दूसरी मुसकान: भाग-5

मेजर आनंद ने वापस कैंप में फोन किया. मगर वहां से भी नाउम्मीदी ही हाथ लगी. कार्यकर्ता अहमद ने बताया कि यहां जोर की बारिश और आंधीतूफान है…पहाड़ी नाला सड़क पर बहने लगा है, इसलिए कोई उन की मदद को नहीं आ सकता.

‘‘अब क्या होगा?’’ उस ने घबरा कर मेजर की तरफ देखा.

‘‘सिवा इंतजार के कोई रास्ता नहीं. आप तो काफी भीग गई हैं…पीछे बैग में कुछ ड्रैसेज रखी हैं, उन में से ही कुछ पहन लो. यों भीगे कपड़ों में रात भर रहीं तो बीमारी पड़ जाओगी,’’ कह मेजर गाड़ी से बाहर निकल गए.

उस ने देखा बैग में ट्रेड फेयर में बिकने वाले कपड़े रखे थे. कपड़े पारंपरिक थे. छींट का लहंगाचोली थी. उसे संकोच हुआ, मगर भीगे कपड़ों से छुटकारा पाने का यही तरीका था. उस ने गाड़ी की लाइट औफ की और कपड़े बदल लिए. बालों को भी खोल कर कपड़े से पोंछ लिया. अब काफी सुकून महसूस कर रही थी.

मेजर गाड़ी में आ कर बैठ गए. उन्होंने एक गहरी नजर से उसे देखा और फिर हलके से मुसकरा दिए. जाने क्या था उन नजरों में कि वह अपनेआप में सिमट गई. मेजर ने सीट ऐडजस्ट कर दी. वह पीछे की सीट में खुद को समेट कर लेट गई. रात यों ही गुजरने लगी. बारिश रुकरुक कर हो रही थी.

सुबह के 6 बजने वाले होंगे कि मैकैनिक बाइक में अपने साथी कारीगर के साथ वहां पहुंच गया. उसे रात में कब नींद लगी और मेजर कब से मदद के लिए फोन मिला रहे थे, उसे पता ही नहीं चला. मेजर ने उसे धीरे से हिलाया तो वह अचकचा कर उठ बैठी.

‘‘आओ, तुम्हें छोड़ दूं,’’ मेजर ने पहली बार उस के लिए आप की जगह तुम का प्रयोग किया था.

वह अपना लहंगा संभालती हुई गाड़ी से बाहर आ गई. मौसम में गजब की ठंडक थी. उस ने चुन्नी कस के बदन से लपेट ली.

‘‘सर, कच्चे रास्ते से जाइएगा, पक्का रास्ता तो जाम है,’’ मैकैनिक ने कहा. उन्होंने बिना कुछ बोले बाइक स्टार्ट की. वह चुपचाप उन के पीछे बैठ गई. रास्ता काफी उबड़खाबड़ था. वह गिरने ही वाली थी कि उस ने मेजर को पकड़ लिया.

सुबह का धुलाधुला मौसम, ठंडी हवा, आसपास का हराभरा नजारा, जाने क्या था कि उस पर रोमानियत छाने लगी. पहली बार उस को लगा कि यह रास्ता कभी खत्म न हो.

रास्ता एक अजीब सी खुमारी में खामोशी से कट गया. घर पास आतेआते वह संभल कर बैठ गई. मेजर ने घर के सामने बाइक रोकी. वह लहंगे को संभालते हुए उतर गई.

‘‘आइए, चाय पी कर जाइएगा,’’ वह शर्मिंदगी से बमुश्किल बोल पाई.

मेजर मुसकराए और फिर बाइक मोड़ कर बिना कुछ कहे चले गए. वह भाग कर घर में घुसी. डोरबैल बजाई, सामने विलियम खड़ी थी. उसे ऐसी ड्रैस में देख कर सुखद आश्चर्य में भर गई.

चाय पीतेपीते उस ने विलियम को सारा हाल कह सुनाया. वह हंस पड़ी. सर्दी से उसे बुखार चढ़ गया था. उस के जेहन से मेजर आनंद उतर ही नहीं रहे थे. उसे लगा एक खुली हवा का झोंका उस के अंदर की घुटन को बाहर निकाल रहा है और वह सालों बाद सांस ले रही है.

उधर मेजर आनंद बुखार में तप रहे थे. सारी रात गीले कपड़ों की वजह से अंदर जबरदस्त सर्दी बैठ गई थी. उस ने न आने के लिए अपनी साथी जमुना को फोन किया, तो उसे मेजर साहब की बीमारी के बारे में पता चला.

जमुना ने चुटकी ली, ‘‘दोनों एकसाथ बीमार…और सारी रात…क्या बात है.’’

वह भी हंस पड़ी थी. उसे सुकून की नींद आई थी.

सुकून भरी नींद की मिठास सालों बाद उस के हिस्से में आई थी. खुद को काफी हलका महसूस कर रही थी. अजीब सी खुमारी छाई हुई थी. उसे लगा मेजर साहब की तबीयत के बारे में उसे पूछना चाहिए. उन की यह हालत उस की वजह से ही तो हुई थी…न उसे छोड़ने आते न वह उन पर शक करती और न वे भीगते. अत: उस ने नंबर मिला दिया.

‘‘हैलो,’’ उधर से मेजर की उन्नींदी सी आवाज आई.

‘‘हैलो सर,’’ मैं शुमी.

‘‘हां, कहो शुमी क्या बात है?’’

‘‘जी आप कैसे हैं?’’

‘‘ठीक हूं,’’ छोटे से जवाब के साथ खामोशी छाई रही. उसे भी कुछ नहीं सूझा.

‘‘शुभी ठीक है? शायद पहली बार वह तुम्हारे बिना रही होगी.’’

वह हैरान थी कि मेजर साहब को उस की बेटी का नाम पता है. अरे, वे उस की बच्ची के बारे में पूछ रहे थे, जिस की सुध उस के अपने पिता ने भी कभी नहीं ली थी.

वह अंदर तक सुकून से भर गई. थोड़ी देर बाद उस ने हेमा दी को फोन किया और सालों बाद देर तक सुकून के साथ बातें कीं.

2 दिन तक वह छुट्टी पर रही थी. काम फिर शुरू हो गया था. अब वह पहले से ज्यादा उत्साह के साथ मेजर का दिया काम करने लगी थी. उन के हर काम का महत्त्व उसे समझ आने लगा था. धीरेधीरे वह काफी कुछ सीख गई और आश्चर्यचकित थी कि अगर हम अपनी सोच का दायरा फैलाएं और कुछ करने की ठान लें, तो दुनिया का अलग ही रंग नजर आता है.

वह मेजर साहब की दिल से इज्जत करने लगी थी. वे अपने दुखों से ऊपर उठ कर किस तरह दूसरों को सुख पहुंचाने की कोशिश करते थे… खुद को अकेला नहीं छोड़ा था उन्होंने… कितने लोग जुड़े हुए थे उन के साथ और एक वह थी. सालों तक खुद को ही बंद कर के बैठी हुई थी.

मेजर उसे जिस ट्रेड फेयर में जाने को कह रहे थे वह अब तक का सब से बड़ा ट्रेड फेयर था और मेजर के लिए महत्त्वपूर्ण भी था. उन्होेंने अपनी टीम के साथ मिल कर उस के लिए बहुत मेहनत की थी. लेकिन वह शहर से काफी दूर था, जहां से उसी दिन वापस नहीं आया जा सकता था. शुभी को कहां रखे? वह विलियम से कैसे कहे कि वह मेजर आनंद के साथ अकेली जा रही है और वह उस की बच्ची को रखे.

दूसरे दिन सुबह उठी तो खुद आश्चर्य से भर गई. हेमा दी सामने थीं. वह दीदी से लिपट गई.

‘‘अचानक कैसे दी? कोई फोन नहीं, खबर नहीं.’’

