Makeup Guide: सुहागरात पर कैसा मेकअप करें

Makeup Guide: रियल लाइफ की फर्स्ट नाइट फिल्मों वाली फर्स्ट नाइट जैसी बिलकुल नहीं होती, जिस में दूल्हादुलहन मंडप के बाद सीधे बैडरूम में दिखाए जाते हैं. शादी के बाद कई तरह की रस्में होती हैं और शादी के 2-3 बाद फर्स्ट नाइट होती है.

ऐसे में हर दुलहन चाहती है कि वह बेहद खूबसूरत लगे. लेकिन उस समय पार्लर जाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता. इसलिए अगर आप भी फर्स्ट नाइट मेकअप को ले कर परेशान हैं तो हम आप को बता दें कि सुहागरात पर मेकअप नैचुरल और रोमांटिक होना चाहिए.

शादी के बाद नईनवेली दुलहन को मेकअप के इन कुछ पौपुलर ट्रिक्स को जरूर आजमाना चाहिए :

मोइस्चराइजर लगाएं

मेकअप से पहले त्वचा को अच्छी तरह साफ करें और मोइस्चराइजर लगाएं ताकि मेकअप बेस चिकना और हाइड्रेटेड रहे.

फाउंडेशन

हलका फाउंडेशन या बीबी क्रीम चुनें, जो त्वचा के रंग से मेल खाता हो. इसे अच्छी तरह से ब्लैंड करें ताकि एकसमान और प्राकृतिक फिनिश मिलें.

कंसीलर

आंखों के नीचे के काले घेरों को छिपाने के लिए कंसीलर लगाएं और इसे धीरेधीरे ब्लैंड करें. कंसीलर बहुत ज्यादा न लगाएं बस वहीं लगाएं जहां कालापन हो और जरूरत लगे.

ब्लशर लगाएं

गालों पर हलका ब्लश लगाएं. आप चाहे टी ब्लशर को पिंक कलर करें, क्योंकि शरमाते हुए गालों का गुलाबी रंग माहौल को रोमांटिक कर देगा. आप चाहें तो चीकबोंस पर हाइलाइटर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

ड्यूई फिनिश

थोड़ा चमकदार (ग्लोई या ड्यूई) बेस चुनें ताकि चेहरा भराभरा और फ्रैश दिखे, नकि बहुत मैट.

आंखें

आंखों पर हलका आईशैडो और काजल लगाएं. इस के आलावा आप चाहें तो स्मोकी आई भी बना सकते हैं. आप हलका ब्राउन या रोज गोल्ड, रैड आईशैडो लगा सकती हैं. फौल्स लैशेज बन लगाएं. ये कंफर्टेबल नहीं रहती हैं. साथ ही अपनी लैशेज को कर्ल करें और मसकारा के 2 कोट लगाना न भूलें.

होंठ

आप मैट रैड लिपस्टिक लगा सकती हैं, जो सब से ज्यादा बोल्ड और आकर्षक लगती है या फिर आप सौफ्ट न्यूड पिंक या पीच शेड का चुनाव कर सकती हैं. साथ ही लौंग लास्टिंग ऐसी लिपस्टिक चुनें जो लौंग लास्टिंग और ट्रांसफर प्रूफ हो. यह आप के लुक को पूरा करेगा और होंठों को मुलायम भी रखेगा.

मेकअप सैट करें

मेकअप को सैट करने के लिए लूज पाउडर का इस्तेमाल करें. यह मेकअप को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखेगा और अतिरिक्त चमक को नियंत्रित करेगा.

हेयरस्टाइल हो कुछ ऐसा

हाई बन जरूर बनाएं क्योंकि यह दुलहन पर खूब अच्छा लगता है. आजकल यह खूब चलन में है और इसे बनाना भी आसान है. आजकल बनेबनाए बन मिलते हैं. इन को बालों में पिन की मदद से सैट कर लें. फिर इस को स्टाइलिश ऐक्सैसरीज और बौबी पिन्स से सजाएं. साइड मेसी बन या फिर मेसी साइड ब्रेड भी बना सकती हैं. बन को ताजा फूलों और ब्रेड को बीड्स से सजा कर आप अपने लुक में चार चांद लगा सकती हैं. आप चाहें तो जुड़े में गजरा लगा कर माहौल को थोड़ा रोमांटिक भी बना सकती हैं.

परफ्यूम जरूर लगाएं

मेकअप के साथसाथ एक हलका और मनमोहक परफ्यूम जरूर लगाएं. साथ ही अंडरआर्म्स के लिए भी रोल औन जैसे परफ्यूम जरूर लगाएं ताकि वह बेड स्मेल को कम कर दे.

पेल्विक हेयर क्लीन करें

सुहागरात के लिए पेल्विक हेयर को क्लीन करना भी जरूरी है. यह भी मेकअप का ही पार्ट हैं. इस के लिए  सब से सुरक्षित तरीका ट्रिमिंग है, जिस में आप कैंची या ट्रिमर का उपयोग कर के बालों को छोटा कर सकती हैं, जिस से कटने का खतरा कम होता है.

शेविंग के लिए हमेशा साफ रेजर, शेविंग फोम या जैल का उपयोग करें और बालों के उगने की दिशा में शेव करें ताकि जलन से बचा जा सके. वैक्सिंग को किसी विशेषज्ञ से ही कराएं या हेयर रिमूवल क्रीम का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट कर लें, क्योंकि इस से एलर्जी हो सकती है. प्राइवेट पार्ट्स को साफ और सूखा रखें और बिना खुशबू वाले हलके साबुन का इस्तेमाल करें.

नेल आर्ट

आप के हाथ आकर्षण का केंद्र बने रहें, इसलिए अपने नेल्स पर आप खूबसूरत नेल आर्ट करवा सकती हैं. आप अपने ड्रैसेस से मैच करते हुए खूबसूरत कलर नेल्स पर लगवा सकती हैं.

क्या पहनें

आप चाहें तो अपनी फर्स्ट वैडिंग नाइट पर बेहद हसीन दिखने के लिए दीपिका और ऐश्वर्या जैसी बनारसी साड़ी पहन सकती हैं. सुर्ख लाल बिंदी के साथ मैचिंग लिपस्टिक लगाएं. इस में आप का दुलहन वाला रूप भी खिलेगा और आप पूरी तरह कंफर्टेबल भी फील करेंगी. इस के अलावा आप अपनी फर्स्ट वैडिंग नाइट के लिए एक लाइट वेट लहंगा, लांचा या कोई साड़ी तैयार कर सकती हैं ताकि आप को शादी के बाद यह सोचना न पड़े कि अपने जीवन की नई शुरुआत पर आप क्या पहनें.

Makeup Guide

Social Story: रागविराग- कैसे स्वामी उमाशंकर के जाल में फंस गई शालिनी

Social Story: विकास की दर क्या होती है, यह बात सुलभा की समझ से बाहर थी. वह मां से पूछ रही थी कि मां, विकास की दर बढ़ने से महंगाई क्यों बढ़ती है? मां, बेरोजगारी कम क्यों नहीं होती? मां यानी शालिनी चुप थी. उस का सिरदर्द यही था कि उस ने जब एम.ए. अर्थशास्त्र में किया था, तब इतनी चर्चा नहीं होती थी. बस किताबें पढ़ीं, परीक्षा दी और पास हो गए. बीएड किया और अध्यापक बन गए. वहां इस विकास दर का क्या काम? वह तो जब छठा वेतनमान मिला, तब पता लगा सचमुच विकास आ गया है. घर में 2 नए कमरे भी बनवा लिए. किराया भी आने लगा. पति सुभाष कहा करते थे कि एक फोरव्हीलर लेने का इरादा है, न जाने कब ले पाएंगे. पर दोनों पतिपत्नी को एरियर मिला तो कुछ बैंक से लोन ले लिया और कार ले आए. सचमुच विकास हो गया. पर शालिनी का मन अशांत रहता है, वह अपनेआप को माफ नहीं कर पाती है.

जब अकेली होती है, तब कुछ कांटा सा गड़ जाता है. सुभाष, धीरज की पढ़ाई और उस पर हो रहे कोचिंग के खर्च को देख कर कुछ कुढ़ से जाते हैं, ‘‘अरे, सुलभा की पढ़ाई पर तो इतना खर्च नहीं आया, पर इसे तो मुझे हर विषय की कोचिंग दिलानी पड़ रही है और फिर भी रिपोर्टकार्ड अच्छा नहीं है.’’

‘‘हां, पर इसे बीच में छोड़ भी तो नहीं सकते.’’

सुलभा पहले ही प्रयास में आईआईटी में आ गई थी. बस मां ने एक बार जी कड़ा कर के कंसल क्लासेज में दाखिला करा दिया था. पर धीरज को जब वह ले कर गई तो यही सुना, ‘‘क्या यह सुलभा का ही भाई है?’’

‘‘हां,’’ वह अटक कर बोली. लगा कुछ भीतर अटक गया.

‘‘मैडम, यह तो ऐंट्रैंस टैस्ट ही क्वालीफाई नहीं कर पाया है. इस के लिए तो आप को सर से खुद मिलना होगा.’’

सुभाषजी हैरान थे. भाईबहन में इतना अंतर क्यों आ गया है? हार कर उन्होंने उसे अलगअलग जगह कोचिंग के लिए भेजना शुरू किया. अरे, आईआईटी में नहीं तो और इतने प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज खुल गए हैं कि किसी न किसी में दाखिला तो हो ही जाएगा.

हां, सुलभा विकास दर की बात कर रही थी. वह बैंक में ऐजुकेशन लोन की बात करने गई थी. उस ने कैंपस इंटरव्यू भी दिया था, पर उस का मन अमेरिका से एमबीए करने का था. बड़ीबड़ी सफल महिलाओं के नाम उस के होस्टल में रोज गूंजते रहते थे. हर नाम एक सपना होता है, जो कदमों में चार पहिए लगा देता है. बैंक मैनेजर बता रहे थे कि लोन मिल जाएगा फिर भी लगभग क्व5 लाख तो खुद के भी होने चाहिए. ठीक है किस्तें तो पढ़ाई पूरी करने के बाद ही शुरू होंगी. फीस, टिकट का प्रबंध लोन में हो जाता है, वहां कैसे रहना है, आप तय कर लें.

रात को ही शालिनी ने सुभाष से बात की.

‘‘पर हमें धीरज के बारे में भी सोचना होगा,’’ सुभाष की राय थी, ‘‘उस पर खर्च अब शुरू होना है. अच्छी जगह जाएगा तो डोनेशन भी देना होगा, यह भी देखो.’’

रात में सुलभा के लिए फोन आया. फोन सुन कर वह खुशी से नाच उठी बोली, ‘‘कैंपस में इंटरव्यू दिया था, उस का रिजल्ट आ गया है, मुझे बुलाया है.’’

‘‘कहां?’’

‘‘मुंबई जाना होगा, कंपनी का गैस्टहाउस है.’’

 

‘‘कब जाना है?’’

‘‘इसी 20 को.’’

‘‘पर ट्रेन रिजर्वेशन?’’

‘‘एजेंट से बात करती हूं, मुझे एसी का किराया तो कंपनी देगी. मां आप भी साथ चलो.’’

‘‘पर तुम्हारे पापा?’’

‘‘वे भी चलें तो अच्छा होगा, पर आप तो चलो ही.’’

सुभाष खुश थे कि चलो अभी बैंक लोन की बात तो टल गई. फिर टिकट मिल गए तो जाने की तैयारी के साथ सुलभा बहुत खुश थी.

सुभाष तो नहीं गए पर शालिनी अपनी बेटी के साथ मुंबई गई. वहां कंपनी के गैस्टहाउस के पास ही विशाल सत्संग आश्रम था.

‘‘मां, मैं तो शाम तक आऊंगी. यहां आप का मन नहीं लगे तो, आप पास बने सत्संग आश्रम में हो आना. वहां पुस्तकालय भी है. कुछ चेंज हो जाएगा,’’ सुलभा ने कहा तो शालिनी सत्संग का नाम सुन कर चौंक गई. एक फीकी सी मुसकराहट उस के चेहरे पर आई और वह सोचने लगी कि वक्त कभी कुछ भूलने नहीं देता. हम जिस बात को भुलाना चाहते हैं, वह बात नए रूप धारण कर हमारे सामने आ जाती है.

उसे याद आने लगे वे पुराने दिन जब अध्यात्म में उस की गहरी रुचि थी. वह उस से जुड़े प्रोग्राम टीवी पर अकसर देखती रहती थी. उस के पिता बिजनैसमैन थे और एक वक्त ऐसा आया था जब बिजनैस में उन्हें जबरदस्त घाटा हुआ था. उन्होंने बिजनैस से मुंह मोड़ लिया था और बहुत अधिक भजनपूजन में डूब गए थे. उस के बड़े भाई जनार्दन ने बिजनैस संभाल लिया था. वहीं सुभाष से उन की मुलाकात और बात हुई. उस के विवाह की बात वे वहीं तय कर आए. उसे तो बस सूचना ही मिली थी.

तभी वह एक दिन पिता के साथ स्वामी उमाशंकर के सत्संग में गई थी. उन्हें देखा था तो उन से प्रभावित हुई थी. सुंदर सी बड़ीबड़ी आंखें, जिस पर ठहर जाती थीं, वह मुग्ध हो कर उन की ओर खिंच जाता था. सफेद सिल्क की वे धोती पहनते थे और कंधे तक आए काले बालों के बीच उन का चेहरा ऐसा लगता था जैसे काले बादलों को विकीर्ण करता हुआ चांद आकाश में उतर आया हो.

शालिनी के पिता उन के पुराने भक्त थे. इसलिए वे आगे बैठे थे. गुरुजी ने उस की ओर देखा तो उन की निगाहें उस पर आ कर ठहर गईं.

शालिनी का जब विवाह हुआ, तब उस के भीतर न खुशी थी, न गम. बस वह विवाह को तैयार हो गई थी. पिता यही कहते थे कि यह गुरुजी का आशीर्वाद है. विवाह के कुछ ही महीने हुए होंगे कि सुभाष को विशेष अभियान के तहत कार्य करने के लिए सीमावर्ती इलाके में भेजा गया. शालिनी मां के घर आ गई थी.

