Hindi Drama Story: छलिया कौन- क्या हुआ था सुमेधा के साथ

Hindi Drama Story: सब कहते हैं और हम ने भी सुना है कि जिंदगी एक अबूझ पहेली है. वैसे तो जिंदगी के कई रंग हैं, मगर सब से गहरा रंग है प्यार का… और यह रंग गहरा होने के बाद भी अलगअलग तरह से चढ़ता है और कईकई बार चढ़ता है. अब प्यार है ही ऐसी बला कि कोई बच नहीं पाता. ‘प्यार किया नहीं जाता हो जाता है…’ और हर बार कोई छली जाती है… यह भी सुनते आए थे.

आज भी ‘छलिया कौन’ यह एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बन कर मुंहबाए खड़ा है. प्यार को छल मानने को दिल तैयार नहीं और प्यार में सबकुछ जायज है, तो प्यार करने वाले को भी कैसे छलिया कह दें? प्यार करने वाले सिर्फ प्रेमीप्रेमिका नहीं होते, प्यार तो जिंदगी का दूसरा नाम है और जिंदगी में बहुतेरे रिश्ते होते हैं. मसलन, मातापिता, भाईबहन, मित्र और इन से जुड़े अनेक रिश्ते…

ममत्व, स्नेह, लाड़दुलार और फटकार ये सभी प्यार के ही तो स्वरूप हैं. इन सब के साथ जहां स्वार्थ हो वहां चुपके से छल भी आ जाता है.

वैसे, जयवंत और वनीला की कहानी भी कुछ इसी तरह की है. कथानायक तो जयवंत ही है, मगर नायिका अकेली वनीला नहीं है. वनीला तो जयवंत और उस की पत्नी सुमेधा की जिंदगी में आई वह दूसरी औरत है जिस की वजह से सुमेधा अपनी बेटी मीनू के साथ अकेली रहने के लिए विवश है. सुमेधा सरकारी स्कूल में शिक्षिका है और जयवंत सरकारी कालेज में स्पोर्ट्स टीचर है. दोनों की शादी परिवारजनों ने तय की थी.

सुमेधा सुंदर और सुशील है और जयवंत के परिजनों को दिल से अपना मान कर सब के साथ सामंजस्य बैठा कर कुशलतापूर्वक घर चला रही है. शादी के 10 सालों बाद सरकारी काम से जयवंत को दूसरे शहर में ठौर तलाशना पड़ा. काफी प्रयासों के बाद भी सुमेधा का ट्रांसफर नहीं हुआ. जयवंत हर शनिवार शाम को आता और पत्नी व बेटी के साथ 2 दिन बिता कर सोमवार को लौट जाता. मीनू भी प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ रही थी तो सुमेधा ने परिस्थितियों से समझौता कर लिया. सुमेधा सप्ताहभर घर की जिम्मेदारी अकेली उठाती रहती और सप्ताहांत में घर आए पति के लिए भी समय निकालती.

जयवंत के कालेज में एक प्राध्यापिका थी वनीला, जो अधिक उम्र की होने के बाद भी अविवाहित थी. वह सुंदर, सुशील और संपन्न थी. मनोनुकूल वैवाहिक रिश्ता न मिलने से सब को नकारती रही. उम्र के इस सोपान पर तो समझौता करना ही था, जो उस के स्वभाव में नहीं था, इसलिए आजीवन अविवाहित रहने का मन बना चुकी थी. अक्ल और शक्ल दोनों कुदरत ने जी खोल कर दी थी तो अकड़ भी स्वाभाविक. कालेज में सब को अपने से कमतर ही समझती थी.

जयवंत और वनीला ने जब पहली दफा एकदूसरे को देखा तो दोनों का दिल कुछ जोर से धड़का. जयवंत तो था ही स्पोर्ट्समैन तो उस का गठीला शरीर था. उसे देख कर वनीला को अपना संकल्प कमजोर पड़ता जान पड़ा. उसे लगा कि कुदरत ने उस के लिए योग्य जीवनसाथी बनाया तो सही, मगर मिला देर से. दोनों देर तक स्टाफरूम में बैठे रहते, जबरदस्ती का कुछ काम ले कर.

दोनों को पहली बार पता चला कि वे कितने कर्मठ हैं. एकदूसरे की उपस्थिति मात्र से वे उत्साह से लबरेज हो तेजी से काम निबटा देते. अधिकांश कार्यकारिणी समितियों में दोनों का नाम साथ में लिखा जाने लगा, क्योंकि इस से समिति के अन्य सदस्य निश्चिंत हो जाते थे. दोनों को किसी अन्य की उपस्थिति पसंद भी नहीं थी.

स्पोर्ट्स समिति की कर्मठ सदस्य और अधिकांश गतिविधियों की संयोजक अब वनीला मैडम होती थीं. यह अलग बात है कि उन की बातचीत अभी भी शासकीय कार्यों तक ही सीमित थी. व्यक्तिगत रूप से दोनों एकदूसरे से अनजान ही थे.

बास्केटबौल के टूर्नामैंट्स होने थे, जिस की टीम में वनीला दल की अभिभावक के तौर पर जबकि जयवंत कोच के रूप में छात्राओं के दल के साथ गए थे. वहां अप्रत्याशित अनहोनी हुई कि एक छात्रा की तबियत काफी खराब हो गई. उसे हौस्पिटल में भरती करना पड़ा. शहर के दूसरे कालेज के दल के साथ ही अपनी टीम को रवाना कर वे दोनों छात्रा के पेरैंट्स के आने तक वहीं रुके.

हौस्पिटल में गुजरी वह एक रात उन की जिंदगी में बहुत बड़ा परिवर्तन ले आई. रातभर बेंचनुमा कुरसियों पर बैठेबैठे ही काटनी पड़ी और चूंकि काम तो कुछ था नहीं, सो उस दिन खूब व्यक्तिगत बातें हुईं.

जयवंत ने वनीला से अभी तक शादी न करने की वजह पूछी तो उस के मुंह से अनायास निकल पड़ा, “तुम्हारे जैसा कोई मिला ही नहीं…”

उस की बात का इशारा समझ कर जयवंत भी बोल उठा, “जब मैं ही मिल सकता हूं तो मेरे जैसे की जरूरत ही क्या है?”

वनीला की आंखें आश्चर्यमिश्रित खुशी से फैल गईं,”क्या आप ने भी अभी तक शादी नहीं की?”

अब जयवंत मगरमच्छी आंसुओं के साथ बोला,”मेरी दादी मरते वक्त मुझे उन के एक दूर के रिश्तेदार की बेटी का हाथ जबरन थमा गईं… वह दिमाग से पैदल है, तभी तो यहां ले कर नहीं आया… अब मैं उसे तलाक दे दूंगा… यदि तुम चाहोगी तो हम शादी कर लेंगे, वीनू.”

“ओह जय, कितना गलत हुआ तुम्हारे साथ… हम पहले क्यों नहीं मिले? अब तुम्हारी पत्नी है तो हम कैसे शादी कर सकते हैं?”

“क्यों नहीं कर सकते वीनू… आई लव यू…और मुझे पता है कि तुम भी मुझे प्यार करती हो… बोलो, सच है न यह? हमारी जिंदगी है… हम एकदूसरे के साथ बिताना चाहें तो इस में गलत क्या है?” कहते हुए उस ने भावातिरेक में वनीला का हाथ कस कर पकड़ लिया.

उम्र की परतों में वनीला ने जो भावनाओं की बर्फ छिपा रखी थी वह जयवंत के सहारे की गरमी से पिघलने लगी… जवाब में उस ने भी बोल ही दिया, “आई लव यू टू जय… आई वांट टू स्पैंड माई लाइफ विद यू.”

इधर इजहार ए इश्क हुआ और उधर छात्रा की तबियत थोड़ी सुधरने लगी. वीनू सोच रही थी कि जय की पत्नी के साथ मैं छल कर रही हूं तो गलत नहीं है, क्योंकि उस के परिवार वालों ने भी तो जय के साथ छल किया है. जय सोच रहा था कि घर की जिम्मेदारी भी उठाऊंगा, पत्नी और बेटी तो वैसे ही अकेले रहने की आदी हो गई हैं… यहां पर मैं वीनू को उस के हिस्से का प्यार दे कर उस पर उपकार कर रहा हूं… कोई छल नहीं कर रहा, वह भी तो मुझे पाना चाहती है. बेटी को पढालिखा कर शादी कर दूंगा… कितने ही पुरुषों ने 2 शादियां की हैं… यह कहीं से भी गलत नहीं है और सुमेधा तो इस सब से अनजान ही थी.

जय और वीनू अब कालेज के बाद भी साथ में समय गुजारने लगे थे. उम्र का तकाजा था तो शाम के बाद कभी कोई रात भी साथ में गुजर जाती. जय अपने रूम पर कम और वीनू के घर पर अधिक समय गुजारने लगा. दोनों ने चोरीछिपे शादी भी कर ली, मगर उसे गुप्त रखा.

जय का रविवार अभी भी सुमेधा और मीनू के साथ गुजरता था. यह बात भी सोलह आने सच है कि पत्नियों की आंखें उन्हें अपने पतियों की नजरों में परिवर्तन का एहसास करा ही देती हैं. सुम्मी भी जय में आए परिवर्तन को महसूस कर रही थी. रहीसही कसर स्टाफ मैंबर्स ने पूरी कर दी.

एक गुमनाम पत्र पहुंचा था सुम्मी के पास जिस में जयवंत और वनीला के संबंधों का जिक्र करते हुए उसे सावधान किया गया था.

अगले रविवार जब जयवंत घर पहुंचा तो वहां अपने मातापिता और सासससुर को आया देख कर हैरान रह गया. हंगामा होना था… हुआ भी… जयवंत लौट आया इस समझौते के साथ कि तलाक के बाद भी मीनू की पढ़ाई और शादी की सारी जिम्मेदारी वही वहन करेगा. अब वीनू से शादी की बात राज नहीं रह गई थी.

काफी लंबे अरसे बाद किसी वजह से हमारा सुमेधा के शहर में जाना हुआ. जयवंत ने सुम्मी और मीनू से मिल कर आने को कहा. हमें भला क्यों आपत्ति होती… जयवंत और वनीला निस्संतान थे, इसलिए इस की तड़प तो थी ही.

इतने सालों बाद बेटी से मिलने की तड़प तो पिता को होनी स्वाभाविक भी थी. प्यार का खुमार हमेशा एकजैसा नहीं रहता है और जयवंत की पोस्टिंग भी दूसरे शहर में हो चुकी थी. अब उसे अकेले में अपराधबोध सालता होगा. जयवंत के मातापिता ने वीनू को कोसने में कोई कसर नहीं रखी. उन के अनुसार उस बांझ स्त्री ने उन के बेटेबहू का घर तोड़ कर उन का जीवन नारकीय बना दिया है. उस ने पत्नी का सुख तो दिया मगर पिता का सुख नहीं दे पाई. उसी की वजह से जय और मीनू इतने सालों तक एकदूसरे से दूर रहे.

अब मीनू पीजी की पढ़ाई पिता के साथ रह कर उन के कालेज से करना चाहती थी. जयवंत और वनीला की पोस्टिंग अलगअलग शहर में होने से शायद उन्हें फिर उम्मीद की किरण दिख रही थी. सुमेधा का कहना था कि मुझे कोई अपेक्षा नहीं है मगर मीनू को उस का अधिकार मिलना चाहिए.

वनीला के विरोध के बावजूद भी मीनू अपने पिता के घर रहने आ गई थी. वीनू अब वीकैंड में आती थी. जब कभी कुछ विवाद होता तो उन का फोन आने पर हमें ही जाना पड़ता था, क्योंकि न चाहते हुए भी इस कलह की अप्रत्यक्ष वजह तो हम बन ही चुके थे. न हम सुम्मी से मिलने जाते और न ही यह टूटा तार फिर से जुड़ता.

आज भी अचानक फोन आया और वीनू ने कहा, “आपलोग तुरंत आइए, अब इस घर में या तो मैं रहूंगी या मीनू.”

कुछ देर तक तो हम समझ ही नहीं पाए… सौतन का आपसी झगड़ा तो सुना था, मगर सौतेली मां और बेटी का इस तरह से झगड़ना…?

आश्चर्य की एक वजह और थी कि वनीला और मीनू दोनों ही काफी समझदार थीं. अलगअलग दोनों से बात करने पर हम इतना समझ पाए थे कि दोनों अपनी सीमाएं जानती थीं और एकदूसरे के क्षेत्राधिकार में दखल भी नहीं देती थीं. कभीकभी जय संतुलन नहीं कर पाते, तभी विवाद होता था.

जय का कहना था कि मीनू ही मेरी इकलौती संतान है तो वीनू को भी इसे स्वीकार लेना चाहिए. आखिर वह उस की भी बेटी है. सुमेधा ने तो वनीला को अपनी जगह दे दी तो क्या यह उस की बेटी को हमारी जिंदगी में थोड़ी भी जगह नहीं दे सकती? उस का अधिकार तो यह नहीं छीन रही है. 2-3 साल बाद तो ससुराल चली जाएगी, तब तक भी इसे आंख की किरकिरी नहीं मान कर सूरमे की तरह सजा ले… हमारी जिंदगी में रोशनी ही तो कर रही है…

हम भी जय की बातों से सहमत थे. जिंदगी का यही दस्तूर है… दूसरी औरत ही हमेशा गलत ठहराई जाती है. मैं भी एक औरत हूं तो सुम्मी का दर्द महसूस कर रही थी और मीनू से सहानुभूति होते हुए भी वीनू को गलत नहीं मान पा रही थी. मेरे पति वीनू को गलत ठहरा रहे थे और मैं जय को… एक पल को लगा कि उन का झगड़ा सुलझाने में हम न झगड़ पड़ें.

