Video: अनुज की एंट्री होते ही अनुपमा को याद आया पुराना अफसाना, यूं गाने लगीं रोमांटिक गाना

स्टार प्लस के सीरियल अनुपमा में अनुज कपाड़िया की एंट्री के बाद कहानी पूरी बदल चुकी है. जहां वनराज और काव्या पूरी कोशिश कर रहे हैं कि अनुज को अपने जाल में फंसा सके तो वहीं अनुज, अनुपमा के लिए अपने दिल में छिपा प्यार दबा नही पा रहा है. इसी बीच अनुपमा की एक वीडियो वायरल हो रही है, जिसमें वह रोमांटिक गाना गाते नजर आ रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं वायरल वीडियो….

यूं रोमेंटिक हुईं अनुपमा

 

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सोशलमीडिया पर एक्टिव रहने वाली सीरियल अनुपमा की लीड एक्ट्रेस रुपाली गांगुली ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह एक पुराना रोमांटिक गाना गाती नजर आ रही हैं. वहीं फैंस को ये गाना बेहद पसंद आ रहा है. साथ ही फैंस इस गाने को अनुज कपाड़िया के लिए अनुपमा के प्यार का इजहार बता रहे हैं और जमकर वीडियो पर कमेंट कर रहे हैं.

 

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सीरियल में की तारीफ

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज कपाड़िया, अनुपमा की तारीफ करते हुए कहेगा कि पुरुषों को क्यों लगता है कि महिलाओं को जिंदगी में कुछ करने के लिए, आगे बढ़ने के लिए पुरुषों की जरूरत पड़ेगी. वह आगे कहता है कि किसी औरत को आगे बढ़न के लिए मर्द का सहारा नहीं चाहिए होता है और अनुपमा ने ये पूरी तरह साबित किया है. इसी के साथ वह अनुपमा का सपना पूरा करता भी नजर आएगा, जिसे देखने के बाद सीरियल की टीआरपी बढ़ जाएगी.

वनराज को होगी जलन


अनुज कपाड़िया और अनुपमा की नजदीकियां देखकर अपकमिंग एपिसोड में वनराज को जलन होने वाली है, जिसके चलते वह कदम कदम पर अनुज को खरी खोटी सुनाता नजर आएगा. हालांकि वनराज की इस जलन को देखकर फैंस उसे उसका सबक मिलने की बात कह रहे हैं और जमकर कोस रहे हैं.

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धारा के विपरीत: भाग 3- निष्ठा के कौनसे निर्णय का हो रहा था विरोध

दोनों घरों में कुहराम मच गया. लेकिन दोनों के दुख अलगअलग थे. एक परिवार ने अपना जवान बेटा खोया था तो दूस के का मानसम्मान और प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. बेटी के भविष्य के बारे में सोचसोच कर निष्ठा के मांपापा घुले जा रहे थे. मृदुल के तीये की बैठक के बहाने वे उस के घर गए.

“अब क्या सांत्वना दें आप को. हम एक ही नाव के सवार हैं,” कहते हूए निष्ठा के पापा लगभग रो दिए. मां के शब्द तो पहले ही आंसुओं में बह गए थे.

“क्या करूं बहन जी, कोई दूसरा बेटा भी तो नहीं वरना निष्ठा बिटिया को बीच राह न छोड़ते,” मृदुल की मम्मी ने निष्ठा को कस कर अपने से सटा लिया.

“हम तो जीते जी मर गए. छठे महीने में बच्चा गिरवाएंगे तो बेटी से भी हाथ धो बैठेंगे,” कहती हुई निष्ठा की मां फिर से सुबकने लगी. तभी मृदुल की चचेरी भाभी वनिता सामने आई.

“बड़े पापा, यदि आप सब को ठीक लगे तो निष्ठा और मृदुल का यह बच्चा हम अपना लें. वैसे भी, हम लोग अपने बच्चे के लिए प्रयास करतेकरते थक चुके हैं और लौकडाउन खुलने के बाद कोई बच्चा गोद लेने का प्लान ही कर रहे थे.” वनिता ने अपने पति रमन की तरफ़ देखते हुए अपनी बात रखी. रमन ने भी सहमति में गरदन हिलाई तो निष्ठा की मां के चेहरे पर उम्मीद की हलकी सी रोशनी चिलकी. सब इस बदली हुई परिस्थिति पर विचार करने लगे.

अंत में तय हुआ कि निष्ठा कुछ समय अपने जौब से ब्रैक लेगी और वनिता तथा रमन के साथ बेंगलुरु जाएगी. वहीं वह अपनी संतान को जन्म देगी और एक महीने के बाद बच्चे को कानूनन वनिता को गोद दे दिया जाएगा. गोद लेने के लिए ‘सेमी ओपन अडौप्शन’ प्रक्रिया का चयन किया जाएगा जिस में बच्चे को सौंपने के बाद निष्ठा उस से नहीं मिलेगी.

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तय कार्यक्रम के अनुसार निष्ठा बेंगलुरु आ गई. उस ने मन ही मन ठान लिया था कि अब वह अपनी कोख में आकार ले रहे शिशु के प्रति किसी प्रकार की आत्मीयता नहीं रखेगी. वह अपने बढ़े हुए पेट को शरीर में पनप रही एक बड़ी गांठ के रूप में ही देखेगी जिस का कुछ समय बाद औपरेशन होना है और गांठ निकलने के बाद वह वापस अपनी सामान्य अवस्था में आ जाएगा.

वनिता और रमन निष्ठा का पूरा खयाल रख रहे थे. वे उसे खुश रखने का प्रयास करते लेकिन निष्ठा कैसे खुश हो? जबकि वह जानती थी कि इस बच्चे पर उस का अधिकार सिर्फ उसे जन्म देने तक ही है. निष्ठा इस सच को स्वीकार कर चुकी थी, शायद, इसलिए भी वह धीरेधीरे बच्चे के मोह से छूट रही थी.

