काम्या पंजाबी के बाद एक और टीवी एक्ट्रेस करेंगी शादी, सोशल मीडिया पर किया ऐलान

पौपुलर टीवी सीरियल में से एक तुझ संग प्रीत लगाई सजना (Tujh Sang Preet Lagayi Sajna) फेम एक्ट्रेस पूजा बैनर्जी (Puja Banerjee) भले ही फिल्मी दुनिया से इन दिनों दूर चल रही हैं, लेकिन हाल ही में वह एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है. दरअसल, सुर्खियों में आने का कारण कोई टीवी सीरियल नही बल्कि उनकी शादी है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

सोशल मीडिया पर की शादी की अनाउंसमेंट

एक्ट्रेस पूजा बनर्जी (Puja Banerjee) ने सोशल मीडिया पर अपनी शादी की अनाउंसमेंट कर दी है. सोशल मीडिया पर अपनी शादी को लेकर प्यारे से पोस्ट के साछ पूजा बनर्जी (Puja Banerjee) ने बौयफ्रेंड कुणाल वर्मा (Kunal Verma) शादी का ऐलान किया.

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2017 में की थी सगाई

 

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पूजा बनर्जी काफी लम्बे समय से कुणाल वर्मा (Kunal Verma) को डेट कर रही है. साल 2017 में सगाई करने के बाद कुणाल और पूजा अब जल्द ही शादी करने वाले है, जिसका ऐलान पूजा ने वीमेंस डे के खास मौके पर सोशल मीडिया के जरिए किया.

बौयफ्रेंड के लिए लिखा ये खास मैसेज

पूजा बनर्जी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुणाल के साथ एक रोमांटिक फोटो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि, ‘महिला दिवस के खास मौके पर मैं आप सबके साथ एक बड़ी खबर शेयर करना चाहती हूं…कुणाल वर्मा तुम मुझे पूरा करते हो. मैं एक बेटी हूं बहन हूं…एक दोस्त और एक गर्लफ्रेंड हूं लेकिन अब मैं पत्नी भी बनने वाली हूं. ये समय है हमेशा के लिए एक हो जाने का. हम जल्द ही शादी कर रहे है और हमें आपके आर्शीवाद और दुआ की जरुरत है.’


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बता दें,  दोनों एक्टर्स एक साथ सीरियल में नजर आ चुके हैं, जहां से दोनों के प्यार की शुरूआत हुई थी. वहीं कुछ समय पहले खबरें थीं कि पूजा और कुणाल 9 साल एक दूसरे को डेट करने के बाद अलग होने का फैसला कर लिया था, लेकिन अब शादी की खबर के बाद दोनों के ब्रेकअप की खबरें अफवाह बनकर रह गई हैं.

परिवर्तन की अलख जगाती रूमा देवी

(राजस्थान, बाड़मेर में 22,000 से ज्यादा गरीब, ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ा)

राजस्थान के बाड़मेर के अति पिछड़े गांव की रूमा देवी भले ही सिर्फ आठवीं पास हों, लेकिन उनके जुझारूपन ने इस क्षेत्र की बाइस हजार से ज्यादा गरीब, ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उनको आर्थिक सशक्ता देकर उनके जीवन में खुशहाली बिखेर दी है. बचपन से ही अत्यधिक आर्थिक तंगी से जूझने वाली रूमा देवी ने अपनी दादी से सीखी राजस्थानी हस्तशिल्प कसीदाकारी को अपनी जीविका का आधार बनाया. उन्होंने एक स्वयं सेवक समूह बना कर न सिर्फ अपने परिवार को गरीबी के चंगुल से मुक्ति दिलायी, बल्कि आसपास के पचहत्तर गांवों की बाइस हजार से ज्यादा महिलाओं को इस कला का प्रशिक्षण दिया और राजस्थानी हस्तशिल्प को गांव से निकाल कर अन्तरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया. उनके उत्कृष्ठ कार्यों के लिए वर्ष 2019 में उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों देश का सबसे सम्मानित ‘नारीशक्ति अवॉर्ड’ प्राप्त हुआ.

रूमा देवी राजस्थान में बाड़मेर क्षेत्र के उस दूरदराज के गांव से आती हैं जहां औरत के लिए चेहरे से घूंघट हटाना और घर की दहलीज लांघना नामुमकिन सी बात थी, लेकिन रूमा देवी ने इन बंधनों को तोड़ा और अपने लिए ही नहीं बल्कि अपने समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी सबल और सक्षम होने की राह प्रशस्त की. गरीबी और पुरुष प्रधान समाज की रूढ़ीवादी परम्पराओं से संघर्ष की उनकी कहानी को उन्होंने ‘गृहशोभा’ के साथ साझा किया. प्रस्तुत है उनसे बातचीत के संपादित अंश –

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–  वह क्या वजहें थीं जिन्होंने आपको घर की दहलीज लांघ कर काम करने के लिए मजबूर किया?

मैं पांच साल की थी जब मेरी मां गुजर गयी. पिता ने दूसरी शादी कर ली और मुझे मेरे मामा के पास भेज दिया. मेरे मामा ने ही मुझे पाला-पोसा. उनकी आर्थिक स्थिति भी दयनीय थी. वहां मैंने आठवीं तक पढ़ाई की, लेकिन गरीबी के कारण मुझे स्कूल छोड़ कर घर के कामकाज में लगना पड़ा. रसोई बनाना, पशुओं की देखभाल के अलावा पूरे घर के लिए पीने के पानी का इंतजाम करना सब मैंने छोटी सी उम्र से किया. हमारे गांव में पानी की बहुत किल्लत थी. मैं परिवार की पानी की जरूरत पूरी करने के लिए आठ से दस किलोमीटर दूर से बैलगाड़ी पर पानी भरकर लाती थी. यह मेरा रोज का काम था. 17 साल की हुई तो मेरी शादी हो गयी. मेरी जिन्दगी शादी के बाद भी आसान नहीं थी. मेरे ससुरालवाले भी बहुत गरीब थे. घर की दहलीज लांघ कर बाहर काम करने के लिए मैं तब मजबूर हुई जब मेरे डेढ़ महीने के बीमार बेटे को पैसे की तंगी के कारण इलाज नहीं मिल पाया और उसने तड़प-तड़प कर मेरे सामने दम तोड़ दिया. उस घटना ने मुझे हिला दिया और मैंने तय कर लिया कि कुछ ऐसा करना है जिससे घर में पैसा आयें और हमारी मजबूरी खत्म हो. बचपन में मां के मरने के बाद मैंने कढ़ाई का कौशल अपनी दादी से सीखा था. मुझे वह हुनर आता था तो मैंने वह काम करने की इच्छा अपने ससुरालवालों के आगे रखी. मैंने उनसे कहा कि घर की हालत सुधारने के लिए मैं काम करना चाहती हूं. वे समाज के रीति-रिवाज से डरे. लोग क्या कहेंगे, बदनामी होगी, ऐसी बातें सोचीं. हमारे गांव में औरतें आज भी लम्बे घूंघट में रहती हैं. उन्होंने मुझसे कहा कि तू बिना घूंघट के काम करेगी? मैंने कहा – नहीं, सिर पर पल्लू नहीं हटेगा. तब परिवारवाले मान गये. मैंने घूंघट में रहते हुए घर से बाहर कदम निकाला और यह काम शुरू किया.

