‘कार्तिक’ से नफरत करने लगेगा ‘कायरव’, अब क्या करेगी ‘नायरा’ ?

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के मेकर्स शो में नए ट्विस्ट एंड टर्न्स लाकर फैंस का दिल जीतने की पूरी तैयारी में है. हाल ही में हमने आपको बताया था कि ‘नायरा’ को ‘कायरव’ की कस्टडी मिल जाएगी, जिसके बाद ‘कार्तिक’ ‘नायरा’ माफी मांगते हुए और खुद को कोसता हुआ नजर आएगा. वहीं ‘कायरव’ को गलतफहमी होगी कि ‘नायरा और कार्तिक’ की दोबारा लड़ाई होगी. पर बड़ी बात तब होगी जब ‘कायरव’ का गुस्सा ‘कार्तिक’ पर निकलेगा. आइए आपको बताते हैं क्या करेगा ‘कायरव’…

नए प्रोमो में नजर आया ‘कायरव’ का गुस्सा

शो का नया प्रोमो सामने आया है. जिसमें ये दिखाया गया है कि ‘कायरव’ अपनी और ‘कार्तिक’ की फोटो के टुकड़े-टुकड़े कर देता है. दरअसल, ‘कायरव’ ने ‘कार्तिक और नायरा’ को बहस करते हुए देख लिया था. ऐसे में उसे लग रहा है कि उसकी मां के सारे दुखों की वजह उसके पापा ‘कार्तिक’ ही है. उसकी वजह से ही ‘नायरा’ की आंखों में हमेशा आंसू रहते हैं. ‘कायरव’ के मन में ‘कार्तिक’ के लिए कड़वाहट आ जाएगी और वो उससे दूर होने लगेगा.

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बर्थडे पर नजर आएगा बड़ा ड्रामा

नए प्रोमो में ‘नायरा और कार्तिक’ ‘कायरव’ के बर्थडे की बात करते हुए नजर आ रहे हैं, जिसमें ‘कार्तिक’ ‘नायरा’ से बात करते हुए काफी एक्साइटेड नजर आ रहा है. ‘कार्तिक नायरा’ से कह रहा है कि ‘ मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मेरा और मेरे बेटे का जन्मदिन एक ही दिन है….’ वहीं दूसरी ओर ‘कायरव’ के मन में धीरे धीरे ‘कार्तिक’ के लिए जहर भरता जा रहा है.

‘कार्तिक’ मांग चुका है ‘नायरा’ से माफी

कोर्ट में ‘कायरव’ की कस्टडी के ड्रामे के चलते ‘नायरा और कार्तिक’ की सारी गलत फहमियां दूर हो गई हैं. वहीं इसी दौरान ‘कार्तिक’ ‘नायरा’ से माफी मांग चुका है, जिसके चलते ‘कायरव’ को गलतफहमी हो चुकी है.

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बता दें, शो में जल्द ही ‘वेदिका’ की एक्जिट होने वाली है. ट्विस्ट ये होगा की ‘नायरा वेदिका’ के एक्स हस्बैंड का राज खोलते हुए सब के सामने ‘वेदिका’ का पर्दाफाश करेगी और सभी घरवाले चौंक जाएंगे.

Romantic Story In Hindi: प्रेम लहर की मौत- भाग 3

पिछला भाग पढ़ने के लिए- प्रेम लहर की मौत: भाग-2

लेखक- वीरेंद्र बहादुर सिंह 

  ‘‘ऐसा क्यों?’’

  ‘‘बिकाज…बिकाज… आई लव यू. अनु एंड आई नो दैट यू आलसो लव मी. इसी बात से डर लग रहा था कि प्रियम के बारे में पता चलने पर कहीं तुम्हें खो न दूं.’’

असीम की बात सुन कर मैं फफकफफक कर रो पड़ी. रोते हुए मैं ने कहा, ‘‘असीम तुम्हें पता है कि प्रियम तुम्हें कितना चाहती है और तुम भी उसे कितना चाहते हो. मात्र 4 महीने के अपने इस संबंध में तुम अपने और प्रियम के 4 सालों के प्यार को कैसे भुला सकोगे? और हमारे बीच संबंध ही क्या है?

  ‘‘असीम, आज भी तुम मात्र प्रियम को ही प्यार करते हो. जितना पहले करते थे, उतना ही, शायद उस से भी ज्यादा. वह अभी तुम्हारे पास यानी तुम्हारे साथ नहीं है. तुम उसे खूब मिस कर रहे हो.

  ‘‘ऐसे में मेरे प्रेम की वजह से तुम्हें ऐसा लगता है कि तुम मुझे प्रेम करते हो. जबकि सच्चाई यह है कि तुम ने मुझे कभी प्रेम किया ही नहीं. तुम मुझ में प्रियम को खोजते हो. मेरा तुम्हारा केयर करना, तुम्हारी छोटीछोटी बातों का ध्यान रखना, तुम्हें लगता है तुम्हारे लिए यह सब प्रियम कर रही है. तुम्हें ऐसा लगा, इसीलिए तुम मेरे प्रति आकर्षित हुए. बट इट्स नाट लव. असीम, यू नाट लव मी.’’

  ‘‘पर अनु तुम…’’

  ‘‘मैं… यस औफकोर्स आई लव यू. आई लव यू सो मच.’’

  ‘‘तो क्या यह काफी नहीं है.’’

  ‘‘नहीं असीम, यह काफी नहीं है. प्रियम और तुम एकदूसरे को बहुत प्यार करते हो. हां, यह बात भी सच है कि मैं भी तुम्हें बहुत प्यार करती हूं. पर मैं इतनी स्वार्थी नहीं हूं कि अपने प्यार के लिए प्रियम के साथ धोखा करूं या धोखा होने दूं. नहीं असीम, मैं अपने सपनों का महल प्रियम की हाय पर नहीं खड़ा करना चाहती. इसीलिए मैं ने तय किया है कि मैं यहां से दूर चली जाऊंगी, तुम से बहुत ही दूर.’’

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  ‘‘अरे, तुम कहां और क्यों जाओगी? जरूरत ही क्या है यहां से कहीं जाने की?’’

  ‘‘क्यों जाऊंगी, कहां जाऊंगी, यह तय नहीं है. पर जाऊंगी जरूर, यह तय है.’’

  ‘‘प्लीज अनु, डोंट डू दिस यू मी. मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता.’’

  ‘‘असीम, मैं भी तुम से यही कहती हूं, डोंट डू दिस टू प्रियम, मात्र 4 महीने के प्रेम के लिए तुम 4 साल के प्रियम के प्रेम को कैसे भूल सकते हो. उस के प्रेम की कुर्बानी मत लो असीम.’’

  ‘‘अनु, तुम ने जो निर्णय लिया है, बहुत सही लिया है.’’ निकी ने कहा.

मैं निकी के गले लग कर खूब रोई. उस ने भी मुझे रोने दिया. रोने से दिल हलका हो गया. उस रात मैं ने कुछ नहीं खाया. निकी ने मुझे बहुत समझाया, पर कौर गले के नीचे नहीं उतरा. मैं सो गई. सुबह उठी तो काफी ठीक थी. फ्रैश हो कर मैं औफिस गई.