डिलीवरी का समय पास आ रहा था. रमन ने एक अच्छे मैटर्निटी होम में प्रसव की व्यवस्था कर रखी थी. डाक्टर भी निष्ठा के शरीर में हो रहे परिवर्तनों पर निगाह रखे हुए थी. इन सब व्यवस्थाओं से विलग निष्ठा हर समय बालकनी में खुलने वाली खिड़की के पास बैठी बाहर शून्य में ताकती रहती.

एक दिन सुबह निष्ठा की आंख बिल्ली के शोर से खुली. उस ने उत्सुकता से बाहर देखा तो पाया कि बालकनी में एक बिल्ली अपने 3 नवजात बच्चे ले कर आई है. वे बच्चे इतने छोटे थे कि उन की आंखें तक नहीं खुली थीं. बिल्ली बारीबारी से तीनों बच्चों को चाट रही थी. वह कभी उन बच्चों को अपनी बांहों के घेरे में ले लेती तो कभी उन्हें अपनी छाती से सटा कर दूध पिलाने लगती. एक बार जब वह उन्हें अपने मुंह में दबा कर दूसरी जगह ले जाने की कोशिश कर रही थी, तो निष्ठा का दिल धक से रह गया.

‘अरे, संभाल के. कहीं चोट न लग जाए,’ सोचती हुई निष्ठा के हाथ यंत्रवत खिड़की से बाहर निकल आए. वह बिल्ली के नन्हे बच्चों को हाथ में थामने को लालायित हो उठी. फिर कुछ सोच कर खुद ही संभल गई.

उन बच्चों की धीमी सी म्याऊं इतनी प्यारी थी कि निष्ठा उस आवाज में कहीं खो सी गई. अचानक उसे लगा मानो उस के स्तनों में दूध उतर आया. इस के साथ ही उस के हाथ अपने पेट को सहलाने लगे और आंखों से पानी बहने लगा. उस की आंखें तो खिड़की से हट गईं लेकिन उस के कान वहां से नहीं हट सके. रहरह कर बालकनी से आती म्याऊं की सुरीली मोहक आवाजें उसे बेचैन किए जा रही थीं. निष्ठा ने अपने लिए रखा दूध एक कटोरे में उंडेल कर बालकनी में रख दिया.

उसी रात निष्ठा को प्रसव पीड़ा उठी. वनिता और रमन भी तो इसी घड़ी की प्रतीक्षा कर रहे थे. वे फ़ौरन निष्ठा को ले कर मैटर्निटी होम गए. 2 ही घंटे बाद एक नन्ही शिशु वनिता की गोद में थी. निष्ठा अभी दवाओं के असर से नीम बेहोशी में थी लेकिन उस के हाथ अपनी बगलों में इधरउधर घूमते हुए कुछ टटोल रहे थे. वनिता उस की पीड़ा समझ गई. उस ने निष्ठा के हाथों को नवजात से छुआया. निष्ठा उस कोमल स्पर्श को पाते ही स्थिर हो गई और उस छुअन को महसूस करने लगी.

शाम को जब निष्ठा को कुछ होश आया तो नर्स ने उसे बच्ची को अपना दूध पिलाने को कहा. थोड़ी कोशिश के बाद बच्ची ने अपनी मां का दूध खींचना शुरू किया. निष्ठा एक अलौकिक सुख में डूब गई. एक ऐसा अनुभव जिसे वह शब्द नहीं दे सकती थी. निष्ठा के हाथ बेटी का सिर सहलाने लगे. दूध पीते समय बच्ची के मुंह से आ रही चुसड़चुसड़ की आवाजें कमरे में बांसुरी सी बजा रही थीं. वनिता मन ही मन इस सुख की कल्पना में डूब-उतर रही थी.

4 दिनों बाद निष्ठा घर आ गई. कमरे में आते ही उस ने सब से पहले बिल्ली के कटोरे में दूध डाला. अब तक निष्ठा की मां भी अपनी बेटी की देखभाल करने के लिए बेंगलुरु आ गई थी. पूरा घर एक छोटे से शिशु के इर्दगिर्द सिमट गया. देखते ही देखते महीना होने को आया. निष्ठा के बच्ची से अलग होने का समय नजदीक आ गया. रमन गोद लेने की प्रक्रिया पूरे जोशोखरोश से निबटा रहा था. एक शाम वह औफिस से घर लौटा तो बहुत खुश मूड में था.

“मैं ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं. अब एकदो दिन में हमारे घर का सर्वे किया जाएगा. संतुष्टिजनक रिपोर्ट के बाद कुछ ही दिनों में यह प्यारी सी गुड़िया कानूनन वनिता की हो जाएगी.” रमन ने बच्ची को गोद में उठा कर उस का मुंह चूम लिया. सुनते ही वनिता भी खिल गई. बच्ची की नानी मुसकरा दी. किसी ने भी निष्ठा की प्रतिक्रिया की तरफ ध्यान नहीं दिया. अचानक निष्ठा उठी और उस ने रमन के हाथों से बच्ची को छीन लिया.

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“मैं अपनी बच्ची किसी को नहीं दूंगी,” निष्ठा ने कहा. उस की बात सुनते ही सब सकते में आ गए.

“क्या बकवास कर रही हो. यह सब तो पहले से ही तय था. इसी शर्त पर तो तुम्हें यहां भेजा गया था,” मां ने निष्ठा को झिंझोड़ा.

“आंटी सही कह रही हैं. यह सब तुम्हारी सहमति से ही तो हुआ है,” वनिता ने उसे याद दिलाया.

“हां, लेकिन अब मैं अपनी बच्ची को खुद पालना चाहती हूं,” निष्ठा ने बच्ची को कंधे से लगाते हुए कहा.

“पागल हो गई हो क्या? क्या तुम जानती नहीं कि तुम्हारा यह फैसला समाज के नियमों के खिलाफ है. आत्मघाती है,” मां ने उसे चेताया लेकिन निष्ठा तो कुछ भी सुनने को तैयार न थी. उस ने अपना फैसला बदलने से इनकार कर दिया. वह सब को असमंजस में छोड़ कर अपने कमरे में जा कर अपना और बेटी का सामान पैक करने लगी.

