Me Too को लेकर काजोल ने दिया बयान, कहा- पुरुषों ने महिलाओं से बनाई 7 कदम की दूरी

90 की दशक में बेहतरीन अदाकारा के रूप में चर्चित अभिनेत्री काजोल (Kajol) से कोई अपरिचित नहीं. उन्होंने हमेशा अलग-अलग भूमिका निभाकर दर्शकों को चकित किया है. फिर चाहे वह बाज़ीगर जैसी रोमांटिक फिल्म हो या तानाजी जैसी पीरियोडिकल ड्रामा हर किरदार में सफल रही. इस सफलता का श्रेय अपनी मां को देती है, जिसने हर माहौल में उसका साथ दिया. आज वह 2 बच्चों की मां भी है, पर परिवार के साथ काम में सामंजस्य बिठाने को मुश्किल नहीं समझती. उसे फिल्में चाहे छोटी हो या बड़ी किसी को भी करने से नहीं कतराती.

शौर्ट फिल्म ‘देवी’ में उसने एक साधारण और विनम्र महिला की भूमिका निभाई है. इस फिल्म के स्क्रीनिंग पर उसने बताया कि महिलाओं को देवी कहकर उन्हें उपर का दर्जा तो दिया जाता है, पर रियल लाइफ में उन्हें वह सम्मान नहीं मिलता जिसकी वह हकदार है, इसके लिए हर एक महिला को हो अपनी आवाज बुलंद करने की जरुरत होती है और ये तब तक करते रहना चाहिए जब तक उसे सही न्याय नहीं मिलता.

 

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Hey You….. Happy happy birthday you sweet girl. Wish you the world?❤❤❤❤❤❤ #Devi @tanishaamukerji

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काजोल कहती है कि मुझे कई लोगों ने पूछा कि मैं ये फिल्म क्यों कर रही हूं. मुझे इसकी स्क्रिप्ट के अलावा जो सन्देश है वह मेरे लिए बहुत रुचिपूर्ण था. इसमें 9 अभिनेत्रियों ने साथ मिलकर काम किया और यही बात हमारी महिलाओं में होनी चाहिए. वे अगर साथ मिलकर किसी बात का विरोध करती है, तो उसका परिणाम सामने निकलकर आयेंगा, लेकिन यही महिला अगर एक दूसरे से झगडती है या एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करती है तो उन्हें उनका हक कभी नहीं मिल पायेगा.

 

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Team #Devi . She is all of us. One more for the women’s club! @electricapplese #goodday #womensclub #filmrelease

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पूरे विश्व में महिलाओं के साथ भेदभाव होता है, पर समय के साथ-साथ उन्हें सफलता भी मिली है. काजोल कहती है कि महिलाओं ने आगे बढकर अपने आपको सिद्ध किया है और उन्हें सम्मान भी मिला है. कई ऐसे भी परिवार है जिन्होंने मेहनत कर अपने बेटों की सही परवरिश की है और वे अपनी बहन माँ और पत्नी को सम्मान देते है. हालाँकि ये काम धीरे-धीरे हो रहा है, पर मुझे उम्मीद है कि इसका प्रभाव अगले कुछ सालों में देखने को अवश्य मिलेगा.

भविष्य निर्माण में एक महिला ही जिम्मेदार होती है और इसे बचपन से उन्हें अपने बेटों को देनी चाहिए. इतना ही नहीं आज किसी भी अपराध की दोषी महिला को ही ठहराया जाता है. अगर महिला उससे निकलकर आगे बढकर न्याय मांगती है, तो वह समय रहते नहीं मिलता. इसमें कमजोरी हमारे सिस्टम की है, जिसे सुधारने की बहुत जरुरत है, जिसके लिए बहुत सारे लोगों को एक साथ मिलकर काम करने की जरुरत है.


फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता और अभिनेत्रियों के मेहनताना में काफी फर्क होने के बारें में पूछे जाने पर काजोल का कहना है कि केवल फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, हर क्षेत्र में महिलाओं को पुरुषों से कम आंका जाता है, क्योंकि ये पुरुष प्रधान समाज है. प्रैक्टिकल और सेंसिबल एप्रोच से ही इसे सुधारा जा सकता है. इसके अलावा हमारा समाज काफी हद तक जिम्मेदार है, जो महिला प्रधान फिल्मों को भी पुरुष प्रधान फिल्मों की तरह ही प्यार नहीं देती. इससे बदलाव आने में समय लग रहा है. आत्मसम्मान पाने के लिए खुद आवाज उठाने के अलावा हमारे बेटों को भी वैसी शिक्षा देने की जरुरत है.

 

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Repost @officialhumansofbombay We met 25 years ago, on the sets of Hulchul–I was ready for the shot & asked, ‘Where’s my hero?’ Someone pointed him out–he was broodily sitting in a corner. So 10 minutes before I met him, I bitched about him! We began talking on set & became friends. I was dating someone at the time & so was he–I’ve even complained about my then boyfriend to him! Soon, we both broke up with our significant others. Neither of us proposed–it was understood that we were to be together. It went from hand-holding to a lot more before we knew it! We used to go for dinners & so many drives–he lived in Juhu & I, in South Bombay, so half our relationship was in the car! My friends warned me about him–he had quite a reputation. But he was different with me–that’s all I knew. We’d been dating for 4 years, when we decided to get married. His parents were on board, but my dad didn’t talk to me for 4 days. He wanted me to focus on my career, but I was firm & he eventually came around. Again, there was no proposal–we just knew we wanted to spend our lives together. We got married at home & gave the media the wrong venue–we wanted it to be our day. We had a Punjabi ceremony & a Marathi one! I remember, during the pheras Ajay was desperately trying to get the pandit to hurry up & even tried to bribe him! I wanted a long honeymoon–so we travelled to Sydney, Hawaii, Los Angeles… But 5 weeks into it, he fell sick & said, ‘Baby, book me on the next flight home!’ We were supposed to do Egypt, but we cut it short. Over time, we began planning to have kids. I was pregnant during K3G, but had a miscarriage. I was in the hospital that day–the film had done so well, but it wasn’t a happy time. I had another miscarriage after that–it was tough. But eventually it worked out–we had Nysa & Yug & our family’s complete. We’ve been through so much–we’ve formed our own company, Ajay’s on his 100th film & every day we’re building something new. Life with him is content–we’re not too romantic or anything–we care for each other. If I’m thinking idiotic things, it’ll come out of my mouth without a filter & vice versa. Like right now I’m thinking that he owes me a trip to Egypt!

