दशहरा सेलिब्रेशन में होगा बड़ा हादसा, ‘कायरव’ पर चिल्लाएगा ‘कार्तिक’

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में जल्द ही ‘कार्तिक और कायरव’ के बीच नफरत देखने को मिलने वाली है, जिसका अंदाजा शो के प्रोमो से लगाया जा सकता है. ‘नायरा-कार्तिक’ के फैंस भी इस ट्विस्ट का इंतजार बेसब्री से कर रहे हैं. वहीं अब शो के सेट से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ‘कार्तिक-नायरा’ और ‘कायरव’ दशहरा मनाते हुए नजर आने वाले हैं, लेकिन प्रोमो की खास बात इस सेलिब्रेशन में आने वाले ट्विस्ट से है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा इस सेलिब्रेशन में…

‘कार्तिक’ ने सौंपी ‘नायरा’ को कस्टडी

‘कार्तिक’ ने कोर्ट में ना सिर्फ ‘नायरा’ को ‘कायरव’ की कस्टडी सौंप दी बल्कि उसकी जमकर तारीफ भी की. ये सब देखकर ‘नायरा’ काफी इमोशनल होती हुई नजर आईं. वहीं ‘कार्तिक’ ‘नायरा’ से माफी मांगते हुए नजर आया.

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‘कायरव’ का होगा बर्थडे सेलिब्रेशन

‘नायरा और कार्तिक’ के बीच इसी बातचीत को जहां ‘कायरव’ गलत समझकर कार्तिक से नफरत करने लगेगा. तो वहीं ‘कायरव’ के बर्थडे की तैयारी में ‘नायरा-कार्तिक’ बिजी नजर आएंगे.

 ‘दशहरा’ का होगा सेलिब्रेशन

सीरियल में जल्द ही सभी लोग दशहरे का उत्सव भी मनाएंगे. दशहरे वाले दिन ‘कायरव’ और ‘वंश’ राम और लक्ष्मण बनेंगे और दोनों ही इस त्यौहार को सेलीब्रेट करने के लिए काफी उत्सुक रहेंगे.

सेलिब्रेशन में होगा बड़ा हादसा

इस सीरियल के सेट से सामने आए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है. सामने आए वीडियोज के मुताबिक ‘कायरव और वंश’ ही रावण दहन करेंगे लेकिन इसी दौरान चारों ओर आग लग जाएगी.

‘कार्तिक’ करेगा ‘कायरव’ पर गुस्सा

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि आग लगने के बाद ‘कार्तिक’ ‘कायरव’ को बचाएगा, लेकिन बाद में ‘कार्तिक’ ‘कायरव’ पर गुस्सा करते हुए नजर आएगा. साथ ‘कायरव’ ‘नायरा’ से चिपक जाएगा.

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‘वेदिका’ की होगी विदाई

बता दें, जल्द ही ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ से और ‘नायरा-कार्तिक’ की जिंदगी से विदाई होने वाली है, जिसके चलते शो में ‘वेदिका’ के एक्स हस्बैंड को लाया गया है. अब देखना ये है कि कैसे और किस तरह शो से ‘वेदिका’ की विदाई होती है.

जब फैशन बन जाए मजाक

भाई फैशन का जमाना है. 21वीं सदी है. लोग फैशन तो बहुत करते हैं. हमेशा नई-नई चीजें जब मार्केट में आती हैं तो वो फैशन बन जाती हैं.वो चीजें चलन में आ जाती हैं चाहें शूज़ हो,कपड़े हो.सैंडल हो,या कुछ और हो.फैशन की अपनी एक अलग ही दुनिया होती है.तभी तो अब तो फैशन शोज़ भी होते हैं. लड़किया माडलिंग करती हैं.नई-नई चीजों को पहन कर उन्हें फैशन में लाती हैं. लैक मी. जो की बहुत बड़ा ब्रांड है वो भी फैशन शोज़ आर्गनाइज करता हैं.हर मौसम में मौसम के अनुकूल नई-नई चीजों का फैशन आता है.लेकिन जरा सोचिए कुछ ऐसी चीजें फैशन के नाम पर अगर मार्केट में आ जाए जिनका मजाक बन जाए तो क्या होगा.जी हां अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ मौडल नए तरह का हैंड बैग लेकर खड़ी हुई नज़र आ रही हैं. जिसे देखकर आप खुद भी सोचेंगे कि भला ऐसा बैग कौन कैरी करेगा.जी हां इन बैग्स का साइज इतना बड़ा है कि इसे कैरी करना तो दूर कोई सोचेगा भी नहीं इनके बारे में. इसे देखकर तो कम से कम यही लगता है.लेकिन फैशन की क्या कहें भाई कुछ भी हो सकता है.

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सोशल मीडिया पर इन फोटोज को देखकर इनका खूब मजाक बनाया जा रहा हैं.यूजर्स ट्रोल कर रहें हैं. कुछ ने तो ये कमेंट किया कि अब लड़कियों को शापिंग करने में दिक्कत नहीं होगी,कुछ ने कहा कि अब तो लड़कियां पूरा का पूरा वार्डरोब ही कैरी कर सकती हैं. उनक पूरा मेकप और फैशन का सामान इसमें आ जाएगा.कुछ एक तो ने कहा की इसको लेकर तो कोई किसी की किडनैपिंग भी हो सकती है.कुछ ने कहा नींद आने पर इसमें आराम से सो भी सकते हैं.एक ने कहा कि पूरा का पूरा घर आ जाए इसमें तो. ऐसा हम नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर लोग कमेंट कर रहें हैं. वैसे इसमें कोई दोराय नहीं है कि लड़कियों को शॉपिंग का बहुत शौख होता है लेकिन कभी-कभी उनके शौख उनका मज़ाक बन जाते हैं.अब इन तस्वीरों को देखकर आप खुद ही सोचिए कि भला ऐसे बैग कौन इस्तेमाल करेगा.

हालांकि खबर के मुताबिक इन बैग्स को खासतौर पर मॉडल्स के लिए तैयार किया गया हैं. उनके फोटोशूट के लिए और इसे खासतौर पर डिजाइन करके बनाया गया है.लेकिन जब इनकी फोटोज़ को सोशल मीडिया पर डाला गया इनका मज़ाक बन कर रह गया.लेकिन इस बात में भी कोई शक नहीं कि जो चीजें पहले मज़ाक बनती हैं वो बाद में फैशन में भी आ जाती हैं.अब क्या पता भविष्य में इनका भी क्रेज हो और लड़कियां इन बैग्स का इस्तेमाल करें जब ये मार्केट में जाए.वैसे भी भाई किसी भी चीज़ का क्रेज बहुत जल्दी ही फैलता है और फिर ये फैशन की बात है.हालांकि इन बैग्स को कैरी करना काफी मुश्किल है..क्योंकि ऐसे बैग्स का इस्तेमाल इंसान डेली यूज में तो इस्तेमाल नहीं कर सकता है.आप खुद इन बैग्स को देखकर इतना तो समझ ही गए होंगे.लेकिन लोगों के कमेंट्स से एक बात तो साफ है कि फैशन कभी-कभी मज़ाक का मुद्दा बन जाता है.क्योंकि फैशन के नाम पर कुछ भी लाना कभी-कभी बहुत गलत साबित हो जाता है.

