Serial Story: रिश्ता (भाग-3)

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‘‘मीनाक्षीजी, आप के पास सोने का दिल है. मेरी बेटी आप के घर की बहू बन कर आती तो यह मैं उस का सौभाग्य मानता. मुझे पूरा विश्वास है कि वह इस घर में बेहद खुश व सुखी रहेगी. लेकिन अफसोस यह है कि अलका खुद इस रिश्ते में दिलचस्पी नहीं रखती है. मैं उसे राजी करने की कोशिश करूंगा, अगर वह नहीं मानी तो आप रोहन को समझा देना कि वह अलका को तंग न करे,’’ अशोकजी ने भावुक लहजे में मीनाक्षी से प्रार्थना की.

‘‘आप जैसे नेकदिल इनसान को जिस काम से दुख पहुंचे या आप की बेटी परेशान हो, वैसा कोई कार्य मैं अपने बेटे को नहीं करने दूंगी,’’ मीनाक्षी के इस वादे ने अशोकजी के दिल को बहुत राहत पहुंचाई.

अलका और रोहन के वापस लौटने पर इन दोनों ने उलटे सुर में बोलते हुए अपनीअपनी इच्छाएं जाहिर कीं तो उन दोनों को बहुत ही आश्चर्य हुआ.

‘‘अलका, तुम अगर रोहन को अच्छा मित्र बताती हो तो कल को अच्छा जीवनसाथी भी उस में पा लोगी. मीनाक्षीजी के घर में तुम बहुत सुखी और सुरक्षित रहोगी, इस का विश्वास है मुझे. मैं दबाव नहीं डाल रहा हूूं पर अगर तुम ने यह रिश्ता मंजूर कर लिया तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा,’’ अपनी इच्छा बता कर अशोकजी ने बेटी का माथा चूम लिया.

‘‘रोहन, अलका खुशीखुशी ‘हां’ कहे तो ठीक है, नहीं तो तुम इसे किसी भी तरह परेशान कभी मत करना. भाई साहब का ब्लड प्रेशर ऊंचा रहता है. तुम्हारी वजह से इन की तबीयत खराब हो, यह मैं कभी नहीं चाहूंगी,’’ मीनाक्षी ने बड़े भावुक अंदाज में रोहन से अपने मन की इच्छा बताई.

‘‘पापा, क्या आप चाहते हैं कि मैं रोहन से शादी कर लूं?’’ अलका ने हैरान स्वर में पूछा.

‘‘हां, बेटी.’’

‘‘आप की सोच में बदलाव आंटी के कारण आया है न?’’

‘‘हां, यह तुम्हारा बहुत खयाल रखेंगी, इन के पास सोने का दिल है.’’

‘‘गुड,’’ अलका की आंखों में अजीब सी चमक उभरी.

रोहन ने अपनी मां से पूछा, ‘‘मेरी इच्छा को नजरअंदाज कर अब जो आप कह रही हैं, उस के पीछे कारण क्या है, मां?’’

‘‘मैं इन को दुखी और चिंतित नहीं देखना चाहती हूं,’’ मीनाक्षी ने अशोकजी की तरफ इशारा करते हुए जवाब दिया.

‘‘आप की नजरों में यह कैसे इनसान हैं?’’

‘‘बडे़ नेक…बडे़ अच्छे.’’

‘‘गुड, वेरी गुड,’’ ऐसा जवाब दे कर रोहन ने अर्थपूर्ण नजरों से मां की तरफ देखा और बोला, ‘‘इन बदली परिस्थितियों को देखते  हुए हमें सोचविचार के लिए एक बार फिर बाहर चलना चाहिए.’’

‘‘चलो,’’ अलका फौरन उठ कर दरवाजे की तरफ चल पड़ी.

‘‘कहां जा रहे हो दोनों?’’ मीनाक्षी और अशोकजी ने चौंक कर साथसाथ सवाल किए.

‘‘करीब आधे घंटे में आ कर बताते हैं,’’ रोहन ने जवाब दिया और अलका का हाथ पकड़ कर घर से बाहर निकल गया.

कुछ पलों की खामोशी के बाद अशोकजी ने टिप्पणी की, ‘‘इन दोनों का व्यवहार मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है.’’

‘‘अगर दोनों बच्चे शादी के लिए तैयार हो गए तो मजा आ जाएगा,’’ मीनाक्षी की आंखों में आशा के दीप जगमगा उठे.

अलका और रोहन करीब 45 मिनट के बाद जब लौटे तो सोमनाथ और गायत्री उन के साथ थे. इन चारों की आंखों में छाए खुशी व उत्तेजना के भावों को पढ़ कर मीनाक्षी और अशोकजी उलझन में पड़ गए.

‘‘आप दोनों का उचित मार्गदर्शन करने व हौसला बढ़ाने के लिए ही हम इन्हें साथ लाए हैं,’’ रोहन ने रहस्यमयी अंदाज में मुसकराते हुए मीनाक्षी व अशोकजी की आंखों में झलक रहे सवाल का जवाब दिया.

सोमनाथ अपने दोस्त की बगल में उस का हाथ पकड़ कर बैठ गए. गायत्री अपनी सहेली के पीछे उस के कंधों पर हाथ रख कर खड़ी हो गई.

रोहन ने बातचीत शुरू की, ‘‘अलका के पापा का दिल न दुखे इस के लिए मां ने मेरी इच्छा को नजरअंदाज कर मुझ से यह वादा मांगा है कि मैं अलका को कभी तंग नहीं करूंगा. लेकिन मैं अभी भी इस घर से रिश्ता जोड़ना चाहता हूूं.’’

मीनाक्षी या अशोकजी के कुछ बोलने से पहले ही अलका ने कहा, ‘‘मैं रोहन से प्रेम नहीं करती पर फिर भी दिल से चाहती हूं कि हमारे बीच मजबूत रिश्ता कायम हो.’’

‘‘तुम शादी से मना करोगी तो ऐसा कैसे संभव होगा?’’ अशोकजी ने उलझन भरे लहजे में पूछा.

‘‘एक तरीका है, पापा.’’

‘‘कौन सा तरीका?’’

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‘‘वह मैं बताता हूं,’’ सोमनाथजी ने खुलासा करना शुरू किया, ‘‘मुझे बताया गया है कि ़तुम मीनाक्षीजी से इतने प्रभावित हो कि अलका से इस घर की बहू बनने की इच्छा जाहिर की है तुम ने.’’

‘‘मीनाक्षीजी बहुत अच्छी और सहृदय महिला हैं और अलका…’’

‘‘मीनाक्षीजी, आप की मेरे दोस्त के बारे में क्या राय बनी है?’’ सोमनाथ ने अपने दोस्त को टोक कर चुप किया और मीनाक्षी से सवाल पूछा.

