जनसंख्या विस्फोट से अधिक खतरनाक है क्लाइमेट चेंज, जानें यहां

मुंबई हर मानसून में पानी-पानी हो जाती है और ये धीरे-धीरे हर साल बढती जा रही है, कितना भी कोशिश प्रसाशन कर ले, इसे रोक नहीं पाती. कई लो लाइंग एरिया को ऊपर किया गया, रास्ते और सीवर लाइन बदले गए, लेकिन मानसून में पानी जमा होने को रोक नहीं पाये, जिससे हर साल यहाँ के निवासियों को बाढ़ जैसे हालात का सामना मानसून में करना पड़ता है. असल में इस महानगरका तापमान पिछले एक दशक में काफी बढ़ी है. एक दशक पहले 35 डिग्री सेल्सियस तक,अक्तूबर और नवम्बर में रहने वाला तापमान अब 35 से 40 डिग्री तक होने लगा है. इसकी वजह जंगल काटकर शहरीकरण करना, पर्यावरण पर अधिक दबाव का पड़ना है,जिससे ग्रीन जोन लगातार कम हो रहा है. यहाँ की जनसँख्या भी अधिक है, जिससे गाड़ियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. मुंबई में रहनेवालों के पास भले ही 350 स्कवायर फीट का घर हो, पर गाड़ी वे बड़ी खरीदते है, ऐसे कई विषम परिस्थितियों की वजह से पूरे विश्व में पर्यावरण प्रदूषण बहुतबढ़ चुकी है, जिससे जलवायु में परिवर्तन भी जल्दी दिख रहा है और ये समस्या जनसंख्या विस्फोट से भी अधिक भयावह हो गयी है, लेकिन विश्व इसे अनसुना कर रही है, ऐसे में अगर इसे रोकने की व्यवस्था नही की गई, तो आने वाली कुछ सालों में मुंबई और समुद्र के पास स्थित बड़ी-बड़ी शहरों को डूबने से कोई बचा नहीं सकेगा.

बदल रही है जलवायु

जलवायु परिवर्तन की समस्या से पूरा विश्व गुजर रहा है, जिसमें आर्कटिक में तीसरी बड़ी ग्लेसियर के पिघलने की वजह से इस साल वहां और कनाडा में भयंकर गर्मी पड़ना,जर्मनी में अचानक बाढ़ आना,अमेरिका की जंगलों में बिना मौसम के आग लगना, आदि न जाने कितने ही आपदा इस जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है, इसे गिन पाना संभव नहीं. एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि आने वाली कुछ सालों में भारतीय मानसून और अधिकतीव्र हो जायेगा, इसकी वजह पिघलती बर्फ और बढ़ते कार्बन डाई आक्साइड है, जिससे समुद्र के निकवर्ती एरिया डूब जाने की आशंका है.

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किया अनदेखा क्लाइमेट चेंज को

इस बारें में एनवायरनमेंटलिस्ट भारती चतुर्वेदी कहती है कि क्लाइमेट चेंज का प्रभाव काफी सालों से दिख रहा था पर अमीर बड़े-बड़े देशों में नहीं दिख रहा था, सिर्फ हमारे देश में दिख रहा था. हमारे देश में इसका प्रभाव बहुत अधिक दिख रहा है, मसलन तापमान का बढ़ना, बारिश कम होना, सूखा पड़ना, भयंकर बाढ़ आना, अकाल पड़ना आदि कई समस्याएं दिखाई पड़ रही है. विश्व इस पर अधिक ध्यान भी नहीं देती थी, न इसे सच मानती थी. अब अमेरिका में हरिकेन तो कनाडा की वेस्ट कोस्ट में भीषण गर्मी होने और ग्रीनलैंड में तीसरी ग्लेसियर के पिघलने के बाद अब वे इस दिशा में सोच रहे है, जबकि क्लाइमेट चेंज पूरे विश्व के लिए बहुत बड़ा खतरा, सेहत और लाइफ के लिए है. जलवायु परिवर्तन से कई जानवर और पक्षी के समूह आज विलुप्त हो चुके है. ये बहुत ही खतरनाक है, इसलिए इसे अब समझना चाहिए.

चल रहा है आरोप-प्रत्यारोप

इसके लिए हर एक देश एक दूसरे पर आरोप लगाती है कि ये किसी देश की वजह से हुआ है, जबकि देखा जाय तो सारे अमीर देशों का अमीर होने में इंडस्ट्रियलाइजेशन और कोलोनियालिज्म खास महत्व रखता है.इंग्लॅण्ड और अमेरिका ने व्यवसाय की वजह से इतने पैसे कमाए और अमीर बने. इसमें बहुत सारे कोयला जलाया, पेट्रोल जलाया, क्योंकि कैलिफोर्निया जैसे शहर में किसी को भी कही जाने में गाडी लेनी पड़ती है, नहीं तोकहीं नहीं जा सकते, जबकि हमारे देश में बस, ट्रेन, मेट्रो को बहुत अच्छी सुविधा है. गाड़ी, कोयले और इंडस्ट्रियलाइजेशन का कल्चर होने की वजह से इनकी खपत बहुत अधिक है,इससे इन देशों ने अपनी इकॉनमी बढाई है. इसी से क्लाइमेट चेंज हुआ है और मेरा मानना है कि अमीर देशों ने गरीब देशों को इसका गिफ्ट दिया है. गरीब देश जिसमें भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालद्वीप आदि है, उन्हें भुगतना पड़ रहा है. अम्फान तूफान भी इस दिशा में बहुत भयंकर साइक्लोन था, इससे जो आर्थिक नुकसान हुआ, उसकी भरपाई इन अमीर देशों ने नहीं की. इतना ही नहीं हमारे देश में भी रहने वाले अमीर भी जलवायु परिवर्तन में अपना योगदान देने में पीछे नहीं है. मोटेतौर पर देखने से ये पता चलता है कि अमीरों के दिए गए इस भेंट को पाकर सारे गरीब देश और अधिक गरीब हो रहे है.

