#lockdown: कई खिलाड़ियों के करियर पर लटक रही है कोरोना की तलवार

कोरोना के कहर ने पूरी दुनिया की तमाम खेल गतिविधियों पर विराम लगा दिया है. दुनिया के 90 फीसदी से ज्यादा खिलाड़ी इस समय अपने घरों में कैद हैं. ओलंपिक 2020 पहले ही एक साल आगे खिसक चुके हैं और अब जापान ओलंपिक समिति के मुखिया साफ साफ कह रहे हैं कि गारंटी से नहीं कहा जा सकता था कि जुलाई 2021 में भी ओलंपिक खेल हो पाएंगे या नहीं. सिर्फ ओलंपिक ही नहीं करीब करीब सभी खेल प्रतिस्पर्धाओं के बारे में यही कहा जा सकता है. भारत में बहुचर्चित क्रिकेट लीग आईपीएल 29 मार्च 2020 से शुरु होनी थी, लेकिन कोरोना के कहर को देखते हुए इसे 15 अप्रैल 2020 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है और इस समय जब ये पंक्तियां लिखी जा रही हैं, लगता नहीं है कि 15 अप्रैल के बाद भी इंडियन प्रीमियर लीग का आयोजन संभव हो पायेगा. अगर किसी वजह से इस आयोजन को संभव भी किया गया, तो मैच दर्शक रहित मैदानों में होंगे, जिससे कारोबारी हित तो किसी हद तक पूरे हो सकते हैं, मगर दर्शकों की अनुपस्थिति में खेले गये कोई भी खेल किसी जीवनरहित मशीनी गतिविधि जैसे ही होंगे.

सवाल है खेलों की तमाम प्रतिस्पर्धाओं पर विराम लग जाने या उनकी तारीख आगे बढ़ जाने से सबसे ज्यादा नुकसान किसको होगा? निःसंदेह इसमें भावनात्मक रूप से तो खेल प्रेमियों का नुकसान होगा; क्योंकि उन्हें घर में बैठे यानी फुर्सत में होने के बावजूद भी खेलों के रोमांच का आनंद नहीं मिलेगा. लेकिन अगर कॅरियर के लिहाज से देखें तो इसमें सबसे ज्यादा नुकसान ऐसे खिलाड़ियों का होगा, जो कोरोना के चलते कहीं अपने कॅरियर से ही हाथ न धो बैठें. इसमें दो तरह के खिलाड़ी हैं एक वो जो अपने खेल और उम्र की ढलान पर हैं और वे व्यवस्थित ढंग से अपने हिस्से के आखिरी प्रतिस्पर्धाओं में उतरने की योजना बना रहे थे ताकि सकून से सन्यास ले सकें. कहीं ऐसा न हो कि कोरोना के कारण अब उन्हें यह मौका ही नहीं मिले और उन्हें अपने कॅरियर को अलविदा कहना पड़े.

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ऐसी आशंकाओं के दायरे में भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और मुक्केबाज मैग्नीफिसेंट मैरी काॅम भी शामिल हैं. गौरतलब है कि महेंद्र सिंह धोनी एक दिवसीय आईसीसी विश्वकप 2019 के बाद से क्रिकेट से दूर हैं. उनको ही नहीं उनके प्रशंसकों तक को और आम हिंदुस्तानियों को भी यह उम्मीद थी कि 29 मार्च से शुरु होने वाले आईपीएल में धोनी अपना जलवा दिखाएंगे और इस तरह वे एक बार फिर से भारतीय टीम में लौट आएंगे. लेकिन अब जिस तरह की स्थितियां बन गई दिख रही हैं, उससे लगता नहीं है कि आईपीएल का आयोजन संभव हो सकेगा और अगर आईपीएल का आयोजन संभव न हुआ तो 38 वर्षीय महेंद्र सिंह धोनी की इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी नामुमकिन होगी. यह बात सिर्फ धोनी के आलोचक ही नहीं, उनके प्रशंसक भी कह रहे हैं.

हालांकि यह बात भी सही है कि धोनी के अंदर अभी तक कितना क्रिकेट बचा हुआ है, इसे लेकर दुनिया के तमाम बड़े क्रिकेटर दो फाड़ हो गये हैं. एक धड़ा यह कह रहा है कि धोनी अपने हिस्से का क्रिकेट खेल चुके हैं तो दूसरी तरफ एक धड़ा ऐसा भी है जो मान रहा है कि धोनी में अभी बहुत क्रिकेट बची हुई है. भारतीय टीम के पूर्व कप्तान के.श्रीकांत साफ तौरपर कहते हैं कि अगर 15 अप्रैल के बाद भी आईपीएल नहीं हुआ तो धोनी का कॅरियर समाप्त है. इसके पहले यह बात कभी भारतीय टीम के विस्फोटक ओपनर रहे वीरेंद्र सहवाग भी कह चुके हैं. इसके अलावा और भी कई वरिष्ठ क्रिकेटर ऐसी ही राय व्यक्त कर चुके हैं. लेकिन इंग्लैंड के कप्तान नासिर हुसैन से लेकर बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली तक यह कहते और संकेत देते रहे हैं कि धोनी के अंदर अभी क्रिकेट बाकी है और उन्हें मौका भी मिलेगा.

पिछले दिनों एक पत्रकार वार्ता में सौरव गांगुली ने साफ शब्दों में कहा था धोनी दुर्लभ खिलाड़ी हैं, सम्मान के साथ विदाई उनका हक है. अपनी इस प्रतिक्रिया का अंतिम शब्द जो उन्होंने बोला, वह धोनी के लिए बहुत उम्मीदें जगाने वाला शब्द था. मसलन गांगुली ने कहा, ‘आप जानते हैं कि चैंपियंस जल्द खत्म नहीं होते. धोनी की अगुवाई में भारत ने टी-20 विश्वकप 2007 और एक दिवसीय विश्वकप 2011 जीते हैं.’ इसका साफ इशारा था कि धोनी को अभी मौका मिलेगा. लेकिन कोरोना के चलते जिस तरह से आईपीएल ही नहीं, आने वाले दिनों की कई दूसरी सीरीज भी स्थगित होने की तरफ बढ़ रही हैं, उससे धोनी के कॅरियर पर अनचाहे विराम की तलवार लटक चुकी है.

सिर्फ धोनी ही नहीं कई और महान व दिग्गज खिलाड़ी हैं, कोरोना ने जिनके कॅरियर पर सवालियां निशान लगा दिये हैं. मसलन मुक्केबाजी की एवरग्रीन क्वीन समझी जाने वाली मैग्नीफिसेंट मैरी काॅम के कॅरियर पर भी खात्मे की तलवार लटक रही है. गौरतलब है कि इस साल मार्च में 6 बार की विश्व चैंपियन एमसी मैरी काॅम ने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था. लेकिन अब जबकि टोक्यो ओलंपिक एक साल के लिए स्थगित हो गये हैं और यह नहीं पता कि अगले साल भी वो होंगे या नहीं होंगे, ऐसे में 38 वर्ष की हो रहीं मैरी काॅम का कॅरियर समाप्ति की ओर बढ़ चला है. दरअसल मैरी काॅम ने जिस 51 किलो भार वर्ग में क्वालीफाई किया है, उस स्तर पर उनका वेट बना रहना संभव नहीं है और न ही लगातार ट्रेनिंग मोड में रहना संभव है. पहले से ही उनकी जगह लेने के लिए हिंदुस्तान में कई दूसरी महिला मुक्केबाज मौजूद हैं.