‘‘तुम से मिलने का बड़ा मन था,’’ हेमा दी ने प्यार से निहारा जैसे पहली बार देख रही हों. वे उसे ऐसे छू रही थीं जैसे मां अपने बच्चे को छूती है… वे उस की मां ही तो थीं. उस के हर दुखसुख में वे और रमन जीजाजी साथ खड़े रहे थे. वह देर तक दी से बातें करती रही.

‘‘कुछ बताना भूल तो नहीं रही?’’ दी ने प्यार से पूछा.

‘‘क्या?’’ वह हंस पड़ी.

‘‘मेजर आनंद…’’ दी ने कहा.

वह खामोशी से दी को देखने लगी. दी ने प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘जिंदगी ने तुझे एक मौका और दिया है. हाथ से जाने मत देना.’’

वह हैरान थी कि दी इतना कुछ कैसे जानती हैं?

हेमा दी ने मेजर आनंद को फोन कर के लंच पर बुला लिया और फिर दोनों ने मिल कर खूब चाव से अच्छेअच्छे व्यंजन बनाए.

मेजर आए तो वह उन के सामने बैठने से भी शरमा रही थी. हेमा दी मेजर आनंद से प्रभावित हुई थीं. दी ने काफी देर उन से बातें कीं. वे शुभी से भी घुलमिल गए थे. मेजर आनंद का शुभी से लगाव उसे अंदर तक भिगो गया. शुभी उन्हें अपनी बनाई ड्राइंग दिखा रही थी.

हेमा दी 3 दिन उस के पास रुकी और उन्होंने अपनी रजामंदी से उसे मेजर आनंद के साथ ट्रेड फेयर में भेज दिया. काफी शानदार मेला था. मेजर आनंद और उन की टीम की मेहनत नजर आ रही थी. उसे वहां काफी कुछ देखनेसमझने को मिला. रहने की व्यवस्था मेले के पास ही गैस्ट हाउस में की गई थी.

‘‘अपनी जिंदगी मेरे साथ बिताना पसंद करोगी?’’ चाय पीते हुए मेजर साहब ने उस से पूछा.

वह काफी देर खामोश रही. शुभी के बारे में काफी कुछ कहना चाहती थी, मगर कहां से शुरू करे समझ नहीं पा रही थी.

‘‘शुभी को मैं अपनी बेटी मान चुका हूं… बाकी मैं बोलने में नहीं करने में यकीन रखता हूं.’’

बिना कुछ कहे, बिना पूछे तसल्ली हो गई थी. ट्रेड फेयर से लौटते ही उस ने अपना फैसला दी को सुना दिया. सुन कर वे बहुत खुश हुईं और विलियम की आंखों में भी उस ने वह तसल्ली महसूस करी थी, जो वसंत के वक्त नहीं थी. उम्र के तजरबे और फर्क को वह अब महसूस कर पाई थी.

हेमा दी के जाते ही रमन जीजा आ गए. मेजर आनंद से मिले. सब बातें उन्होंने खोल कर सामने रखीं. दोनों तरफ से तसल्ली होने पर शादी तय हो गई.

हेमा दी ने काफी सामान पहले ही खरीद रखा था. बाकी तैयारी उस के और विलियम के साथ मिल कर कर ली. विलियम ने सारी तैयारी में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया.

शादी साधारण तरीके से कोर्ट में संपन्न हुई. मेजर आनंद ने कुछ खासखास लोगों को ही शादी में शामिल किया. हेमा दी ने भी कुछ करीबी लोगों को ही बुलाया था. वह एक बार फिर शादी के बंधन में बंध गई.

हेमा दी ने उसे अपने हाथों से बड़े प्यार से सजाया और फूलों से महकते कमरे में पहुंचा दिया.

मेजर आनंद कमरे में आए तो उस का दिल जोरजोर से धड़कने लगा. उन्होंने धीरे से उस का हाथ अपने हाथ में ले कर हौले से दबाया और फिर झुक कर उस के माथे को चूम लिया. न जाने कितने सितारे उस के अंदर चमकने लगे, सैकड़ों फूल उस के दामन में खिल उठे.

‘‘जिंदगी भर मेरी दोस्त बन कर रहना, क्योंकि दोस्त से प्यार ज्यादा होता है. वैसे डर तो नहीं लग रहा?’’ मेजर आनंद ने उस के कान में शरारत से कहा, तो वह शर्म से उन की बांहों में पिघलने लगी. उसे महसूस हुआ चारों तरफ जुगनू चमकने लगे हैं और वह उन्हें मुट्ठी में भर रही है.

दूसरी मुसकान: भाग-4

उस ने खुद को उस वक्त बहुत छोटा महसूस किया था. बिखर गई थी वह…प्यार में छला हुआ आदमी कहीं का नहीं रहता…उस के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे.

हेमा दी और रमन जीजा देर तक उसे समझाते रहे थे कि वसंत किसी भी मामले में खरा नहीं उतरा और अब भी बच्चे की आड़ में वह सिर्फ अपना मतलब ही निकाल रहा है.

मगर वह सोच रही थी कि अब पैसे वसंत के हाथों में नहीं देगी…जो करेगी खुद करेगी…खर्चा कैसे चलेगा…वसंत के पास कुछ था नहीं. बैंक में  8-9 महीने का खर्चा ही बचा था. फिर कैसे होगा सब…एक बार वह बस जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाना चाहती थी और उस के लिए उसे पैसे की सख्त जरूरत थी.

हेमा दी और रमन जीजा जानते थे कि उस की उम्र और अक्ल इतनी नहीं है कि वसंत की चालाकियों से बच सके. बड़ी मुश्किल से ही नतीजा निकला था. रमन जीजा ने मकान की कीमत लगवा कर उसे उस के हिस्से का पैसा दे दिया था और कुछ पैसा शुभी के नाम फिक्स कर दिया था, जिस का जिक्र उन्होंने वसंत के आगे करने से मना किया था. वे दोनों आखिर तक उसे वसंत की चालों से बचाना चाह रहे थे.

मगर वसंत की चालाकियों के आगे तीनों मुंह ही ताकते रह गए थे. चंद महीने के अंदर ही वसंत ने उस का सारा पैसा साफ कर दिया और फिर वही रवैया शुरू हो गया. अब वसंत पहले से ज्यादा घर से बाहर रहता और महीने 2 महीने में ही घर आता. जिस बच्ची के भविष्य की चिंता दिखा कर उस ने सारा पैसा समेट लिया था अब उस की तरफ देखता भी नहीं था.

वह घर और बच्ची की जिम्मेदारी के साथ फिर अकेली खड़ी थी. दोनों के रिश्ते कड़वाहट से भरने लगे थे. कुछ था, जो उसे साफसाफ न सही, मगर नजर आ रहा था. उस का सामाजिक जीवन पूरी तरह खत्म हो चुका था. शुभी के स्कूल दाखिले के वक्त उसे खासी परेशानी उठानी पड़ी. धीरेधीरे उस का धीरज जवाब दे गया. वह पहली बार रमन जीजा के सामने बिखर गई, ‘‘मुझे मुक्ति दिला दीजिए…शायद तभी मुझे सांस आएगी.’’

रमन जीजा ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवा दी. पहली बार बिना उस की सलाह के उन्होंने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर के वसंत की खोजखबर निकलवाने की कोशिश करी. जब सच सामने आया तो वह कई दिनों तक अस्पताल के बिस्तर पर रही.

वसंत पहले से शादीशुदा था. वह अपनी पहली पत्नी और बच्चों के प्रति भी कोई जिम्मेदारी नहीं उठाता था. उन की देखभाल वसंत के मातापिता ही करते थे, क्योंकि वसंत एक आवारा किस्म का इनसान था.

इतना सब होने के बाद अब उस का रिश्ता वसंत के साथ बेनाम और बेअसर हो चुका था. हेमा दी उसे और शुभी को अस्पताल से ही अपने घर ले गईं, घर में उन्होंने ताला लगा दिया था. वह तो जैसे पत्थर ही हो गई थी. हेमा दी और रमन जीजा उस का गम समझते थे. वक्त हर जख्म का मरहम होता है. मगर एक अच्छाखासा वक्त लगा था उसे अपनी सोचसमझ वापस लाने में. आखिरकार वह वसंत से अलग हो गई. उस वसंत से जो खून बन कर उस की रगों में दौड़ता था. कागज के एक टुकड़े पर साइन करते वक्त उसे ऐसा लगा था कि क्यों नहीं उस के प्राण शरीर को छोड़ देते…उस दिन वह बिलखबिलख कर रोई थी.

