#coronavirus: डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति को है अलर्ट रहने की जरूरत

कोरोना वायरस यानि कोविड 19 को लेकर विश्व में चारो तरफ लोग परेशान है, लेकिन इसमें सही हाईजिन और उचित मात्रा में खुद की देखभाल से इससे बचा जा सकता है. इस वाइरस के जीवाणु कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को अपनी चपेट में आसानी से ले लेता है. इसमें कैंसर, डायबिटीज और हाइपरटेंशन से पीड़ित व्यक्ति को अधिक देखभाल करने की जरुरत है. इस बारें में चेन्नई के डॉ. मोहन डायबिटीज के डाईबेटोलोजिस्ट डॉ. वी मोहन का कहना है कि डायबिटीज के रोगी आसानी से कोविड -19 के वाइरस से पीड़ित हो जाते है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है.  कुछ सावधानियां बरतने से इस रोग से अपने आप को रोका जा सकता है, जो निम्न है,

अच्छी हाईजिन को बनाये रखें,जिसमें अपने हाथ को नियमित पानी, साबुन और सेनिटाईजर से धोएं, जिन्हें खांसी, जुकाम या बुखार है, उनसे दूर रहने की कोशिश करें, क्योंकि ये वाइरस ड्रापलेट्स इन्फेक्शन के अंतर्गत आता है, इसलिए कोरोना वाइरस से पीड़ित व्यक्ति अगर खांसता या छींकता है तो आपके नजदीक होने से ये वाइरस आपमें भी फ़ैल जाता है, अगर आपको इन्फेक्शन है, तो आप मास्क अवश्य पहने और घर पर रहकर आराम करें ताकि जीवाणु दूसरों तक न फैलें.

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डायबिटीज के बीमार लोग अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखे, किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ाती है, इतना ही नहीं अगर डायबिटीज का स्तर अन कंट्रोल्ड हो तो इन्फेक्शन और अधिक बढ़ने का खतरा हो जाता है,

लगातार ग्लूकोमीटर से ब्लड के ग्लूकोस लेवल को मोनिटर करते रहे, ब्लड शुगर लेवल अगर बहुत हाई हुआ तो डॉक्टर की सलाह से उसे तुरंत कंट्रोल करें.

टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज जिसमें शुगर लेवल बहुत हाई होने की सम्भावना रहती है, जिसमें केटोसिस या डायबेटिक केटोएसिडोसिस डेवेलोप होता है, हॉस्पिटल में एडमिट होने की जरुरत नहीं पड़ती , लेकिन इसका स्तर बढ़ने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें. इसके अलावा इन्सुलिन की सुई को किसी के साथ शेयर न करें.

डायबिटीज के सभी रोगी को कोविड-19 से बचने की जरुरत है और अगर आपको इन्फेक्शन हो गया है तो अपने परिवार के कांटेक्ट में भी न आये. डायबिटीज को अच्छी तरह से कंट्रोल में रखें और मेडिकल अटेंशन जितनी जल्दी हो, लेने की कोशिश करें.

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सोशल मीडिया पर छाया उर्वशी रौतेला का ब्राइडल लुक, आप भी कर सकती हैं ट्राय

बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती के साथ अपने ग्लैमरस लुक को लेकर खूब सुर्खियां बटोरती रहतीं हैं आये दिन उनके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते रहतें हैं. इन दिनों वह सोशल मीडिया पर फिर छाई हुई हैं. हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम से कुछ लेटेस्ट फोटोज और वीडियो शेयर की हैं. जिसमें वह ट्रेडिशनल लुक में नजर आ रहीं हैं उर्वशी ने इस फोटो में लहंगा पहना हुआ है उर्वशी ने इस लहंगे वाली फोटो के साथ एक कैप्शन भी लिखा हैं “सदा सौभाग्यवती भव:”

उर्वशी का अपनी फोटो में कैप्शन लिखने का कारण उनका डिजाइनर एम्ब्रोइडरी वाला स्लीवलेस ब्लाउज है. जिसमें “सदा सौभाग्यवती भव:” लिखा हुआ हैं. अपने इस नए वीडियो में उर्वशी फैशन शो में दुल्हन बन कर रैंप वाक करती नजर आ रही हैं.वीडियो में उर्वशी रौतेला का अंदाज और उनकी खूबसूरती देखने लायक है. उन्होंने ने रेड दुपट्टे के साथ ऑफ वाइट कलर का लहंगा पहना हुआ है, इसके साथ खुले बाल के साथ हैवी ज्वेलरी में उनका दिलकश और ग्लैमरस अंदाज लोगों को दीवाना बना रहा हैं. उनके इस लुक को देख कर उनके एक फैन ने उनको लिखा, “ये कोरोना लुक हैं.” इससे पहले भी उर्वशी के बिकनी वाले लुक पर भी उनके फैंस ने कोरोना को लेकर कई कमैंट्स किए थे.


उर्वशी रौतेला के इस वीडियो में एक्सप्रेशन देने का खूबसूरत अंदाज लाजवाब है. उनके इस वीडियो को 4 लाख से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है. इसके अलावा उर्वशी रौतेला के और भी कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं,  फोटो में भी उर्वशी रौतेला का ब्राइडल लुक जबरदस्त लग रहा है.

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सोशल मीडिया के साथ-साथ टिकटॉक भी हमेशा एक्टिव नजर आती हैं. हाल ही में होली के मौके पर उनका एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. उर्वशी होली की पार्टी वाले वीडियो में वह खूब होली खेल रही है और होली गीतों पर अपने दोस्तों के साथ जमकर मस्ती करती हुई नजर आईं. एक वीडियो में पिचकारी भरकर अपने दोस्तों को रंगों से भिगो रही हैं तो वहीं दूसरे वीडियो में वह गुलाल से खेलती नजर आ रही हैं.

वह होली के त्योहार को पूरी तरह से इंजॉय कर रही हैं.उनके होली वाले वीडियो ने सोशल मीडिया पर खूब धूम मचाई थी . जो उनके फैंस को खूब पसंद आएं थे. उनका होली का जलेबी वाला एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है जिसमें वह जलेबी को अपने मुंह तक तो लेकर जाती हैं लेकिन उसे खाती नहीं हैं. इस पर उर्वशी ने लिखा है कि डाइटिंग की वजह से वह ऐसा नहीं कर सकती हैं. मिठाई न खा पाने का दर्द उनके चेहरे पर साफ झलकता है.