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–  यात्रा कैसे शुरू हुई? क्या दिक्कतें आयीं और क्या उपलब्धियों हासिल हुर्इं?

2006 में मैंने कढ़ाई का काम शुरू किया. शुरुआत में मैंने लेडीज बैग और कुशन कवर आदि बनाने की सोची, मगर उस वक्त कपड़े-धागे तक के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे. फिर मैंने अपने आसपास के परिवार की औरतों से बात की. मेरे गांव की दस औरतें मेरे साथ काम करने को तैयार हो गयीं. फिर मैंने एक स्वयं सहायता समूह बनाया और सबसे सौ-सौ रुपये इकट्ठा करके कढ़ाई के लिए जरूरी सारी चीजें जैसे कपड़े, रंगीन धागे, सुईयां, कैंचियां, सामान पैक करने के लिए प्लास्टिक के थैले इत्यादि खरीदे. मैंने उन औरतों को वह कढ़ाई सिखायी जो मैंने अपनी दादी से सीखी थी. हम सबने साथ मिल कर सुन्दर-सुन्दर बैग और कुशन कवर बनाये. भाग्य से हमें खरीदार भी अपने ही गांव में मिल गये, जो हमारा सामान शहरों में ले जाकर बेचने लगे. इस तरह हमें कुछ पैसे मिलने लगे. उसके बाद तो हमारे इस ग्रुप से लगातार महिलाएं जुड़ने लगीं.

–  दस औरतों का छोटा सा समूह बाईस हजार से ज्यादा औरतों का समूह कैसे बना?

मैंने कभी यह बात स्वीकार नहीं की कि हमारे सामने सीमित संसाधन हैं या सीमित अवसर हैं. काम करने की इच्छा और हुनर होना चाहिए, रास्ते अपने आप खुल जाते हैं. जिन्दगी कभी भी आसान नहीं होती, लेकिन जूझते हैं तो जीतते हैं. मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने जैसी बहुत सारी गरीब औरतों के लिए काम करना चाहती थी. उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहती थी ताकि जो मेरी ममता के साथ हुआ, वह किसी और औरत के साथ न हो. मैंने अपने गांव की औरतों को ही यह कला नहीं सिखायी, बल्कि आसपास के गांव की औरतों को भी सिखाने लगी. क्षेत्र के काफी गांव हमारे काम से जुड़ गये. हमारे उत्पाद जब मार्केट में आये तो बाड़मेर के ‘ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान’ ने उन्हें काफी सराहा और मुझे अपना सदस्य बनने का प्रस्ताव दिया. 2008 में मैं इस संस्था की सदस्य बन गयी. फिर दो साल में ही मैं संस्था की अध्यक्ष भी चुन ली गयी. यह संस्था महिलाओं को ट्रेनिंग के साथ-साथ मार्केटिंग के गुण भी सिखाती है. इस संस्था से जुड़ने के बाद मुझे बहुत हिम्मत मिली, रास्ते खुले. मैंने कई शहरों में जाकर अपने उत्पाद मंचों पर प्रदर्शित किये और हम अन्तरराष्ट्रीय मंच तक भी पहुंचे. आज हमारे गु्रप की हर सदस्य अपने कौशल से तीन से दस हजार रुपये महीना कमा लेती है. हमारे साथ बाड़मेर की ही नहीं, बीकानेर और जैसलमेर तक की महिलाएं जुड़ी हैं. यह संख्या बढ़ती ही जा रही है.

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– आप आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रौशन कर रही हैं. फैशन वर्ल्ड में आपके नाम और काम का डंका बज रहा है. यह उपलब्धि कैसे हासिल की?

भारत के नीति आयोग द्वारा हमारा बाड़मेर जिला सबसे पिछड़ा क्षेत्र घोषित है. यह एक पुरुष प्रधान समाज है जहां पर्दा प्रथा का पालन करने और अपने घर की दहलीज के भीतर रहने के लिए स्त्रियां मजबूर हैं. लेकिन इतनी ज्यादा गरीबी देखने के बाद और पैसे की तंगी के कारण अपने बच्चे को खोने के बाद काम करने का मेरा संकल्प इतना मजबूत था कि मैं घर-समाज के बंधन तोड़ कर बाहर आयी ताकि अपने परिवार के कल को अच्छा बना सकूं. ‘ग्रामीण विकास चेतना संस्थान’ से जुड़ने के बाद मुझे मार्केटिंग की बातें समझ में आयीं. यहां मैंने ‘फेयर ट्रेड फोरम’ के लिए उत्पाद तैयार किये. धीरे-धीरे हमें हस्तशिल्प समूह के रूप में पहचान मिलने लगी. यहीं मुझे डिजाइनर कपड़ों और फैशन वर्ल्ड के बारे में भी जानकारी मिली, लेकिन मेरे पास डिजाइनिंग की कोई ट्रेनिंग नहीं थी. मैं जिस क्षेत्र में रहती हूं, वहां कोई फैशन इंस्टीट्यूट या कॉलेज भी नहीं है. बड़े शहर हमारे गांव से दूर हैं. लेकिन आगे बढ़ने का मेरा निश्चय दृढ़ था. मैंने साहस करके खुद ही कुछ प्रसिद्ध डिजाइनरों से सम्पर्क किया और उनको अपने उत्पाद दिखाये. उनमें से कुछ डिजाइनर हमारी संस्था के साथ काम करने के लिए तैयार हो गये. वर्ष 2016 में यानी अपना काम शुरू करने के दस साल बाद मैंने पहली बार ‘राजस्थान हेरिटेज वीक कार्यक्रम’ में रैम्प पर मॉडल्स के साथ अपने संग्रह को पेश किया और उनके साथ रैम्प पर भी चली. उस वक्त मैं सचमुच अपने सपने को जी रही थी. उस कार्यक्रम में मेरे द्वारा बनाये कपड़ों को बहुत सराहना मिली. धीरे-धीरे कुछ प्रसिद्ध डिजाइनरों और संस्थाओं ने हस्तनिर्मित कपड़ों और राजस्थानी कढ़ाई के लिए हमसे सम्पर्क करना शुरू कर दिया. हमने जल्दी ही विभिन्न श्रेणियों के अपने उत्पादों की बड़ी श्रृंखला बाजार में उतारी और बहुत बड़े पैमाने पर काम किया. हमारे काम ने इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर्स को हमारे गांव तक ला दिया. आज हमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर सराहा जा रहा है. हमारे राजस्थानी हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है. लंदन, जर्मनी, सिंगापुर और कोलंबो के फैशन वीक्स में मैं शामिल हो चुकी हूं जहां हमारे उत्पादों का बहुत सुन्दर प्रदर्शन हुआ.

–  इस क्षेत्र में अवार्ड्स की लम्बी सूची आपके नाम है. कुछ विशेष का जिक्र करें.

