शारदा मैम: भाग 2- आखिर कार्तिक को किसने ब्लैकमेल किया ?

दूसरे दिन कार्तिक सुबह लेट उठा. रात को नींद नहीं आई ठीक से. बाबूजी मौर्निंग वाक पर गए हुए थे. अपार्टमैंट के नजदीक गार्डन था. बाबूजी वहीं जाया करते थे. कभीकभी मां भी चली जाती थी. बाबूजी गार्डन से आए तो कार्तिक नहा कर रैडी हो चुका था. मां नाश्ते की तैयारी कर रही थी. बाबूजी ने आते ही खुशी के मारे कार्तिक को बुलाया.

कार्तिक बोला, ‘‘बाबूजी क्या हुआ बड़े खुश हैं?’’

‘‘हां, बात ही कुछ ऐसी है खुशी की. दीपा तुम भी किचन से बाहर आओ.’’

‘‘क्या हुआ?’’ दीपा किचन से बाहर आतेआते बोली.

‘‘गार्डन में गांव से फोन आया था. अपने पड़ोसी हैं रमेशजी उन की लड़की वाराणसी में रह कर पढ़ाई कर रही है तनुजा. उस के रिश्ते के लिए उन्होंने कहा. अगर तनुजाकार्तिक एकदूसरे को पसंद कर लेते हैं तो दोनों की शादी की जा सकती है,’’ बाबूजी की खुशी साफ चेहरे पर झलक रही थी.

‘‘यह तो बहुत बड़ी शुभ खबर है,’’ दीपा बोली.

‘‘मगर मां पहले भी एक जगह रिश्ता टूट चुका है. फिर टूट जाएगा,’’ कार्तिक टैंशन में था.

‘‘ऐसे कैसे टूट जाएगा? बारबार क्यों टूटेगा,’’ अब बाबूजी भी टैंशन में थे.

‘‘मैं बस बता रहा था कि कहीं यह रिश्ता भी टूट गया तो?’’ कार्तिक बोला.

‘‘ऐसा कुछ नहीं होता है. तुम टैंशन फ्री रहो,’’ मां बोली, ‘‘चलो नाश्ता करो मैं टेबल पर नाश्ता लगाती हूं,’’ मां ने भी खुशी के मारे हलवा भी बना लिया था.

कार्तिक सोच रहा था, इस बार भी शारदा मैम तक बात जाएगी और वह पहले रिश्ते की तरह रिश्ता तुड़वा देगी. पहले भी उस ने ऐसा ही किया था. लड़की वालों को बता दिया था कि कार्तिक आवारा और लफंगा है. शराबी और बिगडैल है. लड़की वालों ने बिना सोचेसमझे रिश्ता तोड़ दिया. शारदा मैम ने उन को यह भी बोला कि एक बार उस से भी जबरदस्ती करने की कोशिश की थी. आप की लड़की की जिंदगी बरबाद हो जाएगी. ये सब बातें उस लड़की ने बताईं जिस के साथ रिश्ता होने वाला था. अपनी जीत पर खुश हुई थी शारदा मैम. देखती हूं शादी कैसे होती है?

‘‘मां,’’ कार्तिक ने दीपा को आवाज लगाई.

‘‘बोल,’’ दीपा बोली.

‘‘मां जब तक बात पक्की नहीं होती है तब तक तुम किसी को मत बोलना प्लीज,’’ कार्तिक बोला.

‘‘अरे, खुशी की खबर है. अपने जो पड़ोसी हैं उन्हें तो बताएंगे न. जब बात पक्की करेंगे तो घर में कुछ लोग होने चाहिए. गांव से अब कोई नहीं आ पाएगा. शादी में आएंगे सब,’’ दीपा ने बताया.

मां को कौन समझए कार्तिक टैंशन में था.

दूसरे ही दिन रमेशजी का फोन आ गया कि वे हफ्तेभर बाद आ रहे हैं. यदि

तनुजाकार्तिक एकदूसरे को पसंद कर लेते हैं तो बात पक्की कर देंगे.

मांबाबूजी खुशी के मारे तैयारी में जुट गए. मां ने अपने पड़ोसियों को न्योता दे दिया, खबर भी कर दी कि हफ्तेभर बाद लड़की वाले बात पक्की करने आ रहे हैं.

‘‘कार्तिक डार्लिंग बात ही पक्की हो रही है शादी नहीं,’’ मां के खबर देने के बाद ही शारदा मैम के मोबाइल से मैसेज आ गया, ‘‘हमारा प्रेम तो अमर है. हम कैसे दूर हो सकते हैं?’

जब कार्तिक ने मैसेज का जवाब नहीं दिया तो सीधी कार्तिक के घर आ गई. दीपा उस से बड़ी प्रभावित थी उन की फराटेदार अंगरेजी से. वे मुंबई की लोकल थी. इसलिए कहीं भी आनाजाना होता तो दीपा शारदा मैम के साथ ही जाती थी.

‘‘कोई हैल्प की जरूरत हो तो बताना प्लीज,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘जी जरूर बताएंगे आप को,’’ दीपा बोली.

‘‘कार्तिक बेटा नर्वस क्यों हो?’’ शारदा मैम ने कार्तिक के गालों को सहला दिया.

‘‘बेटा, छि:… छि:… कितनी घटिया औरत है,’’ कार्तिक ने मन में कहा.

आखिरकार वह दिन आ गया जब तनुजा के परिवार वाले आए. बुधवार के दिन वे सवेरे पहुंच गए थे. 4 कमरों का बड़ा फ्लैट था. इसलिए किसी को कोई परेशानी नहीं हुई रुकने की.

तनुजा ने तो कार्तिक को देखते ही फैसला ले लिया कि कार्तिक से शादी के लिए हां कर देगी. लगभग 23 वर्षीय तनुजा देखने में सुंदर थी, साथ ही कार्तिक के मातापिता के स्वभाव से भी परिचित थी. वाराणसी में पड़ोसी थे दोनों, इसलिए तालमेल बैठाने में कोई परेशानी नहीं आएगी.

सफर की थकान के कारण कार्तिक की मां ने नाश्ता तनुजा के परिवार वालों को रूम में ही पहुंचा दिया. तय हुआ कि दोपहर के खाने के पहले बात पक्की करने की रस्म पूरी कर ली जाए. तनुजा के परिवार वालों ने भी तैयारी पूरी कर ली थी मिठाई, ड्राईफ्रूट, कपड़े आदि सब तैयार थे. तनुजा ने पिंक कलर की साड़ी के साथ मोतियों का सैट पहना था. जब वह तैयार हो कर बाहर आई तो कार्तिक देखता रह गया कि कितनी प्यारी लग रही है तनुजा.

‘‘क्या देख रहे हो कार्तिक?’’ तनुजा बोली.

‘‘कुछ नहीं,’’ कह कर कार्तिक भी मुसकरा दिया. पड़ोसी आ गए थे. पड़ोसियों में शारदा मैम भी आ चुकी थीं. भड़कीली साड़ी के साथ गहरा मेकअप किए.

‘‘हाय कार्तिक… कैसे हो बेटे?’’ कहतेकहते उस ने कार्तिक को गले लगाया फिर तनुजा से बोलीं.

‘‘कैसे लग रहे हैं हम दोनों?’’

‘‘मतलब?’’ तनुजा समझ नहीं पाई.

‘‘अरे यार, कार्तिक भी बेटे जैसा है मेरे, मांबेटे की जोड़ी कैसी लग रही है?’’ शारदा मैम बोली.