पूरा साल उस ने हेमा दी के पास गुजारा था. उस की हालत ऐसी नहीं थी कि वह वापस आती खाली मकान में. आने के नाम से ही उस को घबराहट होने लगती. पहले उसे वसंत का इंतजार रहता था और आने की उम्मीद अब किस का इंतजार करेगी? फिर पासपड़ोस के उन लोगों का कैसे सामना करेगी, जो हमदर्दी जताने के बहाने जख्म कुरेद जाते हैं.

हेमा दी चाहती थीं की वह उस मकान को बेच कर यहीं आ कर रहे और दोबारा अपनी जिंदगी शुरू करे. रमन जीजा तो उस के लिए रिश्ते खोजने की कोशिश में थे. बस उन्हें उस की हां का इंतजार था. वसंत की तमाम यादों से जुड़े मकान को बेचना उस की मजबूरी हो गई थी, मगर वह वापस अलवर भी आना नहीं चाहती थी. रिश्तेनातेदारों से भरा शहर, हेमा दी का सुखीसंपन्न परिवार और ससुराल उसे उस का खाली होने का ज्यादा एहसास करवाते. वह भाग जाना चाहती थी वहां से.

विलियम की टच में वह हमेशा थी. उस ने जिद कर उन के पड़ोस में ही एक छोटा मकान खरीद लिया और चली आई उसी में. एक बार फिर सब को नाराज कर के.

जिंदगी फिर शुरू हो चुकी थी, मगर इतना आसान नहीं था. वसंत था कि उस के दिलोदिमाग से निकलता नहीं था. हेमा दी कितनी बार उसे ले जाने आ चुकी थीं. उन्हें उस की खाली जिंदगी खौफ देती थी, खुद उसे भी. मगर उस के अंदर से यकीन जैसे खत्म हो चुका था.

फिर अचानक जिंदगी में नया मोड़ आया और उस मोड़ ने मेजर आनंद से मिलवा दिया. जब से उन से मिली थी, जिंदगी में हलचल होने लगी थी… ठहरे पानी पर जमी काई उखड़ने लगी थी. वह कहीं कुछ महसूस करने लगी थी… वे जज्बात जो दर्द की तह में सो चुके थे, अब फिर जागने लगे थे…बिना इजाजत कोई दिल के दरवाजे पर दस्तक देने लगा था.

मेजर आनंद की आदतें उसे रमन जीजा की याद दिलाती थीं. हेमा दी कितनी खुश थीं उन के साथ. शुरूशुरू में उसे कितनी परेशानी हुई थी काम करने में…इतना सारा काम, स्टोर की देखभाल, सैकड़ों आइटम्स देखना कि कुछ खत्म न हो, ऊपर से इंस्टिट्यूट का काम, ट्रेड फेयर की व्यवस्था और न जाने कहांकहां से काम निकल आता था…उस के लिए काफी मुश्किल था सब कुछ, मगर मेजर साहब की वजह से धीरेधीरे सब आसान होने लगा था. वह धीरेधीरे मेजर आनंद की तरफ खिंचती चली जा रही थी.

उसे जौब करते अभी कुछ ही महीने हुए थे. चंपारन में एक बड़ा ट्रेड फेयर लगाया जा रहा था. मेजर साहब ने स्थानीय और बाहर के काफी हस्तशिल्पियों की उस में शिरकत करवाई थी. स्थानीय किसान जो ऐक्सपर्ट्स के अंडर रह कर जड़ीबूटियों की खेती कर रहे थे वे उन के इस प्रयास से काफी खुश और उत्साहित नजर आ रहे थे.

औफिस के स्टाफ से कुछ लोग और उन के सामाजिक कार्यकर्ता वहीं मेले में ही रहे थे. मगर उसे शुभी के स्कूल की वजह से डेली अपडाउन करना पड़ रहा था.

1 हफ्ते से मेला काफी अच्छा चल रहा था. सभी में उत्साह था, मगर उस दिन अचानक तेज आंधीतूफान से बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई. सब कुछ समेटवाते हुए वह काफी लेट हो गई थी.

वह शुभी को ले कर परेशान हो गई थी. भले ही विलियम उस के पास थी, मगर शुभी को रात में उस ने कभी अकेला नहीं छोड़ा था. मेजर आनंद ने खुद उसे गाड़ी से छोड़ने को कहा. देर रात सवारी मिलना, वह भी इस मौसम में मुश्किल था. वह तैयार हो गई. मगर बीच रास्ते में ही गाड़ी खराब हो गई.

वह घबरा गई. तरहतरह के गंदे खयाल उस के दिमाग में आने लगे. मेजर आनंद ने बोनट खोल कर देखा, मगर कुछ समझ न आने की वजह से वे फोन उठा कर किसी को फोन करने लगे. जाने उसे क्या हुआ, उस ने मेजर के हाथ से फोन छीन लिया. मेजर आश्चर्य से उस की तरफ देखने लगे.

‘‘आप किसी को भी फोन नहीं करेंगे,’’ उस ने सख्ती से कहा.

‘‘मगर क्यों? मैकैनिक को फोन कर रहा हूं. गाड़ी ठीक नहीं हुई तो जाएंगे कैसे?’’

‘‘हुआ क्या?’’ मेजर हैरान थे.

‘‘पहले मैं फोन करूंगी,’’ कह वह तुरंत विलियम को फोन करने लगी.

मेजर दोनों हाथ जेब में डाल कर किनारे खड़े हो कर उसे ध्यान से देखने लगे.

उस ने पहली बार उन नजरों की ताब को महसूस किया था. वह गाड़ी में जा बैठी. मेजर पेड़ के सहारे खड़े रहे. उन्होंने उसे कुछ कहने या समझाने की कोशिश नहीं की. उसे मेजर के रवैए पर गुस्सा आ रहा था. वह मन ही मन एक अनजाने भय से घिरी बैठी थी. करीब 1 घंटे से ऊपर बीत चुका था और मेजर यों ही बाहर एक पेड़ के सहारे खड़े थे. सुनसान रास्ता, रात का वक्त उस पर बारिश फिर होने लगी थी. मेजर भीगने लगे थे. वह कुछ देर तक देखती रही. आखिर उसे लगा वह बेवजह के वहम में गिरफ्तार है. अत: गाड़ी से बाहर आई, तो ठंड और बारिश से सिहर उठी.

‘‘अंदर चलिए,’’ उस ने कहा.

‘‘क्यों?’’ मेजर ने मुसकराते हुए पूछा.

‘‘आप भी भीग रहे हैं और मैं भी… अब चलिए भी,’’ उस ने खीजते हुए कहा.

‘‘अब डर नहीं लग रहा मुझ से?’’ और फिर मेजर गाड़ी में आ कर बैठ गए. उन्होंने नंबर मिलाया तो दूसरी तरफ से जो कहा गया उसे सुन मेजर के मुंह से निकला, ‘‘ओह नो.’’

‘‘क्या हुआ?’’ उस ने पूछा.

‘‘भूस्खलन से रास्ते बंद हो गए हैं. कोई मैकैनिक इस वक्त नहीं आ सकता. अब सारी रात गाड़ी में ही बितानी होगी.’’

‘‘क्या?’’ उस के हाथपैर ठंडे होने लगे. गाड़ी से बाहर निकलने से मेजर के साथसाथ वह भी भीग गई थी. यों सारी रात भीगे बदन गाड़ी में बैठना कैसे हो पाएगा? इस सोच से ही वह कांपने लगी थी.