उर्वशी रौतेला के वर्क फ्रंट की बात करें तो उन्होंने बॉलीवुड में फिल्म ‘सिंह साब दि ग्रेट’ से अपने करियर की शुरुआत की थी. जिसमें वह एक्टर सनी देओल के साथ मुख्य भूमिका में नजर आई थीं. फिल्मों के अलावा उर्वशी ने हनी सिंह के सॉन्ग ‘लव डोज’ से भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं. आखिरी बार एक्ट्रेस फिल्म पागलपंती में दिखाई दी हैं, जिसमें उनके साथ अरशद वारसी, जॉन अब्राहम, कृति खरबंदा, इलियाना डिक्रूज और अनिल कपूर जैसे कई कलाकार भी अहम भूमिका में नजर आए.

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कर्ली हेयर को स्ट्रेट करने के लिए मै क्या करूं?

सवाल-

मेरे बाल बहुत कर्ली हैं. उन्हें स्थाई सीधा करने का कोई उपाय बताएं?

जवाब-

बालों में रोज गरम तेल लगाने से वे बहुत जल्दी सीधे हो जाते हैं और साथ ही उन में नमी भी बनी रहती है. गरम तेल बालों की ऐंठन और कर्ल को सीधा करने का काम करता है. नारियल तेल, औलिव औयल या फिर बादाम तेल का इस्तेमाल करें. तिल के तेल का भी प्रयोग कर सकती हैं.तेल को हलका गरमकर बालों पर लगा कर हलके हाथों से मसाज करें. 15 से 20 मिनट तक मसाज करना फायदेमंद रहेगा. बालों को फुल लैंथ कंघी करें. ऊपर से नीचे कंघी करने से जहां बालों की उलझन सुलझ जाएगी, वहीं धोने के दौरान भी वे कम टूटेंगे.कंघी करने के बाद हलके गरम पानी में तौलिया डुबो कर बालों पर बांध लें. इस से तेल बालों की जड़ों तक पहुंचेगा. करीब आधे घंटे बाद बालों को किसी माइल्ड शैंपू से साफ कर लें. उस के बाद जब बाल हलके गीले हों तभी कंघी कर लें. बाल जल्दी सीधे हो जाएंगे.

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आजकल कर्ली बाल काफी ट्रेंड में है. बौलिवुड की कई मशहूर ऐक्ट्रेसेस भी खूबसूरत कर्ल्स  में नजर आ रही हैं. कर्ली बाल देखने में तो काफी आकर्षक लगते हैं लेकिन इनका देखभाल करना भी बेहद मुश्किल होता है. तो चलिए आपको बताते हैं, कर्ली बाल की देखभाल करने के टिप्स. इससे आप आसानी से कर्ली बाल को मैनेज कर सकती है.

ऐसे करें कर्ली बालों की देखभाल

  1. बालों को कंघी करते समय कर्लिंग प्रौडक्ट का इस्तेमाल करें. बालों को सुखाने के लिए सौफ्ट कौटन टौवेल यूज करें. सुखाते समय बालों को टौवेल से न रगड़े बल्कि बालों को कौटन टौवेल से पोंछते हुए सुखाएं.

2. कर्ली बालों को सुलझाने के लिए हेयर ब्रश का इस्तेमाल न करें. इसकी बजाय मोटी कंघी से बाल झाड़ें. आसानी से कंघी करने के लिए बालों को हल्का गीला कर लें.

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#coronavirus: कोरोना वायरस से ज्यादा खतनाक है ‘डॉ. सोशल मीडिया’, बचें इन अफवाहों से

“बस कुछ दिन और सावधानी बरतनी है, सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) बनाये रखनी है, फिर गर्मी आ जायेगी, सूरज तेज़ निकलने लगेगा और कोरोना वायरस स्वत: ही खत्म हो जायेगा.” मेरे दोस्त ने व्हाट्सएप्प पर यह मेसेज फॉरवर्ड किया, इस दावे के साथ कि ‘यह एक विशेषज्ञ की राय है और इसमें शत प्रतिशत सच्चाई है’.

कोविड-19 की विश्वव्यापी महामारी के चलते यह और इस प्रकार के अन्य अनेक दावे सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहे हैं. इनमें कितनी हक़ीक़त है व कितना फ़साना है- यह जानना बहुत आवश्यक है न सिर्फ आपके अपने स्वास्थ के लिए बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि अपने देश में कोरोना वायरस स्टेज 3 में न पहुंचे, जो कि इस समय स्टेज 2 पर है.इसके अतिरिक्त उन धार्मिक संगठनों व नेताओं से बचने की भी ज़रूरत है जो सोशल मीडिया पर यह भ्रमक प्रचार कर रहे हैं कि उन हिन्दुओं को कोरोना वायरस नहीं हो सकता जो गौमूत्र का नियमित सेवन करते हैं या उन मुस्लिमों को कोरोना वायरस नहीं हो सकता जो नमाज़ के लिए पांच वक़्त वुज़ू (हाथ, मुंह धोना) बनाते हैं. एक अमेरिकी पादरी ने दावा किया कि कोल्लोडिअल सिल्वर (लिक्विड में घुला धातु) कोरोना वायरस को 12 घंटे में मार देगा और शरीर के इम्यून सिस्टम को मज़बूत करेगा. लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि सिल्वर पीने से लाभ होता है बल्कि इससे गुर्दे खराब हो सकते हैं. आयरन व जिंक की तरह सिल्वर ऐसा धातु नहीं है जिसका मानव शरीर में कोई काम हो.गौरतलब है कि कुछ दिन पहले एक हिन्दू संगठन ने दिल्ली में कोरोना वायरस से बचने के लिए ‘गौमूत्र पार्टी’ का आयोजन किया था. सरकार को चाहिए कि इस प्रकार के प्रचारों व आयोजनों पर प्रतिबंध लगाये. सऊदी अरब में मस्जिदों में नमाज़ अदा करने पर पाबंदी लगा दी गई है. महाराष्ट्र सरकार ने भी शिरडी संस्थान व अन्य मंदिरों को बंद किया है.