हां, इस काम के लिए मुझे बहुत सारे अवार्ड्स और सम्मान मिले हैं. सबसे विशेष मार्च 2019 को राष्ट्रपति कोविंद के हाथों नारीशक्ति के लिए सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘नारीशक्ति अवार्ड’ था. दूसरा मैं 6 सितम्बर 2019 का दिन नहीं भूल सकती जब मुझे टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के कर्मवीर एपिसोड में अमिताभ बच्चन जी के सामने हॉट सीट पर बैठने का अवसर मिला था. इस कार्यक्रम को पूरे देश ने देखा और मेरी कहानी जानी. इंडिया टुडे पत्रिका ने 2018 में अपने एनिवर्सरी एडिशन में मुझे कवर पर स्थान दिया. फिर मुझे ट्राइब इंडिया का ‘गुड विल एम्बेसडर एंड चीफ डिजाइनर’ का अवॉर्ड मिला. 15  फरवरी 2020 को मुझे अमेरिका में कैम्ब्रिज की हावर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से 17वें एनुअल इंडिया कॉन्फ्रेंस के लिए पैनल मेम्बर के तौर पर आमंत्रित किया गया है. अभी 7 जनवरी को मुझे ‘जानकी देवी बजाज अवॉर्ड’ दिया गया है, जो महिला उद्यमियों को महिला सशक्तिकरण की दिशा में अच्छा काम करने के लिए दिया जाता है. इनके अलावा भी दस-बारह अवॉर्ड हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुझे प्राप्त हुए हैं.

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–  आगे की क्या योजनाएं हैं?

गरीबी ने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, पुरुष प्रधान समाज से सवाल करने की हिम्मत दी कि हम औरतें क्यों नही अपने घर-परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बाहर निकल कर काम कर सकती हैं? आज मैं औरतों को ही नहीं, पुरुषों को भी हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दे रही हूं. हम अलग-अलग कौशल उन्नयन कार्यशालाओं का आयोजन करते हैं. आत्महत्या और कन्या भ्रूण को मां के पेट में ही मारने जैसे समाज के बुरे कार्यों के खिलाफ हम सेमिनार आयोजित करते हैं ताकि अपने क्षेत्र की महिलाओं को जागृत कर सकें, उनमें उत्साह पैदा कर सकें और उन्हें आत्मनिर्भर बना सकें. छोटे पैमाने पर अपने उद्यम कैसे स्थापित करने हैं, स्व सहायता समूहों के माध्यम से पैसा कैसे पैदा करना है, सरकार की किन योजनाओं के तहत उन्हें वित्तीय सहायता मिल सकती है, यह सारी जानकारियां हम इन कार्यक्रमों के जरिए राजस्थान के दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाते हैं और महिलाओं को रोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं. मैं ग्रामीण महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के लिए भी कुछ करना चाहती हूं. उनके बच्चों के बेहतर कल का सपना जो उनकी आंखों में है, उसे मैं पूरा करना चाहती हूं.

जानें क्या हैं 2020 के समर मेकअप ट्रेंड

मेकअप हर महिला के लिए बेहद ज़रूरी व एहम होता है. मेकअप की मदद से आप अपनी खूबसूरती को और ज्यादा निखार सकते है और खुद कॉंफिडेंट फील कर सकते है. कई लड़कियां इसका इस्तिमाल अपनी खूबसूरती बढ़ाने के लिए करती है तो कुछ अपने कॉन्फिडेंस बूस्ट करने के लिए. आप सभी को मेकअप करना तो आता ही होगा लेकिन क्या आपको यह पता है की हमें अपना मेकअप सीजन (मौसम) के हिसाब से किस तरह करना चाहिए. और जब बात आती है समर की तो आपको यह ज़रूरी ध्यान रखना चाहिए की आपको गर्मियों में किस तरह का मेकअप व प्रोडक्ट इस्तेमाल करना चाहिए.

1. ग्लिटर स्मोकी ऑय

स्मोकी ऑय मेकअप तो हम अपने स्कूल व कॉलेज से करते हुए आ रहा है लेकिन आज के ट्रेंड और पहले के ट्रेंड में यह अंतर है की हम पहले मैट स्मोकी ऑय मेकअप करते थे और अब हम ग्लिटर स्मोकी ऑय मेकअप करते है. इस तरह का ऑय मेकअप शादी व नाईट पार्टी के लिए एक बेटर ऑप्शन है.

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2. रेड लिपस्टिक

पिछले साल हमने लिपस्टिक में कई एक्सपेरिमेंट किये है जैसे की पर्पल लिपस्टिक, स्पार्कल लिपस्टिक और फॉरएवर न्यूड लिपस्टिक. लेकिन इस समर सीजन रेड लिपस्टिक काफी ट्रेंड में है, रेड लिपस्टिक हर ऑउटफिट और हर ऑकशन में अच्छे लगते है.  रेड लिपस्टिक काफी ब्राइट और वाइब्रेंट होते है और यदि आपको मिनिमल मेकअप पसंद है तो आप सिर्फ रेड लिपस्टिक लगाकर भी अपना लुक कम्पलीट कर सकते है. और सिर्फ फेस पर सनस्क्रीन लगाए.

3. नियॉन ऑयलाइनर

क्लासिक ब्लैक लाइनर तो हम सब हमेशा ही हर ऑकशन पर यूज़ करते है. समर सीजन में हमे वैसे भी नियॉन जैसे ही कलर पहनने और यूज़ करने चाहिए यदि आप नियॉन ऑयलाइनर इस्तेमाल करेंगे तो आपकी आँखे ब्राइट और सबसे हटके दिखेगी.

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4. वेट एंड ग्लोई लुक

गर्मी में मेकअप की लेयर जितनी कम हो उतना अच्छा है, आप वेट एंड ग्लोई लुक में अपने नेचुरल ब्यूटी को हाईलाइट करते हो, इसमें आपको 2-3 प्रोडक्ट्स के आलावा कुछ नहीं चाहिए होता है. आप अपने फेस पर सिर्फ कंसलीर लगाए जिससे की आप चेहरे पर छोटे-मोठे दाग  व धब्बें चुप जाये, कंसीलर के बाद आप ज़रा सा हाइलाइटर अपने चीक्स पर लगाए और लीजिये आपका  वेट एंड ग्लोई लुक तैयार है.  यदि आप ब्लश के दीवाने है तो बस अपनी इक्छा अनुसार ज़रा से पिंक ब्लश का भी इस्तेमाल कर सकते है. यह लुक आपके रोज़ाना ऑफिस व कॉलेज के लिए एक दम सही है.

2020 के समर एक्सेसरीज ट्रेंड

जिस तरह एक परफेक्ट ऑउटफिट आपकी पर्सनालिटी के लिए बेहद ज़रूरी होते है उसी तरह परफेक्ट एक्सेसरीज भी ज़रूरी होती है जो आपके लुक को बना और बिगड़ दोनों सकते है. याद रहे की आपके एयरिंग, नेकलेस, फुटवियर और हैंड बैग भी आपके कपड़ो की तरह बराबर अहमियत रखते है.  आज हम आपको इस आर्टिकल के ज़रिये बतायंगे की आपको समर में किस तरह की एक्सेसरीज पहननी चाहिए, जो आपकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देंगे.

1. पर्पल कलर फुटवियर

गर्मी में हमे हमेशा लाइट और सूथिंग कलर्स ही पहनने चाहिए.  जो हमे सारा सारा दिन लाइट और फ्रेश फील दे सके.  आज कल ट्रेंड में लाइट कलर पर्पल कलर के फुटवियर बहुत ट्रेंड में है. आप अपने ड्रेस के के साथ मध्यम हाई हील वाले लाइट पर्पल कलर पहन सकते है, जो आपको बहुत ही कॉफी फील देंगे. यदि आप कॉलेज गोइंग स्टूडेंट है तो डेनिम जीन्स के साथ पर्पल स्नीकर को कॉम्बो बनाकर पहन सकते है.