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DIWALI 2019: आने वाला है शादियों का मौसम, दीवाली से ही आजमाएं ये 8 ब्यूटी ट्रीटमेंट

दिवाली से ही शादियों का मौसम शुरू हो जाता है. इसलिए क्या करें क्या नहीं का फौलो करें और पाएं चेहरे की चमक इस मौसम में भी. चमक और सुंदर दिखने की ललक के कारण ज्यादातर महिलाएं,सैलून में उत्सुकता से  फेशियल करवाती दिखती हैं. इसके बाद आमतौर पर स्किन की जलन और रैशेज़ जैसी समस्याओं से उनका सामना होता है. हर किसी को न यह याद रखना चाहिए कि आपके डी-डे से कम से कम 6 दिन पहले वैक्सिंग की जानी चाहिए क्योंकि यह आपकी स्किन में जलन और लालिमा पैदा कर सकता है. हालांकि कैमिकल पीलिंग  स्किन के लिए एक अच्छा इलाज़ माना जाता है. लेकिन आप यदि पहली बार यह ट्रीटमेंट ले रहे हैं , तो शादी के वक़्त इस पीलिंग ट्रीटमेंट को नहीं  लेना चाहिए. प्री ब्राइडल मेकअप के लिए सबसे अधिक लिये जाने वाले उपचार में से कुछ इस प्रकार हैं :

1. हाइड्राफेशिअल

हाइड्राफेशिअल, हाइड्राडर्मब्रेशन प्रक्रिया को इंगित करता है. जो अन्य सभी प्रक्रियाओं का एक समामेलन है! जैसे कि उचित सफाई, एक्सफोलिएशन, एंटीऑक्सिडेंट, एक्सट्रैक्शन, हाइड्रेशन आदि. यह मुख्य रूप से चेहरे पर काले धब्बे, झुर्रिओं, बढ़े हुए रोमछिद्रों, तैलीय स्किन, मुँहासे और यहां तक ​​कि हाइपर पिगमेंटेशन को कमकरने में काम आता है.

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2. पीलिंग

आपकी स्किन की सभी मृत कोशिकाओं को हटाने के लिए पीलिंग का काम किया जाता है. इससे आपकी स्किन से सारी गंदगी साफ हो जाएगी.

3. स्किन में निखार

स्किन ब्राइटनिंग मुख्य रूप से लाइटनिंग और फेडिंग को संदर्भित करता है. हमेशा याद रखना चाहिए कि स्किन में निखार लाने के साथ-साथ डार्क स्किन टोन भी लिए भी इस ब्राइटनिंग प्रोसेज किया  जा सकता है.

4. लेज़र हेयर रिडक्शन

यह याद रखना चाहिए कि लेज़र हेयर रिडक्शन और अन्य  उपचार 6 महीने पहले शुरू कर देने चाहिए.

5. डरमल फिलर्स

यदि स्किन झोलदार है तो डरमल फिलर्स से सुधार होता है. डरमल फिलर्स से झुर्रियों, कम पलकें, फूलेेंगाल  और नासोलैबियल लाइनों से छुटकारा मिलता है.

6. बोटौक्स

यह अपनी आइब्रो को उठाने के लिए और एक भारी जॉलाइन बोटोक्स प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाता है. यदि आपके चेहरे पर झुर्रियां हैं, तो उन्हें ठीक करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है.

7.डबल चिन

डबल चिन की समस्या काफी आम है और अक्सर कई लोगों के लिए अप्रिय अनुभव है. केबेल्ला चेहरे की खामियों को सुधारने और एक दोहरी ठुड्डी के वसा से छुटकारा पाने के लिए एक आशाजनक एवं गैर-सर्जिकल उपचार है.

8. होंठ फिलर

महिलाओं की सुंदरता बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण पार्टस में से एक उनके होंठ हैं. जैसे ही उम्र बढ़नी शुरू होती है,  होंठों की स्किन के आसपास प्राकृतिक रूप से झुर्रियाँ शुरू हो जाती हैं. इस समस्या निजात पाने के लिए, कॉस्मेटिक   सर्जन लिप कॉन्टूरिंग सर्जरी  लेकर आएं हैं.

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9. अंडर आई ट्रीटमेंट

आंखों के नीचे काले घेरे होने से आंखें थकी और बुझी लगती हैं. हालाँकि, घरेलू तरीके हैं जैसे कि कोल्ड कम्प्रेस अन्य तरीके जिनको आंखों के नीचे काले घेरों के लिए प्रयोग किया जा सकता है. इस के लिए एक योग्य स्किन विशेषज्ञ से परामर्श करना ठीक है. फिलरस भी इस के लिए अद्भुत काम कर सकते हैं.

10. अन्य उपचार

पूरे शरीर की वाइटनिंग, ब्राइटनिंग और पीलिंग व पोलिशिंग से  दुल्हन की स्किन ग्लो करती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि कितना ही मेकअप कर लें यदि आपकी स्किन स्वस्थ  नहीं है ,तो आप अपने सबसे अच्छे रूप में भी खुश नहीं होंगे. हमेशा याद रखें कि इन उपचारों के बावजूद क्लीन्ज़र, फेसवॉश, मौइस्चराइजर आदि के दैनिक उपयोग को नहीं छोड़ना चाहिए. नियमित उपयोग से बचना ठीक नहीं. यह आपकी स्किन की चमक को बनाए रखने में मदद करेगा.

द्वारा–डौक्टर नेहा मित्तल, कौस्मेटिक फिजिशियन , डरमा वर्ल्ड स्किन ऐंड केयर क्लिनिक ,न्यू दिल्ली

DIWALI 2019: लो कैलोरी स्वीटनर्स से फेस्टिवल बनाएं हेल्दी

भारत एक ऐसा देश है जो अपने हर त्यौहार को खूब धूम-धाम  से मनाना पसंद करता है. भारत देश में हर त्यौहार खूब ख़ुशी- उल्लास और उत्साह से मनाया जाता आ रहा है.  हर “ग्रेट इंडियन फेस्टिवल” के लिए ज़रूरी होता है की हम त्यौहार के दिन कुछ मीठा और सवादिष्ट भोजन बनाए जिससे की त्यौहार का उत्साह दो गुना हो जाता है, हर  त्यौहार में हम कोई न कोई पारंपरिक भारतीय मिठाइयाँ हम ज़रूर बनाते है. और यह  मिठाइयां आपको पारंपरिक मिठाइयों की दुकानों के साथ-साथ घरों में भी तैयार की जाती है.  भारतीय लोगों को अपनी पसंदीदा मिठाइयों को खाने के लिए किसी भी कारण की आवश्यकता नहीं है,बल्कि यह त्यौहारों के समय में और ज्यादा खाई और बनाई जाती है.  त्यौहार के समय में इसके बिक्री और खपत काफी उच्च स्तर पर पहुंच जाती है.

हालांकि, हम सभी यह बात अच्छे से जानते है की इन मिठाइयों में मिठास के लिए चीनी का इस्तेमाल किया जाता है , और बात किसी से भी छिपी नहीं है की हम मिठाइयों में चीनी का इस्तेमाल खूब करते है और हम सब यह भी जानते है की ज्यादा मात्रा में मीठा खाने से हमे डायबिटीज जैसे समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है. त्यौहार के सीजन में मिठाइयों की खपत ज्यादा होती है , और अधिक मात्रा में मीठे का का सेवन करने से डायबिटीज सहित विभिन्न  बीमारियों  का उत्पन हो सकता है. और मीठे की वजह से उत्सव का आनंद  कम नहीं होना चाहिए, क्यूंकि आज मार्किट में कई अन्य तरह के लौ कैलोरी स्वीटनेस  (एल सी एस ) आसानी से उपलब्ध है.