आगे पढ़ें- मेजर आनंद ने वापस कैंप में फोन किया. मगर…

दूसरी मुसकान: भाग-3

पूर्व कथा:

पढ़ाई के दौरान शुमी की मुलाकात वसंत से हुई और फिर दोनों में प्यार हो गया. शुमी वसंत से शादी करना चाहती थी, मगर वह टालमटोल कर रहा था. आखिरकार वसंत के घर वालों की रजामंदी के बगैर दोनों ने शादी कर ली. शुमी एक बच्ची की मां बन चुकी थी. अब वसंत ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया. जब शुमी को पता चला कि वसंत पहले से शादीशुदा है, तो वह उस से अलग हो गई.

अब आगे पढ़ें:

 

कितनी मुश्किल के साथ वसंत से उस की शादी हुई थी. जमीनआसमान एक करना शायद इसी को कहते हैं, जो उस ने किया था… बड़ी साधारण सी शादी हुई थी. शादी में वसंत की तरफ से 2-3 लोग ही शामिल हुए थे. सब को बड़ा अटपटा सा लग रहा था. हेमा दी और रमन जीजा के चेहरे बड़े बुझेबुझे से थे. मगर वह खुश थी कि जिसे चाहा वह मिल गया. रमन जीजाजी ने उसी शहर में उस के नाम पर एक मकान खरीद दिया था और फिर हेमा दी ने घरगृहस्थी का सारा सामान खरीद कर घर सजा दिया था. इस के अलावा काफी पैसा भी उस के अकाउंट में डाल दिया था. मगर वसंत नाराज था. उस ने दी और जीजाजी को तो कुछ नहीं कहा, मगर उस के आगे अपनी सारी भड़ास निकाल दी.

वसंत के कहे मुताबिक उस की दी और जीजा को उस पर यकीन नहीं था. तभी सारा पैसा मकान और सामान पर लगा दिया. वह शादी के दूसरे दिन वसंत के ये तेवर देख कर दंग थी. हेमा दी ने अपनी तरफ से उन का हनीमून प्लान किया. ऊटी के एक होटल में उन की बुकिंग करवा दी. मगर वसंत गुस्से में नहीं गया.

‘‘अब हम अपना हनीमून भी तुम्हारी बहन की मरजी से मनाएंगे?’’

‘‘तुम कहीं और ले चलो,’’ उस ने मनुहार की थी.

‘‘देखेंगे,’’ कह वसंत टालता रहा और फिर हनीमून बस एक सपना ही बन कर रह गया. करीब 1 महीने बाद काम का वास्ता दे कर वसंत ने उस से क्व2 लाख निकलवाए. उस ने गौर किया था कि वसंत को शादी का कोई क्रेज नहीं था, न ही उस की तरफ कोई खास ध्यान. वसंत को अपनी नईनवेली दुलहन का कतई ध्यान नहीं था. वह उदास रहने लगी थी.

वसंत मुंह से कोई लड़ाईझगड़ा नहीं करता था, लेकिन उस का ठंडा रवैया उसे अंदर ही अंदर खाने लगा था.

वसंत कितनेकितने दिन घर से बाहर रहता. जिस दिन लौटने की कह कर जाता उस दिन कभी न आता. वह किसी अनजाने डर से घिरी रातरात भर जागती रहती. उसे कुछ पता नहीं रहता कि वसंत कहां है और क्या कर रहा है. उस ने कितनी बार उस से कहा कि घर में एक फोन लगवा लो, मगर वह एक कान से सुनता और दूसरे से निकाल देता.

हेमा दी ने उसे एक मोबाइल खरीद कर दे दिया और कहा था कि कम से कम टच में तो रहोगी. कभी रातबिरात कोई परेशानी भी हो सकती है… अकेली किस का दरवाजा खटखटाएगी. हेमा दी से तो उस की बात रोज ही हो जाती, मगर वसंत से बात कभीकभार ही होती या तो उस का फोन बंद होता या वह फोन काट देता. रात को तो उस का फोन अकसर स्विच औफ होता. वह हैरान थी.

घर में राशन है या नहीं वसंत को इस से कोई मतलब नहीं था. वह जब भी घर के खर्च या जरूरत के सामान की बात करती वह खामोशी इख्तियार कर लेता. उस की यह बेजारी उसे अंदर तक तोड़ जाती. थकहार कर वह बैंक जा कर पैसा निकाल कर बेमन से घर के सारे इंतजाम करती. वसंत को ले कर उस ने जो सपने देखे थे, वे सपने ही रह गए. उस के प्यार से बेजार एक बेल की तरह वह सूखती जा रही थी.

अब उसे एहसास होने लगा था कि रमन जीजाजी ने सारा पैसा नक्द न दे कर उसे मकान और सामान खरीद कर क्यों दिया था. शादी को साल भर से ऊपर हो गया था. वसंत पिछले 20 दिन से घर से बाहर था. बेदिली से काम निबटा कर वह बालकनी में आ कर खड़ी हो गई.

‘‘कैसी हो’’ आवाज की दिशा में उस ने मुड़ कर देखा, तो निर्मला खड़ी मुसकरा रही थी.

‘‘मैं ठीक हूं, आप सुनाइए?’’ उस ने बेदिली से मुसकरा कर कहा.

‘‘बस ठीक हूं और तुम सुनाओ वसंत भैया आ गए क्या?’’

‘‘नहीं, अभी कुछ वक्त और लगेगा,’’ उस ने खीज कर जवाब दिया. अब वह चिढ़ने लगी थी, ऐसे सवालों से.

‘‘अरे, पर कल ही तो इन्होंने उन्हें ईजी स्टोर में देखा. आवाज भी लगाई, मगर वे शायद जल्दी में थे,’’ निर्मला अजीब तरह से मुसकराते हुए बता रही थी.

वह हैरान थी कि वसंत इसी शहर में है और उसे पता भी नहीं. उस ने गुस्से में तमतमा कर वसंत को फोन लगाया. फोन पर ही उस का झगड़ा हो गया. वह देर तक रोती रही. उस ने हेमा दी को फोन पर वसंत की सारी हरकतें बता दीं, जिन पर वह अब तक परदा डालती आ रही थी. वसंत दूसरे ही दिन घर आ गया और जिंदगी यों ही लड़खड़ाते हुए गुजरने लगी.

बेजारी के उस आलम में एक दिन उसे एहसास हुआ कि वह मां बनने  वाली है. वह खुशी से पागल हो गई. मगर यह सुन कर वसंत गुस्से से बोला, ‘‘दिमाग खराब है… तुम्हें संभालना ही मुश्किल है ऊपर से बच्चा… बिलकुल नहीं.’’

‘‘यह क्या कह रहे हो?’’ वह अविश्वास से चीख उठी. फिर वही झगड़ा, रोनाधोना. जिस खबर से घर में उल्लास का माहौल होना चाहिए था उस बात से जबरदस्त क्लेश हो रहा था. वसंत किसी भी तरह इस बच्चे को नहीं चाहता था और वह इस अजन्मे बच्चे को मारना नहीं चाहती थी. एक अजीब सा तनाव पूरे घर में पसर गया.

फिर अचानक वसंत ने अपना विरोध खत्म कर दिया और उस की देखभाल करने लगा. उसे आश्चर्य हुआ कि मरुस्थल में अचानक फूल कैसे खिल उठे. वह उस का नकारात्मक रवैया देखने की अभ्यस्थ हो चुकी थी. मगर अच्छे परिवर्तन हमेशा सुखद लगते हैं. कुल मिला कर गर्भावस्था के 9 महीने कठिन होने के बावजूद अच्छे गुजरे. बच्चे के जन्म से पहले ही उस ने घर को बच्चे की जरूरत के सामान से सजा दिया. वसंत की मुहब्बत बूंदबूंद कर फिर उस के अंतर में उतरने लगी थी. वह खुश थी और इंतजार में थी उस नन्हे मेहमान के, जिस के आने से उस की झोली खुशियों से भर गई थी. उस का वसंत उसे वापस मिल गया था.

वह एक प्यारी सी बच्ची की मां बन गई थी. वसंत ने अच्छे अस्पताल में उस की डिलिवरी करवाई थी. बच्ची को गोद में लेते ही वह रो पड़ी थी. मां बनना भी कितना सुखद अनुभव है, जिसे बिना मां बने समझा नहीं जा सकता.

