मन का रिश्ता: खून के रिश्तों से जुड़ी एक कहानी

मेरे हाथों में मेहंदी लगी देख सुदेश ने सवाल उछाल दिया, ‘‘यह मेहंदी किस खुशी में लगाई है? कोई शादीब्याह, तीजत्योहार या व्रतउपवास है क्या?’’

जवाब में मैं ने भी प्रश्न ही उछाल दिया, ‘‘आप को मालूम है…मधु की शादी तय हो गई है?’’

‘‘कौन मधु?’’

‘‘आप भी न कमाल करते हैं. अरे, हमारे पड़ोसी विपिनजी की बेटी, जिसे आप बचपन से देखते आ रहे हैं. सुंदर, सुशील, प्रतिभाशाली और काम में निपुण…’’ मेरी बात अधूरी ही रह गई जब सुदेश ने बात काटते हुए प्रश्न किया, ‘‘वही मधु न जिसे विपुल ने रिजेक्ट कर दिया था?’’

‘‘रिजेक्ट नहीं किया था,’’ मैं तमतमा उठी. मानो मेरा अपना अपमान हुआ हो. ‘‘उसे सौम्या पसंद थी. उस से प्यार करता था वह. खैर, वे सब पुरानी बातें हो गईं. मुझे तो खुशी है मधु को भी अच्छा घरवर मिल गया. शादी अच्छे से संपन्न हो जाए.’’

‘‘हुंह…बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना. तुम्हें हमेशा दूसरों के सुखचैन की पड़ी रहती है,’’ कहते हुए उन्होंने फाइलों में मुंह छिपा लिया. मैं सोच में डूब गई. शायद बेटा विपुल और ये ठीक ही कहते हैं. न जाने क्यों मुझ से किसी का बुरा सोचा ही नहीं जाता. चाहे वह आत्मीय हो या अजनबी, हमेशा हर एक के लिए दुआ ही निकलती है.

सुदेश तो कई बार समझाने भी लग जाते हैं कि तुम्हें थोड़ा व्यावहारिक होना चाहिए. सांसारिक दृष्टिकोण रखना कोई बुरी बात नहीं है. पर मैं चाह कर भी अपनेआप को बदल नहीं पाती.

विपुल हंसते हुए कहता है, ‘पापा, हमारी मम्मी इस ग्रह की नहीं हैं, किसी दूसरे ग्रह की प्राणी लगती हैं.’ मैं भी उन के मजाक में शामिल हो जाती. पर मुझे हमेशा यही लगता कोई इनसान इतना आत्मकेंद्रित कैसे हो सकता है? आखिर इनसानियत भी तो कोई चीज है.  मधु के साथ अनजाने में मुझ से जो अपराध हुआ था, वह मुझे हमेशा सालता रहता था. दरअसल सुंदर, गुणी मधु से मैं हमेशा से प्रभावित थी और उसे अपनी बहू बनाने का सपना भी देखती थी. जाने- अनजाने अपना यह सपना मैं मधु और उस के घर वालों पर भी प्रकट कर चुकी थी और वे भी इस रिश्ते से मन ही मन बेहद खुश थे. सुदर्शन, इंजीनियर दामाद उन्हें घर बैठे जो मिल रहा था.

विपुल दूसरे शहर में नौकरी करने लगा था. इस बार जब वह छुट्टी ले कर आया तो मैं ने अपना मंतव्य उस पर प्रकट कर दिया. हालांकि पहले भी मैं उसे मधु को ले कर छेड़ती रहती थी, लेकिन इस बार जब उस ने मुझे गंभीर और शादी की तिथि निश्चित करने के लिए जोर डालते देखा तो वह भी गंभीर हो उठा.‘मम्मी, मैं अपनी सहकर्मी सौम्या से प्यार करता हूं और उसी से शादी करूंगा.’

मुझे झटका सा लगा था, ‘पर बेटे…’

‘प्लीज मम्मी, शादी मेरा निहायत व्यक्तिगत मामला है. मैं इस में आप की पसंद को अपनी पसंद नहीं मान सकता. मुझे उस के साथ पूरी जिंदगी गुजारनी है.’

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‘मधु हर तरह से तुम्हारे लिए उपयुक्त है, बेटा. निहायत शरीफ…’ मैं ने अपना पक्ष रखना चाहा.  ‘आई एम सौरी, जिस लड़की से मैं प्यार नहीं करता उस से शादी नहीं कर सकता,’ विपुल इतना कह चला गया. मैं बिलकुल टूट सी गई थी. लेकिन सुदेश ने भी मुझे ही दोषी ठहराया था, ‘गलती तुम्हारी है इंदु. तुम्हें मधु या उस के घर वालों से कोई भी वादा करने से पहले विपुल से पूछ लेना चाहिए था.’

मैं ने अपनी गलती मान ली थी. मधु और उस के घर वालों के सम्मुख वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए मैं ने क्षमा भी मांग ली थी. मधु ने तो मेरी मजबूरी समझ ली थी. हालांकि उस के चेहरे से लग रहा था कि उसे गहरा धक्का लगा है पर उस के घरवाले काफी उत्तेजित हो गए थे. खूब खरीखोटी सुनाई उन्होंने मुझे. मैं ने गरदन झुका कर सबकुछ सुन लिया था. आखिर गलती मेरी थी. ऊपर से संबंध भले ही फिर से सामान्य हो गए थे पर कहीं कोई गांठ पड़ गई थी. पहले वाली बेतकल्लुफी और अपनापन कहीं खो सा गया था. विपुल की शादी में वे शामिल नहीं हुए. पूरा परिवार ही शहर से बाहर चला गया था. इरादतन या संयोगवश, मैं आज तक नहीं जान पाई. स्वभाववश मैं ने हमेशा की तरह यही कामना की थी कि मधु को भी जल्दी ही अच्छा घरवर मिल जाए. और एक दिन मधु की मां खुशीखुशी शादी का कार्ड पकड़ा गई थीं. मैं ने उन्हें गले से लगा लिया था.

‘‘सच कहूं बहन, आप से भी ज्यादा आज मैं खुश हूं,’’ और इसी खुशी में मैं ने अपने हाथों में मेहंदी रचा ली थी. ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ जैसा पति का व्यंग्य भी मेरी खुशी को कम नहीं कर सका था. बहुत उत्साह से मैं ने शादी की सभी रस्मों में भाग लिया और फिर भारी मन से बेटी की तरह मधु को विदा किया.

मधु की शादी के बाद विपुल और सौम्या घर आए तो मैं मधु की विदाई का गम भूल उन के सत्कार में लग गई. सौम्या भी बहुत अच्छी लड़की थी. मुझे उस पर भी बेटी सा स्नेह उमड़ आता था. बापबेटे हमेशा की तरह मुझ पर हंसते थे. ‘मम्मी को सब में अच्छाइयां ही नजर आती हैं. परायों से भी रिश्ता जोड़ लेती हैं. फिर तुम तो उन की इकलौती बहू हो. तुम पर तो जितना प्यार उमड़े कम है.’  सच, उन के साथ पूरा सप्ताह कैसे गुजर गया, पता ही नहीं चला. उन के जाने के बाद एक दिन बाजार में मुझे मधु मिल गई. उसे देखते ही मेरा चेहरा एकदम खिल उठा, लेकिन गौर से उसे देखा तो जी धक से रह गया. सूनी मांग, सूनी कलाइयां, सूना माथा और भावनाशून्य चेहरा… मुझे चक्कर सा आने लगा. पास के खंभे को पकड़ अपने को संभाला.