तभी पिता ने एक दिन कहा, ‘‘मैं सत्संग में गया था. वहां उमाशंकरजी आने वाले हैं. वे कुछ दिन यहां रहेंगे. वे तुम्हें याद करते ही रहते हैं.’’

उस की आंखों में हलकी सी चमक आई.

‘‘उन के आशीर्वाद से ही तुम्हारा विवाह हो गया तथा जनार्दन का भी व्यवसाय संभल गया. मैं तो सब जगह से ही हार गया था,’’ पिता ने कहा.

एक दिन वह मां के साथ सत्संग आश्रम गई थी. वहां उमाशंकर भी आए हुए थे इसलिए बहुत भीड़ थी. सब को बाहर ही रोक दिया गया था. जब उन का नंबर आया तो वे अंदर गईं. भीतर का कक्ष बेहद ही सुव्यवस्थित था. सफेद मार्बल की टाइल्स पर सफेद गद्दे व चादरें थीं. मसनद भी सफेद खोलियों में थे. परदे भी सफेद सिल्क के थे. उमाशंकर मसनद के सहारे लेटे हुए थे. कुछ भक्त महिलाएं उन के पांव दबा रही थीं.

‘‘आप का स्वास्थ्य तो ठीक है?’’ मां ने पूछा.

‘‘अभी तो ठीक है, लेकिन क्या करूं भक्त मानते ही नहीं, इसलिए एक पांव विदेश में रहता है तो दूसरा यहां. विश्राम मिलता ही नहीं है.’’

शालिनी ने देखा कि उमाशंकरजी का सुंदर प्रभावशाली व्यक्तित्व कुछ अनकहा भी कह रहा था.

तभी सारंगदेव उधर आ गया.

‘‘तुम यहां कैसे? वहां ध्यान शिविर में सब ठीक तो चल रहा है न?’’

‘‘हां, गुरुजी.’’

‘‘ध्यान में लोग अधोवस्त्र ज्यादा कसे हुए न पहनें. इस से शिव क्रिया में बाधा पड़ती है. मैं तो कहता हूं, एक कुरता ही बहुत है. उस से शरीर ढका रहता है.’’

‘‘हां, गुरुजी मैं इधर कुरते ही लेने आया था. भक्त लोग बहुत प्रसन्न हैं. तांडव क्रिया में बहुत देर तक नृत्य रहा. मैं तो आप को सूचना ही देने आया था.’’

‘‘वाह,’’ गुरुजी बोले.

गुरुजी अचानक गहरे ध्यान में चले गए. उन के नेत्र मुंद से गए थे. होंठों पर थराथराहट थी. उन की गरदन टेढ़ी होती हुई लटक भी गई थी. हाथ अचानक ऊपर उठा. उंगलियां विशेष मुद्रा में स्थिर हो गईं.

‘‘यह तो शांभवी मुद्रा है,’’ सारंगदेव बोला. उस ने भावुकता में डूब कर उन के पैर छू लिए.

अचानक गुरुजी खिलखिला कर हंसे.

उन के पास बैठी महिलाओं ने उन से कुछ पूछना चाहा तो उन्होंने उन्हें संकेत से रोकते हुए कहा, ‘‘रहने दो, आराम आ गया है. मैं तो किसी प्रकार की सेवा इस शरीर के लिए नहीं चाहता. इस को मिट्टी में मिलना है, पर भक्त नहीं मानते.’’

‘‘पर हुआ क्या है?’’ मां को चैन नहीं था.

‘‘दाएं पांव की पिंडली खिसक गई है, इसलिए दर्द रहता है. कई बार तो चला भी नहीं जाता. शरीर है, ठीक हो जाएगा. सब प्रकृति की इच्छा है, हमारा क्या?’’

‘‘क्यों?’’ उन की निगाहें शालिनी के चेहरे पर ठहर गई थीं, ‘‘आजकल क्या करती हो?’’

‘‘जी घर पर ही हूं.’’

‘‘श्रीमानजी कहां हैं?’’

‘‘जी वे बौर्डर डिस्ट्रिक्ट में हैं, कोई अभियान चल रहा है.’’

‘‘तो कभीकभी यहां आ जाया करो.’’

‘‘क्यों नहीं, क्यों नहीं,’’ मां ने प्रसन्नता से कहा था. और फिर उस का सत्संग भवन में आना शुरू हो गया था.

उस दिन दोपहर में वह भोजन के बाद इधर ही चली आई थी. उसे गुरुजी ने अपने टीवी सैट पर लगे कैमरे से देखा तो मोबाइल उठाया और बाहर सहायिका को फोन किया, ‘‘तुम्हारे सामने शालिनी आई है, उसे भीतर भेज देना.’’

सहायिका ने अपनी कुरसी से उठते हुए सामने बरामदे में आती हुई शालिनी को देखा.

‘‘आप शालिनी हैं?’’

‘‘हां,’’ वह चौंक गई.

‘‘आप को गुरुजी ने याद किया है,’’ वह मुसकराते हुए बोली.

वह अंदर पहुंची तो देखा गुरुजी अकेले ही थे. उन की धोती घुटने तक चढ़ी हुई थी.

‘‘लो,’’ उन्होंने पास में रखी मेवा की तश्तरी से कुछ बड़े काजू, बादाम जितने मुट्ठी में आए, बुदबुदाते हुए उस की हथेली पर रख दिए.

‘‘और लो,’’ उन्होंने एक मुट्ठी और उस की हथेली पर रख दिए.

वह यंत्रवत सी उन के पास खिसकती चली आई. उसे लगा उस के भीतर कुछ उफन रहा है. एक तेज प्रवाह, मानो वह नदी में तैरती चली जाएगी. उन्होंने हाथ बढ़ाया तो वह खिंची हुई उन के पास चली आई. और उन के पांव दबाने लग गई. उन की आंखें एकटक उस के चेहरे पर स्थिर थीं और उसे लग रहा था कि उस का रक्त उफन रहा है.

तभी गुरुजी ने पास रखी घंटी को दबा दिया. इस से बाहर का लाल बल्ब जल उठा. उन की बड़ीबड़ी आंखें उस के चेहरे पर कुछ तलाश कर रही थीं.

‘‘शालू, वह माला तुम्हारी गोद में गिरी थी, जो मैं ने तुम्हें दी थी. वह तुम्हारा ही अधिकार है, जो प्रकृति ने तुम्हें सौंपा है,’’ वे बोले तो शालू खुलती चली गई. फिर उमाशंकरजी को उस ने खींचा या उन्होंने उसे, कुछ पता नहीं. पर उसे लगा उस दोपहर में वह पूरी तरह रस वर्षा से भीग गई है. उसे अपने भीतर मीठी सी पुलक महसूस हुई. वह चुपचाप उठी, बाथरूम जा कर व्यवस्थित हुई फिर पुस्तक ले कर कोने में पढ़ने बैठ गई.

सेवक भीतर आया. उस ने देखा गुरुजी विश्राम में हैं. उस ने बाहर जा कर बताया तो कुछ भक्त भीतर आए. तब शालिनी बाहर चली गई. सही या गलत प्रश्न का उत्तर उस के पास नहीं था, क्योंकि वह जानती थी कि गलती उस की ही थी. उसे अकेले वहां नहीं जाना चाहिए था. पर अब वह क्या कर सकती थी? चुप रहना ही नियति थी, क्योंकि वह उस की अपनी ही जलाई आग थी, जिस में वह जली थी. किस से कहती, क्या कहती? वही तो वहां खुद गई थी. विरोध करती पर क्यों नहीं कर पाई? उस प्रसाद में ऐसा क्या था? वह इस सवाल का उत्तर बरसों तलाश करती रही. पर उस दिन सुलभा ने ही बताया था कि मां, मुंबई की पार्टियों में कोल्डड्रिंक्स में ऐसा कुछ मिला देते हैं कि लड़कियां अपना होश खो देती हैं.

वे बरबाद हो जाती हैं. मेरी कुछ सहेलियों के साथ भी ऐसा हुआ है. ये ‘वेव पार्टियां’ कहलाती हैं, तब वह चौंक गई थी. क्या उस के साथ भी ऐसा ही हुआ था? वह सोचने लगी कि कभीकभी वर्षा ऋतु न हो तो भी अचानक बादल कहीं से आ जाते हैं. वे गरजते और बरसते हैं, तो क्यारी में बोया बीज उगने लगता है.

फिर सब कुछ यथावत रहा. सुभाष भी जल्दी ही लौट आया. उसे आने के बाद सूचना मिली कि वह पिता बनने वाला है तो वह बहुत खुश हुआ और शालिनी को अस्पताल ले गया.

Social Story

Wild Wild Women: कैसे बनी इंडिया की पहली फीमेल हिप-हौप क्रू

लेखिका : निकिता सक्सेना

Wild Wild Women: ‘‘अच्छा, रिकौर्डिंग चालू हो गई है,’’ मैं ने जैसे ही अपना रिकौर्डर औन किया, तब 7 युवा महिलाओं में से एक ने बाकियों को सावधान किया. अब बोलते समय जरा संभलना होगा, उन्होंने मुसकराते हुए कहा. सब इस नकली चेतावनी पर हंसने लगीं. उन की हंसी हमारे चारों ओर प्लेटों की खनखनाहट के शोर में घुल गई.

मैं मध्य दिल्ली के एक रेस्तरां में वाइल्ड वाइल्ड वीमन की सदस्यों से बात कर रही थी. यह मुंबई स्थित 8 परफौर्म्स का एक समूह है जो खुद को भारत का पहला आल फीमेल हिप-हौप क्लैक्टिव कहता है. इंटरव्यू अभी शुरू ही हुआ था कि उन्होंने कहानी की दिशा तय कर दी. एक ऐसा देश, जहां ‘अच्छी औरत’ कहलाने की पहली शर्त अकसर खामोशी होती है, वहां इन युवा महिलाओं का विरोध उन की बुलंद आवाजें हैं.

अक्तूबर की शुरुआत की एक कड़क दोपहर में जब मैं उन से मिली, तब उन्होंने अपना साउंड चैक खत्म ही किया था. उस शाम वे दिल्ली के सुंदर नर्सरी में प्रदर्शन करने वाली थीं, जो एक 16वीं सदी का ऐतिहासिक बाग है. वे उन 10 कलाकार समूहों में शामिल थीं, जो किरण नाडर म्यूजियम औफ आर्ट्स के म्यूजिक फैस्टिवल ‘वौइसेज औफ डाइवर्सिटी’ में प्रदर्शन कर रहे थे. फैस्टिवल को कर्नाटिक गायक, लेखक और ऐक्टिविस्ट टी.एम. कृष्णा ने क्यूरेट किया था.

जब ये महिलाएं थोड़ी देर आराम करने के लिए घास पर बैठीं तब हम ने एकदूसरे से परिचय किया. इस दौरान उन का आपसी अपनापन नजरअंदाज करना मुश्किल था. उन में से एक ने शिकायत करते हुए कहा, ‘‘बहुत गरमी है यार,’’ दूसरी लड़की ने चिढ़ाते हुए कहा, ‘‘इतनी बूजी (नाजुक) मत बन.’’

वाइल्ड वाइल्ड वीमन में 5 रैपर्स शामिल हैं. इन में से 2 समूह की सहसंस्थापक हैं: अश्विनी हिरेमठ, जिन का स्टेज नाम क्रांतिनारी है और प्रीति एन. सुतार, जिन्हें हैशटैगप्रीति के नाम से जाना जाता है. बाकी सदस्य हैं जैक्विलिन लुकास, जिन्हें जे क्वीन कहा जाता है: प्रतिका इवैंजेलिन प्रभुणे, जो प्रतिका के नाम से परफौर्म करती हैं और श्रुति राऊत या एमसी महिला. साथ ही इस समूह में शामिल हैं डांसर दीपा सिंह या फ्ला-रा, मुग्धा मांडोकर जिन्हें बीगल एमजीके कहा जाता है, स्केटबोर्डर श्रुति भोसले और ग्रैफिटी आर्टिस्ट गौरी गणपत दाबोलकर. ये सभी अपनी 20वें या 30वें दशक की शुरुआत में हैं.

2020 में अपनी स्थापना के बाद से इस समूह ने 5 सिंगल ट्रैक्स जारी किए हैं और 3 अन्य कलाकारों के साथ सहयोग में प्रस्तुत किए हैं. अपनी परफौर्मैंस के दौरान ये महिलाएं अकसर साड़ी में मंच पर आती हैं और कभीकभी लुंगी में भी. वे पूरे आत्मविश्वास और लगन के साथ मंच पर गतिमान होती हैं. इन के गाने अंगरेजी, मराठी, तमिल, कन्नड़ और हिंदी में होते हैं. इन में व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों ही तरह की सोच शामिल होती है.

सामाजिक मान्यताओं को चुनौती

हाल ही में दिल्ली में आयोजित संगीत और फूड फैस्टिवल ‘साउथ साइड स्टोरी’ में जब ऐंकर ने वाइल्ड वाइल्ड वीमन बैंड के नाम की घोषणा की, ‘तब पूरा स्टेडियम जबरदस्त शोर से गूंज उठा,’ ‘उन के प्रदर्शन ने मंच को उत्सव में तबदील कर दिया. बेझिझक,’ ‘फुल पावर’ परफौर्मैंस ने दर्शकों को लगातार बांधे रखा. लेखक अरन्या पडिल ने आउटलुक पत्रिका में लिखा.

इस समूह की पंक्तियां प्रभावशाली हैं क्योंकि वे पारंपरिक सौंदर्यशास्त्र में फिट नहीं होतीं बल्कि ‘‘वे मुंबई का स्लैंग और अपनी पहचान से जुड़ी स्थानीय भाषाई अभिव्यक्तियों का प्रयोग करती हैं,’’ वाइल्ड वाइल्ड वीमन रूपक और पौप संस्कृति से जुड़े संदर्भ उन के संगीत को उन वास्तविक अनुभवों से जोड़ते हैं, जिन्हें युवा पीढ़ी आसानी से सम झ और महसूस कर सकती है. अरन्या आगे लिखते हैं.