‘‘इन का दिल बहुत भावुक है और मैं नहीं चाहती कि इन का स्वास्थ्य रोहन की किसी हरकत के कारण बिगड़े. तभी मैं ने अपने बेटे से कहा कि अलका अगर शादी के लिए मना करती है तो…’’

‘‘यानी कि आप दोनों एकदूसरे को अच्छा इनसान मानते हैं और यही बात आधार बनेगी दोनों परिवारों के बीच मजबूत रिश्ता कायम करने में.’’

‘‘मतलब यह कि जीवनसाथी अलका और मैं नहीं बल्कि आप दोनों बनो,’’ रोहन ने साफ शब्दों में सारी बात कह दी.

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है?’’ अशोकजी चौंक पड़े.

‘‘यह क्या कह रहा है तू?’’ मीनाक्षी घबरा उठीं.

‘‘रोहन और मेरी यही इच्छा रही है,’’ अलका बोली, ‘‘आंटी और पापा को मिलाने के लिए हमें कुछ नाटक करना पड़ा. हम दोनों ही विदेश जाने के इच्छुक हैं. मेरे पापा की देखभाल की जिम्मेदारी आप संभालिए, प्लीज.’’

‘‘अंकल, विदेश में मैं अलका का खयाल रखूंगा और आप यहां मां का सहारा बन कर हमें चिंता से मुक्ति दिलाइए.’’

‘‘लेकिन…’’ अशोकजी की समझ में नहीं आया कि आगे क्या कहें और मीनाक्षी भी आगे एक शब्द नहीं बोल पाईं.

‘‘प्लीज, अंकल,’’ रोहन ने अशोकजी से विनती की.

‘‘आंटी, प्लीज, मुझे वह खुशी भरा अवसर दीजिए कि मैं आप को ‘मम्मी’ बुला सकूं,’’ अलका ने मीनाक्षी के दोनों हाथ अपने हाथों में ले कर विनती की.

‘‘हां कह दे मेरे यार,’’ सोमनाथ ने अपने दोस्त पर दबाव डाला, ‘‘अपनी अकेलेपन की पीड़ा तू ने कई बार मेरे साथ बांटी है. अच्छे जीवनसाथी के प्रेम व सहारे की जरूरत तो उम्र के इसी मुकाम पर ज्यादा महसूस होती है जहां तुम हो. इस रिश्ते को हां कह कर बच्चों को चिंतामुक्त कर इन्हें पंख फैला कर ऊंचे आकाश में उड़ने को स्वतंत्र कर मेरे भाई.’’

गायत्री ने अपनी सहेली को समझाया, ‘‘मीनू, हम स्त्रियों को जिंदगी के हर मोड़ पर पुरुष का सहारा किसी न किसी रूप में लेना ही पड़ता है. बेटा विदेश चला जाएगा तो तू कितनी अकेली पड़ जाएगी, जरा सोच. तुझे ये पसंद हों तो फौरन हां कह दे. मुझे इन्हें ‘जीजाजी’ बुला कर खुशी होगी.’’

‘‘चुप कर,’’ मीनाक्षी के गाल शर्म से गुलाबी हो गए तो सब को उन का जवाब मालूम पड़ गया.

अशोकजी पक्के निर्णय पर पहुंचने की चमक आंखों में ला कर बोले, ‘‘मैं इस पल अपने दिल में जो खुशी व गुदगुदी महसूस कर रहा हूं, सिर्फ उसी के आधार पर मैं इस रिश्ते के लिए हां कह रहा हूं.’’

‘‘थैंक यू, अंकल,’’ रोहन ने हाथ जोड़ कर उन्हें धन्यवाद दिया.

‘‘थैंक यू, मेरी नई मम्मी,’’ अलका, मीनाक्षी के गले से लग गई.

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सोमनाथ और गायत्री ने तालियां बजा कर इस रिश्ते के मंगलमय होने की प्रार्थना मन ही मन की.

‘‘मेरी छोटी बहना, बधाई हो. हमारी योजना इतनी जल्दी और इस अंदाज में सफल होगी, मैं ने सोचा भी न था,’’ रोहन ने शरारती अंदाज में अलका की चोटी खींची तो मीनाक्षी और अशोकजी एकदूसरे की तरफ देख बडे़ प्रसन्न व संतोषपूर्ण ढंग से मुस्कुराए.

किसी भी धर्म के प्रति टोलरेंस रखने और सोचने की है जरुरत– शरमन जोशी

थिएटर से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता शरमन जोशी गुजराती परिवार से है.उन्होंने अभिनय के अलावा गुजराती, हिंदी, मराठी और अंग्रेजी थिएटर का निर्देशन भी किया है. उनकी पहली अभिनीत चर्चित फिल्म ‘रंग दे बसंती’ थी, जिसमें उनके अभिनय को आलोचकों ने सराहा. फिल्म ‘थ्री इडियेट्स’ भी काफी चर्चा में रही ,जिसमें उन्होंने राजू रस्तोगी, एक साधारण परिवार के इंजिनियर छात्र की भूमिका निभाई थी.

शांत और दृढ़ स्वभाव के शरमन का परिवार कला और साहित्य के बहुत करीब है. उनके पिता अरविन्द जोशी बीते ज़माने के गुजरती थिएटर आर्टिस्ट थे. शरमन ने बचपन से कला को नजदीक से देखा है और यही से उसे इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली. वे अपनी माता-पिता की सीख को अपने जीवन में उतारते है,जिन्होंने उन्हें एक अच्छे व्यक्तित्व के इंसान बनने के लिए हमेशा उन्हें उत्साह दिया. शरमनने हमेशा लीक से हटकर काम किया और सफल रहे. उनके इस कामयाबी में वे अपने माता-पिता और पत्नी का श्रेय देते है, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया. उनकी अंग्रेजी फिल्म ‘ग्राहम स्टेंस’ एक अनकही सच्चाई, द लीस्ट ऑफ़दीज’ शीमारू बॉक्स ऑफिस पर हिंदी में पहली बार रिलीज हो चुकी है, जिसमें अभिनेता शरमन जोशी ने पत्रकार की मुख्य भूमिका निभाई है. उनसे उनकी जर्नी के बारें में बात हुई, पेश है कुछ अंश.

सवाल-ये फिल्म हालाँकि अंग्रेजी में रिलीज हो चुकी है, लेकिन अब हिंदी में भी हुई है, क्या ये जरुरी था ?

अंगेजी में फिल्म बनी थी, लोगों ने देखा और पसंद भी किया, लेकिन हिंदी में होना भी जरुरी था, शीमारू ने इसे ओ टी टी प्लेटफॉर्म पर जगह दी है और उम्मीद करता हूं कि कुछ और दर्शक अब इस फिल्म के साथ जुड़ सकेंगे.

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सवाल- आपने इस सेंसिटिव इश्यु को लेकर बनी फिल्म में पत्रकार की भूमिका निभाई है, कितना रिसर्च करना पड़ा? कैसे किया?