‘‘कब आईं तुम? और यह क्या है?’’ वह फफक उठी. देर तक फूटफूट कर रोती रही, ‘‘सब खत्म हो गया आंटी, एक दुर्घटना में वे चल बसे. ससुराल वालों ने अशुभ कह कर दुर्व्यवहार आरंभ कर दिया. मैं यहां आ गई. दोचार दिन तो सब ने हाथोंहाथ लिया. पर अब भाभीभैया अवहेलना करने लगे हैं. आखिर हूं तो मैं बोझ ही. मां सबकुछ देखतीसमझती हैं पर कर कुछ नहीं पातीं. जीवन बोझ लगने लगा है. मरने का मन करता है.’’

‘‘पागल हो गई हो? ऐसा कभी सोचना भी मत. चलो, मेरे साथ घर चलो,’’ उस का मुंह धुला कर मैं ने उसे चाय पिलाई. जब उस का मूड कुछ ठीक हो गया तो मैं ने बात आगे बढ़ाई.

‘‘तुम तो काफी पढ़ीलिखी हो. पति की जगह नौकरी पर क्यों नहीं लग जातीं?’’

‘‘सोचा था. पता चला, उस जगह देवर लगने का प्रयास कर रहे हैं.’’

‘‘लेकिन पहला हक तुम्हारा है. यदि तुम आत्मसम्मान की जिंदगी जीना चाहती हो तो तुम्हें अपने हक के लिए लड़ना होगा.’’

‘‘लेकिन मुझे तो कुछ भी नहीं मालूम…कैसे क्या करना है?’’

‘‘हूं… एक आइडिया है. विपुल उसी शहर में है. मैं उस से कहती हूं, वह तुम्हारी मदद करेगा.’’

विपुल पहले तो एकदम बिदक गया, ‘‘क्या मां, आप हर किसी के फटे में टांग डालती रहती हो.’’ पर जवाब में मेरी ओर से कोई आवाज सुनाई नहीं दी तो तुरंत मेरी मनोस्थिति ताड़ गया, ‘‘ठीक है मम्मी, मैं प्रयास करता हूं.’’  विपुल के प्रयास रंग लाए और मधु को नौकरी मिल गई. वह बेहद खुश थी. उस की मुसकान देख कर मुझे लगा कि मेरी गलती का आंशिक पश्चात्ताप हो गया है. उस के जाने के बाद एक दिन उस की मां मिल गईं. उन्होंने  यह कहते हुए मेरा बड़ा एहसान माना कि मैं ने मधु को नई जिंदगी दी है.

‘‘मैं तो चाहती हूं उस का फिर से घर भी बस जाए. अभी उस की उम्र ही क्या है?’’ मेरी जबान फलीभूत हुई. मधु की मां ने ही एक दिन बताया कि मधु ने अपने एक सहकर्मी से आर्यसमाज में शादी कर ली है. उस के भाईभाभी ऊपर से तो रोष जता रहे हैं, लेकिन मन ही मन खुश हैं कि चलो, बला टली.

‘‘यह दुनिया ऐसी ही है बहन. आप के बेटेबहू कोई अपवाद नहीं हैं.’’

‘‘लेकिन आप तो अपवाद हैं. अपनों की तो हर कोई सोचता है लेकिन आप तो परायों के लिए भी…’’

‘‘अपनापराया कुछ नहीं होता. रिश्ते तो मन के होते हैं. जिस से मन जुड़ जाए वही अपना लगने लगता है. मधु को मैं ने हमेशा अपनी बेटी की तरह चाहा है. उस के लिए कुछ करने से मुझे कभी रोकना मत.’’

वैसे प्यार तो मुझे सौम्या से भी बहुत हो गया था. सच कहूं, मुझे हर वक्त उस की चिंता लगी रहती थी. पतली, नाजुक, छुईमुई सी लड़की कैसे आफिस और घर दोनों जिम्मेदारियां संभालती होगी? विपुल से जब भी बात होती मैं उसे सौम्या की मदद करने की सीख देना नहीं भूलती.  और जब से मुझे पता चला कि वह गर्भवती है तो एक ओर तो मैं हर्ष से फूली नहीं समाई, लेकिन दूसरी ओर उस की चिंता मुझे दिनरात सताने लगी. मैं ने डरतेडरते सुदेश से अपने मन की बात कही, ‘‘मैं चली जाती हूं दोनों के पास उन्हें संभालने. सौम्या बेचारी, कैसे मैनेज कर रही होगी?’’

‘‘इंदु, तुम्हारा इतना संवेदनशील और लचीला होना मुझे बहुत अखरता है. अभी उसे मात्र 2 महीने हुए हैं. उसे 9 महीने इसी अवस्था में गुजारने हैं. तुम कब तक उन की देखभाल करोगी? वे बच्चे नहीं हैं. अपनेआप को और अपने घर को संभाल सकते हैं. उन्हें तुम्हारे हस्तक्षेप, जिसे तुम सहयोग कहती हो, की जरूरत नहीं है. जरूरत होगी, तब वे अपनेआप तुम्हें बुला लेंगे और तभी तुम्हारा जाना सार्थक और सम्मानजनक होगा.’’

मैं कहना चाहती थी, भला अपनों के काम आने में क्या सम्मान और सार्थकता देखना, पर जानती थी ऐसा कहना एक बार फिर मेरी व्यावहारिक नासमझी को ही दर्शाएगा. इसलिए चुप्पी लगा गई. पर गुपचुप छिटपुट तैयारियां करना मैं ने आरंभ कर दिया था. बहू के लिए खूब सारे सूखे मेवे खरीद लाई थी. कोई जाएगा तो साथ भिजवा दूंगी. फोन पर हिदायतों का दौर तो जारी था ही.  इसी बीच खबर लगी कि मधु भी गर्भवती है. मैं ने मधु की मां से मिल कर उन्हें बधाई दी. पता चला कि वे मधु के पास ही जा रही थीं.  मैं तुरंत घर लौटी. मेवे का पैकेट खोल कर उस के 2 पैकेट बनाए और तुरंत मधु की मां को ला कर थमा दिए, ‘‘यह एक पैकेट विपुल आ कर ले जाएगा और दूसरा मधु के लिए है.’’  डबडबाई आंखों से उन्होंने दोनों पैकेट थाम लिए. समय के साथसाथ सौम्या की तबीयत संभलने लगी थी. मैं विपुल से फोन पर हमेशा यही कहती, ‘‘जरा सी भी दिक्कत हो तो मुझे निसंकोच फोन कर देना. मैं तुरंत पहुंच जाऊंगी.’’

‘‘बिलकुल मां, यह भी भला कोई कहने की बात है?’’

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सौम्या की डिलीवरी का समय पास आ गया था. उस ने अब आफिस से छुट्टियां ले ली थीं. आपस में सलाह- मशविरा कर उन्होंने हमें सूचित किया कि डिलीवरी के समय मैं सौम्या के पास रहूं इसलिए सुदेश के खाने का प्रबंध कर मैं उन के पास रहने चली गई. तय हुआ कि डिलीवरी के बाद कुछ वक्त गुजार कर मैं लौट आऊंगी और तब सौम्या की मां आ कर सब संभाल लेंगी.