संगीत और पौप संस्कृति की प्रकाशन रोलिंग स्टोन इंडिया में पत्रकार अनुराग टगट लिखते है, ‘‘वाइल्ड वाइल्ड वीमन की विशिष्टता उन के गानों में होती है, जो एकता में शक्ति ढूंढ़ने, शरीर के प्रति सकारात्मक सोच को अपनाने और महिला के तौर पर अपने व्यक्तिगत अनुभवों के जरीए सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देने तथा अपनी जीत का उत्सव मनाने पर केंद्रित होते हैं.’’

उन की विशिष्टता उन के अनुभवों की विविधता में निहित है. ‘‘क्योंकि हम इतने सारे हैं, हर कोई अपनेअपने परिवेश, अपनेअपने नजरिए या अपनीअपनी समस्याओं से जुड़ा है,’’ क्रांतीनारी ने मु झे बताया, ‘‘यह संदर्भ के हिसाब से बहुत महत्त्वपूर्ण है, राजनीतिक रूप से भी बहुत माने रखता है, लेकिन हमारे लिए यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा भी है.’’

वाइल्ड वाइल्ड वीमन का संगीत दोनों करता है: एक तरफ पारंपरिक सोच को चुनौती देता है, तो दूसरी तरफ खुशी और जश्न की लहरें भी फैलाता है, ‘‘खुले घूमें, चीरफाड़ ऐसी बातें, बिना रुकावटें, आसमान छूते रास्ते, वाइल्ड वाइल्ड वीमन नाम से हमें जानते,’’ यह उन के टाइटल ट्रैक की पंक्तियां हैं. ‘समाज में थे  झुकते, अब चलते सीना तान के,’ एमसी महिला वाइल्ड वाइल्ड वीमन के एक और गाने ‘गेम फ्लिप,’ में रैप करती हैं. इस गीत का कोरस रूढि़यों और जजमैंट्स से मुक्त होने के संदेश से गूंजता है.

‘‘कभीकभी आप देखते हैं कि दर्शकों में कुछ लड़के मजे ले रहे हैं और नाच रहे हैं और आप सोचते हैं कि क्या उन्हें सम झ आ रहा है कि ये गीत उन के ही दोषों की ओर इशारा कर रहे हैं,’’ हैशटैगप्रीति व्यंग्य में मुसकराते हुए कहती हैं. पहले इस समूह को हिप-हौप समुदाय के कुछ पुरुषों द्वारा तवज्जो न मिलने का डर रहता था. ‘‘यह सवाल कभी हम सभी के दिमाग में रहता था- क्या वे हमें देखते हैं, क्या हम स्वीकार किए जाते हैं,’’ प्रतिका कहती हैं. अब उन्होंने कहा, समूह को इस की रत्तीभर भी परवाह नहीं है.

एमसी महिला ने वाइल्ड वाइल्ड वीमन के संगीत को संक्षेप में यों बयां किया, ‘‘यह महिलाओं के लिए, महिलाओं द्वारा और महिलाओं का ही है.’’

पिछले कुछ वर्षों से वाइल्ड वाइल्ड वीमन की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. अकेले 2024 में ही बताया जाता है कि इस गु्रप ने पूरे भारत में 75 से ज्यादा शो किए हैं. इस साल की शुरुआत में उन्होंने जरमनी में एक फैस्टिवल में हिस्सा ले कर अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू भी किया. केरला के एक शो में, ‘‘हम नहीं देख पा रहे थे कि लोगों का हुजूम खत्म कहां हुआ,’’ एमसी महिला याद करती हैं. हाल ही में उन्होंने हेयर सीरम ब्रैंड लिवौन और फैशन ब्रैंड्स जूडियो तथा ट्रूब्राउनज के साथ मार्केटिंग सहयोग भी किया है.

Courtesy : Wild Wild Women/Youtube

अनोखी कहानी

वाइल्ड वाइल्ड वीमन के एक गाने गेम फ्लिप की छोटी सी इंस्टाग्राम रील को 1.55 करोड़ से अधिक व्यूज और 12 लाख से ज्यादा लाइक्स मिले. जब जे क्वीन की मुलाकात संगीत जगत के दिग्गजों ए.आर. रहमान और संतोष नारायणन से हुई, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने भी वह रील देखी है. ‘‘मैं ने सोचा, ‘वाह क्या बात है,’’’ जे क्वीन ने याद करते हुए कहा. मार्च में इस समूह ने औस्कर विजेता म्यूजिक कंपोजर एम.एम. कीरवाणी के साथ एक कौंसर्ट में हिस्सा लिया, जो उन के संगीत में योगदान का सम्मान करने के लिए आयोजित किया गया था.

मंच के बाहर ये महिलाएं सहज आत्मीयता बिखेरती हैं. महत्त्वाकांक्षी होने के साथ इन में आत्मविश्वास भी भरा हुआ है. इन की ताकत इन के विविध अनुभवों में समाहित है. इन में से कई युवा महिलाएं आर्थिक कठिनाइयों, पारिवारिक विरोध और सामाजिक तौर पर पिछड़नेपन से लड़ कर यहां तक पहुंची हैं. मुंबई के अलगअलग हिस्सों में पलीबढ़ीं ये युवा महिलाएं अपने शहर की अपनी अनोखी कहानी व्यक्त करती हैं. इन की राजनीतिक सम झ अभी भी विकसित हो रही है. ये हमेशा एकदूसरे से सहमत नहीं होतीं. लेकिन इस के बावजूद इन्होंने अपनी सामूहिकता में एकजुटता और अपनापन पाया है.

डांसर बीगल एमजीके पहले किसी दूसरे हिप-हौप समूह का हिस्सा थीं, जिसे उन्होंने अपने विकास में मदद करने के लिए श्रेय दिया. लेकिन उन्होंने वाइल्ड वाइल्ड वीमन से जुड़ कर यह पाया कि ‘यहां मैं अपनेआप को ज्यादा सुरक्षित और अभिव्यक्त महसूस करती हूं.’ ग्रैफिटी कलाकार गौरी भी पहले एक दूसरे हिप-हौप कलैक्टिव के साथ काम कर चुकी थीं, जिस में ज्यादातर पुरुष थे. ‘‘यहां मु झे अपनी असली पहचान के साथ खुल कर खुद होने की आजादी है,’’ वे कहती हैं.

‘‘यहां पर हम साथ में नाचे हैं, गाए हैं, रोए हैं,  झगड़ा किए हैं- सबकुछ किए हैं,’’ जे क्वीन कहती हैं, ‘‘अगर किसी को कुछ भी प्रौब्लम होती है तो हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हम एकदूसरे को कंधा दें- यह वह जगह है जहां कोई भी किसी को जज नहीं करता.’’

वाइल्ड वाइल्ड वीमन के बनने की शुरुआत होती है 2020 में, जब सर्दियों में इस की 2 संस्थापक सदस्य- क्रांतिनारी और हैशटैगप्रीति की मुलाकात हिप-हौप कलाकारों के लिए आयोजित एक अनौपचारिक जैम सैशन में हुई. पहली ही मुलाकात के तुरंत बाद वे एकदूसरे के साथ घुलमिल गईं. ‘‘ऐसा लगा जैसे हम एकदूसरे को बहुत पहले से जानते हों- यह एक पलभर में महसूस होने वाला बहनाना रिश्ता था,’’ हैशटैगप्रीति ने याद करते हुए बताया. वे वहां मौजूद कुछ गिनीचुनी महिलाओं में से थीं और यह कोई असामान्य बात नहीं थी.

पुरुषों को चुनौती

इस दौरान हिप-हौप भारत में तेजी से असली गति पकड़ चुका था और यह अब उन पारंपरिक रूढि़यों से आगे बढ़ रहा था जो अकसर स्त्री विरोध, शराबखोरी और पैसे की अंधी दौड़ का महिमामंडन करती थीं. देशभर के रैपर जिन में से कई हाशिए पर मौजूद समुदायों से आते थे हिप-हौप को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे थे. उन का संगीत बुद्धिमत्तापूर्ण, आकर्षक और प्रयोगात्मक था, जिस के जरीए वे सामाजिक असमानताओं और सत्ता केंद्रों को चुनौती देने से भी नहीं डरते थे.

इस के बावजूद हिप-हौप ग्रुप्स को बड़े पैमाने पर पुरुषों की दुनिया माना जाता था. क्रांतिनारी बताती हैं, ‘‘लड़कों के ग्रुप्स ऐसे थे जिन में में कुछ लड़कियां होती थीं और हिप-हौप भी करना चाहती थीं, लेकिन वे लोग उन्हें अपने समूह का हिस्सा नहीं मानते थे. उन का मानना था कि यह तुम्हारा कैरियर नहीं बनेगा, आखिर में तुम्हें शादी ही करनी है.’’

ऐसा नहीं था कि पुरुष कलाकार अपनी महिला साथियों की मदद करने को तैयार नहीं थे. लेकिन पहले से ही यह मान लिया जाता था कि ज्यादातर महिलाएं हिप-हौप को एक अस्थाई शौक सम झती हैं. महिलाओं के लिए एक समूह के तौर पर काम करने के अवसर बहुत दुर्लभ थे.

कभीकभी साथी पुरुष रैपर उन महिलाओं को दिशा देने की कोशिश भी करते थे, जिन के साथ वे काम करते थे. ‘‘मेरे साथ तो यह बहुत हुआ,’’ एमसी महिला ने अपने एक पुरुष हिप-हौप समूह के साथ बिताए समय को याद करते हुए कहा, ‘‘वो लोग मतलब बताते थे कि ऐसा (बीट) ले, ये ले, इस पर लिख, उस पर लिख,’’ वे बताती हैं.

उस प्रभाव ने महिला रैपर्स के लिखने के विषयों और उन के लिखने के तरीके दोनों को बदल दिया. हैशटैगप्रीति ने मु झे बताया, ‘‘हम उन्हें देख कर प्रेरित हो रहे थे, लेकिन इस प्रक्रिया में हम अपनी स्त्रीत्व की पहचान खो रहे थे और धीरेधीरे ही सही मर्दाने अंदाज की ओर  झुक रहे थे,’’ वे कहती हैं.

‘‘हां, बिलकुल फुल गैंगस्टर रैप की तरह,’’ एमसी महिला बीच में बोल पड़ी.

‘‘जो हम हैं ही नहीं,’’ क्रांतिनारी ने बीच में फटाफट जोड़ा.

जहां जैम सैशन में वे पहली बार मिली थीं, उस के बाद क्रांतिनारी और हैशटैगप्रीति ने एकसाथ डोसा खाते हुए अपनी  झुं झलाहट एकदूसरे से सा झा की. वे दोनों पहले से ही अन्य महिलाओं के साथ इसी तरह की बातचीत कर चुकी थीं. हैशटैगप्रीति ने पहले एक आल वीमन कू्र बनाने की कोशिश की थी, जिस में वे सफल नहीं हो पाईं. क्रांतिनारी ने भी कुछ स्थापित महिला रैपरों से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन उन में से किसी ने कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी.

अब दोनों ने महिलाओं के लिए विशेष साइफर आयोजित करने का फैसला किया- एक अनौपचारिक मंच, जहां रैपर्स इकट्ठा हो कर खुल कर और तुरंत रचनात्मक प्रदर्शन कर सकें. ‘‘ठंडीठंडी का सीजन था, दिमाग शांत था, आइडियाज आ रहे थे,’’ क्रांतिनारी हंसते हुए बोलीं. उन्हें ठीकठीक नहीं पता था कि उन के प्रयास उन्हें कहां ले जाएंगे, लेकिन एक बात वे निश्चित रूप से जानती थीं, ‘‘हम उन लड़कों के ग्रुप्स को छोड़ना चाहते थे, जिन पर हम निर्भर थे,’’ क्रांतिनारी ने याद करते हुए बताया.

एकसाथ आने से पहले वाइल्ड वाइल्ड वीमन की पांचों रैपरों ने अपने हुनर की अलगअलग तरीके से खोज की थी. लगभग सभी के लिए यह उन की खुद की आवाज और पहचान को हासिल करने का जरीया था.

क्रांतिनारी का बचपन अकसर अस्पतालों के चक्कर लगाते हुए बीता. वे बताती हैं कि 7वीं कक्षा तक स्कूल जाना और बुली होना मेरे लिए रोजमर्रा की बात थी. 8वीं कक्षा में उन्होंने अपनी मां के प्रोत्साहन पर बास्केटबौल अपनाया. उन की मां खुद कभी राज्य स्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी थीं. इस खेल ने क्रांतिनारी को स्कूल के बाहर आत्मविश्वास बनाने में मदद की.

लेकिन कोर्ट पर दूसरे खिलाड़ी अकसर क्रांतिनारी की टूटीफूटी और गलत अंगरेजी का मजाक उड़ाते थे. ‘‘मु झे सम झ नहीं आता था कि क्या करूं,’’ वे याद करते हुए बताती हैं.

‘‘क्योंकि मैं अपने घर में या अपने पड़ोसियों से अंगरेजी में बात नहीं करती थी. वह भाषा मेरी दुनिया का हिस्सा ही नहीं थी,’’ एक सीनियर ने उन का साथ दिया. उन्होंने क्रांतिनारी को अमेरिकन रैपर एमिनेम का गाना ‘ब्यूटीफुल’ सुनाया, जो आत्म स्वीकृति के बारे में है.

‘‘उस गाने के बोल इतने असरदार थे कि मैं हर शब्द, हर पंक्ति पर रुक कर यह सम झने की कोशिश करती थी कि उस का मतलब क्या है,’’ क्रांतिनारी याद करती हैं. वे शब्दों को सम झने से पहले ही उच्चारण का अभ्यास करती थीं. उन्होंने अपनी कई डायरियों को उन गानों के शब्दों से भर दिया था, जिन्हें वे पसंद करती थीं. धीरेधीरे संगीत ने उन्हें अंगरेजी के साथ सहज होने में मदद की. इसी दौरान कुछ हिप-हौप कलाकारों से आकस्मिक मुलाकात ने उन्हें ब्रेकडांस से परिचित कराया. यहीं उन्हें अपना पहला स्टेज नाम ‘बी गर्ल म्याऊ’ मिला.