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यही हाल कुछ वैश्विक खिलाड़ियों का भी है. अपने जीवन के 40वें साल में चल रहे दुनिया के अभूतपूर्व टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर जिन्हें दुनिया एक चमत्कार की तरह देखती है और उन्होंने अपने चाहने वालों को 20 गैंडस्लैम सहित 101 टेनिस के अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीतकर बार बार यह धारणा बनाने का मौका भी दिया है. शायद इस कोरोना कहर के बाद उनकी भी बिना किसी समारोह विदाई हो जाए. यही नहीं अगर इसी क्रम में 15 गैंडस्लैम जीत चुके नोवाक जोकोविच और 18 गैंडस्लैम सहित 82 खिताब जीत चुके राफेल नाडाल का कॅरियर भी कोरोना के कहर का शिकार हो जाए तो किसी को बहुत आश्चर्य नहीं होना चाहिए. हिंदुस्तान में सानिया मिर्जा और सानिया नेहवाल दोनो के कॅरियर पर भी कोरोना का कहर टूट सकता है. इसी तरह क्रिकेटरों में इशांत शर्मा भी अगर कोरोना के बाद अपनी तेजरफ्तार गेंदों के साथ न दिखें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि तमाम सीनियर खिलाड़ियों के सिर पर कोरोना ने रिटायरमेंट की तलवार लटका दी है, भले वे इस कोरोना के पहले तक अपनी शानदार लय में रहे हों.

खुदकुशी की राह

किसानों की आत्महत्याओं के मामले वर्षों से सुर्खियां बनते रहे हैं, क्योंकि खेती लगातार अच्छी रहेगी इस की गारंटी नहीं है और इसलिए किसान अकसर कर्ज में डूबे रहते हैं. अनपढ़ किसानों को बैंकों के बावजूद साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता है और न चुका पाने पर आत्महत्या ही अकेला रास्ता बचता है. अब यही ट्रैंड पढ़ेलिखे युवाओं में भी दिखने लगा है.हर थोड़े दिनों में बीवीबच्चों वाले युवा द्वारा सभी घर वालों को मार कर आत्महत्या कर लेने के मामले सामने आने लगे हैं.

नोटबंदी के बाद व्यापार में जो हाहाकार मचा है और बेरोजगारी बढ़ी है उस से ये आत्महत्याएं ज्यादा होने लगी हैं. मार्च के पहले सप्ताह में हैदराबाद के सौफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी बीवी और 2 बच्चों को मार कर आत्महत्या कर ली, क्योंकि उस पर क्व22 लाख से ज्यादा का कर्ज चढ़ा हुआ था.उस ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उसे अपने मातापिता का खयाल रखना था, पर वह उन्हीं पर निर्भर होने लगा था. वह नौकरी छोड़ कर व्यापार करना चाहता था, पर जो भी उस ने किया उस में घाटा हुआ और उसे कोई रास्ता नहीं दिख रहा था कि वह कर्ज चुका सके.1991 के आर्थिक सुधारों के बाद देश में नौकरियों और व्यापारों की बाढ़ आ गई थी. परेशान नौकरी देने वाले होते थे कि न जाने कब उन का होनहार कर्मचारी छोड़ जाए, वेतन वृद्धि भी हो रही थी और व्यापार फूलफल रहे थे.

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2014 के बाद यह आशा धीरेधीरे निराशा में बदलने लगी. व्यापार चलाना मुश्किल होने लगा. नियमकानून सख्त होने लगे. बैंकों का दीवाला पिटने की नौबत आने लगी. साहूकारों तक को मुश्किल होने लगी, क्योंकि उन का पैसा भी डूबने लगा.वे कर्ज देते पर वसूली के लिए हर हथकंडा अपनाते और जिस ने लिया और अगर उसे घाटा हो गया तो सिवा खुदकुशी के उसे और कोई रास्ता नहीं दिखता. पहले लोग खुद मरते थे और बीवीबच्चों को मातापिता के हवाले कर जाते थे, अब पूरा परिवार साथ मरने लगा है. जिम्मेदार युवा हताश हो जाते हैं पर जानते हैं कि उन के बिना उन के बीवीबच्चों को कोई नहीं पालेगा. उन्हें भटकता न देखने के लिए वे आत्महत्या से पहले उन्हें मार देते.

हैदराबाद का 36 वर्ष का यह युवा आईबीएम जैसी कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर था. जब उस जैसे इस तरह निराश हो चले हों तो देश का क्या हाल हो रहा होगा इस का अंदाजा लगाया जा सकता है. देश को धर्म की पट्टी तो रोज पढ़ाई जा रही है पर कर्म के रास्ते न कोई बना रहा है न औरों को बनाने दिए जा रहे हैं. लाखों बेरोजगार युवाओं में से कितने दंगाई बनेंगे, गुंडेचोर बनेंगे, कितने आत्महत्या करेंगे और कितने सड़कों पर आ जाएंगे इस का तो अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता.

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19 दिन 19 टिप्स: गंजेपन से बचाएं 11 गुणकारी तेल

हेयरस्टाइल किसी के भी लुक को निखार सकता है, मगर यदि बाल झड़ने या कमजोर होने लगें तो उन्हें स्टाइल करने में मुश्किल आती है. जानिए, इस समस्या से निबटने में कौनकौन से तेल आप के काम आ सकते हैं:

1. प्याज का तेल:

प्याज का तेल बालों के लिए वरदान है. प्याज के तेल में ऐंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. इस कारण यह स्कैल्प में होने वाले किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाव कर बालों का झड़ना रोक सकता है. इस में प्रचुर मात्रा में सल्फर होता है, जो स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन में सुधार कर नए बालों को उगने में मदद करता है.

2. अरंडी का तेल:

इस में राइसिनोलिक ऐसिड, ओमेगा-6 और फैटी ऐसिड, विटामिन ई और मिनरल्स जैसे पोषक तत्त्व मौजूद होते हैं. यह तेल बालों को न सिर्फ बढ़ने में मदद करेगा, बल्कि दोमुंहे बालों से भी छुटकारा दिलाएगा और उन्हें घना और काला भी बनाएगा.

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3. आर्गन का तेल:

इस तेल में फैटी ऐसिड और विटामिन ई के कई पोषक तत्त्व पाए जाते हैं, जो स्कैल्प के लिए मौइस्चराइजर का काम करते हैं और डैंड्रफ व ड्राई स्कैल्प से लड़ने में मदद करते हैं. ये बालों को मजबूत बनाते हैं और बालों के दोमुंहा होने की समस्या से भी छुटकारा दिलाते हैं.

4. जोजोबा का तेल

यह तेल बालों को मजबूत और खूबसूरत बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है. इस में मौजूद विटामिन ई और बी बालों को चमकीला और घना बनाते हैं. सिर में होने वाली खुजली और रूसी को भी यह तेल दूर करता है.

5. नारियल का तेल:

यह तेल बालों को बढ़ाने के अलावा उन्हें स्वस्थ, मुलायम और चमकदार भी बनाता है. इसे एक कंडीशनर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि यह विटामिन ई और ऐंटीऔक्सीडैंट से समृद्ध है. यह गरमी के नुकसान से बालों की रक्षा करता है और रूखे व बेजान बालों में चमक भी लाता है.

6. चंदन का तेल:

इस तेल की खुशबू से बालों की जड़ों में मौजूद ओआर2ऐंटी4 नाम के ‘स्मैल रिसैप्टर’ सक्रिय हो जाते हैं. इस से रिसैप्टर नए बाल उगाने में सक्षम कैरोटिन प्रोटीन का उत्पादन बढ़ा देते हैं, जिस से बाल तेजी से उगने लगते हैं.

7. गुलाब का तेल:

इस तेल के ऐंटीसैप्टिक गुण बैक्टीरिया और गंदगी से निबटते हैं, इसलिए साफ किए गए रोम शक्तिशाली होते हैं और बालों का झड़ना बाधित होता है, साथ ही इस की सुगंध तनाव को कम कर आप को शांत बनाती है.

8. सूरजमुखी का तेल:

इस तेल में विटामिन ई होता है, जिस से बाल लंबे, घने, काले और चमकदार होते हैं. विटामिन ई से न केवल ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, बल्कि बालों की जड़ों को पोषक तत्त्व भी मिलते हैं.