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मी टू मूवमेंट (Me Too) भी इस दिशा में काफी कारगर सिद्ध हुई है. काजोल हंसती हुई कहती हैं कि इसके बाद से पुरुषों ने महिलाओं से 7 कदम की दूरी बना ली है. आज वे कुछ कहने से डरते है. ये सही कदम है, हर क्षेत्र में इस विषय पर ध्यान दिया जा रहा है. ये जरुरी था, आज पुरुष चाहे सेट पर हो या वर्किंग प्लेस पर किसी भी महिला से बात करने से पहले अपनी सीमा को समझने लगे है.

Women’s Day 2020: रूढ़िवादी सोच के कारण महिलाएं आधुनिक तौर-तरीके नहीं अपना पा रहीं- अनामिका राय सिंह

अनामिका राय सिंह, व्यवसायी

उत्तर प्रदेश के गोंडा और गाजीपुर जैसे छोटे जिलों में पढ़ाई करने के बाद राजधानी लखनऊ आईं अनामिका राय ने कम समय में ही बिजनैस के क्षेत्र में काम कर के न केवल खुद को साबित किया, बल्कि आज बहुत सारे लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. वे कहती हैं कि महिलाओं को अपना पढ़ने का शौक बढ़ाना चाहिए. इसी से तरक्की का रास्ता निकलता है. पेश हैं, अनामिका से हुई गुफ्तगू के कुछ अंश:

अपने बारे में विस्तार से बताएं?

मेरे पिता गोंडा जिले की आईटीआई कंपनी में काम करते थे. स्कूल के दिन मेरे वहां बीते. केंद्रीय विद्यालय आईटीआई गोंडा से 12वीं कक्षा पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ आ गई. लखनऊ मेरे लिए बड़ा शहर था. लखनऊ विश्वविद्यालय से फूड न्यूट्रिशन में बीएससी करने के बाद ‘एचआर और मार्केटिंग’ में एमबीए किया. इस के बाद शादी हो गई. कुछ समय के बाद मुझे लैक्मे के सैलून की फ्रैंचाइजी लेने का मौका मिला. मुझे लगा कि यह काम मैं कर सकती हूं. अत: मैं ने काम शुरू किया. कामयाबी मिली तो 2 सालों में ही लखनऊ में 3 लैक्मे के सैलून खोल लिए.

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पहले लोगों को लगता था कि मैं इस काम को नहीं कर पाऊंगी, क्योंकि कालेज के बाद शादी और शादी के बाद यह बिजनैस. लोग समझते थे कि मुझे कोई अनुभव नहीं है. अपनी मेहनत से सफलता हासिल करने के बाद मुझे खुद पर भरोसा हुआ. फिर समाज के सामने खुद को साबित किया. तब लोगों की आलोचनाएं बंद हुईं. मुझे लगता है कि सफलता ही वह चीज है, जो आलोचनाएं बंद कर सकती है. मुझे ‘यंगैस्ट वूमन ऐंटरप्रन्योर 2017’ और ‘शख्सीयत ए लखनऊ’ जैसे सम्मान भी मिले.

बिजनैस से मिली सफलता के बारे में कुछ बताएं?

एक बार बिजनैस में कदम बढ़ाने के बाद मैं ने ब्यूटी के बाद फैशन के क्षेत्र में काम करना शुरू किया. ‘द इंडियन सिग्नोरा’ नाम से फैशन स्टोर खोला, जिस में हर तरह के लेडीज परिधान उपलब्ध हैं. इस के साथ ही ‘कौफी कोस्टा’ नाम से कैफे का बिजनैस भी शुरू किया. बिजनैस के अलगअलग क्षेत्रों में काम करना अच्छा रहता है ताकि कभी एक सैक्टर किसी कारण से प्रभावित हो तो दूसरे सैक्टर से मदद मिल सके. महिला होने के नाते बिजनैस को संभालना थोड़ा कठिन काम होता है. बिजनैस के लिए समयबेसमय आप को बाहर जाना पड़ता है, तरहतरह के लोगों से मिलना पड़ता है. ज्यादातर काम करने वाले पुरुष ही होते हैं. इस से काम करने में कुछ परेशानियां भी आती हैं. मगर उन का सामना कर के ही आगे बढ़ा जा सकता है.

व्यवसाय के अलावा और क्या पसंद है?

मेरी रुचि बिजनैस करने में नहीं थी. मुझे किताबें पढ़ने और लिखने का शौक था. स्कूलकालेज के दिनों से मैं लेख, गीत, कविताएं, व्यंग्य, कहानियां लिखती थी. संगीत में भी रुचि रखती थी. इस दिशा में ही अपना कैरियर आगे बढ़ाना चाहती थी. 2015 में मेरा पहला काव्य संग्रह ‘अनामिका’ प्रकाशित हुआ, जिस में दिल को छूने वाली 42 कविताएं प्रस्तुत की गईं. काव्य संग्रह के बाद रियल स्टोरी बेस्ड एक नौवेल लिखने पर काम कर रही हूं. मगर बिजनैस के चलते अब समय नहीं मिल रहा, जिस की वजह से उसे पूरा करने में समय लग रहा है.

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क्या अब महिलाओं की स्थिति में बदलाव आया है?

यह सच है कि महिलाओं की हालत में अब बहुत बदलाव आया है. अब छोटेछोटे शहरों की लड़कियां भी खुद को साबित कर रही हैं. परिवार का भरोसा पहले से अधिक बढ़ रहा है. मगर इस सब के बीच कुछ नई चुनौतियां भी सामने हैं, जिन में महिलाओं की सुरक्षा सब से बड़ा मुद्दा बन गया है. इस पर समाज और कानून को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. महिलाओं में रूढि़वादी सोच भी है जिस के चलते वे आधुनिक सोच के साथ कदम से कदम मिला कर नहीं चल पा रहीं. यह बदलाव महिलाओं को खुद करना है. अब जब वे पुरुषों के कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं, तो उन्हें अपनी हैल्थ, डाइट और फिटनैस पर भी ध्यान देने की जरूरत है.

