ब्रेकफास्ट में परोसें आलू वौलनट पनीर परांठा

अगर आप बच्चों को ब्रैकफास्ट में कुछ हेल्दी और टेस्टी खिलाना चाहते हैं तो ये रेसिपी ट्राय करें. आलू वौलनट पनीर परांठा की ये रेसिपी टेस्टी की साथ-साथ आसानी से बनने वाली रेसिपी है. आप इसे कभी भी अपनी फैमिली को ब्रेकफास्ट में परोस सकती हैं.

हमें चाहिए

–  3 मध्यम आकार के आलू उबले व मैश किए

–  मैस्ड कौटेज चीज

–  दरदरे पिसे कैलिफोर्निया वॉलनट्स

–  1 मध्यम आकार का प्याज कटा

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–  नमक व मिर्च स्वादानुसार

–  1 छोटा चम्मच भुना जीरा

–  1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

–  1/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

–  3-4 कटी हरी मिर्चें

–  थोड़ा सी धनियापत्ती कटी.

परांठे के लिए हमें चाहिए

–  100 ग्राम गेहूं का आटा

–  100 ग्राम बाजरे का आटा

–  पानी जरूरत के अनुसार

–  2 बड़े चम्मच तेल परांठे सेंकने के लिए.

बनाने का तरीका

एक कटोरे में मैश आलू व कौटेज चीज को मिक्स कर लें. अब इस में कटा प्याज, पिसे अखरोट, धनियापत्ती, हरीमिर्चें व बाकी सभी मसाले मिला लें. अच्छी तरह मिलाने के बाद नमक मिक्स करें. अब आटा गूंधने के बाद उसे 30 मिनट के लिए रख दें. एक बौल के बराबर आटा ले कर उसे बेलें. फिर इस में ?भरावन भर परांठा बेल लें. अब तवे पर परांठे को दोनों तरफ से तेल लगा कर सुनहरा होने तक सेंकें. स्वादिष्ठ परांठे को मक्खन, दही व अचार के साथ गरमगरम परोसें.

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हम से ज्यादा समझदार हैं जानवर

क्या हम ही ऐसे जीव हैं जो बोल, सुन, खापी या वोट कर सकते हैं? हर पशुपक्षी, कीड़ामकोड़ा भी ऐसा ही करता है. अगर हम दुनिया को दूसरी नजरों से देखना शुरू कर दें कि सब जीव एकजैसे हैं, तो आप के लिए उन्हें सताना, मारना, नष्ट या इग्नोर करना मुश्किल हो जाएगा. दक्षिण अमेरिका की ब्राजील सरकार का इरादा है कि वहां समुद्र सरीखी नदी अमेजन के इर्दगिर्द उगे जंगलों का सफाया कर दिया जाए और वहां लोगों को रहने, फैक्टरियां लगाने, खेती करने की सुविधा दे दी जाए. इस से न केवल इन जंगलों में रह रही सैकड़ों जीवों की प्रजातियां हमेशा के लिए डायनासोरों की तरह लुप्त हो जाएंगी, बल्कि दुनिया विनाश की ओर बढ़ रहे कदमों को भी और तेज कर देगी.

अगर सरकार का व्यक्ति मुखिया बन कर दुनिया को नष्ट करने की हिम्मत रख सकता है, तो आप अपने इलाके के एक व्यक्ति क्यों नहीं बन सकते, जो अपने इलाके को और बेहतर बना दे?

मुरगियों को अपने स्टेटस का बहुत खयाल रहता है. उन्हें कई मुरगों के साथ सैक्स करना होता है, क्योंकि कई नर मुरगे अपने बल पर उन के साथ मेट करते हैं. पर प्रकृति ने उन्हें क्षमता दी है कि वे उन शुक्राणुओं की पहचान कर सकें जो कमजोर फीके मुरगों के हैं और उन्हें अंडा देने से रोक सकें.

मिलतीजुलती आदतें

फरमैंट कर के खाने की चीजों से शराब बना कर सभी समाजों में पी जाती है चाहे वह कितनी ही नुकसानदेह क्यों न हो. चोरीडकैती और बलात्कार की तरह का यह दुर्गुण हर सभ्यअसभ्य समाज में हमेशा रहा है. लेकिन चिंपाजी भी शराब पीते हैं. हां, उन्हें शराब फरमैंट करना नहीं आता पर वे प्रकृति में अपनेआप सड़ने वाले फलों के रस को पीते हैं, जो शराब की तरह का नशा देता है. वे सख्त फलों के छिलकों के प्राकृतिक रूप से बने प्यालों में इस रस को जमा करते हैं और पत्तों को चम्मच की तरह इस्तेमाल कर के मादक रस पीते हैं.

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कुत्ते उन्हीं पर विश्वास करते हैं जो उन की सहायता करते हैं. प्रयोगों से वैज्ञानिकों ने पाया है कि यदि कुछ लोग कुत्तों को इग्नोर करते हैं तो वे कुत्ते उन से खाना नहीं मांगने जाते.

जैसे आदमियों के रोएं खड़े हो जाते हैं, वैसे ही डर के कारण या गुस्से में कुत्तों के बाल भी खड़े हो जाते हैं. बिल्लियों की तरह आदमियों की आंखें भी किसी चुनौती में चौड़ी हो जाती हैं. जिस तरह डर या रोब दिखाते समय आदमी सीधा तन कर खड़ा हो जाता है वैसे ही कुत्ते और बिल्लियां भी पूंछ खड़ी कर लेती हैं.

एकसमान भावनाएं

जैसे मर्द किसी स्त्री से प्रेम निवेदन करते हुए उसे कीमती पत्थर जैसे हीरा, सोना, मूंगा देता है वैसे ही पैंगुइन भी पत्थर के टुकड़े मादा को देते हैं. अंटार्कटिक में बर्फ के कारण पत्थर आसानी से नहीं मिलते और मादाओं को अपने अंडों के लिए घोंसलों में इन की जरूरत होती है. पैंगुइन इन पत्थरों को चोरी कर के भी लाते हैं. अगर नर पैंगुइन के पास पत्थर का टुकड़ा लाने की क्षमता होती है, तो मादा उसे आकर्षित भी करती है जैसे मानवों में वेश्याएं पैसों के लिए पुरुषों को आकर्षित करती हैं.

चूहे भी आदमियों की तरह चेहरों की भावभंगिमाओं से अपना गुस्सा, प्रेम, दर्द प्रकट करते हैं. उन की नाक के पास के बाल, कान, आंखें, नाक सभी इन भावों को दिखाते हैं, जिन्हें दूसरे चूहे सम झ लेते हैं.

वोट करने में भी पशुपक्षी पीछे नहीं हैं. यूरिशिया के लाल हिरन बड़े समूहों में रहते हैं. उन में से कुछ नेता बन जाते हैं पर जब तक चलने के लिए 60-70% खड़े न हो जाएं, नेता भी चलना शुरू नहीं कर सकता. अफ्रीकी भैंसे भी इसी तरह संयुक्त फैसला करते हैं कि कब चलना है, किधर चलना है. उन में मादाएं ही वोट करने की पहल करती हैं और किसी विशेष दिशा में चल कर पीठ के बल लेटना शुरू कर देती हैं. उन में दलबदल भी होती है, क्योंकि नाराज होने पर एक झुंड के हिस्से हो जाते हैं और फिर कुछ इधरउधर होते रहते हैं. जब मानवों और पशुओं में इतनी समानता है, तो उन्हें नष्ट करने के बारे में कैसे सोचा जा सकता है?

