतियां लोग इमर्जेंसी फंड न बनाकर करते हैं.

1. तुरंत जरूरतों के लिए इमर्जेंसी फंड बनाएं

आजकल बढ़ती महंगाई के साथ हमारी अन्य जरूरतें भी उसी तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे में बीमारी, नौकरी छूटने या अन्य वजह से अचानक सामने आने वाले बड़े खर्चों से हमारा सारा बजट खराब हो जाता है. ऐसी ही समस्याओं से निपटने के लिए इमरजेंसी फंड बहुत जरूरी होता है. यह फंड ऐसी सेविंग होती है, जिसे तुरंत जरूरत के समय में आप खर्च कर सकते हैं.

2. कितना होना चाहिए इमर्जेंसी फंड

इमर्जेंसी फंड की राशि उतनी होनी चाहिए जो आपके 6 महीनों के खर्चों को पूरा कर सके. यदि आपके पास हैल्थ इंश्योमरेंस पहले से है तो तीन से चार महीने का इमर्जेंसी फंड भी पर्याप्त है. इसके लिए हर महीने अपनी सेविंग का 10 फीसदी हिस्साए इमर्जेंसी फंड के लिए तैयार करें. एक तय सीमा से अधिक बचत होने पर अपनी शेष राशि को अन्य विकल्प में निवेश कर सकते हैं.

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3. लिक्विड फंड में निवेश करें

इमरजेंसी फंड के लिए बैंक बचत खाता और लिक्विड म्युचुअल फंड में भी निवेश किया जा सकता है. इन फंड्स में लॉक-इन पीरिएड नहीं होता और विड्रॉल में भी ज्यादा समय नहीं लगता. बचत खाते में इमर्जेंसी फंड के तौर पर जमा राशि किसी भी समय एटीएम की मदद से निकाल सकते हैं. इमर्जेंसी के लिए कोशिश करें कि बैंक एफडी या म्यूचुअल फंड में निवेश न करना पड़े.

4. इमरजेंसी में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं

इमर्जेंसी के लिए आपका क्रेडिट कार्ड भी सहायक बन सकता है. क्रेडिट कार्ड के साथ 50 से 60 दिनों तक का क्रेडिट पीरिएड मिलता है. ऐसे में अस्पताल के खर्चों का भुगतान और दूसरे खर्चों के लिए क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं. लेकिन आपको बता दें कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेामाल विड्रॉल के लिए न करें. क्योंकि इससे ब्याज काफी बढ़ जाएगा.

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5. जरूर करवाएं हेल्थ इंश्योसरेंस

बीमारी या दुर्घटना के दौरान इमर्जेंसी फंड की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है. ऐसे में किसी भी अनिश्चितता से सुरक्षा के लिए अपने और परिवार के लिए एक हेल्थि इंश्योररेंस पॉलिसी होना बहुत जरूरी है. हेल्थ पॉलिसी की मदद से अस्पताल और इलाज के खर्च से बच जाते हैं. कैशलैस प्लान की स्थिति में इलाज के दौरान कोई भी धन राशि देने की जरूरत नहीं होती. लेकिन यदि कैशलैस नहीं है तो कुछ समय के लिए पैसों की जरूरत अवश्य पड़ सकती है.

6 TIPS: Pregnancy में पहनें मैटरनिटी बेल्ट

मैटरनिटी बेल्ट एक किस्म का पट्टा होता है जो गर्भवती महिलाओं के पेट और कमर को सहारा देता है. ये बेल्ट गर्भावस्था के बाद भी पहनी जा सकती है.  इसको पहनने से उभरी और सूजी हुई मांसपेशियां वापस अपने पुराने आकार में आ जाती हैं. यह लचीली बेल्ट गर्भवती महिलाओं को गर्भ के दूसरे और तीसरे तिमाही चरण में बहुत सहायता करती है.

गर्भवती महिलाओं को मैटरनिटी बेल्ट से कई फायदे होते हैं. गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद भी मैटरनिटी बेल्ट को पहनना जा सकता है.