क्रांतिनारी ने डिजाइन की पढ़ाई करने के लिए मुंबई शहर छोड़ा. बाद में आईआईटी बौंबे के डिजाइन सैंटर में स्कौलर के रूप में लौटीं और फिर हैदराबाद में माइक्रोसौफ्ट के साथ काम करने के लिए फिर से रवाना हुईं. इस दौराम उन्होंने अपने भीतर एक खालीपन सा महसूस किया. इसलिए उन्होंने खुद से रैप करना शुरू किया. मुंबई में तेजी से बढ़ते हिप-हौप परिदृश्य के करीब आने के लिए उन्होंने ऐसी नौकरी चुनी जिस में वे मुंबई वापस लौट सकें.

एक इंस्टाग्राम रील की झलकियां जिस में वाइल्ड वाइल्ड वीमन ने अपने गाने 'Game flip' पर परफौर्म किया था. इस रील को 15.5 मिलियन से ज्यादा लोगों ने देखा और 1.2 मिलियन लोगों ने लाइक किया.
एक इंस्टाग्राम रील की झलकियां जिस में वाइल्ड वाइल्ड वीमन ने अपने गाने ‘Game flip’ पर परफौर्म किया था. इस रील को 15.5 मिलियन से ज्यादा लोगों ने देखा और 1.2 मिलियन लोगों ने लाइक किया. Courtesy : Wild Wild Women/Youtube

जोश और जज्बा

इसी समय क्रांतिनारी ने पहली बार मुंबई स्थित एक पौलिटिकल रैप कू्रू स्वदेशी को देखा. उन्होंने सोचा कि ये तो वही बोल रहे हैं जो मेरे दिमाग में चल रहा है. उन्हें महसूस हुआ कि उन को अपना रास्ता मिल गया है. दिन में वे औफिस जातीं और शाम को स्वदेशी के साथ ट्रेनिंग करती थीं. यहीं वे अंडरग्राउंड गिग्स और ओपन माइक इवेंट्स में जाने लगीं, जहां कोई भी मंच पर आ कर परफौर्म कर सकता था. उन के मातापिता 3 साल तक इस बात से अनजान रहे. वे अगर कभी पूछते भी थे तो क्रांतिनारी कहतीं कि औफिस में देर तक काम कर रही थी.

उन के एक पारिवारिक मित्र ने अखबार में छपा एक लेख देखा, जिस में क्रांतिनारी का जिक्र था. उन की मां ने अल्टीमेटम दिया कि मैं रैप छोड़ दूं नहीं तो वे आत्महत्या कर लेंगी. क्रांतिनारी ने याद करते हुए बताया. उन्होंने अपने मातापिता को सम झाने की कोशिश की, लेकिन बहस हर मोड़ पर तैयार खड़ी थी.

एक बार उन के एक रिश्तेदार ने उन के रैप को ले कर आपत्ति जताई, जो सत्ता की संरचनाओं को चुनौती देता है. उन्होंने कहा कि हम तुम से बात नहीं कर सकते क्योंकि तुम देशद्रोही हो. क्रांतिनारी कहती हैं कि इस बात ने मु झे बहुत अंदर तक  झक झोर दिया. फिर भी मैं डटी रही.

क्रांतिनारी की तरह ही एमसी महिला को भी पारिवारिक दबावों का सामना करना पड़ा. जिस चाल में वे पलीबढ़ीं, वहां ज्यादातर लोग अपने बच्चों के लिए एक स्थिर नौकरी और सामान्य जीवन को ही बेहतर मानते थे. ‘‘उधर का वाइब बहुत अलग है,’’ वे कहती हैं, ‘‘यानी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कोई लड़की म्यूजिक करेगी.’’

जब उन्होंने रैप शुरू किया तो उन के मातापिता भी विरोध में थे. ‘‘मैं तो पूरी फैमिली की ब्लैक शीप हूं,’’ उन्होंने हंसते हुए कहा. लेकिन जैसेजैसे एमसी महिला ने अच्छा प्रदर्शन करना शुरू किया, उन के मातापिता का संकोच गर्व में बदल गया.

मंच पर एमसी महिला आग के गोले की तरह जोश से भरी होती हैं. मंच से उतरते ही वे एक निरीक्षक बन जाना पसंद करती हैं. ‘‘मैं बहुत कम बात करती हूं, मु झे बहुत  िझ झक होती है,’’ वे कहती हैं, ‘‘मैं ऐसी ही हूं स्ट्रेट अप.’’

उन की पृष्ठभूमि उन के काम को वाइल्ड वाइल्ड वीमन के अन्य रैपर्स से अलग बनाती है. प्रतिका ने बताया, ‘‘मु झे लगता है उन का काम ज्यादा असरदार और असली है.’’

‘‘प्रतिका के अपने अनुभव उन के परिवार की आर्थिक अस्थिरता से गढ़े गए. बचपन में वे मुंबई के अलगअलग हिस्सों में लगातार स्थानांतरित होते रहे. इन में से कुछ जगहों पर प्रतिका ने समाज में हिंसा को करीब से देखा. जिंदगी कठिन थी और शुरुआत में हर चीज एक संघर्ष जैसी थी. इस ने मेरे सोचने और लिखने के तरीके को गहराई से प्रभावित किया,’’ वे बताती हैं.

प्रतिका के लिए संगीत जीवन में बदलती परिस्थितियों के बीच एक सहारा बन गया. जब वे 12 साल की थीं, उस समय वे ‘क्रौनिक फोबिया’ नाम के एक मैटल बैंड में बेस गिटार बजाया करती थीं. कुछ साल उन्होंने चर्च के कौयर ग्रुप के साथ भी बिताए. जब उन्होंने टैलीविजन चैनलों के जरीए हिप-हौप से परिचय पाया तो उन का  झुकाव ऐसे ग्रुप्स की ओर हुआ, जिन में मजबूत संगीतकला को दमदार रैप के साथ जोड़ा गया जैसे अमेरिकी बैंड ‘लिंकिन पार्क.’

परफौर्मेंस के दौरान बैंड की सदस्य कभी साड़ी तो कभी लुंगी पहन कर स्टेज पर आती हैं. वे अभिमान और आजादी के साथ आगे बढ़ती हैं.
Courtesy : Wild Wild Women

संगीत से पहला परिचय

मास कम्युनिकेशन में डिगरी पूरी करने के बाद प्रतिका ने संगीत से जुड़े ऐसे काम की तलाश की जो उन्हें स्थिर आय दे सके. उन्होंने कई तरह की नौकरियां कीं- वाद्ययंत्र विक्रेताओं, एक इवेंट कंपनी और एक स्वतंत्र रिकौर्ड लेबल के साथ. कोरोना महामारी के दौरान वे जिस रिकौर्ड लेबल कंपनी में काम कर रही थीं, वह आर्थिक मुश्किलों से गुजर रही थी. तब खुद को सहारा देने के लिए उन्होंने एक रिमोट जौब करनी शुरू कर दी.

उसी दौरान जब प्रतिका दिल्ली की हिप-हौप जोड़ी ‘सीधे मौत’ के साथ वक्त गुजार रही थीं, उन में से एक ने उन्हें एक बीट सुनाई. उन्होंने पूछा कि क्या वे उस बीट का इस्तेमाल कर सकती हैं.

‘‘मैं उन के सामने बैठी और आधे घंटे में एक रैप लिखा और गाया,’’ प्रतिका ने याद किया. यही उन का पहला गाना था. ‘‘और बस, वहीं से सबकुछ शुरू हो गया,’’ प्रतिका ने मु झे बताया.

जे क्वीन का संगीत से पहला परिचय उन के पिता के जरीए हुआ. उन के पिता अमेरिकी गायक और डांसर माइकल जैक्सन के बहुत बड़े फैन थे. वे जे क्वीन के स्कूल और अपनी चाल में होने वाले कार्यक्रमों में जैक्सन के मशहूर गानों पर परफौर्म किया करते थे.

‘‘मैं भी माइकल जैक्सन की एकदम पागल फैन हो गई थी,’’ जे क्वीन ने मु झे बताया. एक टीचर के प्रोत्साहन से जे क्वीन ने सार्वजनिक तौर पर गाना भी शुरू कर दिया था. जैसेजैसे वे बड़ी हुईं, हिप-हौप की दुनिया से उन का परिचय हुआ ज्यादातर यूट्यूब वीडियोज के जरीए. उन की पसंदीदा कलाकारों में से एक थीं निक्की मिनाज, त्रिनिदाद की रैपर, गायिका और गीतकार, जो अमेरिका में रहती हैं.

‘‘मैं तो लड़के लोगों को देखती थी रैप करते हुए, लेकिन यह निक्की मिनाज तो कुछ अलग है,’’ जे क्वीन ने उन दिनों को याद करते हुए कहा, ‘‘मैं ने सोचा, मु झे भी ऐसा कुछ करना चाहिए.’’

वे गानों के लिरिक्स कौपी कर अकेले में उन की प्रैक्टिस करती थी. उन्होंने अपनेआप से बीटबौक्सिंग सीख ली, एक तकनीक जिस के माध्यम से कलाकार ड्रम की आवाजों का अनुकरण करते हैं. एक बार क्लास में देर से आने पर जे क्वीन को सजा के तौर पर कुछ परफौर्म करने को कहा गया. तब उन की दोस्तों को यह पता चला कि वे रैप कर सकती हैं. उस के बाद दोस्तों ने उन्हें इस कला को आगे बढ़ाने का हौंसला दिया.

हिप-हौप समूह के एक और दोस्त जे क्वीन को दक्षिण मुंबई में एक ठिकाने पर ले कर गईं. इस जगह का नाम जमैका के प्रसिद्ध गायक और गीतकार बौब मार्ले के नाम पर रखा गया था. इसे लोकप्रिय तौर पर ‘बौब मार्ले का मंदिर’ कहा जाता था. वास्तव में यह एक लकड़ी और धातु की वर्कशौप थी, जिस के मालिक गिटार बजाने वाले हरपाल सिंह थे. उन्होंने अपनी वर्कशौप को युवा संगीतकारों के लिए खोल रखा था ताकि वे यहां मिल सकें और अभ्यास कर सकें.

जे क्वीन ने याद किया कि हरपाल सिंह की वजह से उन्होंने ब्रिटिश रौक बैंड ‘द बीटल्स’ और स्वीडिश पौप ग्रुप ‘ऐब्बा’ का संगीत सुनना शुरू किया. जे क्वीन वर्कशौप में अन्य रैपर्स से भी मिलीं, जिन में एक पुरुष हिप-हौप कू्र भी था. वे उन के साथ परफौर्म करने लगीं.

जे क्वीन के मातापिता चाहते थे कि वह आर्थिक स्थिरता के लिए वे 9-से-5 की नौकरी करे. इस के चलते लगभग 6 सालों तक उन्हें बेहद कठिन दिनचर्या निभानी पड़ी. सुबह 7 बजे उठ कर, फिर 1 घंटे का सफर तय कर के वे रियल ऐस्टेट फर्म की नौकरी पर जातीं. वहां से डेढ़ घंटे की यात्रा कर के वे फिर अपने ग्रुप के साथ अभ्यास करने पहुंचतीं. अंत में वे 1 घंटे का सफर कर के घर लौटती.

‘‘मैं उन के लिए भी कर रही थी (मातापिता के लिए) और मैं अपना भी कर रही थी,’’ जे क्वीन ने कहा, ‘‘और मु झे अच्छा लग रहा था जो मैं कर रही थी.’’

जैसेजैसे जे क्वीन को पहचान मिलने लगी, ऐसा लगने लगा कि अन्य कू्र के सदस्य असुरक्षित महसूस कर रहे थे. आखिरकार उन में से एक ने जे क्वीन को ग्रुप छोड़ने के लिए कह दिया. इस के कुछ सालों बाद तक जे क्वीन गाती रहीं, लेकिन अब वे सिर्फ अपने लिए गाती थीं.

आदत नहीं जनून

इस बीच एक और युवा महिला अपनी आवाज एक अलग माध्यम में खोज रही थीं. हैशटैगप्रीति के लिए लिखना हमेशा से ही एक भावनात्मक अभिव्यक्ति का जरीया रहा था. बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें हर हफ्ते अपने मातापिता को पत्र लिखना होता था. जैसेजैसे वे बड़ी हुईं, यह अभ्यास एक नियमित डायरी लेखन में बदल गया. धीरेधीरे हैशटैगप्रीति को एहसास हुआ कि शब्दों के साथ काम करना सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि उन का जनून है.

‘‘मेरे पापा बिजनैसमैन हैं, तो मेरे मातापिता हमेशा सोचते थे कि मैं भी आखिरकार बिजनैस ही करूंगी, जिस के साथ बहुत सी सुविधाएं और विशेषाधिकार जुड़े हैं,’’ वे कहती हैं.

कुछ पाबंदियां भी थीं. ‘‘जो मु झे चाहिए था, वो घर पर कभी सुना नहीं जाता था,’’ हैशटैगप्रीति बताती हैं, ‘‘मैं ने खुद को कभी एक आर्टिस्ट के रूप में नहीं देखा, खुद को हमेशा कम ही आंकती रही.’’

लगभग 7 साल पहले, जब उन्होंने हिप-हौप की दुनिया खोजी, तब उन के लिए संगीत और शब्दों का सही माने में समायोजन हुआ.

‘‘तब मैं ने देखा कि यह भी किया जा सकता है और यह वही था जो मैं हमेशा से करना चाहती थी,’’ उन्होंने मु झे बताया.

हैशटैगप्रीति एक ऐसे माहौल में बड़ी हुईं, जहां उन के चारों ओर महिलाएं ही थीं. बहुत सारी बहनें और लड़कियों के स्कूल में गहरी दोस्तियां. ‘‘जब मैं हिप-हौप में आई, तो मु झे ऐसा लगा कि यार, मु झे मेरी लड़कियां चाहिए, वे कहती हैं कि उन का पहला रैप इस पंक्ति से शुरू हुआ था, ‘दिस इज फौर द गर्ल्स हू सम झते हिप-हौप, (यह उन लड़कियों के लिए है जो सम झते हिप-हौप).’’