सौम्या का समय पूरा हो चुका था पर उसे अभी तक लेबरपेन आरंभ नहीं हुआ था. डाक्टर की सलाह पर हम ने उसे अस्पताल में भरती करवा दिया. अभी हम पूरी तरह व्यवस्थित भी नहीं हो पाए थे कि पास लाई गई दूसरी प्रसूता को देख मैं चौंक उठी. यह तो मधु थी. वह दर्द से कराह रही थी. उसे आसपास का जरा भी होश न था. उस की मां उसे संभालने का असफल प्रयास कर रही थीं. मैं ने उन्हें धीरज बंधाया. जल्दी ही मधु को लेबर रूम में ले जाया गया और कुछ समय बाद ही उस ने एक बेटे को जन्म दे दिया. भावातिरेक में उस की मां मेरे गले लग गईं. अब बस सौम्या की चिंता थी. डाक्टर ने चेकअप किया. सामान्य प्रसव के कोई आसार न देख आपरेशन से बच्चा पैदा करने का निर्णय लिया गया. मैं बारबार सौम्या के सुरक्षित प्रसव की कामना कर रही थी. मधु और उस की मां ने मेरी बेचैनी देखी तो मुझे धीरज बंधाया.

‘‘सब अच्छा ही होगा. आप जैसे भले लोगों के साथ कुदरत हमेशा भला ही करेगी.’’

जब तक सौम्या आपरेशन थिएटर में बंद रही और विपुल बाहर चक्कर काटता रहा उस दौरान मधु की मां ने बातों से मेरा दिल बहलाए रखा. साथ ही मधु और अपने नवासे को भी संभालती रहीं. लेडीडाक्टर ने जब जच्चाबच्चा दोनों के सुरक्षित होने की सूचना दी तब ही मुझे चैन पड़ा. घर में पोती आई थी. मैं बहुत खुश थी, लेकिन यह जान कर मेरी चिंता बढ़ गई कि नवजात बच्ची बहुत कमजोर है. सौम्या की हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं थी. फिर उसे दूध भी नहीं उतर रहा था. अस्पताल में नर्सरी आदि की सुविधा नहीं थी. डाक्टर के अनुसार बच्ची को यदि कुछ समय तक किसी नवप्रसूता का दूध मिल जाए तो उस की स्थिति संभल सकती थी.

‘‘आप को एतराज न हो तो मैं इसे दूध पिला देती हूं,’’ मधु ने स्वयं को प्रस्तुत किया तो हम एकबारगी तो चौंक गए.

‘‘नेकी और पूछपूछ,’’ कहते हुए उस की मां ने बच्ची को तुरंत मधु की गोद में डाल दिया. मधु ने उसे प्यार से आंचल में ढांप लिया और दूध पिलाने लगी. मैं उस के इस ममतामयी रूप पर निछावर हो गई.

2 दिन हो गए थे. सुदेश भी आ गए थे. मधु जितनी बार अपने बेटे को दूध पिलाती, याद से गुडि़या को भी पिला देती. तीसरे दिन डाक्टर ने चेकअप किया. मधु की अस्पताल से छुट्टी हो चुकी थी. गुडि़या की तबीयत संभल गई थी, लेकिन सौम्या को अभी कुछ दिन और अस्पताल में रहना था. उस के घाव अभी भरे नहीं थे. बड़ी असमंजस की स्थिति थी. गुडि़या को मां से दूर भी नहीं किया जा सकता था और अभी कुछ दिन उसे और ऊपर के दूध के साथ मां के दूध की जरूरत थी. हम सोच ही रहे थे कि क्या किया जाए कि मधु बोल पड़ी, ‘‘हमारा घर पास में ही है. मैं इसे दूध पिलाने आती रहूंगी. साथ ही ऊपर का दूध भी बना कर लाती रहूंगी.’’

‘‘हां हां, आप चिंता मत कीजिए. हम सब संभाल लेंगे,’’ मधु की मां भी तुरंत बोल पड़ीं.

3-4 दिन तक मांबेटी का यही क्रम चलता रहा. मधु न केवल गुडि़या को दूध पिला जाती बल्कि ताजा गुनगुना दूध बना कर भी ले आती. कभी सौम्या के लिए खिचड़ी, दलिया आ जाता.  मधु की मां जो दवा मधु के लिए बनातीं उस की एक खुराक आ कर सौम्या को भी खिला जातीं. विपुल और उस के पापा ये सब देख कर अचंभित रह जाते. अपनी अब तक की सोच पर शर्मिंदगी के भाव उन के चेहरे पर स्पष्ट परिलक्षित होते थे. मैं मधु को बारबार कहती, ‘‘तुम्हें इतना श्रम अभी नहीं करना चाहिए. तुम्हें आराम की जरूरत है.’’

‘‘मुझे ये सब करने से इतना आराम मिल रहा है कि मैं आप को बता नहीं सकती,’’ वह मुसकरा कर कहती. एक नर्स ने तो मुझ से पूछ भी लिया था, ‘‘क्या रिश्ता है आप का इस लड़की से?’’

‘‘इनसानियत का रिश्ता, जिस के तार मन से जुड़े होते हैं,’’ यह कहते हुए मेरे चेहरे पर असीम तृप्ति के भाव थे.

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हिना खान से लेकर शिवांगी जोशी तक, ट्रेंड में है TV की इन हसीनाओं का आई-मेकअप

टीवी एक्ट्रेसेस आजकल घर-घर में पौपुलर हो गई हैं. हर कोई कपड़ों से लेकर मेकअप तक उन्हीं ते लुक को कौपी करना चाहता है. वहीं टीवी एक्ट्रेसेस भी अपने फैंस के लिए सोशलमीडिया पर नए-नए लुक और मेकअप टिप्स की फोटोज शेयर करती रहती हैं, जिसके बाद फैंस उनके लुक को कौपी करने की कोशिश करते हैं. इसीलिए आज हम आपको टीवी हसीनाओं के कुछ आई मेकअप लुक आपको दिखाएंगे, जिसे आप आसानी से ट्राय कर सकती हैं.

वेस्टर्न लुक के लिए परफेक्ट है हिना खान का आई मेकअप

अदाकारा हिना खान ने हाल ही में अपनी ये फोटो शेयर की है. जिसमें अदाकारा यैलो कलर के आई लाइनर का इस्तेमाल कर लोगों का ध्यान खींच लिया. इसी आई मेकअप को आप अपने वेस्टर्न लुक के साथ कैरी कर सकती हैं. ये ट्रैंडी के साथ-साथ खूबसूरत भी लगेगा.

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हिना खान का नागिन लुक है पौपुलर

 

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She’s Coming 🐍

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बीते दिनों नागिन 5 में हिना खान के लुक के काफी चर्चे हुए थे, जिनमें सबसे ज्यादा सुर्खियां उनके आई मेकअप लुक बटोरीं थीं. अगर आप भी अपने इंडियन लुक के साथ खूबसूरत आई मेकअप करना चाहती हैं तो हिना खान का ये लुक परफेक्ट है.

नायरा के लुक भी हैं परफेक्ट

 

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~The Royal Bride!❤😭✨ It’s a common edit, and as always Shiviii looks soo beautiful in this one!😍💫 God’s Favourite Angel!✨😍 Pyaari Dulhaniya!🙈💫🤗 ____________________________________________ Please Let Me Know About This Edit😭 & It Will Be A Great Honour If You Mention Shivii In The Comments Too!😭❤ Thank you!✨🌎 ____________________________________________ . . . . . . . . . . . . . . . #MomoShivi #MohsinShivangi #KartikNaira #ShivinKaira #Yrkkh #Beautiful #MendhakSherni #Love #BestJodi #FavouriteJodi #WeLoveYouKaira __________________________________________________________ ❌NO REPOST PLEASE❌ __________________________________________________________ @shivangijoshi18 @khan_mohsinkhan @yashoda.joshi.33 @sumanprakashjoshi @sheetal_joshi_official @samarthjoshi15

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ये रिश्ता क्या कहलाता है की शूटिंग शुरू होने के बाद नायरा यानी शिवांगी जोशी नए लुक में नजर आ रही हैं. वहीं शिवांगी को आई लैशेज के एक्सटेंशन और मसकारे का भी बड़ा क्रेज है, जिसके चलते वह आंखों को खूबसूरत दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़तीं. अगर आप भी अपनी आंखों को खूबसूरत दिखाना चाहती हैं तो शिवांगी जोशी का आईमेकअप ट्राय करना ना भूलें.