1. दर्द कम करती है

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाओं को पीठ, कमर और जोड़ों में दर्द होता है. इस कारण वो अपने दैनिक काम करने में भी बहुत तकलीफ महसूस करती हैं. मैटरनिटी बेल्ट उनके गर्भ और पीठ को सहारा देती है और बिना किसी दर्द के काम करने में सहायता करती है. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह के दर्द होते हैं.

यह दर्द स्नायु, नितम्ब के अगले हिस्से और पेट के नीचे की तरफ होते हैं. इस दर्द का कारण मुख्यतः गर्भ के बढ़ने के कारण स्नायु और हड्डियों पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार होता है. बेल्ट के कारण यह भार बंट जाता है. अतः किसी एक स्थान पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ता. इसके साठ ही गर्भावस्था के दौरान शरीर में रिलैक्सिन नाम के होर्मोन की मात्रा बढ़ जाती है. इस कारण नितम्ब के जोड़ों पर असहाय दर्द होता है. कई बार इसी कारण पीठ के नीचले हिस्से में भी दर्द होता है. बेल्ट पहनने से जोड़ों को सहारा मिलता है और दर्द में आराम मिलता है.

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2. हल्का दबाव

यदि दिन भर के काम के दौरान पेट को हल्का-हल्का दबाव दिया जाता रहे तो यह गर्भाशय को सहारा देता है और चलने-फिरने के दौरान होने वाली मुश्किल को भी कम करता है. लेकिन यह ध्यान में रखा जाना चाहिए की दबाव बहुत ज्यादा ना हो और बेल्ट इतनी कसकर ना बांधी जाए कि पेट में खून का बहाव प्रभावित हो.

3. दैनिक क्रियाकलापों में सहायता

गर्भावस्था में नियमित रूप से चलने-फिरने से उच्च रक्तचाप, अवसाद और डायबिटीज जैसी बीमारियां दूर रहती हैं. लेकिन शारीरिक मेहनत के दौरान होने वाला दर्द और असहजता बहुत सी औरतों को टहलने-घूमने से रोक देते हैं. मैटरनिटी बेल्ट पहनने से आपका दर्द और असहजता कम होगी और आप अपनी दैनिक दिनचर्या को जी पाएंगी.

4. हर्निया के मरीजों के लिए लाभदायक

जिन महिलाओं को हर्निया की समस्या है, गर्भावस्था के दौरान यह बेल्ट उनके लिए बहुत आवश्यक और सहायक है.

5. शरीर की मुद्रा को सही रखती है

मैटरनिटी बेल्ट पहनने से आपकी पीठ को सहारा मिलता है जिस कारण शरीर की मुद्रा सही बनी रहती है. इससे नीचली पीठ जरुरत से ज्यादा खिंचने से बच जाती है. गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त वजन के कारण कई बार रीढ़ की मासपेशियां खिंच जाती हैं. मैटरनिटी बेल्ट इन मासपेशियों को खिंचचने से बचाती है और शरीर को सीधे रखने में सहायता करती है.

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6. प्रसव के पश्चात के फायदे

प्रसव के बाद मॉसपेशियां और स्नायु ढीले पड़ जाते है. उनको वापस अपने पुराने आकार में आने में समय लगता है. इसके साथ ही महिलाओं को अपने नवजात शिशु को भी देखना पड़ता है. प्रसव के बाद बेल्ट पहनने से यह आसान हो जाता है. नवजात शिशु के साथ ही नयी-नवेली मां के शरीर को भी स्वस्थ होने का मौका मिल जाता है.

इन सबके बावजूद, यह मैटरनिटी बेल्ट आपकी समस्याओं के समाधान का मात्र एक बाहरी सहारा है. यह भी जरूरी है कि इसपर आवश्यकता से अधिक निर्भर ना हों. जरूरी है कि मांसपेशियों और स्नायु की बेहतरी हेतु व्यायाम और खान-पान का खास ध्यान रखा जाए. यह बेल्ट पहनने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें.