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2. श्रुकण बैग

यह बैग आजकल काफी प्रचलित हो गए है पिछले साल से इसकी डिमांड बढ़ती ही गयी है. आप इसे शादी, पार्टी, या किसी भी फंक्शन में कैर्री कर सकते है. यह साइज में काफी छोटे और क्यूट होते है, इस बैग में ज्यादा जगह तो नहीं होती है बाकि बैग्स की तरह इसमें सिर्फ एक क्रेडिट कार्ड रखने की जगह होती है.  यह छोटे होने के बावजूद लोग इसे काफी पसंद करते है यह हर ऑउटफिट के साथ बेहद शानदार लगते है.

3. पर्ल ज्वैलरी

लड़कियों को गोल्ड व डायमंड से तो प्यार होता ही है, लेकिन आज कल जो ट्रेंड में  है वो है  पर्ल ज्वैलरी जिसके अंदर पर्ल एयरिंग, पर्ल हेयर क्लिप, पर्ल नेकपीस आदि शामिल है. यह अब सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी इसे पहन रहे है. पर्ल नैक पीस आपके कॉटन साड़ी या कुर्ती भी अच्छे लगेंगे वही पर्ल हेयर क्लिप आपके ड्रेस व जीन्स पर अच्छे लगेंगे.

4. एंगुलर फ्रेम सनग्लासेस

हम सबने हमेशा राउंड और ओवल शेप के ही सनग्लासेस पहनने है लेकिन आज कल इस तरह के ट्रेंड काफी पुराने व बोरिंग हो चुके है. एंगुलर फ्रेम  अंदर कई अन्य शेप के सनग्लासेस आते है जैसे की ट्रायंगल, रेक्टैंगल,डायमंड और  हेक्सागोनस शेप के सनग्लासेस. यह बोल्ड ड्रेस, सलवार कमीज, शर्ट-पैंट, ब्लैज़र हर किसी के साथ बेहद जचते है. आप जब भी एंगुलर फ्रेम सनग्लासेस तो उसका फ्रेम हमेशा वाइब्रेंट व टैंगी कलर का चुने.

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5. प्रिंटेड स्कार्फ़ ऑन बैग

हम अक्सर स्कार्फ़ को अपने गले या फिर बालों में लगाकर फैशन करते है. लेकिन अब यह बैग व बालों में नहीं बल्कि आपके हैंडबैग पर भी लगाएं जाने लगे है. सिल्की प्रिंटेड स्क्रफ को आप अपने किसी भी हैंडबैग के साथ टाई कर सकते है यह आपके बोरिंग व पुराने बैग को एक फ्रेश लुक देंगे जिसके साथ आपके लुक में भी बदलाव दिखेगा.

डाइनिंग टेबल पर आपका अंदाज हो इंप्रैसिव

लंच हो या  डिनर, मगर याद रखिए डाइनिंग टेबल पर आपका अंदाज इंप्रैसिव होना चाहिए. खाने के जरिए आपकी पूरी छवि को पल में जानना बेहद आसान होता है. इसलिए कहते हैं कि खाना  खिलाना भी एक हुनर है. सबसे पहले खाना हमेशा एपेटाइजिंग नजर आना चाहिए. इसके बाद खुशबू अच्छी होनी चाहिए और आखिर में टेस्ट लाजवाब होना चाहिए.

1. बाइट साइज स्नैक्स

शुरूआत बाइट साइज स्नैक्स के साथ करें. यह आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और इन्हें खाने से लेकर सर्व करने तक में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. इसके लिए लाइट कलर की प्लेट्स लें, जिनका शेप स्क्वेयर, राऊंड या  ओवल हो. इसके अलावा ऑक्टागोनल या फ्लॉवर के शेप की प्लेट्स भी ली जा सकती हैं. डिशेज को प्लेटों पर सजाते हुए कंट्रास्ट का ख्याल रखें. डिश बिल्कुल अलग नजर आनी चाहिए. यदि किसी तरह का डाऊट हो तो सेफ प्ले करें और व्हाइट कलर की प्लेट लें.

2. मैनर्स फॉर टेबल

खाने की टेबल लगाने, बैठने व भोजन करने के कुछ नियम होते हैं. जिनका पालन करके न केवल आप सभ्य बन सकते हैं मजा भी उठा सकते हैं.

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3. जगह : आप सब से पहले  तय कर लें कि आप के मेहमानों की संख्या कितनी है. उसी के अनुसार टेबल सजायें.

4. टेबल क्लाथ : यदि आप डाइनिंग टेबल काम में ले रही हों तो उसे ग्लैमरस लुक देने के लिए सिल्क, साटिन, ब्रोकेड के बार्डर वाले मेजपोश, गोटे की किनारी वाले रनर या कशीदे के काम किए मेजपोश सुंदर लगेंगे.

5. रनर : टेबल क्लाथ पर रखे आकर्षक रनर गरम सामान से आप की टेबल की रक्षा करते हैं. ये रनर टेबल के मध्य में लंबाई में बिछाए जाने चाहिए. यदि ये टेबल क्लाथ के कंट्रास्ट कलर में हों तो टेबल की खूबसूरती दोगुनी हो जाएगी. गरम सर्विंग डिश रखने के लिए लकड़ी के स्टैंड का इस्तेमाल करते हैं, जिसे हम ‘ट्राईवेट्स’ कहते हैं. मेहमानों की संख्या के अनुसार थालियां, कटोरियां, प्लेटें, चम्मच, गिलास, कांटे, छुरी व नैपकिन डाइनिंग टेबल पर रख लें.

6. कटलरी : सर्वप्रथम आप तय कर लें कि कौन सी कटलरी इस्तेमाल करने वाली हैं. फिर हर सीट के सामने डाइनिंग मैट्स बिछाएं.  प्लेट्स को मैट्स के मध्य में रखें. सलाद और चपाती की प्लेट डिनर प्लेट के बाईं तरफ रखें. छुरी और गिलास भी दाईं ओर रखें.

7. नैपकिन : डाइनिंग टेबल पर नैपकिन डिनर प्लेट के बाईं ओर कांटों के नीचे या डिनर प्लेट के ऊपर रखा जा सकता है. नेपकिन आप चौकोर, फोल्ड, क्लासिक फोल्ड, नौट फोल्ड, रिंगफोल्ड या डेजी फोल्ड भी बना सकती हैं.

8. टेबल की सजावट : टेबल के मध्य में ताजे फूलों का गुलदस्ता रख कर माहौल को खुशनुमा बना सकती हैं. टेबल पर एक साल्ट एंड पेपर शेकर अर्थात नमकमिर्चदानी अवश्य रखें. एक सुंदर से बाउल में अचार पहले से ही निकाल कर रख दें. पानी के गिलास डाइनिंग टेबल पर नहीं रखने चाहिए वरना पानी लेते समय वह गिर भी सकते हैं, इसलिए डाइनिंग टेबल के पास छोटी टेबल पर पानी का प्रबंध करें या फिर पानी के गिलास इस तरह रखिए कि बैठने वाले के बाएं हाथ की तरफ हो.