जब हैशटैगप्रीति ने शुरुआत की, तो वे एक लड़कों के ग्रुप से जुड़ गईं. ‘चीजें ज्यादा ठीक नहीं चल रही थीं,’ उन्होंने बताया. ‘‘मु झे नहीं पता था कि मैं जिस रास्ते पर हूं, वह सही है या नहीं. मु झे हमेशा शक होता था.’’ लेकिन हैशटैगप्रीति के मन में एक सपना बारबार आता था, वे लड़कियों का एक अपना ग्रुप बनाना चाहती थीं.

जीवन का अच्छा निर्णय क्रांतिनारी और जे क्वीन एकदूसरे को हिप-हौप गिग्स से जानती थीं और वे पहले भी औल वीमन कू्र की जरूरत पर बात कर चुकी थीं. जब क्रंतिनारी ने उन्हें फोन किया उस सायफर के बारे में जिसे वे और हैशटैगप्रीति प्लान कर रही थीं, तो उन्होंने पूछा कि तू आएगी क्या? इस को ले कर जे क्वीन के मन में दुविधा थी.

अपने पिछले ग्रुप से निकाले जाने के बाद वे खुद से सवाल कर रहीं थीं.

‘‘मुझे तो यह भी पक्का नहीं था कि मैं अब रैप में कुछ कर भी पाऊंगी या नहीं,’’ वे बताती हैं.

जे क्वीन ने एक दोस्त से सलाह मांगी और एक और प्रयास करने की ठानी, ‘‘मु झे लगता है कि वह मेरे जीवन का सब से अच्छा निर्णय था उस सायफर में जाने का,’’ जे क्वीन कहती हैं.

क्रांतिनारी और हैशटैगप्रीति ने याद करते हुए कहा कि उस सायफर के लिए ज्यादातर बातचीत ऐसे ही हुई थी. कुछ जवाब इतने छोटे और जल्दी दिए गए थे कि उन्हें यकीन भी नहीं था कि जिन युवतियों से उन्होंने बात की थी, वे वास्तव में आएंगी भी या नहीं. लेकिन अधिकांश युवतियां आईं. 8 मार्च, 2021 यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन वाइल्ड वाइल्ड वीमन ने अपना पहला सिंगल रिलीज किया. इस का नाम था- ‘आई डू इट फौर हिप-हौप.’

इस गाने में शामिल सभी रैपर्स ने अपनी जड़ों और संगीत से अपने रिश्ते को व्यक्त किया. इस का प्रोडक्शन किया था पोषक ने जो उस समय इंडस्ट्री में एकदम नए थे. प्रतिका ने अपने पास मौजूद संसाधनों से वीडियो की शूटिंग और एडिटिंग की. ‘‘मैं इस सायफर को ले कर इतनी उत्साहित थी,’’ वे याद करती हैं, ‘‘कि मैं ने 2 दिनों में वीडियो एडिट कर के सब के साथ शेयर कर दिया.’’

अस्पष्ट सोच

ग्रुप ने उत्सुकता बढ़ाने के लिए एक टीजर भी जारी किया और उस के बाद एक प्रैस अनाउंसमैंट भी की. इस में उन्होंने खुद को भारत का पहला आल फीमेल हिप-हौप समूह बताया. उन्होंने हिप-हौप कम्युनिटी के अपने सभी परिचितों से दोबारा पुष्टि की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन से कोई भूल तो नहीं हुई थी. उस वक्त उन की सोच बिलकुल स्पष्ट थी, प्रतिका ने याद किया, ‘‘करते हैं बराबर से. अब पीछे नहीं हटेंगे.’’

वाइल्ड वाइल्ड वीमन को लगभग तुरंत ही शो और इंटरव्यूज के औफर मिलने लगे. प्रतिका को याद है कि जो लोग उन से संपर्क करते थे, उन्हें वे यह साफसाफ कहती थीं कि उस समय उन के पास सिर्फ एक ही गाना था. उन्होंने वाइल्ड वाइल्ड वीमन के अगले 2 ट्रैक्स- ‘गेम फ्लिप’ और ‘उड्डू आजाद’ का प्रोडक्शन किया. 2023 में जब ‘गेम फ्लिप’ की रील वायरल हुई, तब तक यह ग्रुप अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरने लगा था.

आगे बढ़ते हुए वाइल्ड वाइल्ड वीमन में नए सदस्य भी जुड़ने लगे. डांसर एमसीके बीगल- जो फ्ला-रा को पहले से ही जानती थी- का इस समूह से परिचय 2021 में हुआ.

क्रांतिनारी ने आर्टिस्ट गौरी से संपर्क किया, जिन्हें वे पहले से जानती थीं. वे दोनों ही एक एनजीओ के साथ काम करते हुए धारावी की  झुग्गी बस्ती में बच्चों को पढ़ाती थीं. गौरी एक प्रशिक्षित जिमनास्ट हैं. उन्होंने सब से पहले ब्रेकडांसिंग के जरीए हिप-हौप को जाना था. वे 1 साल तक एक दूसरे समूह का हिस्सा भी रही थीं. लेकिन उन के मातापिता इस से खुश नहीं थे. बाद में जब उन्होंने मुंबई के जे.जे. स्कूल औफ आर्ट से अपनी डिगरी पूरी की तो उन्हें कैलीग्राफी और टाइपोग्राफी तकनीकों को ग्रैफिटी में इस्तेमाल करने में दिलचस्पी हुई. अब वे वाइल्ड वाइल्ड वीमन के प्रदर्शनों के दौरान स्टेज पर रखे कैनवस पर लाइव पेंटिंग करती हैं.

20 साल की श्रुति ग्रुप की सब से कम उम्र की और सब से नई सदस्य हैं. उन्होंने स्केटबोर्डिंग की दुनिया को 2017 में जाना, जब उन्होंने अपने घर के पास एक पार्क में कुछ लड़कों को स्केटबोर्ड करते हुए देखा. वे याद करते हुए बताती हैं, ‘‘तो उन को देखा और फिर मैं भी ‘भैयाभैया’ बोल कर चलती थी.’’

उन में से एक लड़के ने श्रुति को एक सैकंड हैंड स्केटबोर्ड दिया. इस के बाद वे चुपचाप लगभग डेढ़ साल तक स्केटबोर्डिंग में अपने हुनर को निखारती रहीं. ‘‘स्कूल का दांडी मारकर, मैं जाती थी वहां पर,’’ वह कहती है. जब श्रुति के घर वालों को इस के बारे में पता चला तो उन्होंने उन का स्केटबोर्ड फेंक दिया.

‘‘उन्होंने बोला कि ये लड़कियों के लिए नहीं है. ये लड़कों के लिए है,’’ श्रुति याद करती है. ‘‘मेरी दादी ने कहा कि लड़कों का ऐसा रहता है. तू नहीं कर सकती.’’

दादी ने श्रुति को यहां तक चेतावनी दी कि अगर स्केटबोर्डिंग करते हुए श्रुति की टांग टूट गई तो श्रुति से शादी करने वाला कोई नहीं मिलेगा.

2020 में जब कोविड-19 की पहली लहर के बाद देशव्यापी लौकडाउन खत्म हुआ तो श्रुति ने घर छोड़ दिया. अपने खर्च पूरे करने के लिए स्केटबोर्डिंग सिखाना शुरू किया. साथ ही वे अपने खुद के अभ्यास के लिए भी समय निकालती रहीं.

एक साल बाद श्रुति ने पहली बार राज्य स्तर पर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सोना जीता. उसी साल दिसंबर में उन्होंने राष्ट्रीय रोलर स्कैटिंग चैंपियनशिप में सीनियर महिलाओं की श्रेणी (17 वर्ष से ऊपर) में पहला स्थान हासिल किया. अखबार में उन का नाम देख कर उन के पिता खुश हुए, लेकिन उन का अगला सवाल मन में गूंजता रहा कि आगे इस का स्कोप क्या है?

श्रुति की नजरें अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हुई थीं. लेकिन घुटने की चोट ने उन के सपनों की उड़ान बीच में रोक दी. वे फिर से अपने परिवार के साथ रहने लगीं और स्केटबोर्डिंग के प्रति अपने जनून को अलगअलग तरीकों से जिंदा रखने की कोशिश करती रहीं.

2023 में क्रांतिनारी ने एक इनफ्लाइट मैगजीन में श्रुति पर एक फीचर देखा. उन्होंने तुरंत उस युवा स्केटबोर्डर से संपर्क किया और श्रुति को वाइल्ड वाइल्ड वीमन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया.

‘‘मैं हूं तो पुरानी स्केटबोर्डर, पर मैं ज्यादा हाइलाईट नहीं होती थी. वाइल्ड वाइल्ड वीमन में आने के बाद लोगों को मेरे बारे में पता चला,’’ श्रुति ने मु झ से कहा. पहले उन के ज्यादातर दोस्त वे लड़के थे जिन के साथ वे स्केटबोर्डिंग करती थीं. ‘‘लेकिन ग्रुप में आने के बाद मेरी लड़की दोस्त है,’’ उन्होंने मुसकरा कर कहा.

अब यह समूह अपने भविष्य की ओर नजरें टिकाए हुए है. क्रांतिनारी ग्रामीण भारत में वाइल्ड वाइल्ड वीमन मौडल को दोहराने का प्रयास कर रही हैं. इस के लिए उन्होंने ‘साउंड औफ वीमन’ नाम से एक लोक संगीत पहल शुरू की है, जिस का उद्देश्य स्थानीय महिलाओं द्वारा संचालित समूहों को तैयार करना है. अब तक वे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में कुछ समूहों के साथ काम कर चुकी हैं.

‘‘एक कू्र और रैपर के रूप में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं,’’ प्रतिका कहती है. चूंकि समूह की ज्यादातर सदस्य अपने स्वतंत्र कैरियर पर भी काम कर रही हैं, इसलिए अब वे प्रैक्टिस सैशन औनलाइन करती हैं. इस तरह व्यक्तिगत आकांक्षाओं और सामूहिक सपनों के बीच संतुलन बना रहता है

‘‘जब भी हम मिलते हैं, तो हमारी बातें हमेशा संगीत के बारे में होती हैं और यह बहुत अच्छा लगता है,’’ जे क्वीन कहती हैं, ‘‘जब मैं घर पर बैठी होती हूं, तो सोचती हूं, कभी मिलेंगे, कभी साथ काम करेंगे.’’

हैशटैगप्रीति ने इस भावना को दोहराया, ‘‘कई बार मैं बस हमारी बातचीत सुन रही होती हूं और भीतर से बहुत आभारी महसूस करती हूं कि मैं यहां बैठी हूं, इस कमरे में हूं,’’ उन्होंने मु झे बताया, ‘‘फिर मैं खुद को याद दिलाती हूं कि ये कभी एक सपना था और अब यह तुम्हारी हकीकत है. तो अब इस से पीछे मुड़ने का कोई सवाल ही नहीं.’’

लेखक- निकिता सक्सेना

Wild Wild Women

Winter Facial: सर्दियों में फेशियल- निखर जाएगा चेहरा

Winter Facial: सर्दियों में स्किन को खास केयर की जरूरत होती है. लेकिन हमें लगता है कि सर्दी के मौसम में फेशियल करवाने से त्वचा और भी खराब हो जाएगी क्योंकि इस मौसम में स्किन बहुत ड्राई हो जाती है.

ऐसे में अगर आप स्किन केयर नहीं करतीं तो आप की स्किन पर उम्र की लकीरें जल्द ही पड़नी शुरू हो जाती हैं. इतना ही नहीं, अगर विंटर में स्किन की सही केयर करने के ब्यूटी टिप्स आप जान लेंगी तो आप को ग्लोइंग स्किन मिलेगी और उम्र से पहले चेहरे पर पड़ रही झुर्रियां भी नहीं नजर आएंगी.

दरअसल, सर्दियों में ठंडी हवाओं के संपर्क में रहने के कारण त्वचा रूखी हो जाती है. ऐसे में फेशियल करना एक बहुत बड़ी समस्या होती है, क्योंकि आम दिनों में तो हमारी त्वचा सामान्य रहती है लेकिन सर्दियों में हमारी त्वचा रूखी हो जाती है.

इस मौसम में फेशियल के लिए विशेष प्रकार के फेस पैक और मसाज क्रीम की आवश्यकता होती है, जो हमारी त्वचा की नमी को बरकरार रखते हैं.

त्वचा की खोई नमी लौटाने के लिए हमें मौसम के अनुसार मसाज क्रीम का उपयोग करना चाहिए. मसाज हमारे शरीर की थकान को भी दूर करता है. इसलिए इस प्रक्रिया में ऐक्यूप्रेशर के पौइंट को उंगलियों से प्रेस किया जाता है.

क्यों जरूरी है फेशियल करवाना

-ठंड के मौसम में त्वचा ड्राई और बेजान नजर आने लगती है. ऐसे में फेशियल आप की स्किन को नमी देने का काम करता है. इस के अलावा ऐक्सफोलिएशन से डेड स्किन से राहत मिलती है.

-ज्यादातर फेशियल किट्स में विटामिन ई और ऐंटीऔक्सीडेंट के गुण होते हैं, जो आप की त्वचा को पोषण देने का काम करते हैं. सर्दियों में त्वचा को हैल्दी रखने के लिए दोनों ही इनग्रेडिऐंट्स महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं.

-इस मौसम में नमी कम होने की वजह से त्वचा में ऐलर्जी हो जाती है और खुजली होने लगती है. ऐसे में फेशियल त्वचा को हाइड्रेट करने का काम करता है.

-सर्दियों में त्वचा की डीप क्लीनिंग नहीं हो पाती है. कई बार ठंड ज्यादा होने की वजह से हम चेहरा भी कम धोते हैं, जिस की वजह से ब्लैकहेड्स, गंदगी चेहरे पर बनी रहती है. फेशियल इन सभी चीजों को दूर करने का काम करता है.