नहीं समझते जलवायु प्रभाव के दुष्परिणाम 

असल में ये बताना मुश्किल है कि कितने साल पहले से लोगों ने पर्यावरण पर ध्यान देना छोड़ चुके है, लेकिन कई ऐसे देश यहाँ और बाहर है, जो प्रकृति के साथ रहते है. आदिवासी और हिमालय की पहाड़ियों में रहने वाले गाँवों में रहने वाले लोग, जो वहां प्रकृति के साथ रहते है. उन्हें अपने भरण-पोषण के लिए जरुरत की सारी चीजें जैसे खान-पान, दवाई, आग जलाना आदि सब उन्हें उन जंगलों में मिलती है, इसलिए वे जंगल, नदी, पर्वत को अपना जीवन मान उसकी रखवाली करते है. देखा जाय तो पता चलता है कि विश्व में कुछ लोग ऐसे है, जबकि कुछ को ये तक पता नहीं होता है कि उनकी मोबाइल को बनाने में कितने खानों की खुदाई, पेड़ों की कटाई की जाती है और उससे पर्यावरण का प्रदूषणकितना होता है, क्योंकि इससे उन्हें कुछ लेना देना नहीं होता. इस प्रकार कुछ लोगों ने प्रकृति की संरक्षण को नहीं छोड़ा, जबकि उनकी नई पीढ़ी पर्यावरण पर ध्यान देना छोड़ रही है. दूसरे लोग जो पर्यावरण के बारें में कभी सोचा ही नहीं.

डूबने लगेंगे कई देश

डॉ भारती आगे कहती है कि उत्तरपूर्वी ग्रीनलैंड की हिमखंड जल्दी-जल्दी पिघल रही है. अगर ये ग्लेसियर पूरी तरह पिघल जाती है, तो पूरे फ्लोरिडा में 2 इंच पानी आने का खतरा होता. मेरा इसमें ये कहना है कि अब क्लाइमेट चेंज का प्रभाव धीरे-धीरे नहीं जल्दी-जल्दी हो रहा है. साल 2020 में पूरे विश्व में टिड्डियों का आक्रमण अफ्रीका, मिडिल ईस्ट, राजस्थान, दिल्ली, कोलकाता आदि कई शहरों में हुई. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन की वजह से राजस्थान, पश्चिमी बंगाल उत्तराखंड, महाराष्ट्र आदि कई शहरों में बिजली कड़कने की संख्या और इसकी घनत्व बढ़ रही है, जिससे लोगों की मृत्यु होने का आंकड़ा भी पहले से काफी बढ़ चुका है. ये परिवर्तन अचानक कुछ सालों से हो रही है. हालाँकि ग्रीनलैंड हमसे काफी दूर है, लेकिन बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि जगहों पर बिजली केकड़कने को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

जनसंख्या विस्फोट से अधिक खतरनाक, जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन से जनजीवन पर प्रभाव कितना पड़ेगा? पूछने पर भारती कहती है कि हर देश पर इसका अलग-अलग प्रभाव होगा. मसलन इस साल कनाडा की वेस्ट कोस्ट में 49 डीग्री तापमान हो गयी थी. जबकि दिल्ली में 46 डीग्री तापमान होने पर लोग बीमार पड़ने लगते है, लेकिन इसमें अंतर इतना है कि यहाँ के लोग गर्मी की वजह से मरे है, आग लग गयी और एक शहर पूरा आग से भस्म हो गया, पर वे धीरे-धीरे सामान्य हो गए. इसका अर्थ यह है कि अमीर देशों के पास पैसे है, वे क्षतिग्रस्त लोगों को पैसा मुवावजे के रूप में दे सकते है, फिर से उस जले हुए शहर को बसा सकते है, लेकिन गरीब देश जैसे द्वीपों का समूह, जहाँ काफी लोग निवास करते है. जैसे-जैसे बर्फ पिघलेगा समुद्र का जल स्तर बढेगा और ये द्वीप समूह सागर में डूब जायेंगे, फिर ऐसे लोगों को किसी दूसरे स्थान पर ले जाना पड़ेगा, लेकिन वे जायेंगे कहाँ, फिर से कैसे अपना जीवन शुरू करेंगे? विद्रोह और रोष वहां के लोगों में होगा. उन्हें इस कठिन परिस्थिति में जीवन निर्वाह करना पड़ेगा, ऐसे देश मालद्वीप, श्रीलंका जैसेकई है. वेस्टर्न कंट्रीज में पैसा अधिक होने की वजह से वे फिर से सब पा लेते है और कुछ दिनों में नार्मल जिंदगी बिताना शुरू कर देते है, पर गरीब देशों के लिए संभव नहीं.यहाँ ये भी समझना आवश्यक है कि धनी देशों में भी सबके साथ वर्ताव एक जैसा नहीं होता. ब्लैक लोगों के साथ व्हाइट की तरह अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता. उन्हें हर तरह की सुविधाएं नहीं मिलती, समाज उनके लिए इतना प्रेम नहीं रखती, जितना रखना चाहिए. इसलिए उन्हें बहुत अधिक दुःख पहुँचता है, क्योंकि जब अमेरिका में कुछ साल पहले कैटरीना चक्रवात आया था, तो इन गरीबों के पास  न तो पैसे होते है और न ही इनके लिए पैसे कहीं से आये थे.

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है क्या समाधान

समाधान के बारें में पर्यावरणविद भारती कहती है कि पैरिस अग्रीमेंट एक अच्छी समझौता है, जिसमें विश्व की सभी सरकार की प्रतिनिधियों ने मिलकर जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की थी. इसके बाद अब नवम्बर में क्लाइमेट चेंज के बारें में बातचीत होगी और ये निर्णय लिया जाएगा कि इस बिंदु से क्या करना जरुरी होगा, एक तरफ लोग ग्रीन एनवायरनमेंट के साथ या इको-फ्रेंडली के साथ जीना सीखे, लेकिन आबादी यहाँ बहुत अधिक होने की वजह से हम इकोफ्रेंडली तरीके से नहीं जी सकते. इसके लिए देश की जनता को अपनी खपत कम करनी होगी. सोलर पैनल से बिजली मिलने पर भी बिजली की उपयोगिता कम करना पड़ेगा. इसके अलावा खदानों की खुदाई को इको-फ्रेंडली बनाने की जरुरत है, जो मेरे अंदाज से ऐसी खुदाई कभी नहीं हो सकती,  ऐसे में सभी को अपनी जरूरतों को थोडा कम करना है. फॉसिल फ्यूल और कोयले के जलने से कार्बनडाईआक्साइड निकलता है, जो बहुत घातक तरीके से क्लाइमेट चेंज को बढ़ा रहे है. फॉसिल फ्यूल में पेट्रोलियम आता है, इसकी खपत को विकसित और अमीर देशों में कम करने की आवश्यकता है,ताकि इसके कार्बन एमिशन्स को धरती सह सकें. तभी क्लाइमेट इक्विटी हो सकती है और विकासशील देशों को विकसित होने का न्याय मिलेगा और वे आगे बढ़ पायेगे, क्योंकि विकास के लिए थोड़े कोयले और पेट्रोलियम की जरुरत होती है. विकसित देशों का प्रदूषण पोस्ट डेवलपमेंट है, जो वे एंजोयमेंट के लिए करते है,जबकि विकासशील देशों का प्री डेवलपमेंट प्रदूषण है.