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सोशल मीडिया पर चल रहा फर्जी इलाज

तेज़ी से फैल रहे कोरोनावायरस का उपचार तलाश करने के लिए शोधकर्ता दिन रात एक किये हुए हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर अनेक फर्जी व अपुष्ट उपचार वायरल हो रहे हैं. ऑनलाइन दावों में सिर्फ एक ही सही प्रतीत हो रहा है और वह विश्व स्वास्थ संगठन (डब्लूएचओ) के हाथ धोने व हाइजीन संबंधी दिशानिर्देश हैं.आइये सोशल मीडिया के कुछ मिथकों पर गौर करते हैं कि वह झूठे क्यों हैं.पहले इसी दावे की समीक्षा करते हैं कि ‘कोरोना वायरस गर्म मौसम या सूरज की तपिश में खत्म हो जायेगा’.नये कोरोनावायरस पर अति सीमित शोध उपलब्ध है, विशेषज्ञों को मालूम नहीं है कि गर्म मौसम में इसकी प्रतिक्रिया क्या रहेगी. जो ‘भविष्यवाणियां’ हैं वह सार्स व मार्स महामारियों पर आधारित हैं.लेकिन तथ्य यह है कि कोरोना वायरस गर्म देशों जैसे सिंगापुर व ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही मौजूद है. हारवर्ड मेडिकल स्कूल के एक अध्ययन में सुझाव है कि चीन की स्थिति से स्पष्ट है कि कोरोना वायरस में विभिन्न तापमानों व उमस की स्थितियों में ज़िन्दा रहने की क्षमता है.

घरेलू उपचार का सहारा ले रहे लोग

सोशल मीडिया पर एक दावा यह है कि नमक के पानी से गरारे करने से कोरोना वायरस को रोका जा सकता है. लेकिन ऐसी स्थितियों से संबंधित डाटा से मालूम होता है कि श्वांश वायरस नमक के पानी से प्रभावित नहीं होते हैं.यह दावा कि ब्लीच या एथनॉल से गरारे करने पर मदद मिलती है न सिर्फ झूठा है बल्कि बहुत खतरनाक भी है. इन दावों के बावजूद कि गर्म पानी वायरस को ‘बेअसर’ कर देता है या आइस-क्रीम न खाने से मदद मिलती है तथ्य यह है कि वायरस को न ठंडा, न गर्म तापमान मार सकता है, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है.

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है कि हर 15 मिनट पर पानी पीने से वायरस आपके गले से बहकर आपके पेट में चला जायेगा, जहां तेज़ाब उसे मार देगा. लेकिन इस दावे के कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं कि किसी भी प्रकार के श्वांश  वायरस पर यह ‘टोटका’ काम आता हो. बहरहाल, इस बात में कोई शक नहीं है कि नियमित पानी पीना एक अच्छी आदत है और आप इससे हाइड्रेटेड भी रहते हैं.

लहसुन खाने से बचा जा सकता है कोरोनावायरस से

सोशल मीडिया का एक दावा यह है कि लहसुन खाने से कोरोनावायरस से बचा जा सकता है.डब्लूएचओ का कहना है कि लहसुन में कुछ एंटीमाइक्रोबियल गुण अवश्य हो सकते हैं,लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि यह कोरोना वायरस के खिलाफ काम करता है.आमतौर से ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि कोई खास फ़ूड का सेवन वायरस के विरुद्ध प्रभावी होता है.यह दावा भी सोशल मीडिया पर है कि फेस मास्क से कोरोना वायरस को नहीं रोका जा सकता.हालांकि फेस मास्क रोकथाम की 100 प्रतिशत गारंटी के साथ नहीं आते हैं – वायरस आंखों से भी शरीर में प्रवेश कर जाता है और वायरस के कुछ कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि मास्क को भी बाईपास कर जाते हैं – लेकिन वह खांसी या छींक के ड्रापलेट्स को रोकने में सक्षम हैं जिनसे कोरोना वायरस मुख्य रूप से फैलता है. जो लक्षण दिखा रहे हैं या पॉजिटिव टेस्ट हो गये हैं, वह अगर मास्क पहनेंगे तो वायरस को फैलने से रोका जा सकता है.दैनिक प्रयोग में जब बाज़ार जा रहे हों या बस ले रहे हों, मास्क से कोई विशेष अंतर नहीं आने वाला.बहरहाल, हाई-ग्रेड मास्क जैसे एन 95 हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए आवश्यक हैं.

वैक्सीन होने की फैली अफवाह

सोशल मीडिया का एक दावा यह है कि वैक्सीन उपलब्ध है या कुछ माह में उपलब्ध हो जायेगी. हालांकि कोविड-19 के लिए वैक्सीन विकसित करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन कमर्शियल वैक्सीन के उपलब्ध होने में अभी बहुत समय है. कुछ शोधकर्ताओं ने पशुओं पर संभावित वैक्सीन टेस्ट की हैं, फिर भी ट्रायल चरण लम्बी प्रक्रिया होता है ताकि सभी आशंकित साइड-इफेक्ट्स का संज्ञान लिया जा सके. अगर एक वर्ष में वैक्सीन तैयार हो जाती है तो इसे बहुत जल्द हासिल की गई कामयाबी समझा जायेगा.

बचकर रहें इन अफवाहों से

सोशल मीडिया के इस दावे को बिलकुल न मानें कि कोरोनावायरस मौसमी फ्लू जैसा ही है. कोविड-19 मौसमी फ्लू से दस गुणा घातक है और यह दावा भी दुरुस्त नहीं है कि अगर आप दस सेकंड तक अपना सांस रोक सकते हैं तो आप कोरोनावायरस से सुरक्षित हैं.संक्षेप में बात सिर्फ इतनी सी है कि डा. सोशल मीडिया से बचें, उसका कोई दावा वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित नहीं है, और इसके अतिरिक्त धर्म की आड़ में किये गये दावों से भी बचें; जो डब्लूएचओ कह रहा है, बस उसपर ध्यान दें.

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लंबी कहानी: कुंजवन (भाग-2)

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शिखा ने दादू को देखा उस का एकमात्र मजबूत आश्रय. ‘‘दादू, आप के मन में यह आशंका जब आई है तब कोई कारण तो होगा? किसी पर संदेह? कोई स्टाफ?’’

‘‘ठीक से नहीं कह सकता पर… यह बात सच है. यह बहुत बड़ी विदेशी पार्टी है और आर्डर भी छोटामोटा नहीं. इस कौंट्रैक्ट के लिए बहुत सारी कंपनियां हाथ धो पीछे पड़ी थीं. बाजी हम ने मार ली, इस से ईर्ष्या बढ़ेगी. आज नहीं तो कल पता तो वो लगा ही लेंगे. उन लोगों में ‘मेहता एंड सन’ का नाम भी है.’’

चौंकी शिखा, ‘‘मतलब बंटी.’’

‘‘वो तुम्हारा मंगेतर है घर या आफिस अबाध गति से उस का आनाजाना है. उस पर तुम रोक भी नहीं लगा सकती.’’

‘‘पर दादू, उन की तो अपनी ही चलती कंपनी है.’’