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9. कैंड्ललाइट डिनर

यदि रात का खाना हो तो कैंड्ल्स लगा कर आप उसे कैंड्ललाइट डिनर का लुक दे सकती हैं. एक कांच के बरतन में पानी डाल कर कुछ गुलाब की पत्तियां डाल दें और उस में फ्लोटिंग दीए जला दें. ये आप की डाइनिंग टेबल को नया लुक प्रदान करेंगे. खुशबूदार अगरबत्तियां जला दें. इस से वहां के वातावरण में खुशबू आती रहेगी. मेज पर कपडे के नैपकिन या टिश्यू पेपर भी जरूर रखें ताकि हाथ गंदे होने पर पोंछे जा सकें.

10. कैसे सर्व करें : खाना हमेशा बाईं ओर से परोसा जाता है. डेजर्ट हमेशा सब से अंत में सर्व किया जाता है. खाने की प्लेट्स हमेशा दाहिनी ओर से हटाई जाती हैं. मेजबान होने के नाते सब से अंत में स्वयं को सर्व करना.

World Kidney Day 2020: नियमित देखभाल से किडनी को स्वस्थ रखना है आसान  

किडनी के क्षेत्र में अधिक जानकारी देने, इसे स्वस्थ रखने और लोगों की जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ल्ड किडनी डे को हर साल मार्च महीने की दूसरी गुरुवार को पूरे विश्व में मनाया जाता है, जो इस बार यह 12 मार्च को है. किडनी की बीमारी को लगातार बढ़ते रहने की वजह से इसे मनाया जाना बहुत जरुरी है. हर साल यह एक थीम पर आधारित इस दिन को ‘किडनी हेल्थ फॉर एवरी वन एवरी व्हेयर’ दिया गया है . इस बारें में वोकहार्ड हॉस्पिटल्स के नेफ्रोलोजिस्ट डॉ. असीम थाम्बा का कहना है कि ये बीमारी हर साल बढ़ रही है, इसमें हमारी कोशिश ये है कि ये नॉन कोम्युनिकेबल डिसीज होने और थोड़ी ध्यान रखने से इस बीमारी को रोका जा सकता है, जो संभव है. किडनी की बीमारी हमारे देश में होने पर गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों को बहुत समस्याओं से गुजरना पड़ता है, क्योंकि इस बीमारी के इलाज में खर्चा अधिक होता है. इसमें डाईलिसिस और किडनी की ट्रांसप्लांटेशन खास होती है, जो किडनी के फेल हो जाने पर करना पड़ता है. ये अधिकतर क्रोनिक किडनी डिसीज स्टेज 5 में ही किया जाता है, जिसमें किडनी पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है.

क्या है वजह

भारत में इस बीमारी के होने की मुख्य कारण डायबिटीज और ब्लड प्रेशर है. इसके अलावा किडनी स्टोन, बिना सोचे समझे जरुरत से अधिक दवा खुद से ले लेना, पेनकिलर लेना आदि कई है. जिससे किडनी ख़राब होती रहती है. इसे रोकने में समर्थ होने पर खर्च कम होगा और व्यक्ति कई सारी समस्याओं से बच सकता है. रोकथाम पर अधिक ध्यान देने की जरुरत आज सभी को है, क्योंकि ये साइलेंट बीमारी है और शुरुआत में किसी को कुछ पता नहीं चल पाता. जब केवल 20 प्रतिशत किडनी बची हो, तभी इसके लक्षण दिखाई पड़ते है.

लक्षण

लक्षण निम्न है

  • पैर और चेहरे पर सूजन,
  • खाना न खा पाना,
  • सीढ़ी चढ़ने में सांस फूलना,
  • खून की कमी का होना,
  • काम करने में मेहनत महसूस होना,
  • रात को बार-बार पेशाब लगना आदि है. इसे अगर शुरू में नोटिस कर लिया जाय तो डायलिसिस या ट्रांसप्लांट से बचा जा सकता है.

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इसके आगे डॉ. असीम कहते है कि इसके प्रिवेंशन भी कई तरह के होते है,

  • प्राइमरी प्रिवेंशन,
  • सेकेंडरी प्रिवेंशन और
  • टर्शीयरी प्रिवेंशन
  • प्राइमरी में किडनी की बीमारी के शुरुआत से ही इसे रोक लेना,
  • सेकेंडरी में जल्दी जाँच और इलाज का शुरू करना, ताकि बीमारी बढ़े नहीं,
  • टर्शीयरी में बीमारी होने पर उसका इलाज सही से करना और उसके कॉम्प्लिकेशन को अवॉयड करना होता है.

जाँच

प्रिवेंशन में भी दो छोटे जांच के द्वारा बीमारी है या नहीं इसे देखना होता है.

  • यूरिन टेस्ट में देखना पड़ता है कि प्रोटीन लॉस हो रहा है या नहीं,क्योंकि नार्मल यूरिन टेस्ट में प्रोटीन का नहीं जाना सबसे अच्छा माना जाता है, ये कही भी कम खर्च में किया जा सकता है.
  • खून की जांच के द्वारा क्रिएटिनिन के स्तर को देखना. ये दोनों ही टेस्ट किसी भी व्यक्ति की किडनी की सुरक्षा के लिए करना काफी होता है, इसके अलावा शुगर और ब्लड प्रेशर की भी जांच करना आवश्यक होता है. ये स्क्रीनिंग हर व्यक्ति की नियमित स्वास्थ्य सम्बन्धी जांच में शामिल होना आज बहुत जरुरी हो चुका है. इससे किडनी की इलाज और इसकी रोकथाम काफी हद तक संभव हो सकेगा.

डॉ. असीम का आज की लाइफस्टाइल को देखते हुए कहते है कि कई बार हमारे देश में लोग हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के साथ काम काज करते रहते है और उन्हें किसी भी प्रकार की तकलीफ नहीं होती, ऐसे में अधिकतर किडनी रोगी मेरे पास तब आते है जब उनकी किडनी पूरी तरह से फेल हो जाती है और ऐसे मरीज का इलाज मुश्किल हो जाता है. इसलिए किसी भी प्रकार के लक्षण होते ही तुरंत जांच करवाएं. किसी भी प्रकार की सिरदर्द में केवल दर्दनिवारक दवा न लेकर अपने ब्लड प्रेशर की जांच अवश्य करवाएं. इसके अलावा जिम में जाने वाले यूथ को भी ये जानने की जरुरत है कि जल्दी अपनी बॉडी या सिक्स पैक बनाने की होड़ में बहुत अधिक प्रोटीन सप्लिमेंट और स्टेरॉयड सप्लीमेंट लेने से उसका असर किडनी पर काफी पड़ता है, उन्हें एक्युट किडनी इंज्यूरी होने का खतरा रहता है.

ध्यान देने योग्य बातें,

  • हर इंसान को नियमित व्यायाम करना जरुरी,
  • पेशाब को कभी रोके नहीं, बार-बार पिशाब रोकने से यूरिन ब्लाडर की इलास्टिसिटी चली जाती है जिसका असर किडनी पर पड़ने लगता है,
  • हेल्दी और संतुलित भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, ताजे फल, सब्जी आदि अवश्य शामिल करें.

आगे डॉ. कहते है कि आर्टिफीसियल किडनी यानि बायो इम्प्लांटेबल किडनी पर रिसर्च अभी चल रहा है. इसे रोगी को अभी ऑफर नहीं किया जा रहा है, ज्योंही इसकी सारी ट्रायल्स प्रक्रिया पूरी होगी, इसका प्रयोग किया जायेगा और ये किडनी के मरीजों के लिए अच्छा आप्शन है.