3 सखियां: भाग-1

आभा,शालिनी और रितिका पक्की सहेलियां थीं. स्कूल के दिनों से ही उन का साथ था. कालेज में भी वे नियमित रूप से एकदूसरे से मिलती रहती थीं. जब अल्हड़ उम्र की थीं तब अकसर उन की बातचीत का विषय होता लड़के. कालेज के लड़के, पासपड़ोस के लड़के, गलीमहल्ले के लड़के. फिर जब शादी की उम्र हुई तो भावी पति को ले कर अटकलें लगाई जाने लगीं.

‘‘भई तुम लोगों की मैं नहीं जानती,’’ शालिनी आह भर कर कहती, ‘‘पर मेरे साथ जो होने वाला है उसे मैं जानती हूं. जहां मेरी बी.ए. की पढ़ाई समाप्त हुई, मेरी शादी कर दी जाएगी. मेरे मातापिता तो दिन गिन रहे हैं. उन्होंने तो लड़का भी तलाश कर लिया है.’’

‘‘अरे ऐसे कैसे तेरी शादी कर देंगे? अच्छी जबरदस्ती है,’’ रितिका बोली.

‘‘लड़का कौन है? तेरी पसंद का है या नहीं?’’ आभा ने पूछा.

‘‘मेरी पसंद की परवा किसे है भई. कई साल से मेरी बूआ हमारे पीछे पड़ी हुई हैं अपने बेटे के लिए, शायद उसी से…’’

‘‘अरे तेरा कजन? यह तो कुछ अच्छा नहीं लगता. इतना करीबी रिश्ता, तुझे कुछ अटपटा नहीं लगता?’’

‘‘लगता तो है पर मेरी सुनने वाला कौन है? हम दक्षिण भारतीयों में भाईबहन के बच्चों की शादियां होती रहती हैं. इस में कोई बुराई नहीं समझी जाती है. फिर एक तो भतीजी बहू बन कर आती है, तो उस से लगाव होना स्वाभाविक है. वह परिवार में रचबस जाती है. और दूसरी बात यह कि दानदहेज का बखेड़ा नहीं.’’

‘‘हां एक तरह से यह भी ठीक ही लगता है,’’ आभा बोली, ‘‘पहचान की ससुराल हो तो इतमीनान रहता है. पर मुझे देखो, पिताजी इंटरनैट पर मेरे लिए जोरशोर से वर तलाश रहे हैं. जवाब में तरहतरह के नमूनों की अर्जियां आ रही हैं. उन के फोटो देखो तो किसी हीरो से कम नहीं लगते. और उन के विवरण पढ़ो तो लगता है सब के सब जीनियस हैं. एकाध को पिताजी बहुत आशान्वित हो कर देखने भी गए पर बहुत मायूस हो कर लौटे. मैं तो मन ही मन मना रही हूं कि मुझे शादी कर के अमेरिका न जाना पड़े. वहां घर और बाहर का काम करतेकरते तो मिट्टी पलीद हो जाती है और सालों बीत जाते हैं अपनों की शक्ल देखे. ऐसा लगता है जैसे अज्ञातवास कर रहे हों. मैं तो कहती हूं कि अमेरिका के डाक्टर या इंजीनियर के बजाय इंडिया में एक साधारण हैसियत वाले से ब्याह कर के रहना ज्यादा अच्छा है.’’

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‘‘क्या कह रही है तू?’’ रितिका ने उसे झिड़का, ‘‘भला अमेरिका जाने में क्या बुराई है? तुझ में जरा भी हौसला नहीं है. अरे यही तो उम्र है अपने खोल से निकल कर दुनिया देखने की, जगहजगह की सैर करने की. मैं तो इसी ताक में हूं कि कोई मालदार आसामी फंसे और मैं उस से ब्याह कर इंडिया को बायबाय बोल विदेश का रास्ता नापूं. फिर विदेश घूमूं, दुनिया के अजूबे देखूं, तरहतरह की चीजें खरीदूं और भांतिभांति के व्यंजन चखूं. ओह सोच कर ही बदन में झुरझुरी उठती है.’’

‘‘अपनाअपना नजरिया है,’’ आभा ने सर हिलाया, ‘‘मेरे विचार में लड़का अपनी पसंद का होना चाहिए. वह अमीर हो या गरीब उस से कोई फर्क नहीं पड़ता. जहां मन न मिले उस व्यक्ति के साथ पूरा जीवन बिताना एक सजा से कम नहीं है. तू ही बता बिना प्यार के एक अजनबी के साथ बंध कर उम्र भर कलपने का क्या तुक है?’’

‘‘इतनी भावुक न बन मेरी बन्नो, जरा प्रौक्टिकल बन. पैसा बड़ी चीज है. बिना पैसे के जीना मुहाल हो जाता है. जब पेट भर खाना नसीब न हो तो प्यारव्यार सब धरा रह जाता है. अभाव की जिंदगी जीना भी क्या जीना? पैसा पास हो तो जिंदगी की हर खुशी, हर नेमत खरीदी जा सकती है. मैं तो यह चाहती हूं कि जीवनसाथी ऐसा हो जो मुझ पर अपनी दौलत निछावर करे. मुझे  जिंदगी की हर खुशी दे ताकि मैं जीवन भरपूर जी सकूं, गुलछर्रे उड़ाऊं. कल किस ने देखा है,’’ रितिका जोश से उस से बोली.

‘‘वह सब तो ठीक है,’’ शालिनी उदास भाव से बोली, ‘‘अच्छा घर व वर कौन लड़की नहीं चाहेगी भला, पर ये सब अपने बस में तो नहीं है न.’’

‘‘क्यों नहीं है. मैं ने तो तय कर लिया है कि मैं एयरलाइंस जौइन करूंगी. सैर की सैर होती रहेगी और एक मालदार पुरुष से मिलने का चांस भी मिलेगा. अगर तू चाहे तो मैं तुझे उन विमान सुंदरियों के नाम गिना सकती हूं जिन्होंने अमीरजादों को अपने प्रेमजाल में फंसाया और आज ऐशोआराम की जिंदगी बसर कर रही हैं,’’ रितिका ने उस से भी बड़े जोश से कहा.