जानकीदास ने सिर हिलाया, ‘‘यह गलत है. ऊपर से यह चाहें कितना भी दिखावा क्यों ना करें, सब जानते हैं अंदर से खोखले हो गए हैं. गले तक डूबे बैठे हैं कर्ज में. किसी भी दिन सब कुछ समाप्त हो सकता है. दोनों बापबेटे इस समय बचाव के चक्कर में घूम रहे हैं. और…’’

‘‘और क्या?’’

‘‘इन में न विवेक है न मानवता, न दया. यह लोग इस समय डेसपरेट हैं कंपनी और गिरवी रखे घर को बचाने के लिए, कुछ भी कर सकते हैं कुछ भी, हां कुछ भी…’’

शिखा स्तब्ध सी हो गई.

‘‘मैं बंटी से आजकल बहुत कम मिलती हूं.’’

‘‘पर तुम्हारी मां जो गलती कर गई है तुम्हारे जीवन के लिए वो एक जहरीला कांटा है. उन की नजर तुम्हारी कंपनी पर शुरू से थी और है.’’

‘‘मेरी मंगनी नहीं हुई दादू. मुंह की बात भर है.’’

‘‘वही एकमात्र आशा की किरण है. लो घर आ गया. जा कर आराम करो. चिंता मत करना.’’

‘‘बात तो चिंता की ही है.’’

‘‘हां है पर कभीकभी इंसान को कुछ उलझनों को वक्त के भरोसे भी छोड़ना पड़ता है.’’

शिखा ने अपने कमरे में आ कर सब से पहले सूट उतार फेंका. यह औपचारिक ड्रेस उसे एकदम पसंद नहीं. खुला दिन था, धूप थी दिनभर अब उमस है. पसीने वाली उमस. नहा कर उस ने एक फूल सी हलकी और नरम लंबी मैक्सी पहनी. मौसी लस्सी दे गई उस का घूंट भर वो खिड़की पर आई. वर्षा से धुले पेड़पौधे चमक गए हैं. नरम हरियाली की ओढ़नी ओढ़ सब मुसकरा रहे हैं उन पर ढलते सूरज की किरण. अनमनी हो गई वो, पापा का चेहरा सामने आ गया. स्नेह छलकती आंखें, भावुक चेहरा. यह बगीचा भरा है सुंदरसुंदर फूल और फलों के पेड़ों से. पापा ने ही बेनाम इस घर का नामकरण किया था.

‘कुंजवन’ पहले तो यह बस पचपन नंबर कोठी थी. पापा के साथ ही साथ एक और चेहरा सामने आ जा रहा है. पता नहीं क्यों आज गाड़ी से उतरते समय अचानक दादू ने पूछा,

‘‘बेबी, सुकुमार कहां है तुझे पता है कुछ?’’

गिरतेगिरते संभली थी वो, ‘‘नहीं तो…मुझे कैसे पता होगा?’’

‘‘संपर्क नहीं है?’’

‘‘क्यों होगा? मैं ने ही तो मना किया था.’’

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‘‘हां बात तो सही है. मैं ही सठिया गया हूं कुछ याद नहीं रहता.’’

पर वह दादू को कैसे कहे कि सुकुमार से संपर्क भले न हो पर वो उस से दूर नहीं है. उस के लिए मनप्रण से वो आज भी समर्पित है. इसी गेट से उसे शिखा ने चरम अपमान के साथ बाहर निकाल दिया था. कभी भी अपना मुंह उसे ना दिखाए यह भी कहा था. मां को खुश करने, मां की आज्ञा का पालन करने के लिए अपना पहला प्यार, बचपन का प्यार, आने वाले जीवन के सारे के सारे सपनों को अपने हाथों बलि चढ़ा दिया. मां को प्रसन्न करने को, वो भी उस मां के लिए जिस का विरोध करना ही उस के जीवन का सब से बड़ा उद्देश्य था, जिस के विरुद्ध ही वो हर काम को करती आई है. पापा का देहांत हो चुका था पर दादू थे. अवाक हो वो पोती का मुख देखते रह गए. सुकुमार जैसे शांत सौम्य लड़के के साथ यह क्या किया शिखा ने. मां के हाथ की कठपुतली तो वो कभी नहीं थी, तो फिर आज क्या हो गया उसे?

एक गहरी सांस ली शिखा ने. उस दिन के बाद फिर कभी उस ने सुकुमार को नहीं देखा इतने वर्ष हो गए. उस से इतनी बड़ी चोट खा क्या वो दिल्ली छोड़ चला गया था या संसार छोड़? सिहर उठी. ना…ना…जहां हो सकुशल हो. स्वस्थ हो.

सुबह नाश्ते के मेज पर दादू ने बैठते ही कहा, ‘‘बेबी, काम आज से ही शुरू करवाना है. जितनी जल्दी हो काम निबटाना होगा.’’

‘‘वो तो है पर अभी तीन महीने हाथ में है तो.’’

‘‘मुझे डर है कोई अंतरघात ना करे.’’

‘‘पर यह बात किसी को क्या पता?’’

‘‘तू अभी बच्ची है नहीं समझेगी. तेरी मां थी जन्मजात पक्की बिजनैस लेडी. बात अब तक विरोधी पक्षों के कानों में जा कर उन को बेचैन भी कर रही होगी.’’

चौंकी शिखा, ‘‘हैं…पर दादू, कैसे?’’

‘‘कल ही तो कहा था बातों के पर होते हैं तो सावधान और जल्दी काम पूरा करवा कर सप्लाई भेजनी है.’’

थोड़ी देर चुपचाप नाश्ता करने के बाद शिखा ने पूछा, ‘‘दादू, कल इतने वर्षों के बाद आप ने सुकुमार के विषय में पूछा. कोई विशेष कारण?’’

जानकीदास का प्याला छलक गया, ‘‘अरे नहीं…नहीं…बस…अचानक याद आ गया.’’

‘‘याद तो पहले भी आना चाहिए था, उस के अपमान दुख, व्यथा और सबकुछ खो जाने के चश्मदीद गवाह आप ही थे दादू.’’

‘‘मैं तेरी बात समझ रहा हूं बेटी पर इस घर में तो तू जानती ही है तेरी मां का फैसला ही अंतिम फैसला होता था पर…’’

‘‘पर क्या दादू?’’

‘‘तू तो हमेशा मां के विरोध में तन कर खड़ी होती थी. सच तो यह है कि इधर तेरी मां तुझ से थोड़ा घबराने लगी थी. वही तू ने मां के अन्याय का विरोध करना तो दूर उस के सुर में सुर मिला उस सीधेसादे बच्चे को अपमान कर के घर से निकाला तो निकाला कभी अपनी सूरत न दिखाने का कड़ा आदेश भी दे दिया. क्यों बेटी?’’