कार्तिक एकदम से दूर हटा और बोला, ‘‘मैं किचन में देखता हूं, कुछ काम हो मां को.’’

‘‘अरे मैं हूं,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘मैं देख लूंगी डियर,’’ कह कर उस ने कार्तिक के गानों को सहला दिया,’’ बड़े प्यारे, हैंडसम लग रहे हो, हमें भूल मत जाना, पुराने दोस्तों को,’’ कहती हुई किचन में चली गई.

तनुजा कुछ समझ नहीं पा रही थी. वह उस के व्यवहार को ले कर चुप रही.

दोनों परिवार खुश थे. कार्तिक ने तनुजा ने रिश्ते के लिए हां कर दी थी. मुंह मीठा कराने के साथ ही शगुन के साथ दोनों परिवार वाले आशीर्वाद देने लगे थे. पड़ोसी भी खुश थे.

‘‘चलो अब लंच की तैयारी की जाए. टेबल पर सजा दिया जाए खाना,’’ कहती हुई दीपा किचन में चली गई. हाथ बंटाने के लिए तनुजा की मम्मी भी किचन में आ गई. पीछेपीछे शारदा मैम भी आ गईं.

दीपा ने कहा, ‘‘शारदा मैम से हमारे अच्छे संबंध हैं.’’

‘‘अच्छा लगा आप से मिल कर,’’ तनुजा की मम्मी बोली.

‘‘रियली,’’ शारदा मैम इतराईं.

‘‘अरे, कार्तिक.’’

‘‘जी मैम,’’ किचन में आता हुआ कार्तिक बोला,

‘‘देखो मुंबई के तौरतरीके सब सिखा देना तनुजा को, रहना यहीं है मुंबई में,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘वह खुद ही सीख लेगी, मैम, स्मार्ट है, ऐजुकेटेड है तनूजा.’’

‘‘अच्छाजी, हम से ज्यादा स्मार्ट नहीं,’’ कह कर शारदा मैम ने बाईं आंख दबाई.

तनुजा को अजीब सा लग रहा था.

‘‘तनुजा अपना मोबाइल नंबर दो न प्लीज, अभी जो पिक है वह भेजूंगी,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘मैं पिक भेज दूंगा तनुजा को,’’ कार्तिक बोला.

‘‘अरे, तुम कहां आ रहे हो लेडीज में,’’ तुम बाहर जाओ शारदा मैम बोली. फिर तनुजा से मोबाइल नंबर ले लिया.

उस का सपना: भाग 2-किस धोखे में जी रही थी तृप्ति?

अगले ही दिन उस ने कंपनी को अपना इस्तीफा सौंप दिया और ग्रूमिंग इंस्टिट्यूट जौइन कर लिया. वहां उसे पहले बेसिक जानकारी दी गई और बताया गया कि आगे उस की चालढाल, खानेपीने का तरीका और बात करने का स्टाइल भी सिखाया जाएगा. उस की ड्रैसिंग सैंस, हेयरस्टाइल, मेकअप और बौड़ी फिटनैस पर भी डिटेल से बात होगी.

ग्रूमिंग इंस्टिट्यूट जौइन करने के बाद तृप्ति अब और भी ज्यादा बिजी रहने लगी थी. अब उस के आने जाने का समय निश्चित नहीं रहता था. किसी दिन ग्रूमिंग क्लास बहुत देर तक चलते और कभीकभी वह बहुत जल्दी भी फ्री हो जाती और घर आ जाती. एक दिन वैसे ही वह जल्दी फ्री हो गई और घर आ रही थी.

अभी वह लिफ्ट से दूर ही थी कि उस ने देखा अमित एक लड़की के साथ निकल रहा है. वह चौंक पड़ी. उस के दिमाग में सवाल कौंधा कि यह लड़की कौन है जिसे अमित अपने घर ले कर आया है. वह लड़की दिखने में बहुत खूबसूरत नहीं थी, लेकिन एक अजीब सा आकर्षण था उस में. वह तृप्ति की तरह दुबलीपतली नहीं बल्कि सुडौल बौडी की लड़की थी.

इस घटना के बाद एक दिन और तृप्ति ने अमित को उसी लड़की के साथ एक मौल में देखा. यह देख कर वह अंदर से थोड़ी परेशान हो गई. कहीं न कहीं वह लड़की अमित के काफी क्लोज है, यह बात तृप्ति को समझ आने लगी. अब वह अमित पर नजर रखने लगी. वह यह भी ध्यान देने लगी कि अमित आजकल हर समय किसी से फोन में लगा रहता है या फिर उस की व्हाट्सऐप पर बातें होती रहती हैं. कई बार वह इयरफोन लगा कर बिजी रहता.

एक दिन अमित नहाने गया हुआ था. तब तृप्ति ने उस का फोन चैक करने की कोशिश की मगर अमित का फोन लौक था. इसलिए उसे कुछ पता नहीं चल सका. ऐसे ही एक दिन जब अमित वाशरूम में था तभी उस का मोबाइल बजा. तृप्ति जल्दी से मोबाइल के पास गई तो देखा कि स्क्रीन पर काजल नाम ब्लिंक कर रहा है. उस ने फोन रिसीव कर लिया.

सामने से मीठी सी आवाज आई, ‘‘हैलो डियर, क्या बात है आज तुम ने बड़ी देर में फोन उठाया? अब यह बताओ कि कब मिल रहे हैं?’’

यह सुन कर तृप्ति के दिलोदिमाग में हलचल सी मच गई. लेकिन उस ने इसे जाहिर नहीं होने दिया और चुपचाप फोन काट कर अपने काम में लग गई. मोबाइल फिर से बजा और तब तृप्ति ने कौल रिसीव कर के लड़की से कहा, ‘‘अभी अमित बिजी है. वैसे तुम हो कौन?’’

काजल बोली, ‘‘मैं काजल हूं उस के औफिस में काम करती हूं और वह मेरा दोस्त है.’’

काजल ने व्हाट्सऐप कौल किया था और तृप्ति को उस का फेस नजर आ रहा था. यह चेहरा उसी लड़की का था जिसे उस ने अपने घर से निकलते हुए देखा था. तृप्ति सम?ा रही थी कि दाल में कुछ काला जरूर है. फिर दिल के एक कोने से आवाज आई कि हो सकता है वह औफिस कुलीग के सिवा कुछ न हो. मगर मन का एक कोना जिरह कर रहा था. उसे महसूस हुआ जरूर अमित इस लड़की के प्यार में है तभी आजकल वह करीब आने के लिए फोर्स नहीं करता. तृप्ति अब हर समय अमित का मोबाइल और उस का दिल टटोलने की कोशिश करती.

एक दिन तृप्ति ने अमित से पूछा, ‘‘यह काजल कौन है?’’

तब अमित ने बताया, ‘‘मेरी कुलीग है. मुझ से भी ज्यादा इनकम है उस की और जानती

हो उस का ऐटीट्यूड मुझे बहुत पसंद है.’’

‘‘अच्छा, और क्याक्या पसंद है?’’

‘‘तुम्हारी आंखें, तुम्हारा चेहरा.’’

‘‘मैं अपनी नहीं काजल की बात कर रही हूं.’’

‘‘अरे यार तुम भी न ज्यादा सोचने लग जाती हो. तुम्हें पसंद करने के बाद किसी और को पसंद करने का समय किस के पास है,’’ कह कर उस ने तृप्ति को अपनी तरफ खींच लिया.