इस प्रकार विकसित देशों को फिजूल की शौक को कम करने से ही क्लाइमेट चेंज को रोका जा सकेगा, नहीं तो वो दिनदूर नहीं जब जलवायु परिवर्तन से दुनिया भर की झीलों के ऑक्सीजन लेवल में व्यापक गिरावट का कारण बन जायेगी,जिससे वन्यजीवों का दम घुटने लगेगा और पीने के पानी की आपूर्ति का खतरा पैदा हो जायेगा. महासागर में ऑक्सीजन के गिरते लेवल की पहले ही पहचान हो चुकी है,लेकिन नई रिसर्च के मुताबिक, झीलों में इसकी गिरावट पिछले 40 वर्षों में तीन और नौ गुना के बीच तेजी से बढ़ी है,जो आगे और अधिक बढ़ने की संभावना है.

फैमिली के लिए बनाएं लौकी पुडिंग

अगर आप अपनी फैमिली के लिए हेल्दी टेस्टी डेजर्ट बनाना चाहते हैं तो लौकी पुडिंग आपके लिए बेस्ट औप्शन है. लौकी पुडिंग हेल्दी और टेस्टी डिश है, जिसे बच्चे काफी पसंद करते हैं.

सामग्री

– 1 कप कद्दूकस की लौकी

– 100 ग्राम पनीर छोटे टुकड़ों में कटा

– 1/2 लिटर दूध

– 1/2 कप मिल्क पाउडर

– चीनी स्वादानुसार

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– 2 बड़े चम्मच कटे बादाम सजाने व डालने के लिए

– 1 बड़ा चम्मच पिस्ता कटा – 10-12 धागे केसर के

– 1/4 छोटा चम्मच छोटी इलायची चूर्ण.

विधि

लौकी में 250 एमएल दूध डाल कर गलने तक धीमी आंच पर पकाएं. फिर इस में बचा दूध, पनीर और चीनी डालें. 5 मिनट बाद मिल्क पाउडर डाल दें. गाढ़ा होने तक पकाएं. केसर को 1 चम्मच दूध में घोट कर लौकी वाले मिश्रण में डाल दें. गाढ़ा होने पर आधा मेवा डालें और आधा सजावट के लिए रख लें. जब पुडिंग ठंडी हो जाए तब सर्विंग बाउल में डालें और ऊपर से थोड़ाथोड़ा मेवा बुरक कर सर्व करें.

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Married Life में क्या है बिखराव के संकेत

Married Life में प्रेम की ऊष्मा जब कम होने लगती है तब पतिपत्नी के जीवन में ऐसी छोटीछोटी बातें होने लगती हैं, जो इस बात की ओर संकेत करती हैं कि उन के बीच दूरियां बननी शुरू हो रही हैं. अधिकतर दंपती इन संकेतों पर ध्यान नहीं देते या फिर वे समझ नहीं पाते हैं. समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दिया जाए तो उन के बीच प्यार, अपनापन, समर्पण की भावना कम होती जाती है और फिर एक दिन उन का दांपत्य जीवन टूट जाता है. इन संकेतों के प्रति संवेदनशील रह कर संबंधों के बीच पनप रही खाई को गहरा होने से रोका जा सकता है. बिखराव के ये संकेत दांपत्य जीवन के हर छोटेबड़े पहलू से जुड़े हो सकते हैं.

घर में छाई चुप्पी

प्यार भरे संबोधन के साथ हंसनाबोलना, हंसीखुशी का माहौल पैदा करना, खुशियों का जोश भरना ये सब बातें पतिपत्नी के बीच मधुरता और समीपता लाती हैं. यदि हंसीखुशी के क्षणों में भी पतिपत्नी के बीच खामोशी छा जाए, दोनों के स्वर मद्धम पड़ने लगें तो समझना चाहिए उन के बीच प्यार की ऊष्मा कम हो रही है. उहें आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है.

छोटीछोटी बातों में मतभेद

हर बात पर पतिपत्नी के विचार एक हों, यह जरूरी नहीं है. दोनों में थोड़ाबहुत वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है. यदि बातबात पर या हर छोटीछोटी बातों पर दोनों में मतभेद हो और यह मतभेद झगड़े में तबदील होने लगे, दोनों एकदूसरे की कमियां निकालने लगें तो समझना चाहिए कि दोनों के बीच खाई गहरी होनी शुरू हो चुकी है. दोनों को संभलने की जरूरत है.

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झूठ बोलने लगें

पतिपत्नी का आपसी प्यार विश्वास की नींव पर टिका होता है. यदि दोनों के बीच झूठ, बेईमानी, छल, कपट का बोलबाला होने लगे तो समझना चाहिए एकदूसरे के प्रति समर्पण की भावना खत्म हो चुकी है. उन की जोड़ी कभी भी टूट सकती है. विवाह को बनाए रखने के लिए दोनों के बीच भरोसा और विश्वास होना जरूरी है.

तूतू, मैंमैं

2 बरतन जहां रहेंगे वहां आवाज तो आएगी ही. इसी तरह दंपती के बीच किसी बात को ले कर थोड़ी बहस होना परेशानी की कोई बात नहीं है. लेकिन बातबात पर झगड़ा होना, छोटीछोटी बात को ले कर दोनों में लंबी बहस होना, गलती होने पर गलती न मानना, दोनों में बराबर तनाव बना रहना दांपत्य जीवन के लिए खतरनाक संकेत है. इस के लिए दोनों को सोचने व समझने की आवश्यकता है.

दोस्त जब कैक्टस लगें

एकदूसरे को दोस्तों को आदर देने से दंपती के बीच आपसी प्यार बढ़ता है. जब एकदूसरे के दोस्त या सगेसंबंधी रास न आएं, दोनों उन के सामने एकदूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करें तो समझें उन के बीच के प्यार का दम घुटने लगा है. उसे बचाने के लिए आपसी समझदारी की आक्सीजन की जरूरत है.