वीनू ने चुप्पी तोड़ी,”हम इतने सालों से अकेले रहे, मीनू कोई छोटी बच्ची नहीं है, उसे समझना चाहिए कि मैं वीकैंड पर आती हूं, उस के आने के बाद जय तो आते नहीं उसे अकेला छोड़ कर, यदि कुछ गलत दिखे तो मुझे मीनू को डांटने का अधिकार है या नहीं? यदि कुछ ऊंचनीच हो गई तो दोष तो मुझे देंगे सब… पड़ोस में रहने वाले लड़के से इस का नैनमटक्का चल रहा है, मैं ने खुद देखा… पूछा तो साफ मुकर गई और जय मुझे ही गलत कह रहे हैं. यह उतनी भी सीधी नहीं है, जितनी दिखती है…” उस का प्रलाप चलता ही रहता यदि हमें मीनू की सिसकियां न सुनाई देतीं.

“मेरी कोई गलती नहीं हैं… आंटी मुझे क्यों ऐसा बोल रही हैं, वे खुद जैसी हैं, वैसा ही मुझे समझ रही हैं… मैं उन की सगी बेटी नहीं हूं तो मेरी तकलीफ क्यों समझेंगी?” सुबकते हुए भी मीनू इतनी बड़ी बात बोल गई. एक पल को सन्नाटा छा गया.

“मुझे भी आज मीनू को देख कर अपना अजन्मा बच्चा याद आता है…” सन्नाटे को चीरते हुए वनीला ने रहस्योद्घाटन किया. अब चौंकने की बारी हमारी थी.

“वीनू, चुप रहो प्लीज… मीनू बेटी के सामने इस तरह बात मत करो…” जयवंत गिड़गिड़ाते हुए बोले. मीनू भी सहम सी गई.

वीनू के सब्र का बांध जो टूटा तो आंसुओं की बाढ़ सी आ गई, “बताओ मेरी क्या गलती है… जब जय आखिरी बार सुम्मी के घर से लौटे थे, तब मैं ने इन्हें खुशखबरी दी थी… जीवन बगिया में नया फूल खिलने वाला था… मगर…”

जय ने बीच में ही बात काट दी, “वीनू प्लीज… मेरी गलती है, मुझे माफ कर दो. मगर प्लीज अब चुप हो जाओ…”

लेकिन वीनू ने भी आज ठान ही लिया था. वह बोलती रही और परत दर परत जयवंत के छल की कलई खोलती गई.

“उस समय इन्होंने मुझे कहा कि अभी कोर्ट में केस चल रहा है. इस समय सुम्मी के वकील को हमारी शादी का सुबूत मिल गया तो हम मुश्किल में पड़ जाएंगे… सरकारी नौकरी भी जा सकती है… तुम अभी बच्चे को एबोर्ट करवा दो.… एक बार कोर्ट की कार्यवाही निबट जाएं फिर हम नए सिरे से जिंदगी शुरू करेंगे और बच्चा तो भविष्य में फिर हो ही जाएगा…”

“तो मैं ने गलत नहीं कहा था… उस समय यही उचित था…”

“उचितअनुचित मैं नहीं जानती. मुझ पर तो बांझ होने का कलंक लग गया, क्योंकि मीनू तुम्हारी बेटी है, यह सब जानते हैं.”

हम पसोपेश में बैठे थे. स्थिति इतनी बिगड़ने की उम्मीद नहीं थी. मैं सोच रही थी कि प्यार क्याक्या बदलाव ला देता है, सही और गलत की विवेचना के परे… सुम्मी ने मातृत्व को जिया मगर परित्यक्त हो कर अधूरी रही.… वीनू ने प्रेयसी बन प्यार पाया मगर मातृत्व की चाह में अधूरी रही… जयवंत ने सुम्मी और वीनू के साथ अधूरी जिंदगी जी, बेटी होने के बाद भी मीनू को दुलार न सका… क्या यही प्यार है या मात्र छलावा है?

“आप ने मेरे पापा को छीना, अपने अजन्मे बच्चे की हत्या की थी, इसलिए आप मां नहीं बन सकीं… कुदरत ने आप को सजा दी,” मीनू भी आज उम्र से बड़ी बातें कर वीनू को कटघरे में खींच रही थी.

“देखो, जो हुआ उसे हम बदल नहीं सकते. मीनू सही कह रही है, हमारी गलती का प्रायश्चित करने के लिए ही कुदरत ने मीनू को हमारे पास भेज दिया है, वही हमारी बेटी है, तुम बांझ नहीं हो… प्लीज अब बात को यहीं खत्म करो…”

“बात तो अब शुरू हुई है. कुदरत ने सजा नहीं दी, यह तो… ” बोलते हुए वीनू उठी और पर्स में से एक कागज निकाल कर मेरे सामने रख दिया, “यह देखो… सजा मुझे मिली है, यह सही है, मैं ने प्यार किया मगर जय ने मेरे साथ कितना बड़ा छल किया… यह अचानक मिला है मुझे, देखो…”

“क्या नाटक है यह? कौन सा कागज है?” जय अब गुस्से से चिल्लाया.

मैं ने देखा… वह मैडिकल सर्टिफिकेट था, जय की नसबंदी का…”आप ने वीनू को बताए बिना ही औपेरशन…”

मैं ने बात अधूरी छोड़ दी. अब जरूरी भी नहीं था कुछ बोलना. अब परछाई पानी में नहीं थी. आईने में सब स्पष्ट दिख रहा था और हम सोच रहे थे कि प्यार में छल हम किस से करते हैं, अपने रिश्तों से या खुद से, खुद की जिंदगी से?

प्रश्न अभी तक अनुत्तरित ही है…

Hindi Drama Story

Hindi Fictional Story: बरसी मन गई- कैसे मनाई शीला ने बरसी

Hindi Fictional Story: इधर कई दिनों से मैं बड़ी उलझन में थी. मेरे ससुर की बरसी आने वाली थी. मन में जब सोचती तो इसी नतीजे पर पहुंचती कि बरसी के नाम पर पंडितों को बुला कर ठूंसठूंस कर खिलाना, सैकड़ों रुपयों की वस्तुएं दान करना, उन का फिर से बाजार में बिकना, न केवल गलत बल्कि अनुचित कार्य है. इस से तो कहीं अच्छा यह है कि मृत व्यक्ति के नाम से किसी गरीब विद्यार्थी को छात्रवृत्ति दे दी जाए या किसी अस्पताल को दान दे दिया जाए.

यों तो बचपन से ही मैं अपने दादादादी का श्राद्ध करने का पाखंड देखती आई थी. मैं भी उस में मजबूरन भाग लेती थी. खाना भी बनाती थी. पिताजी तो श्राद्ध का तर्पण कर छुट्टी पा जाते थे. पर पंडित व पंडितानी को दौड़दौड़ कर मैं ही खाना खिलाती थी. जब से थोड़ा सा होश संभाला था तब से तो श्राद्ध के दिन पंडितजी को खिलाए बिना मैं कुछ खाती तक नहीं थी. पर जब बड़ी हुई तो हर वस्तु को तर्क की कसौटी पर कसने की आदत सी पड़ गई. तब मन में कई बार यह प्रश्न उठ खड़ा होता, ‘क्या पंडितों को खिलाना, दानदक्षिणा देना ही पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है?’

हमारे यहां दादाजी के श्राद्ध के दिन पंडितजी आया करते थे. दादीजी के श्राद्ध के दिन अपनी पंडितानी को भी साथ ले आते थे. देखने में दोनों की उम्र में काफी फर्क लगता था. एक  दिन महरी ने बताया कि  यह तो पंडितजी की बहू है. बड़ी पंडितानी मर चुकी है. कुछ समय बाद पंडितजी का लड़का भी चल बसा और पंडितजी ने बहू को ही पत्नी बना कर घर में रख लिया.

मन एक वितृष्णा से भर उठा था. तब लगा विधवा विवाह समाज की सचमुच एक बहुत बड़ी आवश्यकता है. पंडितजी को चाहिए था कि बहू के योग्य कोई व्यक्ति ढूंढ़ कर उस का विवाह कर देते और तब वे सचमुच एक आदर्श व्यक्ति माने जाते. पर उन्होंने जो कुछ किया, वह अनैतिक ही नहीं, अनुचित भी था. बाद में सुना, उन की बहू किसी और के साथ भाग गई.

मन में विचारों का एक अजीब सा बवंडर उठ खड़ा होता. जिस व्यक्ति के प्रति मन में मानसम्मान न हो, उसे अपने पूर्वज बना कर सम्मानित करना कहां की बुद्धिमानी है. वैसे बुढ़ापे में पंडितजी दया के पात्र तो थे. कमर भी झुक गई थी, देखभाल करने वाला कोई न था. कभीकभी चौराहे की पुलिया पर सिर झुकाए घंटों बैठे रहते थे. उन की इस हालत पर तरस खा कर उन की कुछ सहायता कर देना भिन्न बात थी, पर उन की पूजा करना किसी भी प्रकार मेरे गले न उतरता था.

अपने विद्यार्थी जीवन में तो इन बातों की बहुत परवा न थी, पर अब मेरा मन एक तीव्र संघर्ष में जकड़ा हुआ था. इधर जब से मैं ने एक महिला रिश्तेदार की बरसी पर दी गई वस्तुओं के लिए पंडितानियों को लड़तेझगड़ते देखा तो मेरा मन और भी खट्टा हो गया था. पर क्या करूं ससुरजी की मृत्यु के बाद से हर महीने उसी तिथि पर एक ब्राह्मण को तो खाना खिलाया ही जा रहा था.

मैं ने एक बार दबी जबान से इस का विरोध करते हुए अपनी सास से कहा कि बाबूजी के नाम पर कहीं और पैसा दिया जा सकता है पर उन्होंने यह कह कर मेरा मुंह बंद कर दिया कि सभी करते हैं. हम कैसे अपने रीतिरिवाज छोड़ दें.

मेरी सास वैसे ही बहुत दुखी थीं. जब से ससुरजी की मृत्यु हुई थी, वे बहुत उदास रहती थीं, अकसर रोने लगती थीं. कहीं आनाजाना भी उन्होंने छोड़ दिया था. सो, उन्हें अपनी बातों से और दुखी करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. पर दूसरी ओर मन अपनी इसी बात पर डटा हुआ था कि जब हम चली आ रही परंपराओं की निस्सारता समझते हैं और फिर भी आंखें मूंद कर उन का पालन किए जाते हैं तो हमारे यह कहने का अर्थ ही क्या रह जाता है कि हम जो कुछ भी करते हैं, सोचसमझ कर और गुणदोष पर विचार कर के करते हैं.

मैं ने अपने पति से कहा कि वे अम्माजी से बात करें और उन्हें समझाने का प्रयत्न करें. पर उन की तरफ से टका सा जवाब मिल गया, ‘‘भई, यह सब तुम्हारा काम है.’’

वास्तव में मेरे पति इस विषय में उदासीन थे. उन्हें बरसी मनाने या न मनाने में कोई एतराज न था. अब तो सबकुछ मुझे ही करना था. मेरे मन में संघर्ष होता रहा. अंत में मुझे लगा कि अपनी सास से इस विषय में और बात करना, उन से किसी प्रकार की जिद कर के उन के दुखी मन को और दुखी करना मेरे वश की बात नहीं. सो, मैं ने अपनेआप को जैसेतैसे बरसी मनाने के लिए तैयार कर लिया.

हम लोग आदर्शों की, सुधार की कितनी बड़ीबड़ी बातें करते हैं. दुनियाभर को भाषण देते फिरते हैं. लेकिन जब अपनी बारी आती है तो विवश हो वही करने लगते हैं जो दूसरे करते हैं और जिसे हम हृदय से गलत मानते हैं. मेरे स्कूल में वादविवाद प्रतियोगिता हो रही थी. उस में 5वीं कक्षा से ले कर 10वीं कक्षा तक की छात्राएं भाग ले रही थीं. प्रश्न उठा कि मुख्य अतिथि के रूप में किसे आमंत्रित किया जाए. मैं ने प्रधानाध्यापिका के सामने अपनी सास को बुलाने का प्रस्ताव रखा, वे सहर्ष तैयार हो गईं.

पर मैं ने अम्माजी को नहीं बताया. ठीक कार्यक्रम से एक दिन पहले ही बताया. अगर पहले बताती तो वे चलने को बिलकुल राजी न होतीं. अब अंतिम दिन तो समय न रह जाने की बात कह कर मैं जोर भी डाल सकती थी.

अम्माजी रामचरितमानस पढ़ रही थीं. मैं ने उन के पास जा कर कहा, ‘‘अम्माजी, कल आप को मेरे स्कूल चलना है, मुख्य अतिथि बन कर.’’

‘‘मुझे?’’ अम्माजी बुरी तरह चौंक पड़ीं, ‘‘मैं कैसे जाऊंगी? मैं नहीं जा सकती.’’

‘‘क्यों नहीं जा सकतीं?’’

‘‘नहीं बहू, नहीं? अभी तुम्हारे बाबूजी की बरसी भी नहीं हुई है. उस के बाद ही मैं कहीं जाने की सोच सकती हूं. उस से पहले तो बिलकुल नहीं.’’

‘‘अम्माजी, मैं आप को कहीं विवाहमुंडन आदि में तो नहीं ले जा रही. छोटीछोटी बच्चियां मंच पर आ कर कुछ बोलेंगी. जब आप उन की मधुर आवाज सुनेंगी तो आप को अच्छा लगेगा.’’