मेरे लिए नयी भूमिका थी. फिल्म में मैं एक हैडलाइन की तलाश में था, जिससे मेरे पब्लिकेशन को अच्छी ऊँचाई मिले.मैंने इस चरित्र के लिए काफी सारे रिसर्च किया और पाया कि ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस अच्छा काम कर रहा था, क्योंकि वह कुष्ठ रोगियों की सेवा कर रहा था. धर्म परिवर्तन की दिशा में उसके खिलाफ जो आरोप था वह कितना सही था, इसकी जानकारी मुझे नहीं थी, लेकिन इसे करते हुए मैं भी भावुक हुआ था. इस फिल्म के द्वारा ये बताने की कोशिश की गयी है कि आप किसी भी धर्म से सम्बन्धरखते हो, पर आप को किसी दूसरे धर्म को भी इज्जत देने की जरुरत है. धार्मिक सहिष्णुता हर व्यक्ति में एक दूसरे के धर्म के प्रति आज होने की जरुरत है. आज के परिवेश में भी इस तरह की फिल्में सटीक बैठती है. केवल भारत ही नहीं विश्व के हर देश में धर्म को लेकर सालों से असहिष्णुता चलती आ रही है. ये फिल्म सभी इंसानों को बाध्य करेगा कि धर्म के प्रति टोलरेंस रखने और सोचने की उन्हें जरुरत है, ताकि सभी लोग सुरक्षित रहे.

सवाल- आजकल मीडिया की विश्वसनीयता लोगों के बीच कम होती जा रही है, हेड लाइन के लिए वे कुछ भी करने के लिए तैयार रहते है, आपकी राय इस बारें में क्या है?

ये बहुत ही गंभीर विषय है. मीडिया को चौथा स्तम्भ देश का माना जाता है, बिना सच्चाई और इमानदारी के छपी कोई भी खबर का नुकसान देश को ही भुगतना पड़ता है. हर पब्लिकेशन केवल दो पन्ने में मेरिट के आधार पर जिसमें किसी की गलत और सही बात को सच्चाई के साथ अगर उसमें प्रदर्शित करें, तो भी फायदा मीडिया हाउस को होगा, क्योंकि तब लोग इन दो पन्नों को पढने के लिए ही उस समाचार पत्र को खरीदेंगे. अभी तो सबको पता है कि बहुत सारे ख़बरों के लिए लोग पैसे देते है, जिसमें सच्चाई नहीं होती. इसलिए मीडिया पर से लोगों का विश्वास घटता जा रहा है. ये सोचने वाली बात है.

सवाल- आप सोशल मीडिया पर कितने एक्टिव है, उसके बारें में क्या सोच रखते है?

मैं सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव नहीं. न के बराबर मेरी उपस्थिती मेरी रहती है. अपने काम का पोस्ट अधिकतर करता हूं. इसके अलावा कुछ नहीं करता. ये अच्छी माध्यम है, बहुत लोगों को बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि वे उस पर अपनी बातें रख सकते है, लेकिन उसका दुरुपयोग या गैर उपयोग नहीं करना चाहिए.

सवाल- आपके कला के परिवार से सम्बन्ध रखते है, ऐसे में अभिनय से इतर कुछ सोचा क्या? किसे अपना आदर्श मानते है?

मेरे पिता, अंकल, आंटी सभी को अपना आदर्श मानता हूं. मेरी आंटी सरिता जोशी अभी भी काम कर रही है. मुझे बहुत गर्व महसूस होता है. उन्होंने गुजराती के अलावा हिंदी में भी बहुत काम किया है. परिवार को भी उन्होंने बखूबी सम्हाला है. मेरे पिता भी बहुत साधारण इंसान थे, पैसे के पीछे उन्होंने कभी भागा नहीं. उनके हिसाब से पैसे आते और जाते है. इंसान की जरूरतें बहुत अधिक कभी नहीं होती, इसका उदहारण इस लॉक डाउन ने सबको समझा दिया है.

सवाल-आपके कैरियर में आपकी पत्नी का सहयोग कितना रहता है?

पत्नी ने हमेशा साथ दिया है,कोई शिकायत नहीं है. उन्होंने हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया है.

सवाल- आप अपनी जर्नी को कैसे देखते है?थ्री इडियट्स की इतनी सफलता का अंदाज था क्या?

मेरे अंदर से आवाज आयी थी कि मैं एक्टर बनूँ और मैं बना. कदम रखते ही प्यार मिला औरसफल रहा. मैं इमानदारी से हर काम को करता हूं.फिल्म ‘रंग दे बसंती’ और थ्री इडियट्स के किरदार को लोग आज भी याद करते है. जो मुझे अच्छा लगता है. मैंने अच्छी-अच्छी फिल्में की है. मैं थिएटर से आया हूं. वहां मैंने बहुत काम सीखा है,जिसे मैं पर्दे पर लाता हूं. मेरे पिता गुजराती थिएटर और फिल्में किया करते थे. उस समय मुझे लगता था कि एक फिल्म से मुझे ख़ुशी मिल जाएगी, लेकिन एक के बाद कई और करने की इच्छा हुई और मुझे काम मिलता गया.फिल्म थ्री इडियट्स की स्क्रिप्ट बहुत पसंद आई थी, इतना प्यार मिलेगा सोचा नहीं था.

सवाल-इंटरटेनमेंट कंपनी बहुत मुश्किलों भरे दौर से इस समय गुजर रही है, क्या मेसेज देना चाहते है?

ये सही है, बहुत लोगों को काम अभी नहीं मिला है, लेकिन धैर्य रखने की बहुत जरुरत है. बहुत सारे लोग इसे भुगत रहे है. हिम्मत रखे, उम्मीद है थोड़े दिनों में फिर से सब नयी सोच के साथ शुरू हो जायेगा. इस समय परिवार की खुशियों का ध्यान रखें.

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सवाल-आगे आपकी कौन सी फिल्में है?

उमेश शुक्ला की फिल्म ‘आँख मिचौली’ है. कॉमेडी फिल्म है. इसके अलावा अब्बास मस्तान के साथ शुरू करने वाली थ्रिलर फिल्म है.

सवाल-गृहशोभा के ज़रिये क्या मेसेज देना चाहते है?

घरेलू महिलाएं होममेकर है और वे उतना ही जिम्मेदारी से काम करती है,इसलिए अपने को कभी कम न समझे और अपनी शौक को हमेशा निखारे. अगर कभी पति को आपका काम करना पड़े तब पता चलेगा, कि कितना मुश्किल है घर सम्हालना. इसके अलावा उत्सव का माहौल आने वाला है. सबको साथ लेकर खुशिया मनाएं.

Hyundai verna के साथ लॉन्ग ड्राइव पर नहीं आएगी कोई दिक्कत

न्यू हुंडई वरना के इस खास क्वालिटी के बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे. लॉन्ग ड्राइव के दौरान अगर आपको किसी तरह कि कोई दिक्कत आती है तो आप परेशान न हो.

हुंडई वरना कि स्पीड कम भी होती है अचानक कोई ऐसा रास्ता आता है जहां ज्यादा स्पीड की ज्यादा जरुरत होती है हुंडई वरना इसे खुद मैनेज कर लेती है. इसलिए इसे #betterThanTheRest कहा गया है.