तृप्ति पूरे मन से अमित की आंखों में खो गई. इन आंखों में उसे अपने लिए प्यार नजर आया. कोई धोखा कोई दगाबाजी नजर नहीं आ रही थी. मगर तृप्ति को एक बड़ा धक्का तब लगा जब अमित उस का बर्थडे ही भूल गया. उस दिन सुबह से ही वह प्लान बना रही थी कि अमित के साथ कहीं बाहर जाएगी. उसने अपना बर्थडे याद तो नहीं दिलाया मगर अमित से यह जरूर कहा कि आज जल्दी आ जाए. तृप्ति खुद भी जिम नहीं गई और देर तक तैयार होती रही. उसे पूरा यकीन था कि हर साल की तरह अमित उसे सरप्राइज देगा. मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ. उलटा वह रात में बहुत देर से आया.

तृप्ति कपड़े बदल चुकी थी और मुंह फुला कर बैठी हुई थी. तभी अमित आया और आते ही वह मोबाइल में लग गया. फिर जल्द ही सोने भी चला गया. तब वह पूरी रात जागती रही और सोचती रही कि उस से गलती कहां हुई है. वह तो अमित के सपनों को पूरा करने की कोशिश में लगी हुई है और इसी वजह से अपने रिश्ते पर या किसी और चीज पर भी ध्यान नहीं दे पा रही है.

अपनी जौब भी उसे छोड़नी पड़ी ताकि अमित खुश रहे. मगर वह तो अपनी ही दुनिया में मग्न हो चुका था. तृप्ति का मन बहुत खालीखाली सा हो गया. वह सोचने लगी कि क्या सचमुच अमित पहले की तरह उसे अब प्यार नहीं करता.

तृप्ति ने खुद को मिरर में देखा. न तो पहले जैसी रौनक उस के चेहरे पर थी और न बदन पर. अब वह स्लिमट्रिम तृप्ति बन चुकी थी. शरीर में हड्डियां ज्यादा दिख रही थीं और मांस कम हो गया था. इस दौरान उस ने कम से कम 10 किलोग्राम वजन घटा लिया था. उसे खुद ही अपना यह रूप अच्छा नहीं लग रहा था, जबकि एक मौडल बनने के लिए उसे यह सब करना पड़ा था. अमित के सपने को पूरा करने के लिए वह तनमन से जुटी हुई थी. पर अब उसे अपने अंदर कुछ टूटा हुआ सा महसूस होने लगा था.

अगले दिन तृप्ति ने अमित से कोई बात नहीं की और सुबहसुबह मौर्निंग वाक के लिए घर से निकल गई. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. वह अपने जीवन में आए इस मोड़ पर विचार करना चाहती थी कि उसे अब क्या करना चाहिए. वह तब तक घर वापस नहीं लौटी जब तक कि अमित के औफिस जाने का समय नहीं हो गया. जब उसे लगा कि अमित जा चुका होगा तो वह वापस घर पहुंची. आज न तो वह ग्रूमिंग क्लास के लिए गई और न ही जिम.

तृप्ति ने बहुत सोचा फिर उसे लगा चलो एक बार अंतिम कोशिश की जाए. इसलिए वह शाम को बहुत खूबसूरत और हौट सी ड्रैस पहन कर और अच्छी तरह सजसंवर कर अमित के आने का इंतजार करने लगी. अमित आया तो वह अपनी अदाओं के तीर चलती हुई उस के करीब आई. तृप्ति ने उस के लिए पहले ही खाना बना कर रखा था. वह खाना परोसने लगी.

मगर अमित ने साफ मना कर दिया, ‘‘नहीं यार आज बाहर से खा कर आया हूं.’’

Monsoon Special: मौनसून में ऐसे करें घर की देखभाल

मानसून में घर की, खासकर लकड़ी के फर्नीचर और दरवाजे-खिड़कियों की देखभाल बहुत जरूरी होती है, वरना मानसून के बाद उनका आकार और रंग, दोनों खराब हो सकता है. अगर आप अपना घर बारिश के लिए तैयार नहीं रखती हैं तो यह मौसम भारी मुसीबत का कारण बन सकता है. बारिश का मतलब है नमी, बदबू मारते कपड़े, अलमारियों में फंगल इंफेक्शन और भी बहुत कुछ. इसलिए इस खूबसूरत मौसम का मजा आप ले सकें, इसके लिए आपको थोड़ी-सी तैयारी करनी होगी…

फर्नीचर की देखभाल करें

मौसम की नमी लकड़ी की गुणवत्ता और शेप पर बहुत बुरा असर डालती है. इसमें फंगस जमा हो सकती है. इस मौसम में हल्के गीले कपड़े की बजाय साफ-नरम और सूखे कपड़े से फर्नीचर साफ करें. लेमिनेटेड फर्नीचर जैसे स्टडी डेस्क, अलमारी, शटर या डोर को साफ करने के लिए साबुन और पानी का इस्तेमाल करें. इस बात का खास खयाल रखें कि अलमारी में रखने से पहले कपड़े पूरी तरह से सूख चुके हों. अलमारी में थोड़ी-बहुत सूखी नीम की पत्तियां भी डाल दें.

1. कारपेट्स और रग्स साफ रखें

मानसून कारपेट्स और रग्स पर बहुत ही बुरा असर डालता है. बारिश में खिड़कियां खुली न रखें, उनसे नमी अंदर आकर कारपेट्स में समा जाएगी. नम कारपेट्स फंगस का बहुत बड़ा घर होते हैं. इसी तरह से कारपेट पर गीले फुटवियर ले जाने से भी बचें. बेहतर होगा कि पंखा चलाए रखें. कारपेट्स को नियमित रूप से वैक्यूम क्लीन करती रहें. वैसे अच्छा यही होगा कि इस मौसम में भारी कारपेट्स उठा कर रख दें. आप ईकोफ्रेंडली कारपेट्स भी इस्तेमाल कर सकती हैं. इनकी ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती.

2. सीलन आने से रोकें

बारिश के दिनों में अक्सर दीवारों और छतों पर सीलन आ जाती है. अगर दीवार या छत पर हल्की सी भी दरार है, खिड़कियां सही नहीं हैं तो घर की दीवारें बुरी तरह से प्रभावित होती हैं. इससे पेंट भी पपड़ी के रूप में उतर सकता है. इन दिनों जो पेंट्स लगाए जाते हैं, वे भी नमी को आसानी से पकड़ लेते हैं और फिर पपड़ी के रूप में उतर जाते हैं. आरसीसी की छत में भी पानी घुस सकता है. इसलिए बारिश आने से पहले ही पूरे घर की दीवारों को चेक करें और सारे पाइपों और नालियों की सफाई करवा लें.

3. सोफों की सफाई

बारिश के मौसम सोफों को वैक्यूम क्लीन करना न भूलें. वैक्यूमिंग करते समय क्लीनर को गर्म हवा वाले मोड पर रखें. सोफे के कोनों में नेफ्थलीन की गोलियां डाल दें.

4. ऐसा भी करें

रसोई के सारे केबिनेट्स को खाली करके अच्छी तरह साफ करें. खाना खुला न छोड़ें. फ्रिज को भी अच्छी तरह साफ करके देख लें, जो खाद्य सामग्री पुरानी हो गई है, उसे फेंक दें. पेड़-पौधों की कटाई करें. बारिश में पेड़-पौधे जल्दी बढ़ते हैं, इसलिए इन्हें ट्रिम कर दें.