शिखा झुक गई चाय की प्याली के ऊपर. बुझे गले से बोली, ‘‘कारण था दादू…’’

‘‘ऐसा भी क्या कारण जो उस लड़के को इतना बड़ा यातनामय कष्ट जीवनभर के लिए दे डाला.’’

‘‘था दादू. समय आने पर आप को सब से पहले बताऊंगी.’’

‘‘क्या लाभ बता कर? उस बच्चे में तेरे लिए निश्छल और एकनिष्ठ प्यार था. उस की मूर्खता थी कि अपना स्तर भूल गया था उस की सजा भी मिल गई. पर जाने दे जो समाप्त हो गया उस की ओर मुड़ कर नहीं देखा जाता.’’

अरे हां, ‘‘मेहता ने फोन किया था वो जल्दी में हैं बंटी से तेरी शादी के लिए पूछ रहे थे, मंगनी की रसम कब करेंगे.’’

माथे पर बल पड़ गए शिखा के, ‘‘मंगनी तक बात आई कैसे?’’

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ऐसे सजाएं बच्चों का कमरा

जिस तरह घर के बड़े सदस्य चाहते हैं कि दिनभर के कामकाज के बाद रात में उन का कमरा ऐसा हो जहां वे सुकून से सो सकें, उसी तरह बच्चे भी चाहते हैं कि उन के कमरे का लुक भी खुशनुमा हो ताकि स्कूल और होमवर्क के बाद वे भी अपने कमरे में चैन से आराम कर सकें. इस के लिए बच्चों के रूम को सजाने से पहले इन बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है:

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कमरा कैसा हो: पहले यह तय कर लें कि बच्चे के लिए एक ही रूम में सोने और पढ़ने की व्यवस्था करनी है या फिर बैडरूम और स्टडीरूम अलग होंगे. यदि 1 से ज्यादा बच्चे हों तब क्या आप उन के लिए अलगअलग रूम रखने की स्थिति में हैं या नहीं. इस के बाद आप आगे की प्लानिंग करें. शहरों में घर की बढ़ती कीमत के कारण आप शायद बच्चे के लिए स्टडीरूम और बैडरूम अलगअलग न रख सकें.

बजट: अपने बजट को ध्यान में रखते हुए बच्चे के रूम के सैटअप और सजावट का निर्णय लें.

बैड: बैड कितने चाहिए 1 या ज्यादा.

2 बच्चे हों तो बैड एक ही चाहिए या अलगअलग. बड़े साइज के बैड पर 2 बच्चे सो सकते हैं या फिर अगर रूम का साइज सही है तो 2 सिंगल बैड रख कर उन के बीच एक साइड टेबल या छोटी रैक रख सकती हैं अथवा एक परदा भी डाल सकती हैं. सोने या पढ़ते समय परदा खींचने से उन्हें 2 अलग कमरों का एहसास होगा.

ओपन स्पेस: बच्चे घर के अंदर उछलकूद करते रहते हैं, इसलिए उन्हें कुछ खुली जगह भी चाहिए. बैड को दीवार से सटा कर इस तरह रखा जा सकता है कि उस का सिरहाना किसी एक कोने में हो ताकि ओपन स्पेस ज्यादा मिले.

बंक बैड: यदि रूम छोटा है और आप 2 अलग बैड या बड़े साइज का बैड नहीं रख सकती हैं, तो बंक बैड लगा सकती हैं. बंक बैड भी अलगअलग तरह के उपलब्ध हैं.

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– एक बंक बैड जिस में स्लीपर कोच की तरह ऊपरनीचे बैड होते हैं और ऊपर जाने की सीढ़ी होती है.

– दूसरा जिस में एक मेन बैड ओर उस के नीचे एक पुलओवर बैड होता है, जिसे दराज की तरह खींच कर बाहर या भीतर कर सकते हैं. इसे टुंड्रेल बंक बैड भी कहते हैं.

– तीसरा इन दोनों का मिश्रण है, जिस में ऊपर भी बैड होता है और नीचे भी पुलओवर बैड होता है. इस में एक अतिरिक्त बैड आप के पास हमेशा उपलब्ध है जिसे घर में किसी तीसरे बच्चे के आ जाने पर उपयोग में ला सकती हैं.

दीवारों का रंग: चिल्ड्रेनरूम की दीवारों का रंग सफेद न ही हो तो अच्छा है. पीला, नीला, गुलाबी कोई भी रंग रख सकती हैं.

दीवारों पर तसवीर या स्टिकर्स: यह भी बच्चे के लिंग और पसंद पर तय किया जा सकता है. लड़के किसी क्रिकेट या फुटबौल खिलाड़ी का फोटो पसंद कर सकते हैं तो लड़कियों को सायना नेहवाल या किसी सिंगर की तसवीर पसंद हो सकती है.

वार्डरोब्स: यदि 2 बच्चे हों तो उन के लिए अलगअलग वार्डरोब्स रखें. इस के अलावा कुछ स्टोरेज बिंस या बास्केट भी उन के रूम में रखें जिन में वे अपनी पसंद के खिलौने आदि रख सकें.

टेबल: यदि एक ही रूम में उन के पढ़ने का इंतजाम हो तो उन की स्टडी टेबल ऐसी जगह रखें जहां उन्हें पर्याप्त रोशनी मिले.

खिलौने: बच्चों को खिलौने बहुत पसंद होते हैं. लड़कों की पसंद अलगअलग हो सकती है, जैसे लड़कों की पसंद रोबोट, रिमोट कार आदि तो लड़कियों की बार्बी डौल्स, पर दोनों को सौफ्ट टौएज खासकर टैडीबियर अच्छे लगते हैं.

लैट दैम ऐंजौय: सब से अहम बात यह है कि बच्चों के रूम का रंग, फोटो, सैटअप सब ऐसे हों कि वे उस में पढ़ाई करने के साथसाथ मौजमस्ती भी कर सकें.

मैंने दर्शकों की सोच को ध्यान में रखकर कभी काम नहीं किया- राजीव खंडेलवाल

बौलीवुड फिल्म ‘आमिर’ से लेकर टीवी सीरियल ‘कहीं तो होगा’ से पहचान बनाने वाले एक्टर राजीव खंडेलवाल (Rajeev Khandelwal) अपनी फैमिली और पर्सनल लाइफ को महत्व देना पसंद करते हैं. जल्द ही वह वेब फिल्म ‘मर्जी’ में नजर आने वाले हैं, जिसमें वह एक डौक्टर के रोल में नजर आने वाले हैं. पेश है वूट सेलेक्ट के लौंच पर राजीव खंडेलवाल (Rajeev Khandelwal) से खास बातचीत के कुछ अंश

सवाल- इसे करने की खास वजह क्या है?