REVIEW: बेवजह की जटिलताओं में फंसी बाल फिल्म ‘अटकन चटकन’

रेटिंग: डेढ़ स्टार

निर्माता:विशाखा सिंह

प्रस्तुति: ए आर रहमान

लेखक व निर्देशकः शिव हरे

कलाकारः जगदीश अमृतायन,  लायडियान नधास्वरन, यश राणे, सचिन चैधरी, तमन्ना चतुर्वेदी, देबाश्री चक्रवर्ती,  राज पुरोहित व अन्य.

अवधि: दो घंटे तीन मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः जी 5

‘‘नर हो न निराश करो मन को’’का संदेष देने वाली बेहतरीन विषयवस्तु व कथानक वाली बाल फिल्म का लेखक व निर्देशक शिव हरे ने बेवजह के जटिल रिश्तों की कथा घुसाकर पूरी फिल्म का बंटाधार कर डाला. दर्शक को केवल बच्चे के मुरझाए हुए भूरे व गंदे चेहरे ही याद रह जाते हं. यह लेखक व निर्देशक की विफलता ही है. फिल्म के प्रस्तुतकर्ता के रूप में संगीतकार ए आर रहमान का नाम देखकर दर्शक इस फिल्म को देखने के लिए प्रेरित होता है, पर उसके हाथ निराशा ही हाथ लगती है.

कहानीः

कहानी शुरू होती है विदेश में कहीं रह रहे गुड्डू से, जिसे उसके बचपन के मित्र माधव का कूरियर मिलता है, जिसमें माधव की शादी का निमंत्रण और एक किताब ‘‘अटकन चटकन’’है. इस किताब में उनके बचपन की ही कहानी है. गुड्डू उस किताब को पढ़ना शुरू करता है. कहानी शुरू होती है झांसी के पास एक गाॅंव से, जहां बारह वर्ष का गुड्डू अपने शराबी पिता की वजह से कुछ दूर शहर में तिवारी चाय वाले की दुकान पर नौकरी कर रहा है. उसकी मां मोहिनी ने उन्हे छोड़ दिया है. उसकी छोटी बहन लता है. गुड्डू की कमाई से ही उनका पेट भर पाता है. पर गुड्डू की हर हरकत में संगीत है. वह एक ‘‘यंग्स आर्केस्ट् दोनों’’ ग्रुप में नौकरी कर संगीत सीखना चाहता है, पर उसे अवसर नहीं मिलता.

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उसका सपना ‘तानसेन संगीत महा विद्यालय’से शिक्षा हासिल करना है. उसका दोस्त माधव पैर से अपाहिज है, पर फुटपाथ भीख मांगते हुए भी किताबें पढ़ता रहता है. नाटकीय तरीके से गुड्डू की मुलाकात छुट्टन और मीठी से होती है. पता चलता है कि मंगू चाचा ने उन्हे रेलवे माल गाड़ी के एक डिब्बे में रहने की जगह दे रखी है और वह भीख में मिली रकम में हिस्सा लेता है. माधव योजना बनाता है कि एक अपना संगीत का बैंड बनाया जाए, जिसमें माधव, गुड्डू, छुट्टन व मीठी हो. उधर ‘तानसेन महाविद्याल के प्रिंसिपल डिसूजा परेषान है,  पिछले तीन वर्ष से उनका विद्यालय संगीत प्रतियोगिता हारता आ रहा है. वह चाहते हैं कि इस बार उनके अवकाश ग्रहण से पहले उनका विद्यालय संगीत प्रतियोगिता जीत जाए, पर उन्हें अपने विद्यालय के छात्रों से उम्मीद नही है. उन्हे माधव व गुड्डू के बारे में पता चलता है, तो वह उन्हे अपने विद्यालय में प्रवेश देकर संगीत शिक्षक मोहिनी से शिक्षा दिलाकर प्रतियोगिता के लिए तैयार करवाते हैं.

प्रतियोगिता से एक दिन पहले पता चलता है कि गुड्डू के पिता विष्णु मशहूर पखावज वादक थे और उनकी मां मोहिनी मषहूर गायिका. मगर मोहिनी की लोकप्रियता के चलते विष्णु मोहिनी को घर से भगा दिया था. उधर विद्यालय के नाराज छात्र मंगू चाचा को पैसे देकर यह व्यवस्था करते हैं कि माधव की टीम प्रतियोगिता के लिए न पहुंचे. जबकि विष्णु यह जान गए हैं कि मोहिनी व गुड्डू मिलते हैं, इसलिए वह गुड्डू को घर से नही निकलने देता. पर घटनाक्रम इस तरह बदलते हैं कि माधव, गुड्डू,  छुट्टन व मीठी प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं व जीत भी हासिल करते हैं, पर एक घटनाक्रम के चलते हार का फैसला सुनने से पहले ही माधव सबको छोड़कर चला जाता है. गलती का अहसास कर माधव, गुड्डू से मिलने आता है, तो मुलाकात नही हो पाती है. पर अब उसने अपनी शादीदी में गुड्डू, छुट्टन व मीठी को बुलाया है.

लेखन व निर्देशन:

निर्देशक शिव हरे ने बच्चों के हिसाब से एक बेहतरीन कहानी चुनी थी,  मगर फिर उसमें तमाम जटिलताओं को पिरोकर  पूरी फिल्म का बंटाधार कर दिया अब या फिर ना तो प्रभावित करती है ना ही खुशी देती है. और ना ही दर्शक चाहता है कि अपने बच्चों को या फिल्म दिखाना चाहता.  निर्देशन भी काफी कमजोर है.

अभिनय:

कमजोर पट कथा और सही चरित्र चित्रण ना होने की वजह से सभी कलाकार सिर्फ साधारण अभिनय ही कर पाए हैं.

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‘बालिका वधू’ फेम इस एक्ट्रेस के घर गूंजीं किलकारी, शादी के 7 साल बाद बनीं मां

दुनिया में जहां कोरोनावायरस का कहर बढ़ता जा रहा है. वहीं कई लोगों की जिंदगी में खुशियां दस्तक दे रही हैं. बीते कुछ महीनों में कई सेलेब्स ने अपनी जिंदगी में नए मेहमान का स्वागत किया है. वहीं अब इन सेलेब्स में बालिका वधू में काम कर चुकीं एक्ट्रेस अंजुम फारुकी का नाम भी जुड़ गया है. बालिका वधू स्टार की जिंदगी में ये खुशी 7 साल बाद आई है, जिसकी खुशी उन्होंने सोशलमीडिया पर जाहिर की है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

बालिका वधू स्टार अंजुम ने बेटी की फोटो शेयर करते हुए बताया कि उनकी बेटी का जन्म 28 अगस्त, 2020 को हुआ था. अपनी बेटी पर प्यार बरसाते हुए अपनी पोस्ट पर अंजुम फारुकी ने लिखा कि, ‘दुनिया में तुम्हारा स्वागत है. मैं आप सभी को अपनी बेटी हानिया सैय्यद से मिलवाना चाहती हूं.’ अंजुम फारुकी की बेटी की फोटो में नन्हें हाथ नजर आ रहे हैं.