कामयाबी पर जलन

एकदूसरे की कामयाबी दोनों के जीवन में खुशियों की बहार लाती है. यदि एकदूसरे की कामयाबी पर संतोषजनक स्वर न मिलें, मन में ईर्ष्या होने लगे, जलन की बू आने लगे तो समझना चाहिए दोनों के बीच प्यार की गरमाहट खत्म होने लगी है. उन के बीच की दूरियां गहरी होने लगी हैं.

अहं की अट्टालिकाएं ऊंची होने लगें

एकदूसरे के बीच अंह या ईगो आना तलाक का एक बड़ा कारण है. मैं क्यों झुकूं, मैं ही क्यों करूं जैसी बातें रिश्ते में कटुता भरती हैं. यदि दोनों हर बात को जीतहार का मुद्दा बना लें तो समझना चाहिए कि पतिपत्नी के बीच अहं की अट्टालिकाएं ऊंची उठने लगी हैं. उन का प्यार अहं की अट्टालिकाओं के नीचे दब कर छटपटा रहा है. उन्हें जल्द ही संभलने की जरूरत है वरना रिश्ता टूटने में देर नहीं लगेगी. शादी का मतलब एकदूसरे को शेयर करना, एकदूसरे की जिंदगी को शेयर करना, एकदूसरे की चीजें शेयर करना होता है. फिर एकदूसरे की चीजें शेयर करने में नाराजगी क्यों?

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सेक्स हैरेसमेंट

सुखी दांपत्य जीवन के लिए सेक्स सब से खास जरूरत है. एकदूसरे के बीच समर्पित सेक्स प्यार, अपनापन और खुशियों की बहार लाता है. पति द्वारा सेक्स के लिए जबरदस्ती करना, पत्नी की इच्छा के विरुद्ध सेक्स संबंध बनाना या सेक्स प्रताड़ना देना, वहीं पत्नी द्वारा सेक्स के लिए इनकार करना या सेक्स में सहयोग न देना जैसी बातें सेक्स हैरेसमेंट में आती हैं. ऐसी स्थिति में दोनों को जल्दी संभलने की जरूरत है. दोनों तुरंत विवाह सलाहकार से मिलें ताकि जीवन में दोबारा खुशियों की बहार आ सके.         

बिखराव के संकेत

घर में सन्नाटा छाना.

दरवाजों का तेजी से खुलना, बंद होना.

चीजों के उठाने व रखने के अंदाज में बदलाव आना.

छोटीछोटी बातों पर बहस होना.

बातों का जवाब न देना.

चीजों का टूटना या पटकना.

बिना वजह किसी बात पर चिल्ला उठना.

पति का कमरा छोड़ कर भाग जाना.

पत्नी का कमरे में घुस कर दरवाजा बंद कर लेना.

बिस्तर पर मुंह फेर कर सो जाना.

एकदूसरे से झूठ बोलना.

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पतिपत्नी दोनों के लिए सुझाव

गलती हो या न हो, दोनों में से कोई एक समर्पण कर दे.

समर्पण कर देने पर सामने वाला नखरे न दिखा कर पूरा मामला भूल जाए.

पुरानी बातों को भूलना सीखें.

किसी भी बात को लंबा तूल न दें.

जब जिंदगी शेयर कर रहे हैं तब भौतिक चीजें शेयर करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए.

एकदूसरे को सुधारने के बजाय जैसा है वैसा ही स्वीकार करें.

अच्छी बातों के लिए एकदूसरे को श्रेय दें.

बिना सोचेसमझे आक्रामक रूप न अपनाएं.

माफी मांगने में शर्म महसूस न करें.

ताली एक हाथ से नहीं, दोनों हाथों से बजती.

सावधान: ज्यादा तनाव लेना सेहत पर पड़ेगा भारी

तनाव हमेशा बुरा नहीं होता. जब तनाव छोटे स्तर पर होता है तो यह दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने में आपकी मदद करता है, लेकिन यह काफी ज्यादा हो जाए तो आपकी सेहत के साथ आपका जीवनस्तर भी प्रभावित होता है. ज्यादा तनाव से औफिस या घर जीवन के हर क्षेत्र में आपका काम प्रभावित होगा और इससे आपके संबंध भी प्रभावित होंगे.

बार-बार सिर दर्द, बार-बार गुस्सा होने, ठीक से नींद न आने का संबंध तनाव से हो सकता है. ज्यादा तनाव के चलते व्यक्ति सहन करने की क्षमता खो देता है. इसके चलते उसका कामकाजी प्रदर्शन निचले स्तर पर चला जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव की लिमिट अलग-अलग व्यक्तियों, परिस्थितियों और व्यक्तिगत क्षमता (मानसिक और शारीरिक) के हिसाब से अलग-अलग होती है. आपका तनाव जब अपनी लिमिट को पार कर जाता है, तो यह आपके रोजमर्रा के काम को प्रभावित करने लगता है.

कैसे पहुंचाता है नुकसान

तनाव आपके सोचने-समझने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. इसके सामान्य लक्षणों में बार-बार सिर दर्द होना, वजन घटना या बढ़ना, ठीक से नींद न आना, खाना-पीना ठीक से न होना, बार-बार बीमार पड़ना, ध्यान केंद्रित न कर पाना, मूड स्विंग होना और हाइपरएक्टिव और ओवरसेंसिटिव होना हैं. कुछ मामलों में तो डिप्रेशन भी हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘तनाव अक्सर आत्महत्या के विचारों के साथ आता है, खुद को या उसके परिजन को नुकसान पहुंचाने के विचारों को भी लाता है. इससे कोई व्यक्ति अपना आत्मसम्मान भी खो देता है. इससे बचने के लिए प्रोफेशनल्स की मदद लेनी चाहिए. यदि यह अपनी सीमा रेखा को पार कर जाता है, जिसमें कोई व्यक्ति इसे सहन नहीं कर सकता और दवाइयां काम नहीं करतीं, ऐसे में थेरेपिस्ट से कंसल्ट करना चाहिए.’

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लंबे समय तक तनाव में रहने से इम्‍युनिटी और हार्मोंस पर असर पड़ता है. नतीजतन आपको ज्यादा बेचैनी होती है और आपका ध्यान लगना कम हो जाता है. जब आपको तनाव होता है तब आप दफ्तर में मीटिंग्स, फोन पर बातचीत करने से बचते हैं. कई बार लोग जीवनसाथी से भी बात करने से बचने लगते हैं. उस समय वे खुद को असहाय पाते हैं.’