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जब राजा के हुनर पर चढ़ेगा रानी के हौंसले का रंग, दुनिया देखेगी कैसे होगा जीवन का नया ‘शुभारंभ’

हम सब का स्वभाव एक दूसरे से अलग होता है और हम सबमें कोई न कोई खूबी जरूर होती है. यही हम सब के व्यक्तित्व की खूबसूरती और पहचान दोनों है. जब दो अलग स्वभाव और मिज़ाज के लोग एक साथ आते हैं और एक दूसरे की खूबियों को पहचान ने में भी सफल होते हैं तो सफलता उनके कदम चूमती है. अगर किस्मत ऐसे ही दो लोगों को करीब लाती है तो वे मिलकर एक और एक दो नहीं पूरे ग्यारह हो जाते हैं. इसीलिए कलर्स लेकर आ रहा है, एक ऐसी ही साझेदारी की अनोखी कहानी ‘शुभारंभ’, आज से सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे सिर्फ कलर्स पर.

भोले-भाले राजा की कहानी का होगा शुभारंभ

शुभारंभ की कहानी दो किरदार ‘राजाऔर रानी’ की है जो गुजरात के एक छोटे शहर, सिद्धपुर से हैं. राजा एक मेहनती और स्वभाव से भोला लड़का है जिसके व्यवहार को सभी पसंद करते हैं. एक अमीर गुजराती बिजनेस घराने का लड़का. राजा अपने पिता को बचपन में ही खो देता है. उस के पिता की मौत के बाद उसके रिश्तेदार धीरे धीरे उसके पिता के बिजनेस और जायजाद पर कब्जा कर लेते हैं. पर राजा अपने भोलेपन की वजह से इससे अनजान बना रहता है और वे लोग अपने मन मुताबिक उसका इस्तेमाल करते रहते हैं.

राजा के हुनर को पहचान दिलाती रानी की कहानी का होगा शुभारंभ

रानी होशियार और कौन्फिडेंट लड़की है. वो गरीब घर की लड़की है जिसके पिता शराबी हैं और मां मेहनत मजदूरी कर के घर का पालन – पोषण करती है. बचपन से ही गरीबी से लड़ते-लड़ते रानी उम्र से पहले बड़ी हो जाती है और उसे ज़माने से निपटना बखूबी आता है. एक ओर रानी का बिज़नेस सेन्स काफी अच्छा है तो दूसरी तरफ राजा में पेंटिंग करने का हुनर है. राजा को घर-दुकान के काम से जब भी वक्त मिलता है, वो पेंटिंग करने में मशगूल हो जाता है. रानी वक्त के साथ राजा के व्यक्तित्व में छुपे हुनर को पहचान लेती है. राजा भी अपने हुनर में रानी से मिले हौसले के पंख लगाता है, और शुरू होती है सपनों की नई उड़ान.

राजा-रानी की जिंदगी में आएगा बदलाव

कलर्स पर आने वाले इस नए धारावाहिक का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है. माना जा रहा है कि ‘राजा-रानी’ का किरदारऔर उनकी कहानी सिर्फ दर्शकों का भरपूर मनोरंजन ही नहीं करेगी बल्कि अपने रिश्ते को नए नजरिये से देखने को प्रेरित भी करेगी. लोगों के दिलों में उत्सुकता है कि जब किस्मत राजा-रानी को करीब लाएगातो दोनों एक-दूसरे की जिंदगी में बदलाव कैसे लाएंगे.

राजा-रानी अपने नए जीवन का शुभारंभ कैसे करते हैं, साथ मिलकर साझेदारी की अनोखी कहानी कैसे लिखते हैं, जानने के लिए देखिये – ‘शुभारंभ’, आज से सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे सिर्फ कलर्स पर.

https://www.youtube.com/watch?v=_RqA9l4tTjY

40 पार ढूंढ़ लें खुशियां अपार

अकेली होने का कारण चाहे कोई भी हो यानी अविवाहित हों, तलाकशुदा हों या फिर विधवा यदि आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो अपनेआप को खुशहाल ही मानें. इतने वर्षों का अनुभव है आप के पास. यही वक्त है जब आप अपने दम पर सही निर्णय ले कर अपने जीवन को खुशहाल बना सकती हैं, खुद को पहचान कर दुनिया में अपनी पहचान बना सकती हैं. आर्थिक रूप से सक्षम न भी हों तो भी घबराने की आवश्यकता नहीं. आप स्वतंत्र हैं. अपने अनुकूल काम कर कमाई कर सकती हैं. अपना रूटीन तय कर सकती हैं कि आप अपना समय अपने ढंग से कैसे व्यतीत करना चाहती हैं. कैसे खुश रह सकती हैं. बस इस के लिए टाइम मैनेजमैंट जरूरी है यानी जिंदगी में अपार खुशियां पाने के लिए सकारात्मक सोच और समय प्रबंधन बेहद जरूरी है.

सदैव कुछ अच्छा सीखने की ललक और इंसानी जज्बा अपने व्यक्तित्व में ढाल लें. अपनी सोच, अपना नजरिया सकारात्मक रखते हुए निम्न मुख्य बातों के लिए समय प्रबंधन अवश्य करें:

– काम का समय.

– सेहत का समय.

– शौक का समय.

– पड़ोसियों, रिश्तेदारों व दोस्तों का समय.

– मनोरंजन का समय.

– सामाजिक कार्यों का समय.

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इन में सब से पहला है कामकाज का समय. यदि आप नौकरी, व्यवसाय अथवा अन्य किसी पेशे में हैं तो उस के लिए समय पहले ही निर्धारित हो. बेहतर हो उस की तैयारी का समय भी आप अवश्य निर्धारित कर लें जैसे क्या पहनना व ले जाना है, ये सब पहले ही तैयार रखें. जरूरी पेपर, फाइल, फोटोकौपी इत्यादि. यदि काम न करती हों और आर्थिक स्थिति सही न हो तो अपने अनुरूप कोई काम अवश्य पकड़ लें या छोटामोटा व्यवसाय ही कर लें ताकि आप का समय और घर दोनों ही सुव्यवस्थित हो सकें.

खुद के लिए समय

फिर आते हैं घरबाहर के काम. रोज के काम यानी खाना बनाना, गमलों, कूलर में पानी डालना, राशनसब्जी लाना या मंगाना, साफसफाई करनाकराना, बिल जमा करना, बैंक जाना आदि. इन के लिए भी समय तय करें. चौबीसों घंटे न लगी रहें ताकि आप अपनी अन्य जरूरतों के लिए भी समय निकाल सकें.

सुबह 1 घंटा सेहत को देना आप को पूरा दिन स्फूर्तिमय रखेगा. नियमित जो भी अनुकूल लगे व्यायाम अवश्य करें और सारे दिन के लिए चार्ज हो जाएं. स्वस्थ मनमस्तिष्क, शरीर होगा तो आप खुश रहेंगी. सकारात्मक ऊर्जा हमें अच्छा और सही कार्य करने में सहयोग करती है, यह सब को पता है.

हौबी यानी शौक के लिए भी समय रखना जिंदगी के लिए बेहद जरूरी है. एक व्यक्ति अपने जीवन में कोई न कोई शौक जरूर रखता है, जिस में वह अपने सारे दुखदर्द भूल कर खुशी और सुकून पाता है. यह मनुष्य के रिलैक्स और रिचार्ज होने का अद्भुत व अचूक उपाय है. अपना टाइम मैनेजमैंट कर इस के लिए भी थोड़ा समय रोज निकालें.

हौबी का साथ

कुछ शौक तो ऐसे होते हैं कि उन के साथ छोटेछोटे काम भी निबटाए जा सकते हैं जैसे संगीत सुनने के साथ डस्टिंग, टेबल अरेंजमैंट, कुकिंग आदि कुछ भी खुशीखुशी कर सकती हैं. हां, किताबें पढ़ने, पेंटिंग, नृत्य, घूमने, कुछ नया सीखने आदि के लिए आप को अलग से समय निकालना ही होगा, भले ही आधा घंटा. आप अनुभव करेंगी कि आप के अंदर ऊर्जा का अनोखा संचार हो रहा है. हौबी का साथ है तो फिर आप अकेली कहां? आप का सारा जहां आप के पास होगा.

रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए भी थोड़ा समय निकालें. किसी अपने से बातें कर के सुखदुख बांटें. कभी फोन पर तो कभी मिल कर सकारात्मक बातें करें. कभी उन के साथ घूमने जाएं, बिंदास शौपिंग, मौजमस्ती करें. मनपसंद साथियों का ग्रुप बनाएं. गंभीर विषयों पर भी विचारों का आदानप्रदान करें और अपने प्रेरक अनुभवों को सा झा करें. यह थोड़ा समय भी आप को खुशी से चार्र्ज कर देगा.

कुछ देर प्रकृति, पालतू पशुपक्षी का साथ भी महसूस करें. बहुत रिलैक्स रहेंगी, साथ ही खुशी और सुकून की अनुभूति होगी.

खुशियों की चाबी

मनोरंजन और दुनिया से जुड़े रहने का समय भी अपने रूटीन में अवश्य रखें. इस के लिए सब से आसान माध्यम टीवी है. आधेपौने घंटे का समय बहुत है. ऐसा कर अपनेआप को अपडेट रखें और खुश रहें.

अंतिम प्रमुख कार्य जो खुशियों की चाबी है वह है सामाजिक कार्य. आप सप्ताह में एक बार अवश्य समाज की भलाई के लिए कुछ समय निकालें. फिर चाहे गरीब, अनाथ बच्चों, बुजुर्गों, बेसहारा औरतों, निरीह पशुओं किसी की भी भलाई का काम हो अथवा भ्रष्टाचार विरोध, नशामुक्ति आदि किसी भी मुद्दे पर कार्य करें. यह कुछ समय का आप का सहयोग समाज को तो लाभान्वित करेगा ही, साथ ही आप को भी अपार खुशियों से भर देगा.

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और भी बहुत कुछ है 40 के पार. घबराएं नहीं. फिर देखें आप अकेली कहां. बिंदास खुशियां मनाएं, नेक कामों में बढ़ कर हिस्सा लें. कुछ अच्छा सीखेंसिखाएं, ऐंजौय करें. जीवन बिताएं नहीं, जीवन जीएं. ढूंढ़ लें खुशियां.

हाथों से बुनें खुशियां

1. स्ट्राबेरी स्वैटर विद ट्रैंडी पर्स

नाप: लंबाई-16 इंच, चौड़ाई-12 इंच.

सामग्री: पिंक और क्रीम कलर की ऊन, शेड नं. 1 व 19, सलाई नं. 7 व सिलने वाली सुई.

कुल ऊन: 320 ग्राम.

स्वैटर को नीचे से इकट्ठा शुरू करने की विधि: 95 फंदे डाल कर क्रीम ऊन से बार्डर शुरू करें. 2 सलाइयां उलटीउलटी से बुन कर डार्क पिंक ऊन लगा कर 1 सलाई सीधी 1 सलाई उलटी से प्लेन बुनते हुए अगले वाले दोनों साइड 3, 3 फंदे का बार्डर बुनते जाएं. क्रीम ऊन से बाकी फंदे डार्क पिंक ऊन से बुनते हुए 11 इंच का भाग बना कर कंधे की घटाई के लिए अगले 2 भाग अलग कर के 1 भाग पीछे का अलगअलग कर के कंधे की घटाई डाल कर तीनों भागों को अलगअलग कर के पिछले भाग की 4, 3, 2 की घटाई डाल कर 5 इंच का कंधा तैयार कर लें. अगले भाग की 11 इंच पर कंधे की घटाई डाल कर 5 इंच का कंधा तैयार कर के 12 इंच पर गले की गोलाई पर घटाई डाल कर 1 साइड का भाग तैयार कर के इसी प्रकार दूसरी साइड का भी भाग तैयार कर के कंधों से सिलाई कर के आगे और पीछे का भाग तैयार हो जाएगा.

कंधे का बार्डर: कंधे से गोल राऊंड में क्रीम ऊन से फंदे उठा कर उलटीउलटी सलाइयों से 2 सलाइयां बुन कर फंदों को बंद कर के एक साइड का बौर्डर तैयार कर के इसी प्रकार दूसरे का भी भाग तैयार कर के फंदों को बंद कर के दोनों साइड के बौर्डर तैयार कर लें.

गला: क्रीम ऊन से गले की गोलाई में फंदे उठा कर 1 सलाई सीधी 1 सलाई उलटी से प्लेन बुनते हुए 4 इंच का कौलर तैयार कर के फंदों को बंद कर के स्वैटर का कालर तैयार कर लें. इसी प्रकार आप का स्वैटर तैयार हो जाएगा.

कैप: 56 फंदे डाल कर क्रीम ऊन से 1 फंदा उलटे से 1 इंच का बार्डर तैयार कर के गहरी गुलाबी ऊन लगा कर 1 सलाई सीधी 1 सलाई उलटी से प्लेन बुनते हुए 7 इंच तक प्लेन बुन कर फंदों को घटाते हुए 8 इंच की कैप को तैयार कर के बाकी बचे फंदों को बंद कर के व पौमपौम लगा कर कैप  को सिल कर तैयार कर लें.

गर्ल्स पर्स: 60 फंदे डाल कर गहरी गुलाबी ऊन से 1 सलाई सीधी, 1 सलाई उलटी से बुनते हुए 6 इंच तक प्लेन बुन कर दो भागों में फंदों को कर के अगले भाग वाले 30 फंदे बंद कर के पिछले वाली साइड 30 फंदों को बुनते हुए गोलाई में घटाते जाएं. पर्स की अगली साइड कर के गोलाई में फंदों को बंद कर के पर्स पर बटन लगा कर पर्स को तैयार कर लें.

2. हाफ स्लीव डिजाइनर स्वैटर विद मफलर

नाप: लंबाई-27 इंच, चौड़ाई-21 इंच, बाजू-21 इंच.

सामग्री: प्रिंटेड ऊन, शेड नं. पीटीटी-36, सलाई नं 7 व सिलने वाली सुई.

कुल ऊन: 350 ग्राम.

पिछला भाग: 70 फंदे डाल कर प्रिंटेड ऊन से बौर्डर शुरू करें. 1 फंदा सीधा 1 फंदा उलटे से 3 इंच का बौर्डर तैयार कर के 1 सलाई सीधी 1 सलाई उलटी से प्लेन बुनना शुरू करें. 20 इंच का प्लेन भाग बुन कर 5, 4, 3, 2 की घटाई डाल कर 7 इंच का कंधा तैयार कर के 27 इंच का पिछला भाग तैयार कर लें.

अगला भाग: 70 फंदे डाल कर प्रिंटेड ऊन से बौर्डर शुरू करें. 1 फंदा सीधा 1 फंदा उलटे से 3 इंच का बौर्डर तैयार कर के डिजाइन शुरू करें. 1 फंदा सीधा बुन कर अगला फंदा सलाई पर उतार लें. फिर से 1 फंदा सीधा बुन कर इसी प्रकार सलाई को पूरा कर लें. इसी प्रकार डिजाइन को बनाते हुए 20 इंच तक बना कर 5, 4, 3, 2 की घटाई डाल कर 7 इंच का कंधा तैयार कर लें. कंधे की घटाई के साथ वी शेप में गले की घटाई डाल कर 27 इंच का अगला भाग तैयार कर लें.

बाजू: 35 फंदे डाल कर 1 फंदा सीधा 1 फंदा उलटे से 3 इंच का बौर्डर तैयार कर के डिजाइन शुरू करें. स्वैटर वाले डिजाइन से बाजू को बनाते हुए 6.6 सलाई पर 1.1 फंदा बढ़ाते हुए 19 इंच की बाजू बना कर 5, 4, 3, 2 की घटाई डाल कर 21 इंच की बाजू को तैयार कर के 1 साइड की बाजू को तैयार कर के इसी प्रकार दूसरे साइड की बाजू की भी बाजू को तैयार कर के दोनों बाजू को स्वैटर के साथ सिल कर तैयार कर लें.