फिल्म प्रमोशन में छाया Priyanka Chopra का अंदाज, फैंस पूछ रहे हैं कई सवाल

बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड में पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) आए दिन सुर्खियों में रहती हैं. पिछले दिनों अपनी मैरिड लाइफ  (Priyanka Chopra Married Life) को लेकर मीडिया में छाने वाली प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपने लुक को लेकर चर्चा में हैं. दरअसल, हाल ही में देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा ने अपना एक लुक  (Priyanka Chopra Look) फैंस के साथ शेयर किया है, जिसके चलते वह ट्रोलिंग का शिकार भी हो रही हैं. हालांकि फैंस उनके लुक को काफी पसंद कर रहे हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

ड्रैस थी खास

 

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दरअसल, हाल ही में एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा अपनी फिल्म द मैट्रिक्स रिसरेक्शन (The Matrix Resurrections) के ग्रैंड प्रीमियर में पहुंची. जहां उन्होंने एक शिमरी गाउन कैरी किया था. इस दौरान स्लिट  पैटर्न वाली ऑफ-शोल्डर शिमरी ड्रेस पहनकर जहां प्रियंका नमस्ते करती नजर आईं तो वहीं मां के साथ जमकर पोज देती हुई नजर आईं थीं.

 

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ट्रोल हुई प्रियंका

 

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लुक की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा ने अपने आउटफिट में शिमरी पैटर्न के साथ रस्ट-ऑरेंज कलर की स्लीव एड की थी, जो उनके लुक को और भी हौट बना रहा था. लेकिन ट्रोलर्स उनके इस लुक को पंखे से तुलना करते नजर आए. वहीं कुछ लोग उनसे सवाल करते नजर आए कि साड़ी किधर है. हालांकि फैंस प्रियंका चोपड़ा के लुक की तारीफें करते नजर आए थे.

 

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फैशन को लेकर सुर्खियों में रहती हैं प्रियंका

 

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प्रियंका चोपड़ा अक्सर अपने फैशन सेंस को लेकर सुर्खियों में रहती हैं. वह फैंस के साथ लगातार अपने लुक्स को शेयर करती हैं. वहीं फैंस भी प्रियंका चोपड़ा के लुक्स को काफी पसंद करते हैं. हाल ही में अपनी फिल्म प्रमोशन के दौरान प्रियंका के एक से बढ़कर एक अवतार ने सोशलमीडिया पर बवाल मचाया था. वहीं उनकी फोटोज काफी वायरल भी हुई थीं.

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Winter Special: सर्दियों में बनाएं ये 4 वन ड्राप आयल अचार

सर्दियों के मौसम में बाजार में सब्जियों की बहार होती है. इसीलिए इस मौसम में अचारों की भी बहार होती है. अचार जहां एक ओर भोजन को विविधता प्रदान करते हैं, वहीं दूसरी ओर भोजन के स्वाद को भी बढ़ाने के साथ साथ हमें पौष्टिकता भी प्रदान करते हैं. कुछ लोग अचार खाने से परहेज करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अचार में बहुत तेल मसालों का प्रयोग किया जाता है परन्तु आज हम आपको ऐसे कुछ अचार के बारे में बता रहे हैं जिन्हें बनाने में केवल 1 टीस्पून तेल और बहुत कम मसालों का प्रयोग किया गया है, ये बनते भी बहुत जल्दी हैं और खाने में भी बहुत स्वादिष्ट लगते हैं,  पर हां ये अचार ताजे ही खाने में अच्छे लगते हैं और इन्हें आप कम मात्रा में रखकर 10 से 15 दिन तक आराम से प्रयोग कर सकतीं हैं. तो आइये देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