तभी बालकनी से वही मधुर म्याऊं सुनाई दी. निष्ठा ने देखा, बिल्ली के तीनों बच्चे कटोरे में रखा दूध पी रहे हैं. बिल्ली बारीबारी से तीनों को चाट रही है. निष्ठा ने भी बच्ची का माथा चूम लिया.

वह जानती थी कि उस के निर्णय का पुरजोर विरोध होगा लेकिन वह अपनी नाव को धारा के विपरीत बहाने के निर्णय पर अटल थी.

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REVIEW: महिला किरदारों की उपेक्षा है ‘पॉटलक’

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः कुणालदास गुपत,  पवनीत गखल, गौरव लुल्ला और विवेक गुप्ता

निर्देशकः राजश्री ओझा

कलाकारः किट्टू गिडवाणी,  जतिन सियाल, ईरा दुबे, सायरस सहुकार, हरमन सिंघा सलोनी खन्ना, सिद्धांत कार्णिक, शिखा तलसानिया, औरव राणा, आरवी राणा, आराध्य अजाना व अन्य.

अवधिः बीस से पच्चीस मिनट के आठ एपीसोड, लगभग तीन घंटे आठ मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः सोनी लिव

किसी भी इंसान के हाथ की पांचों उंगलियां एक समान नही होती. मगर यह पांचो उंगलियां एक साथ आकर मुक्का अथवा चांटे के रूप में बहुत बड़ी ताकत होती हैं. इसी तरह हर परिवार में उसके सभी सदस्यों का कद, व्यवहार, सोच, समझ,  इच्छाएं अलग अलग होती हैं. इसी के चलते अक्सर परिवार का हर सदस्य एक दूसरे से प्यार करते हुए भी विखरा और अलग थलग नजर आता है. ऐसे ही विखरे परिवार के सदस्यों को एकजुट करने के लिए निर्देशक राजश्री ओझा और लेखकद्वय अश्विन लक्ष्मीनारायण व गौरव लुल्ला वेब सीरीज ‘‘पॉटलक’’लेकर आए है. दस सितंबर से ओटीटी प्लेटफार्म ‘‘सोनी लिव’’ पर स्ट्रीम हो रही वेब सीरीज ‘पॉटलक’ में हास्य के साथ परिवार के सदस्यों के बीच की नोकझोक,  प्यार, समस्याओं, उलझनों व रिश्तों के नवीनीकरण का हास्यप्रदा चित्रण है.

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कहानीः

पॉटलक अंग्रेजी का शब्द है,  जिसका मतलब है कुछ परिवारों द्वारा अपनी -अपनी रसोई में खाना पकाना और फिर सभी का एक जगह पर इकट्ठा होकर मिल-जुल कर भोजन का आनंद उठाना. इतना ही नही अंग्रेजी में कहावत है -‘‘द फैमिल हू इ्ट्स टुगेदर, स्टे टुगेदर. ’’अर्थात जो परिवार साथ में बैठ कर भोजन करता है, वह(सदैव) इकट्ठा रहता है. लेकिन यह कहानी उस शास्त्री परिवार की है, जो इकट्ठा नही रहता. अवकाश प्राप्त गोविंद शास्त्री (जतिन सयाल) अपनी पत्नी प्रमिला (किटू गिडवानी) के साथ एक बड़े से घर में रहते हैं. उनके  दो बेटों की शादी हो चुकी है. बड़े बेटा विक्रांत (साइरस साहुकार) अपनी पत्नी आकांक्षा (इरा दुबे) व तीन बच्चों  नक्श, साइशा व जिया के अलग घर में रहता है. गोविंद शास्त्री का छोटा बेटा ध्रुव (हरमन सिंघा) अपनी पत्नी  निधि (सलोनी खन्ना पटेल) के साथ अलग रहता है. निधि को भोजन पकाना नही आता. उसे बच्चे पसंद नहीं और वह नौकरीपेशा है. ध्रुव की नौकरी अमेरिका में लग गई है. ध्रुव व निधि अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे हैं. गोविंद शास्त्री की बेटी प्रेरणा (शिखा तलसानिया)कोलकाता में नौकरी करती थी, मगर अब घर आ गई है.  वह लगातार लड़कों को डेट करती रहती है. कोई पसंद नहीं आता.  माता-पिता चाहते हैं कि वह सैटल हो जाए. मगर अवकाश प्राप्त करने के बाद गोविंद शास्त्री को अहसास होता है कि जब उनके बच्चे स्कूल में पढ़ते थे,  तब बच्चों के लिए उनके पास वक्त नहीं था. अब जब उनके पास वक्त है, तो उनके लिए उनके बच्चों के पास वक्त नही है कि सभी एक छत के नीचे कुछ समय एक साथ बिता सके. तभी अचानक एक दिन गोविंद शास्त्री हार्टअटैक की बीमारी की बात बताते हैं,  जिसके चलते ध्रुव अपना अमेरिका जाने का इरादा बदल देता है. उसके बाद हर सप्ताहांत पर किसी न किसी के घर पर गोविंद की राय के अनुसार पॉटलक के लिए सभी इकट्ठा होते हैं. उनके बीच पारिवारिक संबंध प्रगाढ़ होते हैं. परिणामतः छोटा भाई अपने बड़े भाई की मदद भी करता है. मगर अंततः यह धागा टूटता है और फिर. . . .