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9. जवाकुसुम

इस में विटामिन सी, कैल्सियम, वसा, फाइबर और आयरन भरपूर मात्रा में होता है. यह बालों को मजबूती देने के साथसाथ उन की ग्रोथ में भी मदद करता है. इस के अलावा बालों से संबंधित अन्य परेशानियों जैसे डैंड्रफ, बालों का असमय सफेद होना आदि से भी बचाता है.

10. शीया बटर:

इस में जिंक और विटामिन बी की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है, जिस से बाल झड़ने से राहत मिलती है. यह सूर्य की हानिकारक किरणों से बालों की सुरक्षा करता है, साथ ही रूखे बालों को पोषण और नमी प्रदान कर दोमुंहे बालों को खत्म करने में भी मदद करता है.

11. आम का बटर:

यह फैटी ऐसिड और अन्य विटामिनों से भरपूर एक प्रभावी स्कैल्प कंडीशनर के रूप में काम करता है, जो नमी को बनाए रखता है और बालों के झड़ने को कम करता है. यह बालों को सूखने से भी बचाता है और उन्हें घना, मुलायम और चमकदार बनाता है.

ये सभी तेल बालों के लिए बहुत गुणकारी हैं. इन्हें अलगअलग भी इस्तेमाल किया जा सकता है. पर इन सब की खूबियां एक ही में मिल जाएं और वह भी सही मात्रा में, तो आप को बालों की सभी समस्याओं जैसे गंजापन, बालों का झड़ना, रूसी, दोमुंहे बाल आदि से निजात मिल जाएगी.

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दूसरी मुसकान: भाग-1

गुलमोहर और अमलतास के पेड़ों की अनवरत कतारों के बीच चिकनी काली, चमकीली सड़क दूर तक दिखाई देती है. जगहजगह सड़क के किनारे लैंपपोस्ट लगे थे. उसे इन की पीली रोशनी हमेशा से रहस्यमयी लगती रही है. सड़क की दोनों ओर पैदल चलने वालों के लिए चौड़ी पटरी बनी है. कैंट की इस सड़क से पिछले कई वर्षों से उस का सुबहशाम का वास्ता है.

पिछले 8 वर्षों में यही नौकरी है, जो मुसल्सल 2 सालों से चल रही है वरना कहीं

8-9 महीने तो कहीं सवा साल. बस फिर किसी न किसी वजह से या तो नौकरी उसे बायबाय कह देती या फिर वह खुद नौकरी से विदा ले लेती.

न जाने क्यों इन गुलमोहर के पेड़ों नीचे से गुजरते समय उस के अंदर कुछ पिघलने सा लगता है. अब ही नहीं वर्षों पहले भी ऐसा ही होता था. जब वसंत उस की जिंदगी में आया तो ढेरों फूल खिल गए थे उस के आंचल में, वजूद महकने लगा था.

‘‘तुम्हें पता है, मुझे वसंत पसंद है,’’ वह खोईखोई सी कहती.

‘‘अच्छा,’’ वसंत उसे शरारती नजरों से देखता तो वह शर्म से लाल हो जाती.

‘‘मैं, मौसम की बात कर रही हूं.’’

‘‘मैं भी,’’ वही शरारत और गालों के भंवर, जिस में उस ने खुद को खो सा दिया था.

कंपनी पार्क के आगे लगी बड़ी सी घड़ी ने 6 बजने की सूचना दी तो वह वर्तमान में लौट आई. कदम कुछ तेजी से आगे बढ़ने लगे.

घर पहुंची तो देखा शुभी होमवर्क करने में व्यस्त थी.

‘‘मेरी बच्ची खूब मन लगा कर पढ़ो,’’ उस ने प्यार से शुभी के सिर पर हाथ फेरा और फिर बैग सोफे पर रख कर सीधा रसोई में चली आई. उसे घर पहुंचते ही चाय चाहिए. चाय की बड़ी तलब है उसे, पर जिस से यह आदत लगी, उस के साथ बैठ कर सुकून से चाय पीए हुए मुद्दत हो गई.

‘‘अरे, यह क्या? चाय तो पहले से ही रैडी है. साथ में प्लेट में कुछ नमकीन भी रखा है,’’ उस के होंठों पर मुसकराहट फैल गई.

तब पीछे से शुभी ने लाड़ से गले में बांहें डाल दीं. उसे अच्छी तरह मालूम है कि यह लाड़ क्यों हो रहा है. मगर प्रत्यक्ष में उस ने शुभी को चूम लिया. सच बच्चों के छोटेछोटे मतलब भी मांओं को सुकून देते हैं.

शुमी चाय की ट्रे उठा कर ड्राइंगरूम में आ गई. वह चाय पीते हुए शुभी को गौर से देखने लगी. शुभी न जाने किधरकिधर की बातें सुनाने में लगी हुई थी. वह जानती है, चाय खत्म होने से पहले शुभी मतलब की बात पर आ ही जाएगी.

‘‘ममा, प्लीज मुझे भेज दो न पिकनिक पर, कल पैसे जमा करने की लास्ट डेट है. प्लीज ममा, फिर आगे से चाहे कहीं मत भेजना. प्लीज ममा, नीता और शालू भी तो जा रही हैं… पूरी क्लास है, प्लीज ममा.’’

‘‘शुभी, मैं ने पहले ही कह दिया था किसी पानी वाली जगह मैं तुझे नहीं भेजूंगी,’’ शुमी झुंझला उठी.

‘‘उफ ममा, मैं कोई बच्ची हूं जो पानी में गिर जाऊंगी? आप कहीं भी ले कर नहीं जाते हो… अब स्कूल की तरफ से जा रहे हैं तो भी न जाओ,’’ और फिर शुभी रोने लग पड़ी.

शुभी को रोता देख कर शुमी का भी मन किया कि वह भी शुभी को गले लगा कर जी भर कर रोए पर यह कोई नई बात नहीं थी. पिछले कई सालों से वह अकेले ही इस सब का सामना करती आई है.

वह जानती है कि शुभी की पूरी क्लास पिकनिक पर जा रही है और वह भी अब कोई बच्ची नहीं है. 7वीं कक्षा में है. मगर उस के लिए तो वह अभी भी नर्सरी में पढ़ने वाली बच्ची ही है. शुभी को ले कर वह हमेशा असुरक्षित रहती है.

वह शुभी के आंसू नहीं देख सकती थी. अत: उठ कर प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरा. उस की जबान साथ नहीं दे रही थी. ‘यों कब तक शुभी को बांध कर रखेगी?’ वह खुद से ही सवाल करती है. वह चाहती है कि शुभी मजबूत बने, अपने पांवों पर खड़ी हो…अगर कुछ सालों बाद किसी कोर्स के लिए उसे शहर से बाहर जाना पड़ा तो क्या वह नहीं जाने देगी? रोक लेगी उसे? फिर अगर उस की जिंदगी में भी कोई वसंत आ गया तो? नहींनहीं उस की बच्ची को तो अभी ऊंची उड़ान भरनी है. वह खुद को ही तसल्ली दे रही थी. वह जानती है कि वह शुभी के मामले में ओवर प्रोटैक्टिव है. फिर उस ने शुभी का माथा चूम लिया.

‘‘सुबह अपनी क्लास टीचर से मेरी बात करा देना,’’ यह सुन कर शुभी खुशी से खिल उठी थी.

सुबह शुभी उस के उठने से पहले ही उठ गई. जल्दीजल्दी तैयार हो कर उस के पास

किचन में आ गई. फिर वही गले में बांहें डालने वाला लाड़.

वह मुसकान ही थी पर कभीकभी मुसकराहटें भी कितनी फीकी होती हैं, यह उस ने वसंत के इश्क में मर कर जाना था.