-मूली का अचार

कितने लोगों के लिए          8

बनने में लगने वाला समय    20 मिनट

मील टाइप                         वेज

सामग्री

ताजी मूली                         4

राई की दाल                      1/2 टीस्पून

हल्दी पाउडर                      1/4 टीस्पून

चिली फ्लैक्स                      1/2 टीस्पून

नमक                               1/2 टीस्पून

नीबू का रस                         1 टीस्पून

सरसों का तेल                    1 टीस्पून

विधि

मूली को छीलकर पतले गोल टुकड़ों में काट लें. तेल को गर्म करके गैस बंद कर दें. अब इसमें राई और हल्दी डालकर मूली के टुकड़े डालकर  चलाएं. चिली फ्लैक्स, नीबू का रस और नमक डालकर अच्छी तरह चलाएं और 2-3 दिन बाद प्रयोग करें.

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-मिक्स वेज अचार

कितने लोगों के लिए          8

बनने में लगने वाला समय     20 मिनट

मील टाइप                       वेज

सामग्री

गाजर                          4

गोभी                            1 कप

हरी मिर्च                        6

अदरक                          1 मध्यम गांठ

नीबू                               4

राई की दाल                   1 टीस्पून

हल्दी पाउडर                  1/2 टीस्पून

नमक                           1 टीस्पून

हींग                              चुटकी भर

सरसों का तेल                1 टीस्पून

विधि

गाजर को छीलकर 1 इंच के लंबे और पतले टुकड़ों में काट लें. गोभी को भी छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें. 1 नीबू, अदरक और हरी मिर्च को भी लम्बाई में छोटे टुकड़ों में काट लें. शेष 3 नीबू का रस निकाल कर अलग रख लें. अब एक पैन में तेल गरम करके हींग, राई की दाल, हल्दी पाउडर डालकर सभी सब्जियां व नमक डालकर फुल फ्लेम पर 2 से 3 मिनट तक अच्छी तरह चलाते हुए पकाकर गैस बंद कर दें. ठंडा होने पर नीबू का रस मिलाकर एयरटाइट जार में भरकर तुरन्त ही प्रयोग करें.

-अदरक, कच्ची हल्दी का अचार

कितने लोगों के लिए            8

बनने में लगने वाला समय     20 मिनट

मील टाइप                         वेज

सामग्री

मोटा किसा अदरक               1/2 कप

मोटी किसी कच्ची हल्दी         1/2 कप

बारीक कटी हरी मिर्च             6

नीबू का रस                          1/2 कप

राई की दाल                        1 टीस्पून

काला नमक                        1/2 टीस्पून

काली मिर्च दरदरी कुटी         1/4 टीस्पून

विधि

एक बाउल में समस्त सामग्री को एक साथ अच्छी तरह मिक्स करके कांच के जार में भरकर 3-4 दिन तक धूप में रखकर प्रयोग करें.

-पिंड खजूर का अचार

कितने लोगों के लिए                8

बनने में लगने वाला समय        20 मिनट

मील टाइप                            वेज

सामग्री

बीज निकले ख़जूर                2 कप

नीबू का रस                         1/2 कप

काली मिर्च पाउडर               1/4 टीस्पून

काला नमक                        1/2 टीस्पून

सोंठ पाउडर                        1/4 टीस्पून

भुना जीरा पाउडर                1/4 टीस्पून

घी                                     1/4 टीस्पून

विधि

खजूर को धोकर साफ सूती कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें. अब इन्हें छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें. गर्म घी में कटे खजूर को तेज आंच पर 2 मिनट तक चलाते हुए भूनें ताकि इनकी नमी समाप्त हो जाये. जब ये ठंडे हो जाएं तो एक बाउल में डालकर समस्त सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं. कांच के जार में भरकर रखें. आप इसे तुरंत ही प्रयोग कर सकतीं हैं.