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लौ कैलोरी स्वीटेर्न्स: लाभ

कुछ साल पहले तक, लौ  कैलोरी स्वीटनेस की मांग काफी ज्यादा बढ़ गयी थी , जिन लोगो को चाय और कौफ़ी पीना बेहद पसंद वे लोग लौ कैलोरी स्वीटनेस का इस्तेमाल कर सकते है. लौ कैलोरी स्वीटनर्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल और सेवन लगभग  90% डायबिटीज के मरीज़ो द्वारा ही किया जाता है. इसके अलावा, मध्यम वर्ग के लोग केवल 2% ही इसके सेवन करते है और उच्च आय वर्ग के 70% लोगो द्वारा इसका सेवन व इस्तेमाल किया जाता है. समय के साथ साथ यह लोगो में ज्यादा प्रिय हो गया है और अब ज्यादातर लोग नार्मल चीनी की जगह  लौ कैलोरी स्वीटनेस का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे है.  जेईसीएफए (ज्वाइंट डब्ल्यूएचओ-एफएओ एक्सपर्ट कमेटी ऑन फूड एडिटिव्स) द्वारा किए गए स्टडी के अनुसार,लौ कैलोरी स्वीटनेस डायबिटीज और हाइपर टेंशन जैसे मरीज़ो के लिए फायदेमंद साबित हुई है. यह ने केवल मरीज़ो के लिए फायदेमंद है बल्कि इसके सेवन नार्मल वयक्ति के लिए भी काफी फायदेमंद है,लौ  कैलोरी स्वीटनेस से आपका वजन नियंत्रण और मोटापे से जुड़े  अन्य समस्या में आपकी मदद करता है. लौ कैलोरी स्वीटनेस हर तरह से बेहतर है क्यूंकि इसकी गुणवत्ता  की जांच अच्छे से की गयी है, इसलिए हमें इसकी सुरक्षा पर संदेह नहीं करना चाहिए.

लौ कैलोरी स्वीटनेस से बने खान-पान की बढ़ती मांग

लौ कैलोरी स्वीटनेस से बानी मिठाई व अन्य चीज़ो की मांग बढ़ती जा रही है. डायबिटीज, मोटापा और हाइपर टेंशन जैसी  बीमारियों  के लिए यह बहुत लाभकारी मन जा रहा है.  प्रभावित होने से बचने के लिए, उपभोक्ता सुरक्षित विकल्पों की तलाश में रहते है, न केवल मरीज़ बल्कि आज कल आम लोग भी लौ कैलोरी स्वीटनेस की मांग कर रहे है, वह भी लौ कैलोरी  से बानी चीज़ें खाना पसंद कर रहे है. इससे लौ कैलोरी से बानी मिठाइयों की मांग भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है.

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भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अपनी मनपसंदीदा मिठाई को छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन लौ कैलोरी स्वीटनेस में भी आपको अपनी मनपसंदीदा मिठाई खाने को मिल सकती है जिससे आपको न कोई नुकसान होगा और न ही आपको अपने स्वाद के साथ समझौता करना पड़ेगा. लेकिन इन सभी मिठाई  को हम कैलोरी-फ्री नहीं बना सकते, क्योंकि इन मिठाइयों में अन्य तत्व भी मौजूद होते हैं जैसे कि नट, घी, बटर जैसी अन्य चीज़े जो की कैलोरी से भरपूर होती हैं.  इसके साइड-इफेक्ट से बचने के लिए हमे इसकी  खपत व सेवन पर नियंत्रण रखना होगा.

DIWALI 2019: फेस्टिवल के लिए परफेक्ट है ये फैशन ट्रेंड

बदलते ट्रेंड के साथ साथ हमें भी खुद को बदलना चाहिए और हर एक ट्रेंड को फौलो करना चाहिए. और जब बात आती है किसी त्यौहार की तो हमें एक्सपेरीमेंट करने से बिलकुल भी हिचकिचाना नहीं चाहिए.  हम सभी जानते है की दिवाली हमारे देश में खुद धूम धाम से मनाया जाता है, दिवाली की हर बात खास होती है फिर चाहे वो सजावट, खान-पान हो या फिर कपड़े.  दिवाली में  हम सभी चीज़ो पर खास ध्यान देते है. दिवाली में हम सभी को मौका मिलता है की हम अपनी सुंदरता पर खास ध्यान दे सकते, और ट्रेंडी कपडे पहनकर दिवाली को यादगार बनाये.  आज हमारे साथ फैशन डिज़ाइनर सान्या गुलाटी , ब्रांड ओनर ऑफ़ लेबल सान्या गुलाटी  है जो हमें दिवाली के लिए कुछ खास टिप्स देंगी की हम इस दिवाली किस तरह का फैशन कर सकते है.

1.जैकेट विथ सिगरेट पैंट

यह मौडर्न और इंडियन फ्यूजन का एक परफेक्ट कौम्बो है.  अगर आप पैन्ट्स में ज्यादा कम्फरटेबल महसूस करती है तो आप इस आउटफिट को आराम से कैर्री कर सकती है. इसमें ज़री, ज़रदोज़ी जैसे काम का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें आप स्ट्रैट पैंट के साथ टीयूनिक स्लिट टौप और जैकेट के साथ कैर्री कर सकते है. इस आउटफिट में काफी हैवी वर्क होता है , तो आप ध्यान रखें की बाकि की चीज़े जैसे मेकअप और जेवेलरी बहुत लाइट हो तभी आपका लुक अच्छे से खिल कर बहार आ पाएंगे.

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2. क्लासिक लहंगा

हर महिला त्यौहार के अवसर पर सुन्दर दिखना चाहती है. लेहेंगा एक ऐसा इंडियन  एथनिक वियर है जो हर किसी पर अच्छा जचता  है. यदि आप  लेहेंगा कैर्री  कर रहे है तो यह ज़रूर ध्यान रखें की हर चीज़ ज्यादा हैवी न हो अगर लेहेंगा सिंपल कैर्री कर रहे है तो  आपका दुपट्टा हैवी वर्क वाला होना चाहिए.  इसमें आप ज़री और सीकुइंस वर्क का दुपट्टा कैर्री कर सकते है. यदि आप कुछ हटकर आज़माना चाहते हैं तो, रफ्फल लेहेंगा ट्राई कर सकते हैं केप और ट्रेडिशनल जैकेट के साथ.

3. फ्यूजन साड़ी

साड़ी हर त्यौहार के लिए एक परफेक्ट औप्शन में से एक है. बस त्यौहार के हिसाब से हम खास डिज़ाइन और फैब्रिक वाले साड़ी पहनना पसंद करते है. साड़ी में हमारे पास कई औप्शंस है जैसे की सिल्क, कॉटन, बनारसी साड़ी आदि. काफी युविकाओ को साड़ी पहनना पसंद हैं  पर  ड्रापिंग उनके लिए एक बड़ी  समस्या हैं, आज कल मार्किट में कई तरह के साड़ी ट्रेंड आ गए है जैसे की रफ्फल, ड्रेस साड़ी ,pre-draped स्टाइल आदि. साड़ी हर किसी के बजट में आसानी से फिट भी हो जाती है.

4. शरारा

अगर आप  चूड़ीदार और सलवार से बोर हो चुके हैं, और आपको फैशन में एक्सपेरिमेंट करना पसंद हैं तो आप शॉर्ट कुर्ती को पलाज़ो या घेर वाले शरारा के साथ टीम अप कर सकते हैं. शरारा एक यूनिक फैशन स्टेटमेंट हैं आजकल के युवाओ के बीच. रंग की बात करे तो आप इसमें पस्टेल औप्शन के साथ आराम से जा सकते है.  शरारा बहुत ही कम्फ़र्टेबल और आईडल लुक है इस दिवाली सीजन  के लिए.