गला: 136 फंदे गले के उठा कर 1 फंदा उलटे से 1 इंच का बौर्डर तैयार कर के फंदों को बंद कर के वी शेप में गला तैयार कर लें. इस प्रकार आप का स्वैटर तैयार हो जाएगा.

3. जेब्रा मफलर

नाप: लंबाई-64 इंच, चौड़ाई-7 इंच.

सामग्री: जेब्रा ऊन, शेड नं. पीटीटी 1322, सलाई नं. 4 व सिलने वाली सुई.

कुल ऊन: 120 ग्राम.

मफलर बनाने की विधि: 22 फंदे डाल कर डिजाइन शुरू करें. 1 फंदा सीधा 3 फंदे उलटे, 4 फंदों का क्रौस, 3 फंदे उलटे, 4 फंदों का क्रौस, 3 फंदे उलटे, 1 फंदा सीधे से सलाई को पूरा करें. इसी प्रकार डिजाइन को बनाते हुए 64 इंच लंबाई में मफलर को तैयार कर लें.

4. हैंगिंग पैटर्न वन पीस

नाम: लंबाई-40 इंच, चौड़ाई-15 इंच.

सामग्री: जूलियट ऊन, शेड नं. 37, क्रोशिया नं. 13 व सिलने वाली सुई.

कुल ऊन: 370 ग्राम.

लौंग ड्रैस: 13 इंच की 1 लंबी चेन बना कर चेन में टे्र. डाल कर पहली पक्तिं को पूरा करें. इसी प्रकार 2 पक्तियां बना कर डिजाइन शुरू करें. 2 पंक्ति में 2 ट्रे. 10 चेन 2 ट्रे, 10 चेन, इसी प्रकार पंक्ति को पूरा करें. इस प्रकार डिजाइन को बनाते हुए 3 इंच तक इसी प्रकार डिजाइन बना कर डिजाइन में चेन को बढ़ा कर 30 चेन बना कर 1 छोटा टांका ट्रे. का बना कर पंक्ति को पूरा करें. इसी प्रकार डिजाइन को बनाते हुए 7 इंच तक बना कर कंधे से दोनों साइड बाजू निकाल कर अगला और पिछला भाग इकट्ठा कर के जाली वाले डिजाइन से ड्रैस को बनाते जाएं. अगली पंक्ति में 30 चेन के बाद 10 ट्रे., 30 चेन 10 ट्रे., इसी प्रकार पंक्ति को पूरा करें. अगली पंक्ति में पूरी लाइन ट्रे. की बना लें. अगली पंक्ति में 2 ट्रे., 7 चेन, 2 ट्रे., 7 चेन, से पंक्ति को पूरा करें. इस प्रकार डिजाइन को बनाते हुए 3 इंच का डिजाइन बना कर फिर से 30 चेन वाला डिजाइन बना कर फिर से 3 इंच वाला डिजाइन बनाते हुए 40 इंच तक इसी प्रकार डिजाइन बना कर नीचे घेरे पर धागे की लडि़यों वाले डिजाइन से  झालर बनाते जाएं. नीचे वाली लडि़यां 20 इंच की तैयार कर लें. इस प्रकार ड्रैस को तैयार कर के गले की नैट पर मोती लगा कर ड्रैस को तैयार कर लें.

5. स्पाइडर श्रग

नाप: लंबाई-16 इंच, चौड़ाई-16 इंच.

सामग्री: हौबी मल्टी धागा, शेड नं. 32, क्रोशिया नं. 13 व सिलने वाली सुई.

कुल धागा: 170 ग्राम.

श्रग बनाने की विधि: प्रिंटेड धागे से 5 चेन बना कर चेन में ट्रे. भर कर डिजाइन शुरू करें. 2 ट्रे. 2 चेन 2 ट्रे., 2 चेन से पंक्ति को पूरा करें. अगली पंक्ति में भी इसी प्रकार डिजाइन को बनाते हुए 5 पंक्तियों में इसी प्रकार बना कर 2 ट्रे. को बढ़ाते जाएं. 2 ट्रे. के ऊपर 3 ट्रे., 2 चेन 3 टे्र., 2 चेन से पंक्तियों को बढ़ाते जाएं. इस प्रकार डिजाइन को बढ़ाते हुए 10 इंच तक अगला भाग बना कर लंबाई में 16 इंच तक बना कर ऊपर वाले साइड से 1 इंच बना कर ट्रे.  6 इंच तक डिजाइन बंद कर के बाकी का डिजाइन बनाते जाएं. कंधे के ट्रे. बंद कर के फिर से शुरू कर लें और डिजाइन बनाते हुए 10 इंच का पिछला भाग इसी प्रकार सीधासीधा बनाते हुए दूसरी साइड भी इसी प्रकार 6 इंच तक टे्र. छोड़ कर फिर ऊपर वाली साइड कंधा तैयार कर के रख लें. फिर आप 5 चेन से शुरू कर के ट्रे. भर कर 2 ट्रे., 2 चेन से डिजाइन शुरू कर के 10 इंच तक दूसरा आगे का भाग तैयार कर के कंधे वाली साइड से इस भाग को पीछे वाले भाग के साथ सिल कर तैयार कर के बटन लगा कर डोरी लगा कर पौमपौम वाली श्रग को तैयार करें. बीडिंग कर के प्रिंटेड धागे से श्रग को तैयार कर लें. इस प्रकार आप का श्रग तैयार हो जाएगा.

6. वी शेप पोंचू

नाप: लंबाई-16 इंच, चौड़ाई-11 इंच.

सामग्री: नीले रंग की ऊन, शेड नं. 13, सलाई नं.-7 व सिलने वाली सुई.

कुल ऊन: 180 ग्राम.

पोंचू बनाने की विधि: 9 इंच चौड़ाई में फंदे डाल कर नीले रंग की ऊन से बार्डर बनना शुरू करें. उलटीउलटी सलाईयों से बार्डर बुनते जाएं. 34 इंच की लंबाई कर के आगे वाले भाग को वी शेप सिल कर पोंचू को तैयार कर लें. अब आप वी शेप में डोरियां लगा कर आगे वाले भाग में बटन लगा कर पोंचू को तैयार कर लें. इस प्रकार आप का पोंचू तैयार हो जाएगा.

आर्ट में सेंसरशिप एक समस्या है –सयानी गुप्ता

फिल्म ‘मार्गरीटा विथ ए स्ट्रौ’ में पाकिस्तानी- बांग्लादेशी लड़की की भूमिका निभाकर डेब्यू करने वाली अभिनेत्री सयानी गुप्ता कोलकाता की है. उसे बचपन से ही अभिनय की इच्छा थी, जिसमें साथ दिया उसकी माता-पिता ने. सयानी फिल्म में अपने चरित्र पर अधिक फोकस्ड रहती है और किसी भी चरित्र के लिए सौ प्रतिशत मेहनत करती है. फिल्म की सफलता से अधिक वह इसकी प्रोसेस को एन्जौय करती है और फिल्म इंडस्ट्री में आये परिवर्तन को अच्छा दौर बताती है, जहां हर कलाकार को काम करने का मौका आज मिल रहा है. वेब सीरीज  ‘इनसाइड एज 2’ में वह अपनी भूमिका को लेकर बहुत उत्सुक है. इसके अलावा उसकी जर्नी के बारें में रोचक बातचीत हुई, जहां उन्होंने आज के समाज और इंडस्ट्री की सोच के बारें में चर्चा की. आइये जानते है क्या कहती है सयानी इस बारें में.

सवाल-इंडस्ट्री में आना आपके लिए इत्तफाक था या बचपन से सोचा था?