मैं ने व्यक्तिगत कारणों से नौकरी छोड़ने की बात लिख कर एक महीने का नोटिस दे कर नौकरी से इस्तीफा दे दिया. बौस और सहकर्मियों ने पूछा कि बात क्या है, बताओ तो सही, सब मिल कर उस का हल निकालेंगे, पर मैं अपने निर्णय पर अडिग रही.

उस के बाद मैं कैसे जी रही हूं, मैं ही जानती हूं. जीवन जैसे यंत्रवत हो गया है. हंसना बोलना तो जैसे भूल ही गई हूं. कलेजा अंदर ही अंदर फटता है. मेरी व्यथा या तो मैं जानती हूं या फिर निकी, हां कुछ हद तक असीम भी. किसी तरह 20 दिन बीत गए. इस बीच मैं ने न तो असीम को फोन किया और न मैसेज.

उस के फोन भी आ रहे थे अैर मैसेज भी. पर मैं न फोन उठा रही थी और न मैसेज के जवाब दे रही थी. मैं जानती थी कि उस की भी मेरी जैसी ही व्यथा है. इसलिए मैं ने निकी से कहा कि वह उस के कांटैक्ट में रहे. मेरे साथ तो निकी थी. लेकिन वह तो एकदम अकेला था.

एक दिन उस ने निकी से बहुत रिक्वेस्ट की तो निकी ने मुझ से कहा कि असीम से बात कर लो. मैं ने बात की तो असीम ने कहा, ‘‘अनु, मैं ने जब गंभीरता से विचार किया तो तुम्हारी बात सच निकली, सचमुच मैं आज भी प्रियम को उतना ही प्यारर करता हूं. उस की कमी मुझे खूब खलती है. पर अनु तुम…? हमने इतना समय साथ बिताया, तुम मुझ से काफी जुड़ गई थीं, मुझे तुम्हारी बहुत चिंता हो रही है.’’

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  ‘‘इट्स ओके असीम, आई एम फाइन. तुम मेरी जरा भी चिंता मत करो. मैं इतनी डरपोक या कमजोर नहीं कि खुद को किसी तरह का नुकसान पहुंचाऊं या आत्महत्या जैसी कायराना हरकत के बारे में सोचूं. असीम, मुझे मरना नहीं जीना है, तुम्हारे प्रेम में. और मैं जीऊंगी भी. मैं जानती हूं कि ऐसी स्थिति में मरना बहुत आसान है, जीना बहुत मुश्किल. पर तुम्हारी चाहत और प्रेम को मैं अपने हृदय में संभाल कर जीऊंगी. मैं भले ही तुम्हारा प्रेम नहीं पा सकी, पर तुम्हें, मात्र तुम्हें प्रेम करती हूं और इसी प्रेम के साथ जी सकती हूं.’’ कह कर मैं ने फोन काट दिया.

नोटिस के दौरान मैं ने अपने लिए दूसरे शहर में नौकरी तलाश ली थी. रहने के लिए जगह की भी व्यवस्था कर ली थी. दो दिन पहले असीम का फोन फिर आया. उस ने मुझ से मिलने की इच्छा प्रकट की. मैं मना नहीं कर सकी. मैं ने कहा कि हम स्टेशन पर मिलेंगे. उस की ट्रेन साढ़े 10 बजे आती थी और मेरी टे्रन साढ़े 12 बजे की थी. हमारे पास 2 घंटे का समय था. अंतिम मुलाकात के लिए इतना समय पर्याप्त था.

अनु ये बातें कर रही थी, तभी न जाने क्यों मुझे लगा कि मैं उस के प्रेम, उस की संवेदनशीलता की ओर आकर्षित होने लगा हूं. शायद उसे प्रेम करने लगा हूं. पर उस समय चुपचाप उस की बातें सुनने के अलावा मैं कुछ नहीं कर सकता था. मेरा मूक श्रोता बने रहना ही उचित था. मैं सिर्फ उस की बातें सुनता रहा. उस ने अपनी और असीम की अंतिम मुलाकात की बातें बतानी शुरू कीं.

असीम की ट्रेन 15 मिनट लेट थी. इसलिए उस की ट्रेन पौने 11 बजे आई. मैं अपना सामान ले कर निकी के साथ 10 बजे ही स्टेशन पर पहुंच गई थी. असीम आया, मैं ने उस से हाथ मिलाया. हम स्टेशन के सामने वाले रेस्टोरेंट में कोने की मेज पर आमनेसामने बैठे. सुबह का समय था इसलिए ज्यादा चहलपहल नहीं थी.

हम दोनों की स्थिति ऐसी थी कि दोनों एक शब्द भी नहीं बोल पा रहे थे. फिर भी बात शुरू हुई. उस ने मेरा हाथ हलके से हथेली में ले कर कहा, ‘‘अनु, आई एम वेरी सौरी, मेरी वजह से तुम्हें यह तकलीफ सहन करनी पड़ रही है.’’

  ‘‘प्लीज असीम, डू नाट से सौरी. मेरे नसीब में तुम्हारा बस इतना ही प्यार था. और हां, हम ने साथ बिताए समय के दौरान अगर कभी तुम्हें मेरे लिए, मात्र मेरे लिए सहज भी प्रेम महसूस हुआ हो तो उसी प्रेम की कसम, तुम कभी भी मेरे लिए गिल्टी कांसेस फील मत करना. प्रियम को खूब प्रेम करना. प्रियम को खुश होते देख, समझना मैं खुश हो रही हूं. मुझे पूरा विश्वास है कि तुम मेरी कसम नहीं तोड़ोगे. अब एक बढि़या सी स्माइल कर दो.’’

आगे पढ़ें- असीम ने तो स्माइल की, पर…

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क्लब: भाग-3

पिछला भाग पढ़ने के लिए- क्लब: भाग-2

लेखक- अनिल चाचरा

अर्चना ने अपने को छुड़ाने की कोई खास कोशिश नहीं की, पर नवीन को फौरन ही अपनी बांहों के घेरे से उसे मुक्त करने को मजबूर होना पड़ा.

2 सादी वरदी में पुलिस वाले एक घनी झाड़ी के पीछे से अचानक उन के सामने प्रकट हुए और शिकारी की नजरों से घूरते हुए पास आ गए.

‘‘शर्म नहीं आती तुम दोनों को सार्वजनिक स्थल पर अश्लील हरकतें करते हुए. समाज में गंदगी फैलाने के लिए तुम जैसे लोगों का मुंह काला कर के सड़कों पर घुमाना चाहिए,’’ लंबे कद का पुलिस वाला नवीन को खा जाने वाली नजरों से घूर रहा था.

‘‘बेकार में हमें तंग मत करो,’’ नवीन ने अपने डर को छिपाने का प्रयास करते हुए तेज स्वर में कहा, ‘‘हम कोई गलत हरकत नहीं कर रहे थे.’’

‘‘अब थाने चल कर सफाई देना,’’ दूसरे पुलिस वाले ने उन्हें फौरन धमकी दे डाली.