लेखन व निर्देशनः

लेखकद्वय ने सास ससुर के व्यवहार से बहू को होने वाली दिक्कतें,  बेटी की शादी की चिंता, माता-पिता की कुछ आदतों से बच्चों का खीझना, भाई-बहन की नोकझोंक सहित कई मुद्दें बिना उपदेशात्मक भाषण के रचे गए है. किरदारों की बातें पल-पल गुदगुदाती हैं. मगर यह परिवार व इसके किरदार साधारण मध्यम वर्गीय परिवार की बजाय उच्च वर्गीय परिवार यानी कि अभिजात वर्ग के हैं. जहां नया घर करोड़ में खरीदा जा सकता है. दस साल पहले निर्देशक राजश्री ओझा ने उच्च वर्ग की कहानी को फिल्म ‘‘आएशा’में पेश किया था. फिर वह अमरीका चली गयी थी. अमरीका से वापस आने पर उन्हें अभिजात वर्ग की कहानी पेश करना सहज लगा. लेकिन शुरूआती चार एपीसोड काफी ढीले ढाले हैं. इन्हें कसे जाने की जरुरत थीं. सातवां व आठवां एपीसोड जबरदस्त है, और दर्शकों को जकड़कर रख देता है. लेखक व निर्देशक ने इसमें बेवजह हिंदू मुस्लिम व उर्दू भाषा का एंगल जोड़ा है. प्रेरणा शास्त्री का किरदार अधपका सा लगता है. लेखक व निर्देशक ने महिला किरदारों की पूरी तरह से अनदेखी की है.

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अभिनयः

गोंविंद शास्त्री के किरदार में जतिन सियाल और प्रमिला शास्त्री के किरदार में किट्टू गिडवाणी अपने अभिनय का जलवा दिखाने में सफल रही हैं. आकांक्षा शास्त्री के किरदार में ईरा दुबे अपने अभिनय की छाप छोड़ती हैं. शिखा तलसानिया को अभी अपने अभिनय में निखार लाने की आवश्यकता है. आलिम के किरदार में सिद्धांत कार्णिक का अभिनय काफी सहज है. अन्य कलाकार ठीक ठाक हैं.

Funny video: सम्राट ने सई को पढ़ाई प्यार की पट्टी तो विराट को ऐसे कहा I Love You

सीरियल गुम है किसी के प्‍यार में की कहानी नया मोड़ लेती नजर आ रही है. जहां पाखी, सम्राट का सहारा लेकर विराट को अपने करीब करना चाहती है तो वहीं सई को अपने प्यार का एहसास धीरे-धीरे हो रहा है, जिसके चलते हाल ही में सम्राट उसकी मदद करता हुआ दिख रहा है. आइए आपको दिखाते हैं सई और सम्राट की फनी वीडियो की झलक…

सई ने किया प्यार का इजहार

 

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अब तक आपने देखा कि सई एक बार फिर मुश्‍किल में फंस गई है. जहां उसके कारण विराट का ट्रांसफर रुक गया है तो वहीं जन्माष्टमी के जश्न के बीच सई को अपने प्यार का एहसास होने लगा है. इसी बीच सोशलमीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है, जिसमें सम्राट (vikram singh), सई (ayesha singh) को विराट (neil bhatt) के लिए अपने प्यार का इजहार करने का तरीका बता रहा है. लेकिन विराट इस बात को सुन नही पाता. हालांकि ये स्टार्स की #reels है, जिसे फैंस सीरियल का आने वाला ट्विस्ट मान रहे हैं.

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 सीरियल में आएगा नया ट्विस्ट

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि चौह्वाण परिवार को सई के विराट का तबादला रुकवाने की बात पता लग जाएगी, जिसके कारण विराट काफी नाराज होगा. इसी बीच पाखी एक बार फिर विराट को भड़काने की कोशिश करते हुए कहेगी कि सई हर वक्त बस अपनी मन मर्जी करते है. किसी से नही पूछती. वहीं सई इस बात को सुन लेगी और पाखी को खरीखोटी सुनाएगी और सम्राट और अपने रिश्ते पर ध्यान देने के लिए कहेगी, जिसे सम्राट सुन लेगा. हालांकि सम्राट, विराट के ट्रांसफर रुकवाने की बात पर उसका साथ देगा.

 

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बता दें, हाल ही में विराट और पाखी यानी नील भट्ट और उनकी मंगेतर ऐश्वर्या शर्मा लौंग ड्राइव पर गए थे. जहां वह बचपन का प्यार गाने पर डांस करते नजर आए थे.

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Lakme SPF 50 बनाए स्किन को ऐसी स्मूद कि ठहर जाए खूबसूरती पर नजर 

 

ब्यूटी विद ब्रेन खूब सुना होगा.  अब खूबसूरती का नया स्लोगन है ‘ग्लोइंग और हैल्दी ब्यूटी’ यानि त्वचा की खूबसूरती के साथसाथ उसका नैचुरल टैक्सचर भी बना रहे. वुमन्स की इसी जरूरत को समझा है Lakme SPF 50 ने.  यह प्रोडक्ट आपके स्किन की नैचुरल ब्यूटी को बनाए रखने के साथ ही उसे सूरज की यूवीए और यूवीबी किरणों से प्रोटेक्ट भी करता है और भी ढेरों गुण है लैक्मे के इस प्रोडक्ट में, यहां जानें.



उम्र का बढ़ना थाम लें 

महिलाएं हमेशा यंग दिखना चाहती है. वह अपनी त्वचा पर फाइन लाइन्स को देखना नहीं चाहती है. अकसर सूरज की तेज रौशनी पड़ने से त्वचा पर झुर्रियां बनने लगती है. Lakme SPF 50 की मदद से स्किन पर बढ़ती उम्र के असर को कम किया जा सकता है. इसके अलावा यह हाइपरपिग्मेंटेशन को कम करने का काम भी करता है. 

चेहरे को बनाएं सौफ्ट 

अकसर ब्यूटी प्रोडक्ट्स की वजह से त्वचा रुखे और बेजान हो जाते हैं.  लेकिन इस सनस्क्रीन प्रोडक्ट का रेगुलर इस्तेमाल करने से आपके चेहरे का नैचुरल टैक्सचर बर्बाद नहीं होता है.  यह स्किन की सौफ्टनेस को बनाए रखने का काम करता है. इसमें मौजूद मौइश्चराजिंग तत्व की वजह से चेहरे की नमी बरकरार रहती है.  यह स्किन को हाइड्रेटेड रखता है. कई दूसरे एसपीएफ प्रोडक्ट्स स्किन को रुखा बनाते हैं और इससे चेहरे में इरिटेशन और जलन होती है.

An Indian woman stands in the middle of the street outside. She is beautifully dressed.