मैं बचपन से अभिनेत्री बनना चाहती थी. 4 साल की उम्र से मैंने इस क्षेत्र में आने की सोची थी. पर मेरा पूरा परिवार शिक्षा के क्षेत्र से है. मैं मिडिल क्लास बंगाली परिवार से हूं . एक्टिंग करना ही मेरे लिए बड़ी बात थी. मुंबई आकर फिल्मों में काम करने की बात तो कोई सोच भी नहीं सकता था,पर मेरे पिता म्युजिशियन और आर्ट लवर रहे, थिएटर में भी उन्होंने काम किया था. जब मैं एक साल 8 महीने की थी, तब मेरी माँ ने मुझे डांस स्कूल में डाल दिया था. मुझे डांस में तब डाला गया, जब मुझे कुछ अधिक समझ में नहीं आता था. थिएटर में मैंने पहली प्रस्तुति तब दी, जब मैं केवल 3 साल की थी और मुझे अभिनय के बारें में कोई जानकारी नहीं थी. फिर मैं अभिनय और फिल्म मेकिंग सीखने के लिए फिल्म इंस्टिट्यूट गयी. बाद में मुझे इसका काफी हेल्प मिला और अभिनय मिलने में भी सुविधा हुई. यहाँ काम करने के बाद मैंने बहुत कुछ सीखा है. असल में अभिनय एक ग्रेजुअल प्रोसेस है जो समय के साथ-साथ आता है.

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सवाल-सर्टिफिकेशन न होने की वजह से वेब सीरीज में इंटिमेट सीन्स और हिंसा भरपूर परोसा जाता है, इस बारें में आप क्या सोचती है?

ये हर व्यक्ति की पसंद पर निर्भर करता है कि वह क्या देखे और क्या न देखें. कलाकार निर्देशक और लेखक के आधार पर अभिनय करता है. कहानी की ग्राफ और चरित्र को अगर सटीक न दिखाई जाय तो वेब सीरीज अच्छी नहीं लगती. केवल व्यवसाय के लिए सेक्स, हिंसा आदि को दिखाया जाना सही नहीं होता. अगर मैं गुस्सा होती हूं  तो मुझे उसका एहसास देखने वालों के लिए होना चाहिए. इसके लिए जो जरुरी है वह निर्देशक दिखाता है. सेंसरबोर्ड पास नहीं करेगा ये सोचकर उसके एसेन्स को अगर ख़त्म कर दिया जाय, तो ये सही नहीं. वैसे ही बिना जरुरत के गली-गलौज भी अच्छा नहीं होता. कहानी के अनुसार कुछ भी दिखाने पर दर्शक भी उसे सही मानते है. जब व्यक्ति कहानी में घुसता है, तो जो भी चीज प्रमाणिकता के अनुसार होती है उसे देखना वे पसंद करते है.

सवाल-सेंसरशिप के बारें में आप क्या कहना चाहती है?

किसी भी आर्ट में सेंसरशिप एक समस्या है. क्रिएटिव लोगों को पूरी आज़ादी अपनी कहानी कहने के लिए होनी चाहिए. दर्शक ही बता सकता है कि क्या सही क्या गलत है.किसी भी आर्ट फॉर्म के लिए सेंसर समस्या है. अगर आप बड़ों के साथ किसी फिल्म या वेब को देख नहीं सकते तो कोई आपको इसे देखने के लिए फोर्स नही करेगा और ये आपकी पूरी आजादी आपको मिली है.

सवाल-आगे क्या कर रही है?

अभी छत्तीसगढ़ में मैंने एक मर्डर मिस्त्री पर कॉमेडी फिल्म की शूटिंग पूरी की है और आगे कई फिल्में और वेब सीरीज है. एक बांग्ला फिल्म की बात भी चल रही है.

सवाल-आप एक डांसर है लेकिन उस चरित्र में देखने को कम मिला क्या इसका मलाल है?

ये सही कि मुझे हमेशा इंटेंस भूमिका मिलती है और मैं चाहती हूं  कि वैसी फिल्में मुझे मिले जिसमें मैं डांस कर सकूं.

सवाल-किसी फिल्म का सफल होना आपके लिए कितना माइने रखती है?

किसी फिल्म को साइन करते वक़्त आप उसकी सफलता पर ध्यान नहीं देते, क्योंकि आपको उसकी कहानी और आपका चरित्र पसंद आता है. उस प्रोसेस में पूरी टीम काम करती है. हम केवल उस कहानी की एक पार्ट बनना चाहते है. इस वेब सीरीज में भी मेरी भूमिका क्रिकेट की पूरी जानकारी रखने वाले की थी, जो मेरे पास नहीं थी. मैंने मेहनत कर उसे रियल बनाने की कोशिश की. इसमें लेखक और निर्देशक का काफी हाथ रहा है, जिन्होंने मुझे इस भूमिका के लायक बनाया. इसके अलावा इंडियन क्रिकेट टीम में महिलाएं बहुत कम है, ऐसे में मुझे कुछ पता करना भी मुश्किल था.

सवाल-महिला और पुरुष में अंतर आज भी है, इसे कैसे कम किया जा सकता है? इसकी शुरुआत कहां से होनी चाहिए?

सबसे पहले महिला और पुरुष को एक ह्युमन की तरह ट्रीट करना पड़ेगा. समाज और फिल्म मेकर को भी ऐसी ही सोच रखनी होगी. जब काम पर कोई आता है तो महिला हो या पुरुष उसके टैलेंट के अनुसार उससे व्यवहार करने की जरुरत है. फिल्म लेखक का ये दायित्व है कि वह हर किरदार को एक नज़र से देखें. ये सही है कि आज भी ये अंतर है, इसके लिए समाज की सोच को बदलने की जरुरत है. सोच में बदलाव प्रोसेस में है, फिल्म मेकर, लेखक और निर्देशक कोशिश कर रहे है . इसके बारें में अधिक बात होने की जरुरत है. पहले आईटम सोंग करने वाले को अलग नजरिये से देखा जाता था, जो अब नहीं है और निश्चित ही ये एक सकारात्मक सोच है.

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सिनेमा हमारे समाज का एक भाग है और उसका प्रभाव रहता है, लेकिन घर पर बेटी और बेटो में अंतर को ख़त्म करना होगा. इससे सोच में बहुत बदलाव आयेगा.

सवाल-आप अपनी जर्नी से कितना संतुष्ट है?

मुझे अभिनय करना बहुत पसंद है और मैं हर जगह हर चरित्र को करना चाहती हूं , पर समय नहीं मिल पाता. पिछले 2 सालों से मैंने अपने परिवार और दोस्तों के साथ सही तरह से नहीं मिली और ये मेरे स्वास्थ्य पर भी असर होता है. मैं इस बात से खुश हूं  कि आज हर एक्ट्रेस को काम मिल रहा है, हर महिला ऐसे ही आगे बढे इसमें मुझे बहुत अधिक ख़ुशी मिलती है.

धर्म की आड़ में सब्जबाग

धर्म के नाम पर दानदक्षिणा देने के पाखंड के चलते आज हर धार्मिक स्थान पर ऐसे व्यापारी बैठे हैं जो पूजापाठ का सहारा ले कर न सिर्फ लोगों की भावनाओं और विश्वास के साथ खेलते हैं वरन उन्हें कंगाल भी बना देते हैं.

ये बाबा, ज्योतिषी, पंडित लोगों के दुखों को दूर करने की बात करते हैं और बदले में अपनी जेबें भरते हैं. इन्हें लोगों को अपने जाल में फंसाना भलीभांति आता है.

सोनाली को भी एक ऐसे ही बाबा ने फंसाने की कोशिश की. कानपुर की रहने वाली गृहिणी सोनाली की शादी को 6 साल हो गए हैं और उस की एक 4 साल की बेटी भी है. सोनाली के पति का खुद का साइकिल का स्टोर है. शादी के 4 साल बाद सोनाली के जीवन में सबकुछ बदलने लगेगा, ऐसा उस ने शायद ही सोचा होगा.