‘‘जरूरत नहीं है उन सुंदरियों का नाम गिनाने की. हम तेरी बात पर विश्वास करती हैं. हम भी मानती हैं कि दुनिया में पैसे की बड़ी अहमियत है. पर दौलत के साथसाथ मनचाहा पति भी मिल जाए तो सोने में सुहागा हो जाए,’’ शालिनी बुझे मन से बोली. परीक्षा समाप्त होते ही शालिनी की शादी की तैयारियां होने लगीं. लेकिन ऐन वक्त पर उस के कजन ने शादी से मना कर दिया. शायद उस का किसी और लड़की से चक्कर चल रहा था. उस ने शालिनी के लिए अपने एक दोस्त का नाम सुझाया जो अमेरिका में नौकरी रहा था. फिर आननफानन शालिनी की शादी हो गई और वह अमेरिका के लिए रवाना हो गई. कुछ दिनों बाद आभा के लिए भी एक अच्छा वर मिल गया. इत्तफाक से वह भी अमेरिका में नौकरी करता था. सुनते ही आभा फूटफूट कर रोने लगी, ‘‘मैं ने आप लोगों से एक ही शर्त रखी थी कि मैं ब्याह कर अमेरिका नहीं जाना चाहती और आप लोगों ने मेरी इतनी सी बात नहीं रखी,’’ उस ने आंसू बहाते हुए अपने मातापिता से कहा.

‘‘बेटी,’’ उन्होंने उसे समझाया, ‘‘यह तो संयोग की बात है. और चाहे वर अमेरिका में हो या कहीं और इस से क्या फर्क पड़ता है? पहली बात तो यह देखने की है कि वह तेरे योग्य है कि नहीं. हम ने इस लड़के के बारे में बहुत कुछ सुना है. लड़का क्या है हीरा है. ऐसा लड़का सब को नसीब नहीं होता. और तेरे मांबाप तेरा भला ही तो चाहते हैं. फिर आजकल तो जिसे देखो वही अमेरिका का रास्ता नाप रहा है और तू पगली है कि वहां जाने से घबरा रही है.’’ आभा की शादी के 1 साल बाद अचानक एक दिन उस के पास रितिका का फोन आया.

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Holi Special 2020 : मालपुआ

मालपुआ इन रंगों के त्यौहार पर बनाया जाने वाला एक मीठा व्यंजन है जिसे लोग खाने में बेहद पसंद करते हैं. आज हम आपको होली के मौके पर अपनी फैमिली और मेहमानों के लिए मालपुआ की खास रेसिपी बताएंगे.

हमें चाहिए

– मैदा ( 1 प्याला)

– कंडेन्स्ड मिल्क (1 कप)

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– किशमिश (8-10)

– चीनी की चाशनी ( आवश्यकतानुसार)

बनाने का तरीका

– सबसे पहले आटा और कंडेन्स्ड मिल्क को मिला कर घोल बना लें.

– नौनस्टिक पैन को गर्म करें और एक चम्मच घी डालकर पैन पर अच्छी तरह फैला लें.

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– 1 बड़ा चम्मच घोल पैन पर पूरी के आकार में डालें और एक मिनट बाद पलट दें.

– इसके बाद इसे उतारकर चाशनी में 3 मिनट तक रखें.

– चाशनी से निकाल कर मेवे और रबड़ी के साथ गरमा-गरम परोसें.

भारत का सबसे बड़ा ड्रोन फ्लाई लाईट शो का OPPO ने किया प्रस्तुत

हवा में भविष्य के टेक्नोलौजी डिस्प्ले के साथ मार्केटिंग इनोवेशन को पहुंचाया नए आयाम पर अग्रणी ग्लोबल स्मार्ट डिवाईस ब्रांड, ओप्पो ने कल मुंबई में भारत के सबसे बड़े ड्रोन लाईट शो में 250 ड्रोन्स के हवाई प्रदर्षन के साथ इतिहास रच दिया. इस स्मार्टफोन ब्रांड द्वारा अपनी तरह के पहले मार्केटिंग इनोवेशन ने बेहतरीन लाईट शो के साथ मरीन ड्राईव के आकाश को जगमगाते हुए मुंबई के इस्लामिक जिमखाना में मौजूद सैकड़ों लोगों को अचंभित कर दिया.

ओप्पो उपभोक्ताओं को मजबूत संपर्क स्थापित करने के लिए यादगार अनुभव प्रदान करने में सबसे आगे रहता है. खूबसूरती एवं इनोवेटिव टेक्नॉलॉजी के बीच सामंजस्य बिठाते हुए ओप्पो ने इस अद्वित्य अनुभव का निर्माण किया तथा ओप्पो रेनो3 प्रो की झलकियां प्रस्तुत कीं, जिसमें दुनिया का प्रथम 44 मेगापिक्सल का ड्युअल पंच-होल कैमरा है. इस 10 मिनट के श के दौरान खूबसूरत आकृतियां बनाई गईं, जिनमें हर ड्रोन लाईट एक पिक्सल के रूप में रात के आकाश को जगमगा रही थी.

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श्री सुमित वालिया, वाईस प्रेसिडेंट – प्रोडक्ट एवं मार्केटिंग, ओप्पो इंडिया ने कहा, ‘‘ओप्पो में हमारा मानना है कि अच्छे अनुभव मजबूत संपर्कों का निर्माण करते हैं और इसलिए हम अपने उत्पादों, सेवाओं एवं अभियानों द्वारा अपने उपभोक्ताओं को यादगार अनुभव प्रदान करने का पूरा यत्न करते हैं. सबसे बड़े ड्रोन लाईट शो  के साथ हम अपने उपभोक्ताओं को यह अपनी तरह का पहला अनुभव प्रस्तुत करके काफी उत्साहित हैं. यह इनोवेशन एवं मार्केटिंग अभियान, दोनों ही नजरियों से सीमाओं का विस्तार करने के ओप्पो के प्रयास का एक और प्रदर्शन है. हमें उम्मीद है कि हमारे उपभोक्ता आमची मुंबई के खूबसूरत आकाश को ड्रोन लाईट शो से जगमगाता देखकर बहुत प्रसन्न होंगे.’’

https://www.youtube.com/watch?v=mzgdEZ7dNOU

आकाश में कई सारे ड्रोन्स ने सबसे पहले भारतीय झंडे की आकृति का प्रदर्शन किया. इसके बाद शो की शुरुआत हुई और ओप्पो रेनो3 प्रो के ड्युअल पंच होल कैमरा का प्रदर्शन करके रात के आसमान में टेक्नॉलॉजी की खूबसूरती दिखाई गई.