स्मूद फिनिशिंग के लिए सबसे बढ़िया

 लैक्मे एसपीएफ 50 की एक खास बात यह भी है कि इसे लगाने के बाद यह चेहरे पर आसानी से मिक्स हो जाता है.  चेहरे को देखने से ऐसा नहीं लगता है कि कहीं इसकी मात्रा अधिक हो गई है और कहीं कम. इसकी वजह से त्वचा चिकनी और साफ नजर दिखती है.

  फैस्टिवल टाईम का बैस्ट फ्रैंड 

एक के बाद एक फैस्टिवल्स दस्तक देने वाले हैं.  ऐसे में महिलाएं हर खास मोमेंट के लिए अलग ड्रैस चूज करती है और उसी के अनुसार  मेकअप करना चाहती है.   Lakme SPF 50 की एक खास बात यह है कि यह एक परफैक्ट मेकअप बेस के रूप में काम करता है. इसकी वजह से मेकअप देर तक चेहरे पर बना रहता है और फिक्स रहता है.  जब बात मेकअप की हो रही है, तो यह जानना भी जरूरी है कि यह प्रोडक्ट ऑयल-फ्री फार्मूला  को फौलो करता है यानि आपके चेहरे पर बनने वाले औइल को कंट्रोल में रखता है.  पसीने को मेकअप का दुश्मन नहीं बनने देता है .

सभी तरह के स्किन के लिए परफैक्ट

हर महिला का स्किन डिफरैंट होता है.  किसी का बहुत ही सेंसेटिव होता है तो किसी का नौर्मल होता है.    किसी की स्किन ड्राई होती है तो किसी की औइली होती है. लैक्मे एसपीएफ 50 एक ऐसा सनस्क्रीन है जो हर महिला की स्किन को सूट करता है. यह  कहना गलत नहीं होगा कि प्रोडक्ट, स्किन की देखभाल का बैलेंस फौर्मूला है.

अनुज कपाड़िया के कारण वनराज-काव्या के रिश्ते में आएगी दरार, Anupama में आएंगे नए ट्विस्ट

सीरियल अनुपमा में आए दिन नए ट्विस्ट आ रहे हैं, जिसके चलते शो की टीआरपी पहले नंबर पर बनी हुई है. इस बीच सीरियल की कास्ट भी कड़ी मेहनत करती नजर आ रही है, जिसके चलते सीरियल की कहानी यानी अनुपमा की जिंदगी में जहां नए मोड़ आएंगे तो वहीं वनराज-काव्या के रिश्ते में दरार आती हुई देखने को मिलेगी.

अनुपमा और अनुज ने शेयर की यादें

 

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अब तक आपने देखा कि अनुज कपाड़िया संग अनुपमा को देखकर वनराज जलन महसूस कर रहा है, जिसे देखकर काव्या परेशान हैं. दरअसल, अनुपमा अपना आइडिया शेयर करती है जो कि काका जी और वनराज को काफी पसंद आता है. वहीं दोनों अकेले अपने कौलेज के दिनों की बात करते हैं,जिसके चलते वनराज काफी गुस्से में नजर आता है.

वनराज की हरकतों से परेशान अनुपमा

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुपमा और अनुज को एक साथ देख वनराज गुस्से में नजर आ रहा है, जिसके चलते वह अनुपमा पर तंज कस रहा है. हालांकि अनुपमा उसे करारा जवाब दे रही है.  इसी बीच अनुज से मिलकर अनुपमा के चेहरे पर आई खुशी देखकर काव्या उसे खूब खरी खोटी सुनाती है. साथ ही उसके दिए आइडिये को पूरे परिवार के सामने वनराज-काव्या बेकार बताते हैं.

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वनराज को आएगी अनुपमा की याद

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुपमा अनुज संग डिनर पर जाएगी. जहां वह उसे खाना परोसेगी. इस दौरान राखी दवे, वनराज के कान भरेगी कि वो भी ये चीज़ें पहले कर चुका है, लेकिन अनुपमा काफी लंबा हाथ मारा है. राखी दवे कहती है कि ये दोनों बस दोस्त हैं, या उससे बढ़कर भी कुछ हैं. वहीं इन सब बातों से वनराज को अपने पुराने दिन याद आ जाएंगे.

कहानी में आएंगे नए ट्विस्ट

 

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जल्द ही अनुज कपाड़िया के साथ अनुपमा को देख वनराज उससे नफरत करने लगेगा, जिसके कारण दोनों के बीच नई दुश्मनी का आगाज होगा. वहीं इस दुश्मनी में अनुज, अनुपमा का सपना भी पूरा करता नजर आएगा, जिसे देखकर काव्या जलेगी और वनराज संग उसके रिश्ते में दरार आनी शुरु हो जाएगी.

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फैमिली और मेहमानों के लिए बनाएं मशरूम पुलाव

मेहमानों को खुश करने के लिए आप कई तरह की पकवान बनाने में लगी रहती हैं और खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं. ऐसे मौके पर आप किसी ग्रेवी वाली सब्जी के साथ मशरूम पुलाव बनाएं. यह झटपट बन भी जाएगा और आपके मेहमान भी खुश हो जाएंगे. तो चलिए हम आपको मशरूम पुलाव बनाने की रेसिपी बताते हैं.

सामग्री

1 कप बासमती चावल पानी में भिगोए हुए

100 ग्राम मशरूम कटे हुए

1 बड़ा प्याज कटा हुआ

2-3 हरीमिर्चें कटी हुई

2 छोटे चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट

1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी हुई

3 बड़े चम्मच दही

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1 बड़ा चम्मच तेल

1 टुकड़ा दालचीनी

1 तेजपत्ता

5 लौंग

4 हरी इलायची

नमक स्वादानुसार

पानी जरूरतानुसार

विधि

एक बरतन में तेल गरम कर के तेजपत्ता, लौंग, इलायची व दालचीनी भूनें. अब प्याज डाल

कर सुनहरा होने तक भूनें. फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरीमिर्च डाल कर सौते करें.