‘‘यह तो ठीक है. पर मेरी हालत तो देख. कहीं अच्छी लगूंगी ऐसे जाती हुई?’’

‘‘हालत को क्या हुआ है आप की? बिलकुल ठीक है. बच्चों के कार्यक्रम में किसी बुजुर्ग के आ जाने से कार्यक्रम की रौनक और बढ़ जाती है.’’

‘‘मुझे तो तू रहने ही दे तो अच्छा है. किसी और को बुला ले.’’

‘‘नहीं, अम्माजी, नहीं. आप को चलना ही होगा,’’ मैं ने बच्चों की तरह मचलते हुए कहा, ‘‘अब तो मैं प्रधानाध्यापिका से भी कह चुकी हूं. वे क्या सोचेंगी मेरे बारे में?’’

‘‘तुझे पहले मुझ से पूछ तो लेना चाहिए था.’’

‘‘मुझे मालूम था. मेरी अच्छी अम्माजी मेरी बात को नहीं टालेंगी. बस, इसीलिए नहीं पूछा था.’’

‘‘अच्छा बाबा, तू मानने वाली थोड़े ही है. खैर, चली चलूंगी. अब तो खुश है न?’’

‘‘हां अम्माजी, बहुत खुश हूं,’’ और आवेश में आ कर अम्माजी से लिपट गई. दूसरे दिन मैं तो सुबह ही स्कूल आ गई थी. अम्माजी को बाद में ये नियत समय पर स्कूल छोड़ गए थे. एकदम श्वेत साड़ी से लिपटी अम्माजी बड़ी अच्छी लग रही थीं.

ठीक समय पर हमारा कार्यक्रम शुरू हो गया. प्रधानाध्यापिका ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘आज मुझे श्रीमती कस्तूरी देवी का मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत करते हुए बड़ा हर्ष हो रहा है. उन्होंनेअपने दिवंगत पति की स्मृति में स्कूल को

2 ट्रौफियां व 10 हजार रुपए प्रदान किए हैं. ट्रौफियां 15 वर्षों तक चलेंगी और वादविवाद व कविता प्रतियोगिता में सब से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को दी भी जाएंगी. 10 हजार रुपयों से 25-25 सौ रुपए 4 वषोें तक हिंदी में सब से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को दिए जाएंगे. मैं अपनी व स्कूल की ओर से आग्रह करती हूं कि श्रीमती कस्तूरीजी अपना आसन ग्रहण करें.’’

तालियों की गड़गड़ाहट से हौल गूंज उठा. मैं कनखियों से देख रही थी कि सारी बातें सुन कर अम्माजी चौंक पड़ी थीं. उन्होंने मेरी ओर देखा और चुपचाप मुख्य अतिथि के आसन पर जा बैठी थीं. मैं ने देखा, उन की आंखें छलछला आई हैं, जिन्हें धीरे से उन्होंने पोंछ लिया.

सारा कार्यक्रम बड़ा अच्छा रहा. छात्राओं ने बड़े उत्साह से भाग लिया. अंत में विजयी छात्राओं को अम्माजी के हाथों पुरस्कार बांटे गए. मैं ने देखा, पुरस्कार बांटते समय उन की आंखें फिर छलछला आई थीं. उन के चेहरे से एक अद्भुत सौम्यता टपक रही थी. मुझे उन के चेहरे से ही लग रहा था कि उन्हें यह कार्यक्रम अच्छा लगा.

अब तक तो मैं स्कूल में बहुत व्यस्त थी. लेकिन कार्यक्रम समाप्त हो जाने पर मुझे फिर से बरसी की याद आ गई.

दूसरे दिन मैं ने अम्माजी से कहा, ‘‘अम्माजी, बाबूजी की बरसी को 15 दिन रह गए हैं. मुझे बता दीजिए, क्याक्या सामान आएगा. जिस से मैं सब सामान समय रहते ही ले आऊं.’’

‘‘बहू, बरसी तो मना ली गई है.’’

‘‘बरसी मना ली गई है,’’ मैं एकदम चौंक पड़ी, ‘‘अम्माजी, आप यह क्या कह रही हैं?’’

‘‘हां, शीला, कल तुम्हारे स्कूल में ही तो मनाईर् गई थी. कल से मैं बराबर इस बारे में सोच रही हूं. मेरे मन में बहुत संघर्ष होता रहा है. मेरी आंखों के सामने रहरह कर 2 चित्र उभरे हैं. एक पंडितों को ठूंसठूंस कर खाते हुए, ढेर सारी चीजें ले जाते हुए. फिर भी बुराई देते हुए, झगड़ते हुए. मैं ने बहुत ढूंढ़ा पर उन में तुम्हारे बाबूजी कहीं भी न दिखे.’’

‘‘दूसरा चित्र है   उन नन्हींनन्हीं चहकती बच्चियों का, जिन के चेहरों से अमित संतोष, भोलापन टपक रहा है, जो तुम्हारे बाबूजी के नाम से दिए गए पुरस्कार पा कर और भी खिल उठी हैं, जिन के बीच जा कर तुम्हारे बाबूजी का नाम अमर हो गया है.’’

मैं ने देखा अम्माजी बहुत भावुक हो उठी हैं.

‘‘शीला, तू ने कितने रुपए खर्च किए?’’

‘‘अम्माजी, 11 हजार रुपए. 5-5 सौ रुपए की ट्रौफी और 10 हजार रुपए नकद.’’

‘‘तू ने ठीक समय पर इतने सुंदर व अर्थपूर्ण ढंग से उन की बरसी मना कर मेरी आंखें खोल दीं.’’

‘‘ओह, अम्माजी.’’ मैं हर्षातिरेक में उन से लिपट गई. तभी ये आ गए, बोले, ‘‘अच्छा, आज तो सासबहू में बड़ा प्रेमप्रदर्शन हो रहा है.’’

‘‘अच्छाजी, जैसे हम लड़ते ही रहते हैं,’’ मैं उठते हुए बनावटी नाराजगी दिखाते हुए बोली.

ये धीरे से मेरे कान में बोले, ‘‘लगता है तुम्हें अपने मन का करने में सफलता मिल गई है.’’

‘‘हां.’’

‘‘जिद्दी तो तुम हमेशा से हो,’’ ये मुसकरा पड़े, ‘‘ऐसे ही जिद कर के तुम ने मुझे भी फंसा लिया था.’’

‘‘धत्,’’ मैं ने कहा और मेरी आंखें एक बार फिर अम्माजी के चमकते चेहरे की ओर उठ गईं.

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Best Hindi Story: इस्तीफा- क्या सफलता के लिए सलोनी औफर स्वीकार करेगी

Best Hindi Story: सलोनी की रिस्ट वाच पर जैसे ही नजर पड़ी, ‘उफ… मुझे आज फिर से देर हो गई. कार्यालय में कल नए बौस का आगमन हो रहा है. अत: सारे पैंडिंग काम कल जल्दी औफिस पहुंच कर अपडेट कर लूंगी. अब मुझे जल्दी घर पहुंचना चाहिए. बिटिया गुड्डी और नन्हे अवि के साथ मां परेशान हो रही होंगी. नीरज तो पता नहीं अभी घर लौटे भी हैं या नहीं,’ मन ही मन में सोचविचार करती सलोनी ने अपनी मेज पर रखा कंप्यूटर औफ किया और तेजी से कार्यालय से बाहर निकल आई. लंबेलंबे डग भरते हुए 5 मिनट में बसस्टौप पर आ पहुंची.

चूंकि लोकल ट्रेन अभी आई नहीं थी. अत: वह भी सामने प्रतीक्षारत लगी लाइन में सब से पीछे जा खड़ी हो गई. अचानक उस की नजर अपने से आगे खड़े नवयुवक पर पड़ी. वह गोरे वर्ण का लंबा, गठीला बदन, सुंदर, सुदर्शन, देखने में हंसमुख सजीला नवयुवक, अपनी गरदन घुमा कर उसे ही पहचानने का प्रयास कर रहा था. उस से नजरें मिलते ही सलोनी को भी वह सूरत कुछकुछ जानीपहचानी सी लगी.  सलोनी उस नवयुवक को देख कर पहचानने के उद्देश्य से सोचविचार में गुम थी. कि अचानक दोनों की नजरें आपस में टकराईं तो उस की ओर देख कर वह हौले से मुसकराया. युवक की मुसकान भरी प्रतिक्रिया देख कर उस ने सकपका कर नजरें दूसरी ओर घुमा लीं.

‘‘माफ कीजिए अगर मैं गलत नहीं हूं तो आप का नाम सलोनी है न?’’ युवक ने पहचानने का उपक्रम करते हुए नम्रता के साथ सलोनी से पूछ लिया.

युवक की बात सुन कर सलोनी चौंकते हुए बोली, ‘‘हां मेरा नाम सलोनी है. लेकिन आप मु   झे कैसे जानते हैं? मैं तो आप को नहीं जानती?’’

सलोनी के चेहरे पर अनजान चेहरे को पहचानने के कई रंगभाव उभरे और जल्दी ही विलुप्त हो गए.

‘‘दरअसल, हमारी मुलाकात करीब 19-20 बर्षों बाद हो रही है इसलिए आप मु   झे पहचान नहीं रही हैं.’’

‘‘अच्छा.. लेकिन वह कैसे? कौन हैं आप?’’ सलोनी ने अपने दिमाग पर जोर डालते हुए पूछ लिया.

‘‘लगता है कि आप ने अभी तक इस नाचीज को पहचाना नहीं. हम भूलेबिसरे गीतों

में छिपी कहानी कहीं…’’ युवक ने शायराना अंदाज में मुसकराते हुए यह बात ऐसे कही कि

न चाहते हुए भी सलोनी के चेहरे पर मुसकान खेल गई.

‘‘शायद आप को याद होगा कि कानपुर के संत विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय में 9वीं क्लास में एक लड़का कमल आप की कक्षा में साथ में पढ़ता था. लेकिन उस के पिताजी का ट्रांसफर हो गया था, जिस के कारण उसे कानपुर शहर छोड़ कर दूसरे शहर जाना पड़ा था.’’

‘‘अरे हां… वह पढ़ाकू प्रजाति का कविकुल कमल… क्या खूबसूरत कविताएं लिखता था वह… आज भी जेहन में उस की कुछ कविताओं की यादें ताजा हैं,’’ अब जानपहचान पर अभिमत की मुहर लगाते हुए खुले अंदाज में सलोनी खिलखिला कर बोली, ‘‘उस के खूबसूरत पढ़ने वाले अंदाज को सुनने की खातिर कविता लिखवाने को कितनी लड़कियां उस के आगेपीछे चक्कर लगाती रहती थीं पर वह… पढ़ाकू… आसानी से किसी को घास नहीं डालता था.’’

‘‘हूं… बहुत खूब… सही पहचाना आप ने. हां तो मैडम सलोनीजी मैं गुलेगुलजार, खिलता आफताब, खुशमिजाज, दिले बेताब आप का वही नाचीज कमल हूं,’’ कमल ने शब्दों को शायराना अंदाज में ढाल कर अलग अंदाज में अपने परिचय से रूबरू करवाया.

किशोर वय में सलोनी पर दिलोजान से मरमिटने वाले कमल से उस का इस तरह से परिचय होगा ऐसा सलोनी ने कभी नहीं सोचा था. अत: उस के शरीर में करंट मिश्रित मीठी    झुर   झुरी सी दौड़ गई. फिलहाल तो घर पहुंचने में देरी हो जाने की चिंता में घुलते हुए फिर जल्द ही मिलने का वादा करते हुए दोनों ने अपनेअपने घर की राह पकड़ी. अचानक हुए मिलन की इस बेतकल्लुफ आपाधापी में वे दोनों ही एकदूसरे का फोन नंबर लेना भूल गए.

अगले दिन सलोनी कार्यालय पहुंच कर कंप्यूटर औन कर के कार्य सूची को

अपडेट कर रही थी कि तभी चपरासी ने बताया कि बौस कैबिन में आप को बुला रहे हैं.

सलोनी ने फाइल हाथ में पकड़े हुए बौस के कैबिन के पास जा कर पूछा, ‘‘मे आई कम इन सर?’’

‘‘यस कम इन.’’

सलोनी को आवाज कुछ जानीपहचानी सी लगी. लेकिन बौस की कुरसी की पीठ उस की ओर होने के कारण वह बौस का चेहरा नहीं देख सकी. तभी यकायक बिजली की तेजी से बौस ने अपनी कुरसी उस के चेहरे की ओर घुमाई तो अपने सामने मुसकराते हुए खूबसूरत कमल का सुदर्शन चेहरा देख कर वह खुशी से चहक उठी. अचानक तेजी से बदलते घटनाक्रम के कारण खुशी और सरप्राइज दोनों का एहसास उसे एकसाथ हुआ. अत: हकलाहट में उस के मुख से बोल नहीं निकल सके, ‘‘अरे… कमल… सर… आप… बौस…’’

‘‘जी… सलोनीजी… तो कैसा लगा मेरा सरप्राइज डियर…’’ कहते हुए कमल के सुंदर

मुख पर करीने से तराशी हुई बारीक मूंछों की पंक्ति के नीचे पतले सुर्ख होंठों पर प्यारी सी मुसकान खेलने लगी.सलोनी के मुखड़े पर चमकती धूप सी स्वर्णिम मुसकान खिली और जल्दी ही विलीन हो गई. फिलहाल दोनों ने

काम करने को तवज्जो देते हुए कार्य की बारीकियों पर विचारों का आदानप्रदान किया, साथ ही रविवार को दोपहर में लंच साथ करने और मिलने की प्लानिंग भी कर ली.