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5. एथनिक जम्पसूट

अगर आपको हमेशा ही मौडर्न और ट्रेडिशनल को मिक्स करके पहनना पसंद है तो आप इस बार जम्पसूट भी ट्राई कर सकते है. दिवाली के लिए आप कलर भी सोच समझ के ही पहनने दिवाली में आप मस्टर्ड येल्लो , बेबी पिंक , ब्लू जैसे कलर अडौप्ट कर सकते है.  ऐथनिक जम्पसूट  के साथ आप हैवी मेकअप और ज्वेलरी पहन सकते है.

DIWALI 2019: फेस्टिवल में ऐसे बढ़ाएं फैमिली बौंडिग

आज के दौर में सभी पर काम का बोझ अधिक है. ऐसे में औफिस या बिजनैस से त्योहार के दिन भी छुट्टी मिलनी मुश्किल होती है. दीवाली या दशहरा में 1-2 दिनों की छुट्टी ही मिल पाती है. ऐसे में सभी का आपस में मिलना संभव नहीं होता. अगर पूरे फैस्टिवल सीजन में अलगअलग जगहों पर पार्टियों के आयोजन हों तो बहुत सारे लोग आपस में मिल सकते हैं. एक ही जगह पर पार्टी होने से लोगों की संख्या ज्यादा हो जाती है. पार्टी का बोझ भी बढ़ जाता है. अगर छोटीछोटी पार्टियां घरघर में आयोजित हों तो ज्यादा लोगों के आपस में मिलने का अवसर मिलता है. त्यौहारों में कई तरह के संगठनों में मुलाकातें हो जाती है. परेशानी की बात यह है कि ये संगठन जातीय समुदाय के नाम पर बने होते हैं. ऐसे में बाहरी लोगों का इन के साथ तालमेल नहीं रहता. जरूरत इस बात की है कि बिना जातीय या समुदाय की सोच के केवल आपसी दोस्ती के आधार पर यह पार्टी आयोजित की जाए. अलगअलग आयोजनों के होने से एक लाभ यह होता है कि दोस्तों और रिश्तेदारों से बारबार मुलाकात होने लगती है, जिस से कई बार बिगडे़ हुए रिश्ते भी सहज हो जाते हैं.

हर घर पार्टी

आज के दौर में घरों में इतनी जगह रहती है कि वहां पर छोटी पार्टी का आयोजन हो सके. ऐसे में बहुत खर्च भी नहीं आता. घर वालों को इस में लगने की जरूरत नहीं होती. खाना बनाने वाले या ऐसे काम करने वाले लोग खाने से ले कर सजावट तक सब मैनेज कर देते हैं. अगर त्योहार में केवल एक बार पार्टी का आयोजन होता है तो आपसी मुलाकात भी एक बार ही हो पाती है. अगर बारबार ऐसे आयोजन होते हैं तो आपसी मुलाकातें बारबार होने की संभावना रहती है.

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बारबार मिलने से एकदूसरे के दुखदर्द का ज्यादा पता चलता है. आज के समय में आपस में मिलनाजुलना बेहद कम हो गया है. ऐसे में फैस्टिवल पार्टी के बहाने एकदूसरे से जल्दीजल्दी मिलना हो जाता है. जब बारबार मिलना होता है तो केवल औपचारिक बातें नहीं होतीं, और भी बातें होती हैं.

इस से आपसी संबंध मजबूत होते है. एकदूसरे के घरपरिवार, बच्चों का भी पता चलता है. जिस से केवल दोस्तीभरे रिश्ते ही मजबूत नहीं होते बल्कि कई बार आपस में रिश्तेदारी करने में भी मदद मिल जाती है. आपसी मेलजोल से यह भी पता चलता है कि किस के बच्चे शादी के लायक हो गए हैं, कौन किस से शादी कर सकता है.

कारोबार ही नहीं, नाते-रिश्ते भी

मेलजोल से कारोबार की संभावनाएं भी पनपने लगती हैं. आज के समय में कारोबार में भरोसेमंद लोगों का मिलना मुश्किल होता है. ऐसे में अगर आपसी मेलजोल अधिक होता है तो बिजनैस पार्टनर के साथ करीबी रिश्ते बनाने में मदद मिलती है. देखने में यह फैस्टिवल पार्टी केवल सामान्य पार्टी जैसी ही दिखती है पर असल में यह आपसी तालमेल को लंबे समय तक बनाए रखने का काम कर सकती है. ऐसी पार्टियों में आपसी औपचारिकता को न रखा जाए ताकि इस में शामिल होने वाले को किसी भी तरह की हिचक न हो.

पार्टी को रोचक बनाने के लिए कुछ गेम्स तैयार किए जा सकते हैं. ये हर उम्र को ध्यान में रख कर तैयार किए जाएं. कोशिश हो कि इस में हर उम्र के लोग शामिल हो सकें. कुछ गेम्स ऐेसे भी हों जिन में महिला और पुरुष एकसाथ हिस्सा ले सकें. इस से आपस में एक अलग किस्म का भरोसा बढ़ता है.

आज के समय में महिलाएं बड़ी संख्या में बिजनैस में हैं. वे केवल बिजनैस में रहती ही नहीं, उस का पूरा हिस्सा होती हैं. उन के फैसलों को पूरा सम्मान मिलता है. अब बिजनैस में महिलाओं की भूमिका रबरस्टैंप से अधिक की हो गई है. ऐसे में महिलाओं को पार्टी में जरूर शामिल किया जाए. महिलाओं को धूम्रपान और ड्रिंक से परेशानी होती है इसलिए पार्टी में इस का प्रयोग न ही किया जाए.

धूम्रपान और ड्रिंक से बनाएं दूरी

महिलाओं के साथ पार्टी में गलत व्यवहार धूम्रपान और ड्रिंक से ही शुरू होता है. ऐसे में इस को पूरी तरह से पार्टी से बाहर किया जाना जरूरी होता है. पार्टी में खाने का मैन्यू भी इस तरह से तैयार हो कि सभी को पसंद आए. यह न हो कि कुछ खाने की चीजें ऐसी हों जो लोग  पसंद न करें. आमतौर पर आज के समय में लोग अपनी हैल्थ को ले कर ज्यादा जागरूक हो गए हैं. जिस से वे तलाभुना या ज्यादा मसालेदार चीजें कम खाते हैं. ऐसे में इन बातों का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है.

मसला परिवार का होता है, ऐसे में युवा और बच्चे भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. बच्चे बडे़ लोगों के साथ सही से एंजौय नहीं कर पाते. ऐसे में उन के लिए कुछ गेम्स की तैयारी कर के रखनी जरूरी होती है. छोटे बच्चे भी अपने हिसाब से खेलते हैं. उन के लिए भी कुछ मनोरंजन का अलग से इंतजाम हो ताकि उन के पेरैंटस बिना किसी चिंता के आपस में भेंटमुलाकात का मजा ले सकें.

पार्टी का समय इस तरह से रखा जाए जिस में ज्यादा से ज्यादा लोग शामिल हो सकें. कई बार समय का चुनाव ठीक से नहीं होता तो लोग पूरी संख्या में शामिल नहीं हो सकते. बेहतर होता है कि छुट्टी के दिन इस को रखें. इस से सभी लोग पार्टी का हिस्सा बन सकते हैं.