ये एक नयी तरह की फिल्म है, जिसमें मेरी भूमिका बहुत ही दमदार है. एक डॉक्टर कैसे किसी बात को अपने तरीके से कहने की कोशिश करता है उसे दिखाने की कोशिश की है. ये एक थ्रिलर फिल्म है और सभी इससे अपने आपको रिलेट कर सकते है. मैंने जितने भी चरित्र किये है, उनसे अलग है और मैं इसे लेकर बहुत उत्साहित हुआ था.

सवाल-ये फिल्म क्या कहने की कोशिश करती है?

इस शो का नाम मर्ज़ी है और मर्ज़ी हर इंसान की अलग-अलग होती है. एक डॉक्टर के जीवन की कहानी है, जो बहुतों को पता नहीं है.

 

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सवाल- डॉक्टर को भगवान का रूप दिया जाता रहा है, लेकिन आज डॉक्टरों के साथ कई वारदाते हो जाया करती है, उन्हें बीमार लोगों के परिजनों द्वारा मारपीट का सामना करना पड़ता है, आप इस बारें में क्या सोच रखते है?

मेरे हिसाब से डॉक्टर एक प्रोफेशन से जुड़ा होता है. हमारी गलती ये होती है कि कभी हम उसे भगवान तो कभी हैवान मान लेते है. आम इंसान को समझने की जरुरत होती है कि वह रोगी को लेकर एक प्रोफेशनल के पास जा रहा है और उस व्यक्ति से कुछ गलती हो भी जाती है तो ये वह जानबूझकर नहीं करता. कोई भी डॉक्टर अपनी तरफ से मरीज को सही करने की कोशिश करता है. कई बार बॉडी कुछ अलग रियेक्ट करती है और कुछ गलत हो जाता है. कोई भी डॉक्टर अपनी तरफ से किसी मरीज को ज़हर नहीं देता. मुझे याद आता है कि जब मेरी मां को कैंसर हुआ था तो बहुत लोगों ने अलग-अलग सलाह दी. मैं जिस डॉक्टर के पास गया था उन्होंने बहुत कोशिश की थी, पर मेरी मां गुजर गयी. जीवन अनिश्चित होता है, उसके लिए किसी की मारपीट करना, मैं सही नहीं समझता.

सवाल- हमारे देश में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बहुत कम है, समय पर सही डॉक्टर के पास लोग नहीं पहुंच पातें, इस बारे में आप क्या कहना चाहते है?

छोटे शहरों और गांव की अगर हम बात करें तो वहां स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारियों में काफी कमी है, ऐसे में प्रसाशन और धनसंपदा युक्त लोगों की ये जिम्मेदारी है कि इन जगहों पर सही स्वास्थ्य केंद्र को स्थापित कर लोगों को इसके बारें में जानकारी दें, क्योंकि गांव में रहने वाले गरीब को शहरों में आकर स्वास्थ्य सेवा लेना संभव नहीं.

सवाल- आजकल फिल्में और वेब सीरीज की कहानियों में काफी बदलाव आया है, आप इसे कैसे लेते है?

मैंने कैरियर के 15 साल में दर्शकों की सोच को ध्यान में रखकर काम नही किया है. मैंने काम ऐसा करने की कोशिश की है कि उन्हें पसंद आयें. ये मेरी कमजोरी और स्ट्रेंथ दोनों ही है. मर्ज़ी शो को भी मैंने इसलिए किया, क्योंकि इस दौर में ऐसी कहानी कहने की जरुरत है. आज हर कोई अपनी बात सोशल मीडिया के द्वारा कह सकता है. किसी को दबाना आज संभव नहीं.

 

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A big thanks to all those who took out time and wished us. Here’s me and Manjiri sending all our love and gratitude- Rajeev Khandelwal

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सवाल- सोशल मीडिया आजकल बहुत प्रभावशाली होने की वजह से इसका गलत प्रयोग भी कई बार होता है, आप इस बात से कितना सहमत रखते है? आप खुद कितना सोशल मीडिया पर एक्टिव है?

जब भी कोई नयी चीज से लोग परिचित होते है तो उसके दो पहलू होते है और ये मानव प्रवृत्ति है कि उसका उपयोग और दुरुपयोग दोनों ही होगा. ये हमेशा रहेगा, पर ये आपकी सोच है कि आप किसे लें और किसे नज़रअंदाज करें. मैं सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं.

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सवाल- आप बहुत कम काम करते है, इसकी वजह क्या है?

मैं कभी प्लानिंग नहीं करता. जैसे काम आता है वैसे ही करता रहता हूं. काम न हो तो अपने परिवार के साथ समय बिताने चला जाता हूं. मैं काम के साथ-साथ अपने परिवार को भी अधिक महत्व देता हूं. मेरा सपना केवल काम को लेकर नहीं, परिवार को लेकर भी है. मैं अधिक किसी बात को नहीं सोचता और मेरे लिए सफलता केवल काम को लेकर नहीं है. यही वजह है कि मैं किसी पार्टी या अवार्ड फंक्शन में नहीं दिखता. मेरा रिश्ता दर्शकों के साथ केवल स्क्रीन का है.

Coronovirus Effect: सनी लियोनी ने बच्चों को पहनाया मास्क, कही ये बात

इन दिनों पूरी दुनिया कोरोना वायरस के डर में है. सभी इस वायरस से बचने के लिए पूरी सावधानी बरत रहे हैं. सनी लियोनी (Sunny Leone) ने अपने बच्चों को भी इस वायरस से बचाने की पूरी तैयारी कर दी है. उन्होंने अपने दोनों बच्चों और पति के साथ फोटो शेयर की है. आइए आपको दिखाते हैं कोरोना से लड़ने के लिए सनी लियोनी (Sunny Leone) की तैयारी…

सनी शेयर की फोटो

सनी लियोनी (Sunny Leone) की शेयर की गई फोटो में उनके पूरे परिवार ने मास्क पहना हुआ है. सनी ने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा, ‘बहुत बुरा लग रहा है की मेरे बच्चों को ऐसा रहना होगा, लेकिन ये बहुत ज़रूरी है. बच्चों को मास्क पहनने की ट्रेनिंग देने का पहला दिन.’ सनी ने इस पोस्ट के ज़रिए लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है.