 

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Welcome to the world lil girl. Meet my daughter Haneya Syed 👼 28.08.2020.

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नेवी में काम करते हैं पति

 

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Here’s why I can never fit into 26″ waist jeans & that’s fine 😁 Watch till the end 🍧 #nofilters #foodielife #icecream #cake

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एक्टिंग की दुनिया से दूर अंजुम फारुकी के पति नेवी में काम करते हैं. अब वह अपनी पर्सनल लाइफ में व्यस्त हो चुकी हैं. एक इंटरव्यू में अंजुम फारुकी ने इस बात का खुलासा किया था कि वह टीवी की दुनिया को बहुत मिस करती हैं. हालांकि अंजुम फारुकी की तरह ही मोहिना कुमारी सिंह भी टीवी की चमकती इस दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं.

बालिका वधू से बटोरीं थी सुर्खियां

 

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7 years with this amazing man.. #alhamdulillah #grateful #7th

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सीरियल बालिका वधू में गौरी के किरदार में नजर आ चुकीं अंजुम फारुकी ने फैंस के बीच काफी पौपुलर हुई थीं. इस शो के जरिए अंजुम फारुकी को घर-घर में एक नई पहचान मिली थी. हालांकि कुछ समय बाद ही अंजुम फारुकी ने टीवी की दुनिया को अलविदा कहकर साल 2013 में शादी कर ली थी, जिसके बाद अब कर वह टीवी की दुनिया से दूरी बना चुकी हैं.

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Happy teacher’s day: जानें कैसे थे स्टार्स के अपने टीचर्स के साथ रिश्ते

बौलीवुड के सितारों पर बड़ों से लेकर बच्चा, हर कोई अपनी जान छिड़कता है. लेकिन कुछ सितारे ऐसे हैं जो दूसरों पर भी जान छिड़कते हैं. हर किसी का कोई ना कोई क्रश या कहें पहला प्यार होता है. वहीं बौलीवुड सितारें भी इसमें पीछे नहीं हैं. दरअसल आज यानी 5 सितंबर को टीचर्स डे सेलिब्रेट किया जाता हैं. इसी खास मौके पर आज हम आपको बताएंगे कि सेलेब्स कैसे अपने टीचर्स को दिल दे बैठे थे. और कौन उनका पहला प्यार बना था.

1. टीचर के लिए की पढ़ाई से दोस्ती

अपने क्रश के लिए कोई भी काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं लोग. इन्हीं में शामिल हैं. बौलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना, जिन्हें स्कूल में अपनी गणित की टीचर बहुत पसंद थी और अपने क्रश के पास रहने के लिए उन्होंने गणित से भी दोस्ती कर ली थी. हालांकि आगे चल कर उनका दिल किसी और टीचर पर आ गया था.

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2. टीचर से फ्लर्ट करते थे सलमान खान

 

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Respect to all the farmers . .

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सुर्खियों में रहने वाले बौलीवुड के दबंग खान यानी सलमान खान ने अपने आप इस बात का खुलासा करते हुए कहा था कि वह अपनी स्कूल टीचर को बहुत पंसद किया करते थे, जिसके कारण वह अपनी टीचर के साथ फ्लर्ट करने का मौका हाथ से नहीं जाने देते थे.

3. जब रणबीर कपूर को हुआ प्यार

बौलीवुड के चौकलेट बौय, जिन पर लड़कियां मरतीं हैं वह भी दूसरी क्लास में किसी के उपर जान लुटा चुके हैं. दरअसल, रणबीर कपूर को अपनी सेकेंड स्टैंडर्ड की टीचर से ही प्यार हो गया था. रणबीर उसे अपना पहला प्यार मानते हैं. इसका खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू में करते हुए कहा था कि मम्मी नीतू कपूर के बाद वह टीचर रणबीर को बहुत प्यार किया करती थीं.

4. विदेशी टीचर पर लट्टू हुए थे वरूण धवन

 

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Sweet 16🍼

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यूके में जब बिजनेस मेनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे वरूण धवन को अपनी एक्टिंग टीचर बहुत पसंद थी. और केवल 21 साल के वरूण की टीचर उनसे दो साल बड़ी थी. वह बात अलग है कि, वह अपनी टीचर से दिल की बात तो नहीं कह पाए थे.

5. साइंस टीचर पर मर मिटे थे सिद्धार्थ मल्होत्रा

 

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#GoodMorning ☀️

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बौलीवुड हंक सिद्धार्थ मल्होत्रा ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि, उन्हें 9वीं क्लास में अपनी साइंस टीचर पर क्रश था. सिद्धार्थ को उनसे बात करना बेहद पसंद था. वह सबसे बहुत अच्छे से बात करती हैं और उन्हें यही बात बेहद पसंद आती थी.

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Teacher’s Day 2020: गुरु के बारे में जानें क्या कहते है टीवी सितारें

गुरु की भूमिका हर व्यक्ति को निखारने में किसी न किसी रूप में सहायक होता है. यही वजह है कि गुरु शिष्य की परंपरा सालों से चली आ रही है. पहले ये शिक्षा आश्रमों और कुटियों में दिया जाता था, पर अब समय के साथ-साथ इसका रूप स्कूल और कॉलेज ले चुके है. ऐसा माना जाता है कि गुरु की शिक्षा के बिना किसी व्यक्ति का समुचित विकास संभव नहीं. गुरु केवल अध्यापक ही नहीं कोई भी हो सकता है, जो आपको सही मार्गदर्शन करवाएं और जीवन में आये किसी भी सही या गलत बातों से परिचित करवाएं. ये सही है कि बदलते समय में गुरु की परिभाषा बदल चुकी है.

गुरु शिष्य परंपरा में भी बदलाव आ चुका है, पर इसकी महत्ता को कभी भूलाया नहीं जा सकता. यही वजह है कि हर साल 5 सितम्बर को टीचर्स डे’ मनाया जाता है. इसी आधार पर ये जानने की कोशिश की गयी हैकि आखिर आज की पीढ़ी के जीवन में गुरु की परिभाषा क्या है? क्या सोचते है वे इस बारें में? कौन है उनके जीवन का आदर्श जिसे वे अपना गुरु या मेंटर मानते है? आइये जाने क्या कहते है छोटे पर्दे के सितारें.

रिषिना कंधारी कहती है कि मुझे जीवन में जिन लोगों ने सही और गलत का ज्ञान दिया है, वही मेरे गुरु है. जीवन में बहुत सारें लोग ऐसे मिलते है जो कुछ न कुछ आपको सीख देते रहते है, मैं अपने आपको ‘एकलव्य’ और शिक्षा देने वाले को ‘द्रोणाचार्य’ कहती हूं. अभी मैं जो शो कर रही हूं उसमें मुझे मारवाड़ी संवाद बोलने पड़ते है, जिसके लिए मुझे मेरे निर्देशक धर्मेन्द्र शर्मा और मेरी को एक्ट्रेस नीलू बाघेला है, जो मुझे संवाद के बारें में पूरी जानकारी देती है, अभी मैं उन्हें ही अपना गुरु मान रही हूं.