घर और कार्यालय दोनों स्थानों पर काम के बोझ तले दबी सलोनी के चिड़चिड़ाते मुखड़े पर अब चमकती मुसकान खेलने लगी थी. इसी कारण घर का वातावरण बहुत खुशनुमा रहने लगा था. सलोनी की सासूमां और नीरज ने भी घर का वातावरण खुशनुमा देख कर सलोनी को थोड़ीबहुत देरसवेर से घर पहुंचने पर टोकाटाकी करना या कुछ कहनासुनना छोड़ दिया.

कमल और सलोनी की मुलाकातें खूब रंग ला रही थीं. खूबसूरत लावण्यमयी सलोनी जब हैंडसम कमल के साथ होती तो उत्साह, उमंग से लबरेज उस की आंखों से खुशियों की फुल   झडि़यां छूटने लगतीं. दोपहर का भोजन अकसर वे साथ ही करते. मस्तीमजाक के बीच रूठना, मनाना और मनपसंद उपहारों का आदानप्रदान भी होने लगा था. देखतेदेखते सालभर बादलों की मानिंद पंख लगा कर उड़ गया.

औफिस में सहकर्मी साथियों के बीच दोनों के नाम की चर्चा अब जोर पकड़ने लगी थी. सलोनी को साथी सहकर्मी घटिया मानसिकता की महिला समझने लगे. 2 बच्चों की मां सलोनी अपने सुखी विवाहित जीवन में खुद आग लगा रही थी. महिला साथी सहकर्मी कनखियों से उसे आता हुआ देख कर एक व्यंग्य भरी मुसकराहट जब उस की ओर फेंकतीं तो सलोनी मन ही मन जलभुन जाती.

साथी सहकर्मियों के द्विअर्थी संवादों से लिपटे जुमले उस के कानों में पिघले शीशे की मानिंद गूंजने लगते. ये सब सहकर्मी साथी बौस के नाराज हो जाने के भय से सलोनी से कुछ नहीं कहते थे. लेकिन उन लोगों की घटिया सोच की दबीदबी मुसकराहट और बातों को ध्यान से सुन कर सलोनी बहुत कुछ सोचनेसमझने लगी थी.

अत: कभीकभी उस का मन नीरज और कमल के बीच डांवांडोल हो जाता. उस की

आंखों के सामने उन दोनों के चेहरे आपस में गड्डमड्ड हो जाते. अंतर्द्वंद्व से बाहर निकलने के प्रयास में जब वे उन दोनों के मध्य तुलना करती तो उसे नीरज गृहस्थी का बोझ उठाता एक सांवले रंग का सामान्य कदकाठी का पुरुष नजर आता जो पति के दंभ से भरा हुआ, उबाऊ और अंहकारी पुरुष लगता जिस ने मर्दानगी के रोब में उस के मन की गहराइयों के भीतर धड़कते हुए दिल की खुशियों की कभी परवाह नहीं की. उसे अपने काम और बस काम से प्यार था. उसे स्त्री के मन से अधिक तन के साथ शगल करने की जरूरत थी.

वहीं कमल उस के मन में दबीछिपी अनेक सतहों को पार करता हुआ अब उस के दिल का करार बन गया था. स्वच्छंद प्रकृति का भंवरे सरीखा कमल गुनगुन करता उस के आसपास मंडराता रहता. वह गुलाब के फूल सरीखा हमेशा तरोताजा और खिलाखिला लगता था. अपनी सुंदरता की सारी महक उस की एक मुसकान की खातिर लुटाना चाहता था. उस की मनमोहक बातें सुन कर उस का मन छलकने लगता. उस के रूपसौंदर्य में गढ़ कर ऐसी शायरी सुनाता कि सलोनी का मन निहाल हो कर निसार हो उठता.

वह भी उस के सीने से लिपट कर हंसनारोना चाहती थी. कमल उस की शादीशुदा जिंदगी के बारे में सब जानता था. अत: उस ने दोनों के बीच की मर्यादा रेखा को पार करने के बारे में कभी कोई चर्चा नहीं की थी. वह तो सलोनी के जीवन के सुखदुख भरे पलों की उल   झनों को सुल   झाते हुए अपनी मनमोहक, लच्छेदार बातों से उसे कुछ पलों के लिए हर्ष और उल्लास से भर, परी लोक जैसे सुखद कल्पना लोक में पहुंचा देता था.

सलोनी को पूरी तरह अपने प्रेम के जाल में फंसा कर अब कमल उस से शारीरिक नजदीकियां बढ़ाने का प्रयास करने लगा. आज उस ने सलोनी के साथ शहर से दूर 3 दिन का टूर का प्रस्ताव रखा था. कमल के टूर के पीछे छिपी शारीरिक सुख प्रस्ताव की भावना जान कर सलोनी जैसे सोते से जागी. आज कमल के दोहरे व्यक्तित्व से उस का सामना हुआ. कमल के सुखद मुसकान भरे सुंदर चेहरे के पीछे छिपी कुत्सित मानसिकता से आज वह बहुत असहज हो उठी थी.

तो क्या कमल की सोच भी अन्य मर्दों जैसी है? कमल को भी उस के साथ से उत्पन्न मानसिक सुख नहीं चाहिए वरन उसे भी उस के शारीरिक संबंध का इस्तेमाल चाहिए? इस

दुनिया में औरत और मर्द का रिश्ता केवल शरीर तक ही सीमित क्यों होता है? एक अच्छा साथी पुरुष महिला मित्र के लिए शरीर की जरूरतों से ऊपर उठ कर, मन की भावनाओं के अनुरूप सामंजस्य क्यों नहीं रख सकता? मन और आत्मा से निसार जब एक स्त्री सच्चे आत्मिक रिश्ते निभाने के लिए समर्पित होती है तो खुदगर्ज मर्द शरीर की भाषा से ऊपर उठ कर आत्मिक भाषा क्यों नहीं सम   झते?

सोचतेसोचते उस का दिमाग सुन्न सा होने लगा. अब इस रिश्ते को बरकरार रखने और आगे बढ़ने से अन्य नजदीकी परिस्थितियों को भी स्वीकार करना पडेगा और शायद तब तक मेरे लिए बहुत देर हो चुकी होगी.

घर पहुंच कर काम निबटाते हुए आज सलोनी का दिलदिमाग अपने नन्हेमुन्ने प्यारे बच्चों के साथ लाड़मनुहार कर के खाना खिलाने से अधिक कमल के हावभाव की सोचों में गुम था. यदि नीरज को सब पता चल गया तो… 2 नावों पर सवारी करने वाले व्यक्ति कभी तैर कर पार नहीं होते वरन डूबना ही उन की नियति होती है. सलोनी तू भी तो 2 नावों पर सवार है. आखिर सचाई से वह कब तक मुंह छिपा सकती है?

मन में निरंतर चलते विचारक्रम से व्यथित बेकल हो कर वह पसीनापसीना हो गई और बाहर बालकनी में निकल कर गहरी लंबी सांसें लेने लगी. तब भी उसे भीतर दिल के पास घुटन महसूस हो रही थी.

कहीं न कहीं उस के संस्कार, उस की सोच फिसलन भरी डगर पर बढ़ते कदमों को फिसलने से रोक रहे थे. अब वैवाहिक जीवन की खंडित मर्यादा के भय से उस का अंतर्मन उसे धिक्कारने लगा था. गृहस्थी की सुखी और शांत नींव का आधार नारी का मर्यादित आचरण माना जाता है. जरा सी ठेस लगते ही बेशकीमती हीरा फिर शोकेस में सजाने के काबिल नहीं रहता. गृहस्थी में नारी या पुरुष दोनों की जीवनचर्या सीमा रेखा के इर्दगिर्द घूमती है. जिम्मेदारियों की अनदेखी कर के, राह से भटकने पर, सीमा रेखा पार करने वालों की जिंदगी में आने वाले भूचाल को फिर कोई नहीं रोक सकता. अत: जो कुछ करना है अभी करना है.

पूरी रात सलोनी का मन उसे रहरह कर कचोटता रहा. सलोनी को अनमनी देख कर नीरज ने उस से परेशान होने का कारण जानना चाहा तो वह फीकी सी हंसी हंस कर बात टाल गई और सोने का उपक्रम करने लगी. लेकिन नींद तो आंखों से कोसों दूर थी. जीवन के उतारचढ़ाव सोचनेविचारने के लिए मजबूर सलोनी खुद से सवालजबाव करने लगी कि…

यह जिंदगी भी हमारे साथ कितना अन्याय करती है- हम हाड़मांस के मानवीय पुतलों के साथ कैसेकैसे भावनात्मक अनोखे खेल खेलती है. काश कमल अब से 10 साल पहले मु   झे मिला होता तो आज नीरज के स्थान पर कमल मेरी जिंदगी में पति के रूप में होता और अब तक जब वह नहीं मिला था तो मैं अपनी जिंदगी सुख से जी रही थी न, फिर इस मोड़ पर अब मु   झे कमल से क्यों मिलाया?

गहरी सोच में गुम होने पर उस के भीतर से आवाजें आने लगतीं कि सलोनी तू कितनी खुदगर्ज है. अपने क्षणिक सुख  के लिए तू कितनी सारी सुखी जिंदगियां दांव पर लगा रही है. मातापिता के नाम पर दाग लगा कर सलोनी क्या तू सुख से रह सकेगी?

कमल के साथ चले जाने के बाद यदि नीरज ने तु   झे अवि और गुड्डी से मिलने का अधिकार नहीं दिया तो क्या तू ममता का गला घोंट कर जी सकेगी? नौकरी पर चले जाने के बाद सासूमां कितने प्यारदुलार से अवि और गुड्डी का पालनपोषण अपनी देखरेख में करती हैं. क्या तू उन की अच्छाइयों को झुठला सकेगी?

अब… बस कर… यही रुक जा सलोनी, चल आज रोक ले अपने बढ़ते कदमों को.

अपने सुखीशांत वैवाहिक जीवन को खुद अपने हाथों से तबाह मत कर. नीरज के बाहरी व्यक्तित्व और काम के बो   झ तले दबे जिम्मेदार पिता के व्यवहार को नकारने के बजाय उस के साथ बिताए गए 10 सालों की अच्छाइयों को याद रख. अपने बच्चों का भविष्य सुखद बनाने के लिए ही तो तुम दोनों दिनरात दोहरी मेहनत करते हो. मानसिक तनाव दूर करने के लिए नीरज को अपनी पत्नी का साथ चाहिए तो इस में भला उस की क्या गलती है? इस से पहले तो तुम ने कभी ऐसा नहीं सोचा था. कमल के बजाय नीरज की जिम्मेदारियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से सामने रख कर देख.  तब सारी तसवीर तेरे सामने स्पष्ट होगी और तू सही निर्णय लेने में स्वयं सक्षम होगी. धीरेधीरे आंखों के सामने बीते समय के चित्र उभरने लगे…

जब तू बुखार में बेसुध पड़ी थी तब नीरज ने कैसे रातरात भर जागते रह कर तेरे माथे पर ठंडी पट्टी रख कर तुझे सुखसुकून पहुंचाया था. नीरज ने कितनी बार अपने औफिस से छुट्टी ले कर तेरे ठीक हो जाने तक सारे घर के कामकाज कितनी सुगमता से संभाले. देर हो जाने के कारण कितनी बार तेरे साथ मिल कर रसोईघर में बरतन धुलवाए.

ठंडे दिमाग से एक तरफा निर्णय लेने वाले सोचविचार करने पर कमल के मोहजाल में फंसी सलोनी की आंखों के सामने अब नीरज की सकारात्मक तसवीर स्पष्ट होने लगी थी. मन ही

मन जीवन में आने वाले पलों का निर्णय ले कर आज उस का मन असीम शांति का अनुभव कर रहा था. सुबहसवेरे सुखद भोर का एहसास करते हुए सलोनी मीठी सी अंगड़ाई ले कर उठ खड़ी हुई. शीघ्रता से नहा धो कर उस ने बच्चों और पति का मनपसंद नाश्ता तैयार किया. दोनों बच्चों को उठा कर लाड़दुलार से दूध पिलाया. नन्हा अवि मां के आंचल की गरमाहट पा कर जल्द ही उनींदा हो गया. उस ने उसे मांजी के पास लिटाया और तत्पश्चात मांजी और नीरज को नाश्ता दे कर 2-4 सामान्य बातें करने के बाद वह औफिस के लिए निकल पड़ी.

औफिस में पहुंच कर सलोनी कई दिनों से पैंडिंग पड़ा काम निबटाने लगी. समय के पाबंद कमल के कैबिन में पहुंच जाने के बाद, हाथों में फाइल थामे दमसाधे वह उस के पीछेपीछे बौस के कैबिन में पहुंच गई.

सलोनी को सामने खड़े देख कर कमल ने मुसकराते हुए उस से कल के प्रस्ताव पर विचारविमर्श करने के विषय में पूछा. तुरंत ही फाइल खोल कर सलोनी ने करीने से रखा एक लिफाफा कमल के सामने रखते हुए कहा, ‘‘कमल यह मेरा इस्तीफा है… प्लीज इसे स्वीकार करो… और मु   झे यह नौकरी छोड़ने की इजाजत दे दो.’’

‘‘सलोनी… क्या है ये सब?’’ हैरत से कमल ने पूछा. अचानक अप्रत्याशित स्थिति का सामना करते हुए, हकबकाए कमल का मुंह खुला का खुला रह गया.