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खर्चा घटाएं, मजा बढ़ाएं

मिलजुल कर त्योहार मनाने से त्योहार में होने वाला खर्च घटता है जबकि मजा बढ़ता है. अपने घरपरिवार से दूर रह कर भी घर जैसे मजे लिए जा सकते हैं. आज के समय में ज्यादातर लोग अपने शहर और घर से दूर कमाई के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं. अपने घर जाने के लिए उन को छुट्टी लेनी होती है. कई बार छुट्टियों में घर जाने के लिए रेलवे, बस और हवाई जहाज के महंगे टिकट लेने पड़ते हैं. मुसीबत उठा कर अपने घर जाना कई बार परेशानी का सबब बन जाता है. ऐसे में त्योहारों की पार्टी घरघर होने से सब आपस में मिल लेते हैं. इन का आयोजन मिलजुल कर भी कर सकते हैं. इस से सभी लोगों की हर तरह से भागीदारी रहती है और कोई अपने को बोझ नहीं समझता. कम खर्च में अच्छा आयोजन हो जाता है. परिवार के साथ रहने से पति भी दोस्तों के साथ शराब और जुए जैसे खेलों से परहेज करता है. ऐसे आयोजन होने से त्योहार का मजा दोगुना हो जाता है. सभी धर्मों के बीच रहने वाले लोग भी इस का हिस्सा बन जाते हैं. इस से अलगअलग जगहों की संस्कृति व खानपान का मजा भी मिलता है. जिस तरह से आज आपस में दूरियां बढ़ रही हैं उसे कम करने का यह सब से अच्छा माध्यम है कि त्योहारों की खुशियां मिलजुल कर मनाएं. केवल रैजीडैंशियल कौंप्लैक्स में ही नहीं, कसबों, महल्लों, शहरों और गांवों में भी उत्सव के आयोजन मिलजुल कर किए जाने चाहिए. इस से समाज में एक नया प्यार और सौहार्द्र का माहौल बनेगा.

DIWALI 2019: इन 9 डिफरेंट लाइट्स से सजाएं घर और पाए फेस्टिव लुक

दीवाली जैसे त्यौहार में सजावट का सब से अहम टूल है रोशनी. चूंकि यह त्यौहार ही रोशनी का है, इसलिए इस दिन हर घर में दीप, कैंडल्स और इलैक्ट्रिक लाइट्स जगमगाहट भर देती हैं. आजकल मार्केट में कईं तरह के लैम्प्स और लाइटें आ गईं हैं, जो बजट के साथ-साथ हमारे घर को सुंदर बना देती है. आइए आपको बताते हैं घर को ब्यूटीफुल लाइटिंग से सुंदर कैसे बनाएं…

1. डिजाइनर लैंप्स की चकाचौंध

सजावटी ब्रास लैंप्स घर को अलग ही लुक देते हैं. इन में सजावटी पैटर्न में बने छिद्रों में से चारों ओर छन कर बिखरती रोशनी माहौल को चकाचौंध कर देती है. साथ ही इस तरह के कुछ खास लैंप्स की रोशनी से दीवारों पर फूलों या अन्य तरह की खूबसूरत आकृतियां भी बनती हैं, जो घर को फैस्टिव लुक देती हैं.

2. कोव लाइटिंग से उभारें शैडो

कोव लाइटिंग का प्रयोग ज्यादातर घर की सीलिंग पर किया जाता है. इस से सीलिंग को हाईलाइट किया जाता है. कोव लाइटिंग में सीलिंग की तरफ फोकस करती रोशनी से दीवार पर उभरी शैडो बेहद आकर्षक लगती है.

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3. टी लाइट्स की जगमग

खूबसूरत फूलों और अन्य आकृतियों की टी लाइट्स भी बेहतरीन लाइटिंग करती हैं. इन छोटीछोटी टी लाइट्स से झिलमिलाती रोशनी पूरे घर को खूबसूरत लुक देती है. इन्हें आकर्षक टी लाइट होल्डर्स में रख कर आप के हर कोने में रोशनी कर सकती हैं.

4. मिट्टी के दीयों से करें रोशनी

मिट्टी के परंपरागत दीयों से ले कर टी लाइट्स, फ्लोटिंग कैंडल्स और फंकी लैंप्स के जरीए घर को सजाया जा सकता है. आजकल मिट्टी के दीए भी डिजाइनर लुक लिए होते हैं.

5. एलईडी कैंडल्स का है जमाना

आजकल एलईडी कैंडल्स भी काफी पसंद की जाती हैं. इन से बिना किसी मेहनत के मिनटों में रोशनी की जा सकती है. इन के अलावा पिलर कैंडल्स, अनूठे आकारों की सजावटी कैंडल्स, प्रिंटेड मोटिफ्स वाली कैंडल्स से भी घर सजा सकती हैं.

6. टीवी बैक लाइटिंग

फैस्टिवल पर कुछ नया ट्राई करना चाहती हैं, तो इस से अच्छा कुछ नहीं हो सकता है. एलईडी के पीछे फ्लैक्सिबल एलईडी स्ट्रिप लाइट आजकल ट्रैंड में हैं. इस का यूज करने के बाद टीवी देखने में आप को महसूस होगा कि आप टीवी को दीवार पर देख रही हैं. मेहमानों के आने से पहले इसे औन कर दें. सब की निगाहें बस यहीं थम जाएंगी.

7. करें स्पौट लाइटिंग

घर के अलगअलग हिस्सों में स्पौट लाइटिंग के माध्यम से इंटीरियर में बदलाव किया जा सकता है. ऐसी लाइटिंग की जाए कि एक बार में सिर्फ डाइनिंगटेबल पर ही लाइट पड़े या अगर कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं तो उस के ऊपर ही सुंदर से लैंप से लाइट आए तो कमरा बहुत ही सुंदर लगता है. यह प्रयोग विभिन्न कोनों में अलग रंग के लैंप के साथ किया जा सकता है. अपने डाइंगरूम के 4 में से 3 कोनों पर लाइट लगाएं, जिस में से एक लाइट किसी आर्ट पीस को फोकस करती हुई हो, जैसे चेयर, प्लांट या वास आदि. साथ ही फ्लोर और टेबल लैंप्स का कौंबिनेशन यूज करें. नीचे की तरफ फोकस करते हुए लैंप्स के पास सीटिंग अरेंजमैंट करें. इस के अलावा टेबल के ऊपर शैंडेलियर या पैंडेट यूज करें.

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8. प्रोजैक्टर से भी करें स्पौट लाइटिंग

अपने ड्राइंगरूम की एक दीवार पर आप पैटर्न प्रोजैक्शन करें. ड्राइंगरूम के परदों पर भी कलरफुल प्रोजैक्शन की लाइट डाल कर उन्हें न्यू लुक दे सकती हैं. इस के अलावा अन्य दीवारों पर भी तरहतरह के पैटर्न वाले प्रोजैक्शन से घर का लुक बदला जा सकता है. इस के लिए आप को प्रोजैक्टर से बाहरी दीवारों पर फोकस करना होगा. हमेशा लाइट सोर्स को कंसील रखें. जैसे किसी रौक या प्लांट के पीछे अथवा झुरमुट में. छत की फ्लोर पर भी प्रोजैक्टर से लाइटिंग की जा सकती है. छत की फ्लोर पर लाइट अच्छी तरह डालें ताकि ऊंचे और नीचे लैवल का पता चल सके. पेड़ों पर लाइट छत को जंगल लुक देगा. लाइट लगाते समय यह भी ध्यान रखें कि वह सही ऐंगल पर लगे.