स्वास्थ्य पर असर

लंबे समय तक तनाव के रहने से दिल और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं. तनाव लंबे समय से परेशान कर रहा हो तो मस्क्युलोस्केलेटल सिस्टम, रेस्पिरेटरी सिस्टम, ओएसोफैगस बाउल मूवमेंट, नर्वस सिस्टम और रिप्राडक्टिव सिस्टम को प्रभावित करता है. इसके ज्यादा समय तक बने रहने से यह आपकी बौडी में स्ट्रेस हार्मोंस को बढ़ा देता है. कौर्टिकोस्टेरायड जैसे स्ट्रेस हार्मोंस ब्रेन के न्यूट्रान्स में केमिकल्स कम कर देते हैं, जिसके चलते याददाश्त कमजोर हो जाती है और आसपास की चीजों में व्यक्ति की दिलचस्पी कम होने लगती है. अगर आप घर या दफ्तर में कुछ खास स्थितियों से बचने की कोशिश कर रहे हों तो आप स्ट्रेस से परेशान हो सकते हैं

तनाव से निपटने का तरीका

– पिछले अनुभवों से मौजूदा कामकाज पर प्रभाव न पड़ने दें.

– असहायता, निराशा, विफलता को भूलकर अपनी ताकत पर फोकस करें.

– नियमित एक्सरसाइज, प्राणायाम और अच्छे खान-पान पर जोर दें.

– अपना बर्ताव बदलें, अवांछित चीजों के लिए ना कहना सीखें.

– कामकाज में प्राथमिकताएं तय कर उन्हें निपटाने का प्रयास करें.

– दोस्तों, परिवार के साथ अपनी बात साझा करें.

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पढ़ीलिखी मौडर्न तन्वी को ब्याह कर विजित उसे अपने घर तो ले आया मगर फिर घर में अजीबोगरीब घटनाएं होने लगीं और फिर एक दिन…

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3. बंदिनी: रेखा ने कौनसी कीमत चुकाई थी कीमत

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बंदिनी समान जीवन जीना और फिर मृत्यु को गले लगाना ही रेखा की नियति बन गई थी. पर जिस रिहाई की कीमत रेखा ने चुकाई थी, क्या वह उसे कभी मिल पाई?

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4. लड़की: क्या परिवार की मर्जी ने बर्बाद कर दी बेटी वीणा की जिंदगी

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मां हो कर मैं ने अपने बेटों को लाड़ दिया और बेटी को तिरस्कार. बेटों को स्वच्छंदता दी और बेटी को पाबंदियों का पिंजरा. उस के हर अरमान व फैसलों पर कुठाराघात किया. हमारी परवरिश के चलते ही शायद आज वीणा की जिंदगी इस झंझावत में उलझ गई थी. सारा दोष मेरा ही था.

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5. सिसकता शैशव: मातापिता के झगड़े में पिसा अमान का बचपन

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मासूम सा बचपन, मन में अनगिनत सवाल. सब अनबुझे. अमान का अबोध बचपन मातापिता के झगड़े के बीच में पिस कर रह गया. उस के सिसकने, रोने को कोई भी समझ नहीं पा रहा था .

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6.एक से बढ़कर एक: दामाद सुदेश ने कैसे बदली ससुरजी की सोच

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दकियानूसी खयाल के अपने ससुरजी को जगाने के लिए दामाद सुदेश ने ऐसी कौन सी युक्ति निकाली कि सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी…

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7. शरशय्या: त्याग और धोखे के बीच फंसी एक अनाम रिश्ते की कहानी

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कौन सा था वो अनाम रिश्ता जिसे वो इला से छिपा रहा था ताकि उन का रिश्ता लहूलुहान न हो.

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8.उस रात: कौनसा हादसे के शिकार हुए थे राकेश और सलोनी

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2 महीने बीत जाने के बाद भी जब राकेश व सलोनी का कुछ पता नहीं चला तो सभी ने यह समझ लिया कि वे दोनों किसी दूसरे शहर में जा कर पतिपत्नी की तरह रह रहे होंगे.

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9.अपनी ही दुश्मन: कविता के वैवाहिक जीवन में जल्दबाजी कैसे बनी मुसीबत

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कविता भी एकदम गजब लड़की थी. उसे हर बात की जल्दी रहती थी. बचपन में उसे जितनी जल्दी खेल शुरू करने की रहती थी, उतनी ही जल्दी उस खेल को खत्म कर के दूसरा शुरू करने की रहती थी.

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10. कभी नहीं: क्या गायत्री को समझ आई मां की अहमियत

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किसी तरह भावी सास को विदा तो कर दिया गायत्री ने परंतु मन में भीतर कहीं दूर तक अपराधबोध सालने लगा, कैसी पागल है वह और स्वार्थी भी, जो अपना प्रेमी तलाशती रही उस इंसान में जो अपना विश्वास टूट जाने पर उस के पास आया था.

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15 किलो वजन घटाने के बाद बदला Bharti Singh का लुक, फैंस हैं हैरान

बीते दिनों एक्ट्रेस शहनाज गिल ने अपने वेट ट्रांसफ्रौमेशन से सभी को चौंका दिया है तो वहीं लाफ्टर क्वीन भारती सिंह ने हाल ही में किए वेट लौस से फैंस हैरान है. दरअसल, वेट ट्रांसफॉर्मेंशन के बाद भारती सिंह का लुक पूरी तरह बदल गया है. 15 किलो वजन कम करने के बाद अब वह फैंस को अपने नए-नए लुक से दीवाना बना रही हैं. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

लुक को फ्लौंट कर रही हैं भारती

 

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इन दिनों सोशलमीडिया पर अपनी वेट लौस के बाद नई-नई फोटोज के साथ भारती सिंह अपने फैंस को चौंका रही हैं. इंडियन से लेकर वेस्टर्न के हर आउटफिट में भारती सिंह फैंस का दिल जीत रही हैं. 15 किलो वजन घटाने के बाद भारती सिंह अपने लुक को फ्लौंट करती नजर आ रही हैं.

ऐसे वजन घटा रही हैं भारती सिंह

 

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हाल ही में लाफ्टर क्वीन ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि वह इंटरमिटेंट फास्टिंग के जरिए वेट लौस कर रही हैं. दरअसल, वह शाम 7 बजे से अगले दिन 12 बजे तक कुछ नहीं खाती हूं, जिसके चलते उनका वेट कम हो रहा है. हालांकि वह एक्सरसाइज भी करती हैं और इसी के कारण आज उनका वजन 96 से 78 किलो हो गया है.