ठंडे ठहरे हुए लफ्जों में सलोनी आगे बोली, ‘‘क्या… कुछ नहीं… कमल… यह मेरा इस्तीफा है. मैं इस नौकरी से रिजाइन कर रही हूं…’’

‘‘अगर तुम्हें मेरा प्रस्ताव इतना ही बुरा लग रहा था तो कल ही साफ इंकार कर देती न… मैं ने तुम से जबरदस्ती तो नहीं की थी,’’ कमल के मन की नाराजगी जबां से जाहिर होने लगी. अब कमल का मूड उखड़ने लगा था, ‘‘इस तरह से नौकरी से रिजाइन करने के बारे में तुम सोच भी कैसे सकती हो? अपने घर की आर्थिक स्थिति तुम अच्छी तरह से सम   झती हो.’’

‘‘हां… अब तक तो नहीं सम   झी थी, लेकिन अब बहुत अच्छी तरह से सम   झने लगी हूं और वैसे भी कमल… जिस रास्ते मु   झे जाना ही नहीं तो उस का पता पूछने से हासिल भी क्या होगा. अब यह पक्का तय है कि हम दोनों के रास्ते अलगअलग हैं. हम लोग अब आगे साथ काम नहीं कर सकते.’’

सलोनी का बदला रुख देख कर कमल बात बदलते हुए बोला, ‘‘यार सलोनी, तुम जानती हो न कि मैं तुम्हारी पदोन्नति कर के तुम्हें मैनेजिंग डाइरैक्टर की सीट पर बैठा सकता हूं… सलोनी… थोड़ा सा दिमाग पर जोर डालो और सम   झो कि मैं तुम्हें साथ में क्या

औफर कर रहा हूं… जिंदगी में इस तरह कोरी भावुकता से तरक्की नहीं मिला करती… यहां

हम सभी को कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना भी पड़ता है… इसलिए यदि सुखद भविष्य के लिए तरक्की करनी है, तो कुछ सम   झौते भी करने पड़ेंगे न…’’

‘‘कमल मुझे ऐसी तरक्की नहीं चाहिए जिस की आड़ में मैं खुद की नजरों में गिर जाऊं. ऐसे लिजलिजे समझौते मुझे कदापि स्वीकार नहीं,’’ कहते हुए सलोनी दृढ़ निश्चय के साथ कमल के कैबिन से बाहर निकल आई और मेज से अपना बैग उठा कर सुरक्षित अपने सुखद नीड़ की ओर चल पड़ी.

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Diwali 2025: कोई गम है, तो त्यौहार क्यों न मनाएं?

Diwali 2025: दिवाली या कोई भी त्यौहार खुशियां लाता है. लेकिन कई बार जिनके यहां कोई डेथ हो गई हैं, कोई बीमार है या अन्य कोई भी मिस हैपनिंग हो, तो लोग सबसे पहले त्यौहार मानाने से खुद को रोक देते हैं और अपने घर को बेवजह ही एक अनजाने से सूनेपन से भर देते हैं. जहां त्यौहार पर हर घर में  ख़ुशी का माहौल होता है वहीँ कुछ लोग अपने घर लाइट नहीं नहीं जलाते। वे बच्चो को भी बाहर नहीं जाने देते . खुद भी एन्जॉय नहीं करते और घर के बाकि मेंबर को भी एन्जॉय नहीं करने देते.

ये सही नहीं है. माना आप दुःख में हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप अपनी और बाकि सभी लोगों की ज़िंदगी रोक दें. अगर कोई गम हो गया हो तो उसका सामना करें लेकिन आती हुए खुशियों को रोक कर नहीं बल्कि ज़िंदगी की तरफ आगे बढ़कर.

कोई अपना जेल में हैं, तो कैसे मनाये दिवाली?

अगर त्यौहार के समय परिवार में कोई कोई गिरफ्तार हो गया हो, उसे सच्चे या झूठे किसी भी केस में पुलिस पकड़ कर ले गए हैं तो ऐसे में आप इन्तजार करने के आलावा कुछ नहीं कर सकतें। अगर आपकी भाभी अच्छी नहीं है उसने आपके भाई को झगडे में अरेस्ट करा दिया तो इसकी सजा आप अपने पुरे ससुराल को क्यूँ दे रही हैं. माना आपको दुःख हैं ये सही है. लेकिन आप इसके लिए बाकि लोगों की ज़िंदगी नहीं रोक सकती. ससुराल में सब दिवाली मानना चाहते हैं पर आपका रोना धोना देखकर उनकी हिम्मत नहीं हो रही कुछ करने की.

ये गलत है. अगर आपका पूरा परिवार आपके दुःख में आपके साथ खड़ा है तो आपका भी फर्ज है आप उनकी खुशियों में कुछ समय के लिए अपना गम भूलकर शामिल हों. इससे आप भी रिलैक्स होंगी और आगे क्या कैसे करना है? कौन सा वकील करना है? कैसे सब संभालना है ? ये सब अच्छे से सोच पाएंगी. ख़ुशी मना लेने के बाद सब लोग आपका साथ जरूर देंगे वार्ना उन्हें लगेगा बेकार की किसी की मुसीबत आप लटकाये बैठी हैं. इसी तरह अगर आपके पति या देवर भी गिरफ्तार हो गए हैं तो सभी को समझाएं कि शांत मन से अपनी कोशिशों के साथ त्यौहार भी मानते हैं तो क्या पता शांत मन से कोई रास्ता ही सूझ जाएँ। इससे घर का माहौल भी सही होगा.

बच्चा बीमार है ऐसे में हम क्या करे?

अगर दिवाली से ठीक पहले या किसी भी त्योहार पर बच्चा बीमार हो जाये तो किसी भी माँ बाप की जान निकल जाती है. वो चाहकर  भी त्यौहार की ख़ुशी नहीं मन पाते. घर में मौजूद दूसरा बच्चा पटाखे लाने की जिद करता है तो आप भाई के बीमार होने का एक्सक्यूज़ उसे देते हैं जिसे उसका बाल मन स्वीकार नहीं कर पता.

इस तरह एक बच्चे के चलते दूसरे के साथ भी आप नाइंसाफी कर जाते हैं. माना एक बच्चा बीमार है तो दूसरे को ख़ुशी मानाने से क्यूँ रोकना? क्या इस तरह बीमारी का मातम मानाने से बच्चा ठीक हो जायेगा? नहीं ना, तो फिर उसे डॉक्टर को देखायें बीमारी गंभीर है तो भी उसे ठीक होने में टाइम लगेगा. डॉक्टर के इलाज को फॉलो करें. लेकिन इसके चलते पुरे घर की ज़िंदगी ना रोक दें.

हो सकता है आपके देवर या ननद का कोई प्रोग्राम हो त्यौहार को लेकर. ऐसे में उन्हें जाने से ना रोके. उनको भी बीमारी का दुःख है दिल से हैं और इसके लिए उन्हें त्यौहार ना मानाने का प्रूफ देने की भी जरुरत नहीं है.

इसके विपरीत अच्छे से हर साल की तरह त्यौहार मनाये. डॉक्टर भी बोलते हैं बीमार के आसपास का माहौल खुशियों भरा हो तो वो आधी बीमारी से जंग तो वैसे ही जीत लेता है. उसके आसपास सब खुशियों का माहौल होगा तो वह भी बेहतर महसूस करेगा. इसलिए बेवजह घर में मातम का माहौल न बनाकर उसमे खुशियों की पाजिटिविटी भरें।

बेटी का तलाक हुआ है क्या अच्छा लगेगा त्यौहार मानना?

अगर बेटी ससुराल में दुखी थी और आप उसे वापस ले आएं और तलाक दिलवा दिया तो यह तो अच्छी बात है. आपने बेटी को मरने के लिए वहां नहीं छोड़ दिया? उसके आत्महत्या करने का इंतज़ार नहीं किया? दहेज़ के लिए उसे जला दिया जाये ये इन्तजार नहीं किया? ये बात भी थी अगर उसकी अपने पति से नहीं बन रही थी रोज रोज के झगडे थे तो भी उसे पहले ही ऐसे बेमानी रिश्ते से छुटकारा दिला दिया ये तो अच्छी बात है. आप तारीफ़ के काबिल हैं. लेकिन अब घर में मग छिपकर क्यूँ बैठना.

आपने कुछ गलत नहीं किया है तो फिर समाज के लोग आपके त्यौहार मानाने को बुरा समझेंगे या अच्छा इसकी चिंता क्यूँ करनी? लोगों का काम है कहना कुछ तो लोग कहेंगे. इस थियोरी को समझें और अपने घर से मतलब रखें। इतना सब कुछ बोल्डली किया है तो बेटी को अब आगे बढ़ने में मदद करें. उसे बताएं खुशिया उसका इंतज़ार कर रही हैं. पहले की तरह हंसी ख़ुशी उसके साथ त्यौहार मनाये। उसे अहसास दिलाएं कि अब भी कुछ नहीं बदला है ये उसका घर था है और रहेगा. इसके लिए त्यौहार से अच्छा और क्या मौका होगा.

अगर कोई हॉस्पिटल में है, तो हम कैसे मनाएं दिवाली ?

रत्न जी ने अपनी प्रॉब्लम शेयर करते हुए बताया कि पिछले साल मेरे पति हॉस्पिटल में एडमिट थे और कैंसर से जंग लड़ रहें थे. अब भला ऐसे में हम कैसे त्यौहार मानते. हमने आने घर में एक दिया भी नहीं जलाया. हालाँकि अब मेरे पति ठीक हैं और इस साल हम दिवाली मनाएंगे.

इस तरह की समस्या से कई लोग जूझते हैं. इस बार भी किसी न किसी घर में कोई न कोई बीमार होगा. लेकिन आप त्यौहार पर अपना घर सूना कर दें ये सही नहीं है. अगर कोई दुःख है भी, कोई बीमार भी है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि बाकि सब भी बीमार है. एक ही बीमार है न, हॉस्लिटल में icu में है तो भी क्या हो गया. बाकि सब जिंदगी वैसे ही जिए जैसे की नार्मल जीते हैं.

दिवाली है तो पटाखें भी जलाएं, दिए जलाएं, खाना खाएं और उसके बाद हॉस्पिटल जाएँ। वैसे भी हॉस्पिटल में एक ही जाने की जरुरत है 18 आदमी तो वहां नहीं जा सकते, बाहर मेला लगाएं ये जरुरी तो नहीं है. मरीज आपको त्यौहार पर खुश देखकर वैसे ही ठीक होने की सोचने लगेगा. उसमे पाजिटिविटी आएगी. आपको निराश देखेगा तो सोचेगा अब मैं नहीं बचने वाला क्यूँ इन सब पर बोझ बन रहा हूँ मैं.

अभी 1 महीना पहले ही ससुर की डेथ हुई पड़ौसी भी क्या कहेंगे?

अगर परिवार में कोई भी मिसहैपनिंग हो गई है जैसे अभी कुछ ही समय पहले घर में किसी की डेथ हो गए हैं तो पुरे साल कोई त्यौहार नहीं मनाएंगी ये पंडितों का दिया हुआ बेकार का ज्ञान हैं. मरने वाले के साथ मारा नहीं जा सकता और वैसे भी ये बाते अब बहुत पुरानी  हो चुकी हैं. ज़िंदगी किसी के लिए नहीं रूकती. आपने अपने काम पर जाना नहीं छोड़ा, घर के काम नहीं छोड़ें, बच्चों का स्कूल भी ऐसी ही चल रहा है फिर खुशियों पर ही रोक क्यूँ लगाना?

बस इस वजह से कि पहले से ये रीत चली आ रही है कि साल भर कोई त्यौहार नहीं मनाएंगे. ताकि इन त्योहारों की आन खोलने के लिए पंडितों को बुलाया जाएँ और मोटी  रकम दक्षिणा के रूप में दी जाये. ऐसा करके बस पंडितों को फायदा है आपको नहीं. इसलिए उनके हाथों की कठपुतली ना बने. मरने वाले के साथ मारा तो नहीं जाता है न. ये गम भी अपने मन का होता है जिसे दिल में रखकर आगे बढ़ा ही जाता है, तो फिर त्यौहार मानाने पर ही रोक क्यूँ लगाना? लोग क्या कहेंगी ये सोचना छोड़कर अपने मन की करें लोग सिर्फ तब तक कहेंगे जब तक आप उनकी सुन रहें हैं.

आप ज्यादा सोचते हैं आजकल किसी के पास इतना टाइम नहीं हैं कि आपकी ज़िंदगी में क्या चल रहा है इस पर धयान दें और अगर धयान दे भी रहा है और आपको बाते सुनाएगा तो वो आपका वेलविशर बिलकुल नहीं हो सकता फिर ऐसे में उसकी बातों से क्या डरना. आप वही करें जो आपके और आपके परिवार को खुशियां दें उन्हें आगे बढ़ने में मदद करें.

Diwali 2025

Festival Decoration: कैन्डल लाइट की सजावट से घर को बनाएं कुछ खास

Festival Decoration: त्योहारों में कैन्डल लाइट की सजावट एक क्लासिक लुक देती है, लेकिन इसके लिए कई रचनात्मक तरीके को अपनाना पड़ता हैं, ताकि आपका घर बाकी किसी से भी अलग और अनोखा दिखे. त्योहारों में पारंपरिक दीयों के साथ घर को सजाना आम बात रही है, लेकिन आज के यूथ इसमें अपनी कलात्मक छवि को बखूबी डालना पसंद कर रहे है और कई प्रकार के कलाकृति से घर को सुंदर बनाते है.

इसके लिए आजकल बाजारों और औनलाइन में बहुरंगी मोमबत्तियाँ मिलती है, इन मोमबत्तियों को कलात्मकता के साथ एक सुंदर रूप दिया जा सकता हैं, जो सबके लिए आकर्षक होता है. इन मोमबत्तियों को लालटेन या कांच के जार में सजाया जा सकता है, जिसमें आप मोमबत्तियों को रंगीन कागज, सेक्विन, या मोतियों से सजा सकते हैं, या फिर उन्हें फूलों की पंखुड़ियों या रंगोली के साथ मिलाकर एक आकर्षक सजावट बना सकते हैं.