 किडनी रिजेक्शन की क्या है खास वजह

किडनी सूट न करने की ख़ास वजह कई है. किडनी दो प्रकार से ट्रांस्पलांट की जाती है.

  • लाइव रिलेटेड जिसमें परिवार या एक्सटेंडेड फॅमिली से किडनी लिया जाता है,
  • केडेवेरिक किडनी ट्रांसप्लांट, जो ब्रेन डेड के बाद डोनेशन मिलने के बाद किया जाता है.

लाइव रिलेटेड ट्रांसप्लांट में किडनी देने वाले की कई सघन टेस्ट किये जाते है, जिसमें डोनर की  फिजिकल फिटनेस और किडनी लेने वाले की मैचिंग को देखते है और उसके आधार पर किडनी दी जाती है, क्योंकि किडनी देने के बाद डोनर को तकलीफ नहीं होनी चाहिए. इसके नियम बहुत कठिन है और सबकुछ करने के बाद ही ट्रांसप्लांट किया जाता है. इसके बावजूद भी कई बार रिजेक्शन हो सकता है, क्योंकि कई दूसरे भी कारक होते है, जिसकी वजह से किडनी मेल नहीं खा पाती. इसकी वजह भी दो होते है, रिजेक्शन और इन्फेक्शन जो यहाँ बहुत अधिक होता है. इसके लिए नियमित देखभाल और कई सावधानियां बतानी पड़ती है, कई दवाएं जीवन पर्यंत लेना पड़ता है. डोज कम होता जाता है, पर लेना अवश्य पड़ता है. इसमें दिए जाने वाले स्टीरोइड्स की मात्रा को लगातार मोनिटर किया जाता है. इतना ही नहीं जरुरत पड़ने पर इसे दिए बिना भी ट्रांसप्लांट  किया जाता है. इसकी खुराक रोगी की स्वास्थ्य और उम्र पर निर्भर करता है.

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किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद सही तरह से उसकी देखभाल करने पर किडनी की 90 प्रतिशत से अधिक सरवाईवल के चांस रहती है. डोनर की किडनी जितना फिट होगी, उतना ही उसका रिजल्ट अच्छा होगा. किडनी लेने वाले रोगी की हड्डी, हार्ट और शुगर लेवल आदि सब सही हो, तो उसे भी किडनी मिलने पर उसका सरवाईवल नार्मल इंसान की तरह ही रहता है.

क्रोनिक किडनी बीमारी बहुत जल्दी-जल्दी हमारे देश में फ़ैल रहा है और बहुत सारे लोगो को डायलिसिस की जरुरत आज लोगों को हो रही है, इससे लोगों को घबराने की जरुरत नहीं होती. अच्छा और सही समय पर सप्ताह में 3 दिन डायलिसिस किया जाय तो वे 20 साल तक भी इसके बाद जीवित रह सकते है. अच्छे सेंटर पर डायलिसिस करने पर अंजाम हमेशा अच्छा होता है.

3 सखियां: भाग-6

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लंबाचौड़ा, भूरी आंखें, घनी बरौनियां, घुंघराले बाल और जब वह अपनी टूटीफूटी अंगरेजी में बात करता है तो और भी प्यारा लगता है.’’ आभा उसे एकटक देखती रही. फिर बोली, ‘‘ओह, रितिका तेरा क्या होगा? तू तो बचकानी हरकत कर रही है. तेरे इस प्यार का क्या अंजाम होगा कुछ सोचा भी है? जब निरंजन को इस बारे में पता चलेगा तो वे क्या कहेंगे?’’

आगे पढ़ें- ऐंटोनियो के बिना मेरा जीना मुश्किल है. निरंजन जब…

‘‘पता नहीं, लेकिन मैं बस इतना जानती हूं कि ऐंटोनियो के बिना मेरा जीना मुश्किल है. निरंजन जब मेरे जीवन में आए तो वह महज एक समझौता था. वह शादी मैं ने सिर्फ पैसे के लिए की थी. लेकिन ऐंटोनियो के लिए मेरा प्यार एक जनून है, एक पागलपन है.’’

‘‘और तेरा ऐंटोनियो इस बारे में क्या कहता है?’’

‘‘वह भी मुझे जीजान से चाहता है. मुझ से शादी करना चाहता है.’’

‘‘शादी?’’ आभा चौंक पड़ी, ‘‘रितिका, शादी एक बहुत बड़ा कदम है. कहीं तू कुएं से निकल कर खाई में न गिर जाए. आखिर वह शख्स तेरे लिए अजनबी ही तो है. तू उस के बारे में कुछ भी तो नहीं जानती.’’ ‘‘जानती हूं. मैं ने सब पता लगा लिया है. ऐंटोनियो खानदानी रईस है. उस की रगों में शाही खून दौड़ रहा है. उस के पास बेशुमार दौलत है. इटली में रोम के पास ही एक टापू पर उस का महल है और वह अपने मातापिता का अकेला वारिस है. उस ने मुझे न्योता दिया है कि मैं इटली आऊं और उस के घर को देखूं, उस के परिवार से मिलूं.’’

‘‘और निरंजन का क्या होगा?’’

‘‘निरंजन को छोड़ना ही पड़ेगा. मैं ने तय कर लिया है कि मैं क्विक डाइवोर्स ले लूंगी जो फौरन मिल जाता है. फिर मैं इटली जाऊंगी और ऐंटोनियो से ब्याह कर लूंगी.’’ ‘‘देख रितिका जो भी करना जरा सोचसमझ कर करना और मुझ से वादा कर कि तू मुझे अपने बारे में खबर देती रहेगी.’’

‘‘अवश्य. तुझे नहीं बताऊंगी तो और किसे बताऊंगी? तू मेरी बैस्ट फ्रैंड है.’’ समय गुजरता रहा. आभा के यहां 2 प्यारेप्यारे बच्चे हो गए. वह अपनी घरगृहस्थी में पूरी तरह रम गई. अब उसे दम मारने की भी फुरसत नहीं थी. कभीकभी वह बुरी तरह थक जाती. जब राम घर आता तो वह शिकायत करती, ‘‘ओह, आज मेरा पैर बहुत दर्द कर रहा है पूरे 3 घंटे किचन में खड़ी रही.’’

‘‘ओहो, किस ने कहा था तुम्हें इतने सारे और्डर लेने को? लाओ मैं तुम्हारे पैर दबा दूं.’’

‘‘हटो कोई देखेगा तो कहेगा कि मैं अपने पति से पैर दबवा रही हूं.’’ क्या हुआ? आज बराबरी का युग है. तुम मेरे पैर दबाओगी तो मुझे भी तुम्हारे पैर दबाने पड़ेंगे.’’ क्या राम जैसे पुरुष भी इस संसार में होते हैं? उस ने सोचा. यदि राम ने उस की भावनाओं को न समझा होता, यदि वह उस के प्रति संवेदनशील न हुआ होता तो क्या आभा अपने सगेसंबंधियों से दूर अमेरिका में इतने दिनों रह पाती? पर राम के साथ ये चंद साल पलक झपकते बीत गए थे. एक दिन वह किचन में खड़ी खाना बना रही थी. उस ने चूल्हे पर कड़ाही चढ़ा कर उस में तेल उड़ेल दिया और अपनी एक सहेली से फोन पर बातें करने लगी. तेल गरम हो गया तो अचानक उस में आग लग गई. रसोईघर की छत तक लपटें उठने लगीं. लकड़ी की छत धूधू कर के जलने लगी और स्मोक अलार्म बजने लगा. आभा की चीख निकल गई. वह अपने बच्चों को ले कर घर से बाहर भागी. उस ने राम को फोन किया तो फौरन वह घर आया. फिर दमकल की गाडि़यां आईं और आग पर काबू पा लया गया.