फेशियल से पहले स्किन क्लींजिंग

फेशियल से पहले स्किन क्लींजिंग बेहद जरूरी होती है. ऐसा करने से स्किन के ऊपर की एक परत, जिसे आप डेड स्किन भी कह सकते हैं वह साफ हो जाती है. सर्दियों में फेशियल जरूर करवाना चाहिए. विंटर फेशियल में क्लींजिंग भी अलग तरह से की जाती है. आप अगर अंडे का इस्तेमाल कर सकती हैं, तो आप की स्किन को इस से बड़ा फायदा होगा.

अंडा प्रोटीन का सब से अच्छा सोर्स होता है और स्किन पर जब इसे इस्तेमाल करती हैं तो आप की स्किन का ग्लो लोग आसानी से नोटिस कर पाते हैं.

फेशियल मांसपेशियों को रिलैक्स करेगा

सर्दी में बहुत सी महिलाओं को कमजोर जो लाइन की परेशानी होती है. ऐसे में फेशियल बहुत हद तक इस समस्या की रोकथाम के लिए सहायक है. जब भी आप पार्लर जाएं तो वहां मसाज भी करवाएं. यह आप की मांसपेशियों को रिलैक्स करेगा. आप स्वयं भी उंगलियों की मदद से फेशियल कर सकती हैं. आजकल बाजार में एक किस्म का फेस मसाजर उपलब्ध है. इस का उपयोग भी आप आसानी से कर सकते हैं. इस के अलावा आप कुछ और भी फेशियल को आजमा सकती हैं.

सर्दियों में क्या न करें 

पील औफ मास्क इस्तेमाल न करें : विंटर्स में फेशियल के दौरान पील औफ मास्क न करें, क्योंकि यह इस मौसम में होने वाली ड्राइनैस को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं, जिस से खुजली और रैडनेस बढ़ सकती है, बल्कि इस की जगह मोइस्चराइजर फेस मास्क या फेसपैक का इस्तेमाल करें.

सर्दियों में गरम पानी से मुंह न धोएं : वैसे तो गरम पानी से मुंह धोना किसी भी मौसम में सही नहीं होता, लेकिन सर्दियों में औलरेडी स्किन ड्राई रहती है. ऐसे में गरम पानी के इस्तेमाल से यह प्रौब्लम और ज्यादा बढ़ सकती है. साथ ही इस से स्किन का नैचुरल औयल भी कम होने लगता है.

मोइस्चराइजर इस्तेमाल न करना : फेशियल के बाद हमेशा मोइस्चराइजर का इस्तेमाल करें. इस स्टेप को बिलकुल अवौयड न करें, क्योंकि फेशियल के बाद त्वचा को थोड़ी ज्यादा नमी की जरूरत होती है. इस के लिए आप क्रीम या नौर्मल नारियल तेल का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

सर्दियों के लिए कुछ बेहतरीन फेशियल कौन से हैं

हाइड्रेटिंग/डीहाइड्रेशन फेशियल : जब ज्यादा सर्दियां होती हैं तब यह फेशियल सब से बढ़िया रिजल्ट देता है. यह ह्यलूरोनिक एसिड, प्राकृतिक तेलों और मोइस्चराइजिंग मास्क से नमी को फिर से भरने में मदद करता है. यह सीधे त्वचा में नमी पहुंचाता है. यह ट्रीटमैंट आप की स्किन को क्लियर और स्मूद बनाने में मदद करता है.

जो लोग अपनी त्वचा पर हाइड्रेटिंग फेशियल का इस्तेमाल करते हैं, तो उन लोगों की त्वचा नैचुरल तरीके से मोइस्चराइजर बनी रहती है. इसलिए यह फेशियल त्वचा के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. इस के साथ ही यह फेशियल त्वचा की बारीक लाइनों को सही कर देता है और इस से त्वचा प्लंप और हाइड्रेटेड बन जाती है. यह फेशियल मुंहासे, ड्राइनैस और झुर्रियों के ट्रीटमैंट में भी मदद कर सकता है. यह नमी, रूखेपन से राहत देता है और साथ ही त्वचा को कोमलता देता है.

इस में 3 स्टेप्स होते हैं- ऐक्सफोलिएशन, इंफ्यूजन और हाइड्रेशन.

हर्बल फेशियल : इस फेशियल से स्किन के दागधब्बे भी दूर होते हैं.

फ्रूट फेशियल (खासकर केले, पपीते जैसे नमी देने वाले फलों का उपयोग) : ये प्राकृतिक फल विटामिन और ऐंटीऔक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो त्वचा को पोषण और गुलाबी निखार देते हैं. इस तरह ये प्राकृतिक पोषण, त्वचा की रंगत में सुधार करते हैं.

औक्सीजन फेशियल : घर से बाहर निकलते ही प्रदूषण, धूलमिट्टी और सूर्य की हानिकारक किरणें आप की त्वचा को रूखी और बेजान बना देती हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए औक्सीजन फेशियल एक बेहतर विकल्प होता है. चेहरे में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है. अगर आप हाइड्रेटेड स्किन, ईवन स्किनटोन, ग्लोइंग स्किन चाहती हैं तो वह भी इस से हो जाती है. यह त्वचा में होने वाली कई गंभीर समस्याओं से भी बचाता है.

इस फेशियल में सब से पहले त्वचा को गहराई से साफ किया जाता है और उस के बाद 2 मिनट के लिए त्वचा पर औक्सीजन स्प्रे किया जाता है.

गोल्ड या पर्ल फेशियल (चमक और पोषण के लिए) : इन फेशियल किट में अकसर मोइस्चराइजिंग क्रीम की मात्रा अधिक होती है और ये चमक लाते हैं. इन से त्वचा में चमक और त्वचा में निखार आता है.

ऐक्सफोलिएटिंग फेशियल : यह मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने और त्वचा की रंगत और बनावट को बेहतर बनाने में मदद करता है.

कार्बन फेशियल : यह सेलिब्स का पसंदीदा है. इस में त्वचा पर कार्बन लोशन लगाया जाता है, जिस के बाद लेजर ट्रीटमैंट किया जाता है. लेजर कार्बन को तोड़ता है जिस से डेड स्किन सेल्स, ऐक्सेस औयल और चेहरे की अशुद्धियों को हटाने में मदद मिलती है.

Winter Facial

Honeymoon Fashion Guide: हनीमून पर टिपटौप कैसे रहें

Honeymoon Fashion Guide: हाथों में पहने लाल चूड़े को देख कर हर किसी की नजर बरबस उस नए जोड़े पर चली ही जाती है जिन की नईनई शादी हुई हो और वह हनीमून कपल हो. सुबह ब्रैकफास्ट पर 12 बजे से पहले पहुंचने की जल्दबाजी और रात को देर से सोने और सुबह देर से उठने के बीच लड़की नाइट सूट पर कोई बेकार सा दुपट्टा ले कर ब्रैकफास्ट करने आ जाती है और सब की निगाहें उसी पर टिकी रहती हैं, लेकिन उस के चेहरे की जल्दबाजी, उड़ी हुई रंगत, बिना मेकअप का चेहरा, बिखरे बाल देख हर किसी का मन खराब हो जाता है, क्योंकि नईनवेली दुलहन जब तक सजीधजी न दिखें तब तक अच्छा नहीं लगता.

इसलिए हनीमून पर आए हैं, तो यह न सोचें कि वहां कौन से रिश्तेदार बैठे हैं आप को देखने के लिए, इसलिए कुछ भी पहन लो. यह सोच गलत है.

अगर कुछ दिनों के लिए बाहर आए हैं तो खुद को ठीकठाक रखें ताकि आप को जो देखे बस उस के मुंह से यही निकले कि देखो, कितनी प्यारी दुलहन है.

डैस्टिनेशन के हिसाब से पहनें आउटफिट

बीच डैस्टिनेशन : आप हनीमून के लिए किसी बीच वाली जगह पर जा रही हैं, तो सब से पहले अपने सामान की पेटी में एक खूबसूरत बिकिनी की जगह बनाना न भूलें, क्योंकि नवविवाहित महिलाओं के लिए बिकिनी सब से ज्यादा जरूरी है. समुद्र की गहराई में आप जब अपने हमसफर के साथ होंगी तो बिकिनी ही आप के रोमांस में तड़का लगाने का काम करेगी.

रंगबिरंगी या फ्लोरल प्रिंट वाली मैक्सी ड्रैस या बिकिनी और वनपीस स्विमसूट पहन सकती हैं. इस के ऊपर एक स्टाइलिश कवरअप या कफ्तान पहन सकती हैं, जिसे बाद में किसी रेस्तरां में भी पहना जा सकता है.

सनग्लासेज भी जरूर लगाएं ताकि टैनिंग से भी बची रहें और साथ में स्टाइलिश भी लगें. अपने इस बीच लुक को पूरा करने के लिए फ्लिप फ्लौप पहनें.

बीच हो या हिल टौप, ढीलेढाले फ्लोरल प्रिंट टौप्स और डैनिम शौर्ट्स किसी भी हनीमून डैस्टिनेशन के लिए फिट हैं. साथ में आप रंगबिरंगे फ्लिप फ्लौप या कैनवस शूज पहन सकती हैं. इस से आप को ‘उन के’ साथ लौंग वाक पर जाने में भी तकलीफ नहीं होगी.

हिल स्टेशन पर कैसा आउटफिट हो

अगर आप किसी ठंडी जगह जा रही हैं, तो आप को गरम कपड़े रखने चाहिए. नीचे के लिए आप कुछ भी रखें लेकिन ऊपर से लौंग शार्ट ओवरकोट पहन कर आप बेहद खूबसूरत लगेंगी. ओवरकोट अगर ब्लैक या रैड कलर में हो, तो वह सभी ड्रैसेस के साथ अच्छा लगेगा.

स्कीवी, स्वेटर, जैकेट, जींस के साथ पहनना आप को स्टाइलिश लुक देगा. ठंड ज्यादा हो तो ब्यूटीफुल सी कैप और मफलर आदि चीजें भी पहन सकती हैं.

एक ड्रैस के साथ वूलन स्टौकिंग्स और ऐंकल बूट्स पहने हुए भी अच्छे लगते हैं.

कैजुअल लुक के लिए क्या पहनें

लूज फिटिंग वाले कपड़े, विंटेज ज्वैलरी, बिखरे बाल और नैचुरल मेकअप बोहो लुक का अहम हिस्सा हैं. हनीमून के लिए इस से बढ़िया गेटअप और कुछ हो ही नहीं सकता. यह तो आप भी मानती होंगी कि जितनी खूबसूरत आप बनसंवर कर लगती हैं, उस से ज्यादा अपीलिंग आप अपनी बेपरवाह सी अदाओं और लुक में लगती हैं. इसलिए हनीमून पर औफ शोल्डर टौप, रिप्ड जींस, लौंग शिफौन स्कर्ट्स, फ्लैट्स पैक करना न भूलें. इन्हें आप सुबह होटल में पहन कर भी कूल लग सकती हैं.

अगर आप हनीमून पर ऐथनिक लुक चाहती हैं, तो कट वाले कुरते के साथ पैंट पहन सकती हैं. पंजाबी जूती (मोजरी) के साथ इसे टीमअप करें. ट्रैवल के दौरान इस ड्रैस में आप को ऐथनिक लुक के साथसाथ कंफर्ट भी मिलेगा.

डिनर डेट्स पर कुछ ऐसे हों तैयार

हनीमून पर कपल्स डिनर डेट्स पर भी जाते हैं, ऐसे में आप को अपने लिए एक ग्लैमरस ड्रैस भी खरीद लेनी चाहिए. ऐसी ड्रैस आप की खूबसूरती में चार चांद लगा देगी. औफ शोल्डर ड्रैस पहन कर डेट नाइट पर आप अपना ग्लैमरस अंदाज दिखा सकती हैं.

हनीमून का पहला दिन रोमांटिक डिनर डेट से ही शुरू होता है. ऐसे में इस मौके को और खास बनाने के लिए आप वार्डरोब से अपनी पसंद की बैस्ट ड्रैस जरूर रख लें, जिसे जब आप पहन कर अपने पति के सामने आएं तो बस वे आप की हर अदा पर फिदा हो जाएं.

हनीमून पर 1 दिन तो आप ने और आप के पति ने स्पैशल बनाने के बारे में सोचा होगा, जब आप दोनों किसी अच्छे रेस्टोरैंट में कैंडललाइट डिनर करेंगे. इस स्पैशल दिन के लिए एक स्पैशल आउटफिट ले जाना न भूलें. अगर आप ने पहले से बुकिंग करवा रखी है तो वैन्यू के हिसाब से आउटफिट चुनें. एक बैकलेस मैक्सी या सिंपल ब्लैक ड्रैस इस मौके के लिए अच्छी रहेगी.

रोमांटिक मैक्‍सी ड्रैस आप के हनीमून को स्‍पैशल बना सकती है. मैक्‍सी ड्रैस आप को ऐलिगेंट लुक के साथ सैक्‍सी भी बनाती है. मैक्‍सी का चुनाव करते समय ध्‍यान रखें कि मैक्‍सी नेकलाइन पर लाइट ऐंब्रौयडरी और शीर स्‍लीव्‍स हों. इस के अलावा लड़के व्‍हाइट शर्ट और ट्राउजर के साथ ब्‍लू ब्‍लैजर का चुनाव कर सकते हैं.

लड़कियों के साथ लड़कों को भी अपने लुक को परफैक्‍ट बनाने का प्रयास करना चाहिए.

इस के आलावा हाई हील्स (अगर कंफर्टेबल लगें), स्मोकी आई मेकअप और हाइलाइटेड लिप्स (बोल्ड रैड)जरूर ट्राई करें.

Honeymoon Fashion Guide

सुनीता आहूजा ने कहा- अंधविश्वास का भय दिखा कर मेरे पति से लाखों रुपए ऐंठे

Govinda: आज के समय में अगर कोई धंधा सब से ज्यादा जोरों पर है तो वह है ज्योतिष का धंधा. यह एक ऐसा फलताफूलता बिजनैस है, जिस से कई लोग जुड़ना चाहते हैं, क्योंकि अगर एक बार यह धंधा चल निकला तो बिना मेहनत किए पैसे कमाना आसान हो जाता है.