शुभी के हाथों में पैसे रखते हुए उस ने चेतावनी दी कि अपनी टीचर से मेरी बात जरूर करवाना वरना पिकनिक कैंसिल. शुभी उस के गालों को चूम कर तुरंत घर से निकल गई. वह उसे आंखों से ओझल होने तक एकटक देखती रही.

 

शुभी का निकलता हुआ कद और गालों में पड़ते भंवर वसंत जैसे अपनी कार्बन

कौपी छोड़ गया था उस के पास. शादी के 2 साल बाद बड़ी मुश्किल से उम्मीद जगी थी कि वह मां बनने वाली है. बच्चा भी जैसे उस ने भीख में ही मांगा था वसंत से, पर इस खुशी की खबर ने जैसे पंख लगा दिए थे. उस ने वसंत की मुसकराती तसवीर हर कमरे में फ्रेम करवा कर रख दी थी.

‘‘मुझे तुम्हारे जैसा बेटा ही चाहिए वसंत,’’ वह वसंत के सीने पर सिर रख कर प्यार से बोलती.

‘‘और अगर बेटी हुई तो?’’

‘‘नहीं, बेटा ही होगा.’’

‘‘अच्छा, तुम दुनिया की पहली औरत हो जो बेटी की मुखालफत कर रही है.’’

‘‘नहीं, ऐसा नहीं है, मगर पहला बेटा ही होना चाहिए.’’

‘‘पहला मतलब? अभी और बच्चे चाहिए… महंगाई देखी है…’’ वसंत का वही ठहरा हुआ जवाब.

‘‘हद है, मकान तुम्हें बनाबनाया मिल गया. घर में भी सब कुछ है. अब क्या तुम बच्चों को पालपोस भी नहीं सकते? तुम्हें बच्चे अच्छे नहीं लगते? महंगाई में क्या लोग बच्चे पैदा नहीं करते?’’ वह खीज जाती, मगर वसंत की वही खामोशी उस की बात शुरू होते ही दम तोड़ देती और नतीजे पर नहीं पहुंचती. वही गुलमोहर और अमलतास की कतारें…रोज उस का मन पंछी की तरह डालडाल पर अटकता हुआ चलता है.

यह सड़क सीधी चर्च रोड से मिलती है और चर्च रोड शुरू होते ही कोने में पुरानी किताबों की दुकान, उस की बगल में रोजमैरी रैस्टोरैंट, जिस में न जाने कितनी शामें उस ने और वसंत ने एकसाथ बिताई थीं. आगे विलियम गेट. उस के आगे कंपनी गार्डन. उस से कुछ दूरी पर सैंट सोफिया इंटरमीडिएट स्कूल, जहां उस ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी और वसंत से भी तो यहीं मिली थी.

मन फिर अतीत में भटकते लगा. पहली बार उस ने वसंत को स्कूल कैंपस में कैंटीन

के बाहर खड़ा देखा था. निकलता हुआ कद, गेहुंआ रंग, बड़ीबड़ी गहरी आंखें, पैंट की जेब में हाथ डाले वह बेखयाली से इधरउधर देख रहा था.

कैंटीन के कोने में खड़ी जाने क्यों वह उसे एकटक देखने लगी. उम्र का वह पड़ाव जिस में अनायास ही कोई अपनी तरफ खींचता है… वह भी खिंच रही थी, इस बात से बेखबर कि रोमा कब से उस के पीछे आ खड़ी है. रोमा ने उस की चिकोटी काटी तो उस की चीख निकल गई.

कुछ दूर खड़े वसंत की नजरें आवाज की दिशा में उठीं और उस से टकरा गईं. वह मुसकरा दिया. मुसकराते ही उस के गालों पर भंवर खिलने लगे और वह उन भंवरों में ऐसी खोई कि खुद को कभी तलाश ही नहीं कर पाई.

दूसरे दिन खुद को लाख रोकने के बावजूद वह फिर उसी वक्त कैंटीन के बाहर थी. वसंत वहीं खड़ा था, मगर आज बेखयाल नहीं, कुछ सचेत सा था. उस के ख्वाबों में फूल खिलने लगे थे.

अब मुलाकातें स्कूल से बाहर होने लगी थीं. हफ्ते में 2-3 बार ही मिल पाती थी. शनिवार ही को होस्टल से बाहर निकलने की इजाजत थी. रोज निकलना मुमकिन नहीं था. होस्टल वार्डन एक युवा महिला थी. ज्यादा रोकटोक नहीं करती थी. इसीलिए इतना भी मिल पाते थे. वह जानती थी इस उम्र का पानी अपने बहने का रास्ता ढूंढ़ ही लेता है.

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एक महीने पहले ही सीक्रेट कोर्ट मैरिज कर चुका है ये टीवी कपल, देखें फोटोज

टीवी सीरियल ‘तुझ संग प्रीत लगाई सजना’ कपल पूजा बनर्जी (Puja Banerjee) और कुणाल वर्मा (Kunal Verma) इन दिनों सुर्खियों में हैं. हाल ही में खबर थी दोनों जल्द ही शादी करने वाले हैं, लेकिन अब पूजा और कुणाल की एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें पूजा ने खुलासा किया है कि दोनों ने पहले ही कोर्ट मैरिज कर ली है. आइए आपको बताते हैं. आइए आपको बताते हैं कि क्या है पूरा मामला…

कोर्ट मैरिज की फोटोज की शेयर

 

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This is a pic from last year durga puja sindoor khela. TODAY WAS SUPPOSED TO BE OUR WEDDING BUT THE SITUATION IS SUCH THAT WE HAVE CANCELLED ALL OUR CEREMONIES ALTHOUGH WE HAD REGISTERED OUR MARRIAGE BEFORE A MONTH SO WE ARE OFFICIALLY MARRIED AND TOGETHER FOREVER NOW. WITH THE BLESSING OF OUR PARENTS AND GRANDPARENTS WE STARTING OUR NEW LIFE NEED ALL OF UR BEST WISHES. OUR FAMILY IS HAPPY AND SO ARE WE BUT GIVEN CIRCUMSTANCES OUR HEART GOES OUT TO ALL THE PEOPLE WHO ARE FIGHTING FOR THEIR LIVES RIGHT NOW AND TO ALL THE FAMILIES WHO LOST THEIR LOVED ONES . OUR PRAYERS WITH ALL OF YOU AND A SMALL CONTRIBUTION FROM OUR SIDE AS THE MONEY WE WERE TO SPEND FOR OUR MARRIAGE FUNCTION WE ARE DONATING TO PEOPLE WHO ARE IN NEED NOW 🙏 THIS IS NO TIME TO CELEBRATE BUT WE WILL CELEBRATE WITH OUR LOVED ONES ONCE THE WORLD BECOMES A HAPPY PLACE AGAIN.🙏 JAI MATA DI

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पूजा बनर्जी (Puja Banerjee) ने कुणाल वर्मा के साथ ली गई एक पुरानी फोटो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा ‘ये तस्वीर पिछले साल दुर्गा पूजा के दौरान हुए सिंदूर खेला की है.’ आज हमारी शादी होने वाली थी, लेकिन लौकडाउन की स्थिति को देखते हुए हमें इसे कैंसल करना पड़ा. हमने एक महीने पहले ही हमारी शादी को रजिस्टर करवा लिया था तो हम दोनों आधिकारिक तौर पर शादीशुदा हैं. माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों का आर्शीवाद लेकर हमने अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर दी है और अब आप लोगों की शुभकामनाएं भी चाहिए. हमारा परिवार खुश है और हम भी काफी खुश हैं.

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कोरोनावायरस पीड़ितों के लिए की दुआ

 

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Happy diwali from us

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कोरोनावायरस पीड़ितों के लिए पूजा बनर्जी ने आगे लिखा ‘कोरोना वायरस से जो लोग लड़ रहे है या फिर जो लोग अपनों को खो चुके हैं, उनके हम काफी दुखी हैं. हमारी सारी दुआएं आप सभी के साथ हैं. ये समय खुशियां मनाने का नहीं है. हम हमारी शादी में जो खर्चे करने वाले थे, उसे उन लोगों को दान करना चाहते है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरुरत है. हम खुशियां मनाएंगे लेकिन जब सब कुछ अच्छा हो जाएगा तब…जय माता दी.’

