Financial Planning : भारतीय परिवारों में अकसर यह देखा जाता है कि जब भी घर पर कोई आर्थिक या भावनात्मक संकट आता है, तो पत्नी या मां सब से पहले अपनी जरूरतों और इच्छाओं को पीछे रखती हैं और थोड़ेथोड़े जोड़े हुए पैसों को मुसीबत के समय निकाल कर देती हैं.

लेकिन आज के समय में देखा जाए तो यह बात पतिपत्नी के बीच विवाद का कारण बन जाती है, जब पत्नी कहती है कि मैं अपनी सैलरी घर खर्च में नहीं दूंगी.

अगर आप भी ऐसा ही सोच रही हैं, तो यह बिलकुल ठीक है. इस के कई कारण हैं जिस में से एक है कि वह सैलरी आप खुद की विलासता पर नहीं बल्कि अपने बच्चों और खुद की भविष्य के लिए जोड़ रही है. इसलिए यह बात अपने पति को प्यार से समझाएं और अपनी सैलेरी को अपने पास रखें ताकि आप आत्मनिर्भर बन सकें और जरूरत पड़ने पर अपने परिवार की मदद भी कर सकें.

पत्नी डरती है कि कहीं पति निकम्मा न हो जाए

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कई बार जब पति को लगता है कि पत्नी अपनी पूरी सैलरी घर में खर्च रही है और घर का मोटा खर्चा उसी के जिम्मे है तो पति लापरवाह हो जाते हैं. ऐसे में पत्नी को पति पर भरोसा नहीं होता है. उसे लगता है कि मेरे पैसे कहीं पति बरबाद न कर दें. पति निकम्मा न हो जाएं. वहीं दूसरी तरफ, जब पति को पता होता है कि घर की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर है, तो वह अधिक मेहनत और जिम्मेदारी से काम करता है. इसलिए पति से कहें कि जैसे तुम पहले घर चलते थे अब भी वैसे ही चलाओ. मेरी सैलरी को भविष्य के लिए सेव होने दो.

आप बिलकुल सही करती हो. जब तक आप के खर्चे न हों तो पति से कहो जैसे तुम पहले रहते थे वैसे रहो.

पत्नी की सैलरी इमरजैंसी फंड की तरह होती है

अगर पत्नी घर में सैलरी नहीं खर्च रही है, तो इस का मतलब यह नहीं कि उस की सैलरी का कोई फायदा ही नहीं है, उस का जौब करना ही बेकार है. ऐसा कई पतियों को लगता है लेकिन जब अचानक से कोई बड़ा खर्च आ जाए, कोई बीमारी आदि हो जाए तो पत्नी ही है जो सब से पहले अपने जोड़े हुए पैसे आप के आगे रख देगी. साथ ही भविष्य में किसी बड़ी जरूरत, बच्चों की पढ़ाई या अचानक आए संकट के समय यह बचत बहुत काम आती है.

सैलरी बचाएं, पर पैसे को कहीं इनवेस्ट करें

कई महिलाओं की आदत होती है कि वे अपनी सैलरी को अकाउंट में ही पड़ा रहने देती है या घर की गुल्लक में या किसी पर्स में पैसा इकट्ठा करती रहती है जोकि एक खराब आदत है. यह बात पति को अच्छी नहीं लगती है इसलिए उस पैसे को सही जगह निवेश (Investment) किया जा सकता है, जैसे :

-म्यूचुअल फंड या एसआईपी.

-पीपीएफ (Public Provident Fund)

-सोना (Gold) या प्रौपर्टी.

टर्म इंश्योरैंस : परिवार के मुख्य कमाने वाले व्यक्ति के लिए अनिवार्य.

हैल्थ इंश्योरैंस : मैडिकल इमरजैंसी की स्थिति में आप की जमापूंजी को खर्च होने से बचाने के लिए.

कई बार महिला घर में भी नहीं खर्चती और उस पैसा का क्या करना है उसे यह भी पता नहीं होता. यह सिचुएशन सही नहीं है. आप अपनी बचत को विशिष्ट लक्ष्यों के साथ जोड़ें, जैसे :

-बच्चों की उच्च शिक्षा.

-रिटायरमैंट प्लानिंग.

-घर या संपत्ति खरीदना.

यह निवेश समय के साथ बढ़ता है और परिवार की ही ऐसेट्स को बढ़ाता है.

आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास

जब पत्नी अपनी सैलरी बचाती है, तो उसे आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने का एहसास होता है. इस से घर में एक संतुलन बना रहता है और किसी भी बड़े वित्तीय फैसले में उस की राय का महत्त्व बढ़ जाता है.

एसेट (Asset) बनाम लिएबिलिटी (Liability)

माना कि आप अपनी सैलरी घर पर नहीं खर्चना चाहतीं, ठीक है. लेकिन अगर आप उसी सैलरी को अपने ऊपर अंटशंट तरीके से खर्च करेंगी, तो पति को आपत्ति होगी. जैसे कि कुछ लेने का मन है और पति दिला रहा है, तो लो वरना मत लो. सेविंग करो.

अगर आप उन चीजों पर खर्च कर रही हैं जो भविष्य की पूंजी है तो कोई बात नहीं. जैसेकि आप ज्वैलरी खरीद रही हैं तो ठीक है  लेकिन अगर आप किसी अन्य चीज पर ज्यादा खर्च कर रही हैं, हजारों लुटा रही हैं, तो बेकार है. औफिस की ड्रैस, जूता खरीद रही हैं तो ठीक है. लेकिन अगर आप फैशन में 12 सैंडल खरीद कर रख रही हैं तो वह बेकार है. इस के बजाए जेवर खरीदें, चांदी, सोना खरीदें. इस बात को इस तरह समझें :

सोना, चांदी और ज्वैलरी : यह एक एसेट है. मुश्किल समय में यह न केवल काम आता है, बल्कि इस की कीमत समय के साथ बढ़ती भी है.

जरूरत से ज्यादा फैशन (12 सैंडल या महंगी साड़ियां): यह डिप्रेसिएटिंग एसेट (Depreciating Asset) है, जिस की वैल्यू समय के साथ खत्म हो जाती है. यह खर्च नहीं, बल्कि पैसे की बरबादी है.

जब आप दिखावे के बजाय सादगी चुनती हैं और अपनी मेहनत की कमाई को भविष्य की पूंजी बनाती हैं, तो आप न केवल अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर पूरे परिवार का सहारा भी बनती हैं.

आर्थिक स्वतंत्रता और पारिवारिक अनुशासन का यही सही मेल एक सुखद भविष्य की गारंटी है. पति को आर्थिक रूप से जिम्मेदार बनाए रखना और स्वयं फुजूलखर्ची से बच कर एसेट्स (सोना, चांदी, निवेश) का निर्माण करना एक ऐसी कला है जो परिवार को कभी टूटने नहीं देती.

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