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शादी से पहले, शादी के बाद

इनसान की जो कामना पूरी हो जाती है उस के प्रति वह कुछ समय बाद उदासीन सा हो जाता है और दूसरी कामनाओं के पीछे भागने लगता है. आजकल विवाहित जोड़े, विवाह की बात तय होने के बाद एकदूसरे के लिए बहुत ही उतावले रहने लगते हैं, एकसाथ घूमतेफिरते हैं, खातेपीते हैं, भावी जीवन को ले कर बातें करते हैं, एकदूसरे के घर होने वाले आयोजनों में, उत्सवों में साथसाथ नजर आते रहते हैं, एकदूसरे के घर भी रह आते हैं, एकदूसरे का परिचय भी बड़े गर्व से लोगों से करवाते हैं. उस दौरान उन का एकदूसरे के प्रति समर्पण आसमान छू रहा होता है. दोनों को अपनी भावी ससुराल की हर चीज बहुत अच्छी लगती है. अगर कुछ बुरा भी लगता है तो उसे चुनौती समझ कर स्वीकार करते हैं. लेकिन यही कपल विवाह के साल 2 साल बाद एकदूसरे से उदासीन से हो जाते हैं, उकता से जाते हैं. यानी उन के प्रेम का रंग फीका पड़ने लगता है. एकदूसरे की अच्छाइयां बुराइयों में बदलने लगती हैं. जो बातें चैलेंज के रूप में ली थीं, वे जी का जंजाल बन जाती हैं. विवाह के पहले एकदूसरे का जो पहननाओढ़ना मन को बहुत भाता था, विवाह के कुछ समय बाद वही पहनावा फूहड़पन और भद्देपन में बदलने लगता है. एकदूसरे की कमियां गिनातेगिनाते रातें बीत जाती हैं. देखते ही देखते दोनों एकदूसरे से बेजार से हो जाते हैं. अलगअलग शौक पाल कर रास्ते अलगअलग करने लगते हैं. अगर दोनों जौब में होते हैं तो अधिक व्यस्तता का बहाना बना कर एकदूसरे से दूरियां बनाने लगते हैं.

बौलीवुड के सितारे इन की प्रेरणा बन जाते हैं. 10 में से 5 कलाकारों की यही कहानी होती है. रणधीर कपूरबबीता, अमृतासिंहसैफ, आमिर खान, संजय दत्त, रितिक रोशन आदि इसी राह पर चले हैं.

विवाह बाद दूरियां क्यों

दरअसल, हमारा जीवन एक गाड़ी की तरह है. पतिपत्नी उस गाड़ी के 2 पहिए हैं. यदि उन का संतुलन बिगड़े तो परिवार बिखरने तक की नौबत आ जाती है.

3-4 दशक पहले तलाक के मामले बहुत कम थे. उस के पीछे भी कुछ अहम कारण थे. उस समय युवकयुवतियों को सगाई के बाद भी मिलनेजुलने की इतनी छूट नहीं होती थी. एक सीमा रेखा होती थी. फोन पर बात होती थी. किसी पारिवारिक आयोजन में मुलाकात हो जाती थी. उन का जीवन एक ऐसी किताब की तरह होता था, जिस का 1-1 अध्याय पढ़ने को मिलता था. अगला अध्याय पढ़ने की उत्सुकता बनी रहती थी. इस प्रकार एकदूसरे के जीवन का 1-1 नया अध्याय पढ़ने में उम्र में, स्वभाव में परिपक्वता आ जाती थी. एकदूसरे के घरपरिवार, शिक्षा, कालेज, शौक, पुराने मित्रों के बारे में पता करते, सोचतेसमझते विवाह की नींव इतनी मजबूत हो जाती थी कि टूटने का सवाल ही नहीं उठता था.

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मगर आजकल अति आधुनिकता के पीछे भागते युवकयुवतियां अपने जीवन की किताब विवाह तय होते ही एकदूसरे को सौंप देते हैं. विवाह होने से पहले ही वे एकदूसरे की जीवन की किताब पढ़ चुकते हैं. इस कारण एकदूसरे के प्रति उत्सुकता, बेचैनी, जानने की ललक समाप्त हो जाती है.