शशांक व्यास के हिसाब से मेरे अध्यापक मेरे जीवन के बहुत बड़े आदर्श है, उन्होंने मुझे जीवन के सही रास्ते दिखाए है, जिसपर चलकर आज मैं सफल हो पाया हूं, पर मेरी माँ की भूमिका भी इसमें कम नहीं है, हर पल, हर रास्ते पर वह मेरे साथ चली है. यहाँ मुझे एक बात का दुःख है कि गुरु को हमेशा अपने शिष्यों को समान दृष्टि से देखने की जरुँरत है, वे कम पढ़ाकू बच्चे और अधिक पढने वाले बच्चों के बीच में भेद-भाव कभी न करें. इससे बच्चे का मनोबल टूटता है. एक बार एक अध्यापक ने मेरे पिता से कहा था कि मेरा कोई एम्बिशन या गोल नहीं है, क्योंकि मेरे मार्क्स कम आये थे. मेरे हिसाब से अगर किसी छात्र को नंबर कम आते है तो अध्यापक को उस छात्र पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, इससे उन्हें आगे बढ़ने और आत्मविश्वास को बनाये रखने में सफलता मिलती है. बच्चों को सफलता से अधिक असफलता से निपटने की जानकारी गुरु को देने की आवश्यकता है. मार्कस जीवन में अधिक महत्व नहीं रखते, क्योंकि जीवन में हर कठिन परिस्थिति से निकलने में जो व्यक्ति सफल होता है, वही आज कामयाब है.

 

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Cinema is the most beautiful fraud in the world. 🥰

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अमल सेहरावत कहते है कि जो व्यक्ति आपको जीवन के उद्देश्य और आशावादिता को बनाये रखने में सहयोग दे वही गुरु है. मेरे पेरेंट्स और कास्टिंग डायरेक्टर अतुल मोंगिया ये दोनों मेरे जीवन के सही मेंटर रहे है. मुझे अभी भी याद है जब मुझे एक्टिंग में कोई काम नहीं मिल रहा था और मेरा आत्मविश्वास डगमगा रहा था, तब इन लोगों ने मुझे सहारा दिया और मेरे कॉन्फिडेंस को बनाए रखने में सहायता की थी और बर्तमान में रहने और उसे एन्जॉय करने की सलाह दी थी, इससे मैं अपनी सशक्तता को बनाये रखा और आज सफल हूं.

धारावाहिक ‘उडान’ और नागिन फेम विजेंद्र कुमेरिया का कहना है कि गुरु मेरे लिए वह है जो मुझे सही दिशा में चलने के लिए गाइड करें और जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करें. मेरे जीवन में मेरे पिता एक दोस्त, मेंटर और गाइड है. बचपन की कुछ यादे मुझे आज भी अच्छी लगती है. मुझे याद आता है जब मैं जूनियर क्लास में था और 5 साल का था, मेरा भाई सेकंड क्लास में था. उसकी क्लास टीचर एक पारसी लेडी थी, जो बहुत खूबसूरत थी. मैं कभी-कभी मेरे भाई से मिलने उसकी कक्षा में जाया करता था, क्योंकि मुझे वह लेडी मुझे चोकलेट दिया करती थी. एक दिन मैंने उसे कहा था कि मैं बड़ा होकर उनसे शादी करूँगा. अब मुझे ये सोचकर हंसी आती है.

 

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Need some more greenery in the concrete jungles. Don’t we???

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ध्रुवी हल्दंकर कहती है कि टीचिंग एक नोबल प्रोफेशन है और ये किसी भी बच्चे को एक आकार देने के साथ-साथ उसके जीवन को एक दिशा प्रदान करती है. मेरी गुरु पंडित बिरजू महाराज की बेटी ममता महाराज है, जिन्होंने मुझे जीवन का उद्देश्य बताया और समझाया है. वह मेरी कथक की गुरु है. इसके अलावा मेरी इंग्लिश टीचर अनीता अरोड़ा,वीना मलिक, मैथ टीचर ब्रांडा ब्रिगेंजा, जो मेरे माँ के हाथ का बनाया हुआ अचार पसंद करती थी और मुझे कई बार एक बोतल अचार लाने को कहा करती थी.

अंकित सिवाच कहते है कि गुरु केवल स्कूल और कॉलेज में ही नहीं पाए जाते. जो भी व्यक्ति आपके जीवन में आपको सही रास्ता दिखाए, आप पर विश्वास रखे, वही गुरु कहलाया जा सकता है. मैं परिवार से लेकर उन सभी के लिए आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने मुझे यहाँ तक पहुँचने में सहायता की है और अभी तक खुद को रुटेड रख पाया हूं. मुझे याद आता है, जब मैं 9 वीं कक्षा में था और मेरी फीलिंग नुपुर मैडम के लिए हो गया था. मैं बहुत चिंतित था और कई रातों तक ये सोचकर सो नहीं पाया था कि कही ये बात किसी को पता न चल जाय. आज इसे सोचकर हंसी आती है.

डिब्रूगढ़ आसाम और धारावाहिक संस्कार की चर्चित शमीन मन्नान के जीवनमें अलग-अलग समय पर अलग लोगों ने दिशा निर्देश दिया है, जिसमें नीरज काबी ने एक्टिंग के क्राफ्ट को समझाया है. वह कहती है कि मुझे याद आता है जब मैं 10 वीं कक्षा में थी और मुझे मेरे साइंस टीचर ने क्लासरूम से बाहर घंटो खड़ा किया था, क्योंकि मैंने क्लास में अपनी बेस्ट फ्रेंड को देखकर हंसी थी, जो मुझे बहुत ख़राब लगा था, क्योंकि सभी मेरे जूनियर्स मुझे देखकर हँसते हुए जा रहे थे, इससे मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुयी थी और मैं बाद में पूरे दिन रोई थी. अब मुझे उस बात को सोचकर हंसी आती है.

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धारावाहिक अनुपमा में चर्चित होने वाले अभिनेता आशीष मेहरोत्रा के अनुसार एक अच्छे गुरु की जरुरत हर बच्चे को होती है, ताकि वह उसके सपनो और उद्देश्यों को साकार होने में सही दिशा दिखा सकें. ये पेरेंट्स के साथ-साथ गुरु का होता है. जिसमें वह जीवन के मूल्यों, आज़ादी के सही अर्थ, आशा-निराशा, सही -गलत, सफलता-असफलता आदि सभी को सीखता है. मेरे जीवन में केवल एक मेंटर ही नहीं कई रहे है, जिसमें माता-पिता से लेकर पडोसी, सहकर्मी आदि सभी का किसी न किसी रूप में सहयोग मेरे कामयाबी में रहा है. मेरे स्कूल टीचर माधुरी मैडम, मुक्ता मैडम, अजय सर आदि के लिए मेरा सम्मान हमेशा से है. जबकि मुंबई आने पर कास्टिंग डायरेक्टर काविश सिन्हा, सौरव सर और प्रशांत सर आदि सबका सहयोग मेरे साथ रहा है. उन सभी के लिए मेरा आभार सदैव रहेगा.