बता दें, पूजा बनर्जी (Puja Banerjee) और कुणाल वर्मा (Kunal Verma) की पहली मुलाकात शो के सेट पर हुई थी, जिसके बाद 10 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद 2017 में सगाई कर ली थी. वहीं पूजा बनर्जी ने इस साल वूमन्स डे के मौके पर शादी की घोषणा की थी. इसी बीच उनके ब्रेकअप की खबरें भी आई थी.

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#lockdown: फैमिली के लिए बनाएं पालक कोफ्ता

पालक आयरन से भरपूर होता है. अगर आप अपनी फैमिली को हेल्दी और टेस्टी रेसिपी ट्राय करना चाहते हैं तो पालक कोफ्ता आपके लिए बेस्ट औप्शन है.

हमें चाहिए

– कोफ़्ता के लिए

– ब्रेड स्लाइस (02 नग)

– पनीर (1/2 कप कद्दूकस किया हुआ)

– मैदा (1/2 कप)

– मकई (1/4 कप उबला हुआ)

– बेकिंग पाउडर (चुटकी भर)

– हरी मिर्च (02 नग कटी हुई)

– धनिया पत्ती (01 बड़ा चम्मच कटी हुई)

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– काली मिर्च पाउडर (1/2 छोटा चम्मच)

– काजू (2 छोटे चम्मच)

– दही  (03 बड़े चम्मच)

– नमक (स्वादानुसार)

ग्रेवी के लिए-

– पालक (04 कप कटा हुआ)

– हरी मिर्च (01 नग कटी हुई)

– अदरक (02 छोटे चम्मच बारीक कटा हुआ)

– तेल (02 बड़े चम्मच)

– धनिया पाउडर (01 छोटा चम्मच)

– लाल मिर्च पाउडर (1/2 छोटा चम्मच)

– गरम मसाला पाउडर (1/4 छोटा चम्मच)

– नमक (स्वादानुसार)

ग्रेवी पेस्ट के लिए-

– प्याज (3/4 कप कटा हुआ)

– टमाटर (3/4 कप कटे हुए)

– लौंग (02 नग)

– छौंक के लिए-

– घी (01 बड़ा चम्मच)

– अदरक (01 टुकड़ा)

– प्याज (मीडियम साइज की, बारीक कटी हुई)

पालक कोफ्ता बनाने की विधि :

– इसके लिए ब्रेड के किनारों को हटा कर उन्हें दही में डुबा दें.

– 10 मिनट के बाद उसमें मैदा को छोड़कर कोफ्ता वाली सारी सामग्री डाल कर अच्छी तरह से मिला लें.

– सारी सामग्री एकसार हो जाने के बाद उसे 12 हिस्सों में बांट कर कोफ़्ते जैसा बना लें.

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– उसके बाद कोफ्तों को मैदे से अच्छी तरह से लपेट लें और कढ़ाई में तेल गर्म करके सुनहरा होने तक  तल  लें.

– अब ग्रेवी की तैयारी करेंगे, इसके लिए पालक हरी मिर्च और अदरक को कुकर में डाल कर थोड़ा सा पानी   मिलायें औेर एक सीटी लगा दें.

– इसे ठंडा करने के बाद मिक्सर में पीस कर पेस्ट बना लें.

– इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म करके उसमें प्याज को भून लें.

– प्याज भुन जाने पर उसमें टमाटर का पेस्ट मिलाएं और उसे भी भून लें.

– धनिया, लाल मिर्च पाउडर और नमक मिलाकर उसे 2 मिनट तक पकायें.

– इसके बाद 1/2 कप पानी कड़ाही में डालें और धीमी आंच पर 6-7 मिनट तक पकायें.

–  इसके बाद कोफ्ता को ग्रेवी में डालें और उबाल आने तक पका लें.

– कोफ्ता तैयार होने के बाद छौंक के लिए निकाली गयी सामग्री को एक छोटे पैन में डालें और तेज आंच   में  2 मिनट तक पका लें.

– इसे पकाने के बाद कोफ्ता के उपर से डाल दें.

दूसरी मुसकान: भाग-2

वह बेसब्री से शनिवार का इंतजार करती, खुद को सजातीसंवारती. उसे वसंत के साथ अपनी हर मुलाकात पहली मुलाकात ही लगती. देर तक हाथों में हाथ डाले वे इन्हीं लंबी सड़कों पर घूमा करते. गुलमोहर गवाह हैं इन के प्यार के. वह वसंत के सीने पर सिर रखती तो वह उसे अपनी मजबूत बांहों में जकड़ लेता. वह धीरेधीरे पिघलने लगती. उसे लगता उस के बदन की ताप से गुलमोहर भी सुलग उठेंगे. चांदी के दिन थे वे…इतना कीमती और सुनहरा वक्त हमेशा कहां जिंदगी में रहता है.

उस का स्कूल खत्म होने वाला था और वापस अलवर जाने का वक्त आ गया था. मांबाबूजी तो वक्त से पहले ही इस दुनिया से उठ गए थे. इसलिए उस की सारी जिम्मेदारी हेमा दी और रमन जीजाजी के ऊपर आ पड़ी थी. वह लगातार रोए जा रही थी.

‘‘वसंत कुछ करो, मुझे वापस नहीं जाना.’’

‘‘रोओ मत, कुछ करते हैं. ऐसे तो मैं भी तुम्हें नहीं जाने दूंगा…पगली अभी तो वक्त है…कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा.’’

इंटर के पेपर हो चुके थे. रिजल्ट आने में अभी वक्त था. बिना मार्कशीट कहीं भी दाखिला नहीं होना था. पेपरों के बाद छुट्टियां पड़ रही थीं. वही वापस जाने की मुसीबत. कैसे खुद को जाने से रोके, वह सोच रही थी.

इसी बीच स्कूल की तरफ से 10वीं और 12वीं कक्षा के स्टूडैंट्स के लिए हौबी क्लासेज शुरू होने की खबर आई. स्कूल इस के लिए कुछ ऐक्सट्रा चार्ज कर रहा था. मगर उस की तो मुंहमांगी मुराद पूरी हो गई कि वह अब कोई भी हौबी क्लास जौइन कर लेगी. अलवर वापस जाने से बच जाएगी.

हेमा दी फोन पर बहुत नाराज हुई थीं. कई बार उसे लौटने के लिए कहा था. मगर फिर उस की जिद के आगे चुप हो गई थीं. 2 महीने तफरी में बीत गए. हौबी क्लास में क्या सीखा कुछ पता नहीं. सोनेचांदी के दिन यों ही गुजरते हैं. रिजल्ट आया तो पास हो गई थी. वसंत ने रोजमैरी रैस्टोरैंट में सब को शानदार पार्टी दी.

‘‘मुझे कुछ और भी चाहिए,’’ उस ने वसंत की आंखों में आंखें डाल कर शोखी से कहा था.

‘‘हां, बोलो,’’ वसंत ने उस के चेहरे पर गिर आई लटों को अपनी उंगलियों से संवारते हुए पूछा. वसंत के स्पर्श से वह बेसुध होने लगी थी. बोली, ‘‘मुझे कहीं मत जाने देना.’’

‘‘वादा तुम्हें कहीं नहीं जाने दूंगा.’’

 

और सच में वह कहीं नहीं जा पाई थी. वसंत ने उस के रहने का बंदोबस्त एक होस्टल

में कर दिया था. उस होस्टल को एक क्रिश्चियन महिला विलियम चलाती थी. होस्टल के पास ही फैशन इंस्टिट्यूट था, जहां रोमा की सिस्टर कोर्स कर रही थी. यह आइडिया भी वसंत का ही था कि वह कोर्स कर ले. बीए की पढ़ाई तो वह प्राइवेट भी कर सकती है. उसे आइडिया पसंद आया. हेमा दी को रुकने की एक ठोस वजह बता पाएंगी.