इसके अलावा त्योहारों में कैंडल लाइट सजावट के लिए, आप विभिन्न प्रकार की मोमबत्तियों, मोमबत्ती के स्टैन्डस, अन्य सजावटी तत्वों का उपयोग कर सकते हैं. मोमबत्तियाँ भी कई प्रकार की बाजार में आज उपलब्ध है, मसलन साधारण मोमबत्तियाँ, रंगीन मोमबत्तियां, सुगंधित मोमबत्तियां, फ्लोटिंग मोमबत्तियां आदि कई है. इसके अतिरिक्त आप मोमबत्ती होल्डर्स, लालटेन, और अन्य सजावटी तत्वों का उपयोग करके अपनी सजावट को और भी आकर्षक बना सकते हैं.

आइए जाने मोमबतियाँ और उनके प्रकार

बोटानिकल कैन्डल्स

ये कैन्डल्स फ्रेश फूलों की सुगंध का एहसास कराती है, इन्हे लग्जरी कैन्डल्स भी कह सकते है, फेस्टिव सीजन में इन मोमबत्तियों को लगाने से स्प्रिंग सीजन का एहसास होता है, जिसे लोग काफी पसंद करते है.

कप केक कैन्डल्स

ये किसी भी त्योहार में डाइनिंग स्पेस या एंट्री वाले स्थान पर लगाना उचित होता है, क्योंकि इसकी मीठी खुशबू पूरे माहौल को तरोताजा बनाती है. वेनीला कप केक कैन्डल्स को आजकल अधिकतर लोग पसंद करने लगे है.

एसेंस वाले कैन्डल्स

फेस्टिव मूड को देखते हुए इसे हर साल नए – नए लुभावने आकार और सुगंध में बनाया जाता है, जिनमें वेनिला, लैवेंडर, साइट्रस, वुडी (जैसे देवदार या चंदन) और पुष्प (जैसे गुलाब या चमेली) शामिल होता है. कुछ लोग मिश्रणों को भी पसंद करते हैं, जैसे वेनिला और लैवेंडर या पुदीना और नीलगिरी. इसके सुंदर डिजाइन और मंद – मंद रोशनी, फेस्टिव स्पिरिट को काफी हद तक बढ़ा देती है. इसलिए इसकी डिमान्ड मार्केट में अधिक है.

मोनोग्राम कैन्डल्स

मोनोग्राम कैन्डल्स में पर्सनल टच शामिल होता है, क्योंकि इसपर व्यक्ति विशेष के नाम का पहला अक्षर लिखा होता है, इसे किसी को स्पेशल फ़ील करवाने के लिए लगाया जाता है. इसकी एलिगेनट डिजाइन और वॉर्म ग्लो सबको आकर्षित करती है.

फ्रूट कैन्डल्स

फ्रूट के सेन्ट से भरे हुए ये कलरफुल कैन्डल्स किसी भी त्योहार में खास अनुभव कराती है. ये कैन्डल्स फेस्टिवल के आनंद को रिफ्लेक्ट करती है. डाइनिंग टेबल और किचन एरिया में इसे सजाने पर प्रोसपीरिटी, सेलिब्रेशन और  ग्रैटिट्यूड का एहसास कराती है. एपल और पाइन एपल मेटल फ्रूट कैन्डल इन दिनों यूथ में काफी पोपुलर है.

ये कैन्डल्स किसी भी माहौल को सुगंधित बनाकर उस स्थान के परिवेश को बदल सकते है, लेकिन उसकी सजावट सही तरीके से करना आवश्यक होता है, जिससे उसकी खूबसूरती चारों ओर फैले. यहाँ हम आपको कैन्डल लाइट से सजावट के कई तरीके बता रहे है, जिससे आपका घर सबसे अलग और आकर्षक लगे.

पारंपरिक दीयों के साथ

दीयों और मोमबत्तियों को मिलाकर एक पारंपरिक और आकर्षक सजावट बनाई जा सकती है, इसमें दीयों को खिड़कियों के किनारे, छत पर या घर के प्रवेश द्वार पर सजाया जा सकता है.

लालटेन या कांच के जार में

मोमबत्तियों को लालटेन या कांच के जार में रखकर एक सुंदर और आकर्षक सजावट बनाई जा सकती है. इन लालटेन या जार को बालकनी या बाहरी जगहों पर भी सजा सकते हैं.

सजावटी मोमबत्तियाँ

रंगीन मोमबत्तियों, सुगंधित मोमबत्तियों, या विशेष आकार की मोमबत्तियों का उपयोग करके भी अपनी सजावट को आकर्षक बनाया जा सकता है.

मोमबत्तियों को सजाना

मोमबत्तियों को रंगीन कागज, सेक्विन, मोतियों या रत्नों से सजाया जा सकता है, जो दिखने में आकर्षक लगता है, ये मोमबत्तियाँ बाजार में आसानी से मिल जाती है.

फूलों और रंगोली के साथ

मोमबत्तियों को फूलों की पंखुड़ियों या रंगोली के साथ मिलाकर एक आकर्षक सजावट बनाई जा सकती है.

खुद बना सकते है मोमबत्ती होल्डर

अगर आपके पास थोड़ा समय है, तो मोमबत्ती होल्डर बनाकर भी अपनी सजावट को व्यक्तिगत बना सकते हैं.

कैंडल लाइट डिनर

त्योहारों में मोमबत्तियों का उपयोग करके एक रोमांटिक कैंडल लाइट डिनर का आयोजन भी किया जा सकता है.

ध्यान रखने योग्य बातें,

मोमबत्तियों की सजावट जितनी आकर्षक होती है, उतना ही उसे सजाते हुए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से आप बच सकें, मसलन

  • मोमबत्तियों को ज्वलनशील पदार्थों से दूर रखें,
  • बच्चों और पालतू जानवरों से मोमबत्तियों को दूर रखें,
  • कभी भी जलती हुई मोमबत्ती को अकेला न छोड़ें
  • कमरों को सजाने से पहले आसपास के पर्दे और कपड़ों पर ध्यान दें, ताकि वे मोमबत्ती की लौ से दूर रहें.

इस प्रकार कैन्डल्स का प्रयोग आजकल सजावट में काफी होने लगा है, क्योंकि इसके आकर्षक डिजाइन, रंग और मनमोहक सुगंध हर किसी को खरीदने और सजाने के लिए प्रेरित करता है और ये सही है कि त्योहारों में आज किसी के पास घंटों बैठकर दीयों को तैयार करना संभव नहीं होता, ऐसे में इन कैन्डल्स का प्रयोग कर अपने घरों को सुंदर तरीके से सजाया जा सकता है.

Festival Decoration

Romantic Diwali Celebration: लव बर्ड्स का लव फायर वर्क्स

Romantic Diwali Celebration: दीवाली पर रौशनी तो सभी करते हैं और पटाखे भी सभी जलाते हैं, लेकिन जो मजा अपने पार्टनर के साथ जलाने में आएगा वह अलग ही होगा. लेकिन ऐसा क्या किया जाए कि आप दोनों ऐंजौय करें. हम आप को इसी बारे में बता रहें हैं कि कैसे आप दोनों साथ मिल कर ऐंजौय करते हुए रोशनी और पटाखों का मजा लेते हुए इस शाम को और भी रोमांटिक बना सकते हैं.

साथ मिल कर दीए जलाएं

रोशनी का यह त्योहार घर पर दीए की सजावट के बिना अधूरा है. दीवाली पर दीए जलाना अनिवार्य है और वह भी अलगअलग रंगों के. कुछ दीयों को सुंदर दिखाने के लिए उन्हें अंदर और बाहर रंगा जाता है. अपने साथी के साथ मिल कर घर को दीयों से सजाएं. यह एक बहुत ही आरामदायक और अंतरंग अनुभव होता है. आप अपनी छत या बालकनी में एकसाथ बैठ कर दीयों और तारों की रोशनी में समय बिता सकते हैं.

दीवाली पर दीयों को पैटर्न के साथ जलाएं कपल

हार्ट शेप पैटर्न पैटर्न कुछ ऐसे बनाएं : दिल के आकर के कटआउट मार्केट से बनवा कर लाएं. इस कटआउट को आप अपनी बालकनी, छत या घर के आंगन में रख कर दीयों से एक बड़ा सा दिल बना सकते हैं. दोनों मिल कर एक हसाथ दीए जलाएं और फिर दिल के बीच में खड़े होकर तसवीरें लें. यह बहुत ही प्यारा और रोमांटिक लगेगा.

साथी के नाम का दीयों का पैटर्न  बनाएं

आप दोनों अपने नामों के पहले अक्षर (जैसे ‘p ‘ और ‘a ‘) को दीयों से बना सकते हैं. यह आप के रिश्ते का प्रतीक होगा. इसे किसी ऐसी जगह पर बनाएं जहां से आसानी से देखा जा सके, जैसे घर के बाहर या छत पर. आप चाहें तो सिर्फ साथी के नाम के अक्षर के इस पैटर्न को बना कर उन्हें रोमांटिक सरप्राइज भी दे सकते हैं.

दीयों से सर्पिल आकार की भूलभुलैया बनाएं

अगर आपके पास बहुत सारे दीए हैं, तो आप एक छोटी भूलभुलैया या सर्पिल आकार बना सकते हैं. दोनों मिल कर दीयों की रोशनी में इस पैटर्न में चलें. यह एक मजेदार खेल जैसा लगेगा, जिसे खेल कर आप दोनों ही ऐंजौय करोगे.

वेलकम होम पैटर्न

अपने घर के प्रवेशद्वार से ले कर लिविंग रूम तक दीयों से एक सुंदर रास्ता बनाएं. छोटेछोटे दीयों को लाइन में या एकदूसरे से थोड़ी दूरी पर रखें ताकि एक रोशनी वाला रास्ता बन सके. अब इन रास्तों पर टेढ़ामेढ़ा हो कर एकदूसरे का हाथ पकड़ कर आप को चलना है और कल्पना करनी है कि इसी तरह आप दोनों एकसाथ जिंदगी के टेढ़ेमेढ़े रास्तों पर साथ चलेंगे.

खिड़कियों या बालकनी की रेलिंग पर दीयों का एक पैटर्न बनाएं

अपनी खिड़कियों या बालकनी की रेलिंग पर दीयों को एक पैटर्न में रखें. जैसे, आप हर दूसरे दीए को एकसाथ रख कर या एक लहरदार पैटर्न में रख सकते हैं.

दीयों की जगमगाहट के बीच फोटोशूट करें

जब पैटर्न बन जाए और सभी दीए जल जाएं, तो दीवाली के खास पलों को एकसाथ कैप्चर करें. दीयों की जगमगाहट के बीच एक छोटा सा फोटोशूट करें. दीयों को पैटर्न में रखने और जलाने का काम एक साथ करें. यह आप के बीच बौंडिंग को बढ़ाएगा.

एकसाथ पटाखे जलाएं

पार्टनर नीचे जा कर पटाखे जला रहा है और आप बालकनी से देख रही हैं तो ये एक आइडल सिचुएशन नहीं है. बल्कि कुछ ऐसे पटाखों का चुनाव करें जो आप दोनों मिल कर साथ में जला सकें. जैसे कि :

फुलझड़ी : फुलझड़ी जलाएं और प्यार की पींगे बढ़ाएं. इस के लिए  दोनों एकदूसरे के नाम हवा में लिखने के स्टाइल में फुलझड़ी घुमाएं. यह एक गेम की तरह हो जाएगा और आप साथी के ऐंजौय कर पाएंगे. ऐसा करते हुए अपना वीडियो भी बनाएं.

अनार : अनार एक ऐसा पटाखा है जिसे आसानी से अगरबत्ती से भी जलाया जा सकता है. जब अनार जलता है, तो रोशनी का एक फव्वारा सा बनता है. यह देखने में बहुत ही शानदार लगता है और इस से ज्यादा शोर भी नहीं होता.

चकरी : यह जमीन पर गोलगोल घुमती है और रंगीन चिंनगारियां छोड़ती हैं. जलती हुए इन चकरी पर दोनों कूदकूद कर खूब ऐंजौय करें. यह माहौल को खुशनुमा बना देता है.

रोमन कैंडल : यह आसमान में अलगअलग रंगों की गेंदें छोड़ते हैं. यह एक तरह की छोटी आतिशबाजी होती है, जो दिखने में बहुत खूबसूरत लगती है और ज्यादा शोर नहीं करती.

इस के आलावा एक साथी को पटाखों से डर लगता है, तो दूसरा हाथ पकड़ कर उस की मदद करें ताकि उसे याद रहे कि इस दीवाली उस ने वह किया जो कभी न कर पाया. यदि आप और आप का साथी दोनों को आतिशबाजी देखना पसंद है, तो एकसाथ बैठ कर पटाखों का आनंद लें.

खुशबूदार मोमबत्तियों को जलाएं और माहौल बनाएं रोमांटिक

कुछ यों जलाएं मोमबत्तियां : अगर आप के पास खुशबू वाली मोमबत्तियां हैं, तो उन्हें जलाएं. इन मोमबत्तियों को खास तरीके से जलाएं जैसेकि मोमबत्तियों को कमरे के बीच में या एक ही जगह पर रखने के बजाय, उन्हें अलगअलग ऊंचाइयों पर रखें. जैसे, कुछ मोमबत्तियां फ़र्श पर, कुछ मेज पर और कुछ अलमारी पर. इस से कमरे में रोशनी की एक लहर सी बनेगी जो बहुत ही आकर्षक लगेगी. इस के आलावा एक बड़े बर्तन में पानी भर कर उसमें छोटी मोमबत्तियां (फ्लोटिंग कैंडल्स) डालें. पानी में जलती हुई मोमबत्तियां एक जादुई माहौल बना देती हैं.