 

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❤️❤️ Sc @editxmaterial #shivangijoshi #shivangi #shivangians #weloveyoushivangi #naira #kaira #shivin #yrkkh

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निया शर्मा का लुक भी है खूबसूरत

 

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I Keep things Pink And Proper..

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निया शर्मा उन अदाकाराओं की लिस्ट में शामिल हैं जो अपने ट्रेंडिंग आई मेकअप लुक्स से हमेशा ध्यान खींच लेती है. नागिन 4 में अपने लुक से लेकर पर्सनल लाइफ में अपनी ड्रेसिंग सेंस और मेकअप से निया शर्मा सभी का ध्यान खींचती हैं. अगर आप भी अपने लुक को खूबसूरत दिखाना चाहती हैं तो निया शर्मा का इंडियन से लेकर वेस्टर्न आई मेकअप परफेक्ट औप्शन है.

 

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Kya aaj mein ‘pretty’ lag rahi hoon? Ya sach mein lag rahi hoon….

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रश्मि देसाई और टीना दत्ता

 

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बस यूँ ही 🧡 . . @urbanmutiyar – BB Jewels 💎 #OnShoot #Naagin4 #ItsAllMagical #RashamiDesai

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सीरियल उतरन में साथ नजर आ चुकीं एक्ट्रेस रश्मि देसाई और टीना दत्ता को भी मेकअप का काफी शौक है. जहां रश्मि ने ब्लू मसकारे से ही अपने आई मेकअप को बेहद खास बना दिया था. तो वहीं उतरन फेम अदाकारा टीना दत्ता भी अक्सर अपनी आई लुक से हंगामा मचाती रहती है. स्मोकी आई मेकअप लुक में वह बेहद कमाल नजर आती हैं.

 

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घर पर ही बनाएं तंदूरी मोमोज

मोमोज बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी की पसंद होते हैं. वह भी जब बात हो ग्रिल मोमोज की तो नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. तो आज ही घर पर बनाएं ग्रिल तंदूरी मोमोज.

सामग्री

2 चम्मच हंग कर्ड

1 चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट

½ चम्मच लाल मिर्च

½ चम्मच तंदूरी मसाला

½ चम्मच तंदूरी कलर

¼ चम्मच काली मिर्च

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1 चम्मच चाट मसाला

1 कटोरी मोमोज

नमक स्वादानुसार

विधि

ग्रिल तंदूरी मोमोज बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में हंग कर्ड, अदरक लहसुन का पेस्ट, नमक, लाल मिर्च, तंदूरी मसाला, काली मिर्च, चाट मसाला और तंदूरी कलर डालकर अच्छे से मिलाएं.

अब मोमोज को तैयार मिक्सचर में डालकर मिलाएं और 10 मिनट मेरिनेट करें. अब ग्रिल पैन को बटर से ग्रीस करके मोमोज को ग्रिल करें.

अब मोमोज को सर्विंग प्लेट में निकाल कर चाट मासाला और नींबू का रस डालकर गर्मागर्म परोसें.

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अनुष्का-करीना के बाद इस एक्ट्रेस ने भी दिखाया बेबी बंप, फोटो शेयर कर दी खुशखबरी

बौलीवुड और टीवी सितारों की दुनिया में इन दिनों प्रैग्नेंसी न्यूज की खबरें छाई हुई हैं. हाल ही में एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा और क्रिकेटर विराट कोहली ने प्रैग्नेंसी न्यूज के चलते काफी सुर्खियां बटोरीं थीं. वहीं अब ‘देवों के देव महादेव’ एक्ट्रेस पूजा बनर्जी ने अपनी प्रैग्नेंसी की फोटोज शेयर करके फैंस को चौंका दिया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

बेबी बंप की फोटोज हुई वायरल

बीते दिनों ही पूजा बनर्जी ने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी और बताया था कि उनके घर जल्द ही नन्हा मेहमान आने वाला है. इस घोषणा के बाद अब ‘देवों के देव महादेव’ में पार्वती की भूमिका अदा कर चुकी पूजा बनर्जी ने पहली बार अपना बेबी बम्प फ्लॉन्ट किया है. दरअसल, सोशलमीडिया पर वायरल फोटोज में पूजा बनर्जी को कुणाल वर्मा ने प्यार से गले लगाया हुआ है और पूजा बनर्जी मस्ती में कैंडी का लुत्फ उठाती हुई नजर आ रही है.


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लौकडाउन में किया था खुलासा

 

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My adorable parents to be @banerjeepuja @kunalrverma

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कुछ महीने पहले ही पूजा बनर्जी ने खुलासा किया था कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान ही कुणाल वर्मा संग कोर्ट मैरिज कर ली है. साथ ही पूजा बनर्जी ने ये भी बताया था कि उनका और कुणाल का परिवार लम्बे समय से उनकी शादी का इंतजार कर रहे थे. ऐसे में सब कुछ तय हो गया था लेकिन लॉकडाउन के चलते सारी प्लानिंग्स पर पानी फिर गया था. खैर पूजा बनर्जी (Puja Banerjee) ने ये बात सामने रखी है कि वो धूमधाम से एक बार फिर शादी करेंगी.

 

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बता दें, एक्ट्रेस पूजा बनर्जी ‘तुझ संग प्रीत लगाई सजना’, ‘झलक दिखला जा’ और ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ’ जैसे शोज में काम कर चुकी हैं. इसके अलावा वह हिंदी, तेलुगू और बंगाली फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं.

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नायरा ने दिया कार्तिक को करारा जवाब, फैंस बोले – सही किया

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के सेट पर कार्तिक के पिता के रोल में नजर आने वाले  एक्टर सचिन त्यागी के साथ समीर ओंकार और स्वाति चिटनीस कोरोना पौजिटिव पाए गए थे, जिसके बाद मेकर्स ने सीरियल की कहानी को कीर्ति के किरदार की तरफ मोड़ दिया हैं. इसी बीच कहानी में बदलाव को देखकर फैंस भी भड़क गए हैं. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

कार्तिक-नायरा की होगी बहस

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के अपकमिंग एपिसोड में गोयनका हाउस में नया ट्विस्ट देखने को मिलने वाला है. दरअसल, शो में नायरा का जन्मदिन मनाया जा रहा है और इसी बीच कार्तिक औऱ नायरा के रोमांस के दौरान दोनों की बहस हो जाएगी. वहीं सोशल मीडिया पर ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) के अपकमिंग एपिसोड के कई वीडियोज वायरल हो रहे हैं, जिसे देखने के बाद फैंस का गुस्सा कार्तिक पर निकल रहा है. गौरतलब हो कि जबसे कार्तिक के पिता मनीष का एक्सीडेंट हुआ है, तबसे कार्तिक रह-रहकर नायरा को खरी खोटी सुना रहा है.