‘‘मैं पुलिस स्टेशन बिलकुल नहीं जाऊंगी,’’ अर्चना एकदम से रोंआसी हो उठी.

‘‘यह इस की पत्नी नहीं हो सकती,’’ लंबे कद का पुलिस वाला अपने साथी से बोला.

‘‘ऐसा क्यों कह रहे हैं, सर?’’ उस के साथी ने उत्सुकता दर्शाई.

‘‘अरे, अपनी बीवी के साथ कौन इतने जोश से गले मिलने की कोशिश करता है?’’

‘‘इस का मतलब यह किसी और की बीवी के साथ ऐश करने यहां आया है. गुड, हमारा केस इस कारण मजबूत बनेगा, सर.’’

‘‘नवीन, कुछ करो, प्लीज,’’ अर्चना के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं.

‘‘देखिए, आप दोनों को जबरदस्त गलतफहमी हुई है. हम कोई अश्लील हरकत…’’

‘‘कर ही नहीं सकते क्योंकि इन के बीच गलत रिश्ता है ही नहीं मिस्टर पुलिसमैन,’’ अचानक झाड़ी के पीछे से निकल कर उन का एक और सहयोगी मनोज उन के सामने आ गया.

उस के साथ विकास भी था. इन्हें देख कर पुलिस वाले ज्यादा सतर्क  और गंभीर से नजर आने लगे.

‘‘आप इन दोनों को जानते हैं?’’ लंबे पुलिस वाले ने सख्त स्वर में सवाल किया.

‘‘जानते भी हैं और इन के साथ भी हैं. यह हैं हमारी अर्चना दीदी,’’ विकास ने परिचय दिया.

‘‘और यह साहब?’’ उस ने नवीन की तरफ उंगली उठाई.

‘‘यह हमारे नवीन भैया हैं, क्योंकि उम्र में सब से बड़े हैं. अब आप ही बताइए कि कहीं भाईबहन अश्लील हरकत…छी, छी, छी,’’ विकास ने बुरी सी शक्ल बना कर दोनों पुलिस वालों को शर्मिंदा करने का प्रयास किया.

‘‘अगर ये भाईबहन हैं तो यह इसे गले लगाने की क्यों कोशिश कर रहा था?’’ दूसरे  पुलिस वाले ने अपने माथे पर बल डाल कर प्रश्न किया.

‘‘जवाब दीजिए, नवीन भाई साहब,’’ मनोज ने उसे हिंटदेने की कोशिश की, ‘‘अर्चना दीदी आजकल जीजाजी की सेहत के कारण चिंतित चल रही हैं. कहीं आप उन्हें हौसला बंधाने को तो गले से नहीं लगा रहे थे?’’

‘‘बिलकुल, बिलकुल, यही बात है,’’ नवीन अपनी सफाई देते हुए उत्तेजित सा हो उठा, ‘‘मेजर साहब, यानी कि मेरे जीजा की तबीयत ठीक नहीं चल रही है. इसलिए यह दुखी थी और मैं इसे सांत्वना…’’

‘‘क्या आप के पति फौज में मेजर हैं?’’ लंबे पुलिस वाले ने नवीन को नजरअंदाज कर अर्चना से अचानक अपना लहजा बदल कर बड़े सम्मानित ढंग से पूछा.

‘‘जी, हां,’’ अर्चना ने संक्षिप्त सा जवाब दिया.

‘‘यह आप की बहन हैं?’’ दूसरे ने नवीन से पूछा.

‘‘जी, हां.’’

‘‘असली बहन हैं?’’

‘‘जी, नहीं. ये आफिस वाली बहन हैं,’’ मनोज बीच में बोल पड़ा.

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘मतलब यह कि  हम सब एक आफिस में साथसाथ काम करते हैं और वहां सब के बीच भाईबहन का रिश्ता है.’’

‘‘आप को विश्वास नहीं हो रहा है तो नवीन भैया से पूछ लीजिए,’’ विकास बोला था.

दोनों पुलिस वालों ने नवीन को पैनी निगाहों से घूरा तो उस ने फौरन हकलाते हुए कहा, ‘‘हांहां, हम सब वहां भाईबहन की तरह प्यार से रहते हैं.’’

‘‘आप को परेशान किया इसलिए माफी चाहते हैं, मैडम,’’ लंबे कद के पुलिस वाले ने अर्चना से क्षमा मांगी और अपने साथी के साथ वहां से चला गया.

जहां वे बैठे थे वहां से सड़क नजर आती थी. वहां खड़ी एक सफेद रंग की कार में बैठे ड्राइवर ने अचानक जोरजोर से हार्न बजाना शुरू कर दिया.

‘‘मुझे वह बुला रहे हैं,’’ ऐसी सूचना दे कर अर्चना अचानक उठ खड़ी हुई.

‘‘कौन बुला रहा है?’’ नवीन ने चौंकते हुए पूछा.

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‘‘थैंक यू, नवीन भैया, लंच और फिल्म दिखाने के लिए बहुतबहुत धन्यवाद,’’ उस के सवाल का कोई जवाब दिए बिना अर्चना उस सफेद कार की तरफ चल पड़ी.

‘‘नवीन भैया,’’ मनोज ने ये 2 शब्द मुंह से निकाले और अचानक ठहाका मार कर हंसने लगा.

‘‘सर, वैलकम टू दी अर्चना दीदी क्लब,’’ विकास ने भी अपने सहयोगी का हंसने में साथ दिया.

‘‘देखो, ये बात किसी को आफिस में मत बताना,’’ अपने गुस्से को पी कर नवीन ने उन दोनों से प्रार्थना की.

दोनों ने मुंह पर उंगली रख कर उन्हें अपने खामोश रहने के प्रति आश्वस्त किया, पर वे दोनों अपनी हंसी रोकने में असफल रहे.

नवीन ने जब कार के ड्राइवर को बाहर निकलते देखा तो जोर से चौंका. ड्राइवर वही बड़ीबड़ी मूंछों वाला शख्स था जिसे उन्होंने सिनेमा हाल के बाहर अर्चना को घूरते हुए देखा था और जो अंदर हाल में उस की बगल में बैठा था.

‘‘यह कौन है?’’ नवीन ने उलझन भरे स्वर में पूछा.

‘‘यह मेजर साहब हैं…अर्चना के पति,’’ विकास ने जवाब दिया.

‘‘पर…पर अर्चना ने मुझे सच क्यों नहीं बताया?’’

‘‘सर, हमें भी नहीं बताया था और हम बन गए अर्चना दीदी क्लब के पहले 2 सदस्य. अपने फौजी जवानों की मदद से…होटल व सिनेमा हाल के मालिक से उन की दोस्ती है और उन दोनों की मदद से मेजर साहब अपनी छुट्टियों में अर्चना दीदी को तंग करने वाले हमारेतुम्हारे जैसे किसी रोमियो को अर्चना दीदी क्लबका सदस्य बनवा जाते हैं.’’

‘‘और ये दोनों पुलिस वाले नकली थे?’’

‘‘नहीं, सर, ये मिलिटरी पुलिस के लोग थे.’’