इन मोमबत्तियों को कमरे के अलगअलग कोनों में रखें ताकि खुशबू धीरेधीरे पूरे कमरे में फैल जाएं. मोमबत्तियां जलाने से पहले कमरे की बाकी लाइट्स डीम कर दें या बंद कर दें. खुशबू और हलकी रोशनी का यह मेल शाम को बेहद खास बना देगा.

छोटी मोमबत्तियों का इस्तेमाल करें, जिन्हें टी लाइट्स कहते हैं. इन्हें आप कई जगह पर रख सकते हैं, जैसे सीढ़ियों पर या खिड़कियों की बालकनी पर.

खुशबूदार मोमबत्तियों से शाम बन जाएगी हसीं

गुलाब, लैवेंडर या चंदन जैसी महक मन को शांति देती हैं और माहौल को और भी रोमांटिक बनाती हैं.

गुलाब की खुशबू प्यार और रोमांस का प्रतीक मानी जाती है. दीवाली के दिन गुलाब की खुशबु की मोमबत्ती जलाएं. यह माहौल में प्यार भर देंगी.

वैनिला की मीठी और गरम खुशबू किसी भी शाम को आरामदायक और रोमांटिक बना सकती है.

अगर आप प्यार की पहली खुशबू को महसूस करना चाहते हैं तो साथी के साथ मिल कर लैवेंडर की मोमबत्तियां जलाएं. ये मन को शांत करने और माहौल बनाए में मदद करती है.

हलकी रोशनी में डिनर

डाइनिंग टेबल के बीच में राउंड शेप में मोमबत्तियां लगाएं. मोमबत्तियों और दीयों की हलकी रोशनी में अपनी पसंद का खाना एकसाथ बनाएं और परोसें. यह माहौल को और भी रोमांटिक बना देगा. खाने के दौरान मोमबत्तियों की रोशनी में बात करना एक अलग ही अनुभव है. मोमबत्तियों की रोशनी के साथ धीमी आवाज में अपना पसंदीदा रोमांटिक संगीत चलाएं और घर पर ही दीवाली कैंडल लाइट डिनर का आनंद लें.

Romantic Diwali Celebration

Diwali Decoration: इस दीवाली पर घर की लाइटिंग करें कुछ इस तरह

Diwali Decoration: दीवाली रोशनी का त्योहार है, इसे मनाने के लिए पूरा परिवार घर की साफसफाई से ले कर सजावट तक में रम जाता है. ऐसे में इस सजावट में सब से जरूरी होती है, घर की लाइटिंग, क्योंकि किसी भी घर या कमरे की सुंदरता उस की लाइटिंग पर निर्भर करती है. सही लाइटिंग से एक छोटा घर भी बड़ा और बड़ा घर रोशनी से जगमगा उठता है.

आज के यूथ इस में हमेशा कुछ नया और प्रयोगात्मक काम करने से पीछे नहीं हटते, जो पहले लोग नहीं किया करते थे, यही वजह है कि दीवाली के अवसर पर बाजारों और औनलाइन पर विभिन्न प्रकार के लाइटिंग के औप्शन दीवाली पर खूब मिलने लगते हैं, ताकि आप अपने मनपसंद लाइटों से अपने घर को सजा सकें.

इंटीरियर डिजाइनर भी मानते हैं कि किसी घर की पौजिटिव वाइब्रैंट को बनाए रखने के लिए घर की सही लाइटिंग जरूरी है. यहां हम आप को ऐसे ही कुछ औप्शन बता रहे हैं, जिन्हें अपना कर आप का घर दीवाली में सब से अलग और खास दिखने लगेंगे.

आधुनिकता के साथ करें घर की लाइटिंग

सही लाइटिंग से आप किसी भी उबाऊ स्थान को भी आकर्षक बना सकते हैं, जिस में आप की क्रीऐटिविटी निखर कर आती है. कुछ अनोखी लाइटिंग भी सजावट में काम आती है. अगर आप दीवाली की लाइट डैकोरेशन के आइडियाज ढूंढ़ रहे हैं, तो अलगअलग लाइटिंग स्टाइल्स को मिला कर कुछ खूबसूरत और बेहतरीन बनाएं. चटख दीवारों के रंगों और शानदार एथनिक लाइटिंग के मिश्रण से अपने स्टडीरूम या होम औफिस में जान डाल सकते हैं. यह पारंपरिक झूमर के साथ बोहो चिक कमरे के लिए लाइटिंग का एक अनोखा विकल्प है. यह अनोखा कौंबिनेशन वाकई सब को पसंद आता है.

लिविंग रूम

लिविंग रूम मुख्य मनोरंजन के स्थान होने की वजह से पूरे घर का माहौल तय करता है. गेस्ट का स्वागत सुंदर रोशनी में करें, जैसेकि ऊंची छत वाले लिविंग रूम आधुनिक शैली के अनुसार भव्य या झूमर से सजा सकते हैं, वहीं नीची छत वाले घरों में आप साधारण झूमर लगा सकते हैं. इन्हें आकर्षक पेंडेंट लाइट्स के साथ जोड़ा जा सकता है, जो कमरे को एक सौफ्ट और वार्म ग्लो से भर देती हैं.

झूमर को सजावट का एक स्टेटमैंट माना जाता है, जो कमरे का केंद्रबिंदु होता है, वहीं पेंडेंट लाइट्स का प्रभाव थोड़ा कम होता है. अगर आप अपने लिविंग रूम को आधुनिक और एथनिक लुक देना चाहते हैं, तो आप कुछ चमकदार एलईडी फैस्टिव लाइट्स भी लगा सकते हैं, ताकि कमरे के कोनों से अंधेरा दूर हो जाएं. ऐंजौयमैंट वाले माहौल को बनाए रखने के लिए हैंगिंग लाइट्स काफी अच्छे होते हैं.

डाइनिंग रूम

जैसाकि कहावत है, जो परिवार साथ खाता है, वह साथ रहता है. सही रोशनी खाने के दौरान होने वाली बातचीत का माहौल बनाती है. जहां तक दीवाली की रोशनी की सजावट की बात है, तो पुराने जमाने के आकर्षण के लिए पारंपरिक, मोमबत्ती से प्रेरित झूमर या कोलोनियल चार्म के लिए दीवार पर लगी लाइटें और आज के डैकोरेटिव बल्ब सब से बेहतर होते हैं.

बैडरूम

बैडरूम के एक कोने में सुंदर और पारंपरिक लाइटें, तकिए के साथ बातें करने का अच्छा माहौल बनाती हैं, जो आराम और तरोताजा होने के लिए अनुकूल होता है. खूबसूरत डिजाइन वाले बैडरूम लाइट्स बैडरूम के आकर्षण को बढ़ाती हैं और तेज रोशनी को दूर रखती हैं. टेबल लैंप हलकी रोशनी लाते हैं, जिस से आप अपने साथी को परेशान किए बिना बिस्तर पर पढ़ या बातचीत कर सकते हैं.

बालकनी के लिए लाइटस

बालकनी आप के घर का एक अकसर अनदेखा, लेकिन बेहद अहम हिस्सा होता है. सुंदरसुंदर लाइट्स और लड़ियों का प्रयोग कर आप एक आकर्षक माहौल बना सकते हैं, जो दीवाली के लिए बिलकुल सही है. इस पारंपरिक त्योहार को दीयों, परी लाइटों और अन्य रूपों में उपलब्ध एलईडी फैस्टिवल लाइटों से एक आधुनिक रूप दिया जा सकता है. बालकनी में लाइट्स वाले सजावटी लालटेन टांगने के लिए भी एक बेहतरीन जगह होता है.

एक खूबसूरत लुक के लिए इन लटकते लालटेनों का चुनाव कर सकते है. इस के अलावा इन ओपन एरिया को सुंदर बनाने के लिए कलरफुल बल्बस और लाइट्स के कई औप्शन का प्रयोग दीयों के साथ भी किया जा सकता है.

प्रवेश द्वार

चाहे घर का प्रवेश द्वार हो या कमरों के बीच, गलियारे आप के लाइट्स, आप के विचारों को प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करते हैं. प्रवेश द्वार पर सुंदर लटकन लैंप लगा कर अपने मेहमानों का स्वागत कर सकते हैं. जब आप किसी संकरे रास्ते का अधिकतम लाभ उठाना चाहते हैं, तो लटकन लैंपों से बेहतर कुछ नहीं हो सकता. इस के अलावा, अगर आप के पास एक गलियारा है, तो आप चीनी लालटेन या बिजली के लैंप जैसी कुछ चमकदार बाहरी उत्सव रोशनी का विकल्प चुन सकते हैं.

घर के अंदर, अलगअलग कमरों को जोड़ने वाले रास्तों को न भूलें. पारंपरिक रोशनियों से इन रास्तों में उत्सव का माहौल बनाएं. इस प्रकार दीवाली पर सही लाइटिंग कर आप अपने घर को भव्य और पारंपरिक रूप दे सकते हैं. इस के लिए जरूरत होती है, सही लाइटों के मिश्रण को चुनना, इस के बाद आप घर के आगे खड़े हो कर अपने घर को जीवंत होते हुए देख सकते हैं.

Diwali Decoration

Diwali Celebration: बौयफ्रैंड या गर्लफ्रैंड के साथ प्री दिवाली

Diwali Celebration: दीवाली का त्योहार हो और दिल की बातें न हों यह तो पौसिबल ही नहीं है, क्योंकि दीवाली जैसे त्योहार का मजा भी तभी आता है जब साथ में आप का मनपसंद दिलबर हो। अपने मनपसंद दिलबर यानि सोलमेट या यों भी कह सकते हैं कि लवर प्रेमी के साथ दीवाली मनाने का मजा कुछ खास ही होता है.

अपने सोलमेट के साथ वक्त बिताना किसी त्योहार से कम नहीं है और अगर दीवाली पर आप का प्यार आप के साथ है तो फिर कहने ही क्या.

निश्चित तौर पर हर किसी की वह दीवाली सब से खास होती है जब उस का प्रेमी उस के साथ होता है. पंकज उदास की गजल,’कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यों लगते हो…’ यह सिर्फ गाने की पंक्ति नहीं बल्कि एक प्यार करने वाले के दिल का हाल है.

हजारों खूबसूरत चेहरे होने के बावजूद उस का दिल एक ऐसे शख्स के लिए धड़कता है जो उस की नजर में खास है और दिल के सब से करीब है. तभी तो हजारों की भीड़ में एक प्यार में डूबा इंसान वही चेहरा देखना चाहता है, जिसे देखने के लिए उस का दिल धड़कता है, जो सिर्फ एक ही बात कहता है कि बस, तुम ही हो, मेरी जिंदगी बस तुम ही हो.

दीवाली के मौके पर जब प्यार करने वाले शख्स को सोलमेट के साथ दीवाली मनाने का मौका मिलता है, तो उस के मन में हमेशा यह ख्वाहिश रहती है कि वह ऐसा क्या करे कि उस की सोलमेट के लिए यह दीवाली खास दीवाली हो जाए.

ऐसे ही खास प्रेमियों के लिए पेश हैं,  ताजातरीन टिप्स जिसे फौलो करने के बाद निश्चित तौर पर इस बार की दीवाली खास हो जाएगी.

दीवाली सैलिब्रेशन को खास बनाने वाली टिप्स खासतौर पर उन प्रेमियों के लिए हैं जो न सिर्फ इस साल की दीवाली का जश्न धूमधाम से मनाने की इच्छा रखते हैं , बल्कि अपनी सोलमेट के लिए भी कुछ खास कर के इस दीवाली को स्पैशल दीवाली बनाने की ख्वाहिश रखते हैं.

दीवाली पर अपनाएं खास अंदाज

दीवाली का मौका हो और अपने पार्टनर के साथ खास दीवाली पार्टी करने जाना हो तो अंदाज भी निराला होना चाहिए जैसेकि रोजमर्रा में पहनने वाले कपड़ों से अलग हट कर स्टाइलिस्ट कुरता पजामा, पठानी, पहनें या अगर लड़कियां अपने प्रेमी के साथ दीवाली की पार्टी करने जा रही हैं तो वह भी अपनी प्रेमी की पसंदीदा ड्रैस जोकि थोड़ा ट्रैडिशनल और आकर्षक हों, जैसे साड़ी, शरारा या गरारा या फिर आकर्षक डिजाइनर सलवार कुरता पहनें और साथ में क्लासी ज्वैलरी पहनें, जो खूबसूरत होने के साथसाथ आरामदेह भी हो.

ड्रैसिंग के हिसाब से मेकअप करें

इस के अलावा अपने प्रेमी को रिझाने के लिए उन का पसंदीदा परफ्यूम लगाएं ताकि वह सिर्फ आप की शक्ल और ड्रैसिंग से ही नहीं, बल्कि आप की खुशबू से भी मोहित हो जाएं.