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नायरा का टूटा सब्र का बांध

अपकमिंग एपिसोड की वायरल वीडियो में नायरा, कार्तिक से कह रही है कि अब उसके सब्र का बांध टूट चुका है और वो ये घर छोड़कर जा रही है. वहीं वायरल की वीडियो को देखने के बाद एक यूजर का कहना है कि, ‘कार्तिक इसी लायक है उसे कभी भी प्यार की भाषा नहीं समझ आई है.’ वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है कि, ‘नायरा का ये फैसला बिल्कुल सही है. नायरा ने एकदम सही फैसला लिया है.’

बता दें, वहीं खबरें हैं कि अपकमिंग एपिसोड में नायरा के भाई और कार्तिक की बहन यानी नक्क्ष और कीर्ति की शादी टूटने की कगार पर पहुंच जाएगी.

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झूठ और भ्रम फैलाते छोटे शहरों के अखबार और न्यूज़ चैनल

पिछले एक दशक में झूठी खबरों को सिलसिला लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे लोकल अखबार और लोकल न्यूज़ चैनल वालों के निजी लाभ के अलावा इसमें सोशल मीडिया का लगातार विस्तार . समस्या यह है कि लोग ज्यादा सोशल मीडिया पर एक्टिव होते जा रहे हैं. जिस कारण  इन झूठी खबरों को फैलने में मदद मिलती है.असल में लोकल अखबारों की ऐसी खबरें फैलाने में उनकी भी अहम भूमिका रहती हैं. लोग बिना कुछ सोचे समझे किसी भी झूठी खबर या झूठे विडियोज पर यकीन कर लेते हैं और उन्हें अपने दोस्तों व परिवार वालों के पास फॉरवार्ड कर देते हैं.

उदाहरण 1-

अभी कुछ माह पहले की एक खबर जिसने सब को भ्रम में रखा, कुछ इस तरह थी -” लखनऊ ब्रेकिंग न्यूज. योगी आदित्यनाथ जी का बड़ा फैसला आज रात को 11.40 pm कोई भी  व्यक्ति घर के दरवाजे ना खोले और खिड़की को भी बंद कर के रखे. हर राज्य मे 5 हेलिकॉप्टर की मदद से  स्प्रे डाला जायेगा! इस महामारी कोरोना  को खत्म करने के लिए” !  न ऐसा कुछ हुआ और न ही होना था. यह खबर बिल्कुल झूठी थी. इसका समर्थन किसी भी प्रादेशिक बड़े अखबार ने नहीं किया.

उदाहरण 2-

इस खबर ने सबको बहुत परेशान और हैरान किया, जो कि इस प्रकार थी ,” सत्तर वर्ष से चली आ रही बुद्ध बाजार, मुरादाबाद में स्थित मिठाई की दुकान, के सभी मालिक व कर्मचारी सहित 12 लोग कोरोनावायरस पॉजिटिव पाए गये हैं. कृपया अपने परिवार व अपना ख्याल रखते हुए मिठाई आदि खाने से बचें” .

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यह खबर आग के जैसे सब जगह फैलने लगी. यहां तक कि व्हाट्सएप ग्रुप्स में भी दिखाई देने लगी. जब मैंने इसे पढ़ा तो मुझे इसलिए दुख हुआ क्योंकि यह प्रतिष्ठित लोग मेरे पड़ोसी हैं. हर दिन इनसे बात हो रही थी. किसी ने लोगों को डराने के लिए झूठी खबर बनाकर अखबार में छाप दीं और अखबार से वह सब सोशल मीडिया पर पहुंच गई. ऐसे ही ना जाने कितनी खबरें इस कोरोना काल में सबसे अधिक फैंलीं.

झूठी खबरों का सिलसिला दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है. यह सिर्फ एक कोरोना काल का समय ही नहीं, हर रोज किसी न किसी लोकल अखबार या चैनल पर ऐसी भ्रम फैलाने वाली खबरें अक्सर मिल जाती हैं. सच्चाई की तह में जाने के बाद सिर धुन लेने के अलावा और कोई चारा नहीं लगता.

लालच के कारण

जैसे जैसे भ्रष्टाचार ज्यादा फैल रहा है वैसे वैसे ही झूठी खबरों का सिलसिला भी बढ़ता ही जा रहा है. चाहे आप लोकल अख़बार में पढ़ें या लोकल चैनल पर देखें , आप को सच्ची खबर जानने के लिए बहुत जांच पड़ताल व रिसर्च करनी पड़ेगी. ये लोग पूर्ण रूप से सच्ची ख़बरें नहीं छापते हैं. इसमें उनका लालच शामिल होता है. परंतु यह कितना शर्मनाक है कि कुछ लोग चंद पैसों के लिए अपने ईमान को बेच, लोगों को अपनी झूठी खबरों के माध्यम से भ्रमित करते हैं.

बदल गया तरीका

प्रदेश में पिछले दिनों एक के बाद एक कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होने  लोगों को झकझोर दिया . पिछले साल भी कुछ पत्रकारों को गेंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था और  उन पर आरोप था कि वे सभी अपने पेपर और न्यूज चैनल के जरिए पुलिस प्रशासन व अधिकारियों के खिलाफ गलत और दुष्प्रचार करने वाली खबरें फैलाया करते थे.

स्थानीय समाचारों को अक्सर राष्ट्रीय समाचारों की तुलना में अधिक विश्वसनीय माना जाता था. लेकिन जबसे ये लोकल अखबार ऑनलाइन की गिरफ्त में आयें हैं, इन पर विश्वास करना अत्यधिक असुरक्षित है.

इसके पीछे एक पूरा तंत्र होता है. और उन की सोची समझी चाल भी. कुछ अखबार किसी एक राजनैतिक पार्टी के पास बिक जाते हैं. उनका मुख्य काम उस पार्टी को लोगों कि नजरों में अच्छा दिखाना व दूसरी पार्टियों को लोगो की नजरो से गिराना होता है.

अन्य देश भी अछूते नहीं

यह बात केवल भारत की ही नहीं है बल्कि अन्य देशों में भी ऐसा होता है.  लोगो को एक दूसरे से लड़वाया और  भ्रमित किया जाता है. जनता से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष, सच उजागर करना और ईमानदार नज़रिए से कवरेज  लगातार कम होते जाना, अब लोकल समाचार पत्रों की परिपाटी सा बन गया है.

आजकल लोगों को भ्रमित करने के लिए ये लोग स्वयं से कहानियां बनाते हैं और सोशल मीडिया से भी इसमें पूरा योगदान मिलता है. सोशल मीडिया झूठी कहानियों को कुछ इस प्रकार दर्शाता है कि दोनों में ( सच्ची व झूठी ) अंतर करना मुश्किल हो जाता है. इंटरनेट की मेहरबानी से ये झूठी खबरें सच सामने आने तक एक शहर से दूसरे शहर पहुंच चुकी होतीं हैं.

सांठ गांठ का खेल

दरअसल सच्चाई यह है कि इन लोकल अखबारों के पीछे भी किसी पार्टी या मीडिया का हाथ होता है. जो जितना बिकेगा, उन्हें उतने ही ज्यादा इनाम व तोहफे मिलेंगे. परंतु शर्त यह होती है कि उस खबर को इस तरीके से शेयर किया जाए कि पढ़ने वाला उसे सच मान कर विश्वास कर ले.