बारिश के मौसम में दीमक बहुत तेजी से बढ़ती है. इसलिए पूरे घर के खिड़की-दरवाजे चेक करें कि कहीं कोई दीमक तो नहीं लगी हुई. इस मौसम में घर में कोई तोड़-फोड़ या रिनोवेशन न करवाएं.

बारिश से पहले गद्दों को निकालकर धूप दिखा दें. इससे बारिश में कोई कीड़े बिस्तरों में नहीं लगेंगे.

नमी को पूरी तरह से नियंत्रित करने की कोशिश करें. इलेक्ट्रिकल गैजेट्स को लेकर विशेष सावधानी बरतें. उन्हें सिलिकॉन पाउच में रखें.

Monsoon Special: बारिश में पैरों की देखभाल है जरूरी

मानसून का मौसम आ गया और ये पानी वाले मौसम के आते ही आप में से कई महिलाएं इस बात को लेकर जरूर चिंतित होंगी कि पैरों को कैसे खूबसूरत बनाए रखा जाए, क्योंकि इस मौसम में बारिश के कारण पैरो में कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं. इसलिए पैरों की देखभाल इस मौसम में अधिक करनी पड़ती है.

आइये जानते है कि कैसे मानसून सीजन में पैरों को सुन्दर बनाएं रखा जा सकता है…

1. तलवों के दर्दरहित, चिकने और खूबसूरत होने से आपके सुंदर भी दिखते हैं और आपको आराम भी देते हैं. और इस वजह से आपके चेहरे की त्वचा पर भी स्वाभाविक आभा छलकती है. पैरों की देखभाल करने से शरीर भी स्वस्थ बना रहता है.

2. बहुत सी महिलाएं खासतौर पर घरेलू महिलाएं, अपने पैरों के तलवों को नजरअंदाज कर देती हैं. वे पूरा दिन घर पर नंगे पांव चलती रहती हैं तो उनके तलवे गंदे और फटे हुए ही रहेंगे. यदि पैरों के तलवे गंदे या कटे फटे होगें तो चेहरे की सुंदरता की चमक भी फीकी पड़ जाती है.

3. जब तलवे की नियमित रूप से सफाई व मालिश नहीं की जाती तो शरीर की त्वचा को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन और खून भी नहीं मिलता, जिससे आपके चेहरे पर लालिमा कम हो जाती है. यहां हम आपको बता देना चाहते हैं कि तलवों की सफाई से रक्त संचार बढ़ता है और ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में मिलती है, जिससे रंगत लालिमा युक्त होती है और आपकी मोहकता में वृद्धि करती है.

4. आप कोशिश करें की कम से कम नहाते समय तो तलवो को अच्छे से साफ करें. आप तलवों को किसी ब्रश या प्यूमिक स्टोन से भी साफ़ कर सकती हैं. नहाने के बाद तलवों की नारियल तेल या सरसों के तेल से मालिश करना न भूले, इससे आपके शरीर में रक्त संचार अच्छे से हो जाता है.

5. यहां हम कह सकते कि यदि आप अपने तलवों की अच्छे से देखभाल करती हैं, तो उनमे कोई समस्या नहीं आयेगी और साथ ही आपका पूरा शरीर भी स्वस्थ बना रहेगा.

Sangeeta Bijlani bday: 63 साल की हुई Salman Khan की एक्स गर्लफ्रेंड

बॉलीवुड की मशहूर अदाकरा संगीता बिजलानी ने 9 जुलाई को अपना बर्थडे सेलिब्रट किया. संगीता बिजलानी 63 साल की हो गई है. अपना बर्थडे खास बनाने के लिए संगीता ने मीडिया पैपराजी और सैलून के स्टाफ के साथ मिलकर अपना बर्थडे मनाया. एक्ट्रेस ने पैपराजी और क्रोमा सैलून के स्टाफ के साथ केक कट किया.

बर्थडे पर बेहद खूबसूरत लग रही संगीता

बर्थडे के मौके पर बॉलीवुड अभिनेत्री संगीता बिजलानी काफी खूबसूरत लग रही है. संगीता बिजलानी ने अपने बर्थडे पर नेवी ब्लू कलर की वन पीस पहन रखा है. वन पीस में बहुत खूबसूरत लग रही है. इसके साथ ही संगीता ने वाइट कलर के स्नीकर्स पेयर कर रखें है साथ ही साइड लाइट ग्रीन बैग कैरी किया हुआ है. वकाई संगीता बिजलानी काफी यंग लग रही है. खुले बालो में कहर ढा रही है.

 

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सलमान खान के साथ रहा रिश्ता

लोकप्रिय अभिनेत्री संगीता बिजलानी ने ‘त्रिदेव’, ‘योद्धा’ और कई अन्य फिल्मों में दिखाई दीं, बॉलीवुड दिवा ने जुहू में केक काटकर पपराजी के साथ अपना खास दिन मनाया. दरअसल, संगीता कथित तौर पर सलमान खान एक समय के साथ रिश्ते में थी. अक्सर खबरे आती थी दोनों ही जल्द शादी करने वाले है. लेकिन सलमान ने तय तारीख से कुछ दिन पहले ही शादी से इनकार कर दिया था. मीडिया खबरो के मुताबिक संगीता ने सलमान को किसी और के साथ देख लिया था, जिसके बाद संगीता ने सलमान से रिश्ता तोड़ दिया था.

 

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पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अज़हरुद्दीन से शादी की

सलमान से रिश्ता टूटने के बाद संगीता बिजलानी ने भारत के  तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन के साथ रिलेशन मे आ गई थी.लेकिन अजहरुद्दीन पहले से शादीशुदा थे और संगीता से शादी करने के लिए उन्होंने पत्नी नौरीन से तलाक ले लिया. इसके बाद 1996 में दोनों ने शादी कर ली. शादी के 14 साल बाद दोनों आपसी सहमति से तलाक ले लिया था.

क्या बेटी और पति अनुज को छोड़कर अपना सपना चुनेगी अनुपमा!

अनुपमा’ सीरियल जबसे टेलीकस्ट हुआ है तभी से ये शो सभी दर्शकों का चाहेता शो में बन गया है. ‘अनुपमा’ शुरुआत से ही टीआरपी में आगे रहा है. शो मेकर्स भी आए दिन ट्विस्ट और टर्न्स लेकर आते ही रहते है. ‘अनुपमा’ देखने वाले हर दर्शक का यही सवाल है क्या अनुपमा अमेरिका जाएगी.

‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कि गुरु मां का मैसेज पाकर अनुपमा डांस एकेडमी पहुंच जाएगी. वहां मलती देवी अनुपमा से कहेगी जब आसमान अपनी ओर बुलाता है तो जमीन अपनी ओर खींचती है. अब फैसला तुम्हें करना है तुम्हें आगे बढ़ना है या पीछे हटना है. वहीं अनुपमा गुरु मां से वदा करेगी कि  कुछ भी हो जाए वह अमेरिका जाएगी.

छोटी की तबियत बिगड़ी

कपाड़िया हाउस में छोटी अनु की तबियत और बिगड़ने लगी. दर्द में छटपटाती छोटी अनु कहेगी उसकी मां चली गई है अब उसकी मम्मी भी छोड़कर जी रही है. अनुज छोटी अनु की हिम्मत बांधता है.