9. लौन में करें पैटियो स्पौट लाइटिंग

फैस्टिवल के मौके पर पूरे घर के साथ आंगन को भी जगमगा दीजिए, इस के लिए एलईडी लाइटिंग का प्रयोग करना होगा. लौन में सोफे के नीचे आउटडोर पैटियो लाइटिंग करने से मेहमानों को ऐसा महसूस होगा जैसे वो तैरते हुए सोफे पर बैठे हैं. इस से त्योहार की रौनक और भी बढ़ जाएगी. इस के अलावा लौन को लालटेन से डैकोरेट करें. कलरफुल लालटेन लौन में लगाने से उस की सुंदरता बढ़ जाएगी. इलैक्ट्रिक दीए से भी आप अपने घर को मिनटों में नया लुक दे सकती हैं. घर के किसी कोने को उभारने के लिए ट्रैक लाइट तो स्टाइलिश लुक के लिए फेयरी लाइट का विकल्प ठीक है. घर के हर कोने में रोज जलने वाले दीए मिट्टी के बने हों. उन पर पेंट या ड्राइंग कर नया लुक दें.

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Romantic Story In Hindi: प्रेम लहर की मौत- भाग 4

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लेखक- वीरेंद्र बहादुर सिंह 

असीम ने तो स्माइल की, पर मेरी आंखों से आंसू टपक पड़े. आंसू गिरते देख उस ने कहा, ‘‘प्लीज अनु, रोना मत.’’

  ‘‘नहीं, मैं बिलकुल नहीं रोऊंगी.’’ मैं ने कहा.

  ‘‘तुम्हें तो पता है अनु, तुम मेरे सामने बिलकुल झूठ नहीं बोल सकती, तो फिर क्यों बेकार की कोशिश कर रही हो. मैं तुम्हें अच्छी तरह से जानता हूं अनु. मुझे पता है कि तुम रोओगी, खूब रोओगी और मुझे यह हर्ट करेगा. जबकि मैं नहीं चाहता कि तुम मेरी वजह से रोओ, जी जलाओ.’’

तभी निकी का फोन आ गया कि ट्रेन के आने का एनाउंसमेंट हो गया है. हम दोनों एकदूसरे को देखते रहे. थोड़ी देर तक हमारे बीच मौन छाया रहा. अचानक असीम ने पूछा, ‘‘अनु, तुम कम से कम यह तो बता दो कि तुम जा कहां रही हो?’’

  ‘‘नहीं, अब मैं कुछ नहीं बताऊंगी. मेरा यह मोबाइल नंबर भी कल सुबह से बंद हो जाएगा. जहां भी जाऊंगी, नया नंबर ले लूंगी. अब अंत में सिर्फ इतना ही कहूंगी कि तुम खुश रहना, सुखी रहना और प्रियम को भी खुश और सुखी रखना, उसे खूब प्रेम करना और हमारी मुलाकात को एक सुंदर सपना समझ कर भूल जाना. इस के बाद हम स्टेशन पर आ गए. हमारे स्टेशन आतेआते टे्रन आ गई थी. उस के बाद जो हुआ, उसे आप ने देखा ही है.’’ कह कर अनु चुप हो गई.

मैं मन ही मन अनु के प्रेम, उस की संवेदनशीलता, उस की समर्पण भावना को सलाम करते हुए सोच रहा था कि काश! इसी तरह प्रेम करने वाली सुंदर लड़की मुझे भी मिल जाती तो मेरे लिए स्वर्ग इसी धरती पर उतर आता. सच बात तो यह थी कि अनु से मुझे प्यार हो गया था. मन कर रहा था, क्यों न मैं उस से अपने दिल की बात कह कर देखूं.

मैं मन की बात कहने का विचार कर ही रहा था कि उस ने एक ऐसी बात कह दी, जिस से मेरे मन में जो प्रेम पैदा हुआ था, उस की अकाल मौत हो गई थी. एक तरह से मेरा प्रेम पैदा होते ही मर गया था. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘मैं यह नौकरी छोड़ने की जो बात कर रही हूं, यह सब नाटक है. मैं ने न नौकरी छोड़ी है और न यह शहर छोड़ कर जा रही हूं.’’

  ‘‘क्या?’’ मैं एकदम से चौंका, ‘‘आप ने यह नाटक क्यों किया, आप ने इतना बड़ा झूठ क्यों बोला?’’

  ‘‘क्योंकि असीम और निकी ने सलाह कर के प्रियम नाम के झूठे करेक्टर को खड़ा कर के मेरे साथ नाटक किया, शायद उन्हें पता नहीं कि मैं उन दोनों से बड़ी नाटकबाज हूं.

  ‘‘अगर असीम मेरे बारे में सब जानता है, तो मैं भी बेवकूफ नहीं हूं कि उस के बारे में सब कुछ न जानती. मैं उस से प्रेम करने लगी थी तो उस के बारे में एकएक चीज का पता लगा कर ही प्रेम किया था. जिस दिन निकी ने मेरे सामने प्रियम का नाम ले कर मुझे चिढ़ाने और परेशान करने के लिए नाटक शुरू किया, उसी के अगले दिन ही मैं ने सच्चाई का पता लगा लिया था, क्योंकि मुझे तुरंत शक हो गया था.’’

  ‘‘कैसे?’’ मैं ने पूछा.

क्योंकि अगर प्रियम से असीम का प्यार चल रहा होता तो निकी इतने दिनों तक इंतजर न करती. क्योंकि उसे मेरे और असीम के प्रेम संबंध की एकएक बात पता थी. अगर असीम के जीवन में कोई प्रियम होती तो वह मुझे पहले ही बता कर असीम के साथ इतना आगे न बढ़ने देती.

अगले दिन मुझे इस का सबूत भी मिल गया था. निकी सुबह नहा रही थी तो उस का मोबाइल मेरे हाथ लग गया, उस में कुछ मैसेज थे, जिस से मेरा शक यकीन में बदल गया. बस, फिर मैं ने भी नाटक शुरू कर दिया.

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मैं ने ऐसा नाटक किया कि उन्हें लगा मैं सचमुच बहुत दुखी हूं. मुझे तो सच्चाई पता थी. पर उन्हें पता नहीं था कि मैं भी नाटक कर रही हूं. इस खेल में मैं उन से ज्यादा होशियार निकली. क्योंकि वे दोनों मेरे आते वक्त तक सच्चाई उजागर नहीं कर पाए. अब उन्हें डर सता रहा है कि सच्चाई उजागर करने पर मैं उन पर खफा हो जाऊंगी?’

मैं ने अनु को बीच में रोक कर पूछा, ‘‘इस का मतलब आप ने नौकरी छोड़ी नहीं है, सिर्फ उन लोगों से कहा कि नौकरी छोड़ कर जा रही हो.’’

  ‘‘पागल हूं, जो नौकरी छोड़ देती. केवल एक सप्ताह की छुट्टी ले कर घर जा रही हूं. घर पहुंच कर फोन का सिम निकाल दूंगी. औफिस वालों को दूसरा नंबर दे आई हूं्. असीम मुझे परेशान करना चाहता था. बदले में मैं ने उसे सबक सिखाया. मैं उसे इतना प्यार करती हूं कि उस के बिना जी नहीं सकती. अगर सचमुच में प्रियम होती तो मैं आप को अपनी यह कहानी बताने के लिए न होती. किसी मानसिक रोगी अस्पताल में अपना इलाज करा रही होती.’’