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ड्रैसेस में बिखेरती हैं जलवे

 

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रियलटी शोज में इन दिनों भारती अपने फिगर से फैंस को दीवाना बना रहीं हैं. फिटिंग वाली ड्रैसेस पहनकर वह सेलेब्स ही नहीं फैंस की भी तारीफें लूट रही हैं. फैंस सोशलमीडिया पर उनकी फोटोज वायरल कर रहे हैं, जिसके चलते वह इन दिनों सुर्खियों में हैं.

 

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एक्ट्रेसेस को देती हैं टक्कर

 

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वजन कम होने के बाद भारती सिंह का कौन्फिडेंस काफी बढ़ गया है, जिसका अंदाजा उनके बदले लुक्स से लगाया जा सकता है. वहीं वह अपने फैशन से एक्ट्रेसेस को टक्कर देती नजर आ रही हैं.

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इन 7 होममेड टिप्स से पाएं बदबूदार बालों से छुटकारा

कभी-कभी बदबूदार बाल भी उतना ही शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं जितने कि आपकी शरीर की दुर्गन्ध. हम में से कई लोगों को सिर की त्वचा की समस्या होती है जो मुख्य रूप से आयली बालों के कारण हो सकती है. क्योंकि चिकना या तेलयुक्त बाल आसानी से धूल, गंध और अन्य बाहरी प्रदूषकों को आकर्षित करते हैं. हार्मोन असंतुलन, फंगस या अन्य संक्रमणों के कारण भी बालों से बदबू आने लगती है. हम सभी लोग शैम्पू के बाद लहराते खुशबूदार बाल चाहते है जो रोजाना इस्तेमाल आने वाले शैम्पू स्थाई रूप से नहीं दे पाते है. यहां आपके लिए कुछ आसान और घरेलू उपचार बताये गए हैं जो आपकी बदबूदार बालों की समस्या को दूर करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं.

1. बेकिंग सोडा-

बेकिंग सोडा बदबूदार बालों के लिए सबसे उत्तम उपचार है, क्योंकि यह आपके बालों और जड़ की दुर्गन्ध और अतिरिक्त तेल को अवशोषित कर लेता है. बेकिंग सोडा के एक हिस्से और पानी के तीन हिस्सों को मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को अपने गीले बालों पर लगाये और 5 मिनट के बाद धो लें.

2. नींबू का रस

नींबू का रस बदबूदार बाल और तैलीय सिर के लिए सबसे ज्यादा असरदार घरेलू उपचार है. इसे शैम्पू करने के बाद पानी में मिलकर बालों एवं उसे जड़ों में लगाये और कुछ मिनट बाद धो लें. इससे बालों की चिकनाहट, दुर्गन्ध और डैंड्रफ दूर हो जाएँगे जिससे आपके बाल फ्रेश और चमकदार हो जाएंगे.

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3. गुलाब जल

गुलाब जल बालों से बदबू निकालने में प्रभावी रूप से सक्षम होता है. यह सबसे आसान और जल्दी तैयार होने वाला घरेलू उपचार है. अपने बालों और उसकी जड़ों में गुलाब जाल छिडके और कुछ समय के लिए सोखने दें. इसके बाद आपके बाल गुलाब के फूल जैसे महकने लगेंगे.

4. जैतून का तेल-

शैम्पू करने से पहले बालों और उसकी जड़ों में जैतून के तेल से मालिश करें. इससे निश्चित रूप से बदबूदार बाल की समस्या से निपटने में आपको मदद मिलेगी. जैतून का तेल बदबूदार बालों की समस्या के लिए काफी असरदार होता  है.

5. नीम का तेल-

एंटीबैक्टीरिया और एंटीसेप्टिक गुणों से समृद्ध नीम का तेल बदबूदार बालों से निपटने में दो तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. आप शैम्पू करते समय नीम के तेल की कुछ बूंदे मिला सकते है. इसके अलावा नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर ठंडा होने पर बालों को हफ्ते में एक बार धो सकते हैं.

6. चाय के पेड़ का तेल-

यह अपने शक्तिशाली एंटीबैक्टीरिया और एंटिफंगल गुणों के लिए जाना जाता है, चाय के पेड़ का तेल बालों में किसी भी तरह के दुर्गन्ध को दूर करने में प्रभावी ढंग से काम करता है जो स्कैल्प संक्रमणों के कारण होता है. चाय के पेड़ के तेल की कुछ बूंदे शैम्पू करते हुए हर बार मिलाये. इससे आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे.

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7. सेब का सिरका-

सेब का सिरका आपके बालों के लिए आश्चर्जनक रूप से फायदेमंद हैं. यह बालों की जड़ों से ऐसे तत्वों को निकालता है जो बालों को बदबूदार बनाते है और सिर की त्वचा और बालों की चमक को वापस लाता है. पानी के दो हिस्सों के साथ सेब के सिरका का एक हिस्सा मिलाएं और शैम्पू करने के बाद इससे बालों पर लगाएं.

इन घरेलू उपचारों के अलावा, बालो की दुर्गन्ध दूर करने के लिए खुशबूदार ड्राई शैम्पू का इस्तेमाल कर सकती हैं. यह बालों की चिकनाई सोख कर साफ और फ्रेश बनाने में मदद करेगा. अचानक कहीं बाहर जाना पड़ा तो आप अपने पसंदीदा परफ्यूम या बौडी स्प्रे का हल्का इस्तेमाल कर सकते है. यह ना केवल आपके बालों को बदबू से राहत देगा बल्कि देर तक टिका रहेगा.

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अगर कश्मीर जाएं तो लें इन 5 जायकों का स्वाद लेना ना भूलें

कहते हैं अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो कश्मीर में है. कश्मीर प्राकृतिक खूबसूरती का खजाना है. अगर आप कभी कश्मीर नहीं गए, तो जल्दी से ट्रिप प्लान कर लीजिए. साथ ही अगर आप कश्मीर घूमने जाएं, तो कश्मीरी जायकों का लुफ्त उठाना न भूलें. आइए, हम आपको बताते हैं कश्मीर के खास जायके. जिन्हें अगर आप एक बार चखेंगी तो पूरी जिंदगी उनका स्वाद आपके जुबान से नहीं उतरेगा.

1. रोगन जोश

नौन-वेज खाने के शौकीनों को रोगन जोश डिश जरूर पसंद आएगी. आप इस जायकेदार रेसिपी को चावल या तंदूरी रोटी के साथ ट्राई कर सकती हैं. यह काफी जल्दी बन जाता और तो और इसमें कई प्रकार के मसाले होते है जिससे यह बेहद स्वादिष्ट हो जाता है. यह कश्मीर का बेहद चर्चित व्यंजन है.