हेमा दी और रमन जीजाजी दोनों ही आए थे. ढेर सारे तोहफों से उन्होंने घर भर दिया था. वसंत ने नामकरण का फंक्शन बहुत अच्छी तरह किया था. उस के अच्छे इंतजाम की सब ने तारीफ की थी. बच्ची का नाम रखा गया शुभी.

उस दिन फिर वसंत को बिजनैस की वजह से बाहर जाना था. बच्ची को गोद में ले कर वह प्यार से निहार रहा था. उस ने उस के कंधे पर हाथ रखा, ‘‘क्या देख रहे हो?’’

‘‘शुमी हमारी बच्ची शहर के सब से बड़े स्कूल में पढ़ेगी और इस की परवरिश राजकुमारियों की तरह होगी…तुम देखना मैं अपनी बच्ची के लिए क्याक्या करता हूं. अब मुझ से बाहर भी नहीं रहा जाता. मैं अपना काम अब इसी शहर में करूंगा ताकि तुम दोनों के साथ रह सकूं.’’

वह खिल उठी थी कि कहां समेटेगी इतनी खुशियां. इधर कुछ दिनों से वसंत परेशान रहने लगा था. वह पूछती तो हंस कर टाल जाता. मगर एक दिन वह फूटफूट कर रो पड़ा. उस का दिल बैठने लगा. वह वसंत का सिर गोद में रख कर खुद भी रो पड़ी.

‘‘कुछ बताओ भी?’’ उस ने पूछा.

‘‘मेरे पार्टनर ने धोखे से सब कुछ अपने नाम करवा लिया… गलती मेरी ही थी, जो वक्त रहते अपने बिजनैस को ले कर सीरियस नहीं हुआ… सब कुछ खत्म हो गया,’’ और वसंत फिर फूटफूट कर रो पड़ा.

उस के पैरों तले की जमीन खिसक गई, ‘‘तुम ने पुलिस में रिपोर्ट नहीं की?’’

सब कुछ कर दिया है… मैं उसे इतनी आसानी से छोड़ूंगा नहीं, मगर इन सब कामों में तो बहुत वक्त और पैसा लगेगा, तब तक क्या होगा? मेरे पास तो नया बिजनैस शुरू करने के लिए पैसा भी नहीं है.’’

‘‘सब ठीक हो जाएगा,’’ उस ने कह तो दिया था, मगर कैसे, यह उसे भी अभी पता नहीं था.

वसंत की भागदौड़ और परेशानी वह देख रही थी. वह भी उस के साथ परेशान रहने लगी थी. शादी के इतने अरसे बाद तो एक सुखद बदलाव आया था…वह भी ज्यादा दिन नहीं रहा था. वसंत नया बिजनैस शुरू करना चाहता था. इस के लिए उसे पैसों की दरकार थी. जितने पैसे उस के अकाउंट में थे उन से काम नहीं चल रहा था. वह तंग रहने लगी थी. वसंत को समझाती कि सभी लोग तो लाखों रुपयों से बिजनैस शुरू नहीं करते? फिर तुम कोई नौकरी क्यों नहीं करते? अगर और पैसा चाहिए तो अपने पिता से बात करो.’’

सुनते ही वसंत भड़क गया, ‘‘तुम से शादी न की होती तो सब कुछ था मेरे पास. अब किस मुंह से उन के आगे हाथ फैलाऊं… यह पैसा मुझे अपने लिए तो नहीं चाहिए न….काम होगा तभी तो बच्ची को अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगे.’’

‘‘तो मैं भी कहां से लाऊं पैसा? मेरे कौन से मांबाप बैठे हैं,’’ वह भी खीज उठी.

‘‘मांबाप का मकान तो है न…तुम्हारा हिस्सा है उस में…अपनी बहन से कहो तुम्हें तुम्हारा हिस्सा दे दे,’’ वसंत ने कह ही दिया.

यह सुन वह सकते की हालत में थी. एक शब्द नहीं फूटा उस के मुंह से…उस के सोचनेसमझने की शक्ति जैसे खत्म हो गई थी. वह फिर से वहीं लौट आई थी जहां पहले थी. घर का माहौल फिर से बोझल रहने लगा था. फर्क इतना था कि वसंत अब घर से गायब नहीं होता था और अपनी बच्ची को प्यार से रख रहा था.

‘‘देखो शुमी समझने की कोशिश करो. मैं तुम से पैसा कभी नहीं मांगता, अगर मेरे अपने से इंतजाम हो जाता और तब भी नहीं कहता अगर उस मकान में तुम्हारे मातापिता रह रहे होते. मगर वह तो खाली पड़ा है. तुम और हेमा दी ही तो उस की वारिस हो. अब तुम्हें जरूरत है, तो उसे बेच कर अपना हिस्सा ले लो. मैं काम तुम्हारे नाम पर शुरू करूंगा. 1-1 पैसा तुम अपने हाथों से खर्च करना. फिक्र मत करो. तुम्हें तुम्हारा पैसा बढ़ा कर ही वापस करूंगा. अब मैं पैसे की वैल्यू समझ चुका हूं और अपनी बच्ची के लिए अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करना चाहता हूं. बस, इस बार मेरा यकीन कर लो.’’

थकहार कर उसे हेमा दी से बात करनी पड़ी. सुनते ही वे फट पड़ीं, ‘‘खबरदार मायका है वह हमारा… मांबाबूजी की अमानत है वह… हमारे बचपन की अनगिनत यादें हैं वहां. वह पैसा मांगता रहता है और तुम निकाल कर देती रहती हो. पिछले दोढाई साल में उस ने तुम्हें कुछ दिया है सिवा परेशानियों के? वह तो बच्चा भी नहीं चाहता था… अब इसी बच्ची की आड़ में मकान हजम करना चाहता है…कब समझोगी तुम? खाली हाथ हो कर सड़क पर आ जाओगी तब आंखें खुलेंगी तुम्हारी…तुम्हें बेटी मानते हैं इसलिए कोई हिसाब नहीं करते न करेंगे…उस मकान में तुम्हारा हिस्सा हमेशा रहेगा, लेकिन किसी बाहर वाले को उसे छूने भी नहीं दूंगी,’’ कहतेकहते हेमा दी रो पड़ी थीं.

आगे पढ़ें- उस ने खुद को उस वक्त बहुत छोटा महसूस किया था…

19 दिन 19 टिप्स: शादी के सालभर में इतना बदल गया ईशा अंबानी का फैशन

अमार बिजनेसमैन की बात करें तो अंबानी परिवार का नाम सबसे पहला आता है. वहीं फैशन की बात करें फैशन की तो बौलीवुड को टक्कर देती हैं अंबानी परिवार की बेटी ईशा अंबानी. 12 दिसंबर 2018 में शादी के बंधन में बंधने वाली ईशा अंबानी की सालगिरह को कुछ ही दिनों में एक साल पूरा हो जाएगा, लेकिन इस एक साल में ईशा के फैशन में इतना बदलाव आ चुका है की आप भी इसे ट्राय कर सकती हैं. ये आपके लुक को फैशनेबल के साथ-साथ एलिगेंट बनाने में मदद करेगा.

1. ईशा का साड़ी लुक करें ट्राय

आजकल रेशम की साड़ियों से लेकर दुपट्टे काफी पौपुलर है. हर कोई नए-नए फैशन की रेशम की साड़ियां ट्राय कर रहा है. अगर आप भी कुछ नया ट्राय करने के शौकीन हैं तो ईशा की ये sea ग्रीन कलर की रेशम साड़ी ट्राय कर सकते हैं. ये आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा.

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2. फ्लावर प्रिंट है पौपुलर

अगर आप फैशन ट्रैंड में रहना चाहते हैं शादी के बाद भी तो फ्लावर प्रिंट पैटर्न वाला लहंगा और टौप जरूर ट्राय करें आप चाहें तो इसका दुपट्टा सिंपल रखकर साड़ी की तरह इसे ट्राय कर सकती हैं. ये आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा.