  ‘‘सलाम है आप के प्रेम को, जब लौट कर  आओगी तो…’’

मेरी बात बीच में ही काट कर अनु ने कहा, ‘‘यही तो सरप्राइज होगा असीम के लिए.’’

अनु के बारे में सोचते हुए कब आंख लग गई, मुझे पता ही नहीं चला. मुझे असीम से ईर्ष्या हो रही थी. ट्रेन स्टेशन पर रुकी तो मेरी आंख खुली. पता चला ट्रेन कानपुर में खड़ी थी. अनु खड़ी हुई, अपना बैग और पर्स लिया और उतर कर निकास गेट की ओर बढ़ गई. वह जैसेजैसे दूर जा रही थी, मैं यही सोच रहा था, काश! सचमुच प्रियम होती, तो आज मेरे प्यार की अकाल बाल मौत न होती.

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सांड की आंख फिल्म रिव्यू: औरतों की बहादुरी और उनके बुलंद इरादों को नमन

रेटिंगः चार स्टार

निर्देशकः तुशार हीरानंदानी

कलाकारः तापसी पन्नू,भूमि पेडणेकर, विनीत कुमार सिंह, प्रकाश झा…

अवधिः दो घंटे 28 मिनट

सपने देखने और उनको पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती.  हर इंसान को खुद ही अपने सपने पूरे करने के लिए प्रयास करना होता है, कोई अन्य किसी के भी सपने पूरा नही कर सकता. यह बात लोगों को भले ही अब तक किताबी ज्ञान लगता रहा हो.  मगर बागपत की दो शार्प शूटर दादीयों चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर के जीवन की असली कहानी को फिल्म‘‘सांड की आंख’’में पेशकर फिल्मकार तुशार हीरानंदानी ने बता दिया कि यह महज किताबी ज्ञान नही,बल्कि कटु सत्य है. यूं भी चंद्रो और प्रकाशी तोमर की बहादुरी, कुछ कर दिखाने का जज्बा पूरे देशवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत व मिसाल से कम नही है.  इस फिल्म देखकर हर इंसान,बच्चे से बूढ़े तक प्रेरित हुए बिना नही रह सकते.

कहानीः

कहानी बागपत जिले के जोहरी गांव के एक तोमर परिवार की है,जिसके मुखिया रतन सिंह तोमर( प्रकाश झा)गांव के सरपंच भी हैं. रतन सिंह तोमर दकियानूसी विचारों के है.  बहुत सख्त हैं.  उनसे उनके छोटे भाई भी डरते हैं. रतन सिंह तोमर के दो छोटे भाई हैं.  इनकी पत्नियां क्रमशः चंद्रो तोमर ( भूमि पेंडणेकर)और प्रकाशी तोमर (तापसी पन्नू) हैं.  इन औरतों की पूरी जिंदगी घूंघट काढ़कर घर का काम करने के अलावा खेत पर काम करने, ईंट भट्टा पर काम करने, पतियों के लिए हुक्का बनाने तक ही सीमित रहती है.  गांव का ही एक लड़का यशपाल ( विनीत कुमार सिंह) जो कि रतन सिंह का भतीजा लगता है, दिल्ली जाकर डाक्टर बन जाता है.  मगर कुछ दिन बाद वह निशानेबाजी शूटिंग का कोच बनकर गांव लौटता है. गांव के सरपंच से इजाजत लेकर वह गांव में निशाने बाजी सिखाने का काम शुरू कर देता है.  यशपाल का सहायक है फारूक(नवनीत श्रीवास्तव).

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प्रकाशी तोमर के बेटे सचिन तोमर(हिमांशु शर्मा)सहित गांव के बच्चे निशानेबाजी सीखने जाते हैं,मगर पहले ही दिन वह तोबा कर लेते हैं. चंद्रो तोमर अपनी भतीजी सीमा के साथ देखने पहुॅचती हंै कि बच्चे क्या सीख रहे हैं,वहां पर बच्चे नदारद होते है. यशपाल, सीमा से कहता है कि वह कोशिश करे. सीमा बंदूक नहीं चला पाती. मगर तैश में चंद्रो बंदूक उठाकर सही निशाना लगा देती है. तब यशपाल कहता है कि यदि सीमा निशानेबाजी सीख लेगी,तो इसे सरकारी नौकरी मिल जाएगी. यह सुनकर चंद्रो कहती है कि सीमा सीखेगी. यशपाल कहता है कि रतन सिंह के गुस्से का क्या होगा?पर घर में बहानेबाजी करके चंद्रो, प्रकाशी,सीमा और चंद्रो की पोती शेफाली निशाने बाजी सीखने लगती है. पहली बार साठ वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की निशानेबाजी की प्रतियोगिता चंडीगढ़ में होती है, जहां मंदिर का झूठ बोलकर प्रकाशी, चंद्रो ,सीमा व सचिन,यशपाल व फारूक के साथ जाते हैं. फारूक,सचिन को फिल्म दिखने ले जाता है, उधर निशानेबाजी प्रतियोगिता में चंद्रो और प्रकाशी विजेता बनती हैं. उसके बाद हर प्रतियोगिता में दिल्ली से चेन्नई तक झूठ बोलकर जाने लगती हैं. चंद्रंरो, प्रकाशी,सीमा और शैफाली 355 मैडल जमा कर लेती हैं. अब सीमा और शेफाली का चयन अंतरराष्ट्ीय निशाने बाजी में भारतीय टीम का हिस्सा बनने के लिए होने वाली ट्रेनिंग के लिए चुना जाता है. दिल्ली में 45 दिन रहना है. तब चंद्रो व प्रकाशी सारा सच घर के पुरूषों को बताती हैं. रतन सिंह आग बबुला होकर सारे मैडल फेंक देता है. तभी चंद्रा का बेटा रमबीर तोमर (साध रंधावा) सेना की नौकरी से छुट्टी पर आता है. बहस होती है,रमबीर तोमर गांव की पंचायत बुलाता है. अंततः सरपंच निर्णय देते हैं कि सीमा व शेफाली दिल्ली जाएंगी,पर चंद्रो व शेफाली अब घर में रहेंगी. निशानेबाजी में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता जीतने वाली पहली लड़की बनती है. बाद में उसे सेना में नौकरी मिल जाती है.

निर्देशनः

तुशार हीरानंदानी की बतौर निर्देशक पहली फिल्म है,मगर वह हर किसी को अपने निर्देशन का कायल बना लेते हैं. फिल्म देखकर इस बात का अहसास ही नही होता कि यह वही तुशार हीरानंदानी हैं, जो अब तक‘मस्ती’व ग्रैड मस्ती’जैसी एडल्ट कौमेडी वाली बीस से अधिक फिल्में लिख चुके हैं. तुशार के निर्देशन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि फिल्म की शुरूआत के पहले दृश्य से ही वह दर्शकों को बांध लेते हैं और फिर दर्शक हिल नही पाता. फिल्म में इतने इमोश्ंास हैं कि किसी न किसी दृश्य में दर्शक की आंखों से आंसू टपक ही पड़ते हैं.