ओप्पो भारत का पहला स्मार्टफोन ब्रांड बन गया, जिसने ब्रांड न्यू एवं इनोवेटिव तरीके से ग्राहकों तक पहुंचने के लिए भविष्य की ड्रोन टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल किया एवं रात के आकाश को अनेक खूबसूरत रंगों में रंग दिया.

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ओप्पो रेनो 3 प्रो ने कल भारत में अपना वैष्विक लॉन्च किया. रेनो सीरीज़ का यह नया सदस्य स्मार्टफोन फोटोग्राफी का अनुभव उन्नत बनाने के लिए डिज़ाईन किया गया है. इसमें दुनिया का पहला 44 मेगापिक्सल+2मेगापिक्सल का ड्युअल पंच होल कैमरा तथा 64 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है, जो बेहतर अल्ट्रा-वाईड शॉट्स ले सकता है. यह अतुलनीय 20एक्स डिजिटल जूम के साथ 108 मेगापिक्सल की अल्ट्रा क्लियर इमेजेस ले सकता है. इसमें अल्ट्रा डार्क मोड है, जो ब्राईट एवं क्लियर पिक्चर्स प्रदान करता है तथा यूज़र्स अंधेरे में वो खूबसूरती भी कैप्चर कर सकते हैं, जो मानव आंख को दिखाई नहीं देती. इसके 8जीबी+128जीबी का मूल्य 29,990 रु. एवं 8जीबी+256जीबी का मूल्य 32,990 रु. है. ओप्पो रेनो3 प्रो 3 खूबसूरत रंगों, स्काई व्हाईट, मिडनाईट ब्लैक एवं ऑरोरल ब्लू में उपलब्ध होगा. यह 6 मार्च, 2020 से अमेज़न, फ्लिपकार्ट एवं ऑफलाईन रिटेल स्टोर्स पर मिलना शुरू होगा.

वर्किंग वुमन से कम नहीं हाउस वाइफ

टीवी पर आप ने एक विज्ञापन देखा होगा, जिस में 2 सहेलियां बहुत दिनों बाद मिलती हैं. पहली दूसरी से पूछती है, ‘‘क्या कर रही है तू?’’

दूसरी गर्व से कहती हैं, ‘‘बैंक में नौकरी कर रही हूं और तू?’’

पहली कुछ झेंपते हुए कहती है, ‘‘मैं… मैं तो बस हाउसवाइफ हूं.’’

यह विज्ञापन दिखाता है कि हमारे समाज में हाउसवाइफ को किस तरह कमतर आंका जाता है या यों कहें कि वह स्वयं भी खुद को कमतर समझती है, जबकि उस का योगदान वर्किंग वुमन के मुकाबले कम नहीं होता है. एक हाउसवाइफ की नौकरी ऐसी नौकरी है जहां उसे पूरा दिन काम करना पड़ता है, जहां उसे कोई छुट्टी नहीं मिलती, कोई प्रमोशन नहीं मिलती, कोई सैलरी नहीं मिलती.

हजारों रुपए ले कर भी यह काम कोई उतने लगाव से नहीं कर पाता

आज महानगरों में ही नहीं, छोटेछोटे शहरों में भी घरेलू कार्यों के लिए हजारों का भुगतान करना पड़ता है. साफसफाई करने वाली नौकरानी इस मामूली से काम के भुगतान के रूप में क्व500 से क्व1000 तक लेती है. खाना बनाने के लिए और ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं. ऐसे ही बच्चों के लिए ट्यूशन की बात हो या फिर घर में बीमार मांबाप की सेवा की, कपड़े धोने की बात हो या फिर 24 घंटे परिवार के सदस्यों की सेवा के लिए खड़े होने की, हाउसवाइफ द्वारा किए जाने वाले कामों की लिस्ट लंबी है.

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पत्नी को अर्द्धांगिनी कहा जाता है, पर वह उस से बढ़ कर है. तमाम मामलों में पति के लिए पत्नी की वही भूमिका होती है, जो बच्चे के लिए मां की. प्रतिदिन सुबह उठें तो चाय चाहिए, नहाने के लिए गरम पानी चाहिए या फिर नहाने के बाद तौलिया, जिम जाते समय स्पोर्ट्स शूज की जरूरत या फिर औफिस जाते समय रूमाल की, हर कदम पर पत्नी की दरकरार.

बच्चे के सुबह उठते ही दूध पिलाने से ले कर नहलाने, खाना खिलाने, स्कूल के लिए तैयार करने या फिर बच्चे के स्कूल से लौटने पर होमवर्क कराने और उस के साथ बच्चा बन कर खेलने तक की जिम्मेदारी हाउसवाइफ ही निभाती है. सब से अहम बात यह है कि हाउसवाइफ मां के रूप में बच्चे को जो देती है, वह लाखों रुपए ले कर भी कोई नहीं दे सकता.

पत्नी के सहयोग से ही मैं अपने काम में सफल हूं: एक टीचर जो सचिन को सचिन, शिवाजी को शिवाजी या विवेकानंद को विवेकानंद बनाती है क्या आप उस की फाइनैंशियल वैल्यू निकाल सकते हैं? नहीं न? तो फिर बच्चे को पूरा समय दे कर उसे भावनात्मक रूप से पूर्ण बनाने वाली, अच्छे संस्कार देने वाली हाउसवाइफ का मूल्यांकन आप धन से कैसे कर सकते हैं? यह कहना है अंजू भाटिया का, जिन्होंने अपने आईटी हैंड पति की व्यस्त दिनचर्या देख कर अपनी मल्टीनैशनल कंपनी की नौकरी इसीलिए छोड़ी, ताकि अपने वृद्ध सासससुर की देखभाल और दोनों बच्चों की परवरिश भली प्रकार कर सके.