‘‘बस बहुत हुआ,’’ राम ने उसे झिड़का, ‘‘अब तुम्हारा घरेलू व्यापार बंद. इस के चलते हमारा आशियाना जल कर खाक हो गया होता. शुक्र है कि घर जलने से बच गया.’’

‘‘और मेरे पास इतने सारे जो और्डर हैं उन का क्या होगा?’’

‘‘वे सब कैंसल…और एक खुशखबरी है तुम्हारे लिए.’’

‘‘वह क्या?’’

‘‘मेरा प्रमोशन हो गया. अब मैं अपनी कंपनी का वाइस प्रैसिडैंट हूं.’’

‘‘अरे वाह. यह तो बड़ी अच्छी खबर है.’’

‘‘हां. इस का मतलब है कि अब तुम्हें इतनी मेहनत करने की जरूरत नहीं. यह काम बंद करो और जरा बच्चों पर ध्यान दो. वे बड़े हो रहे हैं.’’ ‘‘ठीक है. पर अब किचन की मरम्मत कराने का उपाय करो नहीं तो वहां खाना बनाना मुश्किल होगा.’’

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‘‘वह सब छोड़ो. आज हम होटल में खाना खाऐंगे और अब हम नए घर में शिफ्ट होंगे. तुम्हारे लिए नई कार आएगी.’’ ‘‘सच? ओह राम तुम कितने अच्छे हो,’’ वह पति के गले से झूल गई, ‘‘पर पहले अपने लिए नई गाड़ी ले लो. तुम्हारी कार एकदम खटारा हो रही है.’’

‘‘नहीं, पहले मेमसाहब की गाड़ी खरीदी जाएगी.’’

‘‘लेकिन वाइस प्रैसिडैंट तो तुम बने हो.’’

‘‘वह ओहदा, रुतबा सब बाहर वालों के लिए. उन के लिए मैं मिस्टर राम कुमार हूं. अपनी कंपनी का कर्ताधर्ता. घर में तो तुम्हारा राज चलता है…मुझे यह बात कहने में जरा भी संकोच नहीं होता कि मेरी नकेल तुम्हारे हाथों में है. अगर तुम इस घर की बागडोर को कस कर नहीं पकड़तीं तो सब बिखर जाता. मैं भलीभांति जानता हूं कि इस घरपरिवार को सहेज कर रखने का और बच्चों की सही परवरिश का श्रेय तुम्हें ही जाता है. तुम सही अर्थों में मेरी सहधर्मिणी साबित हुईं और तुम्हारे इस सहयोग के लिए मैं हमेशा तुम्हारा आभारी रहूंगा.’’ आभा का तनमन पति के प्यार की ऊष्मा से ओतप्रोत हो गया. साल पर साल गुजरते गए.

एक दिन राम ने दफ्तर से लौट कर उस से कहा, ‘‘तुम्हारे लिए एक खुशखबरी है.’’

‘‘एक और प्रमोशन?’’ आभा चहकी.

‘‘नहीं, तुम तो जानती हो कि हम हिंदुस्तानियों को योग्य होने पर भी कंपनी का प्रैसिडैंट नहीं बनाया जाता. इस मामले में अमेरिकन बड़े घाघ होते हैं. खुशखबरी यह है कि हम इंडिया वापस जा रहे हैं.’’

‘‘अरे अचानक?’’

‘‘हां बहुत दिन वनवास काट लिया. अब अपनों के बीच दिन गुजारने की इच्छा हो रही है. मैं ने तय कर लिया है कि मैं रिटायरमैंट ले लूंगा. इतने दिनों अपने लिए खटता रहा अब दूसरों के लिए काम करूंगा.’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘मतलब यह कि अब मैं अपने देशवासियों के लिए काम करूंगा. समाजसेवा. क्या समझीं? हमारे बच्चे बड़े हो गए हैं. अच्छा पढ़लिख रहे हैं. उन के बारे में हमें चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं. हम उन्हें यहां छोड़ कर वापस घर जाएंगे. मेरे गांव में अपनी पुश्तैनी जमीन है, एक जीर्णशीर्ण घर है, वहां बस जाएंगे. मैं सोच रहा हूं कि उस जमीन में बच्चों के लिए एक छोटा सा प्राइमरी स्कूल खोल देंगे. मुझे हमेशा पढ़ाने का शौक रहा है. मैं उन्हें पढ़ाऊंगा.’’

‘‘और मैं क्या करूंगी?’’

‘‘तुम उन बच्चों के लिए दोपहर का खाना बना कर भेजना. मैं विद्यादान करूंगा, तुम अन्नदान करना. इस से बढ़ कर पुण्य का काम और कोई नहीं है. क्यों, क्या कहती हो?’’

आगे पढ़ें- फिर एक दिन आभा को अचानक फेसबुक पर रितिका की खबर मिली…

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चिली न्यूट्रिला

आजकल यंगस्टर्स में चाइनीज डिश का क्रेज बहुत देखने को मिलता है, लेकिन रोजाना चाइनीज फूड खाना हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है. इसीलिए आज हम आपको चाइनीज डिश को हेल्दी और टेस्टी डिश के रूप में कैसे चेंज करें इसके लिए चिली न्यूट्रिला की रेसिपी बताएंगे.

हमें चाहिए

1/2 कप सोयाबीन की बडि़यां

1 शिमलामिर्च

1 प्याज

1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन व हरीमिर्च का पेस्ट

1/2 पैकेट चिली पनीर मसाला

1 टमाटर

1 बड़ा चम्मच तेल

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1/2 कप दूध

नमक स्वादानुसार.

बनाने का तरीका

न्यूट्रिला को कुछ देर गरम पानी में भिगोए रखने के बाद अच्छी तरह निचोड़ कर रख लें.

एक पैन में तेल गरम कर अदरक पेस्ट डाल कर भूनें. प्याज के मोटे टुकड़े काट कर पैन में डालें. कुछ नर्म होने तक भूनें. टमाटर के मोटे टुकड़े काट कर मिलाएं. जरा सा गलने तक पकाएं.

सोया चंक मिला कर कुछ देर भूनें. चिली पनीर मसाला को 1 बड़े चम्मच पानी में मिला कर लगातार चलाते हुए सब्जी में डाल दें. इस में नमक मिलाएं. दूध डाल कर सब्जी को कुछ देर ढक कर पकाएं.