नकुल अनुपमा से पूछेगा सवाल

शाह हाउस में डिंपल की वजह से चिक-चिक होगी. उधर समर किसी को बिना बताए मुंबई चला जाता है. जिसके बाद बनराज और बा गुस्सा करेंगी. वहीं गुरुकुल में जब अनुपमा और नकुल अमेरिका जाने की तैयारियां कर रहे होते है तो गुरु मां अनुपमा की बेचैनी का अंदाजा लगा लेती है. आगे शो में नकुल अनुपमा से पूछता है जैसे अभी हालात है उसे देखते हुए अगर वो अमेरिका चली जाएगी भा तो वहां कैसी रहेगी? वहां उसे छोटी की फ्रिक रहेगी.

छोटी अनु को होश में लाएगी अनुपमा

टीवी सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने के मिलेगा कि पाखी अनुपमा को अनु की हालत बताती है, जिसके बाद वह कपाड़िया हाउस भागी चली आ जाती है. दूसरी तरफ शाह हाउस में भी अनु की खराब तबीयत के बारे में जानकर सब उठ जाते हैं. तब हर कोई अनुपमा के अमेरिका जाने पर राय देता है. इस दौरान डिंपी सबको सुना का बोलती है. कपाड़िया हाउस में भी अनुपमा छोटी अनु को उठाने की कोशिश करती है. वह अपनी बेटी को उठाने के लिए लोरी गाती है.

शारदा मैम: भाग 1- आखिर कार्तिक को किसने ब्लैकमेल किया ?

मुंबई, सपनों की ऊंची उड़ान मुंबई, सपनों का शहर मुंबई, कहते हैं मुंबई शहर में व्यक्ति भूखा उठता है, लेकिन भूखा सोता नहीं है. लाखों युवकयुवतियां आंखों में सपनों के दीप जलाए मुंबई पहुंचते हैं. लेकिन कुछ युवकयुवतियों के सपने पूरे होते हैं और कुछ के सपने दम तोड़ देते हैं. कई मौत को भी गले लगा लेते हैं क्योंकि यथार्थ का धरातल बड़ा कठोर होता है. संघर्ष से घबरा जाते हैं. प्रेम, प्यार, रोमांस संघर्ष और सपनों का गवाह बनता है मुंबई का मरीन ड्राइव. प्रेमियों और संघर्षरत लोगों की मनपसंद जगह मरीन ड्राइव.

आज मरीन ड्राइव की भीड़ में शाम के समय एक युवक बैठा था. सड़क की तरफ पीठ किए समंदर की तरफ चेहरा. समंदर की लहरें किनारों से टकरा कर शोर मचाती हुई वापस समंदर में मिल जाती थीं. कुछ लहरें ज्यादा जोशीली हुईं तो युवक के पैरों को भिगो कर चली जातीं. छोटीछोटी चट्टानों के पीछे छिपे केकड़े रहरह कर ?ांक लेते थे समंदर को, फिर दुबक जाते थे बड़ेबड़े पत्थरों के पीछे.

लगभग 25 वर्ष के उस युवक का नाम कार्तिक था. चेहरे पर चिंता और सोच की परछाईं थी. हवा उस के माथे पर बिखरे बालों को थोड़ा और बिखेर देती थी. चेहरे पर हलकीहलकी

दाढ़ी थी. लंबी नाक, कमान सी खिंची आंखों में तनाव भी झलक रहा था. खिलता हुआ रंग और लंबा कद.

रोशनी से झिलमिल करती गगनचुंबी इमारतें. समंदर का पानी रोशनी में झिलमिल कर रहा था. कार्तिक शायद खयालों में इतना डूबा था कि उसे बज रहे मोबाइल की आवाज भी सुनाई नहीं दे रही थी. मोबाइल की मधुर ध्वनि लगातार शोर कर रही थी. तभी फेरी वाला लड़का जो वहीं घूमघूम कर पौपकौर्न बेच रहा था, वह रुक गया. एक पल रुका फिर कार्तिक के पास जा कर बोला, ‘‘साहब, आप का मोबाइल बज रहा है उठाते क्यों नहीं? मरने के इरादे से बैठे हो क्या?’’

कार्तिक अचानक हड़बड़ा गया. देखा तो सामने फेरी वाला था, ‘‘क्यों

मरने का क्यों सोचूंगा?’’ कार्तिक गुस्से में बोला.

‘‘अरे साहब, कितनी देर से इधर बैठे हैं आप. बहुत से लोग आते हैं मरने को यहां.’’

‘‘तो फिर मोबाइल उठाओ,’’ फेरी वाला बोला और फिर आवाज लगाता हुआ चला गया.

‘‘हां ठीक है,’’ कार्तिक ने मोबाइल उठा लिया, मोबाइल पर शारदा मैम का नाम चमक रहा था, ‘‘डार्लिंग कहां हो?’’

कार्तिक का मन हुआ मोबाइल उठा कर समंदर में फेंक दे और खुद भी समंदर में कूद जाए. फिर बोला, ‘‘बोलिए मैम.’’

‘‘कब तक आओगे? प्यास लगी है.’’

‘‘घंटेभर में आऊंगा,’’ कार्तिक बोला.

‘‘ओके मैं इंतजार करती हूं.’’

कार्तिक ने अपनी बाइक उठाई, मुंबई की लंबीलंबी सड़कों पर बाइक हवा से बातें करने लगी. साथ ही साथ वह सोचता जा रहा था, काश, मेरी बाइक किसी बड़ी गाड़ी से टकरा जाए, मैं मर जाऊं. क्या करूं? खुद ही गाड़ी किसी गाड़ी से भिड़ा देता हूं. तभी अचानक उस के दिमाग ने सवाल किया कि अपनी जान क्यों गंवाना चाहता है? शारदा मैम को निबटा दें.

हां, यही सही है. इन विचारों में डूबतेउतराते उसे भूख महसूस होने लगी. उस ने बाइक को चौपाटी की तरफ मोड़ दिया.

चौपाटी पर तो मेला सा लगा रहता है. उस ने बाइक एक स्टाल पर रोकी और भेलपूरी और कुछ सैंडविच का और्डर दिए. एक ठंडे पानी की बोतल का और्डर दिया. लड़का ठंडे पानी की बोतल ले आया. सब से पहले उस ने पानी की बोतल खोल कर आधी बोतल से खुद का चेहरा धो लिया, फिर आधी बोतल का पानी पी गया. फैला हुआ पानी रेत में समा गया था. तब तक लड़का प्लेटें टेबल पर सजा गया था. उस ने एक थम्सअप भी मंगवाई. फिर स्नैक्स खाने लगा. खातेखाते उस की आंखों के सामने शारदा मैम का चेहरा घूमने लगा कि यहां से जाते ही शारदा मैम की वासना की आग ठंडी करनी पड़ेगी. उसे घिन सी महसूस होने लगी.

‘‘साहब कुछ और लाऊं?’’ लड़के ने पूछा.

‘‘नहींनहीं, अब कुछ नहीं,’’ कह कर कार्तिक ने स्टाल वाले को पैसे दिए और चल दिया.

जब ग्रांट रोड के उस अपार्टमैंट में पहुंचा तो बहुत देर हो चुकी थी. उस ने सोचा शारदा मैम सो गई होगी. थर्ड फ्लोर पर उस का घर था. सैकंड फ्लोर पर शारदा मैम का. उस 7 माले के अपार्टमैंट ‘प्लाजा’ में जीवन जाग रहा था. यों भी मुंबई नहीं सोती.