सोनाली को जब इस बात की जानकारी मिली कि उस के पति का किसी और के साथ अफेयर चल रहा है, तो उस के पैरों तले की जमीन खिसक गई. यह बात उसे तब पता चली जब वह एक दिन अपने पति के फोन से अपनी मां से बात कर रही थी. तभी उस लड़की का मैसेज आ गया.

सोनाली ने जब पूरा चैट पढ़ा तो वह हैरान रह गई. हालांकि उस ने उस वक्त सम झदारी दिखाई और पति से कोई सवालजवाब नहीं किया.

कुछ महीने बाद सोनाली के पति की हरकतें कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगीं. रात को देर से आना, कभी शराब पी कर आ जाना, पूरा दिन फोन पर व्यस्त रहना, बातबात पर सोनाली को डांटना, ये सब देख कर सोनाली बहुत परेशान हो गई.

सोनाली अपने पति को उस लड़की के चंगुल से दूर करना चाहती थी, लेकिन कोई उपाय नहीं सू झ रहा था. एक दिन उस की नजर अखबार के विज्ञापन पर गई तो वह चौंक पड़ी. उस में लिखा था, ‘‘शक्ति चमत्कार देखें. घर बैठे 2 घंटों में समाधान, गुरु सिकंदर कलकत्ते वाला, मेरे किए की कोई काट नहीं, घर बैठे 2 घंटों में समाधान. प्रेम विवाह, मनचाहा प्यार, ग्रहकलेश, सौतन, दुश्मन आदि से छुटकारा पाएं. ऐसी सभी समस्याओं का चुटकियों में हल. बस एक बार फोन करें. नंबर है-+++7096520.’’

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यह पढ़ते ही सोनाली को लगा शायद इस से सब ठीक हो जाए. अत: उस ने उस विज्ञापन में दिए गए नंबर पर फोन किया. एक आदमी ने फोन उठाया. सोनाली ने उसे अपनी सारी दुखभरी कहानी सुना दी.

सोनाली की बात सुनने के बाद उस व्यक्ति ने उस से कहा, ‘‘बेटी, तू चिंता मत कर. सब ठीक हो जाएगा. अगले दिन तेरा पति तेरे आसपास घूमेगा. हम तेरे, तेरे पति और उस लड़की के नाम पर हवन करेंगे. इस हवन से तेरा पति हमेशा के लिए तेरा हो जाएगा.’’

यह सुन कर सोनाली खुश हो गई. उस ने फिर एक सवाल किया, ‘‘मैं हवन के लिए कब आऊं?’’

यह सुन कर उस व्यक्ति ने कहा, ‘‘आप को आने की जरूरत नहीं है, बस आप को हवन सामग्री और जाप के लिए पैसे देने होंगे.’’

सोनाली ने जब पूछा कि कितने तो उस ने कहा कि क्व3 हजार. सोनाली ने पूजा के लिए हां कर दी. फोन कटने से पहले उस व्यक्ति ने सोनाली को सम झाया कि इस पूजा में बहुत शक्ति है. सब ठीक हो जाएगा. मैं अभी आप के मोबाइल नंबर पर बैंक अकाउंट डिटेल भेज रहा हूं. उस में क्व3 हजार डाल दो आप का काम हो जाएगा और फिर उस बाबा ने बिना देरी किए सोनाली के फोन पर बैंक अकाउंट की डिटेल भेज दी.

बाबा का बैंक अकाउंट नंबर +++200608 और आईएफएससी कोड ++++0000148 था, साथ ही बाबा ने इस बैंक अकाउंट यूजर का नाम नफीस लिख कर भेजा था.

पूजा के नाम पर धोखा

सोनाली ने सोचा कि पति और अपने परिवार के लिए वह इतना तो कर ही सकती है. अत: उस ने उस व्यक्ति के अकाउंट में क्व3 हजार ट्रांसफर कर दिए. पैसे ट्रांसफर करने के बाद उस व्यक्ति का फिर फोन आया. बोला, ‘‘बेटी, अब तेरा काम हो जाएगा.’’

सोनाली को भी लगा कि अब उस की जिंदगी बदल जाएगी और पति पहले की तरह उसे प्यार करने लगेगा.

इधर सोनाली का पति कुछ दिनों के लिए अपने गांव गया था. वहां से वह रोज सोनाली को फोन कर बहुत प्यार से हालचाल पूछता. सोनाली को यकीन होने लगा कि अब सब ठीक हो रहा है.

2-3 दिनों के बाद जब सोनाली का पति घर आया तो उस के व्यवहार में कुछ बदलाव नहीं दिखा. वह पहले की ही तरह हरकतें करता. रोज शराब पी कर आता. उस युवती के भी बराबर संपर्क में रहता. ये सब देख कर सोनाली सोच में पड़ गई कि सबकुछ पहले जैसा ही क्यों है? उस बाबा ने तो कहा था सब ठीक हो जाएगा. अत: उस ने उस बाबा से फिर से बात करने के लिए फोन उठाया ही था कि तभी गांव से उस की सासूमां का फोन आ गया.

सोनाली ने भावुक हो कर अपनी सारी कहानी अपनी सासूमां को बता दी. तब उस की सासूमां ने सोनाली को बताया कि उस का पति अपनी मरजी से सोनाली को फोन नहीं करता था. उस के कहने पर करता था. बाबा वाली बात सुन कर सोनाली की सास ने बहुत गुस्सा किया और फिर उसे सम झाया कि कोई बाबा रिश्तों को नहीं जोड़ सकता. उस ने तो सिर्फ तुम्हें ठगा है. अगर उस बाबा की बात सच होती तो अभी तुम्हारा पति तुम्हारे साथ बैठा होता.

सोनाली की सास ने उसे यह भी सम झाया कि रिश्तों को जोड़ना और तोड़ना हमारे हाथ में होता है. तुम जा कर अपने पति से बात करो पहले. बात करने से समस्या का समाधान जरूर निकलता है.

सोनाली जैसी कई औरतें आए दिन ऐसे बाबाओं के जाल में फंसती रहती हैं. आधुनिक दौर में इन लुटेरों ने लूटने का तरीका भी बदल लिया है. वे अब आधुनिक तरीके अपनाने लगे हैं. टीवी हो या यूट्यूब ये ढपोरशंखी अपना पिटारा खोल कर बैठ जाते हैं और अपनी लच्छेदार बातों से लोगों को खूब मूर्ख बनाते हैं.

ठगी का आधुनिक तरीका

मीनू भी एक ऐसे ही ढपोरशंखी के जाल में फंसी. मीनू वैसे तो मथुरा की रहने वाली है, लेकिन पिछले 3 सालों से नौकरी की वजह से दिल्ली में अपने दोस्तों के साथ रहती है. अंधविश्वासी मीनू की एक अजीब आदत है कि वह दिन की शुरुआत अखबार में राशिफल पढ़ने से करती है या फिर सुबहसुबह टीवी पर ज्योतिषी का कार्यक्रम देख कर. कई बार तो वह यूट्यूब पर भी भविष्यवाणी बताने वाले वीडियोज देखने लग जाती है.

मीनू एक बार ऐसे ही यूट्यूब पर वीडियो देख रही थी, जिस में ज्योतिषी ओमप्रकाश राशि के अनुसार आने वाला दिन कैसा होगा, क्या करना चाहिए, उस से कैसे बचें, बता रहा था. मीनू इस वीडियो को बहुत ध्यानपूर्वक देख रही थी. जब ज्योतिषी मीनू की राशि पर आए तो उन्होंने बहुत कुछ अच्छा तो बहुत कुछ ऐसा बताया जिसे सुन कर वह परेशान हो गई. उस वीडियो में ज्योतिषी का नंबर भी दिया गया था.