होस्टल के कमरे में हेमा दी उस पर बरस रही थीं, ‘‘तेरा दिमाग खराब हो गया है… क्या रखा है इस शहर में जो तू यहां से जाना नहीं चाहती? तेरी जिद्द थी, इसलिए हम ने तुझे यहां होस्टल में रह कर पढ़ने की इजाजत दी. तेरे जीजाजी तो तब भी नहीं मानते थे और अब तो बिलकुल भी नहीं. फिर तेरे लिए एक रिश्ता भी देखा हुआ है. खातापीता परिवार है. लड़का तेरे जीजाजी का देखाभाला है. पढ़ाई पूरी होते ही हम तेरी शादी कर देंगे. वक्त से अपने घर चली जाओगी तो हमारी भी जिम्मेदारी और चिंता खत्म होगी.’’

हेमा दी बोले जा रही थीं. वह सिर झुकाए बस सुन रही थी. बचपन से वह ऐसे ही करती थी. कोई बहस नहीं, जवाब नहीं. चुप रह कर अपनी सारी बातें मनवाती आई थी. अब भी यही होना था और हुआ. हेमा दी को झुकना पड़ा. फिर रोमा और उस के परिवार ने उन्हें तसल्ली दी थी कि वे उस का ध्यान रखेंगे.

हेमा दी भारी मन से सौ हिदायतें दे कर लौट गईं. उन के जाते ही हफ्ते भर बाद जीजाजी आ गए. नाराज थे मगर प्रत्यक्ष में उस के रहने, खाने और पढ़ाई से संबंधित सारा इंतजाम बड़े ध्यान से चैक कर रहे थे. फिर उस के नाम का एक अकाउंट खुलवा कर लौट गए.

वक्त गुजरने लगा था. वह खुश थी. बीए प्राइवेट कर रही थी. फैशन डिजाइनर के कोर्स में उस का खूब मन लग रहा था. कपड़ों की रेशमी रंगबिरंगी दुनिया में वह अपने नाजुक मन की कल्पनाओं से खूब रंग भरती. यह काम उस के नेचर के मुताबिक ही था. वसंत उस के बनाए कपड़ों को गौर से देखता और फिर मुसकरा देता. उस के बिना कुछ कहे ही वह खुशी से भर जाती.

2 साल गुजर चुके थे और यकीनन वह 7वें आसमान पर थी. लेकिन अब उसे धीरेधीरे नीचे आना था. बीए का 1 साल रह गया था. फिर यहां रुकने का कोई बहाना नहीं था.

यों ही एक दिन कंपनी गार्डन में घूमते हुए उस ने वसंत से पूछा, ‘‘मुझ से शादी करोगे न? मैं तो अब किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती.’’

वसंत खामोश रहा.

‘‘कुछ बोलो. मुझे डर लगने लगा है.’’

‘‘हांहां, सब हो जाएगा,’’ वसंत ने लापरवाही से कहा.

‘‘हेमा दी पागल नहीं हैं…और जिंदगी भर क्या मैं पढ़ती रहूंगी? शादी की बात कर रही हूं… तुम्हें इस बार उन से बात करनी पड़ेगी.’’

वसंत फिर खामोश रहा.

‘‘हेमा दी अगले महीने आ रही हैं. वे चाहती हैं कि मैं उन के साथ लौट चलूं…पेपरों के वक्त ही यहां लौटूं, तुम इस बार उन से शादी की बात करोगे न?’’ उस ने मनुहार की.

‘‘हांहां, देखा जाएगा… पहले तुम अपनी पढ़ाई तो पूरी करो,’’ वसंत टालने के मूड़ में था. वह खीज गई. देर तक दोनों के बीच खामोशी रही. फिर वसंत ने उसे अपनी तरफ खींच लिया. फिर वही गहरी आंखें और तपता हुआ स्पर्श, जो उस की बरबादी के लिए काफी था.

‘‘कल हेमा दी ने आना है और तुम्हें अभी काम पड़ना था…या दी का सामना ही नहीं करना चाहते?’’ और वह जोरजोर से रोने लगी.

वसंत उसे चुप कराने लगा और आखिर उस ने अपनी दलीलों से उसे मना ही लिया कि अगली बार बात करेगा. वह दी का सामना करने के लिए फिर अकेली खड़ी थी.

इस बार पहली दफा उस ने दी के सामने काफी कुछ झूठ कहा. काफी नाराजगी और चिंता के साथ हेमा दी फिर लौट गईं. उन के जाने के बाद वह फूटफूट कर रो पड़ी. कुछ था जो दिल में उलझ रहा था.

विलियम ने प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरा था, ‘‘तुम ने अपनी सिस्टर को वसंत के बारे में क्यों नहीं बताया?’’ उस के और वसंत के बारे में विलियम सब जानती थी. मगर इस विषय पर वह पहली बार बात कर रही थी.

‘‘बात तो वसंत को करनी चाहिए थी,’’ और वह फिर सिसक पड़ी.

‘‘वह तुम्हारी सिस्टर के सामने क्यों नहीं आया? देखो यह तुम्हारी लाइफ का सवाल है… तुम्हें अब उस से सब कुछ साफसाफ पूछना चाहिए,’’ विलियम ने इस से ज्यादा कुछ नहीं कहा था, मगर कई सवाल वह उस के आसपास छोड़ गई थी.

दूसरे ही दिन वसंत लौट आया, जबकि वह 1 हफ्ते की कह कर गया था. वह

वसंत को देख कर खुश हुई, मगर साथ ही पहली बार उसे कुछ चुभ भी गया कि इतनी ही जल्दी लौट आना था तो 1 दिन बाद चला जाता. दी से बात तो हो जाती. मगर वसंत ने फिर उसे अपने जादू में बांध लिया था.

धीरेधीरे फाइनल परीक्षा का टाइम आ गया. मगर परीक्षा से ज्यादा उस की चिंता यह थी कि वसंत शादी को ले कर चुप्पी साधे हुआ है. वह जानती थी कि उस के यहां से जाते ही उस की शादी कर दी जाएगी. उस का मन करता वसंत खुद उस से शादी की बात करे और उसे सब साफसाफ और सचसच बताए जैसे वह अपने बारे में बताती है.

मगर ऐसा नहीं था. एक दिन उस ने इन्हीं गुलमोहरों के पेड़ों के नीचे वसंत से कहा था, ‘‘एक दिन चली जाऊंगी यहां से… तुम्हें शायद याद भी न आऊं…’’

‘‘क्या जाने की रट लगाए रहती हो… कहा तो है कि कुछ करेंगे.’’

‘‘तुम कुछ नहीं करोगे और इस बार मैं भी नहीं करूंगी,’’ वह संजीदा हो गई.

‘‘शादी के बिना प्यार मुकम्मल नहीं होता क्या? बड़े झमेले हैं मेरी जान…करोगी तो कहोगी पहले ही अच्छे थे,’’ वसंत ने उस के गले में बांहें डाल कर उसे बहलाने की कोशिश की.

‘‘तुम्हें बड़ा पता है शादी के झमेलों के बारे में…कितनी कर चुके हो?’’

‘‘हां, 4-5 तो कर ही ली हैं,’’ वसंत ने आंख दबा कर कहा.

‘‘वसंत प्लीज आज मुझ से साफसाफ बात करो,’’ कहते ही उस की आंखों से आंसू बहने लगे.

वसंत उस के आंसुओं को पोंछते हुए ठहरी सी आवाज में बोला, ‘‘मेरे पास कुछ नहीं है…न घर, न पैसा, काम अभी जमा नहीं है…शादी कर भी लूं तो मेरे साथ रहोगी कैसे?’’