उस के पति कहते हैं, ‘‘पत्नी के सहयोग से मैं अपने हर काम में सफल हूं. अगर वह इतना सब न करती तो न मेरा कैरियर संभलता और न ही घरपरिवार.’’

पूर्व में मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर कहती हैं कि माताओं को दुनिया में सब से ज्यादा सैलरी मिलनी चाहिए. उन के अनुसार, महिलाओं के द्वारा किए गए कामों की न तो प्रशंसा होती है और न ही उन्हें उस के लिए तनख्वाह मिलती है.

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) की डार्क रिपोर्ट के अनुसार, एक औसत भारतीय महिला दिन में करीब 6 घंटे ऐसे काम करती हैं, जिन के लिए उसे मेहनताना नहीं मिलता. यदि ये काम बाहर से किसी से कराएं जाएं तो इन की एक निश्चित कीमत होगी.

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कुछ वर्ष पूर्व महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रहीं कृष्णा तीरथ ने कहा था कि महिलाओं द्वारा किए जाने वाले घर के काम का मौद्रिक आंकलन किया जाना चाहिए और इस के बराबर मूल्य उन्हें अपने पतियों द्वारा मिलना चाहिए.

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भले ही गृहिणी को काम के लिए कोई मेहनताना न मिलता हो, मगर उस के द्वारा किया गया काम भी आर्थिक गतिविधियों में शामिल होता है और इसे भी राष्ट्रीय आय में जोड़ा जाना चाहिए. ऐसा न कर हम आर्थिक विकास में महिलाओं की हिस्सेदारी कम कर रहे हैं.

हाउसवाइफ की फाइनैंशियल वैल्यू के संदर्भ में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी गौरतलब है. कोर्ट के अनुसार, एक हाउसवाइफ के काम को अनुत्पादक मानना महिलाओं के प्रति भेदभाव को दर्शाता है और यह सामाजिक ही नहीं, सरकारी स्तर पर भी है.

कोर्ट ने एक रिसर्च की भी चर्चा की, जिस में भारत की करीब 36 करोड़ हाउसवाइफ के कार्यों का वार्षिक मूल्य करीब 612.8 डौलर आंका गया है घरेलू काम की कीमत न आंके जाने के कारण ही महिलाओं की स्थिति उपेक्षित रही है. अत: इस ओर हर किसी को ध्यान देने की जरूरत है.

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Sunrise Masala: शुद्धता के साथ दादी मां के मसालों जैसा स्वाद, त्यौहारों को बनाए यादगार

भारतीय खाने में मसाले का इस्तेमाल हमेशा से होता रहा है और इसके बिना हिंदुस्तानी खाना अधूरा माना जाता हैं. पहले के जमाने में घरों में महिलाएं बड़ी बुर्जुग दादी या नानी की देख रेख में खुद से मसाला तैयार करती थी जो सेहत के लिए भी अच्छा होता था और स्वाद में भी बेमिसाल होता था.

बदलते दौर में रेडीमेड का चलन

मगर बदलते दौर में लोगों की जीवनशैली में काफी बदलाव आ गया, जिसकी वजह से लोगों के पास अब इतना टाइम नहीं रहा कि वो घर में मसाला तैयार कर सके, इसलिए लोग बाजार से रेडीमेड मसाले खरीदने लगे. लेकिन इन मसालों में घर जैसे मसालों का स्वाद नहीं होता और लोग अक्सर घर जैसे मसालों के स्वाद को मिस करते हैं.

सनराइज के घर जैसे मसाले…

अगर आप भी मसालों का वही घरेलू स्वाद मिस करते हैं और एक ऐसे मसाले की खोज में हैं जो बिना मिलावट के तैयार किया गया हो? तो सनराइज मसाला आपकी इस तलाश का अंत हो सकता है. जी हां, सनराइज मसाला अपने गुणवत्ता और ताजगी के लिए जाना जाता है. इसे विशेष तरीके से तैयार किया जाता है जिससे ये टेस्टी और हेल्दी बन जाता है. यह मसाला बिना मिलावट के बनाया जाता है, जो इसकी गुणवत्ता को कम नहीं करता है. इन खाकर आपको अपनी दादी और नानी के बनाए मसालो का स्वाद याद आ जाएगा.

बिना मिलावट के होता है तैयार

सनराइज मसाला उन सभी मसालों में से एक है जो बिना मिलावट का होता है और आपके खाने को टेस्टी बनाने में मदद करता है. इसमें लाल मिर्च, धनिया, हल्दी, जीरा और अन्य मसाले शामिल होते हैं. जो पूरी शुद्धता के साथ बनाए जाते हैं.

फेस्टिवल सीजन के लिए परफेक्ट

आने वाले दिनों में हम कई फेस्टिवल सेलिब्रेट करने वाले हैं. चाहे उगादी हो या गुड़ी पड़वा. इस मौके पर कई टेस्टी और यम्मी रेसिपीज घर घर में बनाई है, ऐसे में सनराइज मसाले आपके खाने के स्वाद को दुगुना कर देंगे.

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लंदन फैशन वीक पहुंचा करण सिंह ग्रोवर का आर्ट, देखें फोटोज

अभी हाल ही में, करण सिंह ग्रोवर (Karan Singh Grover) ने अपने जन्मदिन पर एक Starinfinityart.com नाम का वेबसाइट और साथ ही YouTube चैनल, ‘Starinfinityart’ लांच किया. जिसमें उनकी कलाकृति का प्रदर्शन होगा. अभिनेता ने एक कलाकार के तौर पर खुद को सभी के सामने पेश करने के लिए अपने जन्मदिन पर इसे लांच करने का फैसला किया. हालांकि उन्होंने दर्शकों को ये बात नहीं बताई कि उनकी कलाकृति लंदन फैशन वीक में पेश की गयी थी जोकि लांच से पहले रखी गयी थी.

आपको बता दें कि ग्रोवर की कलाकृति के लंदन पहुंचने के पीछे की कहानी शुरू हुई इंडिया के पॉपुलर डिज़ाइनर रॉकी एस से जिन्होंने करण के ब्लैक पेन और इंक आर्ट को पहले ही देखा. रॉकी करण के आर्ट से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे अपने कलेक्शन ‘रिबर्थ’ में यूज़ करने का फैसला किया.