नीरस बन जाती है जिंदगी

मृणाल का ही उदाहरण लें. वह बहुत ही मेधावी छात्रा थी. बंगाली परिवार से थी. कालेज में यूनियन के प्रैसिडैंट सुमीर, जो एक कट्टर ब्राह्मण परिवार से था, को दिल दे बैठी. दोनों एकदूसरे के आकर्षण में ऐसे डूबे कि सब कुछ भुला बैठे. मृणाल हर समय सुमीर की बातें करती. अब वह पढ़ने में पिछड़ने लगी. कईकई बार रात को भी गायब रहने लगी. परीक्षा परिणाम आया तो कई विषयों में अनुत्तीर्ण रही.

दोनों परिवारों के घोर विरोध के बावजूद दोनों का विवाह हो गया. पर कुछ ही सालों में मृणाल, जिस की सुंदरता खिलते गुलाब जैसी थी, पूर्णतया मुरझा गई. शुष्क काले घेरे शृंगार के नाम पर एक छोटी सी बिंदी बस. पीहर की बड़ी हवेली में रहने वाली ससुराल के छोटे से घर में रहती. दालचावल बीनती दिखती रही थी.

एक दिन मृणाल को उस की एक सहेली मिल गई तो मृणाल ने उसे बताया कि वह पहले खुल कर जीती थी पर उस के कट्टर ब्राह्मण ससुराल वालों ने दिल से नहीं स्वीकारा. बस बेटे की जिद के आगे घुटने टेक दिए थे. मुझे रसोईघर में खाना बनाने की अनुमति नहीं थी. रोज अपना खाना रसोईघर से बाहर बनाती. सास बहुत छुआछूत करती. सुमीर बिलकुल बदल चुका है. कहता है यहां रहना है तो उस की मां के अनुसार चलना होगा. किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो गया है. सारासारा दिन घर से बाहर रहता है. खानेपीने का कोई समय तय नहीं. उस की भी शिक्षा अधूरी है वरना कोई नौकरी ही कर लेती.

उस का यह हाल सुन सहेली की आंखें भर आईं. भरे मन से वह वहां से घर वापस आ गई. कुछ महीनों बाद सुमीर से तलाक ले कर मृणाल मायके लौट गई. यह सुन कर सहेली का मन बहुत उदास हो उठा कि विवाह से पहले प्रेम का, साथसाथ घूमनेफिरने, एकदूसरे को समझने का तलाक के रूप में अंत?

बढ़ती दूरियां

अर्थशास्त्री की नजर में किसी भी वस्तु का बाजार में भाव उस की भाग और पूर्ति के सिद्घांत पर टिका रहता है. जैसे बाजार में फल, सब्जी, दालें या अन्य किसी वस्तु की पूर्ति पर्याप्त मात्रा में है और मांग कम है तो बाजार भाव गिर जाता है. इस के विपरीत पूर्ति कम और मांग ज्यादा है, तो उस वस्तु के भाव एकदम बढ़ जाते हैं.

अर्थशास्त्र की मांग और पूर्ति का यही सिद्घांत वैवाहिक जीवन पर भी लागू होता है. यदि विवाह से पहले एकदूसरे की पूर्ति बहुत ज्यादा होती है अर्थात बहुत अधिक मिलनाजुलना रहता है तो विवाह के बाद मांग कम हो जाती है. दोनों आपस में छोटीबड़ी सभी बातें शेयर करते हैं. किसी बात पर कोई परदा नहीं है तो विवाह के बाद एकदूसरे के प्रति उत्सुकता समाप्त हो जाती है. जीवन में नीरसता सी आ जाती है. दूरियां बढ़ती हैं और फिर धीरेधीरे अलग होने के कगार पर आ खड़े होते हैं.

दूसरी ओर एक संतुलित तरीके से मिलनेजुलने पर आकर्षण बना रहता है. विवाह के बाद एकदूसरे को अच्छी तरह जानने की उत्सुकता बनी रहती है. विवाह के बाद दोनों एकदूसरे से अपनी बातें शेयर करते हैं तो जीवन में सरसता बनी रहती है. एकदूसरे को अधिक से अधिक जानने की कोशिश में आपस में बंधे रहते हैं.