‘‘किसी को यों बेवकूफ बनाने का तरीका बिलकुल गलत है,’’ नवीन अपनी कमीज के टूटे बटनों को छू कर उस घटना को याद कर रहा था जब 2 युवकों ने, जो यकीनन फौजी सिपाही थे, उस पर हाथ उठाया था.

‘‘सर, आप के साथ जो गुस्ताखी हुई है, यह उस गुस्ताखी की सजा है जो आप ने यकीनन अर्चना दीदी के साथ की होगी. वैसे मेजर साहब दिल के अच्छे इनसान हैं और उन का एक संदेशा है आप के लिए.’’

‘‘क्या संदेशा है?’’

‘‘आर्मी क्लब में आप सपरिवार उन के डिनर पर मेहमान बन सकते हैं. आज वह दोनों पारिवारिक मित्र हैं और आप  चाहें तो उसी श्रेणी में शामिल हो सकते हैं.’’

‘‘सर, आप को क्लब जरूर आना चाहिए. अपनी भूल को सुधारने व क्षमा मांगने का यह अच्छा मौका साबित होगा,’’ बहुत देर से खामोश मनोज ने नवीन को सलाह दी.

कुछ पलों तक नवीन खामोश रह कर सोचविचार में डूबे रहे. फिर अचानक उन्होंने अपने कंधे उचकाए और मुसकरा पडे़.

‘‘दोस्तो, हम अर्चना दीदी क्लबके सदस्यों को मिलजुल कर रहना ही चाहिए. मैं सपरिवार क्लब में पहुंचूंगा.’’

नवीन की इस घोषणा को सुन कर विकास और मनोज कुछ हैरान हुए और फिर उन तीनों के सम्मिलित ठहाके से पार्क का वह कोना गूंज उठा.

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DIWALI 2019: घर पर बनाएं गुजिया

अगर आप फेस्टिवल में कुछ टेस्टी और हेल्दी ट्राय करना चाहती हैं तो आज हम आपके गुजिया की टेस्टी रेसिपी बताएंगे. गुजिया की इस रेसिपी को आप अपनी फैमिली के लिए बनाकर तारीफें बटोर सकती हैं. आइए आपको बताते हैं गुजिया की खास रेसिपी…

हमें चाहिए

भरने के लिए

500 ग्राम खोया / मावा

6 बडे टेबल स्पून शुगरफ्री नेचुरा डाइट शुगर

3 ¼ टेबल स्पून कद्दू कस किया हुआ नारियल

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15 काजू (बारीक कतरे हुए)

15 बादाम (बारीक कतरे हुए)

20 किशमिश

½ हरी इलायची या जायफल पाउडर

बाहरी कवर के लिए:

4 कप मैदा

½ नमक

5 टेबल स्पून घी

बनाने का तरीका:

खोवा को मैश करके मीडियम आंच पर गुलाबी होने तक निकालें. आंच से उतारें और ठंडा होने के लिए रख दें. शुगर फ्री नेचुरा औ खोवा के साथ सारी अंदर डालने वाली सामग्री को मिलायें और एक तरफ रख दें. कवर बनाने के लिए, मैदा और नमक को लें और 5 चम्मच घी के साथ मिलायें. ज़रूरत के हिसाब से पानी डालकर गूंथ लें. फिर इसे गीले कपडे से ढंककर 15 मिनट के लिए रख दें.

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गूंथे हुए मैदे को दो अलग गोल लोयों में बाँट लें,हर लोये से चार डायमीटर की पूरी बना लें. घी लगायी हुई गुजिया मोल्ड में पूरी को अच्छे से फैलायें और एक टेबलस्पून अंदर वाली सामग्री इसमें डालें. पूरी के किनारों को हल्का गीला करें और फिर मोल्ड को बंदकर दें. किनारों को दबायें और अतिरिक्त मैदे को हटाकर फिर से इस्तेमाल करने के लिए रख दें.

इस तरह सारी गुजिया तैयार करें और उन पर गीला कपडा ढंक दें. कडाही में घी गर्म करें और गुजिया को सुनहरी होने तक तलें. गुजिया को पैपर या नैपकिन पर रखकर घी सोख लेने दें. ठंडा होने दें, उसके बाद एयरटाईट टिफिन में रख दें.

DIWALI 2019: इन खूबसूरत कैंडल्स से सजाएं घर

दीवाली के फेस्टिवल में सबसे ज्यादा जरूरी है रोशनी. दिवाली पर अगर घर में रोशनी न हो तो दिवाली का मतलब नही है. रोशनी के लिए हम घर में दीये, लाइट्स और कैंडल लगाते हैं, जो घर को जगमगा देता है. वहीं मार्केट में घरों को अलग लिक देने के लिए मार्केट में कई स्टाइलिश और ट्रेंडी कैंडल आ गई हैं, जो घर को जगमग बनाने के साथ-साथ खूबसूरत लुक भी देगा. आइए आपको बताते हैं ट्रेंडी कैंडल के औप्शन…

1. फ्लेवर्ड कैंडल्स से महकाएं घर

बाजार में अनार, अमरूद, सेब, ब्लू बेरी, स्ट्राबेरी समेत तमाम तरह के फ्लेवर्स में भी कैंडल्स उपलब्ध हैं, जिन्हें खरीद आप अपने घर में खुशबू बिखेर सकती हैं.  सिर्फ फल ह नहीं बाजार में गुलाब, तितली, दिल, कमल, चांद-तारे के शेप वाली बड़ी कैंडल्स भी मिल रहे हैं.

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2. मशाल वाली कैंडल से सजाएं घर

 

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Quick post just to say how excited I am to see the new glass candles making it out into the world! I love these jars so much and I’m hoping with how thick and sturdy they are that they will have a higher chance of making them to you in one piece but leave it to the usps to challenge that statement ?? . _____ . I hope you all have a fantastic Wednesday! ? ? by @mixed_matched_socks ? . _____ . #candles #soycandles #ilovecandles #candlelove #candleshop #candleshopping #handmade #homemade #allthecandles #smallbusiness #smallbusinesslove #labellove #newage #witchy #witchyvibes #witchyshop #witchycandles #fallcandles #fallscents #pumpkinscented #headlesshorseman #classiclit #bookishcandles #fandomcandles #glasscandles #halloweencandles

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अब कैंडल्स सिर्फ कैंडल्स नहीं रह गईं बल्कि मशाल की शक्ल भी ले चुकी हैं. इसे स्टैंड पर लगाने के लिए इसके पीछे मेटल की स्टिक भी लगी होती है. मशाल कैंडल रात भर आपका घर रोशन कर सकती है. इसके अलावा तोप और साइकिल के डिजाइन वाली जेल कैंडल्स की भी काफी डिमांड है. ये कैंडल्स किफायती होने के साथ-साथ काफी स्टाइलिश भी हैं. इनके जरिये आप अपने घरों का स्टाइल स्टेटमेंट भी बढ़ा सकती हैं.