अब मशरूम, धनियापत्ती, दही डाल कर कुछ देर भूनें. फिर चावल, नमक व पानी डाल कर ढक कर पकाएं और तैयार हो जाने पर मनपसंद सलाद के साथ परोसें.

व्यंजन सहयोग: शैफ एम. रहमान

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वापस: क्यों प्रभाकर के बच्चे की मां बनना चाहती थी प्रभा

लेखक- विनय कुमार पाठक

“मिस्टर प्रभाकर की स्थिति बहुत नाजुक है. हम ने बहुत कोशिश की उन्हें ठीक करने की. पर किसी प्रकार के अंधेरे में आप को रखना उचित नहीं होगा. अब वे शायद 1-2 दिनों से ज्यादा जिंदा न रह सकें,” डाक्टर ने प्रभा से कहा.

प्रभा सन्न रह गई. प्रभा और प्रभाकर की जोड़ी क्या सिर्फ 1 वर्ष के लिए थी? बीते लमहे उस के मस्तिष्क में कौंधने लगे. पर अभी उन लमहों को याद करने का समय नहीं था. प्रभाकर को बचाने में डाक्टर अपनी असमर्थता जता चुके थे. पर प्रभा अपने पति प्रभाकर को किसी भी हाल में वापस पाना चाहती थी,“मैं प्रभाकर के बच्चे की मां बनना चाहती हूं, डाक्टर. क्या आप मेरी मदद करेंगे?” प्रभा ने अनुरोध भरे स्वर में कहा.

“देखिए, मैं आप की भावना को समझ सकता हूं. पर यह संभव नहीं है,” डाक्टर ने असमर्थता जताई.

“क्यों संभव नहीं है? वह मेरा पति है. मैं उस के बच्चे की मां बनना चाहती हूं. अब क्या मैं आप को बताऊं कि आज के उन्नत तकनीक के जमाने में यह संभव है कि आप प्रभाकर के स्पर्म को इकट्ठा कर सुरक्षित रख दें. बाद में ऐसिस्टैड रीप्रोडक्टिव तकनीक से मैं मां बन जाऊंगी,” प्रभा ने मायूस होते हुए कहा.

“यह मुझे पता है प्रभाजी. पर प्रभाकर अभी अचेत हैं. बगैर उन की मरजी के उन का स्पर्म हम नहीं ले सकते. यह कानूनी मामला है,” डाक्टर ने असमर्थता जताई.

“कोई तो उपाय होगा डाक्टर?” प्रभा तड़प कर बोली.

“एक ही उपाय है, कोर्ट और्डर,” डाक्टर ने कहा,”पर इस के लिए समय चाहिए और शायद प्रभाकर 1-2 दिनों से अधिक जीवित नहीं रह सकें.

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“मैं कोर्ट और्डर ले कर आऊंगी,”कहते हुए प्रभा उठ खड़ी हुई. उस ने आईसीयू में जा कर एक बार प्रभाकर को देखा. वह अचेत पड़ा था. तरहतरह के उपकरण उस के शरीर में लगे हुए थे.

“तुम मेरे पास वापस आओगे प्रभाकर,” उस ने प्रभाकर के सिर को सहलाते हुए कहा,“पति के रूप में नहीं तो संतान के रूप में,” और आंसू पोंछती वह बाहर निकल गई.

उस ने अपना मोबाइल निकाला. नेहा उस की परिचित थी और ऐडवोकेट थी. उस ने उसे कौल किया तो उधर से आवाज आई,“हैलो प्रभा, कैसी हो?” वह जानती थी कि प्रभा अभी किस मानसिक संताप से गुजर रही है.

“कैसी हो सकती हूं, नेहा. एक अर्जेंट काम है तुम से,” प्रभा ने उदास स्वर में कहा.

“बोलो न,” नेहा ने आत्मीयता से कहा.

“आज ही कोर्ट और्डर ले लो, प्रभाकर के स्पर्म को कलैक्ट कर प्रिजर्व करने का. मैं प्रभाकर के बच्चे का मां बनना चाहती हूं,” प्रभा ने कहा.

“आज ही? मगर यह मुश्किल है. कोर्ट के मामले तो तुम जानती ही हो,” नेहा ने असमर्थता जताते हुए कहा.

“जानती हूं. पर तुम जान लो कि डाक्टर ने कहा है कि प्रभाकर 1-2 दिनों से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता और उस के जाने के पहले मैं उस का स्पर्म प्रिजर्व करवाना चाहती हूं ताकि मैं ऐसिस्टैड रीप्रोडक्टिव तकनीक से प्रभाकर के बच्चे की मां बन सकूं. कोर्ट में कैसे और क्या करना है यह तुम मुझ से बेहतर जान सकती हो. प्लीज नेहा, पूरा जोर लगा दो. जरूर कोई रास्ता होगा,” प्रभा ने कहा.

“ठीक है. मैं सारे काम छोड़ इस काम में लगती हूं. मैं राजेंद्र अंकल को तुम्हारे दस्तखत लेने भेजूंगी. तुरंत दस्तखत कर पेपर भेज देना,” नेहा प्रभा के पड़ोस में ही रहती थी और उस के ससुर राजेंद्रजी से परिचित थी.

“ठीक है,” प्रभा ने फोन बंद कर दिया.

सबकुछ समाप्त हो चुका था. प्रभा हौस्पिटल के वेटिंग लाउंज में बैठ गई. चारों ओर मरीजों के परिचित व रिश्तेदार बैठे थे. कुछ के मरीज सामान्य रूप से बीमार थे तो कुछ के गंभीर. कोविड के दूसरे लहर की अफरातफरी समाप्त हो चुकी थी. हौस्पिटल के कर्मचारी अपने काम में व्यस्त थे. कोई कैश काउंटर में काम कर रहा था तो कोई कैशलैस काउंटर पर. इतने लोगों के होते हुए भी चारों ओर अजीब किस्म का सन्नाटा था. ऐसा प्रतीत होता था मानों जीवन पर आशंका का ग्रहण लगा हुआ है.