‘‘रह लूंगी. बस तुम शादी के लिए तैयार हो जाओ. मेरे मांबाबूजी की जो संपत्ति है वह मेरी और हेमा दी दोनों की है. शादी के बाद मेरे हिस्से की संपत्ति मुझे मिलेगी…हम उसे बेच घर भी ले लेंगे और तुम अपना बिजनैस भी आगे बढ़ा लेना…’’

वसंत खामोशी से सब कुछ सुनता जा रहा था. अंतत: उस ने शादी के लिए हां कर दी.

यादोें में सफर करतेकरते वह कब औफिस पहुंच गई, उसे पता ही नहीं चला. रोज ऐसा ही होता है. न चाहते हुए भी अतीत के रास्तों में भटकती रहती. औफिस में कदम रखते ही हड़बड़ाता हुआ कबीर उस के पास आया, ‘‘मैडम, आज सुबह से बहुतोें की क्लास लग चुकी है…अब आप की बारी है.’’

उस ने पर्स मेज पर रखा और मेजर आनंद के कैबिन की तरफ बढ़ गई.

‘‘मे आई कम इन सर?’’

‘‘यस, प्लीज.’’

‘‘सर आप ने बुलाया?’’

‘‘बैठो, दीवान एसोसिएशन की पेमैंट का चैक अभी तक नहीं पहुंचा और स्टौक में दालों का स्टौक लगभग खत्म है.’’

‘‘सौरी सर, आज सब हो जाएगा,’’ उस ने धीरे से कहा.

‘‘खैर, कोई बात नहीं. अब देख लेना. और कुछ सोचा जो हम ने कहा था?’’ कह मेजर थोड़ा आंखों ही आंखों में मुसकरा दिए.

उस से जवाब देते न बना.

‘‘मैं बता दूंगी सर,’’ कह कर वह अपने कैबिन में आ कर काम निबटाने लगी. स्टोर का सामान शौर्टलिस्ट करने लगी तो देखा दालों के अलावा भी काफी सामान खत्म था.

काम निबटातेनिबटाते लंच टाइम हो गया. आज वह लंच नहीं लाई थी. अत: स्टोर के ही एक हिस्से में बने कैफे में चली गई. कौफी के साथ ब्रैडरोल खाते हुए खयाल मेजर आनंद की तरफ चला गया.. वही मालिक थे स्टोर के. स्टोर के साथ ही एक इंस्टिट्यूट था, जिस में कई तरह के कोर्स कराए जाते थे. जो लोग फीस नहीं दे सकते थे उन्हें मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती थी और जो फीस दे सकते थे उन्हें बताया जाता था कि उन के पैसों का सदुपयोग कहां किया जाता है. इंस्टिट्यूट सरकार से मान्यताप्राप्त था. अत: काफी चलता था. इस के अलावा मेजर ट्रेड फेयर के द्वारा स्थानीय किसानों और विभिन्न प्रकार के कारीगरों व कलाकारों को भी बढ़ावा देते थे. इस के अलावा वे कई तरह के सामाजिक कार्यों में भी लगे हुए थे. लोग उन की बहुत इज्जत करते थे. सुनने में आया था कि उन की बीवी और बच्चे एक ऐक्सीडैंट में मारे गए थे. तब मेजर ने काफी कम उम्र में ही आर्मी से रिटायरमैंट ले लिया था और अपनी पुश्तैनी प्रौपर्टी जो करोड़ों की थी, को बेच कर उस पैसे को भलाई के कामों में लगा दिया था.

वह जब यहां नौकरी करने आई थी तो उसे लगा था ज्यादा दिन नहीं टिक पाएगी.

आर्मी के लोग बहुत कायदाकानून पसंद होते हैं. मेजर थे भी ऐसे ही. काम में लापरवाही उन्हें पसंद नहीं थी. मगर धीरेधीरे उस के लिए काफी कुछ आसान होता गया था.

बड़ी बात यह थी कि उसे यह महसूस हुआ था कि वह यहां सिर्फ नौकरी नहीं कर रही, बल्कि किसी अच्छे नेक मकसद में हिस्सेदार भी है. उसे मेजर आनंद की बात याद आई. वे उसे शहर से कुछ दूर होने वाले ट्रेडफेयर में ले जाना चाहते थे, जहां से 2 दिन से पहले नहीं लौटा जा सकता था. ऐसा नहीं कि वह पहले फेयर में मेजर और उन की टीम के साथ न गई हो, पर यों

2-3 दिन रुकने के लिए बिलकुल तैयार नहीं थी.

ऐसे सवालों के जवाब उस के पास हमेशा न में ही होते थे. मगर जाने क्यों अब सीधा सा जवाब नहीं दे पा रही थी. इतने सालों बाद उसे भी शायद ब्रेक चाहिए था. कौफी खत्म कर के वह सीधा मेजर आनंद के कैबिन में पहुंची और फिर पूछा, ‘‘कब चलेंगे सर?’’

मेजर मुसकरा दिए फिर कहा, ‘‘इस पूरे महीने में जब तुम्हें सुविधा लगे.’’

वह वापस आ कर काम करने लगी. शाम को घर लौटी. रूटीन कामों से फारिग हो कर वार्डरोब खोल कर देखने लगी. इतने सालों में पसंदनापसंद कहीं खो गई थी. कभी फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था, सोच कर हंसी आती…पर कुछ अच्छा नया खरीदती भी कैसे…जब मन ही खुश नहीं रहता तो तन की खुशी कहां से आती. वह बैड पर लेट गई. मन फिर अतीत में भटकने लगा…

आगे पढ़ें-  कितनी मुश्किल के साथ वसंत से उस की शादी हुई थी. जमीनआसमान…

#coronavirus: इस Lockdown में नए अंदाज में जियें जिंदगी

लॉक डाउन का एक बार फिर से बढ़ जाने से वर्क फ्रॉम होम करने वाले लोग, बच्चे, यूथ और बुजुर्गों के लिए घर पर रहने की परेशानी एक बार फिर बढ़ गयी है. महीनो घर पर रहने के बाद उनकी आदतों में बदलाव न आ जाय, इसे देखने की जरुरत है. नियमित दिनचर्या, सही खान-पान और व्यायाम ही उन्हें अच्छा महसूस करवा सकती है. खासकर मुंबई जैसे शहर में जहाँ लोग दिनभर काम में व्यस्त रहते है. आज कोविड- 19 ने उसकी रफ़्तार को रोक दिया है, लगातार लॉक डाउन ने मुंबई की सूरत को बदल कर रख दिया. आज सड़के और गलियां सब सुनसान पड़ी है, केवल आवश्यक सेवा में लगे लोग और पुलिस ही दिखाई पड़ती है, ऐसे में खुद को और परिवार वालों को स्वस्थ रखना एक चुनौती सबके लिए है. इस बारें में सोच फ़ूड एल एल पी की फाउंडर पूर्वी पुगालिया कहती है कि घर पर रहकर ऑफिस का काम करना और अपनी प्रोडक्टिविटी को बनाये रखना आसान नहीं. इसके साथ पूरे परिवार को भी किसी न किसी रूप में एक्टिव रखना एक चुनौती है.  कुछ सुझाव निम्न है,

  • जब आप वर्क फ्रॉम होम करते है, तो आपके रूटीन को बनाये रखना जरुरी होता है, समय से सोना और जागना पड़ता है. दिनचर्या को पहले की तरह ही बनाये रखना पड़ता है. इसके लिए काम की साप्ताहिक सूची पहले से बनाकर रखना जरुरी है, इसमें लर्निंग, क्रिएटिव प्ले, रिलैक्स करने का समय, फिटनेस, एक्टिविटी आदि को शामिल करना आवश्यक है, अभी घरेलू हेल्प नहीं है, ऐसे में उसे भी कब कैसे करना हे, अपनी सूची में शामिल करें.