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2. दम उलाव

इस डिश को बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता इसे बनाने के लिये सबसे पहले दही और कश्मीरी लाल मिर्च के पेस्ट का प्रयोग होता है जिसकी वजह से दम उलाव काफी स्वादिष्ट हो जाता है. इसे बनाने के लिये सबसे पहले आलू को उबाल लिया जाता है फिर ज्यों का त्यों उसे गर्म तेल में फ्राई कर लिया जाता है उसके बाद इसे बनाने की मुख्य प्रक्रिया शुरू होती है. इस व्यंजन को स्वादिष्ट बनाने में सबसे ज्यादा योगदान इसमें डलने वाले मसालों का होता है, ये देखने में आलू-दम की तरह ही होता है लेकिन बेहद स्वादिष्ट होता है.

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3. मोदूर पुलाव

अगर आप कभी भी कश्मीर जाएं तो एक बात जरूर ध्यान में रखियेगा और वो है वहां की पुलाव. इसका स्वाद मीठा होता है इसमें तमाम प्रकार के मसालों के साथ साथ काफी मात्रा में ड्राई फ्रूट्स तथा शुद्ध देसी घी का प्रयोग किया जाता है. इस चावल का रंग केसरिया होता है और यह चावल मीठा होता है जिसकी वजह से इस व्यंजन का स्वाद मीठा होता है. अगर आप कश्मीर जाएं, तो मीठे जायके का मजा जरूर लें.

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4. थुकपा

इस डिश को बनाना जितना आसान है उतना ही स्वादिष्ट इसका स्वाद है जिसे एक बार चखने बाद शायद आप इस नूडल से बने डिश को कभी ना भूल पाएं. यह नौनवेज और वेज दोनो ही प्रकार का होता है. गाढ़ी नूडल्स की ग्रेवी वाली इस डिश को आप सूप की तरह खा सकती हैं.

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5. कहवा और बटर-टी

कश्मीर के सबसे मशहूर जायकों में से एक. अगर आपने कश्मीर में जाकर कहवा या बटर टी का मजा नहीं लिया, तो समझिए आप बहुत कुछ मिस कर दिया. तो कश्मीर घूमने जाएं, तो यहां के इन जायकों को चखना न भूलें. क्योंकि ठंड में गर्मा गरम चाय या कौफी का मजा ही कुछ अलग हो जाता है.

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आशा की नई किरण: भाग 2- कौनसा मानसिक कष्ट झेल रहा था पीयूष

‘‘बस यही कि आप एक अच्छे डाक्टर से सलाह ले कर इलाज करवा लें और जब तक आप का इलाज चलता रहेगा, मैं अपने जौब पर वापस जा कर खुश रहने का प्रयास करूंगी.’’

पीयूष सोच में पड़ गया. स्वाति का काम पर जाना उसे पसंद नहीं था. दरअसल, वह अपनी यौन अक्षमता से परिचित था और वह नहीं चाहता था कि शादी के बाद स्वाति अन्य पुरुषों के संपर्क में आए. स्त्री की अधूरी इच्छाएं और कामनाएं उसे भटका सकती थीं. इन पर किसी स्त्री का जोर नहीं चलता.

‘‘बाहर जा कर काम करने की इच्छा तुम मन से निकाल दो,’’ पीयूष ने कुछ कड़े स्वर में कहा, ‘‘मां, कभी नहीं मानेंगी और अगर मैं ने इजाजत दी तो घर में बेवजह कलह पैदा होगा. परंतु मैं एक काम कर सकता हूं. तुम में रचनात्मक प्रतिभा है. मैं घर पर कंप्यूटर ला देता हूं. तुम लेखकहानी लिख कर पत्रपत्रिकाओं में भेजो. इस से तुम्हारे अंदर का रचनाकार जीवित रहेगा और तुम समय का सही उपयोग भी कर सकोगी.’’ स्वाति जो चाहती थी, यह उस का सही समाधान नहीं था. चौबीसों घंटे घर पर रहने से एकाकीपन और ज्यादा डरावना लगने लगता है. यों तो स्वाति के ऊपर बाहर जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं था परंतु पुरानी सहेलियों और मित्रों से संपर्क टूट चुका था. एकाध से कभीकभार फोन पर बात हो जाती थी. अब उसे अपने पुराने रिश्तों को जीवित करना होगा. जिस घुटनभरी मानसिक अवस्था में वह जी रही थी, उस में उस का बाहर निकल कर लोगों के साथ घुलनामिलना आवश्यक था, वरना वह मानसिक अवसाद के गहरे कुएं में गिर सकती थी. स्वाति ने बुझे मन से पति के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया परंतु मन में विद्रोह के भाव जाग्रत हो उठे. वह बहुत सीधी, सरल और सच्चे मन की लड़की थी. उस के स्वभाव में विद्रोही भाव नहीं थे. परंतु परिस्थितियां मनुष्य को विद्रोही बना देती हैं. स्वाति के पास विद्रोह करने के एक से अधिक कारण थे परंतु अपनी मनोभावना को उस ने पति पर प्रकट नहीं किया. स्वाति ने संशय से पूछा, ‘‘और आप ने अपने बारे में क्या सोचा है?’’

‘‘अपने बारे में क्या सोचना?’’ उस ने टालने के भाव से कहा.

‘‘आप जानबूझ कर अनजान क्यों बन रहे हैं? क्या आप समझते हैं कि मैं इतनी भोली हूं और पुरुष के बारे में कुछ नहीं जानती. आप अपनेआप को किसी भ्रम में रखने की कोशिश न करें वरना मांजी पोतापोती का मुंह देखे बिना ही इस दुनिया से कूच कर जाएंगी.’’

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पीयूष कुछ पल चुप रहा, फिर गंभीरता से कहा, ‘‘मैं अपना इलाज करवा लूंगा.’’

‘‘तो फिर कब चलेंगे डाक्टर के पास?’’ स्वाति ने उत्साह से कहा.

‘‘तुम क्यों मेरे साथ चलोगी? मैं स्वयं जा कर डाक्टर से सलाह ले लूंगा,’’ पीयूष की आवाज में बेरुखी साफ दिखाई पड़ रही थी.