3. कढ़ाई वाले पैटर्न वाला लहंगा करें ट्राय

अगर आप शादी के बाद किसी शादी पार्टी की ड्रेस के औप्शन ढूंढ रही हैं तो ईशा अंबानी का फ्लावर प्रिंट वाली कढ़ाई वाला लहंगा ट्राय करना न भूलें ये आपके लुके के लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा. आप इसके साथ सिंपल लुक रखते हुए चोकर वाला नेकलस ट्राय कर सकती हैं ये आपके लुक को कम्पलीट करेगा.

4. नेट वाली साड़ी करें ट्राय

 

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अगर आप वेडिंग सीजन में नेट वाली साड़ी ट्राय करना चाहती हैं तो ईशा अंबानी की ये साड़ी आपके लिए परफेक्ट औप्शन है. ये आपके लुक को कम्पलीट करने में मदद करेगा. इसके साथ आप पर्पल कलर को मैच करते हुए ज्वैलरी भी ट्राय कर सकते हैं. ये आपके लुक को एकदम परफेक्ट दिखाने में मदद करेगा.

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Dr Ak Jain: क्या करें जब पुरुषों में घटने लगे बच्चा पैदा करने की ताकत?

इनफर्टिलिटी एक बहुत गंभीर समस्‍या है. जिसके कारण बहुत से कपल्‍स की गोद सूनी ही रह जाती है. मौजूदा लाइफस्टाइल की वजह से इनफर्टिलिटी की समस्‍या आम बात हो गई है. इनफर्टिलिटी का मुख्य लक्षण प्रेग्नेंट न हो पाना है. अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो संपर्क करिए लखनऊ के डॉक्टर ए. के. जैन से जो पिछले 40 सालों से इसका इलाज कर रहे हैं.

आइए अब जानते हैं इनफर्टिलिटी के बारे में…

नौजवानों में तेजी से बढ़ते तनाव और डिप्रैशन के साथसाथ प्रदूषण और गलत लाइफस्टाइल के चलते एनीमिया की समस्या भी मर्दों में नामर्दी की वजह बनती है. इनफर्टिलिटी से जुड़े सब से बुरे हालात तब पैदा होते हैं जब मर्द के वीर्य में शुक्राणु नहीं बन पाते हैं. इस को एजूस्पर्मिया कहा जाता है. तकरीबन एक फीसदी मर्द आबादी भारत में इसी समस्या से पीडि़त है.

हमारे शरीर को रोज थोड़ी मात्रा में कसरत की जरूरत होती है, भले ही वह किसी भी रूप में क्यों न हो. इस से हमारे शारीरिक विकास को बढ़ावा मिलता है.

हालांकि कसरत के कई अच्छे पहलू भी हैं. मगर इस के कुछ बुरे पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है जिन की तरफ कम ही लोगों का ध्यान जाता है. मसलन, औरतों का ज्यादा कसरत करना बांझपन की वजह भी बन सकता है. वैसे, कसरत करने के कुछ फायदे इस तरह से हैं:

  1. दिल बने मजबूत : हमारे दिल की हालत सीधेतौर पर इस बात से जुड़ी होती है कि हम शारीरिक रूप से कितना काम करते हैं. जो लोग रोजाना शारीरिक रूप से ज्यादा ऐक्टिव नहीं रहते हैं, दिल से जुड़ी सब से ज्यादा बीमारियां भी उन्हीं लोगों को होती हैं खासतौर से उन लोगों के मुकाबले जो रोजाना कसरत करते हैं.

2. अच्छी नींद आना : यह साबित हो चुका है कि जो लोग रोजाना कसरत करते हैं, उन्हें रात को नींद भी अच्छी आती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कसरत करने की वजह से हमारे शरीर की सरकेडियन रिदम मजबूत होती है जो दिन में आप को ऐक्टिव बनाए रखने में मदद करती है और जिस की वजह से रात में आप को अच्छी नींद आती है.

3. शारीरिक ताकत में बढ़ोतरी : हम में से कई लोगों के मन में कसरत को ले कर कई तरह की गलतफहमियां होती हैं, जैसे कसरत हमारे शरीर की सारी ताकत को सोख लेती है और फिर आप पूरे दिन कुछ नहीं कर पाते हैं. मगर असल में होता इस का बिलकुल उलटा है. इस की वजह से आप दिनभर ऐक्टिव रहते हैं, क्योंकि कसरत करने के दौरान हमारे शरीर से कुछ खास तरह के हार्मोंस रिलीज होते हैं, जो हमें दिनभर ऐक्टिव बनाए रखने में मदद करते हैं.

4. आत्मविश्वास को मिले बढ़ावा : नियमित रूप से कसरत कर के अपने शरीर को उस परफैक्ट शेप में ला सकते हैं जो आप हमेशा से चाहते हैं. इस से आप के आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होती है.

रोजाना कसरत करने के कई सारे फायदे हैं इसलिए फिजिकल ऐक्टिविटी को नजरअंदाज करने का तो मतलब ही नहीं बनता, लेकिन बहुत ज्यादा कसरत करने का हमारे शरीर पर बुरा असर भी पड़ सकता है खासतौर से आप की फर्टिलिटी कम होती है, फिर चाहे वह कोई औरत हो या मर्द.

ऐसा कहा जाता है कि बहुत ज्यादा अच्छाई भी बुरी साबित हो सकती है. अकसर औरतों में एक खास तरह के हालात पैदा हो जाते हैं जिन्हें एमेनोरिया कहते हैं. ऐसी हालत तब पैदा होती है, जब एक सामान्य औरत को लगातार 3 महीने से ज्यादा वक्त तक सही तरीके से माहवारी नहीं हो पाती है.

कई औरतों में ऐसी हालत इस वजह से पैदा होती है क्योंकि वे शरीर को नियमित रूप से ताकत देने के लिए जरूरी कैलोरी देने वाली चीजों का सेवन किए बिना ही जिम में नियमित रूप से किसी खास तरह की कसरत के 3 से 4 सैशन करती हैं.

शरीर में कैलोरी की कमी का सीधा असर न केवल फर्टिलिटी पर पड़ता है, बल्कि औरतों की सेक्स इच्छा पर भी बुरा असर पड़ता है. साथ ही मोटापा भी इस में एक अहम रोल निभाता है क्योंकि ज्यादातर मोटी औरतें वजन घटाने के लिए कई बार काफी मुश्किल कसरतें भी करती हैं. इस वजह से भी उन की फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है.

इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे जोड़े शारीरिक और मानसिक तनाव की हालत में पहुंच जाते हैं. अकसर देखा गया है कि ऐसे मामलों में या तो शुक्राणु की मात्रा कम होती है या स्पर्म की ऐक्टिविटी बहुत कम रहती है. लिहाजा ऐसे शुक्राणु औरत के अंडाणु को गर्भाधान करने में नाकाम रहते हैं.

वैसे अब इनफर्टिलिटी से नजात पाने के लिए कई उपयोगी इलाज मुहैया हैं. ओलिगोस्पर्मिया में स्पर्म की तादाद बहुत कम पाई जाती है और एजूस्पर्मिया में तो वीर्य के नमूने में स्पर्म होता ही नहीं है. एजूस्पर्मिया में मर्द के स्खलित वीर्य से स्पर्म नहीं निकलता है जिसे जीरो स्पर्म काउंट कहा जाता है. इस का पता वीर्य की जांच के बाद ही लग पाता है.

कुछ मामलों में जांच के दौरान तो स्पर्म नजर आता है लेकिन कुछ रुकावट होने के चलते वीर्य के जरीए यह स्खलित नहीं हो पाता है. स्पर्म न पनपने की एक और वजह है वैरिकोसिल. इस का इलाज सर्जरी से ही मुमकिन है.

कुछ समय पहले तक पिता बनने के लिए या तो दाता के स्पर्म का इस्तेमाल करना पड़ता था या किसी बच्चे को गोद लेना पड़ता था, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान में स्टेम सैल्स टैक्नोलौजी की तरक्की ने लैबोरेटरी में स्पर्म बनाना मुमकिन कर दिया है.