मीनू ने ++++654519 उस नंबर पर फोन किया. जब मीनू ने ज्योतिषी से बात की तो वह मीनू का  जन्मदिन, मातापिता का नाम आदि पूछने लगा. मीनू ने सब बता दिया. सबकुछ देखने के बाद ज्योतिषी का कहना था कि आप मांगलिक हो, आप पर शनि ग्रह भी है, जिस से आगे चल कर आप के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. फिर कहा कि कुंडली बना कर देगा. लेकिन इस के लिए उसे यहां आना होगा.

जब मीनू ने खर्चा पूछा तो क्व3 हजार बताए. मीनू ने ये सारी बातें जब अपने दोस्तों को बताईं तो सब ने उसे उस ज्योतिषी के पास जाने से मना कर दिया. वे उसे सम झाने लगे कि ये लोग पैसों के लिए बातों को बढ़ाचढ़ा कर बताते हैं. ये सब इन का धंधा है.

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दोस्तों की बात मीनू मान तो गई, लेकिन ज्योतिषी की बात सुन कर वह बहुत परेशान हो गई थी. उस के व्यवहार में भी चिड़चिड़ापन आ गया था, जबकि उस के जीवन में सबकुछ अच्छा चल रहा था.

कह सकते हैं कि आज के समय में लोगों का खुद पर से भरोसा ही उठ गया है. उन्हें भरोसा है तो उंगलियों में रंगबिरंगी अंगूठियां पहनने वालों और राम नाम का चोला लटका कर घूमने वाले बहुरुपियों पर. यदि जिंदगी में कुछ ठीक नहीं चल रहा, पतिपत्नी में लड़ाई हो रही है तो यहां इन ज्योतिषियों के अनुसार राहु और शनि की महादशा चल रही होती है. जीवन में कुछ भी हो रहा है तो माना जाता है कि वे सब ग्रहनक्षत्रों का खेल है. धर्म के नाम पर लूट मचाने वाले इन बहुरुपियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है और इन्हें बढ़ावा देने वाला हमारा समाज ही है.

बाबाओं की हकीकत

टीवी पर लोग कई बाबाओं को देखते और सुनते हैं. एक समय के बाद वे उन्हें अपना ईश्वर मान बैठते हैं. लोगों के अंदर इन के प्रति आस्था जाग उठती है. लेकिन ऐसे कई बाबा और ज्योतिषी हैं, जिन्होंने धर्म के नाम पर खूब पैसा कमाया. लेकिन इन की हालत ऐसी है कि ये खुद अपने दुखों को दूर नहीं कर सकते.

खुद को साधूसंत कहने वाले राम रहीम को कोई कैसे भूल सकता है. धर्म के नाम पर बड़ीबड़ी बातें करने वाला, धर्म के नाम पर फिल्म बनाने वाला आज जेल में है.

ऐसा ही आसाराम बापू है. खुद को धर्मगुरु बताने वाला आसाराम भी कई सालों से जेल में है. बलात्कार जैसे अपराध को अंजाम देने वाले इन दोनों ही तथाकथित पाखंडियों ने लोगों की आस्था के साथ जम कर खिलवाड़ किया था. जो बाहर हैं वे सब भी यही काम करते हैं पर उन पर पुलिस, प्रशासन, सरकार व पार्टी का वरदहस्त है.

देखने में लगता इन का जीवन सादे भोजन की तरह है, लेकिन ये सब तो सिर्फ दिखावा होता है. असल में ये इतनी ऐय्याशी करते थे, जिस का किसी को शायद ही अंदाजा हो. इन के पास पैसों की कमी नहीं. धर्म के नाम पर इन की कमाई इतनी अधिक होती कि इन की जेबें नोटों से भरी रहती हैं. ऐसे अनेक बाबा हैं जो अभी भी टीवी पर आते हैं और बेतुकी बातें करते हैं, फिर भी लोग उन्हें सुनते हैं.

जबरदस्ती करवाते हैं दान

जिन पंडितों, बाबाओं या गुरुओं को लोग भगवान का दर्जा देते हैं वही इन लोगों को लूटने का प्रयास सब से ज्यादा करते हैं. भारत में कई धार्मिक स्थल हैं, जिन में मथुरा, वृंदावन, गोकुल भी हैं. गोकुल में जो मंदिर है वहां एक बहुत अजीब मान्यता है. वहां के मंदिर में लोग दीवारों, जमीन और मंदिर के अंदर नाम लिखवाते हैं. ऐसा कहा जाता है कि नाम लिखवाने से सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं.

अगर आप जमीन पर नाम लिखवाते हैं तो इस की दक्षिणा कम ली जाती है, दीवार पर लिखवाते हैं तो दक्षिणा थोड़ी ज्यादा होती है और अगर आप मंदिर के अंदर नाम लिखवाते हैं तो इस के लिए आप को सब से ज्यादा दक्षिणा देनी होती है. आप को मंदिर में जगहजगह पंडित दिखेंगे, जो लोगों को इस के बारे में बताते हैं और अगर कोई मना करे तो ये उसे सुखी जीवन का लालच देते हैं. नाम लिखवाने से जीवन में कई तरह से लाभ होगा ऐसा बोल कर जबरदस्ती अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं.

मगर ये सब सुनने के बाद अगर कोई व्यक्ति नाम लिखवाने से मना करता है तो ये उस के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते. अचानक इन के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगता है.

नाम लिखवाना, जानवरों के नाम पर बाबाओं की जेबें भरना, टीवी पर गुरु या बाबा को पूजना सब आस्था के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाने का जरीया है.

चढ़ावे से व्यापार

मंदिरों में कितना चढ़ावा चढ़ता है, क्या आपने कभी सोचा है और इतना चढावा रोज जाता कहां है? दरअसल, वह सारा चढ़ावा बाजार में जा कर दोबारा बिकता है. किसी भी धार्मिक त्योहार के समय मंदिरों में अधिक भीड़ होती है. ऐसे में लोग अधिक से अधिक फूलफल चढ़ाते हैं और फिर बाद में यही फूलफल फिर बाजार में बिकने के लिए दे दिए जाते हैं.

धर्म एक व्यापार है. लोगों की धार्मिक सोच है कि जितना चढ़ावा चढ़ाएंगे उतना ही लाभ होगा. पंडितों को खुश रखो. ईश्वर अपनेआप खुश हो जाएंगे. मगर ये ईश्वर हैं कहां और कैसे दिखते हैं, यह शायद ही किसी को पता हो.

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रियलिटी शो जीतने के बाद रोमेंटिक वेकेशन पर निकले प्रिंस-युविका, देखें फोटोज

टीवी की पौपुलर औफ स्क्रीन जोड़ियों में से एक युविका चौधरी और प्रिंस नरूला इन दिनों वेकेशन पर हैं. इसकी जानकारी दोनों ने अपने फैंस को देते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दी हैं. वहीं फोटो शेयर करने के बाद से सोशल मीडिया की ये फोटोज वायरल हो रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं प्रिंस और युविका के वेकेशन की खास फोटोज…

रियलिटी शो जीतने के बाद बनाया प्लान

हाल ही में प्रिंस नरुला और युविका चौधरी ने एक रियलिटी शो जीत लिया है, जिसके बाद दोनों ने अपनी जीत को सेलिब्रेट करने के लिए वेकेशन पर जाने का प्लान बनाया.

 

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बाली में ऐसे बिता रहे हैं रोमांटिक वेकेशन

बाली की वादियो में प्रिंस और युविका एक दूसरे के साथ जमकर मस्ती कर रहे है।.दोनों के बेहद प्यारी क्यूट फोटोज इस बात का सबूत हैं कि दोनों को खूब मस्ती सूझ रही है.

वेकेशन पर निकला टीवी का सबसे हौट कपल

 

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रियलिटी शो जीतने के बाद अब सारी थकान निकालने के लिए प्रिंस नरुला और युविका चौधरी ने वेकेशन का मूड बनाते हुए बाली गए हैं. वहीं वेकेशन की फोटोज भी शेयर कर रहे हैं.