प्रभा ने पर्स से पानी की बोतल निकाल एक घूंट लिया और आंखें बंद कर बैठ गई. प्रभाकर के साथ बिताए 1-1 पल उस की आंखों के सामने आते चले गए…

पतिपत्नी के रूप में वे 1-2 माह ही सही तरीके से रह पाए थे. शादी के 1-2 सप्ताह के बाद से ही कोरोना कहर बरपाने लगा था. शादी के 1 माह बाद पिछले वर्ष वह कुछ काम से बैंगलुरू गया था. उस समय समाचारपत्रों में काफी सुर्खियां थीं उस अपार्टमैंट की जिस में वह ठहरा हुआ था. देश में कोरोना के कुछ मामले आने लगे थे. कोई कोविड पैशंट मिला था उस सोसाइटी में. सोसाइटी को सील कर दिया गया था. किसी प्रकार वह वापस आ पाया था.

कोरोना से वह बैंगलुरू में ही संक्रमित हो गया था या फिर रास्ते में या फिर दिल्ली वापस आने के बाद, कहा नहीं जा सकता था पर बुरी तरह संक्रमित हो गया था. गले में खराश और बुखार से काफी परेशान था वह. उस ने खुद को एक कमरे में आइसोलेट कर रखा था. प्रभा चाहती तो थी उस के पास जाने को पर प्रभाकर ने सख्त हिदायत दे रखी थी,“अभी तुम ठीक हो तो मेरी देखभाल कर रही हो, मुझे खानापानी दे रही हो। तुम भी संक्रमित हो जाओगी तो फिर कौन तुम्हारी देखभाल करेगा? लौकडाउन के कारण कोई दोस्तरिश्तेदार भी नहीं आ पाएगा. हौस्पिटल भरे हुए हैं और फिर इस का कोई इलाज भी नहीं है.”

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दोनों एक ही औफिस में काम करते थे और इस दौरान उन की मुलाकात हुई थी. दोनों के नाम मिलतेजुलते थे इसलिए कई बार गलतफहमी भी होती थी. एक बार प्रभाकर की चिट्ठी उस के पास आ गई थी. वह चिट्ठी प्रभाकर को देने गई थी. उस चिट्ठी ने दोनों के बीच सेतु का काम किया था. दोनों के नाम मिलतेजुलते ही नहीं थे, सोचविचार में भी तालमेल था. पहले दोनों अच्छे दोस्त बने, फिर प्रेमी और फिर दंपती. मगर जिंदगी को शायद कुछ और ही गंवारा था. संयोग से वह कोरोनाग्रस्त होने से बच गई और प्रभाकर भी धीरेधीरे ठीक हो गया. कोविड से ठीक होने के बाद लगा था कि जिंदगी पटरी पर वापस आ रही है. पर कोविड के पोस्ट कंप्लीकैशंस के कारण प्रभाकर की स्थिति बिगड़ने लगी. निमोनिया और मल्टी और्गन फेलियर के कारण प्रभाकर का बचना मुश्किल हो गया.

एकाएक प्रभा की तंद्रा भंग हुई. उस का मोबाइल बज रहा था. उस ने स्क्रीन पर देखा ‘न्यू पापा कौलिंग’ मैसेज स्क्रीन पर फ्लैश हो रहा था. उस ने प्रभाकर के पिताजी का नंबर न्यू पापा के नाम से सेव कर रखा था. प्रभाकर के पापा राजेंद्रजी काफी सहयोगात्मक व्यवहार वाले थे. पहले उस ने उन का नाम ‘फादर इन ला’ के नाम से सेव कर रखा था. पर उन के स्नेह को देखते हुए उस ने उन्हें ‘न्यू पापा’ का पद दे दिया था.

“हैलो पापा,” उस ने कौल रिसीव कर क्षीण स्वर में कहा.

“कहां हो बेटा? ऐडवोकेट नेहा ने एक डौक्यूमैंट भेजा है तुम्हारे दस्तखत के लिए,” राजेंद्रजी ने कहा.

“पापा मैं मैन ऐंट्री पर वेटिंग लाउंज में कोने…” बोलतेबोलते रुक गई प्रभा. उस ने देखा प्रभाकर के पिताजी उस के सामने आ गए थे।

“इस पेपर पर दस्तखत कर दो. नेहा ने मांगा है,” राजेंद्रजी ने उसे पेपर देते हुए कहा. उन के चेहरे पर उदासी पसरी हुई थी. उन्होंने डौक्यूमैंट पढ़ लिया था और प्रभा की स्थिति को समझ सकते थे.

प्रभा ने दस्तखत कर पेपर उन्हें वापस कर दिया,”पापा, चाय पीना चाहेंगे?” उस ने पूछा. वह जानती थी कि घर में किसी को खानेपीने की कोई रूचि फिलहाल नहीं है.

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“इच्छा तो नहीं हो रही. जीवन ने तो जहर पिला रखा है. नेहा ने तुरंत पेपर मांगा है. चलता हूं,” और वे चलते बने.

शाम तक नेहा कोर्ट और्डर ले कर आ गई. कोर्ट ने विशेष परिस्थिति को देखते हुए मामले पर विचार किया और अंतरिम राहत दे दी. कोर्ट ने स्पष्ट आदेश हौस्पिटल के डाइरैक्टर को दिया था. प्रभा कोर्ट और्डर ले कर सीधे डाइरैक्टर के पास गई. डाइरैक्टर को उस ने कोर्ट और्डर दिखाया. उस में साफसाफ यह उल्लेख था कि चूंकि मरीज अचेत है और उस की सहमति पाना असंभव है, विशेष परिस्थिति को देखते हुए न्यायालय अस्पताल प्रशासन को आदेश देता है कि आईवीएफ/एआरटी प्रोसीजर से मरीज के स्पर्म को सुरक्षित रखे.

हौस्पिटल ने सही प्रोसीजर अपना कर स्पर्म सुरक्षित रख लिया. प्रभा के मन में संतोष हो गया. प्रभाकर को बचाना तो संभव नहीं है पर वह उस के बच्चे की मां जरूर बनेगी और वह उस के पास दूसरे रूप में वापस आएगा.