दिमाग में कई बार एक प्रश्न आता कि जब अधिकतर लोगो को पता होता है कि यह खबरें झूठी है और इस खबर का कोई सार्थक मतलब नहीं निकलता तो फिर भी वे उस खबर को शेयर ही क्यों करते हैं कि छोटी खबर सच्ची लगने लग जाए और छोटे अखबारों को आर्थिक रूप से भी फायदा पहुंचे.

मुनाफे का खेल

यदि किसी झूठी खबर ने लोकल चैनल या न्यूजपेपर को अच्छी TRP दे दी तो दूसरे लोकल अख़बार वाले भी उस खबर को यह सोच कर प्रकाशित कर देते हैं कि यदि हम इसे अपना विषय बनाएंगे तो इससे बहुत अच्छा मुनाफा मिल सकता है. वे भी उस खबर की अच्छे से जांच पड़ताल नहीं करते हैं कि खबर सच्ची है या झूठी. बल्कि उल्टा उसमे कुछ एक्स्ट्रा रोचक बातें जोड़ देते हैं. ताकि वह खबर ज्यादा से ज्यादा फैले और लोगों की रुचि बढ़े.

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इस तरह  यहां से झूठी खबरों की एक चेन बननी शुरू हो जाती है. इन अखबारों से जुड़े लोगों पर अधिक से अधिक मसालेदार कहानियां व ख़बरें लिखने पर जोर दिया जाता है ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक या रीडर्स मिलें और वे काफी लाभ कमा सकें. उन्हें यह मतलब नहीं होता है कि खबर कितनी सच्ची है और कितनी झूठी उन्हें बस अपने निजी स्वार्थ से मतलब होता है. इसलिए वह ज्यादा यह चैक नहीं करते की खबर झूठी है या सच्ची.

नज़रिए और नीयत गिरावट

नज़रिए और नीयत की ये गिरावट कोई नई बात भी नहीं है. कुछ प्रदेशों में ये लोकल समाचार पत्र और चैनल नियमित रूप से ऐसी सामग्रियों का प्रसारण कर रहे हैं, जो भड़काऊ होती हैं, पक्षपातपूर्ण होती हैं और जिनमें लोगों का पक्ष तो ग़ायब ही होता है. क्या इन सबके लिए कोई  तय मानक का पालन करना आवश्यक नहीं है ?

बैठने का तरीका दे सकता है घुटने का दर्द

डॉक्टर अतुल मिश्रा, फोर्टिस अस्पताल, नोएडा

कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान गठिया के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है. सामान्य दिनों की तुलना में लॉकडाउन के दौरान महिलाओं को घुटने के दर्द से अधिक समस्या हुई है.

घुटनों और जोड़ों के दर्द के कारण उन्हें चलनेफिरने और खासतौर पर सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत होती है. घुटनों में दर्द का मुख्य कारण गठिया है और इसके लिए उठनेबैठने का तौर तरीका भी काफी हद तक जिम्मेदार है. नियमित जीवन में छोटीछोटी चीजें घुटने का दर्द दे सकती हैं.

भारत के लोगों में घुटने मोड़ कर और पालथी मार कर बैठने की अक्सर आदत होती है. सामूहिक भोजन करना हो, घर के कामकाज करने हो या आपस में बातें करनी हों-इन सभी कामों में महिलाएं घुटने मोड़ कर ही बैठती है. यहां तक कि भारतीय शैली के शौचालय में भी घुटने के बल बैठना पड़ता है. बैठने की यह शैली हमारी आदतों में शुमार हो गई है और इस आदत के कारण यहां लोग कुर्सी, सोफे या पलंग पर भी घुटने मोड़ कर बैठना पसंद करते हैं. बैठने के इस तरीके में घुटने पर दबाव पड़ता है जिससे कम उम्र में ही घुटने खराब होने की आशंका बढ़ती है. हालांकि इस के असर तुरंत नहीं दिखते लेकिन उम्र बढ़ जाने पर घुटने की समस्या हो जाती है.”

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ज्यादातर बैठ कर काम करने, कम चलनेफिरने, मोटापा, धूप के संपर्क में कम रहने, जंक फूड के सेवन और विटामिन डी की कमी से भी गठिया होती है. शुरू में मरीज के घुटे में दर्द होता है और चलनेफिरने में तकलीफ होती है लेकिन जब दिक्कत बढ़ती है तो मरीज का चलनाफिरना दूभर हो जाता है.

देश में अक्सर 40 साल से ही महिलाओं में घुटने की समस्या शुरू हो जाती है जबकि पुरुषों में यह समस्या अधिक उम्र में शुरू होती है. करीब 90 प्रतिशत भारतीय महिलाओं में विटामिन डी की कमी है जो बोन मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है.

कैसे पाएं निजात

अगर घुटने में दर्द और जकड़न हो और चलने-फिरने पर घुटनों में आवाज़ आए तो समझ जाइये कि गठिया की शुरुआत हो चुकी है. अगर दिक्कत शुरू हो जाए तो बैठने का तरीका बदलना चाहिए. इस के बढ़ने पर घुटनों को मोड़ने में कठिनाई होती है. घुटने में विकृतियां भी हो सकती हैं.

इस समस्या से बचने का सब से अच्छा तरीका व्यायाम है. बीमारी के प्रारंभिक चरण के रोगियों के लिए स्टेटिक क्वाड्रिसप्स व्यायाम, साइकिल चलाना और तैराकी तीन सर्वोत्तम अभ्यास हैं. व्यायाम से जोड़ों की मांसपेशियां मजबूत रहती हैं, उन का लचीलापन बना रहता है और जोड़ों को उन से सपोर्ट भी मिलता है.

मोटापे को रोकने के लिए संयमित खानपान और शारीरिक सक्रियता पर ध्यान देना चाहिए. वजन कम होने से जोड़ों पर दबाव भी कम पड़ता है.

इसके अलावा विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में शरीर को मिलना चाहिए.

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खीरा है स्किन के लिए हीरा

गर्मियों में हमारे फ्रिज में शरीर को ठंडक देने वाले फ्रूट्स जैसे तरबूज, ख़रबूज़े , लीची की भरमार होती है. और अगर फ्रूट्स में बात करें खीरे की तो इससे ज्यादा ठंडा और बेस्ट कुछ नहीं. क्योंकि ये न सिर्फ हमारी हैल्थ के लिए बल्कि हमारी स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. क्योंकि ये विटामिन्स, मिनरल्स और ढेरों न्यूट्रिएंट्स से जो भरपूर होता है. और इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं कि खीरे में फाइबर होने के साथ साथ 96 पर्सेंट वाटर होता है, जो वजन को कम करने में काफी मददगार होता है. इसमें मौजूद सिलिकोन तत्व स्किन की खूबसूरती को बढ़ाने का काम करता है. इसके रोजाना सेवन व स्किन पर इस्तेमाल करने से स्किन अंदर व बाहर से चमक उठती है . तो जानते हैं कैसे करें स्किन केयर में खीरे का इस्तेमाल, जो आपको रखे हर तरह की स्किन प्रोब्लम्स से दूर .

1. सनटेन का नेचुरल ट्रीटमेंट

सनटेन सिर्फ गर्मियों में ही नहीं बल्कि ये समस्या हर मौसम में होती है. जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. ऐसे में चाहे कितनी भी स्किन की क्यों न केयर कर ली जाए फिर भी सनटेन की समस्या हो ही जाती है. और अगर एक बार चेहरे पर सनटेन हो गया फिर तो जानकारी के अभाव में न जाने हम कितने पैसे इस समस्या को ठीक करने के लिए ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर लगा देते हैं. जबकि इसका ट्रीटमेंट आपकी किचन में उपलब्ध है. जिसे आप रोजाना अपने सनटेन वाले एरिया पर लगाकर कुछ ही दिनों में अपनी पहले जैसी स्किन पा सकेंगी.