वह जल्दीजल्दी सीढि़यां चढ़ने लगा थर्ड माले पर जाने के लिए लिफ्ट की क्या जरूरत? सैकंड माला क्रौस करने वाला ही था कि मोबाइल बज उठा, ‘‘कहां पहुंचे डार्लिंग?’’ शारदा मैम की आवाज आई.

मजबूरन फिर वह सैकंड माले पर फ्लैट नंबर 204 के सामने खड़ा था.

‘‘चले आओ दरवाजा खुला है तुम्हारे इंतजार में,’’ शारदा मैम ड्राइंगरूम में ही सोफे पर अधलेटी थी. सामने शराब की बोतल थी. मतलब आधी बोतल पी चुकी है. कार्तिक घबराया.

‘‘सोच क्या रहे हो? आओ, बची हुई शराब तुम्हारा इंतजार कर रही है,’’ शारदा ने अपनी ?ानी नाइटी को थोड़ा ऊंचा किया पैरों की तरफ से.

‘‘मुझे नहीं पीनी शराब,’’ कार्तिक बोला.

‘‘कोई बात नहीं, मत पीयो… आओ मेरी बांहों में,’’ शारदा बेशर्मी से बोली.

‘‘मुझे फ्री करो मैम, तुम्हारे कारण मैं टैंशन में हूं,’’ कार्तिक गिड़गिड़ाया, ‘‘मेरा वीडियो डिलीट करो.’’

‘‘अरे, हो जाएगा डिलीट वीडियो. आओ, ऐंजौय कर लो,’’ कह कर शारदा उसे कंधे से पकड़ कर बैडरूम में घसीट सी ले गई.

लगभग घंटेभर बाद जब कार्तिक अपने घर जाने के लिए सीढि़यां चढ़ रहा था तो शर्म से गड़ा जा रहा था. फ्लैट की कौलबैल पर उंगली रखता तब तक दरवाजा खुल गया था. मां इंतजार कर रही थी.

कार्तिक मां से नजरें बचाता हुआ अपने रूम में चला गया. कार्तिक की मां दीपा बेटे को परेशान देख बोली, ‘‘बेटा बात क्या है क्यों टैंशन में है?’’

‘‘कुछ नहीं मां,’’ कार्तिक बोला.

‘‘देख बेटा, तू रिश्ता टूटने से टैंशन में है. बहुत से रिश्ते आएंगे. रिश्ते तो बनते और बिगड़ते हैं. हो सकता है कहीं दूसरी लड़की का रिश्ता ज्यादा अच्छा हो.’’

हालांकि टैंशन उन को भी था, लेकिन बेटे के सामने जाहिर नहीं करना चाहती थी. महीनाभर पहले कार्तिक के रिश्ते के लिए लड़की वाले आए थे. सब फाइनल हो गया था. कार्तिक ने भी लड़की पसंद कर ली थी, लेकिन लड़की वालों ने अचानक बिना किसी कारण के रिश्ता तोड़ दिया. लेकिन कार्तिक जानता था कि लड़की वाले रिश्ता क्यों तोड़ रहे हैं.

‘‘मां अब मैं सोना चाहता हूं,’’ कार्तिक बोला.

‘‘ठीक है बेटा, लेकिन टैंशन मत रख, जौब जौइन करने वाला है, उसी की चिंता कर,’’ कह कर दीपा अपने रूम में चली गई.

कार्तिक ने दरवाजा बंद किया और सीधा वाशरूम में गया. बहुत देर तक नहाता रहा और रोता रहा, लेकिन आंसू पानी में मिल कर पानी जैसे ही हो गए. नहा कर आया तो थोड़ा सा मन हलका था. कार्तिक बिस्तर पर लेटा तो लगभग सालभर पहले के वे पुराने दिन याद आ गए. संडे का दिन था. मां और बाबूजी सुबह ही लोनावाला के लिए निकले थे.

अगले 2 दिन वहीं रहने वाले थे. उन के एक फैमिली मित्र भी वहां सपरिवार आने वाले थे तो इन 3 दिनों में कार्तिक फ्री था. जौब के लिए कोशिश जारी थी. उसे पता था कि जौब के बाद तो वही रूटीन लाइफ हो जाएगी इसलिए वह 3 दिन अपने दोस्तों के साथ घूमनेफिरने में बिताना चाहता था. वह कुछ साल पहले ही मुंबई आ कर रहने लगे थे. बाबूजी का पुश्तैनी मकान आदि वाराणसी के पास गांव में था. बाबूजी वाराणसी में सरकारी जौब में थे. कार्तिक इकलौता बेटा था. वह मुंबई में रहना चाहता था. जौब के लिए भी वहीं कोशिश कर रहा था. इसलिए बेटे का मन रखने के लिए अपनी नौकरी के रिटायरमैंट के बाद ग्रांट रोड पर उन्होंने एक फ्लैट खरीद लिया था. कभीकभी गांव भी चले जाते थे.

कार्तिक वाशरूम से नहा कर निकला ही था कि सैकंड फ्लोर पर रहने वाली शारदा मैम दरवाजा धकेल कर सीधी घर में घुस गई. भीगेभीगे से कार्तिक को देखती रही. 25 वर्षीय कार्तिक उसे भा गया. वह लगभग 62 वर्षीय महिला थी. पति उस के विदेश में थे बेटे के पास. वे कभीकभी आते थे. सभी उन को शारदा मैम कह कर बुलाते थे तो कार्तिक भी शारदा मैम कहता था.

‘‘जी बोलिए,’’ कार्तिक ने पूछा.

‘‘मम्मी कहां है तुम्हारी?’’ शारदा ने पूछा.

‘‘लोनावाला गए हैं,’’ कार्तिक का जवाब था.

‘‘मेरी किचन में सिलैंडर खत्म हो गया है उसे चेंज करना है,’’ शारदा मैम बोली.

‘‘आप चलिए मैं आता हूं,’’ कार्तिक बोला और फिर थोड़ी देर बाद चेंज करने के बाद शारदा मैम के घर पहुंच गया.

रसोई में जा कर गैस सिलैंडर बदला और हाथ धोने के लिए वाशरूम में गया ही था कि पीछे से शारदा मैम ने उसे पकड़ लिया.

‘‘अरेअरे यह क्या है?’’ कार्तिक बोला.

‘‘क्या होता है यह, नहीं समझते,’’ कह कर शारदा मैम ने उस पर चुंबनों की बरसात शुरू कर दी थी.

‘‘शर्म नहीं आती, आप को,’’ कार्तिक बोला, ‘‘मैं बेटे के बराबर हूं आप के.’’

‘‘कैसी शर्म? अकेली लेडीज समझ कर रेप की कोशिश कर रहे थे,’’ शारदा ने रंग बदला.

‘‘क्या बकवास है?’’ कार्तिक घबराया.

‘‘चलो सैक्स करो मेरे साथ, नहीं तो पुलिस को बुला लूंगी और शोर मचा दूंगी कि तुम ने जबरदस्ती करने की कोशिश की,’’ शारदा मैम बोली.

उस दिन की मजबूरी उस के गले का फंदा बनती चली गई. वह घबरा गया था.

जौब, पुलिस के चक्कर और शारदा के जाल में फंसता चला गया.