फिल्म के एडीटर देवेंद्र मुरडेश्वर बधाई के पात्र है. फिल्म की एडीटिंग इतनी कसी हुई है कि एक मिनट के लिए भी फिल्म सुस्त या ढीली नहीं पड़ती. इंटरवल के पहले के हिस्से से बनिस्बत इंटरवल के बाद का हिस्सा ज्यादा सशक्त है. फिल्म की कमजोर कड़ी यह है कि तमाम दृश्यों में तापसी और भूमि साठ वर्ष की नजर नही आती. यह मेकअप की कमी है. पर दर्शक इनके अभिनय में इस कदर बंध जाता है कि उसका ध्यान इनकी उम्र की तरफ जाता ही नही है. फिल्म का गीत संगीत भी ठीक है. फिल्म के कैमरामैन सुधाकर रेड्डी भी बधाई के पात्र हैं.

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अभिनयः

यूं तो हर कलाकार ने बहुत ही सधा हुआ अभिनय किया है. मगर तापसी पन्नू,भूमि पेडणेकर व विनीत कुमार सिंह के अभिनय की जितनी तारीफ की जाए,उतनी कम है. फिल्म में भूमि पेडणेकर और तापसी पन्नू की एक साथ केमिस्ट्री लाजवाब है. कई सफलतम फिल्मों के निर्देशक प्रकाश झा का उत्कृष्ट अभिनय तो सबसे बड़ा आश्चर्य है. इस प्रेरणादायी उत्कृष्ट फिल्म को एक बार हर किसी को देखना चाहिए.

https://www.youtube.com/watch?v=-uA-ONin_5M

DIWALI 2019: शादी के बाद रणवीर के साथ ऐसे दीवाली सेलिब्रेट करेंगी दीपिका

हिंदी फिल्म ‘ओम शांति ओम’ से कैरियर की शुरुआत करने वाली एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण सबसे पौपुलर और अट्रेक्टिव एक्ट्रेस है. उसने मेहनत के बल पर अपनी एक खास जगह बौलीवुड और हौलीवुड में बनायीं है. वह अपने काम पर हमेशा फोकस्ड रहती है. उसने हमेशा जो सोचा उसे ही किया, इसमें उनका आत्मविश्वास हमेशा झलकता है, जो बहुत स्ट्रोंग है. दीपिका पादुकोण की शादी रणवीर सिंह के साथ हो चुकी है और वे दोनों इस बार पहली दीवाली मनाने वाले है, जिसे लेकर वह बहुत खुश है.

फैमिली के साथ ऐसे मनाती है दीपिका फेस्टिवल

त्यौहार को सेलिब्रेट करना कितना जरुरी है और दीवाली इस बार रणवीर के साथ कैसे मनाने वाली है पूछे जाने पर दीपिका बताती है कि बचपन से ही मैंने त्यौहार को मनाते हुए देखा है, इसमें बचपन की यादें होती है, साथ ही परिवार और उसकी संस्कृति के साथ जुड़ाव को महसूस करते है. ये कम्युनिटी की फीलिंग को ताज़ा करती है. इस दौरान मिठाइयां बनाना, सबको बांटना, रिश्तेदारों से मिलने जाना आदि संभव होता है. इससे रिश्तों में गहराई आती है. गणपति से लेकर दिवाली तक लगातार उत्सव मनाने का दौर चलता रहता है. अच्छा माहौल होता है और मुझे बहुत पसंद है.

 

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Wishing you both good health,peace of mind & boundless creativity! #33yearsofajsk @abujanisandeepkhosla

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रंगोली बनाना पसंद करती हैं दीपिका

दीवाली पर बचपन से मेरी मां ने मुझे रंगोली बनाना सिखाया है और मैं आज तक भी इसे अपने दरवाजे के बाहर बनाती आ रही हूं और दिए जलाती हूं. इस बार दिवाली को हम दोनों अपने परिवार और दोस्तों के साथ मनाने वाले है. मैंने खुद का एक अपना घर लिया हुआ है. घर को सजाना और सम्हालना मुझे पसंद है, इसमें जो नारी सुलभ टच मैं देती हूं. वह रणवीर को अच्छा लगता है. मसलन दिया जलाना, फ्रेश फूल लेकर सजाना, कैंडल जलाना आदि.

रणवीर के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी दीपिका

दीपिका ने हर फिल्म को सच्चे दिल से किया है यही वजह है कि उनकी फिल्में बौक्स औफिस पर सफल रही है. आज भी वह किसी चुनौती को लेने से घबराती नहीं है. दीपिका फिल्म ‘83’ में शादी के बाद एकबार फिर रणवीर सिंह के साथ अभिनय किया है. जिसमें वह क्रिकेटर कपिलदेव (रणवीरसिंह) की पत्नी रोमिदेव की भूमिका निभा रही है.

 

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❤️ #us

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‘एसिड एटैक का कैरेक्टर निभाना है मुश्किल’

इसके अलावा फिल्म ‘छपाक’ में दीपिका एसिड एटैक से प्रभावित लक्ष्मी अग्रवाल की भूमिका निभा रही है, जो उसके लिए बड़ी चुनौती रही है. वह कहती है कि ये बहुत बड़ी दायित्व सिर्फ मेरे लिए नहीं ,पूरी टीम के लिए होती है, क्योंकि उस व्यक्ति की रहन-सहन, चाल-ढाल सब कुछ सही तरीके से दिखाई जानी चाहिए. इसी वजह से जिस व्यक्ति पर ये कहानी आधारित है, उसे नजदीक से समझने की कोशिश करनी पड़ती है. वैसा दिखना मेरे लिए बहुत बड़ी इमोशनल चुनौती रही है. इसके अलावा लक्ष्मी के साथ ये सब कैसे हुआ. मैं अगर वहां होती, तो परिस्थिति क्या होती आदि छोटी-छोटी बातों का ध्यान देना पड़ा, क्योंकि अपने आप को उस परिस्थिति में डालना और भावनात्मक पहलू को दिखाना बहुत ही मुश्किल होता है.

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फैमिली है सबसे पहले

दीपिका एक सफल एक्ट्रेस होने के साथ-साथ अपने परिवार के बेहद करीब है. उसके अनुसार अगर फिल्म सफल नहीं होती, तो दुःख होता है कि वह दर्शकों अनुरूप काम नहीं कर पायी. ऐसे में परिवार का सहयोग उन्हें हमेशा रहता है. दीपिका अपनी कामयाबी का श्रेय फैशन स्टाइलिस्ट और इमेज कंसलटेंट प्रसाद बिदप्पा,जिसने उसे समझाया कि वह एक्टिंग कर सकती है.इसके बाद फरहा खान, जिसने अभिनय का मौका दिया, ड्राईवर, हेयर ड्रेसर, मेकअप आर्टिस्ट आदि सभी को देती है.

 

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& on to the next…Thank You @kabirkhankk for this incredible honour…! #RomiDev #Day1 @83thefilm @ranveersingh

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आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर महिलाओं की तरह रहना पसंद करती हैं दीपिका

दीपिका को आज की महिलाओं का आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर होना बहुत पसंद है.वह कहती है कि ऐसी महिलाओं के बारें में पढ़ना और मिलना पसंद करती हूँ. महिलाएं हमेशा से ही घर की प्रमुख होती है, उन्हें जिंदगी में उसी काम को करनी चाहिए, जिससे उन्हें ख़ुशी मिले. महिलाएं जब अपने लिए कुछ करती है ,तो उन्हें अपराधबोध होता है, क्योंकि उन्होंने शुरू से अपने पति, बच्चे, माता-पिता, दोस्तों आदि के लिए काम किया है. खुद के लिए उनके पास समय नहीं होता. खुद का ख्याल शारीरिक और मानसिक रूप से बिना अपराधबोध के रखना जरुरी है.

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