लैबोरेटरी में  मरीज के स्टेम सैल्स का इस्तेमाल करते हुए स्पर्म को बनाया जाता है, फिर इसे विट्रो फर्टिलाइजेशन तरीके से औरत पार्टनर के अंडाशय में डाल कर अंडाणु में फर्टिलाइज किया जाता है. इस तरीके से वह औरत पेट से हो सकती है.

लखनऊ के डॉक्टर ए. के. जैन, पिछले 40 सालों से इन सभी समस्याओं का इलाज कर रहे हैं. तो आप भी पाइए अपनी सभी  सेक्स समस्या का बेहतर इलाज अंतर्राष्ट्रीय ख्याति एवं मान्यता प्राप्त डॉ. जैन द्वारा. 

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19 दिन 19 टिप्स: प्यूबिक हेयर के बालों को रखें या हटा दें

प्यूबिक हेयर उगने को ले कर अकसर मन में कुछ गलतफहमियां होती हैं. मसलन, ये इन्फैक्शन से बचाते हैं या इन्फैक्शन की संभावना बढ़ाते हैं, सैक्स पर इन का अनुकूल या प्रतिकूल असर होता है, इन्हें न काटने से ये बढ़ते ही जाएंगे, इन से बदबू आती है बगैरा. इस दुविधा में जहां कुछ लोग प्यूबिक हेयर का न होना ही बेहतर समझते हैं तो वहीं कुछ इन का होना अच्छा मानते हैं.

प्यूबिक हेयर ग्रूमिंग

आमतौर पर देखा जाए तो इन बालों को छोटा यानी ट्रिम करना यों तो बहुत पहले से चला आ रहा है, पर वास्तव में आधुनिक हेयर ग्रूमिंग का चलन या फैशन 80 के दशक से आम लोगों खासकर महिलाओं में देखा गया है. इस का एक मुख्य कारण इंटरनैट और टीवी है. 80 के दशक में विकसित और पश्चिमी देशों में स्ट्रिप डांसर्स और पोर्न अभिनेत्रियों ने अपने बाल छोटे रखने या शेव करने की शुरुआत की. सैक्स ऐंड सिटी और अन्य ऐडल्ट टीवी सीरियलों में ऐसा देखने को मिला.

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एक अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार, प्लेबौय मौडल्स द्वारा हेयर ग्रूमिंग कर के दिखाया जाना भी ग्रूमिंग का एक कारण है. इस के बाद मौडल्स, ऐक्ट्रैस, फिर संभ्रांत महिलाएं और फिर आम महिलाओं ने इस का अनुकरण किया. अब तो प्यूबिक हेयर ग्रूमिंग से कौस्मैटिक इंडस्ट्रीज को अच्छीखासी कमाई होने लगी है. ग्रूमिंग के लिए शेविंग, वैक्सिंग, लेजर और इलैक्ट्रोलिसिस तरीकों से बिजनैस में खूब पैसा आ रहा है.

प्यूबिक हेयर ग्रूमिंग पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक कराती हैं. एक शोध के अनुसार, प्यूबिक हेयर ग्रूमिंग के लिए महिलाएं निम्नलिखित कारण बताती हैं:

– साफसुथरा, अच्छा और आकर्षक दिखना.

– हाइजीनिक रहना.

– सैक्स में पार्टनर को खुश करने और कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए.

– स्थान और ड्रैस की मांग.

– बीच या स्विमिंग पूल में बिकिनी पहनने पर बालों का दिखना अच्छा नहीं लगता है.

प्यूबिक हेयर ग्रूमिंग कितनी अच्छी

प्यूबिक हेयर ग्रूमिंग स्वास्थ्य के लिए अच्छी है, वास्तव में ऐसी कोई बात नहीं होती. दरअसल, कुदरत ने हमारे शरीर में जो भी दिया है उस के पीछे कोई न कोई कारण है और उस में कुछ भी बुरा नहीं है. हमारे सिर पर सब से ज्यादा बाल होते हैं और पुरुषों की दाढ़ीमूंछ में भी. उन्हें तो हम गंदा नहीं मानते?

एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार, ग्रूमिंग के कारण होने वाली समस्या के चलते 2002 से 2010 के बीच अस्पताल के इमरजैंसी विभाग में जाने वाले रोगियों की संख्या में 5 गुना ज्यादा वृद्धि हुई है. प्यूबिक हेयर कुदरत द्वारा दिए गए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच हैं और इन की स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है.

बैक्टीरिया से बचाते हैं

बिकिनी एरिया के बाल शरीर के सब से ज्यादा नाजुक अंग को फ्रिक्शन अथवा मामूली चोट से होने वाले नुकसान से बचाते हैं. ये धूल और बैक्टीरिया को गुप्तांग में प्रवेश करने से भी रोकते हैं. बाहरी खतरों से बचने के लिए ये फर्स्ट लाइन औफ डिफैंस हैं.

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सैक्स के  दौरान

कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार, सैक्स के दौरान फैरोमौंस नामक रसायन के प्रसार में प्यूबिक हेयर मदद करता है. यह रसायन पुरुष और महिला दोनों के हेयर फौलिकल्स ग्लाइंड्स की जड़ों में होता है. इस रसायन की महक से एक साथी दूसरे को आकर्षित करता है. इस के अतिरिक्त सैक्स के दौरान प्यूबिक हेयर स्किन टु स्किन टच नहीं होने देते हैं, जिस से कुछ बैक्टीरिया जैसे हर्प्स के प्रसार की संभावना कम होती है.

ये बाल पसीने से होने वाली बदबू को फैलने से भी रोकते हैं. जो दुर्गंध आती है वह बैक्टीरिया के चलते आती है न कि बालों के चलते. ये बाल भी उतने ही अच्छे या बुरे हैं जितने सिर के बाल. इन की स्वच्छता पर उसी तरह ध्यान देने की जरूरत है, जिस तरह सिर के बालों की.

महिला रोग विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रूमिंग के समय रोमछिद्रों पर कटने से जख्म या इन्फैक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. प्यूबिक हेयर रखें या नहीं यह आप की इच्छा पर निर्भर है, मगर रखने हैं तो इन की सफाई का ध्यान जरूर रखें.

19 दिन 19 टिप्स: 5 टिप्स से घर के कौकरोच और छिपकली की करें छुट्टी

अक्सर घर की सफाई करने के बावजूद घर में कौकरोच और छिपकली आ जाती हैं. जिसे देखना किसी को भी पसंद नही होता. कौकरोच और छिपकली से घर में कईं बीमारियां हो जाती हैं. बाजार में कईं ऐसे प्रोडक्ट्स हैं, जिनसे कौकरोच और छिपकली से छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन इन महंगे प्रौडक्ट्स को खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं हैं इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताएगे, जिससे आ कौकरोच और छिपकली को अपने घर से दूर रख पाएंगे.

  1. अंडे के छिलके का करें इस्तेमाल

छिपकलियां अंडे के छिलकों की गंध से दूर भागती हैं. दरवाजों तथा खिड़कियों और घर में ऐसे स्थानों पर अंडे के छिलके रख देने से छिपकली घर के अंदर नहीं घुसती.

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2. लहसुन का करें इस्तेमाल

छिपकली लहसुन की गंध से भी दूर भागती हैं. छिपकलियों को घर से दूर रखने के लिए घर में लहसुन की कलियाँ टांगें या घर में लहसुन के रस का छिडकाव करें

3. कौफी और तंबाकू की छोटी गोलियां करें इस्तेमाल

कॉफ़ी तथा तंबाकू के पाउडर की छोटी-छोटी गोलियाँ बनायें तथा इन्हें माचिस की तीली या टूथपिक पर चिपका दें. इन्हें अलमारियों में या ऐसे स्थान पर रख दें जहाँ छिपकली अक्सर दिखाई देती है. यह मिश्रण उनके लिए जानलेवा होता है इसलिए आपको बाद में उनके मृत शरीर को फेंकना पड़ेगा.