कैसे करें अप्लाई – इसके लिए आप एक बाउल में खीरे को कस कर उसका जूस निकाल लें. फिर इसे अपने पूरे चेहरे पर अप्लाई करके 15 मिनट के लिए छोड़ दें. और फेस को धो लें. ऐसा आप 1 महीने तक रोजाना करें. इससे आपको सनटेन की समस्या से पूरी तरह से निजात मिलेगा. क्योंकि खीरे में कूलिंग इफेक्ट होता है , जो स्किन को ठंडक पहुंचाने का काम करता है. वहीं इसमें विटामिन सी की मौजूदगी स्किन को मोइस्चर प्रदान करने का काम करती है.

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2. खोई रंगत को लौटाए

धूलमिट्टी व प्रदूषण के कारण स्किन का नेचुरल ग्लो खत्म होने लगता है. स्किन डल सी दिखने लगती है. ब्यूटी प्रोडक्ट्स भी स्किन के नेचुरल ग्लो को वापिस नहीं ला पाते हैं. ऐसे में जब भी हमारी नजर हमारे चेहरे पर पड़ती है तो हम मन ही मन बस यही सोचते हैं कि हमारे चेहरे को क्या से क्या हो गया. कैसे हमारी स्किन पर पहले जैसा ग्लो आ पाएगा. तो आपको बात दें कि आपके चेहरे की खोई हुई रंगत को वापिस लौटाने में खीरा कमाल का रोल निभाएगा. क्योंकि इसमें एंटी इंफेल्मैटरी और हाईड्रेटेड प्रोपर्टीज जो होती हैं. जो स्किन के नेचुरल ग्लो को वापिस लाने का काम करती है.

कैसे करें अप्लाई- आप खीरे का जूस निकाल कर उसे एक स्प्रे बोतल में स्टोर करके रख लें. फिर उसे स्किन पर स्प्रे करके कॉटन बोल्स की मदद से स्किन को क्लीन करें. इससे जितनी भी धूलमिट्टी चेहरे पर जमा होगी सब रिमूव हो जाएगी और धीरे धीरे स्किन की रंगत वापिस लौटने लगेगी.

3. आंखों के नीचे की सूजन को गायब करे

बहुत से लोगों को यह समस्या होती है कि उनकी आंखों के नीचे सूजन आ जाती है जिसे ऑय पफ ीनेस भी कहते हैं. जो उनके पूरे लुक को बिगाड़ने का काम करता है. ये समस्या अकसर तब होती है जब या तो हमारी नींद पूरी नहीं होती, या फिर स्ट्रेस, अल्कोहल के ज्यादा सेवन के कारण ये प्रोब्लम होती है. ऐसे में आप खीरे के इस्तेमाल से आंखों के नीचे की सूजन को काफी हद तक कम कर सकते हैं. क्योंकि खीरे का कूलिंग इफ़ेक्ट सूजन को कम करने में सक्षम जो होता है.

कैसे करें अप्लाई- आप खीरे को काटकर उसकी दो मोटी मोटी स्लाइस करके उसे आंखों पर इस तरह से लगाएं कि आंखों के नीचे की सूजन वाला हिस्सा भी अच्छे से कवर हो जाए. इसे आपको 20 मिनट तक अप्लाई करना होगा. इससे न सिर्फ आपकी आंखों को ठंडक मिलेगी बल्कि आपको इस प्रोब्लम से कुछ ही दिनों में छुटकारा मिल जाएगा.

4. उम्र का न पड़े असर

कौन चाहता है बूढ़ा होना और कई बार तो समय से पहले ही चेहरे से बुढ़ापा झलकने लगता है. जो आपके कोन्फिडेन्स के साथ साथ आपकी पर्सनालिटी को भी डल करने का काम करता है. लेकिन खीरा स्किन को टाइट कर झुर्रियों व डार्क सर्कल्स को दूर करने का काम करता है. खीरे में मोझूद पोटैशियम और मैग्नीशियम स्किन पर उम्र बढ़ने के संकेतों को पैदा होने से रोकने का काम करते हैं. तो अगर आप खुद को हर उम्र में यंग दिखाना चाहते हैं तो चेहरे पर इस तरह करें खीरे का इस्तेमाल कि एजिंग की समस्या के साथ साथ आपकी स्किन खिल उठे.

कैसे करें अप्लाई- अंडे के सफेद वाले भाग जिसमें प्रोटीन होता है में 2 बड़े चम्मच खीरे का रस मिलाकर उसमें नींबू की कुछ बूंदे मिलाएं. फिर इस पेस्ट को अच्छे से मिलाकर 20 मिनट के लिए चेहरे पर लगा छोड़ दें. और फिर धो लें. तुरंत ही आप अपने चेहरे पर बदलाव देखने लगेंगे. ऐसा आपको हफ्ते में 2 बार करना होगा.

5. एक्ने की समस्या से छुटकारा दिलवाए

चेहरे पर एक भी पिम्पल आ जाए तो मन बेचैन हो जाता है. बस हरदम यही लगता है कि किसी तरह से ये पिंपल गायब हो जाएं लेकिन बिना कुछ करे पिंपल गायब नहीं हो सकते. इसके लिए आपको घर पर ही थोड़ी मेहनत करनी होगी, जिससे आपको इससे हमेशा के लिए छुटकारा मिल सके. बता दें कि खीरे में एन्टिओक्सीडैंट्स होने के साथ साथ ये स्किन की जलन को कम करने का काम करता है. साथ ही स्किन टोन को इम्प्रूव करके स्किन पोर्स से अत्यधिक आयल को निकाल कर एक्ने की समस्या से छुटकारा दिलवाता है.

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कैसे अप्लाई करें – खीरे के पल्प में पिंच हलदी और नींबू के रस की कुछ बूंदे मिलाकर उसे फेस पर 15 मिनट के लिए लगा छोड़ दें. इससे आप पिंपल फ्री स्किन पा सकते हैं. क्योंकि हलदी में एक्सफोलिएटिंग एजेंट होने के कारण ये स्किन की जलन व पिंपल्स के धब्बों को हटाने का काम करता है. वहीं नींबू में विटामिन सी की मझुङ्गी स्किन को ग्लोइंग बनाने के साथ साथ दाग धब्बों को हटाने में सक्षम है. तो हुआ न खीरा फायदेमंद.

बारिश के मौसम में बनाएं मूंग दाल की टिक्की

बारिश के मौसम में किसे चटपटी चीजें खानी पसंद नहीं होती. बारिश में हम अकसर पकौड़े और टिक्की खाना पसंद करते हैं. तो इस बारिश आप बनाएं मूंग दाल की टिक्की.

सामग्री

1 कप भीगी मूंग दाल

1-2 हरीमिर्चें कटी

1 प्याज कटा

1 बड़ी कली लहसुन कटा

1/2 शिमलामिर्च कटी

1 टमाटर कटा

1/2 कप लौकी कसी हुई

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4 बड़े चम्मच तेल

नमक स्वादानुसार

विधि

दाल को पीस लें. हरी मिर्चें व लहसुन पीस लें. कड़ाही में तेल गरम कर बारीक काट कर प्याज व शिमलामिर्च भूनें.

अब इस में टमाटर, हरीमिर्च व लहसुन का पेस्ट व नमक मिलाएं. फिर दाल का पेस्ट मिलाएं व भूनें. 2-3 मिनट तक पका कर आंच से उतार लें.

