राइटर- शैलेंद्र सिंह

आदमी औरत मिलकर ना केवल घर चलाते है बल्कि समाज और देश के विकास में भी उनकी भागीदारी अहम होती है. अगर दोनो के बीच दूरियां बढ जायेगी तो घर परिवार समाज और देश की संरचना बदल जायेगी. कल्पना कीजियें की किसी एक जगह केवल आदमी ही आदमी हो और किसी एक जगह केवल औरतें तो माहौल कैसा होगा ? ऐसा माहौल शायद किसी को भी पसंद नहीं आयेगा. वैसे तो कहा जाता है कि औरत पति की अर्धागिनी है. गृहस्थी की गाडी के दो पहिये है. तरक्की वहीं होती है जहां आदमी औरत कंधे से कंधा मिलाकर काम करते है. इसके बावजूद आज भी औरतें हर आदमी पर शक करती है और आदमी हर अकेली औरत को अभी भी शक की नजर से देखती है.

Digital Plans
Print + Digital Plans

साथ ही मिलेगी ये खास सौगात

  • 2000 से ज्यादा कहानियां
  • ‘कोरोना वायरस’ से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • हेल्थ और लाइफ स्टाइल के 3000 से ज्यादा टिप्स
  • ‘गृहशोभा’ मैगजीन के सभी नए आर्टिकल
  • 2000 से ज्यादा ब्यूटी टिप्स
  • 1000 से भी ज्यादा टेस्टी फूड रेसिपी
  • लेटेस्ट फैशन ट्रेंड्स की जानकारी
Tags:
COMMENT