किस स्किन टोन पर कैसा मेकअप फबेगा, जानिए यहां

महिलाओं को यह गलतफहमी होती है कि वे चेहरे पर क्रीम, पाउडर औैर कौस्मैटिक के दूसरे उत्पादों को लगा कर खूबसूरत दिखने लगेंगी. लेकिन ऐसा नहीं है. मेकअप चेहरे के आकार और त्वचा के रंग को ध्यान में रख कर ही करना चाहिए. तभी वह आप को खूबसूरत दिखाने में मदद कर सकता है.

बीते दिनों दिल्ली प्रैस भवन में गृहशोभा की फेब मीटिंग में प्रतिभागियों को मेकअप के इन्हीं गुरों को सिखाने के लिए शिल्पी ब्यूटी सैलून की मेकअप आर्टिस्ट शिल्पी कपूर ने बताया कि मेकअप हमेशा ऐसा होना चाहिए जिस से खूबसूरती निखर कर सामने आए.

गोरी त्वचा का मेकअप

सैशन की शुरुआत हुई फेयर स्किन यानी गोरी त्वचा के मेकअप टिप्स से जिस में शिल्पी ने बताया कि ज्यादातर पेल या फेयर स्किन वाली महिलाओं की त्वचा नाजुक होती है. जरा सी भी ईचिंग या स्क्रैच से उन का चेहरा लाल हो जाता है और उन की त्वचा पर मार्क्स दिखाई देते हैं. इसलिए इस रंग की महिलाओं को अलग तरह के मेकअप की जरूरत होती है.

पेल या फेयर स्किन पर मेकअप के दौरान गलती होने के बहुत चांसेज होते हैं. साथ ही गलत तकनीक से किए गए मेकअप से चेहरा भद्दा लगने लगता है.

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रंगों का इस्तेमाल

गोरे रंग या फेयर स्किन पर ब्राइट कलर हमेशा ही अच्छे लगते हैं. इसलिए मेकअप में भी इस बात का ध्यान रखें. फेयर कलर की महिलाओं को मेकअप में हमेशा डार्क और थोड़े चमकीले रंगों का प्रयोग करना चाहिए. वैसे ब्रौंज कलर फेयर कलर वालों पर बहुत खूबसूरत लगते हैं. खासतौर पर होंठों पर गहरे रंग की लिपस्टिक लगानी चाहिए.

फाउंडेशन

कई बार रंग साफ होेने की वजह से महिलाएं मेकअप बेस नहीं बनातीं. लेकिन यह गलत है. फाउंडेशन के इस्तेमाल से त्वचा को स्मूथ बेस मिलता है. साथ ही इस से स्किन टोन भी एक जैसा हो जाता है. यहां एक बात पर ध्यान देना जरूरी है. वह यह कि फेयर कलर वालों को फाउंडेशन चुनते वक्त बहुत सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यदि वे गलत फाउंडेशन का चुनाव करेंगी, तो उन का रंग काला या फिर ग्रे दिखने लगेगा. खासतौर पर रोशनी में गलत फाउंडेशन का असर ज्यादा दिखाई देता है. इसलिए फाउंडेशन लगाने से पहले उसे एक बार त्वचा पर लगा कर टैस्ट कर लेना चाहिए.

आंखों के लिए साधारण मेकअप

गोरे रंग वाली महिलाओं को आंखों का मेकअप जहां तक हो साधारण रखना चाहिए. वैसे तो इन के लिए काजल, आईलाइनर और मसकारा ही पर्याप्त होता है, लेकिन हलके रंग का आईशैडो भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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ब्लशर जरूर लगाएं

गालों पर कभी भी ब्लशर का इस्तेमाल करना न भूलें. इस के बिना आप का मेकअप पूरा नहीं होगा. पेल स्किन को खूबसूरत और ग्लोइंग दिखाने के लिए हलके ब्लशर की जरूरत होती है.

सांवली त्वचा का मेकअप

डार्क स्किन यानी सांवली त्वचा वाली महिलाओं को हमेशा इस बात की शिकायत रहती है कि वे अपनी त्वचा की रंगत को निखार नहीं सकतीं. इस के लिए वे बाजार में उपलब्ध बहुत सारे उत्पादों का प्रयोग करती हैं. कभीकभी इस की वजह से वे हीन भावना का शिकार भी होती हैं. लेकिन डार्क स्किन वाली महिलाएं भी मेकअप के जरीए अपनी त्वचा की रंगत को निखार सकती हैं और किसी भी समारोह में अलग दिख सकती हैं. ऐसी त्वचा वाली महिलाओं को मेकअप के दौरान अपनी स्किन टोन का ध्यान रखना चाहिए. इस के अलावा अपने चेहरे से मिलताजुलता कलर लिपलाइनर और ब्लशर का इस्तेमाल कर वे खूबसूरत दिख सकती हैं.

लिक्विड फाउंडेशन करें इस्तेमाल

सांवली महिलाएं मेकअप के लिए लिक्विड फाउंडेशन इस्तेमाल करें, क्योंकि यह त्वचा के रंग से मिल जाता है. यदि आप को अपनी स्किन टोन से मेल खाता हुआ फाउंडेशन नहीं मिलता है, तो आप 2 रंगों के फाउंडेशन को मिला कर अपनी टोन का रंग बना सकती हैं. फाउंडेशन लगाने से पहले चेहरे पर मौइश्चराइजर लगाना न भूलें.

ब्लशर का इस्तेमाल कभीकभी

डार्क स्किन वाली महिलाओं को हमेशा चेहरे पर ब्लशर नहीं लगाना चाहिए. हां, कभीकभार पार्टी आदि में आप इस का प्रयोग कर के एक सुंदर सा लुक पा सकती हैं. चेहरे को ब्लश करने के लिए डीप औरेंज, वाइन या कोरल रंगों का प्रयोग करें.

लिपस्टिक का प्रयोग

सांवली त्वचा वाली महिलाओं को लिपस्टिक का चुनाव भी रंग के हिसाब से करना चाहिए. जिन महिलाओं का रंग डार्क हो उन्हें पेल कलर्स यानी हलके रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. अगर आप को लिपस्टिक लगाना पसंद है तो आप डार्क कलर की ही लिपस्टिक लगाएं, जैसे वाइन, रैड, प्लम और ब्राउन आदि रंग आप की सुंदरता निखारेंगे.

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आईब्रोज के लिए

ऐसी महिलाओं को मेकअप के दौरान अपनी आइब्रोज को नजरअंदाज बिलकुल भी नहीं करना चाहिए. अपनी आईब्रोज को शेप देने के लिए पैंसिल और पाउडर का प्रयोग करना बेहतर होगा. ये आप की आंखों की खूबसूरती को बढ़ाते हैं.