इस की छोटी छोटी टिकियां बनाएं और गरम तवे पर दोनों तरफ से तेल लगा कर सेंक लें. चटनी के साथ सर्व करें.

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व्यंजन सहयोग : अनुपमा गुप्ता

कोरोना काल में जब आने वाले हों मेहमान

कोरोना के कारण मार्च में जब लॉक डाउन घोषित हुआ तो जनसामान्य की समस्त गतिविधियों पर ब्रेक लग गया और लोग अपने अपने घरों में कैद हो गए परन्तु अब 5 माह बाद कोरोना हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है जिसके साथ ही हमें जीना सीखना होगा. यूँ भी जीवन चलने का नाम है अतः इंसानी गतिविधियों को रोका नहीं जा सकता. घर में अब तक कैद रहे लोग घूमने जाने का भी प्लान करने लगे हैं. कोरोना से पहले जहां लोग अतिथि के आने पर खुश होते थे वहीं अब मेहमान के आने की सूचना प्राप्त करते ही कोरोना का भूत हावी हो जाता है. आजकल ऐसा ही कुछ हाल है मेरी पड़ोसन जूही का. परसों जैसे ही उसके एक पारिवारिक मित्र ने अपने आने की सूचना दी तो जूही को समझ ही नहीं आ रहा था कि वह हंसे या रोये. अब बरसों पुराने घनिष्ट संबंधों को कोरोना के नाम पर खराब भी तो नहीं किया जा सकता. यही सब बातें जब उसने अपनी सास को बतायीं तो वे बोलीं, “कोरोना तो अब हमारे साथ ही रहने वाला है बेटा, बेहतर है कि तुम आने वाले का जोश से स्वागत करो पर हां सावधानियों का दामन लेशमात्र भी न छोड़ना.”

निस्संदेह सास से बात करके उसे बहुत अच्छा लगा और वह जोश के साथ मेहमानों के स्वागत की तैयारी में लग गयी.

रक्षाबन्धन के त्यौहार पर रश्मि की ननद अपने परिवार सहित पुणे से मुम्बई आ धमकी. आने की सूचना भी रश्मि को मात्र 3 घंटे पहले दी. अब कैसे क्या करे इस कोरोना के टाइम में, कमरों के छोटे से फ्लैट में कैसे मैनेज होगा सोचकर ही उसका सिर चकरा गया. वह अभी प्लानिंग में ही लगी थी कि ननद ने ही पुनः फोन करके कहा,”भाभी चिंता मत करियेगा हम लोग कोरोना टेस्ट करवा कर ही आ रहे हैं.मैं आकर सब मैनेज कर लूंगी. तब जाकर कहीं रश्मि को चैन आया.

इसी प्रकार कई बार हमें न चाहते हुए भी कुछ जगहों पर जाना पड़ता है. देविका की ननद के बेटे की शादी थी और देविका किसी भी कीमत पर स्वयम को इंदौर से भोपाल जाने को राजी नहीं कर पा रही थी परंतु उसके पति ने समझाया,”इकलौती बहन है मेरी हमारे न जाने से जिंदगी भर के लिए सम्बन्ध खराब हो जाएंगे. सभी लोग तो आ रहे हैं , कोरोना के कारण नाते रिश्तेदारियां तो खत्म नहीं कर सकते न. हम वहां भी पूरी सावधानियां रखेंगे.”

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वास्तव में ये समय बहुत ही कठिन समय है परंतु सत्य यह भी है कि एक महामारी के कारण ज़िंदगी की किसी भी गतिविधि पर ब्रेक नहीं लगाया जा सकता क्योंकि जिंदगी चलने का नाम है. कटु सत्य है कि इस काल में भी न चाहते हुए भी आप कभी मेजबान बनेंगे तो कभी मेहमान इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखकर इस दौर को भी आनन्ददायक बनाना बेहतर है-

जब आप हों मेजबान

-जब भी कोई अतिथि आपके घर आये तो पैनिक होने के स्थान पर इसे बड़े ही सरल और सहज ढंग से लें इससे आप सामनेवाले का अच्छे से स्वागत सत्कार कर पाएंगी.

-यदि आपके पास पर्याप्त जगह है तो मेहमान के परिवार को अलग कमरा दें इससे आपकी और उनकी दोनों की ही प्राइवेसी बनी रहेगी और कुछ हद तक कोरोना से सुरक्षा भी.

-यदि जगह का अभाव है तो घर के हॉल में निर्धारित दूरी पर जमीन पर सोने की व्यवस्था करें साथ ही सभी के ओढ़ने बिछाने की अलग चादर रखें.

-घर के मुख्य द्वार पर हैंड सेनेटाइजर रखें और यदि हो सके तो बाहर ही हाथ पैर धोने के लिए पानी और साबुन की व्यवस्था करें ताकि किसी भी प्रकार के कीटाणु और वायरस का घर मे प्रवेश अवरुद्ध किया जा सके.

-भोजन करते समय कम से कम बातचीत करें और एक दूसरे का जूठा खाने से बचें.

-घूमने जाने से पहले घर पर हैवी नाश्ता करें और भोजन की पर्याप्त व्यवस्था करके ही जाएं ताकि बाहर के खाद्य पदार्थ खाने से आप बचे रहें क्योकि इस समय बाहर का भोजन खाने से बचना ही श्रेयस्कर है.

-भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, घूमने के लिए सुबह का समय चुनें, सेनेटाइजर साथ में रखें और पर्याप्त सोशल डिस्टेंस मेंटेन रखें.

जब आप हों मेहमान

-यदि सम्भव हो तो किसी के भी घर जाने से पूर्व आप अपना कोरोना टेस्ट करवाकर ही जाएं ताकि मेजबान कोरोना की ओर से आश्वस्त होकर आपका स्वागत सत्कार कर सके.

-आप जिसके घर जा रहे हैं उनके नियम कायदों का भली भांति पालन करें ताकि आप उनके लिए सिरदर्दी या मुसीबत न बनें.

-वर्तमान काल में बस, ट्रेन और एयर से यात्रा करना लेशमात्र भी सुरक्षित नहीं है बेहतर है कि आप जाने के लिए टैक्सी अथवा अपने वाहन का प्रयोग करें इससे आप तो सुरक्षित रहेंगे ही मेजबान भी आपकी ओर से आश्वस्त रहेगा.

-यदि सम्भव हो तो परिवार के सदस्यों के अनुसार ओढ़ने बिछाने की चादर आप अपने साथ ही लेकर जाएं.

-अपने मैकअप और नहाने कपड़े धोने के साबुन साथ ही लेकर जाएं ताकि मेजबान की कम से कम वस्तुओं का आपको प्रयोग करना पड़े.

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-इस समय अधिकांश घरों में महिलाएं हाथ से समस्त कार्य कर रहीं है, ऐसे में हर समय बैठे ही न रहकर उनकी मदद करवाने का प्रयास करें ताकि उन्हें आप भारस्वरूप न प्रतीत हों.

-यथासम्भव मास्क और सेनेटाइजर का प्रयोग करें. कम से कम 4से 5 मास्क प्रत्येक सदस्य के लिए रखें क्योकि बारिश में अक्सर सूखने में समय लगता है.

-यदि मेजबान कोरोना को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है तो उनकी इस आदत की हंसी या खिल्ली उड़ाने के स्थान पर उन्हें सहयोग करें क्योकि ध्यान रखिए सावधानी में ही सुरक्षा है, सावधानी हटी दुर्घटना घटी.

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