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एक आर्टिस्ट के तौर पर करण ने ख़ुशी-ख़ुशी हां कर दी. डिज़ाइनर ने करण के ब्लैक पेन और इंक आर्ट को मॉडल्स के ऑउटफिटपर प्रिंट किया था जिन्होंने लंदन फैशन वीक में वॉक किया था. करण का आर्ट रॉकी के विंटर वियर पर प्रिंट किया गया था जोकि इंग्लिश रनवे पर एक बड़ा हिट रहा.

करण ने कहा, “रॉकी ने हमेशा ही मेरे ब्लैक पेन और इंक आर्ट को पसंद किया है. उन्होंने मुझे अपने लेटेस्ट कलेक्शन ‘रिबर्थ’ के बारे में बताया और कहा कि तुम मेरे लिए कुछ क्यों नहीं बनाते? और ये सपने के पूरे होने जैसा था कि रॉकी एस ने मुझे कुछ बनाने को कहा है जोकि वो अपने कपड़े पर प्रिंट करना चाहते हैं. उन्होंने इस आर्ट को क्रिस्टल में अपने कपड़ों पर यूज़ किया और ये बहुत खूबसूरत लगे. एक समय ऐसा आता है जब आप अपनी तरफ देखकर कहते हैं कि तुम औसम हो क्योंकि तुमने ये किया और रॉकी ने तुम्हें करने के लिए कहा. ये सच में सपने के पूरे होने जैसा है.”

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Women’s Day 2020: महिलाओं के लिए खुद का नाम बनाना हमेशा कठिन होता है- आशिमा शर्मा

संस्थापक, आशिमा एस कुटोर

‘आशिमा एस कुटोर’ की संस्थापिका और फैशन डिजाइनर आशिमा शर्मा 5 साल से अपना फैशन पोर्टल चला रही हैं. वे 7 साल की उम्र से ही पोर्ट्रेट बनाती और पेंटिंग करती आ रही हैं. कला में दिलचस्पी के चलते कुछ ही सालों में फैशन इंडस्ट्री में अपनी अलग जगह बना ली. आशिमा ने कई अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड व अंतर्राष्ट्रीय आर्ट गैलरीज के साथ भी काम किया है. उन्हें लिखने का भी शौक है. वे ‘एशी माइंड सोल’ नाम से वैबसाइट चलाती हैं. उन्हें 2018 में ‘वूमन ऐक्सीलैंस अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. 2015 में उन्होंने एलएसीएमए (लैक्मा) लौस एंजिल्स में विश्व में 19वां पद प्राप्त किया. उन्हें 2012 में पर्थ अंतर्राष्ट्रीय आर्ट फैस्टिवल में बैस्ट अंतर्राष्ट्रीय टेलैंट से सम्मानित किया गया. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के अंश:

आप की नजर में फैशन क्या है?

मेरे लिए फैशन न केवल ट्रैंड्स को फौलो करना है, बल्कि व्यक्ति द्वारा अपनी पसंद के अनुसार आरामदायक ट्रैंड अपनाना भी माने रखता है. फैशन से व्यक्ति को अलग पहचान मिलती है.

फैशन को आत्मविश्वास से कैसे जोड़ा जा सकता है?

फैशन सिर्फ और सिर्फ आत्मविश्वास के बारे में है. आत्मविश्वास के बिना कोई भी पोशाक अच्छी नहीं दिखेगी, क्योंकि अगर पहनने वाला आत्मविश्वास के साथ सामने नहीं आ सकता तो कोई फर्क नहीं पड़ता कि कपड़े कितने अच्छे हों.

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भारत में महिलाओं की स्थिति पर क्या कहेंगी?

मुझे यह बात बहुत बुरी लगती है कि आज भी महिलाओं को वस्तु माना जाता है, जबकि लोगों को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए. उन का समाज में बहुत बड़ा योगदान रहा है. आज पुरुष और महिलाएं दोनों मिल कर काम कर रहे हैं. महिलाएं अपने काम और प्रोफैशनल जीवन के साथसाथ घर भी संभालती हैं. वे परिवार बनाती हैं और पुरुषों के कंधे से कंधा मिला कर बाहरी दुनिया में भी नाम कमाती हैं, पुरुषों को इस बात का एहसास होना चाहिए.

बतौर स्त्री आगे बढ़ने के क्रम में क्या कभी असुरक्षा का एहसास हुआ?

एक महिला होने के नाते मैं ने हमेशा महसूस किया कि मुझे काम में हमेशा पुरुषों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करना पड़ता है, क्योंकि महिलाओं के लिए खुद का नाम बनाना हमेशा कठिन होता है. लेकिन सफलता की राह हमेशा उन महिलाओं के लिए आसान होती है, जो चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहती हैं और कड़ी मेहनत करती हैं. एक समय के बाद मेरे मन से भी असुरक्षा के भाव दूर हो गए, क्योंकि मुझे पता था कि मैं अपने प्रयासों को सही दिशा में लगा रही हूं.

क्या आज भी महिलाओं के साथ अत्याचार और भेदभाव होता है?

बिलकुल. खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में देखा गया है कि महिलाओं को अभी भी समान वेतन, सुरक्षित वातावरण, उचित स्वच्छता नहीं मिलती है. उन की अधिकांश बुनियादी जरूरतें बड़ी कठिनाई से पूरी होती हैं. यह एक सचाई है कि भारत की ग्रामीण महिलाएं अभी भी बहुत कुछ झेल रही हैं.

घर वालों की कितनी सपोर्ट मिलती है?

मेरे पिता डा. एम.सी. शर्मा, माता डा. शालिनी शर्मा और भाई मनीष शर्मा सभी मुझे हमेशा सपोर्ट देते हैं. उन्होंने हमेशा मेरी प्रतिभा और कड़ी मेहनत पर विश्वास किया है. उन के समर्थन और प्रोत्साहन के बिना मेरे लिए कैरियर में ऊंचाइयां छूना नामुमकिन था.

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ग्लास सीलिंग के बारे में आप की राय?