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समय की मांग

समय की यह मांग है कि विवाह से पहले लड़का और लड़की एकदूसरे को अच्छी तरह समझपरख लें ताकि विवाह के बाद जीवन सही ढंग से गुजरे. पर कभीकभी युवा इस सुविधा का अनुचित फायदा उठाने लगते हैं. एकदूसरे को ज्यादा से ज्यादा प्र्रभावित करने के लिए अपनी आमदनी, परिवार, धनदौलत की बढ़ाचढ़ा कर तारीफ करते हैं. दोनों में से कोई एक या फिर दोनों ही एकदूसरे को सब्जबाग दिखाते हैं, जो भविष्य में जा कर घातक ही सिद्घ होता है.

गलतफहमी में न रहें

हमारे एक नजदीकी रिश्तेदारी में विवाह तय होने के बाद लड़कालड़की दोनों एकदूसरे का स्वभाव, आदतें समझने के बजाय एकदूसरे को प्रभावित करने के लिए झूठी शान बघारने लगे कि हमारे पास इतना धन है, इतना सोना है. खूब हवाई किले बनाने लगे. मगर जब विवाह हुआ तो पता चला कि दोनों ही साधारण परिवार से हैं. लड़की ने ससुराल में जा कर पाया कि लड़के द्वारा बघारी गई शेखियों में कुछ भी सच नहीं है. वह एक अति साधारण परिवार की बहू बन कर रह गई. असलियत खुलने पर बहुत झगड़ा हुआ. अपनी सारी उम्मीदों पर पानी फिरता देख 4 महीने में ही लड़की मायके लौट गई.

विवाह से पहले लड़केलड़कियों का आपस में मेलजोल सही है. इस दौरान दोनों को अपने स्वभाव, आदतें, जीवन स्तर की सही तसवीर पेश करनी चाहिए. अपने जीवन की पूरी किताब एकदूसरे को न सौंप दें. कुछ पाठ विवाहोपरांत पढ़ने में ही आनंद आता है.

अपने होने वाले जीवनसाथी को किसी गलतफहमी में न रहने दें. इसी में दोनों का फायदा है, क्योंकि झूठे हवामहल बनाने से विवाह की नींव कमजोर रहती है और विवाह का महल भरभरा कर गिर जाता है.

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Sunrise Pure स्वाद और सेहत उत्सव में आज बनाते हैं दाल तड़का

घर का हैल्दी खाना अक्सर लोगों को पसंद नही आता. लेकिन अगर वो टेस्टी और नए अंदाज में बनाया जाए तो फैमिली का दिल जीत लेता है. अगर आप डिनर के लिए या लंच के लिए टेस्टी और हेल्दी रेसिपी ट्राय करना चाहते हैं तो दाल तड़का की ये रेसिपी आपके लिए परफेक्ट रेसिपी है.

सामग्री

–   200 ग्राम काली मूंग

–   1 प्याज कटा

–   1 छोटा चम्मच अदरक कद्दूकस की

–   1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

–   1 टमाटर बारीक कटा

–   1 हरी मिर्च बारीक कटी

–   1 बड़ा चम्मच नींबू का रस

–   थोड़ी सी धनियापत्ती बारीक कटी

–   2 बड़े चम्मच Sunrise Pure दाल तड़का मसाला

–   1 बड़ा चम्मच देशी घी

–   नमक स्वादानुसार.

बनाने का तरीका

  • 200 ग्राम काली मूंग को उबालकर एक तरफ रख दें. एक पैन में तेल गरम करें और उसमें कटा प्याज, लहसुन, अदरक और सूखी मिर्च को सुनहरा होने तक भूनें.
  • अब उबली हुई दाल, 2 बड़े चम्मच Sunrise Pure मसाला, कटे टमाटर, हरी मिर्च, स्वादानुसार नमक डालकर 5 मिनट तक पकाएं. कटे हरे धनिये से सजाकर सर्व करें.

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