स्वाति के मन में कुछ चटक गया. पतिपत्नी के प्रेम की डोर में एक गांठ पड़ गई. पीयूष ने दूसरे ही दिन एक डैस्कटौप कंप्यूटर, प्रिंटर के साथ ला कर घर पर लगवा दिया. स्टेशनरी भी रख दी. स्वाति ने अपने भावों को शब्दरूप में ढालना आरंभ किया. उस के लेखन को प्रकाशन के माध्यम से गति मिली. इस से काफी हद तक उसे मानसिक सुख और शांति का अनुभव हुआ. स्वाति अपनी दुश्चिंता और मानसिक परेशानी से बचने के उपाय ढूंढ़ रही थी, तो दूरी तरफ सासूमां उस की परेशानी बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थीं. जैसेजैसे महीने साल में बदल रहे थे, सासूमां की वाणी की मधुरता गायब होती जा रही थी. उन के मुंह से अब केवल व्यंग्यबाण ही निकलते थे. स्वाति को बातबात पर कोसना उन की दिनचर्या में शामिल हो गया था. सासूमां की कटुता स्वाति अपनी कहानियों और कविताओं में भरती रहती थी.

सासूमां अकसर टोकतीं, ‘‘स्वाति, कुछ घर की तरफ भी ध्यान दो.’’

‘‘मेरे बिना घर का कौन सा काम रुका पड़ा है?’’ स्वाति ने अब अपनी स्वाभाविक सरलता त्याग दी थी. वह भी पलट कर जवाब देने लगी थी.

‘‘शादी के कई साल हो गए. अभी तक एक बच्चा पैदा न कर सकी. घरगृहस्थी की तरफ कब ध्यान दोगी, बच्चे कब संभालोगी?’’

‘‘जब समय आएगा, बच्चे भी पैदा हो जाएंगे?’’

‘‘वह समय पता नहीं कब आएगा?’’ सासूमां बोलीं.

स्वाति कुछ नहीं बोली, तो सासूमां ने आगे कहा, ‘‘तुम्हारे पैर घर में टिकते ही नहीं, बच्चों की तरफ ध्यान क्यों जाएगा? बाहर तुम्हारे सारे शौक पूरे हो रहे हैं, तो पति से क्या लगाव होगा? उसे प्यार दोगी तभी तो बच्चे पैदा होंगे.’’ स्वाति ने जलती आंखों से सासूमां को देखा. मन में एक ज्वाला सी भड़की. इच्छा हुई कि सासूमां को सबकुछ बता दे, कमसेकम उन का कोसना तो बंद हो जाएगा, परंतु क्या वे उस की बात पर विश्वास करेंगी? शायद न करें, अपने बेटे की कमजोरी को वे क्यों स्वीकार करेंगी?

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‘‘पता नहीं कैसी बंजर कोख ले कर आई है. ऊसर में भी बरसात की दो बूंदें पड़ने से घास उग आती है, परंतु इस की कोख में तो जैसे पत्थर पडे़ हैं,’’ सासूमां के प्रवचन चलते ही रहते थे. सासूमां की जलीकटी सुनतेसुनते स्वाति तंग आ चुकी थी. लेख, कविता और कहानी के माध्यम से मन की भड़ास निकालने के बाद भी उस के मन की जलन कम नहीं होती थी. दिन पर दिन स्वाति का मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा था. पीयूष की तरफ से उसे कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिल रहे थे. उस ने कहा था कि वह एक आयुर्वेदाचार्य से सलाह ले कर जननेंद्रियों को पुष्ट करने वाली कुछ यौगिक क्रियाएं कर रहा था और दूध के साथ कोई चूर्ण ले रहा था. स्वाति समझ गई, वह किसी ढोंगी वैद्य के चक्कर में फंस गया था. एक नियमित अवधि के बाद जब दोनों ने संबंध बनाए तो स्वाति को पीयूष की पौरुषता में कोई अंतर नजर नहीं आया.

‘‘आप किसी अच्छे डाक्टर को क्यों नहीं दिखाते?’’ स्वाति ने कहा.

‘‘क्या फायदा, जब आयुर्वेद में इस का इलाज नहीं है तो अंगरेजी चिकित्सा में कहां होगा?’’

‘‘आप कैसी दकियानूसी बातें कर रहे हैं. आप पढ़ेलिखे हैं. एक अनपढ़गंवार व्यक्ति के मुंह से भी यह बात अच्छी नहीं लगती. आज विज्ञान कहां से कहां पहुंच गया. चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है. कम से कम आप तो ऐसी बात न करें.’’

‘‘ठीक है, अगर तुम कहती हो तो मैं डाक्टर को दिखा दूंगा,’’ पीयूष ने बात को टालते हुए कहा और बाहर की तरफ चल दिया.

स्वाति पति के टालू स्वभाव से हैरान रह गई. पता नहीं किस मिट्टी का बना है यह इंसान. सासूमां का अत्याचार उस के ऊपर बदस्तूर जारी था, बल्कि दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा था. उन के तानों और जलीकटी बातों से स्वाति का हृदय फट कर रह जाता था. दूसरी तरफ पति की उपेक्षा से उस की मानसिक परेशानी दोगुनी हो जाती. उसे लगता, इस भरीपूरी दुनिया में वह बिलकुल अकेली पड़ गई है. उस का पति और सास ही उस के दुश्मन बन गए हैं. अपने मम्मीपापा से वह अपनी परेशानी बता नहीं सकती थी. अपना दर्द वह उन के हिस्से में क्यों डाले. उन्होंने तो अपनी जिम्मेदारी निभा दी थी. उस की शादी कर दी. अब अपने दांपत्यजीवन की परेशानियों से अवगत करा कर उन्हें क्यों परेशान करे? उस ने ठान लिया कि वह स्वयं ही अपनी परेशानियों से लड़ेगी और जीत हासिल करेगी. इन्हीं दुश्चिंताओं से गुजरते हुए उस ने इंटरनैट पर एक प्रसिद्ध सैक्सोलौजिस्ट का नाम व पता ढूंढ़ निकाला, फिर पीयूष से कहा, ‘‘आप स्वयं तो कुछ करने वाले नहीं हैं. मैं ने एक डाक्टर के बारे में इंटरनैट से जानकारी प्राप्त की है. उन से अपौइंटमैंट भी ले लिया है. कल हम दोनों उन के पास चलेंगे.’’ पीयूष ने अपने स्वर में और ज्यादा तल्खी घोलते हुए कहा, ‘‘एक बात समझ लो, मैं किसी डाक्टर के पास नहीं जाने वाला, तुम अपने काम से काम रखो. घर संभालो, मां की सेवा करो, अपना लेखन कार्य करो. तुम्हें जो चाहिए, मैं ला कर दूंगा. मेरे बारे में कुछ करने की तुम्हें जरूरत नहीं है.’’

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