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बच्चे अभी स्कूल और कॉलेज नहीं जा रहे है, ऐसे में उनकी पढाई को उस लेवल तक करवाते रहना जरुरी है, पर इसके साथ-साथ उनकी फिटनेस और क्रिएटिविटी को भी बनाये रखना है, ताकि वे बोरियत या अकेलेपन का शिकार न बने, कुछ ऑनलाइन कोर्सेज बच्चों के लिए शुरू करवा दें, जिसे वे उसे एन्जॉय कर सके, टीवी का समय निर्धारण पहले जैसे ही करें, इंडोर गेम को अधिक से अधिक करने के लिए प्रेरित करें, यूथ लड़के और लड़कियां इस दौरान खाना पकाने की विधि, रूम डेकोरेशन, पेंटिंग आदि को सीख सकते है, जो बाद में उन्हें काम आ सकता है.

इस लॉक डाउन में परिवार में हैप्पी मोमेंट्स को क्रिएट करें, जिसमें साथ मिलकर भोजन करना, फिल्में देखना, पुरानी बातों को याद करना, आदि हो, क्योंकि व्यस्त दिनचर्या में परिवार के मूल्य, रिश्तों की अहमियत, धीरे-धीरे ख़त्म होते जा रहे थे, ऐसे में ये समय उसे फिर से तरोताजा बनाने का है.

  • व्यस्त समय जब आप भूखे रहते है, ऐसे में जो भी सामने मिलता है, उसे खा लेते है, अब आपके पास समय है और आप एक हेल्दी और बैलेंस्ड फ़ूड परिवार के लिए बना सकते है, जो आपके मेंटल और इमोशनल हेल्थ के बैलेंस को बनाये रखती है, इसमें फल, दही, मिल्क, नट्स आदि से कई प्रकार के स्मूदी, सलाद और फ्रूट डेजर्ट बनाया जा सकता है, इस तरीके के व्यंजन डाइजेस्ट करने में भी आसान होता है, ये सब काम परिवार के लोग साथ मिलकर करे,ताकि इसका जायका और भी बढ़ जाय.

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  • अगर सीनियर सिटिजन घर में है और वे इस तालाबंदी की वजह से घर से निकलकर वाक् नहीं कर पा रहे है, उनकी फिजिकल एक्टिविटी में कमी आई है, तो उन्हें योगा, प्राणायाम और हल्की फुल्की व्यायाम और घर पर थोडा टहलने की जरुरत है,इससे उनकी इम्म्युनिटी बढेगी और उनकी लंग कैपासिटी भी अच्छी रहेगी, ऑक्सीजन का संचार सही ढंग से होगा और उनकी मूड स्विंग कम होगी.

9 टिप्स : क्या आप गरमियों के लिए तैयार हैं

तापमान धीरे धीरे बढ़ने लगा है और देखते ही देखते गर्मी आ जाएगी. इसलिए ज़रूरी है कि हम इस मौसम के लिए तेयार रहें, हममें से ज़्यादातर लोगों के लिए गर्मी कई समस्याएं लेकर आती है, धूप और पसीने के साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं आने लगती हैं. गर्मियों में खाने पीने की आदतों से लेकर स्किन की देखभाल और यात्रा आदि सभी की योजना सोच-समझ कर बनानी चाहिए, इस मौसम के अनुसार जीवनशैली में ज़रूरी बदलाव लाने चाहिए. यहां हम कुछ सुझाव लेकर आए हैं, जिनके द्वारा आप अपने आप को आने वाली गर्मियों के लिए तैयार कर सकते हैं.

1. हल्का खाएं

गर्मियों में मसालेदार भोजन का सेवन न करें, इस मौसम में ऐसा खाना पचाना मुश्किल होता है. हल्का आहार लें, पेट में कुछ जगह खाली छोडें- बहुत ज़्यादा पेट भर न खाएं. खाने के लिए एक दिनचर्या बनाएं और एक या दो बार भारी खाने के बजाए कम मात्रा में बार-बार खाएं. सुनिश्चित करें कि आपका आहार हल्का लेकिन पोषण से भरपूर हो.

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2. मौसमी फल और सब्ज़ियां खाएं

मौसमी फल और सब्ज़ियां आपको मौसमी बीमारियों से लड़ने की ताकत देती हैं. इनमें उचित पोषक पदार्थ होते हैं जो बीमारियों से लड़ने में मदद करते हें.

अगर आपके पास पूरा फल खाने का समय नहीं है तो इसको जूस पीएं. आप फल या सब्ज़ियों को ब्लेंडर में चलाएं, ये पोषण का अच्छा स्रोत हैं. हालांकि आप चाहे कितने भी व्यस्त हों जूस के टेट्रा पेक न चुनें, इनमें बहुत ज़्यादा चीनी और प्रीज़रवेटिव होते हैं जो सेहत के लिए अच्छे नहीं हैं.

3. बहुत सारा पानी पीएं

शराब या कोल्ड ड्रिंक के सेवन से बचें. इसके बजाए सादा पानी पीएं या चाहें तो पानी में थोड़ा चीनी और नमक मिला लें. इससे न केवल आपके शरीर में हाइड्रेशन बना रहेगा, बल्कि इलेक्ट्रोलाईट संतुलन भी बना रहेगा.

4. स्क्रब करें

गर्मियों में अपनी हाइजीन का ध्यान रखना ज़रूरी है, एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है. स्क्रबिंग करने से शरीर से कीटाणु निकल जाते हैं और आप तरोताज़ा महसूस करते हैं. रोज़ाना नहाएं. गर्मियों में तापमान का सबसे ज़्यादा असर स्किन पर पड़ता है, खासतौर पर अगर आपकी स्किन संवेदनशील हो. इसलिए अपनी स्किन की अच्छी देखभाल करें, नियमित रूप से एक्सफौलिएट करें और इसके बाद क्लीनिंग और टोनिंग करें. इसलिए पेट्रोलियम जैली या नारियल तेल से अपनी स्किन की देखभाल करें. पूल से बाहर आने के बाद ज़रूर नहाएं.

5. एसपीएफ अपनाएं

आपकी स्किन का प्रकार चाहे कोई भी हो, एसपीएफ अपनाएं. एसपीएफ आपकी स्किन को हानिकर यूवी किरणों से बचाता है. बाहर जाने से पहले एसपीएफ से युक्त क्रीम या लोशन लगाएं, फिर चाहे आप काम के लिए जा रहे हैं, लंच के लिए या तैराकी के लिए.

6. हल्के कौटन के कपड़े पहनें

कौटन के कपड़े गर्मियों के लिए बेहतरीन हैं. इन कपड़ों में आपकी स्किन सांस ले सकती है और ये पसीने को आसानी से सोख लेते हैं.

7. व्यायाम करें

गर्मियों में नियमित व्यायाम करना ना भूलें. वास्तव में व्यायाम करने से आपकी स्किन से टौक्सिन्स पसीने के रूप में बाहर निकलते हैं. व्यायाम के लिए सुबह का समय चुनें, इस समय तापमान कम होता है.

8. अपने बालों की देखभाल करें

गर्मियों में बाल रूखे और बेजान हो जाते हैं. लगातार धूप, गर्मी और क्लोरीन के संपर्क में आने से बाल डल होने लगते हैं. इस मौसम में हेयर स्टाइलिंग-आयरन और ब्लोअर का इस्तेमाल न करें- बालों को प्राकृतिक रूप से सुखाएं. बाहर जाते समय अपने बालों को ढक लें.

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9. एलर्जी के लिए सावधानी बरतें

गर्मियों में हवा में पराग और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले कण होते हैं. अगर आपको किसी चीज़ से एलर्जी है तो गर्मियों में सावधानी बरतें. अपने डौक्टर से संपर्क करें और उचित निर्देशों का पालन करें.

डॉ. मंजीता नाथ दास, कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल गुरुग्राम

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