एसीडिटी से छुटकारा देंगे ये 15 घरेलू नुस्खे

क्या आप जानते हैं कि आपके पेट में मौजूद हाइड्रोक्लोरिक नाम का एसिड पाचन तंत्र के पूरे कामों के लिए जिम्मेदार है. जब आप कोई जटिल चीज खाते हैं तो, उसको पचाने के लिए पेट मे एसिड का एक सामान्य स्तर में होना बहुत जरूरी है. जब शरीर में इस एसिड की मात्रा कम हो जाती है तो पाचन सही से नहीं हो पाता है. इसके अलावा पेट में एसिड के ज्यादा हो जाने पर भी पाचन क्रिया में असुविधा होने लगती है, इसे ही एसीडिटी कहते हैं.

एसीडिटी होने के कारण

1. तला हुआ और बहुत अधिक ठोस चीजों के खाने से एसीडिटी होती है और यही एसीडिटी का मुख्य कारण है.

2. अगर आपको किसी बात का तनाव है तो भी यह भी एसीडिटी होने को एक कारण बन सकता है.

3. सिगरेट और शराब की की अधिक आदत से भी एसीडिटी उत्पन्न होती है. इनके अलावा बहुत अधिक तीखा खाना खाने से भी एसीडिटी बढती है.

4. चाय,काफ़ी और अधिक बीडी उपयोग करने से एसिडिटी की समस्या पैदा होती है.

5. अचार,सिरका,तला हुआ भोजन,मिर्च-मसालेदार आदि चीजें खाने से  एसिडिटी हो जाती है.

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एसिडिटी के घरेलू उपचार

1. खाना खाने के तुरंत बाद किसी भी तरह के पेय चीजों का सेवन ना करें.

2. भोजन करने के पश्चात थोडा सा गुड लेकर चूसते रहें.
3. विटामिन युक्त सब्जियों का ही अधिक सेवन करें.
4. सुबह उठकर व्यायाम करें और दिनभर शारीरिक गतिविधियाँ करते रहें.

5. सुबह उठकर २-३ गिलास पानी पीयें.

6. बादाम खाने से एसीडिटी के कारण होने वाली आपके सीने की जलन कम होती है.

7. सुबह-शाम रोज २-३ किलोमीटर घूमने जाने की आदत डालें.

8. नियमित रूप से पुदीने का रस पीना, आपकी सेहत के लिए बहुत लाभकारी होगा.

9. पानी और नींबू मिलाकर पीने से एसीडिटी की जलन से तुरंत राहत मिलती है.

10. इनके अलावा जब भी एकीचिटी की शिकायत होती है, तब नारियल पानी का सेवन अधिक से अधिक करना शुरु करना चाहिए.

11. आंवला एक ऐसा फ़ल जिससे शरीर के कई रोग ठीक हो होते हैं. एसिडीटी के लिए भी आंवले का उपयोग करना लाभदायी होगा.

12. खीरा, ककड़ी और तरबूज खाएं.

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13. तुलसी के दो चार पत्ते दिन में कई बार चबाकर खाने से भी लाभ होता है. खाना खाने के बाद 2 ग्राम लौंग और 3 ग्राम ईलायची का पाउडर, चुटकी भर मुंह में रखकर चूसें.

14. एक गिलास पानी में २ चम्मच सौंफ़ डालकर उबाल कर इसे रात भर के लिए रख दें. सुबह इसे छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीये.

15. फ़लों का सेवन एसीडिटी में बहुत फ़ायदेमंद होता हैं.

शादी के बाद बदला यामी गौतम का लुक, रॉयल से लेकर वेस्टर्न लुक के साथ कैरी की वेडिंग ज्वैलरी

बॉलीवुड एक्ट्रेस यामी गौतम अपनी अचानक शादी के बाद से काफी सुर्खियों में रहती हैं. वहीं इन दिनों सैफ अली खान, अर्जुन कपूर और जैकलीन फर्नांडीस के साथ उनकी फिल्म ‘भूत पुलिस’ आने वाली है, जिसके कारण वह आए दिन नए-नए लुक में नजर आ रही हैं. वहीं इन लुक्स में खास बात है उनकी वेडिंग ज्वैलरी, जिसे वह हर लुक के साथ कैरी करती हैं. आइए आपको दिखाते हैं यामी गौतम के शादी के बाद बदले लुक की झलक…

रौयल लुक में जीत रही हैं फैंस का दिल

 

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सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली यामी गौतम हाल ही में अपनी फिल्म का प्रमोशन करती नजर आईं. इस दौरान उनका रॉयल लुक फैंस को काफी पसंद भी आ रहा है. ऑफ व्हाइट कलर की स्कर्ट के साथ गोल्डन रंग के ब्लेजर के साथ यामी गौतम ने गले में नेकलेस पहना और हाथों में गोल्डन कंगन पहना है. वहीं इसके साथ उन्होंने अपनी वेडिंग ज्वैलरी वाले लौंग चेन वाले इयरिंग्स कैरी किए हुए हैं, जो बेहद खूबसरत लग रहे हैं.

 

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वेस्टर्न लुक के साथ भी कैरी की ज्वैलरी

 

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रौयल लुक के अलावा यामी गौतम वेस्टर्न लुक में भी नजर आईं, जिसके साथ भी उन्होंने अपने चेन इयरिंग्स कैरी किए, जिसे फैंस ने काफी पसंद किया है.

फ्लावर प्रिंट लुक में बिखेरे जलवे

 

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फ्लावर प्रिंट के लुक की बात करें तो बौलीवुड एक्ट्रेसेस बेहद स्टाइलिश लुक में नजर आती हैं. वहीं यामी गौतम भी बीते दिनों फ्लावर प्रिंट लुक में नजर आईं, जिसके साथ उन्होंने इयरिंग्स कैरी किए, जो वह शादी के दिन पहने नजर आईं थीं.

साड़ी में लगती हैं कमाल

 

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शादी के दिन बनारसी साड़ी में अपना लुक फ्लौंट करने वाली यामी गौतम एक बार फिर बनारसी लुक में नजर आईं, जिसे फैंस ने काफी पसंद किया है.

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