शेयर की लोकेशन की कई सारी फोटोज

 

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प्रिंस नरुला और युविका चौधरी ने बाली से लोकेशन की कई सारी क्लासिक फोटोज शेयर की है. युविका चौधरी ने इस दौरान कलरफुल ग्लासेज पहनकर खूब मस्ती की और ढेर सारी फोटोज खींचती हुई नजर आईं.

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नाइट और मौर्निंग में दिखा युविका का अलग अंदाज

मस्ती में सराबोर इस जगह पर झूमते-झूमते शाम के वक्त ब्लैक कलर की ड्रेस में जहां युविका खूबसूरत लग रही थीं तो वहीं सुबह युविका चौधरी ने पिंक कलर के ट्रैकसूट में अपना कूल-कूल अंदाज दिखाती हुई नजर आईं.

जानें बच्चों के बिगड़ने के पीछे क्या हैं ये 7 बड़े कारण

बच्चे मन के सच्चे होते हैं. लेकिन समय के साथ बड़े होते-होते उनकी शरारतें, बदतमीजी में बदलने लगती हैं. इसके पीछे का कारण पेरेंट्स भी होते हैं. जी हां, अक्सर पेरेंट्स अपने बच्चों के द्वारा की गई शरारतों के लिए उन्हें समझाते हैं और इसके लिए वे सख्त रवैया अपनाते हैं. जो कि बच्चों पर बुरा असर डालता हैं और ये बच्चों के बिगड़ने के पीछे का कारण बनते हैं. आज हम आपको पेरेंट्स का कुछ ऐसा व्यवहार बताने जा रहे हैं, जो बच्चों के बिगड़ने का कारण बनता हैं.

1. कभी भी बच्चे की तुलना उसके भाई-बहनों या दोस्तों के साथ न करें. इससे उसके मन में आपके लिए नेगेटिव सोच तो आएगी ही साथ ही वह अपने भाई-बहनों या दोस्तों के साथ भी सहज नहीं रह पाएगा.

2. बच्चे तो हर काम गलती करके ही सीखते हैं लेकिन आपका बात-बात पर उनपर चिल्लाना गलत है. इससे बच्चों पर बुरा असर पड़ता है और वह इस माहौल में अच्छे से बढ़ नहीं पाते. इसलिए अपने व्यवहार में थोड़ा-सा संतुलन रखें.

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3. बच्चों को अच्छे संस्कार या उनसे किसी भी तरह की उम्मीद करने से पहले अपनी बुरी आदतों को बदलें. क्योंकि बच्चा वही करता है जो अपने आसपास देखता है. इसके लिए आपको किताबों के साथ कुछ समय बिताना, देर रात तक टीवी न देखना, चीजों को सही जगह पर रखना, बच्चों के समाने झगड़ा न करना आदि जैसे कुछ अच्छी आदतें खुद में विकसित करें.

4. बच्चों को पढ़ाई के लिए या किसी और बात की वजह से कभी डराना-धमकाना नहीं चाहिए क्योंकि इससे बच्चों पर बुरा असर पड़ता है और उनका मानसिक विकास नहीं हो पाता.

5. जब बच्चे को हर बात पर डांटा जाए और उन पर पढ़ाई का दबाव बनाया जाता है तो बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं और किसी की बात नहीं मानते. ऐसे में कभी भी बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा न होनें दें और उनकी जरूरतों को समझते हुए व्यवहार करें.

6. आपका बार-बार डांटना के बच्चे के दिमाग पर बुरा असर डालता है. इससे कई बार बच्चा बात-बात पर डरने लगता है और किसी भी काम को करने से पहले ही पीछे हट जाता है. इसलिए अपने बच्चों को शांत तरीके से समझाए कि वह जो कर रहा है वो गलत हो.

7. बच्चों की गलती के लिए उनकी पिटाई करना या उन्हें अंधेरे कमरे में बंद करना भी गलत है. इससे बच्चों के दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और वह बिगड़ैल हो जाता है. इसके अलावा बार-बार पिटाई करने की आपकी आदत बच्चे को आपसे अलग कर सकती हैं.

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सर्दियों में ऐसे करें बुनाई

नवम्बर का महीना आते ही ऊन और सलाइयां हाथों में दिखाई देने लगते हैं. कल्पना में तरहतरह के स्वैटरों के डिजाइन आते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम अपनी कल्पना के डिजाइन को मूर्त रूप नहीं दे पाते. आइए, हम आप की इस समस्या का हल करते हैं. बुनाई बहुत अच्छी थेरैपी है, जो चिंता को दूर कर एकाग्रता लाती है. बुनाई की इतनी विविधताएं हैं कि सही ज्ञान के अभाव में हम वही डिजाइन थोड़ा बहुत इधरउधर कर बना देते हैं. जैसे ड्रैस में डिजाइन का कोई अंत नहीं उसी तरह स्वैटर भी तरह तरह के डिजाइन के बनाए जा सकते हैं. यहां हम आप के लिए ले आए हैं कुछ उपयोगी जानकारी जिस पर अमल कर के आप बुनाई कला में पारंगत हो जाएंगी. हाथ के बने स्वैटर बुटीक में महंगे मिलते हैं. इसलिए क्यों न थोड़ी सी मेहनत कर के कम खर्च में घर पर ही स्वैटर बनाएं.

1. हमेशा वर्धमान, ओस्वाल आदि किसी अच्छी कंपनी का ऊन इस्तेमाल करें. बच्चों के लिए बेबी वूल लें ताकि स्वैटर नरम बनें. सस्ते के चक्कर में न पड़ें वरना मेहनत व्यर्थ हो जाएगी. ऊन हमेशा स्वैटर से ज्यादा लें. एक व्यक्ति के हाथों से बुनाई हो तो अच्छा रहता है. कई हाथों में जाने से कसावट में फर्क आ जाने से स्वैटर की सुंदरता बिगड़ जाती है.

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2. डिजाइन के अलावा आप केबल, साबूदाना पैटर्न, जिगजैग डिजाइन डाल कर स्वैटर को सुंदर बना सकती हैं. 5-6 तरह के स्वैटर खुद आसानी से बना सकती हैं. बस, थोडे़ ध्यान और जानकारी की जरूरत है. स्वैटर पर अगर मोती, स्टोंस और नग लगा कर बनाएं तो स्वैटर बाजार के स्वैटर जैसा लुक देगा. आप इस स्वैटर को किसी भी पार्टी में पहन कर जा सकती हैं.

3. स्वैटर पर मोती लगाते समय हमेशा बारीक सूई का इस्तेमाल करें. नग या मोती लगाने के लिए स्वैटर के रंग का धागा इस्तेमाल करें. जब भी मोती या नग टांकें तो टांकने के बाद स्वैटर के अंदर की तरफ से धागे से अलग से बांध दें ताकि मोती खुलने न पाएं. आप इसी प्रकार डिजाइन में भी मोती, स्टोंस, सीपियां लगा कर स्वैटर को अलग रूप दे सकती हैं.

ग्राफ वाला स्वैटर बनाते समय

ग्राफ के द्वारा भी स्वैटर को सुंदर रूप दिया जा सकता है:

4. स्वैटर पर जिन रंगोें का ऊन लगा रही हों, ग्राफ के डिजाइन में वहां-वहां उसी रंग का इस्तेमाल करें. इस से स्वैटर बनाने में आसानी रहती है. डिजाइन ग्राफ पेपर पर बनाएं. पहले डिजाइन का एक सैंपल बना लें, बाद में स्वैटर पर ग्राफ बनाएं.

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5. ग्राफ पेपर को डिजाइन बनाने के बाद संभाल कर रखें. हमेशा सूझबूझ से कलर काम्बिनेशन बनाएं. इस से आप बहुत आसानी से बड़ेबड़े ग्राफ बना कर खूबसूरत स्वैटर तैयार कर सकती हैं.

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