4. प्याज का करें इस्तेमाल

इन्हें प्याज़ की कसैली गंध भी पसंद नहीं होती. अत: इन्हें घर से दूर रखने के लिए प्याज के रस का छिडकाव करें.

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5. नेफ्थलीन बौल्स का करें इस्तेमाल

छिपकली को भगाने के लिए नेफ्थलीन बौल्स का उपयोग करना भी बहुत प्रभावी होता है. इसे आप अपने किचन के शेल्फ्स, अलमारियों आदि में रख सकते हैं ताकि वहां छिपकली न पहुंच सके. मार्केट में कईं प्रौडक्ट्स मौजूद हैं, लेकिन अगर आप घर में साफ-सफाई का ध्यान रखेंगे तो कईं आपके घर से कीड़े मकौड़े दूर रहेंगे.

Lockdown के बीच बेटी समीशा खेलती दिखीं शिल्पा शेट्टी, Video Viral

बौलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. कभी फिटनेस तो कभी बेटी समीशा को लेकर वह अक्सप अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फोटो और वीडियो शेयर करती रहती हैं. हाल ही में शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) ने नया वीडियो शेयर किया, जिसमें वह अपनी बेटी को उनका लकी चार्म बता रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं क्या कहना शिल्पा शेट्टी का बेटी समीशा के बारे में…

बेटी समीशा के लिए शेयर किया वीडियो

 

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Some things in life are a little more special than the others. The number ‘15’ has been added to that list now❤️! Our daughter, Samisha Shetty Kundra🧿, came into our lives on 15th Feb and she turns two months old today on 15th April. It’s also a very special and happy coincidence that we have become a family of 15 MILLION on @indiatiktok today, on the 15th of April😍🤩 So grateful for all the love & blessings that you have showered on my family and me over the years… humbled beyond words. Hope you continue to stand by us, rock solid, even in the years to come🙏🏻❤️🤗🧿🌈 ~ @rajkundra9 . . . . . #20DaysOfGratefulness #Day19 #SamishaShettyKundra #happiness #gratitude #blessed #grateful #daughter #15Million #TikTokIndia

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बेटी समीशा के साथ वीडियो को शेयर करते हुए शिल्पा (Shilpa Shetty) ने लिखा, “लाइफ में कुछ चीजें दूसरों की तुलना में थोड़ी ज्यादा खास हैं. इस सूची में अब ’15’ नंबर जुड़ गया है. हमारी बेटी समीशा शेट्टी कुंद्रा 15 फरवरी को हमारी लाइफ में आई थी और वह आज 15 अप्रैल को दो महीने की हो गई. यह भी एक बहुत ही खास और अच्छा संयोग है. इसके अलावा आज 15 अप्रैल को मेरे टिकटॉक पर 15 MILLION फॉलोअर्स हो गए हैं. इसलिए आप सभी के प्यार और आशीर्वाद के लिए थैंक्स. आशा है कि आप मेरे साथ हमेशा ऐसे ही रहेंगे.

 

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The first thing about gratitude is to acknowledge it and second is remember it even in the future. Our parents have done so much for us, the love, the hard work, the sacrifices… We cannot – for a single second – forget how much they’ve done. We live in a different “YUG”, where we lead such fast-paced lives and live in the present forgetting the past… But it’s only human to err. THIS (Lockdown) is a great time to introspect and appreciate how much our parents have done for us in the past. The least we can do NOW is show them love. This TIME is priceless; I was fortunate to have my maternal grandma with me in my formative years and I feel sooo overjoyed to see my son have these moments with my mom. Thank you, Mom… for all and more… always! We are truly lucky and blessed. Only gratitude ❤️🧿❤️ @sunandashetty10 . . . . . #20DaysOfGratefulness #Day15 #stayhome #staysafe #stayindoors #gratitude #IndiaFightsCorona #Mother #son #family

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बेटी के साथ शेयर कर चुकीं हैं फोटो

 

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🧿Samisha Shetty Kundra completes 40 days today🧿 The first milestone for a mother and child, revered in Hinduism. 😇 Ideally, as a ritual we would have “stepped out of the house “ for the “FIRST” time and taken her to a temple for blessings, but as things stand today don’t have that option. Hence, will seek blessings at our mandir at home. It only makes me realise that there are so many other things we should be grateful for even if some things don’t go as per plan. So, for the next 20 days, I’m going to document one thing that I’m grateful for EVERY DAY. Starting with TODAY, I’m so grateful for just having a healthy family by my side. Let’s use this time to thank the universe for all the wonderful things and daily manifest positivity in our lives. Do join me in this exercise stating what YOU are grateful for. Tell me in the comments below or post something on your handle.🌈❤️😇 Love and Gratitude, SSK . . . . . #SamishaShettyKundra #20DaysOfGratefulness #gratitude #blessed #family #40days #milestones #thankful #love

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शिल्पा (Shilpa Shetty) ने अब हाल ही में परिवार के साथ फोटो शेयर की थी. इस फोटो में शिल्पा (Shilpa Shetty) के साथ उनके पति राज कुंद्रा, बेटा और बेटी साथ नजर आईं थीं. फोटो को शेयर करते हुए शिल्पा ने लिखा था ‘शमिशा 40 दिन की हो गई है. किसी भी मां और बच्चे के लिए ये पहला मील का पत्थर है. वैसे तो होना ये चाहिए कि हमें शमिशा को कुछ परंपराओं को निभाने के लिए घर से बाहर निकालना चाहिए लेकिन अभी ऐसा करना सही नहीं होगा.

बता दें, शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) 15 फरवरी को दूसरी बार सरोगेसी के जरिए मां बनी थीं, जिसकी जानकारी उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए फैंस को दी.

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सुष्मिता सेन से फैंस ने पूछा- कब करोगी शादी, मिला ये जवाब

बौलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) भले ही फिल्मी दुनिया से दूर हैं, लेकिन वह अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं, बौयफ्रेंड रोहमन शौल (Rohman Shawl) के साथ सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) अक्सर क्ववौलिटी टाइम बिताती नजर आती है, जिसके बाद उनके फैंस का उनसे एक ही सवाल रहता है कि वह शादी कब करेंगी. हाल ही में सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) का शादी के सवाल पर रिएक्शन देखने को मिल है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला….

शादी के सवाल पर सुष्मिता सेन का रिएक्शन

लौकडाउन के दौरान, सुष्मिता(Sushmita Sen), रोहमन (Rohman Shawl) और उनकी बेटी एलिशा और रिने इंस्टाग्राम पर एक साथ लाइव थे, जिस पर फैन्स उनसे सवाल पूछ रहे थे और सुष्मिता उनका जवाब दे रही थीं. इसी बीच एक फैन ने सुष्मिता से पूछा किया कि वह रोहमन के साथ शादी के बंधन में कब बंधने जा रही हैं? जिस पर सुष्मिता पहले तो बहुत जोर से हंसी और फिर जब उन्हें कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने रोहमन को इस सवाल का जवाब देने के लिए कहा.

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बौयफ्रेंड रोहमन ने दिया ये जवाब

सुष्मिता (Sushmita Sen), ने सवाल पढ़ा और फिर रोहमन (Rohman Shawl) की तरफ देखते हुए कहा, ‘ये सवाल तुम्हारे लिए है.’ अब रोहमन (Rohman Shawl) को इसका जवाब देना था. उन्होंने सुष्मिता (Sushmita Sen), की तरफ देखकर कहा कि जब भी ये हां कह दें मैं शादी के लिए तैयार हूं. रोहमन के इस जवाब ने फैन्स का दिल जीत लिया.

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बता दें, हाल ही में बौयफ्रेंड रोहमन शौल(Rohman Shawl)  ने सुष्मिता (Sushmita Sen)के लिए एक सरप्राइज पार्टी दी थी. रोहमन ने पूरे छत को सजाया, जो काफी शानदार लग रहा था. सुष्मिता सेन को यह सब बेहद पसंद आया और उन्होंने रोहमन को शुक्रिया भी बोलते हुए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फोटो शेयर की. वहीं इसी के साथ सुष्मिता ने अपने बर्थडे सेलिब्रेशन की वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर की.

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