कैसे चुनें सही ब्रा

आप को यह जान कर हैरानी होगी कि 10 में से 8 महिलाएं गलत ब्रा का चुनाव करती हैं. शरीर में ब्रा सही तरह फिट नहीं होगी तो ब्रैस्ट का आकार सही नहीं दिखेगा और आप कितनी भी स्टाइलिश ड्रैस क्यों न पहन लें वह आप पर अच्छी नहीं दिखेगी.

ब्रा ब्रैस्ट साइज के अनुसार ही पहननी चाहिए. कई बार महिलाएं या तो बड़े साइज की ब्रा पहन लेती हैं या फिर छोटे साइज की, जिस से ब्रैस्ट में ढीलापन आने लगता है और आकार में भी बदलाव दिखने लगता है. कई बार ज्यादा टाइट ब्रा पहनने से स्किन ऐलर्जी भी हो जाती है.

अगर आप चाहती हैं कि ब्रैस्ट का साइज सही रहे और वह सुडौल दिखे तो सही ब्रा का चुनाव बहुत जरूरी है.

आइए, जानते हैं सही ब्रा कैसे चुनें और उसे पहनते वक्त किनकिन बातों का ध्यान रखें:

ब्रा का सही माप

ब्रा का सही माप लेने के लिए इंचीटेप का इस्तेमाल करें. ब्रा साइज मापने के लिए बैंड साइज और कप साइज का माप लेना होता है.

बैंड साइज मापें

बैंड साइज मापने के लिए ब्रैस्ट के नीचे से चारों तरफ की लंबाई मापें. ध्यान रहे बांहें नीचे की तरफ रहें. अगर आप का बैंड साइज औड नंबर में आता है तो उस में 1 जोड़ दें. यदि आप का बैंड साइज 29 है तो उस में 1 जोड़ने पर उसे 30 माना जाएगा यानी आप का बैंड साइज 30 है.

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कप साइज ऐसे मापें

कप साइज मापने के लिए इंचीटेप को ब्रैस्ट के सैंटर पौइंट पर रख कर मापें. कप साइज हमेशा बैंड साइज से ज्यादा होगा. यदि आप का कप साइज 32 है और आप का बैंड साइज 30 तो इस में 2 इंच का अंतर है. 2 इंच का मतलब होता क्च कप यानी आप का ब्रा साइज 32 क्च है. यदि आप के कप साइज और बैंड साइज में 1 इंच का अंतर है तो इस का मतलब है ्न कप. अब आप दुकान पर जा कर आसानी से अपने साइज की ब्रा खरीद सकती हैं.

रखें इन बातों का ध्यान

कई महिलाएं व लड़कियां कोईर् भी साधारण ब्रा हर कपड़े के साथ पहन लेती हैं. लेकिन कुछ कपड़ों के लिए खासतौर पर ब्रा डिजाइन की जाती हैं. अगर आप उन परिधानों के साथ सही ब्रा पहनेंगी तो आप ज्यादा बेहतर और परफैक्ट दिखेंगी.

आइए, जानते हैं किन परिधानों के साथ कौन सी ब्रा पहनें:

पुशअप ब्रा: पुशअप ब्रा अधिकतर वे लड़कियां व महिलाएं पहनना पसंद करती हैं, जिन का ब्रैस्ट साइज कम होता है. कई बार जब टाइट कपड़े पहनती हैं तो ब्रा लाइन पता चलने लगती है. लेकिन पुशअप ब्रा में ऐसा नहीं होता. पुशअप ब्रा का एक फायदा यह भी है कि इसे किसी भी कपड़े के साथ पहना जा सकता है.

स्पोर्ट्स ब्रा: जो लड़कियां जिम जाती हैं या खेलकूद में हिस्सा लेती हैं, उन्हें उस वक्त स्पोर्ट्स ब्रा का इस्तेमाल करना चाहिए. यह ब्रैस्ट को पूरा कवर करती है. कई लड़कियां डांस या जिम करते वक्त नौर्मल ब्रा का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन जब वे ऐक्सरसाइज या जंप करती हैं तो बहुत अजीब लगता है. इसलिए स्पोर्ट्स ऐक्टिविटीज के समय लड़कियों को स्पोर्ट्स ब्रा का इस्तेमाल करना चाहिए.

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स्टिक औन ब्रा: स्टिक औन ब्रा शरीर से आसानी से चिपक जाती है. यह 2 कप के साथ आती है. इस में स्ट्रैप नहीं होता. यदि आप बैकलैस या स्ट्रैपलैस ड्रैसेज पहन रही हैं तो यह ब्रा आप के लिए परफैक्ट है.

अंडरवायर ब्रा: अंडरवायर ब्रा में एक स्ट्रिप या वायर होती है, जो ब्रा के अंदर होती है. इस ब्रा को पहनने के बाद यह ब्रैस्ट के नीचे सैट हो जाती है. ब्लाउज और टौप के साथ इस ब्रा को पहन सकती हैं.

मोल्डेड कप ब्रा: यह ब्रा एक गोल और सीमलैस शेप तैयार करती है. इसे पहनने के बाद कोई भी लाइन नहीं दिखती. यह ब्रा हाइनैक और टीशर्ट के साथ पहनने के लिए बेहतरीन है.

फैमिली के लिए बनाएं हींग वाली खस्ता कचौरी

शाम के समय नाश्ते में कचौरी और चाय का मेल स्वाद को और बढ़ा देता हैं. आइए जानते हैं खस्ता कचौरी बनाने की विधि.

सामग्री

मैदा – 220 ग्राम

तेल – 2 चम्मच

नमक – 1 चम्मच

बेसन – 50 ग्राम

सौंफ – 1 चम्मच

लाल मिर्च – 1 चम्मच

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धनिया के बीज – 1 चम्मच

आमचूर पाउडर – 1/4 चम्मच

अदरक पाउडर – 1/4 चम्मच

हींग – 1/8 चम्मच

पानी – 2 चम्मच

विधि

खस्ता कचौरी बनाने के लिए सबसे पहले आप एक बाउल लें और उसमें मैदा, तेल और नमक डालकर इसे पानी से गूंथ लें. अब दूसरा बाउल लें और उसमें बेसन, धनिया के बीज, सौंफ, हींग, आमचूर, तेल और नमक डालकर अच्छे से मिला लें.

अब इस मिश्रण को एक पैन में थोड़े-से तेल डालकर भून लें. ठंडा होने पर इसमें पानी मिलाकर इसे सॉफ्ट बना लें.

फिर तैयार किया हुआ गूंथे हुए आटे की लोई बना लें. लोई को हल्के हाथों से दबाएं और इसमें बेसन का तैयार किया हुआ मिश्रण को भरें.

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अब इसे मोटी रोटी की तरह बेलें. एक कड़ाही में तेल गर्म करें और कचौरी को डीप फ्राई करें. कचौरी को गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई करें. खस्ता कचौरी बनकर तैयार हैं.

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