इस के पीछे खास वजह यह है कि आज के समय में लोग अपने ऊपर विश्वास करने से ज्यादा अंधविश्वास और ज्योतिष पर विश्वास करते हैं.

अंधविश्वास में फंसा ग्लैमर वर्ल्ड

ग्लैमर वर्ल्ड इस अंधविश्वास में सब से ज्यादा फंसा हुआ है. इस बात का जीताजागता उदाहरण बौलीवुड स्टार गोविंदा है. गोविंदा उन ऐक्टरों में से एक हैं, जो एक समय में हीरो नंबर-1 कहलाते थे. लेकिन बाद में उन का समय बदला और आज वे कहीं भी नहीं हैं.

गोविंदा से ज्यादा आज के समय में उन की पत्नी सुनीता आहूजा अपनी बेबाक बयान और जोरदार हंसी के चलते चर्चा में हैं. सुनीता पूरी तरह से बिंदास ओर सच बोलने को ले कर चर्चा में बनी रहती हैं. सुनीता आहूजा के अनुसार, वे लोगों को खुश करने के लिए चिकनीचुपड़ी बातें नहीं करतीं बल्कि जो भी सच है वे वही बोलती हैं. ऐसे में जिन लोगों को सच सुनना अच्छा लगता है उन सभी को सुनीता की बातें समझ आती हैं और जिन को नहीं अच्छा लगता उन को सुनीता पसंद नहीं आतीं.

पूजापाठ के नाम पर ठगी

गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा के अनुसार सुनीता को सब से ज्यादा जो लोग नहीं पसंद करते हैं उन में एक तो गोविंदा के अगलबगल रहने वाले चमचे होते हैं जो गोविंदा को मसका लगा कर चने के झाड़ पर चढ़ा कर पैसे एठते रहते हैं और दूसरे वे जो ज्योतिष हैं और जो पूजापाठ के नाम पर और मंत्रों का जाप कर के कामयाबी दिलाने के नाम पर गोविंदा से लाखों रुपए लूटते रहते हैं.

सुनीता कहती हैं,”मैं तो गोविंदा के अगलबगल रहने वाले ज्योतिषों को मुंह पर ही बोल देती हूं कि अगर तुम में गोविंदा की जिंदगी सुधारने की क्षमता है तो अपनी जिंदगी क्यों नहीं सुधार ली. अगर तुम्हारे पास इतना ही टेलैंट है तो तुम्हें महलों में होना चाहिए था मेरे पति के आगेपीछे नहीं घूमना चाहिए था.”

कर्म पर भरोसा

सुनीता को पूरी तरह से कर्म और मेहनत पर विश्वास है. उन के अनुसार, ग्लैमर वर्ल्ड में कई ज्योतिष कलाकारों को बेवकूफ बना कर उन से लाखों रुपए लूट रहे हैं और खासतौर पर फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे ढोंगी ज्योतिषों का धंधा जोरों पर चल रहा है क्योंकि उन के पास अंधविश्वास में फंसे बेवकूफ बनने वाले कई कलाकार मौजूद हैं.

वे कहती हैं कि मेरे पति गोविंदा उन्हीं में से एक हैं जो ज्योतिषों को लाखों रुपए देते रहते हैं.

सुनीता कहती हैं,”मेरा मानना है कि हर इंसान को अपना कर्म अच्छा रखना चाहिए. अगर आप किसी  के साथ बुरा करेंगे तो वह किसी न किसी तरह आप के पास लौट कर आएगा और कुदरत ने जो तय कर दिया है, जितनी जिंदगी तय की है, जितना संघर्ष तय किया है या जितनी सफलता तय की है वह सब हमें मिलेगा जरूर. लेकिन यह सब ज्योतिषों की वजह से बिलकुल नहीं मिलेगा, बल्कि आप को अपनी वजह से ही मिलेगा, फिर चाहे वह अच्छा हो या बुरा.”

Govinda

Bollywood LoveStories: इन सितारों ने एकतरफा प्यार में बरबाद की जिंदगी

Bollywood LoveStories: कहते हैं प्रेम रोग एक ऐसा रोग है जो लाइलाज है यानि कि उस का कोई इलाज नहीं है, क्योंकि यह रोग जिस को लग जाता है उस के ऊपर कोई भी इलाज काम नहीं करता. प्रेम रोग से पीड़ित प्रेमी अगर एकदूसरे के लिए जान देने को तैयार होते हैं तो प्यार में धोखा मिलने पर उसी प्रेमी की जान लेने से भी पीछे नहीं हटते. इस बात का अनुभव जहां वास्तविक जीवन में देखने को मिला है, वहीं फिल्मों में ऐसे कई प्यार करने वाले आशिक देखने को मिले हैं जो अपने प्यार को ले कर इतने पजेसिव होते हैं कि किसी का खून करने से भी पीछे नहीं हटते.

फिल्में हों या असली जीवन, इस तरह के प्यार करने वाले आशिक हमेशा चर्चा में रहते हैं. लेकिन इस से भी ज्यादा खतरनाक है एकतरफा प्यार करने वाले आशिक क्योंकि एकतरफा प्यार असल में झूठ पर जीने वाला प्यार होता है जिस में एक प्यार करने वाला इंसान जो किसी से बेइंतिहा प्यार करने लगता है और उसे यह लगता है कि सामने वाला इंसान भी उस से उतना ही प्यार करता है लेकिन वह बोलता नहीं है. लेकिन असल में सच यह होता है कि कोई आप से बहुत ज्यादा प्यार करता है तो आप उस को दुख नहीं पहुंचाना चाहते और उसे हमदर्दी दिखाते हुए दोस्ती के तहत उस के एकतरफा प्यार को बिना कुछ कहे झेल लेते हैं, क्योंकि आप नहीं चाहते कि आप उस का किसी भी तरह दिल दुखाएं जो आप से बहुत प्यार करता है.

कई बार एकतरफा प्यार करने वाले प्रेमी को सचाई पता भी चल जाती है तो भी वह झूठ में जीना चाहता है और अपने एकतरफा प्यार के तहत कई बार अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा देता है. उसी प्यार के सहारे पूरी जिंदगी निकाल देता है. किसी और से शादी किए बिना अपने झूठे प्यार के सहारे पूरा जीवन निकाल देता है.

एकतरफा प्यार करने वाले पर एक शायर कहते भी हैं- ‘माना कि गैर है सपने, खुशियां मेरी अधूरी, मगर जिंदगी जीने के लिए गलतफहमियां भी हैं जरूरी…’

ऐसे प्रेमी मन ही मन अपने काल्पनिक प्रेमी को सबकुछ मान कर पूरी जिंदगी उस के नाम पर ही बिता देते हैं फिर चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो या फिर 4-5 बच्चों का बाप ही क्यों न हो. ऐसे प्यार करने वाले सबकुछ पता होते हुए भी अपने प्रेमी को नहीं छोड़ते और कई बार उस के साथ बिना कोई नाम दिए सिर्फ उस प्रेमी का साथ पाने के लिए लिवइन रिलेशनशिप तक में सालों साथ रह जाते हैं.

ऐसे लोगों की जिंदगी का एक ही फलसफा होता है- प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो.

इस तरह के एकतरफा प्यार करने वाले आशिकों के किस्से हर जगह सुनने को मिलेंगे, लेकिन ग्लैमर वर्ल्ड भी इस से अछूता नहीं है, जहां खूबसूरत चेहरों की भरमार है. कुछ ऐसे प्यार करने वाले आशिक भी हैं, जो एकतरफा प्यार के चक्कर में अपनी पूरी जिंदगी बरबाद कर दी लेकिन किसी और को नहीं अपनाया.

बौलीवुड और एकतरफा प्यार

बौलीवुड में कई ऐसे ऐक्टर हैं जिन्होंने एकतरफा प्यार के चक्कर में पूरा जीवन अपने प्यार के नाम निकाल दिया. फिर चाहे वह ऐक्टर और फिल्म मेकर गुरुदत्त हों जिस ने वहीदा रहमान के प्यार में सिर्फ जिंदगी ही बरबाद नहीं की बल्कि जिंदगी खत्म कर ली. एक जमाने के सब से हैंडसम हीरो देव आनंद भी मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री सुरैया के प्यार में पागल थे. दोनों ने साथ में मिल कर कई फिल्में भी कीं. इस जोड़ी को बहुत पसंद किया जाता था. देवानंद ने सुरैया के सामने अपने प्यार का इजहार किया तो अभिनेत्री सुरैया ने न कर दिया.

इसी तरह सुलक्षणा पंडित एक जमाने की मशहूर हीरोइन थीं. वे ऐक्टर संजीव कुमार से बेहद प्यार करती थीं लेकिन जब सुलक्षणा पंडित ने संजीव कुमार के सामने अपने प्यार का इजहार किया तो संजीव कुमार ने उन का प्यार अस्वीकार कर दिया, जिस का असर सुलक्षणा पर इस कदर पड़ा कि उन का मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया.

फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोइराला संजय दत्त से एकतरफा प्यार करती थीं, लेकिन उन्होंने अपना यह प्यार जगजाहिर नहीं किया. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मनीषा कोइराला ने संजय दत्त के प्रति अपने एकतरफा प्यार का जिक्र किया.

करिश्मा कपूर एक समय में अजय देवगन से बेहद प्यार करती थीं, लेकिन उन का यह प्यार असफल रहा.

मशहूर फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली जिन्होंने एक लड़की के प्यार में असफल होने पर पूरी जिंदगी बिना शादी के निकाल दी.

ऐक्टर संजीव कुमार जो हेमा मालिनी से प्यार करते थे लेकिन हेमा मालिनी उन से प्यार नहीं करती थीं. ऐसे में हेमा मालिनी के प्यार में मिली बेरूखी से पीड़ित हो कर पूरी जिंदगी अपने इसी प्यार के नाम निकाल दी.

मशहूर फिल्म मेकर करण जौहर, जो अक्षय कुमार की बीवी और ऐक्ट्रैस ट्विंकल खन्ना से एकतरफा प्यार करते थे, लेकिन ट्विंकल की तरफ से कोई प्यार भरा रिस्पौंस न मिलने पर करण जौहर ने भी शादी नहीं की.

मशहूर खलनायक और गब्बर सिंह कहलाने वाले अमजद खान से उस समय की मशहूर डांसर कल्पना अय्यर बहुत प्यार करती थीं. यह प्यार भी एक तरफा था. लिहाजा, अमजद खान की मौत होने के बावजूद कल्पना अय्यर ने किसी और से शादी नहीं की.

एकतरफा प्यार पर बनी फिल्में

किसी शायर ने सच ही कहा है-‘यह इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजिए, इक आग का दरिया है, और डूब के जाना है…’ शायर की इस बात को वे लोग ज्यादा अच्छे से समझते हैं जिन्होंने टूट कर प्यार तो किया लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ तनहाई, दुख और उदासियां ही मिलीं.

इसी बात को मद्देनजर रखते हुए करण जौहर ने रणबीर कपूर और अनुष्का शर्मा को ले कर फिल्म बनाई, जिस का नाम है ‘ऐ दिल है मुश्किल.’ इस फिल्म के जरीए करण जौहर ने अपने एकतरफा प्यार के दर्द को फिल्म के जरीए प्रस्तुत किया.

इसी तरह एकतरफा प्यार पर कई और फिल्में बनीं. ऋषि कपूर पद्मिनी कोल्हापुरी की फिल्म ‘प्रेमरोग’, राज बब्बर और डिंपल कपाड़िया अभिनीत ‘एतबार’, शाहरुख खान जूही चावला अभिनीत ‘डर’, माधुरी दीक्षित और शाहरुख खान अभिनित ‘अंजाम’,  शाहरुख दिव्या भारती अभिनीत ‘दीवाना’, संजय दत्त माधुरी अभिनीत ‘खलनायक’, करिश्मा कपूर और शाहरुख खान अभिनीत ‘दिल तो पागल है’, उर्मिला मातोंडकर फरदीन खान अभिनीत  ‘प्यार तूने क्या किया’, ऐश्वर्या राय शाहरुख खान अभिनित ‘देवदास’, दीपिका पादुकोण सैफ अली खान अभिनीत ‘काकटेल‘ आदि फिल्में एकतरफा प्यार पर आधारित हैं.

Bollywood LoveStories

HD Makeup: जानिए एचडी मेकअप की पूरी ABCD

HD Makeup: एक ड्रैमेटिक मेकअप लुक की तलाश में दुलहनों के लिए एचडी मेकअप लुक परफैक्ट चौइस है. एचडी मेकअप, जिसे हाई डैफिनिशन मेकअप भी कहते हैं, इस मेकअप के कई फायदे हैं, खासकर जब आप कैमरे के सामने हों या किसी खास इवेंट के लिए तैयार हो रहे हों.

इस मेकअप की मदद से आप के डार्क स्पौट, पोरस और डार्क सर्किल को इस तरह छिपाया जाता है कि आप के फोटो बिलकुल नैचुरल आते हैं. अगर आप एचडी मेकअप करवाते हैं तो आप अपने चेहरे के फ्लौस को छिपा सकते हैं और एक फ्लौलेस स्किन पा सकते हैं. यह मेकअप लौंग लास्टिंग भी होता है और केकी नहीं होता.

इस मेकअप को लंबे समय तक लगाए रखने के बाद भी उस में क्रीज और लाइंस नहीं आने देता. एचडी मेकअप के प्रोडक्ट्स लाइट डिफ्यूजिंग कोटिंग से कोटेड होते हैं. जब लाइट आप के चहरे पर रिफ्लैक्ट होती है तो मेकअप स्मूद, ट्रांसपेरैंट और फ्लौलेस दिखता है. एचडी मेकअप स्किन पर केकी फील नहीं कराता और औलमोस्ट रियल लुक देता है.

क्या होते हैं एचडी मेकअप प्रोडक्ट्स

एचडी मेकअप में जिन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है वे हाई ऐंड और लाइट डिफ्यूजिंग कोटिंग से कोटेड रहते हैं, जिस से चेहरे पर लाइट नहीं पड़ती. इस मेकअप के लिए आप को ऐसे प्रोडक्ट्स चुनने होते हैं जो आप को स्मूद, ट्रांसपेरैंट और ब्लेमिश फ्री लुक दें. मेकअप को स्किन के साथ ऐसे मर्ज किया जाता है जो बिलकुल हैवी नहीं लगता. मेकअप के बाद नैचुरल ग्लो नजर आता है.