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बाटा के 9to9 कलैक्शन के साथ जानें कैसा हो वर्किंग वूमन्स का फुटवियर

आज के समय में अधिकतर महिलाएं वर्किंग हैं. वर्किंग होने की वजह से घर और ऑफिस के बीच वे ऐसे बंध जाती हैं कि अपने पर उचित ध्यान नहीं दे पाती. दूसरी तरफ कुछ ऐसी भी महिलाएं होती हैं जो औफिस जाते वक्त ड्रेसअप तो अच्छे से करती हैं लेकिन जल्दी-जल्दी के चक्कर में कोई भी फुटवियर पहन लेती हैं जिससे उनका स्मार्ट लुक निखर कर नहीं आ पाता. वूमन को फैशन का ज्ञान तो होता है लेकिन इस को सही तरह से कैरी कैसे करें, इस में अधिकतर महिलाएं कन्फ्यूज हो जाती हैं. आइए, जानते हैबाटा के 9to9 कलैक्शन के साथ ऑफिस लुक में स्टाइलिश और कंफर्टेबल कैसे दिखें:

प्रोफेशनल की तरह कैरी करें अपने को 

वर्किंग वूमन को ऑफिस में खुद को सही तरीके से पेश करना बहुत जरूरी है. कुछ समय पहले तक महिलाएं सूट सलवार, साड़ी पहन काम पर जाया करती थी. लेकिन, अब महिलाएं काफी स्मार्ट हो चुकी हैं आज की वर्किंग महिलाएं ट्राउजर, शर्ट जैसे परिधानों को अपना चुकी हैं. ट्राउजर शर्ट या स्कर्ट जैसे फौर्मल ड्रेस के साथ लोफर शूज और बेली शूज परफैक्ट मैच करती है.

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मीटिंग में हील करें अवौएड

यदि ऑफिस में कोई मीटिंग है तो गलती से भी पैंसिल हील या हाई हील क इस्तेमाल न करें. हमेशा आरामदेह फुटवियर ही पहनें इस से आपका ध्यान भटकेगा नहीं और एकाग्रता बनी रहेगी. यदि आपका मन हील पहनने का है तो आप बाटा के 9to9 कलैक्शन में से कंफर्ट ब्लौक हील सैंडल ट्राई कर सकती हैं. यह पहनने में बहुत आरामदायक है, इस सैंडल की खास बात है कि इसकी हील काफी कंफर्टेबल है और यह दिखने में बेहद स्टाइलिश है.

shoes

आउटडोर जौब में कंफर्ट सबसे अहम

ऐसा कई बार होता है कि हम औफिस ऐसी ड्रेस पहन कर चले जाते हैं जिसमें हम कंफर्ट महसूस नहीं करते. उसी तरह हम कई बार फुटवियर भी ऐसी ही पहन कर चले जाते हैं जिस में हम अनकंफर्टेबल फील करते है. फैशनेबल दिखने के चक्कर में हम गलत फुटवियर का चयन कर लेते है. जिससे हमारा पूरा ध्यान उसपर ही रहता है, ना कि काम पर.

आज के समय में पेशे के अनुसार ड्रेस चुनना आवश्यक हो गया है और ड्रेस के अनुसार सही फुटवियर का चयन और भी जरूरी. यदि आपका पहनावा अच्छा है तो भी लोग आप की तरफ आकर्षित होंगे. अगर आपके जौब में फील्ड वर्क है या आपको ज्यादा ऑफिस में इधर-उधर जाना होता है तो, आपके लिए कैजुअल जूते सबसे परफैक्ट औप्शन हैं. बाटा के कैजुअल शूज क्लैक्शन में आपको लैटेस्ट डिजाइन के शूज मिलेंगे वो भी कई औप्शन के साथ.

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कंफर्ट के साथ स्टाइल भी जरूरी

heels

वर्किंग वूमन के लिए कम्फर्ट बहुत जरूरी है. यदि आप अपने पहनावे में कंफर्टेबल हैं तो आपको खुद अच्छा महसूस होने लगता है. कई बार ऑफिस की तरफ से  कई सारे इवेंट में जाना होता है. ऐसे में वर्किंग वूमन को कम्फर्ट के साथ स्टाइल का भी ध्यान रखना जरूरी हो जाता है. अगर आप किसी इवेंट में जा रही हैं तो, हमेशा फुटवियर अपने कंफर्ट के अनुसार पहनें. ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आपने जबरदस्ती कोई भी फुटवियर पहन लिया है. बाटा के 9to9 कलैक्शन में बेहद स्टाइलिश और आरामदायक हील्स हैं. जिन्हें पहन कर आप स्टाइलिश दिख सकती हैं और सबको आकर्षित कर सकती हैं.

जानिए अपनी प्रेमिका को धोखा क्यों देते हैं पुरुष

एक रिलेशनशिप में एक-दूसरे के प्रति ईमानदार होना जरुरी होता है, तभी एक रिश्ता सही रहता है. एक-दूसरे की भावनाओं को समझना रिश्ते को मजबूत बनाता है. लेकिन आज के समय में बहुत से पुरुष अपने रिश्ते के प्रति वफादार नहीं रहते हैं और अपने पार्टनर को धोखा देते हैं. जो पुरुष अपनी साथी को धोखा देने के बारे में सोचते हैं उन्हें इस बात का बिल्कुल आभास नहीं होता है कि वे कुछ गलत कर रहें हैं. पुरूषों की अपेक्षा महिलाएं अपने साथी को कम धोखा देती हैं.

1. अपने साथी के प्रति वफादार नहीं होते हैं:

कुछ ऐसे पुरुष होते हैं जो अपने साथी के लिए वफादार होते हैं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें किसी की भावनाओं की कद्र नहीं होती. इस तरह के पुरुष सिर्फ अपनी महिला साथी का इस्तेमाल करते हैं. वे उन्हें स्पेशल महसूस कराते हैं. लेकिन वास्तव में वह अपनी साथी के लिए बिल्कुल भी ईमानदार नहीं होते हैं.

2. अपने साथी को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं

हर व्यक्ति धोखा दे ऐसा जरुरी नहीं होता है. लेकिन कुछ ऐसे पुरुष होते हैं जो अपने रिश्ते को लेकर थोड़े असुरक्षित होते हैं. जिसके कारण ना चाहते हुए भी वह अपने पार्टनर के साथ गलत कर बैठते हैं. उन्हें इस बात का डर होता है कि कहीं वे अपने साथी को खो तो नहीं देंगे. इस डर की वजह से वे अपने रिश्ते के प्रति ईमानदार नहीं रह पाते हैं और अपने पार्टनर को धोखा दे बैठते हैं.

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3. वह नहीं समझते हैं कि उनके पास जो है कितना अनमोल है:

हमेशा लोगों को जितना मिलता है उससे अधिक पाने कि इच्छा होती है. और इनके पास जो होता है वह उसकी कद्र नहीं करते हैं. ऐसा पुरूषों के साथ भी होता है कि उन्हें जैसी पार्टर मिली होती है वह उन्हें कम ही लगता है. उनके दिमाग में हमेशा यह बात होती है कि जो मिला है उन्हें उससे और बेहतर मिल सकता है. ऐसे पुरूषों में अपने पार्टनर को धोखा देने की प्रवृत्ति अधिक होती है क्योंकि इन्हें जितना मिलता है उसमें उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती है.

4. पुरुष भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं:

पुरुष भावनात्मक और मानसिक रूप से कमजोर होते हैं इसलिए उन्हें उन्हें बेवकूफ बनाना आसान होता है. मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण उनमें सेल्फ कंट्रोल की कमी होती है इस वजह से उनके लिए अपने पार्टनर को धोखा देना ज्यादा मुश्किल नहीं होता है. ऐसे लोग बहुत जल्दी लोगों से प्रभावित हो जाते हैं और कभी-कभी दूसरे की बातें सुनकर अपने पार्टनर की भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं.

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