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अनूप जलोटा को आइसोलेशन में रखा गया


अनूप जलोटा हाल ही में यूरोप से लौटे हैं. दरअसल, यूरोप के होलैंड, जर्मनी, लेस्टर और लंदन‌‌ जैसे 4 शहरों में अपने शोज करने‌ के बाद अनूप आज ‪सुबह 4 बजे मुंबई के एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. फिर वहां से उन्हें सीधे मिराज होटल ले जाया गया. उन्हें अभी आइसोलेशन में रखा गया है.

बाकी लोगों से की ये अपील…

 

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Consider Home Quarantine as Quality time with yourself and family. Play your part to stop #covid19 from spreading further.

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अनूप ने बाकी पैसेंजर्स को कहा, मैं सभी पैसेंजर्स से अपील करता हूँ कि वे लोग जैसे ही भारत में लैंड करें, वैसा ही अपना चेकअप कराएं.

रुकी फिल्म और टीवी शोज की शूटिंग…

कोरोना वायरस के चलते कई फ़िल्मों और टीवी शोज़ की शूटिंग रोक दी गई है. सभी ने घर में रहकर इस वायरस से बचने का फ़ैसला लिया है. इसके साथ ही फ़िल्मों की रिलीज़ डेट भी पोस्टपोन कर दी गई है. वैसे भी वायरस के चलते सभी थिएटर्स भी बंद कर दिए गए हैं.

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बता दें, कोरोना वायरस की वजह से मंगलवार की सुबह तक भारत में तीसरी मौत हो चुकी है. मंगलवार को मुंबई के 64 साल के मरीज ने दम तोड़ दिया. वहीं कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 128 हो गई है.

महिलाओं के लिए बातें बहुत और नौकरियां होती हैं कम

मेकिंसे ग्लोबल इंस्टीट्यूट का एक अध्ययन बताता है कि अगर भारतीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं को पुरुषों के बराबर की भागीदारी दी जाए तो साल 2025 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद में महिलाओं के श्रम की भूमिका 60 फीसदी तक हो सकती है. गौरतलब है कि साल 2011 की जनगणना के मुताबिक सवा अरब से ज्यादा की आबादी में महिलाओं की तादाद 60 करोड़ है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि देश के 55 करोड़ की श्रमशक्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी महज 5 करोड़ कामगारों की है.

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज भी हिंदुस्तान में नौकरियों के क्षेत्र में महिलाओं के साथ किस तरह का भेदभाव किया जाता है. दो साल पहले संयुक्त राष्ट्र द्वारा किये गये 188 देशों के महिला श्रमिकों के एक अध्ययन में भारत का स्थान 170वां आया था यानी हम 188 देशों में से नीचे से ऊपर की तरफ 18वें स्थान पर थे. हमसे 17 देश ही ऐसे थे, जहां महिला कामगारों की तादाद प्रतिशत में हमारे यहां से भी कम थी. लेकिन इनमें से कोई भी ऐसा देश नहीं था, जो भारत का एक चैथाई भी हो, अर्थव्यवस्था तो छोड़िये किसी भी मामले में.

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इससे पता चलता है कि भारत में महिलाओं को या तो नौकरियां मिल नहीं रही हैं या आज भी भारतीय समाज उन्हें नौकरी कराने से हिचकता है. तमाम अध्ययन और विशेषज्ञ बार-बार कहते हैं कि अगर अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बराबरी की हो जाती है तो कोई भी अर्थव्यवस्था कहीं ज्यादा मजबूत हो जाती है. भारत के संबंध में तो तमाम विश्व संगठन लगातार कह रहे हैं कि अगर भारत को वाकई आर्थिक महाशक्ति बनना है तो महिलाओं को बड़ी भूमिका देना होगा. लेकिन हाल के सालों में काफी उलट पुलट स्थितियां देखने को मिली हैं. यह तो तय है कि दक्षिण एशिया में अकेला भारत ही नहीं पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल हैं, जहां महिलाओं को बड़ी आर्थिक भागीदारी नहीं दी गई.

हद तो यह है कि भारत में नेपाल, वियतनाम और कंबोडिया जैसे छोटे देशों से भी प्रतिशत में कम महिलाएं श्रम में भागीदारी निभा रही हैं. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के 185देशों में हाल के सालों में जहां महिला कामगारों की संख्या बढ़ी है, वहीं 41 देशों में यह कम हुई है और जिन देशों में कम हुई है उनमें भारत सबसे ऊपर है. आखिर क्या वजह है कि भारत में नौकरियों के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या घट रही है? हाल के सालों में जब भारत पूरी दुनिया के विकास के इंजन के रूप में चीन के साथ आगे बढ़कर आया है, उस स्थिति में भारत में महिलाओं की श्रम में भागीदारी की कमी का पहलू क्या है?

इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि हाल के सालों में भारतीय पुरुषों की औसत आय में काफी वृद्धि हुई है जिससे घरों में महिलाओं को खासकर खेतों और निर्माण के क्षेत्र में काम कराने से रोका गया है. देखा जाए तो यह एक सकारात्मक पक्ष है क्योंकि भारत में असंगठित मजदूरों के लिए काम की परिस्थितियां बेहद अमानवीय होती हैं, चाहे फिर वे महिलाएं ही क्यों न हो या बाल श्रमिक ही क्यों न हों? पिछले एक दशक में भारतीय पुरुषों की आय में हुई बढ़ोत्तरी के कारण महिलाओं को घर की देखरेख में ज्यादा फोकस करने के लिए प्रेरित किया गया है. हालांकि यहीं पर एक विरोधाभासी आंकड़ा यह भी है कि मनरेगा जैसे रोजनदारी वाले काम के क्षेत्र में महिलाओं की संख्या न सिर्फ बढ़ी है बल्कि मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्र में बेहद गरीब लोगों की सामाजिक स्थिति में काफी सुधार आया है.

इस सुधार के पीछे महिलाओं की आय का बड़ा योगदान है. चूंकि मनरेगा में मजदूरों को नकद और त्वरित भुगतान किया जाता है, इस वजह से मनरेगा की आय ने देश के सबसे कमजोर तबकों में दिखने वाला सुधार किया है. लेकिन जहां यह बात समझ में आती है कि पारिवारिक आय में हुई बढ़ोत्तरी के कारण महिलाओं को भारी, जटिल और कठिन श्रम क्षेत्रों से काफी हद तक मुक्ति मिली है, जो उनकी सेहत और सुरक्षा के लिहाज से अच्छी बात है. लेकिन संगठित क्षेत्र में जहां श्रम की स्थितियां कठिन या अमनावीय नहीं हैं, वहां महिलाओं की भागीदारी में कमी क्यों आयी है? इस कमी के दो कारण हंै, एक कारण में महिलाएं खुद जिम्मेदार हैं और दूसरे कारण में अप्रत्यक्ष रूप से इम्प्लायर ही महिलाओं की भागीदारी को हतोत्साहित करता है.