औरतों के लिए जरूरी सेवा

देश भर में आटो रिक्शा इस्तेमाल करने वालों को एक बड़ी मुसीबत यह रहती है कि आटो वाले इस तरफ कभी नहीं जाना चाहते जिधर सवारी चाहती है और दूसरी दिक्कत होती है कि मीटर या तो होते ही नहीं या ओवर बात करते हैं. इस के लिए दोषी हमेशा आटो ड्राइवरों को ठहराया जाता है और उन की पूरी कोम को मन ही मन 20 गालियां दे दी जाती हैं.

शहरों को ङ्क्षजदा रखने वाली यह सेवा देने वाले बेइमान हैं तो इस का जिम्मेदार इन के उन पर सारा सिस्टम है. शहर में कोई भी आटो बिना परमिट के नहीं चल सकता और यह परमिट हर साल रिन्यू कराना पड़ता है. सुप्रीम कोर्ट ने न जाने किस वजह से शहर में आटो की संख्या पर सीधा लगा रखी है जो दिल्ली में 1 लाख है. परमिट इशू करने वालों के लिए यह सीधा और हर साल रिन्यूअल एक वरदान है, लक्ष्मी का बेइमानी की सोने की मोहरे देने वाला है.

इस परमिट को पाने के लिए ढेरों रुपया चाहिए होता है. शहर बढ़ रहा है पर परमिटों की संख्या नहीं तो पुराने परमिटों की जमकर बिक्री होती है. जो परमिट होल्डर मर जाए उस का परमिट दूसरे के नाम करने के 15-20 लाख तक लग जाते हैं जिस में ये मुश्किल से 10000 रुपए मृत होल्डर ने परिवार को मिलते हैं.

उवर ओला ने इन नियमों को ताक पर रख कर टैक्नोलौजी के बल पर टैक्सियां तो उतार दी पर वे आटो की संख्या कहीं भी नहीं बढ़वा पाए. बढ़ते फैलते शहरों की जरूरत को हट करने के लिए इस सॢवस के लिए तो सरकार को सब्सिडी देनी चाहिए पर सरकार और सरकार के मुलाजिम लगभग पूरे देश में पैसा बनाते है. यही पैसा आटो रिक्शा वाले सवारियों से बसूलते हैं और इस सॢवस को बहुत नाकभौं ङ्क्षसकोड़ कर लिया जाता है.

आटो रिक्शा अगर मैले, टूटे, बदबूदार है तो इसलिए कि सरकारी अगला जिस में ट्रांसपोर्ट अर्थारिटी से ले कर नुक्कड़ का ट्रैफिक पुलिसमैन शामिल हैं, नियमों के नाम पर भरपूर कमाई करते है और आटो रिक्शा वालों के पास वह पैसा नहीं बचता जो बचाना चाहिए.

आटो रिक्शा ड्राइङ्क्षवग में वैसे भी 50 प्रतिशत औरतों को आना चाहिए ताकि औरतें उन के साथ चलने में उचित समझें. आज औरतों के लिए यह व्यवसाय सहज सुलभ है जिस में वे अपनी मर्जी के घंटों के साथ काम कर सकती हैं और घरों की घुटन भरी सांस से बच सकती है. वे सडक़ों, टै्रफिक से जूझ सकती है और ट्रांसपोर्ट अर्थोरिटियों की माफियानुमा जंजीरों को शायद, नहीं तोड़ सकतीं और इसीलिए कम औरतें ही इस लाइन में आ रही हैं. कभीकभार बड़े मान से औरतों को परमिट दिए जाते है पर लगता है सही ही वे बिकबिका जाते.

आटो रिक्शा सॢवस औरतों के लिए एक बहुत जरूरी सेवा है जो उन्हें घरों की कैद से निकाल सकती है और जब तक यह ठीकठाक न हो, शहर सुरक्षित नहीं होंगे पर शहरों के मालिकों के लिए यह साॢवस वह दुलारू गाय है जो दान में पंडित जी को मिली जिसे छुए और फिर सडक़ों पर छोड़ दो.

उस का सपना: भाग 1- किस धोखे में जी रही थी तृप्ति?

तृप्ति  बहुत अच्छी तरह तैयार हुई थी. स्लीवलैस, बास्डी हगिंग ब्लू ड्रैस और खुले लंबे स्ट्रेट बालों में उस का आकर्षण और बढ़ गया था. वह बेसब्री से अपने प्रेमी और लिव इन पार्टनर अमित के आने का इंतजार कर रही थी. आज अमित को तरक्की मिली थी और वह इस दिन को खास अपने अंदाज में सैलिब्रेट करने वाली थी.

तभी दरवाजे की घंटी बजी. तृप्ति ने इठलाते हुए दरवाजा खोला. अमित ने एक ?ाटके से तृप्ति को अपनी बांहों में उठाया और दरवाजा बंद कर उसे ले कर बैडरूम में आ गया.

तृप्ति ने अमित के होंठों को चूमते हुए कहा, ‘‘बधाई हो जान.’’

अमित ने उसे अपने करीब खींचते हुए कहा, ‘‘क्या केवल बधाई से काम चलाने का इरादा है? अपनी चाहतों के फूल भी तो बरसाओ.’’

फिर दोनों एकदूसरे की बांहों में खो गए. तृप्ति ने आज अमित को हर तरह से तृप्त कर दिया. वैसे यह पहली बार नहीं था. पिछले 8 महीनों से दोनों लिव इन में रह रहे थे. तनमन से तृप्ति अमित की थी. उस की खुशी में अपनी खुशी देखती. उस के सपनों को अपने सपने मानती. उस की चाहत को अपनी जिंदगी मानती. दोनों देर तक एकदूसरे में खोए रहे. तभी अमित के औफिस से फोन आ गया. वह बात करने लगा. इधर तृप्ति उठ कर बाथरूम चली गई. लौटी तो अमित ने उसे पकड़ कर मिरर के सामने खड़ा कर दिया.

उस के बदन पर जो 1-2 कपड़े बाकी थे उन्हें भी हटाता हुआ बोला, ‘‘जरा गौर से खुद को देखो तृप्ति. यह संगमरमर की तरह तरासा हुआ कोमल बदन, यह दूध सा गोरा रंग, यह काली घटाओं से केशुओं का घना जाल, ये कातिल निगाहें, ये सुर्ख होंठ. कोई तुम्हें एक बार देखे तो मदहोश हो जाए.’’

तृप्ति खुद को देखती हुई शरमा रही थी कि तभी अमित के हाथ उस के कमर पर

आ गए. वह सवालिया नजरों से देखता हुआ बोला, ‘‘तृप्ति, अब जरा अपनी कमर को देखो. पेट का हिस्सा और बाजुओं के ऊपरी हिस्से को देखो. क्या तुम्हें ये हिस्से फैटी नहीं लग रहे? क्या इन्हें और तराशने की जरूरत नहीं है? मैं फोटोग्राफर हूं न. मैं जानता हूं कि तुम्हें कहां अपने फिगर पर थोड़ी और मेहनत करनी है.’’

तृप्ति ने खुद को ध्यान से देखा. उसे अमित की बात सही लगी. वह सिर हिलाती हुई बोली, ‘‘ओके जैसा तुम कहो. वैसे भी तुम मुझे मुझ से भी ज्यादा जानते हो.’’

‘‘मैं यह भी जानता हूं कि तुम थोड़ी सी कोशिश करोगी तो इंडस्ट्री की नंबर वन मौडल या हीरोइन बन सकती हो, ‘‘अमित ने हौसला बढ़ाते हुए कहा.

‘‘सच?’’ तृप्ति खुश हो गई.

