सितंबर, 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक उच्चस्तरीय बैठक में ‘ऐजैंडा 2030’ के अंतर्गत 17 सतत विकास लक्ष्यों को रखा गया, जिसे भारत सहित 193 देशों ने स्वीकार किया. इन लक्ष्यों में लैंगिक समानता को भी शामिल किया गया था.

हमेशा से इस बात का हल्ला मचता रहा है कि समाज के विकास के लिए लैंगिक समानता बहुत जरूरी है. इस में कोई दोराय नहीं कि स्त्रीपुरुष के बीच सोचसमझ कर भेदभाव की एक खाई बनाई गई है. महिलाओं को समान अधिकार और उचित स्थान प्राप्त नहीं है जिस की वे हकदार हैं.

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