3. फ्लोटिंग कैंडल है अट्रेक्टिव

बदलते वक्त के साथ-साथ मोमबत्तियों के पैटर्न और डिजाइन में भी बदलाव आ गया है. अब मोमबत्तियां सिर्फ एक जगह रखी-रखी पिघलती नहीं बल्कि तैरती भी हैं. बाजार में कई डिजाइन और शेप की फ्लोटिंग कैंडल्स उपलब्ध हैं. फ्लोटिंग कैंडल्स की काफी वरायटी बाजार में मौजूद है.

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4. रिमोट से जलेगी कैंडल


फ्रेगरेंस और जेल वाली कैंडल्स के अलावा एलईडी कैंडल्स भी बाजारों में इतरा रही हैं. इनमें सबसे खास हैं रिमोट सेंसिंग टेक्नोलाजी से लैस एलईडी कैंडल्स. इसमें 10-12 कैंडल्स का सेट होता है, जो एक-दूसरे से कनेक्टेड रहती हैं और रिमोट के एक-बटन के इशारे पर कैंडल्स झिलमिलाने लगती हैं.

DIWALI 2019: फेस्टिवल के लिए परफेक्ट हैं ये ज्वैलरी डिजाइन

1. नथ का अनोखा डिजाइन

नथ पहनना सभी लड़कियों को बेहद पसंद होता है. शादी-विवाह में महिलाएं नथ पहने जरूर नजर आती हैं. दुल्हन का तो नथ के बिना शृंगार ही अधूरा लगता है. यदि आप अपने या किसी खास के लिए नथ खरीदने का सोच रहीं हैं तो इस लेटैस्ट डिजाइन के नथों से मदद ले सकती हैं. मोर नथ- मोर के डिजाइन का बना यह नथ दुल्हन के लिए बिलकुल पर्फेक्ट है. अगर आप दुल्हन के लिए ज्वैलरी खरीदने का सोच रही हैं तो यह नथ अपने ज्वैलरी में जरूर शामिल करें. इसमें कई सारे डिजाइन आपको देखने को मिल जाएंगे, जैसे मीनाकारी मोर नथ, सिंगल, मयूर नथ. जितना खूबसूरत यह दिखने में लगता है इसको पहनने के बाद आपकी खूबसूरती उतनी ही बढ़ जाती है.

2. सिंपल फ्लोरल नथ

अधिकतर लड़कियों को सिंपल नथ ज्यादा पसंद आता हैं. लेकिन बिलकुल नथ इतना अच्छा नहीं लगता अगर उस पर कोई सिंगल फूल बना हुआ तो वह ज्यादा एट्रेक्टिव लगता है.

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3. मीनाकारी नथ

मीनाकारी नथ काफी समय से चलता आ रहा है और इसका फैशन अभी भी बरकरार है. यदि आप मीनाकारी नथ में डिजाइन ढूंढ़ रही हैं तो यह डिजाइन जरूर देखें.मीनाकारी में मयूर डिजाइन नथ भी बेहद खूबसूरत लगता हैं. मीनाकारी में आप अपनी पसंद का भी डिजाइन दिखा कर उस पर मीना करवा सकती हैं.

4. सिंगल नथ

आज कल सिंगल नथ भी फैशन में हैं. इसमें अलग से चैन नहीं लगी होती. महिलाओं व लड़कियों दोनों पर ही बेहद खूबसूरत लगता हैं.

5. ट्रैंडी नेकलेस डिजाइन

हर साल ज्वैलरी के ट्रैंड में तो बदलाव आता ही रहता है, लेकिन हर बार अपने लिए कुछ नया लें, यह भी संभव नहीं है. इसलिए ऐसी ज्वेलरी खरीदें, जो न सिर्फ आपकी खूबसूरती को बढ़ाए, बल्कि आप उसे ज्यादा-से-ज्यादा मौके पर पहन भी सकें. यानी ज्वेलरी की ऐसी डिजाइन चुनें, जो हमेशा फैशन में बनी रहे. बात अगर नेकलेस की करे तो इसके पेटर्न में ज्यादा बदलाव देखनों को नहीं मिलता. लेकिन अपने नेकलेस खरीदने का मन बना लिया है तो इन ट्रैंडी डिज़ाइन्स को जरूर देखें.

6. चोकर

चोकर आजकल फैशन में छाया हुआ है. गले से चिपके होने के साथ ये आपकी खूबसूरती को निखारते भी हैं. अलग-अलग रंग में मिलने वाले चोकर में बीड्स, क्रिस्टल, कुंदन की खूबसूरती भी देखने लायक है.चोकर में कई वैरायटीज देखने को मिल जाएंगी. सेमी-प्रेशियस स्टोन वाला चोकर, मीना डिजाइन चोकर, कुन्दन डिजाइन चोकर. इसमें मल्टी लेयर डिजाइन भी बहुत अनोखा लगता है.

7. फ्लोरल नेकलेस

यह डिजाइन ज्वैलरी में सदाबहार है. इसका डिजाइन फूलों का होता है,जिसे पहनने के बाद गले की खूबसूरती तो बढ़ती ही हैं साथ ही चेहरे की खूबसूरती पर भी चार चंद लग जाता है.

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8. पाजेब नेकलेस

सिंपल के साथ जब एलीगेंट दिखना हो तो पाजेब नेकलेस से बेहतर कोई ऑप्शन हो ही नहीं सकता. इसका डिजाइन बहुत सिंपल और स्टाइलिश होता है. पाजेब की तरह पतली चैन जब गले में सजेगी तो खूबसूरती निखर कर आएगी. इसके अलावे कई और नेकलेस फैशन में हैं, जैसे पर्ल नेकलेस जो ज़्यादातर दुल्हन पहनती हैं.

DIWALI 2019: फेस्टिवल में ऐसे बनाएं स्किन को खूबसूरत

दिवाली के फेस्टिवल पर हर कोई खूबसूरत दिखना चाहता है, जिसके लिए कईं तरह के ब्यूटी प्रौडक्ट्स फेस पर लगाते हैं, लेकिन दिवाली से पहले भी हम अपनी स्किन को महंगे प्रौड्क्ट्स का इस्तेमाल करे बगैर भी खूबसूरत स्किन पा सकते हैं. इसीलिए आज हम आपको दिवाली सेलिब्रेशन से पहले कैसे अपनी स्किन को नेचुरली खूबसूरत कैसे बनाएं, इसकी कुछ खास टिप्स बताएंगे…

1. स्किन की करें देखभाल

रोज रात को सोते वक्त और सुबह किसी अच्छे क्लिंजर से चेहरे की सफाई करने से स्किन ब्यूटीफुल बन जाती है.

2. फेस मास्क का करें इस्तेमाल

आजकल मार्केट में कईं तरह के फेस मास्क मौजूद हैं अगर आप अपनी स्किन को नेचुरली ब्यूटीफुल बनाना चाहते हैं तो सप्ताह में दो बार फेस मास्क का इस्तेमाल करें. इससे चेहरे पर ताजगी व स्किन में कसावट आएगी. फेस मास्क का चुनाव अपने स्किन अनुसार करें या हर्बल फेस मास्क का उपयोग करें.

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3. मौश्चराइजर

आप सेंटर आफ अट्रैक्शन बनने वाली हैं. करवाचौथ के दिन पारंपरिक रस्मों के कारण कई बार मेकअप करने के बावजूद  आपकी स्किन में रूखापन होता है. तो आपका आकर्षण मद्धम पड़ जाएगा. स्किन की खूबसूरती और जंवापन के लिए स्किन का नम होना आवश्यक है.इसके लिए रोजाना मौश्चराइजर  का उपयोग करें.

4. सनटैन

फेस्टिवल के समय शौपिंग के लिए अक्सर बाजार का चक्कर लगाना पड़ता है. जिससे सूर्य की तेज किरणें आपकी स्किन को कांतिहीन बना देती है. इसलिए धूप में निकलने से पहले आपकी स्किन के टेक्शचर के अनुसार सन क्रीम लगाएं.

5. वैक्सिंग

फेस्टिवल के एक दिन या दो दिन पहले वैक्सिंग करवा लें. पहले वैक्सिंग करवाने से स्किन साफ सुंदर और कोमल दिखेगी.

6. हेयर ड्रायर

रोज़ हेयर ड्रायर और वॉल्यूमाइजर का इस्तेमाल बंद कर दें. वैसे भी त्योहारों पर आना जाना ज्यादा रहता है तो  इनका काफी इस्तेमाल करना पड़ता है.

7. हेयर औयलिंग

बालों की शाइन लौटाने और खूबसूरत दिखाने के लिए जरूरी है कि बालों में औयलिंग जरूर करें. शैंपू से पहले गर्म तेल को बालों में अच्छी तरह मालिश करें. इससे आपके बाल फैस्टिवल से पहले खूबसूरत दिखेंगे.

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DIWALI 2019: फैमिली के साथ ऐसे मनाएं फेस्टिवल

रोशनी का त्योहार दीवाली हो या कोई और उत्सव, जब तक 10-20 लोग मिल कर धूम न मचाएं आनंद नहीं आता. सैलिब्रेशन का मतलब ही मिल कर खुशियां मनाना और मस्ती करना होता है. पर मस्ती के लिए मस्तों की टोली भी तो जरूरी है.  आज बच्चे पढ़ाई और नौकरी के लिए घरों से दूर रहते हैं. बड़ेबड़े घरों में अकेले बुजुर्ग साल भर इसी मौके का इंतजार करते हैं जब बच्चे घर आएं और घर फिर से रोशन हो उठे. बच्चों से ही नहीं नातेरिश्तेदारों और मित्रों से मिलने और एकसाथ आनंद उठाने का भी यही समय होता है.

सामूहिक सैलिब्रेशन बनाएं शानदार

पड़ोसियों के साथ सैलिब्रेशन:  इस त्योहार आप अपने सभी पड़ोसियों को साथ त्योहार मनाने के लिए आमंत्रित करें. अपनी सोसाइटी या महल्ले के पार्क अथवा खेल के मैदान में पार्टी का आयोजन करें. मिठाई, आतिशबाजी और लाइटिंग का सारा खर्च मिल कर उठाएं. जब महल्ले के सारे बच्चे मिल कर आतिशबाजी का आनंद लेंगे तो नजारा देखतेही बनेगा. इसी तरह आप एक शहर में रहने वाले अपने सभी रिश्तेदारों और मित्रों को भी सामूहिक सैलिब्रेशन के लिए आमंत्रित कर सकते हैं.

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डांस पार्टी:  भारतीय वैसे भी डांस और म्यूजिक के शौकीन होते हैं तो क्यों न प्रकाशोत्सव के मौके को और भी मस्ती व उल्लास भरा बनाने के लिए मिल कर म्यूजिक डांस और पार्टी का आयोजन किया जाए.  पूरे परिवार के साथसाथ पड़ोसियों को भी इस में शरीक करें ताकि यह उत्सव यादगार बन जाए. बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों के चाहें तो अलगअलग ग्रुप बना सकते हैं ताकि उन के मिजाज के अनुसार संगीत का इंतजाम हो सके. बुजुर्गों के लिए पुराने फिल्मी गाने तो युवाओं के लिए आज का तड़कताभड़कता बौलीवुड डांस नंबर्स, अंत्याक्षरी और डांस कंपीटिशन का भी आयोजन कर सकते हैं.

स्वीट ईटिंग कंपीटिशन

प्रकाशोत्सव सैलिब्रेट करने का एक और बेहतर तरीका है कि तरहतरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं. मसलन, स्वादिष्ठ मिठाईयां बनाने की प्रतियोगिता, कम समय में ज्यादा मिठाई खाने की प्रतियोगिता, खूबसूरत रंगोली बनाने की प्रतियोगिता आदि. आप चाहें तो जीतने वाले को इनाम भी दे सकते हैं. इतना ही नहीं, कौन जीतेगा यह शर्त लगा कर गिफ्ट की भी मांग कर सकते हैं.

वन डे ट्रिप

आप त्योहार का आनंद अपने मनपसंद  शहर के खास टूरिस्ट स्थल पर जा कर भी ले सकते हैं. सभी रिश्तेदार पहले से बुक किए गए गैस्ट हाउस या रिजौर्ट में पहुंच कर अलग अंदाज में त्योहार मनाएं और आनंद उठाएं. त्योहार मनाने का यह अंदाज आप के बच्चों को खासतौर पर पसंद आएगा.

तनहा लोगों की जिंदगी करें रोशन 

आप चाहें तो त्योहार की शाम वृद्घाश्रम या अनाथालय जैसी जगहों पर भी बिता सकते हैं और अकेले रह रहे बुजुर्गों या अनाथ बच्चों की जिंदगी रोशन कर सकते हैं. पटाखे, मिठाई और कैंडल्स ले कर जब आप उन के बीच जाएंगे और उन के साथ मस्ती करेंगे तो सोचिए उन के साथसाथ आप को भी कितना आनंद मिलेगा. जरा याद कीजिए ‘एक विलेन’ फिल्म में श्रद्घा कपूर के किरदार को या फिर ‘किस्मत कनैक्शन’ फिल्म में विद्या बालन का किरदार. ऐसे किरदारों से आप अपनी जिंदगी में ऐसा ही कुछ करने की प्रेरणा ले सकते हैं. इनसान सामाजिक प्राणी है. अत: सब के साथ सुखदुख मना कर ही उसे असली आनंद मिल सकता है.

सामूहिक सैलिब्रेशन के सकारात्मक पक्ष

खुशियों का मजा दोगुना

जब आप अपने रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के साथ सामूहिक रूप से त्योहार मनाते हैं तो उस की खुशी अलग ही होती है. घर की सजावट और व्हाइटवाशिंग से ले कर रंगोली तैयार करना, मिठाई बनाना, शौपिंग करना सब कुछ बहुत आसान और मजेदार हो जाता है. हर काम में सब मिल कर सहयोग करते हैं. मस्ती करतेकरते काम कब निबट जाता है, पता ही नहीं चलता. वैसे भी घर में कोई सदस्य किसी काम में माहिर होता है तो कोई किसी काम में. मिल कर मस्ती करते हुए जो तैयारी होती है वह देखने लायक होती है.

मानसिक रूप से स्वस्थ त्योहारों के दौरान मिल कर खुशियां मनाने का अंदाज हमारे मन में सिर्फ उत्साह ही नहीं जगाता वरन हमें मानसिक तनाव से भी राहत देता है.  यूनिवर्सिटी औफ दिल्ली की साइकोलौजी की असिस्टैंट प्रोफैसर, डा. कोमल चंदीरमानी कहती हैं कि त्योहारों के समय बड़ों का आशीर्वाद और अपनों का साथ हमें ऊर्जा, सकारात्मक भावना और खुशियों से भर देता है. समूह में त्योहार मनाना हमारे मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. इस से हमारा सोशल नैटवर्क और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ती है, जीवन को आनंद के साथ जीने की प्रेरणा मिलती है.  हाल ही में अमेरिका में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों का समाजिक जीवन जितना सक्रिय होता है उन के मानसिक रोगों की चपेट में आने की आशंका उतनी ही कम होती है. शोध के अनुसार, 15 मिनट तक किया गया सामूहिक हंसीमजाक दर्द को बरदाश्त करने की क्षमता को 10% तक बढ़ा देता है.  अपने होने का एहसास: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अकसर हमें अपने होने का एहसास ही नहीं रह जाता. सुबह से शाम तक काम ही काम. मिल कर त्योहार मनाने के दौरान हमें पता चलता है कि हम कितने रिश्तेनातों में बंधे हैं. हम से कितनों की खुशियां जुड़ी हैं. तोहफों के आदानप्रदान और मौजमस्ती के बीच हमें रिश्तों की निकटता का एहसास होता है. हमें महसूस होता है कि हम कितनों के लिए जरूरी हैं. हमें जिंदगी जीने के माने मिलते हैं. हम स्वयं को पहचान पाते हैं. जीवन की छोटीछोटी खुशियां भी हमारे अंदर के इनसान को जिंदा रखती हैं और उसे नए ढंग से जीना सिखाती हैं.

बच्चों में शेयरिंग की आदत

आप के बच्चे जब मिल कर त्योहार मनाते हैं तो उन में मिल कर रहने, खानेपीने और एकदूसरे की परवाह करने की आदत पनपती है. वे बेहतर नागरिक बनते हैं.

बच्चे दूसरों के दुखसुख में भागीदार बनना सीखते हैं. उन में नेतृत्व की क्षमता पैदा होती है. घर के बड़ेबुजुर्गों को त्योहार पर इकट्ठा हुए लोगों को अच्छी बातें व संस्कार सिखाने और त्योहार से जुड़ी परंपराओं और आदर्शों से रूबरू कराने का मौका मिलता है.

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गिलेशिकवे दूर करने का मौका 

उत्सव ही एक ऐसा समय होता है जब अपने गिलेशिकवों को भूल कर फिर से दोस्ती की शुरुआत कर सकता है. त्योहार के नाम पर गले लगा कर दुश्मन को भी दोस्त बनाया जा सकता है. सामने वाले को कोई तोहफा दे कर या फिर मिठाई खिला कर आप अपनी जिंदगी में उस की अहमियत दर्शा सकते हैं. सामूहिक सैलिब्रशन के नाम पर उसे अपने घर बुला कर रिश्तों के टूटे तार फिर से जोड़ सकते हैं.

कम खर्च में ज्यादा मस्ती

जब आप मिल कर त्योहार मनाते हैं, तो आप के पास विकल्प ज्यादा होते हैं. आनंद व मस्ती के अवसर भी अधिक मिलते हैं. इनसान सब के साथ जितनी मस्ती कर सकता है उतनी वह अकेला कभी नहीं कर सकता. एकल परिवारों के इस दौर में जब परिवार में 3-4 से ज्यादा सदस्य नहीं होते, उन्हें वह आनंद मिल ही नहीं पाता जो संयुक्त परिवारों के दौर में मिलता था. सामूहिक सैलिब्रेशन में मस्ती और आनंद ज्यादा व खर्च कम का फंडा काम करता है.

‘कार्तिक-नायरा’ की लड़ाई देख टूटेगा ‘कायरव’ का दिल, उठाएगा ये कदम

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में शो में इन दिनों ‘नायरा-कार्तिक’ की लड़ाई फैंस को एंटरटेन कर रही है. वहीं दोनों का प्यार भी देखने को मिल रहा है, लेकिन अपकमिंग एपिसोड में आपको ‘कायरव’ का नया ड्रामा देखने को मिलने वाला है. शो में फैंस को जल्दी ही ‘कायरव’ बड़ा कदम उठाने वाला है, जिससे घरवाले परेशान होते नजर आएंगे. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

खुद को दोषी मानेगा ‘कार्तिक’

आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि ‘कार्तिक’ कोर्ट में ‘नायरा’ से माफी मांगने के बाद ‘कायरव की कस्टडी भी उसे सौंप देगा. इसके बाद ‘कार्तिक’ वहां से निकल जाएगा, ‘नायरा’ उसे रोकने की कोशिश भी करेगी लेकिन रोक नहीं पाएंगी. ‘कार्तिक’ खुद को सभी चीजों के लिए दोषी मानेगा और खुद को कोसेगा कि जो कुछ भी हुआ है उसकी वजह से हुआ है.

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‘नायरा’ से मिलने जाएगा ‘कार्तिक’

इसके बाद ‘कार्तिक’, ‘नायरा’ से मिलने सिंघानिया हाउस जाएगा. जहां दोनों एक-दूसरे से फिर से माफी मांगेंगे. इस दौरान ‘कार्तिक’ बेहद इमोशनल हो जाएगा और खुद को ही भला-बुरा कहने लगेगा. ‘नायरा’ उसे रोकने की कोशिश करेगी. ये सब दूर खड़ा हुआ ‘कायरव’ देख लेना लेकिन वो दोनों की बातें नहीं सुन पाएगा.

टूट जाएगा ‘कायरव’ का दिल

‘कायरव’ को लगेगा कि उसके मम्मी-पापा फिर से लड़ रहे हैं. वो रोता हुआ घर के अंदर चला जाएगा और सारी पुरानी बातें याद करने लगेगा कि कैसे उसके मम्मी-पापा हर वक्त आपस में लड़ते रहते हैं. इसके बाद ‘कायरव’ कुछ ऐसा करेगा कि सब शौक्ड हो जाएंगे. दरअसल, कायरव घर की अलमारी में ही छुप जाएगा और सबको लगेगा कि वो कही चला गया है.

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बता दें, इन दिनों शो में ‘कायरव’ की कस्टडी के चलते ‘नायरा-कार्तिक’ की लाइफ में काफी ड्रामा चल रहा है, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं. वहीं इस दिवाली में फैंस को ‘नायरा-कार्तिक’ का रोमांस भी देखने को मिलने वाला है. अब देखना है कि शो में किस तरह ‘नायरा-कार्तिक’ एक-दूसरे के करीब आते हैं.

स्क्रिप्ट अच्छी न होने तो बड़े एक्ट्रर्स भी फिल्म को हिट नहीं कर सकते – विनय पाठक

फिल्म ‘भेजा फ्राई’ से चर्चा में आने वाले एक्टर विनय पाठक थिएटर कलाकार, टीवी प्रेजेंटर और निर्माता है. उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था, जिसमें साथ दिया परिवार वालों ने. बिहार के रहने वाले विनय पाठक आज भी थिएटर में काम करना सबसे अधिक पसंद करते है. उन्होंने हर तरह की भूमिका निभाई है और आज भी नयी-नयी चुनौती लेना पसंद करते है. वे सामाजिक काम करते है, पर किसी से बताना पसंद नहीं करते. उनके हिसाब से हर व्यक्ति को अपने आसपास कुछ काम दूसरों के लिए करते रहना चाहिए. हॉट स्टार पर पहली फीचर फिल्म ‘छप्पर फाड़ के’ में वे मुख्य भूमिका निभा रहे है. उन्होंने अपनी जर्नी को गृहशोभा के साथ शेयर किया, आइये जाने उन्ही से.

सवाल-इस फिल्म को करने की खास वजह क्या है?

इस फिल्म की कहानी ख़ास है,जिसमें पुरुषसत्तात्मक परिवार की सोच को दिखाने की कोशिश की गयी है. नोट बंदी के बाद की परिस्थिति को मजाकिया ढंग से दिखाया गया है. असल में पैसे की चाहत सबको होती है, पर जब पैसे मिलते है, तो उसके साथ जिम्मेदारी नहीं आती.फिर परिस्थिति क्या होती है, उसकी कहानी है. मैंने इस तरह की कहानी में आजतक काम नहीं किया है.

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सवाल-किसी के जीवन में अगर ‘छप्पर फाड के’ कुछ मिल जाय, तो उसके फायदे और नुकसान क्या होते है?

जीवन में कोई भी चीज बहुतायत से मिलने पर उसके फायदे और नुकसान होते है. किसी भी अधिक चीज को व्यक्ति लेने के लिए कितना तैयार है, ये उसे समझने की जरुरत होती है. मसलन बरसात की बूंद भी जरुरत से अधिक गिरे, तो उसमें सम्हलना और सम्हालना दोनों मुशिकल होता है और उसके लिए व्यक्ति को ही तैयार रहना पड़ता है.

सवाल-आपने एक लम्बी जर्नी इंडस्ट्री में तय की है, कैसे इसे लेते है?

मैं अपने आपको बहुत ही सौभाग्यशाली समझता हूं, क्योंकि मैंने कभी किसी भी काम के लिए कोई प्लान नहीं किया था. प्लान करें भी, तो वैसा जिंदगी में होता नहीं है. अच्छी बात यह है कि मुझे हमेशा अच्छे लोगों का साथ मिला. शुरुआत मैंने रंगमंच के साथ किया. अभी भी मैं नाटकों में काम करता हूं. इससे मुझे अच्छे कलाकार दोस्त मिले. मुझे बहुत सीखने को मिला और मैं आगे बढ़ता गया.

सवाल-हंसी का सफ़र आपके जिंदगी में कबसे शुरू हुआ?

ये मुझे आजतक भी पता नहीं चल पाया कि ये कैसे शुरू हो गया. मैंने कभी कुछ क्रिएट नहीं किया. परिस्थिति के अनुसार होता गया. कॉमेडी वही है,जिसमें आप जो सोचते है, होता कुछ और है, जिससे दर्शकों और पाठकों को हंसी आती है.

सवाल-आपकी फिल्म ‘भेजा फ्राई’ बहुत अच्छी चली इसके बाद ‘भेजा फ्राई 2’ उतनी नहीं चली, फिल्मों के सफल होने में क्या ख़ास होता है? आप किसी फिल्म को चुनते समय किस बात का ध्यान रखते है?

सबसे महत्वपूर्ण होता है लेखक. कहानी को लिखने वाले और पटकथा लिखने वालों की प्रतिभा पन्नों पर सही ढंग से लिखकर नहीं आती है, तो कुछ भी कर लें फिल्म अच्छी नहीं बन सकती. स्क्रिप्ट अच्छी न होने पर बड़े से बड़े कलाकार होने पर भी फिल्म सफल नहीं होती.

सवाल-अब तक की फिल्मों में आपके दिल के करीब कौन-कौन सी फिल्में है?

दस विदानिया,भेजा फ्राई,जॉनी गद्दार,मिथ्या, पप्पू कांट डांस साला आदि सभी फिल्में मेरे दिल के करीब है. ये सभी अलग-अलग कहानियां है. आगे भी अच्छी कहानियां कहने का प्रयास करता रहता हूं.

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सवाल-एक्टिंग के अलावा और क्या करना पसंद करते है?

मैं थिएटर करता हूं, इसके अलावा समय मिले, तो लिखता और बहुत भ्रमण करता हूं. मेरा पहला प्यार ट्रेवल है, इसके बाद आर्ट आती है. मैंने कहानी लिखी है, उसकी फिल्म बनाने की इच्छा है.

सवाल-आपके यहां तक पहुँचने में परिवार का सहयोग कितना रहा है?

परिवार के सहयोग के बिना कोई भी व्यक्ति सफल नहीं हो सकता. मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ, ऐसे में मानसिक सहयोग सबसे अधिक जरुरी होता है, क्योंकि पैसे कम होते है. सामंजस्य  हर जगह करनी पड़ती है. मेरे माता-पिता बहुत सपोर्ट किया है. उन्होंने कहा था कि तुम जिस क्षेत्र में जा रहे हो, मुझे पता नहीं और हम चाहे भी तो कुछ तुम्हारे लिए नहीं कर सकते,क्योंकि उस क्षेत्र के बारें में मेरी जानकारी कुछ भी नहीं है. अगर आप अपनी मंशा से इस क्षेत्र में जा रहे है, तो मैं पूरी तरह से आपको सपोर्ट करूंगा और वही मेरे लिए काफी था. माता-पिता अगर बच्चों के सपनों को सहयोग देते है, तो ये बहुत बड़ी बात होती है. अभी मेरी पत्नी और बच्चे भी सहयोग देते है.

सवाल- दिवाली कैसे मनाते आये है? व्यस्त दिनचर्या में अभी क्या मिस करते है?

दिवाली हर साल खुशियों के साथ मनाते है. मिस मैं अपने पिता को करता हूं, क्योंकि वे अब नहीं रहे. साल 2014 में उनका देहांत हो गया. हर बार दिवाली मैं मां, पत्नी और बच्चों के साथ मनाता हूं.

सवाल-गृहशोभा के लिए क्या संदेश देना चाहते है?

मुझे गृहशोभा हमेशा से पसंद है मेरी तीन बहने गृहशोभा और सरिता पढ़ती थी और मैं भी उनके साथ मिलकर इसे पढ़ लिया करता था. घर में और कोई मैगज़ीन पढ़ने की आज़ादी नहीं थी. कई बार वे मुझे डांटती थी, क्योंकि वे मंगवाया करती थी और मैं पढ़ने लगता था.

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