‘‘और नहीं तो क्या. सालों से इस फील्ड में काम कर रहा हूं. तुम बस मेरे कहे अनुसार चलो और खुद को मेरी नजरों से देखो फिर देखना कैसे तुम्हारी रंगत बदलती है. सच तो यह है कि यह मेरा सपना है. मैं हमेशा से चाहता रहा हूं कि मेरी पार्टनर एक मौडल हो और मैं

उस के फोटो सैशन करूं, उसे टौप की हीरोइन बनता हुआ देखूं. तुम मेरा यह सपना सच कर सकती हो.’’

तृप्ति अमित से लिपटती हुई बोली, ‘‘ठीक है मेरी जान.’’

इस के बाद शुरू हो गई तृप्ति के ट्रांसफौर्मेशन और उस के सुपर मौडल बनने की जंग. अमित उसे अपने दोस्त के जिम में ले कर पहुंचा. वहां उसे क्याक्या ऐक्सरसाइज करनी है यह सम?ाया गया. इंस्ट्रक्टर ने यह भी चेतावनी दी कि अगर तृप्ति ने बीच में जिम आना छोड़ा तो उस का वजन फिर से बढ़ जाएगा. इसलिए उसे नियम से ऐक्सरसाइज करनी है.

इतना ही नहीं वहां उस की मुलाकात एक डाइटीशियन से भी करवाई गई जिस ने उस के बीएमआई को ध्यान में रखते हुए उस के हिसाब से एक डाइट चार्ट तैयार किया. अमित ने उस ताकीद की कि उसे नियम से यही डाइट फौलो करनी होगी.

यह सब करने की अंदर से तृप्ति की कोई इच्छा नहीं थी. मगर अमित के सपनों के लिए वह सबकुछ करने को तैयार हो गई.

तृप्ति की फिटनैस की जर्नी शुरू हुई. अगले दिन ही औफिस के बाद वह सीधी जिम चली गई. वहां से निकली तो काफी थकान महसूस कर रही थी.

तृप्ति   बहुत अच्छी तरह तैयार हुई थी. स्लीवलैस, बास्डी हगिंग ब्लू ड्रैस और खुले लंबे स्ट्रेट बालों में उस का आकर्षण और बढ़ गया था. वह बेसब्री से अपने प्रेमी और लिव इन पार्टनर अमित के आने का इंतजार कर रही थी. आज अमित को तरक्की मिली थी और वह इस दिन को खास अपने अंदाज में सैलिब्रेट करने वाली थी.

तभी दरवाजे की घंटी बजी. तृप्ति ने इठलाते हुए दरवाजा खोला. अमित ने एक ?ाटके से तृप्ति को अपनी बांहों में उठाया और दरवाजा बंद कर उसे ले कर बैडरूम में आ गया.

तृप्ति ने अमित के होंठों को चूमते हुए कहा, ‘‘बधाई हो जान.’’

अमित ने उसे अपने करीब खींचते हुए कहा, ‘‘क्या केवल बधाई से काम चलाने का इरादा है? अपनी चाहतों के फूल भी तो बरसाओ.’’

फिर दोनों एकदूसरे की बांहों में खो गए. तृप्ति ने आज अमित को हर तरह से तृप्त कर दिया. वैसे यह पहली बार नहीं था. पिछले

8 महीनों से दोनों लिव इन में रह रहे थे. तनमन से तृप्ति अमित की थी. उस की खुशी में अपनी खुशी देखती. उस के सपनों को अपने सपने मानती. उस की चाहत को अपनी जिंदगी मानती.

दोनों देर तक एकदूसरे में खोए रहे. तभी अमित के औफिस से फोन आ गया. वह बात करने लगा. इधर तृप्ति उठ कर बाथरूम चली गई. लौटी तो अमित ने उसे पकड़ कर मिरर के सामने खड़ा कर दिया.

उस के बदन पर जो 1-2 कपड़े बाकी थे उन्हें भी हटाता हुआ बोला, ‘‘जरा गौर से खुद को देखो तृप्ति. यह संगमरमर की तरह तरासा हुआ कोमल बदन, यह दूध सा गोरा रंग, यह काली घटाओं से केशुओं का घना जाल, ये कातिल निगाहें, ये सुर्ख होंठ. कोई तुम्हें एक बार देखे तो मदहोश हो जाए.’’

तृप्ति खुद को देखती हुई शरमा रही थी कि तभी अमित के हाथ उस के कमर पर आ गए. वह सवालिया नजरों से देखता हुआ बोला, ‘‘तृप्ति, अब जरा अपनी कमर को देखो. पेट का हिस्सा और बाजुओं के ऊपरी हिस्से को देखो. क्या तुम्हें ये हिस्से फैटी नहीं लग रहे? क्या इन्हें और तराशने की जरूरत नहीं है? मैं फोटोग्राफर हूं न. मैं जानता हूं कि तुम्हें कहां अपने फिगर पर थोड़ी और मेहनत करनी है.’’

तृप्ति ने खुद को ध्यान से देखा. उसे अमित की बात सही लगी. वह सिर हिलाती हुई बोली, ‘‘ओके जैसा तुम कहो. वैसे भी तुम मुझे मुझ से भी ज्यादा जानते हो.’’

‘‘मैं यह भी जानता हूं कि तुम थोड़ी सी कोशिश करोगी तो इंडस्ट्री की नंबर वन मौडल या हीरोइन बन सकती हो, ‘‘अमित ने हौसला बढ़ाते हुए कहा.

‘‘सच?’’ तृप्ति खुश हो गई.

‘‘और नहीं तो क्या. सालों से इस फील्ड में काम कर रहा हूं. तुम बस मेरे कहे अनुसार चलो और खुद को मेरी नजरों से देखो फिर देखना कैसे तुम्हारी रंगत बदलती है. सच तो यह है कि यह मेरा सपना है. मैं हमेशा से चाहता रहा हूं कि मेरी पार्टनर एक मौडल हो और मैं

उस के फोटो सैशन करूं, उसे टौप की हीरोइन बनता हुआ देखूं. तुम मेरा यह सपना सच कर सकती हो.’’ तृप्ति अमित से लिपटती हुई बोली, ‘‘ठीक है मेरी जान.’’

इस के बाद शुरू हो गई तृप्ति के ट्रांसफौर्मेशन और उस के सुपर मौडल बनने की जंग. अमित उसे अपने दोस्त के जिम में ले कर पहुंचा. वहां उसे क्याक्या ऐक्सरसाइज करनी है यह सम?ाया गया. इंस्ट्रक्टर ने यह भी चेतावनी दी कि अगर तृप्ति ने बीच में जिम आना छोड़ा तो उस का वजन फिर से बढ़ जाएगा. इसलिए उसे नियम से ऐक्सरसाइज करनी है.

इतना ही नहीं वहां उस की मुलाकात एक डाइटीशियन से भी करवाई गई जिस ने उस के बीएमआई को ध्यान में रखते हुए उस के हिसाब से एक डाइट चार्ट तैयार किया. अमित ने उस ताकीद की कि उसे नियम से यही डाइट फौलो करनी होगी.

यह सब करने की अंदर से तृप्ति की कोई इच्छा नहीं थी. मगर अमित के सपनों के लिए वह सबकुछ करने को तैयार हो गई.

तृप्ति की फिटनैस की जर्नी शुरू हुई. अगले दिन ही औफिस के बाद वह सीधी जिम चली गई. वहां से निकली तो काफी थकान महसूस कर रही थी.

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