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दरअसल हमारे यहां महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कानून कितने भी बन गये हांे, लेकिन आज भी महिलाएं न सिर्फ कार्यस्थल पर बल्कि कार्यस्थल से घर तक की दूरी में भी काफी ज्यादा असुरक्षित हैं. प्राइवेट नौकरियों में जिन कामगारों की सबसे ज्यादा तनख्वाहें इम्प्लाॅयर द्वारा मारी जाती हैं, उनमें महिलाओं की संख्या 90 फीसदी होती है. अगर किसी कंपनी के बंद होने की स्थिति बनती है तो सबसे पहले महिलाओं के आर्थिक हितों का नुकसान होता है. इसका मनोविज्ञान यह है कि आज भी भारतीय समाज में यह माना जाता है कि महिलाओं को आसानी से दबाया जा सकता है, फिर चाहे वो कामगार ही क्यों न हों? लेकिन तमाम खामियां अपनी जगह है. मगर यदि भारत को वाकई आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरकर आना है, तो महिलाओं के साथ आर्थिक भागीदारी के मामले में होने वाले भेदभाव को जल्द से जल्द खत्म करना होगा.

महिलाओं के लिए ड्राइविंग हुई आसान

कई लोगों का मानना है कि महिलाओं को गाडि़यों में कोईर् खास दिलचस्पी नहीं होती. वे न तो गाड़ी चलाने में और न ही खरीदने में उत्साह दिखाती हैं.

महिला अगर ड्राइविंग कर रही होती है तो लोग उस पर कमैंट्स करने से भी नहीं चूकते. दरअसल, लोगों के दिमाग में यह बात बैठी रहती है कि महिलाएं अच्छी ड्राइवर नहीं हो सकतीं. उन्हें गाडि़यों की समझ नहीं होती. लेकिन वहीं दूसरी तरफ औटोऐक्सपो के पवैलियन में उमड़ी महिलाओं की भीड़ इस बात को नकार रही थी. शायद लोग यह भूल जाते हैं कि महिलाएं सिर्फ गाडि़यां ही नहीं, बल्कि हवाईजहाज भी चला सकती हैं. महिला कैब ड्राइवर इस बात की सब से बड़ी उदाहरण हैं. यकीनन अब समय बदल गया है कि महिलाएं गाडि़यां खरीदती भी हैं और बखूबी चलाती भी हैं.

गाडि़यां सिर्फ वर्किंग वूमन ही नहीं, बल्कि हाउसवाइफ की भी जिंदगी का हिस्सा हैं. चाहे औफिस जाना हो या फिर बच्चों को स्कूल छोड़ने, महिलाएं किसी पर डिपैंट न हो कर अपना काम खुद करना जानती हैं.

इधर कुछ सालों से महिला चालकों की संख्या भी बढ़ी है और इस बात को कार निर्माता कंपनियां भी समझती हैं. इसीलिए कंपनियों ने महिलाओं को ध्यान में रखते हुए वूमन फ्रैंडली गाडि़यों का निर्माण किया है.

आइए, उन कारों के बारे में जानिए जो महिलाओं के लिहाज से बनाई गई हैं और जिन की चर्चा औटो ऐक्सपो में भी खूब रही:

1. औटोमैटिक गियर बौक्स पर फोकस

मारुति सेलेरियो, हुंडई की क्रेटा, वरना और टोयोटा की इनोवा में औटोमैटिक गियर बौक्स सिस्टम दिया गया है जो ड्राइविंग को काफी आसान बना देता है. महिलाओं के बीच यह गियर बौक्स सिस्टम खासा प्रचलित हो रहा है. खासतौर पर कामकाजी महिलाओं के लिए जिन्हें अब डेली औफिस राइड को इस सिस्टम ने काफी आसान बना दिया है. वहीं, मैट्रो सिटीज में कार के शौकीन लोग औटोमैटिक गियर बौक्स वाली गाड़ी अब खासा पसंद कर रहे हैं.

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2. ब्लूट्रूथ स्टीरियो सिस्टम

राइड के साथ म्यूजिक का आनंद न मिले यह कैसे हो सकता है. ब्लूटूथ स्टीरियो सिस्टम को महिलाएं काफी पसंद करती हैं. शुरुआती श्रेणी की मारुति आल्टो और इग्निस में आप को ब्लूटूथ के साथसाथ स्टीरियो सिस्टम की सुविधा मिल जाएगी. मनपसंद संगीत के साथ आप का सफर और भी सुहाना हो जाएगा.

3. रियर पार्किंग कैमरा और औटोमैटिक वाइपर्स

जब बारिश होती है और बारिश की बूंदें विंड स्क्रीन पर गिरती हैं तो वाइपर्स खुद चलने लगते हैं. साथ ही रियर पार्किंग कैमरा आज लगभग हर महिला ड्राइवर की जरूरत है. ड्राइविंग जितनी ईजी हो ड्राइव में उतना ही मजा आता है. बारिश के मौसम में विंड स्क्रीन क्लीयर करने के लिए बारबार वाइपर्स को मैनुअली औन और औफ करना किसी झंझट से कम नहीं. औटोमैटिक वाइपर्स ऐसे में काफी सुविधाजनक हैं.

4. क्रूज कंट्रोल तकनीक

आजकल कारों में क्रूज कंट्रोल तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. इस तकनीक की वजह से इंजन स्पीड पर खुद कंट्रोल रखता है. इस वजह से ऐक्सेलरेटर और क्लच के बीच संयोजन बना रहता है. अब सी सैगमैंट कारों में भी क्रूज कंट्रोल आ गया है. यह फैसिलिटी टाटा की अल्ट्रोस, नैक्सन, एचबीएक्स, किआ की सैल्टोस, हुंडई की ओरा, क्रेटा और मारुति इग्निस में भी है.

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इन गाडि़यों ने महिलाओं की ड्राइविंग को काफी आसान बना दिया है. महिलाएं अब कार खरीदने और चलाने में रूचि दिखाने लगी हैं. ‘औटो ऐक्सपो-2020’ के पवैलियन में महिलाएं और इन के लिहाज से बनाई गई गाडि़यां खुद इस बात की गवाही दे रही थीं.

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