नूपुरऔर शरवरी पोहरकर बहनें हैं, जिन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ी गांव खेतीखान में पिरुल हस्तशिल्प की स्थापना की. पिरुल जहां उत्तराखंड की ग्रामीण महिलाएं अपनी हस्तशिल्प कला से चीड़ की सुइयों से घरेलू सजावट और जीवनशैली उत्पादों (चाय कोस्टर, ट्रे, मैट, प्लांटर्स, झुमके, हैंडबैग) का निर्माण करती हैं और अपनी आजीविका स्वयं चलाती हैं.
गृहशोभा के इंस्पायर अवार्ड में नूपुर ने यंग जैनरेशन के लिए कहा, ‘‘मैं सब से यही कहूंगी कि नेक इरादों से आगे बढ़ें, चुनौतियां लें और अपना ग्राउंड वर्क करते हुए आगे कदम बढ़ाएं.’’
वहीं शरवारी का संदेश रहा, ‘‘लड़कियो बाहर निकलो. आप डरें नहीं कि लोग क्या कहेंगे. उतारचढ़ाव तो चलते रहते हैं, इसलिए ज्यादा मत सोचो. अपनी लाइफ की लीडर बनो क्योंकि जब एक महिला लीड करती है तो बात ही कुछ और होती है. वहां भावनाओं का भी महत्त्व होता है.’’
एक निर्णायक अंतर्दृष्टि
नूपुर एक पशु चिकित्सक हैं, जिन्होंने अपने एक ग्रामीण फैलोशिप कार्य में देखा कि उत्तराखंड की ग्रामीण जनता वहां के जंगलों की आग से बहुत परेशान है, जिस की सब से बड़ी वजह थी प्रचुर मात्रा में पाइन सुई या चीड़ जो जंगल की आग को बढ़ावा देती है, साथ ही यह भी देखा कि ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थाई आजीविका की कमी है. इन दोनों ही गंभीर विषयों पर उन्होंने अपनी बहन शरवरी जो एक टैक्सटाइल डिजाइनर हैं से विमर्श किया तो उस चर्चा से एक निर्णायक सोच उभर कर आई.
पाइन सुइयों के साथ शिल्पकला पर एक यूट्यूब वीडियो ने चीड़ को ऐसे कलात्मक उत्पादों में बदलने का विचार जगाया जो टिकाऊ और पर्यावरण के लिए फायदेमंद था, साथ ही अपशिष्ट और आजीविका को संबोधित करता था. आज वन उपउत्पाद को हस्तनिर्मित, पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं में बदल कर पिरुल शहरी और अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंचा है.
पिरुल हस्तशिल्प
पिरुल हस्तशिल्प बूटस्ट्रैप्ड है और 2021 से व्यवस्थित रूप से बढ़ गया है. पिरुल पाइन सुइयों से उत्पादों की एक शृंखला बनाती है, जिस में चाय कोस्टर, सर्विंग ट्रे, टेबल मैट, प्लांटर्स, स्टोरेज बौक्स, झुमके, हैंडबैग और अन्य सजावट का सामान शामिल है. आज खेती, खान और आसपास के गांवों के ग्रामीण समुदायों को
100 से अधिक ग्रामीण महिला कारीगर उत्पाद निर्माण का हिस्सा हैं. उत्पाद या प्रोडक्ट्स मुख्यरूप से सोशल मीडिया व प्रदर्शनियों के माध्यम से और दिल्ली, हैदराबाद, बैंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में औफलाइन स्टोरों के साथसाथ चुनिंदा कौरपोरेट और संस्थागत और्डर के माध्यम से बेचे जाते हैं.
अचीवमैंट
शुरुआती कौरपोरेट और्डर में एक फार्मास्युटिकल कंपनी से 5 हजार टी कोस्टर का एक बड़ा सैट शामिल है जो संस्थागत मांग को मान्य करता है.
अब तक पिरुल के कारीगरों ने मिल कर 20 हजार किलोग्राम से ज्यादा चीड़ की सूखी पत्तियों के कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला है.
यह उद्यम लगभग 15.5 लाख का वार्षिक राजस्व (एफवाई2023) रिपोर्ट करता है. जो स्वतंत्र मीडिया में प्रकाशित एक सत्यापित आंकड़ा है.आसपास के 7 गांवों की 100 महिला कारीगर नियमित रूप से शिल्प निर्माण के काम में जुड़ी हैं. 2024 में उन्होंने मार्केटिंग और स्कैलिंग प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए एसबीआई वाईएफआई सहयोग – द पिच फेस्ट, एसबीआई यूथ फौर इंडिया कौन्क्लेव का हिस्सा में 9 लाख का अनुदान जीता.