आज महिलाएं हर वह मुकाम हासिल कर रही हैं जहां वे जाना चाहती हैं. कड़ी मेहनत हमेशा रंग लाती है. सफर मुश्किल जरूर होता है, लेकिन नामुमकिन बिलकुल नहीं खासकर उन के लिए जो मेहनत करने से बिलकुल नहीं कतराते हैं. ग्लास सीलिंग आज भी बड़ी समस्या है, पर जो हर मुश्किल को झेल आगे बढ़े उसे कामयाबी जरूर हासिल होती है.

कंफर्ट और स्टाइल का परफेक्ट कौम्बिनेशन है बाटा का 9to9 कलैक्शन

स्टाइलिश दिखना हर महिला को अच्छा लगता है. इसके लिए वह स्टाइलिश हेयरकट, मेकअप, लुक, आउटफिट्स व फुटवियर्स ट्राय करने में भी पीछे नहीं रहतीं. लेकिन स्टाइल के साथ यह बात भी बहुत मायने रखती है कि आप जिस भी स्टाइल का जूता या फुटवियर खरीदें वह कंफरटेबल हो वरना आप का सारा अटैंशन जूतों पर ही टिक कर रह जाएगा. ऐसे में बाटा की 9to9 कलैक्शन आप को स्टाइल के साथ-साथ फुल कंफर्ट देगी.

वर्किंग वुमंस के लिए बैस्ट

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आज महिलाएं सिर्फ घर तक ही सीमित नहीं रह गई हैं बल्कि वे आर्थिक रूप से खुद को सशक्त बनाने व कंधे से कंधा मिला कर चलने के लिए हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं. ऐसे में उन्हें जब 8-9 घंटे घर से बाहर रह कर बिताना पड़ता है तब उन के कंफर्ट का खासतौर पर ध्यान रखना पड़ता है, ताकि वे पूरा दिन अपने काम पर फोकस कर सके. उन के इसी कंफर्ट को ध्यान में रख कर बाटा लाया है ऐसे शूज, जो पूरा दिन आप के पैरों को आराम देने के साथ आप को रिलैक्स फील करवाने का काम करते हैं.

स्टाइल में दम है

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अनेक बार हम स्टाइल के लिए अपने पैरों के साथ समझौता कर लेते हैं. लेकिन अब आप को अपनी हैल्थ के साथ खिलवाड़ करने की जरूरत नहीं है. क्योंकि 9to9 कलैक्शन आप को कंफर्ट के साथ स्टाइल भी देगी. स्टाइल भी ऐसा कि हर कोई आप के पैरों को देख दंग रह जाएगा और पूछे बिना नहीं रह पाएगा कि आखिर ये फुटवियर स्टाइल किस ब्रैंड का है.

आपको दे स्टार जैसा लुक

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शूज की स्टार लुक टाइप कलैक्शन काफी जबरदस्त है. इस के अंतर्गत वैज हील्स, वेजिस, सैंडिल्स, हील वह हील सैंडिल्स इतने स्टाइलिश व कंफरटेबल बनाए गए हैं, जिन्हें भी आप किसी भी आउटफिट के साथ कैरी करें सब पर जचते हैं. कलर्स भी काफी अच्छे हैं, जिन्हें पहन कर आप स्टार्स की तरह ग्लैमरस लुक पा सकती हैं.

हर कदम बढ़ाएगा कौंफिडैंस

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चाहे…. होम हो या वर्क प्लेस पर जब तक आप खुद को आत्मविश्वास से भरपूर नहीं पाएंगी तब तक आप का हुनर खुल कर सामने नहीं आ पाएगा. ऐसे में बाटा शूज के साथ आप का हर कदम आप के आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करेगा. क्योंकि स्टाइल सुपर हिट जो है.

पुराने स्टाइल से हट कर

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9to9 कलैक्शन ने हर किसी को हैरान कर दिया है. क्योंकि अब ये कलैक्शन कंफर्ट के साथसाथ स्टाइल जो देती है. यंगस्टर्स व वर्किंग वुमंस को ध्यान में रख कर इसे डिजाइन किया गया है. क्योंकि उन्हें स्टाइल से कौंप्रोमाइज करना पसंद जो नहीं. अब ये कलैक्शन उन्हें नौनस्टोप कंफर्ट देगी. फिर चाहे वे उसे पहन कर मीटिंग में जाएं या फिर पोस्ट वर्क डिनर पर. तो हुई न यूनीक कलैक्शन.

इन बातों का भी रखें खास ख्याल

कंफर्ट को इग्नोर न करें

महिलाएं अकसर जूतों का स्टाइल देख कर उन्हें खरीद लेती हैं, जो आरामदायक नहीं होने के कारण उन्हें पूरा दिन अनईजी फील करती हैं. ऐसे में जूतों के कंफर्ट का खास ध्यान रखें ताकि आप पूरा दिन आराम से घूम सकें. वहीं कंफर्ट की बात आए तो बाटा के 9to9 क्लेक्शन हर तरह से परफेक्ट है.

ब्रैंडेड शूज ही खरीदें

सिर्फ स्टाइलिश व सस्ते जूते देख कर ही उन का चयन न कर लें बल्कि क्वालिटी व ब्रैंड का भी ध्यान रखें. क्योंकि ब्रैंडेड शूज की प्रोपर टेंस्टिंग होने के कारण यह पैरों की सेहत को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाती है. वहीं बाटा के शूज और सैंडल्स की बात करें तो यह सालों से चल रहा पौपुलर ब्रैंड है, जो अपने कस्टमर्स की हर जरूरत का ख्याल रखता है.

साइज हो परफैक्ट

जब भी शूज खरीदें तो साइज का खासतौर पर ध्यान रखें. क्योंकि जहां ज्यादा ढीले शूज से आप की ग्रिप नहीं बनती वहीं टाइट शूज से पैरों की मांसपेशियों पर दबाव पडऩे से पैरों में दर्द की शिकायत रहती है इसलिए शूज खरीदते समय साइज का खास ध्यान रखें. बाटा के फुटवियर कलेक्शन की बात करें तो यहां हर तरह के वूमन्स से रिलेटिड फुटवियर्स आपको मिल जाएंगे. इसी के साथ हर साइज का शूज और सैंडल भी आपको आसानी से मिल जाएगा.

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