दीवाली पर खासतौर पर रोशनी का जाल, चमकदमक हर जगह पर देखने को मिलती है। इसलिए अपने पार्टनर के साथ कार या बाइक में या अपनी सहूलियत अनुसार ड्राइव पर जरूर जाएं और दीवाली पर सजीधजी सड़कें, दुकानें और दीवाली का खूबसूरत माहौल का लुत्फ जरूर उठाएं।

दीवाली का मौका है तो अपने पार्टनर के लिए खूबसूरत गिफ्ट तो बनता है, लिहाजा गिफ्ट के रूप में अपने प्रेमी को एक खूबसूरत दीवाली गिफ्ट जरूर दें जो उन की पसंदीदा हो. जैसे अगर लड़का है, तो अपनी प्रेमिका को आर्टिफिशल खूबसूरत ज्वैलरी, पर्स, परफ्यूम अपने बजट के हिसाब से जरूर दें और अगर लड़के को गिफ्ट देना है तो खूबसूरत टीशर्ट, घड़ी, ब्रैसलेट लाकेट चेन आदि जरूर दें.

इस दौरान अपने पार्टनर की पसंद को न भूलें। अगर आप अपनी प्रेमिका की पसंद को ध्यान में रख कर गिफ्ट देंगे तो वह निश्चित ही खुश हो जाएगी, क्योंकि आप का सोलमेट आप के लिए खास है तो उसे डिनर के लिए ऐसे होटल में ले जाएं, जहां आप को थोड़ी प्राइवेसी मिल सके और आप शांति से उस के साथ क्वालिटी टाइम गुजार सकें और अपने दिल की बात भी कह सकें.

दीवाली के मौके पर आप का अपने सोलमेट के लिए पूरे दिल से अगर ऐसी दीवाली पर ऐसी सरप्राइज पार्टी रखेंगे तो आप के साथ मनाई यह दीवाली उस की यादगार दीवाली होगी जिस में सिर्फ आप होंगे और आप के बीच होगा दीवाली के जश्न में डूबा इश्क वाला लव.

Diwali Celebration

No Alcohol Diwali: इस दीवाली नो अल्कोहल मोर फन

No Alcohol Diwali: दीवाली का त्योहार आते ही जश्न का माहौल बन जाता है, जिस की वजह से दीवाली के कुछ दिनों पहले से ही सारी तैयारियां शुरू हो जाती हैं. दीवाली शौपिंग का अलग ही माहौल होता है. हर जगह पर मौल हो या दुकान ग्राहकों से खचाखच भरी होती है क्योंकि दीवाली जगमगाहट से भरा त्योहार है तभी तो इस दिन को मनाने के लिए घर की सजावट से ले कर खुद की सजावट तक यानि घर का नया समान और खुद के लिए सुंदर आउटफिट ज्वैलरी जूते, सभी चीजों की खरीदारी होती है.

इतना ही नहीं पूरा घर रोशनी और दीयों से जगमगा उठता है. हमारी पूरी कोशिश होती है की दीवाली पर किसी चीज की कमी न हो. दीवाली यादगार साबित हो इस के लिए हम दीवाली पार्टी का भी आयोजन करते हैं. मातापिता जहां अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने अलग जगह जाते हैं, वहीं बच्चों की अलग पार्टी होती है जिस में नाचगाना, स्वादिष्ठ खाना, मजाक व मस्ती सबकुछ होता है. यानि की दीवाली पर हम फुल दीवाली मूड में होते हैं.

दीवाली की शुरुआत तो बहुत ही शानदार होती है जिस में सारे यंग लड़केलड़कियां सजधज कर आते हैं. खूबसूरत लड़कियों के चेहरे से नजर ही नहीं हटती, जोकि दीवाली पार्टी में स्पैशल ड्रैस पहन कर खूबसूरत ज्वैलरी के साथ इठलातीबलखाती दीवाली की शान बन कर पार्टी में पहुंचती हैं.

इसी पार्टी में हैंडसम हंक कहलाने वाले लड़के ट्रैडिशनल कुरता पजामा, डिजाइनर शेरवानी या पठानी पहन कर फुल स्वैग में दीवाली पार्टी में पहुंच जाते हैं, जिस के बाद शुरू होती है दीवाली पार्टी का हंगामा, नाचगाना, फ्लोर पर थिरकते खूबसूरत चेहरे, जिस के चलते दीवाली पार्टी की शुरुआत तो बहुत ही आलीशान तरीके से होती है, लेकिन जैसेजैसे पार्टी की शाम आगे बढ़ती है शराब की बोतलें खुलनी शुरू हो जाती हैं और खुलने लगते हैं लोगों के खुलते आगाज का नया अंदाज जिस की शुरुआत जहां पर शालीनता और तहजीब के साथ हुई होती है, वहीं शराब के कुछ पैग अंदर जाते ही और नशा दिलोदिमाग पर चढ़ते ही अंदाज बदल जाता है.

दीवाली पार्टी की शुरुआत में प्यार और इज्जत से बात करने वाले वही लोग कुछ समय बाद गालीगलौच में बात करते नजर आते हैं. दीवाली पार्टी की शुरुआत में जो लड़कियां सजधज कर ऐंट्री करती हैं, वही पार्टी के अंत में बाथरूम में उलटियां करती नजर आती हैं. इतना ही नहीं ज्यादा शराब चढ़ जाने की वजह से वही सजधज कर आई लड़कियां जब पार्टी से बाहर निकलती हैं तो उन की ड्रैस कहीं होती है, तो सैंडल कहीं. कई बार तो इन लड़कियों के साथ आए उन के बौयफ्रैंड उन की सैंडल और पर्स संभालते नजर आते हैं क्योंकि उन की फ्रैंड तो ओवर शराब पी कर धुत होती हैं जिस वजह से उन को होश ही नहीं होता कि वे कहा हैं और उन के जूते व कपड़े कहा हैं.

पार्टी में शराब के गिलास से शराब जब अंदर पहुंचती है तो नकली चेहरे के पीछे जो मन में अपने ही लोगों के लिए नफरत और गुस्सा छिपा होता है, वह पीने के बाद सचाई के रूप में बाहर आने लगता है, जिस के बाद कई बार इसी पार्टी में मारपीट तक हो जाती है और दीवाली पार्टी का पूरा मजा खराब हो जाता है.

ऐसे में क्या साल का एक दिन जो कि दीवाली जैसा बड़ा त्योहार है अल्कोहल फ्री पार्टी के साथ आयोजन नहीं हो सकता?

इस बार दीवाली अल्कोहल फ्री के साथ मजा दोगुना कर के देखें

हालांकि आज के समय में बिना शराब की पार्टी थोड़ा मुश्किल सा लगता है, क्योंकि नहीं पीढ़ी के मुताबिक बिना शराब की पार्टी ओल्ड फैशन या मिडिल क्लास वालों की पार्टी मानी जाती है लेकिन अगर त्योहार के नाम पर सिर्फ एक दिन बिना शराब के पार्टी करें तो उस के कई सारे फायदे नजर आएंगे. ऐसा करना ज्यादा मुश्किल नहीं है अगर मन में ठान लें तो. अल्कोहल फ्री पार्टी में लोग आपस में दिल की बात करते नजर आएंगे, एकदूसरे से घुलतेमिलते नजर आएंगे.

शराब न पीने पर दीवाली पर बने स्वादिष्ठ मिठाइयों का ओर टैस्टी आइटम का मजा लूटते का मौका लूटते नजर आएंगे. कई सारी खूबसूरत यादें, दिल की बातें, एकदूसरे की खिंचाई, मजाकमस्ती का माहौल, दीवाली पर खेले जाने वाले गेम्स आदि सभी चीजों का मजा ले पाएंगे. अगर इस दीवाली पार्टी में शराब नहीं पी जाएगी तो बिना शराब पीए पार्टी करने पर आप खुद महसूस करेंगे कि अल्कोहल फ्री पार्टी का मजा ही कुछ और है.

शराब पीने के बाद जहां दिमाग पर हैंगओवर का बोझ चढ़ जाता है, वहीं बिना शराब पीए दीवाली मनाने पर आप को दिली सुकून जरूर मिलेगा. यकीन न हो तो इस बार दीवाली के मौके पर अल्कोहल फ्री दीवाली मना कर खुद ही अनुभव कर लें.

No Alcohol Diwali

Festive Hairstyles: इस दीवाली कैसा हो आप का हेयर डू

Festive Hairstyles: दीवाली का त्योहार साल का वह समय होता है, जब हर व्यक्ति अपने घर को साफसुथरा रखने और प्रकाशित करने की कोशिश करता है. सभी के मन में त्योहार को ले कर उमंग होता है. खुशियों का माहौल चारों तरफ दिखाई पड़ने लगता है, दिल प्यार से भरे होते हैं, मीठे व्यंजन बन रहे होते हैं और उपहारों का आदानप्रदान हो रहा होता है.

दीवाली पर खूबसूरत परिधान के साथ एक अच्छी और सुंदर हेयरस्टाइल अपनाएं. इस दीवाली पर कुछ अलग और आकर्षक दिखने की इच्छा से हेयरस्टाइल, हेयर कट आदि के बारे में गहराई से जानें, जो आप के चेहरे पर जंचें. सुरुचिपूर्ण और आसान हेयरस्टाइल को अपनाएं, जो भले ही एक दिन के लिए हों, लेकिन उस की लुक आप की खूबसूरती को अलग और अनोखा बनाती है. हेयरस्टाइल से पहले केशों को अच्छी स्टाइलिंग के लिए तैयार करें, ताकि आप का हेयर डू सुंदर दिखें.

  • शुरुआत एक अच्छी तरह से धोए हुए और कंडीशन किए हुए केशों से करें.
  • अगर आप हीट स्टाइलिंग कर रही हैं, तो हीट प्रोटेक्टैंट स्प्रे का इस्तेमाल जरूर करें, ताकि बालों को हीट डैमेज से बचाया जा सके.

साइड ब्रैडेड स्टाइल

आमतौर पर फैस्टिव सीजन में ब्रैडेड हेयरस्टाइल सब से ज्यादा पसंद किया जाता है. ट्रैडिशनल हेयरस्टाइल को एक अलग अंदाज में किया जा सकता है. आप को अपने बालों को पूरी तरह से एक चोटी में बांधने की जरूरत नहीं है, आप को सामने के एक हिस्से को एक तरफ स्टाइलिश ढंग से बांधें और अपने बाकी बालों को खुला छोड़ दें. आप चाहें तो बेहतर लुक के लिए बाकी बालों को आसानी से सीधा या कर्ल कर सकती हैं. यह हर उम्र की स्त्री के लिए सूटेबल हेयर डू है.

ब्रैडेड बन विद मैसी हेयर

जुड़ा त्योहारों के मौसम में सब से ज्यादा पसंद किया जाता है. इस हेयरस्टाइल में बालों को बहुत ही सुंदर स्टाइल में एक बन मिलेगा. इसे आप खुद भी बना सकती हैं, क्योंकि यह बनाने में आसान होता है. सच तो यह है कि अगर आप एक स्लीक और स्टाइलिश हेयरस्टाइल की तलाश में हैं, तो ब्रैडेड बंस बैस्ट चौइस है. इसे मैसी लुक देने के लिए 1 या 2 ढीले बालों की लेयर को लूज कर दें. इस से यह मैसी बन बेहद सुंदर लगेगा.

स्लीक ओपन हेयर

अगर आप अपने बालों की लंबाई के साथ कंफर्टेबल हैं, तो आप बीच की मांग निकाल कर बाल खुले छोड़ सकती हैं. लड़कियों को यह हेयरस्टाइल सब से ज्यादा पसंद आता है. आप चाहें तो अपने बालों को स्ट्रैट करवा सकती हैं या फिर खुले हुए बालों में कर्ल बना सकती हैं। अगर आप के बाल कर्ली हैं, तो यह हेयरस्टाइल आप की साड़ी या फिर लहंगे के साथ बेहद ही सुंदर लगेगा.

टौप नौट

दीवाली पर यह हेयरस्टाइल आप की पर्सनैलिटी को पूरी तरह बदल सकता है. टौप पर नौट स्टाइल में यह हेयरस्टाइल बनाना बहुत ही आसान है. त्योहार के इस सीजन के लिए यह हेयरस्टाइल बहुत ही सही है. किसी भी उम्र की स्त्रियां इसे खुद ही बना सकती हैं.

स्लीक पोनी

अगर आप कोई क्लासी लुक रखना चाहती हैं, तो स्लीक पोनी बिलकुल परफैक्ट है. यह हेयरस्टाइल आप को अधिक आकर्षक बना सकता है. अगर स्लीक पोनी हेयरस्टाइल को डिफरैंट लुक देना चाहती हैं, तो अपनी पोनी को नीचे से कर्ल करवा सकती हैं.

सिम्पल हेयरस्टाइल

यह एक आसान हेयरस्टाइल है, जो दीवाली में यूथ के लिए आकर्षक होता है। इस में चोटी बनाने में आप कभी गलती नहीं कर सकतीं. केशों को बीच से बांटें और सिर के दोनों तरफ से 2-2 हिस्से बनाएं. हर चोटी को सिर के ऊपर लपेटें और उन्हें हेयरपिन से सुरक्षित करें. यह स्टाइल न सिर्फ खूबसूरत दिखता है, बल्कि आप के बालों को पूरे दिन अपनी जगह पर भी रखता है.

परांदा हेयरस्टाइल

परांदे को ले कर बालों में एक तरफ लगाएं, जैसे आप ब्रैड बनाते हैं और फिर उसे नीचे सेट करें. अपने स्टाइल को और बेहतर बनाने के लिए आप मांगटीका, गजरा, रंगबिरंगी क्लिप्स, सुनहरे और रेशमी धागों से बने ऐक्सैसरीज या मोती का इस्तेमाल कर सकती हैं. केश कम है, तो हेयर ऐक्सटैंशन का प्रयोग कर बालों को थोड़ा खुला रख सकती हैं, लेकिन इस में ताजा फूलों का प्रयोग किया जा सकता है, जो फ्रेश लुक के साथसाथ अच्छी खुशबू भी बिखेरती है.

Festive Hairstyles

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