कैसे करते हैं एचडी मेकअप

एचडी मेकअप को नौर्मल मेकअप की तरह मेकअप ब्रश और स्पंज के साथ किया जाता है. इसे करते हुए हाई ऐंड प्रोडक्ट्स का ही उपयोग करना चाहिए. हां, ये प्रोडक्ट्स थोड़े महंगे जरूर होते हैं. एचडी मेकअप प्रोडक्ट्स टैक्स्चर में हलके होते हैं. इन प्रोडक्ट्स को भर कर चेहरे पर एकसाथ न लगाएं. इस से वे अच्छी तरह ब्लैंड नहीं हो पाते और फिर आप को नैचुरल लुकिंग फ्लौलेस लुक नहीं मिल पाता है.

कैसा होता है एअरब्रश एचडी मेकअप

एअरब्रश एचडी मेकअप एक प्रकार का मेकअप है, जिसे एअरब्रश मशीन का उपयोग कर के लगाया जाता है. इस प्रकार का मेकअप आप की त्वचा को एक स्मूद और फ्लौलेस फिनिश देता है. इस में एअरगन का इस्तेमाल किया जाता है. इस एअरगन में मौजूद एक चेंबर में लिक्विड फाउंडेशन डाला जाता है और इसे चेहरे पर स्प्रे किया जाता है. इस से चेहरे को फ्लौलेस फिनिश मिलती है और पूरी कवरेज भी होती है. इतना ही नहीं ब्लशर, आईशैडो, लिप कलर, आइब्रो फीलिंग के लिए भी आजकल एअरब्रश तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जो काफी लंबे समय तक स्टे करता है.

एचडी मेकअप के फायदे

-एचडी मेकअप को साधारण मेकअप की तरह ब्रश और मेकअप स्पौंज के साथ ही किया जाता है. इस के लिए कोई स्पैशल गन का इस्तेमाल नहीं होता है.

-एचडी मेकअप के लिए हाई ऐंड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल होता है, जो थोड़े ऐक्सपैंसिव होते हैं.

-एअरब्रश की तुलना में एचडी मेकअप थोड़े कम समय तक टिकते हैं, फिर भी इन की लास्टिंग 12-15 घंटे तक होती है.

-एचडी मेकअप एअरब्रश मेकअप से थोड़ा सस्ता होता है.

-एचडी मेकअप औयली, सैंसिटिव और ड्राई स्किन वालों के लिए सही होता है.

-एचडी मेकअप में ल्यूक्स प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल होता है, जो नैचुरल लुक देते हैं और यह आप के सभी दागधब्बों को अच्छी तरह छिपाने का काम करता है.

-एचडी मेकअप चेहरे को सौफ्ट फोकस देता है और इसे नैचुरल और कम लेयर्ड बनाता है.

-एचडी मेकअप प्रोडक्ट्स में खास लाइट डिफ्यूजिंग पिगमैंट्स होते हैं, जो लाइट को इस तरह से बिखेरते हैं कि चेहरे की छोटी से छोटी कमियां जैसे महीन रेखाएं, दागधब्बे और काले घेरे कैमरे में दिखाई नहीं देते.

-यह आप की त्वचा को सौफ्ट फोकस इफैक्ट्स देता है, जिस से तसवीरें और वीडियो परफैक्ट आते हैं.

-एच डी मेकअप लंबे समय तक टिकाऊ होता है और समय के साथ चेहरे पर पपड़ीदार या फटा हुआ (केकी) नहीं दिखता.

-एचडी मेकअप बिल्डेबल कवरेज देता है और आवश्यकतानुसार इसे लेयर किया जा सकता है, जिस से आप अपनी जरूरत के हिसाब से कवरेज चुन सकते हैं.

-मेकअप आर्टिस्ट चुनते वक्त यह तो ध्यान रखें ही कि वह विश्वसनीय हो और अच्छी तरह से उसे एचडी मेकअप करने का अनुभव हो.

-मेकअप करने से पहले खुद चैक करें कि जो प्रोडक्ट्स यूज किए जा रहे हैं वे एचडी क्वालिटी के हैं या नहीं, क्योंकि ये प्रोडक्ट्स काफी महंगे होते हैं और कई बार लोग सस्ते मेकअप को एचडी क्वालिटी का बता देते हैं और आप भी जानकारी के आभाव के कारण उसे ही सही मान लेते हैं.

-एचडी मेकअप में अकसर ट्रैडिशनल मेकअप की तुलना में कम लेयरिंग (परत) की जाती है, जिस से बेस हलका और प्राकृतिक लगता है.

कितना महंगा होता है एचडी मेकअप

एचडी मेकअप के प्राइस रेंज पार्लर और जगह के अनुसार निर्भर करती है. एचडी मेकअप की शुरुआत ₹12 हजार से शुरू होती है. साथ ही इस मेकअप का खर्चा ₹50 हजार से भी अधिक जा सकता है. मेकअप की प्राइस उस के प्रोडक्ट्स और लुक पर निर्भर करती है.

HD Makeup

Ashnoor Kaur: मोटापे की वजह से अशनूर को घरवालों ने कहा ‘डायनसोर’

Ashnoor Kaur: ‘बिग बॉस 19’ में बीते हफ्ते प्रतियोगी तान्या मित्तल, कुनिका और नीलम गिरी ने मिल कर 21 वर्षीय अशनूर कौर का जम कर मजाक उड़ाया. मजाक की वजह अशनूर का मोटापा था, जिस की वजह से तान्या और अन्य लोगों ने मिल कर एकदूसरे से चुगली करते हुए अशनूर के मोटापे को ले कर भद्दे कमैंट्स पास किए. तान्या ने अशनूर को डायनासोर, मोटी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर के व बौडी शेमिंग कर के बेइज्जती करने वाला काम किया.

मोटापे की वजह

इस के बाद सलमान खान ने वीकेंड में सभी की क्लास लगाई, जिस के बाद अशनूर कौर ने सलमान के सामने अपने मोटापे की वजह बताते हुए अपना दुख और बीमारी को ले कर अपनी तकलीफ जाहिर की.

अशनूर कौर ने रोते हुए बताया कि उन के मोटापे की असली वजह हारमोंस डिसबैलेंस प्रौब्लम है. अशनूर ने सलमान खान के सामने अपना दुख जाहिर करते हुए बताया कि हारमोंस प्रौब्लम के चलते तनावपूर्ण स्थिति में उन का वजन बढ़ने लगता है. पिछले 7 सालों से अशनूर ने कोई जंक फूड नहीं खाया है. खाना भी उन का बहुत कम है. उन्होंने बहुत डाइटिंग भी की है. फिर भी उन का वजन उस वक्त ज्यादा बढ़ जाता है जब उन को टैंशन होती है या वे तनावपूर्ण माहौल में रहती हैं.

इटिंग डिसऔर्डर

अशनूर के अनुसार, ‘बिग बॉस’ में आने से पहले मैं ने अपना 9 किलोग्राम वजन कम कर लिया था, लेकिन ‘बिग बॉस’ में आने के बाद मेरा वजन फिर से बढ़ गया, क्योंकि टैंशन में मेरा शरीर फूलने लगता है. बतौर टीनएजर मैं ने कई चीजें ट्राई कीं, बहुत डाइटिंग भी की.

एक समय ऐसा भी आ गया कि मुझे इटिंग प्रौब्लम शुरू हो गई. मुझे इटिंग डिसऔर्डर हो गए थे. मैं अगर कुछ भी खाती हूं तो मुझे उलटी होने लगती है. अपने मोटापे को ले कर मुझे कई बार अपमान भी सहना पड़ा है, इसलिए अपनेआप को स्लिमट्रिम बनाने के लिए मैं 14 साल की उम्र से पतले होने की कोशिश में लगी हुई हूं.

अशनूर की बात सुन कर घर के सभी लोग दुखी हो गए. सलमान खान ने अशनूर से कहा कि उन के साथ भी यही प्रौब्लम है. सलमान खान के अनुसार, वे भी जब तनावपूर्ण स्थिति में रहते हैं, तो उन का वजन बढ़ने लगता है.

सलमान खान ने अशनूर को सहयोग देते हुए घर के उन सभी लोगों की क्लास लगा दी जो अशनूर के मोटापे को ले कर बौडी शेमिंग जैसी हरकतें कर रहे थे. उन्होंने समझाते हुए कहा कि हरेक का शरीर अलगअलग होता है. उन की प्रौब्लम्स भी अलगअलग होती हैं. इसलिए बौडी शेमिंग के पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप की कही बातें सामने वाले को मानसिक तौर पर परेशान न करें.

Ashnoor Kaur

Golden Chariot: दक्षिण भारत की शाही रेल यात्रा

Golden Chariot: क्या आप ने कभी सोचा है कि रेल की खिड़की से बाहर  झांकते हुए आप किसी साधारण डब्बे में नहीं बल्कि किसी महाराजा के महल में बैठे हों? सामने रंगीन परदे, चारों ओर कर्नाटक की कला से सजे दरवाजे और आप के सामने चांदी की थाली में परोसे गए व्यंजन हों. यह सपना मात्र नहीं बल्कि हकीकत है. गोल्डन चैरियट दक्षिण भारत की शाही रेलगाड़ी. यह रेल केवल पटरियों पर दौड़ती गाड़ी नहीं बल्कि वह मंच है जहां इतिहास, संस्कृति, कला और आधुनिकता एकसाथ सफर करते हैं.

नाम तथा निर्माण

2008 में जब कर्नाटक पर्यटन विभाग और भारतीय रेल ने मिल कर इस ट्रेन की शुरुआत की तो उन का उद्देश्य था दक्षिण भारत की असली धरोहर को नए अंदाज में दुनिया के सामने लाना.

इस का नाम ‘गोल्डन चैरियट’ इसलिए रखा गया क्योंकि विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हंपी में स्थित प्रसिद्ध स्टोन चैरियट (पत्थर का रथ) इस की प्रेरणा बना. यह रथ दक्षिण भारत की स्थापत्य कला और वैभव का प्रतीक है.

शाही महल जैसा डब्बा

गोल्डन चैरियट के डब्बों में कदम रखते ही यात्री खुद को किसी महल में पाते हैं. हर डब्बे का नाम दक्षिण भारत की ऐतिहासिक राजधानियों पर रखा गया है. कैबिन में गुलाबी, सुनहरी और नीली सजावट, कर्नाटक की पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी और आधुनिक सुविधाओं का अद्भुत संगम है. एसी, इंटरनैट, टीवी, अटैच बाथरूम हर सुविधा मौजूद.

सिर्फ यही नहीं इस ट्रेन में नल और रुचि नामक 2 रेस्तरां भी हैं, जहां महलनुमा झूमरों के नीचे पांचसितारा भोजन परोसा जाता है. मदिरा नाम का बार यात्रियों को मैसूर पैलेस की याद दिलाता है. वहीं आयुष, स्पा शरीर और मन को सुकून देते हैं.

यात्रा की रूपरेखा

गोल्डन चैरियट यात्रियों को दक्षिण भारत की विरासत का साक्षात अनुभव कराती है. इस के कई पैकेज हैं:

– प्राइड औफ कर्नाटक: बैंगलुरु, मैसूर, हम्पी, बदामी और काबिनी जैसे ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल.

– ज्वैल्स औफ साउथ: महाबलीपुरम, पांडिचेरी, तंजावुर, मदुरै, कोचीन, कुमारकोम और गोवा की अद्भुत यात्रा.

– ग्लिंप्सेस औफ कर्नाटक: छोटा पैकेज, जिस में मैसूर और हंपी का वैभव दिखाया जाता है.

हर ठहराव पर पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और गाइडेड टूर यात्रियों का स्वागत करते हैं.

अनुभव का रंग

सोचिए, खिड़की के बाहर नारियल के पेड़ों की कतारें हों, कहीं मंदिरों की घंटियां बज रही हों, कहीं समुद्र की लहरें किनारों से टकरा रही हों और भीतर आप रेशमी परदों वाले कैबिन में चाय का आनंद ले रहे हों, यही है गोल्डन चैरियट का असली जादू. यह ट्रेन यात्रियों को केवल स्थानों तक नहीं ले जाती बल्कि उन्हें इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ती है.

महत्त्व और प्रभाव

– पर्यटन को नई पहचान: गोल्डन चैरियट ने दक्षिण भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन का केंद्र बनाया.

– आर्थिक योगदान: स्थानीय होटल, हस्तशिल्प, गाइड और कलाकारों को रोजगार मिला.

– संस्कृति का संरक्षण: यात्रियों के सामने लोक नृत्य, संगीत और परंपराओं की  झलक प्रस्तुत होती है.

किराया और विशिष्टता

गोल्डन चैरियट का किराया लाखों में है. 7 दिन की यात्रा का मूल्य लगभग क्व34 लाख प्रति व्यक्ति पड़ता है. यद्यपि यह हर किसी की पहुंच में नहीं, लेकिन जो भी इस सफर को करता है, वह जीवन भर इसे याद रखता है.

चुनौतियां

महंगा किराया इसे सीमित वर्ग तक बांध देता है. कोविड-19 काल में यह कई महीनों तक बंद रही.

विदेशी सैलानियों पर अधिक निर्भरता भी एक चुनौती है. फिर भी सरकार और पर्यटन मंत्रालय लगातार इसे पुन: लोकप्रिय बनाने में जुटे हैं.

गोल्डन चैरियट केवल एक रेलगाड़ी नहीं बल्कि दक्षिण भारत का चलताफिरता महल है. यह हमें बताती है कि भारत की धरोहरें कितनी जीवंत और बहुमूल्य हैं.

यही कारण है कि गोल्डन चैरियट आज भी भारत की सब से प्रतिष्ठित लग्जरी ट्रेनों में गिनी जाती है और इसे सचमुच ‘दक्षिण भारत का शाही रेल अनुभव’ कहा जा सकता है.

-विभा कनन

Golden Chariot

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें